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कटेझिरिया जंगल में पुलिस-नक्सली मुठभेड़, नक्सली अभी भी फरार, सर्च ऑपरेशन जारी

बालाघाट:  देश के गृह मंत्री अमित शाह के एलान के बाद लगातार नक्सलियों पर एक्शन जारी है. छत्तीसगढ़ में आए दिन नक्सलियों को या तो खत्म किया जा रहा है, या फिर वे खुद सरेंडर कर रहे हैं. अमित शाह ने नक्सलवाद को मार्च 2026 तक जड़ से खत्म करने की डेडलाइन फिक्स की है. जिसके बाद नक्सलवाद वाले राज्यों में जवानों द्वारा नक्सलियों पर नकेल कसने का काम जारी है. वहीं बालाघाट में एक बार फिर सुरक्षा बल के जवानों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबर आई है. बताया जा रहा है कि रूपझर थाना क्षेत्र के पचामा जंगल में सोमवार देर रात से ये यह मुठभेड़ जारी है. देर रात हुई फायरिंग एएसपी आदर्शकांत शुक्ला के अनुसार, देर रात करीब 11 से 12 बजे के बीच सर्चिंग टीम को पांच नक्सली दिखे। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी गोलीबारी की। इस मुठभेड़ में अभी तक किसी के हताहत होने की कोई जानकारी नहीं है। मुठभेड़ के बाद नक्सलियों की तलाश के लिए पुलिस ने जंगल में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियों को उतारकर तलाशी अभियान तेज कर दिया है। 14 जून को चार नक्सलियों को मारा था उल्लेखनीय है कि कटेझिरिया का यह वही जंगल है जहां बीते 14 जून को सुरक्षाबलों ने 14-14 लाख रुपए के चार इनामी नक्सलियों – रीता उर्फ तुब्बी श्रीरांगु हिडामी (पति चंदू उर्फ देवचंद), रवि, तुलसी उर्फ विमला उर्फ ईमला और सुमन को मार गिराया था। एक ने किया था सरेंडर हाल ही में, 1 नवंबर को तीन राज्यों (छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश) की मोस्ट वांटेड, 14 लाख रुपए की इनामी नक्सली सुनीता आयाम ने बालाघाट पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है। बालाघाट में जवानों और नक्सलियों के बीच फायरिंग अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदर्श कांत शुक्ला ने ईटीवी भारत को बताया कि "पचामा जंगल में देर रात से जवानों और नक्सलियों के बीच एक्सचेंज ऑफ फायर जारी है. जंगल में 800 से अधिक जवान तैनात हैं. जवानों ने सर्च ऑपरेशन को और भी तेज कर दिया है. हालांकि उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी भी नक्सली के हताहत होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है." महिला नक्सली के सरेंडर के बाद मुठभेड़ जानकारी के लिए बताते चलें कि दो दिन पहले यानि रविवार को ही छत्तीसगढ़ के बीजापुर की रहने वाली महिला नक्सली ने बालाघाट में आत्मसमर्पण किया है. उसके दूसरे ही दिन नक्सलियों ने गोलाबारी शुरू कर दी. जिसमें सुरक्षा बल के जवानों की तरफ से देर रात से लगातार जवाबी कार्रवाई जारी है. अपने महिला साथी के आत्मसमर्पण के बाद नक्सलियों की यह बौखलाहट दूसरे ही दिन सामने आई है. लगातार अपनी पकड़ बालाघाट में कमजोर होते देख नक्सलियों में अब निराशा और हताशा है. 12 साल बाद 2 नवंबर को नक्सली ने किया आत्मसमर्पण हालांकि रविवार को महिला नक्सली ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का फैसला लिया. मध्य प्रदेश नक्सली पुर्नवास सह रात नीति 2023 के तहत महिला नक्सली ने आत्मसमर्पण किया था. जिस महिला नक्सली सुनीता ने आत्मसमर्पण किया है, वह नक्सली गार्ड के रूप में काम करती थी. उस पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था. बालाघाट में 12 साल बाद किसी नक्सली ने सरेंडर किया है. इससे पहले साल 2013 में एक नक्सली ने पुलिस के सामने सरेंडर किया था. ज्ञात हो कि इसी पचामा के जंगल में सुरक्षा बल के जवानों ने इसी साल जून में 4 नक्सलियों को मार गिराया था. जिनमे तीन महिलाएं शामिल थीं. जिनके पास से विस्फोटक और हथियार भी बरामद किये गए थे.

रायपुर में सीएम साय ने युवाओं को दी ट्रैफिक नियमों की सीख, बाइक चलाकर दिया संदेश

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने स्वयं बाइक चलाकर युवाओं को दिया सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश रजत जयंती वर्ष के अवसर पर रायपुर में होगा एमआरएफ नेशनल सुपरक्रॉस चैम्पियनशिप 2025 का भव्य आयोजन रायपुर रजत जयंती वर्ष के अवसर पर रायपुर में होगा एमआरएफ नेशनल सुपरक्रॉस चैम्पियनशिप 2025 का भव्य आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर राजधानी रायपुर का बूढ़ापारा आउटडोर स्टेडियम आगामी 8 और 9 नवम्बर को रफ्तार, रोमांच और युवाओं के उत्साह का मंच बनेगा। रजत जयंती समारोह की श्रृंखला में आयोजित यह विशेष कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की नई ऊर्जा, नवाचार भावना और युवा सामर्थ्य का प्रतीक होगा। छत्तीसगढ़ मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित एमआरएफ नेशनल सुपरक्रॉस बाइक रेसिंग चैम्पियनशिप 2025 का यह भव्य आयोजन न केवल रोमांचक मोटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देगा, बल्कि युवाओं को सुरक्षित ड्राइविंग, हेलमेट पहनने और सड़क पर रेसिंग से बचने जैसे सामाजिक संदेश देने का भी माध्यम बनेगा। कार्यक्रम से पूर्व आज मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने स्वयं बाइक चलाकर युवाओं को “सेफ ड्राइविंग” का संदेश दिया। उन्होंने आगामी 8-9 नवंबर को आयोजित नेशनल सुपरक्रॉस बाइक रेसिंग चैंपियनशिप के सफल आयोजन के लिए अपनी  शुभकामनाएं देते हुए कहा, "युवाओं में अपार ऊर्जा है, और उस ऊर्जा को सही दिशा देना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।" मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं को सेफ ड्राइविंग का संदेश देते हुए कहा कि जीवन अनमोल है इसीलिए दुपहिया चलाते समय हमेशा हेलमेट पहने और ट्रैफिक नियमों का पालन करें ।सड़क पर रेसिंग बिल्कुल ना करें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि रजत जयंती वर्ष छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ ही नई पीढ़ी में अनुशासन, जिम्मेदारी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ का युवा केवल गति से नहीं, बल्कि संयम और संकल्प से पहचाना जाए। छत्तीसगढ़ मोटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष  उज्जवल दीपक ने बताया कि यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास है। उन्होंने कहा,"हम चाहते हैं कि रफ्तार जुनून बने, जोखिम नहीं — यही इस चैम्पियनशिप की असली सोच है।” इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि रेसिंग सड़क पर नहीं, बल्कि विशेष रूप से निर्मित सुरक्षित रेसिंग ट्रैक पर होगी, जहाँ सभी सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस दो दिवसीय सुपरक्रॉस चैम्पियनशिप में देश के शीर्ष राइडर्स हिस्सा लेंगे। एमआरएफ के सहयोग से आयोजित यह प्रतियोगिता छत्तीसगढ़ को देश के मोटर स्पोर्ट्स मानचित्र पर एक नई और सम्मानजनक पहचान दिलाने जा रही है।

उज्जैन को मिल रही है आस्था की नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन का एयरपोर्ट बनेगा राज्य का गौरव : मुख्यमंत्री डॉ. यादव उज्जैन को मिल रही है आस्था की नई उड़ान  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बनेगा बाबा महाकाल का अपना एयरपोर्ट  : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश सरकार ने बाबा महाकाल को भेंट स्वरूप उज्जैन में एयरपोर्ट निर्माण की प्रक्रिया की आरंभ सिंहस्थ महाकुंभ से पहले एयरपोर्ट का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के आसमान में विकास की उड़ान अब और ऊंची होने जा रही है। बाबा महाकाल की नगरी में बनने वाला एयरपोर्ट उज्जैन को वैश्विक हवाई मानचित्र पर एक नई पहचान देगा। यह एयरपोर्ट राज्य के अंतर्राष्ट्रीय गौरव को और बढ़ाएगा। राज्य सरकार विमानन क्षेत्र में अधोसंरचनात्मक विकास को योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ा रही है। एयर कनेक्टिविटी के इस विस्तार से न केवल पर्यटन और व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि प्रदेश का हर नागरिक “आसमान से जुड़ने” के सपने को साकार होता हुआ देखेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब सच्चे अर्थों में सभी क्षेत्रों में विकास की नई उड़ान भरने वाला भारत का दिल बन रहा है। हमारी सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से हवाई चप्पल पहनने वाले व्यक्ति को भी हवाई यात्रा का सुखद अनुभव कराने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां 2 इंटरनेशनल एयरपोर्ट सहित इंटर स्टेट एवं इन्ट्रा स्टेट एयर सर्विसेज वाले एयरपोर्ट्स भी होंगे। उज्जैन में बनने वाला एयरपोर्ट वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ मेले से पहले पूरी तरह तैयार कर लेने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि देश-विदेश से सिंहस्थ स्नान के लिए आने वाले लाखों-करोड़ों धर्मप्रेमी श्रद्धालु बड़ी सुगमता और न्यूनतम समय में बाबा महाकाल की नगरी पहुंच सकें। राज्य सरकार द्वारा सभी जिलों मे एयर स्ट्रिप्स विकसित करने की योजना फलीभूत होने से छोटे विमानों और हेलीकॉप्टर सेवाओं के माध्यम से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों को भी राजधानी और प्रमुख शहरों से जोड़ा जा सकेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल के आशीर्वाद से ही मध्यप्रदेश विकास के नए आयाम गढ़ रहा है। उज्जैन में एयरपोर्ट का निर्माण केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि यह प्रदेश की श्रद्धा, सेवा और स्वाभिमान का प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में वैमानिकी सुविधाओं के विस्तार के तहत सभी जिलों में एयर स्ट्रिप्स विकसित करने की योजना बनाई गई है। पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा, पीएम हवाई पर्यटन एयरप्लेन सर्विस और पीएम हवाई पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा के संचालन से मध्यप्रदेश, देश का पहला इंट्रा-स्टेट एयर सर्विसेज प्रारंभ करने वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन का यह एयरपोर्ट न केवल बाबा महाकाल की नगरी को आकाश से जोड़ेगा, बल्कि श्रद्धा, समृद्धि और सुशासन की उड़ान का साक्षी भी बनेगा। अपर मुख्य सचिव, विमानन  संजय कुमार शुक्ला ने बताया कि उज्जैन में एयरपोर्ट निर्माण के लिए एमओयू की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके साथ ही प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी और एविएशन फैसिलिटी बढ़ाने के लिए अगले चरण में कुछ और जिलों में भी एयरपोर्ट बनाने के लिए शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। पुरानी अवंतिका, नई उज्जयिनी— देश की आध्यात्मिक राजधानी उज्जयिनी जो युगों से धर्म, ज्ञान और शक्ति की धुरी रही है, अब आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर अग्रसर है। मध्यप्रदेश सरकार ने कालों के काल, भूत-भावन भगवान, अवंतिकानाथ बाबा महाकाल को भेंट स्वरूप उज्जैन में एयरपोर्ट निर्माण का निर्णय लिया है। यह एयरपोर्ट न केवल एक हवाई विकास परियोजना है, बल्कि आस्था और सेवा का प्रतीक भी है। सरकार द्वारा एयरपोर्ट निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया भी आरंभ कर दी गई है। राज्य के स्थापना दिवस अवसर पर एक नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  किंजरापु राममोहन नायडू की मौजूदगी में एक बड़ा काम पूरा हुआ। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और तय निर्माण एजेंसी के मध्य उज्जैन जिले की वर्तमान दताना-मताना हवाई पट्टी पर एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने के लिए तैयार विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर कर आदान-प्रदान किया गया। उज्जैन में बनने वाला हवाई अड्डा प्रदेश का नौंवा एयरपोर्ट होगा। इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 तक मध्यप्रदेश में इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और खजुराहो में ही एयरपोर्ट थे। वर्ष 2024-25 के दौरान रीवा, दतिया और सतना में नए एयरपोर्ट बनकर तैयार हुए। अब उज्जैन के एयरपोर्ट की घोषणा के साथ ही राज्य में हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर कुल 9 हो जाएगी। उज्जैन का एयरपोर्ट वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ मेले से पूर्व तैयार कर लेने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों को हवाई मार्ग से सीधे बाबा महाकाल की नगरी में उतरने की विशेष सुविधा मिल जाएगी। राज्य सरकार का यह निर्णय उज्जैन को विमानन और पर्यटन के वैश्विक गंतव्य के रूप में भी स्थापित करेगा।  

नई उड़ान, नया क्षितिज: छत्तीसगढ़ में महतारियों के सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी

रायपुर : विशेष लेख : नई उड़ान, नया क्षितिज – छत्तीसगढ़ में महतारियों के सशक्तिकरण की कहानी रायपुर छत्तीसगढ़ अपने विकास-यात्रा के स्वर्णिम पड़ाव पर है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आधार बनी हैं – राज्य की महिलाएँ, जिन्हें स्नेह व सम्मान से “महतारी” कहा जाता है।बीते वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को केवल नीतिगत प्राथमिकता नहीं बनाया, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की धुरी के रूप में स्थापित किया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज महिलाएँ योजनाओं की लाभार्थी मात्र नहीं, परिवर्तन की वाहक बनकर उभरी हैं। राज्य में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए सरकार ने विविध योजनाएँ शुरू की हैं। सबसे उल्लेखनीय महतारी वंदन योजना है, जिसके तहत लगभग 70 लाख महिलाओं को अब तक 12,983 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है। यह सहायता महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि परिवार व समाज में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता भी प्रदान करती है। दीदी ई-रिक्शा योजना ने 12,000 महिलाओं को रोजगार के नए अवसर दिए। सक्षम योजना के तहत 32,000 महिलाओं को 3 प्रतिशत ब्याज पर 2 लाख रुपए तक व्यवसायिक ऋण दिया गया, जबकि महतारी शक्ति ऋण ने 50,000 महिलाओं को बिना जमानत ऋण प्रदान कर आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना से 1.15 लाख महिलाएँ घर-परिवार के साथ उत्पादन कार्य से जुड़कर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कोंडागांव की रतो बाई का जीवन कभी नक्सली भय से घिरा था। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से उन्हें 1.20 रुपए लाख और मनरेगा से 90 दिन का रोजगार मिला। आज वे पक्के घर में सुरक्षित जीवन जीती हैं और सब्ज़ी विक्रय के माध्यम से जीवन यापन करती हैं। उज्ज्वला, नल-जल जैसी सुविधाएँ उनके जीवन में प्रकाश भर रही हैं। दंतेवाड़ा जिले की गंगादेवी SHG की महिलाएँ आज टाटा मैजिक वाहन का संचालन कर 26,000 रुपए मासिक आय अर्जित कर रही हैं। यह उदाहरण बताता है कि ग्रामीण महिलाएँ अवसर मिलने पर कैसे नए व्यवसायों का संचालन कर सकती हैं। सरगुजा की मती श्यामा सिंह ने बिहान योजना के तहत 95,000 रुपए की सहायता से 30 सेंट्रिंग प्लेट से काम शुरू किया। आज उनके पास 152 प्लेट हैं तथा वे 50,000 रुपए प्रतिमाह कमाती हैं। कोरबा की मती मंझनीन बाई को DMF फंड से स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त होकर उन्हें 9,000 रुपए मासिक मानदेय मिलता है। यह न सिर्फ आर्थिक स्थिरता, बल्कि सामाजिक सम्मान भी देता है। कभी नक्सली हिंसा से भयभीत बस्तर आज नए परिदृश्य के साथ उभर रहा है। यह इलाका आत्मनिर्भरता, सम्मान और अवसरों की नई पहचान बन गया है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय कहते हैं कि “बस्तर का पुनर्निर्माण केवल सड़क या पुल बनाना नहीं, यह वहाँ के हर घर में विश्वास का दीप जलाने का संकल्प है।” केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15,000 विशेष आवास स्वीकृत किए, जिनमें से 3,000 बस्तर, सुकमा, कांकेर, बीजापुर और दंतेवाड़ा में बन रहे हैं। अब तक 12,000 से अधिक लोग सुरक्षित आवास पा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में महिला SHG की संख्या 2,80,362 है, जिनमें से लगभग 60,000 समूह बस्तर में सक्रिय हैं। वनोपज और हस्तशिल्प आधारित उद्यमों से करोड़ों का कारोबार हो रहा है। “लखपति महिला मिशन” के अंतर्गत 2,000 महिलाएँ सालाना 1 लाख रुपए से अधिक कमाती हैं। ‘जशप्योर’ और बस्तर बेंत उत्पाद राष्ट्रीय पहचान पा चुके हैं। महिलाएँ अब रोजगार पाने तक सीमित नहीं, बल्कि रोजगार-दाता भी बन रही हैं। स्वास्थ्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार की उज्ज्वला योजना के अंतर्गत स्वीकृत 25 लाख नए  LPG कनेक्शन में से 1.59 लाख कनेक्शन छत्तीसगढ़ को मिले, जिससे नियद नेल्लानार ग्रामों की महिलाएं भी लाभान्वित हो रही है। मुख्यमंत्री  साय कहते हैं -“स्वच्छ रसोई, स्वस्थ परिवार और सशक्त महिला – यही उज्ज्वला का सार है। छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में सखी वन-स्टॉप सेंटर स्थापित हैं, महिला हेल्पलाइन – 181, डायल – 112, 24’7 कार्यरत हैं। नवाबिहान योजना से कानूनी व परामर्श सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना से 3 लाख किशोरियाँ लाभान्वित हो रही हैं। 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीन लगाई गई है। इन पहलों ने महिलाओं के मन में सुरक्षा और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा भरी है। योजनाएँ महिलाओं को तकनीक-आधारित सशक्तिकरण की ओर ले जा रही हैं। ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जशप्योर ब्रांड से लगभग 500 महिलाएँ, 10,000 रुपए प्रति माह कमा रही हैं। नवा रायपुर के यूनिटी मॉल में SHG उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है। ये नारी शक्ति को स्थानीय से राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने का मार्ग तैयार कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े कहती हैं कि “नया छत्तीसगढ़ वह होगा जहाँ भय नहीं, विश्वास होगा, जहाँ महिलाएँ आश्रित नहीं, सशक्त होंगी। ”आज छत्तीसगढ़ का हर गाँव, हर घर, हर परिवार में बदलाव की अग्नि प्रज्वलित है। जहाँ पहले भय था – वहाँ आज आत्मनिर्भरता है। जहाँ मजबूरी थी- वहाँ आज सम्मान है। छत्तीसगढ़ की महतारियाँ अब परिवर्तन की राह नहीं देख रहीं- वे स्वयं परिवर्तन की दिशा रच रही हैं।        डॉ. दानेश्वरी संभाकर       उप संचालक, जनसंपर्क विभाग           छत्तीसगढ़ सरकार

‘सबके लिए रोशनी, सबके लिए प्रगति’ – डॉ. यादव ने बताया राज्य सरकार का विज़न

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समाधान योजना से प्रदेश के 90 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ होगा। यह योजना उन उपभोक्ताओं के लिए राहत का द्वार खोल रही है, जो किसी कारणवश समय पर अपने बिजली बिल नहीं भर पाए। इस योजना में तीन माह या उससे अधिक समय से बिल बकाया रखने वाले घरेलू, गैर घरेलू ,कृषि तथा औद्योगिक उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत तक सरचार्ज में छूट प्रदान की जाएगी। योजना से बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलने के साथ ही राज्य की बिजली व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी। इस कदम से जनता का भरोसा और शासन की पारदर्शिता एक साथ बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट का बटन दबाकर समाधान योजना की शुरूआत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पॉवर मैनेजमेंट कंपनी का नया भवन, कंपनियों के प्रबंधन और कार्य क्षमता में वृद्धि में सहायक होगा। नए भवन से ऊर्जा प्रबंधन और जन सामान्य से बेहतर समन्वय में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव समाधान योजना के शुभारंभ और एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश की ऑल राउंडर महिला क्रिकेट खिलाड़ी क्रांति गौड़ को एक करोड़ रुपए प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को एमपी पॉवर मैनेजमेंट कम्पनी क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। आमजन की समस्याओं का त्वरित निराकरण कर दें संवेदनशीलता का परिचय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "समाधान योजना' 2025-26" से प्रदेश के 90 लाख उपभोक्ताओं का 3 हजार करोड़ रुपये से अधिक बिजली बिल पर सरचार्ज माफ किया जा रहा है। समाधान योजना में 3 माह तक का सरचार्ज रखने वाले उपभोक्ताओं को 100 प्रतिशत सरचार्ज छूट का लाभ मिलेगा। ऊर्जा विभाग के सोमवार को लोकार्पित भव्य भवन से विभाग में कार्यरत तीनों कंपनियों के संचालन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह नया भवन ऊर्जा प्रबंधन, तकनीकी नवाचार और जनसेवा का केन्द्र बनेगा। किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार संकल्पित है। आशा है विभागीय अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधियों से सतत् संवाद और आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण से अपनी संवेदनशीलता का परिचय देंगे। वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत नवकरणीय स्त्रोतों से पूर्ण करने का है हमारा लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार "सबके लिए रोशनी-सबके लिए प्रगति'' का ध्येय लेकर प्रदेश में गतिविधियां संचालित कर रही है। खेत हो या कारखाने, शहर हो या गांव हर घर में रोशनी इसका प्रमाण है। ऊर्जा विभाग से वर्ष 2024-25 में लगभग 35 लाख से अधिक किसानों को 18 हजार करोड़ रूपए से अधिक की बिजली सब्सिडी दी गई। राज्य सरकार ने विभिन्न नीतिगत निर्णयों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा और सतत् विकास को प्राथमिकता दी। इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी, रिन्यूबल एनर्जी पॉलिसी 2025 और पंप हाइड्रो पॉलिसी-2025 के अंतर्गत औद्योगिक निवेश के लिए कई आकर्षक प्रोत्साहन दिए गए हैं। राज्य में 62 गीगावाट सौर, 11 गीगावाट पवन, 4 गीगावाट बॉयोमास और 820 मेगावाट लघु जल विद्युत की क्षमता है। हमारा लक्ष्य 2030 तक 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत नवकरणीय स्त्रोतों से पूर्ण करने का है। मुरैना में विकसित हो रही प्रदेश की पहली सोलर प्लस स्टोरेज परियोजना में 2.70 रूपये प्रति यूनिट बिजली अब तक की सबसे कम टैरिफ दर पर प्राप्त हुई है। यह अपने-आप में रिकार्ड है। शुभ है स्थापना दिवस उत्सव के दौरान समाधान योजना का आरंभ होना मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में तीन दिवसीय स्थापना दिवस महोत्सव मनाया जा रहा है। इस दौरान समाधान योजना का शुभारंभ और नए भवन का लोकार्पण शुभ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य केन्द्रित महानाट्य प्रदेश के गौरवशाली अतीत की झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने भोपाल के लाल परेड ग्राउंड पर प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और प्रगति पर केन्द्रित प्रदर्शनियों और आयोजनों में सहभागी होने का उपस्थित जनसमुदाय से आह्वान किया। समाज के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक बिजली पहुंचाना है हमारा लक्ष्य : ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में सभी स्तर पर ऊर्जा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। हम अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की सुविधा को देखते हुए कार्य कर रहे हैं। आज आरंभ हुई समाधान योजना सुशासन और संवेदनशीलता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा विभाग से संबंधित प्रस्तावों को डॉ. यादव ने सहजता से स्वीकार किया। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित किया जायेगा। कार्यक्रम में समाधान योजना पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। समाधान योजना 2025-26 : एक नजर में समाधान योजना 2025-26 का उद्देश्य 3 माह से अधिक अवधि के उपभोक्ताओं को बकाया विलंबित भुगतान के सरचार्ज पर छूट प्रदान करना है। यह योजना "जल्दी आएं, एकमुश्त भुगतान कर ज्यादा लाभ पाएं'' के सिद्धांत पर आधारित है। इस योजना में उपभोक्ता को प्रथम चरण में एकमुश्त भुगतान करने पर सबसे अधिक लाभ होगा जबकि द्वितीय चरण के दौरान छूट का प्रतिशत क्रमशः कम होता जाएगा। समाधान योजना दो चरणों में चलेगी। प्रथम चरण 3 नवंबर से 31 दिसंबर 2025 तक होगा, जिसमें 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय और अंतिम चरण में यह योजना एक जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक लागू रहेगी। इसमें 50 से 90 फ़ीसदी तक सरचार्ज माफ किया जाएगा। प्रथम चरण में एकमुश्त राशि जमा कराने पर अधिकतम लाभ होगा। समाधान योजना 2025-26 का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को विद्युत वितरण कंपनियों यथा म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल हेतु portal.mpcz.in, म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी जबलपुर हेतु https://www.mpez.co.in/ एवं म.प्र.पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर हेतु https://www.mpez.co.in/ पर पंजीयन कराना होगा। पंजीयन के दौरान अलग-अलग उपभोक्ता श्रेणी के लिए पंजीयन राशि निर्धारित की गई है। घरेलू एवं कृषि उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 10 प्रतिशत तथा गैर घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता कुल बकाया राशि का 25 प्रतिशत भुगतान कर पंजीयन कराकर योजना में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं। विस्तृत विवरण तीनों कंपनियों की वेबसाइटों पर भी देखा जा सकता है। साथ ही विद्युत वितरण केंद्र … Read more

मध्यप्रदेश में परंपरा और प्रगति का संगम, डॉ. यादव बोले – ‘विरासत के साथ तेज़ी से हो रहा विकास’

मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ किए जा रहे हैं विकास के तीव्र प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन हमारी समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत करने का माध्यम बना 70वें मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह अभ्युदय मध्यप्रदेश के तीसरे व अंतिम दिन ड्रोन शो, महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य और सुप्रसिद्ध गायिका स्नेहा शंकर की सुगम संगीत प्रस्तुति भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विरासत के संरक्षण के साथ विकास के तीव्र प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार मध्यप्रदेश विरासत के संरक्षण में आगे है। विकास के अनूठे कदम उठाए गए हैं। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन हमारी समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास को प्रस्तुत करने का माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन ऐतिहासिक नगरी है, जहां भगवान कृष्ण ने सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। बाबा महाकाल की कृपा उज्जैन पर है। सम्राट विक्रमादित्य ने कलयुग में भी सतयुग जैसा और भगवान राम की तरह शासन किया। ज्ञान, न्याय, दानशीलता, शौर्य के गुणों से उन्हें महान शासक की संज्ञा मिली। उन्होंने विक्रम संवत को प्रारंभ किया। प्रदेश के विकास के लिए उठाए गए महत्वपूर्ण कदम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 2 वर्ष में प्रदेश के विकास के लिए अनूठे कदम उठाए गए हैं। मात्र डेढ़ वर्ष की अवधि में राज्य में 18 मेडिकल कॉलेज खुले हैं। आयुर्वैदिक मेडिकल कॉलेज खोलने में मध्यप्रदेश में सबसे आगे है। पीएम एक्सीलेंस कॉलेज सभी जिलों में हैं। राज्य के सभी जिलों में पुलिस बैंड के दल गठित किए गए। इसके लिए रिक्त पदों की पूर्ति की गई। आयोजनों को गरिमा मेय बनाने के लिए पुलिस बैंड का उपयोग व्यापक स्तर पर सराहा गया है। पुलिस बैंड के सदस्यों को आवश्यक प्रशिक्षण भी दिलवाया गया। हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर केवड़िया (गुजरात) में हुए कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के पुलिस बैंड दल का उपयोग किया गया। निश्चित ही यह मध्य प्रदेश के लिए गर्व और गौरव की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजा भोज भी प्रदेश के एक प्रतापी शासक थे। उनका शासन काल सम्राट विक्रमादित्य से लगभग 1000 साल बाद का रहा। भोपाल में स्थित विशाल सरोवर भोजताल कहलाता है। भारतीय संस्कृति के ऐसे पुरोधा और सुशासन देने वाले शासको की स्मृति में आयोजनों का सिलसिला चलता रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के कार्यक्रम "अभ्युदय मध्यप्रदेश" के समापन पर बधाई और शुभकामनाएं दी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस महानाट्य मंचन से जुड़े रहे हैं। संस्कृति में उनकी विशेष रूचि है। सम्राट विक्रमादित्य की खूबियों को नाटक के माध्यम से मंच पर लाने का कार्य करीब दो दशक से चल रहा है। भोपाल के निवासियों को पहली बार यह प्रस्तुति देखने को मिली है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सांस्कृतिक जगत में दिए जा रहे निर्देशन की सराहना की। कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, परिवहन, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उईके, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महिला बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री मती कृष्णा गौर, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मंत्री नारायण सिंह पवार और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल उपस्थित थे। इस अवसर पर भोपाल प्रवास पर आए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित थे। देश के हृदय – मध्यप्रदेश ने अपने 70वें स्थापना दिवस पर “अभ्युदय मध्यप्रदेश” के रूप में संस्कृति, परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम हुआ, जिससे हर दिल गर्व और उत्साह से भर गया। तीन दिनों तक चले इस भव्य समारोह में प्रदेश की लोक कलाओं, विविधताओं और विकास गाथा के मंचन ने बीते 70 वर्षों की यात्रा को सजीव कर दिया। सोमवार की शाम समारोह के समापन पर हर चेहरा मध्यप्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की नई उम्मीदों से झिलमिला रहा था। स्थापना दिवस के उत्सव के तीसरे एवं अंतिम दिवस भी भव्य ड्रोन शो का प्रदर्शन किया गया। इस शो में 2000 ड्रोन ने एक साथ "विरासत से विकास'' पर केन्द्रित आसमान में आकृतियां बनाईं। इन आकृतियों में मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत के साथ सशक्त वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य की आकृतियां आसमान को रोशन कर रही थीं। इसमें उद्योग और आधुनिकरण, रोजगार, विज्ञान, नीलकंठ आलोक, संस्कृति और विकास का संगम इत्यादि देखने को मिला। सोमवार की शाम सर्वप्रथम महानाट्य "सम्राट विक्रमादित्य" का भव्य मंचन हुआ। दर्शकों के उत्साह और उमंग को देखते हुए इसका पुनः प्रदर्शन किया गया। यह महानाट्य मध्यप्रदेश के वैभवशाली अतीत के उस प्रेरणा–पुरुष की गाथा प्रस्तुत करता है, जिन्होंने न्याय, नीति और पराक्रम के बल पर उज्जयिनी एवं मध्यप्रदेश की भूमि को स्वर्ण युग में पहुँचाया। मंचन में सम्राट विक्रमादित्य के अदम्य साहस, उनकी प्रजावत्सलता और विद्या-संस्कृति के प्रति उनके समर्पण को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया। भव्य संगीत, आकर्षक सेट, ऊंट, हाथी, घोड़े, पालकियों ने दर्शकों को उसी युग में पहुंचा दिया। कलाकारों के उत्कृष्ट अभिनय ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। इस महानाट्य की प्रस्तुति उज्जैन की संस्था विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति द्वारा दी गई, जिसका निर्देशन संजीव मालवीय ने किया है। तीन अलग स्टेज पर अत्याधुनिक ग्राफिक, आश्रम एवं जंगल के भव्य सेट के साथ ही भव्य महाकाल मंदिर के प्रतिरूप सेट और 150 कलाकारों ने महानाट्य को जीवंत बना दिया। विक्रमादित्य केवल योद्धा नहीं, बल्कि न्यायप्रिय और प्रजावत्सल शासक थे। “बेताल पच्चीसी” और “सिंहासन बत्तीसी” उनकी विवेकपूर्ण न्याय कथाओं से परिपूर्ण हैं। उनके दरबार में कालिदास, वराहमिहिर, धन्वंतरि जैसे नवरत्न विद्या और संस्कृति के प्रतीक बने। यह युग भारत के विज्ञान, साहित्य और खगोल की प्राचीन समृद्धि का प्रमाण है। स्वर की कोमलता ने हृदय को छुआ महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” की यादगार और भव्य प्रस्तुति के बाद सुप्रसिद्ध गायिका सु स्नेहा शंकर एवं साथी, मुंबई द्वारा सुगम संगीत की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। उनकी गायकी में ऐसा सुरीलापन और … Read more

गीता ज्ञान के 5163 साल पूरे, CM सैनी ने बताया MP हमारा सहयोगी राज्य

CM सैनी: 25 को पीएम कुरुक्षेत्र आएंगे, 21 दिन चलेगा अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव गीता ज्ञान के 5163 साल पूरे, CM सैनी ने बताया MP हमारा सहयोगी राज्य कुरुक्षेत्र में 21 दिन तक अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव, पीएम मोदी 25 को करेंगे उद्घाटन चंडीगढ़ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने घोषणा की है कि 10वां अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 15 नवंबर से शुरू होकर 6 दिसंबर तक 21 दिनों तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष गीता उपदेश को 5163 वर्ष पूरे हो रहे हैं। गीता जयंती का आयोजन इस बार न केवल भारत में, बल्कि टोक्यो (जापान) में भी किया गया है, जो गीता के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है। मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि “गीता के ज्ञान से हर व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ सकता है। पूरा विश्व अब गीता की वाणी से जुड़ रहा है। महोत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।” इस बार मध्यप्रदेश सहयोगी राज्य के रूप में भाग लेगा, जबकि अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में 16 देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। ब्रह्मसरोवर पर रोज होगा भव्य आयोजन सैनी ने बताया कि महोत्सव के दौरान ब्रह्मसरोवर पर प्रतिदिन भव्य गीता महाआरती का आयोजन होगा। साथ ही विभिन्न भाषाओं में श्रीमद्भगवद गीता की प्रदर्शनी, गीता प्रतियोगिताएं और 1 दिसंबर तक गीता पुस्तक मेला भी आयोजित किया जाएगा। बलराम कुश्ती दंगल भी महोत्सव का हिस्सा रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र पहुंचकर महोत्सव में भाग लेंगे। प्रारंभिक कार्यक्रम 4 नवंबर से मुख्य कार्यक्रमों से पहले कई आयोजन 4 नवंबर से शुरू होंगे। इनमें 4 से 14 नवंबर तक ऑनलाइन गीता क्विज, 15 नवंबर को ‘गीता रन’, और 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक शिल्प एवं सरस मेला शामिल हैं। रोजाना सायं पुरुषोत्तमपुरा बाग में भजन संध्या व महाआरती का आयोजन होगा। मुख्य कार्यक्रम 24 नवंबर से 1 दिसंबर तक महोत्सव के प्रमुख कार्यक्रम 24 नवंबर से 1 दिसंबर तक चलेंगे। इस दौरान हरियाणा पवेलियन, पुस्तक मेला, प्रदर्शनी, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार होगा। 24 नवंबर को गीता यज्ञ, गीता पूजन, सर्वधर्म सम्मेलन, और ज्योतिसर एवं सन्निहित सरोवर में गीता पाठ के कार्यक्रम होंगे। 25 से 30 नवंबर तक विश्वविद्यालय में सेमिनार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, और शिक्षा विभाग द्वारा गीता श्लोकोच्चारण, वाद-विवाद, निबंध लेखन, पेंटिंग, रंगोली और मेहंदी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 1 दिसंबर को सुबह 9 बजे ज्योतिसर में गीता पाठ और यज्ञ, थीम पार्क में वैश्विक गीता पाठ, तथा सायं सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर पर दीपोत्सव और महाआरती होगी। दुनिया के 40 देशों तक पहुंचेगा संदेश विदेश मंत्रालय की पहल पर इस बार गीता महोत्सव के कार्यक्रम 40 से ज्यादा देशों में आयोजित होंगे। इनमें प्रदर्शनी और गीता पाठ जैसे आयोजन शामिल हैं। कुरुक्षेत्र में होने वाले मुख्य कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण भी विश्वभर में देखा जा सकेगा। 15 से अधिक देशों के 25 स्कॉलर भी महोत्सव में भाग लेंगे और गीता के उपदेश अपने देशों तक पहुंचाएंगे। 25 नवंबर को पीएम कुरुक्षेत्र आएंगे सीएम ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी दी कि हर दिन ब्रह्म सरोवर पर भव्य गीता महाआरती की जाएगी। सीएम ने बताया कि विभिन्न भाषाओं में श्रीमद्भागवत की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। गीता प्रतियोगिता भी आयोजित की जाएगी। 1 दिसंबर तक गीता पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा। बलराम कुश्ती दंगल का आयोजन भी किया जाएगा। 25 नवंबर को कुरुक्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आएंगे। पहले ही शुरू हो जाएंगे कार्यक्रम महोत्सव से पहले ही कई कार्यक्रमों का आगाज हो जाएगा। इसमें चार से 14 नवंबर तक ऑनलाइन गीता क्विज, 15 नवंबर को गीता रन का आयोजन होगा। इसके अलावा 15 नवंबर से पांच दिसंबर तक शिल्प और सरस मेला चलेगा तथा रोजाना सायं के समय पुरुषोत्तमपुरा बाग में भजन संध्या और महाआरती का आयोजन होगा। 24 से होंगे मुख्य कार्यक्रम इस महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम 24 नवंबर से एक दिसंबर तक होंगे। इसमें हरियाणा पवेलियन, पार्टनर स्टेट, पुस्तक मेला, जनसंपर्क विभाग की राज्य स्तरीय प्रदर्शनी, पुरुषोत्तमपुरा बाग में मुख्य मंच पर दिन और सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम, 24 नवंबर को गीता यज्ञ, गीता पूजन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय गीता सेमिनार, सर्वधर्म सम्मेलन, ज्योतिसर व सन्निहित सरोवर पर श्रीमद् भगवद गीता और पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। ये होगा पूरा शेड्यूल… इसी तरह 25 नवंबर को विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार, ज्योतिसर व सन्निहित सरोवर पर कथा, पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम, 26 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार का समापन व पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम, 27 नवंबर को पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम, 28 से 30 नवंबर को शिक्षा विभाग की तरफ से गीता श्लोकोच्चारण, वाद विवाद, निबंध लेखन, पेंटिंग, रंगोली, मेहंदी सहित अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। एक दिसंबर को सुबह 9 बजे ज्योतिसर में गीता पाठ और यज्ञ, थीम पार्क में वैश्विक गीता पाठ, विश्वविद्यालय में 48 कोस तीर्थ सम्मेलन, सायं 5:30 पर सन्निहित सरोवर पर दीपोत्सव, 6 बजे ब्रह्मसरोवर पर दीपदान व आरती तथा पुरुषोत्तमपुरा बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 15 देशों के महोत्सव से जुड़ेंगे लोग इस बार विदेश मंत्रालय की पहल करने से महोत्सव के कार्यक्रमों का आयोजन 40 से ज्यादा देशों में होगा। इन देशों में प्रदर्शनी, गीता पाठ सहित अन्य कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इसके साथ ही कुरुक्षेत्र में होने वाले मुख्य कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण भी देखा जा सकेगा। इन देशों के नामों की सूची सरकार के पास पहुंच चुकी है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रयासों से 15 से ज्यादा देशों के 25 स्कालर भी महोत्सव में पहुंचेंगे और यहां से पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेश अपने अपने देशों तक पहुंचाएंगे।  

मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र: इंदौर को ग्लोबल हब बनाने की तैयारी तेज

इंदौर होगा 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब', केंद्र सरकार ने योजना पर किया काम शुरू मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र: इंदौर को ग्लोबल हब बनाने की तैयारी तेज इंदौर में उद्योग क्रांति: केंद्र सरकार का मेगा प्लान लागू होने लगा इंदौर  भारत सरकार ने देश के लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर का बनाने के लिए अपने महत्वाकांक्षी 'स्माइल' प्रोग्राम (SMILE – Strengthening Multimodal and Integrated Logistic Ecosystem) की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के तहत पहले चरण में देश के 8 शहरों में इंटीग्रेटेड स्टेट और सिटी लॉजिस्टिक प्लान बनाए जाने हैं, जिसमें मध्यप्रदेश से इंदौर का चयन किया गया है। यह योजना एशियाई डेवलपमेंट बैंक (ADB) के साथ मिलकर पूरी की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी लाना और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को अधिक लचीला और मजबूत बनाना है। क्या है यह योजना और कैसे काम करेगी? इस इंटीग्रेटेड प्लान के तहत सबसे पहले इंदौर में मौजूदा लॉजिस्टिक संसाधनों की पहचान की जाएगी। इसके बाद, विशेषज्ञों द्वारा इन संसाधनों में मौजूद कमियों (Gaps) का विश्लेषण किया जाएगा और उन्हें दूर करने के लिए बेहतर सुविधाओं का खाका तैयार होगा। यह पहल राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का समर्थन करती है, जिससे मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के मानकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगी राहत इस योजना का एक बड़ा लाभ यह भी है कि यह सिर्फ माल परिवहन तक सीमित नहीं है। इसके तहत इंदौर के ट्रैफिक की समस्या का समाधान भी खोजा जाएगा। शहरों को किस तरह डी-कंजेस्ट (भीड़-भाड़ मुक्त) किया जा सकता है, इसे लेकर बेहतर दिशा-निर्देश मिलेंगे। साथ ही, इंदौर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और अन्य स्वच्छ ईंधन विकल्पों को अपनाने पर भी जोर दिया जाएगा। पीथमपुर MMLP को मिलेगी दोगुनी ताकत इंदौर के पास पीथमपुर में पहले से ही मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (MMLP) का प्रोजेक्ट चल रहा है। इसका उद्देश्य आसपास के उद्योगों के लिए एक केंद्रीय हब बनाना है, जहां से देश-विदेश में माल भेजना और मंगाना आसान हो।  सांसद ने कहा हर वर्ग को मिलेगा फायदा सांसद शंकर लालवानी ने इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर कहा कि MMLP प्रोजेक्ट इंदौर क्षेत्र में लॉजिस्टिक सेक्टर को बड़ा बूस्ट देगा। वहीं, यह नया इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक प्लान MMLP से होने वाले फायदों को शहर के आम व्यापारियों और उद्योगपतियों तक सीधे पहुंचाने में मदद करेगा। इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार बढ़ेंगे, हर वर्ग को इससे फायदा मिलेगा।  देश के लिए 'मॉडल' बनेगा इंदौर इंदौर का यह प्लान देश के अन्य लैंड-लॉक्ड इलाकों (ऐसे क्षेत्र जहाँ न कोई समुद्र तट है और न ही कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा) के लिए एक उदाहरण (Model) के रूप में काम करेगा। इस प्लान के लागू होने के बाद न सिर्फ शहरों में ट्रैफिक जैम कम होंगे, बल्कि माल परिवहन भी सुचारु रूप से हो सकेगा। योजना लागू होने पर ये होंगे मुख्य बदलाव: * सड़क, रेल, हवाई और जलमार्गों को एकीकृत कर मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब बनेंगे। * वेयरहाउसिंग सुविधाओं के मानक तय किए जाएंगे, जिससे सप्लाई चेन प्रभावी बनेगी। * निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देकर नए लॉजिस्टिक्स पार्क में निवेश आकर्षित किया जाएगा। * इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम किया जाएगा। * महिला उद्यमियों और श्रमिकों के लिए कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इंदौर को होने वाले प्रमुख फायदे: * लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) में सुधार से इंदौर वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। * शहर में नए निजी निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। * आपूर्ति श्रृंखला में देरी कम होगी, जिससे निर्यातकों और निर्माताओं को सीधा लाभ मिलेगा। * इंदौर को 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब' के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। * लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित होगा।  

भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार

30,000 करोड़ की बड़ी डील: राफेल-सुखोई-तेजस नहीं, भारत खरीद रहा नया बवाल, पाकिस्तान हुआ दहला भारत की नई रक्षा डील ने पाकिस्तान में मचाया हड़कंप, राफेल-सुखोई-तेजस से अलग हथियार 30,000 करोड़ की डील में भारत का नया हथियार, पाकिस्तान में डर और चिंता बढ़ी नईदिल्ली  30,000 Crore Drone Deal: ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार देश की सेनाओं को रॉकेट की रफ्तार से मॉर्डर बनाने में जुटी है. इस कारण करीब-करीब हर हफ्ते हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा रही है. मोटे तौर पर देखें तो देश में एयर फोर्स के पास फाइटर जेट की कमी ही सबसे बड़ी समस्या दिखती है. इस समय एयरफोर्स के पास केवल 31 स्क्वाड्रन बचे हैं जबकि जरूरत कम से कम 42 स्क्वाड्रन की है. इस कमी को पूरा करने के लिए कई मोर्चे पर काम चल रहा है. लेकिन, इस बीच भारत ने आसमान में अपनी बादशाहत कायम रखने के लिए अन्य कई सौदों को अंतिम रूप दिया है. दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. इस ऑपरेशन में उसको ऐसी मार पड़ी है जिसकी उसने सपने में भी कल्पना नहीं की होगी. ऐसे में माना जा रहा है कि वह इस चोट का बदला लेने के लिए चीन के साथ मिलकर भारत के खिलाफ कभी भी कोई बड़ी साजिश रच सकता है. इस तरह भारत अपनी सुरक्षा तैयारियों में तनिक भी चूक या कमी बर्दाश्त नहीं कर सकता है. एयरफोर्स के फाइटर जेट की कमी को पूरा करने के लिए भारत राफेल, सुखोई और देसी फाइटर जेट तेजस को लेकर कई स्तरों पर काम कर रहा है. लेकिन, आसमान में बादशाहत कायम करने के लिए केवल फाइटर जेट्स ही जरूरी नहीं है. इसके अलावा भी कई तरह के जहाज और मिसाइलें चाहिए. तभी जाकर कोई एयरफोर्स मुकम्मल तौर पर ताकतवर बन पाती है. ऐसे में भारत मिसाइलों, एयर डिफेंस, जासूसी जहाजों, राडार सिस्टम और ड्रोन्स पर खूब खर्च कर रही है. क्योंकि आधुनिक जंग में ये चीजें पहले की तुलना में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं. 87 मेल ड्रोन्स दरअसल, भारतीय सेना ने 87 मेडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंडुरेंस यानी MALE ड्रोन्स खरीदने की योजना बनाई है. ये एक तरह से बेबी फाइटर जेट्स हैं. इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. ये इतने पैसे हैं कि इसमें कई छोटे देश पूरा रक्षा बजट तैयार करते हैं. यानी इस एक मेल ड्रोन की कीमत करीब 350 करोड़ आएगी. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के लिए भारतीय कंपनियों को तैयार किया जा रहा है. हालांकि फिलहाल वे पूरी तरह सक्षम नहीं हो पाई हैं. बावजूद इसके सरकार ने इस डील के लिए देसी कंपनियों की शर्त जोड़ दी है. अब मंगलवार को भारतीय कंपनियों को इसका टेंडर जारी किया जा सकता है. सरकार की योजना इस सौदे के साथ देश में ड्रोन निर्माण के लिए एक इकोसिस्टम बनाने की है, जिससे आने वाले वक्त में भारत किसी पर निर्भर न रहे. अब इस सौदे में शामिल होने के लिए विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी को दौड़ रही हैं ताकि वे उनको ड्रोन्स के लिए जरूरी उपकरणों की सप्लाई कर सकें. इन कंपनियों में इजरायली कंपनी एल्बिट और अमेरिकी जनरल एटॉमिक्स के नाम सबसे आगे हैं. अभी सरकार ने देसी में ड्रोन निर्माण में 50 फीसदी स्वदेशी कंटेंट की शर्त रखी है. ऐसे में इन विदेशी कंपनियों को काफी स्कोप दिख रहा है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इस करीब 30 हजार करोड़ रुपये का सौदा सबसे कम बोली लगाने वाली दो कंपनियों को दिया जाएगा, ताकि कम से कम दो ड्रोन निर्माण प्लेयर तैयार किया जा सके.  

नर्मदा घाटों का एकीकरण: MP सरकार का 300 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, बढ़ेगी पर्यटन और जल यात्रा

मध्यप्रदेश में 300 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ेगा नर्मदा के छह घाट, विकास को मिलेगा नई दिशा नर्मदा घाटों का एकीकरण: MP सरकार का 300 करोड़ का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, बढ़ेगी पर्यटन और जल यात्रा एमपी में नर्मदा के छह घाट होंगे आपस में जुड़े, सरकार ने किया 300 करोड़ का निवेश जबलपुर  मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटों की कायापलट की बड़ी योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत नर्मदा के आधा दर्जन घाट को आपस में जोड़ा जाएगा। राज्य के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जबलपुर में नर्मदा के छह घाट संवारे जाएंगे। इन्हें अयोध्या में सरयू की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार ने जबलपुर के नर्मदा घाटों को संवारने के लिए बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया है। सीएम मोहन यादव इसका भूमिपूजन करेंगे। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने रविवार को पत्रकार वार्ता बुलाई। यहां उन्होंने जबलपुर के आधा दर्जन नर्मदा घाटों को संवारने का अहम ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अभी नर्मदा के घाट अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हैं जिससे दिक्कत होती है। नर्मदा भक्तों की सुविधा के लिए 6 घाटों को आपस में जोड़ेंगे। जबलपुर में नर्मदा घाटों को अयोध्या की सरयू की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में जबलपुर के खारीघाट, दरोगा घाट, ग्वारीघाट, उमा घाट, सिद्धघाट और जिलहरी घाट को आपस में जोड़ा जाएगा। इन्हें अयोध्या के सरयू घाटों की तर्ज पर एक समान कर आकर्षक रूप दिया जाएगा। पीडब्लूडी मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि खारीघाट पर खारी विसर्जन के लिए अलग से जलकुंड बनाया जाएगा। घाट पर उतरने के व्यवस्थित सीढ़ियां बनेंगी, नीचे चेंजिंग रूम बनाया जाएगा और पुरोहितों के बैठने की व्यवस्था के साथ ही विशेष मुंडन स्थल भी बनाया जाएगा। श्रद्धालुओं और नर्मदा भक्तों के लिए छोटा नाव घाट भी बनाया जाएगा। ग्वारीघाट का विशेष रूप से जिक्र किया मंत्री राकेश सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की गोद में स्थित यह स्थान स्नान, पूजा और ध्यान की गहरी पवित्रता के लिए बेहद आदर्श जगह है। घाट पर मां नर्मदा की शांत लहरें श्रद्धालुओं को शांति और शक्ति दोनों प्रदान करती हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस विख्यात नर्मदा तट को सुंदर और सुसज्जित रूप दिया जाएगा। जबलपुर का नर्मदा घाट इलाका अत्यधिक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है। रास्ते की चौड़ाई बहुत कम होने के कारण श्रद्धालुओं को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि नए प्रोजेक्ट में ये परेशानियां समाप्त हो जाएंगी। प्रोजेक्ट का भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।