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रायपुर: PM मोदी और मंत्री मांडविया के नेतृत्व में ऐतिहासिक श्रम सुधार, CM विष्णु देव साय ने दी बधाई

रायपुर : प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के नेतृत्व में श्रम सुधारों का ऐतिहासिक क्रियान्वयन : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  देश में चार श्रम संहिताओं के ऐतिहासिक क्रियान्वयन पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि श्रम सुधारों का यह महत्वपूर्ण निर्णय देश के 40 करोड़ से अधिक श्रमिकों के अधिकार, सुरक्षा, सामाजिक सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की एक अभूतपूर्व गारंटी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज का दिन भारत के श्रम क्षेत्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है। चारों श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन का अधिकार, महिलाओं को समान वेतन का प्रावधान, फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी, प्रत्येक श्रमिक के लिए सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा और ओवरटाइम पर डबल वेतन जैसी व्यवस्थाएँ पूरे देश में सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से न केवल श्रमिक वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि औद्योगिक वातावरण अधिक पारदर्शी, संतुलित और श्रमिक-हितैषी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने जिस समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया है, श्रम संहिताओं का लागू होना उस दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम है। उन्होंने कहा कि भारत की कार्यशील जनसंख्या राष्ट्र की उत्पादन शक्ति और आर्थिक समृद्धि की आधारशिला है, और उनके अधिकारों का संरक्षण किसी भी सशक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है। यह संहिताएँ देश की श्रम शक्ति को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करेंगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने  कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, उनके कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाले इस निर्णय के लिए वह प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया जी के प्रति आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार नई अर्थव्यवस्था, बेहतर औद्योगिक संबंधों और मजबूत श्रम बाजार का आधार साबित होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन से देशभर में रोजगार, उत्पादन, निवेश और औद्योगिक विकास की गति और अधिक मजबूत होगी, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ेगी।

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन, लोक नृत्यों की रही धूम

भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन, लोक नृत्यों की रही धूम मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र मध्यप्रदेश के लोक नृत्यों की रही धूम भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के सपने को साकार करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अग्रसर है। सूक्ष्म, लघु एवं उद्यम मध्यम उद्योग मंत्री  चैतन्य काश्यप ने 44वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश दिवस के अवसर पर यह बाते कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 18 नई नीतियां बनाई है, जो निवेशमित्र है और निवेशकों को आकर्षित करती हैं। मंत्री  काश्यप ने मध्यप्रदेश मंडप का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर मंडप का भ्रमण किया। इस अवसर पर मंदसौर की सांसद  सुधीर गुप्ता, और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। अभ्युदय मध्यप्रदेश के दर्शन प्रगति मैदान दिल्ली में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में किए जा सकते हैं। 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' थीम पर 14 से 27 नवंबर तक चलने वाले मेला में मध्यप्रदेश की विरासत से विकास की अद्भुत झांकी, एक जिला-एक उत्पाद और परम्परागत कलाकृतियों आगंतुकों को आकर्षित कर रही है। मध्यप्रदेश मण्डप मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। यहां कि ऐतिहासिक धरोहर, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल, लोक परम्पराओं की समृद्धि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के संकल्प "एक भारत-श्रेष्ठ भारत" को न केवल पूरी कर रही है अपितु विश्व पर्यटन मानचित्र पर इसे अग्रणी स्थान दिला रही है। अमेरिका से प्रकाशित एक प्रतिष्ठित पत्रिका ने विगत वर्ष मध्यप्रदेश को दुनिया के टॉप 10 टूरिज्म डेस्टिनेशन में शामिल किया जो गौरव का विषय है। इस सन्दर्भ का उल्लेख प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा 25 दिसम्बर को खजुराहो में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की जयंती कार्यक्रम में किया गया था 44वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में मध्यप्रदेश मण्डप ग्वालियर किला के रूप में तैयार किया गया है। मण्डप के केन्द्र में 64 योगिनी मन्दिर मुरैना के दर्शन होते है। मण्डप को मेले की थीम 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के अनुरूप सजाया गया है। लुटियन्स ने जब भारतीय संसद भवन का डिजाइन तैयार किया था तब उन्होंने भारत वर्ष की प्रसिद्ध इमारतों के डिजाईन बुलवाये थे, जिसमें से उन्होने मुरैना जिले के 64 योगिनी मन्दिर का चयन कर भारतीय संसद भवन का निर्माण कराया था। मण्डप में मध्यप्रदेश की विश्व धरोहार खजुराहों, सांची स्तूप एवं भीमबेटका के साथ प्रस्तावित धरोहर स्थलों, विभिन्न सांस्कृतिक माहोत्सव, हस्तशिल्प, हाथकरघा, जी.आई. ओ.डी.ओ.पी. उत्पादों को भी सजाया गया है। मंडप में इन उत्पादों को होलोग्राफिक इमेज से भी प्रदर्शित किया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री भी हो रही है। इसमें राज्य शासन की विभिन्न नीतियों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया है। मण्डप में औद्योगिक विकास के साथ पर्यटन की भी पूर्ण जानकारी प्रदर्शित की गयी है। मण्डप में सिंहस्थ-2028 की तैयारी को भी दर्शाया गया है। इन्दौर के जी.आई. उत्पाद, चमड़े के खिलौने एवं टेराकोटा के उत्पाद भी प्रदर्शित किये गये है। स्टार्ट-अप भी अपने उत्पादों का प्रचार और विक्रय कर रहे हैं। मध्यप्रदेश मण्डप, निर्मित विरासत, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय विरासत एवं वन्य जीवन को आकर्षक रूप से प्रदर्शित करता है। मण्डप जहां एक ओर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को प्रदर्शित कर रहा है वही दूसरी ओर सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बांधने का संदेश भी दे रहा है। यही कारण है कि मेले में इस बार फिर मध्यप्रदेश मण्डप दर्शकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। यहां अभ्युदय मध्यप्रदेश की झलक स्पष्ट देखी जा सकती है। मध्यप्रदेश के लोक नृत्य की धूम मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्यों की धूम पूरे अंतर्राष्ट्रीय मेले में मची हुई है। मटकी लो नृत्य, पनिहारी लोक नृत्य और बघेली लोक गायन जैसे पारंपरिक नृत्यों ने लोगों का मन मोह लिया है। मटकी लोक नृत्य में महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक वेशभूषा में चेहरे पर घूंघट डाले, ढोल की थाप पर एक खास लय में नृत्य करती हैं। यह नृत्य आड़ा-खड़ा और रजवाड़ी के नाम से भी जाना जाता है। पनिहारी लोक नृत्य महिलाओं के जीवन को चित्रित करता है, जो पानी के घड़े दूर से लाती हैं। इसके गीत भी पानी और बारिश के महत्व के बारे में हैं। मती शीला बरनाठी बघेली लोक गायन की प्रसिद्ध लोक गायिका बघेली लोक गायन मध्यप्रदेश के रीवा, सतना, शहडोल, सीधी, अनुग्रह और उमरिया जिलों में प्रचलित है।  

MP के 9 जिलों में डकैतों का कहर जारी, ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर गैंग सक्रिय

भोपाल मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल को डकैत मुक्त करने के दावों के बीच सच्चाई यह है कि अब भी प्रदेश के नौ जिले डकैतों से प्रभावित हैं। इनमें महाकोशल-विंध्य के जिले भी शामिल हैं। डकैत प्रभावित जिले ग्वालियर, शिववुरी, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, रीवा, सतना और पन्ना हैं। मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981 प्रदेश के इन जिलों के कुछ थानों, क्षेत्रों में अभी भी लागू है। इनमें से छह जिलों का संपूर्ण क्षेत्र डकैतों से प्रभावित है। ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह है सक्रिय ग्वालियर-चंबल अंचल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह के सरगना योगेंद्र पर राजस्थान और मप्र पुलिस ने 30 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। प्रदेश में सीमावर्ती राज्यों से अंतरराज्यीय डकैत गिरोह की सक्रियता बढ़ी है। इनमें दस्यु प्रभावित क्षेत्रों में डकैती की घटनाएं अधिक होती है। वर्ष 2020 से लेकर वर्ष 2024 तक डकैती के 300 से अधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वर्तमान जो डकैत गिरोह सक्रिय हैं वह अन्य राज्यों से आकर डकैती और लूट की घटनाओं को अंजाम देने वालों का समूह है। जिनके विरुद्ध पांच साल में अलग-अलग प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं।   योगेंद्र गिरोह दो राज्यों के लिए बना मुसीबत ग्वालियर-चंबल में योगेंद्र गुर्जर का गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह ने मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान में भी डकैती की है। पुलिस के साथ इस गिरोह की मुठभेड़ भी हो चुकी है, योगेंद्र व उसके साथी फरार हैं। हालांकि योगेंद्र के गिरोह में शामिल डकैत तहसीला गुर्जर ने राजस्थान के धौलपुर में सरेंडर कर दिया था। वह धौलपुर के मौरोली का रहने वाला है। तहसीला के विरुद्ध धौलपुर के अलावा मध्य प्रदेश के थाना सरायछौला मुरैना, तिघरा ग्वालियर, सेसईपुरा श्योपुर में लूट, अपहरण, हत्या का प्रयास, फिरौती व पुलिस मुठभेड़ के कई मामले दर्ज हैं। डकैती प्रभावित जिले व क्षेत्र जिला–जिले का प्रभावित क्षेत्र ग्वालियर– संपूर्ण जिला ग्वालियर शिवपुरी– संपूर्ण जिला शिवपुरी मुरैना– संपूर्ण जिला मुरैना भिंड– संपूर्ण जिला भिंड श्योपुर– संपूर्ण जिला श्योपुर दतिया– संपूर्ण जिला दतिया रीवा– थाना डभौरा, अतरैला, पनवार, जवा, जनेह, सेमरिया, सिरमौर। सतना– थाना सिंहपुर, चित्रकूट (नया गांव), सभापुर, बरौधा, मझगवां, धारकुंडी। पन्ना– थाना अजयगढ़, धरमपुर, बृजपुर, मडला। नोट- इसमें रेल थाना भी है। जीआरपी ग्वालियर बीजी, ग्वालियर एनजी, जीआरपी मुरैना।

गिल की जगह नए खिलाड़ी को मौका, SA की ठोस ओपनिंग से टीम इंडिया दबाव में

गुवाहाटी गुवाहाटी के बारसापारा स्टेड‍ियम में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 2 मैचों की सीरीज का दूसरा टेस्ट  (22 नवंबर) शुरू हो गया है. जहां साउथ अफ्रीकी टीम पहले बल्लेबाजी कर रही है. मैच में टॉस अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा ने जीता था. अफ्रीकी टीम की ओर से एडेन मार्करम, र‍यान रिकेल्टन ओपन‍िंंग करने आए हैं. इस मुकाबले की लाइव कवरेज और स्कोरकार्ड के लिए इस पेज को लगातार र‍िफ्रेश करते रहें.  भाारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा एवं आखिरी मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में 22 नवंबर (शनिवार) से खेला जा रहा है. इस मुकाबले में साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया. यानी भारतीय टीम को इस मुकाबले में पहले गेंदबाजी करनी पड़ी है. इस मुकाबले के लिए दोनों टीम्स की प्लेइंग-1 में बदलाव देखने को मिले हैं. मुकाबले में ऋषभ पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हैं क्योंकि नियमित कप्तान शुभमन गिल नेक इंजरी के चलते दूसरे टेस्ट मैच से बाहर हो गए थे. शुभमन की जगह बैटिंग ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को इस मैच में मौका मिला है. वहीं स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर अक्षर पटेल भी यह मुकाबला नहीं खेल रहे हैं. अक्षर की जगह साई सुदर्शन की प्लेइंग-11 में एंट्री हुई है. साउथ अफ्रीका ने भी अपनी एकादश में एक बदलाव किया है. कॉर्बिन बॉश की जगह भारतवंशी स्पिनर सेनुरन मुथुसामी को मौका मिला है. मुथुसामी बाएं हाथ के स्पिनर हैं, साथ ही वो बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज भी हैं. मुथुसामी के परदादा-परदादी तमिलनाडु के वेल्लूर के रहने वाले थे और वो बाद में साउथ अफ्रीका चले आए थे. भारतीय टीम गुवाहाटी टेस्ट मैच में चार स्पेशलिस्ट बल्लेबाज, एक विकेटकीपर, 2 स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर, 1 बैटिंग ऑलराउंडर, एक विशेषज्ञ स्पिनर और दो तेज गेंदबाज के साथ उतरी है. दूसरी ओर मेहमान साउथ अफ्रीकी टीम पांच स्पेशलिस्ट बैटर, तीन ऑलराउंडर, एक स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर और दो विशेषज्ञ स्पिनर के साथ उतरी है. भारत- अफ्रीका की प्लेइंग 11 में कितने बदलाव?  भारतीय टीम ने इस मुकाबले में प्लेइंग 11 में 2 बदलाव किए और साउथ अफ्रीकी टीम ने एक बदलावा किया. शुभमन ग‍िल की जगह नीतीश रेड्डी को मौका दिया गया. वहीं अक्षर पटेल को टीम से बाहर कर साई सुदर्शन को टीम में लाया गया. साउथ अफ्रीकी टीम में भी एक बदलाव हुआ है. वहीं कॉर्बिन बॉश  की जगह अफ्रीकी टीम में स्प‍िनर सेनुरन मुथुसामी को लाया गया है. ऐसे में अफ्रीकी टीम 3 स्प‍िनर्स के साथ उतरी है, उनके पास पहले से ही केशव महाराज और साइमन हार्मर हें.  गुवाहाटी टेस्ट में भारत की प्लेइंग-XI: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, वॉशिंगटन सुंदर, ध्रुव जुरेल, ऋषभ पंत (कप्तान, विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, नीतीश रेड्डी, साई सुदर्शन, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज गुवाहाटी टेस्ट में साउथ अफ्रीका की प्लेइंग-XI: एडेन मार्करम, र‍यान रिकेल्टन, वियान मुल्डर, टेम्बा बावुमा (कप्तान), टोनी डी जोरजी, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरेने (विकेटकीपर), साइमन हार्मर, मार्को जानसेन, सेनुरन मुथुसामी, केशव महाराज गुवाहाटी में नई परंपरा की शुरुआत  गुवाहाटी स्टेडियम में यह पहला टेस्ट मैच है. यहां टॉस सुबह 8:30 बजे हुआ और मैच 9 बजे शुरू होगा. पांचों दिन पहला सत्र 9 से 11 बजे तक होगा. इसके बाद 20 मिनट का टी-ब्रेक लिया जाएगा. फिर दूसरा सत्र 11.20 बजे से 1.20 बजे तक होगा. दूसरे सत्र की समाप्ति के बाद 40 मिनट का लंच ब्रेक निर्धारित किया गया है. फिर दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक आखिरी सत्र होगा. यदि निर्धारित समय में पूरे ओवर्स नहीं होते हैं तो खेल को आधा घंटा बढ़ाया भी जाएगा. यानी मुकाबला शाम 4.30 बजे तक चल सकता है. कोलकाता टेस्ट में क्या हुआ था टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका के हाथों कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हुए टेस्ट मैच में 30 रनों से हार झेलनी पड़ी थी. भारतीय टीम को जीत के लिए 124 रनों का टारगेट मिला था, लेकिन शुभमन गिल ब्रिगेड 93 रनों पर ही सिमट गई. साउथ अफ्रीका ने इस तरह भारत में 15 साल बाद कोई टेस्ट मैच जीता था. इस जीत के चलते साउथ अफ्रीकी टीम टेस्ट सीरीज में 1-0 से आगे है. अ माना जा रहा है कि भारत की प्लेइंग 11 में ज्यादा बदलाव नहीं होंगे. केवल शुभमन गिल की जगह किसी ख‍िलाड़ी की एंट्री होगी. वहीं अफ्रीकी टीम की प्लेइंग 11 में ज्यादा बदलाव नहीं होगा.  भारत vs साउथ अफ्रीका टेस्ट (H2H) 45 टेस्ट, 16 भारत जीत, 19 भारत हारा, 10 ड्रॉ भारत-साउथ अफ्रीका टेस्ट (भारत में) कुल मैच 20, भारत जीता: 11, हारा: 6, ड्रॉ: 3  साउथ अफ्रीका सीरीज भारत की टेस्ट टीम: ऋषभ पंत (विकेटकीपर, कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, नीतीश कुमार रेड्डी, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, आकाश दीप. भारत दौरे के लिए साउथ अफ्रीका का टेस्ट स्क्वॉड: टेम्बा बावुमा (कप्तान), कॉर्बिन बॉश, डेवाल्ड ब्रेविस, टोनी डी जोरजी, जुबैर हमजा, साइमन हार्मर, मार्को जानसेन, केशव महाराज, एडेन मार्करम, वियान मुल्डर, सेनुरन मुथुसामी, लुंगी एनग‍िडी (कगिसो रबाडा की जगह), रयान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरेने.  

चार नए लेबर कोड लागू, श्रमिकों को मिली ग्रेच्युटी, फ्री हेल्थ चेकअप और अन्य लाभ

नई दिल्ली:  देश में नए श्रम कानून (Labour laws) लागू हो गए. इसे लेबर सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने चार नई श्रम संहिताओं को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है. सरकार का दावा है कि ये सिर्फ कानूनी अपडेट नहीं, बल्कि भारत के 40 करोड़ से ज्यादा कामगारों के जीवन में एक ऐतिहासिक क्रांति है. नई श्रम संहिताएं सबसे पहले हर वर्कर को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी देती हैं. अब देरी, मनमानी और शोषण की गुंजाइश खत्म होगी. युवाओं के लिए जॉब में नियुक्ति पत्र अनिवार्य कर दिया गया है ताकि नौकरी शुरू होते ही उनका अधिकार पक्का हो. महिलाओं के लिए Equal Pay का साफ नियम लागू होगा, जिससे कार्यस्थलों पर जेंडर बेस्ड भेदभाव पर लगाम लगेगी. सोशल सिक्योरिटी के दायरे में 40 करोड़ वर्कर्स आने से देश की कार्यशक्ति पहली बार इस पैमाने पर सुरक्षित होगी. फिक्स टर्म एम्प्लॉईस को सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी का हक दिया गया है. यह बदलाव उन लाखों वर्कर्स के लिए राहत है जो कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते हैं और स्थायी कर्मचारियों जैसी सुरक्षा नहीं पाते. 40 साल से ऊपर के हर वर्कर का सालाना फ्री हेल्थ चेक-अप अनिवार्य किया गया है. इसे सरकार वर्कफोर्स की दीर्घकालिक सेहत में निवेश मान रही है. ओवरटाइम करने वालों के लिए अब डबल वेतन का प्रावधान है, जिससे शोषण की आशंका खत्म होगी और अतिरिक्त मेहनत का सही मूल्य मिलेगा. New Labour Code 2025 : नई श्रम संहिताओं की खास बातें     सभी वर्कर्स को टाइम पर मिनिमम वेतन की गारंटी अब किसी भी कंपनी या नियोक्ता के लिए वेतन रोकना या देरी करना आसान नहीं रहेगा.     हर युवा को नियुक्ति पत्र अनिवार्य अब जॉइन करते ही Appointment Letter मिलेगा. जॉब सिक्योरिटी और क्लियर टर्म्स दोनों सुनिश्चित.     महिलाओं को Equal Pay और समान सम्मान जेंडर के आधार पर वेतन असमानता खत्म. सभी पदों पर बराबरी का अधिकार.     40 करोड़ कामगारों को सोशल सिक्योरिटी कवरेज देश की आधी से ज्यादा वर्कफोर्स पहली बार इतने बड़े सुरक्षा दायरे में.     फिक्स टर्म एम्प्लॉई को सिर्फ 1 साल बाद ग्रेच्युटी अब कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स भी 

मोबाइल बना मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा, 73% लोग डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित

 इंदौर  एमजीएम मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग द्वारा मोबाइल की लत से परेशान 500 लोगों पर किए गए अध्ययन के बेहद परेशान करने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। इसके अनुसार मोबाइल अब सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अध्ययन के अनुसार 73 प्रतिशत लोग मोबाइल की लत यानी डिजिटल डिपेंडेंसी से पीड़ित पाए गए। अत्यधिक मोबाइल उपयोग के कारण लोग बिना एहसास किए मूक अवसाद (साइलेंट डिप्रेशन) का शिकार हो रहे हैं। 80 प्रतिशत प्रतिभागियों में हल्का लेकिन लगातार चलने वाला अवसाद देखा गया। औसतन लोग प्रतिदिन सात घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं। यानी साल भर में करीब 1800 घंटे यानी पूरे 75 दिन मोबाइल पर निकल जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल न मिलने पर घबराहट (नोमोफोबिया), नींद में कमी, तनाव बढ़ना और बार-बार फोन चेक करने की मजबूरी जैसे व्यवहारगत लक्षण बढ़ते जा रहे हैं। बच्चों और किशोरों में इसका असर और भी गंभीर है। किशोरों में अवसाद का खतरा बढ़ रहा है और 10–14 वर्ष के बच्चों में दिमागी विकास प्रभावित हो रहा है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी अत्यधिक मोबाइल चलाने के कारण किशोरों में आत्मविश्वास में कमी और वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ रही है। चूंकि, यह उम्र सीखने, समझने और सामाजिक कौशल विकसित करने की होती है, ऐसे में अत्यधिक स्क्रीन टाइम उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके लिए स्कूलों में एक मॉडल बनाने की आवश्यकता है। समय रहते यदि मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो जल्द मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं विकराल रूप ले लेंगी। उपाय     फोन पार्किंग जोन बनाएं     रोजाना मोबाइल उपयोग का समय तय करें।     अनावश्यक एप्स के नोटिफिकेशन बंद कर दें। इससे बार-बार फोन देखने की आदत कम होगी।     इंटरनेट मीडिया एप दिन में 2-3 बार ही खोलें। इनके उपयोग के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।     रात में सोते समय मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें।     दिनभर में कुछ ऐसा समय तय करें, जब मोबाइल से दूर रहेंगे। जैसे खाना खाते समय, पढ़ाई के समय या परिवार के साथ बैठते समय।     खाली समय में मोबाइल के बजाय किताब पढ़ें, संगीत सुनें, वाक पर जाएं।     घर में एक फोन पार्किंग जोन बनाएं, जहां सभी फोन रख दें और बार-बार हाथ में न लें। इन 5 तरीकों से छुड़ाएं बच्चे की फोन लत बच्चों की इन गलतियों को न करें नज़रअंदाज, तुरंत टोके वरना हाथ से निकल जाएगा आपका बच्चा स्क्रीन टाइम करें कंट्रोल  अपने बच्चे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने के लिए एक सीमित समय निर्धारित करें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें दिन में केवल 1-2 घंटे के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करने की परमिशन दे सकते हैं. स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं अपने घर में एक स्मार्टफोन-फ्री एरिया बनाएं. उदाहरण के लिए, आप अपने डाइनिंग या बेडरूम में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें.  ऑफलाइन एक्टिविटीज पर ध्यान दीजिए अपने बच्चे के लिए ऑप्शनल एक्टिविटीज का ऑप्शन दीजिए, जो उन्हें स्मार्टफोन से दूर रखें. उदाहरण के लिए, आप उन्हें खेल, बुक रीडिं, या कला बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं. निगरानी रखें अपने बच्चे के स्मार्टफोन का उपयोग करने पर निगरानी रखें. आप फोन में पैरेंट्ल कंट्रोल एप्लीकेशन इंस्टॉल कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा फोन पर क्या देख रहा है, इसको आसानी से ट्रैक कर सकते हैं.  रात में फोन चलाने से रोकें अपने बच्चे के साथ बातचीत करें और उन्हें स्मार्टफोन की लत के बारे में समझाएं. इसके अलावा रात के समय बच्चे को फोन बिल्कुल न दें. इससे बच्चे की आंख और स्किन दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है.  फोन की लत से होने वाले नुकसान      नींद की कमी     अवसाद     चिड़चिड़ापन     ध्यानकेंद्रित करने में परेशानी     आत्मसम्मान की कमी  

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा, मध्यप्रदेश में स्टेट टास्क फोर्स का गठन

भोपाल  कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर देशभर में बढ़ रही चिंता बढ़ रही है, इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने इसे प्राथमिकता पर रखा है, उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में ठोस और व्यापक कदम उठाने की शुरुआत कर दी है। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (NTF) के निर्देशों के बाद स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन कर उसे सक्रिय कर दिया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी और सुधार की रूपरेखा तय कर रही है। उल्‍लेखनीय है कि NTF द्वारा आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि “राज्य के विद्यार्थियों के लिए एक सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल” तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है। STF के हाथ में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की कमान NTF के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने एक स्टेट टास्क फोर्स (STF) का गठन किया है । यह राज्य में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और रोकथाम उपायों पर केंद्रित नीतिगत हस्तक्षेपों के लिए योजना एवं निर्देश जारी कर रही है। एसटीएफ के अध्‍यक्ष आयुक्त, उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा है। ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को इसका सदस्य सचिव नियुक्‍त किया गया है। एसटीएफ में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है । यह एक बहु-विभागीय तंत्र है जो विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से देखेगा। स्टेट टास्क फोर्स (STF) क्या करेगी? राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श से जुड़े उपायों की निगरानी, NTF के निर्देशों के अनुपालन का मूल्यांकन, कोचिंग व कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट, हेल्पलाइन, काउंसलिंग, मनोसामाजिक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना, जिला स्तरीय DTF को दिशा देना और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा, आत्महत्या रोकथाम से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान और सुधार को बढ़ावा, राज्य सरकार को नियमित सिफारिशें और नीतिगत सुझाव शैक्षणिक संस्‍थानों में नोडल अधिकारियों की होगी नियुक्ति सभी सुधारों के समन्वय प्रभावी हो, इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्‍थानों को नोडल अधिकारी नियुक्‍त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों एवं सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन अनिवार्य राज्य स्तर के प्रयास प्रभावी रूप से जिलों तक पहुँचे इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (DTF) का गठन भी अनिवार्य कर दिया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। ये जिम्मेदारी रहेगी डीटीएफ की      कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी करना।     परामर्श सेवाओं की उपलब्धता कराना।     STF–NTF निर्देशों के क्रियान्वयन कराना।     शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा पर निगरानी रखना। कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन अनिवार्य  उच्च शिक्षा विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन के कोई भी कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसलिए जरूरी हैं ये कदम देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है, जहाँ गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने का प्रयास है।  

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मजबूत की अपनी दावेदारी, BJP अध्यक्ष पद की रेस में बढ़त

नई दिल्ली भारतीय जनता पार्टी अब तक अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अंतिम फैसला नहीं ले सकी है। हालांकि, अब कहा जा रहा है कि इस पद पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। इसकी बड़ी वजह बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा का शानदार प्रदर्शन है। हालांकि, इसे लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। भाजपा ने बिहार में प्रधान को चुनाव प्रभारी बनाया था। टेलीग्राफ की रिपोर्ट में सत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि बिहार में यह जीत भाजपा और आरएसएस में अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान खत्म करने में मदद कर सकती है। उन्होंने कहा कि संगठन क्षमता और चुनाव प्रबंधन ने उन्हें इस पद की दौड़ में आगे कर कर दिया है। चुनाव से पहले वह लंबे समय तक बिहार में रहे। एक ओर जहां उन्होंने बागियों को नामांकन वापस लेने में मनाया। वहीं, कैडर को भी मजबूत करने में सफलता हासिल की है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी सूत्र बताते हैं कि हरियाणा, महाराष्ट्र और अब बिहार चुनाव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जोड़ी को मजबूती दी है, जिसपर लोकसभा चुनाव के दौरान मिले झटके के चलते असर पड़ा था। अखबार से बातचीत में एक केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'मोदी जी अब आरएसएस को मनाने में सफल हो सकते हैं कि भाजपा का अध्यक्ष उनकी चॉइस का हो।' एक और नाम था आगे जुलाई में इस पद के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का नाम भी आगे चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, जब भाजपा ने यादव और प्रधान का नाम आगे बढ़ाया, तो आरएसएस ने मंजूरी देने से पहले विचार विमर्श की जरूरत बताई थी। कहा जाता है कि प्रधान ने ही ओडिशा विधानसभा चुनाव में भाजपा को बीजू जनता दल से अलग होकर चुनाव लड़ने के लिए मनाया था, जिसके बाद भाजपा राज्य में सत्ता बनाने में सफल हुई। रिपोर्ट में एक भाजपा नेता के हवाले से बताया गया है, 'इससे पहले संकेत मिल रहे थे कि दक्षिण से नेता भाजपा अध्यक्ष बना सकता है। उप राष्ट्रपति पद के लिए सीपी राधाकृष्णन के चुनाव के बाद यह माना जाने लगा है कि पार्टी प्रमुख उत्तर से होगा।' मौजूदा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का तीन साल का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका था, लेकिन लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विस्तार दिया गया।

Yamaha Jog E: नया इलेक्ट्रिक स्कूटर, एक बार चार्ज करें तो चले 53 किलोमीटर

टोक्यो  जापान के बाज़ार में Yamaha मोटरसाइकिल ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी नई इलेक्ट्रिक स्कूटर Yamaha Jog E को पेश किया है. यह इलेक्ट्रिक स्कूटर खासतौर पर शहरी आवागमनकी ज़रूरतों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, जो कॉम्पैक्ट और किफायती है. यह नया इलेक्ट्रिक मॉडल, Yamaha की लोकप्रिय ICE पावर्ड 'Jog' स्कूटर की लेगसी को आगे बढ़ाएगा और शहरी ग्राहकों को एक हाइटेक और ईको-फ्रेंडली ऑप्शन करेगा. स्वैपेबल बैटरी सिस्टम Yamaha Jog E में स्वैपेबल बैटरी सिस्टम दिया गया है, इस टेक्नोलॉजी को Honda, Suzuki, Yamaha और Kawasaki ने मिलकर तैयार किया है. Jog E में 1.5 kWh का सिंगल स्वैपेबल बैटरी पैक लगाया गया है. हालांकि, इसकी रेंज थोड़ी कम है; फुल चार्ज होने पर यह मात्र 53 किमी की रेंज (30 किमी/घंटा की स्थिर गति पर) प्रदान करती है. इसमें AC सिंक्रोनस मोटर लगी हुई है, जो 2.3 PS की मैक्सिमम पावर और दमदार 90 Nm का टॉर्क जनरेट करती है. यह टॉर्क इसे शहर के ट्रैफिक में तेज़ी से पिक-अप देने में मददगार होगा. डिज़ाइन और फीचर्स Yamaha Jog E का डिज़ाइन काफी सिम्पल, क्लीन और हाइटेक है. इसे दो आकर्षक रंगों – डार्क ग्रे मैटेलिक और लाइट ग्रे – में पेश किया गया है. इसके डिज़ाइन में ऑल-LED लाइटिंग, पॉलीगोनल हेडलैंप, सर्कुलर मिरर्स और फ्लैट बॉडी पैनल जैसे फीचर्स शामिल हैं. सुविधाओं की बात करें तो, इसमें 500 ml का फ्रंट यूटिलिटी पॉकेट, एक USB Type-A चार्जिंग स्लॉट, सामान टाँगने के लिए बड़ा हुक, सीट के नीचे स्टोरेज और एक उल्टी (Inverted) LCD इंस्ट्रूमेंट स्क्रीन दी गई है. राइडिंग को बेहतर बनाने के लिए इसमें तीन अलग-अलग राइडिंग मोड्स भी दिए गए हैं. व्हील, ब्रेक और सस्पेंशन का सेटअप सवारी को आरामदायक और नियंत्रित बनाने के लिए Jog E में उचित सेटअप दिया गया है. इसके अगले पहिये का साइज़ 12-इंच है, जबकि पिछले पहिये का साइज़ 10-इंच रखा गया है. ब्रेकिंग सिस्टम में आगे की तरफ डिस्क ब्रेक और पीछे की तरफ ड्रम ब्रेक दिया गया है, जो कॉम्बी ब्रेक सिस्टम (CBS) के साथ आता है. सस्पेंशन के लिए, स्कूटर में आगे की तरफ टेलिस्कोपिक फोर्क और पीछे की तरफ डुअल शॉक एब्जॉर्बर का इस्तेमाल किया गया है, जो शहर की सड़कों पर झटकों को प्रभावी ढंग से झेलने में मदद करेंगे. कॉम्पैक्ट डिजाइन  Jog E को कॉम्पैक्ट बनाने पर जोर दिया गया है, जिसकी कुल लंबाई 1795 मिमी, चौड़ाई 680 मिमी और ऊँचाई 1140 मिमी है, जबकि इसका व्हीलबेस 1300 मिमी है. इसकी सीट की ऊँचाई 740 मिमी है, जो इसे छोटे कद के राइडर्स के लिए भी सुविधाजनक बनाती है. बैटरी सहित इसका कुल वज़न मात्र 93 किग्रा है, जो इसे हैंडल करने में बहुत हल्का बनाता है. हालांकि, यह स्कूटर सिर्फ़ एक यात्री (Single Rider) की क्षमता के साथ आती है, जो इसकी कॉम्पैक्ट शहरी प्रकृति को दर्शाता है. इसका ग्राउंड क्लीयरेंस 135 मिमी है. कीमत  Yamaha Jog E इलेक्ट्रिक स्कूटर की कीमत 10% कंज्यूमर टैक्स सहित 159,500 जापानी येन रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग ₹90,000 के आसपास है. यह कीमत केवल स्कूटर के लिए है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों को बैटरी पैक और स्वैपिंग सर्विस का खर्च अलग से वहन करना होगा. यह स्वैपेबल बैटरी मॉडल उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लंबे चार्जिंग टाइम से बचना चाहते हैं.  

नई कलेक्टर गाइडलाइन के तहत 15 जनवरी तक जिले भेजा जाएगा प्रस्ताव, महंगी होगी संपत्ति

भोपाल मध्य प्रदेश में एक बार फिर से प्रापर्टी की दरें बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन (प्रापर्टी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव) बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इस संबंध में महानिरीक्षक पंजीयन अमित तोमर ने बुधवार को आदेश जारी किया है। आदेश के अनुसार नई गाइडलाइन का प्रस्ताव पहले सभी जिलों की उप जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा बनाकर 15 जनवरी 2026 तक जिला मूल्यांकन समितियों को भेजना होगा। इसके बाद जिला मूल्यांकन समिति प्रस्तावित गाइडलाइन को लेकर अधिसूचना जारी कर लोगों व राजनीतिक दलों से सुझाव लेगी। 31 मार्च से नई दरें लागू होंगी इन सुझावों पर चर्चा के बाद आवश्यकता होने पर संशोधन कर 30 जनवरी तक प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा। सभी जिला मूल्यांकन समितियों द्वारा 15 फरवरी तक गाइडलाइन का प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेज दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर बोर्ड शासन से चर्चा के बाद 31 मार्च से प्रदेशभर में प्रापर्टी की नई दरें लागू कर देगा। जानकारी के अनुसार प्रदेश में करीब एक लाख 12 हजार में से 74 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की खरीद-फरोख्त अधिक होती है। विभिन्न जिलों में इन स्थानों का पंजीयन और राजस्व अधिकारियों द्वारा एआई सहित अन्य माध्यमों से सर्वे कराया जाएगा। इस सर्वे के बाद ही तय होगा कि कितने स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की जानी है। बता दें कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 60 हजार स्थानों पर प्रापर्टी की दरों में वृद्धि की गई थी। हालांकि आवासीय आरसीसी निर्माण और सभी क्षेत्रों में आरबीसी, टिनशेड, कच्चा कवेलू के लिए प्रचलित निर्माण दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई थी। इन बिंदुओं का ध्यान रखना होगा     स्थानों में दरें निर्धारित करने (यथावत, वृद्धि या कमी) नये स्थान व कालोनी जोड़े जाने की स्थिति में दरें प्रस्तावित किए जाने के लिए आवश्यक अनुमतियों की जानकारी एवं दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हों।     ऐसे स्थान जहां भूमि अधिग्रहण हो रही है या होने की संभावना है तो स्थानों व अधिग्रहण भूमि के आसपास के क्षेत्रों में होने वाले संभावित विकास को दृष्टिगत रखते हुए दरें प्रस्तावित की जाएं।     मूल्य सूचकांक तथा नगर व ग्राम में हुए और प्रस्तावित विकास को दृष्टिगत रखना होगा।     दरें यथासंभव वास्तवित रूप से प्रचलित दरों के अनुरूप हों।     पिछले सालों की निर्माण के लिए तय लागत दरों को ध्यान में रखते हुए प्लाट आदि की दरें निर्धारित की जाएं।