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मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामने म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू हस्ताक्षर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में म.प्र. और डीपी वर्ल्ड के बीच हुआ एमओयू लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सहयोग के लिए बनी सहमति संयुक्त अरब अमीरात स्थित वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है डीपी वर्ल्ड भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में बुधवार को दावोस में मध्यप्रदेश और वैश्विक लॉजिस्टिक्स एवं सप्लाई चेन क्षेत्र की संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) में स्थित अग्रणी कंपनी डीपी वर्ल्ड के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। मध्यप्रदेश शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने एवं डीपी वर्ल्ड की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा वित्त एवं व्यवसाय विकास अधिकारी श्री अनिल मोहता ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर डीपी वर्ल्ड के समूह अध्यक्ष श्री सुल्तान अहमद बिन सुलायेम उपस्थित रहे। इस एमओयू के माध्यम से औद्योगिक विकास और निवेश सहयोग से जुड़े विषयों पर सहमति बनी, जो राज्य में लॉजिस्टिक्स, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। एमओयू में डीपी वर्ल्ड द्वारा मध्यप्रदेश में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई। यह पहल राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक सप्लाई चेन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अहम मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण एवं बुनियादी ढांचे के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। एमओयू के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और औपचारिक रूप से समझौता दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया। यह समझौता ज्ञापन मध्यप्रदेश को लॉजिस्टिक्स और व्यापार के क्षेत्र में एक सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।  

26 जनवरी पर तिरंगा फहराने के लिए राज्यपाल और सीएम के साथ मंत्री किस जिले में जाएंगे? देखें पूरी लिस्ट

भोपाल  देश के अन्य राज्यों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया है और बताया है कि इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों कौन से प्रतिनिधि कहां पर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। राज्य के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस पत्र में बताया गया है कि राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मध्य प्रदेश में 26 जनवरी पर मनाए जाने वाले भारत के गणतंत्र दिवस की तैयारियां जोरो शोर से चल रही है। इस दिन प्रदेशभर के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार के अलग-अलग जनप्रतिनिधि हिस्सा लेकर झंडावंदन करेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सूची जारी करते हुए बताया है कि, इस साल होने वाले जिलास्तरीय आयोजनों में कौन किस जिले में राष्ट्रीय ध्वज फहराएगा। प्रदेश के सभी कलेक्टरों के नाम पर जारी इस लिस्ट में बताया गया है कि, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यक्रमों में राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, राज्यमंत्री और कलेक्टर किन जिला मुख्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे राज्यपाल विभाग की ओर से जारी सूची क अनुसार, राज्यपाल मंगुभाई पटेल राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में होने वाले मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने गृह नगर उज्जैन में होने वाले आयोजन में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इसके अलावा, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर जिले में ध्वज फहराएंगे और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन करेंगे। पत्र के अनुसार, प्रदेश के 23 जिले ऐसे भी हैं, जहां पर स्थानीय कलेक्टर ही ध्वज फहराएंगे। जबकि, शेष में जनप्रतिनिधी झंडावंदन करेंगे। किस जिले में कौनसा मंत्री फहराएगा ध्वज -इंदौर : जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री -सागर : राजेन्द्र शुक्ल, उप मुख्यमंत्री -रतलाम : कुंवर विजय शाह, मंत्री -रीवा : प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री -छिंदवाडा : राकेश सिंह, मंत्री -सिवनी : करण सिंह वर्मा, मंत्री -कटनी : उदय प्रताप सिंह, मंत्री -जबलपुर : सम्पतिया उईके, मंत्री -बुरहानपुर : तुलसीराम सिलावट, मंत्री -दतिया : एदल सिंह कंषाना, मंत्री -नीमच : निर्मला भूरिया, मंत्री -गुना : गोविन्द सिंह राजपूत, मंत्री -खरगोन : विश्वास सारंग, मंत्री -शाजापुर : नारायण सिंह कुशवाह, मंत्री -आगर मालवा : नागर सिंह चौहान, मंत्री -शिवपुरी : प्रद्युम्न सिंह तोमर, मंत्री -अशोकनगर : राकेश शुक्ला, मंत्री -राजगढ़ : चेतन्य काश्यप, मंत्री -दमोह : इंदर सिंह परमार, मंत्री -सीहोर : कृष्णा गौर, राज्यमंत्री -खंडवा : धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी, राज्यमंत्री -मंडला : दिलीप जायसवाल, राज्यमंत्री -बड़वानी : गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री -विदिशा : लखन सिंह पटेल, राज्यमंत्री -रायसेन : नारायण सिंह पंवार, राज्यमंत्री -नर्मदापुरम : नरेंद्र शिवाजी पटेल, राज्यमंत्री -डिंडौरी : प्रतिमा बागरी, राज्यमंत्री -अनूपपुर : दिलीप अहिरवार, राज्यमंत्री -मैहर : राधा सिंह, राज्यमंत्री इन 23 जिलों में कलेक्टर ध्वज फहराकर पढ़ेंगे सीएम का संदेश 1-देवास, 2-धार, 3-झाबुआ, 4-अलीराजपुर, 5-मुरैना, 6-मंदसौर, 7-श्योपुर, 8-भिंड, 9-सीधी, 10-सतना, 11-मऊगंज, 12-शहडोल, 13-उमरिया, 14-पन्ना, 15-छतरपुर, 16-टीकमगढ़, 17-निवाड़ी, 18-बैतूल, 19-हरदा, 20-सिंगरौली, 21-नरसिंहपुर, 22-बालाघाट, 23-पांढुर्णा।

गोल्‍ड और सिल्‍वर ETFs में आई बड़ी गिरावट, 12% तक गिरे भाव, जानें क्यों हुआ क्रैश

नई दिल्‍ली गोल्‍ड और सिल्‍वर ईटीएफ के दाम में गुरुवार को भारी गिरावट आई है. दोपहर के कारोबार के दौरान सिल्‍वर ईटीएफ 12 फीसदी तक और गोल्‍ड ईटीएफ 8 फीसदी तक गिर गए. यह गिरावट सुबह के कारोबार के दौरान सोने-चांदी के रेट में बड़ी गिरावट के कारण आया है.  वायदा बाजार MCX पर सोना और चांदी के दाम गुरुवार की सुबह तेजी से गिरे थे. चांदी 20 हजार रुपये तक टूट गई थी और सोने की कीमतों में 4000 रुपये तक की गिरावट आई. हालांकि कुछ देर बाद सोने और चांदी के दाम रिकवर कर गए. दोपहर 12.20 बजे एमसीएक्‍स पर सिल्‍वर 600 रुपये गिरकर 3,17,951 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रहा था. वहीं गोल्‍ड के दाम 400 रुपये टूटकर 1,60,029 रुपये पर था. लेकिन सोना और चांदी ETFs अभी भी बड़ी गिरावट पर थे.  इंट्राडे के दौरान टाटा सिल्‍वर ईटीएफ करीब 25 फीसदी टूट गया था, लेकिन अभी 13 फीसदी गिरकर कारोबार कर रहा है. सिल्‍वर बीस में 8 फीसदी की गिरावट आई है, जो अभी 285 पर करोबार  कर रहा है.  गोल्‍ड बीस में भी 8 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. टाटा गोल्‍ड 9 फीसदी टूट गया है. HDFC, ICICI, SBI जैसे सिल्‍वर और गोल्‍ड ईटीएफ भी करीब 9 प्रतिशत त‍क गिरे हैं.  सोना-चांदी के दाम क्‍यों गिरे?  सोने और चांदी के दाम में गुरुवार को भारी गिरावट की वजह ट्रंप को माना जा रहा है. दरअसल, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और भारत की अच्‍छी डील जल्‍द होने जा रही है. उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अच्‍छा दोस्‍त बताया है. Donald Trump ने कहा कि PM Narendra Modi को लेकर उनके मन में बहुत सम्मान है, वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है. इस बयान के बाद शेयर बाजार में शानदार तेजी आई और गोल्‍ड सिल्‍वर के दाम क्रैश हो गए, जिस कारण ईटीएफ भी तेजी से टूटे.  ग्रीनलैंड पर क्‍या दिया बयान?  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड पर ऐसा समझौता किया जाएगा, जो अमेरिका और नाटो दोनों के लिए अच्‍छा हो. हालांकि उन्‍होंने यह भी स्‍वीकार किया है कि ग्रीनलैंड पर कब्‍जे की कार्रवाई से अमेरिका में यूरोपीय देशों के निवेश पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ सकता है.  ग्‍लोबल टेंशन में कटौती  ट्रंप के इन दोनों बयान के कारण ग्‍लोबल टेंशन थोड़ा कम होते हुए दिखाई दे रहा है. जिस कारण सेफ असेट माने जाने वाले Gold Silver के दाम में गिरावट आई है और सिल्‍वर-गोल्‍ड ईटीएफ के दाम में बिखर गए हैं.  मुनाफावसूली भी वजह  गोल्‍ड और सिल्‍वर ईटीएफ के दाम अपने रिकॉर्ड हाई पर बने हुए थे, लेकिन जैसे ही सोने और चांदी के दाम में गिरावट शुरू हुई निवेशकों ने प्रॉफिट बुकिंग करनी शुरू कर दी. सोने और चांदी में प्रॉफिट बुकिंग के साथ ही इनके ईटीएफ में भी प्रॉफिट बुकिंग जारी है. 

इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य

यूपी दिवस विशेष प्रदेश में निवेश के नए युग का आगाज, एमओयू से ग्राउंड ब्रेकिंग तक ऐतिहासिक प्रगति इन्वेस्टर्स समिट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों से यूपी बना देश का सबसे भरोसेमंद निवेश गंतव्य रिकॉर्ड निवेश से औद्योगिक आधार का विस्तार, कारखानों, रोजगार और उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब के जरिए संतुलित क्षेत्रीय विकास राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत समग्र योजना, तेज क्रियान्वयन और जनपद स्तर तक इंटीग्रेशन आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के साथ रक्षा कॉरिडोर, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का विस्तार लखनऊ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की वह यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे थी। एक समय निवेशकों के लिए अविश्वसनीय माना जाने वाला प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को सिर्फ घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और क्रियान्वयन के मजबूत मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा। प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है, जिनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित होकर लाखों युवाओं को रोजगार दे रही हैं।  प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी–आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अगुआ बना दिया है। कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ योगी सरकार ने यह साबित किया है कि उत्तर प्रदेश केवल संभावनाओं का नहीं, बल्कि संभावनाओं को परिणाम में परिवर्तित करने वाला राज्य है। भरोसे की बहाली से निवेश की बहार तक उत्तर प्रदेश का कायाकल्प वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग लगाने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर थे। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को जकड़ रखा था। वर्ष 2017 में सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और गुड गवर्नेंस को प्राथमिकता दी। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘इन्वेस्ट यूपी’ और ‘निवेश सारथी’ जैसे प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों का भरोसा लौटाया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक ₹45 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची है और अब भी निरंतर जारी है।  घोषणाओं से आगे ग्राउंड ब्रेकिंग का मॉडल योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश सिर्फ एमओयू तक सीमित नहीं रहे। अब तक चार ग्राउंडब्रेकिंग समारोहों के जरिए 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली 16,000 से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें 8,300 से अधिक परियोजनाओं का व्यावसायिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिला है। योगी सरकार की औद्योगिक नीति ने कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रहने के बजाय सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे-मध्यम निवेशकों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा। आज देश के 65% से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं और लखनऊ-नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब बन चुके हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति से मिली विकास को रफ्तार प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे-आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर किया। जिला स्तर तक डेटा-आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा, अदानी डिफेंस जैसी मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का केंद्र बनाया। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के जरिए उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी का नया हब बन रहा है। यह बदलाव केवल निवेश नहीं, बल्कि भविष्य की नौकरियों और तकनीकी नेतृत्व का आधार है। बुंदेलखंड से पूर्वांचल तक विकास का समावेशी मॉडल बुंदेलखंड, पूर्वांचल व तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना साबित करती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित नहीं। वर्ष 2017 के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट विजन से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। यूपी अब बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में जी रहा है। एक ऐसा प्रदेश, जो भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने को तैयार है।

SC का बड़ा आदेश: धार भोजशाला में बसंत पंचमी पर पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग टाइमिंग निर्धारित

धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में विवादित भोजशाला में बसंत पंचमी के दिन पूजा के साथ नमाज भी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम फैसला देते हुए कहा कि हिंदुओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी। वहीं, मुसलमानों को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक शुक्रवार की नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने भोजशाला में पूजा-अर्चना के लिए कानून व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया और कुछ उपाय भी सुझाए। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि विवादित भोजशाला में नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों की संख्या जिला प्रशासन को बताई जाए। हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। एएसआई की 7 अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को हर मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमान हर शुक्रवार यहां नमाज पढ़ सकते हैं। पिछले 23 सालों से यह व्यवस्था है। इस बार शुक्रवार के दिन ही बसंत पंचमी होने की वजह से प्रशासन के लिए सामने चुनौती खड़ो हो गई है। दरअसल, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर की गई याचिका में आगामी बसंत पंचमी (23 जनवरी 2026, शुक्रवार) को भोजशाला में केवल हिंदुओं को मां सरस्वती की पूजा की अनुमति देने और मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोकने की मांग की थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिंदू पक्ष को बसंत पंचमी पर पूरे दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त तक) पारंपरिक अनुष्ठान करने की अनुमति दे दी है, लेकिन नमाज के समय (1-3 बजे) स्थान उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है.  इसके बाद CJI ने महाधिवक्ता से पूछा कि क्या आप ये व्यवस्थाएं कर पाएंगे? इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि इससे पूजा पूरे दिन जारी रह सकती है. मुस्लिम पक्ष को देनी होगी अनुमानित संख्या इसके अलावा कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को गुरुवार शाम तक धार के जिला मजिस्ट्रेट को नमाज के लिए आने वाले लोगों की अनुमानित संख्या बतानी होगी, ताकि पास जारी हो सकें और प्रवेश-निकास की व्यवस्था हो सके. अदालत ने दोनों पक्षों से अपील की कि वे आपसी सम्मान, सहिष्णुता और सहयोग दिखाएं तथा प्रशासन के साथ मिलकर शांति बनाए रखें. पहले भी चुका है ऐसा वहीं, कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि मुख्य याचिका पहले ही अप्रभावी हो चुकी है और ये आवेदन एक लंबित मामले में दायर किया गया है. उन्होंने अदालत को बताया कि पहले की व्यवस्थाओं के अनुसार कानून-व्यवस्था के इंतजाम किए जा सकते हैं. साथ ही एएसजी और महाधिवक्ता ने आश्वासन दिया कि पहले की तरह पूरी व्यवस्था की जाएगी.   मस्जिद कमेटी की ओर से पेश हुए खुर्शीद दूसरी ओर मस्जिद कमेटी की ओर से वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि पहले भी तीन बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने हिंदू पक्ष को तीन घंटे तक पूजा की अनुमति दी है. उन्होंने कहा, 'ऐसा ही दोबारा होने दिया जाए. जुमा की नमाज दोपहर एक से तीन बजे तक होती है, हम 3 बजे तक जगह खाली कर देंगे. हम न्यूनतम समय मांग रहे हैं और खुशी से समायोजन करने को तैयार हैं. पूजा बाहर भी जारी रह सकती है.' हिंदू पक्ष का तर्क एएसआई की ओर से पेश वकील ने बताया कि पूजा का मुहूर्त दोपहर 1 बजे तक है और वे हिंदू पक्ष को अनुमति दे सकते हैं. हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने जोर देकर कहा कि पूजा-अनुष्ठान सूर्योदय से सूर्यास्त तक होना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नमाज शाम 5 बजे कर ली जाए तो हिंदू पक्ष पूजा पूरी कर 5 बजे जगह खाली कर देगा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि पंडाल-बैरिकेड लगाए जा सकते हैं, जबकि मुख्य प्रवेश द्वार साझा रहेगा तो न्यायमूर्ति जे. बागची ने कहा कि एक तरफ हवन कुंड रखा जाए और दूसरी तरफ नमाज के लिए विभाजन किया जाए, क्या ये संभव है? इससे पहले वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन थी। तब भोजशाला में पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं। इस बार प्रशासन ने पहले से ही यहां सुरक्षा बढ़ा दी है।

शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोती का नाम रखा इस देवी के नाम पर, जानें उसका अर्थ

भोपाल  मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बड़े बेटे कार्तिकेय पिता बन गए. उनकी पत्नी अमानत ने एक बेटी को जन्म दिया. इसी खुशी में शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार की रात को अपने X हैंडल पर अपनी पोती से जुड़ा एक भावुक वीडियो शेयर किया. उस पोस्ट में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा कि, 'हमारे घर आज लाडली लक्ष्मी आई है. कार्तिकेय पिता बन गए और अमानत मां. कोकिला अब दादी जी हैं और मां दादा. कुणाल और ऋद्धि चाचा और चाची. अनुपम जी नाना, रुचिता जी नानी और आर्यन मामा. 2025 में हमारे घर दो बेटियां आईं- अमानत और ऋद्धि. 2026 में फिर बेटी इला का शुभ आगमन हुआ. स्वागतम लक्ष्मी.' पोती का नाम रखा है 'इला', ये है मतलब शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोती का नाम इला रखा है. यह नाम संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ मुख्य रूप से पृथ्वी, वाणी और उर्वरता की देवी से जुड़ा है, जो वैदिक साहित्य में 'इदा' के रूप में भी जानी जाती हैं और सरस्वती तथा भारती के साथ पूजी जाती हैं. पुराणों के अनुसार, इला वैवस्वत मनु की पुत्री और बुध देवता की पत्नी हैं, जिनसे पुरूरवा का जन्म हुआ. आसान शब्दों में कहें तो इला का संबंध शक्ति, पवित्रता और सुंदरता से है. संस्कृत के अलावा यह नाम हिब्रू, और फिनिश जैसी विभिन्न भाषाओं से जुड़ा है, जहां इन्हें शक्ति, सहनशक्ति और आनंद का प्रतीक माना जाता है. शिवराज सिंह चौहान बने दादा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान दादा बन गए हैं। उनके बड़े बेटे कार्तिकेय और बहू अमानत के घर बेटी का जन्म हुआ है। पूर्व सीएम ने अपने घर आई इस खुशखबरी को सोशल मीडिया पर शेयर किया। अपनी पोस्ट में उन्होंने अपनी पोती का नाम भी बताया। उन्होंने बताया कि उनके घर लाडली लक्ष्मी आई है और कार्तिकेय पिता बन गए हैं और अमानत मां बन गई हैं। चौहान ने बताया कि कोकिला अब दादी जी हैं और मैं दादा। साथ ही कुणाल और ऋद्धि अब चाचा-चाची बन गए हैं। शिवराज ने आगे बताया कि पिछले साल हमारे घर दो बेटियां आई अमानत और ऋद्धि, वहीं अब तीसरी बेटी आई है। अपनी इस पोस्ट में उन्होंने अपनी पोती के नाम का खुलासा भी कर दिया। उन्होंने बताया कि 2026 में बेटी इला का शुभ आगमन हुआ है। दादी खुशी से बोलीं- लाडली लक्ष्मी आई है अपनी पोस्ट के साथ शिवराज ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें डॉक्टर उनकी पोती को लेकर गोद में लेकर आते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि बैकग्राउंड में गायत्री मंत्र का उच्चारण करते हुए कृषि मंत्री की आवाज सुनाई दे रही है। इस दौरान वहां पर दोनों परिवारों के सदस्य मौजूद दिखाई दे रहे हैं। शिवराज के बेटे कार्तिकेय बेटी को सबसे पहले गोद में लेते हैं और उसके कान में कुछ सुनाते हैं। इसी दौरान दादी बनी साधना चौहान खुशी से उछलते हुए कहती हैं हमारे घर लाडली लक्ष्मी आई है। पोती के कान में दादू ने सुनाया गायत्री मंत्र इसके बाद डॉक्टर बेटी का नाम पूछती हैं तो कार्तिकेय उन्हें इला नाम बताते हैं। इसके बाद पहले कार्तिकेय और फिर दादू बने शिवराज सिंह चौहान अपनी पोती के कानों में गायत्री मंत्र सुनाते हैं। बता दें कि शिवराज सिंह चौहान के दो बेटे हैं, जिनमें से बड़े बेटे का नाम कार्तिकेय और छोटे बेटे का नाम कुणाल है। कार्तिकेय की शादी पिछले साल 6 मार्च को जोधपुर के भव्य उम्मेद भवन पैलेस में लिबर्टी शू कंपनी के डायरेक्टर अनुपम बंसल की बेटी अमानत बंसल से हुई थी। इस समारोह के बाद दिल्ली में एक ग्रैंड रिसेप्शन भी रखा गया था। जिसमें राजनीति और उद्योग जगत की कई हस्तियां शामिल हुई थीं। शिवराज सिंह ने दिखाई अपनी पोती की पहली झलक हॉस्पिटल से सामने आए वीडियो में शिवराज सिंह का पूरा परिवार बहुत ही खुश नजर आ रहा है. जैसे ही ऑपरेशन थिएटर से बच्ची को बाहर लाया गया, अस्पताल में खुशी का माहौल बन गया. दादी साधना सिंह अपनी भावनाओं को रोक नहीं पाईं और खुश होते हुए बोलीं कि, 'घर में लक्ष्मी आई है'. पापा बने कार्तिकेय ने बेटी को अपनी गोद में उठाते हुए उसका नाम 'इला' रखा. गायत्री मंत्र से किया पोती इला का स्वागत वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि पोती के बाहर आते ही शिवराज सिंह चौहान गायत्री मंत्र का जाप करते हुए दिख रहे हैं. उसके बाद पोती को गोद में लेने के बाद भी शिवराज सिंह ने उसके कान में एक बार फिर गायत्री मंत्र पढ़ा. कार्तिकेय भी अपनी बेटी को थामे हुए मंत्रों का जप करते नजर आए. 

J-K में सेना की गाड़ी 200 फुट गहरी खाई में गिरी, 10 जवानों की मौत

डोडा  जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया है। यहां सेना का वाहन खाई में गिरने से कम से कम 10 सैनिकों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में 9 सैनिक घायल भी हुए हैं। हादसा भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप पर हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि इस बुलेट-प्रूफ आर्मी की गाड़ी में हादसे के समय 17 जवान सवार थे और वह एक ऊंची पोस्ट की ओर जा रही थी। तभी खन्नी टॉप पर ड्राइवर ने वाहन के संतुलन खो दिया और गाड़ी 200 फुट गहरी खाई में गिर गई।  इस हादसे में 10 सैन्य जवानों की जान चली गई, जबकि अन्य जवान घायल हो गए. स्थानीय लोगों और बचाव दलों ने मिलकर घायलों को निकाला. हादसे के बारे में जानकारी देते हुए सैन्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को एक सैन्य वाहन 17 जवानों को लेकर ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौजूद चौकी की ओर लेकर जा रहा था, तभी डोडा के भादरवाह-चंबा अंतरराज्यीय सड़क क्षेत्र स्थित खानी टॉप के पास सेना का एक बुलेटप्रूफ वाहन सड़क से फिसलकर लगभग 200 फीट गहरी खाई में गिर गया. इस हादसे में 10 जवानों की जान चली गई है, जबकि अन्य जवान गंभीर रूप से घायल हो गए.    अधिकारियों ने बताया कि इस दर्दनाक हादसे में 9 अन्य जवान घायल हो गए हैं। यह हादसा भद्रवाह-चंबा अंतरराज्यीय मार्ग पर खन्नी टॉप के पास हुआ। अधिकारियों ने बताया कि सेना के बुलेटप्रूफ वाहन में कुल 17 जवान सवार थे। यह वाहन ऊंचाई पर स्थित एक चौकी की ओर जा रहा था। उन्होंने बताया कि चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया और वाहन करीब 200 फुट गहरी खाई में जा गिरा। अधिकारियों ने बताया कि सेना एवं पुलिस ने तुरंत संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। इस दौरान चार जवान मृत पाए गए। उन्होंने कहा कि नौ अन्य जवान घायल हो गए हैं। उनमें से गंभीर रूप से घायल तीन जवानों को विशेष इलाज के लिए हवाई मार्ग से उधमपुर के सैन्य अस्पताल ले जाया गया। कश्मीर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। गुरुवार को अधिकतर स्थानों पर न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर के अधिकतर स्थानों पर रात के तापमान में कमी आई और पूरी घाटी में तापमान जमाव बिंदु से नीचे बना रहा। उन्होंने बताया कि श्रीनगर में बुधवार रात न्यूनतम तापमान शून्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात की तुलना में एक डिग्री कम है। इसी के साथ, मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले का पर्यटक स्थल सोनमर्ग घाटी में सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान शून्य से 6.1 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। पिछली रात यह शून्य से 5.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में न्यूनतम तापमान शून्य से चार डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। अमरनाथ यात्रा के आधार शिविरों में से एक, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में न्यूनतम तापमान शून्य से 4.4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। वहीं, घाटी के एंट्री गेट काजीगुंड में न्यूनतम तापमान शून्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। जबकि कोकरनाग में यह शून्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस नीचे और कुपवाड़ा में शून्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान दर्ज किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आर्मी और पुलिस ने तुरंत मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और चार सैनिकों के शव मिले। उन्होंने बताया कि बचाए गए 9 अन्य सैनिक घायल हैं और उनमें से तीन को गंभीर चोटें आई हैं। सैनिकों को इलाज के लिए एयरलिफ्ट जाए उधमपुर मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया है। कुछ दिन पहले गुलमर्ग में हुआ था हादसा इस घटना से पहले गुलमर्ग सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास 2 सेना के कुलियों की फिसलकर मौत हुई थी।     यहां के अनीता पोस्ट जा रहे कुली 8 जनवरी को एक गहरी खाई में गिर गए थे। उनके शव दो दिन बाद बरामद किए गए थे।     पिछले साल मई में, जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में एक वाहन के सड़क से फिसलकर 700 फुट गहरी खाई में गिरने से 3 सेना के जवानों की मौत हो गई थी। ओडिशा में भी भीषण सड़क हादसा ओडिशा के खुर्दा जिले में NH-16 पर एक कार के ट्रक से टकराने के बाद तीन लोगों की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह दुर्घटना बुधवार रात को उस समय हुई जब एसयूवी कार ने भुवनेश्वर के पास इंफो वैली पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पिटापल्ली इलाके में ट्रक को पीछे से टक्कर मार दी। उन्होंने बताया, "एसयूवी के चालक ने एक वाहन को ओवरटेक करते समय रफ्तार बढ़ा दी और ट्रक से टकरा गया। 20 से 25 वर्ष की आयु के तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य को गंभीर हालत में एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है।" उन्होंने बताया कि दुर्घटना इतनी भीषण थी कि एसयूवी का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। दमकल कर्मियों को शवों को वाहन से बाहर निकालने के लिए कटर का इस्तेमाल करना पड़ा। अधिकारी ने बताया कि उनके शवों को पोस्टमार्टम के लिए खुर्दा सरकारी अस्पताल भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मृतक भुवनेश्वर के निवासी थे।     

सीएम योगी का बड़ा बयान: ‘धर्म की आड़ में कालनेमि सनातन धर्म को कमजोर कर रहे

 लखनऊ प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य से जुड़े हालिया विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर तीखा और स्पष्ट संदेश दिया है. बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज के समय में धर्म की आड़ लेकर सनातन धर्म को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं और ऐसे लोगों से समाज को सतर्क रहने की जरूरत है. सीएम योगी ने ऐसे तत्वों को 'कालनेमि' करार देते हुए कहा कि ये लोग बाहर से धार्मिक दिखते हैं, लेकिन भीतर से धर्मविरोधी एजेंडे पर काम कर रहे हैं. सीएम योगी ने कहा कि एक योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, उसकी असली संपत्ति धर्म होता है और राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति धर्म के खिलाफ आचरण करता है, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो, उसे सनातन परंपरा का प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता. कौन है कालनेमि  सीएम योगी के बयान में इस्तेमाल किया गया कालनेमि शब्द अपने आप में गहरा अर्थ रखता है. कालनेमि का उल्लेख रामायण में मिलता है. वह एक मायावी असुर था, जिसने साधु का वेश धारण कर हनुमान को भ्रमित करने की कोशिश की थी. बाहर से वह धर्मात्मा और तपस्वी दिखाई देता था, लेकिन भीतर से उसका उद्देश्य भगवान राम के कार्य में बाधा डालना था. अंततः हनुमान ने उसके छल को पहचान लिया और उसका वध कर दिया. शंकराचार्य विवाद के बीच आया बयान सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शंकराचार्य को अपने अनुयायियों के साथ रथ से मौनी अमावस्या पर स्थान करने जाने से रोकने के बाद बहस तेज है. हालांकि मुख्यमंत्री ने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को मौजूदा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है. उनका संदेश यह था कि सनातन धर्म की रक्षा केवल परंपराओं से नहीं, बल्कि आचरण की शुद्धता से होती है. धर्म आचरण में दिखना चाहिए सीएम योगी ने यह भी कहा कि धर्म केवल वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए. उन्होंने समाज से अपील की कि धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे भ्रम और दिखावे से सावधान रहें. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सत्य, संयम और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है और इसी मार्ग पर चलना ही उसकी सच्ची सेवा है.  

मुंबई की मेयर पद के लिए बड़ा ऐलान: महिला ही होगी मेयर, उद्धव गुट में मचा बवाल

मुंबई  बीएमसी के मेयर पद को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. लॉटरी सिस्टम के जरिए तय हुए आरक्षण के अनुसार इस बार मुंबई का मेयर पद ‘ओपन महिला’ कैटेगरी में आ गया है. इसका मतलब है कि अब बीएमसी की मेयर सिर्फ कोई महिला ही बन सकती है. जीती हुई महिला नगरसेवकों में से ही कोई एक इस पद पर पहुंचेगी. महाराष्ट्र के स्थानीय निकायों में मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था हर बार लॉटरी से तय की जाती है. इसी प्रक्रिया में बीएमसी का मेयर पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हो गया. इससे पहले कई बार यह पद सामान्य या अन्य श्रेणियों में आता रहा है, लेकिन इस बार लॉटरी में महिला कैटेगरी निकल आई है. अब बीएमसी में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन अपनी महिला पार्षद को मेयर पद के लिए आगे करेगा. हालांकि इस फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) ने आपत्ति जताई है. पार्टी ने आरोप लगाया कि मुंबई को ओबीसी आरक्षण के ड्रॉ से बाहर रखा गया है. शिवसेना यूबीटी के नेताओं का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर में ओबीसी समुदाय की आबादी को ध्यान में रखते हुए आरक्षण में उनका हिस्सा होना चाहिए था, लेकिन लॉटरी में ऐसा नहीं हुआ. पार्टी ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया है. मुंबई में मेयर का पोस्ट महिला कोटे में गया… अन्य सीटों का क्या हुआ? बीएमसी के मेयर पद का पोस्ट लॉटरी सिस्टम के जरिए महिला कोटे में गया है. शिवसेना-UBT ने मुंबई आरक्षण पर लॉटरी को लेकर आपत्ति जताई है. ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने सवाल उठाया था कि OBC आरक्षण ड्रॉ से मुंबई को क्यों बाहर रखा गया.  इसके अलाना पुणे, धुले, बीएमसी, नांदेड़, नवी मुंबई, मालेगांव, मीरा भयंदर, नासिक और नागपुर में मेयर की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हुई है. मेयर आरक्षण लॉटरी के बाद बदले सियासी समीकरण, लातूर-जालना SC महिला और ठाणे SC के लिए आरक्षित महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के मद्देनजर आरक्षण लॉटरी की घोषणा के बाद राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आया है. लातूर, जालना और ठाणे सहित कुल पांच नगर निगमों की मेयर सीटें अब अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित कर दी गई हैं. इनमें से लातूर और जालना नगर निगम की सीटें विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC) की महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं. वहीं, राज्य के महत्वपूर्ण नगर निगमों में से एक ठाणे को अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है.  महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के मेयर आरक्षण का ऐलान, मुंबई-पुणे सहित बड़े शहरों में महिला सीट महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार, 22 जनवरी को राज्य की 29 महानगरपालिकाओं के लिए मेयर पद के आरक्षण की आधिकारिक घोषणा कर दी है. मंत्रालय में आयोजित आरक्षण लॉटरी के मुताबिक, 29 में से 16 सीटें तमाम श्रेणियों के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि 13 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं. इस बार महिलाओं का दबदबा देखने को मिला है, जहां कुल 17 सीटों पर महिला मेयर चुनी जाएंगी.  मुंबई (बृहन्मुंबई), पुणे, नागपुर और नाशिक जैसी प्रमुख महानगरपालिकाएं 'सामान्य महिला' (Open Woman) श्रेणी के लिए आरक्षित हुई हैं. वहीं, ठाणे को अनुसूचित जाति (SC) और कल्याण-डोंबिवली को अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है. जालना और लातूर की सीटें अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए सुरक्षित हैं. ओबीसी (OBC) वर्ग के लिए 8 सीटें आवंटित की गई हैं, जिनमें अहिल्यानगर और अकोला जैसी जगहों पर महिला मेयर होंगी. इस आरक्षण ने आने वाले मेयर चुनावों के लिए पार्टियों के चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया है. प्रमुख महानगरों में आरक्षण की स्थिति आरक्षण लॉटरी के परिणामों ने राज्य के बड़े राजनीतिक केंद्रों में नई स्थिति पैदा कर दी है. मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक और नवी मुंबई जैसी हाई-प्रोफाइल सीटें 'सामान्य महिला' वर्ग के लिए आरक्षित हुई हैं. इसका मतलब है कि इन शहरों में अब केवल महिला उम्मीदवार ही मेयर पद के लिए चुनाव लड़ सकेंगी. वहीं, वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड और सोलापूर जैसी सीटें पूरी तरह 'ओपन' रखी गई हैं, जहाँ किसी भी वर्ग का उम्मीदवार मेयर बन सकता है. SC, ST और OBC वर्गों का कोटा सामाजिक संतुलन को देखते हुए लॉटरी में अनुसूचित जाति (SC) के लिए 3 सीटें (जालना, लातूर और ठाणे) आरक्षित की गई हैं. अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए केवल कल्याण-डोंबिवली की सीट आरक्षित हुई है. ओबीसी (OBC) वर्ग के हिस्से में 8 सीटें आई हैं, जिनमें चंद्रपूर, कोल्हापुर और अहिल्यानगर शामिल हैं. इस रोटेशन पद्धति के जरिए सरकार ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है, जिससे अब नगर निकायों में नेतृत्व की नई तस्वीर साफ हो गई है. सामान्य महिला (Open Woman): मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक, नाशिक, धुळे, नागपुर, मालेगांव, नवी मुंबई. सामान्य (Open): वसई-विरार, पिंपरी-चिंचवड, अमरावती, छ. संभाजीनगर, सांगली-मिरज-कुपवाड, सोलापूर. SC/SC महिला: ठाणे (SC), जालना और लातूर (SC महिला). ST: कल्याण-डोंबिवली. OBC/OBC महिला: चंद्रपूर (OBC), अहिल्यानगर, अकोला और जळगांव (OBC महिला). कांग्रेस ने उठाया सवाल इसी तरह कांग्रेस पार्टी ने भी परभणी नगर निगम के आरक्षण ड्रॉ पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस का कहना है कि कई जगहों पर लॉटरी की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिख रही है और कुछ शहरों को जानबूझकर बाहर रखा जा रहा है. दोनों पार्टियां राज्य सरकार पर आरोप लगा रही हैं कि वह आरक्षण व्यवस्था का दुरुपयोग कर रही है. बीएमसी चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट), भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के गठबंधन महायुती को बहुमत मिला है. बहुमत होने के कारण मेयर पद पर उनका ही दावा मजबूत माना जा रहा है. अब गठबंधन अपनी किसी महिला पार्षद को मेयर बनाकर पद संभाल सकता है. दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के नेता इस फैसले को राजनीतिक खेल बताकर विरोध जता रहे हैं.

जीतू पटवारी के खिलाफ वारंट जारी, पुलिस तलाश में जुटी, जानें पूरा मामला

ग्वालियर  मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के खिलाफ एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानती वारंट जारी कर दिया है। वारंट की राशि 500 रुपये है। पुलिस को पटवारी की तलाश है, क्योंकि वे कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। मामला लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़ा है। 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाना पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से साठगांठ करने का आरोप लगाया था। 16 जनवरी 2026 को कोर्ट ने पटवारी को प्रकरण में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था।पटवारी गैरहाजिर रहे, इसलिए कोर्ट ने अब जमानती वारंट जारी किया। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। अगली सुनवाई: 20 फरवरी 2026 को तय की गई है। यह वारंट जमानती है, यानी पटवारी 500 रुपये जमा करके या जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है। जीतू पटवारी के खिलाफ दोबारा वारंट  कोर्ट ने 16 जनवरी को इस मामले में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तलब किया था, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पेश नहीं हुए। इसके बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने 500 रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए एक बार फिर उन्हें तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को निर्धारित की गई है।   यह प्रकरण लोकसभा चुनाव के दौरान का है। चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ करने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद बसपा प्रत्याशी के निर्वाचन अभिकर्ता अशोक गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस प्रकरण में केवल जीतू पटवारी को ही आरोपी बनाया गया है। इससे पहले भी करीब आठ महीने पूर्व कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। कोर्ट में पेश होने पर जारी हुआ जमानती वारंट अब इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने पटवारी को गुजरी 16 जनवरी 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन, पटवारी कोर्ट में पैश नहीं हुए। ऐसे में अब एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। 20 फरवरी को अगली सुनवाई इस मामले में जीतू पटवारी की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होनी है। ये वारंट जमानती है, यानी जीतू पटवारी 500 रुपए जमानत राशि कोर्ट में जमा करके जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है।