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बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने MP सिविल जज परीक्षा का रिज़ल्ट दोबारा जारी करने को कहा, 191 पद खाली—एक भी ST उम्मीदवार चयनित नहीं

जबलपुर  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन  भर्ती परीक्षा-2022 के परिणाम पर बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार किया जाए। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने “एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस” की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।  याचिका में भर्ती के नियम 194 में संशोधन को चुनौती दी गई थी। दरअसल, सिविल जज भर्ती-2022 में कुल 199 पदों के लिए विज्ञापन निकला था, जिसमें बैकलॉग के पद भी शामिल थे। इसमें अनारक्षित वर्ग: 48 में से 17 बैकलॉग,  SC: 18 में से 11 बैकलॉग , ST: 121 में से 109 बैकलॉग ,  OBC: 10 में से 1 बैकलॉग है।  वहीं हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मुख्य परीक्षा में एससी उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 45% और एसटी के लिए 40% अंक मानें जाएं. वहीं इंटरव्यू में भी 20 अंकों की बाध्यता में राहत देने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का कहना है कि पात्र उम्मीदवारों को मौका देना न्याय की मूल भावना है. अब एक्जाम सेल को जल्द ही नई सूची कोर्ट में पेश करनी होगी. यह फैसला कई परिवारों की उम्मीदें फिर से जगा रहा है. मेन्स और इंटरव्यू के बाद अंतिम रूप से 89 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए। हैरानी की बात यह रही कि इन 89 चयनित अभ्यर्थियों में ओबीसी वर्ग के 15 अभ्यर्थी तो शामिल थे, लेकिन SC वर्ग के केवल 3 और ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी जगह नहीं बना पाया। याचिकाकर्ता का कहना था कि इतनी बड़ी संख्या में बैकलॉग पद होने के बावजूद SC-ST अभ्यर्थियों का इतना कम प्रतिनिधित्व संवैधानिक आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करता है।  साथ ही नियम 194 में किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखा है, लेकिन फिलहाल SC-ST अभ्यर्थियों के चयन पर पुनर्विचार करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि कोई अभ्यर्थी योग्य पाया जाता है तो उसे नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।  दों के खाली रहने को 'अत्यंत गंभीर' बताया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और पुष्पेंद्र शाह ने तर्क दिया कि परीक्षा सेल ने आरक्षण नीति का सही ढंग से पालन नहीं किया। बैकलॉग पदों को अनारक्षित वर्ग को देना, न्यूनतम योग्यता में छूट न देना और साक्षात्कार में कम अंक देना भेदभाव को दर्शाता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सिविल जज परीक्षा के परिणामों में 191 पदों के बदले केवल 47 अभ्यर्थियों का चयन व्यवस्था की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। अजजा वर्ग के निर्धारित पदों को भरा ही नहीं जा सका। एक राज्य के तौर पर यह निराशाजनक है। सरकार वंचित वर्ग के उत्थान में पूरी तरह विफल साबित हुई है। हम न्यायपालिका या आरक्षण पर प्रश्न नहीं उठा रहे, किंतु परिणाम बताते हैं कि आरक्षित वर्ग को आज भी सीखने और तैयारियों के संसाधन और अवसर उपलब्ध नहीं हैं। राज्य को इस बात के प्रयास बढ़ाने होंगे, जिसमें वंचित समुदाय को बेहतर अवसर मिल सकें। लगातार हो रहा विरोध सबसे बड़ी चिंता यह रही कि 191 सीटों में से एसटी वर्ग का एक भी उम्मीदवार चयनित नहीं हुआ, जबकि 121 सीटें एसटी वर्ग की खाली रह गईं. एससी वर्ग से भी केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन हुआ. कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर माना. वहीं परिणाम आने के बाद दलित, आदिवासी व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवार लगातार विरोध कर रहे थे. अब संशोधित सूची आने से इस विवाद पर बड़ा असर पड़ सकता है और डिजर्विंग उम्मीदवारों को न्याय मिल सकता है. सिलेक्शन नहीं हो पाने की एक वजह यह बताई एडवोकेट मोहर सिंह बताते हैं कि इस बार का एग्जाम काफी कठिन था। कानूनों से ज्यादा सवाल कोर्ट के जजमेंट्स से जुड़े हुए थे। इस कारण अभ्यर्थियों को जवाब देने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वैकल्पिक एग्जाम भी कठिन था, जिसके कारण कम अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा तक पहुंच पाए। मुख्य परीक्षा में भी 50% अंक लाना जरूरी था। अधिकतर स्टूडेंट 50% का आंकड़ा नहीं छू पाए और पहले ही बाहर हो गए। इस तरह का था परीक्षा पैटर्न प्रारंभिक परीक्षा     प्रारूपः वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्यीय प्रश्न)     अवधि: 2 घंटे     कुल अंकः 150 (150 प्रश्न, प्रत्येक 1 अंक का) मुख्य परीक्षा     प्रारूपः वर्णनात्मक (निबंध-आधारित)     अवधिः प्रत्येक पेपर के लिए 3 घंटे     कुल पेपर: 4     कुल अंक: 400 (प्रत्येक पेपर 100 अंकों का) विषय : भारत का संविधान, सिविल प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, लेखन कौशल और न्यायालयीन अभ्यास जैसे विषय शामिल थे। अनिवार्यता : सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 200 अंक और अन्य वर्गों के लिए 190 अंक लाना जरूरी। मौखिक साक्षात्कार कुल अक: 50 चयनः अंतिम चयन के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़ा गया।

PM मोदी ने G20 मंच से कहा—पुराने विकास मॉडल ने दुनिया को नुकसान पहुंचाया, अब सबके लिए विकास जरूरी

जोहान्सबर्ग  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुंचे, जहां वे 21 से 23 नवंबर तक होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं. यह सम्मेलन ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है. शनिवार को उन्होंने सम्मेलन को संबोधित किया.  अफ्रीका की धरती पर पहली बार आयोजित हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन ने एक ऐतिहासिक शुरुआत देखी, और उसके उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक विकास की दिशा बदलने वाले तीन बड़े प्रस्ताव रखे. G20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने क्या-क्या कहा? पीएम मोदी ने कहा कि कई दशकों से जी20 दुनिया की अर्थव्यवस्था को आकार देता रहा है, लेकिन वर्तमान विकास मॉडल ने बड़े समुदायों को संसाधनों से वंचित किया है. उन्होंने साफ कहा कि इन मॉडलों ने प्रकृति का अंधाधुंध दोहन बढ़ाया है और सबसे अधिक असर अफ्रीका और ग्लोबल साउथ पर पड़ा है. उन्होंने तीन बड़े प्रस्ताव रखे.  1. ग्लोबल ट्रेडिशनल नॉलेज रिपोजिटरी प्रधानमंत्री ने ऐसी ज्ञान-परंपराओं की बात उठाई जो सदियों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में प्रकृति-संतुलन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता को बनाए रखती हैं. उन्होंने कहा कि भारत के “भारतीय ज्ञान प्रणालियां” मॉडल के आधार पर एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार बननी चाहिए, ताकि टिकाऊ जीवन के इन अनुभवों को संरक्षित कर अगली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके. 2. जी20 अफ्रीका कौशल गुणक पहल प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अफ्रीका का विकास पूरी दुनिया के हित में है. इसी सोच के साथ उन्होंने “जी20–अफ्रीका कौशल गुणक” का ऐलान किया. यह पहल ट्रेन-द-ट्रेनर्स मॉडल पर आधारित होगी, जिसे सभी G20 देश मिलकर फंड और सपोर्ट करेंगे. लक्ष्य है अगले 10 साल में एक मिलियन प्रमाणित ट्रेनर तैयार करना, जो फिर लाखों युवाओं को कौशल दे सकेंगे. 3. ड्रग-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने पर G20 पहल प्रधानमंत्री ने ड्रग–टेरर नेटवर्क पर भी गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि फेंटानाइल जैसे सिंथेटिक ड्रग पूरी दुनिया में स्वास्थ्य, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं. इसलिए जी20 को एक संयुक्त अभियान – ड्रग-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने पर G20 पहल शुरू करना चाहिए. यह तस्करी, अवैध वित्तीय नेटवर्क और आतंकी फंडिंग को रोकने में मदद करेगा. पीएम मोदी ने अफ्रीका और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को जी20 की मुख्यधारा में लाने की जरूरत दोहराई और कहा कि भारत “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” की सोच को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है. G20 बैठक में बोले पीएम मोदी – अब समय है विकास के नए मानक तय करने का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, G20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में भाषण दिया. यह सत्र समावेशी और टिकाऊ विकास पर केंद्रित था.  उन्होंने कहा कि अफ्रीका पहली बार G20 समिट की मेजबानी कर रहा है, इसलिए अब सही समय है कि हम अपने विकास के पैमानों को फिर से देखें और ऐसा विकास मॉडल अपनाएं जो सबको साथ ले और लंबे समय तक टिक सके. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के प्राचीन मूल्यों, खासकर समग्र मानववाद का सिद्धांत, दुनिया को आगे बढ़ने का बेहतर रास्ता दिखाता है. G20 समिट में पीएम मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात दक्षिण अफ्रीका में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की. यह बातचीत जोहान्सबर्ग में चल रही बहुपक्षीय बैठकों के बीच हुई, जहां दोनों नेताओं ने आपसी मुद्दों पर चर्चा की. पीएम मोदी की कई विश्व नेताओं से मुलाकात G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विश्व नेताओं से मुलाकात और बातचीत की. G20 में कौन-कौन से देश शामिल हैं? अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, रूस, तुर्किये, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका देश शामिल हैं. इसके अलावा दो क्षेत्रीय संगठन भी इस समूह में शामिल हैं – यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ. 

यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन

खादी महोत्सव 2025 है स्वदेशी, नवाचार और सशक्तिकरण का उत्सव यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन खादी महोत्सव 2025 का विशेष आकर्षण हैं कौशल विकास कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम व आधुनिक उपकरणों का वितरण  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के तहत स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश की राजधानी में आयोजित दस दिवसीय खादी उत्सव 2025 में आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी आंदोलन को पुनर्जीवित करने, स्वदेशी शिल्पकला, स्थानीय उद्यमिता और पारंपरिक कलाओं को एक बड़े पैमाने पर सर्व समावेशी मंच के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता को प्रदर्शित कर रहे हैं खादी के उत्पाद   राज्य के विभिन्न जिलों से 160 से अधिक उद्यमी इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं, जो पारंपरिक उत्पादों की विविध श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। हाथ से काती गई खादी के वस्त्रों से लेकर टेराकोटा कला, हर्बल उत्पादों, आभूषणों और पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं तक यह प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता और विविधता को प्रदर्शित करती है। खादी महोत्सव में जहां एक ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट शिल्प को जानने व खरीदने का अवसर मिल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण व कुटीर के उद्यमियों को अपने उत्पाद आमजन तक पहुंचाने का मंच भी मिल रहा है।   ग्रामीण उद्यमियों को किया जा रहा आधुनिक उपकरणों का वितरण इस वर्ष खादी महोत्सव 2025 का एक प्रमुख आकर्षण लाभार्थियों को आधुनिक उपकरणों का वितरण किया जाना है। जिसके तहत दोना बनाने वाली मशीनें, पॉपकॉर्न यूनिट और इलेक्ट्रिक कुम्हार चाक शामिल हैं। यह पहल ग्रामीण व कुटीर उत्पादों की उत्पादकता बढ़ाने, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों का समर्थन करने और ग्रामीण युवाओं के लिए सार्थक आजीविका के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। ऐसे कदम प्रदेश के परंपरागत व ग्रामीण के उद्योगों में तकनीकी उन्ययन व नवाचार को को बढ़ावा दे रहे हैं। जिससे न केवल उत्पादों की लागत में कमी आएगी बल्कि उनकी गुणवत्ता में भी सुधार होगा।  कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और पैकेजिंग पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन बाजार स्थल और कौशल विकसित करने की जगह दोनों के रूप में डिजाइन किया गया यह खादी महोत्सव 2025 में कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग और व्यवसाय प्रबंधन पर आधारित कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से खादी व ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय बाजारों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक विस्तार करने एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यवसाय और प्रशिक्षण गतिविधियों के साथ-साथ, सांस्कृतिक प्रदर्शन, लोक संगीत और पारंपरिक कला प्रदर्शनों ने आयोजन को जीवंतता प्रदान कर रहा है।  खादी महोत्सव 2025 स्वदेशी व ग्रामीण विकास के मंच के रूप में संचालित है, जहां परंपरा प्रौद्योगिकी से मिलती है, और ग्रामीण क्षमता आर्थिक शक्ति के रूप में परिवर्तित होने का अवसर मिलता है। खादी महोत्सव यह संदेश देता है कि स्वदेशी उद्योग न केवल भारत की परंपरागत व ऐतिहासिक पहचान हैं, बल्कि एक स्थायी, स्थानीय रूप से सशक्त और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया

एआई के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति की ओर उत्तर प्रदेश योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया एआई संचालित तकनीकों के अभिनव प्रयोगों से खेती में कुशलता, उत्पादन व लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक बनाने की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश खेती के क्षेत्र में तकनीक आधारित अभिनव प्रयोगों के क्रियान्वयन एक अनुकरणीय मॉडल के तौर पर प्रस्तुत हो रहा है। राज्य में योगी सरकार ने पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों का विस्तार किया है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। एआई के इस्तेमाल से मौसम, मिट्टी और फसल के अनुसार वैज्ञानिक परामर्श, कीट और रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा मार्केट एक्सेस के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है। स्मार्ट खेती की दिशा में तेजी से बढ़ रहा यूपी प्रदेश में एआई-संचालित ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म्स के कुशल क्रियान्वयन से कृषि कार्यों की पूर्ति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत लगभग 300 कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान खेती को स्मार्ट बनाने के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। एआई आधारित कीट एवं रोग निगरानी व्यवस्था के जरिए फसलों को होने वाले नुकसान में भारी कमी आई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। मक्का की उपज 29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने तथा धान की उपज 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है। इससे प्रदेश तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर उच्च उत्पादकता वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। किसानों के आर्थिक उत्थान में एआई की बड़ी भूमिका विश्व बैंक और गूगल साझेदारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने एआई आधारित कृषि और शासन प्रणाली को बड़े पैमाने पर अपनाया है। यह प्रणाली किसानों को वास्तविक समय में मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार डिजिटल सलाह उपलब्ध करा रही है। ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्मों ने किसानों को मार्केट एक्सेस आसान बनाया है, जबकि एआई ने ऋण, बीमा और सब्सिडी जैसी सेवाओं का लाभ भी तीव्र गति से उपलब्ध कराया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस कृषि से जुड़े हर किसान को तकनीक से जोड़ने और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास अब बड़े पैमाने पर सफल होते दिखाई दे रहे हैं। इन प्रयासों के जरिए उत्तर प्रदेश की एआई आधारित कृषि क्रांति न केवल राज्य के भविष्य को बदल रही है, बल्कि देश के लिए भी एक नए आदर्श मॉडल के रूप में उभर रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी

दिव्यता व भव्यता के साथ संपन्न करेंगे माघ मेलाः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंती पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की हो रही कार्रवाईः मुख्यमंत्री माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु करेंगे संगम पर स्नानः मुख्यमंत्री लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास के साथ करते हैं मां गंगा की साधनाः मुख्यमंत्री बोले- गंगा-यमुना में सीवर के एक बूंद का भी नहीं होगा रिसाव   माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारीः सीएम योगी 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्थाः मुख्यमंत्री 25 हजार शौचालय-3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात, 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापितः मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की, फिर पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। सीएम ने कहा कि मेले की प्रगति युद्ध स्तर पर है। कल्पवासियों व श्रद्धालुओं के साथ पूरे आयोजन को भव्यता-दिव्यता के साथ संपन्न करेंगे। उन्होंने बताया कि माघ मेले की तिथि 15 दिन पहले आ रही है। तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि (छह प्रमुख स्नान) होंगे। तीन जनवरी से 1 फरवरी तक यहां कल्पवासियों की बड़ी संख्या रहेगी। लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास कर मां गंगा की साधना व तपस्या करते हैं। इनके साथ ही मुख्य स्नान पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। अनुमान है कि लगभग डेढ़ महीने के दौरान प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर स्नान करेंगे। हर दिन लगभग 20-25 लाख कल्पवासियों के साथ ही देश-प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से भी लोग आएंगे। मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की कार्रवाई हो रही है। सात सेक्टर बनाए गए हैं। अलग-अलग रूट से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 42 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। 2024 की तुलना में बढ़ाया गया दायरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण का गठन किया था और मंडलायुक्त को इसका अध्यक्ष नामित किया था। मेला प्राधिकरण के नेतृत्व में महाकुम्भ के साथ-साथ अन्य आयोजन भी संपन्न होते हैं। माघ मेला 2026 की तैयारी प्रारंभ हो चुकी है। 2024 की तुलना में इसके दायरे को बढ़ाया गया है। यहां की टीम के सामने 2025 के महाकुम्भ का अनुभव है, जिसने देश-दुनिया में अमिट छाप छोड़ी थी और भारत की सनातन धर्म की परंपरा के प्रति लोगों के मन में नया उत्साह भरा था। माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारी सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले के दृष्टिगत यूपी सरकार के सभी संबंधित विभागों को जोड़ा गया है। सिंचाई विभाग बाढ़ निरोधक उपाय करने के साथ ही जल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। यद्यपि आज संगम में 19-20 हजार क्यूसेक शुद्ध जल की उपलब्धता है, लेकिन उस समय भी 10 हजार क्यूसेक जल की उपलब्धता निरंतर बनी रहे, विभाग यह प्रयास कर रहा है। नमामि गंगे को जल की शुद्धता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पावर कॉरपोरेशन नियमित विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी की व्यवस्था करेगा। उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा मेला क्षेत्र में 47 किमी. की एचटी व 360 किमी. की एलटी लाइन बिछाने और 25 अस्थायी सब स्टेशन बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। बोले-सीवर के एक बूंद का रिसाव भी गंगा-यमुना जी में नहीं होगा सीएम योगी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी कनेक्टिंग मार्ग के साथ ही अंदर के मार्गों की भी व्यवस्था देखेगा। आवागमन में दिक्कत न हो, इसके लिए विभाग सात पांटून ब्रिज, लगभग 160 किमी. के दायरे में चकर्ड प्लेट बिछाएगा। उप्र जल निगम द्वारा 242 किमी. की पेयजल पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। 85 किमी. की सीवर लाइन बिछाने की कार्रवाई होगी, जिससे सीवर के एक भी बूंद का रिसाव गंगा-यमुना जी में न होने पाए। 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं के त्वरित उपचार के लिए 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे हैं। 12 पीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य हेल्प सेंटर के रूप में लोगों को सुविधा उपलब्ध कराएंगे। एक वेक्टर कंट्रोल यूनिट, पांच आयुर्वेदिक- पांच होमियोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना, 50 एंबुलेंस की भी व्यवस्था रहेगी। 25 हजार शौचालय, 3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा पर्याप्त शौचालय, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है। मेले के दौरान 25 हजार शौचालय, 8 हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग, 20 सक्शन गाड़ियां, 3000 सफाईकर्मी तैनात रहेंगे। 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापित सीएम योगी ने कहा कि मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए यूपी पुलिस द्वारा पर्याप्त कार्मिक तैनात किए गए हैं। मेला पुलिस अधीक्षक के साथ ही पहले चरण में एडिशनल एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती हो चुकी है। शेष की तैनाती प्रक्रिया कार्रवाई चल रही है। पुलिस लाइन के निर्माण कार्य को बढ़ाया जा चुका है। मेला क्षेत्र में 17 थाने, 42 पुलिस चौकी, 20 फायर टेंडर, 7 अग्निशमन चौकी, अग्निशमन के 20 वाच टावर, एक जल पुलिस थाना, एक जल पुलिस कंट्रोल रूम और 4 जल पुलिस सब कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने हैं। 8 किमी. का डीप वाटर बैरिकेडिंग भी यूपी पुलिस द्वारा लगाया जाएगा। मेले के दौरान 3800 बसें करेंगी काम सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा सीसीटीवी व एआई युक्त 400 कैमरों के माध्यम से क्राउड मॉनीटरिंग-क्राउड डेंसिटी एनालिसिस व इन्सिडेंट रिपोर्टिंग (स्वच्छता व सुरक्षा निगरानी) भी होगी। उन्होंने बताया कि यातायात व भीड़ नियंत्रण के लिए भी अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय कार्ययोजना विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां करीब 3800 बसें काम करेंगी। इसमें परिवहन निगम की 3000 बसें भी रहेंगी। 75 शटल बस मेला … Read more

योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व आईटी निवेश के ग्लोबल डेस्टिनेशन के तौर पर चमक रहा यूपी योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था बन रही युवाओं के लिए रोजगार सृजन का माध्यम, नए अवसर हो रहे उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि, 2017 की तुलना में लगभग 11 गुना उछाल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक आधारित समावेशी विकास की मजबूत सोच ने उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और डाटा सेंटर हब के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में, राज्य की उन्नति औद्योगिक रूप से अग्रणी कई राज्यों से भी अधिक तेज है। इसका सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है, जिन्हें आईटी और नई तकनीक आधारित क्षेत्रों में रोजगार एवं कौशल विकास के सुनहरे अवसर प्राप्त हो रहे हैं। योगी सरकार की कुशल नीतियों के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में निवेश निरंतर बढ़ रहा है और इससे 1.48 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की प्रबल संभावनाएं हैं। रणनीतिक बदलाव से बदला परिदृश्य पिछले पौने नौ वर्षों में राज्य सरकार ने पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ भविष्य आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था पर अपना विशेष फोकस किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल हुआ है। बेहतर कारोबारी माहौल, सरल प्रक्रियाएं, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ने राज्य में सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स, हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाओं और डाटा आधारित उद्योगों की स्थापना को नए आयाम दिए हैं। इस क्रम में स्टार्टअप इकोसिस्टम भी मजबूती से विस्तृत हो रहा है और बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा उत्तर प्रदेश राज्य से इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात जहां 3,862 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार आईटी निर्यात भी 55,711 करोड़ से 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रदेश आज कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख निर्यातक राज्य के रूप में उभर चुका है। सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े निवेश की नई संभावनाएं खुल रही हैं। मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती उत्तर प्रदेश में वैश्विक कंपनियां एसेम्बली यूनिट, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट और प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट की स्थापना कर रही हैं, जिससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों का लगभग 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। भूमि बैंक, प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क, बड़े पैमाने पर डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के साथ राज्य अब भविष्य की तकनीकी छलांग के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रहा यूपी कम लॉजिस्टिक्स लागत, बेहतर कानून-व्यवस्था, सिंगल विंडो सिस्टम और तकनीकी कौशल से लैस मजबूत युवा कार्यबल ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे विश्वसनीय गंतव्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा, निवेश संरक्षण और इंडस्ट्रियल टाउनशिप आधारित अप्रोच ने यूपी के औद्योगिक विकास को गति दी है। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे में उत्तर प्रदेश का उभरना यह दर्शाता है कि देश का टेक्नोलॉजी और विनिर्माण भविष्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर अपनी जनसांख्यिकीय ताकत को एक वास्तविक आर्थिक संपदा में परिवर्तित कर रही है।

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना कारोबार 4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना 4 लाख करोड़ का होगा कारोबार    जनवरी-जून, 2025 के बीच लगभग 23 करोड़ पर्यटक आए, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में मिलेगी मदद   लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है पर्यटन से राजस्व के 4 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान  अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में  महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5% योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी।     अयोध्या बन रहा है पर्यटन का सबसे बड़ा हब श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रूपये खर्च किया जा चुका है। यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्याम रखा जा रहा है।  उत्तर प्रदेश के पर्यटन में अयोध्या की हिस्सेदारी में वृद्धि 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25% होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आध्यात्म से आर्थिक विकास की यात्रा  अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।

ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश

यूपी की नई आर्थिक सोच को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बना 'भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025' ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश युवा व महिला उद्यमिता तथा निवेशक साझेदारी से भविष्य की अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश अपनी आर्थिक क्षमता व अवसरों की नई उड़ान को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की थीम पर केंद्रित इस मेले में उत्तर प्रदेश ने न केवल अपने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक स्वरूप में पेश किया, बल्कि नए स्टार्टअप, नवाचार व डिजिटल इकोसिस्टम की ताकत को भी दुनिया के समक्ष सशक्त रूप से प्रदर्शित किया है। योगी सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना को इस आयोजन में सबसे बड़े फोकस के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसके तहत 343 विशेष स्टॉल स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश से 2,750 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया है, जो मेले में राज्य की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी में से एक है। इस प्रकार, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 में उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि वह न सिर्फ अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और निवेशकों के साथ नए युग की आर्थिक क्रांति के नेतृत्व की दिशा में तेजी से अग्रसर है। राष्ट्रीय व वैश्विक पटल पर नए अवसर हो रहे सृजित मेले में युवा उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूपी सरकार के सहयोग से 150 से अधिक युवा स्टार्ट-अप्स और महिला उद्यमियों को अपनी नवोन्मेषी पहल, डिज़ाइन और तकनीकी उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर मिल रहा है। उनके लिए विशेष बिजनेस वर्कशॉप, नेटवर्किंग सेशन और निवेशक मंच आयोजित किए गए हैं, जहां वे प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी व देशी खरीदारों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्वरूप के तौर पर रेखांकित किया गया है। आगरा का पेठा, भदोही की कार्पेट, बनारसी साड़ियाँ, मेरठ का खेल सामान, कानपुर का चमड़ा, फिरोजाबाद का ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के मुख्य आकर्षण के रूप में उभर रहे हैं। इन उत्पादों के निर्माण, विकास व वाणिज्यिक प्रबंधन में युवाओं तथा महिलाओं की अग्रिम भूमिका उन्हें इस वृहद आयोजन के माध्यम से सीधे तौर पर राष्ट्रीय व वैश्विक पटल से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए नए अवसर सृजित कर रही है। मेले के दौरान पारंपरिक शिल्प को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ प्रस्तुत कर राज्य ने विश्व बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को और अधिक कुशल, सक्षम व प्रतिस्पर्धी राज्य के तौर पर स्थापित किया है। भविष्य की अर्थव्यवस्था के मजबूत रोडमैप की दिखी झलक सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन में विकसित हो रही राज्य की नई आर्थिक सोच इस मेले में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जहां पारंपरिक हस्तशिल्प को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डिजिटलीकरण से जोड़ने के प्रयासों को व्यापक सफलता मिली है। प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ग्राम से ग्लोबल बाजार तक पहुंच को सहज और सार्थक बनाया गया है, जिसका प्रमाण मेले में भी देखने को मिला है। मेले में कई विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बी2बी मीटिंग्स का आयोजन हो रहा है, जिनका उद्देश्य ओडीओपी सहित प्रदेश के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ साझेदार राज्य की भूमिका में भाग लेकर उत्तर प्रदेश ने इस भव्य आयोजन में खुद को वैश्विक व्यापार केंद्र तथा एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। साथ ही शिक्षा, कौशल विकास और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्राथमिकता में रखते हुए नई परियोजनाओं, निवेश समझौतों तथा लॉजिस्टिक्स हब आधारित आर्थिक ढांचे को भविष्य की सतत विकास यात्रा के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

कतर्नियाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य में बोट सफारी की क्षमता दोगुनी करने का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को मिलेगा बूस्ट, थारू-थाली और चंदन चौकी शिल्पग्राम को किया जाएगा विकसित  कतर्नियाघाट वन्य जीव अभ्यारण्य में बोट सफारी की क्षमता दोगुनी करने का प्रस्ताव दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए अनुभव-थारू संस्कृति योजना के क्रियान्वयन का प्रस्ताव       लखनऊ  उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की हालिया बैठक में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान और कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे क्षेत्रों को इको टूरिज्म का हब बनाने के उद्देश्य से थारू जनजाति की सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय व्यंजनों और वन्यजीव सफारी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के प्रस्ताव पेश किए गये। इसके साथ ही पर्यटकों को विशेष अनुभव के लिए 'अनुभव – थारू संस्कृति' योजना के तहत शिल्पग्राम को विकसित करने व  व थारू-थाली का विशेष प्रचार करने का प्रस्ताव भी पेश किया गया है। यूपी इको टूरिज्म की इन पहलों से न केवल पर्यटकों को अनोखा अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय समुदायों के आर्थिक उत्थान व समावेशी विकास को भी नई दिशा मिलेगी।   कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में नदी सफारी की क्षमता होगी दोगुनी उत्तर प्रदेश, नेपाल सीमा क्षेत्र में स्थित कतर्नियाघाट वन्यजीव अभ्यारण्य में गेरुआ नदी पर बोट या नदी सफारी का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा गया है। वर्तमान में वन विभाग द्वारा गेरूआ नदी में दो बोटों का संचालन किया जा रहा है। नदी सफारी के लिए पर्यटकों की बढ़ती हुई मांग को देखते हुए इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड ने दो अतिरिक्त बोटों के संचालन की योजना पेश की है।इससे वन्यजीव अभ्यारण्य में नदी सफारी की क्षमता दोगुनी हो जाएगी और पर्यटकों को अधिक सुविधा मिलेगी। बोर्ड ने वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इन बोटों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से लैस करने पर जोर दिया है, ताकि नदी तट पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।  'अनुभव – थारू संस्कृति' व थारू-थाली योजना के संचालन से बढ़ेगा स्थानीय पर्यटन  यूपी इको टूरिज्म विकास बोर्ड दुधवा राष्ट्रीय उद्यान व कतर्निया घाट के तराई क्षेत्र में रहने वाली थारू जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करने वाली 'अनुभव – थारू संस्कृति' योजना का भी प्रस्ताव भी पेश किया है। जो न केवल इन अभ्यारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान में आने वाले पर्यटकों को एक विशेष अनुभव प्रदान करेगा साथ ही थारू समुदाय के सामाजिक-आर्थिक उत्थान व समावेशी विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी क्रम में बोर्ड 'थारू थाली' को सक्रिय रूप से प्रचारित कर रहा है। यह थाली, थारू जनजाति के पारंपरिक व्यंजनों से युक्त है, जो स्थानीय जड़ी-बूटियों, अनाज और मसालों से तैयार की जाती है। क्षेत्र के होटलों और रिसॉर्ट्स संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मेन्यू में थारू थाली को अनिवार्य रूप से शामिल करें। साथ ही टूरिज्म बोर्ड ने ट्रेनिंग प्रोग्राम्स की भी योजना बनाई है, जहां थारू समुदाय के युवाओं व महिलाओं को खान-पान और आतिथ्य कला सिखाई जाएगी। जिससे न केवल प्रदेश में जनजातिय सांस्कृतिक संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा बल्कि समुदाय के लोगों को आय व रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।  चंदन चौकी शिल्पग्राम के पुनर्विकास का रखा गया प्रस्ताव समीक्षा बैठक में एक अन्य प्रस्ताव चंदन चौकी शिल्पग्राम के विकास के लिए भी पेश किया गया है। जनजातीय विकास विभाग द्वारा निर्मित यह शिल्पग्राम पूरी तरह तैयार है, लेकिन वर्तमान में बंद पड़ा है। दुधवा क्षेत्र में स्थित यह केंद्र थारू और अन्य जनजातीय संस्कृति के कौशल व कला के प्रदर्शन स्थल के रूप में पुनः विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। यहां हस्तशिल्प प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। बोर्ड ने सुझाव दिया कि जनजातीय विकास विभाग की सहमति से पर्यटन विभाग, इकोटूरिज्म बोर्ड या पर्यटन निगम इसे निजी निवेश के माध्यम से संचालित करेगा। इससे पर्यटकों की सुविधाएं बढ़ेंगी और इको-टूरिज्म को नया आयाम मिलेगा। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से सीएम योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश को इको टूरिज्म का हब बनाने की कार्ययोजना को बल मिलेगा साथ ही राजस्व वृद्धि व जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ थारू जनजाति के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर

मुख्यमंत्री का निर्देश, अवैध घुसपैठ पर होगी सख्त कार्रवाई   मुख्यमंत्री का जिलाधिकारियों को निर्देश, घुसपैठियों को चिन्हित करें, बनाए जाएं अस्थायी डिटेंशन सेंटर   डिटेंशन सेंटर में रखे घुसपैठियों को भेजा जाएगा वापस- मुख्यमंत्री योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को अवैध घुसपैठ पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समरसता सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक जिला प्रशासन अपने क्षेत्र में रहने वाले अवैध घुसपैठियों की पहचान सुनिश्चित करे और नियमानुसार कार्रवाई शुरू करे।   मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि घुसपैठियों को रखने के लिए प्रत्येक जनपद में अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाए जाएं। इन केंद्रों में विदेशी नागरिकता के अवैध व्यक्तियों को रखा जाएगा और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक वहीं आवास सुनिश्चित किया जाएगा।   मुख्यमंत्री ने कहा कि डिटेंशन सेंटर में रखे गए अवैध घुसपैठियों को तय प्रक्रिया के तहत उनके मूल देश भेजा जाएगा।