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जनता को राहत: सरकार ने 12% टैक्स स्लैब घटाकर 5% किया, 99% वस्तुएं होंगी सस्ती

चेन्नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार ने 12 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 99 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इससे लोगों पर कर का बोझ कम होगा। ट्रेड एडं इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के ज्वाइंट कॉन्क्लेव में लोगों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार ने जीएसटी सुधार के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को चार (5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत) से घटाकर दो (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) कर दिया गया है।" वित्त मंत्री ने आगे कहा, "जब लोगों को लगा कि सरकार ज्यादा टैक्स लगा रही है तो प्रधानमंत्री मोदी ने टैक्स के बोझ को घटाने के लिए कदम उठाए। जीएसटी में कटौती का हमारे 140 करोड़ नागरिकों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री दिवाली से पहले देश को यह छूट देना चाहते थे, लेकिन हमें नवरात्रि से पहले ही इसकी घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है। यह सभी भारतीयों की जीत है।" वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर कर को घटाकर 5 प्रतिशत या शून्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने बताया कि 2017 में केवल 65 लाख लोग की जीएसटी का भुगतान कर रहे थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 1.5 करोड़ पर पहुंच गई है। साथ ही जीएसटी कलेक्शन बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है, जो कि 2018 में 7.18 लाख करोड़ रुपए था। जीएसटी में कटौती का श्रेय राज्यों के साथ साझा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के मंत्री जीएसटी परिषद की शुरुआत से ही इसका हिस्सा रहे हैं, और यह निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है। इस सफलता में राज्य सरकारों की भी भूमिका है। हमने 350 से ज्यादा वस्तुओं पर कर कम किया है और कर ढांचे को केवल दो स्लैब तक सीमित कर दिया है। नए जीएसटी सुधार 22 सितंबर से लागू होंगे। नए जीएसटी ढांचे में सरकार ने 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो स्लैब रखे हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर 40 प्रतिशत का अलग से टैक्स लगाया जाएगा।

GST कटौती ने इस कार को किया किफायती, त्योहारों पर ग्राहकों को मिलेगा बड़ा ऑफर

मुंबई होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड (HCIL) की लग्जरी सिटी सेडान को 22 सितंबर से खरीदने सस्ता हो जाएगा। दरअसल, नए GST स्लैब का असर इस कार की कीमत पर भी देखने को मिलेगा। ऐसे में कंपनी ने बताया कि इस कार पर ग्राहकों का 57,500 रुपए के टैक्स की बचत होगी। इतना ही नहीं, कंपनी इस कार पर इस महीने 1.07 लाख रुपए के बेनिफिट भी दे रही है। यानी इस सेडान को खरीदने पर कुल मिलाकर 1.64 लाख रुपए तक का फायदा मिल जाएगा। होंडा सिटी में e:HEV के साथ SV, V, VX और ZX वैरिएंट आते हैं। इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 12.38 लाख रुपए है। भारत में इसका मुकाबला स्कोडा स्लाविया, हुंडई वरना और फॉक्सवैगन वर्टूस से होता है। होंडा सिटी का इंजन, फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस होंडा सिटी में 1.5-लीटर का पेट्रोल इंजन दिया गया है. जो 121bhp की पावर और 145Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। कार के इंजन को 6-स्पीड मैनुअल और 7-स्टेप सीबीटी गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। कंपनी 1.5-लीटर ऑटोमेटिक वैरिएंट में 17.8 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज देने का दावा करती है। जबकि 1.5-लीटर CVT वैरिएंट 18.4 किमी प्रति लीटर तक माइलेज देता है। वही, हाइब्रिड मॉडल का माइलेज 26.5Km/l तक है। होंडा सिटी में वायरलेस एंड्रॉइड ऑटो और एपल कारप्ले के साथ 8-इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, लैदर अपहोल्स्ट्री, रेन-सेंसिंग वाइपर, वायरलैस फोन चार्जर, क्रूज कंट्रोल, सनरूफ और एम्बिएंट लाइटिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं।सेफ्टी के लिए 6 एयरबैग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल, रियर व्यू कैमरा, ABS के साथ EBD और ADAS जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसमें होंडा ADAS सेफ्टी फीचर्स भी ऑफर करती है। छोटी और लग्जरी कारों पर नए GST 2.0 की कंडीशन छोटी पेट्रोल और पेट्रोल हाइब्रिड कारों पर अब 18% GST ही देना होगा। इसी तरह CNG और LPG कारों पर भी यही टैक्स लिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कंडीशन ये तय की गई है कि पेट्रोल और CNG कारों में 1200cc या इससे कम कैपेसिटी वाला इंजन हो। या फिर इन कारों की लंबाई 4 मीटर से ज्यादा ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इसी तरह, डीजल और डीजल हाइब्रिड कारों पर भी अब 28% के बजाय 18% GST लगेगा, लेकिन ये छूट सिर्फ 1500cc पावर तक कैपिसिटी वाली और 4 मीटर तक लंबी कारों को ही मिलेगी। दूसरी तरफ, लग्जरी और मिड साइज कारों के लिए अब 40% टैक्स कर दिया है। सरकार ने इन्हें लग्जरी आइटम मानते हुए 40% GST स्लैब के दायरे में रखा है। 1200cc से बड़ी पेट्रोल कारें और 1500cc से अधिक क्षमता वाली डीजल कारें इस दायरे में आएंगी। ऐसे में यूटीलिटी व्हीकल (UV), स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकल (SUV), मल्टी यूटीलिटी व्हीकल (MUV) और मल्टी पर्पज व्हीकल (MPV) या क्रॉस ओवर यूटीलिटी (XUV) व्हीकल पर 40% GST देना होगा। जिन व्हीकल का ग्राउंड क्लीयरेंस 170mm से अधिक होगा वो भी इसी कैटेगरी में आएंगे। सरकार ने लग्जरी और बड़ी कारों म को 40% कर दिया है। हालांकि, अच्छी खबर ये है कि पुराने GST स्टैब की तुलना में इसे कम किया गया है। जी हां, पहले लग्जरी कारों पर 28% GST और 22% सेस लगता था। इस तरह ग्राहकों को कुल 50% टैक्स देना पड़ता था। अब नए GST स्लैब में इसे घटाकर कुल 40% कर दिया गया है। यानी ग्राहकों को यहां भी 10% टैक्स से छुटकारा दिया गया है। यानी इसमें 28% GST को बढ़ाकर 40% कर दिया गया है, लेकिन सेस को 00% कर दिया है।

GST में छूट का दिखा असर: वाहन बाजार में बुकिंग का उछाल, लेकिन सप्लाई चेन बना रोड़ा

ग्वालियर जीएसटी काउंसिल ने फेस्टिवल सीजन को देखते हुए आम लोगों की जेब पर बड़ा फायदा देने का ऐलान किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, इंश्योरेंस और अन्य रोजमर्रा की चीजों पर जीएसटी दरों में कटौती की गई है, लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट ये हुआ है कि बाजार फिलहाल थम सा गया है। ज्यादातर लोग नई दरों का इंतजार कर रहे हैं, जिससे खरीदारी 70-80 फीसदी तक गिर गई है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में बुकिंग जारी, डिलीवरी रुकी ग्वालियर ऑटोमोबाइल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरिकांत समाधिया ने बताया कि सरकार की ओर से जीएसटी की दरें कम करने के बाद कंपनियां दिमाग लगा रही हैं। कंपनियां सेस का कंपन्सेशन एडजस्ट नहीं करना चाहती, ऐसे में वे स्कीम्स को बंद करने का मन बना रही हैं। जहां तक कारों की खरीदारी की बात है तो फिलहाल सिर्फ वाहनों की बुकिंग हो रही है, खरीदारी 22 सितंबर के बाद होगी। एक छोटी गाड़ी पर 50 हजार तक की बचत होगी। सरकार को 22 सितंबर को ही घोषणा करनी थी इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी केदारनाथ गुप्ता ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में जीएसटी की दरें 28 से कम होकर 18 फीसदी होने वाली हैं। पर सरकार को इसकी घोषणा 22 सितंबर को ही करनी थी, फिलहाल बाजार एकदम से थम सा गया है। यानी खरीदारी 80 फीसदी तक कम हो गई है। लोग अब 22 सितंबर का ही इंतजार कर रहे हैं। एक लाख रुपए के 75 इंच के एलइडी पर 10 हजार और 55 इंच के एलइडी पर करीब 3906 रुपए की बचत होगी। नहीं करा रहे इंश्योरेंस, रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं भर रहे स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। इंश्योरेंस कंसल्टेंट प्रणव कुमार दास ने बताया कि 22 सितंबर तक कोई भी व्यक्ति इंश्योरेंस कराने को तैयार नहीं है। यहां तक कि लोग अपनी रिन्युअल प्रीमियम भी नहीं जमा कर रहे। हम उन्हें समझा रहे हैं कि आपकी पॉलिसी लेप्स हो जाएगी और उसमें रिस्क कवर भी नहीं है। फिर भी लोग मानने को तैयार नहीं हैं और कह रहे हैं कि 16-17 दिनों में कुछ नहीं होगा। इसके साथ ही जिन बीमा कंपनियों ने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए प्रतियोगिताएं निकाली थीं, उन्हें या तो बंद कर दिया गया है या फिर उनकी तारीख बढ़ा दी है। सिर्फ तीन दिन में होगा जीएसटी रजिस्ट्रेशन जीएसटी कॉउंसिल की ओर से किए गए रिफॉर्म्स में जीएसटी करदाताओं के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को भी अब बेहद सरल बना दिया गया है। कॉउंसिल ने महज 3 दिन में ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन देने की बात कही है। इससे व्यापार करने में सुगमता आएगी और विभाग के चक्कर लगाने की कोई जरूरत नहीं होगी। इसमें खास बात यह है कि ये रजिस्ट्रेशन अब बिना वेरिफिकेशन के ही प्रदान कर दिए जाएंगे। इस नई स्कीम से करीब 96 फीसदी करदाताओं को लाभ मिलेगा, जो नया पंजीयन लेते हैं। ये स्कीम एक नवंबर 2025 से चालू होगी। इसके साथ ही जीएसटी के 90 फीसदी रिफंड का रुपया प्रोविजनल आधार पर ही मिल सकेगा। सीए पंकज शर्मा ने बताया कि व्यापार की सुगमता के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना अच्छा कदम है। इससे लंबा समय लेने वाली प्रक्रिया से बचाव होगा।

दिवाली पर किसानों की झोली होगी भारी! GST कटौती और PM KISAN 21वीं किस्त की तैयारी

नई दिल्ली केंद्र की मोदी सरकार ने GST Rate Cut करके किसानों को ही नहीं पूरे देशवासियों को दिवाली का गिफ्ट नवरात्रि में ही दे दिया। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू होंगी। रोजमर्रा की जरूरतों का लगभग हर सामान सस्ता हो गया। कुछ वस्तुओं पर तो 0 जीएसटी लगेगा। ये गिफ्ट देश के हर वर्ग के लोग किसानों से लेकर मिडिल क्लास तक सभी के लिए हैं। लेकिन किसानों को दिवाली पर मोदी सरकार एक और तोहफा दे सकती है। ये तोहफा PM KISAN YOJANA की 21वीं किस्त का हो सकता है। पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे पहले 2 अगस्त को PM Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से 20वीं किस्त जारी की थी। अब किसानों को अगली किस्त का इंतजार है। GST Rate Cut के बाद अब दिवाली पर PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त? कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि किसानों को दिवाली या दिवाली से पहले 21वीं किस्त का तोहफा मिल सकता है। पिछले साल की बात करें तो अक्टूबर 2024 में मोदी सरकार ने 18वीं किस्त जारी की थी। इस बार दिवाली 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है।  ऐसे में संभावना यही है कि इस बार भी अक्टूबर में मोदी सरकार PM Kisan Yojana की 21वीं किस्त जारी कर सकती है। हालांकि, अभी सरकार द्वारा आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बैंक खाते में आएंगे 2-2 हजार? अगर दिवाली से पहले किसानों के खाते में 2-2 हजार रुपये आते हैं तो यह डबल धमाके जैसे होगा। क्योंकि सरकार ने पहले ही जीएसटी की दरों में कटौती कर दी है। 22 सितंबर यानी नवरात्रि के पहले दिन से New GST Rates लागू हो रहे हैं। सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त (21st installment of the PM Kisan Samman Nidhi Yojana) जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इस योजना के तहत, पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलते हैं, जो 2,000 रुपये की तीन किस्तों में विभाजित होते हैं, सीधे उनके बैंक खातों में।  

कब और कैसे हुआ GST सुधार का आगाज़? जानें वित्त मंत्री की बारीक बातें

नई दिल्ली  जीएसटी में व्यापक सुधार रातों-रात नहीं हुआ बल्कि इसकी शुरुआत माल एवं सेवा कर परिषद की पिछले साल दिसंबर में जैसलमेर में हुई बैठक से पहले ही हो गयी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को फोन कर जीएसटी को व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाने और दरों को युक्तिसंगत बनाने को कहा था, जिसके बाद इस पर काम तेजी से आगे बढ़ा। यह बात स्वयं सीतारमण ने बतायी। इसके परिणामस्वरूप सरल जीएसटी प्रणाली का रास्ता साफ हुआ जिसमें कर की दरें कम हैं। इससे एक तरफ जहां कंपनियों के लिए अनुपालन का बोझ कम हुआ है वहीं रोजमर्रा के इस्तेमाल के समेत लगभग 400 वस्तुओं पर कर दरें कम हुई हैं। सीतारमण ने पीटीआई-भाषा को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘वास्तव में जीएसटी में व्यापक सुधारों का काम पहले ही शुरू हो चुका था। राजस्थान के जैसलमेर में हुई पिछली जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही, प्रधानमंत्री ने मुझे फोन करके कहा था,‘एक बार आप जीएसटी को देख लो, व्यवसायों के लिए सुविधाजनक बनाओ और दरों पर इतने सारे भ्रम की स्थिति क्यों है? मुझे लगता है कि नौ महीने पहले हुई जैसलमेर बैठक से पहले की बात है।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर, बजट के दौरान, जब हम आयकर उपायों पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने मुझे (प्रधानमंत्री) याद दिलाया कि ‘आप जीएसटी के ऊपर काम कर रही हैं न।' यह एक चीज थी।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘दूसरा, मंत्री समूह (जीओएम) डेढ़ साल से काम कर रहे थे और मैं उनमें से प्रत्येक की सराहना करती हूं कि उन्होंने रिपोर्ट तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की और उनके सुझाव सामने आए।'' उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया कि अब समय आ गया है कि हम जीएसटी के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा करें, न केवल दरों की, न केवल स्लैब की संख्या की, बल्कि इस दृष्टिकोण से भी देखें कि एक व्यवसाय, लघु या मझोले व्यवसाय के लिए यह कितना और बेहतर होगा'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हमने इन सब बातों पर गौर किया। वस्तुओं के वर्गीकरण को देखा जिससे काफी भ्रम पैदा हो रहा था… फिर, स्वभाविक रूप से दर पर भी गौर किया। एक फरवरी, 2025 से लेकर लगभग 15 मई तक हम इसकी अध्ययन समीक्षा आदि का काम करते रहे।'' सीतारमण ने कहा, ‘‘मई के मध्य में… मैं प्रधानमंत्री के पास गयी, उन्हें जानकारी दी और बताया कि हम कदम उठाने के करीब हैं। यह एक प्रस्ताव का रूप ले सकता है और उनसे समय देने का अनुरोध किया…। उसके बाद उन्होंने कहा कि आप देखिये इसे कैसे जीएसटी परिषद में ले जा सकती हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘फिर मैं टीम के साथ बैठी और तय किया कि यह केंद्र का प्रस्ताव होगा, जो जीओएम को भेजा जाएगा, क्योंकि जीओएम में राज्यों के मंत्री हैं। मैं वहां नहीं हूं। वास्तव में हम चाहते थे कि यह स्पष्ट हो जाए कि हम जीओएम द्वारा किए गए सभी कार्यों का सम्मान करते हैं। लेकिन यहां एक प्रस्ताव विशेष रूप से केंद्र की ओर से आ रहा है, जो परिषद में एक-तिहाई भागीदार है।'' वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘नियमानुसार, हमने मंत्री समूहों को प्रस्ताव दिया और मंत्री समूहों ने उस पर विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच, और उससे भी पहले, जैसलमेर में, वित्त राज्यमंत्री को क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह का चेयरमैन बनाया गया था और वह उस पर विचार कर रहे थे। लेकिन वहां भी, क्षतिपूर्ति उपकर के बाद, अगर वह उसे समाप्त करने का फैसला लेते हैं, तो उन मदों का क्या होगा जो क्षतिपूर्ति उपकर के अंतर्गत आती हैं? अब वे कहां जाएंगी? यह दरों को युक्तिसंगत बनाने का मामला है। इसलिए मंत्रिसमूह ने यह निर्णय लिया कि उपकर और उसे समाप्त करने के संबंध में, उन्हें हर नियम एवं शर्तों पर काम करना होगा। लेकिन इसके अलावा, दरें तय करने के लिए गठित मंत्रियों का समूह दरों को युक्तिसंगत बनाने पर विचार कर रहा था। इसलिए, मंत्रिसमूह के सदस्यों की सहमति से, यह तय किया गया कि उपकर पर काम कर रहे सदस्य भी दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समूह समिति में भाग लेंगे…।'' फिर दरों को युक्तिसंगत बनाने वाली समिति जिसकी शुरुआत वास्तव में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज सोमप्पा बोम्मई से हुई थी और जिसका नेतृत्व बाद में बिहार के उपमुख्यमंत्री ने किया, ने मंत्रिसमूह द्वारा किए गए कार्यों के अलावा, केंद्र द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर भी विचार किया। सीतारमण के अनुसार, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेहतर होगा कि यह पूरा मामला परिषद में ही रखा जाए, बजाय इसके कि वे इस प्रस्ताव पर आगे विचार करें। फिर यह सब परिषद के पास आया और परिषद ने इसे स्वीकार कर लिया। जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह बुधवार को माल एवं सेवा कर के चार स्लैब की जगह दो स्लैब करने का फैसला किया। अब कर की दरें पांच और 18 प्रतिशत होंगी जबकि विलासिता एवं सिगरेट जैसी अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की विशेष दर लागू होगी। सिगरेट, तंबाकू और अन्य संबंधित वस्तुओं को छोड़कर नई कर दरें 22 सितंबर से प्रभावी हो जाएंगी। दरों को युक्तिसंगत बनाये जाने के तहत टेलीविजन एवं एयर कंडीशनर जैसे उपभोक्ता उत्पादों के अलावा खानपान और रोजमर्रा के कई सामान समेत करीब 400 वस्तुओं पर दरें कम की गयी हैं।  

TATA गाड़ियों की कीमतों में बड़ी कटौती, GST छूट के बाद 1.55 लाख तक सस्ता हुआ कार

मुंबई  गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST Reforms) स्लैब में बड़े बदलाव के बाद देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स ने आज आधिकारिक तौर पर अपनी कारों की कीमत में कटौती का ऐलान कर दिया है. टाटा मोटर्स ने अपनी सबसे सस्ती कार टाटा टिएगो से लेकर मशहूर एसयूवी टाटा सफारी तक, सभी वाहनों की कीमत में बदलाव किया है. कारों की कीमत में की गई ये कटौती आगामी 22 सितंबर 2025 से देश भर के डीलरशिप पर पर लागू होगी.  टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने अपने बयान में कहा है कि, "22 सितम्बर 2025 से लागू होने वाली पैसेंजर व्हीकल्स पर GST में कटौती एक प्रगतिशील और समयानुकूल फैसला है. जिससे देश भर में लाखों लोगों के लिए व्यक्तिगत मोबिलिटी और सुलभ हो जाएगी." उन्होंने कहा कि "कंपनी के कस्टमर फर्स्ट सिद्धांत के अनुरूप टाटा मोटर्स इस जीएसटी रिफॉर्म की पूरी भावना और उद्देश्य का सम्मान करती है. कंपनी अपने ग्राहकों को जीएसटी कटौती का पूरा लाभ देगी." शैलेश चंद्रा ने आगे कहा कि "इससे टाटा मोटर्स की लोकप्रिय कारों और एसयूवी रेंज और अधिक किफायती होगी, जिससे पहली बार वाहन खरीदने वाले ग्राहकों को प्रोत्साहन मिलेगा और देशभर में नई पीढ़ी की मोबिलिटी की ओर बदलाव और तेज होगा." किन कारों की कीमत में कितनी हुई कटौती? टाटा के मॉडल कीमतों में कटौती (रुपयों में) टिएगो  75,000 टिगोर 80,000 अल्ट्रोज  1,10,000 पंच 85,000 नेक्सन 1,55,000 कर्व   65,000 हैरियर   1,40,000 सफारी   1,45,000 नोट: कारों की एक्चुअल प्राइसिंग के लिए अपने नजदीकी डीलरशिप से संपर्क करें. फेस्टीव सीजन में मिलेगा लाभ टाटा मोटर्स का यह ऐलान भारत के त्योहारों के सीजन से ठीक पहले आया है. जो परंपरागत रूप से वाहनों की बिक्री का पीक पीरियड माना जाता है. कंपनी ने ग्राहकों को यह सलाह भी दी है कि संभावित बढ़ी हुई मांग को देखते हुए वे समय से पहले ही बुकिंग कर लें. जीएसटी कटौती टाटा मोटर्स की पूरी पैसेंजर व्हीकल रेंज पर लागू होगी. इसमें एंट्री-लेवल हैचबैक Tiago पर ग्राहकों को अधिकतम 75,000 रुपये तक की बचत होगी. इसी तरह Tigor पर अधिकतम 80,000 रुपये और लोकप्रिय कॉम्पैक्ट एसयूवी Punch पर 85,000 रुपये तक की राहत मिलेगी. वहीं सबसे बड़ी कटौती Nexon में देखने को मिली है, जिसके दाम 1.55 लाख रुपये तक घट गए हैं. बता दें कि, हाल ही में हुए जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में यह फैसला लिया गया था कि, छोटी कारें, जिनमें 1200 सीसी तक के पेट्रोल इंजन, 1500 सीसी तक के डीजल इंजन और 4 मीटर से कम लंबाई वाली कारें शामिल हैं, उन पर अब केवल 18% जीएसटी लगेगा, जो पहले 28% था. इससे इस कैटेगरी में आने वाली कारों की कीमत में भारी कटौती हुई है.

महंगाई पर राहत की उम्मीद! SBI रिपोर्ट से सामने आया सबूत

नई दिल्ली  जीएसटी दरों में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे आम घरेलू सामान और सेवाओं पर टैक्स कम होगा. इससे अगले वित्त वर्ष (2025-26) में रिटेल इंफ्लेशन 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक घट सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए जीएसटी नियम लागू होने के बाद देश में महंगाई कम होगी जीएसटी काउंसिल की 56वीं मीटिंग में पुरानी चार स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5%, 12%, 18%, 28%) को हटाकर दो स्तरीय टैक्स स्ट्रक्चर (5% और 18%) को मंजूरी दी गई. साथ ही, कुछ लग्जरी सामान और सेवाओं के लिए 40% की स्पेशल टैक्स दर तय की गई है, जिसके तहत रोजमर्जा की काफी चीजें सस्ती हो गई हैं और कुछ तो टैक्स फ्री ही हो गई हैं. नई दरें कब से लागू होंगी? तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स को छोड़कर नई टैक्स दरें 22 सितंबर 2025 से लागू होंगी. रिपोर्ट कहती है कि 453 सामानों की जीएसटी दर में बदलाव हुआ है. इनमें से 413 सामानों पर टैक्स कम हुआ है, जबकि सिर्फ 40 सामानों पर टैक्स बढ़ा है. करीब 295 जरूरी सामानों पर जीएसटी 12% से घटकर 5% या 0% हो गई है. इससे खासकर खाने-पीने की चीजों पर 60% फायदा ग्राहकों को मिलेगा, जिससे कंज्यूमर वैल्यू इंडेक्स आधारित इंफ्लेशन 0.25 से 0.30% तक कम हो सकती है. रिटेल इंफ्लेशन पर क्या असर होगा? एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा, सेवाओं पर जीएसटी दरों को रेशनाइलज बनाने से अन्य वस्तुओं और सेवाओं पर खुदरा मुद्रास्फीति में 0.40 से 0.45 प्रतिशत की और कमी आएगी. इसमें ग्राहकों को लाभ 50 प्रतिशत मिलने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान रिटेल इंफ्लेशन में 0.65 से 0.75 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. जीएसटी की औसत दर कितनी हुई? जीएसटी काउंसिल के रेट रेशनलाइजेशन से सितंबर 2019 में औसत जीएसटी दर 14.4% से घटकर 11.6% हो गई थी. अब नए बदलावों के बाद ये और कम होकर 9.5% हो सकती है. नए जीएसटी नियमों से जरूरी सामान और सेवाएं सस्ती होंगी, जिससे महंगाई कम होगी और आम लोगों को फायदा होगा.  

अब सिगरेट, तंबाकू और कोल्ड ड्रिंक पर सिर्फ GST नहीं, अतिरिक्त टैक्स भी लागू होगा!

नई दिल्ली  GST रिफॉर्म के तहत तंबाकू, सिगरेट और कोल्‍ड ड्रिंक्‍स जैसे सिन प्रोडक्‍ट्स पर 40 फीसदी जीएसटी लगाया गया है. लेकिन अब इन उत्‍पादों पर और भी ज्‍यादा टैक्‍स लग सकता है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है कि सरकार इन चीजों पर टैक्‍स को और भी अधिक बढ़ा सकती है.  सरकार तंबाकू और सिगरेट जैसे हानिकारक वस्‍तुओं पर टैक्‍स के इम्‍पैक्‍ट को वर्तमान स्‍तर पर बनाए रखने के लिए 40% GST के अलावा, सेस भी लगा सकती है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अध्यक्ष संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि GST के तहत, 40% अधिकतम टैक्‍स लगाया जा सकता है. बाकी टैक्‍स को वर्तमान स्तर पर बनाए रखने के लिए कोई व्यवस्था करेंगे. हालांकि उन्‍होंने उस व्‍यवस्‍था के बारे में विस्‍तार से जानकारी नहीं दी है. उन्होंने बिजनेस टुडे को दिए एक इंटरव्‍यू में आगे कहा कि अगर विधायी संशोधन या विधेयक की आवश्यकता होगी तो उस पर ध्यान दिया जाएगा. लग्‍जरी कार-बाइक पर एक्‍स्‍ट्रा टैक्‍स नहीं उन्‍होंने यह भी स्‍पष्‍ट किया कि लग्‍जरी कारों, लग्‍जरी बाइक और सुपर लग्‍जरी अन्‍य वस्‍तुओं जैसी वस्‍तुओं एक्‍स्ट्रा टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा. उनपर 40 फीसदी का ही टैक्‍स लगेगा.  नए जीएसटी रिफॉर्म के तहत हानिकारक वस्‍तुओं और सुपर लग्‍जरी आइटम्स पर मौजूदा 28% के बजाय 40% टैक्‍स लगेगा. अग्रवाल ने आगे बताया कि हानिकार सबटैक्‍स 28 फीसदी दिसंबर 2025 तक जारी रहने की संभावना है, जबकि पहले यह उम्मीद थी कि यह इस साल 31 अक्टूबर तक यह समाप्त हो जाएगा. 22 सितंबर से लागू करने पर चल रहा काम उन्‍होंने कहा कि CBIC जीएसटी की नई दरों को लागू करने के लिए भी काम कर रहा है, जो 22 सितंबर से लागू होंगी. अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में दो प्रॉसेस चल रही हैं. पहला- हमें आवश्यक नोटिफिकेशन जारी करनी होंगी, और केंद्र के साथ-साथ राज्यों द्वारा भी नोटिफाई किए जाएंगे. हम जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी कर लेंगे. दूसरा- दरों में बदलाव, नया आसान रजिस्‍ट्रेशन प्रॉसेस और रिफंड प्रॉसेस को ध्यान में रखते हुए, हमारी आईटी सिस्‍टम में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं.  उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को भी 22 सितंबर से अपने ERP को नई दरों के साथ अपडेट करना होगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनवॉयसिंग सही ढंग से की जा रही है. 

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक: नवरात्रि में GST रिलीफ, दिवाली से पहले मिला फायदा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 22 सितंबर से लागू होने वाले GST दरों में बड़े कटौती के फैसले को अर्थशास्त्री और राजनीतिक पर्यवेक्षक दोनों ही अहम मान रहे हैं. इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की एक ऐसी पहल बताया जा रहा है जो न सिर्फ उपभोग और सार्वजनिक खर्च को बढ़ावा देगी, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी के लिए बड़ा तोहफा भी साबित होगी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार त्योहारों के मौसम में उपभोक्ता खर्च रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है. जीएसटी कटौती नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर से लागू होगी, जो दिवाली (20 अक्टूबर) से लगभग एक महीने पहले है. इससे उपभोक्ता खरीदारी को टालने की बजाय बढ़ाएंगे. बजट में नए टैक्स सिस्टम के तहत दी गई इनकम टैक्स राहत के बाद यह सरकार की तरफ से आम जनता के लिए इस साल का दूसरा बड़ा तोहफा है. चार राज्‍यों में विधानसभा चुनाव बीजेपी आगामी बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु चुनावों में इस कदम को अपने प्रचार अभियान का अहम हिस्सा बनाने जा रही है. पार्टी इस बात पर जोर देगी कि मोदी सरकार ने आम जनता की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ा है और उनकी क्रय शक्ति को बढ़ाया है. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में जीएसटी दरों के सरलीकरण को दिवाली गिफ्ट बताया था, लेकिन सरकार जानती थी कि अगर ये कटौती दिवाली के ठीक पहले की जाती तो उपभोक्ता खरीदारी को टाल सकते थे. इसलिए इसे समय से पहले लागू करने का फैसला किया गया. आमलोगों को सीधा राहत नई दरों के तहत रोजमर्रा की जरूरत की ज्यादातर वस्तुओं पर जीएसटी को घटाकर या तो 5% कर दिया गया है या शून्य. मेडिकल और जीवन बीमा पॉलिसी पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा. साथ ही जीवन रक्षक दवाओं और अधिकांश दवाओं पर कर दरें कम कर दी गई हैं. इससे आम आदमी को सीधी राहत मिलेगी. UPA पर हमला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार जीएसटी लागू नहीं कर पाई थी क्योंकि राज्यों को केंद्र पर भरोसा नहीं था. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को तय करना होगा कि उसे इस कटौती का समर्थन करना है या विरोध. अगर वे विरोध करते हैं, तो जनता के सामने उनकी असलियत सामने आ जाएगी.’ बीजेपी को उम्मीद है कि कांग्रेस की आलोचना उसे जनता की नजर में ‘एंटी-पब्लिक’ साबित करेगी, जबकि मोदी सरकार का यह कदम चुनावी मैदान में पार्टी के लिए सकारात्मक माहौल बनाएगा.

GST से सरकार की बढ़ी तिजोरी, क्या सुधारों से और होगा फायदा या घटेगा कलेक्शन?

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल की बैठक में अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों को लेकर कई बड़े फैसले किए गए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनके बारे में बताते हुए साफ किया कि अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब 5% और 18% के रहेंगे, जबकि हानिकारक और सुपर लग्जरी आइटम्स के लिए एक स्पेशल 40% का स्लैब होगा. देश में तमाम टैक्सों को खत्म करते हुए 2017 में GST लागू किया गया था और जीएसटी कलेक्शन के जरिए सरकार की कमाई में साल-दर-साल तगड़ा इजाफा देखने को मिला है. बीते 8 साल में कमाई का आंकड़ा तीन गुना हो गया है. हालांकि, अब GST 2.0 के तहत इसमें किए बदलाव से कलेक्शन पर भी असर देखने को मिल सकता है.    2017 में शुरुआत, अब बड़ा बदलाव देश की आजादी के बाद सबसे बड़े टैक्स सुधार के रूप में 1 जुलाई 2017 को जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) को लागू किया गया था. सरकार पुरानी अप्रत्‍यक्ष कर व्‍यवस्‍था की जगह वस्‍तु एवं सेवा कर को लेकर आई और इसके बाद पहले लगने वाले अलग-अलग तरह के तमाम टैक्स खत्म कर दिए गए. इसे संचालित करने के लिए जीएसटी परिषद का गठन किया गया, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री, राज्‍य मंत्री (रेवेन्‍यू) और राज्‍यों के वित्त मंत्रियों को जगह दी गई. शुरुआत से ही जीएसटी को चार भागों में डिवाइड किया गया.       पहला: सीजीएसटी (केंद्रीय माल और सेवा कर)     दूसरा: एसजीएसटी (राज्य माल और सेवा कर)     तीसरा: आईजीएसटी (एकीकृत माल और सेवा कर)     चौथा: यूटीजीएसटी (केंद्र शासित प्रदेश माल और सेवा कर) जीएसटी को अलग-अलग कैटेगरी के सामानों के हिसाब से चार स्लैब में भी बांटा गया, जो 5%, 12%, 18% और 28% तय किए गए थे. अब जीएसटी आठवें साल में पहुंच गया है और इसके साथ ही इसमें नए सुधार करते हुए सरकार ने इसे सिर्फ दो टैक्स स्लैब तक सीमित कर दिया है, जो 5% और 18% के होंगे.   हर साल बढ़ती गई सरकार की कमाई जीएसटी से सरकार की कमाई के बारे में बात करें, तो 1 जुलाई 2017 को लागू होने के बाद से हर साल इसमें जोरदार इजाफा हुआ है. इस साल 2025 में तो जीएसटी कलेक्शन ने सारे रिकॉर्ड तोड़े. शुरुआती साल में इसके जरिए सरकारी खजाने में 7.41 लाख करोड़ रुपये (जुलाई से मार्च तक) आए थे. तो वहीं अगले साल 2018–19 में जीएसटी से कमाई का आंकड़ा 11.77 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं इसकी शुरुआत से अब तक कलेक्शन में तीन गुना से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया गया है और 2021-22 से लेकर 2024-25 तक सिर्फ पांच साल में ही जीएसटी से सरकार की कमाई दोगुनी हो चुकी है और ये 11.37 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 22.08 लाख करोड़ रुपये हो गई है.  2025 में बनाया सबसे बड़ा रिकॉर्ड इस साल 2025 में जीएसटी कलेक्शन ने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़े और सरकार को ताबड़तोड़ कमाई कराई. अप्रैल महीने में अब तक सबसे बड़ा मासिक जीएसटी कलेक्शन हुआ, जो 2.37 लाख करोड़ रुपये रहा.  महीना जीएसटी कलेक्शन जनवरी 2025 1.96 लाख करोड़ रुपये फरवरी 2025 1.84 लाख करोड़ रुपये   मार्च 2025 1.96 लाख करोड़ रुपये   अप्रैल 2025 2.37 लाख करोड़ रुपये मई 2025 2.01 लाख करोड़ रुपये जून 2025 1.85 लाख करोड़ रुपये जुलाई 2025 1.96 लाख करोड़ रुपये अगस्त 2025  1.86 लाख करोड़ रुपये रेवेन्यू में नुकसान की भरपाई की उठी थी मांग जीएसटी रिफॉर्म के चलते सरकार ने करीब 40,000 करोड़ रुपये के सालाना रेवेन्यू नुकसान की आशंका जाहिर की है. मतलब सरकार की कमाई पर इन सुधारों का असर पड़ने वाला है, लेकिन दूसरी ओर देश की आम जनता से लेकर छोटे कारोबारियों और किसानों तक के लिए ये सरकार की ओर से दिवाली से पहले दिया गया बड़ा गिफ्ट है. जीएसटी रिफॉर्म के रेवेन्यू पर पड़ने वाले असर को लेकर बैठक के दौरान विपक्षी राज्यों की ओर से नुकसान की भरपाई के लिए योजना बनाने की मांग उठाई गई थी. हालांकि, बैठक के रिजल्ट आने के बाद पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बात करते हुए कहा कि हमने कहा था कि क्षतिपूर्ति उपकर बढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन केंद्र सहमत नहीं हुआ.  रोजमर्रा के सामानों से कार-बाइक तक होंगी सस्ती  बुधवार 3 सितंबर को नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में नए सुधारों का ऐलान करते हुए सरकार ने रोजमर्रा के सामानों साबुन, तेल, घी, फूड प्रोडक्‍ट्स, डेयरी प्रोडक्ट्स (मक्खन, घी, पनीर, गाढ़ा/पनीर), चॉकलेट और कोको पाउडर, सिलाई मशीन, पास्ता, कॉर्न फ्लेक्स, नूडल्स, बिस्कुट, माल्ट एक्सट्रेक्ट (गैर-कोको) के साथ ही जैम, जेली, मुरब्बा, मेवे/फलों का पेस्ट, सूखे मेवे, मेवे समेत पहले से पैक पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती, रोटी को 5%  स्लैब में डाला गया है.  छोटी कारों, 350 सीसी तक की बाइक्स से लेकर ट्रैक्टर तक पर जीएसटी घटाकर 28 से 18 फीसदी किया गया है और इसका मतलब है कि इनके दाम घटने वाले हैं. इसके अलावा एयर कंडीशनर, डिशवाशर मशीनें, टीवी (एलईडी, एलसीडी), मॉनिटर, प्रोजेक्टर पर लागू 28% जीएसटी को कम करते हुए 18% कर दिया गया है. इंश्योरेंस प्रीमियम और 33 जरूरी दवाओं के साथ ही शिक्षा से संबंधित सामानों को जीएसटी फ्री यानी जीरो जीएसटी में शामिल किया गया है. जीएसटी बदलाव के तहत करीब 90% हाउसहोल्ड आइटम्स के दाम घटेंगे और नवरात्रि के पहले दिन यानी 22 सितंबर 2025 से ये लाभ जनता को मिलने लगेंगे. हालांकि, तंबाकू प्रोडक्ट्स, कॉर्बोनेटेड-कैपिनेटेड ड्रिंक्स, फास्ट फूड और सुपर लग्जरी आइटम्स जैसे प्राइवेट जेट को 40% स्लैब में रखा गया है.