samacharsecretary.com

भागीरथपुरा मामला: हाई कोर्ट का बड़ा निर्देश, टेंडर प्रक्रिया और प्रदूषण बोर्ड के दस्तावेज होंगे संरक्षित

इंदौर भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में हाई कोर्ट का आदेश जारी हो गया है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का संपूर्ण रिकॉर्ड (टेंडर प्रक्रिया सहित) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन दस्तावेजों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से भी कहा कि उन्हें नगर निगम और शासन द्वारा 20 जनवरी को प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर अगर किसी तरह की आपत्ति है तो प्रस्तुत कर दें। कोर्ट ने इस मामले में कलेक्टर के साथ बनाई जाने वाली स्वतंत्र कमेटी के लिए याचिकाकर्ताओं से नाम मांगे हैं। अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में पांच अलग-अलग याचिकाएं चल रही हैं। इन याचिकाओं में मंगलवार 20 जनवरी को करीब डेढ घंटे सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था जो बुधवार दोपहर जारी हुआ। तीन पेज के आदेश में कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ताओं को आशंका है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने के लिए हुई टेंडर प्रक्रिया के दस्तावेजों के साथ छोड़छाड़ की जा सकती है।   कोर्ट ने दिया दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का निर्देश याचिकाकर्ता ने ऐसी ही आशंका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की उस रिपोर्ट के साथ होने की आशंका भी व्यक्त की है जिसमें पानी के नमूने दूषित पाए गए थे। ऐसी स्थिति में इन दस्तावजों को सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। कोर्ट ने कलेक्टर और निगमायुक्त से कहा है कि वे इन दोनों दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। याचिकाकर्ता सुझाएं नाम सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा गठित समिति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें इस पर विश्वास नहीं है। शासन ने भागीरथपुरा मामले के लिए दोषी अधिकारियों का पता लगाने के लिए अधिकारियों की कमेटी बना दी है। यह जिम्मेदार अधिकारियों को बचाने के लिए सिर्फ दिखावा है। कोर्ट ने आदेश में याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे कलेक्टर के साथ इस मामले की स्वतंत्र निगरानी के लिए बनाई जाने वाले कमेटी के लिए सदस्यों के नाम प्रस्तावित करें। 27 से पहले दे दें आपत्ति शासन ने 20 जनवरी को हुई सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश की थी। बताया था कि मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बुधवार को जारी आदेश में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा है कि उन्हें अगर इस रिपोर्ट को लेकर किसी तरह की आपत्ति है तो वे इसे 27 जनवरी से पहले पेश कर दें।

धनबाद के कालेज में मोबाइल से परीक्षा का पेपर हल करते दिखीं छात्राएं

धनबाद. बीएसएस महिला कालेज की छात्राओं का मोबाइल देखकर परीक्षा में लिखते वीडियो वायरल हो गया है। किसी छात्रा ने ही मोबाइल से वीडियो बनाया और वायरल कर दिया। वायरल वीडियो में छात्राएं मोबाइल देखकर लिखती दिख रही हैं। आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन-आइसा की ओर से कालेज परिसर में चला जा रहे सदस्यता अभियान के दौरान कुछ छात्राओं ने उनसे इसकी शिकायत की। आइसा की जिला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि उन्होंने इसे लेकर प्राचार्य सहित अन्य शिक्षकों से बात की। प्राचार्य ने मोबाइल देख कर लिखने की बात को गलत बताया। आइसा से जुड़ी छात्राओं ने बताया कि कालेज के कुछ शिक्षकों की ओर से मामले को लेकर उन पर दबाव भी बनाया गया। साक्ष्य के रूप में उन्होंने इसका वीडियो बनाया। बाद में उन्होंने बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की डीएसडब्ल्यू डा. पुष्पा कुमारी से मिलकर उनसे मामले की शिकायत की। कहा कि जल्द ही परिस्थिति में सुधार नहीं हुआ तो बीएसएस कालेज के खिलाफ सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। राज्य उपाध्यक्ष स्नेहा कुमारी महतो, राज्य सह सचिव रितेश मिश्रा, बीबीएमकेयू प्रभारी दीपक महतो, ला कालेज की अध्यक्ष पायल, उपाध्यक्ष अंजलि, बीएसएस महिला कालेज की प्रतिनिधि प्राची दुबे, पल्लवी, रोशन, शशि राज, रिशु पांडे, साहिल उपाध्याय, अमन, सुजल समेत अन्य शामिल थे। कालेज ने 28 से 30 तक प्री-बोर्ड परीक्षा मोबाइल देख कर परीक्षा में लिखने का वीडियो वायरल होने के बीच बीएसएस कालेज की ओर से 12वीं की फाइनल प्री-बोर्ड परीक्षा संबंधी नोटिस भी मंगलवार को जारी किया गया। कालेज से जारी नोटिस में 28 से 30 तक प्री-बोर्ड परीक्षा की सूचना जारी की गई है। पहली पाली में दिन में 11 से 12 तथा दूसरी पाली में दोपहर एक से तीन बजे तक प्री-बोर्ड की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

अरावली मुद्दे पर SC का फैसला: 100 मीटर नियम पर रोक और अवैध खनन के खिलाफ कड़ा कदम

  नई दिल्ली    अरावली क्षेत्र में खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम सुनवाई करते हुए साफ कहा कि अवैध खनन एक गंभीर अपराध है और इसके पर्यावरणीय असर भयानक और अपूरणीय हो सकते हैं. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है और तब तक केंद्र व संबंधित राज्यों को अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. शुरुआती चिंता के बिंदु सामने आए: CJI सुनवाई की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा कि कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कुछ गंभीर चिंता के क्षेत्र चिन्हित किए हैं और इन पर केंद्र सरकार की सहायता की आवश्यकता है. CJI ने स्पष्ट किया कि यह कोई विरोधात्मक मुकदमा नहीं है, बल्कि उद्देश्य समस्या की जड़ तक पहुंचना है. इसी क्रम में कोर्ट ने एमिकस क्यूरी को एक विस्तृत नोट दाखिल करने को कहा और स्पष्ट किया कि तब तक पहले से लागू व्यवस्थाएं जारी रहेंगी. राजस्थान में अब भी कट रहे पेड़, दिए जा रहे खनन पट्टे राजस्थान के किसानों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि जस्टिस ओका की 2024 की पीठ के आदेशों के बावजूद राज्य में खनन पट्टे दिए जा रहे हैं और पेड़ों की कटाई जारी है. इस पर CJI ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे आदेश बिल्कुल साफ हैं. दुर्भाग्य से अवैध खनन और भ्रष्टाचार मौजूद है. राज्य को अपनी मशीनरी हरकत में लानी होगी. अवैध खनन हर हाल में रोका जाना चाहिए, यह एक अपराध है. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि यदि कहीं अवैध खनन की जानकारी है तो उसकी प्रतिनिधि शिकायत ASG कार्यालय में दी जाए. साथ ही कोर्ट ने साफ किया कि जब मामला पहले ही सुओ मोटो लिया जा चुका है, तो नई रिट याचिकाओं से बचा जाए ताकि सुनवाई भटके नहीं. स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की जरूरत ASG ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सशक्त समिति (CEC), एमिकस क्यूरी की सहायता करेगी. इस पर CJI ने कहा कि अब जरूरत है कि वन, खनन, पर्यावरण और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ एक साथ काम करें. कोर्ट ने संकेत दिया कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष विशेषज्ञ समिति बनाई जाएगी, जो इस पूरे मसले पर कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी, ताकि सभी पहलुओं पर समग्र दृष्टि से विचार हो सके. 100 मीटर नियम पर रोक जारी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरावली को लेकर पहले दिए गए उस आदेश पर लगी रोक जारी रहेगी, जिसमें 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने की बात कही गई थी. कोर्ट ने दोहराया कि अरावली जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही भविष्य की पीढ़ियों के अधिकारों पर सीधा असर डालती है. अरावली की परिभाषा पर उठे कानूनी सवाल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अरावली पर्वतमाला को सख्ती से परिभाषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि भूगर्भीय रूप से इसमें उप-टेक्टॉनिक संरचनाएं भी शामिल हैं. उन्होंने इस मुद्दे पर प्रारंभिक सुनवाई की मांग की. इस पर CJI ने कहा कि यदि एमिकस या केंद्र से कोई अहम पहलू छूट गया है, तो उस पर सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश सभी पक्ष विस्तृत नोट दाखिल करें एमिकस और सरकार पर्यावरण, वन और खनन विशेषज्ञों के नाम सुझाएं प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति कोर्ट की सीधी निगरानी में काम करेगी राजस्थान सरकार यह सुनिश्चित करे कि अवैध खनन तुरंत रोका जाए दिसंबर में दिया गया पिछला आदेश अगले निर्देश तक लागू रहेगा कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ‘वन’ और ‘अरावली’ की परिभाषाओं को अलग-अलग रखा जाएगा. जहां ‘वन’ की परिभाषा व्यापक होगी, वहीं ‘अरावली’ को संकीर्ण दायरे में देखा जाएगा.  एमिकस क्यूरी के. परमेश्वर को चार हफ्तों में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी. सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि अवैध खनन को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके पर्यावरणीय प्रभाव को पलटना लगभग असंभव होता है.

छत्तीसगढ़ आबकारी नीति व प्रबंधन संस्थान को लीज पर जमीन को मिली मंजूरी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई. नए साल में हुई पहली साय कैबिनेट की बैठक में विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई. इसके बाद कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर कैबिनेट ने मुहर लगाई है. 1) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव का अनुमोदन तथा इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया गया. 2) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में उच्च कोटि का शैक्षणिक संस्थान स्थापित किये जाने हेतु श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को उनके नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना के लिए सेक्टर-18 में चिन्हांकित लगभग 40 एकड़ भू-खण्ड का आबंटन लीज के रूप में एकमुश्त 90 वर्षाें के लिए करने की स्वीकृति प्रदान की है. एसव्हीकेएम एक ख्याति प्राप्त संस्था है, जो वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत तथा वर्तमान में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित है, जोकि एक लाख से अधिक छात्रों को प्रति वर्ष प्री-प्राइमरी से लेकर डॉक्टोरल कार्यक्रमों में शिक्षा प्रदान करता है. वर्ष 2025 में एनआईआरएफ यूनिवर्सिटी रैकिंग में इस संस्था को 52वां रैंक प्राप्त हुआ है. नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को और मजबूती मिलेगी. 3) मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में 04 नवीन उद्यमिता केन्द्रों की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू का निर्णय लिया है. इससे राज्य में आईटी/आईटीईएस उद्योग तथा तकनीकी स्टार्ट-अप इको सिस्टम को प्रोत्साहित करने में यह एमओयू महत्वपूर्ण होगा. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के 68 केन्द्र संचालित है, जिनमें 60 भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित है. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से एआई, मेडटेक (हर्बल मेडिसिन एवं वन उत्पाद आधारित), स्मार्ट सिटी तथा स्मार्ट एग्री उद्यमिता केन्द्रों के माध्यम से आगामी तीन से पांच सालों में डोमेन विशेष के 133 स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देंगे. राज्य सरकार द्वारा छात्रों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं तथा उद्योगों को ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकसित करने में सहयोग प्रदान करने के लिए एसटीपीआई के माध्यम से एक इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास (ईएसडीडी) केन्द्र स्थापित किया जाएगा, जो प्रति वर्ष 30 से 40 हार्डवेयर, स्टार्टअप और एमएसएमई को सभी सहायता प्रदान करेगा. 4) मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओ में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, वर्तमान संसाधनों को सुदृढीकरण करने तथा निर्धारित मानक के अनुसार जांच की संख्या बढ़ाने के लिए राज्य के जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लैब के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक निर्णय लिए गए हैं.

मैक्रों का ब्लू सनग्लास अंदाज, दावोस में ट्रंप को बर्दाश्त की हद बताने वाला बयान

दावोस फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्विटजरलैंड के दावोस में दिए गए अपने भाषण से अतंरराष्ट्रीय हलकों में सनसनी मचा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जुबानी हमलों का लगातार सामना कर रहे मैक्रों ने बिगड़ते वर्ल्ड ऑर्डर पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने अपने भाषण में "बुलीज़" (bullies) जैसे शब्दों का प्रयोग किया और कहा कि जोर-जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात की.  इमैनुएल मैक्रों ने बिना नाम लिए लेकिन स्पष्ट रूप से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ओर इशारा करते हुए कहा कि दुनिया "एक नियम-रहित विश्व" (world without rules) की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को पैरों तले कुचला जा रहा है और सिर्फ "ताकतवर का कानून" (law of the strongest) चल रहा है.  मैक्रों ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में जुटे विश्व भर के नेताओं को आसामनी रंग सनग्लासेज पहने मैक्रों ने संबोधित करते हुए कहा, "देखिए हम किस स्थिति में हैं. मेरा मतलब है, डेमोक्रेसी के खिलाफ, तानाशाही की तरफ बदलाव. ज़्यादा हिंसा, 2024 में 60 से ज़्यादा युद्ध – यह एक बिल्कुल रिकॉर्ड है, भले ही मुझे पता चला कि उनमें से कुछ फिक्स थे. और टकराव नॉर्मल हो गया है, हाइब्रिड हो गया है, नई मांगों, जगह, डिजिटल जानकारी, साइबर, व्यापार वगैरह में फैल रहा है." अंतर्राष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जाता है  मैक्रों ने अमेरिकी दादागीरी की चर्चा करते हुए कहा कि, "यह एक ऐसी दुनिया की ओर भी बदलाव है जहां कोई नियम नहीं हैं जहां अंतर्राष्ट्रीय कानून को पैरों तले रौंदा जाता है और जहां ऐसा लगता है कि सिर्फ़ सबसे ताकतवर का कानून ही मायने रखता है." ट्रंप से 200 फीसदी टैरिफ की धमकी झेल चुके फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाएं फिर से उभर रही हैं. जाहिर है रूस का युद्ध, यूक्रेन के खिलाफ़ रूस का आक्रामक युद्ध, जो अगले महीने अपने चौथे साल में प्रवेश करेगा और मध्य पूर्व और पूरे अफ्रीका में संघर्ष जारी हैं. बहुपक्षवाद कमजोर किया जा रहा है यह एक ऐसी दुनिया की ओर भी बदलाव है जहां प्रभावी सामूहिक शासन नहीं है और जहां बहुपक्षवाद उन शक्तियों द्वारा कमज़ोर किया जा रहा है जो इसमें बाधा डालती हैं या इससे मंह मोड़ लेती हैं, और नियम कमज़ोर हो रहे हैं.  ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को ठेंगा दिखाने की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए मैक्रों ने कहा कि, "मैं ऐसे इंटरनेशनल संगठनों के कई उदाहरण दे सकता हूं जिन्हें बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने कमज़ोर कर दिया है या छोड़ दिया है। और जब हम स्थिति को देखते हैं, तो यह साफ़ तौर पर बहुत चिंताजनक समय है, क्योंकि हम उस स्ट्रक्चर को खत्म कर रहे हैं जहां हम स्थिति को ठीक कर सकते हैं और हमारे सामने आने वाली आम चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. टैरिफ का इस्तेमाल संप्रभुता पर प्रेशर बनाने के लिए मैक्रों ने कहा कि अब सामूहिक शासन की बजाय टकराव का रास्ता अपनाया जा रहा है. अमेरिकी टैरिफ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका से ट्रेड एग्रीमेंट के ज़रिए मुकाबला जो हमारे एक्सपोर्ट हितों को कमज़ोर करता है, ज़्यादा से ज़्यादा रियायतें मांगता है और खुले तौर पर यूरोप को कमज़ोर करने और अपने अधीन करने का लक्ष्य रखता है, साथ ही नए टैरिफ का अंतहीन जमावड़ा जो मूल रूप से अस्वीकार्य है, खासकर जब उनका इस्तेमाल क्षेत्रीय संप्रभुता के खिलाफ दबाव बनाने के लिए किया जाता है. फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि इस समस्या को ठीक करने के लिए इसका जवाब है ज़्यादा सहयोग. और नए तरीके अपनाना. उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर ज़्यादा आर्थिक संप्रभुता और रणनीतिक अर्थव्यवस्था बनाना है, खासकर यूरोपियनों के लिए.  आसमानी रंग का गोगल्स चमकाकर मैक्रां ने महफिल लूट ली इस संबोधन में राष्ट्रपति मैक्रों के भाषण के अलावा उनका आसमानी सनग्लास भी चर्चा में रहा. अमूमन बिना चश्मा के दिखने वाले मैंक्रों इस बार आसमानी सनग्लास में थे. उनका ये लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि इस चश्मे की वजह मेडिकल है. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि, 'उनकी आंखों में समस्या है. मीटिंग की शुरुआत में ही उन्होंने विनम्रता से कहा, "सनग्लासेस के लिए माफी चाहता हूं, मेरी आंखों में हल्की दिक्कत है. फ्रांसीसी मीडिया के अनुसार, इसका कारण एक फटी हुई खून की नस थी, जिससे मैक्रों की आंखों में सूजन आ गई थी. बता दें कि 15 जनवरी को फ्रांसीसी राष्ट्रपति को साफ तौर पर लाल और सूजी हुई आंख के साथ देखा गया था. 

मंत्री सारंग ने कहा, दिव्यांगजन स्पर्श मेला सामाजिक बदलाव में अहम कदम

दिव्यांगजन स्पर्श मेला सामाजिक दृष्टिकोण बदलाव में सार्थक पहल : मंत्री सारंग तीन दिवसीय राज्य स्तरीय दिव्यांगजन स्पर्श मेले का शुभारंभ सांस्कृतिक, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों का होगा संगम भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण एवं सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि सामाजिक न्याय विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय दिव्यांगजन स्पर्श मेला, सामाजिक दृष्टिकोण के बदलाव में एक सार्थक पहल होगा। इस तरह के आयोजन दिव्यांगजनों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करते हैं। इसके साथ ही समाज की इस वर्ग के प्रति सकारात्मक सोच  को बढ़ाते हैं। उन्होंने यह बात पंडित खुशीलाल आयुर्वेदिक संस्थान के सभागार में तीन दिवसीय दिव्यांगजन स्पर्श मेला के शुभारंभ अवसर पर कहीं। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम परिषद किशन सूर्यवंशी भी उपस्थित थे। मंत्री सारंग ने कहा कि स्पर्श मेला एक संवेदनशील पहल है इस तरह के आयोजनों से दिव्यांगजनों में समानता की भावना का संचार होता है। उन्होंने कहा कि स्पर्श मेले से दिव्यांगजन के मन, मस्तिष्क को नवीन ऊर्जा मिलेगी। शारीरिक कमी उनके आर्थिक, सामाजिक और व्यक्तित्व के विकास में बाधक नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ही विजन है कि उन्होंने नि:शक्तजनों को एक नया शब्द दिव्यांगजन देकर उनके प्रति सामाजिक सोच में बदलाव दिलाया है। सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर समाज के कमजोर वर्ग को मुख्य धारा से जोड़ने के लिये लगातार प्रयास कर रहा हैं। उन्होंने दिव्यांग स्पर्श मेले में दिव्यांग कलाकारों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स और अन्य दैनिक उपयोग के उत्पादन की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के दिव्यांग खिलाड़ियों द्वारा पैरा-ओलम्पिक गेम्स में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश को नहीं पहचान दिलाई है। उन्होंने इस तरह के आयोजन जिला और संभाग पर भी करने की सलाह सामाजिक न्याय विभाग को दी। मंत्री सारंग ने कहा कि खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा भी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए लगातार अवसर और प्रोत्साहन दिया जाता रहेगा। महापौर श्रीमती मालती राय ने स्पर्श मेले का आयोजन के लिए सामाजिक न्याय विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि स्पर्श मेले दिव्यांग बच्चों के प्रतिभाओं को दिखाने का एक अच्छा प्लेटफार्म बनेगा। उन्होंने इस तरह के आयोजन, हर स्तर पर किए जाने की आवश्यकता जताई। प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय दिव्यांगजन कल्याण श्रीमती सोनाली वांयगणकर ने बताया की 21 जनवरी से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित किए जाने वाले दिव्यांग स्पर्श मेले में प्रदेश के सभी शासकीय और अशासकीय दिव्यांग स्कूलों के बच्चों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि स्पर्श मेले में दिव्यांगजनों की सांस्कृतिक, खेलकूद एवं रचनात्मक प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इन खेल प्रतियोगिताओं इनडोर और आउटडोर खेल होंगे। इसमें क्रिकेट, दौड़ और फन गेम्स तथा सायंकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, 23 जनवरी को विजेताओं को पुरस्कार वितरण के साथ समापन होगा स्पर्श मेले में दिव्यांग कलाकारों के उत्पादों को मिली सराहना तीन दिवसीय मेले में प्रदेश से दिव्यांग कलाकारों की और संस्थाओं की प्रदर्शनी लगाई गई है। मंत्री सारंग ने कलाकारों के बेहतरीन उत्पादों के प्रदर्शन के लिये सराहा। इनमें इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और भोपाल से आये कलाकार सम्मिलित है। दिव्यांग क्रिकेट मैच का शुभारंभ स्पर्श मेले में दिव्यांग खिलाड़ियों के उद्घाटन मैच इंदौर और भोपाल के बीच खेला गया, दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र के विधायक भगवान दास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, पार्षद डॉ. रेहना ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा विधायक सबवानी ने बैटिंग कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।

सांसदों को चेतावनी: समय पर न पहुंचे तो हाजिरी कटेगी, सैलरी भी प्रभावित होगी

नई दिल्ली संसद के बजट सत्र में लोकसभा सचिवालय सांसदों की हाजिरी को लेकर एक नई शुरुआत करने जा रहा है। अब सांसदों की हाजिरी सदन के भीतर सीट पर बैठकर ही डिजिटल तरीके से लग पाएगी। यदि कोई सांसद देरी से सदन में पहुंचता है और तब तक हंगामे या किसी और वजह से सदन दिनभर के लिए स्थगित हो जाता है तो फिर माननीय की उस दिन की हाजिरी नहीं लग पाएगी। उन्हें एक दिन के वेतन-भत्ते से हाथ धोना पड़ेगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम यह प्रावधान करने जा रहे हैं कि सदन में पहुंचकर ही हाजिरी लगाई जा सकेगी। अभी तक सदन के बाहर हाजिरी के लिए जो रजिस्टर होता था, अब उसे हटा देंगे। ऐसे सांसद जो रजिस्टर में हाजिरी लगाकर चले जाते थे, या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे, उनके लिए मुश्किल होगी। उन्हें सदन में जाना ही होगा। उन्होंने कहा कि संसद की कार्यवाही डिजिटल हो चुकी है। अब उसमें एआई का इस्तेमाल परीक्षण के तौर पर चल रहा है। इसमें काफी निगरानी और सावधानी की जरूरत है। अभी परीक्षण के तौर पर वक्ताओं के भाषणों के अनुवाद में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। बाद में लोग उसे चेक करते हैं। यह 80 फीसदी तक सटीक है। ओम बिरला ने यह जानकारी 86वें ऑल इंडिया प्रिज़ाइडिंग ऑफिसर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में दी. उन्होंने बताया कि संसद परिसर में सदन के बाहर से हाजिरी लगाने की पुरानी व्यवस्था अब समाप्त कर दी जाएगी. लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अब केवल सदन के अंदर सीट पर बैठने पर ही उपस्थिति दर्ज होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी कारणवश सदन स्थगित हो जाता है, तो उसके बाद कोई भी सदस्य हाजिरी दर्ज नहीं कर सकेगा. इस कदम से सांसदों को रोज़ाना कार्यवाही की शुरुआत से ही सदन में उपस्थित रहने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा. ओम बिरला ने कहा कि यह फैसला पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है, ताकि उपस्थिति वास्तविक भागीदारी को दर्शाए, न कि केवल संसद परिसर में मौजूद रहने को. उन्होंने बताया कि लोकसभा कक्ष में हर सीट पर निर्धारित कंसोल पहले से ही लगाए जा चुके हैं. यह सुधार संसदीय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और सत्रों की उत्पादकता बढ़ाने की व्यापक पहल का हिस्सा है. लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसद में एआई टूल्स के इस्तेमाल को लेकर परीक्षण किया जा रहा है और संभावित त्रुटियों से निपटने के लिए मैनुअल सत्यापन की व्यवस्था भी की गई है. चुनिंदा बैठकों में रियल-टाइम ट्रांसलेशन का प्रयोग हो रहा है, जो आने वाले महीनों में पूरी तरह लागू किया जाएगा. इसके अलावा सांसदों को 24×7 शोध सहायता सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं. ओम बिरला ने विधानसभा सत्रों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई और कहा कि विधायी संस्थाओं की प्रभावशीलता, जवाबदेही और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि सदन के संचालन की जिम्मेदारी भले ही अध्यक्ष की हो, लेकिन सुचारू कार्यवाही सरकार और सदस्यों के सहयोग पर निर्भर करती है. सांसदों की उपस्थिति से जुड़ा यह कदम संसद की गरिमा को मजबूत करने वाला बताया जा रहा है और कई सदस्यों ने इसका स्वागत किया है. उल्लेखनीय है कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा और केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. आईटी कंपनी की मदद से इसे 100 फीसदी सटीक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि मानसून सत्र से अनुवाद को पूरी तरह से एआई संचालित कर देंगे। इससे फायदा यह होगा कि अभी अनुवाद के कारण चार घंटे में कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होता है। एआई के इस्तेमाल से यह आधे घंटे में हो जाएगा। अनुसंधान में भी एआई का इस्तेमाल किया जाएगा। विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए जेल जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान से जुड़े विधेयक पर संसदीय समिति में विपक्ष शामिल नहीं हुआ लेकिन अब विपक्ष की तरफ से संकेत दिए गए हैं कि वह अपने विचार रखना चाहता है। इस बारे में पूछे जाने पर बिरला ने कहा कि यदि वे आते हैं तो उनके विचारों को समाहित करने का प्रयास किया जाएगा। बजट सत्र पर विपक्ष के संभावित रुख पर बिरला ने कहा कि वे चाहते हैं सदन चले। विपक्ष को अपनी बात चर्चा में रखनी चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में वह हर बात रख सकता है। विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले ओम बिरला ने कहा कि लखनऊ में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में कहा, ज्यादातर विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में संकल्प पारित करेंगे कि विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन चले। कुछ का रिकॉर्ड अच्छा है। असीमित न हो अधिकार एक प्रश्न के उत्तर में बिरला ने कहा कि स्पीकरों के अधिकारों पर भी कई बैठकों में चर्चा हुई है। वे चाहते हैं कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए। पेपरलेस सदन बिरला ने कहा,संसद के अलावा सभी विधानसभाओं को पेपरलेस बनाया जा चुका है। अनेक विधानसभाओं की कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव भी हो रही है। इसी साल सभी विधानसभाओं का पूरी तरह से डिजिटलीकरण हो जाएगा। महाभियोग पर रिपोर्ट का इंतजार जस्टिस वर्मा के खिलाफ लाए गए महाभियोग पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को लेकर ओम बिरला ने कहा कि समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही रिपोर्ट आएगी उस पर आगे बढ़ा जाएगा। बजट सत्र में महाभियोग पर अभी कह नहीं सकते।

मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित

लोकतंत्र की आत्मा हैं न्याय, समता व बंधुता: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को किया संबोधित “सीखो और सिखाओ” के मंच हैं ऐसे सम्मेलनः सीएम योगी ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषदः मुख्यमंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में बुधवार को तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश आए सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। संविधान संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देश में न केवल विधायी कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है। संविधान के तीन शब्द (न्याय, समता और बंधुता) भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करते हैं। न्याय कैसे प्राप्त होना है, इसका कानून विधायिका के मंच पर तैयार होता है। समतामूलक समाज की स्थापना में सरकार की योजनाएं योगदान दे सकें, उसकी कार्ययोजना का स्थल भी विधायिका का मंच बनता है। विधायिका बंधुता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां सहमति व असहमति के बीच भी संवाद के माध्यम से समन्वय होता है।  लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था देश में अत्यंत मजबूत  सीएम योगी ने कहा कि देश में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था अत्यंत मजबूत है और यह दुनिया के लिए प्रेरणा है। सदन में जनप्रतिनिधि के माध्यम से अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति की आवाज मजबूती से सुनी जा सकती है और संसद इसकी प्रेरणा का केंद्रबिंदु है। उसके माध्यम से देश में योजनाएं बनती हैं। पांच बार लोकसभा सदस्य रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसद में रहकर सीखा कि सामान्य जीवन में सरकार की गतिविधियों, आपसी व्यवहार और नियम के अंतर्गत इन कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। विधान सभा-विधान परिषद केवल संसद के नियमों-परिनियमों का अवलोकन-प्रशिक्षण ले ले तो उसे अपने सदन संचालन में काफी आसानी होगी।  संसद के प्रति श्रद्धा का भाव हर भारतवासी का दायित्व  सीएम ने कहा कि सतीश महाना ने 2022 में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभाला तो मैंने उनसे कहा कि प्रश्नकाल में 20 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं, लेकिन सवा घंटे के प्रश्नकाल में केवल दो-तीन सदस्य ही बोल पाते हैं। क्या हम भी इसे संसद की तर्ज पर आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर उन्होंने तत्काल नियमावली में परिवर्तन किया। अब सवा घंटे में 20 तारांकित प्रश्न और हर प्रश्न के साथ दो-तीन अनुपूरक प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं। प्रश्न करने वाले और उत्तर देने वाले मंत्रीगण, दोनों पूरी तैयारी के साथ आते हैं। सदन में अधिक से अधिक जनप्रतिनिधियों की सहभागिता दिखती है। संसद हमारे लिए प्रेरणा बनी। हमारे पास सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था के रूप में संसद है। यदि हम कुछ कर रहे हैं तो संसद ही उसका आधार बनती है, उसके प्रति श्रद्धा हर भारतवासी का दायित्व है।  एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है भारत सीएम योगी ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ का जिक्र किया, फिर कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि ग्राम स्वराज की परिकल्पना को गांवों ने साकार किया। देश में रूपरंग, खानपान, वेशभूषा अलग हो सकते हैं, लेकिन पूरा भारत एक भाव-एक भंगिमा के साथ बोलता और सोचता है। उसकी आस्था एक होती है। संसद उस आस्था को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। संसद को आदर्श के रूप में बढ़ाएंगे तो विधायिका और मजबूत-सशक्त होगी।  ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ पर 24 घंटे चली चर्चा के सहभागी बने 300 सदस्य सीएम योगी ने सम्मेलन में पारित हुए छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अभिनंदनीय बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने आजादी के अमृत महोत्सव में आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना बनाने को कहा। ‘विजन 2047- विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के संकल्प के साथ हम आगे बढ़े हैं। सीएम ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश, आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ पर सत्तापक्ष व विपक्ष के 300 से अधिक सदस्य 24 घंटे तक चलने वाली चर्चा के सहभागी बने। चर्चा का शुभारंभ करने के बाद मैं कुछ देर बैठा रहा, फिर अन्य प्रशासकीय कार्यों व बैठकों के लिए जाना पड़ा। रात 11 बजे मैं फिर सदन में आया तो भी यहां बोलने की होड़ दिखी। बहुत अच्छे सुझाव आए। हर व्यक्ति के अनुभव का लाभ अत्यंत प्रभावी होता है। विधानसभा-परिषद में लोगों ने विकास के बारे में मुद्दों को रखा और विकसित भारत के लिए अपनी जिम्मेदारी का भी जिक्र किया। विकसित भारत केवल भारत सरकार, प्रधानमंत्री का ही कार्य नहीं है,  हम भी कैसे इस अभियान के सारथी-सिपाही बन सकते हैं, इस पर भी चर्चा हुई। पीठासीन अधिकारियों के इस सम्मेलन में भी इस प्रस्ताव को पारित करते हुए, प्रभावी ढंग से इसको आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ विकसित भारत की परिकल्पना को साकार बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को सार्थक गति प्रदान की है।  सीएम ने 30 बैठकों के प्रस्ताव का किया स्वागत सीएम ने कहा कि यूपी में सदन की कार्यवाही की प्रशंसा की। कहा, यहां कार्यवाही अत्यंत सुगमता से चलती है। सीएम ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव पारित किए जाने को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह संसद और विधानसभा के लिए ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी प्रेरणा है। जनता के द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि विकास की धुरी बनते हैं। तकनीक के इस युग में हम खुद को पीछे नहीं छोड़ सकते। जब सरकार के सामने यह बात आई कि ई-विधान होना है तो हमने कहा कि तत्काल इसे लागू कीजिए। आज यूपी की विधानसभा-परिषद, कैबिनेट और बजट भी पेपरलेस है। सीएम ने कहा कि जनप्रतिनिधि भी तकनीक से अपडेट हों, उनके उचित प्रशिक्षण समेत सभी प्रस्ताव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।  ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है यूपी विधानसभा-परिषद सीएम ने कहा कि यूपी विधानसभा ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है। स्थायी विकास लक्ष्यों (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) पर भी यहां लगातार 37-38 घंटे चर्चा हुई। उसके लक्ष्य निर्धारित हुए। मंत्रिमंडल, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के स्तर पर कमेटी गठित हुई, जो इन लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में कार्य कर रही है। 26 नवंबर, … Read more

चांदी के बढ़ते दामों से व्यापार ठप होने की आशंका, कारोबारी और ग्राहक दोनों चिंतित

इंदौर   देश में चांदी और सोने के भाव में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि हो रही है. बुधवार को चांदी 3 लाख 25 हजार किलो के भाव को पार कर गई. वहीं प्रति तोला सोना भी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गया है. इन हालातों में अब बाजार में चांदी मिलना मुश्किल हो रही है. बड़े व्यवसायियों ने भी चांदी की खरीदी बिक्री से हाथ खींच लिए हैं. ग्राहक समझ नहीं पा रहे कि चांदी में इतनी ज्यादा चमक क्यों बढ़ गई है. इंदौर सराफा मार्केट की चमक फीकी दुनिया भर में चांदी की खरीदी में आ रही तेजी के चलते मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में भी चांदी 325000 के आंकड़े को पार कर गई. इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने बताया "बढ़ती कीमतों के कारण कई शहरों में चांदी के व्यापार को लेकर विवाद हो रहे हैं, जो व्यापारी बड़े व्यापारियों से माल खरीद कर बेचने के लिए ले जा रहा है, बढ़ती कीमत के कारण उसे खरीदी की रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है." कारीगर, ढलाई, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों की आजीविका पर असर चांदी के बढ़ते दामों ने सराफा बाजार में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसने 40 वर्षों का इतिहास तोड़ दिया। डेढ़ महीने के भीतर चांदी की कीमत दोगुणी होकर ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसकी कल्पना भी कारोबारियों ने नहीं की थी। 21 नवंबर को जहां चांदी का भाव एक लाख 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था, 20 जनवरी तक तीन लाख 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। यह उछाल सराफा उद्योग के लिए झटका है। अब बाजार में न खरीदार हैं, न विक्रेता। एक महीने से ठंडी पड़ी भट्ठियां, उम्मीद व आशंका के बीच फंसा सराफा उद्योग हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानें खुली तो हैं, लेकिन लेनदेन ठप है। इसी उथल-पुथल के बीच सराफा कारोबार को बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब चार दर्जन व्यापारियों की करीब 2500 किलो चांदी लेकर 10 कारोबारी फरार हो गए। करोड़ों की चांदी डूबने की आशंका ने छोटे और मझोले व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर भी संकट ला दिया है। कारीगर, ढलाई करने वाले, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों के लेकर अन्य की आजीविका इसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि एक पायल बनाने में ही करीब 10 से 12 मजदूरों को रोजगार मिलता है। लेकिन जब पायल ही नहीं बनेगी, तो ये मजदूर क्या करेंगे। चांदी न मिलने पर गिलट की पायल का काम अर्जुनपुरा के रहने वाले कारीगर अजय बताते हैं कि चांदी की माल नहीं मिलने पर अब उन्होंने गिलट की पायल बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन इसमें भी मजदूरी कम हो गई है। फिर भी परिवार के भरण पोषण को देखते हुए गिलट का काम ले लिया है।  मध्यम वर्ग से भी दूर हुई चांदी सराफा कारोबारी हुकुम सोनी का कहना है "बाजार में ग्राहकों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए चांदी खरीदना भी मुश्किल हो गया है. क्योंकि सबसे छोटा चांदी का आइटम भी अब ₹2000 तक पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है. गुजरात के सूरत में इन्हीं हालातों के कारण कई व्यापारियों ने चांदी का धंधा बंद कर दिया. ऐसी स्थिति अब इंदौर सराफा बाजार में आ रही है कई व्यापारियों में व्यापार के दौरान टकराव हो रहे हैं." शादी के सीजन में भी खरीदने की हिम्मत नहीं शादी का सीजन होने के बाद भी लोग चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं. ग्राहक आते हैं और रेट पूछकर वापस चले जाते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि हो सकता है आगे चलकर चांदी के रेट कम हो जाएं. लेकिन जब वही ग्राहक फिर वापस खरीदारी करने आता है तो कम से कम वजन के आइटम्स के बारे में जानकारी लेता है. दूसरी तरफ, चांदी को गिरवी रखने वाले अब उसे उठाने के लिए आ रहे हैं. इसको लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं. चांदी के भाव कम होने की उम्मीद नहीं सोना-चांदी के जानकार बता रहे हैं कि चांदी का फंड एवं कोष विकसित करने के कारण भी दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के हालातो में चांदी और सोना निवेशकों के लिए भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. चांदी उत्पादक देश पेरू में 23% चांदी का फंड है, जिसकी मात्रा 149000 टन है. इसी प्रकार चीन में 99000 टन और रूस में 70000 टन का चांदी कोष तैयार किया गया है. ऐसी स्थिति में चांदी के दाम कम होने की संभावना कम है.

ट्रंप की टैरिफ रणनीति के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक, मेगा डील होने के संकेत

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने अमेरिका की ओर से लगाए गए हाई टैरिफ के बावजूद अपना दमखम दिखाया है और आईएमएफ से लेकर वर्ल्ड बैंक तक दुनियाभर ने इसका लोहा माना है. देश दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ गेम (Trump Tariff Game) में उलझे हुए हैं और ताबड़तोड़ धमकियां दे रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर भारत लगातार खेल करता जा रहा है.  बीते कुछ दिनों में ओमान से लेकर न्यूजीलैंड समेत अन्य कई ट्रेड डील करने के बाद अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए (India-EU FTA) होने वाला है, जिसके सिग्नल खुद EU Chairman उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिए हैं और इसे सबसे बड़ी डील करार दिया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि दावोस के बाद वे भारत का दौरा कर सकती हैं. 'ग्लोबल GDP का एक चौथाई हिस्सा कवर' दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर बोलते हुए यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने संकेत दिया कि EU-India लंबे समय से रुके हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहे हैं. उर्सुला वॉन डेर ने इसे लेकर पॉजिटिव संकेत दिया कि ये डील दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों के बीच आर्थिक संबंधों को नया आकार दे सकती है. वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'अभी बहुत काम करना बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं, कुछ लोग इसे अब तक की सबसे बड़ी Trade Deal कहते हैं. यह एक ऐसा समझौता होगा जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.' उन्होंने इसे यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों में विविधता लाने और जोखिम कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है.  भारत को मिलेगा 27 देशों का बाजार भारत के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ ये व्यापार समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसका संभावित दायरा बहुत व्यापक है. ब्रसेल्स के लिए, भारत उसकी चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से सहयोगी माने जाने वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करने में एक बड़े पार्टनर के रूप में उभरा है. इस डील से भारत के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों वाले बाजार तक अधिक पहुंच बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. 2007 में शुरू हुई बातचीत अंतिम पड़ाव पर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत साल 2007 से चल रही थी और ये लगातार एक दशक तक ठप पड़ी रही. हालांकि, तमाम राजनीतिक गतिविधियों में नए सिरे से सक्रियता आने के बाद 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया था. तब से, India-EU Trade Deal को लेकर बात लगातार आगे बढ़ी है. जो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में सहयोग पर केंद्रित है. ट्रंप टैरिफ से दुनिया को डराने में लगे गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते साल 2025 की तरह से ही इस साल भी लगातार दुनिया को अपने टैरिफ से डराने में लगे हैं. उनके हालिया Tariff Attacks की बात करें, तो पहले उन्होंने ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने की धमकी दी, फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के अपने प्लान में रोड़ा बन रहे 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की वॉर्निंग दे डाली, जो 1 फरवरी से लागू होने वाला है और इसे 1 जून से बढ़ाकर 25% किए जाने की बात भी कही है.  वहीं डोनाल्ड ट्रंप की सबसे ताजा धमकी की बात करें, तो उन्होंने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ (Trump 200% Tariff Warning) लगाने की नई धमकी दे डाली है. इसके बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है. जापान से लेकर कोरिया तक के शेयर मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) नजर आ रहे हैं.