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मंत्री पटेल ने कहा- मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता

भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि ग्रामीण विकास एक बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे पंचायत प्रतिनिधियों को नियत और न्याय की भावना से स्वीकार करना होगा। मंत्री श्री पटेल धार में आयोजित पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि सांसद रहते हुए उन्होंने सदैव कृषि और ग्रामीण विकास विषयक संसदीय समितियों में रहकर देश भर में इन विषयों को गहराई से समझने का प्रयास किया। प्रदेश में मंत्री के रूप में उन्हें इन नीतियों को लागू करने का अवसर मिला है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि अपने क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, वृक्षारोपण और योजनाओं का रिकॉर्ड पारदर्शिता से रखें। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का आहवान मंत्री श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है, लेकिन जल संकट की आहट को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। जल संरक्षण के लिये वृक्षारोपण ही सबसे स्थायी उपाय है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत व्यापक पौधारोपण का आहवान किया और कहा कि “जो पौधा आप लगाते हैं, उसकी देखभाल भी आपकी व्यक्तिगत जवाबदेही है।” उन्होंने कहा कि “वृक्षारोपण अभियान 2025” में महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन को भी बल मिलेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने कहा कि पुराने, जीर्ण-शीर्ण पंचायत भवनों को तोड़कर 48 लाख और 37 लाख रुपये की लागत से नए भवनों की मंजूरी दी गई है। कोई भी पंचायत अब भवन विहीन नहीं रहेगी। धार जिले में इस वर्ष 81 पंचायत भवन और 85 पुलियों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है। चौथे चरण की प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत अब मजरे-टोले को भी जोड़ा जा सकेगा, जिसके लिए राजस्व ग्राम की शर्त हटा दी गई है। केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रीमती सवित्री ठाकुर ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार की योजनाओं को गाँव-गाँव तक पहुँचाने का कार्य करें और प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जुट जाएँ। सम्मेलन में अतिथियों द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन में जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, विधायक नीना वर्मा और कालूसिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव,नीलेश भारती एवं चंचल पाटीदार ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में अधिकारी सहित बड़ी संख्या में सरपंच व पंच उपस्थित रहे। 

पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर रोक, MP हाईकोर्ट करेगा व्यापक जांच और जवाबदेही तय

भोपाल /जबलपुर  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान एक अहम् फैसला सुनाते हुए पैरामेडिकल कॉलेजों को दी जा रही मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी है , इस आदेश के बाद कॉलेज संचालकों में हड़कंप मच गया है, बता दें मध्य प्रदेश के पैरामेडिकल कॉलेजों को लंबे इन्तजार के बाद मान्यता मिलने जा रही थी जिसे हाई कोर्ट ने रोक दिया है। नर्सिंग घोटाले के बाद अब पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता और एडमिशन में गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर की डिवीज़नल बेंच ने एक महत्वपूर्ण स्थगन आदेश पारित किया है। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई नर्सिंग मामले की जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पिछले दिनों एक आवेदन पेश कर कोर्ट को बताया गया था कि नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कॉलेजों के मान्यताओं में भी अनियमितताएँ की जा रही है। 2023-24 एवं 2024-25 सत्र के लिए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल दे रहा मान्यता  याचिका में कहा गया कि एमपी पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा निकल चुके एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से दी जा रही है और बगैर मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से सम्बद्धता प्राप्त किए सरकारी तथा निजी पैरामेडिकल कॉलेजों के द्वारा अवैध रूप से छात्रों के प्रवेश दिए जा रहे हैं, नर्सिंग घोटाले की जांच में जिन कॉलेजों को सीबीआई ने अनसूटेबल बताया है उन्हीं बिल्डिंग में पैरामेडिकल काउंसिल अब पैरा मेडिकल कॉलेजों की मान्यता दे रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगाई   पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसे अलग जनहित याचिका (PIL) के रूप में पंजीबद्ध करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन व रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, आज की सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य शासन के उस आदेश पर रोक लगा दी है जो पैरामेडिकल काउंसिल को एकेडमिक सत्रों (2023-24 एवं 2024-25) की मान्यता भूतलक्षी प्रभाव से देने की अनुमति देता था। 24 जुलाई को होगी अगली सुनवाई  मामले में पैरामेडिकल काउंसिल के चेयरमैन और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है बताते चलें कि मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ राजेंद्र शुक्ला, पैरामेडिकल काउंसिल के पदेन चेयरमैन हैं । इस मामले की अगली सुनवाई सभी नर्सिंग मामलों के साथ 24 जुलाई को होगी ।

म.प्र. में हर सेक्टर में हैं बड़ी संभावनाएं, स्पेन के निवेशकों को देंगे वर्ल्ड क्लास सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बेहिचक म.प्र. से जुड़िए और हमारी 18 हाईटेक औद्योगिक नीतियों का लाभ लें निवेश के लिए बढ़ाया गया हर कदम व्यापार-व्यवसाय में होगा मील का पत्थर साबित मध्यप्रदेश निवेशकों को केपिटल रिटर्न देने में पीछे नहीं रहेगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मैड्रिड में इन्वेस्ट इन एमपी बिजनेस फोरम मीट में संबोधन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारत और स्पेन दो प्राचीन सभ्यताओं के संवाहक हैं। दोनों देशों ने नैतिक मूल्यों के आधार पर अपनी पुरा संस्कृति को आगे बढ़ाया है। दोनों देश जुड़वा भाईयों की तरह हैं। अब विकास के मामले में भी हम मिलकर आगे बढ़ेंगे। संस्कृति के साथ-साथ तकनीक में भी स्पेन की एक अलग ही पहचान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में इन्वेस्ट इन एमपी बिजनेस फोरम मीट को संबो‍धित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भारत का सबसे तेजी से विकासशील प्रदेश है। यहां निवेश करना नि:संदेह फायदे का सौदा है। उन्होंने निवेशकों को मध्यप्रदेश की बेजोड़ खूबियां बताते हुए कहा कि यदि आप भारत में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो एक बार मध्यप्रदेश अवश्य आइये, मध्यप्रदेश को भूल नहीं पाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में खनिज, पर्यटन, बड़े उद्योग, फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री, तकनीकी विकास से जुड़े उद्योग स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं। भारत में एमपी टूरिज्म सबसे तेजी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भरपूर भू-संपदा उपलब्ध है, जिसमें नई तकनीक का इस्तेमाल करने से विकास की अपार संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश, भारत के मध्य क्षेत्र में स्थित है, इसलिए हम लॉजिस्टिक सेक्टर में अग्रणी बनने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अगर आप भारत के किसी और राज्य में भी उद्योग स्थापित करते हैं, तब भी आपको मध्यप्रदेश की आवश्यकता जरूर पड़ेगी। मध्यप्रदेश आंतरिक सड़कों, नेशनल हाईवेज, रेल और हवाई मार्ग से देश-विदेश से जुड़ा है। मध्यप्रदेश सभी सेक्टर्स में तेजी से आगे बढ़ने वाला भारत का राज्य बना है। हम अपने देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी अपनी भूमिका बखूबी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी, एग्री बेस्ड इंडस्ट्री और टेक्सटाईल सेक्टर में बड़ी संभावनाएं हैं। हम सभी सेक्टर्स में यहां आने वाले निवेशकों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं देने की क्षमता रखते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से आग्रह किया कि सुरक्षित निवेश के लिए आप बेहिचक मध्यप्रदेश से जुड़िए। हमारी 18 प्रकार की हाईटेक औद्योगिक नीतियों का लाभ लें। मध्यप्रदेश निवेशकों को केपिटल रिटर्न देने में पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश की विकासशीलता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भी प्रभावित किया है। मध्यप्रदेश में निवेश करने पर भारत सरकार की ओर से भी देशी-विदेशी निवेशकों को कई तरह की रियायतें दी जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में मेडिकल कॉलेजेस की संख्या भी तेजी से बढ़ाई जा रही है और नई मेडिकल डिवाईसेस के लिए देशी और विदेशी कंपनियां यहां निवेश कर रही हैं। अब मध्यप्रदेश में मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्पेन की शांतिप्रियता, सामुदायिक विकास, तकनीक के इस्तेमाल और फुटबॉल प्रेम ने भी यहां की अर्थव्यवस्था को बेहद मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि स्पेन आर्थिक व्यापार के मामले में भारत का छठा सबसे बड़ा साझेदार है। वर्तमान में स्पेन के साथ 9.32 बिलियन डॉलर का व्यापार हो रहा है। उन्होंने कहा कि स्पेन के निवेशकों द्वारा मध्यप्रदेश में निवेश के लिए बढ़ाया गया हर एक कदम व्यापार-व्यवसाय के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के सचिव एवं एमडी टूरिज्म डॉ. इलैया राजा टी., एमडी एमपीआइडीसी श्री चंद्रमौली शुक्ला सहित फ्रेंड्स इन एमपी इन स्पेन के सदस्य एवं बड़ी संख्या में उद्योगपति/निवेशक उपस्थित थे। म.प्र. में हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज्म में निवेश के अवसर : प्रमुख सचिव पर्यटन श्री शुक्ला मध्यप्रदेश, इतिहास और विरासत की भूमि है। भारत में स्थित यूनेस्को की 62 विश्व धरोहर है जिसमें से 18 मध्यप्रदेश में है। संस्कृति और आध्यात्म की दृष्टि से मध्यप्रदेश अत्यंत समृद्ध है। प्रदेश में 2 ज्योतिर्लिंग के साथ विश्व की प्राचीनतम नदियों में से एक और प्रदेश में पूजनीय नदी माँ नर्मदा बहती है। आज के तनाव भरे जीवन में मां नर्मदा के किनारे स्थित सभी स्थल आपको अध्यात्म और सकारात्मक ऊर्जा से भर देते हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन नीति 2025 की विशेषता बताते हुए प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेशकों के लिए प्रदेश में अपार संभावनाएं है। प्रदेश में हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म आदि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के अवसर है। अपार संभावनाओं का भरोसेमंद स्थल मध्यप्रदेश : प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह औद्योगिक नीति एवं निवेश संवर्धन विभाग के प्रमुख सचिव श्री राघवेन्द्र सिंह ने कहा कि म.प्र. अपार संभावनाओं का भरोसेमंद निवेश स्थल है। प्रदेश का भौगोलिक विस्तार, संसाधनों की उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन और स्थिर नेतृत्व इसे उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त गंतव्य बनाते हैं। स्पेन और भारत के बीच व्यापारिक संबंध लगातार सुदृढ़ हो रहे हैं। वर्ष 2024 में भारत से स्पेन को 5.93 बिलियन यूरो का निर्यात हुआ, जिसमें मध्यप्रदेश का योगदान 58.5 मिलियन यूरो का रहा।  

तीन साहसिक कदम: मोदी कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी के लिए 27K करोड़ तय किए, स्वच्छ ऊर्जा की दिशा मजबूत

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश की कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशा देने वाले तीन बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई. इनमें एक ओर जहां कृषि जिलों के समग्र विकास की योजना को स्वीकृति दी गई, वहीं दूसरी ओर रेन्वेबल एनर्जी में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता साफ किया गया. कैबिनेट ने “प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना” को 2025-26 से शुरू कर छह वर्षों के लिए मंजूरी दी है. इसका टारगेट 100 कृषि जिलों का विकास करना है. यह योजना नीति आयोग के ‘आकांक्षी जिलों’ कार्यक्रम से प्रेरित है, लेकिन यह खासतौर से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर केंद्रित है. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) योजना का मकसद कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल डाइवर्सिफिकेशन को प्रोत्साहित करना, टिकाऊ कृषि ऑप्शन को अपनाना, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर भंडारण की सुविधा बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर करना शामिल है. इस योजना को 11 मंत्रालयों की 36 योजनाओं के कोऑर्डिनेशन के जरिए लागू किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकारों की योजनाएं और निजी क्षेत्र की साझेदारी भी शामिल होगी. 100 जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल साइकिल और कम लोन डिस्ट्रिब्यूशन जैसे तीन प्रमुख मानकों के आधार पर किया जाएगा. हर राज्य से कम से कम एक जिला शामिल किया जाएगा. एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये कैबिनेट ने एनटीपीसी लिमिटेड को रेन्वेबल एनर्जी क्षेत्र में निवेश के लिए मौजूदा सीमा से ऊपर जाकर 20,000 करोड़ रुपये तक निवेश की अनुमति दी है. यह निवेश एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL) और इसकी सहायक कंपनियों और संयुक्त उपक्रमों के जरिए किया जाएगा, ताकि 2032 तक 60 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल की जा सके. एनएलसी इंडिया लिमिटेड को 7,000 करोड़ रुपये की मंजूरी एनएलसीआईएल को भी 7,000 करोड़ रुपये के निवेश की विशेष छूट दी गई है, जो वह अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) के जरिए रेन्वेबल एनर्जी प्रोजेक्ट में लगाएगी. इससे कंपनी को संचालन और वित्तीय लचीलापन मिलेगा. ग्रीन एनर्जी पर सरकार खर्च करेगी 27 हजार करोड़ एनटीपीसी को ग्रीन एनर्जी में निवेश के लिए 20000 करोड़ के निवेश को मंजूरी: मोदी कैबिनेट ने देश की सबसे बड़ी ऊर्जा कंपनी NTPC को 20,000 करोड़ रुपये की मदद देने का फैसला किया है ताकि वो रिन्यूएबल एनर्जी (हरित ऊर्जा) में तेज़ी से निवेश कर सके. NLCIL को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार को मंजूरी: वहीं मोदी कैबिनेट ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) को 7,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विस्तार की मंजूरी दी है. 100 जिलों के लिए कृषि योजना को मंजूरी कैबिनेट ने 24 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक खर्च वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दी है. कैबिनेट ने बुधवार को 6 साल के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंज़ूरी दे दी, जिसमें 24,000 करोड़ रुपये के वार्षिक परिव्यय के साथ 100 ज़िले शामिल होंगे. केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा. वहीं, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को बढ़ावा देगा. केंद्रीय कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी साझा करते हुए, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाएगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करेगी और कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी करेगी. इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने की उम्मीद है.

मॉनटेन तूफान की तबाही: NY–NJ में फ्लैश फ्लड से दो मरे, शहर का आवागमन ठप

न्यूयॉर्क   न्यूयॉर्क और न्यूजर्सी में भारी बारिश और तूफान से दो लोगों की मौत हो गई। मूसलाधार बारिश होने से पूरा इलाका पानी में डूब गया। न्यूयॉर्क का सबवे सिस्टम ठप हो गया और पूरे इलाके में बिजली गुल हो गई। प्लेनफील्ड में सोमवार को तेज बारिश के कारण एक गाड़ी सेडर ब्रूक में बह गई। इससे दो लोगों की मौत हो गई। गवर्नर फिल मर्फी ने बताया कि दोनों को घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने खराब मौसम के कारण आपातकाल की घोषणा की है। इस महीने शहर में तूफान से होने वाली यह तीसरी और चौथी मौतें थीं। न्यूयॉर्क डेली न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, मेयर एड्रियन मैप्प ने कहा, "पूरा प्लेनफील्ड इस नुकसान से दुखी है। इतने कम समय में चार लोगों को खोना अकल्पनीय है। हम परिवारों के साथ शोकाकुल हैं। हम अपने इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने और अपने निवासियों को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" नॉर्थ प्लेनफील्ड में बाढ़ का पानी भरने के बाद एक घर में आग लग गई। हालांकि इसमें किसी के घायल होने की खबर नहीं है। गवर्नर मर्फी ने पत्रकारों से कहा, "मौसम से परेशानी में हम अकेले नहीं हैं, लेकिन हम अभी अधिक ह्यूमिडिटी, हाई टेंपरेचर और तेज तूफान वाले पैटर्न में हैं। सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।" कुछ ही घंटों में छह इंच तक बारिश फ्लोरिडा के पास बन रहे एक ट्रॉपिकल स्टॉर्म के कारण पूर्वी तट पर नमी बढ़ गई। इससे कई जगहों पर धीरे-धीरे तूफान आया और भारी तबाही हुई। गार्डन स्टेट में कुछ ही घंटों में छह इंच तक बारिश हुई। वहां कई लोगों को बचाया गया। शहरों में मंगलवार को भी लगभग 2900 घरों और व्यवसायों में बिजली नहीं थी। मर्फी ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया, "ढाई घंटे से भी कम समय में छह इंच बारिश हुई। पहली बारिश ने कई समुदायों को थोड़ा परेशान किया। दूसरी बारिश ने पूरी तरह से तबाही मचा दी। हम सभी समुदायों और काउंटियों का आकलन कर रहे हैं।" न्यूयॉर्क में सोमवार को सेंट्रल पार्क में लगभग 2.64 इंच बारिश हुई। इसने उसी दिन के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जो 1.47 इंच था। हार्लेम में बारिश के दौरान वेस्ट 149वीं स्ट्रीट और ब्रैडहर्स्ट एवेन्यू के पास एक 43 साल के न्यूयॉर्क वासी पेड़ की शाखा गिरने से घायल हो गया। सबवे स्टेशन में सीढ़ियों से पानी घुसा खराब मौसम के कारण कई सबवे लाइनें भी बंद हो गईं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में मैनहट्टन में एक स्टेशन के प्रवेश द्वार से पानी सीढ़ियों से नीचे गिरता हुआ दिखाई दे रहा है। एक अन्य तस्वीर में यात्री बाढ़ के पानी से बचने के लिए अपनी सबवे सीटों पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। मेट्रोपॉलिटन ट्रांजिट अथॉरिटी के अध्यक्ष और सीईओ जानो लाइबर ने एबीसी 7 को बताया कि शहर का सीवर सिस्टम बारिश से भर गया और सबवे सुरंगों व स्टेशनों में पानी आ गया। न्यू जर्सी के कुछ हिस्सों में कुछ सड़कें अभी भी बंद हैं और मंगलवार को इलाके के हवाई अड्डों पर दर्जनों उड़ानें रद्द कर दी गईं या उनमें देरी हुई। फ्लाइटअवेयर के आंकड़ों के अनुसार, नेवार्क लिबर्टी हवाई अड्डे पर कुल 159 उड़ानें रद्द कर दी गईं। हालांकि ट्रिस्टेट इलाके के लिए अधिकांश चेतावनियां अब समाप्त हो गई हैं, लेकिन मौसम का पूर्वानुमान बताने वालों ने चेतावनी दी है कि वाशिंगटन डीसी से लेकर कैरोलिना तक बाढ़ की संभावना अभी भी है। आने वाले दिनों में भी बारिश होने की चेतावनी गवर्नर फिल मर्फी ने कहा कि प्लेनफील्ड में जो दो मौतें हुईं, वे बहुत दुखद हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर संभव मदद करने के लिए तैयार है। मेयर एड्रियन मैप्प ने भी मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शहर आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में हुई बारिश ने कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सेंट्रल पार्क में इतनी बारिश पहले कभी नहीं हुई थी। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। सबवे में पानी भर गया और कई सड़कें बंद हो गईं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में भी बारिश हो सकती है। लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। न्यू जर्सी और न्यूयॉर्क में हुई इस बारिश से लोगों को काफी नुकसान हुआ है। कई लोगों के घर पानी में डूब गए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सरकार लोगों को मदद पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं। हमें इसके लिए तैयार रहना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत  निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी। उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।

खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका : CM यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपनी स्पेन यात्रा के पहले दिन की शुरूआत मैड्रिड स्थित विश्व प्रसिद्ध LaLiga मुख्यालय के भ्रमण से की और वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट कर खेल, युवा सशक्तिकरण और निवेश सहयोग पर केंद्रित संवाद किया। उन्होंने कहा कि LaLiga की खेल विशेषज्ञता और वैश्विक पहुँच का लाभ मध्यप्रदेश के युवाओं तक पहुँचना चाहिए। यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि खेल के क्षेत्र में नवाचार, सामाजिक समावेशन और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी की दिशा में प्रदेश के दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने LaLiga के पदाधिकारी और तकनीकी निदेशकों के समक्ष प्रस्ताव रखा कि मध्यप्रदेश में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर फुटबॉल एक्सीलेंस सेंटर, स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और स्पेनिश कोचिंग आधारित यूथ ट्रेनिंग प्रोग्राम प्रारंभ किए जाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि LaLiga के साथ यह साझेदारी केवल खेलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन, सामाजिक भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा दे सकती है। LaLiga मैचों में होगी म.प्र. की ब्राडिंग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुझाव दिया कि LaLiga मैचों के दौरान डिजिटल और ग्राउंड को-ब्रांडिंग अभियानों के माध्यम से मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, वन्यजीव, विरासत स्थलों और पर्यटन अवसरों का स्पेन और यूरोप के व्यापक दर्शकों के बीच प्रभावी प्रचार किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यटन बल्कि स्पोर्ट्स टूरिज्म, फिटनेस, मीडिया ब्रॉडकास्टिंग और स्पोर्ट्स टेक जैसे सेक्टर्स में विदेशी निवेश आकर्षित करने की संभावनाएँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की 18 सेक्टर-विशिष्ट औद्योगिक नीतियों और ‘स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज़’ जैसी दूरदर्शी पहलों का उल्लेख करते हुए LaLiga के साथ जुड़े वैश्विक निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अब भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक साझेदारियों के लिए एक भरोसेमंद और अनुकूल डेस्टिनेशन बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने युवाओं के कौशल विकास, फुटबॉल अकैडमीज़ के ज़रिये प्रतिभा पहचान, और सामुदायिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में LaLiga की दीर्घकालिक विशेषज्ञता और भारत में उसकी सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश इस सहयोग के माध्यम से खेल को सामाजिक विकास का सशक्त माध्यम बनाएगा। LaLiga और मध्यप्रदेश: भविष्य के साझेदार LaLiga, स्पेन की प्रमुख पेशेवर फुटबॉल लीग, न केवल स्पोर्टिंग उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर युवाओं के लिए प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और ब्रांड विस्तार का भी एक प्रभावशाली मंच है। भारत में LaLiga की सक्रियता, विशेषकर LaLiga Football Schools जैसी पहल, यह दर्शाती हैं कि स्पेनिश फुटबॉल का भारतीय युवाओं से गहरा संबंध बन चुका है। अब यह संबंध मध्यप्रदेश जैसे संभावनाशील राज्य के लिए नए अवसरों का द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा, वैश्विक खेल नेटवर्क से जुड़कर प्रदेश में निवेश, युवाओं के कौशल विकास और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल मानी जा रही है। स्पेन के राजनीतिक, कारोबारी और खेल जगत में इस दौरे को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और यह भारत की स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी को भी नई ऊँचाइयाँ देने वाला कदम सिद्ध हो रहा है। फुटबॉल के जरिए भविष्य की नीव और खेलों में अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी का प्रारंभ होगा नया दौर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ला लीगा मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों को लेकर जिस प्रकार से वातावरण बना है, उसने प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने का अवसर दिया है। खेल अब केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत के युवाओं के व्यक्तित्व, करियर और वैश्विक पहचान से जुड़ चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत सरकार और खेल मंत्रालय के सहयोग से मध्यप्रदेश भी हर स्तर पर खेलों के विकास में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि शहडोल के एक छोटे से गाँव में जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की "फुटबॉल राजधानी" की उपमा दी, तो वह केवल एक प्रशंसा नहीं थी, बल्कि देश की उस छिपी हुई ताकत को पहचानने का संकेत था, जो ग्रामीण भारत में मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहडोल से लेकर भोपाल तक, प्रदेश में फुटबॉल सहित सभी खेलों के लिए अधोसंरचना को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और वैश्विक प्रतियोगिताओं में भागीदारी के अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्पेन जैसे देशों के अनुभवों से सीखकर, मध्यप्रदेश में भी फुटबॉल को नई दिशा दी जाएगी। प्रतिभाओं को तराशने के लिए तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण केंद्र, और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में सहभागिता की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि स्पेन प्रवास के दौरान औद्योगिक निवेश के कार्यक्रमों के साथ उन्होंने खेल क्षेत्र के लिए भी कई उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश केवल उद्योग, पर्यटन या शिक्षा में ही नहीं, बल्कि खेलों के क्षेत्र में भी अग्रणी बने, यही हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं को विश्वस्तरीय अवसर देने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। फुटबॉल जैसे खेलों के माध्यम से न केवल शरीर, बल्कि भविष्य भी गढ़ा जा सकता है।  

केंद्रीय कैबिनेट की पीएम धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी, हर साल खर्च होंगे 24000 करोड़ रुपये

नई दिल्ली केंद्रीय कैबिनेट ने 36 योजनाओं को मिलाकर 24,000 रुपये प्रति वर्ष के परिव्यय वाली प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी। सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह एलान किया है। सरकार ने एनएलसीआईएल को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 7,000 करोड़ रुपये की भी मंजूरी दे दी है। इसके अलावे कैबिनेट ने एनटीपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के लिए 20,000 करोड़ रुपये की मंजूरी देने पर भी अपनी मुहर लगा दी है। क्या है प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना? मंत्रिमंडल ने बुधवार को छह साल की अवधि के लिए प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत हर वर्ष 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसमें 100 जिले शामिल होंगे। केंद्रीय बजट में घोषित यह कार्यक्रम 36 मौजूदा योजनाओं को एकीकृत करेगा और फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने मदद देगा। भंडारण और सिंचाई सुविधाओं में होगा सुधार केंद्रीय मंत्रिमंडल में लिए गए निर्णय के बारे में जानकारी साझा करते हुए, सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम धन-धान्य कृषि योजना से फसल के बाद भंडारण में वृद्धि होगी, सिंचाई सुविधाओं में सुधार होगा और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। इस कार्यक्रम से 1.7 करोड़ किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। एनएलसी इंडिया एनआईआरएल में कर सकेगा 7000 करोड़ रुपये का निवेश सरकार ने बुधवार को एनएलसी इंडिया को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनआईआरएल में 7,000 करोड़ रुपये निवेश करने की अनुमति दे दी। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की ओर से लिया गया। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) को नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) पर लागू मौजूदा निवेश दिशानिर्देशों से विशेष छूट देने को मंजूरी दे दी है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "इस रणनीतिक निर्णय से एनएलसीआईएल को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) में 7,000 करोड़ रुपये का निवेश करने में मदद मिलेगी। इसके तहत एनआईआरएल विभिन्न परियोजनाओं में सीधे या संयुक्त उद्यम का गठन कर निवेश कर सकेगी।इसके लिए पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी।" शुभांशु शुक्ला की पृथ्वी पर वापसी से जुड़ा प्रस्ताव भी पारित बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर भी एक प्रस्ताव पारित किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह स्पेस की दिशा में हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि  है। उन्होंने कहा, "आईएसएस (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) से ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की वापसी पर मंत्रिमंडल ने एक बड़ा संकल्प पारित किया है। 15 जुलाई को भारत की अनंत आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अन्तरिक्ष यात्रा से सकुशल धरती पर लौटे हैं। ये समूचे देश के लिए गर्व, गौरव और उल्लास का अवसर है। आज मंत्रिमंडल, देश के साथ मिलकर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के सफलतापूर्वक पृथ्वी पर लौटने का अभिनंदन करता है। उन्होंने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिन का ऐतिहासिक मिशन पूरा किया।"  पीएम धन धान्य कृषि योजना, जिसपर सालाना 24000 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार क्या है पीएम धन धान्य कृषि योजना? यह योजना खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए शुरू की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य खेती में नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाना, किसानों को एक ही फसल पर निर्भर रहने की बजाय फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के लिए प्रोत्साहित करना, जलवायु के अनुसार खेती को बढ़ावा देना, गांव स्तर पर भंडारण, सिंचाई और कृषि कर्ज की सुविधाओं को मजबूत बनाना और लागत घटाकर किसान की पैदावार बढ़ाना है जिससे उनकी आय में सुधार हो सके। किन किसानों को मिलेगा लाभ? इस योजना का सबसे ज़्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा। इन किसानों की जमीन कम होती है, लेकिन अगर उन्हें सही तकनीक, सिंचाई और भंडारण की सुविधा मिले, तो वे भी ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। 100 ज़िलों को प्राथमिकता सरकार ने देश के 100 ऐसे ज़िलों की पहचान की है, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता औसत से नीचे है और किसानों को पर्याप्त ऋण नहीं मिल पाता। इन जिलों में पीएम धन धान्य कृषि योजना को सबसे पहले लागू किया जाएगा। ₹24,000 करोड़ का वार्षिक खर्च सरकार इस योजना पर हर साल ₹24,000 करोड़ खर्च करेगी। यह राशि पहले से चल रही 36 कृषि योजनाओं के समन्वय से खर्च की जाएगी, जिससे न सिर्फ लागत घटेगी बल्कि योजनाओं का असर भी ज़्यादा होगा। कृषि में क्रांति लाने की तैयारी पीएम धन धान्य कृषि योजना से उम्मीद है कि यह देश में कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति लाएगी। टेक्नोलॉजी, विविधीकरण, और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाओं को लागू कर किसानों की आय को बढ़ाया जाएगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना का उद्देश्य: इस योजना का मुख्य उद्देश्य कम फसल उत्पादन वाले क्षेत्रों में कृषि सुधार करना है। सरकार ने उन 100 जिलों को चिन्हित किया है, जहां खेती उन्नत नहीं है और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इस योजना के तहत सरकार किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरण उपलब्ध कराएगी, जिससे किसान अपनी फसल में सुधार कर सकें। इसके साथ ही वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी, ताकि किसान बेहतर उपकरण और नए तरीके अपनाकर अपनी खेती को और अधिक उत्पादक बना सकें। इस योजना का उद्देश्य खेती को आसान और किसानों के लिए लाभकारी बनाना है, जिससे वे अधिक फसल उगा सकें और अपनी आय बढ़ा सकें। इस योजना से कृषि क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा, और देश भर के किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा। पीएम धन धान्य कृषि योजना के लिए पात्रता मापदंड: इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निम्नलिखित पात्रता मापदंडों को पूरा करते हैं:     कम कृषि उत्पादन वाले 100 चयनित जिलों के किसान इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं।     छोटे, सीमांत और बड़े पैमाने के किसान सभी पात्र होंगे।     आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।     किसान के पास वैध भूमि स्वामित्व दस्तावेज होना चाहिए।     पारंपरिक या पुरानी खेती के तरीकों का उपयोग करने वाले किसान इस … Read more

ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित UAS और C-UAS हमारी जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण

नई दिल्ली भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि दुनिया में हुईं हाल की लड़ाइयों ने दिखा दिया है कि कैसे ड्रोन जंगों में शक्ति के संतुलन को जबरदस्त तरीके से बदल सकते हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यूएवी और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस) में आत्मनिर्भरता भारत के लिए एक "रणनीतिक अनिवार्यता" है.  जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ड्रोन वास्तविकता के प्रमाण हैं और हाल के संघर्षों में उनकी व्यापक उपयोगिता दर्शाती है कि कैसे ड्रोन अपने आकार या कीमत के अनुपात में सामरिक संतुलन को असमान रूप से बदल सकते हैं.  उन्होंने कहा, "असममित ड्रोन युद्ध बड़े प्लेटफार्मों को असुरक्षित बना रहा है और सेनाओं को एयर डॉक्ट्राइन, सी-यूएएस के विकास के वैचारिक पहलुओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है." दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में जनरल चौहान ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह दर्शाया है कि स्वदेशी रूप से विकसित मानवरहित हवाई प्रणालियां (यूएएस) और सी-यूएएस "हमारे इलाकों और हमारी जरूरतों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं." बता दें कि दिल्ली में भारतीय सेना ने थिंक-टैंक सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज के सहयोग से UAV और C-UAS (काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम) पर एक कार्यशाला का आयोजन किया है.  सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि भविष्य की लड़ाइयां आज की जंग को कल के हथियारों से नहीं जा सकता है.  उन्होंने कहा है कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है, तो हमें ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि आज का युद्ध ‘कल की तकनीक’ से नहीं लड़ा जा सकता. हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता को स्वदेशी बनाना होगा. जनरल चौहान ने कहा कि अगर भारत को युद्ध क्षेत्र में बढ़त बनाकर रखनी है तो इंडियन आर्मी को ‘भविष्य की तकनीक’ से लैस होना होगा. सीडीएस ने कहा कि हमें अपने भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता का स्वदेशीकरण करना होगा.  लोअर एयर स्पेस में लड़ी जा रही हैं लड़ाइयां  अनिल चौहान ने कहा कि हम पहले सोचते थे कि एयर स्पेस एक है, इसे बांटा नहीं जा सकता है. पहले यहां मानव युक्त विमानों का बोलबाला था. लडाइयों में इन्ही का इस्तेमाल होता था. इसके बाद बैलेस्टिक और हाइपर सोनिक मिसाइल आए, इसने अपर स्पेस को खोल दिया. लेकिन अब लोअर एयर स्पेस भी खुल गए हैं. एयर स्पेस की बदलती लड़ाइयों पर उन्होंने कहा कि अपने लोअर एयर स्पेस पर जोर देना होगा. लोअर एयर स्पेस में ट्रैफिक बढ़ती जा रही है. ज्यादातर लड़ाइयां यही लड़ी जा रही हैं. इसलिए समय की जरूरत यह है कि अब लोअर एयर स्पेस में अपनी मारक क्षमता बढ़ाएं. इसके साथ ही दुश्मन को ऐसा करने से रोकने के लिए हमें काउंटर-अनमैंड एरियल सिस्टम विकसित करना होगा.  ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र जंगों और ड्रोन्स की बात हो रही थी तो जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने 10 मई को बिना हथियारों वाले ड्रोन और लॉइटर म्यूनिशंस का इस्तेमाल किया. लेकिन "इनमें से कोई भी वास्तव में भारतीय सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका." सीडीएस चौहान ने कहा, "इनमें से ज्यादातर को काइनेटिक और नॉन काइनेटिक तरीकों के इस्तेमाल से नष्ट कर दिया गया है. इनमें से कुछ को लगभग इनटैक्ट (साबूत) स्थिति में बरामद किया गया."  उन्होंने कहा कि भविष्य लड़ाइयों में हमें इसी लोअर एयर स्पेस पर फोकस करना होगा. सीडीएस ने जोर देकर कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने "हमें दिखाया है कि हमारे इलाके और हमारी जरूरतों के हिसाब से स्वदेशी रूप से विकसित यूएएस, सी-यूएएस क्यों महत्वपूर्ण हैं" आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि "हम वैसे युद्ध के लिए आयातित तकनीकों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं जो हमारे डिफेंसिव और ऑफेंसिव मिशन के लिए महत्वपूर्ण हैं. युद्ध में ड्रोन के इस्तेमाल पर जनरल चौहान ने कहा कि ड्रोन्स ने जंगों की तस्वीर बदल दी है. मुझे लगता है कि युद्ध में उनका इस्तेमाल बहुत क्रांतिकारी रहा है.  जैसे-जैसे ड्रोन्स की तैनाती बढ़ी इसका दायरा बढ़ा, सेना ने क्रांतिकारी तरीके से इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया. इस कार्यशाला के लिए अपने संदेश में सीडीएस ने लिखा, "गैर-संपर्क युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे परिदृश्य में, यूएवी एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरे हैं. भारत जैसे राष्ट्र के लिए, यूएवी और सी-यूएएस प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता न केवल एक रणनीतिक अनिवार्यता है, बल्कि यह भारत को अपना भाग्य बनाने, अपने हितों की रक्षा करने और भविष्य के अवसरों का लाभ उठाने के लिए सशक्त बनाने के बारे में भी है."