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पीएम आवास योजना में प्रदेश के 49 लाख परिवारों को मिला अपना घर

खुद के घर की खुशी से बढ़कर कुछ नहीं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सबको आवास देना ही हमारा लक्ष्य आवास हितग्राहियों के लिये है यह विशेष दीवाली पीएम आवास योजना में प्रदेश के 49 लाख परिवारों को मिला अपना घर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम आवास योजना के अंतर्गत नीमच में तैयार 348 एएचपी आवास कॉलोनी का किया वर्चुअल लोर्कापण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि अपना घर हर किसी का सपना होता है। अपने घर की खुशी से बढ़कर और कुछ नहीं होता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 4 करोड़ से अधिक लोगों को उनका मकान बनाकर दिया है। प्रधानमंत्री का खुद का कोई घर नहीं है, लेकिन देश के सभी नागरिकों को मकान देना उन्होंने अपना लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीमच के 348 परिवार अपने सालों पुराने सपने को हकीकत में बदलते देख रहे हैं। यह दिवाली उनके जीवन की सबसे सुंदर दीपावली बनकर आई है, क्योंकि इस बार सभी अपने घर में में दिवाली मनाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन से नगर पालिका नीमच द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजनान्तर्गत अफोर्डेबल हाऊसिंग प्रोजेक्ट के तहत निर्मित आवासों की सुंदर कॉलोनी का वर्चुअल लोकार्पण कर हितग्राहियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यहां 348 परिवारों को गृह प्रवेश कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए घर के लाभार्थियों से संवाद कर सभी को धनतेरस के दिन मिले नये आवास और पंच दिवसीय दीपोत्सव की मंगलकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि जब गरीब का घर रोशन होता है, तभी देश में सच्ची दीपावली होती है। आज मध्यप्रदेश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। लक्ष्मी-गणेश की कृपा से मध्यप्रदेश जन-कल्याण और विकास की दीपावली मना रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी नीयत साफ है, हमारी नीतियां गरीबों को सशक्त करने की हैं एक दौर वो भी था जब गरीबों के नाम पर योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन उनका लाभ कई पुश्तों के बाद भी गरीब को नहीं मिल पाता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से हितग्राहियों को छत ही नहीं, स्वाभिमान और सुरक्षा दोनों मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 योजना के तहत हम 10 लाख आवास बनाएंगे। हम इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। पीएम आवास योजना (शहरी) के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश को बेस्ट परफार्मिंग स्टेट अवॉर्ड की श्रेणी में दूसरा स्थान मिला है। नीमच तो हमेशा से ही इस मामले में अव्वल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज ही नीमच जिले में 134 करोड़ की लागत से पीएम आवास के 348 घरों की चाबियां सौंपी जा रही हैं। जिसमें 144 मकान EWS के, 144 मकान LIG और 60 मकान MIG के शामिल हैं। साथ ही 33 कमर्शियल प्लॉट भी हैं। आज जो मल्टी स्टोरी आवास प्रदान किए जा रहे हैं, यह सिर्फ मकान नहीं, बल्कि एक पूरा परिसर विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यहां चमचमाती सड़कें, व्यवस्थित नालियां, ओवरहेड टैंक और सीवरेज पंपिंग स्टेशन की व्यवस्था की गई है। स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा के लिए गेट और बाउंड्री वॉल बनाई गई हैं। बच्चों के खेलने के लिए पार्क की स्थापना की गई है। कैंपस में हेल्थ केयर सेंटर (प्राथमिक उपचार केन्द्र), बस स्टॉप, फायर सुविधा भी है। यहां स्कूल बनाने के लिए भूमि भी आरक्षित की गई है। यानी हर ज़रूरत का पूरा ध्यान रखा गया है। यह समेकित परियोजना एक सच्चे मायनों में सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य की नींव रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रदेश में हर गरीब के पास पक्का मकान हो। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से शहरी गरीबों को पक्के घर देने की दिशा में मिशन मोड पर काम जारी है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पीएम आवास योजना के तहत अब तक 49 लाख से अधिक परिवारों का अपने घर का सपना पूरा हुआ है। 40 लाख से अधिक ग्रामीण और 8 लाख से अधिक शहरी परिवारों को अपनी छत मिली है। हमारे गांव और शहर दोनों एक साथ मुस्कुरा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीमच में बहुत जल्द मेडिकल कॉलेज बनेगा और हवाई सेवाओं से भी जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि नीमच की भादवा माता मध्यप्रदेश की वैष्णो देवी हैं। भादवा माता मंदिर के विकास के लिए भी सभी प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी बहनें हमारा मान हैं। बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की राशि पहुंच गई है, भाईदूज से 250 रुपए अलग से दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान भाइयों को भी हमने भावांतर योजना का उपहार दिया है। अब हमारी सरकार कोदो-कुटकी का उपार्जन भी करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश दीयों की दिवाली भी मना रहा है और दिलों की दिवाली भी मना रहा है। आज दोहरी खुशी का मौका है, त्यौहार की खुशी के साथ-साथ अपने घर का सपना साकार हुआ है। मुख्यमंत्री ने नव गृह प्रवेश करने वाले सभी हितग्राहियों की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। कार्यक्रम को नीमच विधायक दिलीप सिंह परिहार ने भी संबोधित किया। उन्होंने बताया कि आज नगर पालिका क्षेत्र नीमच में 348 घरों की पीएम आवास कॉलोनी सहित नीमच विधानसभा क्षेत्र की 25 ग्राम पंचायतों को स्वच्छता रथ भी दिए गए हैं। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री एवं नीमच जिले की प्रभारी मंत्री सु निर्मला भूरिया ने वर्चुअली सहभागिता की। नीमच में हुए कार्यक्रम में मंदसौर-नीमच सांसद सुधीर गुप्ता, पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा, विधायक माधव मारू, जिलाध्यक्ष मती खंडेलवाल एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में नीमच की नगर पालिका अध्यक्ष मती स्वाति चोपड़ा ने सभी का आभार व्यक्त किया।  

एम्स से सुभाष नगर तक भोपाल मेट्रो का CMRs निरीक्षण खत्म, जल्द दौड़ेगी मेट्रो

भोपाल  अक्टूबर में भोपाल मेट्रो के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर संचालन का जो लक्ष्य रखा गया था, अब वह पूरा होने के करीब है। मेट्रो प्रबंधन ने संचालन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली से आई कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम द्वारा दूसरे चरण का निरीक्षण पूरा करा लिया है। सीएमआरएस की तीन सदस्यीय टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम्स से सुभाष नगर स्टेशन तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य लाइन, ट्रैक, विद्युत और यांत्रिक (ई एंड एम) सिस्टम, स्टेशन भवन और परिचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। यह भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा मानी जा रही है। अब सिर्फ ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट का इंतजार है। इससे पहले 25 सितंबर को मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) और उनकी टीम ने डिपो और रोलिंग स्टॉक का परीक्षण किया था। वहीं इस बार सीएमआरएस टीम ने सभी स्टेशनों पर सुरक्षा और तकनीकी मानकों की समीक्षा की ताकि संचालन शुरू होने से पहले सभी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मानक अनुरूप हों। CMRS की दूसरी जांच में डिपो से AIIMS Bhopal तक के आठ मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इस जांच में यात्रियों के लिए सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया। इसमें स्टेशन के आने-जाने के रास्ते, लिफ्ट, एस्केलेटर, शौचालय, कंट्रोल रूम, आग से सुरक्षा के इंतजाम, ट्रैक और बिजली की व्यवस्था, टेलीकॉम नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। स्टेशनों की सुंदरता बढ़ाने के कामों को भी देखा गया। CMRS की दूसरी जांच का यह हिस्सा प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करेगा। यह हिस्सा सुभाश नगर डिपो को AIIMS Bhopal से जोड़ता है। इस खंड में आठ मेट्रो स्टेशन हैं और यह शुरुआती यात्री सेवा का मुख्य आधार बनेगा। MPMRCL के अधिकारियों ने बताया कि CMRS की यह जांच मेट्रो के संचालन की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि जांच में हर छोटी-बड़ी चीज़ का बारीकी से मुआयना किया जा रहा है। स्टेशन के अंदर और बाहर की सुरक्षा व्यवस्थाएं, यात्रियों के लिए आरामदायक माहौल और आपातकालीन स्थिति से निपटने के इंतजामों को परखा जा रहा है। यह भी बताया गया कि मेट्रो के ट्रैक और बिजली की सप्लाई की जांच भी की जा रही है ताकि संचालन के दौरान कोई दिक्कत न आए। टेलीकॉम नेटवर्क की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि यात्रियों को संचार की कोई समस्या न हो। इस पूरे प्रोजेक्ट में MPMRCL के अधिकारी पूरी मेहनत से लगे हुए हैं ताकि भोपालवासी जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकें। दिवाली के बाद होगा अंतिम निरीक्षण मेट्रो प्रबंधन के अनुसार अब अगला कदम सीसीआरएस द्वारा अंतिम निरीक्षण है। उनकी स्वीकृति मिलने पर ही भोपाल मेट्रो को ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट जारी होगी। रिपोर्ट मिलते ही राजधानी के लोगों का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो जाएगा और भोपाल मेट्रो अपने पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक दौड़ने लगेगी।  

लालघाटी चौराहे पर भीखमंगाई पर कड़ा अभियान, भोपाल प्रशासन का सख्त कदम

भोपाल राजधानी को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन पिछले 10 महीनों से प्रयासरत है। साल की शुरुआत में अभियान चलाकर भिक्षुकों को समझाया गया था और कईयों को सुधार गृह तक भेजा गया था। कुछ मामलों में एफआइआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन वक्त के साथ अभियान धीमा पड़ गया। नतीजा यह हुआ कि शहर के चौक-चौराहों, धार्मिक स्थलों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भिक्षुकों की संख्या फिर से बढ़ गई। इसी को देखते हुए प्रशासन ने भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सात टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम की जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है। शुक्रवार को संत हिरदाराम नगर क्षेत्र की टीम ने लालघाटी चौराहे पर निरीक्षण किया। टीम ने महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को समझाया कि वे भीख न मांगें और अपने घर लौट जाएँ। चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा भीख मांगते पकड़े गए तो कार्रवाई की जाएगी। छह घंटे चला अभियान तहसीलदार हर्ष विक्रम सिंह के नेतृत्व में सुबह 10 बजे शुरू हुआ अभियान शाम चार बजे तक चला। नगर निगम सहायक प्रभारी उद्यान अवध नारायण मकोरिया की अगुवाई में टीम लालघाटी चौराहे पर पहुंची। टीम को देखकर कई भिक्षुक भाग निकले, लेकिन कुछ वहीं लौटकर वाहन चालकों से पैसे मांगने लगे। टीम ने जब आधार कार्ड देखे तो पाया कि अधिकांश भिक्षुक राजस्थान और महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। उन्हें समझाया गया कि भोपाल में भिक्षावृत्ति पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसलिए वे अपने गृह राज्य लौट जाएँ। मासूम बच्चों के साथ मिली महिला निरीक्षण के दौरान लालघाटी फ्लाईओवर के नीचे एक महिला अपने छोटे बच्चों के साथ बैठी मिली। पूछताछ में उसने बताया कि वह महाराष्ट्र की रहने वाली है और इलाज के लिए भोपाल आई है। उसके पति यहां मजदूरी कर रहे हैं। टीम ने उसे भी चेतावनी दी कि सड़क पर बैठकर भिक्षा न मांगे। नहीं माने तो होगी एफआईआर हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि यदि भिक्षुक समझाईश के बाद भी नहीं मानते और भीख मांगते पाए जाते हैं तो लेने और देने वाले दोनों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। इसके बाद भिक्षुकों को सुधार गृह भेजकर स्वजनों से संपर्क कर सौंपा जाएगा। नोडल अधिकारी और जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने बताया कि शहर को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए सभी एसडीएम के नेतृत्व में टीमें गठित की गई हैं। अभी भिक्षुकों को समझाया जा रहा है, लेकिन आगे सड़क से हटाकर सुधार गृह भेजने और एफआइआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी।

मध्यप्रदेश में बड़ी बदलाव की शुरुआत: पेपर स्टाम्प बंद, ई-स्टाम्प से हर साल बचेगा करोड़ों का खर्च

भोपाल  मध्य प्रदेश में 126 साल पुरानी मैनुअल स्टाम्प व्यवस्था अब बंद होने जा रही है. जैसे कभी टेलीग्राम और मनीऑर्डर बंद हुए थे, वैसे ही अब मैनुअल स्टाम्प पूरी तरह खत्म किए जा रहे हैं. सरकार अब सिर्फ ई-स्टाम्प जारी करेगी. नई व्यवस्था कुछ महीनों में लागू होने जा रही है. इससे सरकार को हर साल करीब 34 करोड़ रुपए की बचत होगी, जो अब तक स्टाम्प की छपाई, ढुलाई और सुरक्षा पर खर्च होते थे. बता दें कि 100 रुपए से ज्यादा वाले मैनुअल स्टाम्प तो साल 2015 में ही बंद किए जा चुके हैं. अभी तक 100 रुपए से नीचे वाले स्टाम्प की छपाई नीमच और हैदराबाद प्रेस में की जाती है, फिर इन्हें सुरक्षा इंतजामों के साथ अलग-अलग जिलों में भेजा जाता है. ई-स्टाम्प लागू होने के बाद ये परेशानी खत्म हो जाएगी. ई-स्टाम्प सिस्टम से ये भी ट्रैक किया जा सकेगा कि किसने, कब और कितने मूल्य का स्टाम्प खरीदा है. इससे फर्जीवाड़े और दोहरी बिक्री जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगेगी. मैनुअल स्टाम्प बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है. जल्द मैनुअल स्टाम्प बंद होगा किरायानामा से लेकर एफिडेविट तक लोगों को रोजमर्रा के कामों में स्टाम्प की जरूरत पड़ती है. किरायानामा, एफिडेविट, पॉवर ऑफ अटॉर्नी और सेल एग्रीमेंट जैसे दस्तावेजों के लिए अब लोगों को लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा. बैंक या अधिकृत केंद्र से आसानी से ई-स्टाम्प खरीदा जा सकेगा. इसके अलावा अब कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर खुद भी ई-स्टाम्प जनरेट कर सकेगा. इससे आम लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे. डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध  राजस्व विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ई-स्टाम्प सिस्टम से पारदर्शिता और राजस्व संग्रहण दोनों में सुधार होगा. अब हर ट्रांजेक्शन का डेटा रीयल टाइम में उपलब्ध रहेगा. खास बात यह है कि मध्य प्रदेश देश का इकलौता राज्य है जो अपने खुद के सॉफ्टवेयर से ई-स्टाम्प जारी करता है. बाकी राज्यों में यह काम थर्ड पार्टी एजेंसी "स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया" करती है, एमपी में पैसा सीधे राज्य सरकार के खजाने में जाता है, जबकि बाकी राज्यों में पहले एजेंसी के पास जमा होकर फिर सरकार तक पहुंचता है.  डिजिटल स्टाम्प के लाभ और खर्च में कमी डिजिटल स्टाम्प के चलन में आने से हर साल स्टाम्प पेपर की प्रिंटिंग और उसे वेंडर्स तक पहुंचाने पर होने वाले खर्च में बचत होगी। वर्तमान में, इस प्रक्रिया पर लगभग 30 से 35 करोड़ रुपए का खर्च आता है। कागजी स्टाम्प की समाप्ति के बाद, यह खर्च बच जाएगा और राज्य के वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। पंजीकरण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, जैसे ही राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देगी, कागजी स्टाम्प पेपर का प्रचलन समाप्त हो जाएगा। इसके बाद, केवल डिजिटल स्टाम्प का ही उपयोग किया जाएगा, जो एक नई तकनीकी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कदम न केवल पारदर्शिता लाएगा, बल्कि स्टाम्प के दुरुपयोग को भी कम करेगा। इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) का प्रभाव मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) की शुरुआत जुलाई 2013 में हुई थी। इस प्रणाली के माध्यम से, स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए न केवल स्टाम्प की खरीद प्रक्रिया सरल होती है, बल्कि इसकी ट्रैकिंग भी आसान होती है। इससे स्टाम्प के दुरुपयोग की संभावना कम हो जाती है और लेनदेन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित होती है। ई-स्टाम्प कैसे खरीदें: एक सरल प्रक्रिया डिजिटल स्टाम्प खरीदने के लिए, उपयोगकर्ताओं को निम्नलिखित सरल चरणों का पालन करना होगा:     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद, आपको तुरंत एक डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन प्रक्रिया में संकोच करता है, तो वह अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी स्टाम्प खरीद सकता है। स्टाम्प का दुरूपयोग और ट्रेकिंग आसान होगी एमपी में इलेक्ट्रॉनिक स्टाम्पिंग सिस्टम (ESS) जुलाई 2013 में शुरू हुई थी। इस सिस्टम में स्टाम्प पेपर को अधिकृत वेंडर के जरिए ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। ईएसएस के जरिए स्टाम्प की ट्रेकिंग आसान होती है। ऑनलाइन ऐसे खरीद सकते हैं ई-स्टाम्प     मध्य प्रदेश के ई-स्टाम्पिंग पोर्टल या अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाएं।     आवश्यक दस्तावेज श्रेणी (जैसे बिक्री विलेख, किराया समझौता) चुनें और लेनदेन का विवरण भरें।     नेट बैंकिंग, यूपीआई या कार्ड जैसे ऑनलाइन तरीकों से भुगतान करें।     सफल भुगतान के बाद आपको तुरंत डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र मिल जाएगा। अधिकृत वेंडर से भी ले सकते हैं     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से भी खरीद सकते हैं।     स्टाम्प वेंडर जरूरी स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन करेंगे।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। अधिकृत वेंडर से खरीदने की प्रक्रिया अधिकृत वेंडर से स्टाम्प खरीदने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:     अपने शहर में किसी अधिकृत ई-स्टाम्प वेंडर से संपर्क करें।     स्टाम्प वेंडर आपको आवश्यक स्टाम्प शुल्क और प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन करेगा।     जरूरी विवरण देने के बाद, आप भुगतान कर सकते हैं और स्टाम्प वेंडर से डिजिटल स्टाम्प प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस नई प्रणाली के माध्यम से, मध्य प्रदेश सरकार ने न केवल दस्तावेजों की प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि पारदर्शिता को भी बढ़ावा दिया है। डिजिटल स्टाम्प के माध्यम से, नागरिकों को एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका उपलब्ध होगा, जिससे उन्हें अपने लेनदेन में आसानी होगी। इस परिवर्तन के साथ, मध्य प्रदेश अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें तकनीकी प्रगति और पारदर्शिता को महत्व दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में, उम्मीद की जा रही है कि यह प्रणाली अन्य क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी।

BRICS करेंसी के बिना ही झटका अमेरिका को? चीन में रूसी तेल का पेमेंट और भारत की भूमिका

नई दिल्ली पिछले दिनों इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट से एक खबर महत्वपूर्ण थी. रिपोर्ट के अनुसार अब रूस से कच्चा तेल खरीदकर भारत ने चीन की मुद्रा युआन में भुगतान करना शुरू कर दिया है. यानी कि भारत कच्चा तेल रूस से खरीद रहा है लेकिन रूस को पेमेंट चीनी मुद्रा युआन में कर रहा है. ये डॉलर के प्रभुत्व को खत्म करने एक बड़ी कोशिश है.  हालांकि भारत के टोटल डील की तुलना में चीनी मुद्रा में होने वाला भुगतान कम है लेकिन इससे भारत की ओर से पेमेंट सिस्टम में होने वाले शिफ्ट का पता चलता है और इससे यह भी बात समझ में आती है कि भारत-चीन और रूस ने बिना ब्रिक्स करेंसी बनाए ही ट्रंप के डॉलर अभिमान को किनारे लगाना शुरू कर दिया है.  बता दें कि अभी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बाजार में एक युआन की कीमत 12.34 भारतीय रुपये है. भारत का यह कदम भले ही छोटा हो लेकिन इसके भू-राजनीतिक असर तगड़े हैं और मैसेज देते हैं. रूस के उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने पुष्टि की है कि भारत अभी भी मुख्य रूप से रूबल यानी कि रूसी मुद्रा में भुगतान कर रहा है, लेकिन युआन का उपयोग भी बढ़ रहा है. यह कदम बिना किसी ब्रिक्स मुद्रा के ही भारत, चीन और रूस के त्रिकोणीय गठजोड़ को मजबूत कर रहा है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'डॉलर डिप्लोमेसी' को झटका दे रहा है.  Investing live नाम की वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हाल ही में भारत की सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने हाल ही में दो से तीन रूसी तेल कार्गो के लिए युआन में भुगतान किया है.  यह कदम 2023 से एक बदलाव का संकेत देता है, जब चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के दौरान सरकारी असहजता के बीच सरकारी रिफाइनरियों ने युआन से भुगतान रोक दिया था, जबकि निजी रिफाइनर इस मुद्रा का इस्तेमाल जारी रखे हुए थे.  भारत की ओर से चीनी मुद्रा में फिर से भुगतान शुरू करना इस बात की ओर भी संकेत देता है कि दोनों देशों (भारत-चीन) के बीच संकेत मधुर हुए हैं. ट्रंप की धमकी को याद कीजिए भारत द्वारा कच्चे तेल के पेमेंट सिस्टम में बदलाव का लिंक राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान से है. अमेरिकी राष्ट्रपति-चुनाव डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) देशों को नई मुद्रा बनाने या डॉलर के विकल्प का समर्थन करने पर सख्त चेतावनी दी थी. ट्रंप ने 30 नवंबर 2024 को ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि, "ब्रिक्स देश नई मुद्रा न बनाएं, वरना 100% टैरिफ लगेगा और ये देश अमेरिकी बाजार से विदा हो जाएंगे."   ट्रंप का ये बयान उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का हिस्सा है, जहां ट्रंप डॉलर की वैश्विक प्रभुता (Global dominance) को हर कीमत पर बचाए रखना चाहते हैं. ट्रंप का तर्क है कि डॉलर वैश्विक व्यापार का 58% हिस्सा है, ब्रिक्स की कोशिशें इसे कमजोर करेंगी.  डी-डॉलरीकरण क्यों चाहते हैं ब्रिक्स देश डी-डॉलरीकरण (De-dollarization) वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से अमेरिकी डॉलर की प्रभुता को कम करने की प्रक्रिया है. यह मुख्य रूप से ब्रिक्स देशों द्वारा संचालित हो रही है, जो वैश्विक जीडीपी का लगभग 40% और आबादी का 45% प्रतिनिधित्व करते हैं. 2025 तक अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में डॉलर का वैश्विक हिस्सा 73% से घटकर 54% रह गया है.   ब्रिक्स देश डी-डॉलरीकरण चाहते हैं ताकि अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुता कम हो, और इन देशों की आर्थिक और भू-राजनीतिक स्वायत्तता को बढ़े. यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका ने रूस पर प्रतिबंध लगाए और रूस को स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम से बार कर दिया. इससे ब्रिक्स देशों को एहसास हुआ कि अमेरिका डॉलर का इस्तेमाल 'हथियार' के रूप में कर सकता है.  भारत-चीन-रूस ने निकाला बीच का रास्ता ब्रिक्स देश डी-डॉलरीकरण की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन ये रफ्तार धीमी है. ट्रंप की धमकी के बाद ब्रिक्स देशों ने ब्रिक्स की नई करेंसी का प्रस्ताव तो फिलहाल धीमा कर दिया है. दक्षिण अफ्रीका ने कहा है कि नई मुद्रा की कोई योजना नहीं है.  ब्रिक्स ने 2025 रियो शिखर सम्मेलन में एक संयुक्त मुद्रा की योजना को स्थगित कर दिया. इसके बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर जोर दिया गया.अब ब्रिक्स पे एक डिसेंट्रलाइ्ज्ड भुगतान प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो रहा है. जो स्विफ्ट का विकल्प बनेगा. 2025 में ब्रिक्स व्यापार का 90% स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है. रूस-चीन व्यापार में युआन का हिस्सा 44% है. अब भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर चीनी मुद्रा में भुगतान करना ब्रिक्स करेंसी से इतर बीच का रास्ता है. जिससे भारत का काम भी निकल जाएगा और डॉलर के प्रभुत्व को भी चुनौती मिलेगी.  इसलिए भारत, चीन और रूस का यह युआन-आधारित व्यापार उसी 'पहले चरण' का वास्तविक स्वरूप है.  विश्व के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता भारत ने सितंबर में रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 2.5 बिलियन यूरो खर्च किए. ये पिछले महीने की तुलना में 14 प्रतिशत कम है. भारत का यह युआन प्रयोग अभी भू-राजनीतिक कदम से अधिक एक व्यावहारिक मैकेनिज़्म है.  ताकि रूसी तेल सस्ते में मिले और पश्चिमी प्रतिबंधों से निपटा जा सके. इसके रणनीतिक निहितार्थ गहरे हैं. 

योगी के दीपोत्सव ने नई ऊंचाई पर पहुंचाया भारत-रूस के संबंध

दीपोत्सव- 2025:अयोध्या में रूस के राम को समर्पित होगी मास्को की रामलीला योगी के दीपोत्सव ने नई ऊंचाई पर पहुंचाया भारत-रूस के संबंध रूस-भारतीय मैत्री संघ के द्वारा दीपोत्सव 2025 के दौरान किया जाएगा रामलीला का मंचन रूस के राम पद्मश्री गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की स्मृति को समर्पित होगी रामलीला 18-19 अक्टूबर को अयोध्या में रूस के साथ विभिन्न देशों के कलाकार प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करेंगे अयोध्या  राम की नगरी अयोध्या एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनने जा रही है। अयोध्या शोध संस्थान के आमंत्रण पर रूस-भारतीय मैत्री संघ के द्वारा दीपोत्सव 2025 के दौरान “दिशा रामलीला मॉस्को” अपनी विशेष नाट्य प्रस्तुति का मंचन करेगी। यह प्रस्तुति पद्मश्री गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की स्मृति को समर्पित होगी, जिन्हें स्नेहपूर्वक “रूस का राम” कहा जाता था। आयोजन 18-19 अक्टूबर को अयोध्या में होगा, जहां रूस के साथ विभिन्न देशों के कलाकार प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत करेंगे।   1960 के दशक में रूस के प्रसिद्ध अभिनेता और रंगमंच निर्देशक गन्नादी पेचनिकोव ने भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला का मंचन शुरू किया था। भारत के प्रति उनके प्रेम और समर्पण के लिए उन्हें भारत सरकार ने बाल मित्र पदक और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। वे लगभग दो दशकों तक भारतीय संस्कृति के दूत के रूप में जाने गए। चार दशक बाद योगी सरकार में रूसी-भारतीय मैत्री संघ “दिशा” ने पेचनिकोव की स्मृति में “दिशा रामलीला” की परंपरा को पुनर्जीवित किया है। इसका पहला मंचन 4-6 नवंबर 2018 को अयोध्या में हुआ, दूसरा कुम्भ मेला 2019 प्रयागराज में और उसके बाद अयोध्या के दीपोत्सव में प्रस्तुत किया गया। इस वर्ष दीपोत्सव 2025 में यह मंचन फिर से रूस की ओर से सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करेगा। दीपोत्सव में भारत-रूस की मित्रता एक नई ऊँचाई पर पहुंचाया रूस-भारतीय मैत्री संघ “दिशा” के अध्यक्ष डॉ. रमेश्वर सिंह ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारत के रूस में राजदूत माननीय श्री विनय कुमार, रूस के भारत में राजदूत माननीय श्री डेनिस एवगेनियेविच अलीपोव, और जवाहरलाल नेहरू कल्चरल सेंटर (JNCC) मॉस्को की निदेशक श्रीमती मधुर कंकना रॉय के आभारी हैं। इन सभी के सहयोग से रामलीला की परंपरा फिर से जीवंत हुई है और भारत-रूस की मित्रता एक नई ऊँचाई पर पहुँची है।  उन्होंने कहा कि अयोध्या दीपोत्सव का यह आयोजन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि भारत और रूस के बीच आत्मिक जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है। “दिशा रामलीला मॉस्को” के मंच पर जब रूसी कलाकार भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के रूप में संवाद करेंगे, तब वह अभिनय सीमाओं को पार कर दोनों देशों के साझा मूल्यों आस्था, आदर्श और मानवता को एक सूत्र में बाँध देगा। यह मंच केवल कला का नहीं, बल्कि संस्कृति, श्रद्धा और मित्रता का सेतु बनेगा जो भारत और रूस के संबंधों को नई आध्यात्मिक ऊँचाई देगा। गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव: रूस के राम 8 सितंबर 1926 को मॉस्को में जन्मे गन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव वह कलाकार थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति को रूस की आत्मा में बसाया। रामायण पढ़ने के बाद उनमें भगवान श्रीराम के आदर्शों को मंच पर जीवंत करने की प्रेरणा जगी और उन्होंने स्वयं रामलीला में श्रीराम की भूमिका निभानी शुरू की। यह भूमिका उनके जीवन का ध्येय बन गई और वे “रूस के राम” कहलाए। 1947 में मॉस्को आर्ट थियेटर से स्नातक होने के बाद उन्होंने अभिनय और निर्देशन को अपना जीवन बना लिया। यर्शोफ थियेटर के माध्यम से उन्होंने बच्चों और कलाकारों को भारतीय मूल्यों से जोड़ा। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें “बाल सम्मान” और “पद्मश्री” से सम्मानित किया। 27 अप्रैल 2018 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका राम-स्वरूप आज भी जीवित है। उन्होंने कहा था, “अभिनय ही जीवन है और राम भारतीयता का प्रतीक।” सचमुच, गेनादी पेचनीकोव इस युग में भारत और रूस के सांस्कृतिक सेतु बनकर अमर हो गए।

धनतेरस पर किसानों संग रहेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव, 18 अक्टूबर का दिन अन्नदाताओं को समर्पित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 18 अक्टूबर को पूरा दिन किसानों के बीच रहेंगे, किसानों के साथ मनायेंगे धनतेरस मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे किसानों की बात, किसानों के साथ मुख्यमंत्री निवास में होगा किसान सम्मेलन, करेंगे सीधा संवाद मुख्यमंत्री राजगढ़ एवं सीहोर में भी किसान सम्मेलन में शामिल होंगे भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार 18 अक्टूबर को सुबह से देर शाम तक किसान भाइयों के बीच रहेंगे और उनके साथ धनतेरस मनायेंगे। मुख्यमंत्री शनिवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित किसान सम्मेलन में किसान भाइयों से सीधा संवाद भी करेंगे। इसके बाद राजगढ़ जिले के ब्यावरा और सीहोर जिले के बिलकिसगंज झागरिया में आयोजित किसान सम्मेलनों में शामिल होकर किसानों को राहत राशि का वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ब्यावरा में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को 277 करोड़ रूपये की राहत राशि का अंतरण करेंगे एवं 33 करोड़ रूपये की लागत की ब्यावरा नगर जल प्रदाय योजना का भूमिपूजन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव यहां 193 करोड़ रूपये की लागत के 41 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण भी करेंगे। बाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव सीहोर जिले के बिलकिसगंज झागरिया में आयोजित किसान सम्मेलन में शामिल होंगे और यहां जिले के 2 लाख से अधिक किसानों को फसल क्षति की 118 करोड़ रूपये से अधिक की राहत राशि सिंगल क्लिक के जरिए किसानों के खाते में अंतरित करेंगे। मुख्यमंत्री निवास में किसान सम्मेलन मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार की सुबह मुख्यमंत्री निवास परिसर में आयोजित किसान सम्मेलन में किसानों के बीच उनसे उनके हित की बात करेंगे। किसानों से संवाद में मुख्यमंत्री राज्य सरकार द्वारा कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास की दिशा में उठाए जा रहे विभिन्न कल्याणकारी कदमों और नवाचारों पर भी प्रकाश डालेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसानों के साथ धनतेरस और दीपावली पर्व की शुरुआत करेंगे। किसान भाई सोयाबीन की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लाने की युगांतकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री डॉ यादव का आभार भी व्यक्त करेंगे। इस किसान सम्मेलन में नर्मदापुरम, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, रायसेन और विदिशा जिलों के करीब 2500 से अधिक प्रगतिशील किसान शामिल होंगे। किसान सम्मेलन का उद्देश्य प्रदेश के किसानों को भावांतर भुगतान योजना की जानकारी देना और उन्हें योजना का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी किसानों को योजना की प्रक्रिया, पात्रता तथा लाभ वितरण से संबंधित विस्तृत जानकारी देंगे। भावांतर योजना के तहत प्रदेश के सोयाबीन उत्पादक किसान 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक अपनी फसल कृषि उपज मंडियों में विक्रय कर सकेंगे। राज्य सरकार द्वारा योजना में पात्र किसानों के आधार लिंक बैंक खातों में भावांतर की राशि फसल विक्रय के 15 दिन के भीतर सीधे जमा कर दी जाएगी। ई-उपार्जन पोर्टल पर भावांतर योजना के लिए किसानों का पंजीयन कार्य 17 अक्टूबर तक पूरा किया जा रहा है, ताकि कोई भी पात्र किसान इस योजना का लाभ पाने से वंचित न रहे। किसान सम्मेलन के मुख्य आकर्षण     भावांतर योजना की विस्तृत जानकारी और प्रशिक्षण।     मुख्यमंत्री द्वारा किसानों से सीधा संवाद।     कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन।     किसान सम्मेलन में सरकार द्वारा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की जानकारी भी दी जाएगी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीडियो कॉल पर जानी कुमारी संस्कृति की कुशलक्षेम, इलाज के बाद इंदौर वापसी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुमारी संस्कृति से वीसी से की बात, इलाज के बाद स्वस्थ होकर इंदौर लौटी सड़क हादसे में घायल हुई थी संस्कृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईलाज के लिये संस्कृति को एयर एम्बुलेंस से भेजा था मुंबई संस्कृति और उसके दादा-दादी ने मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद मुख्यमंत्री ने कहा – संस्कृति से इंदौर मिलने आयेंगे भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास से इंदौर की कुमारी संस्कृति वर्मा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात कर उसके स्वास्थ्य की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने संस्कृति को स्वस्थ होकर लौटने पर बधाई देते हुए कहा कि तुम्हारे चेहरे की मुस्कान से तो हमारी दीपावली आज ही मन गई। मुख्यमंत्री ने संस्कृति से कहा कि अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखो और पढ़ाई भी जारी रखो। सरकार सभी प्रकार की मदद करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संस्कृति और उसके परिजन को धनतेरस, रूपचौदस और दीपावली की शुभकामनाएं दीं और कहा कि समय खराब था, पर संकट का समय अब पूरी तरह टल गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशीलता और मानवीयता एक बेटी के जीवन में नया सवेरा लेकर आई है। संस्कृति ने बताया कि वह खूब पढ़-लिखकर सीए बनना चाहती है और इसलिए वह कॉमर्स प्लस एप्लाईड मैथ्स लेकर पढ़ाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगली बार इंदौर प्रवास के दौरान वे संस्कृति से मिलने जाएंगे।  उल्लेखनीय है कि इंदौर के संगम नगर निवासी 17 वर्षीय बेटी कुमारी संस्कृति पुत्री अशोक वर्मा एक अप्रत्याशित दुर्घटना के कारण 15 सितंबर 2025 को एयरपोर्ट रोड इंदौर पर सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थी। इससे उसके शरीर के बाएं बांह एवं अन्य जगह गंभीर चोटें आई थीं। यह चोटें इतनी गंभीर थी कि उसके जीवन पर भी संकट में आ गया था। इंदौर में उसे चिकित्सकों की टीम द्वारा श्रेष्ठ उपचार दिया गया, किंतु उसकी गंभीर चोटों की जटिलता को देखते हुए चिकित्सकों के दल ने यह निर्णय लिया कि उसे शल्य चिकित्सा के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल, मुंबई भेजना अनिवार्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने त्वरित निर्णय लेते हुए कलेक्टर इंदौर को संस्कृति को एयर एंबुलेंस से एयरलिफ्ट कर शासन के व्यय पर तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल मुंबई शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देश का पालन किया और संस्कृति को मुम्बई पहुंचाया गया, जहां उसके बायीं बांह एवं हाथ को बचाने के लिए सर्जरी की गई, फॉलोअप के साथ संस्कृति को फिजियोथैरेपी की सलाह के साथ उसे शुक्रवार को छुट्टी दे दी गई। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उसके इलाज पर लगभग 30 लाख रुपए का व्यय किया गया। इंदौर की कक्षा 12वीं में पढ़ने वाली इस होनहार बेटी के जीवन में भी उजाला लाने के लिए सरकार और जिला प्रशासन ने अथक प्रयास किया और यह प्रयास रंग लाया। संस्कृति अब पुनः अपने सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। उसके जीवन में भी आशा के सारे रंग सरकार की मदद से पुनः जाग रहे हैं।  

देश में उत्कृष्ट कार्यान्वयन के साथ मप्र बना आदि कर्मयोगी अभियान का अग्रणी राज्य

आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में मप्र का देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने मध्यप्रदेश को किया सम्मानित भोपाल राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु नेनईदिल्ली के विज्ञान भवन में आदि कर्मयोगी अभियान पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश को सम्मानित किया। प्रदेश के प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य श्री गुलशन बामरा ने म.प्र. के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार ग्रहण किया। उन्होंने जनजातीय समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति दी। मध्यप्रदेश को आदि कर्मयोगी अभियान के क्रियान्वयन में देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम पांच राज्यों में स्थान मिला है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान जनजाति समुदायों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य जनजाति क्षेत्र में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं का प्रभावी अमल सुनिश्चित करना और शासन को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर आधारित है जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रमुख सचिव जनजाति कार्य श्री गुलशन बामरा ने मध्य प्रदेश में जनजातीय विकास की स्थिति की पर जानकारी देते हुए कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान में 1 लाख 41 हजार आदि सहयोगी काम कर रहे हैं। इसके साथ एक लाख 92 हजार आदि साथी और 1210 अशासकीय संगठन जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसका लक्ष्य तीन लाख चेंज लीडर्स तैयार करना है जो निचले स्तर पर जनजातीय विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन में मदद कर रहे हैं। जनजातीय बंधुओं की मदद के लिए 13,000 आदि सेवा केंद्र बनाए गए हैं। जनजाति क्षेत्र में बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शाला छोड़ने वाले बच्चों पर निगरानी रखी जा रही है। वर्तमान में माता शबरी आवासीय बालिका शिक्षा कंपलेक्स, हॉस्टल, आदर्श आवासीय स्कूल, एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल, आश्रम स्कूल, खेल परिसर मिलाकर 2,913 संस्थाएं संचालित है जिनमें 2 लाख 30 हजार विद्यार्थियों के रहने की क्षमता है। विद्यार्थियों के कौशल विकास पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। मलेरिया, टीबी, एनीमिया की रोकथाम के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। इस साल जून से लेकर सितंबर तक सिर्फ तीन माह में 81000 से ज्यादा आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। मातृत्व सुरक्षा के लिए भी विशेष पहल की गई। इसके अलावा नौ हजार से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य केंद्र में टेलीमेडिसिन सेवाओं का संचालन किया गया। स्व-सहायता समूहों का गठन कर उन्हें रोजगार निर्माण एवं आजीविका की गतिविधियों से जोड़ा गया है। उन्हें आर्थिक गतिविधियां शुरू करने के लिए साख सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट कार्य हुआ है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने में 100% उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में शिवपुरी, मैहर, रायसेन, कटनी और भिंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पीएम जनमन में शिवपुरी को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। आदि कर्मयोगी अभियान में देश स्तरीय उत्कृष्ट जिलों में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को सम्मानित किया गया। प्रदेश की उत्कृष्ट मास्टर ट्रेनर श्रेणी में सहायक शोध अधिकारी श्रीमती सारिका धौलपुरिया सम्मानित की गई। आदि कर्मयोगी अभियान में अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों में बैतूल, धार, पूर्वी निमाड़ और बड़वानी का विशेष उल्लेख किया गया। राज्य स्तरीय सुपर कोच और मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रदेश के उपायुक्त आदिवासी विकास श्री जेपी यादव को भी सम्मानित किया गया। एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों बड़वानी, बैतूल और शिवपुरी को उल्लेखनीय गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए सम्मानित किया गया। धरती आबा जन भागीदारी अभियान में गुना, बुरहानपुर और विदिशा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी गुना और एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी विदिशा को उत्कृष्टतम प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि आदि कर्मयोगी अभियान में 14 हजार गांवों के विलेज एक्शन प्लान बन चुके हैं। ग्राम सभा से इनका अनुमोदन कराया गया है। इन गांवों में 13 हजार से ज्यादा आदि सेवा केंद्र स्थापित हो चुके हैं। आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान, जन धन, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए है।  

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट घोटाले पर खुद लिया संज्ञान, सरकारों से मांगा जवाब

नई दिल्ली देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों पर अब सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार (MHA सेक्रेटरी), सीबीआई, हरियाणा सरकार और अंबाला के साइबर क्राइम विभाग को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों के साथ जारी किए गए फर्जी न्यायिक आदेश न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास की नींव को हिला देते हैं। यह कार्य न केवल कानून के शासन पर हमला है बल्कि न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा प्रहार भी है। वरिष्ठ नागरिक दंपति की शिकायत से शुरू हुआ मामला यह कार्रवाई उस शिकायत के बाद हुई जिसमें एक वरिष्ठ नागरिक दंपति से पिछले महीने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए उनकी जीवनभर की बचत ठगी गई थी। इस गंभीर घटना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर संज्ञान लिया। जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और अंबाला साइबर क्राइम के एसपी से अब तक हुई जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के साइबर अपराधों पर सख्त कदम जरूरी हैं ताकि लोगों का भरोसा डिजिटल व्यवस्था पर बना रहे।