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“भारत ने न्यूजीलैंड को 48 रनों से पटखनी दी, अभिषेक और रिंकू का धमाल”

नागपुर     भारत-न्यूजीलैंड के बीच नागपुर में बुधवार को खेले गए पहले टी20 मैच में टीम इंडिया ने 48 रनों से जीत हासिल की. इस जीत के बाद भारतीय टीम 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गई है.  मुकाबले में टॉस जीतकर न्यूजीलैंड की टीम ने पहले गेंदबाजी चुनी थी. भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए अभिषेक शर्मा की तूफानी 84 और रिंकू सिंह की नाबाद 44 रनों की पारी के दम पर 238 रन बनाए थे. इसके जवाब में उतरी मेहमान टीम 7 विकेट खोकर 190 रन ही बना सकी.   ऐसी रही न्यूजीलैंड की पारी 239 रनों के जवाब में उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत बेहद खराब रही. पहले ओवर की दूसरी ही गेंद पर अर्शदीप ने कॉन्वे का विकेट झटक लिया. वो खाता भी नहीं खोल सके. इसके बाद दूसरा ओवर लेकर हार्दिक आए. उन्होंने रचिन रवींद्र को आउट कर दिया. रवींद्र के बल्ले से केवल एक रन आए. यानी 1 रन के स्कोर पर कीवी टीम को 2 झटके लगे. लेकिन इसके बाद ग्लेन फिलिप्स और रॉबिन्सन ने पारी को संभालने की कोशिश की. दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई. लेकिन 7वें ओवर में वरुण ने रॉबिन्सन का विकेट झटका. उस वक्त मेहमान टीम का स्कोर 52-3 था. इसके बाद ग्लेन फिलिप्स ने तूफानी पारी खेली. उन्होंने 40 गेंद में 78 रन बनाए. लेकिन 14वें ओवर में उनका विकेट गिरा. इसके बाद चैपमेन ने मोर्चा संभाला. लेकिन 15वें ओवर में वरुण ने उन्हें अपनी फिरकी में फंसा लिया. चैपमेन के बल्ले से 39 रन आए. जब चैपमेन का विकेट गिरा तो न्यूजीलैंड को जीत के लिए 31 गेंद में 96 रन चाहिए थे. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने शिकंजा कस लिया और 190 के स्कोर पर ही न्यूजीलैंड को रोक दिया. सीरीज का दूसरा मैच अब 23 जनवरी को रायपुर में खेला जाएगा. अभिषेक शर्मा ने कीवी गेंदबाजों को कूट डाला अभिषेक शर्मा टी20 क्रिकेट में लगातार अपनी धाक मजबूत करते जा रहे हैं. दुनिया के नंबर-1 रैंक वाले टी20 अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाज़ ने बुधवार (21 जनवरी) को नागपुर में खेले गए पहले टी20 मैच में न्यूजीलैंड की गेंदबाज़ी की धज्जियां उड़ाते हुए 35 गेंदों पर शानदार 84 रन की पारी खेली. 8 छक्के और 5 चौके लगाए पहले बल्लेबाज़ी के लिए उतरी भारतीय टीम को एक बार फिर शुरुआती बढ़त अभिषेक के निडर स्ट्रोकप्ले से मिली. उन्होंने अपनी 84 रनों की पारी में 8 छक्के और 5 चौके लगाए. महज 22 गेंदों में उन्होंने फिफ्टी जमाई. भले ही वह शतक से 16 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक वह न्यूजीलैंड को भारी नुकसान पहुंचा चुके थे.  5000 रन भी पूरे इस पारी के साथ अभिषेक शर्मा ने टी20 क्रिकेट में 5000 रन भी पूरे कर लिए और ऐसा करने वाले इस प्रारूप के इतिहास में 131वें खिलाड़ी बन गए. हालांकि, जो बात उन्हें सबसे अलग बनाती है, वह है इन रनों की रफ्तार. 5000 टी20 रन बनाने वाले सभी बल्लेबाज़ों में अभिषेक का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा है. उन्होंने शानदार 172.54 के स्ट्राइक रेट से यह मुकाम हासिल किया. अभिषेक ने यह उपलब्धि 165 पारियों में हासिल की और वह 5000 टी20 रन पूरे करने वाले चौथे सबसे तेज़ भारतीय बल्लेबाज़ बन गए. भारतीय बल्लेबाज़ों में 5000 टी20 रन तक पहुंचने वाले सबसे तेज़ खिलाड़ी * 143 पारियां – केएल राहुल * 145 पारियां – ऋतुराज गायकवाड़ * 154 पारियां – शुभमन गिल * 165 पारियां – अभिषेक शर्मा * 167 पारियां – विराट कोहली पावरप्ले में उनका दबदबा उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है. उनके कुल टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्कों में से 60 प्रतिशत से अधिक पहले छह ओवरों में आए हैं. यह एक हैरान करने वाला आंकड़ा है. अभिषेक अब तक पावरप्ले में 49 छक्के जड़ चुके हैं, जो उनसे पीछे पाकिस्तान के साहिबज़ादा फरहान (28 छक्के) से कहीं ज्यादा हैं. फिफ्टी जड़कर भी बनाया रिकॉर्ड अपने सातवें टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक के दौरान अभिषेक ने एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया. उन्होंने महज 22 गेंदों में फिफ्टी पूरी करते हुए 25 गेंदों से कम में अपना आठवां टी20 अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक जमाया, जो इस प्रारूप में किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा सबसे अधिक है. इस दौरान उन्होंने इंग्लैंड के फिल साल्ट, वेस्टइंडीज़ के एविन लुईस और अपने कप्तान सूर्यकुमार यादव को पीछे छोड़ दिया, जिनके नाम सात-सात ऐसे अर्धशतक दर्ज हैं.   ऐसी रही भारत की पारी  पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारत की शुरुआत अच्छी नहीं रही. दूसरे ही ओवर में संजू सैमसन 10 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद लंबे समय के बाद टी20 में वापसी कर रहे ईशान किशन भी सस्ते में निपट गए. उनके बल्ले से केवल 8 रन आए. लेकिन इसके बाद अभ‍िषेक शर्मा ने तूफानी पारी खेली और महज 22 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव भी लय में दिखे. 10 ओवर में भारत का स्कोर 117-2 था. लेकिन 11वें ओवर में भारत को तीसरा झटका लगा जब कप्तान सूर्या 32 रन बनाकर आउट हो गए. सूर्या ने 22 गेंद में 4 चौके और एक छक्के जड़कर 32 रन बनाए. 12वें ओवर में भारत को चौथा झटका लगा जब अभिषेक शर्मा 35 गेंद में 84 रनों की तूफानी पारी खेलकर आउट हुए. अभिषेक ने अपनी पारी में 5 चौके और 8 छक्के लगाए. 14वें ओवर में भारत को 5वां झटका लगा जब शिवम दुबे 9 रन बनाकर आउट हो गए. 16वें ओवर में हार्दिक पंड्या का विकेट गिरा. हार्दिक ने 25 रन बनाए. इसके बाद रिंकू सिंह ने 20 गेंद में 44 रनों की नाबाद पारी खेली और भारत का स्कोर 238 तक पहुंचाया. भारतीय टीम (प्लेइंग इलेवन): संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह नागपुर टी20 में न्यूज़ीलैंड की  XI  : टिम रॉबिन्सन, डेवोन कॉन्वे, रचिन रवींद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डेरिल मिचेल, मिचेल सेंटनर (कप्तान), क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जेमिसन, ईश सोढ़ी, जैकब डफी. का फॉर्म चिंता का विषय है. 

नए टैक्स सिस्टम में होम लोन और मेडिकल इंश्योरेंस का असर, कैसे मिलेगा आपको फायदा?

नई दिल्ली  भारत सरकार द्वारा फरवरी 2026 में पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं. खासतौर पर नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को और आकर्षक बनाने के लिए होम लोन की ब्याज छूट और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन को शामिल करने की संभावनाओं पर जोरदार चर्चा चल रही है. वर्तमान में नए रिजीम में ज्यादातर डिडक्शन्स उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से कई टैक्सपेयर्स पुराने रिजीम को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो मिडल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है. द इकोनॉमिक टाइम्स में कई रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को नई रिजीम में शामिल करने की मांग की है. नियती शाह (चार्टर्ड अकाउंटेंट और 1 Finance की पर्सनल टैक्स हेड) ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर कैप्ड डिडक्शन (25,000-50,000 रुपये) दी जाए, क्योंकि मेडिकल इन्फ्लेशन 12-14 फीसदी सालाना है. विश्वानाथन अय्यर (ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट चेन्नई के सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर) ने अनुमान लगाया कि 15 लाख इनकम वाले के लिए 1 लाख स्टैंडर्ड डिडक्शन या हेल्थ इंश्योरेंस कैप्ड डिडक्शन से टैक्स में करीब 4,000 रुपये की बचत हो सकती है. एक अन्य रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को दोनों रिजीम्स में उपलब्ध कराने और सीनियर्स के लिए लिमिट बढ़ाने की सिफारिश की. हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बनाने की उम्मीद बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में नियती शाह के हवाले से लिखा गया है कि हेल्थकेयर, हाउसिंग और रिटायरमेंट पर फोकस करते हुए कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000-50,000 की कैप्ड डिडक्शन और होम लोन या HRA से जुड़ी सरल फ्लैट डिडक्शन दी जाए. एसआर पटनायक (Cyril Amarchand Mangaldas के पार्टनर और टैक्सेशन हेड) ने सुझाव दिया कि सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर हायर इंटरेस्ट डिडक्शन और 30 फीसदी टैक्स स्लैब थ्रेशोल्ड बढ़ाया जाए. फाइनेंशियल एक्सप्रेस और अपस्टॉक्स की रिपोर्टस में अभिषेक सोनी जैसे एक्सपर्ट्स ने होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को 2 लाख से 3 लाख तक बढ़ाने की बात कही, क्योंकि प्रॉपर्टी प्राइस और EMI बढ़ गई हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) ने प्री-बजट मेमोरेंडम में सेक्शन 80D डिडक्शन को नए रिजीम में शामिल करने की सिफारिश की है, ताकि हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बने. अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे पर खूब चर्चा है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट सुमित कपूर (@moneygurusumit) ने पोस्ट किया कि बजट 2026 में 80D हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन नई रिजीम में वापस आ सकता है और होम लोन पर आंशिक डिडक्शंस की अनुमति दी जा सकती है, जिससे प्रभावी टैक्स-फ्री इनकम 17 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. सीए हिमांक सिंगला (@CAHimankSingla) ने भी इसी तरह की खबर शेयर की, जिसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन 1-1.5 लाख, 80D डिडक्शन और होम लोन बेनिफिट्स का जिक्र है. जर्नलिस्ट निनाद शेठ ने लिखा कि बजट में होम लोन पर बड़ी इंटरेस्ट डिडक्शन और अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स लगभग निश्चित हैं, जो मिडल क्लास की मांगों को ध्यान में रखते हुए ईएमआई कम कर सकते हैं. इसके अलावा फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने पुरानी रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट रिबेट को 5 लाख तक बढ़ाने की संभावना जताई. लोन्स जगत (@loansjagat) ने होम लोन रिलीफ को 2 लाख से 5 लाख तक बढ़ाने की उम्मीद जताई. कड़क (@itskadak) ने हिंदी में पोस्ट किया कि बजट 2026 में नई टैक्स रिजीम गेम-चेंजर बन सकती है, जिसमें एचआरए और हेल्थ इंश्योरेंस शामिल होने की चर्चा है, साथ ही होम लोन और एजुकेशन लोन पर राहत. कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर मिडल क्लास की राहत की मांग जोरों पर है, और ये चर्चाएं मीडिया रिपोर्ट्स से मेल खाती हैं. अगर ऐसा हुआ तो टैक्सपेयर्स को कैसे और कितना फायदा? वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए – 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे. कैसे होगा फायदा? वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे. होम लोन अगर 2 लाख इंटरेस्ट डिडक्शन मिलती है, तो टैक्सेबल इनकम 2 लाख कम हो जाएगी. 30% स्लैब में यह 60,000 रुपये की टैक्स सेविंग देगी. अगर लिमिट 5 लाख तक बढ़ी (जैसी कि चर्चा है), तो सेविंग 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है. मेडिकल इंश्योरेंस: 25,000 रुपये की डिडक्शन पर 30 प्रतिशत स्लैब में 7,500 रुपये की सेविंग. सीनियर्स के लिए 50,000 पर 15,000 रुपये. अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000) के साथ ये जोड़े जाएं, तो 15 लाख इनकम वाला व्यक्ति 12 लाख तक टैक्स-फ्री रह सकता है, और बाकी पर कम रेट्स लागू होंगे. चर्चाओं के मुताबिक, प्रभावी टैक्स-फ्री लिमिट 17 लाख तक पहुंच सकती है. मान लीजिए आपकी सालाना इनकम 15 लाख है. नए रिजीम में वर्तमान टैक्स लगभग 1.56 लाख (रिबेट के बाद) रुपये बनता है. अगर 2 लाख होम लोन + 25,000 इंश्योरेंस डिडक्शन मिले, तो टैक्सेबल इनकम 12.75 लाख हो जाएगी, और टैक्स घटकर 1.17 लाख रह सकता है, यानी 39,000 रुपये की सेविंग होगी. हाई इनकम (20 लाख) पर सेविंग और ज्यादा होगी (30 प्रतिशत स्लैब में 2.25 लाख डिडक्शंस से 67,500 रुपये की बचत होगी. फिलहाल, नए टैक्स रिजीम में अभी तक होम लोन इंटरेस्ट (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस (सेक्शन 80D) जैसी डिडक्शन नहीं मिलती हैं. ये पुराने रिजीम में ही उपलब्ध हैं. स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये नए रिजीम में सैलरीड लोगों को मिलता है. वर्तमान में (FY 2025-26 यानी AY 2026-27) नए रिजीम के स्लैब ऐसे हैं: 4 लाख तक जीरो, 4-8 लाख 5%, 8-12 लाख 10%, 12-16 लाख 15%, … Read more

डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम, स्कैमर्स के खिलाफ एक बटन से शुरू होगा ‘अरेस्ट’ प्रोसेस

नई दिल्‍ली.  देश में डिजिटल अरेस्‍ट की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने कारगर पैंतरा अपनाया है. गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्‍ट की समस्‍या के समाधान के लिए उच्‍च स्‍तरीय समिति बनाई थी. इस समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍प सुझाए हैं, जहां एक बटन दबाते ही स्‍कैमर्स के मंसूबों पर ताला लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, अगर डिजिटल अरेस्‍ट के दौरान कोई वित्‍तीय नुकसान हुआ है तो उसकी भी भरपाई करने का तरीका समिति ने सुझाया है. गृह मंत्रालय की उच्‍च स्‍तरीय समिति ने ‘किल स्विच’ जैसे विकल्‍पों का सुझाव दिया है. इसका मतलब है कि अगर किसी को अपने साथ डिजिटल फर्जीवाड़े की आशंका है तो वह इस किल स्विच बटन के जरिये अपने सभी फाइनेंशियल ट्रांजेक्‍शन तत्‍काल रोक सकता है. इससे स्‍कैमर्स को खाते से पैसे निकालने या धोखाधड़ी करने का मौका ही नहीं मिलेगा और बैंक की तरफ से यूजर के सभी खाते कुछ समय के लिए फ्रीज कर दिए जाएंगे. नुकसान की भरपाई के लिए भी व्‍यवस्‍था बैंकिंग सिस्टम में धोखाधड़ी से जुड़े नुकसान को कवर करने के लिए एक बीमा व्यवस्था भी जल्द आ सकती है, क्योंकि बढ़ते डिजिटल युग के घोटाले वाणिज्यिक बैंकों को अपने जोखिम प्रबंधन ढांचे पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. इसका मकसद ग्राहकों और पूरे वित्तीय सिस्टम की बेहतर सुरक्षा करना है. समिति ने किल स्विच के साथ ऐसे बीमा उत्‍पाद लाने का भी सुझाव दिया है. कैसे काम करेगी इमरजेंसी बटन पिछले साल दिसंबर में किल स्विच के लिए एक अंतर विभागीय समिति बनाई गई थी. इसमें अन्य विकल्पों के साथ-साथ एक इमरजेंसी बटन की व्यवस्था की जा सकती है, जिसे लेंडर्स के पेमेंट ऐप्स में जोड़ा जाएगा. जब भी कोई यूजर महसूस करे कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो रहा है, तो वह इस बटन को दबाकर अपने सभी बैंकिंग ऑपरेशन्स तुरंत फ्रीज कर सकता है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि विचार यह है कि क्या यूजर के पेमेंट ऐप, जैसे UPI ऐप या बैंक ऐप में किल स्विच हो सकता है और जैसे ही यूजर वह बटन दबाए, कोई भी बैंक ट्रांजेक्शन संभव न हो सके. धोखाधड़ी के बाद पैसा वापस दिलाने की कोशिश समिति यह भी देख रही है कि क्या ऐसे लेन-देन की पहचान करना संभव है जो धोखाधड़ी के शिकार हो सकते हैं. साथ ही क्‍या ऐसा कोई तरीका है जिससे धोखाधड़ी के बाद उसे तुरंत कई म्यूल खातों में बांटा न जा सके, ताकि पैसों को वापस दिलाने की कोशिश की जा सके. डिजिटल अरेस्ट घोटालों में ठग पुलिस या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के रूप में वीडियो कॉल के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और दावा करते हैं कि वे गंभीर अपराधों की जांच के दायरे में हैं. वे अपनी विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लीक हुए निजी डेटा का इस्तेमाल करते हैं. अक्‍सर डर और जल्दबाजी का माहौल बनाते हैं और फर्जी आईडी व गिरफ्तारी वारंट दिखाकर पीड़ितों से बड़ी रकम ऐंठ लेते हैं.  

HCL टेक का एमपी के टियर-2 टेक्नोलॉजी हब पर फोकस, दावोस में हुई अहम चर्चा

भोपाल  HCL- दावोस में वर्ल्ड इकोनामिक फोरम–2026 का पहला दिन एमपी के लिए निवेश, सहयोग और वैश्विक साझेदारी के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ। फोरम में एमपी की सशक्त मौजूदगी नजर आई। प्रदेश के प्रतिनिधि मंडल ने तकनीक, नवकरणीय ऊर्जा, एआई, आईटी, कृषि-खाद्य, पर्यटन और औद्योगिक क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों से चर्चा की। मध्यप्रदेश को एक उभरते हुए भरोसेमंद और फ्यूचर रेडी इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में प्रस्तुत किया। यहां आईटी कंपनी एचसीएल टेक से भी अहम चर्चा हुई। कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया एमपी को उभरते टेक्नोलॉजी डेस्टिनेशन के रूप में देखा जा रहा है। दावोस में मध्यप्रदेश सरकार और एआई आधारित प्रोटीन नवाचार में अग्रणी कंपनी शिरू (Shiru) के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रदेश के औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने शिरू की सीईओ एवं संस्थापक डॉ. जैस्मिन ह्यूम से विस्तृत चर्चा की। इस दौरान एआई-संचालित प्रोटीन नवाचार, कृषि-आधारित इनपुट्स और अनुप्रयुक्त अनुसंधान पर फोकस रहा। शिरू की सीईओ ने मध्यप्रदेश की सुदृढ़ कृषि व्यवस्था में विशेष रुचि प्रदर्शित की। बातचीत के दौरा राज्य के विश्वविद्यालयों, कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग की संभावनाओं, फसल-आधारित प्रोटीन इनपुट्स की पहचान एवं विकास पर ज्वाइंट वेंचर पर करने पर सहमति हुई। नवकरणीय ऊर्जा भंडारण पर अमारा राजा समूह से चर्चा हुई। बैठक में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला एवं अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने समूह के सह-संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर जय गल्ला से बातचीत की। हाइब्रिड मॉडलों की लागत संरचना एवं तकनीकी पहलुओं पर अध्ययन किए जाने पर सहमति बनी। एचसीएल टेक के साथ टियर-2 टेक्नोलॉजी हब पर अहम चर्चा दावोस में वैश्विक आईटी सेवा कंपनी एचसीएल टेक के साथ टियर-2 टेक्नोलॉजी हब पर अहम चर्चा हुई। मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल की एचसीएल टेक के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट अभय चतुर्वेदी के साथ महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने प्रदेश में टियर-2 टेक हब के रूप में उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में मध्यप्रदेश में विस्तार की संभावनाओं पर बात की। एचसीएल टेक द्वारा पारंपरिक आईटी केंद्रों से आगे बढ़कर टियर-2 शहरों में संचालन विस्तार के अवसरों का आंकलन किए जाने की बात बताई गई। एचसीएल टेक के अनुसार मध्यप्रदेश को एक उभरते और संभावनाओं से परिपूर्ण टेक्नोलॉजी डेस्टिनेशन के रूप में देखा जा रहा है। विशेष ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी की जानकारी दी इस अहम बैठक में मध्यप्रदेश शासन की विशेष ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) पॉलिसी की जानकारी दी गई।प्रतिस्पर्धी लागत लाभ और रेडी-टू-मूव-इन ऑफिस स्पेस की उपलब्धता को प्रमुख आकर्षण के रूप में प्रस्तुत किया गया। राज्य में आईआईटी, एनआईटी और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी को भी प्रमुख ताकत बताया गया। एचसीएल टेक ने मध्यप्रदेश में भविष्य के टेक्नोलॉजी सेंटर्स और ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर्स की संभावनाओं में रुचि व्यक्त की।

एमपी में खाद की ऑनलाइन बुकिंग का सिस्टम शुरू, अगले महीने से होगी होम डिलीवरी

भोपाल  एमपी में बुआई के हर मौसम में किसानों की खाद लेने के लिए लगी कतारें सरकार और पब्लिक दोनों को परेशान करती हैं। अब सरकार किसानों को खाद की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा देने जा रही है। यही नहीं खाद की होम डिलेवरी सेवा पर भी काम चल रहा है। मप्र के कृषि विभाग ने एग्रीस्टेक पोर्टल पर सवा करोड़ किसानों की पूरी डिटेल दर्ज कराई है। इसमें किसान की खेती की भूमि का रकबा और उसमें बोई जाने वाली फसलों के साथ ही लगने वाली खाद की भी अनुमानित खपत दी है।  किसानों को खाद मिलने में पहले परेशानी का जरूर सामना करना पड़ता था, लेकिन अब किसानों को समय बचाने के लिए होम डिलीवरी शुरू की गई है. जिले के किसानों को इस योजना का लाभ लेने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी. इसके बाद किसानों के घर में खाद पहुंचाई जाएगी. जिसके लिए ₹25 का शुल्क देना होगा. हालांकि यह सुविधा डबल लॉक केंद्र के 5 किलोमीटर के दायरे में फिलहाल शुरू की गई है, जिसका विस्तार भी किया जाएगा. अब किसानों के घर पहुंचेगी खाद इसके पहले किसानों को डबल लॉकर या विक्रय केंद्र में जाकर खाद लेना पड़ता था. लेकिन यह सुविधा भी अभी जारी रहेगी. इसके अलावा अब किसान 25 रूपए प्रति बोरी देकर अपने घर से पोर्टल में जाकर ऑनलाइन बुकिंग कर खाद की होम डिलेवरी भी कर सकेंगे. जहां योजना के तहत उर्वरक की होम डिलेवरी पर परिवहन शुल्क ₹15 प्रति बैग और लोडिंग, अनलोडिंग शुल्क ₹10 देना होगा, मतलब ₹25 कुल किसानों को होम डिलेवरी के लिए खर्च करने होंगे. किसान चुन सकेंगे होम डिलीवरी का विकल्प योजना के पहले किसान सुहाजनी के ओमप्रकाश बने जिन्होंने ऑनलाइन बुकिंग कर 14 बोरी यूरिया की बुकिंग की. इसके बाद डबल लॉक केंद्र से उनके घर यूरिया की 14 बोरी भिजवाई गई. किसान का कहना है यह योजना काफी अच्छी है, जिससे अब समय भी बचेगा और केंद्र में लगने वाली लाइनों से भी राहत मिलेगी. बहरहाल यह सुविधा जबलपुर के डबल लॉकर मझोली, सिहोरा और शहपुरा में शुरू कर दी गई है. जिसका लाभ अब किसान उठाने लगे हैं. चयनित उर्वरक विक्रेता के यहाँ पर ई-टोकन से कृषक उर्वरक क्रय कर सकेंगे  जिसकी वैद्यता 03 दिवस की रहेगी। जो किसान जिस सहकारी समिति का डयू सदस्य है, टोकन उसी समिति पर बुक करना होगा। सहकारी समिति के ऋणी कृषक सदस्य जिनकी खरीफ सीजन में खाद लेकर लिमिट पूरी हो चुकी है, वे नगद राशि जमा कर लिमिट खुलवा सकते है। ओवर डयू सदस्य या अन्य किसान, विपणन संघ के गोदाम, एमपी एग्रो, प्राइवेट विक्रेता पर टोकन बुक कर सकते है। टोकन की वैद्यता 03 दिवस रहेगी, पात्रता मिलने तक 3-3 दिवस के अंतराल पर बार-बार टोकन बुक किया जा सकता है।  

ट्रंप के सनकी इरादों से घबराए पीएम मार्क कार्नी, ग्रीनलैंड के बाद कनाडा को लेकर भी उठीं चिंताएं

ओटावा/दावोस  डोनाल्ड ट्रंप ने  एक नया मैप सोशल मीडिया पर डाला है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है। ये नक्शा एडिटेड है, लेकिन ट्रंप का इरादा नहीं। कनाडा इस बात को जान गया है कि ग्रीनलैंड के बाद अगला नंबर उसका है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान से कनाडा के आम लोगों में भारी गुस्सा है, वो अपमान महसूस कर रहे हैं और वो धीरे धीरे अमेरिका के खिलाफ एक मजबूत संकल्प के साथ नई तैयारी में जुट गये हैं। कनाडा, ट्रंप प्रशासन की तरफ से आने वाले नई खतरनाक मांगों का सामना करने की तैयारी में जुट गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 'अमेरिकी दबदबा खत्म हो गया' कहकर शुरूआत कर दी है। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने कनाडा के आगे के रास्तों के बारे में बताया और चेतावनी दी और कहा कि "मजबूत देश इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, टैरिफ को दबाव बनाने के लिए और सप्लाई चेन को शोषण करने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।" लेकिन स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मार्क कार्नी ने अमेरिका का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उन्होंने अपने भाषण में इसे 'ग्लोबल टूट' करार दिया और कहा कि "बीच की ताकतों को मिलकर काम करना होगा क्योंकि अगर हम टेबल पर नहीं होंगे, तो हम मेन्यू में होंगे।" यानि, कनाडा और यूरोपीय देशों को अब समझ में आ रहा है, जो भारत वर्षों से कहता आया है। लेकिन अभी तक ये देश अमेरिकी दबदबे का फायदा उठा रहे थे और जब ट्रंप ने चाबी कसी है, तो उन्हें 'ग्लोबल ऑर्डर, दूसरे देशों की संप्रभुता, अमीर और गरीब देशों का फर्क' समझ में आ रहा है। अमेरिका से लड़ने की तैयारी में कनाडा? कनाडा ने अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने में लगभग एक अरब डॉलर खर्च किए हैं। अब वह आने वाले सालों में अपनी उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर और खर्च करेगा। जबकि प्रधानमंत्री कार्नी ने फिर से दोहराया कि "कनाडा, ग्रीनलैंड के साथ मजबूती से खड़ा है और ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला करने के उनके खास अधिकार का समर्थन करता है।" हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "रूस आर्कटिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है।" उन्होंने कहा, "हम अपने NATO सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं, जिसमें नॉर्डिक बाल्टिक के 8 देश भी शामिल हैं, ताकि गठबंधन के उत्तरी और पश्चिमी किनारों को और सुरक्षित किया जा सके, जिसमें ओवर-द-होराइजन रडार, पनडुब्बियों, विमानों और जमीन पर, बर्फ पर सैनिकों में अभूतपूर्व निवेश शामिल है।" हाल के महीनों में कनाडा ने रक्षा, और खासकर आर्कटिक की सुरक्षा को लेकर अपनी नई प्रतिबद्धता को दिखाने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने आर्कटिक में खतरों के लिए शुरुआती चेतावनी रडार कवरेज देने के लिए "ओवर-द-होराइजन" रडार सिस्टम के लिए 4 अरब डॉलर से ज्यादा का फंड देने का वादा किया है। उन्होंने आने वाले सालों में आर्कटिक में एक विशाल सेना से लगातार मिलिट्री मौजूदगी बढ़ाने का भी वादा किया है। लेकिन कनाडा के साथ दिक्कत ये है कि जिस अमेरिका के साथ अपनी सबसे ज्यादा लगने वाली सीमा का वो अभी तक सबसे ज्यादा फायदा उठा रहा था, वो सीमा उसके लिए सबसे मुश्किल बन चुकी है। कनाडा, अमेरिका के साथ दुनिया की सबसे बड़ी जमीनी सीमा को साझा करता है, इसके अलावा वो दूसरी तरफ ग्रीनलैंड के साथ दुनिया की सबसे बड़ी समुद्री सीमा को शेयर करता है। कनाडा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ग्रीनलैंड? ग्रीनलैंड, कनाडा और अमेरिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले कई दशकों से ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए कनाडा ने NATO देशों और NORAD (नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड) के साथ मिलकर ऑपरेशनल डिफेंल प्लानिंग किए हैं, जिसमें इसी हफ्ते ग्रीनलैंड में एक NORAD मिशन भी शामिल है। NORAD ने एक बयान में पुष्टि की है, कि कॉन्टिनेंटल यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा के बेस से ऑपरेट होने वाले एयरक्राफ्ट, ग्रीनलैंड में "अलग-अलग लंबे समय से प्लान की गई NORAD एक्टिविटीज को सपोर्ट करने के लिए" होंगे, जो यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा, साथ ही किंगडम ऑफ डेनमार्क के बीच स्थायी डिफेंस सहयोग पर आधारित है।कनाडा के अधिकारी फिलहाल ये तय नहीं कर पाए हैं कि ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए सैनिक भेजे जाए या नहीं। वो अभी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि प्रतीकात्मक तौर पर सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजने का फैसला सही रहेगा या नहीं, लेकिन प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण से साफ हो गया है कि डोनाल्ड ट्रंप के साथ कनाडा के रिश्ते काफी ज्यादा खराब होने वाले हैं। इसके अलावा उन्होंने इस महीने चीन की भी यात्रा की है। उन्होंने अमेरिका को संदेश और संकेत दोनों दे दिया है कि कनाडा के पास विकल्प हैं। ऐसे में अगर डोनाल्ड ट्रंप ज्यादा आगे बढ़ते हैं, तो अमेरिका अपने पड़ोसी देश को खो सकता है।  

भार्गवास्त्र की ताकत: एक मिसाइल से 64 टारगेट नष्ट, पाकिस्तान के ड्रोन्स पर संकट

नई दिल्‍ली भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है. भार्गवास्त्र के साथ भारत अब दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जिसके पास एक साथ 60 से अधिक (सटीक क्षमता 64) माइक्रो-मिसाइलें दागने वाला स्वदेशी सिस्टम है. महाराष्ट्र के नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) द्वारा विकसित यह सिस्टम विशेष रूप से ड्रोन झुंड (Swarm Drones) को पलक झपकते ही तबाह करने के लिए बनाया गया है. 19 जनवरी 2026 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस प्रणाली की सफलता की सराहना करते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी जीत बताया. भार्गवास्त्र: तकनीक, क्षमता और विकास की पूरी कहानी निर्माण और विकास: भार्गवास्त्र को सोलर ग्रुप की सहायक कंपनी ‘इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड’ (EEL) ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया है. इसके सफल परीक्षण मई 2025 में गोपालपुर, ओडिशा में किए गए थे. मारने की अभूतपूर्व क्षमता: यह सिस्टम एक साथ 64 माइक्रो-मिसाइलें/रॉकेट मात्र 10 सेकंड में दाग सकता है. इसकी तुलना में दुनिया के अन्य आधुनिक सिस्टम एक बार में अधिकतम 4 मिसाइलें ही दाग पाते हैं. मल्टी-लेयर सुरक्षा: यह दो स्तरों पर काम करता है. पहला स्तर अनगाइडेड रॉकेटों का है जो 20 मीटर के दायरे में ड्रोन झुंड को खत्म करते हैं और दूसरा स्तर सटीक गाइडेड माइक्रो-मिसाइलों का है. रेंज और रडार: यह 6 से 10 किमी दूर से ही दुश्मन के ड्रोन को पहचान लेता है और 2.5 किमी की दूरी तक उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देता है. लागत (Cost): पारंपरिक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (जैसे S-400) के मुकाबले इसकी लागत बहुत कम है, जिससे यह ड्रोन जैसे सस्ते हमलों को रोकने के लिए एक किफायती समाधान बनता है. भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए स्वदेशी 'भार्गवास्त्र' ड्रोन-रोधी प्रणाली का सफल परीक्षण किया है. सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड द्वारा डिज़ाइन और विकसित यह कम लागत वाली प्रणाली ड्रोन स्वार्म (झुंड) के बढ़ते खतरे से निपटने में एक क्रांतिकारी कदम है. गोपालपुर सीवर्ड फायरिंग रेंज में इस प्रणाली के माइक्रो रॉकेट्स का कठिन परीक्षण किया गया, जिसमें सभी निर्धारित लक्ष्य हासिल किए गए. यह उपलब्धि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति और 'मेक इन इंडिया' मिशन की एक और सफलता को दर्शाती है. 5 महत्वपूर्ण सवाल सवाल 1: भार्गवास्त्र को ‘ड्रोन किलर’ क्यों कहा जा रहा है? जवाब: यह सिस्टम विशेष रूप से उन ड्रोन झुंडों को खत्म करने के लिए बनाया गया है जो रडार को चकमा देते हैं. इसकी 64 मिसाइलें एक साथ हमला कर किसी भी बड़े ड्रोन हमले को विफल कर सकती हैं. सवाल 2: क्या यह सिस्टम किसी भी मौसम और इलाके में काम कर सकता है? जवाब: हां, इसे रेगिस्तान से लेकर 5000 मीटर से ऊंचे बर्फीले पहाड़ों तक हर तरह के कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है. सवाल 3: भार्गवास्त्र की सबसे अनोखी बात क्या है? जवाब: इसकी ‘साल्वो मोड’ क्षमता, जिसके तहत यह दुनिया में सबसे ज्यादा (60+) मिसाइलें एक साथ दागने वाला एकमात्र सिस्टम बन गया है. सवाल 4: क्या इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है? जवाब: हां, यह पूरी तरह से एक मोबाइल प्लेटफॉर्म (ऑल-टेरेन व्हीकल) पर आधारित है जिसे युद्ध क्षेत्र में कहीं भी तेजी से तैनात किया जा सकता है. सवाल 5: यह भारतीय सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? जवाब: यह चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के बढ़ते ड्रोन खतरे को देखते हुए भारत की रक्षा पंक्ति को अभेद्य बनाता है और कीमती मिसाइल डिफेंस सिस्टम को छोटे खतरों से बचाता है. परीक्षण का विवरण गोपालपुर में सेना वायु रक्षा (AAD) के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में 'भार्गवास्त्र' के तीन परीक्षण किए गए.  पहले दो परीक्षण: प्रत्येक में एक-एक रॉकेट दागा गया. तीसरा परीक्षण: सैल्वो मोड में दो सेकंड के अंतराल में दो रॉकेट दागे गए. चारों रॉकेट्स ने अपेक्षित प्रदर्शन किया और सभी लॉन्च पैरामीटर हासिल किए. ये परीक्षण ड्रोन हमलों के खिलाफ प्रणाली की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को साबित करते हैं. 'भार्गवास्त्र' की विशेषताएं 'भार्गवास्त्र' एक बहुस्तरीय ड्रोन-रोधी प्रणाली है, जो छोटे और तेजी से आने वाले ड्रोनों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है. इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं… उन्नत पहचान और हमला प्रणाली 6 से 10 किमी दूर छोटे ड्रोनों का पता लगा सकती है, जिसमें रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर, और RF रिसीवर शामिल हैं. यह 2.5 किमी की दूरी पर ड्रोनों को नष्ट कर सकती है, जिसमें 20 मीटर का घातक दायरा है. अनगाइडेड माइक्रो रॉकेट्स: पहली परत के रूप में ड्रोन झुंड को नष्ट करने के लिए. गाइडेड माइक्रो-मिसाइल: दूसरी परत के रूप में सटीक हमले के लिए (पहले ही परीक्षण किया जा चुका है. सॉफ्ट-किल परत: जैमिंग और स्पूफिंग की वैकल्पिक सुविधा, जो ड्रोनों को बिना नष्ट किए निष्क्रिय कर सकती है. मॉड्यूलर डिज़ाइन प्रणाली को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है. सेंसर और शूटर को एकीकृत कर लंबी दूरी तक लक्ष्यों को भेदने के लिए स्तरित वायु रक्षा कवर प्रदान किया जा सकता है. यह विविध भूभागों, जैसे उच्च ऊंचाई (>5000 मीटर), में काम कर सकती है, जो भारतीय सशस्त्र बलों की अनूठी जरूरतों को पूरा करती है. कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर C4I (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशंस, कंप्यूटर्स, और इंटेलिजेंस) तकनीक से लैस, यह प्रणाली एकल ड्रोन या पूरे झुंड का आकलन और मुकाबला करने के लिए व्यापक स्थिति जागरूकता प्रदान करती है. EO/IR सेंसर कम रडार क्रॉस-सेक्शन (LRCS) लक्ष्यों की सटीक पहचान सुनिश्चित करते हैं. नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध 'भार्गवास्त्र' को मौजूदा नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध ढांचे के साथ आसानी से एकीकृत किया जा सकता है, जो इसे सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए एक व्यापक रक्षा ढाल बनाता है. वैश्विक स्तर पर अनूठी प्रणाली 'भार्गवास्त्र' को इसके डेवलपर्स ने वैश्विक स्तर पर एक अनूठी प्रणाली बताया है. हालांकि कई उन्नत देश माइक्रो-मिसाइल प्रणालियों पर काम कर रहे हैं, लेकिन बहुस्तरीय, लागत-प्रभावी और ड्रोन झुंड को नष्ट करने में सक्षम कोई स्वदेशी प्रणाली अभी तक विश्व में तैनात नहीं हुई है.      लागत-प्रभावी: पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों की तुलना में 'भार्गवास्त्र' कम लागत में उच्च प्रभावशीलता प्रदान करता है.     स्वदेशी डिज़ाइन: यह प्रणाली पूरी तरह से भारत … Read more

इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी

गत वर्ष से 8 लाख 22 हजार मीट्रिक टन अधिक हुई धान की खरीदी : खाद्य मंत्री राजपूत इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 51 लाख 75 हजार मीट्रिक टन से अधिक हुई धान की खरीदी प्रदेश में गत वर्ष खरीदी गई थी 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि धान उपार्जन के लिये निर्धारित तिथि 20 जनवरी तक गत वर्ष से 8 लाख 22 हजार मीट्रिक टन अधिक धान की खरीदी हुई है। इस वर्ष 7 लाख 62 हजार 629 किसानों से 51 लाख 75 हजार 4 मीट्रिक टन धान की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। उन्होंने बताया है कि गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपये प्रति क्विंटल है। किसानों को अभी तक 9485 करोड़ रूपये से अधिक राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया था। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये थे। क्रय की गयी धान की 84 प्रतिशत मात्रा 43 लाख 55 हजार 879 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक इस वर्ष धान बेचने किसानों का उत्साह अलग ही नजर आ रहा है। प्रदेश में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रूपए प्रति क्विंटल है। अभी तक पिछले साल की तुलना में 1 लाख 29 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा धान की खरीदी की जा चुकी है। गत वर्ष 43 लाख 52 हजार 905 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी।मध्यप्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि धान विक्रय के लिये 8 लाख 59 हजार 822 किसानों ने पंजीयन कराया है। एक दिसम्बर से शुरू हुई धान खरीदी के लिये विभिन्न जिलों में 1436 केन्द्र बनाये गये हैं। क्रय की गयी धान की 79 प्रतिशत मात्रा 39 लाख 19 हजार 277 मीट्रिक टन का परिवहन किया जा चुका है।   

प्रधानमंत्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 में शामिल होने पहुँचे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने "डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप: सब नेशनल ब्लू प्रिंट फॉर यूटिलिटी स्केल एनर्जी ट्रांजीशन" विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग में भागीदारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य की ऊर्जा यात्रा में नवकरणीय ऊर्जा की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा मध्यप्रदेश के समावेशी और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन को प्रेरणा बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य स्वच्छ, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की दूरदर्शी सोच से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने हरित ऊर्जा को विकास की मुख्य धारा में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि अन्तर्राज्यीय सहयोग और बेहतर समन्वय से राज्य में बिजली और जल आपूर्ति में स्थिरता आई है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ उद्योगों को भी लाभ मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य में सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण से जुड़ी नई नवकरणीय परियोजनाओं की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी। राउण्ड टेबल मीटिंग के समापन-सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने भारत और प्रधानमंत्री श्री मोदी के हरित ऊर्जा विज़न को साझा किया। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में नीति स्थिरता के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह उपभोक्ताओं और ऊर्जा क्षेत्र के लिए लाभकारी सिद्ध होगी। केन्द्रीय मंत्री श्री जोशी ने सुधारोन्मुख राज्यों, विशेषकर मध्यप्रदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की सौर ऊर्जा संबंधित उपलब्धियाँ वैश्विक स्तर पर साझा की जा सकती हैं। उन्होंने श्रम, भूमि और ऊर्जा के बेहतर समन्वय से स्वच्छ ऊर्जा में जोखिम कम करने के मध्यप्रदेश मॉडल को उल्लेखनीय बताया और प्रौद्योगिकी निवेश और ब्लेंडेड फाइनेंस पर ज़ोर दिया। राउण्ड टेबल मीटिंग में मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, महानिदेशक, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन श्री अशोक खन्ना, अपर मुख्य सचिव नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा श्री मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार श्री मनीष सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैया राजा टी, आयुक्त जनसम्पर्क श्री दीपक कुमार सक्सेना एवं एमडी एमपीआईडीसी श्री चन्द्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे। मीटिंग में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिये एक ड्रॉफ्ट फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया। विदेश में म.प्र. की नवकरणीय ऊर्जा नीति की हुई सराहना इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के उप-राज्यपाल श्री एमिल एलेस्टियान्तो डार्डक ने कहा कि उप-राष्ट्रीय सरकारें भी राष्ट्रीय नीतियों में परिवर्तन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की प्रगतिशील नीतियों की सराहना की। राउंड टेबल मीटिंग में प्रतिभागियों में वैश्विक और घरेलू कंपनियों के कॉरपोरेट प्रतिनिधि और निवेशक शामिल थे, जिन्होंने राज्य की नीतियों, हरित ऊर्जा की उपलब्धता, तथा डेटा सेंटर जैसी नई प्रौ‌द्योगिकी एवं नवाचारों के संबंध में जानकारी ली। चर्चाओं में नियामकीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। साथ ही यह भी चर्चा हुई कि किस प्रकार से मध्यप्रदेश जैसे क्षेत्रीय या उप-राष्ट्रीय सरकारें इस क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व कर सकती हैं।  

भागीरथपुरा मामला: हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, टेंडर प्रक्रिया और प्रदूषण बोर्ड के दस्तावेज होंगे संरक्षित

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हाई कोर्ट का आदेश जारी हो गया है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का संपूर्ण रिकॉर्ड (टेंडर प्रक्रिया सहित) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी कहा कि उन्हें नगर निगम और शासन द्वारा 20 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर अगर किसी तरह की आपत्ति है तो प्रस्तुत कर दें। कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर के साथ बनाई जाने वाली स्वतंत्र कमेटी के लिए याचिकाकर्ताओं से नाम मांगे हैं। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं में मंगलवार 20 जनवरी को करीब डेढ घंटे सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो बुधवार दोपहर जारी हुआ। तीन पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों के साथ छोड़छाड़ की जा सकती है।   कोर्ट ने दिया दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश याचिकाकर्ता ने ऐसी ही आशंका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट के साथ होने की आशंका भी व्यक्त की है जिसमें पानी के नमूने दूषित पाए गए थे। ऐसी स्थिति में इन दस्तावजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि वे इन दोनों दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता सुझाएं नाम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। शासन ने भागीरथपुरा मामले के लिए दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए अधिकारियों की कमेटी बना दी है। यह जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ दिखावा है। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे कलेक्टर के साथ इस मामले की स्वतंत्र निगरानी के लिए बनाई जाने वाले कमेटी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करें। 27 से पहले दे दें आपत्ति शासन ने 20 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। बताया था कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बुधवार को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि उन्हें अगर इस रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की आपत्ति है तो वे इसे 27 जनवरी से पहले पेश कर दें।