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खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया: 26 जनवरी को ग्राम सभा में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का वाचन होगा

मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरूकता कार्यक्रम 26 जनवरी को ग्राम सभा में होगा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित जानकारी का वाचन : खाद्य मंत्री राजपूत भोपाल खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों को राशन सामग्री के प्रति जागरूक करने तथा राशन वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री अन्न सेवा जागरुकता कार्यक्रम' प्रारंभ किया गया है। इसमें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित जानकारियों का वाचन उचित मूल्य दुकान के विक्रेता (पृथक विक्रेता विहीन उचित मूल्य दुकान की ग्राम पंचायतों में समिति प्रबंधक) द्वारा किया जायेगा। ग्राम सभा में 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना' अंतर्गत राशन प्राप्त करने वाले पात्र परिवार/हितग्राहियों के नाम, पात्र परिवारों को वितरित राशन सामग्री की मांग, ईकेवायसी से शेष प्रतीक्षारत हितग्राहियों के नाम और वर्तमान में सम्मिलित हितग्राहियों में से ईकेवायसी न कराने वाले हितग्राहियों के नाम बताये जायेंगे। साथ ही वर्तमान में सम्मिलित हितग्राहियों में से मृत एवं स्थाई रूप से पलायन करने वाले हितग्राहियों का चिन्हांकन भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री अन्न सेवा आगरुकता कार्यक्रम के अंतर्गत उचित मूल्य दुकानों से जुड़े हुए पात्र हितग्राही एवं उनको वितरित खा‌द्यान्न मात्रा की जानकारी जनसमुदाय को देने के लिए 2 अक्टूबर एवं 26 जनवरी को आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में उचित मूल्य दुकान के विक्रेताओं ‌द्वारा पात्र हितग्राहियों एवं वितरित सामग्री का विवरण के वाचन का प्रावधान किया गया है। गणतंत्र दिवस पर आयोजित ग्राम सभाओं में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित जानकारी के वाचन तथा सदस्यों ‌द्वारा उठाए गए बिन्दुओं का उल्लेख कार्यवाही विवरण में कर, जानकारी निर्धारित प्रपत्र में 10 फरवरी 2026 तक संचालनालय खा‌द्य को भेजने के निर्देश भी दिये गए हैं।  

आतंकियों की नई साजिश: 26-26 पर हमले, दिल्ली से अयोध्या तक मंदिरों पर बढ़ा अलर्ट

नई दिल्ली दिल्ली समेत कई शहरों को गणतंत्र दिवस से पहले दहलाने की साजिश का खुलासा हुआ है। पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई जैश-ए-मोहम्मद के साथ ‘कोड 26-26’ के नाम से आतंकी वारदात को अंजाम देने में जुटी है। इस खुफिया इनपुट के बाद देश के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम और कड़े कर दिए गए हैं। खुफिया एजेंसियों ने इस साजिश का पता चलने के बाद दिल्ली पुलिस, जम्मू-कश्मीर पुलिस सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया है। इस खतरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहली बार एक विशेष वांटेड नोटिस जारी किया है, जिसमें अल-कायदा (एक्यूआईएस) के संदिग्ध आतंकी और दिल्ली निवासी मोहम्मद रेहान की तस्वीर शामिल की गई है। इंटेलिजेंस एजेंसियों की सोशल मीडिया पर नजर इस इनपुट के बाद देश की राजधानी दिल्ली में सुरक्षाबलों को अलर्ट पर रखा गया है क्योंकि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और पंजाब बेस्ड गैंगस्टर्स हमला कर सकते हैं. इंटेलिजेंस एजेंसियों की सोशल मीडिया पर भी लगातार नजर है, जहां kashmiri Resistance Group का FalconSquad लगातार धमकी दे रहा है. मुस्लिम युवकों को भड़काया जा रहा है. दिल्ली के आतंकी मोहम्मद रेहान को लेकर अलर्ट दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आतंकियों के पोस्टर चस्पा किए गए हैं. पोस्टर में पहली बार दिल्ली के आतंकी की तस्वीर लगाई गई है. इस आतंकी का नाम मोहम्मद रेहान है. पोस्टर में मोहम्मद रेहान का पता नॉर्थ ईस्ट दिल्ली का चौहान बांगर बताया गया है. ये आतंकी 2016 से फरार है. जब एजेंसियों ने संभल में अलकायदा का मॉड्यूल बस्ट किया था, तभी दिल्ली का रहने वाला ये आतंकी फरार हो गया था. जम्मू में हाई अलर्ट पर सुरक्षाबल उधर,गणतंत्र दिवस से पहले जम्मू में सुरक्षाबल हाई अलर्ट पर हैं. अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि आतंकी घुसपैठ की कोशिशें तेज कर सकते हैं. यही वजह है कि जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था कई गुना बढ़ा दी गई है. बीएसएफ पूरी तरह मुस्तैद है. सीमा पर गश्त को और सख्त किया गया है. नदी-नालों के किनारे, जंगलों और दुर्गम इलाकों की गहन तलाशी ली जा रही है.ड्रोन और सुरंगों के जरिए घुसपैठ की चुनौतियां बनी हुई हैं. सेना और सीआरपीएफ के साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस भी सीमावर्ती इलाकों के साथ ही आंतरिक क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रही है. कहां है संदिग्‍ध आतंकवादी मोहम्‍मद रेहान? सूत्रों के मुताबिक मोहम्मद रेहान उस समय अंडरग्राउंड हो गया था, जब उत्तर प्रदेश के संभल में अलकायदा से जुड़े एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया था. तब से ही सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हुई हैं. अब गणतंत्र दिवस से पहले जारी इस अलर्ट के बीच उसकी तस्वीर सार्वजनिक कर आम लोगों से भी मदद मांगी जा रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाई जा सके. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकियों का मकसद भीड़भाड़ वाले इलाकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर देश में दहशत फैलाना और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना हो सकता है. इसी कारण रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन और प्रमुख बाजारों में भी तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं. कई राज्यों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त टीमें बनाकर विशेष गश्त कराई जा रही है. देशभर में अलर्ट सरकारी सूत्रों ने बताया कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है. इंटेलिजेंस इनपुट को लेकर रोजाना उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जा रही है. आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे सतर्क रहें, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और अफवाहों पर ध्यान न दें. गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस देश का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व है, जिसमें राजधानी दिल्ली में भव्य परेड और समारोह आयोजित होते हैं. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहतीं. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन खतरे की गंभीरता को देखते हुए पूरे देश में हाई अलर्ट जारी रखा गया है, ताकि किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके. पोस्टर में शाहिद फैसल का भी नाम है, जिसे बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट सहित दक्षिण भारत में कई धमाकों का मास्टरमाइंड बताया गया है। खुफिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आतंकी समूह गणतंत्र दिवस से पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ हमले करने की फिराक में जुटे हैं। निशाने पर बड़े मंदिर सीक्रेट ‘कोड 26-26’ का मतलब है गणतंत्र दिवस से पहले बड़ी आतंकी साजिश को अंजाम देना। आतंकियों के निशाने पर देश के बड़े मंदिर हैं, ताकि माहौल बिगाड़ा जा सके। इनमें अयोध्या का राम मंदिर और जम्मू का रघुनाथ मंदिर भी शामिल है। पुलिस फोर्स के अलावा सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ को भी पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। पूरे उत्तर भारत की सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

पेंच जल विद्युत गृह ने मॉक ड्रिल में महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों को बैकअप प्रदान किया

पेंच जल विद्युत गृह ने मॉक ड्रिल में दिया महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों को बैकअप भोपाल  मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह के माध्यम से उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय एवं परिचालन तत्परता का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए महाराष्ट्र राज्य विद्युत पारेषण कम्पनी (MahaTransco) के साथ गत दिवस सफलतापूर्वक ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल की। यह अभ्यास विशिष्ट आपातकालीन परिस्थितियों या राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के आंशिक अथवा पूर्ण विफल होने की स्थिति में विद्युत प्रणाली की त्वरित बहाली एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की दृष्टि से किया जाता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कम्पनी के पेंच जल विद्युत गृह से महाराष्ट्र राज्य स्थित कोराडी ताप विद्युत गृह (महा-जेनको), खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह (महा-जेनको) व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह (अदाणी समूह), नागपुर तक एक आयलैंड का निर्माण कर महाराष्ट्र की लगभग 5 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता को बैकअप दिया गया। क्यों की जाती है मॉक ड्रिल भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता (इंडियन इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड कोड – IEGC) एवं MEGC 2020 के प्रावधानों के अंतर्गत ग्रिड पुनर्बहाली प्रक्रियाओं का सामयिक परीक्षण व सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसमें पूर्ण या आंशिक ब्लैकआउट की स्थिति में ब्लैक स्टार्ट प्रक्रिया, आयलैंड का निर्माण व उसके पुनः राष्ट्रीय ग्रिड के साथ समन्वय की व्यवस्था शामिल है। मॉक ड्रिल कैसे की गई पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह में यह ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल गत दिवस 21 जनवरी को सुबह 10:03 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक सफलतापूर्वक संचालित की गई। इस मॉक ड्रिल में आयलैंड के माध्यम से पेंच जल विद्युत गृह से लगभग 20 मेगावाट विद्युत की आपूर्ति महाराष्ट्र के तीन ताप विद्युत गृहों कोराडी ताप विद्युत गृह, खापरखेड़ा ताप विद्युत गृह व विदर्भ औद्योगिक विद्युत गृह को की गई। इस मॉक ड्रिल में आपातकालीन स्थिति में विद्युत गृह को प्रारंभ करने की तकनीकी क्षमता का परीक्षण किया गया। लगभग दो घंटे तक आयलैंड के सफल एवं स्थिर संचालन के बाद दोपहर 12:02 बजे पेंच जल विद्युत गृह को राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड के साथ सफलतापूर्वक पुनः समन्वित (री-सिंक्रोनाइज) किया गया। यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप पूर्ण की गई, जो मध्यप्रदेश पावर कंपनी की उच्च स्तरीय अभियान्त्रिकी दक्षता, समन्वय व परिचालन तत्परता को प्रदर्शित करती है। ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल क्या है ब्लैक स्टार्ट मॉक ड्रिल एक विशेष तकनीकी अभ्यास है, जिसके अंतर्गत किसी भी पूर्ण या आंशिक ब्लैक आउट की स्थिति में विद्युत गृह को बाह्य ग्रिड सहायता के बिना, सेल्फ स्टार्ट जनरेटरों की सहायता से चालू किया जाता है। सामान्यतः यह प्रक्रिया जल अथवा गैस आधारित विद्युत गृहों द्वारा की जाती है, जहाँ स्थानीय स्टैंड-अलोन विद्युत स्रोतों जैसे डीजल जनरेटर सेट के माध्यम से सहायक प्रणालियों को विद्युत आपूर्ति देकर क्रमशः ताप विद्युत इकाइयों को प्रारंभ किया जाता है। यह अभ्यास त्वरित समाधान, प्रणाली की विश्वसनीयता तथा अभियंताओं की तकनीकी तत्परता एवं दक्षता का व्यावहारिक परीक्षण होता है। पेंच जल विद्युत गृह की विशिष्ट भूमिका पिछले वर्षों में ग्रिड संबंधी घटनाओं के परिपेक्ष्य में ब्लैक स्टार्ट सक्षम विद्युत गृहों की निरंतर तत्परता, परीक्षण एवं अभ्यास अत्यंत आवश्यक है, जिससे आपातकालीन स्थितियों में विद्युत प्रणाली की शीघ्र बहाली कर आर्थिक एवं सामाजिक क्षति को न्यूनतम किया जा सके। उल्लेखनीय है कि सेंट्रल इंडिया व विदर्भ क्षेत्र के निकटस्थ उपलब्ध एकमात्र जल विद्युत स्रोत 160 मेगावाट क्षमता का पेंच जल विद्युत गृह है। इस दृष्ट‍ि से पेंच जल विद्युत गृह आपातकालीन तकनीकी अभ्यास के लिए अहम भूमिका रखता है। पेंच जल विद्युत गृह के माध्यम से आसपास स्थित महाराष्ट्र के विभिन्न ताप विद्युत गृहों को आपातकालीन परिदृश्य निर्मित कर इस अभ्यास को क्रियान्वित किया गया।  

एमपी नगर में खाद्य भवन के निर्माण के लिए 150 पुराने पेड़ काटे जाएंगे, करेंगे ‘चिपको आंदोलन’

भोपाल  राजधानी भोपाल के एमपी नगर क्षेत्र में प्रस्तावित खाद्य भवन के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस परियोजना के तहत करीब 150 पुराने पेड़ों को काटने की तैयारी है, जिनमें पीपल और बरगद जैसे बड़े और छायादार वृक्ष शामिल हैं। इन पेड़ों की उम्र 40 से 50 साल से अधिक बताई जा रही है। पेड़ों की कटाई के विरोध में अब कर्मचारी संगठनों के साथ पर्यावरणविद् भी मैदान में उतर आए हैं। जानकारी के मुताबिक, वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन द्वारा करीब 64 करोड़ रुपये की लागत से एक नया 6 मंजिला खाद्य भवन बनाने की योजना तैयार की गई है। इस भवन में खाद्य संचालनालय, वेयर हाउसिंग और नाप-तौल विभाग के दफ्तरों को एक ही परिसर में शिफ्ट किया जाना है। सभी सुविधाओं को मिलाकर कुल खर्च 90 से 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यह निर्माण एमपी नगर स्थित नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय की लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर प्रस्तावित है। इसी परिसर में टैंक लॉरी कैलिब्रेशन और प्रयोगशालाओं के लिए भी बड़ा क्षेत्र आरक्षित है। पुराने भवन को तोड़कर नया निर्माण किया जाएगा, जिसके चलते परिसर में मौजूद सैकड़ों पेड़ों को हटाया जाना तय माना जा रहा है। नए भवन के लिए टेंडर हो चुके जारी हाल ही में वेयर हाउसिंग द्वारा नए ‎भवन के निर्माण के लिए एजेंसी‎ चुनने टेंडर जारी कर दिए हैं।‎ नाप-तौल नियंत्रक कार्यालय एमपी‎ नगर में जिला उद्योग केंद्र के पास ‎लगभग डेढ़ एकड़ जमीन पर स्थित ‎है। मुख्य भवन के अलावा काफी‎ बड़ा क्षेत्र टैंक लारी कैलिब्रेशन और‎ दूसरी प्रयोगशाला के लिए छोड़ा गया‎ है। इसी जमीन पर पुराने भवन को‎ तोड़कर नया खाद्य भवन बनेगा। जिसके लिए पेड़ों को भी काटा‎ जाएगा। पीपल, बरगद सहित परिसर‎में 40 से 50 साल पुराने लगभग‎ 150 पेड़ हैं।‎ एक विभाग के लिए इतना खर्च ठीक नहीं तिवारी ने बताया कि नागरिक आपूर्ति निगम को छोड़कर सभी विभागीय दफ्तरों के सरकारी भवन‎ हैं। सिर्फ नान के लिए 100 करोड़ रुपए का खर्च ठीक नहीं है। ‎परिसर के 150 पेड़ भी काटे जाएंगे। 3 साल में भवन बनने‎ पर मुख्यालय को लाखों रुपए किराए के देने होंगे। विभाग के‎ सभी स्टाफ गुरुवार से काली पट्टी लगाकर काम करेंगे। वहीं, भोजन‎ अवकाश में विरोध करेंगे। सात साल पहले अपने दफ्तर बाहर भेजे‎ जगह की कमी बताकर 7 साल पहले नाप तौल मुख्यालय से‎ उप नियंत्रक व निरीक्षक कार्यालय 50 लाख खर्च कर जेके ‎रोड क्षेत्र में 5 हजार वर्गफीट के दफ्तर में भेजे थे। कर्मचारियों‎ के मुताबिक यहां स्टाफ के बैठने और जब्त सामान रखने के‎लिए बमुश्किल जगह है। मुख्यालय में टैंक लॉरी कैलिब्रेशन‎ सुविधा बनाने 5 करोड़ की स्वीकृति मांगी जा चुकी है।‎ इस फैसले के खिलाफ मप्र नाप-तौल अधिकारी-कर्मचारी संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। समिति के अध्यक्ष उमाशंकर तिवारी ने बताया कि गुरुवार को भोजन अवकाश के समय कर्मचारी और पर्यावरण से जुड़े लोग पेड़ों से चिपककर ‘चिपको आंदोलन’ करेंगे। विरोध के प्रतीक स्वरूप कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि नागरिक आपूर्ति निगम (नान) को छोड़ दें तो बाकी सभी विभागों के पास पहले से अपने सरकारी भवन हैं। ऐसे में केवल एक विभाग के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च करना और इसके बदले 150 पेड़ों की बलि देना पूरी तरह अनुचित है। साथ ही, नए भवन के निर्माण में करीब तीन साल लगेंगे, इस दौरान मुख्यालय को किराए के भवन में शिफ्ट करना पड़ेगा, जिससे लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि करीब सात साल पहले जगह की कमी का हवाला देकर नाप-तौल मुख्यालय से कुछ कार्यालयों को 50 लाख रुपये खर्च कर जेके रोड स्थित किराए के भवन में भेजा गया था, जहां आज भी स्टाफ और जब्त सामग्री के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। वहीं, मुख्यालय परिसर में टैंक लॉरी कैलिब्रेशन सुविधा विकसित करने के लिए पहले ही 5 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी जा चुकी है। अब पेड़ों की कटाई और भारी खर्च को लेकर विरोध तेज होता जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि शहर में पहले ही हरियाली लगातार कम हो रही है, ऐसे में पुराने और बड़े पेड़ों को बचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। आंदोलन को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पेड़ काटने पर लगाई है रोक पत्रकार गौरव चतुर्वेदीने बताया कि "मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कुछ माह पहले ही आदेश जारी करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगाई थी. इसमें यह भी कहा गया था कि हाईकोर्ट के बगैर आदेश के राजधानी भोपाल में एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा. यह रोक हाईकोर्ट ने इसलिए लगाई थी कि भोपाल में ही हजारों पेड़ काटने का मामला सामने आया था. जिसमें कोर्ट ने कहा था कि मध्य प्रदेश में अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई बंद होनी चाहिए. कुछ रिपोर्टर्स के अनुसार मध्य प्रदेश में 408 वर्गफीट जंगल कम हुए हैं,जो कि चिंता विषय है."

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान कर किया पूजन

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में स्नान कर किया पूजन राष्ट्र की निरंतर प्रगति और कल्याण के पथ पर अग्रसर रहने की माँ गंगा से की प्रार्थना माघ मेले के पुण्य अवसर पर किया गंगा स्नान भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने माघ मेले के पुण्य अवसर पर प्रयागराज में त्रिवेणी संगम में स्नान कर पूजन किया। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ माघ मास में संगम तट पर स्नान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस काल में गंगा, यमुना एवं अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान से आत्मशुद्धि, पुण्य लाभ एवं लोक परलोक दोनों का कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी संगम के पवित्र तट पर संतों, श्रद्धालुओं और साधकों की उपस्थिति ने वातावरण को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। वैदिक मंत्रोच्चार, आरती और पूजन के मध्य किया गया स्नान अंतर्मन को शांति, संतुलन और सकारात्मक संकल्प से भरने वाला रहा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने माँ गंगा से समस्त देशवासियों पर अपनी कृपा बनाए रखने, समाज में सद्भाव, समरसता और नैतिक चेतना का विस्तार करने और राष्ट्र के निरंतर प्रगति और कल्याण के पथ पर अग्रसर रहने की प्रार्थना की है। संत जनों से लिया आशीर्वाद उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने माघ मेला क्षेत्र, प्रयागराज में सतुआ बाबा के शिविर पहुंचकर संतोष दास (सतुआ बाबा) से आत्मीय भेंट कर उनका सान्निध्य प्राप्त किया। इस अवसर पर आध्यात्मिक विषयों, सनातन परंपराओं और सामाजिक समरसता से जुड़े विचारों पर संवाद किया। साथ ही श्रीमद् जगद्गुरु नृसिंह पीठाधीश्वर पूज्य डॉ. स्वामी नरसिंह देवाचार्य जी महाराज (नरसिंह मंदिर – गीताधाम जबलपुर) से भेंट की और मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।  

बांग्लादेश ने T20 वर्ल्ड कप से किया बहिष्कार, ICC को झटका, क्रिकेट में हलचल

  नई दिल्ली इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) की चेतावनी और अल्टीमेटम के बावजूद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) खिलाड़ियों और अंतरिम सरकार के खेल सलाहकार ने T20 वर्ल्ड कप को लेकर अपने रुख पर कायम रहने का फैसला किया है. बांग्लादेश ने साफ कर दिया है कि जब तक मैचों का वेन्यू भारत से बदलकर श्रीलंका नहीं किया जाता, तब तक टीम वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं लेगी. खिलाड़ियों के साथ अहम बैठक के बाद बांग्लादेश के खेल सलाहकार आसिफ नजरुल ने ICC पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि ICC ने बांग्लादेश के साथ न्याय नहीं किया है और खिलाड़ियों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है. आसिफ नज़रुल के मुताबिक- सरकार, क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ी तीनों एक मत हैं कि सुरक्षा से किसी भी हालत में समझौता नहीं किया जाएगा. आसिफ नज़रुल ने साफ शब्दों में कहा- हम किसी के दबाव में नहीं झुकेंगे. दुनिया को यह भी समझना चाहिए कि अगर बांग्लादेश वर्ल्ड कप नहीं खेलेगा तो उसके क्या नतीजे होंगे. हम अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते. बैठक के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भी दोहराया कि उनका फैसला अटल है. बोर्ड का कहना है कि मौजूदा हालात में भारत जाकर खेलना सुरक्षित नहीं है और इसलिए वेन्यू बदलकर श्रीलंका किया जाना चाहिए. हालांकि ICC ने पहले ही साफ कर दिया है कि टूर्नामेंट के मैच भारत से बाहर नहीं ले जाए जाएंगे. ICC की इस सख्त चेतावनी के बाद भी बांग्लादेश ने अपने फैसले से पीछे हटने से इनकार कर दिया है. इस पूरे विवाद के चलते T20 वर्ल्ड कप पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं. अब सबकी नजर ICC के अगले कदम और इस टकराव के समाधान पर टिकी हुई है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश को दिया धोखा, कहा-टी20 वर्ल्ड कप से नाम वापस नहीं लेंगे  एक बार सांप पर भरोसा कर लेना लेकिन पाकिस्तान पर नहीं…अकसर पाकिस्तान के लिए ये बात कही जाती है लेकिन बांग्लादेश को शायद ये बात पता नहीं थी. टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के साथ खड़े होने का दावा करने वाला पाकिस्तान अब पलट गया है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड कह रहा था कि अगर बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुआ तो वो भी इस टूर्नामेंट का बॉयकॉट करेंगे. अब ऐसे हालात बने हैं तो पाकिस्तान ने टूर्नामेंट से नाम वापस नहीं लेने का फैसला किया है. पाकिस्तानी मीडिया की खबरों के मुताबिक पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड टूर्नामेंट से हटने पर विचार नहीं कर रहा है. पाकिस्तान ने बांग्लादेश का समर्थन किया लेकिन… टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने बांग्लादेश के रुख का समर्थन तो किया लेकिन पीसीबी के अधिकारियों का मानना ​​है कि टूर्नामेंट के बहिष्कार का कोई ठोस आधार नहीं दिखता. उन्होंने कहा,’ पाकिस्तान अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है, लेकिन आयोजन से हटना कभी भी एक विकल्प नहीं था और न ही इस पर विचार किया गया था.’ पीसीबी अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान के मैच पहले से ही एक तटस्थ मैदान पर हो रहे हैं, जहां सुरक्षा से जुड़ी कोई चिंता नहीं है. पीसीबी अधिकारियों ने ये भी कहा कि पाकिस्तान ने कभी भी आधिकारिक तौर पर टूर्नामेंट से हटने की धमकी नहीं दी, और ये बात सिर्फ सोशल मीडिया में फैली थी. आईसीसी ने बांग्लादेश को दिया आखिरी मौका बता दें बांग्लादेश के मुद्दे पर आईसीसी ने बुधवार को वोटिंग कराई जिसमें 14 क्रिकेट बोर्ड ने भारत के समर्थन में वोट दिया. बांग्लादेश को सिर्फ दो वोट मिले. ऐसे में आईसीसी ने साफतौर पर कह दिया है कि बांग्लादेश को अपने टी20 मुकाबले भारत में ही खेलने होंगे. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड की टीम खेलेगी. अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अपनी सरकार से बात करेंगे. सरकार की इजाजत के बाद ही बांग्लादेशी टीम टी20 वर्ल्ड कप खेल पाएगी. आईसीसी के फैसले का विरोध आईसीसी के इस फैसले का बांग्लादेश और पाकिस्तान में विरोध हो रहा है. पाकिस्तान के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज कामरान अकमल ने आईसीसी के फैसले पर निराशा जताई. कामरान ने टेलीकॉम एशिया स्पोर्ट से बातचीत में आरोप लगाया कि आईसीसी के ज्यादातर फैसला भारत के पक्ष में होते हैं. कामरान अकमल के मुताबिक अगर चैंपियंस ट्रॉफी के वेन्यू भारत के लिए बदले जा सकते हैं तो बांग्लादेश को भी ऐसी सुविधा मिलनी चाहिए. कामरान के मुताबिक भारत सबसे ज्यादा पैसा आईसीसी को देता है इसलिए उसके पक्ष में फैसले जाते हैं. ICC की इस सख्त चेतावनी के बाद भी बांग्लादेश ने अपने फैसले से पीछे हटने से इनकार कर दिया है. इस पूरे विवाद के चलते T20 वर्ल्ड कप पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं. अब सबकी नजर ICC के अगले कदम और इस टकराव के समाधान पर टिकी हुई है. वैसे टी20 वर्ल्ड कप के शेड्यूल के मुताबिक पहले बांग्लादेश को ग्रुप C में रखा गया था. इसके  पहले तीन मैच कोलकाता में होने थे. इसके बाद  बांग्लादेश अपना आखिरी ग्रुप मैच 17 फरवरी को मुंबई में नेपाल के खिलाफ खेलना था.  बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप के लिए शेड्यल ऐसा था 7 फरवरी 2026: बांग्लादेश vs वेस्टइंडीज, दोपहर 3 बजे, ईडन गार्डन्स (कोलकाता) 9 फरवरी 2026: बांग्लादेश vs इटली, सुबह 11 बजे, ईडन गार्डन्स (कोलकाता) 14 फरवरी 2026: बांग्लादेश vs इंग्लैंड, दोपहर 3 बजे, ईडन गार्डन्स (कोलकाता) 17 फरवरी 2026: बांग्लादेश vs नेपाल, शाम 7 बजे, वानखेड़े स्टेडियम (मुंबई) क्यों बांग्लादेश ने क‍िया टी20 वर्ल्ड कप भारत में ना खेलने का फैसला  हाल के दिनों में भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तब तल्खी देखी गई जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार देखने को म‍िला. इसका असर बाद में क्रिकेट पर भी देखने को म‍िला. इसके बाद  मुस्ताफिजुर रहमान को कोलकाता नाइटराइडर्स फ्रेंचाइजी ने कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर आईपीएल 2026 से  बाहर कर दिया थ. इसके बाद बांग्लादेश ने भी आईपीएल प्रसारण पर बैन लगा द‍िया. बाद में टी20 वर्ल्ड कप के अपने मैच श्रीलंका में कराने की मांग तेज कर दी. जिसे ICC ने स्वीकार नहीं किया था.  22 जनवरी की बैठक के बाद BCB ने किया बायकॉट  ICC से 21 जनवरी को आधिकारिक संदेश मिलने के … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामने म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू हस्ताक्षर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग के लिए बनी सहमति संयुक्त अरब अमीरात स्थित वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है डीपी वर्ल्ड भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में बुधवार को दावोस में मध्यप्रदेश और वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) में स्थित अग्रणी कंपनी डीपी वर्ल्ड के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मध्यप्रदेश शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने एवं डीपी वर्ल्ड की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा वित्त एवं व्यवसाय विकास अधिकारी श्री अनिल मोहता ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर डीपी वर्ल्ड के समूह अध्यक्ष श्री सुल्तान अहमद बिन सुलायेम उपस्थित रहे। इस एमओयू के माध्यम से औद्योगिक विकास और निवेश सहयोग से जुड़े विषयों पर सहमति बनी, जो राज्य में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। एमओयू में डीपी वर्ल्ड द्वारा मध्यप्रदेश में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। यह पहल राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक सप्लाई चेन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण एवं बुनियादी ढांचे के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। एमओयू के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और औपचारिक रूप से समझौता दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। यह समझौता ज्ञापन मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और व्यापार के क्षेत्र में एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।  

26 जनवरी पर तिरंगा फहराने के लिए राज्यपाल और सीएम के साथ मंत्री किस जिले में जाएंगे? देखें पूरी लिस्ट

भोपाल  देश के अन्य राज्यों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया है और बताया है कि इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों कौन से प्रतिनिधि कहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस पत्र में बताया गया है कि राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मध्य प्रदेश में 26 जनवरी पर मनाए जाने वाले भारत के गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरो शोर से चल रही है। इस दिन प्रदेशभर के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सूची जारी करते हुए बताया है कि, इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों में कौन किस जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराएगा। प्रदेश के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस लिस्ट में बताया गया है कि, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे राज्यपाल विभाग की ओर से जारी सूची क अनुसार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने गृह नगर उज्जैन में होने वाले आयोजन में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर जिले में ध्वज फहराएंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। पत्र के अनुसार, प्रदेश के 23 जिले ऐसे भी हैं, जहां पर स्थानीय कलेक्टर ही ध्वज फहराएंगे। जबकि, शेष में जनप्रतिनिधी झंडावंदन करेंगे। किस जिले में कौनसा मंत्री फहराएगा ध्वज -इंदौर : जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री -सागर : राजेन्द्र शुक्ल, उप मुख्यमंत्री -रतलाम : कुंवर विजय शाह, मंत्री -रीवा : प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री -छिंदवाडा : राकेश सिंह, मंत्री -सिवनी : करण सिंह वर्मा, मंत्री -कटनी : उदय प्रताप सिंह, मंत्री -जबलपुर : सम्पतिया उईके, मंत्री -बुरहानपुर : तुलसीराम सिलावट, मंत्री -दतिया : एदल सिंह कंषाना, मंत्री -नीमच : निर्मला भूरिया, मंत्री -गुना : गोविन्द सिंह राजपूत, मंत्री -खरगोन : विश्वास सारंग, मंत्री -शाजापुर : नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री -आगर मालवा : नागर सिंह चौहान, मंत्री -शिवपुरी : प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री -अशोकनगर : राकेश शुक्ला, मंत्री -राजगढ़ : चेतन्य काश्यप, मंत्री -दमोह : इंदर सिंह परमार, मंत्री -सीहोर : कृष्णा गौर, राज्यमंत्री -खंडवा : धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्यमंत्री -मंडला : दिलीप जायसवाल, राज्यमंत्री -बड़वानी : गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री -विदिशा : लखन सिंह पटेल, राज्यमंत्री -रायसेन : नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री -नर्मदापुरम : नरेंद्र शिवाजी पटेल, राज्यमंत्री -डिंडौरी : प्रतिमा बागरी, राज्यमंत्री -अनूपपुर : दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री -मैहर : राधा सिंह, राज्यमंत्री इन 23 जिलों में कलेक्टर ध्वज फहराकर पढ़ेंगे सीएम का संदेश 1-देवास, 2-धार, 3-झाबुआ, 4-अलीराजपुर, 5-मुरैना, 6-मंदसौर, 7-श्योपुर, 8-भिंड, 9-सीधी, 10-सतना, 11-मऊगंज, 12-शहडोल, 13-उमरिया, 14-पन्ना, 15-छतरपुर, 16-टीकमगढ़, 17-निवाड़ी, 18-बैतूल, 19-हरदा, 20-सिंगरौली, 21-नरसिंहपुर, 22-बालाघाट, 23-पांढुर्णा।

गोल्‍ड और सिल्‍वर ETFs में आई बड़ी गिरावट, 12% तक गिरे भाव, जानें क्यों हुआ क्रैश

नई दिल्‍ली गोल्‍ड और सिल्‍वर ईटीएफ के दाम में गुरुवार को भारी गिरावट आई है. दोपहर के कारोबार के दौरान सिल्‍वर ईटीएफ 12 फीसदी तक और गोल्‍ड ईटीएफ 8 फीसदी तक गिर गए. यह गिरावट सुबह के कारोबार के दौरान सोने-चांदी के रेट में बड़ी गिरावट के कारण आया है.  वायदा बाजार MCX पर सोना और चांदी के दाम गुरुवार की सुबह तेजी से गिरे थे. चांदी 20 हजार रुपये तक टूट गई थी और सोने की कीमतों में 4000 रुपये तक की गिरावट आई. हालांकि कुछ देर बाद सोने और चांदी के दाम रिकवर कर गए. दोपहर 12.20 बजे एमसीएक्‍स पर सिल्‍वर 600 रुपये गिरकर 3,17,951 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहा था. वहीं गोल्‍ड के दाम 400 रुपये टूटकर 1,60,029 रुपये पर था. लेकिन सोना और चांदी ETFs अभी भी बड़ी गिरावट पर थे.  इंट्राडे के दौरान टाटा सिल्‍वर ईटीएफ करीब 25 फीसदी टूट गया था, लेकिन अभी 13 फीसदी गिरकर कारोबार कर रहा है. सिल्‍वर बीस में 8 फीसदी की गिरावट आई है, जो अभी 285 पर करोबार  कर रहा है.  गोल्‍ड बीस में भी 8 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. टाटा गोल्‍ड 9 फीसदी टूट गया है. HDFC, ICICI, SBI जैसे सिल्‍वर और गोल्‍ड ईटीएफ भी करीब 9 प्रतिशत त‍क गिरे हैं.  सोना-चांदी के दाम क्‍यों गिरे?  सोने और चांदी के दाम में गुरुवार को भारी गिरावट की वजह ट्रंप को माना जा रहा है. दरअसल, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और भारत की अच्‍छी डील जल्‍द होने जा रही है. उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अच्‍छा दोस्‍त बताया है. Donald Trump ने कहा कि PM Narendra Modi को लेकर उनके मन में बहुत सम्मान है, वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है. इस बयान के बाद शेयर बाजार में शानदार तेजी आई और गोल्‍ड सिल्‍वर के दाम क्रैश हो गए, जिस कारण ईटीएफ भी तेजी से टूटे.  ग्रीनलैंड पर क्‍या दिया बयान?  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड पर ऐसा समझौता किया जाएगा, जो अमेरिका और नाटो दोनों के लिए अच्‍छा हो. हालांकि उन्‍होंने यह भी स्‍वीकार किया है कि ग्रीनलैंड पर कब्‍जे की कार्रवाई से अमेरिका में यूरोपीय देशों के निवेश पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ सकता है.  ग्‍लोबल टेंशन में कटौती  ट्रंप के इन दोनों बयान के कारण ग्‍लोबल टेंशन थोड़ा कम होते हुए दिखाई दे रहा है. जिस कारण सेफ असेट माने जाने वाले Gold Silver के दाम में गिरावट आई है और सिल्‍वर-गोल्‍ड ईटीएफ के दाम में बिखर गए हैं.  मुनाफावसूली भी वजह  गोल्‍ड और सिल्‍वर ईटीएफ के दाम अपने रिकॉर्ड हाई पर बने हुए थे, लेकिन जैसे ही सोने और चांदी के दाम में गिरावट शुरू हुई निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग करनी शुरू कर दी. सोने और चांदी में प्रॉफिट बुकिंग के साथ ही इनके ईटीएफ में भी प्रॉफिट बुकिंग जारी है. 

इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य

यूपी दिवस विशेष प्रदेश में निवेश के नए युग का आगाज, एमओयू से ग्राउंड ब्रेकिंग तक ऐतिहासिक प्रगति इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य रिकॉर्ड निवेश से औद्योगिक आधार का विस्तार, कारखानों, रोजगार और उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के जरिए संतुलित क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समग्र योजना, तेज क्रियान्वयन और जनपद स्तर तक इंटीग्रेशन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ रक्षा कॉरिडोर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार लखनऊ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की वह यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे थी। एक समय निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन के मजबूत मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जिनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।  प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी–आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है। कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ योगी सरकार ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में परिवर्तित करने वाला राज्य है। भरोसे की बहाली से निवेश की बहार तक उत्तर प्रदेश का कायाकल्प वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग लगाने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर थे। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जकड़ रखा था। वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची है और अब भी निरंतर जारी है।  घोषणाओं से आगे ग्राउंड ब्रेकिंग का मॉडल योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रहे। अब तक चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें 8,300 से अधिक परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे-मध्यम निवेशकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति से मिली विकास को रफ्तार प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है। बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक विकास का समावेशी मॉडल बुंदेलखंड, पूर्वांचल व तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना साबित करती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। यूपी अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। एक ऐसा प्रदेश, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।