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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- इन्दौर स्वच्छता और स्वाद के साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बनाएगा विशेष पहचान

फिटनेस, सामूहिक चेतना और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन इन्दौर के लिए गर्व का विषय अपने शहर के लिए बेहतर करने की इन्दौरवासियों की ऊर्जा, भावना और सामूहिक संकल्प शक्ति सराहनीय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर ने स्वच्छता और स्वाद के क्षेत्र में विश्व में विशेष पहचान बनाई है। आज की मैराथन, इंदौर को स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विशेष पहचान देगी। स्वास्थ्य की मूल आधार दौड़ है और दौड़ के लिए इतनी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित हैं। यह इन्दौरवासियों की ऊर्जा और सामूहिक संकल्प शक्ति से शहर के लिए कुछ बेहतर करने की उनकी भावना को प्रकट करती है। सकारात्मक पहल के परिणाम सदैव बेहतर होते हैं। इंदौर इस मैराथन के माध्यम से स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिकॉर्ड स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को प्रात: 7 बजे "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित इन्दौरवासियों को मुख्यमंत्री निवास भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मैराथन के सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए मैराथन का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फिटनेस, सामूहिक चेतना और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित "वन इन्दौर-रन इन्दौर" मैराथन का यह भव्य आयोजन इन्दौर शहर के लिए गर्व का विषय है। यह आयोजन यूनाइटेड इन्दौर की भावना को सशक्त करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य इन्दौरवासियों में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना, सामुदायिक एकता को मजबूत करना और फिटनेस को एक जनआंदोलन का रूप देना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अपने शहर के लिए इतने संवेदनशील विषय पर आयोजित मैराथन में भौतिक नहीं पर भावनात्मक रूप से वे स्वयं भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रसन्नता का विषय है कि इस कार्यक्रम में 10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है। मैराथन की 3, 5 और 7 किलोमीटर रन की श्रेणियों में दौड़ने के लिए उनकी उपस्थिति इन्दौर की जागरूकता और उत्साह का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इन्दौर की जनता हमेशा से सकारात्मक पहल में अग्रणी रही है। यह कार्यक्रम शहर की ऊर्जा, उमंग और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को नई दिशा प्रदान करेगा। स्वच्छता में देश का निरंतर नेतृत्व करने वाला हमारा इन्दौर, अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी देश में नम्बर 1 बने, यह हम सभी का सामूहिक संकल्प है। "वन इन्दौर-रन इन्दौर" उसी दिशा में एक सशक्त पहल है। यह कार्यक्रम इन्दौरवासियों में फिटनेस के प्रति उत्साह को और अधिक बढ़ाएगा, साथ ही स्वस्थ समाज निर्माण का संदेश पूरे प्रदेश में प्रसारित करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास के साथ प्रदेशवासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी राज्य सरकार द्वारा निरंतर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। युवाओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य के आधार, खेल को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि अब प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से प्रदेश के खिलाड़ी पदक लेकर ही लौट रहे हैं। इसका हाल का उदाहरण सुश्री क्रांति गौड हैं, जिन्होंने महिला वर्ल्ड कप में विश्व में अपनी प्रतिभा स्थापित की। राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन स्वरूप उन्हें एक करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई। इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, विधायक श्री रमेश मैंदोला, श्री मधु वर्मा सहित बड़ी संख्या में युवा वर्ग उपस्थित रहा।  

सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान से राज्य में बदला सामाजिक परिदृश्य, मिशन शक्ति से गांव तक पहुंचा स्वावलंबन का संदेश

लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार के शासनकाल में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर किए गए व्यापक प्रयास अब ठोस परिणामों के रूप में सामने आ रहे हैं। प्रदेश में महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्तीय स्वतंत्रता और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से सुधार हुआ है। इसी परिवर्तन को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश आज महिला सशक्तिकरण के जरिए सामाजिक और आर्थिक बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहा है। प्रदेश सरकार ने सबसे पहले महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। एंटी रोमियो स्क्वाड की सक्रियता, 1090 वुमेन पावर लाइन का विस्तार और पिंक पेट्रोलिंग जैसे कदमों ने महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार किया है। शहरों और गांवों दोनों में बदलते सामाजिक वातावरण का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। परिवारों में लड़कियों की शिक्षा को लेकर सकारात्मकता बढ़ी है और माता-पिता अब बिना किसी संकोच के बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में मिशन शक्ति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके माध्यम से महिला समूहों को नेतृत्व, आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और जागरूकता से जोड़ा गया। बालिकाओं के लिए कायाकल्प, स्कूलों में जेंडर सेफ्टी प्रोग्राम और किशोरी स्वास्थ्य अभियान जैसे प्रयासों ने सामाजिक बदलाव की सुदृढ़ नींव रखी। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को जन्म से लेकर स्नातक तक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई, जिससे पढ़ाई में निरंतरता बनी। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बात करें तो यूपी आज देश में सबसे बड़े महिला स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में लाखों महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों के जरिए उद्यमिता की ओर बढ़ रही हैं। बैंक सखी, बीसी सखी और कृषि सखी जैसे मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता को गति दे रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ग्रामीण बैंकिंग को नए स्तर पर पहुंचा रही है। ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना) ने महिलाओं को स्थानीय उत्पादों पर आधारित रोजगार से जोड़ने का मजबूत अवसर दिया है। हथकरघा, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग और स्थानीय उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। शासन की ओर से आसान ऋण, प्रशिक्षण, मार्केट लिंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहयोग मिलने से महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।  स्टार्टअप नीति के अंतर्गत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। महिला आधारित स्टार्टअप को अनुदान और मार्गदर्शन मिलने से टेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के जरिए पोषण उपक्रम, यूनिफॉर्म निर्माण, समुदाय आधारित स्वच्छता सेवाएं और स्थानीय उत्पादन यूनिट्स चलाने वाली महिलाओं ने साबित किया है कि आर्थिक सशक्तिकरण ग्रामीण विकास को भी गति देता है। सरकारी योजनाओं के प्रभाव से आज गांवों से लेकर शहरों तक महिलाओं की भूमिका केवल पारिवारिक सीमाओं तक ही केंद्रित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में उनकी जिम्मेदारी, भूमिका और सक्रियता निरंतर बढ़ रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार के प्रयासों ने महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और अवसर प्रदान कर समाज में उनकी स्थिति को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। उत्तर प्रदेश का यह परिवर्तन प्रदेश सरकार नीतियों और प्रयासों का परिणाम है। जिसने महिलाओं को नई ऊर्जा और नई दिशा दी है। प्रदेश अब वास्तविक अर्थों में महिला सशक्तिकरण को सामाजिक और आर्थिक विकास की धुरी बनाने की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से संबंधित आंकड़े… – उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों की संख्या 2025 तक लगभग 95 लाख सदस्यों तक पहुंच गई है । – सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों की तैनाती की गई है। वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण को गति देने वाले इस प्रयास के अंतर्गत बीसी सखियों ने लगभग 32 हजार करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय लेनदेन किया है।  – ओडीओपी योजना में महिलाओं की भागीदारी 2018 की तुलना में 2024 तक लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेष रूप से यह वृद्धि हस्तशिल्प, हथकरघा, फूड प्रोसेसिंग और वुडक्राफ्ट क्षेत्रों में दर्ज हुई है। – महिला उद्यमिता मिशन और स्टार्टअप नीति के अंतर्गत 2025 तक लगभग 3200 से अधिक महिला संचालित स्टार्टअप रजिस्टर्ड हुए हैं। – विगत साढ़े 08 वर्षों में श्रम शक्ति में महिलाओं की भागीदारी 14 प्रतिशत से बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है।

चंडीगढ़ प्रशासन पर प्रस्तावित विधेयक टला, सरकार ने सत्र से किया बाहर

नई दिल्ली  केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने के बारे में आ रही रिपोर्टों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बयान जारी किया है। इसमें कहा गया कि अभी चंडीगढ़ के लिए केंद्र की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है। इस संबंध में संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इन रिपोर्टों के कारण सियासी हलकों में गरगर्मी बढ़ी हुई थी। इसे देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने के बारे में कोई बातचीत नहीं चल रही है।   पोस्ट में कहा गया, 'चंडीगढ़ के लिए सिर्फ केंद्र सरकार की ओर से कानून बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस प्रस्ताव में किसी भी तरह से चंडीगढ़ की शासन-प्रशासन की व्यवस्था या चंडीगढ़ के साथ पंजाब या हरियाणा के परंपरागत संबंधों को बदलने की कोई बात नहीं है। चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों से पर्याप्त विचार विमर्श के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा। इस विषय पर चिंता की आवश्यकता नहीं है। आने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में इस आशय का कोई विधेयक प्रस्तुत करने की केंद्र सरकार की कोई मंशा नहीं है।' पंजाब के सीएम मान की तीखी प्रतिक्रिया इससे पहले, मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की वैधानिक स्थिति बदलने की दिशा में काम कर रही है। इससे चंडीगढ़ के प्रशासक के रूप में पंजाब के राज्यपाल के अधिकार कम हो जाएंगे। यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ में दिल्ली की तरह उपराज्यपाल का पद सृजित कर सकती है। इस पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह एक बड़ा अन्याय है। भाजपा सरकार पंजाब की राजधानी छीनने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा, ‘चंडीगढ़ पहले भी पंजाब का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। कोई भी व्यक्ति या संस्था इससे इनकार नहीं कर सकता कि मातृ राज्य होने के नाते पंजाब का अपनी राजधानी चंडीगढ़ पर पूरा अधिकार है।’  

भारतीय रक्षा शक्ति में बड़ा इजाफा: 1000 किलो बम का सफल निर्माण, दुश्मन देशों में हड़कंप

नई दिल्ली सैन्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत ने 1000 किलो का बम बनाया है। भारत ने न सिर्फ ये बम बनाया है बल्कि इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। इस स्वदेशी बम को ‘गौरव’ नाम दिया गया है, जो लक्ष्य को दूर से ही सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम है। DRDO ने Su-30MKI फाइटर जेट से ‘गौरव’ लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम का सफल परीक्षण किया है। 1000 किलो वजनी यह देसी बम दुश्मन की वायु सुरक्षा सीमा के बाहर से सटीक हमला करेगा। DRDO ने इस हथियार को दो स्वरूपों में तैयार किया है। पहला वर्जन Gaurav-PCB है, जिसे मजबूत संरचनाओं और जमीनी बंकरों को भेदने के लिए तैयार किया गया है। यह पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन की स्थिति में उपयोगी साबित हो सकता है। दूसरा संस्करण Gaurav-PF है, जिसका उपयोग खुले ठिकानों, सैन्य तैनाती या रणनीतिक लक्ष्य पर एक साथ कई हिस्सों में नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाएगा। ‘गौरव’ वह हथियार है, जो विमान को जोखिम में डाले बिना दुश्मन पर प्रहार कर सकता है। यह हवा से छोड़े जाने के बाद काफी दूरी तक ग्लाइड करता है और ठीक उसी स्थान पर जाकर वार करता है, जहां लक्ष्य मौजूद हो। ज्यादा दूरी से हमला करने की वजह से यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देता है। इसका भारी वजन और उच्च विनाश क्षमता इसे बंकर, किलेबंद ठिकानों और पहाड़ी ठिकानों पर बेहद कारगर बनाती है। Su-30MKI के साथ ‘गौरव’ का जुड़ना भारतीय वायुसेना का Su-30MKI पहले से ही कई एडवांस हथियारों से लैस है। इसके साथ Rudram मिसाइल, SAAW हथियार प्रणाली और BrahMos-A पहले से जुड़े हैं और अब ‘गौरव’ के जुड़ जाने से यह विमान लंबी दूरी से जमीन पर हमला करने में और भी सक्षम हो गया है। यह संयोजन वायु सेना को आधुनिक युद्ध के लिए ऐसी क्षमता देता है, जिसे दुनिया की बड़ी सेनाएं भी महत्व देती हैं। भारत क्यों तेजी से बना रहा है अपने इंजन और डिफेंस सिस्टम फाइटर जेट इंजन के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता लंबे समय से भारत की बड़ी चुनौती रही है। यही कारण है कि तेजस Mk2 और AMCA जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमानों के प्रोजेक्ट में देरी हुई। अब सरकार और DRDO दोनों मिलकर अपने इंजन और हथियार प्रणाली को देश में ही विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। बम, मिसाइल, रडार, एयर डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक। ऐसे सभी क्षेत्रों में तेज प्रगति हो रही है ताकि आने वाले वर्षों में भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य स्तरीय कार्यशाला और वाटर शेड महोत्सव का करेंगे शुभारंभ

बड़ी संख्या में जुटेंगे जनप्रतिनिधि व अधिकारी कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंन्वेंशन सेंटर में 24 से 26 नवम्बर तक होगा आयोजन भोपाल प्रदेश की पंचायतों को आत्मनिर्भर व समृद्ध बनाने के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तीन दिन तक मंथन किया जाएगा। राज्य स्तरीय कार्यशाला होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कंन्वेंशन सेंटर, भोपाल में होने वाली राज्य स्तरीय कार्यशाला और वाटरशेड महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, श्री जगदीश देवड़ा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके, जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह सहित जनप्रतिनिधि, विषय-विशेषज्ञ व प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। संचालक सह आयुक्त पंचायत राज श्री छोटे सिंह ने बताया कि भोपाल में 24, 25 एवं 26 नवंबर को तीन दिवसीय “आत्‍मनिर्भर पंचायत समृद्ध मध्‍यप्रदेश’’ पर केन्द्रित कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्‍य पंचायतों को आत्‍मनिर्भर के साथ समृद्ध बनाना है। कार्यशाला में त्रि-स्तरीय पंचायत से जुड़े जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाली कार्यशाला में पंचायतों के लिए “स्‍वनिधि से समृद्धि’’ अभियान की अवधारणा, शहरीकरण के साथ सामंजस्‍य, वाटरशेड परियोजना का क्रियान्‍वयन एवं शुद्ध पेयजल की उपलब्‍धता, स्‍वच्‍छ ग्राम, विभिन्न शासकीय योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनमन योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पीएम पोषण एवं पेसा ग्राम सभाओं की वर्तमान स्थिति एवं सफल क्रियान्वयन सहित प्रशासनिक रूप से सक्षम पंचायत, प्रश्‍न-उत्‍तर इत्‍यादि विषयों पर विस्‍तृत रूप से चर्चा की जायेगी। 2000 से अधिक जनप्रतिनिधि व अधिकारी होंगे शामिल तीन दिन तक चलने वाली राज्य स्तरीय कार्यशाला में 2000 से अधिक लोग शामिल होंगे। इसमें जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यापालन अधिकारी, जिला पचांयत, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत के सरपंच एवं अन्य राज्य स्तरीय पदाधिकारी शामिल होंगे। राज्य स्तरीय कार्यशाला में जल गंगा संवर्धन अभियान में उत्कृष्ट कार्य वाले जिलों के साथ ही जिला एवं जनपद स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। जल गंगा संवर्धन अभियान में सर्वश्रेष्ठ कार्य करने वाले जिलों में खंडवा प्रथम, रायसेन द्वितीय एवं बालाघाट तीसरे नंबर रहा। खेत तालाब निर्माण में श्रेष्ठ कार्य वाले प्रथम जिले को दो श्रेणियों 'ए' और 'बी' में पुरस्कृत किया जाएगा। 'ए' श्रेणी में अनूपपुर जिला एवं 'बी' श्रेणी में बालाघाट जिला शामिल है। इसी तरह से जल गंगा संवर्धन अभियान में खेत तालाब निर्माण में विकासखंड स्तर पर श्रेष्ठ कार्य करने वाली जनपद पंचायतों को 'ए' और 'बी' श्रेणी में पुरस्कृत किया जाएगा। 'ए' श्रेणी में बालाघाट जिले की बिरसा जनपद एवं 'बी' श्रेणी में अनूपपुर जिले की पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत शामिल है। साथ ही जल गंगा संवर्धन अभियान के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले मनरेगा परिषद के राज्य स्तरीय अधिकारी-कर्मचारियों को भी सम्मानित किया जाएगा। इसमें राजीव गांधी जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन मिशन के अतिरिक्त संचालक श्री विवेक दवे, टेक्नीकल एक्सपर्ट सुश्री शिल्पी अधोलिया के साथ मनरेगा परिषद के सिस्टम एनालिस्ट श्री ओबेस अहमद, अधीक्षण यंत्री श्री सोमन सिंह डाबर, परियोजना अधिकारी श्रीमती आकांक्षा सिंह, सहायक प्रबंधक श्री पियूष प्रताप सिंह, नॉलेज पार्टनर टीम लीड श्री सुमेंद्र पुनिया, जीआईएस मैनेजर श्री राजेंद्र स्वामी, प्रोजेक्ट मैनेजर सुश्री नुपुन नवानी शामिल हैं। साथ ही परियोजना संचालक स्वान श्री अंशुमन राज सहित एमपीएसईडीसी के हेड डॉ. श्री राकेश दुबे, जनरल मैनेजर जीआईएस श्री अशोक पैडी, टेक्नीकल लीड श्री पुलकेश दास, एसोसिएट इंजीनियर श्री सागर तंतुवाय को भी सम्मानित किया जाएगा। कार्यशाला का उद्देश्य कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को प्रशासनिक, वित्तीय एवं सामुदायिक स्तर पर मजबूत बनाते हुए उन्हें आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में ठोस रणनीति तैयार करना है। इसके अंतर्गत स्थानीय शासन की पारदर्शिता व जवाबदेही, मनरेगा, आजीविका मिशन, सामाजिक अंकेक्षण, डिजिटल ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग, वित्तीय प्रबंधन एवं पंचायत शासन, "स्‍वनिधि से समृद्धि" अभियान, वाटरशेड परियोजनाओं का क्रियान्वयन, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ ग्राम तथा विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं का प्रभावी संचालन, पेसा ग्राम सभाओं की वर्तमान स्थिति एवं सफल क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा और प्रशिक्षण दिया जाएगा। पैनल डिस्कशन एवं तकनीकी सत्र कार्यशाला के इन सत्रों में मंत्री, अपर मुख्य सचिव, विषय-विशेषज्ञ एवं विभाग के प्रमुख अधिकारियों की सहभागिता से उच्च स्तरीय पैनल डिस्कशन होगा। प्रत्येक दिन तकनीकी सत्रों में केस स्टडी, समूह गतिविधियाँ, फील्ड आधारित उदाहरण, अनुभव-साझा सत्र द्वारा प्रतिभागियों को व्यावहारिक सीख प्रदान की जाएगी।

भारत का UPI जल्द यूरोप में लॉन्च: यात्रियों को मिलेगी कैशलेस और झंझट-फ्री पेमेंट सुविधा

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एनपीसीआई इंटरनेशनल ने यूरोपीय सेंट्रल बैंक के साथ मिलकर ऐतिहासिक पहल की है जो भविष्य में यूरोपीय देशों की यात्रा पर जाने वाले पर्यटकों या वहां कारोबार करने वालों को काफी सहूलियत देगी। इसके तहत अब भारत का यूपीआई जल्द ही यूरोप के इंस्टैंट पेमेंट सिस्टम टिप्स यानी टार्गेट इंस्टैंट पेमेंट सेटलमेंट से जुड़ जाएगा। दोनों पक्षों ने इसके “रियलाइजेशन फेज'' को शुरू करने पर सहमति दे दी है। इसके लागू होने के बाद फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, नीदरलैंड आदि देशों में घूमने गए भारतीय पर्यटक सीधे अपने फोन से यूपीआई स्कैन करके खरीदारी कर सकेंगे।   इन जगहों पर मिलेगी यूपीआई की सुविधा रेस्तरां, होटल, दुकानें, टैक्सी हर जगह भारतीय यूपीआई काम करेगा, बिना विदेशी क्रेडिट/डेबिट कार्ड या नकदी के झंझट के। साथ ही पैसा तुरंत व बहुत ही कम फीस में ट्रांसफर होगा। साथ ही यूरोप से आने वाले लोग भी भारत में आसानी से पेमेंट कर सकेंगे। माना जा रहा है कि इससे छोटे-मध्यम उद्यमियों को खास तौर पर फायदा होगा क्योंकि लेन-देन सस्ता, तेज और पारदर्शी हो जाएगा। कब से चालू होगी यह सुविधा वर्तमान में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की बातचीत अपने अंतिम चरण में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई-टिप्स लिंकेज इस समझौते को तेजी से अमलीजामा पहनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच वित्तीय एकीकरण की जमीन पहले से ही तैयार होगी। आरबीआई और एनपीसीआई तकनीकी एकीकरण, रिस्क मैनेजमेंट और सेटलमेंट व्यवस्था पर तेजी से काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही तक यह सुविधा चालू हो जाएगी। आरबीआई की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक यह कदम जी-20 दिशानिर्देशों के तहत उठाया गया है जिसके सभी सदस्य देशों ने आपस में वित्तीय लेन-देन को सुविधाजनक बनाने की सहमति दी है।  

MP में पराली संकट गहराया: सख्ती के बावजूद नहीं थम रही आग, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी

भोपाल सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और कई शहरों में प्रदूषण का खतरनाक स्तर होने के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। स्थिति यह है कि नवंबर माह में अब तक इसके लिए संवेदनशील पांच बड़े राज्यों में पराली जलाने के 21 हजार 266 मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले मध्य प्रदेश में 11 हजार 442 यानी 50 प्रतिशत से अधिक मामले हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा सैटेलाइट से लिए गए चित्रों के अनुसार, चौंकाने वाली बात यह है कि गत 16 नवंबर को एक ही दिन में 1520 मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई इसी माह नवंबर में उत्तर प्रदेश में 3780, पंजाब में 3434, राजस्थान में 2104, हरियाणा में 3218 और दिल्ली में दो मामले दर्ज किए गए। बता दें कि सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से पराली जलाने के मामलों की निगरानी और पुष्टि की जाती है, लेकिन ऐसे मामले लगातार सामने आने के बाद भी पराली जलाने वालों पर कार्रवाई में ढिलाई की जा रही है। मध्य प्रदेश का उदाहरण लें तो राजधानी भोपाल तक में एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही है। यह स्थिति तब है जब प्रदेश के चार महानगर- भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और इंदौर की हवा में आए दिन प्रदूषण गहरा जाता है।   इन महानगरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक या मध्यम श्रेणी में है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा सभी कलेक्टरों को पराली जलाने के मामले में कार्रवाई के निर्देश के बाद कुछ दिन प्रशासन ने सतर्कता दिखाई लेकिन फिर ढिलाई शुरू हो गई। पिछले पांच दिन में सिर्फ दतिया में एक किसान के विरुद्ध एफआईआर की जानकारी सामने आई है। अन्य सालों से तुलना करें तो नवंबर अंत तक पराली जलाने के मामलों की यही स्थिति रह सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे कमी आएगी। हालांकि, तब तक आंकड़ा 15 हजार से अधिक पहुंच जाएगा, जो मध्य प्रदेश में अब तक की सर्वाधिक संख्या होगी। यह अच्छी बात है कि अभी कोहरा नहीं पड़ रहा है नहीं तो पराली के धुआं से प्रदूषण का स्तर वर्तमान से डेढ़ से दो गुना तक बढ़ सकता था। मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में एक्यूआई का स्तर शहर — एक्यूआई– श्रेणी भोपाल- 289 – खराब ग्वालियर – 289 – खराब जबलपुर -207 – खराब सागर – 236 – खराब इंदौर – 133 – मध्यम देवास – 178 – मध्यम नोट : एक्यूआई का स्तर 0 से 50 को अच्छा, 51 से 100 को संतोषजनक माना जाता है। इस माह पिछले सात दिन में पांच राज्यों में पराली जलाने के मामले तिथि– मप्र– उप्र — पंजाब– राजस्थान — हरियाणा 21 —1125 — 250 — 30 — 82 — 11 20 — 625 — 98 — 12 –58– 2 19 — 658 — 115 — 16 — 90– 11 18 — 641 — 377– 15– 65 — 6 17 — 822 — 384 — 31 — 103 — 10 16 — 1520 — 461 — 95 — 125 — 47

ग्रेच्युटी नियमों में बड़ा बदलाव: एक साल की सर्विस पर भी मिलेगा लाभ, ऐसे करें हिसाब

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लेबर लॉ में बड़े बदलाव करते हुए 29 श्रम कानूनों को महज चार तक सीमित कर दिया है। श्रम कानून में लागू किए गए सुधारों में एक अहम बदलाव ग्रेच्युटी से जुड़ा भी है। इसके तहत अब ग्रेच्युटी पाने के लिए पांच साल नौकरी करना जरूरी नहीं रहेगा। अब सिर्फ सिर्फ एक साल की सेवा के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्युटी लाभ के योग्य हो जाएगा। सरकार ने बताया कि इस फैसले की वजह रिटायरमेंट बेनिफिट्स को बढ़ाना और ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने के तरीके में ज्यादा ट्रांसपेरेंसी लाना है। ये बदलाव फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए खास तौर पर जरूरी हैं, जिन्हें अब नौकरी छोड़ने पर बेहतर फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिलेगी। आइए एक नजर डालते हैं ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन कैसे किया जाता है। ग्रेच्युटी = (आखिरी वेतन × 15 × कुल सेवा के साल) / 26 यह गणना हर पूरे साल की सेवा के बदले 15 दिन की सैलरी पर आधारित होती है। आखिरी वेतन में बेसिक पे और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होता है। यदि कर्मचारी ने आखिरी साल में 6 महीने से ज्यादा काम किया है, तो उस साल को अगला पूरा साल मान लिया जाता है। 1 साल की नौकरी पर कितनी मिलेगी ग्रेच्युटी? मान लीजिए आपकी आखिरी सैलरी ₹30,000 थी, तो ग्रेच्युटी इतनी होगी। ग्रेच्युटी = (30000 × 15 × 1) / 26 ग्रेच्युटी = ₹17,307 इस तरह 30,000 रुपये सैलरी पर 1 साल की नौकरी के लिए आपको ₹17,307 रुपये ग्रेच्युटी मिलेगी। 3 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का उदाहरण यदि तीन साल की नौकरी के बाद आपकी आखिरी सैलरी 40,000 रुपये हो जाती है, तो ग्रेच्युटी इतनी हो जाएगी। ग्रेच्युटी = (40000 × 15 × 3) / 26 ग्रेच्युटी = ₹69,230 यानी 40,000 रुपये की सैलरी पर 3 साल की सेवा के लिए आपको लगभग ₹69,230 ग्रेच्युटी मिलेगी।

योगी सरकार का बड़ा निर्देश: गरीबों और बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड पर मिलेगी प्राथमिकता

मऊ उत्तर प्रदेश सरकार एंव क्रेद्र सरकार की योजनाओं लाभार्थियों तक पहुचाने का जिलाधिकारी ने सख्त निर्देश दिए है। जिला अधिकारी ने कहा कि अंत्योदयकार्ड धारक और 70 वर्ष के ऊपर बुजुर्गों का प्रमुखता से आयुष्मान कार्ड बनाए जाने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा के अनुसार जरुरत मंदों को सरकारी योजनओं का लाभ शतप्रतिसत मिले। कार्य में लापवाही पर करने वाले कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में स्वास्थ्य विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र ने कहा कि जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए हर स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिले में स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार होगा  मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि जिले में आरबीएसके कार्यक्रम के तहत डीईआईसी (डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर) स्थापित करने के लिए भूमि की तत्काल आवश्यकता है। इस सेंटर के बनने से जन्म से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों में पाई जाने वाली 4D श्रेणी (जन्मजात दोष, बीमारी, कमी और विकास विलंब/विकलांगता) से संबंधित उपचार जनपद में ही उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार होगा। आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो  जिलाधिकारी ने डीईआईसी के लिए उपयुक्त स्थान की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संस्थागत प्रसवों की समीक्षा में दोहलीघाट और फतेहपुर मंडाव के एमओआईसी को लक्ष्य सुधारने के निर्देश दिए गए। साथ ही जननी सुरक्षा योजना के अंतर्गत आशा कार्यकर्ताओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी न होने की हिदायत दी गई। उन्होंने कहा कि आशाओं को उनके बढ़ते कार्यों के अनुरूप मानदेय में वृद्धि संबंधित जानकारी देना भी आवश्यक है। अभियान चलाकर 70 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों का बनाया जाय आयुष्मान कार्ड  अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. बी.के. यादव ने बताया कि ई-कवच पोर्टल पर गर्भवती महिलाओं की फीडिंग अनिवार्य है। लापरवाही से जनपद की रैंकिंग प्रभावित हो सकती है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने अंत्योदय कार्ड धारकों और 70 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों का आयुष्मान कार्ड अभियान चलाकर प्राथमिकता के आधार पर बनाने के निर्देश दिए।   जरूरतमंद परिवारों को जागरूक कर उनका टीकाकरण किया जाय टीकाकरण के संबंध में उन्होंने कहा कि जिले में कोई भी बच्चा टीके से वंचित न रह जाए। जरूरतमंद परिवारों को जागरूक कर उनका टीकाकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम और रोगी खोजी अभियान की समीक्षा करते हुए बेहतर रणनीति बनाने पर जोर दिया गया। अपने दायित्वों का ईमानदारी निर्वहन करें अधिकारी  बैठक के दौरान ओपीडी, आईपीडी, आरबीएसके, एम्बुलेंस सेवा, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, आभा आईडी, परिवार कल्याण कार्यक्रम, आयुष्मान कार्ड, क्षय रोग और कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम सहित कई योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समय से कार्यालय में उपस्थित रहें और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें।  

वंदे भारत अपग्रेड: इंदौर–नागपुर रूट पर 16 कोच की नई ट्रेन, सीट क्षमता दोगुनी

इंदौर रेलवे बोर्ड ने इंदौर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस में कोचों की संख्या बढ़ाकर 16 कर दी है। 24 नवंबर से यह ट्रेन दोगुनी सीटों के साथ चलेगी, जिससे लगभग 1200 यात्री यात्रा कर सकेंगे। व्यस्त मार्ग पर यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर मिलेगा।     इंदौर-नागपुर वंदे भारत में कोच बढ़े।     सीट क्षमता हुई दोगुनी, 1200 यात्री।     24 नवंबर से नया बदलाव होगा लागू।  इससे प्रतिदिन 600 अतिरिक्त यात्रियों को आरामदायक और तेज यात्रा का अवसर मिलेगा—जो त्योहारों और भीड़भाड़ के समय राहत का बड़ा कारण बनेगा। व्यस्ततम रूट, मांग लगातार बढ़ रही थी इंदौर–भोपाल–नागपुर रेल मार्ग मध्य भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूटों में शामिल है। विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, कारोबारी और ट्रैवलर्स की भारी आवाजाही के कारण वंदे भारत में सीटें अक्सर फुल रहती थीं। वेटिंग लिस्ट भी लगातार बढ़ रही थी। इंदौर और भोपाल शिक्षा व व्यापार केंद्र हैं, वहीं नागपुर एक बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब है। ऐसे में 16 कोच का स्थायी विस्तार यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस दिन से मिलेगा नई सुविधा का लाभ ट्रेन नंबर 20911 इंदौर-नागपुर व ट्रेन नंबर 20912 नागपुर-इंदौर में 24 नवंबर से इस सुविधा का लाभ यात्रियों को मिलेगा। वंदे भारत ट्रेन की एग्जीक्यूटिव क्लास के कोच में 52 तो चेयरकार कोच में 78 सीटें होती हैं। कोच बढ़ने से सीटों की संख्या भी बढ़ेगी। वंदे भारत (Indore Nagpur Vande Bharat Train) का 16 कोच वाला अपग्रेडेड रैक बुधवार को दिल्ली से इंदौर पहुंचा है। त्योहारी सीजन में फुल थी ट्रेन कोचिंग डिपो में इसका (Indore Nagpur Vande Bharat Train) मेंटेनेंस किया जा रहा है। मालूम हो, पहले यह ट्रेन इंदौर से भोपाल चल रही थी। यात्रियों की संख्या कम होने से इसे नागपुर तक कर दिया गया। त्योहारी सीजन में यह ट्रेन फुल रही। यात्रियों को वेटिंग मिली। कोच दोगुना होने से यात्रियों को आसानी से सीट मिल जाएगी। वंदे भारत ट्रेन में बीते चार माह से सीटें फुल जा रही थी। इस कारण रेलवे ने वंदे भारत के कोच बढ़ा दिए है। इंदौर से नागपुर तक ट्रेन चलाने की मांग हमेशा से उठती रहती है। दो साल पहले इंदौर से भोपाल के बीच वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू किया था। यह ट्रेन सुबह सवा छह बजे जाती है। इंदौर से भोपाल तक के लिए इस ट्रेन को कम यात्री मिलते थे। बाद में वंदेभारत ट्रेन का विस्तार इंदौर से नागपुर तक किया गया। इसके बाद ट्रेन को अच्छे यात्री मिलने लगे। त्यौहार के समय इस ट्रेन में सीट नहीं मिलती है। पहले दिल्ली भेज दिए थे रैक वंदे भारत के लिए सितंबर माह में रैक आए थे, लेकिन उसका उपयोग रेलवे ने दिल्ली पटना ट्रेन के लिए कर दिया था। अब वे रैक वापस इंदौर भेजे है। दो दिन पहले रैक इंदौर लाए गए। अब 24 नवंबर से 16 कोच के साथ ट्रेन इंदौर से नागपुर के लिए रवाना होगी। उधर इंदौर नगर निगम ने भी इंदौर से नागपुर के लिए बस सेवा शुरू की है। पिछले दिनों हरी झंडी देकर मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने बस को रवाना किया था।