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MMC स्पेशल जोनल कमेटी ने CMs को लिखा पत्र, नक्सलियों ने जताई हथियार डालने की तैयारी

रायपुर        देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्पेशल जोनल कमेटी (MMC जोन) के नक्सलियों ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, मध्य प्रदेश के मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साईं को एक लेटर भेजा है, जिसमें उन्होंने सामूहिक सरेंडर करने की इच्छा जताई है. नक्सलियों ने अपने दो वरिष्ठ साथियों महाराष्ट्र में सरेंडर करने वाले भूपति और छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने वाले सतीश के नक्शेकदम पर चलते हुए सरेंडर करने की इच्छा जताई है.  MMC जोन के सभी नक्सली एक साथ सरेंडर करेंगे. हालांकि, इस लेटर में, MMC जोन के नक्सलियों ने एक-दूसरे से बातचीत करने के लिए 15 फरवरी 2026 की डेडलाइन मांगी है.  उन्होंने अनुरोध किया है कि इस डेडलाइन तक सुरक्षा बलों को कोई ऑपरेशन नहीं करना चाहिए. माओवादियों ने मुख्यमंत्रियों से कुछ दिनों के लिए न्यूज नेटवर्क बंद करने का भी अनुरोध किया है. PLGA सप्ताह नहीं मनाने का भरोसा पत्र में नक्सलियों ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वे जल्द ही आने वाला अपना सालाना PLGA हफ्ता (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी वीक) इस साल नहीं मनाएंगे. उन्होंने सुरक्षा बलों से अनुरोध किया है कि इस अवधि के दौरान नक्सलियों के खिलाफ सालाना ऑपरेशन भी न चलाएं. नक्सलियों ने पत्र में कहा है कि वे जल्द ही एक और पत्र भेजकर मास सरेंडर की तारीख की घोषणा करेंगे. केंद्र सरकार की डेडलाइन के भीतर भले ही 15 फरवरी, 2026 की डेडलाइन लंबी लगती हो, लेकिन यह केंद्र सरकार की ओर से नक्सली-मुक्त भारत के लिए निर्धारित 31 मार्च, 2026 की अंतिम समय सीमा के भीतर है. अगर तीनों राज्यों की सरकारें MMC जोन के नक्सलियों को यह समय देती हैं और यह सामूहिक सरेंडर सफल होता है, तो यह देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की एक ऐतिहासिक सफलता होगी.

105 वर्षीय राधाकृष्ण सिंह शास्त्री नहीं रहे, पीएम मोदी भी कर चुके हैं सम्मानित

बैतूल  बैतूल में आजाद हिंद फौज के सिपाही राधाकृष्ण (राधा किशन) सिंह शास्त्री का 105 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। राधाकृष्ण सिंह का जन्म 1 जनवरी 1920 को बर्मा (म्यांमार) के पेंगु जिले में हुआ था। प्रधानमंत्री ने किया था सम्मानित स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में आज़ाद हिंद फ़ौज की 75वीं वर्षगांठ पर दिल्ली में उन्हें सम्मानित किया था। जीवन के अंतिम दिनों तक वे ‘जय हिंद’ के नारे के साथ लोगों का अभिवादन करते थे और आजाद हिंद फौज की वर्दी जैसा सफेद पैंट-शर्ट पहनना उनकी आदत बन गई थी। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। नेताजी के साथ मोर्चे पर लड़ी लड़ाई 1943 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बुलावे पर राधाकृष्ण सिंह ने आज़ाद हिंद फ़ौज जॉइन की थी। सिंगापुर में भर्ती होकर उन्होंने “चनमारी” नामक सैन्य प्रशिक्षण लिया और नेताजी के नेतृत्व में इम्फाल और कोहिमा मोर्चों पर अंग्रेजी सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इस दौरान वे तीन महीने अंग्रेजों की जेल में भी रहे, जहाँ से क्रांतिकारी भोला भाई देसाई के प्रयासों से रिहा हुए। जापान के आत्मसमर्पण के बाद आज़ाद हिंद फ़ौज को पीछे हटना पड़ा और बर्मा छोड़ने से पहले नेताजी ने अपने सैनिकों से अंतिम मुलाकात की—उसी समूह में राधाकृष्ण भी शामिल थे। भारत लौटकर संघर्षपूर्ण जीवन बिताया आज़ादी के बाद उन्होंने करीब 20 साल बर्मा में संघर्षपूर्ण जीवन बिताया और अंततः लालबहादुर शास्त्री की प्रेरणा से भारत लौटे। भारत में शरणार्थी के रूप में उन्हें बैतूल जिले के पहाड़पुर गांव में 5 एकड़ भूमि दी गई। जीविका चलाने के लिए वे पाथाखेड़ा की कोयला खदान में मजदूर बने और वहीं से रिटायर हुए। उनके निधन के बाद जिले में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को किया जाएगा।  राधाकृष्ण सिंह ने बताए आजादी की लड़ाई के अनछुए संस्मरण  आजाद हिंद फौज के सिपाही राधा कृष्ण सिंह शास्त्री ने भारत को आजादी दिलाने में अहम भूमिका निभाई ,जो आज बैतूल जिले के पहाड़पुर गांव में निवास कर रहे हैं। 105 साल की उम्र में आज भी वे सात्विक जीवन बीता रहे हैं। अधिक उम्र होने के कारण थोडा अस्वस्थ रहते हैं लेकिन आज भी अंग्रेजी हुकुमत के साथ हुए युद्ध काल की घटना पर उन्होंने कहा कि भारत देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाने की इस लड़ाई में भारत मां के अनगिनत सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। इसके बाद भारत स्वतंत्र हुआ है। क्रांतिकारियों के अदम्य साहस के कारण अंग्रेजो ने भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लिया। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खां, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव और सुभाषचंद्र बोस जैसे अनेक देश भक्त हुए है। जिन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। उल्लेखनीय है कि शास्त्री जी का जन्म 01जनवरी 1920 को बर्मा ब्रम्हदेश के चौतगा में हुआ था। राधाकृष्ण सिंह शास्त्री के सहयोगी और उनके साथ अनेक कार्यक्रमों के साक्षी रहे अंबादास सूने ने बताया कि शास्त्री जी ने सन 1943 में आजादी के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आव्हान पर आजाद हिंद फौज में भर्ती होकर भारत को स्वतंत्र कराने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश के अधिकांश भारत वासी दक्षिण पूर्व एशियाई देशो में थे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण अविस्मरणीय योगदान रहा है। आजाद हिंद फौज की स्थापना रासबिहारी बोस ने की और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को कमान सौंपी। सुभाषचंद्र बोस ने देश की स्वतंत्रता के लिए भारत वासियो का आव्हान किया , फलस्वरूप राधाकृष्ण सिंह और बडे भाई सीताराम, डीपी वर्मा के साथ अनेक भारतीय समुदाय के लोग आजाद हिंद फौज में भर्ती हुए। नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने नारा देते हुए कहा कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा। देश के बाहर रहते हुए नेताजी ने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में अतुलनीय योगदान दिया। लेकिन देश स्वतंत्र होने के बाद अनेक क्रांतिकारी और भारत मां के सपूतों को षडयंत्र पूर्वक भुलाने का प्रयास तत्कालीन सरकार ने किया।श्री शास्त्री ने बताया कि पोपा हिल की लड़ाई 11 दिन और 11 रात चली जिसमें सीताराम बड़े भाई मारे गए। आज देश स्वतंत्र है लेकिन जो सम्मान आजादी के बाद देश के महान सपूतों और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को मिलना चाहिए था , वह सम्मान तत्कालीन सरकारों ने नहीं दिया। वर्तमान समय में केंद्र और राज्य शासन दोनों की तरफ से उन्हें पेंशन मिल रही है जिससे वह अपना गुजर बसर कर रहे है।

लाभार्थियों के लिए खुशखबरी, लाड़ली बहना योजना की 31वीं किस्त दिसंबर में जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश राज्य में लाडली बहना योजना अग्रिम सफलता प्राप्त कर चुकी है। बताते चलें कि इस योजना के प्रति महिलाओं की रुचि शुरू से ही देखने को मिली है जिसके चलते राज्य की करोड़ों महिलाएं योजना में पंजीकृत है और मासिक लाभ प्राप्त कर पा रही है। लाडली बहना योजना को अधिक आकर्षक बनाने के लिए और महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा लाभ देने हेतु सरकार के द्वारा निरंतर ही प्रयास किए जा रहे हैं तथा इस योजना में संशोधन भी करवाए गए है। संशोधित आधार पर 12 नवंबर 2025 को लाडली बहना योजना की 30वीं किस्त जारी हो चुकी है। योजना की 30वीं किस्त जारी होने के बाद सभी पंजीकृत महिलाओं ने सफलतापूर्वक लाभ प्राप्त किया है अब इसी क्रम में राज्य सरकार के द्वारा दिसंबर महीने की अगली यानी 31वीं किस्त हेतु प्रयोजना तैयार की जा रही है जिसके लिए जल्द ही निर्णय सामने आ सकते हैं। 2023 में शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मई 2023 में लाड़ली बहना योजना शुरू की गई थी।लाड़ली बहना योजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।इस योजना के तहत 21 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को 1000 रुपए देने का फैसला किया गया था और फिर इसकी पहली किस्त 10 जून को जारी की गई थी।     इसमें रक्षा बंधन पर अगस्त 2023, अगस्त 2024 और अगस्त 2025 में लाभार्थी महिलाओं को 250 रूपये की विशेष सहायता राशि तीन बार प्रदान की गई। 2023 अगस्त में राशि को 1000 से बढ़ाकर 1250 रुपए कर दिया गया । इसके बाद नवंबर 2025 में राशि में 250 की फिर वृद्धि की गई है और अब इस योजना के तहत 1500 रुपए महीना के हिसाब से महिलाओं को सालाना 18,000 रुपये मिलते हैं।     लाड़ली बहनों को जून 2023 से नवंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता राशि की कुल 30 किश्तों का अंतरण किया गया है। इस प्रकार योजना के आरंभ से अब तक 44,917.92 करोड़ रूपये की राशि का सीधा अंतरण लाभार्थी महिलाओं के खातों में किया जा चुका है।प्रदेश के सभी 52 जिलों में कुल 1,26,36,250 (एक करोड़ 26 लाख 36 हजार 250) महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।     घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। जानिए किस जिले में कितनी लाड़ली बहनें     लाड़ली बहना योजना में सबसे अधिक लाभार्थी इंदौर जिले में हैं, जहाँ 4 लाख 40 हजार 723 महिलाओं को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद सागर में 4 लाख 19 हजार 903, रीवा में 4 लाख 3 हजार 182, छिंदवाड़ा में 3 लाख 90 हजार 311, धार में 3 लाख 82 हजार 417, जबलपुर 3 लाख 81 हजार 848 ,बालाघाट जिले में 3 लाख 47 हजार 816, उज्जैन में 3 लाख 40 हजार 203, मुरैना में 3 लाख 33 हजार 821 ,छतरपुर में 3 लाख 24 हजार 454, खरगोन में 3 लाख 13 हजार 741, भोपाल में 3 लाख 9 हजार 20 तथा ग्वालियर जिले में 3 लाख 5 हजार 969 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है।     राजगढ़ में 2 लाख 95 हजार 459, शिवपुरी में 2 लाख 87 हजार 943, देवास में 2 लाख 85 हजार 496, विदिशा में 2 लाख 74 हजार 946, भिंड में 2 लाख 72 हजार 343, बेतूल में 2 लाख 71 हजार 474 ,सिवनी जिले में 2 लाख 68 हजार 187, मंदसौर में 2 लाख 62 हजार 827, रतलाम में 2 लाख 50 हजार 176, रायसेन में 2 लाख 46 हजार 390, दमोह में 2 लाख 45 हजार 143, सीहोर में 2 लाख 42 हजार 717, और कटनी में 2 लाख 41 हजार 302 बहनों को राशि का लाभ मिला है।     बड़वानी में 2 लाख 37 हजार 60, गुना में 2 लाख 28 हजार 604, खंडवा में 2 लाख 16 हजार 372, नर्मदापुरम में 2 लाख 9 हजार 837, सिद्धी में 2 लाख 9 हजार 706, टीकमगढ़ में 2 लाख 7 हजार 79, नरसिंहपुर में 2 लाख 8 हजार 734 ,सिंगरौली जिले में 1 लाख 97 हजार 4, मंडला में 1 लाख 95 हजार 153, झाबुआ में 1 लाख 92 हजार 511, शहडोल में 1 लाख 88 हजार 729, पन्ना में 1 लाख 82 हजार 220, शाजापुर में 1 लाख 73 हजार 900, नीमच में 1 लाख 57 हजार 658, तथा अशोक नगर में 1 लाख 55 हजार 387 महिलाएँ इस योजना से लाभान्वित हुई हैं।     दतिया में 1 लाख 44 हजार 239, अनूपपुर में 1 लाख 26 हजार 54, अलीराजपुर में 1 लाख 23 हजार 492, आगर मालवा में 1 लाख 17 हजार 255, उमरिया में 1 लाख 9 हजार 113, श्योपुर में 1 लाख 8 हजार 673, और हरदा जिले में 93 हजार 516 बहनों को योजना की राशि का लाभ मिला है। निवाड़ी जिले में 80 हजार 157 महिलाओं को योजना का लाभ प्राप्त हुआ है। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” … Read more

रायसेन में मासूम से अत्याचार पर जनआक्रोश, गिरफ्तारी न होने से मंडीदीप-जाम और बाड़ी बंद; शिवराज सिंह चौहान ने कड़ा बयान दिया

रायसेन  रायसेन जिले में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है। आरोपी ने चॉकलेट का बहाना बनाकर बच्ची को जंगल में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद गंभीर हालत में नाबालिग को एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने भोपाल-जबलपुर राष्ट्रीय राज्यमार्ग पर चक्काजाम किया और गौहरगंज का बाजार शनिवार को पूरे दिन बंद रहा। इधर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि वह पीड़िता और उसके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं और अपराधी को कड़ी सजा दिलाने में कोई कोताही नहीं होगी। दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी न होने से आक्रोश बढ़ा, मंडीदीप में जाम, बाड़ी शहर बंद मासूम से दुष्कर्म मामले में आरोपित अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर है, हिन्दू संगठनों सहित जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आक्रोशित भीड़ ने मंडीदीप में जाम लगा दिया है। यहां पूर्व मंत्री क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र पटवा भी पहुंचे हैं और धरने पर साथ में बैठे हैं। पूर्व सांसद बुदनी विधायक रमाकांत भार्गव भी जाम में फंस गए हैं। आरोपी फरार, जिले कई जगह बंद आरोपित सलमान की गिरफ्तार करने की मांग जिले भर में उठी। रायसेन जिला मुख्यालय, बाड़ी बंद, ओबेदुल्लागंज, मंडीदीप बंद। रायसेन शहर में भोपाल सागर तिराहे पर हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। शहर में दुकानें पूरी तरह से बंद हैं। कल उदयपुरा बंद की घोषणा की गई है। पुलिस आरोपित सलमान को लगातार तलाश रही है लेकिन अभी तक कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लगा है। जिले में विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है। शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा: मेरे संसदीय क्षेत्र में मासूम बेटी के साथ हुई दुष्कर्म की घटना से मन व्यथित और अत्यंत आक्रोशित है। इस मामले में आज मैंने केंद्रीय चिकित्सालय,भोपाल पहुंचकर पीड़िता के स्वास्थ्य की जानकारी ली और परिवारजनों को दिलासा दी कि हम मजबूती से साथ खड़े हैं और न्याय जरूर दिलाएंगे। बेटी के उपचार में कोई कमी न रहे और समुचित इलाज की व्यवस्था हो, इसके लिए अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया है। साथ ही प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि जो आरोपी है, उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। मैंने यह भी निर्देश दिया है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में लाया जाए। जिससे पीड़िता के साथ जल्द से जल्द न्याय हो सके। जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूंगा।

TMC के हुमायूं कबीर के मस्जिद निर्माण ऐलान पर उमा भारती ने जताई कड़ी प्रतिक्रिया

भोपाल  विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक साम्प्रदायिक मोड आ गया है. बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण की आधारशिला रखने का ऐलान किया है. 6 दिसंबर वही तारीख है जब 33 साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद तोड़ दी गई थी.  टीएमसी विधायक के इस बयान पर बीजेपी नेता और राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं प्रखर हिंदूवादी नेत्री उमा भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है कि इबादत के नाम पर बनी मस्जिद का हम सम्मान करेंगे लेकिन बाबर के नाम से बनी हुई इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था, ईंटे भी गायब हो गई थीं.  हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी के विधायक और पूर्व मंत्री हैं.  हुमायूं कबीर ने 2021 में भरतपुर विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. इस बार 2026 में विधानसभा चुनाव होने को हैं. 2021 में हुमायूं कबीर को 96 हजार 226 वोट मिले थे. उन्होंने बीजेपी के ईमान कल्याण मुखर्जी को 43 हजार 83 वोटों के मार्जिन से हराया था. 2016 में हुमायूं कबीर भरतपुर सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे और उन्हें मात्र 1497 वोट मिले थे.  लेकिन जब वे टीएमसी में आए तो उनकी किस्मत बदल गई. हुमायूं कबीर ने कहा कि वह  6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे. इस दौरान मुस्लिम समाज के कई नेता शिरकत करेंगे. उन्होंने कहा कि यह निर्माण तीन साल में पूरा हो जाएगा. हुमायूं कबीर ने कहा कि इस कार्यक्रम में कई मुस्लिम मौलानाओं को न्योता दिया जाएगा.  हुमायूं कबीर बेलडांगा क्षेत्र में काफी असर रखते हैं और मुस्लिम समुदाय के बीच लोकप्रिय हैं. कबीर पहले भी विवादित बयान और राजनीतिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहे हैं. माना जाता है कि वे पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट चल रहे हैं, पर ममता बनर्जी की आलोचना से बचते रहे हैं. राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रहीं उमा भारती ने इस बयान पर काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "खुदा, इबादत, इस्लाम के नाम पर मस्जिद बने हम सम्मान करेंगे लेकिन बाबर के नाम से बनी हुई इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था, ईंटे भी गायब हो गई थीं." पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सलाह देते हुए उमा भारती ने कहा कि, "मेरी मित्र ममता बनर्जी जी को सलाह है कि बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की बात कहने वालों पर कार्रवाई करिए, बंगाल एवं देश की अस्मिता एवं सद्भाव के लिए आपकी भी जिम्मेवारी है."  6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी राम मंदिर आंदोलन के दौरान आज से 33 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को लाखों कारसेवकों ने अयोध्या में स्थित बाबरी मस्जिद को तोड़ दिया था. हिंदू संगठनों का दावा था कि यह मस्जिद भगवान राम के जन्मस्थान पर मुगल शासक बाबर द्वारा बनवाई गई थी. मुस्लिम संगठन इसे अपनी मस्जिद बताते थे. इस विध्वसं के बाद देश भर में कई जगहों पर साम्प्रदायिक दंगे हुए थे.  इस मामले में 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल की जमीन हिन्दू पक्ष को दी और मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.  बाबरी मस्जिद ही क्यों? TMC MLA हुमायूं कबीर के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा  है कि, 'मस्जिद बनाना ठीक है, लेकिन खास तौर पर 'बाबरी मस्जिद' ही क्यों? जो विवाद पहले ही सुलझ चुका है, उसे राजनीतिक फायदे के लिए फिर से खोला जा रहा है. हमारा रिश्ता बाबर से नहीं, बल्कि शिवाजी महाराज से है." टीएमसी विधायक के इस बयान पर बीजेपी नेता और बंगाल के नेता प्रतिपक्ष सुवेन्दु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा है, "वह यह सब सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए कर रहे हैं. चुनाव पास आ रहे हैं. बेचारे मुसलमान TMC को छोड़ रहे हैं. जैसे 2021 में उन्होंने CAA को NRC कहकर सभी मुसलमानों को एक किया था, इस बार वे बाबरी मस्जिद के निर्माण पर चर्चा करके ऐसा कर रहे हैं."   हुमायूं कबीर के इस बयान पर टीएमसी की अबतक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है.   

रामनगरी की अर्थव्यवस्था में आया भारी उछाल, हर हाथ को मिला रोजगार का अवसर

अयोध्या   अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन में आई भारी वृद्धि ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मंदिर प्रांगण और प्रमुख मार्गों पर पूजा सामग्री, प्रसाद और स्मृति चिह्न बेचने वाले दुकानदारों की आय में कई गुना की हुई है। रामपथ, कनक भवन, श्री हनुमानगढ़ी मार्ग और आसपास के क्षेत्र अब सिर्फ धार्मिक रूप से ही नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी समृद्ध दिखाई दे रहे हैं। हनुमानगढ़ी मार्ग पर स्थित श्री गायत्री भोग प्रसाद भंडार के संचालक जितेंद्र कुमार गुप्ता बताते हैं कि पहले उनका दैनिक कारोबार 3,000 रुपये तक सीमित रहता था। लेकिन राम मंदिर निर्माण के बाद ये कारोबार प्रतिदिन 10,000 रुपये तक पहुंच गया है। वे कहते हैं कि योगी सरकार के प्रयासों से अयोध्या दिव्य, भव्य और नव्य हो गई है। उनका मानना है कि धर्म ध्वजारोहण और मंदिर के कार्यक्रमों के बाद पर्यटकों की आमद और बढ़ेगी जिससे आय में अतिरिक्त वृद्धि की संभावना बनी हुई है। इसी तरह कनक भवन के पास पूजा सामग्री की दुकान चलाने वाले श्यामजी राय ने बताया कि अयोध्या में तीर्थ यात्रियों का उत्साह अलग ही स्तर पर पहुंच गया है। पहले वे नौकरी करते थे लेकिन अब दुकान संभाल रहे हैं और बताते हैं कि व्यापार में चार गुना की वृद्धि हुई है। वे कहते हैं कि राम मंदिर बनने के बाद यहां रोजगार के अवसर बढ़े हैं, पलायन रुका है और अयोध्यावासी अपने शहर में आत्मनिर्भर हो रहे हैं। कनक भवन के सामने स्थित गुप्ता जी चंदन वाले दुकान के मालिक प्रशांत गुप्ता भी आर्थिक बदलाव के इस दौर के जीवंत उदाहरण हैं। पहले उनकी दुकान की बिक्री रोजाना 2,000 रुपये तक रहती थी, अब यह आंकड़ा प्रतिदिन 25,000 रुपये तक जा पहुंचा है। वे कहते हैं कि पहले दुकानदारों का खर्च निकलना भी मुश्किल था, लेकिन अब हम लोग भरपूर लाभ में हैं। सफाई, सौंदर्यीकरण और यातायात व्यवस्था में आई सुधार ने भी व्यापार को गति दी है। जय नारायण मिश्र, जो जय पूजन मूर्ति और सामग्री भंडार के संचालक हैं, बताते हैं कि पहले व्यापार अधिकतर मेले पर आधारित रह्ता था। वर्ष में कुछ ही दिनों में ग्राहक आते थे। आज स्थिति यह है कि वे प्रतिदिन 10,000 रुपये तक कमा रहे हैं, जबकि पहले आय महज 2,000 रुपये थी। वे बताते हैं कि पहले प्रतिदिन करीब 100 लोग मूर्तियां खरीदते थे, मगर अब उनकी दुकान पर प्रतिदिन 1,200 से अधिक ग्राहक आते हैं। अयोध्या में इस आर्थिक जागरण ने छोटे व्यापारियों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। सड़क मार्गों का चौड़ीकरण, अतिक्रमण हटाना, धार्मिक पर्यटन से संबंधित सुविधाओं का व्यवस्थित निर्माण स्थानीय व्यवसाय के लिए लाभकारी सिद्ध हुआ है। दुकानदारों का मानना है कि मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं रहा बल्कि यह रोजगार सृजन और आर्थिक सुदृढ़ता का भी प्रतीक बन चुका है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में अयोध्या विश्वस्तरीय तीर्थ शहर के रूप में स्थापित होगी और यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था और भी मजबूती प्रदान करेगी।

CM योगी की पाती: श्रीराम मंदिर में ध्वजारोहण से शुरू होगा नया युग, कल पीएम मोदी करेंगे कार्यक्रम

अयोध्या  अयोध्या में श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर 25 नवंबर को ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह आयोजित हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर के शिखर पर केसरिया भगवा ध्वज फहराएंगे, जो त्रेता युग की प्राचीन परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक पाती लिखी है जिसमें उन्होंने कहा है कि वो प्रार्थना करते हैं कि धर्म-ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का नया युग आरंभ हो। उन्होंने इस पत्र में लिखा है कि ये हम सभी प्रदेशवासियों के लिए आनंद और गौरव का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में अयोध्या में हो रहा कार्य प्रभु श्रीराम के जीवन मूल्यों से प्रेरित है। सौहार्द एवं सौमनस्य का यह पुनः प्राप्त वातावरण के पीछे अनन्य श्रद्धा, रामभक्तों की आस्था तथा सनातन संस्कृति के गौरवगान है। पीएम मोदी करेंगे अयोध्या के श्रीराम मंदिर में ध्वजारोहण  अयोध्या में श्रीराम मंदिर के मुख्य शिखर पर मंगलवार को होने वाले ऐतिहासिक ध्वजारोहण समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विवाह पंचमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजकर 6 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में केसरिया ध्वज फहराएंगे, जो भगवान राम की सूर्यवंशीय परंपरा का प्रतीक है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह ध्वज सूर्य के प्रतीक के साथ अंकित है, जो दिव्य ऊर्जा, सद्गुण और ज्ञान का प्रतिनिधित्व करता है। समारोह से पूर्व 21 से 25 नवंबर तक पांच दिवसीय वैदिक अनुष्ठान चल रहे हैं, जिन्हें 108 आचार्यों द्वारा संपन्न किया जा रहा है। केसरिया ध्वज फहराया जाएगा इस केसरिया ध्वज की कुल ऊंचाई 21 फीट है जिसमें 161 फीट ऊंचे शिखर पर 42 फीट का ध्वजस्तंभ लगाया गया है। इसे अहमदाबाद की एक 80 वर्ष पुरानी कंपनी ने तैयार किया है, जो पैराशूट निर्माण करती है। ध्वज विशेष पैराशूट फैब्रिक और रेशमी साटन धागों से बुना गया है जो सूर्य की तेज किरणों, भारी वर्षा और 60 किमी/घंटा तक की हवाओं का सामना कर सकता है। सीएम योगी की प्रदेशवासियों के नाम पाती इस ऐतिहासिक पल से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि ” 25 नवंबर को अयोध्या का नाम पुनः इतिहास के पृष्ठ पर स्वर्णिम अक्षरों में अंकित होगा। इस अवसर पर हम सभी प्रदेशवासी आनंद और गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। कबीरदास जी, अद्वैतवादी आचार्य शंकराचार्य, संत तुलसीदास, मलिक मोहम्मद जायसी, संत रैदास आदि महापुरुषों की तपोभूमि एवं आध्यात्मिक धरोहरों को पुनर्स्थापित करने का यह शुभ क्षण है। प्रभु श्रीराम का नगर सतत् विकास के प्रतिमान स्थापित करता हुआ अद्यतन कला-सौंदर्य एवं संस्कृति के सनातन अध्यात्म एवं आधुनिक स्थापत्य बृहत्तरता के लिए श्रीरामलला धरातल से लेकर अनंत तक उत्कृष्टता की कड़ी बन रहा है, सुरक्षा भी सुदृढ़ हुई है। मुझे श्रीराम की नगरी विश्व मानचित्र पर सांस्कृतिक राजधानी के रूप में अंकित होते देख हर्ष, गौरव का अनुभव हो रहा है और अद्भुत विकास भी। मेरी यही कामना है कि धर्म-ध्वजा की पुनर्स्थापना से प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि का नया युग आरंभ हो।” उन्होंने आह्वान किया कि आइए हम सभी मिलकर रामराज्य के आदर्शों से प्रेरित एक नव–उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।

धर्मेंद्र के निधन से शोक, CM मोहन व सिंधिया ने व्यक्त किया दुख—भावुक संदेश हुए वायरल

भोपाल  बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र के निधन पर CM मोहन का रिएक्शन सामने आया है। सीएम ने ट्वीट कर कहा- भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता धर्मेन्द्र जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। सिनेमा जगत को समृद्ध करने में उनका अद्वितीय योगदान और अभिनय सदैव अविस्मरणीय रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिजनों व प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट की है। उन्होंने लिखा- भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता एवं बीकानेर से लोकसभा सांसद रहे धर्मेंद्र जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। धर्मेंद्र जी ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, सादगी, और समर्पण से न केवल पर्दे पर किरदारों को जिया, बल्कि करोड़ों दिलों में अमिट छाप छोड़ी। उनका जाना भारतीय फिल्म जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है पर उनका व्यक्तित्व, उनका स्नेह और उनका जीवंत अंदाज़ हमेशा अमर रहेगा। शोक की इस घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं उनके परिवार, प्रशंसकों और समस्त फिल्म जगत के साथ हैं।

बुंदेलखंड के लिए बड़ी खबर, CM ने दी लॉन्च नदी परियोजना की मंजूरी, केन–बेतवा लिंक बनेगा गेम चेंजर

 बण्डा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से बुन्देलखंड के हर खेत को पानी मिलेगा। इससे क्षेत्र में समृद्धि आएगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा है कि वह अपने खेतों को किसी भी स्थिति में बेचने का प्रयास नहीं करें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों का सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नंबर वन बनाने का कार्य किया जाएगा। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 25 गायों के साथ गौशाला खोलने पर 40 लाख रुपये में से 10 लाख तक का अनुदान देने का कार्य मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव सागर जिले के बण्डा में सांदीपनि विद्यालय भवन के लोकापर्ण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बण्डा में आज लगभग 31 करोड़ रुपये की लागत से नव निर्मित सर्व सुविधा युक्त सांदीपनि विद्यालय भवन का लोकार्पण किया गया है। इस विद्यालय में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा है कि बण्डा क्षेत्र में सर्व सुविधा युक्त स्कूल भवन के निर्माण से इस क्षेत्र के विद्यार्थियों को सीधा लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालय परियोजना मध्यप्रदेश शासन की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जो गरीब वर्ग के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के साथ प्रारंभ की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा ही किसी देश की मजबूती का आधार है। मध्य प्रदेश सरकार बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए उन्हें उच्च-गुणवत्ता युक्त शिक्षा और सभी सुविधाएं प्रदान करने के लिए संकल्पित हैं। गीता जयंती मनाई जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में एक दिसंबर से प्रदेशव्यापी गीता जयंती उत्सव मनाया जाएगा। प्रदेश सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों में गीता भवन बनाए जा रहे हैं। सभी जिलों के प्रत्येक जनपद पंचायत में वृंदावन ग्राम एवं गीता भवन बनाए जाएंगे। लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री ने 50.65 करोड़ रुपये के 16 निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। लांच नदी परियोजना को स्वीकृति मुख्यमंत्री ने सागर जिले की बहुप्रतीक्षित लांच नदी परियोजना की स्वीकृति की घोषणा की। वहीं, मुख्यमंत्री ने शाहगढ़ में सिविल अस्पताल बनाने, बण्डा में सर्व सुविधा युक्त स्टेडियम, सिविल अस्पताल बण्डा में पोस्टमार्टम हाउस बनाने, बण्डा क्षेत्र में राखसी, चकेरी, विनेयका में भवन विहीन स्कूलों के लिए भवन बनाने की घोषणा की। सीएम के साथ इस कार्यक्रम में एमपी के मंत्री लखन पटेल दशरथ लोधी दमोह सांसद राहुल लोधी सहित सागर जिले के भाजपा विधायक गण एवं विशाल जनसमूह उपस्थित रहा। 

धूल के कणों में भारी वृद्धि, 98% शहरों में बढ़ा प्रदूषण; MP की हवा बनी दम घोंटू

भोपाल  दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का संकट बना हुआ है. दिल्ली में एक्यूआई 400 के पास दर्ज हो रहा है लेकिन वायु प्रदूषण के मामले में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल सहित कई शहर दिल्ली के रास्ते पर चल रहे हैं. प्रदेश के कई शहरों में पॉल्यूशन का स्तर लगातार बढ़ रहा है.मध्य प्रदेश में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 98 प्रतिशत शहरों में पीएम 2.5, यानी धूल के बारीक कणों का स्तर बढ़ा हुआ है।  प्रदेश में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आ रही है. विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले सालों में शहरी क्षेत्रों और आसपास के क्षेत्रों में कम हुई पेड़ों की संख्या, मौसम में बदलाव और कई दूसरे कारणों से वायु की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. ग्वालियर में भी स्थिति चिंताजनक ग्वालियर में भी स्थिति चिंताजनक है। महाराज वाड़ा में 308, डीडी नगर में 309 और सिटी सेंटर में 243 AQI मिला। इनमें से महाराज वाड़ा और डीडी नगर की हवा बेहद खराब श्रेणी में रही, जबकि सिटी सेंटर कुछ कम प्रदूषित, लेकिन पुअर कैटेगरी में रहा। इंदौर में अलग-अलग स्थानों पर अलग स्थिति देखने को मिली। छोटी ग्वालटोली में 304 AQI वेरी पुअर रहा, जबकि एयरपोर्ट पर 155, रेसीडेंसी एरिया में 103 और खंडवा रोड के आसपास 155 के आसपास AQI मॉडरेट मिला। कोहरा और सर्दी में इसलिए बढ़ता है प्रदूषण पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि ठंड के सीजन में आम तौर पर एक्यूआई बढ़ता ही है। ठंड में वाहनों से निकलने वाली हानिकारक गैस एक्सपेंड नहीं हो पातीं व वायुमंडल में ठहरी रहती हैं। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ती है, गैस व धूल के कण वायुमंडल में देर तक ठहरते हैं। इससे AQI बढ़ता है। इसी के साथ अधिक कोहरे की वजह से भी कई बार वायुमंडल में मौजूद हानिकारक गैस डिजॉल्व नहीं हो पाती हैं। कैसी है प्रदेश के शहरों की हवा? भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हवा की गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है. मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी इंडेक्स के मुताबिक राजधानी भोपाल का एक्यूआई इंडेक्स 300 के पार पहुंच गया है. भोपाल के पर्यावरण परिसर में हवा की गुणवत्ता वैरी पुअर कैटेगिरी की रिकॉर्ड की गई. यहां एक्यूआई का स्तर 304 पहुंच गया. इसी तरह भोपाल के कलेक्टोरेट एरिया में एक्यूआई 321 रिकॉर्ड किया गया, जबकि इससे भी ज्यादा खराब स्थिति भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की रही, यहां एक्यूआई का स्तर 347 तक पहुंच गया. यहां की स्थिति प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से भी खराब है. ग्वालियर ग्वालियर में भी वायु की गुणवत्ता वैरी पुअर कैटेगिरी की स्थिति में पहुंच गई. ग्वालियर के महाराज बाड़ा में एक्यूआई का स्तर 310 पहुंच गया. वहीं ग्वालियर डीडी नगर में इसका स्तर 310 आंका गया. इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहीं जाने वाली इंदौर के छोटी ग्वालटोली में भी एक्यूआई का स्तर 300 पार पहुंच गया. जबलपुर जबलपुर की आबोहवा अपेक्षाकृत बेहतर है. यहां वायु की गुणवत्ता दूसरे बड़े शहरों के मुकाबले अच्छी है. जबलपुर में एक्यूआई का स्तर 243 रिकॉर्ड किया गया, हालांकि यह पुवर कैटेगिरी है. सागर सागर में भी वायु प्रदूषण पुअर कैटेगिरी में पहुंच गया है. सागर के कलेक्टोरेट क्षेत्र में एक्यूआई 311 पहुंच गया है, जबकि सागर के दीनदयाल नगर में एक्यूआई 147 रहा. सिंगरौली प्रदेश में वायु प्रदूषण के मामले में सबसे ज्यादा खराब स्थिति सिंगरौली में रिकॉर्ड की गई है. सिंगरौली में एक्यूआई का स्तर 356 पहुंच गया है. प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर के सेक्टर 2 में एक्यूआई का स्तर 338 और मंडीदीप में 321 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया. प्रदेश के इन क्षेत्रों की हवा अच्छी प्रदेश में वायु प्रदूषण के मामले में सबसे बेहतर स्थिति दमोह की आंकी गई. यहां एक्यूआई का स्तर 41 रहा और हवा में पीएम 10 का स्तर सिर्फ 40.48 रहा. दमोह में वायु की गुणवत्ता की कैटेगिरी गुड रही. इंदौर के रीजनल पार्क और पोलोग्राउंड में वायु प्रदूषण का स्तर ठीक रहा. खरगोन नगर पालिका में भी पॉल्यूशन का स्तर अच्छा आंका गया. पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी. पांडे के अनुसार     सर्दियों में देर रात और सुबह हवा का दबाव कम होने से प्रदूषक नीचे जम जाते हैं।     इससे सुबह की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित होती है।     यह स्थिति फेफड़ों के रोगियों, हार्ट पेशंट, 5 साल से छोटे बच्चों और 60+ उम्र के लोगों के लिए बेहद खतरनाक है।     उन्होंने सलाह दी कि मॉर्निंग वॉक हलकी धूप निकलने के बाद ही करें, क्योंकि उस समय हवा में प्रदूषक ऊपर उठने लगते हैं। जहां हवा साफ मिली, उसका कारण विशेषज्ञों का कहना है कि दमोह, खरगोन, रीजनल पार्क जैसे इलाकों में एक्यूआई Good या Satisfactory इसलिए मिला, क्योंकि इन स्थानों पर उद्योग और ट्रैफिक कम है। हवा तेज चलने से प्रदूषक जल्दी फैल जाते हैं। तेज हवा प्रदूषकों को जमीन से ऊपर ले जाती है, इसलिए ऐसी जगहों की हवा अपेक्षाकृत जल्दी साफ हो जाती है।