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‘परमाणु हथियारों से लैस सैन्य शासन है पाकिस्तान’—पुतिन की बुश से बातचीत का खुलासा

वाशिंगटन पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को लेकर पश्चिमी देशों और रूस की चिंता नई नहीं है। अब इस पर मुहर लगाती हुई अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव की गोपनीय जानकारी साझा की गई हैं। आर्काइव की तरफ से 2001 से लेकर 2008 के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच हुई निजी जानकारी को सार्वजनिक किया गया है। इन दस्तावेजों में पुतिन और बुश दोनों ही पाकिस्तानी परमाणु अस्थिरता को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते नजर आते हैं। दस्तावेजों के मुताबिक जून 2001 में स्लोवेनिया में हुई अपनी पहली व्यक्तिगत मुलाकात में पुतिन पाकिस्तान की आलोचना करते उसे एक परमाणु हथियार से संपन्न जुंटा (सैन्य शासन) बताया था। जारी किए गए दस्तावेजों के मुताबिक बाहर से भले ही अमेरिका 9/11 के बाद पाकिस्तान से अपनी साझेदारी बढ़ा रहा था, लेकिन वह पाकिस्तान की परमाणु शक्ति से चिंतित भी था। इसी बातचीत में पुतिन ने खास तौर पर पश्चिमी देशों की यह कहते हुए आलोचना की थी कि वह पाकिस्तान के ऊपर लोकतंत्र का दबाव बनाने में नाकामयाब रहे। पुतिन और बुश के बीच यह बातचीत जिस समय में हो रही थी, उस समय दुनिया को इस बात की जानकारी नहीं थी कि क्या पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले ए.क्यू.खान इसकी डिजाइन को किसी को बेच रहे हैं। हालांकि दोनों ही परमाणु ताकत के प्रसार के खिलाफ दिखाई देते हैं। बुश और पुतिन की बातचीत इन दस्तावेजों में सबसे अहम रूप से दोनों ही देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते हैं। पुतिन कहते हैं कि अभी तक यह साफ नहीं है कि ईरान के पास प्रयोगशालाओं में क्या है और वह कहां है लेकिन उनका पाकिस्तान के साथ सहयोग मौजूद है। इस पर बुश कहते हैं, 'मैंने इस बारे में मुशर्रफ से बात की है। मैंने उनसे कहा कि हमें ईरान और उत्तर कोरिया को ट्रांसफर को लेकर चिंता है। उन्होंने ए. क्यू. खान और उसके कुछ साथियों को जेल में डाला, फिर हाउस अरेस्ट में रखा। हम जानना चाहते हैं कि उन्हें क्या बताया गया है। मैं मुशर्रफ को लगातार याद दिलाता रहता हूं। या तो उन्हें कुछ पता नहीं है या फिर वे पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं।" इसका जवाब देते हुए पुतिन कहते हैं, 'मेरी समझ के मुताबिक सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम मिला है।' इस पर बुश ने कहा,' हां, वही चीज जिसके बारे में ईरान ने आईएईए को नहीं बताया था। यह नियमों का उल्लंघन है। पुतिन-वह पाकिस्तानी मूल का था, यह मुझे परेशान करता है। बुश-हमें भी यह बात परेशान करती है। पुतिन- हमारे बारे में भी सोचिए बुश-हमें परमाणु हथियारों लिए ढेर सारे धार्मिक उन्मादी नहीं चाहिए, ईरान में तो वही सरकार चला रहे हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान को लेकर भारत यह बात शुरुआत से ही कहता आ रहा है। लेकिन वैश्विक राजनीति की वजह से अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करते नजर आता है। अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान के हजारों गुनाह माफ किए, क्योंकि उस वक्त उसे पाकिस्तान की जरूरत थी। बाइडन प्रशासन के दौर में जैसे ही अमेरिकी सैनिक पाकिस्तान से बाहर निकले, वाशिंगटन में इस्लामाबाद की पहुंच कमजोर हो गई। शुरुआत में खबरें यह तक आईं कि बाइडन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का फोन उठाना बंद कर दिया है। हालांकि, राजनीति ने फिर करवट ली और पाकिस्तान आज के समय में एक बार फिर से अमेरिका की गोद में जाकर बैठ गया है।

देशभर में फूड डिलीवरी पर संकट, Zomato–Swiggy–Zepto हड़ताल की तैयारी; 10 मिनट डिलीवरी नियम बना मुद्दा

नईदिल्ली  Amazon, Zomato, Zepto, Blinkit, Swiggy और Flipkart जैसे बड़े फूड डिलीवरी और ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स ने  31 दिसंबर 2025 को देशभर में हड़ताल का ऐलान किया है। इन कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला कंपनियों पर दबाव बढ़ाने के लिए उठाया गया है क्योंकि यूनियनों के मुताबिक गिग इकोनॉमी में काम करने की परिस्थितियां लगातार खराब होती जा रही हैं। इस हड़ताल का ऐलान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (Telangana Gig and Platform Workers Union) और इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (Indian Federation of App-Based Transport Workers) ने किया है। इसमें मेट्रो शहरों और प्रमुख टियर-2 शहरों के डिलीवरी वर्कर्स के शामिल होने की संभावना है। स्विगी-जोमैटो की हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और इंडियन फेडरेशन ऑफ एप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने एक बयान में कहा कि "खासकर व्यस्त समय में और त्योहारों के दौरान डिलीवरी वर्करों को लंबे समय तक काम करना होता है। देशभर में हड़ताल- क्या चाहते हैं गिग वर्कर्स? गिग वर्कर्स की यूनियनों का मानना है कि प्लेटफॉर्म कंपनियों का एल्गोरिदम पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण है जो काम के टारगेट और भुगतान तय करता है। उनका कहना है कि रिस्क कर्मचारियों पर डाले जा रहे हैं जबकि डिलीवरी की समय-सीमा लगातार सख्त होती जा रही है और इंसेंटिव के नियम बार-बार बदले जा रहे हैं। यूनियनों ने अपने बयान में कहा है कि डिलीवरी वर्कर्स- जो खासकर त्योहारों और व्यस्त समय में लोगों तक खाना और पार्सल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इनमें घटती आमदनी, लंबे और अनिश्चित काम के घंटे, असुरक्षित डिलीवरी डेडलाइन, बिना चेतावनी के वर्क आईडी ब्लॉक होना और किसी भी तरह की बुनियादी सामाजिक सुरक्षा या वेलफेयर सपोर्ट का अभाव शामिल है। यूनियनों ने ऐप्स में शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने की मांग भी की है। खासकर रूट से जुड़ी समस्याओं और पेमेंट फेल होने जैसे मामलों के लिए। ये वर्कर्स जॉब सिक्योरिटी से जुड़े उपाय चाहते हैं- जैसे तय रेस्ट ब्रेक, हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना की स्थिति में कवर और पेंशन लाभ। इसके अलावा फे पेयर सिस्टम उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्कर्स 10 मिनट में अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल को खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं। सरकार से क्या मांग कर रही हैं यूनियनें? वर्कर्स यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकारों से उनकी मांग पर तुरंत कार्रवाई करने को कहा है। वे प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए सख्त नियम, लेबल लॉ का सही तरीके से पालन, गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं और यूनियन बनाने व सामूहिक रूप से बातचीत करने के अधिकार की आधिकारिक मान्यता की मांग कर रहे हैं। यूनियन नेता शेख सल्लाउद्दीन ने कहा कि असुरक्षित कार्य प्रणालियों, घटती कमाई और किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा के अभाव के कारण डिलीवरी वर्कर्स को उनकी सीमाओं से परे धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल न्याय, गरिमा और जिम्मेदारी की मांग के लिए है और सरकार मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती। जबकि कंपनियां वर्कर्स की जान की कीमत पर मुनाफा कमा रही हैं। अब तक सरकार ने गिग वर्कर्स की क्या मदद की है? यह हड़ताल ऐसे समय में हो रही है, जब सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक मान्यता देने के लिए नए श्रम सुधार लागू किए हैं। 21 नवंबर 2025 से लागू हुए संशोधित सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) के तहत अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अपने वार्षिक टर्नओवर का 1–2% एक सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा करना होगा। हालांकि, यह योगदान गिग वर्कर्स को किए गए कुल भुगतान के अधिकतम 5% तक सीमित रहेगा। इस फंड का उद्देश्य हेल्थ इंश्योरेंस, दुर्घटना बीमा और मातृत्व लाभ जैसी कल्याणकारी योजनाओं को सपोर्ट देना है। नए नियमों में आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर को भी अनिवार्य किया गया है ताकि वर्कर्स अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर काम करते समय अपने लाभों को साथ ले जा सकें। इसके साथ ही गिग और प्लेटफॉर्म वर्क की कानूनी परिभाषा का भी विस्तार किया गया है। हालांकि कई कंपनियों ने इन बदलावों का स्वागत किया है और कहा है कि इससे स्पष्टता आएगी और वर्कर्स को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। लेकिन यूनियनों का कहना है कि यह सिर्फ पहला कदम है। उनके मुताबिक न्यूनतम वेतन, वर्कर्स की सुरक्षा और एल्गोरिदम आधारित नियंत्रण जैसी गहरी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।  

यात्रीगण ध्यान दें! रेलवे किराए में बढ़ोतरी लागू, स्लीपर–एसी सफर अब पड़ेगा महंगा

नई दिल्ली  भारतीय रेल ने हाल में रेल किराया बढ़ाने की घोषणा की थी, जो आज (26 दिसंबर) से प्रभावी हो गया। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि पहले से की गई बुकिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, 26 दिसंबर या उसके बाद की गई नई बुकिंग पर नए किराए लागू होंगे। रेलवे के अनुसार, उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों के किरायों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अन्य श्रेणियों की ट्रेनों और सेवाओं पर यह संशोधन लागू होगा। आपको बता दें कि यह एक साल में दूसरी बार है जब मंत्रालय ने यात्री रेल किरायों में संशोधन किया है। इससे पहले जुलाई में किराया में वृद्धि की गयी थी। रेल मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा के लिए साधारण श्रेणी के टिकट की कीमत में एक पैसा प्रति किलोमीटर तथा मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की गैर वातानुकूलित और सभी ट्रेनों की वातानुकूलित श्रेणियों के टिकट की कीमत में दो पैसे प्रति किलोमीटर की वृद्धि की अधिसूचना जारी की।अगर आप से आप टिकट बुक कर रहे हैं तो महंगा किराया चुकाना होगा. यह बढ़ोत्‍तरी एक और दो पैसे प्रति किमी. की गयी है. हालांकि इससे कम दूरी तक जनरल क्‍लास से और लोकल ट्रेनों में सफर वालों को राहत दी गयी है, यानी उनके किराए में कोई बढ़ोत्‍तरी नहीं हुई है. आइए जानते हैं कि इस बढ़ोत्‍तरी पर आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा. हालांकि साल में यह दूसरी बार बढ़ोत्‍तरी हुई है. इससे पहले जुलाई में भी बढ़ोत्‍तरी हुई थी. रेल मंत्रालय के कार्यकारी निदेशक सूचना और प्रसार दिलीप कुमार बताते हैं कि आज से ट्रेनों का किराया महंगा हो गया है. इस बढ़ोत्‍तरी से 215 किमी. से कम की जनरल क्‍लास और सबअर्बन ट्रेनों में कोई असर नहीं पड़ेगा. यात्रियों को ट्रेनों और स्‍टेशनों में और बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह बढ़ोत्‍तरी की गयी है. साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को 1 पैसा प्रति किलोमीटर अतिरिक्त देना है. वहीं, मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों की नॉन-एसी और एसी श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 2 पैसे प्रति किलोमीटर है. इससे पहले कब बढ़ा किराया भारतीय रेलवे द्वारा 21 दिसंबर को जारी आदेश के अनुसार 26 दिसंबर से ट्रेन के किराए में बढ़ोतरी का फैसला किया था. किराया बढ़ोत्‍तरी वित्‍तीय साल 2025-26 में दूसरी बार किया गया है. इससे पहले जुलाई में किराया बढ़ाया गया था. इसमें नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस में आधा पैसा (0.5 पैसे) प्रति किमी और एसी क्लासेस में 2 पैसे प्रति किमी की बढ़ोतरी की गई थी. 500 किमी तक नॉन-एसी जनरल में कोई बदलाव नहीं था. इससे रेलवे को करीब 700 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान था.     कम दूरी पर कोई असर नहीं     अगर आप जनरल क्लास में सफर करते हैं, तो रेलवे ने यहां एक ‘किलोमीटर वाला फॉर्मूला’ लगाया है.     अगर आपकी यात्रा 215 किलोमीटर के दायरे में है, तो पुराना किराया ही लगेगा. यानी छोटे शहरों के बीच आने-जाने वालों पर कोई बोझ नहीं है.     216 से 750 किमी के सफर के लिए सिर्फ 5 रुपये बढ़ेंगे. वहीं, 751 से 1250 किमी के लिए 10 रुपये, 1251 से 1750 किमी के लिए 15 रुपये और इससे अधिक दूरी के लिए अधिकतम 20 रुपये की बढ़ोतरी की गई है.     स्लीपर और फर्स्ट क्लास (साधारण): यहां प्रति किलोमीटर के हिसाब से मात्र 1 पैसे का इजाफा किया गया है.     आज से पहले बुक टिकट पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा.     215 किमी तक जनरल/सेकंड क्लास और लोकल ट्रेनों में कोई बढ़ोतरी नहीं.यानी रोजाना ऑफिस/स्कूल जाने वाले यात्रियों को कोई फर्क नहीं.     इस साल दूसरी बार बढ़ोतरी. पहली बार 1 जुलाई 2025 में हुई बदलाव किया गया था.     इससे आने वाले राज्‍सव से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी.     रिजर्वेशन फीस, सुपरफास्ट सरचार्ज, में कोई वृद्धि नहीं. पुराने नियम ही लागू. वे को कितने राजस्‍व का फायदा इस बढ़ोत्‍तरी के साथ एक साल में रेलवे को 1300 करोड़ के अतिरिक्‍त राजस्‍व होने की संभावना है. पहले बढ़ोत्‍तरी के आदेश से 700 और इस बार के आदेश से 600 करोड़ रुपये सालाना आया की बढ़ोत्‍तरी होगी. इस तरह पूरे साल में 1300 रुपये अतिरिक्‍त आय रेलवे को होने का अनुमान है. दिल्‍ली से मुंबई पर कितना पड़ेगा असार दिल्ली से मुंबई के बीच ट्रेन दूरी करीब 1384 किमी. है. अगर जनरल क्लास (अनरिजर्व) की बात करें तो पहले किराया करीब 350 के आसपास होता था, एक पैसे प्रति किमी. के हिसाब से करीब 14 रुपए पहले की तुलना में अधिक चुकान होंगे. यानी 364 के आसपास जनरल क्‍लास वालों को किराया चुकाना होगा. नॉन-एसी यानी  (स्लीपर क्लास) का पुराना किराया 585 रुपये के आसपास है, दो फसे प्रति किमी. बढ़ोत्‍तरी के हिसाब से करीब 32 रुपये ज्‍यादा चुकाने होंगे. वहीं, थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1600 रुपये था, जो बढ़कर 1643 रुपये के आसपास हो गया. दिल्‍ली से पटना के किराए में कितना फर्क पड़ेगा दिल्‍ली से पटना की दूरी करीब 998 किलोमीटर है. जनरल क्लास (अनरिवर्ज) का मौजूदा किराया पुराना किराया 250 के आसपास है, बढ़ोत्‍तरी होने के बाद किराए में 10 रुपये की बढ़ोत्‍तरी होगी, कुल किराया 260 रुपये के आसपास . वहीं नॉन-एसी में किराए में 24 रुपये तक की बढ़ोत्‍तरी . इसी रूट पर थर्ड एसी का पुराना किराया करीब 1370 रुपये है. स्‍लीपर जितना इस क्‍लास में बढ़ाने के बाद किराया 1395 रुपए के आसपास .

हेलमेट नहीं तो जेब पर भारी मार! MP में ट्रैफिक नियम तोड़ने पर अर्थदंड बढ़कर 500 रुपये

भोपाल प्रदेश में हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। हेलमेट नहीं लगाने पर अब 300 की जगह 500 रुपये अर्थदंड लगाने का प्रस्ताव है। वाहन चालक हो या पीछे बैठने वाला दोनों के लिए 500-500 रुपये अर्थंदड का प्रविधान किया जाएगा। परिवहन आयुक्त कार्यालय ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है। इसे शीघ्र ही स्वीकृति के लिए कैबिनेट में प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं अधिकारियों के अनुसार जनवरी, 2026 से नए प्रविधान लागू हो सकते हैं। एमपी में भी लगभग तीन वर्ष पहले अर्थदंड बढ़ाने का प्रस्ताव कैबिनेट में आया था, पर कुछ मंत्रियों ने यह कहते हुए विरोध किया था कि इससे जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा। इस कारण इसे स्वीकृति नहीं मिली थी। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनमें दोपहिया वाहन सवार जितने लोगों की मौत होती हैं, उनमें 80 प्रतिशत से अधिक बिना हेलमेट वाले होते हैं।   6541 लोग बिना हेलमेट के थे इस कारण अर्थदंड बढ़ाने की तैयारी है। चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पहले से चालान 500 रुपये है। पुलिस प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीटीआरआई) की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान चली गई, जिनमें 6541 लोग बिना हेलमेट के थे। ये वाहन चालक या पीछे बैठने वाले थे। पड़ोसी राज्यों की तुलना में एमपी में हेलमेट नहीं पहनने पर अर्थदंड बहुत कम है। यूपी और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड उत्तर प्रदेश और बिहार में एक हजार और छत्तीसगढ़ में 500 रुपये अर्थदंड लगाया जाता है। सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने भी इस वर्ष दो बार प्रदेश का दौरा किया, जिसमें नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिए कहा था। परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 15-20 दिन के भीतर हेलमेट नहीं लगाने पर अर्थदंड बढ़ाने की अधिसूचना जारी हो सकती है।  

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार कोई बिजली यूनिट लगातार 450 दिन से कर रही उत्पादन

भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) के अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई (ATPS) की 210 मेगावाट क्षमता की यूनिट नंबर 5 ने बड़ा कमाल दिखाते हुए लगातार 450 दिन बिजली उत्पादन करने का रिकार्ड बनाया। चचाई की यूनिट नंबर 5 प्रदेश के इतिहास में ऐसी प्रथम विद्युत उत्पादन यूनिट है जो लगातार 450 दिनों से संचालित है। यह यूनिट 1 अक्टूबर 2024 से निरंतर रूप से विद्युत उत्पादन कर रही है। यूनिट ने गत माह अक्टूबर की 4 तारीख को लगातार 365 दिन (एक वर्ष) तक निर्बाध विद्युत उत्पादन करने का तमगा हासिल किया था। यूनिट 5 के निर्बाध संचालन से प्रदेश के विद्युत ग्रिड को स्थिरता मिली और घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को सुचारु विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई। इस उपलब्धि से न केवल म.प्र. पावर जनरेशन कंपनी की साख मजबूत हुई बल्कि यह प्रदेश की अन्य ताप विद्युत इकाइयों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बनी है। ऊर्जा मंत्री ने ऐतिहासिक सफलता पर दी बधाई अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई की यूनिट नंबर 5 की इस सफलता व उपलब्ध‍ि पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा नीरज मंडलोई व MPPGCL के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह हर्ष ने व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्ध‍ि अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई के यूनिट नंबर के ऑपरेशन व मेंटेनेंस अभियंताओं व कार्मिकों की लगन, मेहनत व समर्पण का सबसे बड़ा उदाहरण है। उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता दर्शाते आंकड़े निरंतर संचालन की इस असाधारण अवधि के दौरान यूनिट नंबर 5 ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए 98.48% का प्लांट अवेलेबिलिटी फैक्टर (PAF), 94.91% का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) प्राप्त किया है और 9.29% की सहायक विद्युत खपत (APC) बनाए रखी। ये परिचालन सूचकांक स्पष्ट रूप से इस अवधि के दौरान संयंत्र टीम द्वारा उच्च स्तर की दक्षता, विश्वसनीयता और तकनीकी उत्कृष्टता को बनाये रखा गया। चचाई के अभियंताओं व कार्मिकों ने दिखाया कमाल पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि सामूहिक प्रयास, अनुशासित कार्यशैली व उच्च तकनीकी दक्षता से अमरकंटक ताप विद्युत गृह की यूनिट नंबर 5 जैसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। चुनौतीपूर्ण लक्ष्य लगातार एक वर्ष तक बिना रुकावट संचालन किसी भी ताप विद्युत इकाई के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसके लिए बॉयलर, टरबाइन, जनरेटर एवं सहायक प्रणालियों का सटीक रखरखाव, निरंतर निगरानी व तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान जरूरी होता है। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) की समर्पित टीम के निरंतर परिश्रम व तकनीकी विशेषज्ञता का परिणाम है।  

फिर बढ़ा संक्रमण का खतरा, साल खत्म होने से पहले डराने लगी यह बीमारी

अमेरिका में छुट्टियों और जश्न के माहौल के बीच कोरोना वायरस (COVID-19) ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। जैसे-जैसे लोग क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के लिए यात्रा कर रहे हैं और ठंडे मौसम के कारण घरों के अंदर समय बिता रहे हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने संक्रमण की एक नई लहर की चेतावनी दी है। Stratus वैरिएंट का बढ़ता प्रभाव इस साल की शुरुआत में अमेरिका में लेट-समर वेव देखी गई थी जिसका कारण XFG वैरिएंट था। इसे वैज्ञानिक भाषा में Stratus भी कहा जाता है। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन के अन्य रूपों की तरह ही बहुत संक्रामक है और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर आसानी से फैलता है। CDC (रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र) के ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका के 31 राज्यों में कोविड के मामले बढ़ रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? संक्रमण के स्तर को मापने के लिए वैज्ञानिक वेस्टवॉटर (गंदे पानी) की जांच करते हैं। इसमें दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं: CDC की रिपोर्ट: 13 दिसंबर तक देशभर में वायरस की मात्रा कम स्तर पर थी लेकिन 15 राज्यों में यह मध्यम से उच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। WastewaterSCAN की रिपोर्ट: इसके अनुसार नवंबर से अब तक वायरस की मौजूदगी में 21% की बढ़ोतरी हुई है और राष्ट्रीय स्तर पर इसे हाई माना जा रहा है।  बुजुर्गों के लिए बढ़ता खतरा वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ डॉ. विलियम शैफनर का कहना है कि वर्तमान में फ्लू (Flu) के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं जबकि कोविड की रफ्तार फिलहाल धीमी लेकिन स्थिर है। सबसे ज्यादा चिंता 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को लेकर है क्योंकि इस आयु वर्ग में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। विशेषज्ञ इसकी वजह समय के साथ कम होती इम्युनिटी और बूस्टर डोज न लगवाना बता रहे हैं। सबसे प्रभावित इलाके और राज्य फिलहाल अमेरिका के मिडवेस्ट और नॉर्थईस्ट इलाकों में संक्रमण सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। मिशिगन, मिनेसोटा, ओहियो, मैसाचुसेट्स, कनेक्टिकट, एरिजोना, कंसास, केंटकी और न्यू हैम्पशायर जैसे राज्यों में कोविड का स्तर 'हाई' या 'मॉडरेट' दर्ज किया गया है।   बचाव के तरीके छुट्टियों के इस सीजन में खुद को और परिवार को सुरक्षित रखने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ सलाह दी है: वैक्सीनेशन: अपनी बूस्टर डोज समय पर लें। सावधानी: यात्रा के दौरान भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मास्क का प्रयोग करें। स्वच्छता: हाथों को बार-बार धोएं और सर्दी-जुकाम के लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट करें।

रंगपुर डिविजन के अलग होने से चिकन नेक की समस्या हल, 23 लाख हिंदुओं के लिए राहत

नई दिल्ली /ढाका   बांग्लादेश से शेख हसीना की सरकार को हटाए जाने के बाद से वहां की सत्ता कट्टरपंथी ताकतों के हाथ में है. खुद मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस इन कट्टरपंथी ताकतों के हाथों खिलौना बन गए हैं. ऐसे में इस वक्त वहां भारत विरोधी भावनाएं काफी मुखर हैं. कट्टरपंथी हर बात पर भारत को धमकी दे रहे हैं. हालांकि भारत के सामने बांग्लादेश और वहां की कट्टरपंथी ताकतों की औकात बहुत मामूली है. भौगोलिक रूप से पूरी तरह से भारत की गोद में बैठा इस मुल्क के मौजूदा हुक्मरान इस बात को भूल गए हैं कि उनको भारत ने ही पैदा किया है. वे अब उलटे भारत को ही धमकी दे रहे हैं. वे पूर्वोत्तर इलाके को भारत से अलग करने बात करते हैं. वे भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक कहा जाता है, को काटने की धमकी देते हैं. लेकिन, उनको नहीं पता है कि भारत के शह मात्र से उनका एक बड़ा इलाका आजाद हो सकता है. वह इलाका है रंगपुर डिविजन. इसी डिविजन के बराबर चिकन नेक है और बांग्लादेश के इस डिविजन का करीब-करीब 90 फीसदी बॉर्डर भारत के पश्चिम बंगाल राज्य से जुड़ता है. अब सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब चर्चा चल रही है. तमाम लोग कह रहे हैं कि अब बहुत हो गया. भारत को राष्ट्र हित को महत्व देते हुए बांग्लादेश से इस डिविजन को आजाद कराने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए. इस डिविजन के आजाद होने भर से भारत का सिलिगुड़ी कॉरिडोर करीब 120 से 150 किमी चौड़ा हो जाएगा. इससे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या दूर हो जाएगी. क्या ऐसा करना संभव है? देखिए, सैद्धांतिक तौर पर ऐसा करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं है. भारत एक जिम्मेदार मुल्क है. वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करता है. लेकिन, कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि खुद को बचाने के लिए पड़ोसी मुल्क में परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप करना मजबूरी हो जाती है. ऐसी स्थिति में कोई भी मुल्क हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा रह सकता है. क्योंकि अंततः बांग्लादेश हमारी गोद में बैठा मुल्क है और उसकी किसी भी हरकत से सीधे तौर पर भारत पर असर पड़ना तय है.     रूस-यूक्रेन जंग है उदाहरण     इस बात को समझने के लिए हम मौजूदा रूस-यूक्रेन जंग को उदाहरण बना सकते हैं. ऐतिहासिक रूप से यूक्रेन सोवियत रूस का हिस्सा था. विभाजन के बाद वह अलग मुल्क बना. फिर वह तेजी से पश्चिम के प्रभाव में आने लगा. दूसरी और रूस को यह बात पसंद नहीं थी. फिर भी वह शांत रहा. लेकिन, यूक्रेन ने एक संप्रभु मुल्क होने के नाते रूस विरोधी ताकतों के साथ हाथ मिलाते रहा. वह रूस विरोधी सबसे बड़े सैन्य गठबंधन नाटो का हिस्सा बनने के लिए झटपटाने लगा. इस कारण रूस का धैर्य जवाब दे दिया. रूस किसी भी कीमत पर अपनी सीमा पर नाटो की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं कर सकता था. इसी कारण उसने यूक्रेन पर हमला किया. रूस के पास सैन्य ताकत है और वह ऐसा करने का दम रखता है. आज स्थिति यह हो गई है कि अमेरिका और तमाम पश्चिमी देश रूस को संघर्ष विराम कराने के लिए जो प्रस्ताव दे रहे हैं उसमें यूक्रेन को नाटो से अलग रखने और रूस द्वारा यूक्रेन के कब्जाए गए हिस्से को मान्यता देने की बात कह रहे हैं. यानी रूस की जो चिंता थी उसे अब पश्चिमी देश भी मानने लगे हैं. इस तरह यह बात तो स्पष्ट है कि अगर किसी देश की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है तो वह मजबूरन इस तर्क को आधार बनाकर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. बांग्लादेश के मौजूदा हुक्मरान ऐसी परिस्थिति बनाने में लगे हैं. वे भारत विरोधी ताकतों को लगातार शह दे रहे हैं. ऐसे में भारत सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है. लेकिन, यह सैन्य हस्तक्षेप भी रूस-यूक्रेन जंग की तरह काफी व्यापक और बड़ा आर्थिक नुकसान वाला हो सकता है. अब आते हैं रंगपुर डिविजन पर वैसे तो 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के वक्त भारत के पास सुनहरा मौका था कि वह अपने सिलिगुड़ी कॉरिडोर को चौड़ा करने के लिए बांग्लादेश के इस डिविजन को भारत में मिला ले या फिर उसको एक आजाद मुल्क बनवा दे. उस वक्त भारत के लिए ऐसा करना बहुत आसान था क्योंकि भारत ने इस मुल्क की आजादी के लिए जंग लड़ी थी. पूरी दुनिया से टकराव मोल लिया था. खुद दुनिया का अंकल सैम अमेरिका भारत के खिलाफ था लेकिन दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शानदार नेतृत्व का परिचय दिया और बांग्लादेश का निर्माण करवाया. करीब 23 लाख हिंदू रंगपुर डिविजन पूरी तरह पश्चिम बंगाल की गोद बैठा इलाका है. यह एक बड़ा डिविजन है और इसका क्षेत्रफल 16,185 वर्ग किमी है. यहां की कुल आबादी करीब 1.9 करोड़ है. यह एक बहुत ही गहन आबादी वाला इलाका है. यहां प्रति किमी 1200 लोग रहते हैं. इस इलाके में करीब 23 लाख हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी में करीब 13 फीसदी हैं. मुस्लिम समुदाय की आबादी करीब 86 फीसदी है. बांग्लादेश में डिविजन की बात करें तो प्रतिशत में यह रंगपुर डिविजन दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला इलाका है. इस देश के सिलहट डिविजन में सबसे अधिक 13.51 फीसदी हिंदू हैं. संख्या के आधार पर देखें तो राजधानी ढाका डिविजन में सबसे अधिक करीब 28 लाख हिंदू रहते हैं. हालांकि ढाका डिविजन की कुल आबादी 4.42 करोड़ है और प्रतिशत में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 6.26 फीसदी है. कैसे अलग हो सकता है रंगपुर देखिए, सीधे तर सैन्य कार्रवाई कर इस डिविजन को बांग्लादेश से अलग करना बहुत मुश्किल कार्य है. इसके लिए वहां के लोगों को आगे आना पड़ेगा. सबसे पहले तो बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं को इस इलाके में बसना पड़ेगा. उनको यहां की डेमोग्राफी में बदलाव करना पड़ेगा. जब वह एकजुट और किसी खास इलाके में मजबूत होंगे तो आंतरिक रूप से भी उनके लिए खतरा कम हो जाएगा. फिर अगर उनको कोई बाहरी जरूरत पड़ेगी तो भारत के लिए परोक्ष तौर पर सहायता देना आसान होगा. इसके अलावा उनके खिलाफ अत्याचार या जुर्म होता है, या उनका उत्पीड़न किया जाता है या उनके साथ दोयम दर्जे का … Read more

7वां वेतन आयोग खत्म, 8वें की तैयारी: नए साल से पहले जानें आपकी सैलरी कितनी बढ़ेगी

नई दिल्ली सातवें वेतन आयोग की समय सीमा 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है यानी 8 दिन बाद आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission) लागू होने की संभावना है। देशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। क्योंकि, इसका सीधा असर 1.19 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनर्स पर पड़ने वाला है। ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स में उम्मीदें भी तेज हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी और पेंशन में असल बढ़ोतरी कितनी होगी? सैलरी में इजाफा पूरी तरह फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा, क्योंकि यही फैक्टर नई बेसिक सैलरी तय करता है। इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर लेवल-1 से लेवल-18 तक यानी चपरासी से लेकर आईएएस तक के कर्मचारियों की सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी? नया वेतन 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है, लेकिन सरकार को रिपोर्ट मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर जरूर मिलेगा, पर बढ़ी हुई सैलरी थोड़ा इंतजार कराने के बाद ही हाथ आएगी। फिटमेंट फैक्टर दरअसल वह गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई सैलरी तय की जाती है। Nexdigm के डायरेक्टर रामचंद्रन कृष्णमूर्ति के अनुसार, फिटमेंट फैक्टर तय करते समय महंगाई, जीवन-यापन की लागत, CPI इंडेक्स, सरकार की वित्तीय स्थिति और प्राइवेट सेक्टर से तुलना जैसे कई पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर बेसिक पे और ग्रेड पे को आधार बनाकर यह तय किया जाता है कि कर्मचारियों को कितना इंक्रीमेंट दिया जा सकता है। महंगाई जितनी ज्यादा होती है, फिटमेंट फैक्टर उतना ही ऊंचा रखने की जरूरत महसूस होती है। दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो सैलरी में सीधा दोगुने से ज्यादा का असर दिखेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है, तो 2.15 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से नई बेसिक सैलरी ₹38,700 हो सकती है। वहीं, ₹50,000 बेसिक पाने वाले कर्मचारी की सैलरी बढ़कर करीब ₹1,07,500 तक पहुंच सकती है। यही नहीं, चूंकि DA, HRA और पेंशन जैसी सुविधाएं बेसिक सैलरी पर ही निर्भर करती हैं, इसलिए कुल मासिक आय और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में भी बड़ा उछाल आएगा। अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों की सैलरी अगर अलग-अलग लेवल की बात करें, तो लेवल-1 में ₹18,000 की बेसिक सैलरी बढ़कर ₹38,700, लेवल-6 में ₹35,400 से ₹76,110 और लेवल-10 में ₹56,100 से बढ़कर करीब ₹1.20 लाख हो सकती है। वहीं, सीनियर अधिकारियों के लिए यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा होगी। लेवल-15 में ₹1.82 लाख की बेसिक सैलरी ₹3.91 लाख, जबकि लेवल-18 में ₹2.50 लाख से बढ़कर करीब ₹5.37 लाख तक पहुंच सकती है। कुल मिलाकर, अगर 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 8वां वेतन आयोग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत और मजबूत बढ़ोतरी लेकर आ सकता है। चपरासी से IAS तक, कितनी कितनी बढ़ेगी सैलरी?  ग्रेड वर्तमान बेसिक पे अनुमानित बेसिक पे Level 1 ₹ 18,000 ₹ 38,700.00 Level 2 ₹ 19,900 ₹ 42,785.00 Level 3 ₹ 21,700 ₹ 46,655.00 Level 4 ₹ 25,500 ₹ 54,825.00 Level 5 ₹ 29,200 ₹ 62,780.00 Level 6 ₹ 35,400 ₹ 76,110.00 Level 7 ₹ 44,900 ₹ 96,535.00 Level 8 ₹ 47,600 ₹ 102,340.00 Level 9 ₹ 53,100 ₹ 114,165.00 Level 10 ₹ 56,100 ₹ 120,615.00 Level 11 ₹ 67,700 ₹ 145,555.00 Level 12 ₹ 78,800 ₹ 169,420.00 Level 13 ₹ 118,500 ₹ 254,775.00 Level 13 ₹ 131,100 ₹ 281,865.00 Level 14 ₹ 144,200 ₹ 310,030.00 Level 15 ₹ 182,200 ₹ 391,730.00 Level 16 ₹ 205,400 ₹ 441,610.00 Level 17 ₹ 225,000 ₹ 483,750.00 Level 18 ₹ 250,000 ₹ 537,500.00  8वां वेतन आयोग कब से लागू होगा? 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रहा है। ऐसे में नई सैलरी 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। हालांकि, सरकार को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें मंजूर करने में करीब दो साल लग सकते हैं। ऐसे में कर्मचारियों को एरियर मिलने की उम्मीद भी है। फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?  फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। जितना ज्यादा फिटमेंट फैक्टर, उतनी ज्यादा सैलरी और पेंशन। फिटमेंट फैक्टर कैसे तय होता है? एक्सपर्ट बताते हैं कि फिटमेंट फैक्टर तय करते समय कई आर्थिक और संस्थागत पहलुओं को देखा जाता है। आमतौर पर इसमें बेसिक पे + ग्रेड पे को आधार बनाकर जरूरी बढ़ोतरी का आकलन किया जाता है।  

वीर बाल दिवस आज: प्रदेशभर के स्कूलों में आयोजित होंगे विशेष कार्यक्रम

प्रदेश के स्कूलों में आज 26 दिसम्बर को मनाया जायेगा वीर बाल दिवस स्कूलों में होंगी चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिताएँ मंत्री सिंह ने की प्रतियोगिता में बच्चों की अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण भोपाल  प्रदेश के स्कूलों में 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जायेगा। इसके लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किये हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने स्कूल के बच्चों से इस दिन होने वाली गतिविधियों में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह द्वारा दिये गये सर्वोच्च बलिदान के संबंध में प्रतिवर्ष 26 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के भविष्य की नींव माने जाने वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिये समर्पित एक राष्ट्रीय उत्सव है। इस पहल का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं का पोषण करना, रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें विकसित भारत के सपने में योगदान देने के लिये प्रेरित करना है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का होगा सजीव प्रसारण वीर बाल दिवस का राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम 26 दिसम्बर, 2025 को दोपहर 12:30 बजे भारत मण्डपम नई दिल्ली में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का सजीव प्रसारण (लाइव वेबकास्ट) http://pmindiawebcast.nic.in/ पर किया जायेगा। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि इस लिंक की सूचना सभी सरकारी और प्रायवेट स्कूलों में दी जाये, जिससे स्कूल के विद्यार्थी इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देख सकें। जिला शिक्षा अधिकारियों को दिये गये निर्देश में कहा गया है कि इससे जुड़ी जानकारी dpividhya admin और ramsa admin Whats App Group पर भी साझा की गई है। वीर बाल दिवस पर होने वाली प्रतियोगिताएँ स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों में आयु समूह के अनुसार विभिन्न प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का निर्णय लिया है। आयु वर्ग 3-6 वर्ष के लिये चित्रकारी, पेंटिंग, खेल गतिविधियाँ एवं कहानी सुनाना और आयु वर्ग 6-10 वर्ष के लिये चित्रकला, निबंध लेखन एवं कहानी सुनाना प्रमुख हैं। इसके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें मेरे सपनों का भारत, वह भारत जो मैं देखना चाहता हूँ, दूसरों की मदद करना मेरी महाशक्ति है, मेरी संस्कृति के रंग और मेरे आसपास के नायक, जिनमें शिक्षक, देखभालकर्ता और मित्र शामिल हैं। स्कूलों में आयु वर्ग 11-18 वर्ष के लिये निबंध, कविताएँ, वाद-विवाद और डिजिटल प्रतियोगिता शामिल हैं। इनके लिये जो विषय तय किये गये हैं, उनमें 'राष्ट्र निर्माण में बच्चों की भूमिका', 'विकसित भारत के लिये मेरा दृष्टिकोण', 'विकसित भारत बनाने में बच्चों की भूमिका', 'विकासशील भारत को आकार देने में बच्चों की भूमिका', 'साहस और करुणा, एक नायक क्या बनाता है', 'भारत के इतिहास में वीरता की कहानियाँ', 'डिजिटल इण्डिया में युवाओं के लिये अवसर', 'स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत', 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ', 'प्रत्येक बालिका को सशक्त बनाना' शामिल हैं। इसके अलावा आत्मनिर्भर भारत-नवाचार में युवाओं की अग्रणी भूमिका, 'वोकल फॉर लोकल', 'भारत की पारम्परिक शिल्प-कलाओं का उत्सव मनाना', 'स्किल इण्डिया मिशन' और 'अमृतकाल में कल के भारत निर्माण में युवाओं की भूमिका' को शामिल किया गया है। शिक्षकों को इन प्रतियोगिताओं मे  

MP सरकार का बड़ा कदम: 15 लाख कर्मचारियों को साल 2026 से आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य सुविधा

 भोपाल  प्रदेश सरकार राज्य के 15 लाख से अधिक कर्मचारियों को नए साल 2026 में आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य सुविधा योजना देने की तैयारी कर रही है।प्रस्ताव बना लिया गया है। इसमें कर्मचारियों को हरियाणा और राजस्थान की तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। कुछ राशि उनके वेतन से अंशदान के तौर पर काटी जाएगी, शेष राशि सरकार जमा कराएगी। कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई योजना मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से प्रस्तावित यह योजना राज्य सरकार ने कर्मचारी संगठनों के सुझाव पर बनाई है। इसके लिए भी आयुष्मान भारत की तरह प्रदेश और प्रदेश के बाहर के निजी अस्पतालों से अनुबंध किया जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से कैशलेस उपचार सुविधा की मांग कर रहे हैं, जो जल्द ही उन्हें मिल सकती है। 10 लाख रुपये तक फ्री इलाज का प्रस्ताव प्रस्तावित योजना में प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ सेवानिवृत्त कर्मियों के परिवारों को सामान्य इलाज के लिए पांच लाख रुपये और गंभीर बीमारी होने पर दस लाख रुपये तक की निश्शुल्क चिकित्सा और ओपीडी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वेतन और पेंशन से कितना देना होगा अंशदान इसमें कर्मचारियों के वेतन और पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक मासिक अंशदान लिया जाएगा। शेष राशि सरकार मिलाएगी। बता दें कि सरकार ने फरवरी 2020 में प्रदेश के कर्मचारियों के लिए फ्री इलाज की घोषणा की थी। इसका आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन योजना शुरू नहीं की जा सकी। उत्तराखंड सरकार इसी तरह की योजना संचालित कर रही है। इन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ स्थायी, अस्थायी, संविदा, शिक्षक संवर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, कार्यभारित, राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, आशा एवं उषा कार्यकर्ता, आशा सुपरवाइजर और कोटवार और आउटसोर्स स्वास्थ्य सुविधा का लाभ ले पाएंगे। इन कर्मचारियों की संख्या 15 लाख से अधिक है। अभी खुद कराते हैं इलाज प्रदेश में अभी कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज का सारा खर्च खुद उठाते हैं और बाद में विभाग के माध्यम से खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करते हैं। यह प्रस्ताव कैबिनेट तक जाता है और सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की दरों के अनुसार भुगतान करती है, लेकिन कई बार गंभीर बीमारी पर अधिक व्यय होने के कारण पूरा खर्च कवर नहीं होता, जिसके चलते कर्मचारियों को स्वयं ही इलाज का खर्च वहन करना होता है।     हम तो लंबे समय से कर्मचारियों के स्वास्थ्य बीमा की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। कई पेंशनर ऐसे हैं जो अपना जीवन यापन भी ठीक तरह से नहीं कर पाते, इलाज कराना तो बहुत दूर की बात है। सरकार को शीघ्र निर्णय लेकर इसे लागू करना होगा। सभी को स्वास्थ्य सुविधा मिलनी चाहिए।     -सुधीर नायक, मंत्रालय सेवा अधिकारी, कर्मचारी संघ