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जीतू पटवारी के खिलाफ वारंट जारी, पुलिस तलाश में जुटी, जानें पूरा मामला

ग्वालियर  मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी के खिलाफ एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने जमानती वारंट जारी कर दिया है। वारंट की राशि 500 रुपये है। पुलिस को पटवारी की तलाश है, क्योंकि वे कोर्ट में पेश नहीं हो रहे। मामला लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़ा है। 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाना पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि चुनाव प्रचार के दौरान पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से साठगांठ करने का आरोप लगाया था। 16 जनवरी 2026 को कोर्ट ने पटवारी को प्रकरण में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था।पटवारी गैरहाजिर रहे, इसलिए कोर्ट ने अब जमानती वारंट जारी किया। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। अगली सुनवाई: 20 फरवरी 2026 को तय की गई है। यह वारंट जमानती है, यानी पटवारी 500 रुपये जमा करके या जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है। जीतू पटवारी के खिलाफ दोबारा वारंट  कोर्ट ने 16 जनवरी को इस मामले में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तलब किया था, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पेश नहीं हुए। इसके बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने 500 रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए एक बार फिर उन्हें तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को निर्धारित की गई है।   यह प्रकरण लोकसभा चुनाव के दौरान का है। चुनाव प्रचार के समय कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ करने का आरोप लगाया था। इस बयान के बाद बसपा प्रत्याशी के निर्वाचन अभिकर्ता अशोक गुप्ता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इस प्रकरण में केवल जीतू पटवारी को ही आरोपी बनाया गया है। इससे पहले भी करीब आठ महीने पूर्व कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। कोर्ट में पेश होने पर जारी हुआ जमानती वारंट अब इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने पटवारी को गुजरी 16 जनवरी 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया था। लेकिन, पटवारी कोर्ट में पैश नहीं हुए। ऐसे में अब एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। पुलिस को पटवारी नहीं मिल रहे हैं। 20 फरवरी को अगली सुनवाई इस मामले में जीतू पटवारी की अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होनी है। ये वारंट जमानती है, यानी जीतू पटवारी 500 रुपए जमानत राशि कोर्ट में जमा करके जमानत पर रिहा हो सकते हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट में पेश होना अनिवार्य है।

झारखंड में मुठभेड़ में 1 करोड़ के इनामी समेत 10 से 12 माओवादी ढेर!

पश्चिमी सिंहभूम/चाईबासा. झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले स्थित सारंडा के घने जंगलों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। गुरुवार सुबह से छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुंभडीह गांव के पास सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ जारी है। इसमें अब तक करीब 10 से 12 माओवादियों के ढेर होने की सूचना है। इसके साथ ही 1 करोड़ का इनामी माओवादी नेता अनल भी मारा गया है। अनल दस्ते के साथ आमना-सामना प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में 5 से 7 माओवादी मारे गए हैं। बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के कुख्यात अनल दस्ते के साथ हुई है। सुरक्षाबलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि इलाके में नक्सली बड़ी घटना की साजिश रच रहे हैं, जिसके बाद घेराबंदी शुरू की गई। गुरुवार सुबह से ही पूरे क्षेत्र में रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। कौन है मारा गया माओवादी अनल?     नाम: अनल उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ रमेश     पिता: टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी     निवासी: ग्राम झरहाबाले, थाना पीरटांड, जिला गिरिडीह अनल भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) था और लंबे समय से सुरक्षाबलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। सूत्रों के अनुसार, इस भीषण मुठभेड़ में अब तक 10 से 12 माओवादियों के मारे जाने की सूचना है। हालांकि, सुरक्षाबलों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। इलाके में अब भी सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र को घेर रखा है। बड़े इनामी नक्सली के मारे जाने की संभावना सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस मुठभेड़ में 1 करोड़ रुपये के इनामी एक शीर्ष माओवादी कमांडर को भी ढेर कर दिया गया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने अभी तक मारे गए नक्सलियों की संख्या और उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि सुरक्षाबलों का ऑपरेशन फिलहाल जारी है। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। मुठभेड़ के बाद सारंडा के पूरे जंगली क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों और बैकअप टीम को मौके पर रवाना किया गया है ताकि नक्सलियों के भागने के सभी रास्ते बंद किए जा सकें। खबर लिखे जाने तक सर्च ऑपरेशन और मुठभेड़ की स्थिति बनी हुई है।

भोजशाला की 700 साल पुरानी त्रासदी: 271 साल तक ज्ञान का केंद्र रही, जानें इतिहास

धार  क्या काशी की ज्ञानवापी के बाद अब मध्य प्रदेश के धार की भोजशाला में हिंदुओँ को पूजा का हक मिलेगा? दरअसल ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में मुस्लिम मस्जिद है. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू मंदिर होने की मान्यता है.ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला में हिंदू पक्ष पूजा अर्चना की इजाजत मांग रहा है. ज्ञानवापी के सर्वे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदुओं को ज्ञानवापी में पूजा की इजाजत दे दी थी. ज्ञानवापी की तरह ही भोजशाला के भी ASI सर्वे का आदेश कोर्ट ने दिया था. अब भोजशाला में भी हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि पूजा की इजाजत मिल जाएगी. 23 जनवरी को बसंत पंचमी के आयोजन को लेकर धार भोजशाला पर एक बार फिर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। दरअसल, इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू संगठनों ने दिन भर माता सरस्वती की पूजा- अर्चना की प्रशासन से इजाजत मांगी है।  इससे पहले 2003 से लेकर 2016 के बीच तीन बार ऐसा मौका आया जब बसंत पंचमी शुक्रवार को ही थी। तीनों ही बार विवाद की स्थिति बनी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वहीं हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पूरे दिन पूजा के अधिकार की मांग है। इस पर आज यानी 22 जनवरी को सुनवाई है। धार की भोजशाला का इतिहास करीब 990 साल पुराना है। 1034 ई. में राजा भोज ने इसका निर्माण कराया था और यहां मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित की थी। 200 सालों से ज्यादा समय तक भोजशाला का वैभव कायम रहा, लेकिन 1305 ई में मोहम्मद खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण कर इसे नेस्तनाबूत करने की कोशिश की। इसके बाद कई बार मुस्लिम आक्रांताओं ने भोजशाला पर हमले किए। कई सालों तक मां सरस्वती की प्रतिमा भोजशाला में दबी रही। इसके बाद अंग्रेज आए। वे यहां से खुदाई कर वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन के म्यूजियम ले गए। खिलजी के आक्रमण से लेकर अब तक भोजशाला को उसकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष जारी है। खिलजी ने कईं बार किया आक्रमण  भोजशाला का निर्माण परमार वंश के महान राजा राजा भोज ने 1034 ईस्वी के आसपास किया था. वह एक महान योद्धा के साथ ही कला साहित्य और विज्ञान के संरक्षक भी थे. उन्होंने ही यहां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की मूर्ति स्थापित की थी. उस समय यह एक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका था. जहां दुनिया भर से लोग व्याकरण और खगोल विज्ञान पढ़ने आते है. ‌ वाग्देवी की यही प्रतिमा लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी हुई है. कहा जाता है कि 1875 के आसपास खुदाई के दौरान यहां से सरस्वती माता की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा मिली थी. जिसे एक अंग्रेज अफसर मेजर किनकैड अपने साथ लंदन ले गया. लंबे समय इसे वहां से वापस लाकर भोजशाला में ससम्मान स्थापित करने की मांग की जा रही है. भोजशाला विवाद के दौरान भी यही मूर्ति इसका सबसे बड़ा प्रमाण बनती है. दरअसल खिलजी के धार पर आक्रमण कर भोजशाला को काफी नुकसान पहुंचाया था. इसके बाद मुस्लिम शासकों ने इसके ढांचे में भी कई बदलाव किए. 15 सी सदी के आसपास मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने यहां कुछ उसको मस्जिद के रूप में भी इस्तेमाल किया था. उसी दौरान यहां कुछ दरगाह और मस्जिद भी बनाई गई. मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद मानता है. बसंत पंचमी पर यहां भव्य आयोजन होते रहे हैं जबकि कईं बार विवाद की स्थिति भी बन चुकी है. धार में पहले कई बार धार्मिक तनाव रह चुका है. लेकिन धार्मिक गुरु और प्रशासन की सहमति से अब सब कुछ शांत वातावरण में होता है. भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों होते है. मंगलवार को हिंदू पूजा करते है जबकि शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ते है. बाकी दिनों के लिए यह स्थल पर्यटकों के लिए खुला रहता है. यहां बड़ी संख्या में पुरानी मूर्तियां और कलाकृति देखने को मिलती है. ‌ भोजशाला की बनावट देखते ही आपको उस समय की हिंदू संस्कृति और कलाकृति की झलक मिलती है. ‌यहां के खंभों पर संस्कृत में कई शिलालेख खुदे हुए है. जिनमें व्याकरण और काव्य के नियम लिखे गए है. दीवारों पर परमार काली मूर्तियां, श्लोक और संरचनाएं दिख जाती है. भोजशाला काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है जानकार मानते है कि इसकी संरचना किसी मस्जिद जैसी नहीं बल्कि एक पारंपरिक भारतीय पाठशाला या मंदिर जैसी है. एक बार फिर वसंत पंचमी से पहले भोजशाला का मुद्दा गरमा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण 2024 में ही यहां वैज्ञानिक सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट बनाई है. इस सर्वे का मकसद यह पता लगाना था कि मौजूदा ढांचे के नीचे क्या कोई मंदिर के अवशेष मौजूद है. फिलहाल इस‌ सर्वे की रिपोर्ट आना बाकि है. अगर आप भी भोजशाला जाना चाहते है तो मंगलवार और शुक्रवार छोड़कर कभी भी जाकर इसके इतिहास को और करीब से देख सकते हैं. अब जानिए कोर्ट में क्या है भोजशाला के मामले का स्टेटस भोजशाला मंदिर या मस्जिद, साइंटिफिक सर्वे पूरा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने 1 मई 2022 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि भोजशाला का पूर्ण आधिपत्य हिंदुओं को सौंपा जाए। ये मंदिर है या मस्जिद इसका कैरेक्टर तय करने के लिए एएसआई से साइंटिफिक सर्वे कराया जाए। 11 मार्च 2024 को इंदौर हाईकोर्ट ने एएसआई को भोजशाला का साइंटिफिक सर्वे कर 6 हफ्ते में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। एएसआई ने और समय मांगा जिसपर 2 जुलाई 2024 तक का समय दिया गया। एएसआई ने फिर समय मांगा जिसपर कोर्ट ने 15 जुलाई तक की तारीख दी। इस तारीख को एएसआई ने साइंटिफिक रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी। एएसआई ने ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार और कार्बन डेटिंग मेथड की मदद से अपना सर्वे शुरू किया। मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचा दूसरी तरफ हाईकोर्ट के 11 मार्च के 2024 के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2024 को विशेष अनुमति याचिका लगाई। इसमें पूरा पक्ष सुनने की मांग की गई। 1 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर दिया। जिसमें साइंटिफिक सर्वे पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सर्वे रिजल्ट के आधार पर बिना सुप्रीम … Read 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ट्रंप ने कहा- मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता होगा शानदार

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. उन्होंने पीएम मोदी को अपना शानदार दोस्त बताते हुए भारत और अमेरिका के बीच एक अच्छी ट्रेड डील की उम्मीद जताई है. स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान हमारी सहयोगी न्यूज पोर्टल मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी उनके शानदार दोस्त हैं. बहुत जल्द भारत के साथ अमेरिका की अच्छी डील होने जा रही है. ट्रंप ने कहा- ‘हम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करते हैं, मोदी शानदार इंसान और मेरे अच्छे दोस्त हैं’. उन्होंने कहा वह कि ‘भारत के साथ जल्द अच्छी डील करने जा रहे हैं’. किन मुद्दों पर अटकी है बातचीत? वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 56वें वार्षिक समिट के मौके पर ट्रंप ने मनी कंट्रोल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बेहद आशावादी बातें कही है. उनका यह बयान उस वक्त आया है जब भारत और अमेरिका के वार्ताकार इस डील पर अटके हुए हैं. दोनों देशों के वार्ताकार कई मसलों पर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. इसमें टैरिफ की दरों से लेकर बाजार तक पहुंच के मुद्दे शामिल हैं. इनके बीच ऊर्जा और कृषि से जुड़े मसलों पर असहमति है. अब तक कितने दौर की हुई बातचीत? भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की संभावना को लेकर पूछे गए सीधे सवाल पर उन्होंने सकारात्मक बातें कहीं. उन्होंने कहा कि हम एक अच्छी डील करने जा रहे हैं. भारत और अमेरिका ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पारस्परिक टैरिफ दरों को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था बनाने को लेकर अब तक छह दौर की बातचीत की है. दोनों पक्ष लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. इस संभावित ट्रेड डील पर बातचीत को बीते साल फरवरी में गति मिली थी. उस वक्त पीएम मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी. फिर दोनों शासनाध्यक्षों ने ‘मिशन 500’ की घोषणा की थी. इस मिशन का लक्ष्य दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर दोगुना करने का था. कब तक हो सकती है डील? इस रोडमैप के तहत ही भारत और अमेरिका ने तय किया था कि 2025 के बीतते-बीतते एक मल्टी-सेक्टर पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रेड डील को अमलीजामा पहना देंगे. लेकिन, यह समय बीत गया लेकिन डील नहीं हो पाई. हालांकि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि मार्च 2026 तक दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है. भारत के लिए कितना जरूरी है यह डील? भारत के लिए यह ट्रेड डील बहुत जरूरी हो गया है. क्योंकि भारत के 48.2 बिलियन डॉलर के निर्यात को भारी अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. भारत की कोशिश है कि इस विषम परिस्थिति में भी अमेरिका को भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी बनी रहे. हालांकि, उच्च टैरिफ दरों का असर अन्य सेक्टर पर पड़ा है. पीएम मोदी ने बीते साल फरवरी में अमेरिका का दौरा किया था. उसके बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड वार्ता शुरू हुई थी. दोनों देशों के बीच कितने का कारोबार? टैरिफ की चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बीते साल अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत से अमेरिका को निर्यात 9.8 फीसदी बढ़कर 65.9 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लिए बतौर एक ट्रेड पार्टनर अमेरिका की क्या भूमिका है. भारत और अमेरिका अब भी द्विपक्षीय ट्रेड समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं. अभी क्या है भारत का रुख? भारत के विदेश मंत्रालय ने नौ जनवरी को कहा था कि दोनों देशों के बीच करीब एक साल साल से बातचीत चल रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा था- भारत और अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों देशों के बीच बीते साल 13 फरवरी से बातचीत चल रही है. उसके बाद ही दोनों देशों ने एक संतुलित और दोनों को फायदा पहुंचाने वाले एक ट्रेड डील को लेकर कई दौर की वार्ता कर चुके हैं.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज सिरोही से किसान सम्मान निधि करेंगे ट्रांसफर

जयपुर. राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रदेश के 65 लाख किसानों को 653 करोड़ रुपए की बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी। आज यानी 22 जनवरी को इस योजना की 5वीं किस्त सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। योजना के तहत करीब 65 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गुरुवार को सिरोही दौरे पर रहेंगे। कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे जयपुर से प्लेन से रवाना होकर 12.50 बजे सिरोही हवाई पट्टी पहुंचेंगे। 12.55 बजे सिरोही हवाई पट्टी से कार से शहर के अरविंद पैवेलियन स्टेडियम पहुंचेंगे। यहां कार्यक्रम स्थल पर सहकार उत्थान शिविर 2026 में भाग लेंगे और किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों को योजना का लाभ हस्तांतरण करेंगे। मुख्यमंत्री यहां सभा को भी संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद सीएम दोपहर 2.25 बजे सिरोही हवाई पट्टी से जयपुर के लिए रवाना होंगे। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में हुआ वितरण इस अवसर पर सिरोही के अरविंद पैवेलियन स्टेडियम में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर के किसानों को वित्तीय सहायता प्रदानहोगी। वहीं, जयपुर जिले में जिला स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन दोपहर 11.30 बजे हरीशचन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (एचसीएम रीपा) सभागार में किया। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को योजना से जोड़ना और उन्हें अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है। ये है योजना की खास बातें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM–Kisan) के अंतर्गत केंद्र सरकार देशभर के किसानों को सालाना 6,000 रुपए की आर्थिक सहायता देती है। इसी तर्ज पर राजस्थान सरकार ने किसानों के लिए मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की है। इस योजना के तहत पीएम किसान योजना के लाभार्थियों को सालाना 3,000 रुपए अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका मतलब है कि एक वित्त वर्ष में राज्य के किसानों को कुल 9,000 रुपए की मदद मिलती है।

मध्यप्रदेश में 25 जनवरी से तेज सर्दी का असर: मावठा और कोहरे के बाद बढ़ेगी ठिठुरन

भोपाल  मध्यप्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। मावठा गिरने और सुबह-शाम कोहरा छाने के बाद प्रदेश में सर्दी और तीखी होगी। मौसम विभाग भोपाल के मुताबिक, गुरुवार को ग्वालियर-दतिया सहित 5 जिलों में मध्यम कोहरा दर्ज किया गया, जबकि शुक्रवार से उत्तरी मध्यप्रदेश में बारिश के आसार बन रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि 25 जनवरी से न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक गिर सकता है।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिम-उत्तर भारत और उत्तरप्रदेश के ऊपर दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन सक्रिय हैं। इसके साथ ही एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी असर दिखा रहा है। ये सभी सिस्टम आगे बढ़ रहे हैं, जिसका असर पहले यूपी-बिहार में नजर आया और अब 24 जनवरी से मध्यप्रदेश में भी दिखेगा। इस दौरान बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि 23 जनवरी को ही ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश के संकेत हैं। सिस्टम गुजरते ही बढ़ेगी ठिठुरन मौसम विभाग का कहना है कि जैसे ही ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे, उत्तर से ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ेगी। इसका सीधा असर तापमान पर पड़ेगा और रात का पारा 2 से 3 डिग्री तक नीचे आ सकता है। सिस्टम आगे बढ़ेंगे तो पारे में गिरावट होगी मौसम विभाग के अनुसार, जब ये सिस्टम आगे बढ़ेंगे तो न्यूनतम तापमान में गिरावट होगी। पारा 2 से 3 डिग्री तक लुढ़क जाएगा। उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर फिलहाल उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर है। गुरुवार सुबह ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मध्यम कोहरा रहा। भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में हल्के कोहरे का असर देखने को मिला। मंदसौर सबसे ठंडा, राजगढ़-छतरपुर में भी सर्दी का असर प्रदेश में ठंड का असर भी है। मंगलवार-बुधवार की रात में मंदसौर सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ में 6.2 डिग्री, नौगांव में 7 डिग्री, शाजापुर में 7.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 7.6 डिग्री, दतिया में 7.9 डिग्री, खजुराहो में 8 डिग्री, रीवा में 8.2 डिग्री, शिवपुरी में 9 डिग्री और पचमढ़ी में पारा 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में सबसे कम 9 डिग्री रहा। भोपाल में 10.8 डिग्री, इंदौर में 12.2 डिग्री, उज्जैन में 12 डिग्री और जबलपुर में तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तरी MP में कोहरा फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से कोहरे की गिरफ्त में हैं। गुरुवार सुबह ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मध्यम कोहरा रहा, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन समेत कई जिलों में हल्का कोहरा छाया रहा। मंदसौर सबसे ठंडा, कई जिलों में सर्दी  प्रदेश में ठंड का असर साफ नजर आ रहा है। मंगलवार–बुधवार की रात मंदसौर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.1 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ 6.2, नौगांव 7, शाजापुर 7.1, कटनी के करौंदी 7.6, दतिया 7.9, खजुराहो 8, रीवा 8.2, शिवपुरी 9 और पचमढ़ी में 9.2 डिग्री तापमान रहा।पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 9 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.8, इंदौर में 12.2, उज्जैन में 12 और जबलपुर में 12.5 डिग्री सेल्सियस रहा। क्या है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के मुताबिक, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाला हवा–बादलों का सिस्टम होता है। इसके सक्रिय होने पर पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश होती है। सिस्टम गुजरने के बाद उत्तर से ठंडी हवाएं चलती हैं, जिससे दिन-रात सर्दी का असर बढ़ जाता है।  क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। ठंड के लिए इसलिए खास है जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त अहम रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं, इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे।

“दावोस में ग्लोबल एक्सपर्ट्स की राय: मजबूत विकास दर के साथ क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनेगा?”

 नई दिल्ली दुनिया के बहुत कम देश इस साल दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उतनी मजबूती और आत्मविश्वास के साथ पहुंचे हैं, जितना भारत. मजबूत विकास दर, गहरे होते सुधार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच भारत आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब कड़े फैसलों और तेज क्रियान्वयन (एक्जीक्यूशन) की जरूरत है. इसी विषय पर इंडिया टुडे ग्रुप के सहयोग से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसका संचालन इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस-चेयरपर्सन और एग्जीक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने किया. सत्र में दिग्गज अर्थशास्त्री, सीईओ और केंद्रीय मंत्री ने इस बात का विश्लेषण किया कि भारत को आगे क्या करने की आवश्यकता है. भारत का ‘मोमेंटम मोमेंट’ हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर और प्रसिद्ध भारीतय-अमेरिकी अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने अर्थव्यवस्था को नया रूप देने वाली प्रगति को स्वीकार करते हुए चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने सबसे पहले भारत की अब तक की उपलब्धियों को रेखांकित किया.  उन्होंने कहा, “डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण बेहद प्रभावशाली रहा है. जीएसटी में जो किया गया, खासकर हालिया सरलीकरण, वह अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मददगार है.” जब कली पुरी ने उनसे पूछा कि इस मोमेंटम को बनाए रखने के लिए अब भारत को क्या करना चाहिए? तो गोपीनाथ का जवाब स्पष्ट था. उन्होंने कहा, "इस मोमेंटम को बनाए रखना, प्रति व्यक्ति आय बढ़ाना और 2047 के 'विकसित भारत' के लक्ष्य तक पहुंचना ही असली चुनौती है. आज भारत की बुनियाद मजबूत है. न सिर्फ विकास दर के लिहाज से, बल्कि महंगाई भी लो सिंगल डिजिट में है. यह भारत के लिए अच्छी स्थिति है.”   हालांकि, उन्होंने कुछ पुराने अवरोधों की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा, "भारत में जमीन अधिग्रहण करना, साफ-सुथरी जमीन के मालिकाना हक होना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जो विकास और मैन्युफैक्चरिंग में बाधा डालती है." उन्होंने न्यायिक सुधारों को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. श्रम बाजार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा. उन्होंने कहा कि भारत के विकास में केवल लगभग 30% हिस्सा ही श्रम से आया है. उन्होंने नए श्रम कानूनों का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि यदि भारत वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ना चाहता है, तो उसे बहुत बड़ा सोचना होगा. उन्होंने कौशल विकास (Skilling) को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा, “नौकरियों और श्रमिकों के कौशल के बीच बड़ा अंतर है. स्किलिंग को बड़े पैमाने पर बढ़ाना बेहद जरूरी है.” प्रदूषण: विकास के रास्ते में बड़ी बाधा कली पुरी के एक तीखे सवाल पर कि भूमि और श्रम के अलावा भारत को क्या रोक रहा है, गोपीनाथ ने प्रदूषण के मुद्दे को उठाया. उन्होंने साफ-साफ कहा कि प्रदूषण भारत में एक चुनौती है. यह टैरिफ के किसी भी असर से कहीं ज़्यादा गंभीर है. उन्होंने विश्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "भारत में हर साल प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोग जान गंवाते हैं. यह न केवल आर्थिक बोझ है, बल्कि वैश्विक निवेशकों को भी हतोत्साहित करता है."  उन्होंने प्रदूषण से युद्ध स्तर पर निपटने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आपको वहां रहना है और माहौल ऐसा नहीं है जो आपको अपनी सेहत के लिए अच्छा लगे, तो यह आपको पीछे खींचता है."  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं पर बोलते हुए गोपीनाथ ने कहा, “दुनिया पिछले 80 सालों के वैश्विक आर्थिक ढांचे से स्थायी रूप से आगे निकल चुकी है. अब हम पीछे नहीं लौटने वाले.” अभी भी बाकी हैं बड़े सुधार कली पुरी ने भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल से एग्जीक्यूशन से जुड़ा था एक अहम सवाल पूछा कि भारत की ग्रोथ को सच में तेजी देने के लिए हमें और क्या करने की जरूरत है?" मित्तल ने आशावादी लहजे में कहा, “भारत पहले से ही बहुत अच्छी स्थिति में है. हम तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेंगे ही. अगर आध्यात्मिक भाषा में कहूं तो यह किस्मत में लिखा है.” हालांकि, उन्होंने बड़े पैमाने पर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि हमें 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचना होगा.  उद्योग जगत की बात करते हुए मित्तल ने कहा कि बुनियादी शर्तें पूरी हैं. उन्होंने कहा, “मेरी जमात यानी बिजनेस कम्युनिटी को एक सक्षम माहौल चाहिए, एक प्रतिबद्ध सरकार चाहिए और नीति में स्थिरता चाहिए. ये तीनों चीजें आज उपलब्ध हैं. उनकी सबसे बड़ी चिंता वैश्विक हालात को लेकर है. जो चीज हमें पटरी से उतार सकती है, वह है दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा. इस माहौल में ट्रेड डील्स बेहद अहम होंगी.” मित्तल ने पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक लाइसेंस के लिए सैकड़ों विभागों के चक्कर काटने का दौर अब खत्म हो चुका है. उन्होंने कहा, “मैंने वो दौर देखा है जब DGTD, CCIE जैसे विभागों के बाहर खड़े होकर ढेर सारी किताबें, मैनुअल और हैंडबुक लेकर एक-एक लाइसेंस के लिए चक्कर लगाने पड़ते थे. सैकड़ों विभागों से मंजूरी लेनी होती थी. अब वो सब खत्म हो चुका है.” उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह भारतीय कंपनियों पर और अधिक भरोसा दिखाए. उन्होंने कहा, "हम पर अधिक विश्वास करें, हम नियमों का पालन करेंगे और सही काम करेंगे." भारत की सबसे बड़ी ताकत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, “भारत उपभोक्ताओं का महाद्वीप है. हम दुनिया के हर देश के लिए एक बड़ा बाजार हैं. और अब हम सिर्फ उपभोग ही नहीं कर रहे, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन भी कर रहे हैं.” एक वैश्विक CEO की नजर से भारत कली पुरी ने IKEA के वैश्विक प्रमुख जुवेन्सियो मेज़्टु हेरेरा से पूछा कि एक ग्लोबल सीईओ के नजरिए से आज भारत कैसा दिखता है. इस पर IKEA के CEO हेरेरा ने बेहद आत्मीयता और साफगोई के साथ जवाब दिया. उन्होंने कहा, “भारत को लेकर मैं भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ हूं. मैंने यहां छह साल बिताए हैं.” भारत की ताकतों को गिनाते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार है. यहां की आबादी युवा है. यह एक लोकतंत्र है. भारत के पास यह क्षमता है कि वह कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था से सीधे अत्याधुनिक AI युग में, किसी भी अन्य देश … Read more

अर्थतंत्र को सशक्त और सुप्रबंधित करने में डॉ. मोहन यादव का योगदान

अर्थ तंत्र को सुप्रबंधित और सशक्त करते डॉ मोहन यादव  विश्व के महानतम अर्थशास्त्री कौटिल्य के अनुसार प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है।इसलिए राजा को – तस्मान्नित्योत्थितो राजा,कुर्यादर्थानुशासनम् । अर्थस्य मूलमुत्थानमनर्थस्य विपर्ययः ।। अर्थात राजा सदैव उद्यमशील रहकर,अर्थमूल में वृद्धि करे। इसके विपरीत कार्य अनर्थ या हानि के कारण बनते हैं ।  इस मंत्र को आत्मसात करते हुए भाजपा की डॉ मोहन यादव सरकार प्रगति पथ पर अग्रसर है।अर्थ तंत्र को उन्नत कर रही है।मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव के कुशल वित्तीय सुप्रबंधन द्वारा राज्य का अर्थ तंत्र उन्नत हो रहा है, सशक्त हो रहा है।वित्त विभाग द्वारा श्रेष्ठ वित्तीय प्रबंधन मानकों को अपनाकर शून्य आधारित बजट प्रक्रिया के अनुसार बजट तैयार किया जा रहा है। तीन वर्षों के लिये रोलिंग बजट की प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें बजट प्रक्रिया से संबंधित नवाचार अपनाएं जा रहे हैं। वित्तीय संस्थाओं द्वारा जारी प्रतिवेदनों में मध्यप्रदेश के वित्तीय प्रबंधन,बजटीय विश्वसनीयता तथा गुणवत्ता को सराहा गया है।दूरदर्शी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 5 वर्षों में बजट के आकार को दोगुना कर वर्ष 2028-29 तक 7 लाख करोड़ रुपये करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।पूंजीगत निवेश को बढ़ाना,सड़क विस्तार एवं संधारण, सिंचाई क्षेत्रफ़ल जल संचय क्षमता विस्तारण,बिजली,सौर,पवन ऊर्जा उत्पादन,वितरण सुविधा का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा का विकास और उद्योग,रोजगार के अवसर वृद्धि हेतु,निवेश आकर्षित करने आदि के लक्ष्यों को पूर्ण कर,विकसित भारत निर्माण के परम लक्ष्य में योगदान देना है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा प्रदेश में पूंजीगत व्यय में निरंतर, सतत वृद्धि की जा रही है। पूंजीगत व्यय से राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर, अवसंरचना में गुणात्मक वृद्धि हुई है।वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पूंजीगत व्यय,केपिटल एक्सपेंडिचर लगभग 85 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।प्रभावी पूंजीगत व्यय लगभग 90 हजार करोड़ रुपये है।प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में नियमित वृद्धि बनी हुई है।वर्ष 2024-25 में प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 15 लाख 03 हजार 395 करोड़ रूपये रहा एवं प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 52 हजार 615 रूपये रही है।वर्तमान वित्त वर्ष में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 17 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आर्थिक संकल्पों को उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा पूर्ण मनोयोग से सिद्ध कर रहे हैं।वर्तमान में वित्तीय मानकों के आधार पर प्रदेश की स्थिति अत्यधिक सुदृढ़ है।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देशन में संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा अनेक नवाचार लागू किए गए हैं।मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की आर्थिक शुचिता और नवाचार के कारण लगभग 50 वर्षों से प्रचलित व्यवस्था को समाप्त किया गया है जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में मुख्यमंत्री एवं समस्त मंत्री स्वयं ही आयकर का भुगतान कर रहे हैं।पूर्व में मुख्यमंत्री,मंत्रीगणों, मुख्य सचिव का वार्षिक आयकर,शासकीय कोष द्वारा वहन किया जाता था। वाणिज्यिक कर अर्थव्यवस्था को सुप्रबंधित, सशक्त कर रहा है। वाणिज्य कर द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में 55 हजार 634 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक कुल 34 हजार 829 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में माह नवम्बर तक डाटा एनालिटिक्स आधारित चिन्हित प्रकरणों में प्रवर्तन कार्यवाहियों से रुपये 967 करोड़ एवं ऑडिट की कार्यवाही से रुपये 404 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है।  नवाचारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की दूरदर्शी पहल द्वारा मध्य प्रदेश, देश का प्रथम राज्य बन गया है जहाँ पंजीयन विभाग में 75 प्रकार के दस्तावेज पट्टा, पॉवर ऑफ अटर्नी, बंधक इत्यादि का घर बैठे वीडियो केवायसी के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है।पंजीयन विभाग के सॉफ्टवेयर संपदा 2.0 को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 में स्वर्ण पदक मिला है। प्रदेश के 8 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिये यह गौरव का विषय है।पंजीयन विभाग को वर्ष 2023-24 में 10 हजार 325 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2024-25 में 11 हजार 355 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।वर्ष 2025-26 में 13 हजार 920 करोड रूपये का लक्ष्य रखा गया है।नवंबर 2025 तक 7 हजार 580 करोड रूपये का राजस्व प्राप्त हो गया है।प्रतिवर्ष उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विभिन्न विभागों में अनेक आर्थिक सुधारों एवं नवाचारों को अपनाकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर रहे हैं।मध्य प्रदेश के अर्थ तंत्र को, अर्थमूल को बढ़ा रहे हैं। इति श्री।                                                                                                                           लेखक- सत्येंद्र कुमार जैन 

राममंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दो साल: जानिए क्या-क्या हुआ निर्माण, धर्मध्वजा से लेकर राम दरबार तक

अयोध्या  अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा को दो साल पूरे हो चुके हैं. इन दो वर्षों में मंदिर में लगातार निर्माण हो रहे हैं और आस्था के इस नए केंद्र का नया ही स्वरूप बदलकर सामने आ रहा है. रोज हजारों श्रद्धालु देश-विदेश से रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं. मंदिर में दर्शन की व्यवस्था से लेकर टाइमिंग आदि में भी बदलाव हुए हैं जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सहूलियत को देखते हुए अपनाए जा रहे हैं.  श्रीराम मंदिर का मुख्य ढांचा अब लगभग पूर्ण हो चुका है. गर्भगृह में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की मूर्ति स्थापित है और नियमित पूजा-अर्चना हो रही है. मंदिर की भूतल संरचना पूरी तरह तैयार है, जबकि पहली और दूसरी मंजिल पर निर्माण और कलात्मक कार्य अंतिम चरण में हैं. मंदिर का शिखर, मंडप और स्तंभ पारंपरिक नागर शैली में निर्मित किए गए हैं, जिन पर बारीक नक्काशी की गई है. पत्थरों पर रामायण से जुड़े प्रसंग उकेरे गए हैं, जो मंदिर को सांस्कृतिक पहचान देते हैं. पिछले दो साल में मंदिर परिसर का बड़ा हिस्सा विकसित किया गया है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़ा परिक्रमा पथ बनाया गया है, जिससे दर्शन के दौरान भीड़ नियंत्रित रहती है. परिसर में रास्ते, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है. सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीक से मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर दर्शन कर सकें. राम मंदिर में फहराई गई धर्म ध्वजा बीते साल नवंबर 2025 में अयोध्या में राम मंदिर पर धर्म ध्वजारोहण हुआ. राम मंदिर पर फहराने वाला ध्वज केसरिया रंग का है. ध्वज की लंबाई 22 फीट चौड़ाई 11 फीट और ध्वजदंड 42 फीट का है. इस ध्वज को 161 फीट के शिखर पर फहराया गया. ध्वज पर 3 चिन्ह चिह्नित किए गए हैं- सूर्य, ऊं, कोविदार वृक्ष. माना जा रहा है कि यह ध्वज सूर्य भगवान का प्रतीक है. सनातन परंपरा में केसरिया त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक माना गया है. रघुवंश के शासनकाल में भी यह रंग विशेष स्थान रखता था. भगवा वह रंग है जो ज्ञान, पराक्रम, समर्पण और सत्य की विजय का प्रतिनिधित्व करता है. ध्वज पर उकेरे गए ये पवित्र चिन्ह ध्वज पर कोविदार वृक्ष और 'ऊं' की छवि अंकित की गई है. कोविदार वृक्ष का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और इसे पारिजात व मंदार के दिव्य संयोग से बना वृक्ष माना गया है. मुख्य राम मंदिर: गर्भगृह और रंग मंडप सहित इसका निर्माण पूरा हो गया है. परकोटा: मुख्य मंदिर के चारों ओर लगभग 800 मीटर लंबा परकोटा तैयार है, जिसमें कई छोटे मंदिर शामिल हैं. सप्त मंडप: महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहल्या के मंदिर बनकर तैयार हैं. छोटे मंदिर: भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्यदेव, मां दुर्गा और मां अन्नपूर्णा के मंदिर भी पूर्ण हो चुके हैं. प्रतिमाएं और ध्वज: जटायु, गिलहरी और संत तुलसीदास की प्रतिमाएं स्थापित हैं, और सभी मंदिरों पर कलश व धर्म ध्वज लगा दिए गए हैं. लक्ष्मण जी का मंदिरः परकोटे के बाहर शेषावतार लक्ष्मणजी का मंदिर भी बनकर तैयार है और सभी मंदिरों के शिखरों पर कलश और धर्म ध्वज भी स्थापित किए जा चुके हैं. मंदिर परिसर में राम कथा को समझाने के लिए संग्रहालय और प्रदर्शनी स्थल विकसित किए जा रहे हैं. यहां श्रद्धालुओं को भगवान राम के जीवन, वनवास, राम-रावण युद्ध और रामराज्य की अवधारणा को चित्रों, शिल्प और आधुनिक माध्यमों से समझाया जाएगा. यह व्यवस्था खासतौर पर युवाओं और बच्चों के लिए बनाई जा रही है ताकि वे रामायण को सरल भाषा और दृश्य रूप में समझ सकें. जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण से संबंधित काम 15 जनवरी 2021 को शुरू हुआ था. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच अगस्त 2020 को भूमि पूजन किया था. भूमि पूजन के बाद जनवरी 2021 से मंदिर निर्माण के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नींव की खोदाई शुरू कराई थी. कुल मिलाकर, दो साल बाद श्रीराम मंदिर अपनी भव्यता और गरिमा के साथ खड़ा है. कुछ कार्य अभी शेष हैं, लेकिन मंदिर अब अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना का मजबूत केंद्र बन चुका है.

“भारत ने न्यूजीलैंड को 48 रनों से पटखनी दी, अभिषेक और रिंकू का धमाल”

नागपुर     भारत-न्यूजीलैंड के बीच नागपुर में बुधवार को खेले गए पहले टी20 मैच में टीम इंडिया ने 48 रनों से जीत हासिल की. इस जीत के बाद भारतीय टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गई है.  मुकाबले में टॉस जीतकर न्यूजीलैंड की टीम ने पहले गेंदबाजी चुनी थी. भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए अभिषेक शर्मा की तूफानी 84 और रिंकू सिंह की नाबाद 44 रनों की पारी के दम पर 238 रन बनाए थे. इसके जवाब में उतरी मेहमान टीम 7 विकेट खोकर 190 रन ही बना सकी.   ऐसी रही न्यूजीलैंड की पारी 239 रनों के जवाब में उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ओवर की दूसरी ही गेंद पर अर्शदीप ने कॉन्वे का विकेट झटक लिया. वो खाता भी नहीं खोल सके. इसके बाद दूसरा ओवर लेकर हार्दिक आए. उन्होंने रचिन रवींद्र को आउट कर दिया. रवींद्र के बल्ले से केवल एक रन आए. यानी 1 रन के स्कोर पर कीवी टीम को 2 झटके लगे. लेकिन इसके बाद ग्लेन फिलिप्स और रॉबिन्सन ने पारी को संभालने की कोशिश की. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई. लेकिन 7वें ओवर में वरुण ने रॉबिन्सन का विकेट झटका. उस वक्त मेहमान टीम का स्कोर 52-3 था. इसके बाद ग्लेन फिलिप्स ने तूफानी पारी खेली. उन्होंने 40 गेंद में 78 रन बनाए. लेकिन 14वें ओवर में उनका विकेट गिरा. इसके बाद चैपमेन ने मोर्चा संभाला. लेकिन 15वें ओवर में वरुण ने उन्हें अपनी फिरकी में फंसा लिया. चैपमेन के बल्ले से 39 रन आए. जब चैपमेन का विकेट गिरा तो न्यूजीलैंड को जीत के लिए 31 गेंद में 96 रन चाहिए थे. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने शिकंजा कस लिया और 190 के स्कोर पर ही न्यूजीलैंड को रोक दिया. सीरीज का दूसरा मैच अब 23 जनवरी को रायपुर में खेला जाएगा. अभिषेक शर्मा ने कीवी गेंदबाजों को कूट डाला अभिषेक शर्मा टी20 क्रिकेट में लगातार अपनी धाक मजबूत करते जा रहे हैं. दुनिया के नंबर-1 रैंक वाले टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज़ ने बुधवार (21 जनवरी) को नागपुर में खेले गए पहले टी20 मैच में न्यूजीलैंड की गेंदबाज़ी की धज्जियां उड़ाते हुए 35 गेंदों पर शानदार 84 रन की पारी खेली. 8 छक्के और 5 चौके लगाए पहले बल्लेबाज़ी के लिए उतरी भारतीय टीम को एक बार फिर शुरुआती बढ़त अभिषेक के निडर स्ट्रोकप्ले से मिली. उन्होंने अपनी 84 रनों की पारी में 8 छक्के और 5 चौके लगाए. महज 22 गेंदों में उन्होंने फिफ्टी जमाई. भले ही वह शतक से 16 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक वह न्यूजीलैंड को भारी नुकसान पहुंचा चुके थे.  5000 रन भी पूरे इस पारी के साथ अभिषेक शर्मा ने टी20 क्रिकेट में 5000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले इस प्रारूप के इतिहास में 131वें खिलाड़ी बन गए. हालांकि, जो बात उन्हें सबसे अलग बनाती है, वह है इन रनों की रफ्तार. 5000 टी20 रन बनाने वाले सभी बल्लेबाज़ों में अभिषेक का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा है. उन्होंने शानदार 172.54 के स्ट्राइक रेट से यह मुकाम हासिल किया. अभिषेक ने यह उपलब्धि 165 पारियों में हासिल की और वह 5000 टी20 रन पूरे करने वाले चौथे सबसे तेज़ भारतीय बल्लेबाज़ बन गए. भारतीय बल्लेबाज़ों में 5000 टी20 रन तक पहुंचने वाले सबसे तेज़ खिलाड़ी * 143 पारियां – केएल राहुल * 145 पारियां – ऋतुराज गायकवाड़ * 154 पारियां – शुभमन गिल * 165 पारियां – अभिषेक शर्मा * 167 पारियां – विराट कोहली पावरप्ले में उनका दबदबा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है. उनके कुल टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्कों में से 60 प्रतिशत से अधिक पहले छह ओवरों में आए हैं. यह एक हैरान करने वाला आंकड़ा है. अभिषेक अब तक पावरप्ले में 49 छक्के जड़ चुके हैं, जो उनसे पीछे पाकिस्तान के साहिबज़ादा फरहान (28 छक्के) से कहीं ज्यादा हैं. फिफ्टी जड़कर भी बनाया रिकॉर्ड अपने सातवें टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक के दौरान अभिषेक ने एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने महज 22 गेंदों में फिफ्टी पूरी करते हुए 25 गेंदों से कम में अपना आठवां टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक जमाया, जो इस प्रारूप में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा सबसे अधिक है. इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के फिल साल्ट, वेस्टइंडीज़ के एविन लुईस और अपने कप्तान सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम सात-सात ऐसे अर्धशतक दर्ज हैं.   ऐसी रही भारत की पारी  पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही. दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन 10 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद लंबे समय के बाद टी20 में वापसी कर रहे ईशान किशन भी सस्ते में निपट गए. उनके बल्ले से केवल 8 रन आए. लेकिन इसके बाद अभ‍िषेक शर्मा ने तूफानी पारी खेली और महज 22 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव भी लय में दिखे. 10 ओवर में भारत का स्कोर 117-2 था. लेकिन 11वें ओवर में भारत को तीसरा झटका लगा जब कप्तान सूर्या 32 रन बनाकर आउट हो गए. सूर्या ने 22 गेंद में 4 चौके और एक छक्के जड़कर 32 रन बनाए. 12वें ओवर में भारत को चौथा झटका लगा जब अभिषेक शर्मा 35 गेंद में 84 रनों की तूफानी पारी खेलकर आउट हुए. अभिषेक ने अपनी पारी में 5 चौके और 8 छक्के लगाए. 14वें ओवर में भारत को 5वां झटका लगा जब शिवम दुबे 9 रन बनाकर आउट हो गए. 16वें ओवर में हार्दिक पंड्या का विकेट गिरा. हार्दिक ने 25 रन बनाए. इसके बाद रिंकू सिंह ने 20 गेंद में 44 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत का स्कोर 238 तक पहुंचाया. भारतीय टीम (प्लेइंग इलेवन): संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह नागपुर टी20 में न्यूज़ीलैंड की  XI  : टिम रॉबिन्सन, डेवोन कॉन्वे, रचिन रवींद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डेरिल मिचेल, मिचेल सेंटनर (कप्तान), क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जेमिसन, ईश सोढ़ी, जैकब डफी. का फॉर्म चिंता का विषय है.