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लाड़ली बहना योजना का बजट बढ़ा, सरकार खर्च करेगी 1859 करोड़ प्रति माह

भोपाल  मध्यप्रदेश की सुपरहिट योजनाओं में शुमार मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से मोहन सरकार को 318 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। अभी सरकार कर्ज लेकर हर महीने लाड़ली बहनों को 1250 रुपए दे रही है। अक्टूबर महीने में राशि अंतरित करने के लिए सरकार को 318 करोड़ रुपए का इंतजाम करना होगा। फिलहाल, अक्टूबर महीने में किस दिन लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे यह अभी तय नहीं हुआ है। सीएम डॉ मोहन यादव के द्वारा भाईदूज पर बहनों के खाते में 250 रुपए अतिरिक्त राशि देने का ऐलान किया था। जिसके बाद अब लाड़ली बहनों के खाते में 1500 हर महीने ट्रांसफर किए जाएंगे। हर महीने लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपए सीएम डॉ मोहन यादव ने अगस्त में लाड़ली बहना योजना की राशि 1500 रुपए करने का ऐलान किया था। अक्टूबर महीने में सरकार के द्वारा 250 रुपए बढ़ाकर ट्रांसफर किए जाएंगे। यानी लाड़ली बहनों के खाते में इस महीने से 1500 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। लाड़ली बहनों के खाते में राशि 15 अक्टूबर के पहले ही ट्रांसफर कर दी जाएगी। पूर्व मंत्री बोले- कर्ज के दलदल में एमपी पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल ने बातचीत में कहा कि सरकार की लाड़ली बहना योजना अब सिर्फ चुनावी इवेंट बनकर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर महीने इस योजना के भुगतान के लिए राज्य सरकार को कर्ज लेना पड़ रहा है। पटेल ने कहा, सरकार इस महीने से बहनों के खातों में 1500 रुपए ट्रांसफर करने जा रही है, जिससे करीब 300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ेगा। उन्होंने दावा किया कि पहले लाखों लाड़ली बहनों के नाम योजना से काट दिए गए और अब नई पात्र बहनों नाम जुड़ नहीं पा रहे हैं। पूर्व मंत्री ने सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा, हर महीने मध्यप्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेला जा रहा है। राज्य पर प्रति व्यक्ति 60 हजार रुपए का कर्ज हो चुका है।   राखी पर लाड़ली बहनों को 250 रुपए अतिरिक्त मिले थे रक्षाबंधन पर सीएम मोहन यादव ने लाड़ली बहनों के खाते में 250 रुपए अतिरिक्त ट्रांसफर किए थे। जो कि हर महीने 1250 रुपए मिलने वाली राशि से अलग थे। उस दौरान सरकार ने करीब 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में 1859 करोड़ से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई थी। जबकि सितंबर महीने में 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 28वीं किस्त के रूप में 1541 करोड़ रुपए अधिक की राशि ट्रांसफर की गई थी।   सरकार को लेना पड़ सकता है कर्ज अक्टूबर महीने में दिवाली का त्योहार है। ऐसे में कर्मचारियों और महिलाओं की मांग को पूरी करने के लिए सरकार फिर से कर्ज ले सकती है। सरकार पर मौजूदा कर्ज 459640.27 करोड़ रुपए तक हो गया। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में आंकड़ा बढ़कर 37900 करोड़ तक पहुंच गया है। सरकार के द्वारा बीते 30 सितंबर को 1 हजार करोड़ का कर्ज लिया गया था। 

मछुआ समाज के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री

रायपुर : सामाजिक विकास का मूलमंत्र है शिक्षा, शिक्षा के बिना है जीवन अधूरा – मुख्यमंत्री  साय मछुआ समाज के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार – मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन में हुए शामिल रायपुर शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है। शिक्षा केवल नौकरी प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि सफल जीवन का मार्ग है। सामाजिक विकास का मूलमंत्र शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता के लिए शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय मछुवारा जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  हमारी सरकार प्रारंभ से ही राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही है। राज्य गठन के समय जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज हुआ करता था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। इसी तरह हमने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थान जैसे आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स और सिपेट जैसे संस्थान छत्तीसगढ़ में स्थापित किए हैं, जिनका लाभ राज्य के स्थानीय विद्यार्थियों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में नालंदा परिसर के निर्माण का कार्य चल रहा है, जिससे युवाओं को दिशा और अवसर दोनों मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज समाज को संगठित होने की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज से ही राष्ट्र मजबूत होता है। उन्होंने कहा कि नशाखोरी समाज के विकास में बाधक है और इस बुराई से दूर रहना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने समाज से नशा मुक्ति का संकल्प लेने की अपील की। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने मत्स्य संपदा योजना प्रारंभ की, जो मछुआरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुई है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में गंगरेल बांध ठेका प्रथा को समाप्त कर पुनः डुबान क्षेत्रों के किसानों को मत्स्य पालन की अनुमति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार मछुआ समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में अनेक योजनाएँ प्रारंभ की गई हैं। प्रदेश का पहला एक्वा पार्क हसदेव बांगो जलाशय में लगभग ₹37 करोड़ की लागत से निर्मित किया जा रहा है। यह एक्वा पार्क मछली उत्पादन, प्रोसेसिंग, निर्यात और टूरिज़्म— इन चारों क्षेत्रों में नए अवसर सृजित करेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में यहाँ 800 केजों में मत्स्य पालन किया जा रहा है, जिससे अनेक पंचायतों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे मछुआ भाइयों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री  साय ने राष्ट्रीय मछुवारा संघ के सभी पदाधिकारियों और देशभर से पधारे मेहनतकश मछुआ भाइयों-बहनों को राष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने कहा कि निषाद समाज का गौरवशाली इतिहास और परंपरा रही है। हमारे इतिहास और परंपरा के बारे में नई पीढ़ी को बताना और सिखाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी जी ने सदैव निषाद समाज को अग्रणी स्थान दिया है। उन्होंने बताया कि जब अयोध्या में प्रभु  रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, तब उसी के सामने सरयू नदी के तट पर निषाद राज मंदिर का निर्माण कर समाज को उचित सम्मान दिलाने का कार्य प्रधानमंत्री  मोदी ने किया है। इस हेतु निषाद समाज सदैव उनका ऋणी रहेगा। उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि निषाद समाज अत्यंत मेहनतकश और परिश्रमी समाज है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति में निषाद समुदाय का योगदान अनुकरणीय है। इस अवसर पर विधायक  सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष  भरत मटियारा, सहित प्रदेश और अन्य राज्यों से आए समाज के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

राज्यपाल ने दी सलाह: हर जनजातीय परिवार तक पहुँचे कल्याण योजनाओं की रोशनी

जनजातीय कल्याण की योजनाओं का लाभ, अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाए: राज्यपाल  पटेल वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र से लें युवा प्रेरणा राज्यपाल ने किया आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत संवाद भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश में जनजातीय कल्याण का महा अभियान चल रहा है। पीएम जनमन योजना और धरबी आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जनजातीय सशक्तिकरण की अभूतपूर्व योजनाएं है। उन्होंने सभी से आव्हान किया कि जनजातीय कल्याण की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने आगें आए। राज्यपाल  पटेल रविवार को दमोह के सिंग्रामपुर में आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत आदि साथी और आदि सहयोगियों से संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर केन्द्रीय राज्यमंत्री  दुर्गादास ऊईके भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि सरकार के साथ जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी जनजातीय कल्याण के प्रयासों को जमीनी स्तर पर लागू करने में सक्रिय सहभागिता करें। आम जनों को शासकीय योजनाओं की जानकारी के साथ सिकल सेल, टी.बी. आदि रोगों के कारण, लक्षण और उपाय के प्रति भी जागरूक करें। उन्होंने पीएम जनमन योजना और धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत दी जा रही शासकीय सहायता और सुविधाओं की चर्चा की। शादी के पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान अवश्य करें राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश की धरती से वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन का संकल्प लिया है। इस संकल्प को सफल बनाने सरकार के साथ आम नागरिकों का सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हम सभी का दायित्व है कि सिकल सेल की जागरूकता में हर संभव सहयोग करें। उन्होंने कहा कि शादी के पूर्व जेनेटिक कार्ड का मिलान जरूर किया जाए। पेसा पंचायतें ग्राम सभा में सिकल सेल जागरूकता का गंभीर प्रयास करें। सिकल सेल के सामान्य लक्षण, बचाव आदि के बारे में बताएं। ग्रामीणों को शादी के पहले जेनेटिक कार्ड मिलान के महत्व की व्यावहारिक और सरल भाषा में जानकारी दें। वीरांगना के जीवन आदर्शों से लें प्रेरणा युवा राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत का गौरव है। उन्होंने अपने अदम्य वीरता, साहस और नेतृत्व क्षमता से सफलतापूर्वक शासन किया। राज्यपाल  पटेल ने उपस्थित युवाओं से आव्हान किया कि वीरांगना रानी दुर्गावती के जीवन आदर्शों और संघर्ष से प्रेरणा लें। राष्ट्र हित में हमेशा आगे बढ़कर कार्य करें। केन्द्रीय राज्यमंत्री  दुर्गादास ऊईके ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार जनजातीय कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार उनके स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के प्रति राज्यपाल  मंगुभाई पटेल की संवेदनशीलता और सक्रिय प्रयासों की सराहना की। प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री  धमेन्द्र भाव सिंह लोधी ने राज्यपाल  पटेल के आगमन पर आभार जताया। पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री  लखन पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय की भावना के अनुरूप जनजातीय कल्याण की दिशा में सतत रूप से कार्य कर रही है। कार्यक्रम में दमोह सांसद  राहुल सिंह लोधी, हटा विधायक मती उमा देवी खटीक, मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष मती रंजीता गौरव पटेल, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और आमजन उपस्थित रहे।

नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट पटना मेट्रो जल्द दौड़ेगी, किराया ₹15 से ₹30, होगी रोज़ 40+ राइड्स

पटना  बिहार में विधानसभा चुनाव करीब हैं. चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार भी एक्टिव मोड में है. चुनाव कार्यक्रम के ऐलान से पहले सीएम नीतीश की सरकार अब पटना के लोगों को बड़ा तोहफा देने जा रही है. सीएम नीतीश 6 अक्टूबर को दिन में 11 बजे पटना के लोगों को मेट्रो रेल की सौगात देंगे. पटना मेट्रो रेल परियोजना पर 13 हजार 925 करोड़ 50 लाख की लागत आई है. पटना मेट्रो के उद्घाटन कार्यक्रम में सीएम नीतीश के साथ दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी शामिल होंगे. पटना मेट्रो के शुभारंभ पाटलिपुत्र बस डिपो से होना है. इस सेवा की शुरुआत के बाद यात्री इसमें आईएसबीटी स्टेशन से जीरो माइल और भूतनाथ तक सफर कर पाएंगे. इस रूट की लंबाई करीब सवा चार किलोमीटर है. पटना मेट्रो का न्यूनतम किराया 15 रुपये पटना मेट्रो के लिए जो किराया निर्धारित किया गया है, उसके मुताबिक एक स्टेशन तक सफर करने के लिए 15 रुपये का टिकट लगेगा और अधिकतम किराया 30 रुपये होगा. पटना मेट्रो का परिचालन फिलहाल सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक होगा और हर दिन इस रूट पर मेट्रो ट्रेन 40 से 42 फेरे लगाएगी. पटना मेट्रो की साज-सज्जा पर भी खास ध्यान दिया गया है. इस ट्रेन को विश्व प्रसिद्ध मधुबनी पेंट्रिंग से सजाया गया है. इस पेंटिंग में बिहार की पहचान की झलके है. पटना मेट्रो प्रोजेक्ट की पूरी टाइमलाइन बिहार राजधानी पटना में मेट्रो ट्रेन चलाने का प्लान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साल 2013 में बनाया था. पटना मेट्रो परियोजना की गिनती सीएम नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में की जाती है. नीतीश कुमार की अगुवाई वाली कैबिनेट ने 11 जून 2013 को पटना मेट्रो परियोजना के लिए डीपीआर तैयार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. जून 2014 में पटना मेट्रो परियोजना को हरी झंडी मिली, जिसका निर्माण पांच चरणों में कराने का प्रस्ताव पारित किया गया. पटना मेट्रो प्रोजेक्ट में बिहार और केंद्र सरकार के साथ–साथ जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी यानी JICA की भी भागीदारी है. कब क्या हुआ– -17 फरवरी 2019 को पीएम मोदी ने पटना के पहले मेट्रो रेल कॉरिडोर का शिलान्यास किया -18 फरवरी 2019 को पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई -पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी PMRCL को पटना मेट्रो प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी मिली -इस प्रोजेक्ट में DMRC को सलाहकार बनाया गया -4 मार्च 2019 को पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने पटना के इंदिरा भवन में अपना ऑफिस खोला -जनवरी 2022 में एल एंड टी कंपनी ने पटना मेट्रो के फेज-1 के कॉरिडोर-2 के डिजाइन और निर्माण के लिए मेट्रो ऑपरेटर DMRC से ऑर्डर हासिल किया -पहले फेज में पटना मेट्रो के पांच स्टेशन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया  

राज्य स्तरीय काव्य प्रतियोगिता में निधि, मीरा और अलीशा बनीं विजेता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया पुरस्कृत

छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में आयोजित हुआ युवा कवि सम्मेलन राज्य स्तरीय काव्य प्रतियोगिता में निधि, मीरा और अलीशा बनीं विजेता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया पुरस्कृत छत्तीसगढ़ प्रदेश स्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता में उभरीं नई प्रतिभाएं, निधि, मीरा और अलीशा ने काव्य पाठ से बांधा समा एक हजार से अधिक प्रतिभागियों में से चयनित तीन युवा कवियों ने युवा कवि सम्मेलन में किया मंच साझा छत्तीसगढ़ के युवा कवियों की खोज में आयोजित हुई युवा काव्य पाठ प्रतियोगिता, भव्य कवि सम्मेलन के साथ हुई समाप्त रायपुर  प्रदेश भर के युवा कवियों को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्तरीय काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया प्रदेश भर के 1038 युवा कवियों ने प्रतियोगिता में  सहभागिता की। संभाग स्तर पर चयनित प्रतिभागियों का  फाइनल मुकाबला शनिवार को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में किया गया। प्रतियोगिता में बिलासपुर की निधि तिवारी ने प्रथम स्थान, बिलासपुर की ही मीरा मृदु ने द्वितीय तथा सरगुजा की अलीशा शेख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। युवा कवि सम्मेलन में तीनों को क्रमशः 50 हजार, 30 हजार एवं 20 हजार रुपए की पुरस्कार राशि  सीएम साय एवं डिप्टी सीएम साव ने प्रदान की। छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि, पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग द्वारा हास्य कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी, उप मुख्यमंत्री अरुण साव जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस युवा कवि सम्मेलन में प्रीेतयोगिता में विजयी तीनों नवोदित कवियों को मंच पर सर्वप्रथम काव्य पाठ का अवसर दिया गया। अलीशा शेख ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि पर कविता प्रस्तुत की, मीरा मृदु ने मधुर स्वर में छत्तीसगढ़ महतारी और रामायण प्रसंग को नए काव्य रूप में पिरोया, जबकि निधि तिवारी ने समाज में व्याप्त कुरीतियों और बेटियों की पीड़ा पर प्रभावशाली रूपक कविता सुनाई। वरिष्ठ कवियों ने तीनों युवा कवियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भूमि प्रतिभा से परिपूर्ण है, जो राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है। बता दें कि कवि सम्मेलन में देश के प्रख्यात कवि शशिकांत यादव, दिनेश बावरा, नीलोत्पल मृणाल, कवयित्री कविता तिवारी एवं मनु वैशाली ने अपनी भावपूर्ण कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभागार कविताओं की विविध रसधाराओं से गूंज उठा। इस अवसर पर मंत्री श्री टंकराम वर्मा जी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब जी, मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी, मंत्री श्री राजेश अग्रवाल जी, विधायक श्री मोतीलाल साहू जी, युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर जी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद के अध्यक्ष श्री शंशाक तिवारी जी, भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष श्री राहुल टिकरिहा जी, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा जी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल जी, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज जी, लौह शिल्पकार  बोर्ड अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल विश्वकर्मा जी एवं प्रदेश के युवा कवि उपस्थित रहे। …..    ……..

भारतीय महिला टीम की जोरदार जीत, पाकिस्तान को फिर चटाई धूल – मैच के बाद बना तनावपूर्ण माहौल

कोलंबो  आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के मैच नंबर-6 में रविवार (5 अक्टूबर) को भारत का सामना चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से हुआ. कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में हुए इस मुकाबले में भारत ने 88 रनों से शानदार जीत हासिल की. मुकाबले में पाकिस्तान को जीत के लिए 248 रनों का टारगेट मिला था, जिसका वो पीछा नहीं कर पाई. पाकिस्तानी टीम 43 ओवरों में 159 रनों पर सिमट गई. भारत की ओर से तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने तीन विकेट झटके और वो 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुनी गईं. दीप्ति शर्मा ने भी तीन और स्नेह राणा ने दो विकेट हासिल किए. पाकिस्तान पर भारतीय टीम ने वूमेन्स वनडे में लगातार 12वीं जीत हासिल की है. उसने अब तक एक भी वनडे मुकाबला पाकिस्तान के खिलाफ गंवाया नहीं है. मौजूदा वर्ल्ड कप में भारत की ये लगातार दूसरी जीत रही और वो अंकतालिका में पहले स्थान पर पहुंच गई है. भारतीय टीम ने अपने अभियान का शानदार आगाज करते हुए पहले मुकाबले में श्रीलंका को डीएलएस नियम के तहत 59 रनों से पराजित किया था. भारतीय टीम अब अपने अगले मुकाबले में 9 अक्टूबर को साउथ अफ्रीका का सामना करेगी. टारगेट का पीछा करते हुए पाकिस्तानी टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 6 रनों के स्कोर पर मुनीबा अली का विकेट गंवा दिया  मुनीबा 2 रनों के निजी स्कोर पर रन आउट हुईं. फिर उसने सदफ शमास (6 रन) और आलिया रियाज (2 रन) का विकेट भी सस्ते में खो दिया. 26 रनों पर तीन विकेट गिरने के बाद सिदरा अमीन और नतालिया परवेज ने चौथे विकेट के लिए 69 रन जोड़े. क्रांति गौड़ ने नतालिया को आउट करके इस पार्टनरशिप को तोड़ा. कप्तान फातिमा सना (2 रन) कुछ खास नहीं कर पाईं और उन्हें दीप्ति शर्मा ने अपनी फिरकी में फंसाया. पाकिस्तान के लिए सिदरा अमीन ने खेली अच्छी पारी पांच विकेट गिरने के बाद सिदरा अमीन और सिदरा नवाज ने मिलकर छठे विकेट के लिए 41 रन जोड़े. जरूरी रनरेट बढ़ता जा रहा था, इसी चलते पाकिस्तानी टीम बैक टू बैक ओवरों में सिदरा नवाज (14 रन) और रमीन शमीम (0 रन) के विकेट खो दिए. पाकिस्तान को फिर सिदरा अमीन के रूप में आठवां झटका लगा, जो शानदार बैटिंग कर रही थीं. सिदरा ने 106 गेंदों पर 81 रन बनाए, जिसमें 9 चौके के अलावा एक सिक्स शामिल रहा. यह वूमेन्स ओडीआई में भारत के खिलाफ किसी पाकिस्तानी बैटर का बेस्ट स्कोर रहा. सिदरा अमीन के आउट होने के बाद भारतीय टीम के लिए जीत औपचारिकता रह गई. भारतीय महिला टीम ने PAK प्लेयर्स से नहीं मिलाया हाथ स मुकाबले में नो हैंडशेक पॉलिसी देखने को मिली. टॉस के समय भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना से हाथ नहीं मिलाया. फिर मैच के बाद भी भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी प्लेयर्स संग हैंडशेक नहीं किया. इससे पहले एशिया कप 2025 में भारतीय मेन्स टीम ने ऐसा किया था. तब भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों ही मैचों में पाकिस्तान प्लेयर्स संग हैंडशेक नहीं किया था. भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बोर्ड की ओर से खिलाड़ियों को पाकिस्तान टीम से हाथ मिलाने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा था, 'पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ है. खिलाड़ियों को हैंडशेक करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है. हमारा फोकस सिर्फ खेल पर है.' मोहसिन नकवी के हाथों नहीं ली एशिया कप ट्रॉफी यह मुद्दा सबसे पहले मेन्स एशिया कप के दौरान उभरा था, जब भारत और पाकिस्तान तीन बार आमने-सामने आए थे. उस समय भारतीय टीम ने मैच से पहले और उसके बाद हैंडशेक से परहेज किया थाा. पाकिस्तानी टीम के कोच माइक हेसन ने दावा किया था कि भारतीय टीम ने सुरक्षा और राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए ऐसा किया. तनाव उस समय और बढ़ गया जब भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी के हाथों एशिया कप ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि पाकिस्तान के साथ खेल संबंध सिर्फ आईसीसी या न्यूट्रल वेन्यू पर होने वाले टूर्नामेंट्स तक सीमित रहेंगे. दोनों देशों के बीच आखिरी द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज 2012-13 में खेली गई थी. महिला वर्ल्ड कप के लिए पाकिस्तान की टीम कोलंबो में ही ठहरी हुई है, जबकि भारत के मुकाबले गुवाहाटी और कोलंबो में हो रहे हैं. भारत ने अपने पहले मुकाबले में श्रीलंका को 59 रनों से हराकर शानदार शुरुआत की थी.

बड़ा खुलासा! 2025 में कब मनाई जाएगी दिवाली — भ्रम दूर हुआ!

नई दिल्ली देशभर में रोशनी और खुशियों का त्योहार दीपावली बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन इस बार दीपावली की तारीख को लेकर काफी भ्रम और कन्फ्यूजन देखने को मिल रहा है। अलग-अलग पंचांगों में दीपावली की तारीख अलग-अलग बताई जा रही है। कहीं इसे 20 अक्टूबर को तो कहीं 21 अक्टूबर को मनाने की बात कही जा रही है। इस कन्फ्यूजन के बीच काशी विद्वत परिषद ने इस मामले में साफ-साफ अपनी राय रख दी है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, काशी विद्वत परिषद के महामंत्री रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि साल 2025 में अमावस्या की तिथि 20 अक्टूबर से शुरू हो रही है। इसी दिन अमावस्या प्रदोषकाल पूरा होता है, जो लक्ष्मी पूजन के लिए जरूरी माना जाता है। वहीं 21 अक्टूबर को अमावस्या तीन प्रहर (लगभग आधी रात तक) तक बनी रहती है। उस दिन प्रतिपदा की तिथि भी शुरू हो जाती है, जिससे नए अन्न का पारण (भोजन) नहीं हो पाता है। शास्त्र के अनुसार दीपावली का महापर्व तभी पूरी तरह से माना जाता है जब यह अमावस्या तिथि और प्रदोषकाल के बीच मनाया जाए। इसलिए पूरे देश में इस बार दीपावली 20 अक्टूबर को ही मनाना सही रहेगा। कैसे हुआ फैसला? पंचांग में तारीखों को लेकर चल रहे मतभेदों को सुलझाने के लिए काशी विद्वत परिषद ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। यह बैठक ऑनलाइन हुई और परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचन्द्र पाण्डेय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में दीपावली की सही तिथि को लेकर गहन चर्चा हुई। विद्वानों ने शास्त्र, गणित और पंचांग के आधार पर अपने तर्क प्रस्तुत किए। अंत में दीपावली की तिथि को स्पष्ट करते हुए प्रेस रिलीज जारी की गई और पूरे देश को जानकारी दी गई। बैठक में शामिल हुए विद्वान इस महत्वपूर्ण बैठक में कई नामी विद्वान मौजूद रहे, जिनमें प्रोफेसर वशिष्ठ नाथ त्रिपाठी, प्रोफेसर विनय पांडेय, प्रोफेसर रामनारायण द्विवेदी, प्रोफेसर सदाशिव द्विवेदी, डॉ. सुभाष पांडेय, प्रोफेसर चंद्रमौली उपाध्याय, विद्वान राम किशोर त्रिपाठी और पंचांगकार अमित कुमार मिश्र शामिल थे। इन सभी ने मिलकर दीपावली की सही तिथि तय की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज प्रतिभा सम्मान समारोह में विद्यार्थियों को करेंगे सम्मानित

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज जबलपुर में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकोशल महाविद्यालय के 13 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से निर्मित नवीन शैक्षणिक भवन और शासकीय विज्ञान महाविद्यालय के 10.05 करोड़ रुपये से बने नये शैक्षणिक भवन का भी लोकार्पण करेंगे। साथ ही महाकोशल महाविद्यालय में 3 करोड़ 67 लाख रुपये से बनने वाले भवन का भूमि-पूजन भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव महाविद्यालय में प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम में शैक्षणिक उत्कृष्टता, खेल, सांस्कृतिक, नवाचार एवं सामाजिक सेवा क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी करेंगे। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, राज्य सभा सदस्य श्रीमती सुमित्रा बाल्मीकि, सांसद श्री आशीष दुबे, महापौर श्री जगत बहादुर सिंह अन्नु, क्षेत्रीय विधायक श्री अशोक रोहाणी, नगर निगम अध्यक्ष श्री रिकुंज विज और जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री आशीष राव विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने बताया कि प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस महाकोशल कॉलेज के नवीन शैक्षणिक भवन में कुल 19 व्याख्यान कक्ष, प्रशासनिक ब्लॉक, स्मार्ट कक्षाएँ, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ एवं कॉमन रूम जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। यह भवन महाविद्यालय को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता योजना के अनुरूप प्रदेश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह अवसर महाकौशल महाविद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास में स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगा। लगभग 1500 विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षाविद एवं नागरिक इस अवसर के साक्षी बनेंगे। यह आयोजन जबलपुर की शिक्षा और युवा ऊर्जा का प्रतीक बनकर प्रदेश में उत्कृष्टता और नवाचार के नये मानक स्थापित करेगा।  

उज्जवल भविष्य की ओर कदम: चंबल के बीहड़ में सौर ऊर्जा का नया अध्याय

भोपाल थर्मल पावर पर निर्भरता कम करने के लिए सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रही मध्य प्रदेश सरकार अब चंबल के बीहड़ में सोलर प्लांट लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बीहड़ की 60 हजार हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। इस भूमि पर सोलर प्लांट लगाने की संभावनाओं का आइआइटी रुड़की से अध्ययन कराया जा रहा है। इस अध्ययन रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ करेंगे अध्ययन बीहड़ की भूमि कभी डकैतों के लिए प्रसिद्ध रही है, लेकिन इसका उपयोग अब सौर ऊर्जा बनाने में किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट में चंबल नदी, जलीय जीवों के संरक्षण और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। सरकार इस दिशा में भी विचार कर रही है कि क्यों न बीहड़ की भूमि का उपयोग ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भी किया जाए। आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञ इस पहलू से भी अध्ययन करेंगे।   कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य बता दें कि ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो नवीकरणीय ऊर्जा से पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया द्वारा विभाजित करके बनाया जाता है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। यह भारी उद्योगों, परिवहन और ऊर्जा भंडारण जैसे मुश्किल क्षेत्रों को कार्बन-मुक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक पांच मिलियन टन ग्रीन हाइड्रोजन के वार्षिक उत्पादन का लक्ष्य रखा है। कितनी भूमि उबड़ खाबड़ और कितनी समतल मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक अमनवीर सिंह बैंस ने बताया कि हमारे पास बीहड़ क्षेत्र की सेटेलाइट इमेज है, इसका पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के भूमि का डाटा से मिलान कराया जा रहा है। इससे यह पता लग जाएगा कि कितनी भूमि उबड़ खाबड़ है और कितनी भूमि समतल। भूमि का वर्गीकरण कर मैपिंग की जा रही है और यह निर्णय लिया जाएगा कि कितनी भूमि का सोलर प्लांट लगाने में उपयोग किया जा सकता है। काफी कुछ आइआइटी रुड़की के विशेषज्ञों की ओर से किए जाने वाले अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा।  

22 नवंबर से पहले ही होंगे बिहार के चुनाव, नए वोटर कार्ड धारकों को मतदान का मौका

पटना बिहार विधानसभा चुनाव से पहले हुए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद आम मतदाताओं के मन में बड़ा सवाल था कि वोटर कार्ड बदल दिए जाएंगे? पहले वाले वोटर कार्ड बेकार हो जाएंगे? ऐसा सवाल इसलिए भी था क्योंकि विशेष गहन पुनपरीक्षण में 2003 के बाद मतदाता सूची में शामिल वोटरों को अपने कागज और तस्वीर भी देनी थी। कहा भी गया था कि उनका डाटा उसी हिसाब से अपडेट किया जाएगा। अब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया है कि जिन मतदाताओं की जानकारी में किसी तरह का अपडेट या बदलाव हुआ है, उन्हें नया वोटर कार्ड जारी किया जाएगा। बाकी को इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि प्रावधान के तहत 22 नवंबर से पहले नई सरकार के लिए चुनाव हो जाना है और इसी हिसाब से आयोग काम कर रहा है। बाकी दस्तावेजों के आधार भी डाल सकते हैं बिहार चुनाव में वोट दो दिवसीय दौरे के बाद पटना से लौटने के पहले मीडिया से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने साफ कहा- "जिनके वोटर कार्ड के डाटा में कोई परिवर्तन होगा, उन्हें 15 दिनों के अंदर ईपिक, यानी वोटर कार्ड मिल जाएगा। जिनके पास पुराने वोटर कार्ड हैं और डाटा में कोई बदलाव नहीं है, वह उसी को सही मानेंगे। मतदान करने के लिए बाकी जिन दस्तावेजों को पहले से मान्य रखा गया था, वह आगे भी कायम रहेंगे।" मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अयोग्य वोटरों को हटाने और योग्य वोटरों को शामिल करने के लिए चलाए गए गहन विशेष पुनरीक्षण का परिणाम बहुत स्पष्ट और संतोषजनक रहा है। अब भी कोई अयोग्य जुड़ा हुआ है या योग्य छूटा हुआ है तो उसका नाम हटाने-जोड़ने की प्रकिया चलती रहेगी। चुनाव के बाद यह प्रक्रिया अगले आदेश तक के लिए बंद हो जाएगी। आधार कार्ड की मान्यता पर भी मुख्य चुनाव आयोग ने खुलकर की बात मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोटर पुनरीक्षण की प्रक्रिया में आधार को रखने और नहीं रखने को लेकर विवाद पर भी स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने मतदाता सूची के लिए नामांकन भरा होगा, वह आधार देने के लिए बाध्य नहीं थे और न हैं। चुनाव आयोग या आधार अथॉरिटी के नियम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आधार न जन्मतिथि और न नागरिकता का प्रमाणपत्र है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया तो आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण में आधार कार्ड लेने की व्यवस्था दी। उन्होंने नागरिकता को लेकर पूछे गए सवाल पर भी सीधा जवाब देते हुए कहा- संविधान के तहत भारत का मतदाता बनने के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी है। वोटर जहां रहता है, उसके आसपास के बूथ का मतदाता हो सकता है। उन्होंने कहा कि सभी चिह्नित अयोग्य मतदाताओं का नाम हटाया गया है। उसका कारण भी बताया गया है।