samacharsecretary.com

टैरिफ डर का असर: ट्रंप के बयान से एशिया में बिकवाली, भारत में भी बाजार लुढ़के

मुंबई     डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का टैरिफ दुनिया के शेयर बाजारों को संभलने का मौका नहीं दे रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति आए दिन कहीं न कहीं टैरिफ बम (Trump Tariff Bomb) फोड़ते नजर आ रहे हैं, जिसका असर खुद अमेरिकी शेयर बाजारों के साथ ही एशियाई शेयर मार्केट में क्रैश (Asian Market Crash) के रूप में देखने को मिला है. जापान से लेकर साउथ कोरिया तक बुधवार को भगदड़ देखने को मिली. ये पहले से ही बिखरते जा रहे भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए भी खराब सिग्नल रहे, जब सेंसेक्स-निफ्टी ओपन हुए तो शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद दोनों इंडेक्स भी बिखर गए. BSE Sensex ओपनिंग के बाद 200 अंक से ज्यादा फिसलकर कारोबार करता नजर आया.  ट्रंप ने दी 200% टैरिफ की धमकी अमेरिका ने एक बार फिर से टैरिफ बम फोड़ा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर बीते शनिवार को 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो 1 फरवरी को लागू होने वाला है. ये Trump Tariff Warning अमेरिका के ग्रीनलैंड प्लान का विरोध करने पर दी गई है और ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर Greenland कब्जाने में कोई रुकावट आती है, तो फिर 1 जून से ये टैरिफ 25% तक किया जाएगा. इसके बाद अचानक Donald Trump ने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की नई धमकी दे डाली है.  कल हुआ था क्रैश, आज भी बिखरे सेंसेक्स-निफ्टी बता दें कि ट्रंप टैरिफ से दुनिया के बाजारों में मची हलचल का असर बीते कुछ दिनों से भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ देखने को मिल रहा है. पिछले कारोबारी दिन मंगलवार सेंसेक्स-निफ्टी में तगड़ी गिरावट देखने को मिली थी. BSE Sensex 83,207 पर ओपन होने के बाद 1066 अंक गिरकर 82,180.47 पर क्लोज हुआ था. तो वहीं NSE Nifty 25,580 पर खुलने के बाद 353 अंक फिसलकर 25,232 पर बंद हुआ था. बुधवार को जब शेयर बाजार में कारोबार ओपन हुए, तो दोनों इंडेक्स में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला. लेकिन महज 10 मिनट के कारोबार के दौरान ही बीएसई का सेंसेक्स करीब 200 अंक से ज्यादा फिसल गया, तो वहीं एनएसई का निफ्टी भी रेड जोन में ट्रेड करता दिखा.  जापान से कोरिया तक मार्केट क्रैश ट्रंप की इस नई धमकी का सीधा असर एशियाई शेयर बाजार में भगदड़ के रूप में दिखाई दिया है. बुधवार को जब Asian Stock Markets में कारोबार शुरू हुआ, तो ज्यादातर टूटे हुए नजर आए. Japan Nikkei खबर लिखे जाने तक 297 अंक फिसलकर 52,693 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि शुरुआती कारोबार में ये 796 अंकों की गिरावट के लेकर 52,194 तक फिसल गया था.  जापान के अलावा हांगकांग का Hang Seng 112 अंक टूटकर 26,423 पर आ गया. इसके अलावा साउथ कोरिया का KOSPI इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा गिरकर ट्रेड कर रहा था. अन्य बाजारों में ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200, DAX, CAC भी रेड जोन में दिखाई दिए.  खुद अमेरिका में बुरा हाल Trump Tariff का असर सिर्फ एशियाई बाजारों में ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका में भी बड़े लेवल पर देखने को मिला है. अमेरिकी शेयर बाजार भी बीते कारोबारी दिन तेज गिरावट के साथ बंद हुए. Dow Jones 870 अंक की तेज गिरावट के साथ फिसलकर 48,509 पर आ गया, तो वहीं S&P 500 इंडेक्स भी बिखरा हुआ नजर आया. इसमें क्लोजिंग के समय तक 143 अंक की गिरावट आ गई और ये 6817 पर बंद हुआ.

भारत-न्यूजीलैंड टी20 भिड़ंत: ODI का हिसाब बराबर करने का मौका, SKY के बल्ले से बड़ी पारी की उम्मीद

नई दिल्ली पिछले कुछ समय से रन बनाने के लिए जूझ रहे कप्तान सूर्यकुमार यादव न्यूजीलैंड के खिलाफ बुधवार से नागपुर में शुरू होने वाली पांच मैचों की टी20 श्रृंखला से फॉर्म में वापसी करने के लिए बेताब होंगे। भारत की नजर वनडे श्रृंखला में मिली हार का बदला चुकता करके अगले महीने घरेलू धरती पर होने वाले टी20 विश्व कप के लिए अपनी तैयारियों को पुख्ता अंजाम देने पर होगी।   सूर्यकुमार ने 2024 में टी20 टीम की कप्तानी संभाली थी जिसके बाद भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है और उसकी जीत का प्रतिशत 72 प्रतिशत से अधिक रहा है। इससे कप्तान के बल्लेबाजी में निराशाजनक प्रदर्शन पर ज्यादा गौर नहीं किया गया लेकिन अब ऐसा नहीं है। पिछले दो वर्षों में भारतीय टी20 टीम स्वचालित मोड पर रही है, जिसमें उसे इक्का-दुक्का हार का ही सामना करना पड़ा। आईपीएल के कारण उसके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो अपनी भूमिकाओं को अच्छी तरह से जानते हैं। भारतीय टीम पर हालांकि विश्व कप में अपने खिताब का बचाव करने और घरेलू धरती पर खेलने का दबाव होगा और सूर्यकुमार न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला से पहले इन बातों पर जरूर गौर कर रहे होंगे। न्यूजीलैंड की टीम काफी मजबूत है और उसने पिछले एक साल में कई उपलब्धियां हासिल की है जिसमें भारत के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में क्लीन स्वीप करना और वनडे श्रृंखला जीतना भी शामिल है। भारतीय धरती पर पहली बार द्विपक्षीय वनडे श्रृंखला जीतने से निश्चित तौर पर उसके खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा होगा। लेकिन जब टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की बात आती है तो सूर्यकुमार की कप्तानी में भारत एक अलग ही टीम साबित हुई है, जिसने पिछले 25 में से 18 मैच जीते हैं। इसका श्रेय काफी हद तक अभिषेक शर्मा की तूफानी शुरुआत और वरुण चक्रवर्ती की बीच के ओवरों में शानदार गेंदबाजी को जाता है। न्यूजीलैंड ने 2024 टी20 विश्व कप के बाद खेले गए 21 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से 13 में जीत हासिल की है। आक्रामक सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे, कप्तान मिचेल सैंटनर, तेज गेंदबाज जैकब डफी, बेहतरीन फॉर्म में चल रहे डैरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स की मौजूदगी में न्यूजीलैंड मजबूत प्रतिद्वंद्वी टीम साबित हो सकती है। इसका यह भी मतलब है कि मौजूदा चैंपियन भारत को विश्व कप की तैयारी के लिए बेहतरीन समय मिलेगा। इस पृष्ठभूमि में केवल सूर्यकुमार ही ऐसे हैं, जिनकी खराब फॉर्म मजबूत टीम की कमजोर कड़ी साबित हुआ है। उन्होंने पिछले 19 मैचों में एक भी अर्धशतक लगाए बिना केवल 218 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 123 से अधिक रहा है। तिलक वर्मा को खेलने का अधिक समय देने के लिए उन्होंने बल्लेबाजी क्रम में खुद को तीसरे नंबर के बजाय चौथे नंबर पर खिसका दिया। सूर्यकुमार अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके खराब प्रदर्शन का ड्रेसिंग रूम में असर पड़ सकता है और उन्हें अब हर हाल में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। किसी भी अन्य टीम में श्रेयस अय्यर जैसे काबिल खिलाड़ी को टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में स्वतः ही जगह मिल जाती, क्योंकि उन्होंने तीन अलग-अलग फ्रेंचाइजी को आईपीएल फाइनल तक पहुंचाया है और एक बार जीत हासिल की है। भारतीय टीम में स्पिनरों के खिलाफ खेलने वाले सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक अय्यर को तिलक वर्मा के चोटिल होने के कारण टीम में जगह मिली है। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि तिलक विश्व कप के लिए समय पर ठीक हो पाएंगे या नहीं, लेकिन नंबर चार पर अय्यर की मौजूदगी से सूर्यकुमार को अपने पसंदीदा नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने का मौका मिलेगा। अगर इस बात को ध्यान में रखा जाए कि तिलक बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं तो इस समय शानदार फॉर्म में चल रहे इशान किशन भी दावेदारी पेश कर सकते हैं। टी20 श्रृंखला में ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की भी वापसी होगी जीने जिन्हें वनडे श्रृंखला में विश्राम दिया गया था। पंड्या अपने कौशल से टी20 टीम में संतुलन लाते हैं और उनकी मौजूदगी का मतलब है कि टीम प्रबंधन एक अतिरिक्त विशेषज्ञ खिलाड़ी को खिलाने का जोखिम उठा सकता है। वरुण चक्रवर्ती टीम के तुरुप का इक्का होंगे, जिनके खिलाफ न्यूजीलैंड ने ज्यादा मैच नहीं खेले हैं। वरुण के सातवें से 15वें ओवर के बीच के चार ओवर अक्सर मैच का रुख पलट देते हैं और कुलदीप यादव की खराब फॉर्म को देखते हुए तमिलनाडु के इस खिलाड़ी को और भी बेहतर प्रदर्शन करने की जरूरत होगी। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज और ऑलराउंडर क्रिस्टियन क्लार्क टी20 श्रृंखला के लिए टीम में बने रहेंगे क्योंकि माइकल ब्रैसवेल और एडम मिल्ने दोनों ही हल्की चोटों से उबर रहे हैं। टीम इस प्रकार हैं: भारत: सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), इशान किशन, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा। न्यूजीलैंड: मिचेल सैंटनर (कप्तान), डेवोन कॉनवे, बेवन जैकब्स, डैरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम रॉबिन्सन, जिमी नीशम, ईश सोढ़ी, जैक फाउल्स, मार्क चैपमैन, माइकल ब्रैसवेल, रचिन रविंद्र, काइल जैमीसन, मैट हेनरी, जैकब डफी, क्रिस्टियन क्लार्क। समय: मैच शाम सात बजे शुरू होगा।  

भोजशाला में पूजा का मामला सर्वोच्च अदालत में, 22 जनवरी को SC करेगा सुनवाई

धार मध्यप्रदेश के धार की भोजशाला में पूजा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बसंत-पंचमी पर दिनभर पूजा की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका लगाई गई है। हिंदू पक्ष ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका लगाई। इस पर 22 जनवरी को सुनवाई होगी। भोजशाला में बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन उत्सव आयोजित किया गया जाता है। इस दिन शुक्रवार होने से यहां नमाज भी होगी जिसके चलते दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति बन चुकी है। इस माहौल को देखते हुए धार और भोजशाला परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। भोजशाला में वसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू सरस्वती पूजा करते हैं जबकि शुक्रवार को यहां मुस्लिमों को नमाज की भी इजाजत है। इस बार वसंत पंचमी 23 जनवरी को शुक्रवार के दिन पड़ रही है जिससे दोनों पक्षों में विवाद पैदा हो गया है। हिंदू पक्ष वसंत पंचमी को पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति मांग रहा है। अब इसके लिए देश की शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से मंगलवार को याचिका दाखिल की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार कर लिया है। हरिशंकर जैन के सहयोग से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने याचिका दायर की है।   भोजशाला में जुमे की नमाज पर रोक लगाने की मांग की याचिका में कहा गया है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी है। इस दिन भोजशाला में परंपरागत रूप से सरस्वती पूजा की जाती है। यहां वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजन के लिए केवल हिंदू समाज को ही अनुमति दी जाए। दिनभर पूजा ही चले। याचिका में शुक्रवार के दिन भोजशाला में जुमे की नमाज पर रोक लगाने की भी मांग की गई है। याचिका पर कार्यक्रम के एक दिन पहले यानि 22 जनवारी को सुनवाई की जाएगी।

रक्षा उत्पादन में एमपी की बड़ी भूमिका, भारतीय सेना को मिलेंगे 10 ‘अजेय’ टैंक

जबलपुर भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। 2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली वीएफजे में वर्ष 2023 के दौरान कार्य की भारी कमी हो गई थी। 1500 करोड़ रुपए तक उत्पादन क्षमता वाली फैक्ट्री के पास उस समय मात्र 500-600 करोड़ रुपए का कार्य शेष था। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन भविष्य को ने देखते हुए टी-72 टैंक मेंटेनेंस, रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) परियोजना पर काम शुरू किया।   इस परियोजना के तहत कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए चेन्नई भेजा गया, जहां उन्होंने टी-72 टैंक की ओवरहालिंग की तकनीकी बारीकियां सीखी। अप्रैल 2025 में बीएफजे को दो टी-72 टैंक प्राप्त हुए थे थे, जिनकी मैकेनिकल ओवरहालिंग दिसंबर 2025 में पूरी कर ली गई है। दो चरणों में हो रहा ओवरहालिंग कार्य पहले चरण में टैंक के टरेट और हल की ओवरहालिंग की गई। टरेट टैंक का ऊपरी हिस्सा होता है, जिस पर गन माउंट रहती है और जो 360 डिग्री घूमने में सक्षम होती है। वहीं हल वह आधार होता है, जिस पर पूरा टैंक निर्भर रहता है। दूसरे चरण में टैंक के अंदरूनी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मरम्मत व बदलाव किया जाएगा।   टी-72 टैंक को सोवियत संघ में डिजाइन और निर्मित किया गया था। भारत ने 1970 के दशक में इसे आयात किया और बाद में हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी में इसका स्वदेशी निर्माण और उन्नयन शुरू हुआ। 'अजेय टैंक' के नाम से पहचाना जाने वाला टी-72 आज भी भारतीय सेना के टैंक बेड़े की रीढ़ है।   चेन्नई में होगा प्रशिक्षण- जनसंपर्क अधिकारी टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निरीक्षण के बाद इसे टेस्टिंग के लिए चेन्नई भेजा जाएगा। इसके पश्चात भविष्य में 10 नए टैंकों की खेप मिलने की उम्मीद है, जिनमें मैकेनिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की ओवरहालिंग भी की जाएगी। -हर्ष भटनागर, जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

मध्यप्रदेश में 12,000 आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की आशंका, जानें कब तक फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों (Outsourced Employees) की नौकरी पर 31 मार्च के बाद संकट के बादल मंडरा सकते हैं। वर्तमान में कार्यरत एजेंसियों की टेंडर अवधि इसी तिथि को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इससे समय पर नई एजेंसी तय होने और कर्मचारियों को निरंतर काम मिलने की संभावना कमजोर नजर आ रही है। दस्तावेज अब तक तैयार नहीं सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं हो पाए है। इसी कारण वितरण कंपनियां नई निविदा प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर पा रही है। इस देरी का सीधा असर जिले के 12 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो विभिन्न कार्यों में वर्षों से सेवाएं दे रहे है। बताया जाता है कि विद्युत वितरण कंपनियां अलग-अलग कार्यों के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया टेंडर के जरिए होती है। हर वर्ष 31 मार्च को टेंडर अवधि समाप्त होती है। आमतौर पर एजेंसी बदलती है, लेकिन कर्मचारी उसी स्थान पर कार्यरत रहते हैं, केवल उनका नियोक्ता बदल जाता है।   जानकारों के मुताबिक नई निविदा प्रक्रिया सामान्यतः दो महीने पहले शुरू कर दी जाती है, क्योंकि टेंडर कई चरणों में पूरा होता है और इसमें पर्याप्त समय लगता है। हालांकि इस बार ऊर्जा विभाग द्वारा बीते करीब डेढ़ साल से एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली के दस्तावेज तैयार किए जा रहे है, जिसके तहत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में एक साथ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी निविदा निकाली जानी है। ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी फिलहाल ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी किए जाने की विद्युद् ब्रह्मेति बात कही जा रही है। इस संबंध में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग प्रमुख राजीव गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा विभाग से आदेश प्राप्त होने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

नर्मदा पर स्वास्थ्य सेवा की नई पहल: पानी पर तैरते अस्पताल बनेंगे, नदी एम्बुलेंस नेटवर्क होगा विस्तारित

भोपाल मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी। राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में नदी किनारे बसे लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए नदी एम्बुलेंस शुरू की गई हैं, जो आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगी।   आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण कदम खासकर बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा वेलनेस और योग टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए घाटों पर योग, ध्यान केंद्र और पार्क निर्माण भी किए जाएंगे। नर्मदा के घाटों पर प्रतिदिन 2.5 लाख आते हैं श्रद्धालु नर्मदा नदी के 861 घाटों पर प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख से अधिक पर्यटक, श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। 396 सूक्ष्म आकार के घाटों पर एक लाख आठ हजार से अधिक, 338 मध्यम आकार के घाटों पर 95 हजार और 116 वृहद आकार के घाटों पर 65 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। डॉक्टर, नर्स सहित मेडिकल सुविधाओं से लैस होगा फ्लोटिंग अस्पताल यानी पानी पर तैरता हुआ अस्पताल, जो दूरदराज के इलाकों और द्वीपों पर रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगा। यह चिकित्सा सेवाओं को नदी से लगे सड़क विहीन गांवों तक ले जाने में सक्षम होगा। डॉक्टर, नर्सिंग टीम व मेडिकल सुविधाओं से लैस ये अस्पताल आपातकालीन स्थितियों में भी मददगार होंगे। इनमें जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

8th Pay Commission पर बवाल: 2.5 लाख कर्मचारियों को नहीं मिला लाभ, वित्त मंत्री को लिखा पत्र

नई दिल्ली केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज (CSAP) को लेकर विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन ने इस योजना से केंद्र शासित प्रदेशों और स्वायत्त निकायों (Autonomous Bodies) के कर्मचारियों को बाहर रखने पर कड़ी आपत्ति जताई है। फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर इस 'नाइंसाफी' को दूर करने की मांग की है। 2.5 लाख कर्मचारियों के साथ भेदभाव का आरोप फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने वित्त मंत्री को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि देश की करीब 5,000 सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज में लगभग 2.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी केंद्र सरकार के ही नियमों के तहत सेवाएं देते हैं, फिर भी उन्हें इस महत्वपूर्ण वेलफेयर बूस्टर से वंचित रखा गया है।   इसमें दिल्ली सरकार (GNCTD) और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी भी शामिल हैं, जो व्यावहारिक रूप से केंद्र के ही अधीन काम करते हैं। क्या है कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज? केंद्र सरकार ने 16 जनवरी को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए इस विशेष पैकेज की घोषणा की थी। इसे आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:     बैंकिंग सुविधाएं: एक ही खाते के माध्यम से सभी वित्तीय लेनदेन।     बीमा कवर: कर्मचारियों को बेहतर बीमा सुरक्षा का प्रावधान।     ऋण और कार्ड: आसान लोन प्रक्रिया और विशेष कार्ड सुविधाएं।     वित्तीय सुरक्षा: बैंकिंग जरूरतों को एक ही स्थान पर एकीकृत कर सामाजिक सुरक्षा मजबूत करना। फेडरेशन की प्रमुख मांगें फेडरेशन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रधानमंत्री के 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के विजन को ध्यान में रखते हुए समानता सुनिश्चित की जाए। पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:     समानता का अधिकार: सभी केंद्र शासित प्रदेशों और ऑटोनोमस बॉडीज के कर्मचारियों को तुरंत इस पैकेज में शामिल किया जाए।     सामाजिक न्याय: वित्तीय सुरक्षा के इस लाभ को केवल मंत्रालयों तक सीमित न रखा जाए।     वित्तीय समावेश: 2.5 लाख वंचित कर्मचारियों को भी बैंकिंग और बीमा के ये विशेष लाभ दिए जाएं।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल देश का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश, प्रकृति की अनुपम सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, गहन आध्यात्मिक आस्था और विविध वन्य जीवों का अद्भुत संगम है। इन्हीं विशेषताओं और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दूरदर्शी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने पर्यटन को समावेशी और सतत विकास के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में प्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है, जो मध्यप्रदेश के प्रति बढ़ते राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित हुआ है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हो चुका है। इसके साथ ही खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन नीति-2025 एवं फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास को नई दिशा दी गई है। फिल्म पर्यटन नीति-2025 के अंतर्गत मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होमस्टे विकसित किए गए हैं, जिन्हें 1000 तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आय और रोजगार उपलब्ध करा रही है। पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। साथ ही पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा के माध्यम से पर्यटकों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के 4 धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना प्रदेश की वैश्विक पर्यटन क्षमता और प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करता है। मध्यप्रदेश आज पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संगम के साथ वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।  

ग्रीन स्टील तकनीक पर झारखंड सरकार और टाटा के बीच करार

रांची. वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड ने विश्व आर्थिक मंच में एक ऐतिहासिक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों में 11,000 करोड़ से अधिक के भारी निवेश की रूपरेखा तैयार करती है, जो एक स्थायी और कार्बन न्यूट्रल भविष्य और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की ओर एक ऊंची और लम्बी छलांग है। नीदरलैंड और जर्मनी के अत्याधुनिक नवाचारों को राज्य में लाकर यह पहल सुनिश्चित करती है कि झारखंड प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य बनाए रखते हुए हरित विनिर्माण के वैश्विक बदलाव में अग्रणी बना रहे। इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन एवं प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। इस निवेश का मुख्य आधार हिसारना और ईजीमेल्ट जैसी क्रांतिकारी आयरनमेकिंग तकनीकियों की उपयोगिता है, जिसमें कुल 7,000 करोड़ का निवेश शामिल है। क्या है हिसारना परियोजना? हिसारना परियोजना एक ऐसी सफल तकनीक है, जिसमें स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के अयस्क का उपयोग करने की क्षमता है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्टील उत्पादन अधिक किफायती बनेगा। यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए एक गेमचेंजर है, जिसमें कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक की कमी लाने की क्षमता है। नीदरलैंड में सफल पायलट परीक्षणों के बाद, टाटा स्टील 2030 तक जमशेदपुर में लगभग एक मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, ईजीमेल्ट (इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर) तकनीक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया की स्थिरता को बढ़ाएगी। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला समाधान है, जो सिनगैस का उपयोग करके कोक की खपत को कम करता है और कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है। औद्योगिक बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण आयरनमेकिंग के इन नवाचारों के अलावा इस निवेश पैकेज में एक अत्याधुनिक काम्बी मिल के लिए 1,500 करोड़ और टिनप्लेट विस्तार के लिए 2,600 करोड़ का प्रविधान किया गया है। यह व्यापक औद्योगिक खाका आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने, उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा करने और डी-कार्बोनाइजिंग दुनिया में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये पहल टाटा स्टील और झारखंड को बड़े पैमाने पर हरित आयरनमेकिंग तकनीक में फर्स्ट मूवर के रूप में स्थापित करती हैं, जिससे घरेलू प्रतिस्पर्धा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। युवा झारखंड औद्योगिक विरासत से हरित नवाचार तक राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह ऐतिहासिक समझौता झारखंड के परिवर्तनशील औद्योगिक सफर का प्रतीक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड एक पारंपरिक खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में झारखंड में टाटा समूह से जुड़े खनन एवं विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है। बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन ने मुख्यमंत्री की दावोस में सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा राज्य को ऐसे वैश्विक बिजनेस मंचों पर नियमित रूप से भाग लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने राज्य की आइटीआइ संस्थाओं को रोजगार और बाजार उन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें कंपनी ने अपने सहमति जताई। इस अवसर पर टाटा समूह द्वारा मुख्यमंत्री को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज का आमंत्रण भी दिया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।

अब बिना नली के जांच: 2040 में पिल एंडोस्कोपी से हार्ट व फैटी लिवर मरीजों को राहत

इंदौर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल द्वारा राष्ट्रीय स्तर की इंदौर जीआई कान्क्लेव का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के लिवर और एंडोस्कोपी विशेषज्ञों ने गैस्ट्रोएंट्रोलाजी में हो रहे आधुनिक शोध और इलाज की नई तकनीकों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने चर्चा की कि वर्ष 2040 तक आज की जटिल एंडोस्कोपी जांच एक साधारण पिल (कैप्सूल) से संभव हो जाएगी। यह कैप्सूल न सिर्फ पाचन तंत्र की जांच करेगा, बल्कि फैटी लिवर, हार्ट की बीमारी और लकवे जैसी गंभीर समस्याओं की पहचान और इलाज में भी मददगार होगा। इसके अलावा शराब के बढ़ते सेवन और उससे जुड़ी लिवर बीमारियों पर विशेष चिंता जताई गई।   विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है। कान्क्लेव में पद्मश्री और पद्मभूषण से सम्मानित वरिष्ठ लिवर विशेषज्ञ शिव सरिन की पुस्तक ओन योर बाडी का विमोचन किया गया। साथ ही पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित एंडोस्कोपी विशेषज्ञ डी नागेश्वर रेड्डी का सम्मान किया गया। इंदौर के वरिष्ठ चिकित्सक सुनील जैन को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कांफ्रेंस के आर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी अमित अग्रवाल ने बताया कि कांफ्रेंस के पहले दिन सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) पर आधारित 16 जटिल केस किए गए। इनमें गालब्लैडर कैंसर, पैंक्रियाज कैंसर, पैंक्रियाटिक स्यूडोसिस्ट में प्लास्टिक और मेटैलिक स्टेंट डालना, गैस्ट्रिक वैरिक्स में ग्लू और काइल से इलाज जैसे मामले शामिल रहे। लंबे समय से खून की उल्टी से पीड़ित मरीजों का ईयूएस के माध्यम से सफल उपचार भी किया गया। लाइव डेमो के जरिए ईयूएस एनाटामी को समझाया गया और बायोप्सी व स्टेंट डालने की प्रक्रिया बताई गई। इसके अलावा कांफ्रेंस में एल्कोहालिक लिवर डिजीज, मेटाबालिक एल्कोहालिक लिवर डिजीज (मेट-एएलडी), फैटी लिवर और एसाइटिस यानी पेट में पानी भरने की समस्या पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि अधिकांश लिवर रोग शराब, फैटी लिवर और गलत खानपान से होते हैं। इस दौरान नई दिल्ली के आदर्श चौधरी, अमित महदेव, मुंबई के अनिल अरोरा, हैदराबाद के प्रमोद गर्ग आदि को सम्मानित किया गया।