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मतदान करने वाले हर बिहारवासी के लिए खुशखबरी! चुनाव आयोग ने घोषित किया छुट्टी का नियम

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग बिहार विधानसभा चुनाव और 8 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों की तारीखों की घोषणा कर चुका है। मतदान के दिन सभी कर्मचारियों को सवेतन अवकाश देने का आदेश जारी किया गया है। आयोग ने कहा कि यह कदम मतदाताओं को अपने वोट का इस्तेमाल करने में आसानी प्रदान करने के लिए उठाया गया है। बिहार में पहला चरण का मतदान 6 नवंबर को और दूसरे चरण की वोटिंग 11 नवंबर को होगी। इसके अलावा सभी 8 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव भी 11 नवंबर को ही होंगे। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत हर कर्मचारी, चाहे वह किसी व्यवसाय, उद्योग या अन्य प्रतिष्ठान में काम करता हो, मतदान के दिन सवेतन अवकाश पाने का हकदार है। इस दौरान उनकी तनख्वाह में कोई कटौती नहीं होगी। अगर कोई नियोक्ता इस नियम का उल्लंघन करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक कर्मचारी भी इस सुविधा के हकदार हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग अपने मतदान क्षेत्र से बाहर अन्य जगहों पर नौकरी करते हैं, लेकिन अपने मूल मतदान क्षेत्र में वोटर हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवेतन अवकाश मिलेगा। इससे वे अपने वोट डालने के लिए समय निकाल सकेंगे। यह नियम सुनिश्चित करता है कि हर मतदाता को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पूरा मौका मिले। निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे इस नियम का सख्ती से पालन कराएं। इसके लिए सभी नियोक्ताओं और संबंधित विभागों को जरूरी हिदायतें जारी की जाएं। आयोग का मकसद है कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और सुगम हो, ताकि हर नागरिक बिना किसी परेशानी के वोट डाल सके। बिहार में इस घोषणा से कर्मचारियों और दैनिक मजदूरों में खुशी की लहर है। आयोग ने नियोक्ताओं से अपील की है कि वे इस अवकाश का लाभ देने में सहयोग करें ताकि लोकतंत्र मजबूत हो। यह कदम मतदान प्रतिशत बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पटाखों का धुआं बना जहर: ग्वालियर और जबलपुर में हवा सबसे खराब, भोपाल-इंदौर भी प्रभावित

भोपाल दीपावली पर बारूदी धुएं ने वायु गुणवत्ता का गला घोंट दिया। ग्वालियर व जबलपुर सबसे प्रदूषित शहर रहे। भोपाल व इंदौर की हवा भी जहरीली हो गई। हालात ऐसे बने कि रात नौ बजे से सुबह चार बजे तक इन शहरों में रहने वालों का दम बारूदी धुएं से घुटता रहा। आधी रात के बाद प्रदूषण का स्तर इतना अधिक हो गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कई स्थानों पर इसे मापना ही बंद कर दिया। सात शहरों की हवा बेहद खराब मिली दीपावली की रात प्रदेश के चार महानगरों समेत सात शहरों की हवा बेहद खराब मिली। ग्वालियर के डीडी नगर में औसत एक्यूआइ 364 दर्ज हुआ। पिछले साल यहां की हवा 408 अंक तक खराब स्थिति में पहुंची थी। जबलपुर के गुप्तेश्वर में भी एक्यूआइ 364 रहा। यहां पिछले साल एक्यूआइ केवल 335 था। इंदौर के छोटी ग्वालटोली केंद्र पर एक्यूआइ 362 दर्ज हुआ। पिछले साल यहीं पर एक्यूआइ 399 दर्ज हुआ था। 832 तक पहुंच गया था सागर का एक्यूआइ इस सूची में सागर की स्थिति चौंकाने वाली है। सामान्य तौर पर कम औद्योगिक दबाव वाले इस शहर में औसत एक्यूआइ 341 दर्ज हुआ है। यहां सोमवार रात 12 बजे एक्यूआइ 832 तक पहुंच गया था। पीथमपुर (330) और सिंगरौली (307) में भी हवा की गुणवत्ता खराब रही। भोपाल में सोमवार शाम चार बजे से मंगलवार शाम चार बजे तक पर्यावरण परिसर स्थित निगरानी केंद्र पर वायु गुणवत्ता सूचकांक का औसत 311 रहा। लेकिन सोमवार की रात आठ बजे से जब पटाखे फूटना शुरू हुए तो यहां की हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 355 हो चुका था। पहली बार इतनी जहरीली हवा यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। बात यहीं नहीं रुकी, रात नौ बजे तक एक्यूआइ 426 हो चुका था, वहीं 10.15 बजे तक यह 761 तक जा पहुंचा। यह स्थिति रात एक बजे तक बनी रही। उसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे मापना ही बंद कर दिया। उसके बाद आंकड़ा सुबह 3.15 बजे आया, जहां एक्यूआइ 680 तक था। सुबह चार बजे तक यही स्थिति रही। भोपाल के ही कलेक्ट्रेट परिसर में एक्यूआइ का औसत 341 मापा गया। यहां एक्यूआइ का सर्वाधिक स्तर 672 रहा, जो रात 10 बजे से 10.45 तक का था। उसके बाद की गणना नहीं हुई। वहीं टीटी नगर में एक्यूआइ का औसत 318 रहा। यहां सर्वाधिक एक्यूआइ 627 रहा, जो रात 11 बजे दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि राजधानी में पहली बार इतनी जहरीली हवा मापी गई है। पिछले वर्ष अधिकतम एक्यूआइ 500 के आसपास ही रहा था। उत्तर पूर्वी हवाओं ने दी थोड़ी राहत विशेषज्ञों का कहना है कि रात में चल रही उत्तर-पूर्वी हवाओं ने इस भारी प्रदूषकों को हटाने में बहुत मदद की। हवा बंद रहती तो स्थिति अधिक गंभीर हो सकती थी। तब बहुत लोग अचानक बीमार पड़ सकते थे। यह बताता है गुणवत्ता सूचकांक 0-50 – हवा साफ है 51 -100 – हवा कम प्रदूषित 101-200 – मध्यम स्तर का प्रदूषण 201-300 – हवा खराब है 301 – 400 – बेहद खराब 401-500 – गंभीर रूप से खराब

भोपाल में रेयर अर्थ एलिमेंट व टाइटेनियम थीम पार्क का उद्घाटन जल्द

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के निकट, आचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में “रेयर अर्थ और टाइटेनियम थीम पार्क” आकार ले रहा है. अधिकारियों ने बताया कि दुर्लभ खनिजों के खनन और परिशोधन में सशक्त बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करते हुए उच्च-स्तरीय दल ने भोपाल के अचारपुरा इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड के रेयर अर्थ एवं टाइटेनियम थीम पार्क का अवलोकन किया. उच्च-स्तरीय दल प्रदेश में रेयर अर्थ खनिजों की संपूर्ण वैल्यू चेन के विकास और सहयोग के अवसर तलाश रहा है. राज्य सरकार की इस टीम ने संयंत्र में स्वदेशी तकनीक से विकसित रेयर अर्थ धातु निष्कर्षण प्रक्रियाओं की जानकारी ली. क्यों खास है ये पार्क? राज्य सरकार की टीम ने अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का भी अवलोकन किया, जहां उन्नत अनुसंधान, परिशोधन (बेनीफिसिएशन) और प्रसंस्करण तकनीकों के माध्यम से भारत को इस रणनीतिक क्षेत्र में अग्रणी बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं. खनिज विभाग और आईआरईएल के बीच भावी सहयोग पर भी चर्चा हुई, जिसमें नीतिगत सहयोग, तकनीकी विकास और औद्योगिक संपर्क को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. यह पार्क मध्यप्रदेश को एक महत्वपूर्ण ‘रेयर अर्थ मैटेरियल हब' बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. हाल ही में भी राज्य की उच्चस्तरीय टीम ने इस पार्क का दौरा कर उसकी प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान और प्रसंस्करण क्षमताओं का जायज़ा लिया. इससे प्रदेश में रेयर अर्थ खनिजों के अन्वेषण, प्रसंस्करण और संबद्ध उद्योगों का सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र (इको सिस्टम) विकसित किया जा सके. खनिज विभाग के उच्च-स्तरीय दल का यह दौरा प्रदेश को महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण और संबद्ध विनिर्माण के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे देश को रेयर-अर्थ-मटेरियल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सशक्त किये जाने के प्रयासों को सहायता मिलेगी.

2200 km/h स्पीड, 65% स्वदेशी और ब्रह्मोस का जुड़ाव — तेजस MK1A की ताकत क्या है?

नई दिल्ली  भारत की रक्षा ताकत एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाली है. हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित तेजस Mk1A (Tejas Mk1A) अब पहली उड़ान के लिए तैयार है. शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में महाराष्ट्र के नासिक से यह देश का सबसे आधुनिक स्वदेशी लड़ाकू विमान आसमान में उड़ान भरेगा. यह वही ‘तेजस’ है, जो पूरी तरह भारतीय इंजीनियरिंग, तकनीक और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है. भारतीय वायुसेना इसे अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है. और माना जा रहा है कि इसे बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात किया जाएगा, ताकि पाकिस्तान की सीमा के पास भारत की हवाई शक्ति और भी मजबूत हो सके. भारत का ‘गेमचेंजर’ फाइटर- तेजस MK1A तेजस एमके-1ए पुराने मिग-21 का एडवांस वर्जन है, जिसमें अल्ट्रा-मॉडर्न एवियोनिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और बेहतर रडार लगाए गए हैं. इसकी अधिकतम रफ्तार 2,200 किमी/घंटा है. यानी कुछ ही मिनटों में यह दुश्मन की सीमा तक पहुंच सकता है. इसमें लगी आधुनिक ब्रह्मोस मिसाइल, एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक क्षमता इसे “सुपर-पावर जेट” बनाती है. इसके अलावा यह दुनिया के सबसे हल्के लेकिन घातक फाइटर जेट्स में शामिल है, जो किसी भी मौसम में मिशन पूरा कर सकता है. 65% स्वदेशी तकनीक, भारत की ताकत का नया प्रतीक तेजस एमके-1ए की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका 65 प्रतिशत स्वदेशी योगदान है. एचएएल ने बताया कि इसके अधिकांश पार्ट्स भारतीय कंपनियों ने तैयार किए हैं. रडार से लेकर एवियोनिक्स और स्ट्रक्चर तक. यह भारत की तकनीकी ताकत दिखाने वाला कदम है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की बड़ी उपलब्धि है. मिग-21 की जगह लेगा ‘तेजस’ भारतीय वायुसेना ने हाल ही में अपने पुराने मिग-21 बेड़े को रिटायर किया है. अब उसकी जगह तेजस एमके-1ए लेगा. वायुसेना और एचएएल के बीच 62,370 करोड़ रुपए का अनुबंध हुआ है. इसके तहत 97 स्वदेशी लड़ाकू विमान भारत को मिलेंगे. इनमें 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर जेट शामिल हैं. इंजन और उत्पादन में मिली रफ्तार अमेरिकी कंपनी GE ने एचएएल को अब तक चार GE-404 जेट इंजन सप्लाई किए हैं. वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 इंजन मिलने की उम्मीद है. इन इंजनों की मदद से तेजस के उत्पादन और वायुसेना को डिलीवरी में तेजी आएगी. आने वाले कुछ सालों में भारतीय वायुसेना के पास दर्जनों तेजस फाइटर जेट्स होंगे. हर एक दुश्मन के लिए डर की वजह. पाकिस्तान की ‘नींद उड़ाने’ को तैयार तेजस एमके-1ए की तैनाती के बाद भारत की सीमाएं पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित होंगी. इसकी रफ्तार, हथियार क्षमता और स्टेल्थ डिजाइन पाकिस्तान की वायुसेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकती है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस का हर स्क्वॉड्रन “आत्मनिर्भर भारत की उड़ती ढाल” साबित होगा. भारत के आसमान में ‘स्वदेशी शेर’ की दहाड़ तेजस एमके-1ए सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी ताकत, वैज्ञानिक क्षमता और सैन्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. जब यह शुक्रवार को नासिक के आसमान में उड़ान भरेगा, तो यह भारत के एयरोस्पेस इतिहास का एक नया अध्याय लिखेगा.  

टैक्स बचाने की नई रणनीति पर काम कर रहा एप्पल, इनकम टैक्स में कर सकता है बदलाव

नई दिल्ली  एप्पल कंपनी भारत में अपने कारोबार को बढ़ावा दे रही है। कंपनी के आईफोन अब भारत में बहुत तेजी से बन रहे हैं। कंपनी ने इस वित्तीय वर्ष के पहले छह महीनों में ही 10 अरब डॉलर (करीब 88,730 करोड़ रुपये) के आईफोन का निर्यात किया है। यह एक रेकॉर्ड है। अब अमेरिका की यह कंपनी भारत सरकार से अनोखी मांग कर रही है। कंपनी की मांग से ऐसा लगता है कि इसकी लॉबी भारत सरकार पर हावी हो रही है। एप्पल भारत सरकार से इनकम टैक्स कानून में बदलाव की मांग कर रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक कंपनी चाहती है कि उसे अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को दिए जाने वाले हाई-एंड आईफोन बनाने वाली मशीनों के मालिकाना हक पर टैक्स न देना पड़े। सूत्रों का कहना है कि यह एक ऐसी समस्या है जो एप्पल के भारत में भविष्य के विस्तार में बाधा डाल सकती है। भारत एप्पल के अनुरोध की सावधानी से समीक्षा कर रहा है। भारत में मौजूदगी बढ़ा रही कंपनी यह मांग ऐसे समय में आई है जब एप्पल चीन से बाहर निकलकर भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक साल 2022 से भारत में आईफोन की हिस्सेदारी दोगुनी होकर 8% हो गई है। जबकि दुनिया भर में आईफोन की कुल शिपमेंट में चीन का हिस्सा अभी भी 75% है, वहीं भारत का हिस्सा 2022 से चार गुना बढ़कर 25% हो गया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल बाजार है। क्या है एप्पल का प्लान? एप्पल के कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स फॉक्सकॉन और टाटा ने पांच प्लांट खोलने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है। लेकिन इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा आईफोन असेंबली के लिए महंगी मशीनें खरीदने में चला जाता है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर एप्पल अपनी व्यावसायिक प्रथाओं को बदले बिना नई दिल्ली को साल 1961 के उस कानून को बदलने के लिए राजी नहीं कर पाता जो भारत में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के विदेशी मालिकाना हक को कवर करता है, तो उसे अरबों डॉलर का अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। चीन में नहीं देना होता टैक्स चीन में एप्पल आईफोन बनाने वाली मशीनें खरीदता है और उन्हें अपने कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को देता है। भले ही वह उन मशीनों का मालिक हो, फिर भी उस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। लेकिन भारत में ऐसा संभव नहीं है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और दो अन्य उद्योग सूत्रों ने बताया कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत एप्पल के ऐसे मालिकाना हक को एक तथाकथित 'व्यावसायिक संबंध' माना जाएगा। इससे अमेरिकी कंपनी के आईफोन मुनाफे पर भारतीय टैक्स लग जाएगा। एप्पल को होगा फायदा सूत्रों ने बताया कि एप्पल के अधिकारियों ने हाल के महीनों में भारतीय अधिकारियों से इनकम टैक्स के इस कानून में बदलाव के लिए बातचीत की है। कंपनी को डर है कि मौजूदा कानून उसके भविष्य के विकास में बाधा डाल सकता है। एक सूत्र ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स एक हद से ज्यादा पैसा नहीं लगा सकते। उन्होंने कहा अगर पुराने कानून में बदलाव किया जाता है तो एप्पल के लिए विस्तार करना आसान हो जाएगा।

भोपाल की वायु गुणवत्ता पर नजर रखेगा हाईटेक सर्विलांस सिस्टम

भोपाल  भोपाल शहर में हवा, पानी और ध्वनि की जांच के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सर्विलांस का उपयोग करेगा। इस सर्विलांस की मदद से सड़क से लेकर चार दीवारी के बीच होने वाले प्रदूषण की जांच की जा सकेगी। जांच से मिलेगा डाटा का एनालिसिस होगा। इसमें एआइ की मदद ली जाएगी। अभी शहर में तीन स्थानों पर बोर्ड रियल टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। इनकी लागत करीब तीन करोड़ है। मॉनिटरिंग के बाद सर्विलांस सिस्टम को भी उपयोग किया जाएगा। इसे पीसीबी ने विकसित किया है। हवा पानी से लेकर साइंस की जांच के साथ आंकड़ों का तुरंत एनालिसिस करने में यह मददगार साबित होगा। पीसीबी ने इस साल सेटेलाइट बेस निगरानी का भी उपयोग किया। यह पराली के लिए इस्तेमाल की गई है। ब्रजेश शर्मा, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि शहर में हवा पानी की जांच के लिए तकनीक का उपयोग हो रहा है। सर्विलांस सिस्टम के लिए राजधानी में अलग डिवीजन तैयार की गई है। इस सिस्टम के सहारे रियल टाइम आंकड़ों के साथ ही एआइ मॉनिटरिंग भी होगी। आंकड़े जल्द और स्पष्ट मिलेंगे। क्या है सर्विलांस सिस्टम अधिकारियों के मुताबिक यह एक डाटा कलेक्शन सेंटर है। इससे हवा, पानी और ध्वनि की जांच कर रहे हैं। औद्योगिक निगरानी, सार्वजनिक जानकारी जोड़ी जा रही है। ये एनालिसिस करेगा। जानकारों के मुताबिक उन कारणों का पता लगाना आसान होगा जो प्रदूषण के लिए जिमेदार हैं। अभी चार स्थानों पर मैन्युअल जांच, ये भी जुडे़ंगे वर्तमान में राजधानी में सात स्थानों पर जांच हो रही है। इनमें तीन रियल टाइम हैं, जबकि चार मैन्युअल हैं। मैन्युअल जांच में एक औद्योगिक क्षेत्र हैं।

20 वर्षों में पहली बार भारत हुआ कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए प्राथमिक विकल्प

नई दिल्ली  भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गुड न्यूज है.भारत में 20 साल बाद कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो सकता है. कॉमनवेल्थ गेम्स के कार्यकारी बोर्ड ने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों के मेजबान शहर के रूप में अहमदाबाद के नाम की सिफारिश की. राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी अहमदाबाद को देने पर आखिरी फैसला 26 नवंबर को ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेल आमसभा की बैठक में लिया जाएगा. इससे पहले भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन साल 2010 में नई दिल्ली में हुआ था. भारत को नाइजीरिया से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था लेकिन राष्ट्रमंडल खेल ने भविष्य के खेलों के लिए इस अफ्रीकी देश की मेजबानी की महत्वाकांक्षाओं को ‘समर्थन और गति प्रदान करने के लिए एक रणनीति विकसित करने’ का निर्णय लिया है. जिसमें 2034 खेलों की मेजबानी पर विचार भी शामिल है. 100वीं सालगिरह अहमदाबाद में 1930 में हैमिल्टन, कनाडा में शुरू हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 में अपने 100वें पड़ाव पर होगा. कॉमनवेल्थ गेम्स अपनी 100वीं सालगिरह अहमदाबाद में मनाएगा. कॉमनवेल्थ गेम्स की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "कॉमनवेल्थ गेम्स की एक्ज़ेक्यूटिव बोर्ड- कार्यकारी बोर्ड ने आज पुष्टि कर दी है कि वह अमदाबाद, भारत को 2030 सेंटेनरी कॉमनवेल्थ खेलों के लिए प्रस्तावित मेजबान शहर के रूप में सिफारिश करेगा." इस प्रेस रीलीज़ में कहा गया है,"अमदावाद (जिसे गुजरात राज्य में अहमदाबाद के नाम से भी जाना जाता है) को अब पूरे कॉमनवेल्थ गेम्स की सदस्यता के सामने रखा जाएगा, जिसमें 26 नवंबर को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स के जनरल बॉडी -आमसभा में अंतिम फैसला लिया जाएगा."  अमित शाह का आया रिएक्शन अमित शाह ने भारत की मेजबानी का रास्ता साफ होने पर ट्वीट कर कहा,"भारत के लिए बेहद खुशी और गर्व का दिन. अहमदाबाद में राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेजबानी के लिए भारत की बोली को राष्ट्रमंडल संघ द्वारा मंजूरी दिए जाने पर भारत के प्रत्येक नागरिक को हार्दिक बधाई. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भव्य समर्थन है. भारत को विश्व खेल मानचित्र पर स्थान दिलाने के लिए जी के अथक प्रयास. विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा खड़ा करके और देश भर में खेल प्रतिभाओं का समूह तैयार करके मोदी जी ने भारत को एक अद्भुत खेल स्थल बना दिया है." भारत ने रेस में नाइजीरिया को हराया कॉमनवेल्थ गेम्स  की कार्यकारी बोर्ड ने बुधवार को अहमदाबाद को 2030 कॉमनवेल्थ खेलों के लिए मेजबान शहर के रूप में सिफारिश की. भारत ने इन खेलों की मेज़बानी की रेस में नाइजीरिया को पीछे छोड़ दिया. कॉमनवेल्थ गेम्स की एक्ज़ेक्यूटिव बोर्ड ने अफ्रीकी देश की मेजबानी की को भी आनेवाले खेलों के आयोजन का आश्वासन दिया है. इसके लिए एक रणनीति बनाने का फैसला भी किया गया है. मुमकिन अगला मौका 20234 में नाइजिरिया को मिले. कैसे रंग लाई भारत की मुहिम? भारतीय ओलिंपिक संघ ने इसी साल अगस्त में भारत सरकार की सहमति के बाद मेज़बानी के लिए कॉमनवेल्थ बिड सबमिट किया था. फिर सितंबर में लंदन में भारतीय ओलिंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा, गुजरात के गृह और खेल मंत्री हर्ष सांघवि, भारतीय ओलिंपिक संघ के सीईओ रघुराम अय्यर और सेक्रेटरी अश्वनि कुमार की टीम ने खेलों के लिए प्रेज़ेन्टेशन भी दिया. अहमदाबाद ने प्रेज़ेन्टेशन के ज़रिये भी फैसला अपने हकॉ में करवा लिया.  इतने मेडल जीत चुका है भारत 1934 में राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत के बाद से भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में 564 पदक जीते हैं. भारतीय एथलीटों ने 1934 में राष्ट्रमंडल खेलों, जिसे तब ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था, में डेब्यू किया था. लंदन 1934 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय दल में छह एथलीट शामिल थे, जिन्होंने 10 ट्रैक और फील्ड स्पर्धाओं और एक कुश्ती स्पर्धा में भाग लिया था. भारत ने अपने पहले राष्ट्रमंडल खेलों में एक पदक जीता था. पिस्टल निशानेबाज जसपाल राणा राष्ट्रमंडल खेलों में 15 पदक – नौ स्वर्ण, चार रजत और दो कांस्य के साथ सबसे सफल भारतीय एथलीट हैं.1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने शूटिंग सर्किट पर दबदबा बनाया. 2010 में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दौरान भारतीय निशानेबाजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. नई दिल्ली 2010 में, भारत ने 101 पदक – 39 स्वर्ण पदक, 26 रजत और 36 कांस्य जीतकर पदक लीडरबोर्ड पर दूसरा स्थान हासिल किया था. नई दिल्ली 2010 भारत का अब तक का सबसे सफल राष्ट्रमंडल खेल बना हुआ है. राष्ट्रमंडल खेल ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘राष्ट्रमंडल खेल के कार्यकारी बोर्ड ने आज पुष्टि की है कि वह 2030 शताब्दी राष्ट्रमंडल खेलों के लिए प्रस्तावित मेजबान शहर के रूप में भारत के अहमदाबाद की सिफारिश करेगा.’ विज्ञप्ति के अनुसार, ‘अहमदाबाद को अब पूर्ण राष्ट्रमंडल खेल सदस्यता के लिए प्रस्तावित किया जाएगा जिस पर अंतिम फैसला 26 नवंबर को ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेल महासभा में लिया जाएगा.’ भारत ने 2010 के सत्र की मेजबानी नयी दिल्ली में की थी.  

छमाही परीक्षाओं के लिए बोर्ड पैटर्न अनुसार प्रश्नपत्रों की तैयारी शुरू

भोपाल  सरकारी स्कूलों में नौवीं से 12वीं तक की छमाही परीक्षाएं तीन नवंबर से आयोजित की जा रही है। इसमें अक्टूबर तक के करीब 70 फीसद पाठ्यक्रम से सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है, इससे कुछ स्कूलों का पाठ्यक्रम करीब 40 से 50 फीसद पूरा हुआ है। स्कूलों में 18 से 23 अक्टूबर तक दीपावली का अवकाश है। इसको देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूलों को अतिरिक्त कक्षाएं संचालित कर पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। अब कई स्कूलों ने अवकाश में भी रेमेडियल कक्षाएं लगाकर पाठ्यक्रम पूरा कराने की योजना पर काम कर रहे हैं। विभाग ने सरकारी स्कूलों में होने वाली छमाही परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है। इनमें पाठ्यक्रम 70 प्रतिशत हिस्सा कवर किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की वार्षिक के हिसाब से तैयारी हो सके। वहीं बोर्ड व वार्षिक परीक्षा फरवरी में होगी। प्रश्नपत्र ईमेल के माध्यम से स्कूलों में भेजे जाएंगे और वहीं से प्रिंट निकालकर विद्यार्थियों में वितरित किए जाएंगे। प्रश्नपत्र बोर्ड के पैटर्न पर तैयार होंगे। रिजल्ट में देखा जाएगा कि जिन सवालों में अधिकांश विद्यार्थी गलती कर रहे हैं, उनके लिए अलग से कक्षा लगाई जाएगी, ताकि वे वार्षिक परीक्षा में इस गलती को न दोहराएं। विद्यार्थियों के लिए रेमेडियल और विशेष कक्षाएं भी लगाई जाएंगी, ताकि वार्षिक परीक्षा के लिए उनकी पर्याप्त तैयारी हो सके। अवकाश में भी लग रही कक्षाएं सांदीपनि विद्यालय बरखेड़ी के प्राचार्य केडी श्रीवास्तव ने बताया कि पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए दीपावली की छुट्टियों में भी कक्षाएं संचालित की जाएंगी। विद्यार्थी अपने मन से कक्षाओं में आएंगे। वहीं सांदीपनि विद्यालय निशातपुरा के प्राचार्य आरसी जैन ने बताया कि 60 फीसद पाठ्यक्रम पूरा कर लिया गया है। रविवार और दीपावली के अवकाश में भी कक्षाएं लगाई जाएंगी।इसके अलावा रेमेडियल कक्षाएं भी संचालित की जा रही है। इस बार फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं अधिकारियों ने बताया कि पेपर बोर्ड पैटर्न पर तैयार किया जाएगा और कठिनाई स्तर का भी ध्यान रखेंगे। इसे मध्यम स्तर पर तैयार करेंगे ताकि छात्रों को वार्षिक परीक्षा का पूर्वाभ्यास हो जाए। इस बार 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के पहले सप्ताह से शुरू हो रही हैं। इस वजह से भी अधिकतम पाठ्यक्रम को कवर करेंगे। विद्यार्थियों को उत्तरपुस्तिकाएं दिखाएंगे परीक्षा के दौरान ही उत्तरपुस्तिकाएं चेकिंग का काम भी शुरू हो जाएगा। जिस विषय का पेपर होता जाएगा, उसकी उत्तरपुस्तिकाएं भी जांचनी शुरू कर दी जाएंगी। ऐसी व्यवस्था की जाएगी कि परीक्षा समाप्ति के दो-तीन दिन के भीतर ही छात्रों को उनकी उत्तरपुस्तिकाएं दिखा दी जाए। अधिकारियों ने बताया कि विद्यार्थियों को कक्षाओं में संबंधित विषय के शिक्षक यह भी बताएंगे कि उन्होंने कहां गलती की है और वार्षिक परीक्षा में इस तरह के प्रश्नों के उत्तर कैसे लिखने हैं। अभी से स्कूलों में रेमेडियल कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इसी के साथ छमाही परीक्षा के परिणाम के आधार पर भी स्कूलों में विशेष कक्षाएं लगाकर उनकी समस्या दूर की जाएगी। स्कूल स्तर पर भी पेपर तैयार करवाकर विद्यार्थियों से हल करवाएंगे। छमाही परीक्षाओं के लिए विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। नरेंद्र अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी

दालों के उत्पादन में प्रथम, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश

कृषि के क्षेत्र में मध्यप्रदेश स्थापित कर रहा है नये कीर्तिमान दालों के उत्पादन में प्रथम, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन में तीसरे स्थान पर मध्यप्रदेश किसानों के हर सुख-दुख में साथ है मध्यप्रदेश सरकार भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विकास और किसान कल्याण में मध्यप्रदेश सरकार प्राण-प्रण से जुटी हुई है। मध्यप्रदेश उत्पादक गतिविधियों में नवाचार कर रहा है। सरकार किसानों के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ी है। प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं। उत्पादन में रिकार्ड दर्ज कर प्रदेश को अनेक अवार्ड हासिल हुए हैं। म.प्र. दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान पर, खाद्यान उत्पादन में द्वितीय स्थान पर और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। प्रदेश में त्रि-फसली क्षेत्र में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रदेश में नरवाई जलाने की घटनाओं में कमी (हतोत्साहित) करने के लिए प्रदेश में प्रभावी कार्यवाही की गई है। किसानों के सम्मान के साथ प्रोत्साहन भी राज्य सरकार द्वारा रबी 2024-25 में उपार्जित गेहूँ पर राशि रूपये 175 प्रति क्विटंल प्रोत्साहन राशि प्रदाय की गई। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा फरवरी 2025 में लगभग 83.50 लाख से अधिक किसानों को करीब 1770 करोड़ रूपये किसान सम्मान निधि सिंगल क्लिक से अंतरित की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत 81 लाख से अधिक किसानों के खातों में 1624 करोड़ रूपये सिंगल क्लिक के माध्यम से जमा की गई। पहली बार समर्थन मूल्य पर सोयाबीन की खरीदी प्रदेश में पहली बार भारत सरकार की प्राईस सर्पोट स्कीम अंतर्गत सोयाबीन का उपार्जन किया गया, जिसमें 2,12,568 कृषकों से कुल 6.22 लाख मीट्रिक टन मात्रा का उपार्जन किया गया है, जिसके न्यूनतम समर्थन मूल्य की राशि 3043.04 करोड़ है। अन्न के उत्पादन को बढावा देने के लिए रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना लागू की है, जिसके तहत किसानों को 3900 रूपये प्रति हैक्टेयर डी.बी.टी. के माध्यम से प्रदान किया जायेगा। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, स्वाईल हेल्थ कार्ड और सिंचाई सुविधाओं में वृद्धि का लाभ भी मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत फसल के नुकसान का समय पर आकलन एवं राहत राशि का वितरण किसानों को मिल रहा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नामांकन एवं दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, एनसीआईपी पोर्टल के साथ भूमि रिकॉर्ड को सफलता पूर्वक एकीकृत करने और पोर्टल को किसान अनुकूल बनाने के लिए मध्यप्रदेश को 'उत्कृष्टता प्रमाण पत्र' प्रदान किया गया है। नमो ड्रोन दीदी योजनांतर्गत मध्यप्रदेश में 89 दीदियों को स्वाबलंबी बनाया गया है। नमो ड्रोन से 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में तरल उरर्वरक का छिड़काव कर दीदियों ने 21.22 लाख रूपये की शुद्ध आय प्राप्त की है। वर्ष 2025-26 में 1066 दीदिओं को योजनांर्तगत लाभान्वित किया जा रहा है। नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र पर 412 करोड़ का अनुदान कृषकों द्वारा फसल अवशेष (पराली) जलाने से रोकने के लिये शासन द्वारा कई कदम उठाये गये है, जिसमें प्रदेश स्तर पर 46,800 से अधिक नरवाई प्रबंधन से संबंधित कृषि यंत्र अनुदान पर वितरित करते हुए 412 करोड़ रूपये की अनुदान राशि जारी की गई है। कौशल विकास केन्द्रों के माध्यम से किसान ड्रोन पायलट प्रशिक्षण एवं ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान कराया जा रहा है। प्रशिक्षण में 50 प्रतिशत शुल्क का भुगतान म.प्र. शासन द्वारा वहन किया जा रहा है। अब तक 412 युवाओं को ड्रोन पायलट का प्रशिक्षण तथा 33 प्रशिक्षणार्थियों को ड्रोन तकनीशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्रों से कृषक हो रहे लाभान्वित कृषकों को सस्ते दर पर यंत्र उपलब्ध कराने एवं ग्रामीण युवाओं को स्वावलंबी बनाये जाने के लिये सरकार के संकल्प के अनुसार हर वर्ष 1000 कस्टम हायरिंग केन्द्र स्थापित किये जा रहे है। अब तक 4730 कस्टम हायरिंग केन्द्र प्रदेश स्तर पर स्थापित है जिससे कृषकों को लाभ मिल रहा है। कस्टम हायरिंग के 25 लाख रूपये तक के प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत अधिकतम 10 लाख रूपये का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में अपेडा अन्तर्गत 11.48 लाख हेक्टयर फसल उत्पादन क्षेत्र एवं वनोपज संग्रहण क्षेत्र सहित कुल 20.55 लाख हेक्टयर जैविक क्षेत्र पंजीकृत है। "एक जिला एक उत्पाद" अंतर्गत कृषि संबंधी 6 उत्पाद कोदो-कुटकी-अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिंगरौली, तुअर दाल- नरसिंहपुर, चना-दमोह, बासमति चावल-रायसेन, चिन्नोर चावल-बालाघाट, सरसों-भिण्ड एवं मुरैना जिले शामिल किये गये है। फार्म गेट एप के तहत किसान अपनी उपज का विवरण, फोटो मोबाइल एप्लिकेशन पर डाल कर मंडी मे पंजीकृत व्यापारियों के साथ मोल भाव कर सकता है। सौदा तय होने पर किसान की सहमति प्राप्त कर व्यापारी सीधे किसान के गाँव / खेत से उपज उठा लेता है। इससे भौतिक रूप से माल के परिवहन की आवश्यकता नहीं रहती और माल न बिकने की अनिश्चितता को समाप्त करता है। मंडी के माध्यम से किसान को मंडी अनुबंधित व्यापारी का चयन कर खेत/गोदाम पर ही फसल बेचने की सुविधा है। रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना रानी दुर्गावती अन्न प्रोत्साहन योजना में किसानों को एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 3 हजार 900 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जा रही है। शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन फसल ऋण के लिए इस वर्ष 600 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। विगत वर्ष किसानों को समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ पर प्रति क्विंटल 125 रुपये का बोनस प्रदाय किया गया।  

महासमुंद जिला अब स्वस्थ, आयुष्मान भारत योजना से मिली बेहतर स्वास्थ्य सेवा

रायपुर : आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना से स्वस्थ हो रहा महासमुंद जिला 10 लाख से अधिक हितग्राही बने आयुष्मान कार्डधारी, 27 हजार वरिष्ठजन को मिला वय वंदन कार्ड का लाभ रायपुर रजत जयंती वर्ष 2025-26 के अवसर पर महासमुंद जिला जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल हो रहा है। शासन की मंशानुरूप आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना का लक्ष्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को गुणवत्तापूर्ण, कैशलेस और सुलभ स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले में 257 जन आरोग्य मंदिरों के माध्यम से जन-जागरूकता और सेवा विस्तार का कार्य निरंतर जारी है। इन केंद्रों पर नागरिकों को योजना की जानकारी, पात्रता जांच, दस्तावेज सत्यापन और आयुष्मान कार्ड निर्माण की सुविधा एक ही स्थान पर प्रदान की जा रही है। अब तक जिले में 10 लाख 16 हजार 800 हितग्राहियों के आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 88.4 प्रतिशत है। इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 9 लाख 9 हजार 955 और शहरी क्षेत्र के 1 लाख 6 हजार 845 लाभार्थी शामिल हैं। विकासखण्ड स्तर पर पिथौरा, बागबाहरा, बसना, सरायपाली और महासमुंद सभी क्षेत्रों में विशेष शिविरों एवं घर-घर संपर्क अभियान के माध्यम से कार्ड निर्माण का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण हेतु जिले में 27 हजार 816 आयुष्मान वय वंदन कार्ड बनाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश लाभार्थी ग्रामीण अंचलों से हैं। यह कार्ड 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को 5 लाख रुपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करता है। उल्लेखनीय है कि आयुष्मान कार्डधारी परिवार सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में बिना किसी अग्रिम भुगतान के कैशलेश इलाज प्राप्त कर सकते हैं। योजना से स्वास्थ्य सेवाओं में न केवल विश्वास बढ़ा है, बल्कि लोगों की चिकित्सा पहुँच भी अधिक सहज और समान हुई है।