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महाशक्तिमान हथियारों की तैयारी: ब्रह्मोस के बाप की 7400 KMPH रफ्तार, Su-30MKI जैसे जेटों से ताकत बढ़ेगी

बेंगलुरु  ऑपरेशन सिंदूर के बाद स्‍ट्रैटजिक पॉलिसी में काफी बदलाव आया है. देसी टेक्‍नोलॉजी की मदद से फाइटर जेट और मिसाइल बनाने की रफ्तार को और तेज कर दिया गया है. भारत अभी भी फाइटर जेट का इंजन घरेलू स्‍तर पर नहीं बना पाता है, लेकिन अब इससे जुड़े प्रोजेक्‍ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी की मदद से पांचवीं पीढ़ी का देसी फाइटर जेट डेवलप करने के डिफेंस प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत स्‍वदेशी एयर डिफेंस सिस्‍टम बनाने में जुटा है, जिसे ‘मिशन सुदर्शन’ का नाम दिया गया है. इसके साथ ही एक और अहम प्रोजेक्‍ट पर भी काम चल रहा है. भारत अल्‍ट्रा मॉडर्न हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. यह मिसाइल मैक-5 या फिर 6 की रफ्तार से टारगेट की ओर मूव करने में सक्षम होगी. इसका मतलब यह हुआ कि हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल 7400 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे भी ज्‍यादा की रफ्तार से दुश्‍मनों पर धावा बोल सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)  ET-LDHCM (Enabling Technologies for Long Duration Hypersonic Cruise Missile) हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल डेवलप करने में जुटा है. इस दिशा में डीआरडीओ को एक बड़ी सफलता मिली है. बता दें कि पाकिस्‍तान में तबाही मचाने वाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की स्‍पीड 2300 से 3700 किलोमीटर प्रति घंटे है. भारत ने 2024 में हाइपरसोनिक हथियार तकनीक के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई. DRDO ने ET-LDHCM कार्यक्रम के तहत महत्वपूर्ण प्रगति की पुष्टि की है. यह प्रोजेक्‍ट लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाली हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के लिए मूल तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, DRDO ने एक्टिव-कूल्ड स्क्रैमजेट इंजन का डिजाइन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह इंजन वह मुख्य तकनीक है, जो मिसाइल को लंबी दूरी तक हाइपरसोनिक गति (मैक 5 से अधिक) बनाए रखने में सक्षम बनाएगी. हाइपरसोनिक उड़ान के दौरान मिसाइल की बाहरी सतह और इंजन पर अत्यधिक तापमान पैदा होता है. ऐसे में एक्टिव कूलिंग सिस्टम बेहद जरूरी होता है, ताकि मिसाइल क्षतिग्रस्त न हो और अपनी गति बनाए रख सके. इसी कारण स्क्रैमजेट इंजन के एक्टिव-कूल्ड डिजाइन को पूरा होना भारत के लिए एक बड़े तकनीकी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. दुनिया के बहुत कम देशों ने ऐसी तकनीक पर प्रभुत्व हासिल किया है. फाइटर जेट बनेंगे महाशक्तिमान प्रोजेक्‍ट के तहत सिर्फ डिजाइन ही नहीं बल्कि एक सब-स्केल कम्बस्टर प्रोटोटाइप भी तैयार किया गया और उसका रीक्षण किया गया. यह परीक्षण हाई-एनथैल्पी टेस्ट फेसेलिटी में किया गया, जिसमें वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियां तैयार की गई थीं. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रायल में 60 सेकंड तक स्थिर दहन (स्टेबल कम्बशन) हासिल किया गया, जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है. DRDO के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, इस परीक्षण ने स्क्रैमजेट इंजन की पूरी क्षमता की पुष्टि की है और इससे भविष्य के पूर्ण-स्केल मॉडलों के विकास में मदद मिलेगी. ये उपलब्धियां भारत के पहले हाइपरसोनिक परीक्षण वाहन HSTDV की सफलता के बाद हासिल की गई हैं, जिसने 2020 में मैक 6 की गति प्राप्त की थी. हालांकि, ET-LDHCM प्रोजेक्‍ट उससे अलग है, क्योंकि यह सिर्फ गति पर नहीं बल्कि लंबे समय तक हाइपरसोनिक उड़ान पर केंद्रित है. यह तकनीक सामरिक हमलों से लेकर बड़े सैन्य अभियानों तक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है. भविष्य में इसे लड़ाकू विमानों जैसे Su-30 MKI और आने वाले AMCA के साथ भी जोड़ा जा सकता है. एयर डिफेंस सिस्‍टम का तोड़ चीन और रूस की हाइपरसोनिक क्षमताओं के बीच यह प्रगति भारत की सामरिक क्षमता को काफी मजबूत करेगी. लंबी दूरी तक उड़ने वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें किसी भी दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को भेदने में सक्षम होती हैं और जरूरत पड़ने पर पारंपरिक या परमाणु वारहेड भी ले जा सकती हैं. वायुसेना के लिए इसका एयर-लॉन्च वर्ज़न भारत की गहरी मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. इस परियोजना को करीब 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे यह साफ है कि रक्षा मंत्रालय भविष्य की ऐसी तकनीक पर ध्यान दे रहा है जिसके सैन्य और नागरिकदोनों तरह के उपयोग हो सकते हैं. इससे हाई-स्पीड एविएशन के क्षेत्र में भी बड़े फायदे देखने को मिल सकते हैं. भारत की यह प्रगति आने वाले वर्षों में देश की रक्षा क्षमता में एक नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है.

कॉकरोच क्यों नहीं होते नष्ट? एटम बम से भी बचने वाले इस जीव के बिना धरती पर क्या खतरे?

नई दिल्‍ली. दुनिया की अधिकांश आबादी कॉकरोच को सिर्फ गंदगी और डर से जोड़कर देखती है. रसोई में अचानक भागते हुए दिखाई देना, खाने में घुस जाना या अलमारी में छिपे मिल जाना. ऐसे में अगर कोई कह दे कि धरती से कॉकरोच का नामोनिशान मिट जाए तो जीवन और भी आसान हो जाएगा. ज्यादातर लोग इस विचार से सहमत भी दिखेंगे लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. वैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि कॉकरोच का गायब होना सिर्फ घरों की सफाई का सवाल नहीं बल्कि पूरी धरती के इको-सिस्‍टम के लिए एक गंभीर चेतावनी होगी. जंगलों की उपज, मिट्टी की गुणवत्ता, खाद्य सीरीज का संतुलन, छोटे जीव-जंतुओं का अस्तित्व. सभी पर गहरी चोट पहुंचेगी. PNAS यानी प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन बताता है कि कॉकरोच के अदर मौजूद ब्लाटाबैक्टीरियम नामक बैक्टीरिया नाइट्रोजन को री-साइकिल कर आवश्यक पोषक तत्वों में बदलता है. यही वजह है कि कॉकरोच बेहद कठिन वातावरण में भी जीवित रहते हैं और उन्हीं जगहों पर इको-सिस्‍टम में संतुलन बनाए रखते हैं, जहां अन्य कीट जीवित नहीं रह सकते. अगर यह प्रजाति खत्म हो जाए तो अनेक प्राकृतिक प्रक्रियाएं रुक जाएंगी, जिनका असर इंसानी जीवन तक पहुंचेगा. एटम बम गिरा तो कुछ नहीं बचा, सिवाय एक जीव के जंगलों की क्लीनिंग मशीन कॉकरोच का एक बड़ा हिस्सा घरों में नहीं बल्कि घने जंगलों में बसता है. वे गिरे हुए पेड़ों, पत्तों, सड़े हुए पौधों और लकड़ी को चबाकर छोटे-छोटे कणों में बदलते हैं. यही प्रक्रिया जंगल की मिट्टी में नाइट्रोजन और अन्य पोषक तत्व वापस भेजती है. अगर कॉकरोच गायब हो जाएं तो जंगल की जमीन पर जैविक कचरे की परतें जमा हो जाएंगी. डिसोल्यूशन यानी विघटन की गति धीमी पड़ जाएगी और मिट्टी की उर्वरता घटने लगेगी. धीरे-धीरे पेड़ों की वृद्धि कमजोर होगी और पूरी वन-व्यवस्था थकान महसूस करने लगेगी. असंख्य जीवों के आहार का आधार एक छोटा सा कीट गायब हो जाए, तो लगता है फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र इन्हीं छोटे-छोटे हिस्सों से टिके होते हैं. छिपकलियां, मेंढक, पक्षी, छोटे स्तनधारी और कई कीट कॉकरोच पर निर्भर रहते हैं. वे एक भरोसेमंद और एक निरंतर उपलब्ध भोजन है. यदि वे अचानक गायब हो जाएं तो— • शिकारियों को वैकल्पिक भोजन ढूंढना पड़ेगा, • प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, • कई छोटे जीव भूख से मरने लगेंगे, • और खाद्य सीरीज में ‘डोमिनो इफेक्ट’ शुरू हो जाएगा. नाइट्रोजन फैक्ट्री यदि यह प्रजाति खत्म हो जाए, तो कई पारिस्थितिक निच खाली रह जाएंगे और विविधता में भारी गिरावट आएगी. कॉकरोच के शरीर में मौजूद Blattabacterium बैक्टीरिया अपशिष्टों को अमीनो एसिड और विटामिन में बदल देता है. यह प्रकृति का अनोखा सहयोगी तंत्र है. यही वजह है कि वे— • कड़े, न्‍यूट्रीशन की कमी में भी जीवित रहते हैं, • उन जगहों को संतुलन में रखते हैं जहां दूसरे कीट नहीं पहुंच पाते. कृषि पर बड़ा असर कॉकरोच खेतों के आसपास भी सड़ी-गली चीजों को तोड़कर मिट्टी में वापस मिलाते हैं. उनके गायब होने पर— • जैविक कचरा धीमी गति से टूटेगा, • मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी बढ़ेगी, • किसानों को अधिक केमिकल फर्टिलाइजर डालने पड़ेंगे, • और इससे पानी प्रदूषण सहित पर्यावरणीय खतरे बढ़ जाएंगे. इस तरह, रसोई का ‘अनवांटेड कीड़ा’ खेतों की उपज बढ़ाने में चुपचाप मदद करता है. मिट्टी की सेहत बिगड़ेगी, जैव विविधता घटेगी मिट्टी केवल रेत या कंकड़ का मिश्रण नहीं बल्कि जीवित तंत्र है. कॉकरोच— • मृत पौधों को तोड़ते हैं, • मिट्टी में पोषक तत्व घोलते हैं, • और कई छोटे जीवों के लिए भोजन उपलब्ध कराते हैं. उनके गायब होने से कई क्षेत्रों में मिट्टी मृत होने लगेगी, पौधों की वृद्धि रुकेगी और पूरे खाद्य जाल पर असर पड़ेगा. पर्यावरण का अलार्म सिस्टम कई जंगल-निवासी कॉकरोच पर्यावरण में बदलाव का पहला संकेत देते हैं. उनकी संख्या घटे या बढ़े तो वैज्ञानिक अनुमान लगा लेते हैं कि किसी क्षेत्र में क्या गड़बड़ चल रही है. यदि कॉकरोच न रहें, तो वैज्ञानिकों के पास यह जैविक संकेतक ही नहीं बचेगा. कॉकरोच के बिना बीमार पड़ जाएगी पृथ्‍वी सच्‍चाई यह है कि कॉकरोच का गायब होना दुनिया को खत्म नहीं करेगा, लेकिन इसे कमजोर जरूर कर देगा. हम भले ही किचन में कॉकरोच को देखकर उससे नफरत करने लगते हों या फिर उसे मारने के लिए हिट का इस्‍तेमाल करते हों लेकिन सच्‍चाई में यही हमारे जीवन का आधार भी है. यानी जिसे हम एक परेशान करने वाला कीड़ा समझते हैं, वही प्राकृतिक दुनिया की कई अदृश्य मशीनों को चलाए रखता है. धरती पर कई जीव हैं जिनका महत्व हम देखते नहीं, कॉकरोच उनमें सबसे कम आंका जाने वाला नायक है. • जंगलों में विघटन धीमा होगा, • मिट्टी पोषक तत्व खो देगी, • खाद्य सीरीज टूटेंगी, • कृषि पर दबाव बढ़ेगा, • इको-सिस्‍ट का लचीलापन घटेगा. रेडिएशन का असर क्यों नहीं पड़ता? तिलचट्टे रेडिएशन के प्रति इतने सहनशील क्यों हैं, इसका जवाब उनके शरीर की जैविक संरचना में छिपा है. उनका कोशिका विभाजन बहुत धीमा होता है. रेडिएशन का सबसे घातक असर तेजी से विभाजित होने वाली कोशिकाओं पर पड़ता है, जैसे कैंसर सेल्स, आंत की कोशिकाएं, अस्थि मज्जा और बालों की जड़ें. मनुष्य में ये कोशिकाएं हर कुछ घंटे या दिन में विभाजित होती रहती हैं, इसलिए रेडिएशन उन्हें तुरंत नष्ट कर देता है. तिलचट्टे की कोशिकाएं हफ्तों या महीनों में एक बार ही विभाजित होती हैं. वे सिर्फ मोल्टिंग (खाल उतारने) के समय ही तेजी से बढ़ते हैं, जो उनके जीवन में सिर्फ 6-7 बार होता है. जब रेडिएशन आता है, तब उनकी ज्यादातर कोशिकाएं “आराम” की अवस्था में होती हैं. रेडिएशन उन्हें छू भी नहीं पाता. क्यों विकिरण उनके लिए गर्म चाय जैसा LD50 एटम बम विस्फोट की स्थिति में रेडिएशन की वो मात्रा है, जिसमें 50% जीव मर जाते हैं. मनुष्य के लिए 400 -1000 रेड रेडिएशन खतरनाक कुत्ता के लिए 350 रेड रेडिएशन खतरनाक चूहा के लिए 900 रेड में खतरा फल मक्खियों के लिए 64,000 रेड रेडिएशन खतरनाक तिलचट्टा के लिए 90,000 से 1,05,000 रेड खतरनाक हालांकि तिलचट्टे की कुछ प्रजातियां 1,50,000 तक रेडिएशन भी सह लेती हैं. यानी तिलचट्टा इंसान से 100-150 गुना ज्यादा रेडिएशन सह सकता है. हिरोशिमा के केंद्र में लगभग 10,000–20,000 रेड रेडिएशन था. ये इंसान … Read more

नए लेबर कोड्स के तहत 5 नहीं, 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी, समझें राशि कैसे तय होगी

 नई दिल्‍ली केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक बदलाव किया है. 29 श्रम कानूनों को सिमित करके अब सिर्फ 4 नए श्रम कानून (New Labour Codes) लागू किए गए हैं. यह कानून सभी तरह के वर्कर्स (संगठित, असंगठित, गिग वर्कर्स, माइग्रेंट वर्कर्स, प्‍लेटफॉर्म वर्कर्स और महिलाएं) पर लागू होंगे. 4 नए श्रम कानूनों के तहत सैलरी, ग्रेच्‍युटी, सोशल सिक्‍योरिटी, महिलाओं को अधिकार और जॉब गारंटी समेत कई प्रमुख फायदे दिए गए हैं.  सबसे बड़ा बदलाव ग्रेच्‍युटी को लेकर किया गया है. पहले ग्रेच्‍युटी 5 साल की नौकरी पर मिलती थी, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव करते हुए सिर्फ 1 साल कर दिया गया है. अब कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की नौकरी पर ही ग्रेच्‍युटी का लाभ दिया जाएगा.  किन कर्मचारियों को मिलेगी ग्रेच्‍युटी?  पहले ग्रेच्‍युटी का लाभ 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को ही दिया जाता था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है. इसके तहत फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी लाभ दिया जाएगा. अगर वे 1 साल तक ही नौकरी करके छोड़ देते हैं तो भी इसका लाभ मिलेगा.   है. Gratuity निकालने के लिए- अंतिम सैलरी  x (15/26) x कंपनी में काम किए गए साल, वाला फॉर्मूला अप्‍लाई करना होता है.  फॉर्मूला- ग्रेच्‍युटी = अंतिम सैलरी  x (15/26) x काम किए गए वर्ष 5 साल की नौकरी पर कितनी मिलती है ग्रेच्‍युटी?  मान लीजिए किसी व्‍यक्ति ने एक ही कंपनी में लगातार 5 सालों तक काम किया और उसकी अंतिम सैलरी (Basic Pay+DA) 60 हजार रुपये था. इस  हिसाब से कैलकुलेट करें तो उसकी ग्रेच्‍युटी 1,73,077 रुपये बनेगी.  60,000 x (15/26) x 5  = 1,73,077 रुपये 1 साल की सर्विस पर कितनी बनेगी ग्रेयुटी?  अब मान लीजिए सरकार नए श्रम कानून के तहत ग्रेच्‍युटी कैलकुलेट करने के फॉर्मूले में कोई बदलाव नहीं करती है और 1 साल की नौकरी में अंतिम बेसिक सैलरी 50 हजार रुपये हो तो ग्रेच्‍युटी कुल इतना होगा.  50,000 x (15/26) x 1  = 28,847 रुपये  क्या होती है ग्रेच्युटी?  Gratuity किसी भी कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारियों को एक तरह से उनके काम के बदले दिया जाने वाला तोहफा होता है. यह अभी तक एक संस्‍थान में ही 5 सालों तक लगातार नौकरी करने वाले पर्मानेंट कर्मचारियों को दिया जाता रहा है, लेकिन अब इसमें बदलाव करने 1 साल तक सर्विस करने वाले कर्मचारियों को भी जोड़ दिया गया है. साथ ही ग्रेच्‍युटी का लाभ फिक्‍स्‍ड टर्म कर्मचारियों और कॉन्‍ट्रैक्‍ट वाले कर्मचारियों को भी दिया जाएगा. 

जिहादी प्लान का पर्दाफाश: डॉ. शाहीन ने बनाई ‘स्लीपर सेल’, शामिल थीं लड़कियां

कानपुर  दिल्ली लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार, दिल्ली विस्फोट के बाद पकड़ी गई जैश-ए-मोहम्मद की लेडी विंग कमांडर डॉ. शाहीन ने कानपुर और आसपास के जिलों में टीनएजर लड़कियों को बहला-फुसलाकर अपना नेटवर्क तैयार किया था. इनमें ज्यादातर लड़कियां गरीब परिवारों से थीं, जिन्हें बेहतर जिंदगी और धार्मिक शिक्षा का झांसा देकर अपने ग्रुप में शामिल किया गया था. इतना ही नहीं, इस मामले की जांच कर रही जांच एजेंसी एनआईए के इनपुट पर यूपी एटीएस ने भी शुक्रवार को 10 से ज्यादा डॉक्टरों से पूछताछ की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सब मुख्य आरोपी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. शाहीन और डॉ. आदिल के संपर्क में रहे थे. हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की गई है. अधिकारियों के अनुसार, जिन जिलों में डॉक्टरों से पूछताछ हुई, उनमें बहराइच, अलीगढ़, नोएडा, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल और मुजफ्फरनगर शामिल हैं. एटीएस ने एनआईए को सौंप अहम सुबूत मुरादाबाद में तीन डॉक्टरों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उन्हें एटीएस मुख्यालय (लखनऊ) बुलाया गया है. ये तीनों दिल्ली धमाके के बाद अपने मोबाइल बंद कर चुके थे, और पिछले महीने फरीदाबाद में उनकी लोकेशन मिली थी, जिसके बाद शक और गहरा गया. वहीं, एटीएस ने डॉ. शाहीन और डॉ. परवेज के घर से मिले कई अहम सुबूत एनआईए को सौंप दिए हैं. एनआईए ने अभी इस मामले में औपचारिक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, लेकिन केस प्रॉपर्टी उनकी तहकीकात के लिए ट्रांसफर कर दी गई है. शाहीन ने कानपुर में तैयार किया था महिला स्लीपर सेल नेटवर्क रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच-पड़ताल में यह भी पता चला है कि डॉ. शाहीन ने कानपुर में अपनी महिला विंग का मजबूत नेटवर्क तैयार किया था. इसमें 19 से अधिक महिलाएं शामिल थीं और सभी के मोबाइल पिछले दिनों एक साथ बंद मिले. ये नंबर कानपुर और आसपास के जिलों फतेहपुर, उन्नाव, कन्नौज आदि में बंद हुए थे. एजेंसियों का दावा है कि शाहीन ने इन महिलाओं को कट्टरपंथी विचारधारा और ब्रेनवॉश के जरिए अपने संगठन जमात-उल-मोमिनात में शामिल किया था. उसका लक्ष्य भारत में ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की ‘आतंकी भर्ती’ करना था. शाहीन की गिरफ्तारी के तुरंत बाद बंद हो गए थे नंबर सूत्रों के मुताबिक, शाहीन की गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही उसकी महिला विंग के लगभग सभी नंबर अचानक बंद हो गए. एजेंसियों को शक है कि सभी नेनए मोबाइल या नए सिम ले लिए हैं. खुफिया एजेंसियों ने अब टेलिकॉम कंपनियों से 10 नवंबर के बाद बेचे गए नए सिम की पूरी डिटेल मांगी है ताकि संदिग्ध नंबरों को ट्रैक किया जा सके. दिल्ली धमाके में कानपुर के सिम का इस्तेमाल जांच में यह बात भी सामने आई है कि दिल्ली में हुआ विस्फोट कानपुर से खरीदे गए सिम कार्ड से ऑपरेट किया गया था. आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर ने धमाके से ठीक पहले कई नंबरों पर कॉल की थी और फिर फोन बंद कर दिया था. बीटीएस (मोबाइल टावर) डेटा में जिन नंबरों की लोकेशन मिली, उनमें कई कानपुर के हैं. इनकी खरीदारी बेकनगंज क्षेत्र से हुई बताई जा रही है, जिसकी जांच जारी है.

ईपीएफओ में सुधार की तैयारी, सैलरी कैप बढ़ने से लाभार्थियों की संख्या बढ़ेगी

नई दिल्‍ली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन अनिवार्य PF और पेंशन कंट्रीब्‍यूशन के लिए सैलरी लिमिट बढ़ाकर अपने पात्रता मानदंडों में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है.  सरल शब्‍दों में कहें तो EPFO वेतन की मौजूदा सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा 15000 रुपये से बढ़ाकर 25000 रुपये करने का प्रस्‍ताव है. पहले यह 6,500 रुपये थी.इस कदम के पीछे का मकसद 1 करोड़ से ज्‍यादा कर्मचारियों को पेंशन और पीएफ की सामाजिक सुरक्षा में लाने का है.  यह तय करती है कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत कौन स्वतः नामांकित है. मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम नागराजू ने कहा कि यह बहुत बुरी बात है कि 15,000 रुपये से थोड़ा ज़्यादा कमाने वाले इतने सारे लोगों के पास पेंशन कवर नहीं है और बुढ़ापे में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता है. उन्‍होंने पुरानी पेंशन सीमाओं को अपडेट करने पर जोर दिया.  अभी क्‍या है नियम?  मौजूदा नियमों के तहत, केवल 15,000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को ही ईपीएफ और ईपीएस के दायरे में लाया जाना चाहिए. इससे थोड़ा भी ज्‍यादा कमाने वाले लोग इससे बाहर निकल सकते हैं और नियोक्ताओं को उन्हें रजिस्‍टर्ड करने की कोई बाध्यता नहीं है. इससे शहरी निजी क्षेत्र के कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा मामूली वेतन पाने के बावजूद, औपचारिक सेवानिवृत्ति बचत के बिना रह जाता है. 25000 रुपये हो सकती है ये लिमिट रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ईपीएफओ इस सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकता है और अगले साल की शुरुआत में केंद्रीय न्यासी बोर्ड द्वारा इस मामले पर विचार किए जाने की उम्मीद है. श्रम मंत्रालय के एक डाटा से पता चलता है कि सीमा में ₹10,000 की वृद्धि से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ और ईपीएस कवरेज के अंतर्गत आ सकते हैं. ट्रेड यूनियनें लंबे समय से इस तरह के संशोधन की मांग कर रही हैं, उनका तर्क है कि बढ़ती जीवन-यापन लागत और वेतन स्तरों के बीच मौजूदा सीमा पुरानी हो चुकी है. ईपीएफओ फंड बढ़ेगा कर्मचारियों के लिए, इस बदलाव से मासिक अंशदान बढ़ेगा, ईपीएफ कोष बढ़ेगा और पेंशन भुगतान में सुधार होगा. वर्तमान में, कर्मचारी मूल वेतन का 12% योगदान करते हैं, जो नियोक्ता द्वारा बराबर किया जाता है, जो अपना हिस्सा ईपीएफ और ईपीएस के बीच विभाजित करते हैं. हाई सैलरी बेस से दोनों पक्षों का योगदान बढ़ेगा. नियोक्ताओं के लिए प्रति कर्मचारी लागत बढ़ेगी.

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा- भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग

भोपाल  भारतीय परम्परा में खेल, सामाजिक प्रबंधन और जीवन पद्धति का अभिन्न अंग था। हमारे पूर्वजों ने खेलों को हजारों वर्षों पूर्व स्थापित किया था और अतीत के उन कालखंडों में हम खेलों के क्षेत्र में अग्रणी थे। खेल के परिप्रेक्ष्य में भारतीय दृष्टि व्यापक थी। भारतीय दृष्टि में खेल, केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शारीरिक और बौद्धिक विकास के माध्यम होते थे। मनुष्य के समग्र विकास की दृष्टि से भारत में खेल खेले जाते थे। यह बात उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार ने शनिवार को भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के ज्ञान-विज्ञान भवन में क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति द्वारा आयोजित "खेल सृष्टि-भारतीय दृष्टि" विषय पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ कर कही। मंत्री श्री परमार ने संगोष्ठी में "भारतीय दर्शन में खेलों के पुरातन इतिहास एवं वर्तमान परिप्रेक्ष्य में खेलों में भारतीय दृष्टि के महत्व" के आलोक में अपने विचार व्यक्त किए। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि विश्व एक परिवार है। "वसुधैव कुटुंबकम्" का दृष्टिकोण विश्व को भारत की देन है। कोविड के संकटकाल में भारत ने आत्मानुशासन का पालन करते हुए, विश्व के विभिन्न देशों को निशुल्क वैक्सीन उपलब्ध करवाकर इसी दृष्टिकोण का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि खेल के मैदानों से सेवा का संकल्प पूरा होगा। खेल से शरीर और मन स्वस्थ होता है और स्वस्थ मन से खिलाड़ी समाज में सेवा का संकल्प पूरा करेंगे और प्रेरणा का केंद्र बनेंगे। मंत्री श्री परमार ने संवेदना के साथ खेलों को आगे बढ़ाने और वैचारिक प्रवाह को सतत् जारी रखने का आह्वान भी किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में, परंपरागत खेलों का समावेश किया है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हर खेल की अपनी अलग दृष्टि होती है। उन्होंने तीरंदाजी का उदाहरण देकर कहा कि इस खेल में एकाग्रता की आवश्यकता होती है। यह तीरंदाजी के खेल की अपनी विशिष्ट दृष्टि है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि समय के सापेक्ष हमने विभिन्न विदेशी खेलों को भी हमने अपनाया है, जो भारतीयता के साथ आत्मसात करने की सीख देता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि क्रीड़ा भारती "क्रीड़ा से निर्माण चरित्र का, चरित्र से निर्माण राष्ट्र का" के विचार को चरितार्थ कर रही है। मंत्री श्री परमार ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए समिति को बधाई भी दी। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में क्रीड़ा भारती श्री अशोक अग्रवाल ने कहा कि खेल से राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव सुदृढ़ होता है। खेलों में भारतीय दृष्टि केंद्रित शुचिता एवं चरित्र निर्माण की आवश्यकता हैं। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी, पारम्परिक एवं ग्रामीण खेलों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करना, खिलाड़ियों में खेल भावना, नैतिक आचरण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के साथ खेल संस्कृति का विकास करना एवं खेलों के माध्यम से खिलाड़ी रूपी नागरिकों में भारतीय दृष्टि केंद्रित राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना था। क्रीड़ा भारती प्रदेश समिति के अध्यक्ष श्री दीपक सचेती, राष्ट्रीय नियामक मंडल सदस्य श्री भीष्म सिंह राजपूत, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार जैन, कुलसचिव डॉ अनिल शर्मा एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आलोक मिश्रा सहित क्रीड़ा भारती के विभिन्न पदाधिकारीगण, खेल विधा से जुड़े विविध विषयविद, प्राध्यापकगण, क्रीड़ा अधिकारी एवं अन्य विद्वतजन उपस्थित थे।  

भावी वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण स्थापित करने का कार्य करें प्राध्यापक

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में आयुर्वेद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। आने वाले समय में, प्रदेश में आयुर्वेद चिकित्सा अग्रणी स्थान पर होगी और इसमें हमारे प्राध्यापकों एवं चिकित्सकों के समर्पण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। मंत्री श्री परमार शनिवार को, भोपाल के मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सभागृह में, फैकल्टी डेवलपमेंट को लेकर आयोजित एकदिवसीय "फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला" का शुभारम्भ कर, संबोधित कर रहे थे। आयुष मंत्री श्री परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने, प्रदेश में विश्वस्तरीय आयुर्वेद महाविद्यालय खोले जाने का निर्णय लिया है और इसके लिए चिकित्सकों और प्राध्यापकों के पद भी सृजित होंगे। मंत्री श्री परमार ने समस्त आयुर्वेद प्राध्यापकों से आह्वान करते हुए कहा कि भारतीय दर्शन "वसुधैव कुटुंबकम्" के मंत्र को आयुर्वेद की पैथी के माध्यम से विश्वमंच तक पहुंचाएं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि भावी आयुर्वेद चिकित्सकों एवं वैद्यों में मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने का कार्य करें। विश्व आयुर्वेद परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. महेश कुमार व्यास ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सही चिकित्सा तभी संभव है जब चिकित्सकों और प्राध्यापकों को सही निर्देशन मिले। प्रमुख वक्ता के रूप में महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस के बोर्ड ऑफ रिसर्च के सदस्य डॉ. किरण टवलारे ने योग्यता एवं उत्कृष्टता के परिप्रेक्ष्य में, मुख्य मानचित्रण प्रस्तुत किया। आईजीपी आयुर्वेद कॉलेज, नागपुर की प्राध्यापक डॉ. कल्पना टवलारे ने खेती और उद्देश्यों की दक्षता पर प्रकाश डाला। मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग सिंह राजपूत ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मानसरोवर समूह के आयुर्वेद संचालक डॉ. बाबुल ताम्रकार ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह एकदिवसीय कार्यशाला; श्री साईं ग्रामोत्थान समिति, मानसरोवर समूह के मानसरोवर आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन और विश्व आयुर्वेद परिषद् के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है। कार्यशाला में विश्व आयुर्वेद परिषद् के संरक्षक वैद्य गोपाल दास मेहता, मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. ए एस यादव, श्री साईं इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च एंड मेडिसिन की प्राचार्य डॉ. मनीषा राठी, फैकल्टी ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य डॉ. श्रीकांत पटेल, मानसरोवर समूह के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर सचिन जैन सहित देश भर से पधारे 300 से अधिक प्राध्यापक उपस्थित थे।  

रामनगरी अयोध्या बनेगी आर्थिक शक्ति, सालाना 4 लाख करोड़ का योगदान तय

लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है। अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5 प्रतिशत योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी। श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुकाे हैं।यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्ड तोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, और लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25 प्रतिशत होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब 1.25 लाख करोड़ रुपए का योगदान किया है। अयोध्या सिर्फ धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।

36,600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव हुए प्राप्त, 27,800 रोजगार होंगे सृजित

सभी निवेशकों का स्वागत है मध्यप्रदेश में निवेशकों को सभी क्षेत्रों में दिया जा रहा है आगे बढ़ने का अवसर तेलंगाना और मध्यप्रदेश की जोड़ी है हीरा-मोती की तरह निवेशकों की सहूलियत के लिये बनाई 18 निवेश नीतियाँ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हैदराबाद में ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश’ सत्र को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में अनेक क्षेत्रों में निवेश की विद्यमान संभावनाओं को साकार करने के लिए सभी मिलकर कार्य करेंगे। मध्यप्रदेश की प्रोत्साहनकारी निवेश नीतियों से निरंतर निवेश आ रहा है। आज सभी के संयुक्त प्रयासों से अपने प्रदेश के साथ संपूर्ण देश की प्रगति का विचार रखते हुए क्रियान्वयन की राह पर आगे बढ़ना है। मध्यप्रदेश सरकार की 18 नवीन निवेश नीतियाँ निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। निवेशकों के लिये आवश्यक हुआ तो इन नीतियों की परिधि के बाहर जाकर भी उद्योगपतियों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार पलक-पांवड़े बिछाकर सभी निवेशकों का स्वागत कर रही है। हम हैदराबाद के निवेशकों के साथ एक नई डोर जोड़ने के लिये आये है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हैदराबाद में अनेक उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश में निवेश की इच्छा जताई है। इसमें 36 हजार 600 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए जिससे लगभग 27 हजार 800 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को हैदराबाद में आयोजित ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश’ सत्र में उद्योगपतियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अन्य राज्यों में उन्होंने बिना राजनैतिक एजेंडा के सिर्फ एक उद्देश्य, औद्योगिक निवेश को लेकर यात्राएं की हैं। ऐसे इंटरैक्टिव सेशन मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास की बहुआयामी संभावनाओं को बताने और निवेश के लिए आमंत्रित करने का माध्यम बने हैं। यह क्रम चलता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विचारों का उद्योगपतियों और निवेशकों ने समर्थन करते हुए करतल ध्वनि से स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मैं बाबा महाकाल की नगरी से हूं। मध्यप्रदेश देश का एक मात्र राज्य है, जहां हीरा निकलता है। तेलंगाना राज्य में मोती निकलते हैं। इस प्रकार से हमारी जोड़ी हीरा-मोती की तरह है। हैदराबाद के लोग मोती की पहचान कर लेते हैं, उनके लिए आदमी पहचानना तो बहुत आसान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हैदराबाद एक ऐसा शहर है, जो भविष्य को भांप कर आगे बढ़ता है। इसका अर्थ यह है कि हैदराबाद आने वाले समय का अनुमान लगाने में सक्षम है। यहां निवेशकों के साथ एक नई डोर जोड़ने के लिए आए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है। देश ने कई मिथकों को तोड़कर अंतरिक्ष सहित सभी क्षेत्रों में विकास की तेज गति हासिल की है। भारत अब रेल कोच भी निर्यात करने की स्थिति में है। मध्यप्रदेश में बीईएमएल को 18 हजार करोड़ लागत की रेल कोच निर्माण की यूनिट लगाने के लिए भूमि आवंटित की गई है। प्रदेश में डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश हो रहा है। राज्य में सभी क्षेत्रों के निवेशकों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हाईड्रा पॉवर पंप स्टोरेज का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट नीमच में चंबल नदी पर बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण आगामी 2 वर्ष में पूर्ण हो जाएगा। यह एक बड़ा प्रकल्प है। मध्यप्रदेश सरकार निवेशकों से किए हर संकल्प को पूरा कर रही है। राज्यों के बीच साहचर्य का भाव है, देश बदल रहा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्यों के बीच साहचर्य की भावना विकसित हो रही है। मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और हमारे पास पर्याप्त जल उपलब्ध है। मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान के साथ चल रहे सालों पुराने जल विवाद को खत्म कर पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना को आगे बढ़ाया है। इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए केन्द्र सरकार 90 प्रतिशत राशि प्रदान कर रही है। आज का समय स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने और प्रदेश को आगे बढ़ाने का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में अब देश बदल रहा है। राज्य सरकार उद्योगपतियों और निवेशकों को मध्यप्रदेश में भी अपना कार्य शुरू करने का अवसर दे रही है। उद्योग-व्यापार बढ़ने से गरीबों और जरूरतमंदों को रोजगार मिलता है। वन-टू-वन बैठकों में प्राप्त निवेश प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हैदराबाद में आयोजित ‘इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन मध्यप्रदेश’ सत्र में उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा की। चर्चा के दौरान 10 कम्पनियों द्वारा 36 हजार 600 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए गए। इससे लगभग 27 हजार 800 रोजगार सृजित होंगे। प्रमुख निवेश प्रस्ताव में एजीआई ग्रीनपैक कम्पनी द्वारा पैकेजिंग इंजीनियरिंग सेक्टर में 1500 करोड़ रुपये, एक्सिस एनर्जी वेंचर्स इंडिया कम्पनी द्वारा नवीकरणीय ऊर्जा सेक्टर में 29 हजार 500 करोड़ रुपये, अनंत टेक्नालॉजीज कम्पनी द्वारा एयरो स्पेस सेक्टर में एक हजार करोड़, ऑटोमेटस्की सॉल्यूशंस कम्पनी द्वारा आईटी सेक्टर में एक हजार करोड़, कोलाबेरी इंक कम्पनी द्वारा फार्मा एण्ड ट्रेडिंग सेक्टर में एक हजार करोड़ रुपये, डर्माक्योर फार्मास्युटिकल्स कम्पनी द्वारा नवकरणीय ऊर्जा एवं आईटी सेक्टर में 150 करोड़ रुपये, विंडपोनिक्स इण्डिया कम्पनी द्वारा नवकरणीय ऊर्जा एवं कृषि सेक्टर में 280 करोड़ रुपये, विंटेज कॉफी एण्ड बेवरेजेस लिमिटेड कम्पनी द्वारा फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 1100 करोड़ रुपये, विश्वनाथ प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कम्पनी द्वारा अधोसंरचना सेक्टर में 350 करोड़ रुपये और वुमेनोवा एग्रो फूड पार्क प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी द्वारा फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में 720 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव दिया गया। ग्रीनको ग्रुप के ग्रुप प्रेसिडेंट एवं फाउंडर श्री महेश कोली का अनुभव ग्रीनको ग्रुप प्रेसिडेंट श्री महेश कोली ने बताया कि ग्रीनको ने पिछले 10 वर्षों में मध्यप्रदेश में 12 हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश से 3 हजार मेगावॉट क्षमता वाले नवकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित किए हैं। आने वाले पाँच वर्षों में 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश की योजना भी तैयार है, जो मध्यप्रदेश के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नीमच में 1,900 मेगावॉट का हाइड्रो स्टोरेज प्रोजेक्ट किसी भी अन्य देश में 8 से 10 वर्ष में पूरा होता, जबकि मध्यप्रदेश में यह 3 वर्षों से भी कम समय में पूरा हुआ है। … Read more

MP में भाजपा का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, कई प्रभारियों को मिली नई जिम्मेदारियां

भोपाल भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई में प्रभारी की नियुक्ति की गई है। यह नियुक्तियां मोर्चा, प्रकोष्ठ और कार्यालय व्यवस्था प्रभारी की हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के हस्ताक्षरों से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की सहमति से प्रदेश मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा, प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी आशुतोष तिवारी और कार्यालय व्यवस्था प्रभारी जितेंद्र लिटोरिया को बनाया गया है। प्रदेश में भाजपा अपने संगठन को निरंतर व्यवस्थित और मजबूत करने के मकसद से नियुक्तियां कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष खण्डेलवाल को विष्णु दत्त शर्मा के स्थान पर जिम्मेदारी सौंपी गई। लंबी जद्दोजहद के बाद खंडेलवाल ने प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया। विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों की भी नियुक्ति हो चुकी है; कुछ नियुक्तियां वर्तमान विशेष हैं। राज्य में एक तरफ जहां संगठन को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर, सरकार में राजनीतिक नियुक्तियां होनी हैं। इन नियुक्तियों को लेकर पार्टी में लंबे अरसे से मंथन का दौर जारी है। तमाम दिग्गज निगम मंडलों में अपनी अथवा समर्थकों की नियुक्तियां करना चाहते हैं। इसके लिए वे संगठन और सरकार में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि पहले निगम मंडल पदाधिकारियों की नियुक्ति होगी और उसके बाद ही राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार का रस्ता भी साफ हो सकता है। राज्य में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में अभी समय है और पार्टी की कोशिश यही है कि इन चुनावों से पहले तमाम नियुक्तियां कर ली जाएं। वहीं, दूसरी ओर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के कार्य में भी पार्टी पदाधिकारी पूरी सक्रियता से लगे हुए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर संसद और विधायक भी एसआईआर अभियान की सफलता के लिए जगह-जगह दौरा और बैठक कर पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश भी जारी कर रहे हैं। साथ ही उन्हें कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम से भी अवगत कराया जा रहा है।