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नौरादेही में बनेगा तीसरा चीते का घर, केंद्र ने दिए 4 करोड़, कूनो और गांधी सागर के बाद नई पहल

भोपाल  चीता रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत नमीबिया से लाए गए चीते अब भी एमपी की पहचान बने रहे रहेंगे। इनको एमपी के बाहर नहीं बसाया जा रहा है, बल्कि इनके लिए प्रदेश में ही नया ठिकाना तैयार किया जा रहा है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ( नौरादेही ) को चीतों का नया घर बनने जा रहा है। दरअसल, नौरादेही अभ्यारण को चीतों का नया ठिकाना बनाने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनटीसीए ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ) ने तैयारियों के लिए सेंट्रल कैंपा फंड से 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह तैयारियों की पहली किस्त है। इसके बाद जल्दी ही 3 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की जाएगी। तैयार होगा चीतों का ठिकाना एनटीसीए की तरफ से जारी किए गए फंड से नौरादेही में चीतों के लिए नया घर तैयार होगा। इसमें सागर और दमोह जिले में फैले नौरादेही अभ्यारण में 4 क्वारेंटाइन बोमा और एक सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किया जाएगा। साथ ही फेंसिंग सहित इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य जरूरी काम जल्द शुरू होंगे। वहीं, दूसरे फंड मिलने के बाद 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व नौरादेही में चीते बसाए जाएंगे। एनटीसीए की टीम करेगी दौरा केंद्र सरकार से नौरादेही अभ्यारण बनाने की मंजूरी मिलने के बाद यहां चीतों को बसाने की कवायद तेज हो गई है। 4 महीने पहले किए गए निरीक्षण में नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के सबसे बेस्ट माना गया। जल्दी ही एनटीसीए की टीम इन तीनों इलाकों का दौरा करने के लिए आएगी। फॉरेस्ट रेंज से कई गांव होंगे विस्थापित नौरादेही में जिन तीन क्षेत्रों सिंघपुर, झापा और मोहली को चीतों को उपर्युक्त माना है। उसके अंदर 13 गांव आते हैं। चीतों को बसाने से पहले यहां के लोगों को पुनर्वासित किया जाएगा। चीतों को लाने से पहले 30 किमी के रेंज पर बाड़ेबंदी की जाएगी। राजस्थान और गुजरात नहीं जाएंगे चीते चीतों की अगली बसाहट राजस्थान या गुजरात में करने की तैयारी थी। हालांकि एनटीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि चीतों को कहीं और नहीं बसाया जाएगा। एमपी में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसी संभावना है कि नए साल 2026 में अफ्रीका से आने वाले चीतों की नई खेप को नौरादेही में बसाया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो कूनो में पले बढ़े और जवान हो चुके शावकों को शिफ्ट किया जाएगा। 1952 से विलुप्त हो गए थे चीते देश में चीतों को आखिरी बार 1952 में देखा गया था। इसके बाद से विलुप्त हो चुके चीतों को रीइंट्रोडक्शन करने के लिए साल 2022 में नामीबिया से 8 चीतों की पहली खेप लाई गई। इनको कूनो में बसाया गया। फिर फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में ही रखा गया। दो खेप में कुल 20 चीतों को भारत में लाया गया। कूनो में पिछले दो सालों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया। हालांकि बीमारी, हमलों और अन्य कारणों के चलते केवल 19 ही जीवित बच पाए हैं।

वैज्ञानिकों की अनोखी खोज: नाक नहीं, Butt से भी सांस लेना संभव – जापान में हुआ सफल प्रयोग

टोक्यो  क्या आपने कभी सोचा है कि सांस लेने का रास्ता नाक या मुंह ही क्यों हो? जापान के वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया कि Butt से भी ऑक्सीजन ली जा सकती है. यह सुनने में मजाक लगता है, लेकिन यह एक गंभीर चिकित्सा खोज है. हाल ही में हुए एक क्लिनिकल ट्रायल से पता चला कि यह तरीका सुरक्षित है. अगर यह कामयाब रहा, तो सांस की नलियां बंद होने पर मरीजों के लिए यह एक वैकल्पिक रास्ता बन सकता है. यह तरीका कैसे काम करता है? इस प्रक्रिया का नाम है 'एंटरल वेंटिलेशन'. इसमें एक खास तरल पदार्थ, जिसे पर्फ्लोरोकार्बन कहते हैं, रेक्टम (मलद्वार) में डाला जाता है. इस तरल में बहुत ज्यादा ऑक्सीजन भरी होती है. विचार यह है कि ऑक्सीजन आंतों की दीवारों से गुजरकर खून में चली जाए. इससे मरीज को नाक या मुंह से सांस लेने की जरूरत न पड़े. यह उन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिनकी सांस की नलियां ब्लॉक हो गई हों, जैसे दम घुटने या चोट लगने पर. यह आइडिया नया नहीं है. जानवरों में यह पहले से होता है. सूअर, चूहे, कछुए और कुछ मछलियां मुसीबत के समय पीछे से ही ऑक्सीजन ले लेती हैं. इंसानों के लिए यह रिसर्च पिछले साल फिजियोलॉजी में इग्नोबेल प्राइज जीत चुकी है – जो मजाकिया लेकिन वैज्ञानिक खोजों को सम्मानित करता है. ट्रायल में क्या हुआ? यह पहला मानव ट्रायल था, जो सिर्फ सुरक्षा की जांच के लिए था. प्रभावशीलता की टेस्टिंग अभी बाकी है. जापान में 27 स्वस्थ पुरुष वॉलंटियर्स को चुना गया. उन्हें एक तरल पदार्थ दिया गया, जिसमें ऑक्सीजन नहीं थी (सुरक्षा के लिए). हर व्यक्ति को 25 मिलीलीटर से 1500 मिलीलीटर तक का तरल रेक्टम में रखना था. 60 मिनट तक होल्ड करना था. परिणाम सकारात्मक आए. कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ. हां, जिन्हें सबसे ज्यादा मात्रा (1500 मिलीलीटर) दी गई, उन्हें पेट में फूलना, असुविधा और हल्का दर्द महसूस हुआ. बाकी के महत्वपूर्ण संकेत जैसे ब्लड प्रेशर, हृदय गति सब सामान्य रहे. सिर्फ 7 लोगों को पूरे घंटे तक होल्ड करने में दिक्कत हुई. बाकी सबने अच्छे से सहन किया. वैज्ञानिकों की राय ओसाका यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल साइंटिस्ट टाकानोरी टेकेबे कहते हैं कि यह पहली बार इंसानों पर डेटा आया है. नतीजे सिर्फ प्रक्रिया की सुरक्षा दिखाते हैं, प्रभावशीलता की नहीं. लेकिन अब सहनशक्ति साबित हो गई है, तो अगला कदम ऑक्सीजन वाली तरल से ब्लड में ऑक्सीजन पहुंचाने की जांच होगा. अगला ट्रायल ऑक्सीजन वाली तरल पर होगा. देखेंगे कि कितनी मात्रा और कितने समय तक रखने से मरीज का ब्लड ऑक्सीजन लेवल सुधरेगा. यह ट्रायल मरीजों पर होगा, जो असल में ऑक्सीजन की जरूरत में होंगे. क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज? सांस की समस्या दुनिया भर में बड़ी बीमारी है. कोविड जैसी महामारी में लाखों लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी. अगर यह तरीका काम कर गया, तो यह बैकअप ऑप्शन बनेगा. खासकर उन जगहों पर जहां पारंपरिक तरीके संभव न हों. लेकिन अभी यह शुरुआती स्टेज में है. ज्यादा ट्रायल्स में समय लगेगा. यह रिसर्च मेड जर्नल में छपी है.

वाहन नंबर पोर्टिंग की सुविधा जल्द, मोबाइल नंबर की तरह अब रजिस्ट्रेशन बदल पाएंगे मालिक

भोपाल  मोबाइल नंबर की तरह अब वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर भी पोर्ट हो सकेगा। यदि कोई वाहन मालिक पुराने वाहन का नंबर चाहता है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। केवल एक आवेदन के जरिए पुराने वाहन का नंबर नए वाहन में मिल जाएगा। हाल ही में परिवहन विभाग ने यह सुविधा शुरू की है। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए वाहन मालिक को स्क्रैप सेंटर में अपना पुराना वाहन बेचना होगा। वहां से वाहन को डिस्मेंटल करने का सर्टिफिकेट दिया जाएगा। यदि वाहन मालिक चाहता है कि उसके पास वही रजिस्ट्रेशन नंबर रहे, तो उसे परिवहन विभाग में स्क्रैप सेंटर से प्राप्त सर्टिफिकेट के साथ आवेदन करना होगा। इसके आधार पर उसे उसके वाहन का पुराना नंबर नए वाहन के लिए आवंटित कर दिया जाएगा। पसंदीदा नंबर के लिए देनी पड़ती थी शुल्क यदि वाहन मालिक मनचाहा नंबर चाहते हैं तो उन्हें एमपी ऑनलाइन या वाहन डीलर के माध्यम से परिवहन विभाग की वेबसाइट पर नंबर का चयन करना होता है। उसे ढाई हजार से पांच हजार रुपए फीस चुकानी पड़ती है। जबकि वीआइपी नंबर के लिए वेवसाइट पर ऑक्शन में भाग लेना होता है। जिसकी बिड अधिक होती है उसे नंबर आवंटित कर दिया जाता है। स्क्रैप पॉलिसी को मिलेगा बढ़ावा 2021-22 के आम बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि 15 साल पुराने सरकारी और प्राइवेट तथा 20 साल पुराने कमर्शियल वाहन को सड़कों से हटाया जाना है। इस योजना को स्क्रैप पॉलिसी नाम दिया गया था। पिछले एक दशक में लाखों नई गाड़ियां सड़क पर आईं। अब इस व्यवस्था के लागू होने से स्क्रैप पॉलिसी को बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने कहा तुरंत अपडेट करें अपना फोन नंबर, घर बैठे मोबाइल से हो जाएगा काम आधार कार्ड या फिर पैन कार्ड, सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ मोबाइल नंबर अपडेट होना बहुत जरूरी है। क्या आपने कभी सोचा है कि ड्राइविंग लाइसेंस के साथ भी मोबाइल लिंक होना कितना जरूरी है। MORTH India ( भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट से ट्वीट करके ड्राइविंग लाइसेंस धारकों और पंजीकृत वाहन मालिकों से आग्रह किया है कि वे अपना मोबाइल नंबर वाहन और सारथी पोर्टल पर अपडेट करवा लें। लोगों को इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप ऑनलाइन ही अपना नंबर अपडेट करा सकते हैं। पूरा प्रोसेस जानने के लिए नीचे पढ़ें। मोबाइल से ही हो जाएगा काम RTO ऑफिस में जाकर लंबी लाइन में लगे बिना ही आप ड्राइविंग लाइसेंस को अपडेट करा सकते हैं। इसका यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि विवरण पूरी तरह सटीक है। ट्वीट में एक QR कोड भी दिया गया है, जिसे मोबाइल से स्कैन करते ही आप सीधा वाहन और सार्थी पोर्टल पर पहुंच जाएंगे। ड्राइविंग लाइसेंस के लिए नंबर अपडेट करना का प्रोसेस बहुत ही आसान है। मोबाइल मंबर अपडेट कराने के लिए आपके पास होनी चाहिए ये जानकारियां परिवाहन और सार्थी पोर्टल पर मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए आपके पास कुछ जानकारियां होनी चाहिए।     व्हीकल का रजिस्ट्रेशन नंबर     रजिस्ट्रेशन की तारीख     वाहन का चेसिस नंबर     ड्राइविंग लाइसेंस नंबर     ड्राइविंग लाइसेंस जिसके नाम पर है उसकी जन्म तिथि     ऐसे और भी कई डिटेल की जरूरत होगी। एक टैप में पहुंच जाएंगे वेबसाइट     आप जैसे ही परिवहन सेवा की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएंगे। वेबसाइट पर जाते ही आपको एक पॉप-अप स्क्रीन दिखेगी।     इस स्क्रीन पर नंबर अपडेट करने के कहा जाएगा। साथ ही दो QR कोड दिए जाएंगे     कोड के नीचे वेबसाइट के लिए लिंक भी दिया जाता है।     एक लिंक परिवाहन पोर्टल और दूसरा लिंक सार्थी परिवहन पोर्टल का है।     इन लिंक पर क्लिक करते ही आप दोनों वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे।     यहां आपको नंबर अपडेट करने के लिए अपने व्हीकल की कुछ डिटेल भरनी होगी।     इसमें व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर , रजिस्ट्रेशन डेटा आदि शामिल है।     इन डिटेल को भरने के बाद मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए आवेदन सबमिट हो जाएगा। हालांकि, ध्यान रखें कि इसके लिए आपके मोबाइल में इंटरनेट कनेक्शन होना चाहिए। अगर आप मोबाइल से ऑनलाइन नंबर अपडेट नहीं पा रहे हैं तो RTO ऑफिस जाकर भी ऐसा करा सकते हैं।    

1500 KM लंबा रेल प्रोजेक्ट: जेद्दा से दम्माम तक मील का पत्थर बनेगा MBS का लैंड ब्रिज

दुबई  सऊदी अरब पैसे और तकनीक के बल पर एक अति महत्वाकांक्षी हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसे मोहम्मद बिन सलमान के 'विजन 2030' का एक अहम हिस्सा कहा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस प्रोजेक्ट पर सऊदी अरब करीब 7 अरब डॉलर यानी 58,000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रहा है। यह रेल प्रोजेक्ट अरब प्रायद्वीप में यात्रा और व्यापार को पूरी तरह से नया आकार देगा क्योंकि यह लाल सागर को अरब की खाड़ी से जोड़ने वाला है। क्या है 'लैंड ब्रिज' प्रोजेक्ट? यह 1500 किलोमीटर लंबा रेल प्रोजेक्ट है, जो लाल सागर के जेद्दा शहर को राजधानी रियाद होते हुए अरब की खाड़ी के पास के शहर दम्माम से जोड़ेगा। यह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) का ड्रीम प्रोजेक्ट है और उनके सऊदी विजन 2030 की आधारशिला है। यह अरब के रेगिस्तान में एक चमत्कार करने जैसा है। इसका उद्देश्य प्रमुख जनसंख्या केंद्रों को जोड़ना और देश को एक ग्लोबल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और उसका हब बनाना है। 12 घंटे का सफर चार घंटे से भी कम समय में प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद हाई स्पीड रेल 12 घंटे का सफर चार घंटे से भी कम समय में पूरा कर लेगा। रेल की रफ्तार की वजह से ही इस प्रोजेक्ट को प्यार से 'लैंड ब्रिज' नाम दिया गया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा यात्री और माल परिवहन व्यवस्था को होगा। यह नेटवर्क प्रमुख औद्योगिक शहरों और बंदरगाहों को भी जोड़ेगा, जिससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी फायदा पहुंचेगा। इसका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और 2030 तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। Desert Dream लग्जरी ट्रेन चलाने का भी ऐलान इस प्रोजेक्ट को सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था बदलने वाली शाही योजना भी कहा जा रहा है, जिसमें धन और तकनीक का बेजोड़ इस्तेमाल किया गया है। रेगिस्तान में लग्जरी ट्रेन दौड़ाने की इस अद्भुत क्षमता को देख दुनिया हैरान है और सऊदी अरब की तारीफ कर रही है। इस परियोजना में सिर्फ रफ्तार पर ध्यान नहीं दिया गया है बल्कि ट्रेन की शान-ओ-शौकत पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इस रूट पर सऊदी सरकार ने Desert Dream लग्जरी ट्रेन चलाने का भी ऐलान किया है। रेल नेटवर्क बढ़कर हो जाएगा 8000KM विजन 2030 के तहत सऊदी अरब का लक्ष्य अपने मौजूदा रेलवे नेटवर्क को 5300 किलोमीटर से बढ़ाकर 8000 किलोमीटर करने का है। सऊदी रेलवे कंपनी ने 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली 15 ट्रेनों का ऑर्डर भी दिया है।

खराब हवा से देश में बढ़ी मौतें, सालाना 20 लाख लोग समय से पहले गंवा रहे जान: रिपोर्ट

नई दिल्ली दुनिया की हवा पर रिसर्च करने वाली संस्था State of Global Air Report की नई रिपोर्ट आ गई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और चीन में 2023 में खराब हवा में सांस लेने के चलते 20 लाख लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, नाइजीरिया जैसे देशों में भी दो लाख मौतें हुई हैं। इंडोनेशिया, म्यांमार, मिस्र का भी हाल खराब है और यहां एक साल के अंदर 1 लाख लोग खराब हवा के चलते ही मारे गए। रिपोर्ट का कहना है कि दुनिया में अकाल मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण अब एयर पलूशन बन गया है और पहले नंबर पर अब भी हाई ब्लड प्रेशर है। बोस्टन स्थित हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया की 36 फीसदी आबादी भीषण एयर पलूशन की शिकार है। डिमेंशिया जैसी बीमारी भी इस समस्या के चलते हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2023 में एयर पलूशन जनित बीमारियों ने दुनिया भर में 79 लाख लोगों की जान ले ली। इस तरह दुनिया में होने वाली 8 मौतों में से हर एक की वजह एयर पलूशन रही है। इनमें से 49 लाख लोग तो ऐसे रहे हैं, जो हवा में पीएम 2.5 के बढ़ने के कारण बीमारियों के शिकार हुए। अहम तथ्य यह है कि इनमें से 28 लाख लोग तो ऐसे ही थे, जो आमतौर पर घर में ही रहते थे। खराब हवा से 90 फीसदी मौतें अकेले एशिया में सबसे खराब हाल भारत और चीन का है, जहां दुनिया की बड़ी आबादी बसती है। दोनें देशों में 2023 में 20-20 लाख लोगों की मौत हुई है। रिपोर्ट कहती है कि एयर पलूशन से होने वाली 90 फीसदी मौतें तो एशिया में ही हुई हैं। इनमें भी लोअर-मिडल इनकम वाले देशों की स्थिति ज्यादा खराब है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हार्ट की बीमारी, डिमेंशिया और डायबिटीज जैसी समस्याएं भी एयर पलूशन के चलते हो रही हैं। अनुमान है कि 2023 में स्वस्थ मानव जीवन के 11.6 मिलियन वर्ष 2023 में ही कम हो गए। एयर पलूशन के चलते लोगों के फेफड़े बीमार हो रहे हैं और वे गंभीर समस्याओं के शिकार हो रहे हैं। 25 फीसदी हार्ट की बीमारियों का कारण है एयर पलूशन इसके अलावा 25 फीसदी हार्ट की बीमारियों का कारण एयर पलूशन है। डिमेंशिया के शिकार लोगों में भी 25 फीसदी की वजह एयर पलूशन बताई जाती है। खराब एयर क्वालिटी डायबिटीज की भी वजह बन रही है। अब सवाल है कि सबसे ज्यादा खराब हवा का सामना कौन कर रहा है। इन देशों में भारत, चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, ब्राजील और कुछ अफ्रीकी मुल्क शामिल हैं। सीधी बात यह है कि अधिक आबादी के चलते मकान, बाजार की जरूरतें बढ़ी हैं। जंगल खत्म हुए हैं तो प्रदूषण में इजाफा दिखा है।

सम्मान बचाने मैदान में उतरेगा भारत, कोहली-गिल की जोड़ी पर सबकी उम्मीदें

सिडनी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मुकाबले को जीत भारत सम्मान बचाने उतरेगा। पिछले दो मैचों में विफल रहे कप्तान शुभमन गिल और विराट कोहली पर सभी की नजर होगी। पूर्व कप्तान और शानदार एंकर कोहली ने अभी तक इस सीरीज में अपना दबदबा नहीं दिखाया है, जबकि टीम की कप्तानी कर रहे गिल शीर्षक्रम में नियंत्रण बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके कंधों पर बहुत बड़ा बोझ है। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हर मोर्चे पर पटखनी दी है। कोहली और रोहित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब केवल एकदिवसीय मैच ही खेलते हैं, ऐसे में दोनों ही बल्लेबाज सीरीज के अंतिम मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सीरीज का सुखद अंत करना चाहेंगे। कप्तान शुभमन गिल के लिए यह दौरा कप्तानी के साथ ही बल्लेबाजी के दृष्टिकोण से भी अच्छा नहीं रहा है। गिल ने पहले दो मैच में कुल 19 रन ही बना पाए हैं। मध्य क्रम में के एल राहुल ने पहले और श्रेयस अय्यर ने दूसरे मैच में अच्छी बल्लेबाज़ी की थी लेकिन भारत इन दोनों के एक साथ प्रदर्शन करने की उम्मीद करेगा। सिडनी में भारत को सार्थक चुनौती पेश करने के लिए कोहली को अपनी लय, टाइमिंग और दबदबा वापस आना होगा और गिल को पारी की शुरुआत में उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करना होगी, ताकि बाद में आने वालों के लिए माहौल सेट हो सके। वहीं आत्मविश्वास से भरा हुआ ऑस्ट्रेलिया सीरीज का आखिरी मैच जीतकर क्लीन स्वीप के इरादे से मैदान में उतरेगा है। मिशेल मार्श और ट्रैविस हेड शुरुआती आक्रामकता प्रदान करते हैं, जबकि मैथ्यू शॉर्ट और मैट रेनशॉ बीच के ओवरों में पारी को स्थिरता देते हैं। कूपर कॉनली और मिशेल ओवेन फिनिशिंग पावर देते हैं, यह सुनिश्चित करते हैं कि मोमेंटम कभी रुके नहीं।  जोश हेज़लवुड, मिशेल स्टार्क, ज़ेवियर बार्टलेट और एडम जम्पा की अगुवाई वाला गेंदबाजी आक्रमण सटीक और लगातार रहा है, जिससे पिछले दोनों मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाज दबाव में रहे हैं। एकदिवसीय प्रारूप में दोनों के बीच कुल 154 मैच खेले गए हैं, जिसमें से 86 में ऑस्ट्रेलिया और 58 में भारत को जीत मिली है। भारत में खेले गए 72 मुकाबलों में 34 में ऑस्ट्रेलिया और 33 में भारतीय टीम को जीत मिली है। ऑस्ट्रेलिया में खेले गए 56 मुकाबलों में 40 में कंगारू और 14 में भारत को जीत मिली है। तटस्थ स्थान पर 26 मैचों में से 11 में भारत और 12 में ऑस्ट्रेलिया ने जीते है। भारत आक्रमण में धारा लेने के लिए कुलदीप यादव का रुख कर सकता है। बाएं हाथ के रिस्ट-स्पिनर की गेंद को दोनों तरफ घुमाने और इनिंग्स के आखिर में रफ पैच का फायदा उठाने की काबिलियत ऑस्ट्रेलिया के मिडिल ऑर्डर को परेशान कर सकती है, खासकर मोहम्मद सिराज और अर्शदीप सिंह के साथ नई गेंद से, और बीच के ओवरों में वाशिंगटन सुंदर के कंट्रोल से। यह काफी हद तक कोहली और गिल के फॉर्म और अथॉरिटी में वापस आने पर निर्भर करता है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड की बात की जाये तो यह शुरुआत में सीम मूवमेंट और असमान उछाल ओपनर्स के लिए चुनौती पेश करते हैं। स्पिनर्स को बाद में फायदा मिलता है। संभावित एकादश ऑस्ट्रेलिया:- मिशेल मार्श (कप्तान), ट्रैविस हेड, मैथ्यू शॉर्ट, मैट रेनशॉ, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), कूपर कॉनोली, मिशेल ओवेन, जेवियर बार्टलेट, मिशेल स्टार्क/बेन ड्वारशुइस, एडम ज़म्पा, जोश हेजलवुड/नाथन एलिस संभावित एकादश भारत:- रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर/कुलदीप यादव, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, मोहम्मद सिराज, अर्शदीप सिंह  

PM मोदी का ऐलान: GST बचत उत्सव बनेगा आम जनता की राहत का पर्व

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि इस बार त्योहारों के इस मौसम में जीएसटी बचत उत्सव ने नए रंग भर दिए हैं। उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि देश में जीएसटी रेट कटौती को लेकर बहुत बड़ा सुधार हुआ है। 17वें रोजगार मेले में नवनियुक्त युवाओं को 51 हजार से अधिक नियुक्ति पत्र सौंपते हुए उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "जीएसटी सुधार का असर केवल लोगों की बचत तक सीमित नही हैं बल्कि, नेक्स्ट-जेनरेशन जीएसटी सुधार से रोजगार के अवसरों का विस्तार हो रहा है।" उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा कि जब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं सस्ती होती हैं तो मांग भी बढ़ती है। वहीं, जब मांग बढ़ती है तो उत्पादन और सप्लाई चेन को भी गति मिलती है। फैक्ट्रियां ज्यादा उत्पादन करती हैं और नई नौकरियां पैदा होती हैं। पीएम मोदी ने कहा, "जीएसटी बचत उत्सव रोजगार उत्सव में बदल रहा है। धनतेरस, दीपावली पर रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े सामने आए हैं, जो दिखाता है कि जीएसटी सुधार ने देश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।" एमएसएमई सेक्टर और रिटेल ट्रेड को लेकर उन्होंने कहा कि हम इस सेक्टर में भी इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव देख रहे हैं। इस वजह से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और डिस्ट्रिब्यूशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "आज भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और हम देश के युवा सामर्थ्य को भारत की एक बड़ी ताकत मानते हैं। हम हर क्षेत्र में इसी सोच और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं।" पीएम मोदी ने बताया कि विदेश नीति भी देश के युवाओं के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने को लेकर उन्होंने जानकारी दी कि स्किल इंडिया मिशन अभियानों के जरिए युवाओं को स्किल की ट्रेनिंग दी जा रही है। वहीं साथ ही, नेशनल करियर सर्विस जैसे प्लेटफॉर्म देश के युवाओं को नए अवसरों से जोड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया है कि इसके माध्यम से अब तक 7 करोड़ से अधिक वैकेंसियों को लेकर युवाओं को जानकारी दी गई है।" उन्होंने कहा कि कई बार उम्मीदवार यूपीएससी की अंतिम लिस्ट तक पहुंचने के बाद भी सेलेक्ट नहीं हो पाते, ऐसे उम्मीदवारों की मेहनत भी अब व्यर्थ नहीं जाएगी। ऐसे उम्मीदवारों के लिए सरकार प्रतिभा सेतु पोर्टल की पेशकश रख रही है। इस पोर्टल के माध्यम से निजी और सार्वजनिक संस्थान उन युवाओं को निमंत्रित कर सकती है। उनके इंटरव्यू ले सकते हैं और उन्हें रोजगार का अवसर दे सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा, युवाओं की प्रतिभा का यह सदुपयोग ही युवा सामर्थ्य को दुनिया के सामने लाएगा।

9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण को मिली 78 करोड़ 15 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की एक और महत्वपूर्ण घोषणा को राज्य सरकार ने मूर्त रूप दे दिया है। राज्य बजट में शामिल 9 नवीन नर्सिंग महाविद्यालयों के भवन निर्माण कार्य के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी कर दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा को नई दिशा देगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने में मदद करेगा। प्रत्येक नर्सिंग महाविद्यालय के भवन निर्माण के लिए 8 करोड़ 68 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। ये नवीन नर्सिंग कॉलेज दंतेवाड़ा, बैकुंठपुर, बीजापुर, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़, धमतरी, जांजगीर-चांपा और नवा रायपुर (अटल नगर) में स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों की स्थापना से प्रदेश के दूरस्थ और जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता और सुदृढ़ होगी। "हमारा उद्देश्य है कि प्रदेश के हर युवा को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य शिक्षा मिले और हर जिले में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कुशल मानव संसाधन भी तैयार हो। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदेश के स्वास्थ्य शिक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ेगी। यह पहल न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त बनाएगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर भी बढ़ाएगी।" -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय "मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य शिक्षा को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण की स्वीकृति से प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण नर्सिंग शिक्षा के साथ ही रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। यह पहल छत्तीसगढ़ को स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने में मदद करेगी।" –  स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल "मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रही है। 9 नए नर्सिंग कॉलेजों के भवन निर्माण के लिए 78 करोड़ 15 लाख रुपए की स्वीकृति इस बात का प्रतीक है कि सरकार प्रदेश के युवाओं के लिए अवसर सृजन और सेवा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।" – वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी

सीताराम केसरी का अपमान उठाया मोदी ने, कांग्रेस पर किया जमकर कटाक्ष

बेगूसराय  भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. सीताराम केसरी की आज पुन्यतिथि है। इस मौके पर बिहार के दलित नेता को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के खिलाफ पार्टी अध्यक्ष के अपमान का मुद्दा उछाल दिया। कहा कि कांग्रेस परिवार (गांधी परिवार) ने केसरी उन्हीं के मकान में बाथरूम में बंद करवा दिया और अध्यक्ष पद की चोरी कर ली। पीएम ने राहुल गांधी के वोट चोरी नारे पर उन्हीं के अंदाज में जवाब दे दिया। बेगूसराय की चुनावी रैली में जुटी लाखों की भीड़ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सीताराम केसरी की पुण्यतिथि है। देश यह कभी नहीं भूल सकता कि कांग्रेस के इस परिवार ने किस प्रकार से सीताराम केसरी को अपमानित किया। आज का दिन हमें याद दिलाता है कि कांग्रेस पार्टी दलित और पिछड़ों के अधिकार छीनने के लिए क्या कुछ कर सकती है। इन लोगों के लिए सिर्फ अपना परिवार ही सबसे ऊपर है। आपने टीवी पर देखा होगा कि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे सीताराम केसरी जो हमारे बिहार के गौरव थे, उन्हें उनके घर के बाथरूम में बंद कर दिया गया और उनको उठाकर फुटपाथ पर फेंक दिया गया। इतने से भी मन नहीं भरा तो उनके जिम्मे जो कांग्रेस का अध्यक्ष पद था, इस परिवार ने अध्यक्ष पद की भी चोरी कर ली। यह ऐसे लोग हैं जिन्हें आपके परिवार की कोई चिंता नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि जंगल राज में हमारी माताएं बहने सबसे ज्यादा पीड़ित रहीं। आज एनडीए के सुशासन में वही बहनें निर्भीक होकर अपने को आत्मनिर्भर बना रही हैं। देश दुनिया में बड़ा नाम करने के लिए आगे आ रही हैं। जीविका दीदी के रूप में बिहार की बहने गांव में अपना व्यवसाय कर रही हैं लखपति डॉन में बिहार की बहनों की संख्या अच्छी है। कांग्रेस राजद की सरकार में बहनों के कुछ नहीं किया गया।  

छठ पूजा की तैयारी जोरों पर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद संभाली कमान

नई दिल्ली  दिल्ली में आस्था के महापर्व छठ की तैयारी पूरे जोश और श्रद्धा के साथ जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कई छठ घाटों का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि सरकार छठ की तैयारियों के लिए कोई कमी नहीं छोड़ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और विधायक संदीप सहरावत ने शुक्रवार को पहले भव्य पोचनपुर छठ घाट का उद्घाटन किया और श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "पूरी दिल्ली में लगभग 1,500 स्थानों पर छठ घाट बनाए गए हैं और सभी तैयारियां जोरों पर हैं। इसके अलावा, यमुना नदी के किनारे कई किलोमीटर तक 17 अलग-अलग स्थानों पर विशेष घाट बनाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को छठ पूजा करने के लिए उचित सुविधाएं मिल सकें।" भाजपा विधायक संदीप सहरावत ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "हमारी मुख्यमंत्री ने पोचनपुर छठ घाट का उद्घाटन किया और स्वयं सभी तैयारियों का निरीक्षण किया। उन्होंने सभी तैयारियों की समीक्षा की। मैं मुख्यमंत्री को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।" इसके बाद, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी नगर विधानसभा क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया, जिसमें छठ घाट, 153 गलियां, सीवर व पानी की लाइनें और गणेश नगर कॉम्प्लेक्स में एक पुलिया शामिल है। उन्होंने धोबी समुदाय के लोगों को इलेक्ट्रिक आयरन बांटे और भाजपा की ओर से यमुना घाटों पर किए गए इंतजामों के बारे में बताया, जिससे पूर्वांचल के लोग बिना किसी परेशानी के छठ पूजा कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "यह घाट न सिर्फ पूर्वांचली भाई-बहनों की आस्था का प्रतीक है, बल्कि दिल्ली के सांस्कृतिक गौरव और सहभागिता की पहचान भी बनेगा।" मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, "भाजपा सरकार के नेतृत्व में जिस समर्पण और संवेदनशीलता से छठ महापर्व की तैयारियां की जा रही हैं, वह अभूतपूर्व है। इस बार यमुना किनारे जब हमारी बहनें सूर्य देव को अर्घ्य देंगी, तो वे स्वच्छ और निर्मल जल में खड़ी होकर अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करेंगी। यह नया घाट दिल्ली में आस्था और विकास के संगम का प्रतीक है।"