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31 जनवरी तक ही माओवादी समर्पण विकल्प, फरवरी से सख्त कार्रवाई, योजनाओं का लाभ बंद

रायपुर  माओवादी हिंसा उन्मूलन के लिए नए साल में सरकार और कड़ा रुख अपनाने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार ने जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए रणनीति तय की है। इसके तहत माओवादियों को 31 जनवरी 2026 तक ही समर्पण का विकल्प मिलेगा और वे पुनर्वास योजना का लाभ ले सकेंगे। माओवादी हिंसा उन्मूलन के लिए नए साल में बदलेगी रणनीति समर्पित मओवादियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत नकद प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, नौकरी व स्वरोजगार के लिए सब्सिडी और आवास की सुविधा दी जा रही है। सुरक्षा तंत्र से जुड़े राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरवरी से माओवादियों के लिए चल रही आत्मसमर्पण की नीति समाप्त कर दी जाएगी। इसके बाद सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के ठिकानों में घुसकर उन्हें चारों ओर से घेरने और निर्णायक कार्रवाई करने की रणनीति पर अमल किया जाएगा। साझा रणनीति तय केंद्र और राज्य सरकार ने जनवरी, फरवरी और मार्च के लिए साझा रणनीति तय की है। जनवरी के बाद माओवादियों को उनकी मांद के भीतर ही घुसकर गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा। मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने के लिए नरेन्द्र मोदी, अमित शाह ने संकल्प लिया है। प्रदेश में विष्णु देव साय और विजय शर्मा इस मुहिम में निरंतर लगे हुए हैं। माओवादी अधिक संख्या में मुख्य धारा में लौटें, इसके लिए लगातार उन्हें आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभी आत्मसमर्पित माओवादियों को आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत नकद प्रोत्साहन, प्रशिक्षण, नौकरी व स्वरोजगार के लिए सब्सिडी और आवास की सुविधा दी जा रही है। कर्रेगुट्टा पहाड़ी में हुए आपरेशन की तर्ज पर बनी रणनीति सुरक्षा तंत्र से जुड़े राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक फरवरी से माओवादियों के लिए चल रही आत्मसमर्पण की नीति पर विराम लगाकर माओवादियों के खिलाफ लड़ाई तेज होगी। सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के ठिकानों में घुसकर उन्हें चारों ओर से घेरने और निर्णायक कार्रवाई करने की रणनीति पर अमल किया जाएगा। सुरक्षा बलों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित गढ़ को ध्वस्त किया था बीजापुर जिले की कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर जिस तरह सुरक्षा बल के जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित गढ़ को ध्वस्त किया था, ठीक उसी तरह अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए राज्य से लगे पड़ोसी राज्यों से सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी बस्तर में उतारा जा सकता है। इस व्यापक अभियान को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच सहमति बन चुकी है। बता दें कि मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ समेत पूरे देश को माओवादी हिंसा से मुक्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने संकल्प लिया है। 'छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं को नहीं मारना चाहते थे माओवादी' झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमले को 12 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन हाल के दिनों में भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी के बाद यह मामला सुर्खियों में है। 17 अक्टूबर को समर्पण करने वाले पूर्व माओवादी केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश ने दावा किया कि झीरम हमला किसी राजनीतिक साजिश के तहत सुनियोजित नहीं था। यह टीसीओसी (टैक्टिकल काउंटर आफेंसिव कैंपेन) के तहत पुलिस बल को निशाना बनाने की योजना थी, लेकिन दुर्भाग्यवश इसकी चपेट में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा आ गई। माओवादियों ने कवासी लखमा को छोड़ दिया गया था रूपेश ने बताया कि स्थानीय पहचान के कारण कवासी लखमा को छोड़ दिया गया था। लखमा वर्तमान में कांग्रेस से विधायक हैं। बता दें कि 25 मई 2013 को माओवादियों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्र कर्मा, नंद कुमारपटेल व विद्याचरण शुक्ल सहित 30 से अधिक लोगों की हत्या कर दी थी। उन्होंने कहा कि भाकपा (माओवादी) की पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति की बैठकों में इस हमले को संगठन की बड़ी रणनीतिक भूल के रूप में स्वीकार किया गया था। पार्टी ने इस संबंध में पत्र जारी कर सार्वजनिक रूप से अपनी गलती भी मानी थी।  माओवादी आंदोलन सीमित दायरे में सिमट गया रूपेश ने कहा कि माओवादी आंदोलन सीमित दायरे में सिमट गया और जनता का भरोसा धीरे-धीरे टूटता चला गया। बस्तर में ईसाई मिशनरियों द्वारा बड़े पैमाने पर मतांतरण के बावजूद माओवादियों की चुप्पी के सवाल परउन्होंने कहा कि इससे हमें नुकसान ही हुआ, क्योंकि लोग चर्च से जुड़ जाते हैं और संगठन में नहीं आते हैं। शव पर हथियार लेकर नृत्य करना था गलत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के शव पर हथियार लेकर नृत्य करने को लेकर रूपेश ने कहा कि मैं भी इसे व्यक्तिगत रूप से बहुत गलत मानता हूं। शीर्ष माओवादी देवजी के अब तक समर्पण नहीं करने पर कहा कि वह केंद्रीय पोलित ब्यूरो सदस्य है। वह मानता है कि संघर्ष को मरने नहीं देना है, भले ही हम मर जाएं।      

रहमान की सीख और जमीनी हकीकत: कानून-व्यवस्था पर सवाल, हिंदू की लिंचिंग से मचा हड़कंप

ढाका  बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान 24 दिसंबर को जब अपना मुल्क लौटने की तैयारी कर रहे थे. तो उनके मन में बांग्लादेश को लेकर एक सपना था. सेकुलर बांग्लादेश का, लोकतांत्रिक बांग्लादेश का. उस बांग्लादेश का जहां कानून का राज होगा. बांगलादेश को लेकर उनका सपना उनके भाषणों में साफ दिखता है. लेकिन ठीक उसी समय बांग्लादेश में कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही थी.  24 दिसंबर की रात को बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पांग्शा उपजिला में होसेंडांगा पुराने बाजार क्षेत्र में रात करीब 11 बजे एक भीड़ ने हिन्दू युवक अमृत मंडल की हत्या कर दी. भीड़ ने सबसे पहले अमृत मंडल पर हमला किया और उसकी खूब पिटाई कर दी. पुलिस ने उन्हें गंभीर हालत में उन्हें बचाया और अस्पताल पहुंचाया, जहां रात करीब 2 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया.  25 दिसंबर को अमृत मंडल की मौत हो गई और 25 दिसंबर को ही तारिक रहमान 17 सालों बाद लंदन से बांग्लादेश लौटे.  पहले दीपू, अब अमृत, 6 दिन में 2 हिन्दुओं की लिंचिंग दीपू चंद्र दास की हत्या के 6 दिन बाद हुए इस कत्ल से बांग्लादेश का हिन्दू समुदाय सदमे में है. बांग्लादेश की पुलिस और अंतरिम सरकार इस घटना पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है.  पुलिस का कहना है कि यह सांप्रदायिक हमला नहीं था, बल्कि स्थानीय अपराधी गतिविधियों से जुड़ा मामला था. पुलिस का दावा है कि अमृत मंडल के खिलाफ हत्या सहित कई आपराधिक मामले दर्ज थे. और उसे एक स्थानीय गिरोह का सरगना माना जाता था. अगर बांग्लादेश पुलिस का दावा सच भी है तो भी एक भीड़ को किसी की हत्या की इजाजत नहीं दी जा सकती है. 25 दिसंबर को तारिक रहमान जब ढाका में अपनी पहली सभा को संबोधित कर रहे थे तो उन्होंने बांग्लादेश में हर कीमत पर कानून-व्यवस्था की मर्यादा कायम रखने की सलाह चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को दी थी.  तारिक रहमान ने बुधवार को  कहा, “देश की शांति और अनुशासन को किसी भी कीमत पर बनाए रखना होगा. साजिशों का मुकाबला करने के लिए सभी को धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा.” ये बांग्लादेश मुसलमानों-हिन्दुओं का है BNP के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि, "लोग लोकतंत्र वापस चाहते हैं. साथ मिलकर, हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाएंगे."  तारिक रहमान ने भले ही लोकतांत्रिक और सुरक्षित बांग्लादेश का सपना देखा हो लेकिन मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाला बांग्लादेश में हिन्दुओं के लिए न तो लोकतंत्र है और न ही वे यहां सुरक्षित दिख रहे हैं.  पहले 18 दिंसबर को दीपू चंद्र की हत्या इसके बाद 24 दिसंबर को अमृत मंडल की हत्या इसी का सबूत है.  तारिक रहमान के सपनों का बांग्लादेश अबतक सेकुलर दिखता है. 25 दिसंबर को अपने भाषण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया.  तारिक रहमान ने ढाका के बाहरी इलाके पूर्बांचल में लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "आज बांग्लादेश के लोग बोलने का अपना अधिकार वापस पाना चाहते हैं. वे अपने लोकतांत्रिक अधिकार वापस पाना चाहते हैं." "अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर देश बनाएं. यह देश पहाड़ों और मैदानों के लोगों, मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों का है. हम एक सुरक्षित बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर महिला, पुरुष और बच्चा घर से निकलकर सुरक्षित घर लौट सके." यूनुस के राज में चटगांव में हिन्दुओं पर हमले बढ़े बांग्लादेश के चट्टगांव में भी हिन्दू परिवारों पर हमले हुए हैं और मोहम्मद यूनुस की पुलिस रस्मी कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं कर पा रही है. चटगांव के राउज़ान के तीन इलाकों में पांच दिनों में अल्पसंख्यक समुदायों के चार घरों पर आगजनी की घटनाओं की एक सीरीज़ ने उपज़िला के निवासियों में डर फैला दिया है.  पीड़ितों और पुलिस के अनुसार हमले देर रात किए गए हमलावरों ने घरों में आग लगाने से पहले उनके मुख्य दरवाजों को बाहर से बंद कर दिया था.  हमले से बचते हुए ये हिन्दू परिवार बांस या टिन की दीवारों को काटकर भागने में कामयाब रहे.  ताज़ा घटना मंगलवार को सुबह करीब 3:45 बजे राउज़ान नगर पालिका के पश्चिम सुल्तानपुर के शिल्पारा में हुई, जिसमें सुलाल शिल और अनिल शिल के घरों को निशाना बनाया गया.  पुलिस ने घटनास्थल के पास से एक संदिग्ध हाथ से लिखा बैनर ज़ब्त किया. इसमें 43 मोबाइल फोन नंबर भी थे. दोनों परिवारों के आठ सदस्य घरों के अंदर सो रहे थे, वे घने धुएं और आग की लपटों से जागे.  सुलाल के बेटे मिथुन शिल, जो दुबई में रहते हैं और तीन महीने पहले अपनी शादी के लिए घर लौटे थे, ने कहा, "हम घबरा गए और बाहर भागने की कोशिश की, लेकिन हमने पाया कि दोनों दरवाजों पर बाहर से कुंडी लगी हुई थी." "आखिरकार, हमें अपनी जान बचाने के लिए बांस और टिन की दीवारों को काटना पड़ा." मिथुन ने बताया कि उनका पासपोर्ट, फर्नीचर और एक महीने पहले शादी में मिले करीब 10 लाख रुपये के शादी के तोहफे आग में जलकर खाक हो गए.  

मुख्यमंत्री बोले—त्याग और बलिदान की भावना रखने वालों का ही इतिहास बनता है

इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होः मुख्यमंत्री  वीर बाल दिवस के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए योगी आदित्यनाथ, सिख गुरुओं के अमर बलिदान को किया नमन सीएम ने साहिबज़ादों के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने के लिए प्रधानमंत्री का किया धन्यवाद लखनऊ धर्म रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सुपुत्रों की स्मृति में वीर बाल दिवस एवं श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर शुक्रवार को आयोजित कीर्तन समागम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव हो। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने स्वदेश और स्वधर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की जो परंपरा स्थापित की, वही हमारी प्रगति का मार्ग है। वीर बाल दिवस के अवसर पर शबद पाठ और कीर्तन समागम का आयोजन मुख्यमंत्री आवास, 5 कालिदास मार्ग पर हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम की शुरुआत में गुरु ग्रंथ साहिब को माथे लगाकर प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने शबद कीर्तन और साहिबज़ादों के अमर बलिदान की गाथा को सुना। कीर्तन पाठ करने वाले बच्चों को पटका पहनाकर और पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। उन्होंने ‘छोटे साहिबज़ादे’ नाम की पुस्तिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद  सिंह जी के साहिबज़ादों बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के शहीदी दिवस को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाना, उनके स्वधर्म और स्वदेश के प्रति अमर बलिदान को नमन करने का अवसर है। उन्होंने प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दिया कि उन्होंने देशभर के सिख समाज की भावना को स्वीकार करते हुए इस दिवस को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत में भक्ति और शक्ति का इतिहास है। गुरु नानक देव जी ने सिख धर्म की जो अलख जगाई, उसके प्रचार-प्रसार के लिए देश के कोने-कोने में गए। गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद  सिंह जी ने अपने त्याग और बलिदान से इसे अनुकरणीय बनाया। शबद कीर्तन समागम में मुख्यमंत्री ने सिख गुरुओं की परंपरा, उनके त्याग और बलिदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का 350वां वर्ष मनाया जा रहा है और मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कई बार उनके शहीदी दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिला। यह विशेष संयोग था कि जिस समय हम गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में कार्यक्रम का आयोजन कर रहे थे, उसी दिन 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश के हर स्कूल, कॉलेज और कार्यालय में वीर बाल दिवस के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा साहिबज़ादों की गाथाएं पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं, ताकि नई पीढ़ी को बलिदान की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि इतिहास उन्हीं का बनता है जिनके मन में त्याग और बलिदान का भाव होता है। सिख धर्म की लंगर परंपरा सामाजिक समरसता का उदाहरण है, जहाँ किसी की जाति या धर्म नहीं पूछा जाता। गुरु गोबिंद  सिंह जी ने समाज को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किया। मुख्यमंत्री ने गुरु गोबिंद  सिंह जी महाराज, माता गुजरी देवी, बाबा अजीत सिंह, बाबा जुझार सिंह, बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस प्रत्येक भारतीय युवा के लिए प्रेरणा का दिन है। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के आयोजनों में डबल इंजन सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में आनंद साहिब का पाठ और अरदास हुई। इसके बाद वह मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ एवं असीम अरुण के साथ लंगर में भी सम्मिलित हुए।

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए यातायात रिफ्रेशर कोर्स, निरीक्षक से आरक्षक तक अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

सड़क दुर्घटना रोकने के लिये यातायात रिफ्रेशर कोर्स यातायात पुलिस निरीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों ने लिया प्रशिक्षण भोपाल  सड़क सुरक्षा की दृष्टि से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिये दुर्घटना विहीन सफर की ओर एक सार्थक प्रयास पुलिस परिवहन शोध संस्थान (पीटीआरआई) द्वारा मध्यप्रदेश के यातायात पुलिस निरीक्षक से आरक्षक स्तर के अधिकारी/ कर्मचारियों को यातायात रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शाहिद अबसार की पहल पर जिसमें सड़क उपयोगकर्ताओं को एक सुरक्षित सड़क नेटवर्क उपलब्ध कराना जिसमें पदयात्रियों तथा सायकिल चालकों को प्राथमिकता दी गयी हो तथा भविष्य में शून्य सड़क दुर्घटना मृत्यु का लक्ष्य प्राप्त करना। सड़क सुरक्षा को मूलभूत यातायात सेवा में अविभाज्य अंग के रूप में मान्यता देना। प्रशिक्षण सत्र के शुभारंभ पर उप पुलिस महानिरीक्षकपीटीआरआई टी.के. विद्यार्थी द्वारा 4ई के प्रमुख सूत्रों जैसे एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इन्फोर्समेंट एवं इमरजेंसी केयरकी जानकारी दी गई। इस दौरान पीटीआरआई के सहायक पुलिस महानिरीक्षक अभिजीत कुमार रंजन, विक्रम रघुवंशी, उपुअ हिमांशु कार्तिकेय तथा अन्य प्रशिक्षण टीम के अधिकारी भी उपस्थित रहे। इस सत्र में सडक सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए प्रथमतः गोल्डन आवर के दौरान घायल व्यक्ति को बचाये जाने के लिए राहवीर, केशलेस जैसी बहुपयोगी योजनाओं कि विस्तृत जानकारी उनि. श्रीमती संध्या सिंह द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को दी गई। साथ ही उमनि पीटीआरआई द्वारा वैश्विक स्तर पर जारी सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों को प्रशिक्षणार्थियों सामने रखा गया तथा प्राथमिक उपचार से संबंधी सीपीआर/बीएलएस का प्रशिक्षण भी डेमोन्सट्रेशन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉ. आशीष शर्मा के द्वारा दिया गया। प्रशिक्षण के अंतिम सत्र में डॉ. मयंक दुबे तथा एस.एस. लल्ली (सेवा निवृत अपुअ) द्वारा यातायात प्रबंधन से संबंधी सड़क अभियांत्रिकी व प्रवर्तन की कार्यवाही तथा उनि. श्रीमती पूजा त्रिपाठी द्वारा संशोधित मोटर यान अधिनियम से संबंधी प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पुलिस अधिकारी की भूमिका को समझाया गया।  

महाकाल मंदिर में भक्तों की आस्था और दान बढ़ा, 13 करोड़ रुपये के आभूषण और 1 अरब रुपये से अधिक दान प्राप्त

उज्जैन  उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर लंबे समय से भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र रहा है। हमेशा से ही यहां भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन जब से महाकाल लोक का निर्माण हुआ है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला है। देश-विदेश जाने वाले श्रद्धालु दर्शन तो कर ही रहे हैं दिल खोलकर दान भी दे रहे हैं। पहले मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिदिन 40 से 50 हजार हुआ करती थी। अब ये आंकड़ा डेढ़ से 2 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गया है। भक्तों की संख्या बढ़ने के साथ मंदिर में आने वाले दान में भी वृद्धि हुई है। सोना चांदी से लेकर नगदी मंदिर में दान किया जा रहा है। बढ़ते श्रद्धालु और बढ़ता दान अभी तक 11 महीने में 5.50 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर में दर्शन कर चुके हैं। इस दौरान मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए नगद मिला है। वहीं 13 करोड़ रुपए से ज्यादा के सोने चांदी के आभूषण प्राप्त हुए हैं। मंदिर में अलग-अलग जगह पर दान पेटियां लगी हैं, जिनमें से 43 करोड़ 43 लाख की आय हुई है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था से हुई आय 64 करोड़ 50 लाख रुपए है। इस तरह से कुल आय का आंकड़ा 107.93 करोड़ है। यह आंकड़ा 1 जनवरी 2025 से 15 दिसंबर तक का है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालु सोना-चांदी के साथ-साथ नगदी भी दान कर रहे हैं। महाकाल मंदिर में बीते 11 महीनों में 5.50 करोड़ श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं। इस दौरान भक्तों ने करीब 13 करोड़ रुपए मूल्य का सोना-चांदी दान किया है, जबकि नकद दान के रूप में 43 करोड़ 43 लाख रुपए मंदिर समिति को प्राप्त हुए हैं। इस वर्ष 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक कुल 5.5 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर लगी दान पेटियों से महाकाल मंदिर समिति को 43 करोड़ 43 लाख रुपए का दान प्राप्त हुआ है। वहीं शीघ्र दर्शन व्यवस्था से मंदिर समिति को करीब 64 करोड़ 50 लाख रुपए की आय हुई है। पिछले वर्ष 2024 में भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को कुल 92 करोड़ रुपए की आय हुई थी। इस वर्ष, पिछले साल की तुलना में करीब 15 करोड़ रुपए अधिक दान भगवान महाकाल को प्राप्त हुआ है। दान में क्या मिला महाकाल मंदिर में अब तक मिले दान में 1483.621 ग्राम सोना, 592.366 किलोग्राम चांदी, दान पेटियां से 43 करोड़ 43 लाख रुपए, शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख रुपए। श्रद्धालुओं ने जो सोने के आभूषण दान किए हैं उनकी कीमत 1 करोड़ 82 लाख और चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख के आसपास बताई जा रही है। श्रद्धालुओं ने कुल मिलाकर 13 करोड़ से ज्यादा के आभूषण दान किए हैं। पिछले वर्ष कितना था दान इस वर्ष आए दान की तुलना साल 2024 से करें तो पिछली बार सोना अधिक दान किया गया था। 1 जनवरी 2024 से 13 दिसंबर 2024 तक 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना दान में आया था। इस वर्ष सोना चांदी की कीमत में भारी अंतर आया है, जिसका असर दान पर भी हुआ है। एक अरब 7 करोड़ दान पेटी और शीघ्र दर्शन से आय इस बार भेंट पेटी और शीघ्र दर्शन से महाकाल मंदिर को 11 माह 15 दिन में 107 करोड़ 93 लाख रुपए की आय हुई है। अभी 15 दिन शेष हैं जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के महाकाल मंदिर पहुंचने की उम्मीद है। महाकाल मंदिर में अन्य स्त्रोताें से होने वाली आय जैसे भस्म आरती बुकिंग,अभिषेक पूजन की आय, अन्न क्षेत्र से आय, धर्मशाला बुकिंग आय,फोटोग्राफी मासिक शुल्क आय, भांग एवं ध्वजा बुकिंग से आय,उज्जैन दर्शन बस सेवा से होने वाली आय शामिल नहीं। इस वर्ष अब तक यह दान मिला     सोना 1483.621 ग्राम।     चांदी 592.366 किग्रा।     दान पेटियों से 43 करोड़ 43 लाख रुपए।     शीघ्र दर्शन व्यवस्था से 64 करोड़ 50 लाख। 13 करोड़ से अधिक के आभूषण दान आए महाकाल मंदिर में एक जनवरी 2025 से लेकर पंद्रह दिसंबर 2025 तक के बीच में श्रद्धालुओं ने 592.366 किग्रा चांदी और 1483.621 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया है। दान आए आभूषणों में सोने की कीमत करीब 1 करोड़ 82 लाख रुपए तो चांदी की कीमत 11 करोड़ 85 लाख रुपए के आसपास है। महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने एक वर्ष से भी कम समय में 13 करोड़ रुपए से अधिक के तो सिर्फ आभूषण ही दान कर दिए। पिछले वर्ष की तुलना में 193 किलो चांदी अधिक भक्तों ने वर्ष 2024 में इस वर्ष की तुलना में सोना अधिक दान किया था। इस वर्ष चांदी पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दान में मिली है। साल 2024 में 1 जनवरी से 13 दिसंबर 2024 तक भक्तों ने 399 किलो चांदी और 1533 ग्राम सोना बाबा महाकाल को दान किया था। हालांकि पिछले वर्ष और इस वर्ष सोने और चांदी की कीमत में काफी अंतर आने से बाबा महाकाल को मिलने वाले दान की कीमत में करीब 10 करोड़ रुपए का अंतर आ गया। साल 2024 में 64 किलो आभूषण ऐसे थे जो दानपेटी से निकले थे, जिसमें हीरे की अंगूठी, कीमती घड़ी, डॉलर सहित अन्य देशों की मुद्रा भी शामिल थे। 15 दिसंबर तक 5.50 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे वर्ष 2025 खत्म होने को है इससे पहले महाकाल मंदिर से मिले आंकड़ों को देखें तो सामान्य दिनों में मंदिर दर्शन के रोजाना 1.20 लाख श्रद्धालु आ रहे हैं। वीक एंड में डेढ़ से पौने दो लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। महाकाल मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष फलवाड़िया ने बताया कि एक जनवरी से दिसंबर माह के शुरुआत तक मंदिर में अब तक पांच करोड़ पचास लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच चुके है। 25 दिसंबर से 31 जनवरी तक करीब 6 लाख श्रद्धालुओं के मंदिर में पहुंचने की संभावना है। दो … Read more

कोण्डागांव की योगिता मंडावी को जूडो में प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार

कोण्डागांव की योगिता मंडावी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जूडो में उत्कृष्ट प्रदर्शन पर योगिता मंडावी राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई और शुभकामनाएं रायपुर  छत्तीसगढ़ के कोण्डागांव जिले की प्रतिभाशाली बालिका योगिता मंडावी ने जूडो खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम गौरवान्वित किया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा संचालित बालिका गृह, कोण्डागांव में पली-बढ़ी योगिता को उनकी उल्लेखनीय खेल उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा योगिता मंडावी को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। समारोह में देशभर से चयनित प्रतिभाशाली बच्चों को विभिन्न क्षेत्रों जैसे खेल, नवाचार, सामाजिक सेवा, कला एवं संस्कृति आदि में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि योगिता मंडावी ने कम उम्र में ही जूडो खेल में अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय दिया है। मात्र 13 वर्ष की आयु में उन्होंने राज्य की श्रेष्ठ जूडो खिलाड़ी का दर्जा प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में लगातार पदक अर्जित कर अपनी निरंतर प्रगति और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने योगिता मंडावी की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है तथा कहा कि प्रतिभाशाली बच्चों की सफलता से नई पीढ़ी को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा मिलती है। योगिता की उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है, बल्कि बालिका गृह एवं बाल कल्याण संस्थाओं में रह रहे बच्चों के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत भी है। उन्होंने यह साबित किया है कि संसाधनों की सीमाएँ नहीं, बल्कि सपनों के प्रति लगन और परिश्रम ही सफलता का वास्तविक आधार है।

Gold और Silver की कीमतों में जबरदस्त उछाल, सोना ₹1,287 बढ़कर रिकॉर्ड पर, चांदी ₹2.32 लाख पार

इंदौर  सोने-चांदी की दहाड़ से सर्राफा बाजारों में सन्नाटा पसरा है। आज सोने-चांदी के भाव एक और नया इतिहास लिख चुके हैं। दोनों धातुएं आज भी एक नए ऑल टाइम हाई पर हैं। चांदी के भाव एक झटके में 13117 रुपये प्रति किलो उछकर 232100 रुपये प्रति किलो पर खुले। जबकि, सोने के भाव में 1287 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी समेत चांदी अब 239063 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। जबकि, 24 कैरेट गोल्ड का रेट अब जीएसटी समेत 142051 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना और चांदी ने ऐसा उछाल दिखाया है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है। MCX पर दोनों कीमती धातुएं अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं। बाजार में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से बुलियन सेगमेंट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। MCX पर सोना 1.39 लाख के पार, बना नया रिकॉर्ड मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना तेज उछाल के साथ नया इतिहास रच गया। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,39,290 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया, जो अब तक का सबसे ऊंचा भाव है।दोपहर के कारोबार में भी सोना मजबूती बनाए हुए नजर आया और करीब एक प्रतिशत की तेजी के साथ ट्रेड करता दिखा। निवेशकों का रुझान साफ तौर पर सोने की ओर बढ़ा है। चांदी की रफ्तार और तेज, 2.33 लाख रुपये के पार सोने के साथ-साथ चांदी ने भी बाजार में तूफान ला दिया। MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने 2,33,183 रुपये प्रति किलो का स्तर छूकर नया ऑल-टाइम हाई बना दिया।दिनभर के कारोबार में चांदी में हजारों रुपये की तेजी देखने को मिली, जिसने इसे निवेशकों का सबसे पसंदीदा एसेट बना दिया। कैरेट के हिसाब से गोल्ड के भाव आज 23 कैरेट गोल्ड भी 1282 रुपये उछल कर 137362 रुपयेकै प्रति 10 ग्राम के भाव पर खुला। जीएसटी संग इसकी कीमत अब 141482 रुपये हो गई है। अभी इसमें मेकिंग चार्ज नहीं जुड़ा है। 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 1179 रुपये चढ़कर 126329 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। जीएसटी संग यह 130118 रुपये है। 18 कैरेट गोल्ड 966 रुपये की तेजी के साथ 103436 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है और जीएसटी के साथ इसकी कीमत 106539 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। 14 कैरेट गोल्ड का रेट भी 753 रुपये चढ़ा है। आज यह 80680 रुपये पर खुला और जीएसटी समेत यह 83100 रुपये पर है। 2025 में सोना-चांदी ने दिया जबरदस्त रिटर्न इस साल की बात करें तो सोना और चांदी दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है, वहीं चांदी ने तो उम्मीद से कहीं ज्यादा कमाई कराई है। यही वजह है कि मौजूदा समय में बुलियन मार्केट को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चमक, डॉलर के मुकाबले मजबूती वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा, जबकि चांदी ने भी नया उच्चतम स्तर छू लिया।अमेरिकी बाजारों में निवेशकों की बढ़ती मांग और आर्थिक अनिश्चितता ने इस तेजी को और बल दिया। आखिर क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक तनाव, महंगाई की चिंता, ब्याज दरों को लेकर असमंजस और डॉलर में उतार-चढ़ाव जैसे कारणों से निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश बनकर उभरे हैं। आगे क्या रहेगा ट्रेंड, निवेशकों को क्या करना चाहिए? मौजूदा हालात में बुलियन बाजार का ट्रेंड मजबूत नजर आ रहा है। हालांकि, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होती हैं, तो मुनाफावसूली का जोखिम भी बढ़ जाता है।निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें और बाजार की दिशा को समझते हुए ही निवेश करें। इस साल सोना ₹61,752 और चांदी ₹1,46,083 महंगी हुई     इस साल अब तक सोने की कीमत 61,752 रुपए बढ़ी है। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 76,162 रुपए का था, जो अब 1,37,914 रुपए हो गया है।     चांदी का भाव भी इस दौरान 1,46,083 रुपए बढ़ गया है। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी की कीमत 86,017 रुपए थी, जो अब 2,32,100 रुपए प्रति किलो हो गई है। गोल्ड में तेजी के 3 प्रमुख कारण     डॉलर कमजोर – अमेरिका के ब्याज दर घटाने से डॉलर कमजोर हुआ और सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हुई, इससे लोग खरीदने लगे।     जियोपॉलिटिकल – रूस-यूक्रेन जंग और दुनिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर खरीद रहे हैं।     रिजर्व बैंक – चीन जैसे देश अपने रिजर्व बैंक में सोना भर रहे हैं, ये सालभर में 900 टन से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं, इसलिए दाम ऊपर जा रहे हैं। चांदी में तेजी के 3 प्रमुख कारण     इंडस्ट्रियल डिमांड – सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स और EV में भारी इस्तेमाल, चांदी अब सिर्फ ज्वेलरी नहीं, जरूरी कच्चा माल बन गई है।     ट्रंप का टैरिफ डर – अमेरिकी कंपनियां चांदी का भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, ग्लोबल सप्लाई में कमी से कीमतें ऊपर चढ़ीं।     मैन्युफैक्चरर होड़ में – प्रोडक्शन रुकने के डर से सभी पहले से खरीद रहे हैं, इसी वजह से आने वाले महीनों में भी तेजी बनी रहेगी। आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं दाम केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि चांदी की डिमांड में अभी तेजी है जिसके आगे भी बने रहने का अनुमान है। ऐसे में चांदी इस साल के आखिर तक चांदी की कीमत 2.50 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। वहीं अगर सोने के बात करें इसकी डिमांड में भी तेजी बनी हुई। ऐसे में अगले साल तक ये 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के पार जा सकता है। वहीं इस साल के आखिर तक इसकी कीमत 1.40 लाख रुपए किलो पहुंच सकती है। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड … Read more

किसानों के लिए राहत: ई-टोकन से खाद वितरण शुरू, अब लंबी कतारों में समय नहीं खोएंगे

जबलपुर  किसानों को रसायनिक खाद वितरण में आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए कृषि विभाग ने लगातार अनेक उपाय किए पर सफलता नहीं मिली। वितरण केंद्रों में खाद पाने किसानों की कतार लंबी होती गई। स्थाई समाधान की दिशा में कार्य करते हुए शासन ने एक अक्टूबर 2025 से खाद वितरण की नई व्यवस्था ‘ई-टोकन’ का प्रयोग किया। इसके बेहतर परिणाम सामने आए। किसानों से प्राप्त फीडबैक के बाद यह व्यवस्था अब एक जनवरी 2026 से प्रदेशभर में लागू की जा रही है। जबलपुर, विदिशा और शाजापुर जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत ई-टोकन व्यवस्था शुरू की गई थी। योजना का फायदा यह रहा कि खाद लेने के लिए किसानों को न तो कतार में खड़ा होना पड़ा, न ही दस्तावेज लेकर भटकने की जरूरत पड़ी। उन्होंने अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ई-टोकन पोर्टल पर वांछित जानकारी दर्ज की, जिसके साथ ही तय मात्रा में खाद बुक हो गई। उसके बाद किसानों ने अपनी सुविधा के मुताबिक वितरण केंद्र से खाद प्राप्त कर ली। विभाग ने खाद को घर तक पहुंचाने की वैकल्पिक सुविधा भी दी है। जबलपुर में तीन माह के भीतर 40 हजार से अधिक किसानों ने ई-टोकन के माध्यम से लगभग 20 हजार 770 टन खाद ली। रबी सीजन में लगभग 59 हजार से ज्यादा किसानों ने खाद लेने के लिए ई-टोकन प्रणाली में पंजीयन कराया है। कतार से राहत, समय की भी बचत ई-टोकन व्यवस्था से किसान तय तारीख और समय पर केंद्र पहुंचकर आसानी से खाद ले सकेंगे। इससे न समय की बचत होगी, बल्कि वितरण केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था पर नियंत्रण लगेगा। ई-टोकन के साथ-साथ किसानों के घर तक खाद पहुंचाने की सुविधा भी शुरू की गई है, लेकिन यह व्यवस्था किसानों को खास पसंद नहीं आई। जबलपुर जिले में अब तक केवल तीन किसान ही घर-घर खाद वितरण योजना से जुड़े हैं। अधिकांश किसानों का मानना है कि केंद्र से सीधे खाद लेना अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद है। आंकड़ों पर नजर     01 अक्टूबर से जबलपुर सहित तीन जिलों में ई-टोकन की सुविधा शुरू हुई।     18 दिसंबर तक जबलपुर में 40 हजार किसानों ने 20 हजार 770 टन खाद ली-     59 हजार 732 किसानों ने रबी सीजन में ई-टोकन के जरिए खाद लेने पंजीयन कराया।     03 माह के भीतर चार हजार से अधिक किसानों को ई-टोकन से खाद दी गई। ऐसे ले सकते हैं ई पोर्टल से खाद     ई-टोकन पोर्टल पर किसान पंजीयन कराना जरूरी है।     इसके लिए ई-टोकन डट एमपीकृषि डाट ओआरजी ओपन करें।     ट्रस्ट/पट्टा/अन्य कृषक का पंजीयन पर क्लिक करें।     आधार नंबर दर्ज करें और आधार सत्यापन पर क्लिक करें।     ओटीपी प्रविष्ट करें एवं आधार सत्यापित पर क्लिक करें।     आधार सत्यापन के बाद स्वतः प्रदर्शित जानकारी दें।     किसान का नाम, मोबाइल और आधार नंबर व पते की जानकारी दें।     भूमि विवरण जोड़ने की प्रक्रिया में जाकर और कुल रकबा, सिंचित रकबा और खसरा नंबर दें।     स्थान विवरण चयन कर जिला, विकासखंड, ग्राम की जानकारी दें।     इसके बाद भूमि जोड़ें पर क्लिक करें।     अंत में चेक बाक्स में क्लिक कर अनुमोदन को प्रेषित करें। यह डाटा राजस्व विभाग के पास चला जाएगा। डा. एसके निगम, उप संचालक, कृषि ने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत ई-टोकन की व्यवस्था जबलपुर समेत प्रदेश के तीन जिलों में लागू की गई थी। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। किसानों से फीडबैक लेने के बाद अब इसे प्रदेशभर में एक जनवरी 2026 से लागू किया जा रहा है।

धीरेंद्र शास्त्री बोले—भक्ति और राष्ट्रवाद अंधविश्वास नहीं, देश छोड़ दें जो ऐसा मानते हैं

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में धर्म परिवर्तन कैंसर से भी ज्यादा खतरनाक है और इसके खिलाफ सनातन धर्म एवं हिंदू परंपरा के सभी अनुयायी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन के तीन मुख्य कारण अशिक्षा, अंधविश्वास और आर्थिक तंगी हैं। इन तीनों कारणों को दूर करने की जिम्मेदारी समाज के समृद्ध और जागरूक वर्ग की है, ताकि हिंदू समाज को मजबूत किया जा सके छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि कथावाचक प्रदीप मिश्रा और धीरेंद्र शास्त्री अंधविश्वास फैला रहे हैं। देश में हिंदू कभी खतरे में नहीं था। अब पं. धीरेंद्र शास्त्री ने भूपेश बघेल के बयान पर पलटवार किया है। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अगर हिंदू समाज को जोड़ना, भक्ति का प्रचार करना और राष्ट्रवाद के प्रति लोगों को जागरूक करना अंधविश्वास है, तो जिन्हें यह अंधविश्वास लगता है, उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि, वे नेता नहीं हैं, इसलिए आमतौर पर राजनीतिक बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं देते, लेकिन इस मुद्दे पर अपनी बात रखना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदू समाज को एकजुट करना, हनुमान भक्ति का प्रचार करना और राष्ट्रवाद की भावना जगाना अंधविश्वास नहीं है। दरअसल, भिलाई के जयंती स्टेडियम में कथावाचक पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा 25 दिसंबर से 29 दिसंबर तक होगी। गुरुवार को कथा से पहले मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बयान दिया है। राजनीतिक बयानों पर टिप्पणी नहीं करता, लेकिन… धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने स्पष्ट किया कि वे कोई नेता नहीं हैं और सामान्यतः राजनीतिक बयानों पर टिप्पणी नहीं करते. लेकिन इस विषय पर अपनी बात रखना जरूरी समझा. उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को मजबूत करना, हनुमान जी की भक्ति फैलाना और राष्ट्रवाद की जागृति लाना किसी भी तरह अंधविश्वास नहीं है. लव जिहाद और जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने जनसांख्यिकीय बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि एक समुदाय की आबादी प्रतिशत में बढ़ी है, जबकि हिंदुओं की हिस्सेदारी कम हुई है. उन्होंने बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो खतरा साफ नजर आएगा. लव जिहाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब बहन-बेटियां प्रभावित होंगी, तब लोगों को वास्तविक खतरे का अहसास होगा. कई क्षेत्रों में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं, इसलिए अब सनातन एकता पर जोर देना जरूरी है. जशपुर-सरगुजा में चर्च के सामने लगेगा मंच धर्मांतरण के मुद्दे पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का हिंदू समाज अब जागृत हो रहा है. वे लगातार प्रदेश आ रहे हैं और भविष्य में सरगुजा-जशपुर क्षेत्र में कथा आयोजित करेंगे, जहां बड़े चर्च के सामने ही मंच स्थापित किया जाएगा. उन्होंने धर्मांतरण के तीन प्रमुख कारण बताए. पहला अशिक्षा, जिसके लिए शिक्षा जागरण जरूरी है. दूसरा आर्थिक कमजोरी, जिसके समाधान के लिए समर्थ हिंदू समाज को गरीबों की मदद करनी चाहिए और गांवों को गोद लेना चाहिए. तीसरा अंधविश्वास, जिसके निवारण के लिए वे दिव्य दरबार आयोजित करते रहेंगे, ताकि हनुमान जी में लोगों का विश्वास और मजबूत हो.  अंधविश्वास में फंस जाते हैं लोग पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि अशिक्षा के कारण लोग जागरूक नहीं हो पाते और अंधविश्वास में फंस जाते हैं, जबकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोग लालच में आकर धर्म परिवर्तन की ओर बढ़ जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पूजा-पाठ के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पूजा-पाठ के नाम पर कराए जा रहे धर्म परिवर्तन का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि समाज को संगठित होकर इन समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करना होगा। बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध, भारत में भी हो सकती है ऐसी स्थिति बांग्लादेश के हालात पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि, दो दिन पहले वहां एक हिंदू को सिर्फ इसलिए जिंदा जला दिया गया, क्योंकि वह हिंदू था। आज बांग्लादेश में हिंदू होना अपराध बन गया है। भारत के सनातनी हिंदुओं से उन्होंने अपील करते हुए कहा कि यह गंभीर और सोचनीय विषय है। उन्होंने चेतावनी दी कि वह दिन दूर नहीं, जब भारत में भी हिंदू होना अपराध बन सकता है। यही सही समय है हिंदू एकता और हिंदू राष्ट्र की बात करने का। हम 9 राज्यों में हो गए अल्पसंख्यक, वे 6 से बढ़कर हो गए 28% पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि एक वर्ग 6% से बढ़कर 28% हो गया, जबकि हिंदू 90% से घटकर 80% रह गए। अगर अब भी खतरा महसूस नहीं हो रहा, तो शायद बांग्लादेश का नक्शा देखकर ही समझ आएगा। उन्होंने लव जिहाद का जिक्र करते हुए कहा कि, जब बहन-बेटियां इसमें फंसेंगी, तब खतरा महसूस होगा। देश के 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं। अब हर हिंदू को सनातन एकता पर जोर देना होगा। धर्मांतरण पर बोले- गरीब हिंदुओं को लेना होगा गोद धर्मांतरण के मुद्दे पर पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का हिंदू समाज अब जागने लगा है। वे लगातार प्रदेश आ रहे हैं। आने वाले समय में सरगुजा-जशपुर में कथा करेंगे, जहां एशिया की सबसे बड़ी चर्च के सामने ही मंच लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के 3 मुख्य कारण हैं। अशिक्षा: इसके लिए शिक्षा के प्रति जागरूकता जरूरी है। आर्थिक तंगी: समृद्ध हिंदुओं को गरीब हिंदुओं और गांवों को गोद लेकर उनकी मदद करनी चाहिए। अंधविश्वास: इसके लिए वे दरबार लगाते रहेंगे, जब तक भगवान हनुमान पर लोगों का भरोसा मजबूत नहीं हो जाता। दरबार में होगी घर वापसी, स्वेच्छा से आने निमंत्रण घर वापसी को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि स्वेच्छा से फॉर्म भरकर 27 दिसंबर को संदेश दिया गया है। उस दिन दिव्य दरबार लगेगा और जो स्वभाव से सनातन को समझता है, वह वापस लौट सकता है। इसके लिए वे आयोजक से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि, आने वाले दिनों में वे छत्तीसगढ़ में पदयात्रा करेंगे। इसकी तैयारियां की जा रही हैं। वहीं, मुस्लिम समाज की तरफ से किए गए स्वागत पर उन्होंने कहा कि, यह अच्छी बात है। इसके लिए वे धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि इस देश में जन्म लेने वाले सभी लोग सनातनी हैं और सब हिंदू हैं। संविधान … Read more

दिग्विजय सिंह ने कहा: अयोध्या जाने की आवश्यकता नहीं, ‘अहं ब्रह्मास्मि’ का जिक्र किया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों ने दिग्विजय सिंह से राम मंदिर जाने को लेकर सवाल किया था. इसपर कांग्रेस नेता ने राम मंदिर जाने से इनकार कर दिया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मुझे कहीं जाने की जरूरत नहीं है. ‘शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे’ राम मंदिर जाने के सवाल पर कांग्रेस नेता ये भी कहा कि वे शंकराचार्य का अद्वैत वेदांत का पाठ करवाएंगे. साथ ही प्रवचन भी करवाएंगे. इसमें लिखा है, ‘अहं ब्रह्मास्मि’. मतलब मुझमें ही ब्रह्म है, इसलिए मुझे कहीं और जाने की जरूरत नहीं है. लेकिन सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. ‘कमलनाथ सरकार पुजारियों को वेतनमान दे रही थी’ कांग्रेस नेता ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘उज्जैन में मंदिरों में जो चढ़ावा आ रहा है, वो मंदिरों के रखरखाव में इस्तेमाल नहीं हो रहा है. मंदिरों के रखरखाव का पैसा कलेक्टर, SDM के खाते में जमा होता है, लेकिन अधिकारी साइन नहीं करते हैं. गुना में इसी तरह का मामला सामने आया है. मंदिरों की जमीन स्थापित इष्ट देव की है, ये बात सुप्रीम कोर्ट ने कही है. देवता के नाम दर्ज भूमि नीलाम नहीं हो सकती, लेकिन इसका उल्लंघन एमपी सरकार कर रही है. एमपी में 50 हजार पुजारी है उनके साथ कुठाराघात हो रहा है. वहीं कमलनाथ सरकार पुजारियों का वेतनमान समेत कई सुविधा दे रही थी. सांसद ने कहा- दिग्विजय सनातन समाज से माफी मांगे भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हम सबके आदर्श और श्रृद्धा के केन्द्र हैं। मैं दिग्विजय सिंह से पूछना चाहता हूं अगर अयोध्या में राम मंदिर नहीं जाओगे तो क्या दिल्ली की जामा मस्जिद में जाओगे? क्या मक्का-मदीना में जाओगे। देश की जनता इनके बारे में बहुत कुछ समझती है। इसलिए इनकी पार्टी और उनकी खुद की दुर्गति हो रही है। इस प्रकार के स्टेटमेंट के लिए उनको सनातन समाज से माफी मांगना चाहिए। ‘मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं’ दिग्विजय सिंह ने आगे कहा, ‘मैं जब मुख्यमंत्री था, तो मेरे खिलाफ विश्व हिंदू परिषद ने झूठा प्रचार किया था. मुझ पर आरोप लगाते हैं कि मैं मुस्लिम और ईसाई हूं. मैं सनातन धर्म का पालन करने वाला हूं. पुजारियों के साथ गलत हुआ है, तो हम लड़ाई लड़ेंगे. पुजारियों की जमीन कोई नहीं ले सकता है. जब सरकार बदलेगी तब सारी पोल खोलेंगे.  राम मंदिर के लिए दिग्विजय ने दिया था चंदा जनवरी 2021 में दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को 1,11,111 रुपए का चेक भेजा था। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को एक पत्र भी लिखा था। दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में अपील की थी कि राम मंदिर के नाम पर चंदा संग्रह सौहार्दपूर्ण और पारदर्शी माहौल में किया जाए, ताकि समाज में किसी भी प्रकार का तनाव या विभाजन न हो। आस्था के इस विषय में सभी वर्गों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। दिग्विजय ने चंदे का हिसाब भी मांगा था दिग्विजय सिंह ने पत्र के माध्यम से विश्व हिंदू परिषद द्वारा पूर्व में एकत्र किए गए चंदे का लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई थी। उन्होंने कहा था कि चंदे की पारदर्शिता से लोगों का विश्वास और मजबूत होगा। दिग्विजय सिंह का यह कदम उस समय चर्चा में रहा था, जब देशभर में राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर चंदा अभियान चलाया जा रहा था। उनके इस निर्णय को उन्होंने आस्था के सम्मान के साथ-साथ जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़कर बताया था।