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मुख्यमंत्री डॉ. यादव 5 अक्टूबर को असम में निवेशकों से वन-टू-वन चर्चा करेंगे; मध्य प्रदेश बना निवेश का प्रमुख केंद्र

भोपाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, आज रविवार 5 अक्टूबर को असम के गुवाहटी में पूर्वोत्तर राज्यों के निवेशकों सहित भूटान के प्रतिनिधियों से वन टू वन चर्चा करेंगे। सेशन को रॉयल भूटान काउन्सलेट के काउंसिल जनरल  जिग्मे थिनायल नामग्याल भी संबोधित करेंगे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश के निवेश के प्रमुख सेक्टर और उद्योग-अनुकूल नीतियों की जानकारी देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की संकल्पबद्धता और राज्य की मजबूत नीतियां निवेशकों को भरोसा देती हैं कि उनके व्यवसाय के लिए प्रदेश में हर तरह के संसाधन और अवसर उपलब्ध हैं। यह अवसर पूर्वोत्तर और मध्यप्रदेश के उद्योगों के लिए साझी संभावनाओं का नया मार्ग खोलेगा।  मध्यप्रदेश की केन्द्रीय भौगोलिक स्थिति, विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा और बाजार तक आसान पहुंच इसे निवेशकों के लिए सर्वाधिक अनुकूल और एक अनूठा केंद्र बनाती है। मध्यप्रदेश ने उद्योग-अनुकूल नीतियां और क्लस्टर आधारित विकास मॉडल तैयार किए हैं, जिससे निवेशक अपनी नए उद्योग की योजना को तेजी से क्रियान्वित कर सकते हैं। राज्य के एग्रो और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेशकों को कृषि उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमताओं का लाभ मिलता है। टेक्सटाइल्स और अपैरल सेक्टर राज्य की परंपरागत और आधुनिक क्षमता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे निर्यात और रोजगार दोनों में वृद्धि संभव होती है। फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में मध्यप्रदेश की ताकत निवेशकों को कच्चे माल, अनुसंधान एवं विकास और उत्पादन के अवसर प्रदान करती है। सीमेंट, मिनरल्स और इंजीनियरिंग, पेट्रोकेमिकल्स और केमिकल्स, टूरिज्म और वेलनेस, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी इक्विपमेंट तथा प्लास्टिक्स और पॉलिमर्स जैसे सेक्टर राज्य को निवेश के लिए बहुआयामी विकल्प प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से इन क्षेत्र में निवेश केवल व्यवसाय ही नहीं बल्कि आर्थिक विकास और स्थायी अवसरों का रास्ता बन रहा है। मध्यप्रदेश पूर्वोत्तर के उद्योगपतियों के लिए निवेश का आदर्श स्थल है। असम और अन्य राज्यों में फैले फार्मा हब, सीमेंट यूनिट्स, टी-रिसर्च और प्लांटेशन, लॉजिस्टिक केंद्र और पेट्रोकेमिकल्स जैसी सुविधाओं के साथ मध्यप्रदेश निवेशकों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक और भरोसेमंद वातावरण प्रदान करता है।  

रेल लाइन के लिए 16 सुरंगें, महू-खंडवा प्रोजेक्ट में 17 हजार पेड़ों की रक्षा का आश्वासन

इंदौर  महू-खंडवा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर कवायद तेज हो गई है। शुक्रवार को भोपाल में रीजनल इंपावरमेंट कमेटी (आरईसी) की बैठक में प्रोजेक्ट से जुड़े पर्यावरण मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें जंगल में बिछाई जाने वाली पटरी और निर्माण कार्यों पर सहमति बन चुकी है। गेज परिवर्तन के तहत इंदौर-बड़वाह वनमंडल की 454 हेक्टेयर वनभूमि आएगी, जिसमें एक लाख 52 हजार पेड़ चिह्नित किए गए हैं। हालांकि 17 हजार पेड़ों को बचाया जा सकेगा, क्योंकि इस पूरे रेल मार्ग पर 20 किमी लंबी 16 सुरंगें बनाई जाएंगी। इस कारण इन पेड़ों को काटा नहीं जाएगा। साथ ही रेलवे ने यह भी सुनिश्चित किया कि मार्ग में जगह-जगह अंडरपास बनाए जाएंगे, जिससे पेड़ों को बचा सकेंगे। हालांकि महीनेभर में प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल सकती है। इसके बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ महीनों में प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। महू-खंडवा प्रोजेक्ट में इंदौर वनमंडल की 410 हेक्टेयर और बड़वाह वनमंडल की 44 हेक्टेयर वनभूमि इस्तेमाल की जाएगी। इंदौर के 410 हेक्टेयर क्षेत्र में एक लाख 30 हजार और 44 हेक्टेयर में 22 हजार पेड़ों को चिह्नित किया गया है। हालांकि सुरंग बनने से इनमें 17 हजार पेड़ बचाए जाएंगे। बड़िया से बेका के बीच 4.1, चोरल से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच 2.2 और राजपुर में 1.6 किमी लंबी सुरंग रहेगी। शेष 12.1 किमी की 13 सुरंग बनाई जाएंगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक सुरंग के अलावा अंडरपास बनाए जाएंगे। ये सभी 30-30 मीटर होंगे। इससे भी काफी संख्या में पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। धार-झाबुआ में लगेंगे पौधे इंदौर-बड़वाह के जंगलों से कटने वाले पेड़ों की भरपाई की जाएगी, मगर इसके लिए इंदौर वनमंडल में वनक्षेत्र नहीं है। इसके चलते धार और झाबुआ में एक हजार हेक्टेयर में पौधे रोपे जाएंगे। वन अफसरों ने वनभूमि चिह्नित कर ली है। फिलहाल रेलवे भी इसके लिए राजी है। दक्षिण से बढ़ेगी कनेक्टिविटी महू-खंडवा प्रोजेक्ट से इंदौर को काफी फायदा होगा। गेज परिवर्तन होने से दक्षिण की ओर जाने वाली ट्रेन भी इंदौर होकर गुजरेगी। अभी दक्षिण से चलने वाली ट्रेन उज्जैन और खंडवा से डायवर्ट हो जाती है। 150 करोड़ रुपये वन विभाग को रेलवे देगा वनभूमि के एवज में रेलवे वन विभाग को 40 करोड़ रुपये देगा। साथ ही पौधों की नेट प्रेजेंट वैल्यू भी निकाली गई है। उसके लिए भी 40 करोड़ रुपये देने होंगे। जबकि 1000 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसका खर्च भी रेलवे ही उठाएगा। यह राशि लगभग 50 करोड़ रुपये आएगी। वहीं पेड़ों को काटने और परिवहन का खर्च भी वन विभाग रेलवे से वसूलेगा, जो चार से पांच करोड़ होगा। वन विभाग के मुताबिक प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद रेलवे को राशि जमा करनी होगी। उसके बाद रेलवे को काम करने की अनुमति दी जाएगी। अगले कुछ दिनों में मिलेगी अनुमति     वन व पर्यावरण मंत्रालय की कमेटी ने महू-खंडवा प्रोजेक्ट को लेकर बैठक ली थी, जिसमें वन विभाग ने कुछ आपत्तियां लगाई थीं। इसे लेकर रेलवे ने जवाब दिया है। अगले कुछ दिनों के भीतर कमेटी हरी झंडी देगी। इसके बाद रेलवे को आगे की प्रक्रिया करनी होगी। –प्रदीप मिश्रा, डीएफओ, इंदौर वनमंडल  

BrahMos का नया वेरिएंट: भारत-रूस की साझेदारी से बनेगी Mach 4.5 रफ्तार की मिसाइल, रक्षा क्षमता में वृद्धि

नई दिल्ली भारत और रूस की रक्षा साझेदारी एक नए मुकाम पर पहुंच गई है. दोनों के बीच हुई 800 मिलियन डॉलर की ‘घातक’ डील अब दुनिया के हथियार बाजार में हलचल मचा रही है. दोनों देशों की ज्वाइंट प्रोजेक्ट ब्रह्मोस एयरोस्पेस अब ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल को और भी घातक और तेज बनाने पर काम कर रही है. मौजूदा ब्रह्मोस की स्पीड जहां मैक-3 है, वहीं नए वेरिएंट को मैक-4.5 (Mach 4.5) की रफ्तार से उड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है. यह अपग्रेड आने वाले दशकों तक भारत को विश्व स्तर पर बढ़त दिलाने वाला साबित हो सकता है. बताया जा रहा है कि यह अपग्रेड मिसाइल के रैमजेट इंजन (Ramjet Engine) को और शक्तिशाली बनाकर किया जाएगा. इससे इसकी मारक क्षमता 450 से 800 किलोमीटर तक बनी रहेगी. लेकिन रफ्तार दुश्मन के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को मात देने वाली होगी. यही नहीं इस मिसाइल की अंतरराष्ट्रीय मांग भी और अधिक बढ़ने की उम्मीद है. रैमजेट इंजन होगा और ताकतवर इस प्रोजेक्ट में रूस के वैज्ञानिक और भारत की DRDO (Defence Research and Development Organisation) मिलकर काम कर रहे हैं. इसका फोकस नए हाई-टेम्परेचर अलॉय और स्पेशल फ्यूल पर है, ताकि इतनी तेज गति पर भी इंजन और एयरफ्रेम सही तरह से काम करता रहे. मौजूदा एयरफ्रेम रहेगा कारगर विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ब्रह्मोस का एयरफ्रेम इतना मजबूत है कि वह बिना बड़े बदलाव के मैक-4.5 की रफ्तार झेल सकता है. हालांकि इतनी रफ्तार पर तापमान और दबाव से निपटने के लिए नई सामग्री का इस्तेमाल करना होगा. 2030 तक होगा तैयार जानकारी के मुताबिक, अपग्रेडेड ब्रह्मोस का ग्राउंड टेस्ट अगले तीन साल में शुरू हो सकता है. इसके बाद उड़ान परीक्षण और इंटीग्रेशन किया जाएगा. अनुमान है कि यह नया वेरिएंट 2030 की शुरुआत तक तैनाती के लिए तैयार हो जाएगा. दुश्मनों के पास नहीं होगा जवाब मैक-4.5 स्पीड हासिल करने के बाद दुश्मन देशों के पास मिसाइल को इंटरसेप्ट करने का वक्त नहीं बचेगा. यह किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती होगी. साथ ही, इसकी हिट एनर्जी इतनी ज्यादा होगी कि यह अंडरग्राउंड बंकर, नौसैनिक जहाज और कमांड सेंटर्स तक को तबाह कर सकेगी. फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस और इंडोनेशिया जैसे देशों ने खरीदा है. लेकिन नए वेरिएंट के आने के बाद अन्य देशों से भी बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है. यह भारत को हथियारों के वैश्विक बाजार में और मजबूत करेगा.  

मां वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने घोषणा की: यात्रा 5 अक्टूबर से तीन दिन के लिए रोकी गई

कटरा श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को लेकर अभी-अभी बड़ी खबर सामने आई है। श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पहले ट्विटर) पर जानकारी दी है कि मौसम विभाग की चेतावनी के कारण यात्रा आज  5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2025 तक स्थगित कर दी गई है।श्राइन बोर्ड ने कहा है कि यात्रा 8 अक्टूबर 2025 से पुनः शुरू होगी। आधिकारिक सूत्रों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा की नई जानकारी के लिए हमेशा श्राइन बोर्ड के आधिकारिक चैनलों पर ही भरोसा करें। साथ ही सभी से कहा गया है कि वे सुरक्षित रहें और मौसम की जानकारी पर ध्यान दें।   माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम संबंधी सलाह के मद्देनजर वैष्णो देवी यात्रा 5 से 7 अक्टूबर 2025 तक स्थगित रहेगी और 8 अक्टूबर को फिर से शुरू होगी। भक्त आधिकारिक चैनलों के माध्यम से अपडेट रह सकते हैं। 26 अगस्त को मंदिर मार्ग पर हुई लैंडस्लाइड बता दें कि जम्मू संभाग में 26 अगस्त को अत्यधिक खराब मौसम के दौरान माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर भूस्खलन होने से 35 से अधिक तीर्थयात्रियों की जान चली गई थी और 10 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसके कारण माता वैष्णो देवी यात्रा स्थगित कर दी गई थी। कटरा में पिछले दिनों हुए भूस्खलन के बाद प्रशासन ने होटल और धर्मशालाओं को खाली करने का आदेश जारी किया था। भूस्खलन त्रासदी के बाद, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आलोचना हुई थी, यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी यात्रा के मामलों का प्रबंधन करने वाले एसएमवीडीएसबी के अधिकारियों को दोषी ठहराया था। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीन दिन बाद माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर अर्धकुंवारी के पास हुए भूस्खलन की घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया था।  दिल्ली, पंजाब समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना इस सप्ताह उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। 4 से 7 अक्टूबर के दौरान दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। खासकर 6 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की भी चेतावनी (ऑरेंज अलर्ट) जारी की गई है। राजस्थान के पश्चिमी और उत्तरी भागों में भी इसी अवधि में गरज के साथ बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में वर्षा के कारण दिन के तापमान में गिरावट आ सकती है, जिससे मौसम सुहावना रहेगा, लेकिन कुछ निचले इलाकों में जलभराव की समस्या हो सकती है। पूर्वी, पूर्वोत्तर और प्रायद्वीपीय भारत में कैसा रहेगा मौसम? बात अगर पूर्वी भारत की करें तो ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भी 4 से 7 अक्टूबर के बीच गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। हालांकि ओडिशा के कुछ जिलों में भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जिसके कारण भूस्खलन और निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा में भी अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रहने रहेगा। प्रायद्वीपीय भारत की बात करें तो दक्षिण प्रायद्वीप के तटीय क्षेत्रों जैसे आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु और तेलंगाना में भी भारी बारिश की संभावना है। सात अक्टूबर के बाद सामान्य होगी मौसम की ‌स्थिति मौसम विभाग का कहना है कि लगभग 7 अक्टूबर के बाद, उत्तर भारत और मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो जाएंगी। इसके बाद इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य या सामान्य से थोड़ा अधिक रहने और सुबह-शाम हल्की ठंड महसूस होने की शुरुआत हो सकती है, जो मॉनसून की विदाई का संकेत है। हालांकि, दक्षिणी राज्यों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। मुंबई और अन्य पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में मानसून की वापसी में थोड़ी देरी हो सकती है, जिससे रुक-रुक कर बारिश और उमस भरी गर्मी का अनुभव हो सकता है। अगस्‍त में भीषण लैंडस्‍लाइड बता दें कि अगस्‍त के अंतिम सप्‍ताह में माता वैष्णो देवी मंदिर मार्ग पर स्थित अर्धकुवारी में लैंडस्लाइड की घटना हुई थी. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने बताया था कि लैंडस्लाइड इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुआ. इस हादसे में जानमाल का व्‍यापक पैमाने पर नुकसान हुआ था. तकरीबन तीन दर्जन श्रदधालुओं की मौत हो गई थी. यात्रा मार्ग फिर से बहाल करने में कई दिन का वक्‍त लग गया था. इस दौरान भक्‍तों के लिए माता वैष्‍णो देवी की यात्रा को रोक दिया गया था. उस समय हुई प्राकृतिक आपदा से सबक लेते हुए प्रशासन इस बार कोई खतरा नहीं उठाना चाहता है. मौसम विभाग की चेतावनी आने के तुरंत बाद यात्रा को रोकने का आदेश जारी कर दिया गया.

सरकारी क्वार्टर्स में पालतू जानवरों पर रोक? जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा – आवास का उपयोग सिर्फ परिवार के लिए हो

जबलपुर  पालतू कुत्ते और बिल्लियां अब सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रह गई हैं, बल्कि कभी-कभी पड़ोसियों और परिवार के लिए कानूनी मुद्दा बन रही हैं। जबलपुर (Jabalpur) के व्हीकल फैक्ट्री में तैनात जूनियर वर्क्स मैनेजर (JWM) सैफ उल हक सिद्दीकी ने भी इसी कारण हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। मामला इस बात का है कि फैक्ट्री प्रशासन ने पड़ोसियों की शिकायत पर JWM को सरकारी क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी क्वार्टर परिवार के लिए है, और यदि डॉग पालने की जिम्मेदारी याचिकाकर्ता पर है, तो वह किराए के मकान में रहकर पालतू डॉग का पालन कर सकता है। पालतू डॉग्स और पड़ोसियों के बीच विवाद का कारण हाल ही में देखा गया है कि पालतू डॉग और बिल्लियां न केवल पति-पत्नी के बीच मतभेद का कारण बन रही हैं, बल्कि पड़ोसियों के साथ भी संबंधों को प्रभावित कर रही हैं। पड़ोसियों ने शिकायत की थी कि JWM के घर में कई पालतू कुत्ते और बिल्लियां रहने के कारण शोर और गंदगी बढ़ रही है। इस शिकायत के बाद फैक्ट्री प्रशासन ने सरकारी क्वार्टर खाली करने का आदेश जारी किया। JWM ने इसे अवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्वार्टर आवंटन केवल परिवार के लिए होता है, और किसी भी पालतू जानवर को वहां रखने की जिम्मेदारी परिवार के अधिकार में नहीं आती। हाईकोर्ट का आदेश और तर्क जस्टिस विवेक जैन की अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फैक्ट्री प्रशासन का आदेश सही है। सरकारी क्वार्टर परिवार के रहने के लिए है, न कि पालतू जानवरों के लिए। पड़ोसियों की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, और शांति बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि याचिकाकर्ता पालतू डॉग पालना चाहते हैं, तो वह किराए का मकान लेकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। याचिकाकर्ता क्वार्टर का मालिक नहीं है, बल्कि इसे फैक्ट्री प्रशासन ने आवंटित किया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पालतू जानवरों के कारण उत्पन्न परेशानियों को प्रशासन और कानूनी तौर पर हल किया जा सकता है। देश-विदेश में पालतू जानवरों से जुड़े विवाद पालतू डॉग्स और बिल्लियों से जुड़े विवाद अब सिर्फ जबलपुर या किसी एक शहर तक सीमित नहीं रह गए हैं। यहां तक कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक भी 2023 में अपने पालतू डॉग की वजह से सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। भारत में भी कई परिवारों में पालतू जानवरों ने घर की शांति को चुनौती दी है, कभी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत आई, तो कभी पड़ोसियों के साथ मतभेद और कानूनी याचिकाओं की झड़ी लग गई। इसलिए पालतू जानवर सिर्फ घर की खुशी का जरिया नहीं रहे, बल्कि वे अब सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का भी हिस्सा बन गए हैं, जिनका पालन हर मालिक को सोच-समझकर करना पड़ता है। मिडिया और समाज पर प्रभाव इस मामले ने समाज में पालतू जानवरों और पड़ोसियों के अधिकार के बीच संतुलन की चर्चा शुरू कर दी है। मीडिया ने इसे बड़े पैमाने पर कवर किया, और सोशल मीडिया पर भी जब इस तरह के विषय उजागर होते हैं, तो लोग अपनी तरह-तरह की राय देने में पीछे नहीं रहते। अदालत के आदेश ने साफ कर दिया कि सरकारी आवास का उपयोग निजी जिम्मेदारी और पालतू जानवरों के लिए नहीं किया जा सकता। पड़ोसियों और मालिकों के बीच उत्पन्न विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से नियंत्रित किया जा सकता है।

कोचिंग से आज़ादी! पीएम ई-विद्या के जरिए अब घर पर ही पढ़ाई संभव

नई दिल्ली आपका बच्चा यदि स्कूल में है और आप उसके ट्यूशन और कोचिंग पर हर महीने एक बड़ी राशि खर्च कर रहे हैं तो अब आप इससे बच सकते हैं। आपके बच्चे को कोचिंग से बेहतर शिक्षा अब घर बैठे ही पीएम ई-विद्या के जरिए मिल सकती है। केंद्र सरकार ने स्कूलों बच्चों के बीच तेजी से बढ़ी कोचिंग संस्कृति को खत्म करने की दिशा में यह अहम पहल की है। जिसमें बच्चों को बालवाटिका से बारहवीं तक के सभी विषयों की अध्ययन सामग्री अब पीएम ई-विद्या के तहत शुरू किए गए टीवी चैनलों और मोबाइल एप पर मुहैया होगी। जिसे बच्चे अपनी सुविधा के अनुसार देख और पढ़ सकते है। चैट के जरिए मिलेंगे सवालों के जवाब पढ़ाई के दौरान छात्रों के मन में उससे जुड़े किसी तरह के सवाल होंगे, तो चैट के जरिए उसके भी जवाब पा सकेंगे। यह सब बिल्कुल मुफ्त होगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी ) की देखरेख में स्कूली बच्चों के लिए शुरू हुई इस मुहिम में प्रत्येक कक्षा के लिए एक समर्पित टीवी चैनल के साथ अब एक मोबाइल एप भी तैयार किया है। जिसको आइओएस और एनड्राइड दोनों तरह के मोबाइल फोन में डाउनलोड किया जा सकता है। इनमें बालवाटिका यानी प्री-प्राइमरी के लिए भी पहली बार एक समर्पित चैनल और मोबाइल एप बनाया गया है। क्या इस एप की खास बात? खासबात यह इससे जुड़ी अध्ययन सामग्री को तैयार करने या छात्रों की मदद के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अलग-अलग विषयों के देश के श्रेष्ठ शिक्षकों को लगाया गया है। एनसीईआरटी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल एप शुरू होने के करीब दो सप्ताह में एक करोड़ छात्र पीएम ई-विद्या एप से जुड़ गए हैं। वैसे तो इसका लक्ष्य स्कूलों में पढ़ने वाले सभी 25 करोड़ छात्रों तक पहुंचने का है। खासकर दूरदराज और पिछले क्षेत्रों के बच्चों तक पहुंचने पर सबसे अधिक फोकस है। एप के जरिए छात्र अपनी कक्षाओं से जुड़ी अध्ययन सामग्री को कभी भी देख सकेंगे। यह 30 भारतीय भाषाओं में तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि पीएम ई-विद्या की सोच वैसे तो कोरोना काल में निकलकर सामने आयी है, जिसमें दो सौ टीवी चैनल शुरू करने की घोषणा की गई थी। हालांकि इसकी शुरूआत पिछले साल यानी दिसंबर 2024 में हो पायी। अब इसमें नए-नए सुधार किए जा रहे हैं।  इस तरह हुआ है दो सौ टीवी चैनलों का बंटवारा पीएम ई-विद्या के तहत शुरू किए गए दो सौ टीवी चैनलों में से 16 चैनल अकेले एनसीईआरटी के पास है जबकि सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भी पांच-पांच चैनल दिए गए है। मणिपुर में उग्रवाद को देखते हुए उसे दस टीवी चैनल दिए गए है। यह टीवी चैनल 24 घंटे बच्चों को पढ़ाते है। राज्यों के चैनलों पर मुहैया कराई जाने वाली अध्ययन सामग्री पर भी एनसीईआरटी नजर रखता है। जरूरत पड़ने पर या खराब गुणवत्ता पर उन्हें जरूरी निर्देश भी देता है। नीट-जेईई जैसी परीक्षाओं को भी कोचिंग के चंगुल से मुक्त कराने की पहल स्कूली बच्चों को को¨चग संस्कृति से छुटकारा दिलाने की इस पहल से पहले नीट-जेईई जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं को भी कोचिंग के चंगुल के मुक्त कराने की दिशा में केंद्र ने जरूरी कदम उठाए है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का अगुवाई में एक उच्चस्तरीय कमेटी भी गठित की है। जिसे इन परीक्षाओं के पैटर्न को कुछ इस तरह से तैयार करने का सुझाव दिया गया है ताकि बगैर कोचिंग के बच्चे भी इनमें आसानी से चयनित हो सके। कमेटी इसे लेकर एक दौर की बैठक भी कर चुकी है। जिसमें चयनित बच्चों के आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाली इन परीक्षाओं में इससे जुड़े कुछ बदलाव दिख सकते हैं।  

बिहार में युवाओं को खास लाभ: चुनाव से पहले हर माह ₹1000, छात्रवृत्ति भी बढ़ाई गई

नई दिल्ली कौशल दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को देश के युवाओं के लिए योजनाओं-परियोजनाओं के अनावरण की झड़ी लगाई तो चुनावी राज्य बिहार के युवा खास तौर पर सरकार के प्यार में सराबोर होते दिखाई दिए। केंद्र-राज्य सरकार की तमाम योजनाओं का शुभारंभ करते हुए राज्य का अतीत याद दिलाते हुए राजद के शासनकाल को कुशासन बताया और नीतीश कुमार नेतृत्व वाली राजग सरकार की सराहना की। कांग्रेस पर पीएम मोदी का कटाक्ष जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए बिना किसी का नाम लिए विपक्ष पर कटाक्ष किया- ''जरा चोकन्ने रहिए, ये जननायक पद कर्पूरी ठाकुर से ही है। आजकल लोग ये जननायक की भी चोरी करने में लगे हैं और इसलिए बिहार के लोगों से मैं जागृत रहने का आग्रह करूंगा कि हमारे कर्पूरी ठाकुर साहब का ये जनता द्वारा दिया गया सम्मान कोई चोरी न कर जाए।'' पीएम के कटाक्ष को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि तमाम कांग्रेस नेताओं ने अब राहुल को जननायक की उपाधि दे दी है। पीएम मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले ही बिहार की बहनों के रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ा एक बहुत भव्य कार्यक्रम में मुझे शामिल होने का अवसर मिला था। आज बिहार के युवाओं के सशक्तीकरण का ये मेगा प्रोग्राम है। ये दिखाता है कि एनडीए सरकार बिहार के नौजवानों को, महिलाओं को कितनी प्राथमिकता दे रही है। बिहार के लोगों से पीएम मोदी ने कही ये बात आज बिहार के युवाओं के लिए भी इस मंच से अनेक योजनाएं और परियोजनाएं समर्पित हुई हैं। बिहार में नया कौशल विश्वविद्यालय, अन्य विश्वविद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार, नौजवानों के लिए युवा आयोग, हजारों युवाओं को पक्की सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र, ये सब बिहार के युवाओं के बेहतर भविष्य की गारंटी है। उन्होंने दावा किया कि एनडीए की डबल इंजन सरकार लगातार बिहार की शिक्षा संस्थाओं को आधुनिक बनाने में जुटी है। 'आईटीआई पटना में भी इंफ्रास्टक्चर के विस्तार का काम शुरू' उन्होंने कहा कि आईटीआई पटना में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का काम भी शुरू हो चुका है। आज भी बिहार में कई बड़े शिक्षा संस्थानों के आधुनिकीकरण का काम आरंभ हुआ है। एनआइटी पटना के बिहटा कैंपस को भी अब होनहार विद्यार्थियों के लिए खोल दिया गया है। इसके अलावा पटना यूनिवर्सिटी, भूपेंद्र मंडल यूनिवर्सिटी, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, इन सभी संस्थानों में नए एकेडेमिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी गई है। पीएम ने कहा कि अच्छे संस्थानों के साथ-साथ नीतीश सरकार बिहार के नौजवानों की पढ़ाई का खर्च भी कम कर रही है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले एजुकेशन लोन को ब्याजमुक्त कर दिया गया है। ये बिहार सरकार का निर्णय है। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के लिए स्कालरशिप भी 1800 से बढ़ाकर के 3600 रुपये कर दी गई है। पीएम ने राज्य सरकार की मुख्यमंत्री निश्चय स्वयंसहायता भत्ता योजना का भी शुभारंभ किया, जिसमें पांच लाख स्नातकों को दो वर्ष तक प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जाएंगे। आत्मनिर्भर भारत की कार्यशाला हैं आइटीआइ पीएम मोदी ने कहा कि हमारी आइटीआइ इंडस्टि्रयल एजुकेशन के बेहतरीन संस्थान तो हैं ही, ये आत्मनिर्भर भारत की कार्यशाला हैं, इसलिए हमारा फोकस इनकी संख्या बढ़ाने के साथ ही इनको लगातार अपग्रेड करने पर भी है। इंडस्ट्री को आज कैसी स्किल चाहिए, 10 साल बाद किस प्रकार की स्किल लगेगी, इसके लिए आइटीआइ नेटवर्क को तैयार किया जा रहा है। आज 60 हजार करोड़ रुपये की पीएम सेतु योजना की शुरुआत की गई है। 1000 से ज्यादा आइटीआइ को इसके माध्यम से अपग्रेड किया जाएगा। 34 राज्यों के जवाहर नवोदय विद्यालयों और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 1200 स्किल लैब का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ज्ञान और कौशल का देश है। यही बौद्धिक शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है। कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, केंद्रीय मंत्री जुएल ओरांव और राजीव रंजन वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे, जबकि कार्यक्रम की प्रस्तावना कौशल विकास मंत्री जयन्त चौधरी ने रखी। शिक्षा राज्य मंत्री सुकांता मजूमदार भी मंचासीन थे।  

प्रधानमंत्री मोदी ने बैतूल की आईटीआई प्रशिक्षार्थी कु. तावड़े को किया सम्मानित

भोपाल  प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में कौशल एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 4अक्टूबर को आयोजित कौशल दीक्षांत समारोह में मध्यप्रदेश की शासकीय आईटीआई, बैतूल की इलेक्ट्रीशियन ट्रेड की प्रशिक्षार्थी कुमारी त्रिशा तावड़े को आल इंडिया सेंट्रल ज़ोन टू ईयर ट्रेड में टॉप करने पर सम्मानित किया है। कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल ने शासकीय आईटीआई की छात्रा कु.त्रिशा को इस उपलब्धि पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। राज्यमंत्री श्री टेटवाल ने कहा कि यह सफलता प्रदेश में कौशल आधारित शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षकों के समर्पण और युवा प्रतिभाओं की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने बताया कि विभाग की प्राथमिकता है कि प्रशिक्षुओं को तकनीकी दक्षता के साथ जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास, भाषा और संचार कौशल प्रदान करना, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना, उद्योग के अनुरूप प्रशिक्षण देना और विदेशों में रोजगार की संभावनाओं को साकार करना। मध्यप्रदेश के अन्य 09 प्रशिक्षार्थियों ने भी ऑल इंडिया ट्रेड टॉपर के रूप में प्रदेश का नाम रोशन किया जिसमें चंचल सेवारिक कम्प्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, भोपाल, पूजा जाटव ड्रोन तकनीशियन, जबलपुर, श्याम महेश्वरी फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, उज्जैन, अमन गजभिये मेसन, बालाघाट, श्रुति विश्वकर्मा मैकेनिक, ट्रैक्टर, जबलपुर, अरविंद कुमरे मैकेनिक कम्प्यूटर हार्डवेयर, बैतूल, निकिता तायवड़े मैकेनिक कम्प्यूटर हार्डवेयर, बैतूल, अभिजीत सिंह सिसोदिया मिल्क एंड मिल्क प्रोडक्ट टेक्नीशियन, भोपाल और शिवम यादव स्टेनोग्राफर एंड सेक्रेटेरियल असिस्टेंट, खंडवा शामिल है। इन सभी प्रशिक्षार्थियों ने अपने कौशल, परिश्रम और संकल्प से प्रदेश को गौरवान्वित किया। प्रदेश के सभी 280 शासकीय आईटीआई में आज कौशल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया तथा प्रधानमंत्री श्री मोदी के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया। इस अवसर पर आईटीआई स्तर पर सभी ट्रेड्स के टॉपर प्रशिक्षार्थियों को सम्मानित किया गया। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले की शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई की छात्रा कु. त्रिशा तावड़े ने 1200 में से 1187 अंक प्राप्त कर सेंट्रल जोन में प्रथम स्थान हासिल किया और मध्यप्रदेश की एकमात्र प्रशिक्षणार्थी के रूप में राष्ट्रीय मेरिट सूची में नाम दर्ज कर जिले और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। बैतूल के ग्राम भड़ूस की इस संघर्षशील छात्रा के पिता श्री अजय तावड़े बस ड्राइवर हैं और मां श्रीमती सुशीला तावड़े गृहणी हैं। बड़ी बहन कु. एकता तावड़े भी आईटीआई बैतूल की टॉपर रह चुकी हैं और वर्तमान में रेलवे में एप्रेंटिस के रूप में कार्यरत हैं। आईटीआई बैतूल के प्राचार्य ने बताया कि सत्र 2024-25 में मैकेनिक कंप्यूटर हार्डवेयर ट्रेड में छात्र अरविंद कुमरे ने पुरुष वर्ग और छात्रा कु. निकिता तायवड़े ने महिला वर्ग में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप छात्राओं की उन्नति और कौशल प्रशिक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। महिला आईटीआई बैतूल में कौशल विकास विभाग के तहत 'हुनर पहल' कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण एवं कौशल विकास के लिए कम्युनिकेशन स्किल, सॉफ्ट स्किल, इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण सहित हार्टफुलनेस ध्यान, व्यक्तित्व विकास शिविर और हेल्थ क्लब गतिविधियों में योग व कराटे प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आईटीआई बैतूल की छात्राओं को न केवल प्रदेश में बल्कि देश-विदेश में रोजगार पाने के अवसर मिल रहे हैं। पिछले वर्ष 85 से अधिक छात्राएं बेंगलुरु, हैदराबाद और भोपाल की कंपनियों में नौकरी के लिए चयनित हुईं, वहीं इस वर्ष 45 छात्राएं टाटा इलेक्ट्रॉनिक होसुर तमिलनाडु और 9 छात्राएं प्रतिभा सिंटेक्स पीतमपुर जा चुकी हैं।  

माई दंतेश्वरी की धरती से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दी महतारी वंदन की सौगात

महतारी वंदन योजना से छत्तीसगढ़ की बहनें बन रही हैं आत्मनिर्भर : मुख्यमंत्री श्री साय महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त जारी : 65 लाख महिलाओं के बैंक खातों में पहुँचे 606.94 करोड़ रुपये रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के तहत शुरू की गई महतारी वंदन योजना  छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में नई रोशनी लाई है। यह योजना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कदम है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज जगदलपुर में बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार के अवसर पर माई दंतेश्वरी की धरती से राज्य की 64 लाख 94 हजार 768 हितग्राही महिलाओं को महतारी वंदन योजना की 20वीं किस्त के रूप में 606 करोड़ 94 लाख रुपये की राशि अंतरित करते हुए यह बात कही। केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी का सपना है कि हर महिला सशक्त और आत्मनिर्भर बने तथा देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में बराबरी की भागीदारी निभाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस पारदर्शिता और प्रतिबद्धता से इस योजना को लागू किया है, वह पूरे देश के लिए एक आदर्श है। यह योजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव साबित होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की बहनों के जीवन में आत्मविश्वास और सम्मान की नई ऊर्जा का संचार कर रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की ‘मोदी की गारंटी’ के रूप में मिली यह सौगात हमारे प्रदेश की महिलाओं को न केवल आर्थिक सहयोग दे रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज और परिवार में एक नई पहचान भी दिला रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला सशक्त बने और विकास की यात्रा में बराबरी की भागीदार बने। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ सरकार की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महतारी वंदन योजना ने प्रदेश की महिलाओं को न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करने का साधन दिया है, बल्कि उन्हें समाज में आत्मसम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ जीने का अवसर भी प्रदान किया है। उल्लेखनीय है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी पहल कही जाने वाली महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को हुई थी। इस योजना का उद्देश्य 21 वर्ष से अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। अब तक योजना की 19 किस्तों में लाभार्थी महिलाओं को कुल 12376 करोड़ 19 लाख रुपये की राशि दी जा चुकी थी। आज 20वीं किस्त जारी होने के साथ यह आंकड़ा बढ़कर 12983 करोड़ 13 लाख रुपये से अधिक हो गया है।

बिहार की हालत पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, नीतीश कुमार ने बीच में टोक दिया

पटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि बिहार से छात्रों-युवाओं का पलायन राजद शासन काल में शुरू हुआ था। व्यवस्था पटरी से उतर गई थी। नीतीश कुमार की अगुआई वाली राज्य की एनडीए सरकार इसे पटरी पर ले आई है। वे शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से दीक्षा समारोह का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। इसमें उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, ऊर्जा मंत्री विजय कुमार सिन्हा, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार एवं श्रम संसाधन मंत्री संतोष कुमार सिंह शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा पीढ़ी को अंदाजा नहीं होगा कि दो-ढाई दशक पहले बिहार में शिक्षा व्यवस्था किस तरह तबाह थी। न स्कूल खुलते थे और न भर्तियां होती थीं। मजबूरी में लाखों बच्चों को बिहार छोड़कर बनारस, दिल्ली, मुंबई जाना पड़ा। यही पलायन की असली शुरुआत थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जड़ में कीड़ा लगे पेड़ों को जीवित करना पराक्रम का काम है। राजद शासन काल में राज्य की हालत जड़ में कीड़ा लगे पेड़ जैसी थी। सौभाग्य से बिहार के लोगों ने नीतीश कुमार को सरकार का दायित्व सौंपा। एनडीए की पूरी टीम मिलकर बिगड़ी हुई व्यवस्थाओं को फिर पटरी पर लाई। डबल इंजन सरकार बिहार के शिक्षा संस्थाओं को आधुनिक बनाने में जुटी है। राजद-कांग्रेस के शासनकाल की तुलना में बिहार का शिक्षा बजट कई गुणा बढ़ा है। करीब-करीब हर गांव-टोले में एक स्कूल है। इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ी है। हाल में ही केंद्र सरकार ने बिहार के 19 जिलों के लिए केंद्रीय विद्यालय स्वीकृत किए हैं। एक समय था, जब बिहार में स्पोर्ट्स से जुड़ा इंटरनेशनल लेवल का इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं था। आज बिहार में स्पोर्ट्स के नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट्स हो रहे हैं।आइआइटी पटना में इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के अलावा आज भी बिहार में कई बड़े शिक्षा संस्थानों के आधुनिकीकरण का काम आरंभ हुआ है। एनआइटी पटना के बिहटा कैंपस को भी विद्यार्थियों के लिए खोल दिया गया है। इसके अलावा, पटना यूनिवर्सिटी, भूपेंद्र मंडल यूनिवर्सिटी, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा और नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, इन सभी संस्थानों में नए एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी गई है। बिहार में नई स्किल ट्रेनिंग यूनिवर्सिटी, अन्य यूनिवर्सिटीज में सुविधाओं का विस्तार, नौजवानों के लिए युवा आयोग, हजारों युवाओं को पक्की सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र, ये सब बिहार के युवाओं के बेहतर भविष्य की गारंटी है। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड वाले एजुकेशन लोन को ब्याज मुक्त कर दिया गया है। स्कालरशिप की राशि 1800 से बढ़ाकर के 3600 कर दी गई है। बिहार सरकार ने बीते दो दशकों में 50 लाख नौजवानों को बिहार में रोजगार से जोड़ा है। करीब 10 लाख पक्की सरकारी नौकरियां दी गई हैं। पिछले दो वर्षों में ही ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। राज्य सरकार ने जितने रोजगार 20 साल में बनाए, आने वाले पांच साल में उससे दोगुने रोजगार निर्माण का लक्ष्य है। बिहार के नौजवान को राज्य में ही नौकरी-रोजगार देने का संकल्प।