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मसूरी में IAS अफसरों की ट्रेनिंग, 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन और प्रशासनिक तैयारियां

भोपाल  लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA) मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग आयोजित करेगा। यह ट्रेनिंग 5 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगी। इसमें 122 आईएएस अफसर शामिल होंगे। इसके साथ ही, इसमें एमपी के 39 कलेक्टरों समेत अन्य अधिकारियों को बुलाया गया है। मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र भेजकर रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया है। हालांकि, प्रदेश के 39 कलेक्टरों को लेकर पेंच फंस गया है। क्या है कारण… चलिए बताते हैं। चुनाव आयोग के आदेशों से बनी परेशानी     इस ट्रेनिंग के दौरान चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों की वजह से 39 कलेक्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने SIR के कारण प्रशासनिक फेरबदल पर रोक लगा दी है।     इससे इन कलेक्टरों को ट्रेनिंग में शामिल होने की मंजूरी मिलने की संभावना कम हो गई है। इसलिए, इन 39 कलेक्टरों का मिड करियर ट्रेनिंग में शामिल होना अब मुश्किल नजर आ रहा है। प्रदेश के 39 कलेक्टरों का सिलेक्शन लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी मसूरी में मिड करियर ट्रेनिंग के लिए किया गया है इसमें उज्जैन संभागायुक्त के अलावा भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, सागर, रीवा जैसे बड़े शहरों के कलेक्टर शामिल है इसके साथ ही मंत्रालय और अलग-अलग विभागों में विभाग प्रमुख के उप सचिव और सचिव के रूप में काम करने वाले आईएएस अधिकारियों को भी ट्रेनिंग के लिए सिलेक्ट किया गया है 24वें मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम के शेड्यूल जारी करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पांच जनवरी 2026 से 30 जनवरी तक चलने वाले मिड करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज थ्री के लिए 2010 बैच के अधिकारियों का चयन मामला दर मामला के आधार पर किया गया है जबकि 2016 बैच के अधिकारियों के लिए यह तीसरा और अंतिम अवसर है 2017 बैच के अफसरों के लिए दूसरा और वर्ष 2018 बैच के अफसरों के लिए पहला प्रशिक्षण अवसर है ये कलेक्टर ट्रेनिंग के लिए चयनित जिन कलेक्टरों का चयन ट्रेनिंग के लिए किया गया है उसमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रूचिका चौहान, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल, बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना, अलीराजपुर कलेक्टर कलेक्टर नीतू माथुर, खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता, बुरहानपुर कलेक्टर हर्ष सिंह, उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह शामिल है साथ ही देवास कलेक्टर ऋतु राज, शाजापुर कलेक्टर रितु बाफना, आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव, मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग, नीमच कलेक्टर हिमांशु चंद्रा, दतिया कलेक्टर स्वन्प्रिल जी वानखेड़े, मुरैना कलेक्टर लोकेश रामचंद्र जांगिड़, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को ट्रेनिंग के लिए चुना गया है इसके अलावा रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल, सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी, सतना कलेक्टर सतीश कुमार एस, अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली, उमरिया कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, सागर कलेक्टर संदीप जी आर दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल निवाड़ी कलेक्टर जमुना भिडे सीहोर कलेक्टर बालागुरू के रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना हरदा कलेक्टर सिद्थार्थ जैन बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सोमवंशी नरिसंहरपुर कलेक्टर रजनी सिंह छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेंद्र नारायण सिवनी कलेक्टर शीतला पटले बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना, और पांढ़ुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ का भी चयन किया गया है 12 दिसंबर तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा इसमें कहा गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए सिलेक्ट किए गए अधिकारियों का रजिस्ट्रेशन 12 दिसंबर तक ऑनलाइन कराने की कार्रवाई कराएं। साथ ही अधिकारियों से कहा गया है कि 19 दिसंबर तक प्रस्तावित प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए संबंधित अधिकारियों के नामांकन की स्वीकृति भेंजे सभी अफसरों को 4 जनवरी को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी के लिए भेजना सुनिश्चित करें इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए उन अधिकारियों का चयन किया गया है जो 31 दिसंबर 2029 के पहले सेवानिवृत्त नहीं हो रहे है भोपाल कलेक्टर, उज्जैन कमिश्नर को भी बुलाया मिड करियर ट्रेनिंग के लिए 2010 बैच के एमपी कैडर को दो आईएएस अधिकारी चुने गए है इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह शामिल है वीएस चौधरी कोलसानी रुचिका चौहान हरिजिंदर सिंह बी विजय दत्ता अनुग्रह पी चंद्रमौलि शुक्ला नीरज कुमार सिंह पंकज जैन अजय कटेसरिया निधि निवेदिता स्वरोचिष सोमवंशी प्रवीण सिंह अधयक अनुराग वर्मा प्रतिभा पाल फटिंग राहुल हरिदास राजीव रंजन मीना बक्की कार्तिकेयन अवधेश शर्मा कुमार पुरुषोत्तम सुभाष कुमार द्विवेदी धरणेंद्र कुमार जैन नरेंद्र कुमार सोमवंशी राजेश बाथम संतोष कुमार वर्मा अरूण कुमार परमार गिरीश कुमार मिश्रा शिवम वर्मा ,सोनिया मीना हर्ष दीक्षित रजनी सिंह प्रियंक मिश्रा मयंक अग्रवाल अनूप कुमार सिंह संतीष कुमार एस नीरज कुमार वशिष्ठ अमर बहादुर सिंह संदीप जीआर पवन कुमार जैन रिजु बाफना आशीष वशिष्ठ साकेत मालवीय शीतला पटले रिषव गुप्ता लोकेश रामचंद्र जांगिड़ अंकित अष्ठाना नेहा मीना अरुण कुमार विश्वकर्मा भव्या मित्तल क्षितिज सिंघल दीलीप कुमार कापसे बुध्देश कुमार वैद्य अभय कुमार बेडेकर सुधीर कुमार कोचर नीतू माथुर जमुना भिडे अंजू अरुण कुमार परीक्षित संजयराव झाड़े सौरभ संजय सोनवड़े भारसत योगेश तुकाराम राहुल नामदेव धोटे अंकिता धाकरे शेर सिंह मीना अभिलाष मिश्रा देंवेंद्र कुमार नागेंद्र गुरु प्रसाद कुमार सत्यम संजय कुमार जैन राखी सहाय हर्ष सिंह अदिति गर्ग हर्षल पंचोली रितु राज संस्कृति जैन मृणाल मीना पार्थ जायसवाल हिमांशु चंद्रा अर्पिता वर्मा बालागुरू के जे रीभा रौशन कुमार मनोज कुमार सरियाम हरेंद्र नारायण प्रीति यादव जयति सिंह सिध्दार्थ जैन अंशुल गुप्ता स्वन्प्रिल वानखेड़े संजना जैन जगदीश कुमार गोमे अनुराग सक्सेना प्रताप नारायण यादव संघमित्रा गौतम कीर्ति खुरासिया अजीजा सरसार जफर संपना पंकज सोलंकी आशीष सांगवान राजेश कुमार जैन सुचिस्मिता सक्सेना दिशा प्रणय नागवंशी गजेंद्र सिंह नागेश मलिका निगम नागर मंजूषा विक्रांत राय संघ प्रिय शिशिर गेमावत अभिषेक चौधरी तपस्या परिहार सिध्दार्थ जैन प्रथम कौशिक श्याम वीर अमन वैष्णव हरसिमरन प्रीत कौर अंजलि जोसेफ अक्षय कुमार तेम्रवाल रामप्रकाश अहिरवार अर्चना सोलंकी संदीप केरकट्टा अभय सिंह ओहरिया वंदना वर्मा रेखा राठौर नवीन कुमार ध्रुर्वे

किन देशों में महिलाओं की आबादी पुरुषों से अधिक? जानें आंकड़ों के साथ

नई दिल्ली वर्षों से वैश्विक लैंगिक विमर्श शिक्षा, रोजगार और राजनीति में समानता पर केंद्रित रहा है। लेकिन इसी दौरान एक और महत्वपूर्ण बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ रही है। कई देशों में अब पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक हैं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि आबादी के बूढ़े होने, प्रवासन और जीवनशैली में बदलाव के चलते धीरे-धीरे विकसित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों विभाग (UN DESA) और विश्व बैंक के 2024 के जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी यूरोप, एशिया के कुछ हिस्सों और दक्षिणी अफ्रीका में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से पुरुषों से अधिक है। यूरोप में यह असंतुलन सबसे अधिक दिखाई देता है। लातविया, लिथुआनिया और यूक्रेन जैसे देशों में हर 100 पुरुषों पर 116 से 118 महिलाएं हैं। यह दुनिया में सबसे अधिक है। इसके पीछे प्रमुख कारण पुरुषों की औसतन कम आयु, रोजगार के लिए पुरुषों का बड़े पैमाने पर प्रवास और उम्रदराज आबादी में महिलाओं की अधिक हिस्सेदारी है। रूस और बेलारूस में स्थिति इससे मिलती-जुलती है। वहीं पुर्तगाल, फ्रांस और जर्मनी जैसे पश्चिमी यूरोपीय देशों में भी महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक है, हालांकि अंतर अपेक्षाकृत कम है। इसका कारण मुख्य रूप से महिलाओं की औसतन 4-6 वर्ष अधिक आयु है। एशिया में नेपाल और हांगकांग में स्पष्ट रुझान नेपाल में बड़ी संख्या में पुरुष विदेशों में रोजगार के लिए जाते हैं, जिससे देश की आबादी में महिलाओं का अनुपात बढ़ जाता है। हांगकांग में महिलाओं की लंबी आयु और पुरुषों की कम सर्वाइवल दर के चलते वर्षों से यह लैंगिक अंतर बना हुआ है। अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका लेसोथो और नामीबिया में पुरुषों का दक्षिण अफ्रीका की खदानों और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने जाना आम है। इससे घरेलू आबादी में महिलाएं बहुसंख्यक हो जाती हैं। अर्जेंटीना और उरुग्वे जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों में उम्रदराज आबादी के कारण बुजुर्ग आयु वर्ग में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कहीं अधिक है। दुनियाभर में कुल मिलाकर पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर है। हर 100 महिलाओं पर लगभग 101 पुरुष हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह संतुलन पूरी तरह महिलाओं की ओर झुक जाता है। विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में अधिकांश देशों में महिलाओं की संख्या स्पष्ट रूप से अधिक है। यह जनसांख्यिकीय परिवर्तन समाज और अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा प्रभाव डालता है। इन आंकड़ों के पीछे सच्चाई यह है कि महिलाएं अधिक समय तक जीवित रहती हैं और कई देशों में वे आबादी की संरचना को नया आकार दे रही हैं।  

सुरक्षा बलों का अभियान तेज, नक्सलियों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ पहली प्राथमिकता सरेंडर

मंडला  नक्सलियों को जड़ से खत्म करने के लिए व्यापक और सख्त अभियान शुरू किया गया है. मार्च 2026 तक नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके साथ ही राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए कई आकर्षक योजनाओं की घोषणाएं भी की हैं. मंडला जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान अब अपने निर्णायक दौर में पहुंच चुका है. नक्सलवाद खत्म करने का रोडमैप तैयार एसपी रजत सकलेचा ने बताया "नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने का रोडमैप तैयार है. इसके तहत पुलिस और सुरक्षा बल लगातार जंगल के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इस बार अभियान में सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं की ताकत भी जुड़ गई है." राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को 20 हज़ार से लेकर 4 लाख 50 हज़ार रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. सरेंडर करने वाले नक्सलियों को आर्थिक मदद एसपी रजत सकलेचा ने बताया "सरेंडर करने वाले नक्सलियों को जमीन खरीदने के लिए 20 लाख रुपए तक की मदद दी जाएगी. प्रोत्साहन राशि के रूप में न्यूनतम 5 लाख रुपए, नए जीवन की शुरुआत के लिए 1 लाख 50 हज़ार रुपए,और विवाह करने पर 50 हज़ार रुपए की विशेष सहायता राशि प्रदान की जाएगी. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को फ्री खाद्यान्न भी दिया जाएगा ताकि वे समाज की मुख्यधारा में दोबारा जुड़ सकें. राज्य सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के लिए लुभावनी पुनर्वास नीति लागू की है." अन्य नक्सलियों की जानकारी देने पर सरकारी जमीन मिलेगी अगर कोई नक्सली पुलिस को दूसरे नक्सली के आत्मसमर्पण या मूवमेंट की जानकारी देता है, तो उसे सरकारी नौकरी देने पर भी विचार किया जा सकता है. हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें. मार्च 2026 तक मंडला को नक्सल मुक्त बनाने का हमारा लक्ष्य है. इस योजना की जानकारी जनता तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने मीडिया, सोशल मीडिया और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से व्यापक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है. सरकार की योजनाएं नक्सलियों तक पहंचाने की अपील सरकार का उद्देश्य साफ है कि जंगलों में छिपे हर नक्सली तक यह संदेश पहुंचे कि अब सरकार सज़ा नहीं, सुधार का मौका दे रही है. मंडला पुलिस और प्रशासन का मानना है कि अगर यह अभियान सफल रहा तो न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में शांति और विकास की राह और मजबूत होगी.  

डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री डॉ. खट्टर से की सौजन्य भेंट डॉ. यादव ने की डॉ. खट्टर के साथ सौजन्य मुलाकात, बढ़ाई आपसी संवाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की सौजन्य भेंट, दोनों नेताओं ने की महत्वपूर्ण बातचीत सिंहस्थ-2028 से जुड़ी तैयारियों एवं परियोजनाओं पर हुई विस्तृत चर्चा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार की शाम नई दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री डॉ. मनोहर लाल खट्टर से उनके आवास पर सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय मंत्री डॉ. खट्टर को सिंहस्थ-2028 आयोजन से जुड़ी तैयारियों एवं अन्य प्रमुख परियोजनाओं के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास कार्यो और इसके विस्तार प्रस्तावों, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता, शुचिता, नदी संरक्षण, पेयजल व्यवस्था, अस्थायी आवास निर्माण आदि विषयों के संबंध में केंद्रीय मंत्री को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ-2028 को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोत्कृष्ट आयोजन बनाने के लिए राज्य सरकार विभिन्न बहुआयामी योजनाओं पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं —स्वच्छ भारत अभियान, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी पहल, विद्युत परियोजनाओं और शहरी आधारभूत ढांचे से संबंधित अन्य योजनाओं की प्रगति की भी जानकारी दी। बैठक में अपर मुख्य, (मुख्यमंत्री कार्यालय)  नीरज मंडलोई, केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रमुख अधिकारी तथा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

प्रशांत किशोर ने किसे ठेस पहुंचाई? बिहार चुनाव में महागठबंधन और NDA पर असर

 नई दिल्ली 14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजे महागठबंधन के लिए ही नहीं प्रशांत किशोर की नई नवेली पार्टी जनसूरज पार्टी (JSP) के लिए भी अप्रत्य़ाशित रहे.  238 सीटों चुनाव पर लड़ने वाली जेएसपी को एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं हो सकी. पार्टी कr 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई.   फिर भी, JSP ने 35 सीटों पर वोटकटवा की भूमिका निभाई, जहां पार्टी का वोट शेयर विजेता के मार्जिन से ज्यादा रहा. खास यह रहा कि जनसुराज पार्टी ने दोनों ही गठबंधनों को नुकसान पहुंचाया. विपक्ष उन पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाती रही है पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों ने दोनों ही गठबंधनों के प्रत्याशियों को नुकसान पहुंचाया. कभी मोदी-नीतीश के पोल स्ट्रैटेजिस्ट रहे किशोर ने 2022 में JSP लॉन्च कर 'बदलाव' का नारा दिया था. उन्होंने दावा किया था कि पार्टी या तो अर्श पर रहेगी या फर्श पर. जो शायद सही साबित हुआ.  चुनाव प्रचार के दौरान उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ के बारे में कुछ का मानना था कि उनकी सवर्ण जातिगत पहचान के कारण वह बीजेपी के वोट काटेंगे, जबकि अन्य का तर्क था कि वह राज्य से पलायन जैसे मुद्दों पर बात करके सत्ता-विरोधी युवा वोटों को बांटेंगे. हलांकि निश्चित रूप से उनके चलते एक गठबंधन को ज्यादा फायदा मिला है. आइये देखते हैं कि वह कौन सा गठबंधन है जिसे प्रशांत किशोर की स्ट्रैटेजी से अधिक फायदा पहुंचा?  जिन 35 सीटों पर वोटकटवा बने उनमें किसका नुकसान ज्यादा हुआ? प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने जिन 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से 236 पर वह जमानत जब्त करा बैठी, लेकिन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि यह पार्टी कई सीटों पर खेल बिगाड़ने वाली भूमिका भी निभाई है.  35 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के वोट जीत के अंतर से अधिक थे. इनमें से एनडीए ने 19 सीटें जीतीं जबकि महागठबंधन को 14 सीटें मिलीं हैं. एआईएमआईएम और बीएसपी को भी प्रशांत किशोर के प्रत्याशियों के वोट काटने का फायदा एक-एक सीटों पर मिला है. पार्टी ने कुल 3.5 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं जो एआईएमआईएम, बीएसपी आदि के मुकाबले बेहतर है. इसके साथ कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के मुकाबले भी जनसुराज का वोट परसेंटेज बेहतर ही कहा जाएगा. गौरतलब है कि काग्रेस ने 8.3 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं. हालांकि निश्चित रूप से यह कहना बहुत मुश्किल है कि जन सुराज को किसी सीट पर अंतर से अधिक वोट मिलने से किसे फायदा पहुंचा . क्योंकि यह जानना असंभव है कि जो वोट पीके की पार्टी को मिले वे वोट कहां जाते. पार्टी 115 सीटों पर तीसरे स्थान पर रही और एक सीट दूसरे स्थान पर रही. इसलिए प्रशांत किशोर को एक खेल बिगाड़ने वाले खिलाड़ी के रूप में देखा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी.राजनीतिक पारी की शुरूआत में हर प्लेयर करीब-करीब ऐसा ही पर्फार्मेंस देता है. किशोर की पार्टी को मिले वोटों के चलते जेडीयू को 10 सीटें पर जबकि बीजेपी को पांच पर फायदा मिला है. एलजेएपी-आरवी को तीन और आरएलएम को एक सीट मिली है. महागठबंधन में, आरजेडी को नौ सीटें मिलीं जबकि कांग्रेस को दो. सीपीएम, सीपीआईएमएल-एल और आईआईपी को प्रत्येक में एक-एक सीट मिली है.  'नौवीं फेल तेजस्वी' का नरेटिव बनाना प्रशांत किशोर ने अपने चुनाव अभियान के दौरान लगातार  तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' का तंज कसकर और 'जंगल राज' का डर दिखाकर ऐसा माहौल बनाया जो आरजेडी की युवा अपील को ध्वस्त कर दिया. JSP का 3.5 प्रतिशत वोट शेयर वोटकटवा बनकर महागठबंधन को 10-15 सीटें खर्च करा गया. किशोर, जो पूर्व स्ट्रैटेजिस्ट हैं, ने यह नरेटिव सोशल मीडिया और रैलियों में चलाकर आरजेडी की छवि को 'अशिक्षित जंगल राज' का प्रतीक बना दिया.  किशोर ने तेजस्वी की शिक्षा पर सीधा हमला बोला. तेजस्वी ने 2015 में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी नौवीं कक्षा की असफलता को 'सामान्य' बताया था, लेकिन किशोर ने इसे 'अक्षमता' का प्रतीक बनाया. अक्टूबर 2025 की रैलियों में किशोर ने कहा, नौवीं फेल नेता बिहार को नौकरी देंगे? पहले खुद पढ़ लो. युवा वोटर (60% आबादी), जो तेजस्वी को 'नई पीढ़ी' मानते थे, ने इसे 'अपमानजनक' पाया . यह नरेटिव आरजेडी के युवा वोट शेयर को 5% गिरा दिया. तेजस्वी ने जवाब दिया, शिक्षा डिग्री से नहीं, काम से आती है. लेकिन किशोर का तीर लग चुका था. यह प्रहार आरजेडी की 'नौकरी देंगे' अपील को फीका कर गया, क्योंकि बेरोजगारी (14.5%) पर युवा असंतोष JSP की ओर गया. किशोर ने तेजस्वी को 'लालू के जंगल राज' का वारिस ठहराकर डर का माहौल बनाया. 1990s के लालू काल की अपराध, भ्रष्टाचार और आर्थिक ठहराव की यादें ताजा कीं. किशोर ने रैलियों में कहा, तेजस्वी का राज लौटेगा. बीजेपी का विरोध सीमित लेवल पर करना प्रशांत किशोर ने बीजेपी का विरोध 'सीमित स्तर' पर रखा,  किशोर का फोकस मुख्य रूप से तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर रहा. किशोर ने बीजेपी नेता डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर तमाम गंभीर आरोप लगाए. पर मोदी और शाह के खिलाफ वो खुलकर सामने नहीं आ सके. यह रणनीति एनडीए को सुरक्षित रखते हुए महागठबंधन के खिलाफ नरेटिव बनाने जैसा था. किशोर की JSP ने 'बदलाव' का नारा दिया.बेरोजगारी, प्रवासन, शिक्षा सुधार पर उनकी बातें जिन युवकों ने सुनीं उन्होंने आरजेडी-कांग्रेस की बजाए जनसुराज को वोट देना बेहतर समझा. जाहिर है कि बीजेपी से नाराजगी वाले वोट महागठबंधन को जाते पर वो दो भाग में बंट गए. बेरोजगारी , पलायन आदि के मुद्दे पर बीजेपी से नाराज कुझ वोटर्स के जनसुराज की ओर जाने से स्पष्ट रूप से नुकसान महागठबंधन का ही हुआ.  नीतीश को तेजस्वी पर तरजीह देना महागठबंधन की हुई दुर्गति के लिए एक प्रमुख सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) साबित हुए, जिनकी जनसूरज पार्टी (JSP) ने किशोर ने तेजस्वी यादव को 'नौवीं फेल' और 'जंगल राज का वारिस' ठहराकर नीतीश कुमार के 'सुशासन' को चमकाया.चुनाव प्रचार के दौरान एक बार किसी पत्रकार ने प्रशांत किशोर से पूछा कि आपको नीतीश और तेजस्वी में से किसी एक को चुनना हो तो किसे चुनेंगे? किशोर ने नीतीश कुमार पर अपनी मुहर लगाई थी. जाहिर है कि इसका फायदा एनडीए को मिला.

BJP ने तोड़ा पिछला रिकॉर्ड, विधायकों की संख्या में 2014 से बेहतर स्थिति

नईदिल्ली  बिहार विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के बाद बीजेपी के नेता गदगद हैं। अब उनकी नजरें पश्चिम बंगाल पर टिक चुकी हैं। बंगाल चुनाव से पहले भाजपा के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। राज्य विधानसभाओं में पार्टी का प्रतिनिधित्व अब तक का सर्वोच्च स्तर छू चुका है। इस सफलता को देखते हुए भाजपा ने अपना नया लक्ष्य भी तय कर लिया है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने दावा किया है कि पार्टी जल्द ही 1800 विधायकों के आंकड़े को पार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। बीजेपी 1800 विधायकों का आंकड़ा पार करेगी बीजेपी नेता अमित मालवीय ने पार्टी की प्रगति पर अटूट विश्वास जताते हुए भविष्यवाणी की कि अगले दो वर्षों में बीजेपी पूरे देश में 1800 विधायकों की संख्या को आसानी से पार कर लेगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा एक पोस्ट में मालवीय ने भाजपा की इस उड़ान की तुलना कांग्रेस से भी की। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि इस रफ्तार से भाजपा अगले दो सालों में बिना किसी झिझक के 1800 सीटों का आंकड़ा पार कर जाएगी। मालवीय ने बताया कि 1985 में कांग्रेस अपने चरम पर लगभग 2018 विधायकों के साथ पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने तर्क दिया कि 1980 के दशक की राजनीतिक परिस्थितियां सत्ता को मजबूत करने और मतदाताओं को प्रभावित करने में आसान बना देती थीं, लेकिन बीजेपी का उदय धीरे-धीरे, लगातार और कड़ी मेहनत से हुआ है। जहां कांग्रेस को यह शिखर वंशानुगत विरासत में मिला, वहीं भाजपा ने इसे सीट-दर-सीट, राज्य-दर-राज्य और संघर्ष-दर-संघर्ष अर्जित किया। अपने पोस्ट में अमित मालवीय ने दोनों राष्ट्रीय दलों के बीच तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि भाजपा की सफलता निरंतर परिश्रम का फल है। उन्होंने जोर देकर लिखा कि अंतर स्पष्ट है, कांग्रेस को शिखर विरासत में मिला, भाजपा ने इसे कमाया। भविष्य उस पार्टी का है जो काम करती है, न कि जो वंशवाद पर टिकी रहती है। भाजपा के विधायकों की संख्या में वृद्धि पार्टी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 के बाद से भाजपा के विधायकों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है… वर्ष               भाजपा विधायकों की संख्या 2014              1,035 2015              997 2016              1,053 2017            1,365 2018            1,184 2019          1,160 2020          1,207 2021            1,278 2022            1,289 2023           1,441 2024          1,588 2025          1,654 2025 में 1654 विधायकों का आंकड़ा भाजपा का अब तक का सर्वाधिक है।

किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त 19 नवंबर को, हर किसान को 2-2 हजार रुपए मिलेंगे

नई दिल्ली पीएम किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार की लोकप्रिय योजनाओं में शामिल है। इस योजना से मध्यप्रदेश के लाखों किसानों को सालाना 6000 रुपए की आर्थिक सहायता मिलती है। 3 किस्तों में मिलने वाली ये राशि 4-4 महीने के अंतराल पर पात्र किसानों के खातें में डायरेक्ट आ जाती है। अब तक योजना के तहत किसानों को 20 किस्ते जारी कि जा चुकी हैं। अब किसानों के खातें में योजना की 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) ट्रांसफर की जाएगी।  इस योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को 2-2 हजार रुपए की तीन किस्तें साल में (कुल 6000 रुपए) दी जाती हैं। यह राशि लाभार्थियों के बैंक खातों जमा कर दी जाती है। कुछ राज्यों को पहले ही मिल चुकी 21वीं किस्त केंद्र सरकार ने कुछ राज्यों में 21वीं किस्त पहले ही जारी कर दी है। 26 सितंबर 2025 को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों को ये किस्त दी गई, क्योंकि इन राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अग्रिम राहत दी गई थी। इसके अलावा 7 अक्टूबर 2025 को जम्मू-कश्मीर के किसानों को भी ये किस्त मिल चुकी है। बाकी राज्यों को नवंबर में भुगतान होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत किसानों के खाते में हर साल तीन किश्तों में 2-2 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाते हैं। पहली किस्त अप्रैल-जुलाई के बीच, दूसरी किस्त अगस्त-नवंबर और तीसरी किस्त दिसंबर-मार्च के बीच जारी की जाती है। 2 अगस्त को 20वीं किस्त जारी की गई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 अगस्त को किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 20वीं किस्त जारी की थी। PM मोदी वाराणसी उत्तर प्रदेश से 9.7 करोड़ किसानों के अकाउंट में 20वीं किस्त के रूप में 20.84 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे। PM-किसान योजना 2019 में शुरू हुई थी PM-Kisan योजना फरवरी 2019 में शुरू हुई थी। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए भेजी जाती है। अभी देशभर में 10 करोड़ से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त जानकारी के अनुसार, 2 अगस्त को योजना से जुड़े देशभर के किसानों के खाते में 20वीं किस्त जारी कि गई थी। अब 3 महीने का समय में बीत चुका है। ऐसे में करोड़ों किसान 21वीं किस्त(PM Kisan 21th Installment) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि, केंद्र सरकार 19 नवंबर को पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी करेगी। 21वीं किस्त का लाभ मध्यप्रदेश सहित देशभर के 9 करोड़ से अधिक पात्र किसानों को मिलने वाला है। इस किस्त के लिए सरकार कुल 18 हजार करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित करेगी। पात्रता की मुख्य शर्तें     आवेदक मध्य प्रदेश के स्थायी निवासी हो     वे किसान, जिनके पास कृषि योग्य भूमि हो     दो हेक्टेयर या उससे कम भूमि हो     आवेदक किसान के पास आधार कार्ड हो     बैंक अकाउंट होना भी अनिवार्य है     पीएम किसान के लिए फार्मर आइडी अनिवार्य

पंडुम कैफे का शुभारंभ बस्तर में नक्सल उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का प्रेरक प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए आज जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का शुभारंभ किया। यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और समर्पण कर चुके सदस्यों के पुनर्वास हेतु छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सम्मानजनक और स्थायी आजीविका प्रदान करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। यह अनूठी पहल संघर्ष से सहयोग तक के प्रेरणादायक सफर को दर्शाती है।‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में स्थित है। मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘पंडुम कैफे’ में कार्यरत नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत की। उन्होंने नई शुरुआत के लिए उनका हौसला बढ़ाया और ‘पंडुम कैफ़े’ के बेहतर संचालन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पंडुम कैफ़े का शुभारंभ बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में हो रहे सकारात्मक परिवर्तन का एक प्रेरक प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने साय ने कहा कि पंडुम कैफे आशा, प्रगति और शांति का उज्ज्वल प्रतीक है। कैफे में कार्यरत युवा, जो नक्सली हिंसा के पीड़ित तथा हिंसा का मार्ग छोड़ चुके सदस्य हैं, अब शांति के पथ पर अग्रसर हो चुके हैं। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से उन्हें आतिथ्य सेवाओं, कैफ़े प्रबंधन, ग्राहक सेवा, स्वच्छता मानकों, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता कौशल का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति के पथ पर लौटे और कैफ़े में कार्यरत एक महिला ने इस अवसर पर भावुक होकर इस पुनर्वास पहल से हुए बदलाव की बात दोहराई। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा कि,“हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।” एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि,“पहले हम अपने परिवार को सम्मानजनक जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।” एक अन्य सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर जोर देते हुए कहा कि,“हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।” उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाता है, और इसकी टैगलाइन “जहाँ हर कप एक कहानी कहता है” इस बात का प्रतीक है कि यहाँ परोसी गई कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर विजय और एक नई शुरुआत की कहानी भी अपने साथ लेकर आती है। इस अवसर पर वन मंत्री  केदार कश्यप, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, सांसद महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, बेवरेज कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास राव मद्दी, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, संभागायुक्त डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीगण भी उपस्थित थे।

रॉबर्ट वाड्रा बोले- लोग चाहेंगे तो राजनीति में आएंगे, बिहार चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद उठी मांग

इंदौर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति और बिज़नेसमैन रॉबर्ट वाड्रा ने अपनी राजनीतिक पारी को लेकर बड़ा बयान दिया हैं. इंदौर में उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए राजनीति में आने के संकेत दिए. इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला किया.  रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि मैं राजनीति में आऊंगा तो लोग परिवारवाद कहने लगेंगे लेकिन अगर लोग चाहेंगे तो में राजनीति में आएंगे, अगर हम संसद में होंगे तो लोगों की बात को और बात को मजबूत करेंगे. वहीं बेटे रेहान के राजनीति में एंट्री के सवाल पर उन्होंने हा कि अभी ये सही समय नहीं है.   प्रियंका गांधी के पति और कांग्रेस नेता रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार चुनाव परिणामों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता हालिया चुनाव नतीजों से किसी भी तरह खुश नहीं है। उन्होंने कहा कि जो परिणाम सामने आए हैं, वे जनता की मर्जी नहीं बल्कि चुनाव आयोग की भूमिका का नतीजा हैं। वाड्रा ने कहा कि बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए, क्योंकि मौजूदा परिणामों पर भरोसा करना मुश्किल है। जनता का फैसला इससे अलग होता  इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए वाड्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की मदद से यह परिणाम सामने लाए गए हैं और जनता का असली फैसला इससे अलग होता। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ देशभर के युवा लगातार जुड़ रहे हैं। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उनके मुताबिक, अगर बिहार में दोबारा चुनाव कराए जाते हैं तो नतीजे बिल्कुल बदल जाएंगे। एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया वाड्रा ने कहा कि इस समय रेहान को राजनीति में डालने का सही समय नहीं है. रेहान राजनीति देखी है सीखा है और गांधी परिवार के संघर्ष को भी महसूस किया है. रॉबर्ट वाड्रा ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि रेहान ने यह भी देखा है कि किस हद तक बीजेपी एजेंसी का प्रयोग करती है.  बीजेपी हर एक चुनाव में हमारे नाम का प्रयोग करती है. बिहार के रिजल्ट से लोग हैरान है खुश नहीं है. चुनाव आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में मदद की जिसकी वजह से ऐसे नतीजे आए हैं. बिहार में जो हुआ वो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है. एनडीए वाले अपने वादे को पूरा नहीं कर पाएगी.  बिहार में फिर चुनाव कराने की माँग इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने बिहार के नतीजों पर सवाल उठाते हुए दावा किया था कि बिहार में चुनाव सही तरीके से नहीं कराए गए. अगर राड्य में दोबारा चुनाव कराए जाएंगे तो नतीजे पूरी तरह से बदल जाएंगे. युवा इन दिनों एनडीए सरकार की योजनाओं से परेशान हैं और सरकार को बदलना चाहते हैं.  आपको बता दें कि रॉबर्ट वाड्रा इन दिनों इंदौर और उज्जैन में धार्मिक यात्रा पर है. इस दौरान उन्होंने बिहार चुनाव को लेकर पत्रकारों से बात करते हुए अपनी राय भी रखी है.  महाकाल के दर्शन करने पहुंचे थे वाड्रा इंदौर प्रवास के दौरान वाड्रा ने अपने धार्मिक कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे दो दिनों तक मध्य प्रदेश में रहेंगे और इस दौरान उज्जैन एवं ओंकारेश्वर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। बिहार की जनता इससे खुश नहीं रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि बिहार की जनता वास्तव में इन नतीजों से खुश नहीं है। जो कुछ हुआ है, वह पूरी तरह चुनाव आयोग की वजह से हुआ है। आयोग ने जिस तरह मदद की, उसके बाद जो परिणाम आए हैं, उनसे कोई भी सहमत नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के साथ अब बड़ी संख्या में युवा जुड़ रहे हैं और सभी मिलकर लोकतंत्र के लिए आंदोलन खड़ा करेंगे। यह चुनाव किसी भी तरह निष्पक्ष नहीं था, इसलिए बिहार में दोबारा मतदान होना चाहिए। अगर फिर से चुनाव हुए तो नतीजे पूरी तरह बदल जाएंगे।

अयोध्या: राम मंदिर में आज ध्वजारोहण, विशेष मुहूर्त चयनित, मोबाइल फोन पर प्रतिबंध

अयोध्या राम मंदिर में 25 नवंबर को होने वाला ध्वजारोहण समारोह स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोह की गरिमा के साथ संपन्न होगा। वैदिक परंपराओं और आधुनिक शिष्टाचार के बीच सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक निर्धारित शुभ मुहूर्त में ध्वजारोहण की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी। इसी अवधि के भीतर चुने गए 30 मिनट के श्रेष्ठ मुहूर्त में ध्वज फहराया जाएगा। यह मुहूर्त दोपहर 12 से 12:30 बजे तक होगा। समारोह की सबसे महत्वपूर्ण घड़ी वह क्षण होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत स्वतंत्रता दिवस के अनुरूप ही ध्वज फहराने की प्रक्रिया पूरी करेंगे। ध्वज को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सलामी दी जाएगी। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और मंगल वाद्य की ध्वनि पूरे परिसर में गूंजेगी। ध्वज फहराते ही मंदिर परिसर में घंटे-घड़ियाल बजने लगेंगे। समारोह को उसी शिष्टाचार के साथ आयोजित किया जा रहा है जैसा राष्ट्रीय पर्वों पर देखने को मिलता है। ध्वजारोहण की पूरी प्रक्रिया सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। परिसर को पारंपरिक ध्वजों, पुष्प और दीप से सजाया जा रहा है। शहरभर में सुरक्षा, यातायात और आगंतुकों की सुविधा की विशेष व्यवस्था की गई है। रोड शो भी कर सकते हैं ध्वजारोहण समारोह में आ रहे पीएम मोदी राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में 25 नवंबर को आगमन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में रोड शो भी कर सकते हैं। सोमवार या मंगलवार को एसपीजी के आने पर पीएम मोदी के एयरपोर्ट से राम मंदिर तक का रूट फाइनल होने के बाद इस बारे में अंतिम निर्णय किया जाएगा। पीएम मोदी के लिए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक रूप से दो रूट तय किए हैं। पहला विकल्प एयरपोर्ट से महोबरा बाजार होते हुए राम मंदिर तक सड़क मार्ग से जाना प्रस्तावित है। यह मार्ग करीब 12 किमी लंबा है। दूसरे विकल्प के रूप में एयरपोर्ट से हेलीकाप्टर से साकेत कॉलेज में बने हेलीपैड पर उतर कर राम मंदिर तक जाना प्रस्तावित किया गया है। यह मार्ग सिर्फ एक किमी लंबा है। इन दोनों मार्गों पर पीएम के संभावित आवागमन के लिए सुरक्षा व अन्य व्यवस्था से जुड़ी सभी तैयारियां की जा रही हैं। साकेत कॉलेज में तीन हेलीपैड बन कर तैयार हो गए हैं।प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकरी कई चरणों में इन दोनों प्रस्तावित मार्गों का निरीक्षण कर चुके हैं। एसपीजी के आने के बाद इन दोनों में से कोई एक मार्ग पीएम मोदी के लिए फाइनल किया जाएगा। इसके बाद मार्ग के दोनों लेन पर बैरिकेडिंग करवाई जाएगी। आसपास के घरों और अन्य भवनों पर पीएम के काफिले की मूवमेंट के दौरान सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे। सड़क मार्ग पर भी फोर्स मुस्तैद रहेगी। रोड शो पर भी अंतिम निर्णय एसपीजी की सहमति मिलने के बाद ही किया जाएगा।