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चांदी के बढ़ते दामों से व्यापार ठप होने की आशंका, कारोबारी और ग्राहक दोनों चिंतित

इंदौर   देश में चांदी और सोने के भाव में रिकॉर्डतोड़ वृद्धि हो रही है. बुधवार को चांदी 3 लाख 25 हजार किलो के भाव को पार कर गई. वहीं प्रति तोला सोना भी डेढ़ लाख के करीब पहुंच गया है. इन हालातों में अब बाजार में चांदी मिलना मुश्किल हो रही है. बड़े व्यवसायियों ने भी चांदी की खरीदी बिक्री से हाथ खींच लिए हैं. ग्राहक समझ नहीं पा रहे कि चांदी में इतनी ज्यादा चमक क्यों बढ़ गई है. इंदौर सराफा मार्केट की चमक फीकी दुनिया भर में चांदी की खरीदी में आ रही तेजी के चलते मध्य प्रदेश के सबसे बड़े इंदौर सराफा बाजार में भी चांदी 325000 के आंकड़े को पार कर गई. इंदौर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकुम सोनी और मंत्री बसंत सोनी ने बताया "बढ़ती कीमतों के कारण कई शहरों में चांदी के व्यापार को लेकर विवाद हो रहे हैं, जो व्यापारी बड़े व्यापारियों से माल खरीद कर बेचने के लिए ले जा रहा है, बढ़ती कीमत के कारण उसे खरीदी की रकम चुकाना मुश्किल हो रहा है." कारीगर, ढलाई, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों की आजीविका पर असर चांदी के बढ़ते दामों ने सराफा बाजार में ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसने 40 वर्षों का इतिहास तोड़ दिया। डेढ़ महीने के भीतर चांदी की कीमत दोगुणी होकर ऐसे स्तर पर पहुंच गई है, जिसकी कल्पना भी कारोबारियों ने नहीं की थी। 21 नवंबर को जहां चांदी का भाव एक लाख 52 हजार रुपये प्रति किलोग्राम था, 20 जनवरी तक तीन लाख 22 हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचा। यह उछाल सराफा उद्योग के लिए झटका है। अब बाजार में न खरीदार हैं, न विक्रेता। एक महीने से ठंडी पड़ी भट्ठियां, उम्मीद व आशंका के बीच फंसा सराफा उद्योग हालात ऐसे हो गए हैं कि दुकानें खुली तो हैं, लेकिन लेनदेन ठप है। इसी उथल-पुथल के बीच सराफा कारोबार को बड़ा झटका उस वक्त लगा, जब चार दर्जन व्यापारियों की करीब 2500 किलो चांदी लेकर 10 कारोबारी फरार हो गए। करोड़ों की चांदी डूबने की आशंका ने छोटे और मझोले व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने सराफा कारोबार से जुड़े एक लाख मजदूरों के रोजगार पर भी संकट ला दिया है। कारीगर, ढलाई करने वाले, पालिश करने वाले, डिजाइनर, पैकिंग मजदूरों के लेकर अन्य की आजीविका इसी पर निर्भर है। स्थिति यह है कि एक पायल बनाने में ही करीब 10 से 12 मजदूरों को रोजगार मिलता है। लेकिन जब पायल ही नहीं बनेगी, तो ये मजदूर क्या करेंगे। चांदी न मिलने पर गिलट की पायल का काम अर्जुनपुरा के रहने वाले कारीगर अजय बताते हैं कि चांदी की माल नहीं मिलने पर अब उन्होंने गिलट की पायल बनाने का काम शुरू किया है, लेकिन इसमें भी मजदूरी कम हो गई है। फिर भी परिवार के भरण पोषण को देखते हुए गिलट का काम ले लिया है।  मध्यम वर्ग से भी दूर हुई चांदी सराफा कारोबारी हुकुम सोनी का कहना है "बाजार में ग्राहकों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है, क्योंकि अब मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए चांदी खरीदना भी मुश्किल हो गया है. क्योंकि सबसे छोटा चांदी का आइटम भी अब ₹2000 तक पहुंच गया है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है. गुजरात के सूरत में इन्हीं हालातों के कारण कई व्यापारियों ने चांदी का धंधा बंद कर दिया. ऐसी स्थिति अब इंदौर सराफा बाजार में आ रही है कई व्यापारियों में व्यापार के दौरान टकराव हो रहे हैं." शादी के सीजन में भी खरीदने की हिम्मत नहीं शादी का सीजन होने के बाद भी लोग चांदी नहीं खरीद पा रहे हैं. ग्राहक आते हैं और रेट पूछकर वापस चले जाते हैं. उन्हें उम्मीद रहती है कि हो सकता है आगे चलकर चांदी के रेट कम हो जाएं. लेकिन जब वही ग्राहक फिर वापस खरीदारी करने आता है तो कम से कम वजन के आइटम्स के बारे में जानकारी लेता है. दूसरी तरफ, चांदी को गिरवी रखने वाले अब उसे उठाने के लिए आ रहे हैं. इसको लेकर भी विवाद सामने आ रहे हैं. चांदी के भाव कम होने की उम्मीद नहीं सोना-चांदी के जानकार बता रहे हैं कि चांदी का फंड एवं कोष विकसित करने के कारण भी दाम बढ़ रहे हैं, क्योंकि युद्ध के हालातो में चांदी और सोना निवेशकों के लिए भी सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है. चांदी उत्पादक देश पेरू में 23% चांदी का फंड है, जिसकी मात्रा 149000 टन है. इसी प्रकार चीन में 99000 टन और रूस में 70000 टन का चांदी कोष तैयार किया गया है. ऐसी स्थिति में चांदी के दाम कम होने की संभावना कम है.

ट्रंप की टैरिफ रणनीति के बीच भारत का मास्टरस्ट्रोक, मेगा डील होने के संकेत

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने अमेरिका की ओर से लगाए गए हाई टैरिफ के बावजूद अपना दमखम दिखाया है और आईएमएफ से लेकर वर्ल्ड बैंक तक दुनियाभर ने इसका लोहा माना है. देश दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. भले ही डोनाल्ड ट्रंप अपने टैरिफ गेम (Trump Tariff Game) में उलझे हुए हैं और ताबड़तोड़ धमकियां दे रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर भारत लगातार खेल करता जा रहा है.  बीते कुछ दिनों में ओमान से लेकर न्यूजीलैंड समेत अन्य कई ट्रेड डील करने के बाद अब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच एफटीए (India-EU FTA) होने वाला है, जिसके सिग्नल खुद EU Chairman उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने दिए हैं और इसे सबसे बड़ी डील करार दिया है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा है कि दावोस के बाद वे भारत का दौरा कर सकती हैं. 'ग्लोबल GDP का एक चौथाई हिस्सा कवर' दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर बोलते हुए यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने संकेत दिया कि EU-India लंबे समय से रुके हुई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच रहे हैं. उर्सुला वॉन डेर ने इसे लेकर पॉजिटिव संकेत दिया कि ये डील दुनिया के दो सबसे बड़े बाजारों के बीच आर्थिक संबंधों को नया आकार दे सकती है. वॉन डेर लेयेन ने कहा, 'अभी बहुत काम करना बाकी है, लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते की कगार पर हैं, कुछ लोग इसे अब तक की सबसे बड़ी Trade Deal कहते हैं. यह एक ऐसा समझौता होगा जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक जीडीपी (Global GDP) का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा.' उन्होंने इसे यूरोपीय संघ के व्यापार संबंधों में विविधता लाने और जोखिम कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया है.  भारत को मिलेगा 27 देशों का बाजार भारत के लिए यूरोपीय यूनियन के साथ ये व्यापार समझौता इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसका संभावित दायरा बहुत व्यापक है. ब्रसेल्स के लिए, भारत उसकी चीन पर निर्भरता कम करने और रणनीतिक रूप से सहयोगी माने जाने वाले देशों के साथ संबंध मजबूत करने में एक बड़े पार्टनर के रूप में उभरा है. इस डील से भारत के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों वाले बाजार तक अधिक पहुंच बनेगा और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. 2007 में शुरू हुई बातचीत अंतिम पड़ाव पर भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत साल 2007 से चल रही थी और ये लगातार एक दशक तक ठप पड़ी रही. हालांकि, तमाम राजनीतिक गतिविधियों में नए सिरे से सक्रियता आने के बाद 2022 में इसे फिर से शुरू किया गया था. तब से, India-EU Trade Deal को लेकर बात लगातार आगे बढ़ी है. जो महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती में सहयोग पर केंद्रित है. ट्रंप टैरिफ से दुनिया को डराने में लगे गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीते साल 2025 की तरह से ही इस साल भी लगातार दुनिया को अपने टैरिफ से डराने में लगे हैं. उनके हालिया Tariff Attacks की बात करें, तो पहले उन्होंने ईरान के साथ व्यापारिक रिश्ते रखने वाले देशों पर 25% Tariff लगाने की धमकी दी, फिर ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के अपने प्लान में रोड़ा बन रहे 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ की वॉर्निंग दे डाली, जो 1 फरवरी से लागू होने वाला है और इसे 1 जून से बढ़ाकर 25% किए जाने की बात भी कही है.  वहीं डोनाल्ड ट्रंप की सबसे ताजा धमकी की बात करें, तो उन्होंने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ (Trump 200% Tariff Warning) लगाने की नई धमकी दे डाली है. इसके बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है. जापान से लेकर कोरिया तक के शेयर मार्केट क्रैश (Stock Market Crash) नजर आ रहे हैं. 

नदियों की धारा, एक्सप्रेसवे की गति और हवाई उड़ानों के विस्तार से उत्तर प्रदेश बना मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का नया मॉडल

यूपी दिवस विशेष जल-थल-गगन, उत्तर प्रदेश लिख रहा विकास की नई गाथा नदियों की धारा, एक्सप्रेसवे की गति और हवाई उड़ानों के विस्तार से उत्तर प्रदेश बना मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का नया मॉडल पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों वाले राज्य से उबरकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी बना देश के लिए मॉडल स्टेट विगत वर्षों में सड़क, रेल, जल और नभ, चारों साधन मिलकर बने यूपी की आर्थिक प्रगति की धुरी लखनऊ उत्तर प्रदेश का नाम आते ही कभी विशाल जनसंख्या, पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों की चर्चा होती थी। लेकिन, आज वही उत्तर प्रदेश विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर, तेज कनेक्टिविटी और मजबूत लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के दम पर भारत के विकास मानचित्र पर एक नई, सशक्त पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पौने नौ वर्षों में केवल योजनाएं नहीं बनाईं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारकर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया, जहां सड़क, रेल, जल और नभ, चारों साधन मिलकर आर्थिक प्रगति की धुरी बन रहे हैं। उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या में बड़ा राज्य नहीं, बल्कि विकास, निवेश और कनेक्टिविटी में भी अग्रणी राज्य बन चुका है। विश्व-स्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के सहारे उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है, जहां सड़कें गति देती हैं,  नदियां दिशा दिखाती हैं और हवाई मार्ग प्रदेश को विश्व से जोड़ते हैं। गंगा की धारा पर विकास की नई परिभाषा भारत में जलमार्ग परिवहन को नई दिशा देते हुए उत्तर प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर विकसित राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (NW-1) देश की पहली अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजना के रूप में सामने आया है। प्रयागराज से हल्दिया तक फैला यह जलमार्ग लगभग 1,620 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से करीब 1,100 किलोमीटर का खंड उत्तर प्रदेश में पहले से ही क्रियाशील है। यह केवल एक परिवहन मार्ग नहीं, बल्कि उत्तर भारत के लिए जीवन-रेखा समान लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बन चुका है। NW-1 के माध्यम से वाराणसी और प्रयागराज जैसे पारंपरिक व्यापारिक व निर्यात केंद्र अब सीधे कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह से जुड़ गए हैं। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आई है, बल्कि समयबद्ध और पर्यावरण-अनुकूल लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा मिला है। वाराणसी के अस्सी घाट व राजघाट जैसे टर्मिनल तथा प्रयागराज व गाजीपुर के फ्लोटिंग टर्मिनल यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश अब जलमार्ग आधारित अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स से उद्योगों को मिला बल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रणनीति का केंद्रबिंदु अब मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी बन चुका है। दादरी में विकसित किया जा रहा मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब और बोड़ाकी में प्रस्तावित मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं। इन हब्स के माध्यम से सड़क, रेल और जलमार्ग के बीच निर्बाध परिवहन संभव होगा, जिससे उद्योगों को कच्चे माल की आसान उपलब्धता और तैयार उत्पादों के त्वरित निर्यात की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और वेयरहाउसिंग का प्रमुख केंद्र बनाने में निर्णायक साबित हो रही है। एक्सप्रेसवे बने विकास की धमनियां उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे केवल सड़कें नहीं, बल्कि विकास की धमनियां बन चुके हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक, नोएडा-ग्रेटर नोएडा और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को राजधानी और औद्योगिक केंद्रों से जोड़ दिया है। देश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे भी जल्द शुरू होने वाला है। आज देश के 55 फीसदी एक्सप्रेसवे यूपी में हैं। इन एक्सप्रेसवेज के कारण जहां यात्रा समय में ऐतिहासिक कमी आई है, वहीं इनके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर, लॉजिस्टिक्स पार्क, मेडिकल हब और एजुकेशनल कॉरिडोर भी विकसित हो रहे हैं। वर्तमान में सात प्रमुख एक्सप्रेसवे संचालित हैं और पांच नए एक्सप्रेसवे निर्माणाधीन हैं, जबकि 10 एक्सप्रेसवे पर सर्वे जारी है। इनके पूर्ण होने के बाद उत्तर प्रदेश सर्वाधिक 22 एक्सप्रेसवे वाला देश का अग्रणी राज्य बन जाएगा, जो निवेशकों के लिए एक मजबूत संकेत है। हवाई कनेक्टिविटी: प्रदेश से विश्व तक उत्तर प्रदेश सरकार ने हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार को विकास का महत्वपूर्ण आधार बनाया है। आज प्रदेश में 16 घरेलू हवाई अड्डे संचालित हैं, जो छोटे और मध्यम शहरों को भी राष्ट्रीय हवाई नेटवर्क से जोड़ रहे हैं। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर जैसे शहरों में संचालित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। गौतम बुद्ध नगर स्थित जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो अपने निर्माण के अंतिम चरण में है, भविष्य में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत का प्रमुख एविएशन हब बनने जा रहा है। लगभग 5,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित यह एयरपोर्ट प्रदेश की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।   रेल, रैपिड और मेट्रो में नेतृत्व कर रहा प्रदेश लगभग 16 हजार किलोमीटर के विशाल रेल नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क वाला राज्य बन चुका है, जो यात्रियों और माल परिवहन, दोनों के लिए मजबूत रीढ़ का काम कर रहा है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। देश में सर्वाधिक शहरों में मेट्रो संचालन का गौरव आज उत्तर प्रदेश के पास है। लखनऊ, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, कानपुर व आगरा, पांच शहरों में मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही दिल्ली–मेरठ कॉरिडोर पर देश की पहली रैपिड रेल का संचालन शुरू हो चुका है और शीघ्र ही मेरठ में मेट्रो सेवा भी प्रारंभ होने जा रही है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और बरेली जैसे शहरों में मेट्रो परियोजनाओं का ग्राउंड-वर्क जारी है, जिन्हें चरणबद्ध रूप से शुरू करने की योजना है। इसके अतिरिक्त वाराणसी में देश की पहली शहरी रोप-वे सेवा का कार्य भी प्रगति पर है।  औद्योगिक ढांचे में नई ऊर्जा 2017 से पहले यूपी निवेश के नक्शे से बाहर था। लॉजिस्टिक्स हब और वेयरहाउसिंग की कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। आज नोएडा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स से यूपी निवेश और रोजगार का हब बनता जा रहा है। इसके अतिरिक्त लखनऊ में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क, बरेली में मेगा फूड पार्क, उन्नाव में ट्रांस गंगा सिटी, गोरखपुर में प्लास्टिक पार्क, वाराणसी में पहला फ्रेट विलेज समेत कई परियोजनाएं यूपी के विकास को … Read more

ICC रैंकिंग में विराट कोहली का नंबर-1 ताज गया, कीवी बल्लेबाज डेरिल मिचेल बने नए ODI किंग

 दुबई ICC की ताजा ODI बल्लेबाज रैंकिंग में भारत के स्टार बैटर विराट कोहली को झटका लगा है. उनसे नंबर-1 की पोजीशन छिन गई है, अब इस पर अब न्यूजीलैंड के डेरिल मिचेल काबिज हो गए हैं. हालिया मैचों में शानदार प्रदर्शन की बदौलत मिचेल ने यह उपलब्धि हासिल की, जबकि कोहली की रैंकिंग में गिरावट आई है. ध्यान रहे कोहली प‍िछले सप्ताह ही रोहित शर्मा को पछाड़कर नंबर 1 वनडे बल्लेबाज बने थे.तब कोहली जुलाई 2021 के बाद पहली बार नंबर-1 वनडे बल्लेबाज की पोजीशन पर लौटे थे. पर म‍िचेल ने हाल में संपन्न वनडे सीरीज ऐसा प्रदर्शन किया कि कोहली नीचे ख‍िसककर नंबर  पर पहुंच गए.  मिचेल के 845 रैंकिंग पॉइंट्स हैं, जबकि विराट कोहली 795 पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर खिसक गए हैं. इन दोनों से काफी पीछे इब्राहिम जादरान, रोहित शर्मा, शुभमन गिल और बाबर आज़म जैसे बड़े बल्लेबाज़ हैं. यह दूसरी बार है जब मिचेल वनडे रैंकिंग में नंबर-1 बने हैं. इससे पहले पिछले साल नवंबर में वह सिर्फ तीन दिनों के लिए टॉप पर रहे थे, फिर रोहित शर्मा ने उनसे यह जगह छीन ली थी. म‍िचेल ने वनडे सीरीज में जमा दिया रंग  हैमिल्टन में जन्मे डेरिल मिचेल इस समय अपने करियर के सबसे शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने तीन मैचों की वनडे सीरीज में कुल 352 रन बनाए. दूसरे मैच में उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया, जहां उन्होंने 117 गेंदों पर नाबाद 131 रन की पारी खेली. इसी पारी की मदद से न्यूजीलैंड ने पहले सीरीज बराबर की और बाद में सीरीज 2-1 से जीत भी ली. सीरीज के पहले मैच में न्यूज़ीलैंड को हार मिली थी, लेकिन मिचेल ने उस मुकाबले में भी 71 गेंदों पर 84 रन बनाकर टीम के लिए सबसे ज्यादा  रन बनाए थे. तीन मैचों की किसी वनडे सीरीज में 352 रन बनाना किसी भी न्यूजीलैंड खिलाड़ी का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है. यह कुल मिलाकर दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्कोर है. उनसे आगे सिर्फ पाकिस्तान के बाबर आजम (2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 360 रन) और भारत के शुभमन गिल (2023 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 360 रन) हैं. मिचेल की लगातार दो पारियां 130 प्लस रन की रही हैं. इसके साथ ही उन्होंने न्यूज़ीलैंड के महान बल्लेबाज़ मार्टिन गुप्टिल की बराबरी कर ली है, जिनके नाम भी वनडे में चार बार 130+ स्कोर हैं. भारत में भारत के खिलाफ वनडे शतक लगाने के मामले में मिचेल अब चौथे नंबर पर हैं. उनसे आगे सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स हैं, जिन्होंने भारत में भारत के खिलाफ पांच शतक लगाए हैं. मिचेल ने अब तक 54 वनडे पारियां खेली हैं, लेकिन वह एक बार भी शून्य (डक) पर आउट नहीं हुए हैं. यह वनडे इतिहास की दूसरी सबसे लंबी ऐसी लकीर है. उनसे आगे सिर्फ कीपलर वेसल्स हैं, जो 1983 से 1994 के बीच 105 वनडे पारियों में कभी भी डक पर आउट नहीं हुए. कोहली का कैसा रहा प्रदर्शन  वहीं व‍िराट कोहली ने भी वनडे सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया था, वह सीरीज में रन बनाने के मामले में म‍िचेल के बाद नंबर 2 पर रहे. कोहली ने सीरीज में 3 मैचों में 240 रन बनाए, जिसमें उनका उच्चतम स्कोर 124 रहा. उन्होंने 80.00 के एवरेज और 105.26 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की. 

बिहार के बाद केरल मिशन? विनोद तावड़े के कंधों पर बीजेपी को मजबूत करने का दारोमदार

 नई दिल्ली बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी नितिन नबीन ने ऐसे समय संभाली है, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, पुदुचेरी और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी तेज है. इनमें से किसी भी राज्य में बीजेपी के लिए चुनावी लड़ाई आसान नहीं है. नितिन नबीन ने अपनी ताजपोशी के साथ पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के लिए ताबड़तोड़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं.  नितिन नबीन ने बीजेपी के लिए सबसे मुश्किल माने जाने वाले केरल विधानसभा चुनाव की कमान विनोद तावड़े को सौंपी तो साथ ही चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. उनके साथ शोभा करंदलाजे को सह प्रभारी बनाया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि विनोद तावड़े बिहार की तरह ही केरल में भी कमल खिला पाएंगे? वहीं, आशीष शेलार को तेलंगाना नगर निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है. उनके साथ अशोक परनामी व रेखा शर्मा को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वरिष्ठ नेता राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु निकाय चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया गया है तो सतीश पुनिया और संजय उपाध्याय को सह प्रभारी का दातित्व सौंपा है.  विनोद तावड़े को मिला केरल का मुश्किल टास्क मिशन साउथ के तहत बीजेपी दक्षिण भारत के तमाम राज्यों में अपनी सियासी जमीन तलाश रही है. फिर चाहे तमिलनाडु हो या फिर केरल विधानसभा चुनाव का मैदान. पीएम मोदी समेत तमाम बड़े नेताओं की नजर इन राज्यों पर टिकी है. ऐसे में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने केरल की चुनावी जंग को फतह करने के लिए बिहार चुनाव जिताने वाले विनोद तावड़े को सौंपी है, उन्हें विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया है और साथ ही कर्नाटक से आने वाली  शोभा करंदलाजे को सौंपा है.  केरल में सत्ता का रास्ते को ईसाई और मुस्लिम वोट के द्वारा तय होते है, जिसके चलते ही बीजेपी की राह काफी मुश्किल भरी रही है. बीजेपी केरल में तेजी से बढ़ी है, लेकिन सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने में यूडीएफ और एलडीएफ एक बड़ी बाधा हैं. केरल का चुनाव इन्हीं दोनों गठबंधन के बीच सिमटा हुआ है.  हालांकि, बीजेपी को केरल में 2014 में14 प्रतिशत वोट मिले थे, 2019 में 16 प्रतिशत और 2024 में यह बढ़कर 20 प्रतिशत हो गया.  बीजेपी को केरल की सत्ता तक पहुंचने के लिए 20 से 30 और 30 से 40 फीसदी के वोट क का सफर तय करना है. ऐसे में विनोद तावड़े को एक मुश्किल भरा टास्क नितिन नबीन ने सौंपा है.  बिहार की तरह केरल में खिला पाएंगे कमल विनोद तावड़े को भले ही केरल चुनाव में बीजेपी को जिताने की जिम्मेदारी मिली हो, लेकिन बिहार की तरह केरल की राह आसान नहीं है. केरल में बीजेपी के लिए इसलिए भी मुश्किल रहा है, क्योंकि यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट-सीपीएम के अगुवाई वाले एलडीएफ का अपना-अपना मजबूत वोट बैंक है. केरल में मुस्लिम और ईसाई वोटर ही नहीं हिंदू वोटर भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच बंटे हुए हैं, बीजेपी तेजी से अपने पैर पसारे हैं, पर सत्ता तक पहुंचने की मंजिल काफी मुश्किल भरी है.  केरल की कुल आबादी में नायर समुदाय करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी रखता है. इसमें केरल के अपर कास्ट हिंदू आते हैं. इसके अलावा पिछड़ा वर्ग के तहत आने वाले एझवा समुदाय भी काफी अहम भूमिका निभाता है. इसकी केरल में कुल आबादी करीब 28 फीसदी है. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन खुद इस समुदाय से आते हैं. यानी विजयन का ये पारंपरिक वोट बैंक है. इसीलिए इस पर सीपीएम का एकाधिकार माना जाता है. केरल की राजनीति को जानने वाले बीजेपी की हार का कारण केरल की साक्षरता दर को भी मानते हैं. उनका कहना है कि केरल में देश के बाकी राज्यों के मुकाबले ज्यादा पढ़े-लिखे लोग हैं, जो किसी भी मुद्दे पर भावनाओं में बहकर वोट नहीं करते हैं. लोगों को हर विषय की अच्छी जानकारी होती है और वो स्पष्ट होते हैं कि उन्हें कहां और किसे वोट करना है. मुस्लिम और ईसाई में सेंधमारी कितनी मुश्किल केरल में मुस्लिम और ईसाई समुदाय की आबादी 45 फीसदी है. जिसमें बीजेपी अभी तक सेंध नहीं लगा पाई. इस 45 फीसदी वोटबैंक में बिना सेंधमारी किए केरल की सत्ता में आना मुमकिन नहीं है. हालांकि, पिछले चुनावों में बीजेपी का केरल के नायर समुदाय में वोट बैंक बढ़ा है. सबरीमाला के मुद्दे के बाद से ही ये समुदाय बीजेपी की तरफ झुकता नजर आया. केरल के 45 फीसदी वोट बैंक की हमने बात की, यानी अल्पसंख्यक वोट बैंक कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ का माना जाता है. ईसाई और मुस्लिम ज्यादातर इसी फ्रंट को चुनते हैं. वहीं केरल की पिछड़ी जातियों में लेफ्ट का काफी ज्यादा प्रभाव माना जाता है. केरल में हिंदू वोट करीब 55 फीसदी है, जिनके वोट एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटे हुए हैं.  बीजेपी क्या हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण कर पाएगी केरल में हिंदू वोटों का कितना भी ध्रुवीकरण हो जाए ये बीजेपी को जीत तक नहीं पहुंचा सकते हैं. हिंदू वोटों के बड़े हिस्से पर लेफ्ट और कांग्रेस का कब्जा है. केरल में पिछले करीब 80 साल से आरएसएस लगातार काम कर रहा है. देश के अलग-अलग राज्यों में भी आरएसएस कार्यकर्ता और नेता बीजेपी के लिए जमीन बनाने का काम करते आए हैं और कई जगह पार्टी को सफलता भी हाथ लगी है. लेकिन केरल में अब तक कोई करिश्मा नहीं दिखा है.  राज्य के तकरीबन 80 फीसदी हिंदू दो प्रमुख संगठनों- एसएनडीपी और एएसएस के समर्थक हैं. इनमें एसएनडीपी को ओबीसी मानी जाने वाली जाति के और दूसरा एनएसएस अगड़ी जातियों में आने वाले नायर लोगों का संगठन है.  बीजेपी तमाम कोशिशों के बाद भी इन दोनों संगठनों में अपनी पैठ नहीं जमा सकी है.  एनएनडीपी के समर्थन वाले राजनीतिक संगठन बीडीजेएस से गठजोड़ कर नायर वोटों के बीच तोड़ी पकड़ बनाई है.  बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग कैसे होगी हिट  केरल में बीजेपी हर समुदाय में ध्रुवीकरण की तरफ देख रही है. हिंदू वोटों में ध्रुवीकरण करने में पार्टी कहीं न कहीं कामयाब भी रही है. बीजेपी कहीं न कहीं खुद को तीसरे मोर्चे के तौर पर स्थापित करने में कामयाब रही है. हालांकि ये उतनी संख्या में नहीं है, जिनती पार्टी … Read more

‘समृद्धि यात्रा’ में बालू से बनी अपनी तस्वीर देख मुस्कुराए CM नीतीश कुमार

छपरा. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  समृद्धि यात्रा के दौरान बुधवार को छपरा पहुंचे। जहां सदर प्रखंड परिसर में विकास की एक जीवंत झलक देखने को मिली। हेलीकॉप्टर से सुबह 10:56 बजे छपरा हवाई अड्डा पर उतरने के बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से सदर प्रखंड पहुंचे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान विकास, रोजगार और महिला सशक्तिकरण की झलक हर कदम पर दिखाई दी। सदर प्रखंड परिसर में पहुंचते ही मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए विकासात्मक स्टॉलों का निरीक्षण किया। जीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, ग्रामीण सड़क, सामाजिक सुरक्षा, जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र, सामाजिक सुरक्षा कोषांग सहित कई विभागों ने अपने-अपने कार्यों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया था। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने आम लोगों की ओर हाथ जोड़कर अभिवादन किया, जिससे वातावरण आत्मीय हो उठा। दीदी का सिलाई घर का उद्घाटन, मुंह से निकला-वाह, बहुत सुंदर निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने राधे कृष्ण जीविका महिला संकुल संघ द्वारा संचालित दीदी का सिलाई घर प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र का फीता काटकर उद्घाटन किया। जैसे ही वे प्रशिक्षण केंद्र के भीतर पहुंचे, सुव्यवस्थित व्यवस्था और महिलाओं के कामकाज को देखकर उनके मुंह से सहज ही निकल पड़ा-वाह, बहुत सुंदर! मुख्यमंत्री की यह प्रतिक्रिया वहां मौजूद जीविका दीदियों के लिए उत्साह और गर्व का क्षण बन गई। भोजपुरी संवाद और महिलाओं का आत्मविश्वास उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशिक्षण केंद्र में लगे बैनर को पढ़कर मुख्यमंत्री को योजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जीविका दीदी पम्मी देवी से कहा, अच्छी तरह से काम कीजिए। वहीं चंपा देवी ने भोजपुरी में मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए कहा, बहुत अच्छा लगता बा, हमनी के रोजगार मिलल बा। यह संवाद केवल शब्द नहीं था, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास और बदली जिंदगी की कहानी कह रहा था। 57 मशीनें, रोजगार की मजबूत नींव इस सिलाई घर सह उत्पादन केंद्र में कुल 57 मशीनें लगाई गई हैं, जिन पर महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं। खास बात यह है कि यहां काम करने वाली सभी महिलाओं को हाल ही में मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि भी मिली है। जीविका के संचार प्रबंधक दीपक कुमार ने बताया कि 57 मशीनों में दो स्टिच मशीन और दो बटन लगाने की विशेष मशीनें शामिल हैं। आंगनबाड़ी बच्चों के लिए लाखों पोशाकें तैयार होंगी दीपक कुमार ने जानकारी दी कि जीविका और आईसीडीएस के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके तहत सारण जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए मार्च तक 1 लाख 95 हजार पोशाकें सिलकर तैयार की जाएंगी। कपड़ा मफतलाल कंपनी द्वारा उपलब्ध कराया है और उसी कंपनी के अनुभवी कारीगर जीविका दीदियों को कपड़ा काटने व सिलाई की प्रशिक्षण देंगे। महिलाओं के बच्चों और भोजन की भी व्यवस्था छपरा सदर सिलाई घर की कोऑर्डिनेटर सोनिया ने बताया कि यहां काम करने आने वाली महिलाओं के छोटे बच्चों की देखभाल के लिए पालना घर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही महिलाओं के भोजन के लिए जीविका दीदी की रसोई भी संचालित की जा रही है, ताकि कार्य के दौरान उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। हर प्रखंड में खुलेंगे दो-दो सिलाई घर जिला कोऑर्डिनेटर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के हर प्रखंड में दो-दो सिलाई घर खोले जाएंगे। साथ ही सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए पोशाक सिलाई को लेकर भी एमओयू पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया की जाएगी। बालू से बनी मुख्यमंत्री की आकृति बनी आकर्षण का केंद्र परिसर में सैंड आर्टिस्ट अशोक कुमार द्वारा बालू से बनाई गई मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आकृति भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही। मुख्यमंत्री ने आकृति को देखकर सराहना की और स्वयं कलाकार से मुलाकात की। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी मुख्यमंत्री का ध्यान आकृति की ओर आकृष्ट किया, जिसे देखकर मुख्यमंत्री मुस्कुरा उठे। करोड़ों की योजनाओं की सौगात इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले के लिए 450.30 करोड़ रुपये की 45 योजनाओं का शिलान्यास और 86.50 करोड़ रुपये की 24 योजनाओं का उद्घाटन किया। प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने मुख्यमंत्री को प्रगति से समृद्धि तक और सात निश्चय से संबंधित लगाए गए पोस्टरों की जानकारी भी दी। आयुक्त, डीएम व एसएसपी थे मौजूद इस दौरान कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार सहित जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने दी नई आबकारी नीति को हरी झंडी, नवा रायपुर में NMIMS और स्टार्ट-अप हब की शुरुआत

 रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सिविल लाइन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में आज कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में राज्य की आबकारी नीति, शिक्षा, आईटी स्टार्ट-अप, उद्यमिता और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रिपरिषद ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ आबकारी नीति के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इससे संबंधित समस्त अनुषांगिक कार्यवाहियों के लिए विभाग को अधिकृत किया। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में स्थित लगभग 40 एकड़ भूमि को श्री विले पारले कलावनी मंडल (SVKM) को 90 वर्षों की लीज पर आवंटित करने की स्वीकृति दी। यहां नरसी मोंजी प्रबंधन अध्ययन संस्थान की स्थापना की जाएगी। यह संस्था वर्ष 1934 से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है और देशभर में 30 शैक्षणिक संस्थान संचालित कर रही है। नवा रायपुर में इस राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की स्थापना से राज्य में उच्च गुणवत्ता वाली आधुनिक शिक्षा को मजबूती मिलेगी। आईटी और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर अटल नगर में चार नवीन उद्यमिता केंद्रों की स्थापना हेतु सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ एमओयू करने का निर्णय लिया। इसके तहत एआई, मेडटेक, स्मार्ट सिटी और स्मार्ट एग्री जैसे डोमेन में अगले तीन से पांच वर्षों में 133 स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही ईएसडीएम उत्पादों के प्रोटोटाइप विकास के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विकास केंद्र भी स्थापित किया जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने राज्य के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण जांच सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लैब व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी आवश्यक निर्णय भी लिए। 

प्रयागराज में हुआ एयर फोर्स ट्रेनी विमान का क्रैश, तालाब में गिरते ही छात्रों ने पायलट को बचाया

प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब भारतीय वायुसेना का एक ट्रेनी माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होकर शहर के बीचों-बीच एक तालाब में गिर गया. यह हादसा केपी कॉलेज के पीछे स्थित तालाब में हुआ, जहां अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई. चश्मदीदों के मुताबिक, विमान उड़ान भरते समय सामान्य स्थिति में था, लेकिन कुछ ही देर बाद उसका संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे आकर तालाब में गिर पड़ा. हादसे की आवाज सुनकर सैकड़ों स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए और तुरंत पुलिस व प्रशासन को सूचना दी गई. घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया. चश्मदीद पदम सिंह ने बताया, "हम लोग स्कूल कैंपस में थे, तभी रॉकेट जैसी आवाज आई. आवाज सुनकर दौड़कर पहुंचे तो देखा कि कुछ लोग दलदल में फंसे थे. हम लोग तालाब में कूद गए और 3 लोगों को बाहर निकाला." अब मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम विमान को तालाब से निकालने की कोशिश कर रही है. भारतीय वायुसेना की तरफ से शुरुआती जानकारी के अनुसार, यह माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी पर था. विमान में दो पायलट सवार थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. दोनों पायलटों को कोई गंभीर चोट नहीं आई है, जिससे प्रशासन और वायुसेना ने राहत की सांस ली है. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत टीमें मौके पर पहुंचीं. तालाब के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. विमान को तालाब से बाहर निकालने की कोशिश की जा रही है, ताकि तकनीकी जांच की जा सके.   वायुसेना और प्रशासन की संयुक्त टीम हादसे के कारणों की जांच कर रही है. शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनिंग उड़ानों के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाता है और इस हादसे के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी.

मंत्री विजय शाह का मामला: मध्यप्रदेश सरकार का असमंजस, आदिवासी वोट या कोर्ट का फैसला?

 भोपाल  मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अमर्यादित बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश ने प्रदेश सरकार के लिए दुविधा की स्थिति बना दी है। एक तरफ आदिवासी वोट बैंक की चिंता हैं, जो सत्ता के समीकरण बनाने-बिगाड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका के निर्देश हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार विधि विभाग और महाधिवक्ता से सलाह लेगी। आरोपित मंत्री भी सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू अपील कर सकते हैं। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई बता दें कि विजय शाह ने ऑ परेशन सिंदूर में सेना के पराक्रम की जानकारी देश-दुनिया के सामने रखने वाली सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर अमर्यादित बयान दिया था। इससे भाजपा की किरकिरी हुई। मंत्री को पार्टी ने फटकार भी लगाई। उन्होंने पार्टी के निर्देश पर माफी भी मांग ली। हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था इस मामले का हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआइटी ने पूरे मामले की जांच की। अगस्त 2025 में रिपोर्ट सौंपी। एसआइटी की इसी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह में अभियोजन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। सरकार के स्तर पर दुविधा की स्थिति इसके साथ ही शाह के अन्य विवादित बयानों की जांच करने के लिए भी कहा गया। सूत्रों का कहना है कि सरकार के स्तर पर अभी इस मामले में दुविधा की स्थिति है। कोर्ट के निर्देशानुसार यदि अभियोजन के मामले में कार्रवाई बढ़ाई जाती है तो सरकार के लिए अजीब स्थिति बन जाएगी। उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखना परेशानी का कारण बनेगा, इसलिए इस संबंध में पहले सभी कानूनी पहलुओं को देखा जाएगा। यही कारण है कि कानूनी सलाह के लिए प्रकरण विधि विभाग और महाधिवक्ता के पास भेज रहा है। दोनों के अभिमत के आधार पर आगामी निर्णय लिया जाएगा। वहीं, आरोपित मंत्री मंत्री विजय शाह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील करने के लिए कानूनी मशविरा ले रहे हैं। महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर लिखा- सेना की अधिकारी, देश की बेटी और राष्ट्र के सम्मान पर हमला हुआ, लेकिन भाजपा सरकार महीनों तक SIT की रिपोर्ट दबाए बैठी रही। यह कोई एक बयान नहीं, बल्कि सत्ता संरक्षण में पनपती असंवेदनशील और घृणित मानसिकता का उदाहरण है। देश की सुरक्षा में तैनात हमारी बहन के प्रति ऐसी ओछी सोच रखने वाले मंत्री विजय शाह से मुख्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा लेकर पार्टी के सभी दायित्वों से मुक्त करना चाहिए। देश की सेना और महिलाओं के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं। कानून सबके लिए बराबर है, मंत्री के लिए भी। विजय शाह ने पिछले साल महू में दिया था बयान 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था- 'उन्होंने (आतंकियों ने) कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।' शाह ने आगे कहा- 'अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।' सत्ता के समीकरण साधने के लिए महत्वपूर्ण है आदिवासी वोट बैंक प्रदेश में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए विधानसभा की 47 सीटें और लोकसभा की चार सीटें सुरक्षित हैं। 2018 में जब आदिवासी मतदाताओं का झुकाव भाजपा के स्थान पर कांग्रेस की ओर हुआ था तो 15 वर्ष बाद कमल नाथ के नेतृत्व में सरकार बनी थी। भाजपा ने इस वर्ग को साधने के लिए काफी प्रयास किए और 2023 में यह भाजपा के पक्ष में लौटा तो पार्टी की सरकार बनी। छिंदवाड़ा जैसा कांग्रेस का किला भी भाजपा ने इन्हीं आदिवासी मतदाताओं के दम पर ढहाया। ऐसे में जब कांग्रेस ने दलित एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है तो आदिवासी मंत्री विजय शाह के विरुद्ध कार्रवाई को लेकर सत्ता और संगठन दुविधा में है। सरकार के पास कोई विकल्प नहीं पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय मिश्रा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रिव्यू अपील की जा सकती है, लेकिन इसमें राहत मिलने की संभावना नहीं है। सरकार के पास कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यदि कार्रवाई नहीं की जाती है तो अवमानना का मामला बन जाएगा। जहां तक अभियोजन की स्वीकृति पर मंत्री पद छोड़ने की है तो यह नैतिकता से जुड़ा मामला है। उन्होंने जो बयान दिया, वह मंत्री के तौर पर किए गए कार्य से इतर है। 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि

जनभागीदारी से और भव्य होगा उत्तर प्रदेश दिवस- 2026: मुख्यमंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे यूपी दिवस-2026 के मुख्य अतिथि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ होगा इस वर्ष का प्रमुख आकर्षण, हर जिले के स्वाद से परिचय कराएगा यूपी दिवस लखनऊ के राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह, सभी जनपदों में होंगे आयोजन संस्कृति उत्सव, लोककलाओं और शिल्प मेले से सजेगा उत्तर प्रदेश दिवस लखनऊ प्रदेश के प्रत्येक जनपद की सक्रिय सहभागिता, सांस्कृतिक विविधता और विकास की साझा चेतना के साथ उत्तर प्रदेश दिवस-2026 इस वर्ष एक भव्य जनोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। 24 से 26 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस आयोजन में उत्तर प्रदेश की संस्कृति, शिल्प, व्यंजन और विकास यात्रा को जनभागीदारी के माध्यम से एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश दिवस की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान, उपलब्धियों और संभावनाओं को जनसहयोग के साथ प्रदर्शित करने का अवसर है। उन्होंने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश दिवस को जनोत्सव के रूप में आयोजित किया जाए, जिसमें प्रदेश की आत्मा हर स्तर पर दिखाई दे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष उत्तर प्रदेश दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार के माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी की गरिमामयी उपस्थिति आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं गरिमा, अनुशासन एवं समयबद्धता के साथ सुनिश्चित की जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर मुख्य समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसका सीधा प्रसारण प्रदेश के सभी जनपदों में किया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश दिवस का उत्सव एक साथ पूरे प्रदेश में मनाया जा सके। बैठक में अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ की थीम पर आधारित विशेष प्रदर्शनी और शिल्प मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश की विकास यात्रा, नवाचार, बुनियादी ढांचे, उद्योग, कृषि, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस वर्ष ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ को आयोजन का प्रमुख आकर्षण होगा। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद के पारंपरिक और विशिष्ट व्यंजन एक ही परिसर में उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आगंतुक उत्तर प्रदेश के विविध स्वाद, खान-पान परंपराओं और स्थानीय पहचान से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संस्कृति उत्सव 2025-26 के अंतर्गत प्रस्तावित सांस्कृतिक कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश दिवस से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ‘हमारी संस्कृति-हमारी पहचान’ की भावना के अनुरूप लोक, शास्त्रीय एवं समकालीन कला रूपों को मंच प्रदान किया जाए तथा कलाकारों एवं आगंतुकों के लिए समुचित सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि 24 जनवरी को आयोजित मुख्य समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले सभी जनपदों के गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया जाए, ताकि प्रदेश की सामूहिक उपलब्धियों का सम्मान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस-2026 को ऐसा आयोजन बनाया जाए, जो प्रदेश की संस्कृति, स्वाद, शिल्प और विकास दृष्टि को एक साथ प्रस्तुत करे तथा प्रत्येक आगंतुक के लिए यह अनुभव प्रेरणादायी, स्मरणीय और गर्व का विषय बने।