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मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण कदम

सोनोग्राफी सेवाओं के लिए 87 मेडिकल ऑफिसर हुए अधिकृत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण कदम भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है कि 11 वर्षों के सतत् विभागीय प्रयासों और समर्पित कार्य के बाद पीसीपीएनडीटी अधिनियम के अंतर्गत कम्पिटेंसी बेस्ड टेस्ट के परिणाम घोषित किए गए हैं। मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर द्वारा घोषित परिणामों में 87 चिकित्सक (मेडिकल ऑफिसर्स) ने सफलता प्राप्त की है। अब ये सभी पात्र चिकित्सक सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) के क्षेत्र में वैध रूप से चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान कर सकेंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश की मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी। प्रशिक्षित एवं प्रमाणित चिकित्सक ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण अल्ट्रासाउंड सेवाएं उपलब्ध कराकर गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच सेवाओं को सशक्त करेंगे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सफल हुए सभी चिकित्सकों को बधाई देते हुए उनसे अपेक्षा की कि वे इस उपलब्धि को समाजसेवा का माध्यम बनाते हुए प्रदेश के प्रत्येक कोने में सेवा की भावना से कार्य करें। उन्होंने कहा कि आप सभी चिकित्सक प्रदेश की स्वास्थ्य सुरक्षा के अग्रदूत हैं, आपकी सेवा भावना और दक्षता से ही ‘स्वस्थ मध्यप्रदेश’ के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रशिक्षण एवं परीक्षा प्रक्रिया में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों, विशेषज्ञों और संस्थानों की सराहना की है।  

बेंगलुरु का ट्रैफिक जाम खत्म करेगा बिजनेस कॉरिडोर प्रोजेक्ट, जानिए क्या है योजना

बेंगलुरु देश का बड़ा औद्योगिक शहर बेंगलुरु किलोमीटरों तक लगने वाले जाम के चलते चर्चा में रहा है। शहर का जनजीवन भी इस जाम की समस्या से प्रभावित हुआ है और अब इससे निपटने के लिए बेंगलुरु बिजनेस कॉरिडोर बनाने की तैयारी है। इस 117 किलोमीटर के कॉरिडोर से टेक सिटी को जाम मुक्त करने का प्लान है। यह दिल्ली के रिंग रोड जैसा होगा, जो पूरे बेंगलुरु को बाहर से होते हुए ही कनेक्ट करेगा। कर्नाटक कैबिनेट की ओर से इसकी मंजूरी मिल गई है। इस प्रोजेक्ट को बेंगलुरु डिवेलपमेंट अथॉरिटी की ओर से पूरा किया जाएगा और इसकी टाइमलाइन दो साल की रखी गई है। इस प्रोजेक्ट का ऐलान करते हुए कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार का कहना है कि बेंगलुरु का जाम खत्म करने की दिशा में यह ऐतिहासिक कदम होगा। उन्होंने कहा, 'बेंगलुरु चोक हो रहा है। हम चाहते हैं कि ट्रैफिक की समस्या कम हो। मैं जानता हूं कि इस प्रोजेक्ट से 1900 परिवार प्रभावित होंगे। लेकिन सरकार उन्हें उम्मीद से बढ़कर मुआवजा देगी। हमारा यह फैसला कर्नाटक सरकार की ओर से लिए गए सबसे बड़े निर्णयों में से एक है।' शिवकुमार ने कहा कि यह कॉरिडोर बन जाएगा तो बेंगलुरु का 40 पर्सेंट ट्रैफिक कम हो जाएगा। इससे हाइवेज और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की ओर गुजरने वाले बड़े वाहन शहर के बाहरी इलाके से ही निकल जाएंगे। उन्होंने कहा कि यदि कुछ जमीन मालिकों ने भूमि देने से इनकार किया तो हम अदालत में मुआवजा जमा करेंगे और काम को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के विकास के लिए अहम इस परियोजना को हम किसी भी कीमत पर नहीं रोकेंगे। इस प्रोजेक्ट में 10000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना के लिए अधिग्रहित होने वाली जमीन के लिए सरकार ने किसानों को 5 विकल्प दिए हैं। इसके तहत किसानों को विकसित भूमि भी मिलेगी। यदि वे चाहेंगे तो उन्हें रिहायशी और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट्स में भी जगह दी जाएगी। कर्नाटक सरकार का मानना है कि यह परियोजना बेंगलुरु के विकास के लिए गेमचेंजर होगी।

210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग! बिहार में हो रहा है विश्व के सबसे बड़े मंदिर का निर्माण

पटना  बिहार में दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर बन रहा है. चौंकिए मत! यह बिल्कुल सच है. पूर्वी चंपारण जिले के चकिया में विश्व का सबसे बड़ा विराट रामायण मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है. यह भव्य मंदिर 33 फीट ऊंचा होगा. इसमें 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग स्थापित किया जाएगा. मंदिर प्रशासन के मुताबिक, शिवलिंग का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है और जनवरी-फरवरी 2026 तक इसकी स्थापना कर दी जाएगी. आपको बता दें कि विराट रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है. मंदिर परिसर में प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी, शिवलिंग और गर्भगृह की नींव (पाइलिंग) का कार्य पूरा हो चुका है. तमिलनाडु में तैयार हो रहा है शिवलिंग इस मंदिर में स्थापित होने वाले शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम में किया जा रहा है. फिलहाल इसकी कलाकृति और पॉलिश का अंतिम काम चल रहा है. निर्माण पूरा होने के बाद यह विशाल शिवलिंग सड़क मार्ग से महाबलीपुरम से चकिया स्थित विराट रामायण मंदिर तक लाया जाएगा. यह शिवलिंग देश के किसी भी मंदिर में स्थापित सबसे बड़ा शिवलिंग माना जा रहा है. मुख्य शिखर की ऊंचाई होगी 270 फीट इस मंदिर का आकार भी बेहद भव्य होगा. इसकी लंबाई 1080 फीट और चौड़ाई 540 फीट होगी. इसमें कुल 18 शिखर और 22 मंदिर शामिल होंगे. मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी. जबकि दूसरे शिखरों की ऊंचाई 180, 135, 108 और 90 फीट रखी गई है. बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद और महावीर मंदिर स्थान न्यास समिति के सदस्य सायण कुणाल ने बताया कि निर्माण कार्य तय समय पर पूरा करने की हर संभव कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि बिहार के गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है. इस खास जगह पर हो रहा है निर्माण इस मंदिर का निर्माण कार्य 20 जून 2023 को शुरू हुआ था. निर्माण का जिम्मा सनटेक कंपनी को दिया गया है. जबकि वीआरएम (विराट रामायण मंदिर) और टाटा कंसलटेंसी के अधिकारी भी कार्य की निगरानी में तैनात हैं. मंदिर का निर्माण स्थल पूर्वी चंपारण के केसरिया और चकिया के बीच स्थित जानकीनगर में है. यह पटना से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मंदिर परिसर में 4 आश्रम भी बनाए जा रहे हैं. आचार्य किशोर कुणाल का है ड्रीम प्रोजेक्ट आपको बता दें कि इस मंदिर को स्वर्गीय आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है. मंदिर की परिकल्पना और रूपरेखा उनके ही नेतृत्व में तैयार की गई थी.  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में दिए निर्देश

आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लिए हुए प्रयासों को प्रमुखता से करें प्रदर्शित राजधानी के साथ संभाग और जिला स्तर पर भी हों भव्य कार्यक्रम   भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस उद्योग एवं रोजगार वर्ष की थीम पर मनाया जाए। आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश को लेकर हुए नवाचारों और विशेष गतिविधियों का प्रभावी रूप से प्रस्तुतीकरण किया जाए। 'रोजगार के मंदिर हैं उद्योग' की थीम के साथ कौशल उन्नयन, तकनीकी शिक्षा, उद्यमशीलता के विकास सहित युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली सभी गतिविधियों का स्थापना दिवस संबंधी कार्यक्रमों में प्रभावी और आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए।  साथ ही प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों से अर्थव्यवस्था में आई गतिशीलता पर भी प्रस्तुतीकरण हों। स्थापना दिवस पर बीते दो वर्षों में हुए नवाचारों को भी प्रदर्शित किया जाए। स्थापना दिवस को राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाए। भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ सभी जिला और संभागीय मुख्यालयों पर भी भव्य कार्यक्रम आयोजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1 नवंबर मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह के संबंध में मंत्रालय में सोमवार को हुई बैठक में यह निर्देश दिए। प्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री जुबिन नौटियाल एक नवम्बर को देंगे प्रस्तुति बैठक में बताया गया कि मध्यप्रदेश स्थापना दिवस 1 नवंबर को भोपाल में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में प्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री जुबिन नौटियाल प्रस्तुति देंगे। लाल परेड ग्राउंड में होने वाले इस कार्यक्रम में श्रीकृष्ण के भक्ति पदों की प्रस्तुति के साथ ही विरासत से विकास की थीम पर ड्रोन-शो होगा। साथ ही आतिशबाजी भी होगी। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर दो और तीन नवंबर को राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लाल परेड ग्राउंड पर महानाट्य -सम्राट विक्रमादित्य की प्रस्तुति होगी। साथ ही दो एवं तीन नवम्बर को सुगम संगीत की प्रस्तुतियां भी होंगी। औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्थापना दिवस समारोह की गतिविधियों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के हितग्राहियों को भी शामिल किया जाए। उनके सम्मेलन और रैलियां आयोजित हों। साथ ही जिलों में प्रमुख उद्योगपतियों और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले व्यक्तियों और समूहों की उपलब्धियों को भी शामिल किया जाए। प्रदेश के सभी अंचलों में समान रूप से गतिविधियां हों, हर जिला अपनी प्रगति और उपलब्धियों जिला स्तर पर प्रस्तुत करे। साथ ही स्व-सहायता समूह और आईटीआई, पॉलिटेक्निक सहित अन्य संस्थाओं द्वारा युवाओं, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों, कृषक संगठनों द्वारा किसान कल्याण के लिए संचालित गतिविधियों के प्रदर्शन को भी समारोह का हिस्सा बनाया जाए। विभिन्न विषयों पर प्रदर्शनियों के साथ लगेगा देशज व्यंजनों का मेला बैठक में बताया गया कि स्थापना दिवस पर जननायकों के जीवन और अवदान पर भोपाल और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इसके साथ 'एक जिला-एक उत्पाद', सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, सम्राट विक्रमादित्य के सील और सिक्के, मंदिर स्थापत्य तथा भारतीय ऋषि परम्परा पर प्रदर्शनियों को आयोजन किया जाएगा। इसी क्रम में एक से 3 नवम्बर तक वन मेला, ड्रोन टैक वर्कशॉप और एक्सपो, मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला प्रदर्शनी, प्रदेश में विरासत से विकास, प्रदेश की बावड़ियों, भोज और भोपाल आदि विषय पर प्रदर्शनी और देशज व्यंजनों का मेला भी आयोजित किया जाएगा। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, श्री नीरज मंडलोई, श्री संजय शुक्ला, श्री शिवशेखर शुक्ला, प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह और मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार श्री श्रीराम तिवारी उपस्थित थे।  

शिक्षक बनने का मौका! MP SET 25 अक्टूबर से खुलेंगे आवेदन, सिर्फ NET सिलेबस मान्य

इंदौर मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने राज्य पात्रता परीक्षा (सेट) 2025 के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। परीक्षा के लिए आयोग ने कोई अलग से सिलेबस तय नहीं किया है, बल्कि यूजीसी की नेट परीक्षा का पाठ्यक्रम ही मान्य किया गया है। उम्मीदवार इसी सिलेबस के आधार पर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक राज्य पात्रता परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थियों को राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए पात्रता होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक सेट परीक्षा में दो पेपर होंगे। पहला पेपर सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य होगा, जिसमें शिक्षण एवं शोध योग्यता, बोधगम्यता, संचार, तार्किक तर्क, डेटा व्याख्या, आईसीटी, लोग एवं विकास, पर्यावरण तथा उच्च शिक्षा प्रणाली जैसे 10 विषयों से प्रश्न पूछे जाएंगे। यह पेपर अभ्यर्थियों की सामान्य योग्यता और समझ की जांच करेगा। दूसरा पेपर उम्मीदवार के चुने हुए विषय पर आधारित होगा, जिसमें स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे।   11 जनवरी 2025 को परीक्षा का आयोजन परीक्षा का आयोजन 11 जनवरी 2025 को किया जाएगा। दोनों पेपर एक ही दिन तीन घंटे में होंगे। आयोग ने दोनों प्रश्न पत्रों के कुल 300 अंक रखे गए हैं। पहले पेपर में 50 प्रश्न होंगे, जिनके कुल 100 अंक होंगे, जबकि दूसरे पेपर में 100 प्रश्न होंगे, जो 200 अंकों के होंगे। हर सही उत्तर के लिए 2 अंक मिलेंगे और गलत उत्तर पर कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा हिन्दी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में दी जा सकेगी। आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर से शुरू एमपीपीएससी ने आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर से 20 नवंबर 2025 तक रखी है। इस वर्ष परीक्षा 31 विषयों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए प्रदेशभर में 12 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना, सागर, उज्जैन, शहडोल, खरगोन, रतलाम और नर्मदापुरम शामिल है।

OTP पर निर्भर सुरक्षा: Mappls ने लॉन्च किया इंजन लॉक, चोरी पर पड़ेगा बड़ा अंकुश

नई दिल्ली ZOHO के मैसेजिंग ऐप Arattai की तरह ही अब स्वदेसी मैप Mappls को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रमोट किया है. इसके बाद से ही इसके शेयर में करीब 10 परसेंट का उछाला आया है. लेकिन यहां हम कंपनी के शेयर नहीं बल्कि Mappls का एक ऐसा खास फीचर बताने जा रहे हैं, जो आपकी कार चोरों से दूर रखने का काम करेगा.  Mappls ऐप के अंदर Immobiliser नाम का फीचर दिया है. इस फीचर का इस्तेमाल करके आप आसानी से अपनी कार के इंजन को रिमोटली बंद कर सकते हैं. इसके लिए आपको पासवर्ड या OTP एंटर करना होगा.  MapMyIndia ने तैयार किया Mappls  Mappls को MapMyIndia ब्रांड ने तैयार किया है. मैप माय इंडिया के मार्केट में कई GPS कार ट्रैकर मौजूद हैं, जिनमें से कुछ प्रोडक्ट के अंदर आपको कार चोरी होने से बचाने की सर्विस मिलती है.  स्वदेसी Mappls ऐप के साथ ये ट्रैकर कंपेटेबल होते हैं. ऐसे में यूजर्स चाहें तो पूरा सेटअप कराने के बाद अपनी कार के इंजन को घर बैठे ऑफ कर सकते हैं. इसमें फ्यूल ऑफ आदि हो जाता है. कार के ECU को कंट्रोल करता है इम्मोबिलाइजर     दरअसल, कार के अंदर इम्मोबिलाइजर होता है, जो इंजन को ऑन करने में मदद करता है. दरअसल, कार की चाबी के अंदर एक ट्रांस्पोंडर चिप होती है.      ये चिप इंजन के कंट्रोल यूनिट (ECU) को एक खास कोड भेजता है. जब ECU कोड को वेरिफाई करता है और कोड सही होने के बाद सिस्टम इंजन को ऑन होने की परमिशन देता है.     अगर कोड गलत या मिशिंग होता है तो कार का ECU सिस्टम फ्यूल सप्लाई को रोक देता है, जिससे कार का इंजन ऑन नहीं होता है.   इम्मोबिलाइजर ऐसे काम करता है  सबसे पहले तो अपनी कार में Mappls या किसी अन्य कंपनी का GPS ट्रैकर इंस्टॉल कराना होगा, जिनमें गाड़ी का इंजन स्विच ऑफ करने करने का फीचर मिलता है. जीपीएस ट्रैकर कार में लगे इम्मोबिलाइजर को कमांड देता है, जिसके बाद कार का इंजन, फ्यूल सप्लाई और स्टार्टर बंद हो जाते हैं.  मोबाइल ऐप पर मिलता है एक्सेस  मोबाइल ऐप Mappls पर जीपीएस ट्रैकर का एक्सेस मिलता है. इसकी मदद से आप कार की लोकेशन, इंजन ऑन होने पर नोटिफिकेशन्स देख सकते हैं. अगर कोई चोरी-छिपे कार को ऑन करता है तो मोबाइल पर तुरंत अलर्ट आ जाता है.  रिएक्टिवेशन का भी फीचर  कार के इंजन को अगर आपने रिमोटली ऑफ किया था और जब आपको सुरक्षित तौर पर कार रिकवर हो जाती है. तो आपको रिएक्टिवेशन को ऑन करना होगा. इसके बाद आप कार के इंजन को ऑन करके उसे चला सकते हैं.

मंत्री तोमर ने कहा- सिंहस्थ के कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करें एम.पी. ट्रांसको

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मुख्यालय जबलपुर में मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) द्वारा सिंहस्थ-2028 के लिये किये जा रहे कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में ऊर्जा मंत्री श्री तोमर को एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने वर्तमान कार्यों की प्रगति से अवगत कराया। मंत्री श्री तोमर ने निर्देश दिये कि सिंहस्थ-2028 प्रदेश सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है, सिंहस्थ के कार्यों की नियमित निगरानी रखी जायें और तय समय सीमा व उच्च गुणवत्ता के साथ सभी कार्य पूरे किये जाये। एम.पी. ट्रांसको उज्जैन में कर रही है यह कार्य मंत्री श्री तोमर ने सिंहस्थ-2028 में उज्जैन में निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिये पहले चरण में निर्माणधीन 132 के.व्ही. सब स्टेशन चिंतामन एवं 132 के.व्ही. सब स्टेशन त्रिवेणी बिहार के निर्माण कार्यों की प्रगति जानी। इसके अलावा एम.पी. ट्रांसकों 220 के.व्ही. सब स्टेशन शंकरपुरा में वर्तमान 20 एम.व्ही.ए. क्षमता के अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का तथा अपने 400 के.व्ही. सब स्टेशन ताजपुर में 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर रही है। जिनकी कार्य प्रगति के बारे मे भी ऊर्जा मंत्री ने जानकारी प्राप्त कर आवश्यक निर्देश दिये।  

अगर 14 दिन चीनी छोड़ दी जाए तो शरीर पर क्या असर होगा? AIIMS एक्सपर्ट का जवाब जानिए

नई दिल्ली चीनी शरीर के लिए बहुत अच्छी नहीं है और आपको अगर इसका बहुत ज्यादा सेवन करने की आदत है तो फिर ये खबर आपके लिए ही है. आपको अपनी इस आदत को बदलने और चीनी के सेवन पर नियंत्रण रखने पर विचार करना चाहिए. आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन सिर्फ दो हफ्तों तक चीनी छोड़ने से आपको अपने चेहरा साफ-सुथरा लगेगा, स्किन अंदर से क्लियर होगी, शरीर की सूजन और पेट की चर्बी में कमी दिखेगी और पेट की सेहत में भी सुधार जैसे कई बदलाव देखने को मिलेंगे. एम्स, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड जैसे मशहूर संस्थानों से ट्रेनिंग ले चुके गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने एक नए इंस्टाग्राम पोस्ट में दो हफ्तों तक अपनी डाइट से चीनी हटाने के बाद होने वाले कई पॉजिटिव बदलावों की जानकारी दी. डॉ. सेठी ने 15 अक्टूबर को अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के कैप्शन में लिखादो हफ्तों तक चीनी छोड़ने पर क्या होता है? क्या आपको लगता है कि आप दो हफ्ते बिना चीनी के रह सकते हैं? वास्तव में आपके शरीर को ये अनुभव हो सकते हैं. आंखों के आसपास सूजन या लिक्विड्स का जमाव कम होगा डॉ. सेठी के अनुसार, चीनी छोड़ने से चेहरे की सूजन और फैट कम हो सकता है जिससे आपका चेहरा अधिक नेचुरल और शार्प दिखता है. इसके अलावा उन्होंने बताया कि यह बदलाव लिवर में जमा फैट कम करने में मदद कर सकता है जिससे पेट की चर्बी कम जमा होती है. उन्होंने कहा, अगर आप सिर्फ 2 हफ्ते के लिए चीनी का सेवन बंद कर दें तो आपकी आंखों के आसपास सूजन या तरल पदार्थ का जमाव भी कम हो जाएगा. जैसे-जैसे आपके लिवर में फैट कम होने लगेगा, आपको पेट की चर्बी में भी कमी दिखाई देगी. चीनी छोड़ने से पेट ज्यादा खुश रहता है डॉ. सेठी ने यह भी बताया कि चीनी छोड़ने से आंत (इंटेस्टाइन) के माइक्रोबायोम को आंत को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है. उन्होंने आगे कहा कि मुंहासे या लालिमा जैसी त्वचा की समस्याओं वाले लोगों को चीनी कम करने से त्वचा साफ दिख सकती है. उन्होंने कहा, चूंकि चीनी छोड़ने से आंत के हेल्दी माइक्रोबायोम ज्यादा खुश रहते हैं तो अगर आपको कील-मुंहासे या लाल धब्बे हैं तो आपकी त्वचा में सुधार होता है और वो ज्यादा साफ दिखती है. दरअसल चीनी इन्फ्लेमेशन (सूजन) को बढ़ाती है जो कील, मुंहासे जैसी कई त्वचा की दिक्कतों का कारण बन सकता है. इसलिए चीनी छोड़ने से आपकी त्वचा साफ और चमकदार हो सकती है. शुरुआत में चीनी छोड़ना मुश्किल हो सकता है. लेकिन यह नामुमकिन नहीं है. आपको ये लंबे समय में कई फायदे दे सकता है.

निर्वाचन आयोग का सख्त आदेश: वोटिंग डे पर कर्मचारियों को देना होगा वैतनिक अवकाश

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव और सात राज्यों के आठ विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के मतदान के दिनों में वैतनिक अवकाश की घोषणा की है। चुनाव आयोग की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत, मतदान के हकदार प्रत्येक कर्मचारी को मतदान के दिन वैतनिक अवकाश दिया जाना चाहिए। इस अवकाश के लिए किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं काटा जाना चाहिए और इस नियम का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं को दंड का सामना करना पड़ सकता है। यह प्रावधान दैनिक वेतनभोगी और अस्थायी कर्मचारियों पर भी लागू होगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके है कि अनौपचारिक क्षेत्र के कर्मचारी बिना किसी वित्तीय नुकसान के मतदान कर सकें। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदान वाले निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत मतदाता लेकिन उन क्षेत्रों के बाहर औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत मतदाता भी मतदान की सुविधा के लिए सवेतन अवकाश के समान रूप से हकदार हैं। प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, आयोग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को नियोक्ताओं और अधिकारियों को इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देने का निर्देश दिया है। चुनाव आयोग ने प्रत्येक पात्र मतदाता के स्वतंत्र और सुविधाजनक तरीके से मतदान करने के अधिकार की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। यह निर्देश लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने और भारत की चुनावी प्रक्रिया में मतदान को एक मौलिक अधिकार के रूप में बनाए रखने के चुनाव आयोग के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने जा रहा है। पहले चरण के लिए मतदान छह नवंबर को और दूसरे चरण के लिए 11 नवंबर को मतदान होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर! छत्तीसगढ़ में सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की भारी कमी, 70% पद रिक्त

रायपुर प्रदेश के शासकीय सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी अब चिंता का विषय बन चुकी है। रायपुर के दाऊ कल्याणसिंह पोस्ट ग्रेजुएट व रिसर्च केंद्र और बिलासपुर के कुमार साहब स्व. श्री दिलीप सिंह जूदेव शासकीय सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में स्वीकृत 135 पदों में से 95 पद खाली पड़े हैं यानी 70 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। वहीं, राज्य के शासकीय दस मेडिकल कालेजों और एकमात्र रायपुर डेंटल कालेज में भी हालात बेहतर नहीं हैं। यहां स्वीकृत 2,160 पदों में से 1,155 पद रिक्त हैं, जो कुल पदों का 54 प्रतिशत है। डॉक्टरों की कमी के चलते सुपर स्पेशलिटी वार्ड नाममात्र के रह गए हैं। मरीजों को या तो सामान्य चिकित्सकों के भरोसे छोड़ा जा रहा है या उन्हें रेफर करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी नियुक्ति नहीं होने से डॉक्टरों में असुरक्षा की भावना है, जो इस संकट का एक बड़ा कारण है। रायपुर के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से पिछले एक साल में छह से अधिक डाक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि एमबीबीएस सीटों में बढ़ोतरी के चलते जहां मेडिकल क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, वहीं पीजी (स्नाकोत्तर) सीटें कम होने से विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार नहीं हो पा रहे हैं। वर्तमान में दस शासकीय और चार निजी मेडिकल कॉलेज संचालित है, जिसमें एमबीबीएस की 2,180 सीटें हैं। वहीं, पीजी की 311 व निजी में 186 सीटें हैं। इसके अलावा, सरकारी बांड नियम भी डाक्टरों के लिए एक बड़ी परेशानी बनकर उभरा है। यदि समय रहते सरकार ने स्थायी नियुक्तियों और पीजी सीटों में बढ़ोतरी पर ध्यान नहीं दिया, तो स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। राजपत्र में प्रकाशित नियम को दी गई चुनौती विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से मध्यप्रदेश की तरह वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालीय शैक्षणिक आदर्श सेवा भर्ती नियम 2019 सह संशोधन वर्ष 2020 अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की गई थी। इसमें पूर्व में संविदा में कार्यरत चिकित्सा शिक्षकों का स्वशासी समिति के माध्यम से नियमित करने का प्रविधान है। लेकिन, नियमति चिकत्सकों ने पदोन्नति, वरिष्ठता व प्रशासनिक नियुक्ति आदि प्रभावित होने की आशंका से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है, जो वर्तमान में विचाराधीन है। सुपरस्पेशलिटी अस्पतालों में विशेषज्ञों की स्थितिसंस्थान का नाम – स्वीकृत पद – कार्यरत (नियमित व संविदा) – रिक्तकुमार साहब स्व. श्री दिलीप सिंह जूदेव, बिलासपुर – 78 – 8 (एक व सात) – 70दाऊ कल्याणसिंह स्नातोकोत्तर व रिसर्च केंद्र, रायपुर – 57 – 32 (दो व 30) – 25 मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की स्थिति – कांकेर: स्वीकृत पद 148, कार्यरत 30 (19 नियमित, 11 संविदा), रिक्त 118 – दुर्ग: स्वीकृत पद 164, कार्यरत 49 (20 नियमित, 29 संविदा), रिक्त 115 – रायपुर: स्वीकृत पद 416, कार्यरत 242 (156 नियमित, 86 संविदा), रिक्त 174 – रायगढ़: स्वीकृत पद 91, कार्यरत 42 (24 नियमित, 18 संविदा), रिक्त 49 – कोरबा: स्वीकृत पद 150, कार्यरत 58 (34 नियमित, 24 संविदा), रिक्त 92 – सरगुजा: स्वीकृत पद 86, कार्यरत 60 (48 नियमित, 12 संविदा), रिक्त 26 – महासमुंद: स्वीकृत पद 150, कार्यरत 61 (45 नियमित, 16 संविदा), रिक्त 89 – जगदलपुर: स्वीकृत पद 154, कार्यरत 82 (37 नियमित, 45 संविदा), रिक्त 72 – राजनांदगांव: स्वीकृत पद 155, कार्यरत 66 (39 नियमित, 27 संविदा), रिक्त 89 – बिलासपुर: स्वीकृत पद 255, कार्यरत 123 (76 नियमित, 47 संविदा), रिक्त 132 – डेंटल कॉलेज: स्वीकृत पद 102, कार्यरत 70 (31 नियमित, 39 संविदा), रिक्त 32 मध्यप्रदेश, राजस्थान व कई अन्य राज्यों में स्वशासी समिति के माध्यम से नियमित भर्ती का प्रविधान लागू है। यहां के डाक्टरों में नियमित नहीं होने से असुरक्षा की भावना रहती है, जिसकी वजह से अवसर मिलने पर चले जाते हैं। MBBS के अनुसार पीजी की सीटें भी नहीं है। बांड नियम की वजह से एमबीबीएस के बाद कई विद्यार्थी सुपर स्पेशलिटी कोर्स करने से वंचित रह जाते हैं। डॉ. रेशम सिंह, अध्यक्ष, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन, रायपुर डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। शासन को इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। भर्ती नियम को लेकर राज्य शासन स्तर पर निर्णय लिया जाता है। शिखा राजपूत तिवारी, आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा, छत्तीसगढ़