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बर्नस्टीन रिपोर्ट: जीएसटी बदलाव से जीडीपी पर असर बहुत कम, सिर्फ 0.05%

नई दिल्ली ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा घोषित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में व्यापक बदलावों का सार्वजनिक वित्त पर मामूली प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि केंद्र पर केवल 18,000 करोड़ रुपए का राजकोषीय बोझ पड़ने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वित्त वर्ष 26 के लिए भारत के अनुमानित जीडीपी का केवल 0.05 प्रतिशत है। 3 सितंबर को, सरकार ने प्रमुख जीएसटी सुधारों की घोषणा की, जिसमें कर स्लैब की संख्या कम की गई और कई वस्तुओं पर दरें कम की गईं। दैनिक उपयोग की एफएमसीजी वस्तुओं से लेकर कारों, घरेलू वस्तुओं और बीमा तक, अधिकांश उत्पाद 22 सितंबर से सस्ते होने वाले हैं। विश्लेषकों का मानना ​​है कि इन उपायों से मांग बढ़ेगी, कर अनुपालन में सुधार होगा और उपभोग-आधारित विकास को मजबूती मिलेगी। बर्नस्टीन के लेटेस्ट इंडिया स्ट्रेटजी नोट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि इन सुधारों से राजस्व में अल्पकालिक कमी आएगी, लेकिन अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव सीमित रहेगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि 12 प्रतिशत स्लैब को 5 प्रतिशत तक तर्कसंगत बनाने से 79,600 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होगा और 28 प्रतिशत स्लैब को समाप्त करने से 1.12 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान होगा। 12 से 18 प्रतिशत स्लैब में बदलाव से 700 करोड़ रुपए और कुछ वस्तुओं को 28 से 40 प्रतिशत तक स्थानांतरित करने से 15,000 करोड़ रुपए के लाभ से इन नुकसानों की आंशिक भरपाई हो पाएगी। इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए, केंद्र और राज्यों को संयुक्त रूप से लगभग 1.57 लाख करोड़ रुपए का राजस्व घाटा होने का अनुमान है। केंद्र का हिस्सा लगभग 74,000 करोड़ रुपए है। बर्नस्टीन ने राजस्व की कमी को संतुलित करने के लिए पूंजीगत व्यय में 5 प्रतिशत की कटौती का भी अनुमान लगाया है, जो 56,000 करोड़ रुपए है। परिणामस्वरूप, केंद्र पर वास्तविक राजकोषीय बोझ घटकर 18,000 करोड़ रुपए रह गया है। इस बीच, एचएसबीसी ने एक दूसरी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 24 के उपभोग आधार के आधार पर कर कटौती से सकल राजस्व हानि लगभग 10.8 अरब डॉलर हो सकती है। क्षतिपूर्ति उपकर से नए 40 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में पुनर्निर्देशित राजस्व इस हानि के लगभग 5.2 अरब डॉलर की भरपाई कर सकता है, जिससे 5.6 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 0.16 प्रतिशत की शुद्ध कमी रह जाएगी। वित्त वर्ष 26 के आधार पर इसे जोड़ते हुए, एचएसबीसी का अनुमान है कि राजस्व हानि 570 अरब रुपए होगी, जो एक वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के केवल 0.16 प्रतिशत के बराबर होगी। यह देखते हुए कि वित्त वर्ष का केवल आधा समय बचा है, वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.1 प्रतिशत होगा। दोनों रिपोर्टों से पता चलता है कि जीएसटी सुधारों से सरकार को कुछ राजस्व हानि होगी, लेकिन उच्च उपभोग और मजबूत अनुपालन के दीर्घकालिक लाभ अल्पकालिक राजकोषीय नुकसान से अधिक होंगे।

अब जेब पर पड़ेगा डबल बोझ: पान मसाला-सिगरेट पर 40% स्पेशल टैक्स, जानें किन चीजों पर असर

नईदिल्ली   जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में बड़ा टैक्स सुधार किया गया है। अब GST स्लैब को सिर्फ दो हिस्सों में बांट दिया गया है – 5% और 18%, यानी पहले के 12% और 28% स्लैब को हटा दिया गया है और उनमें शामिल वस्तुओं को इन दो नए स्लैब्स में समायोजित किया गया है। लेकिन इस बीच कुछ खास और हानिकारक वस्तुओं पर अब सीधा 40% स्पेशल जीएसटी लगाया जाएगा।  किस चीज पर लगेगा 40% 'Special GST'? जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि कुछ हाई रिस्क या हाई लग्जरी कैटेगरी की वस्तुओं पर अब अलग से कोई सेस या उपकर नहीं लगेगा, बल्कि सीधे 40% जीएसटी ही लिया जाएगा। ये एक तरह से "सिन टैक्स" की श्रेणी में आएगा — यानी ऐसी चीजें जो सेहत या समाज के लिए हानिकारक मानी जाती हैं। 40% टैक्स वाली चीजों की पूरी लिस्ट:     पान मसाला          सिगरेट     गुटखा     चबाने वाला तंबाकू (खैनी, ज़र्दा आदि)     तंबाकू उत्पादों की री-प्रोसेसिंग यूनिट्स में बनने वाले उत्पाद     ऐडेड शुगर वाले और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (Soft Drinks, Energy Drinks आदि)     फास्ट फूड चेन के कुछ हाई-प्रोसेस्ड आइटम्स (बर्गर, नूडल्स, आदि)     सुपर लग्जरी आइटम्स     पर्सनल यूज़ वाले एयरक्राफ्ट (Private Jets, Helicopters)     हाई-एंड लग्जरी कारें (जैसे – स्पोर्ट्स कार, प्रीमियम SUVs) 22 सितंबर से होंगे लागू मोदी सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए अब सिर्फ दो मुख्य टैक्स स्लैब रखने का फैसला किया है। जीएसटी परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि अब सिर्फ 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के दो ही स्लैब लागू होंगे। ये सभी घोषणाएं 22 सितंबर से पूरे देश में लागू हो जाएगी। 12% और 28% वाले स्लैब खत्म इस फैसले के बाद, पहले से चले आ रहे 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत वाले स्लैब को खत्म कर दिया गया है। इससे कई वस्तुओं की कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस बदलाव से जीएसटी प्रणाली और भी सरल हो जाएगी और आम जनता को इसका लाभ मिलेगा। लग्जरी और तंबाकू उत्पादों पर 40% GST हालांकि, लग्जरी सामान और तंबाकू उत्पादों पर लगने वाली जीएसटी दर में बढ़ोतरी की गई है। इन उत्पादों पर अब 40 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। सरकार का यह कदम लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं की खपत को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है।  22 सितंबर से क्या-क्या होगा सस्ता? (GST दरें घटाई गईं) वस्तु/सेवा     नई GST दर दूध, रोटी, पनीर, घी     5% बिस्किट, सॉस, पास्ता     5% सूखे मेवे, पिज़्जा ब्रेड     5% ऑक्सीजन, ग्लूकोमीटर, मेडिकल टेस्ट किट     0% (टैक्स फ्री) जीवनरक्षक दवाएं, पट्टियां     5% साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट     5% मोमबत्ती, खिलौने, फर्नीचर     5% सोलर और विंड एनर्जी डिवाइसेस     5% बायोगैस उपकरण     5% टेक्सटाइल्स, टीवी, सीमेंट     5% या 18% (आइटम के अनुसार) छोटी कारें, बाइक्स (कम्यूटर व्हीकल)     18% तंबाकू और सिगरेट जैसी कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत के विशेष स्लैब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिन भर चली जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय के बारे में मीडिया को जानकारी देते हुए कहा, ‘‘सभी फैसले सर्वसम्मति से किए गए और किसी भी राज्य से कोई असहमति नहीं थी।'' परिषद ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को मौजूदा चार स्लैब… पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत से दो दरों… पांच और 18 प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी। महंगी कार, तंबाकू और सिगरेट जैसी कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 40 प्रतिशत के विशेष स्लैब का प्रस्ताव किया गया है।  वस्तु नई टैक्स दर पान मसाला, सिगरेट, गुटखा, तंबाकू 40% एडेड शुगर वाले कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स 40% फास्ट फूड चेन के कुछ प्रोसेस्ड आइटम्स 40% प्राइवेट जेट्स, हेलिकॉप्टर (पर्सनल यूज) 40% लग्जरी कारें, बड़ी SUV कारें 40% मक्खन और घी से लेकर सूखे मेवे तक ये वस्तुएं होंगी सस्ती दैनिक उपयोग की खाद्य वस्तुओं पर कर की दर शून्य होगी, जबकि मक्खन और घी से लेकर सूखे मेवे, कंडेंस्ड दूध, सॉसेज और मांस, चीनी से बनी कन्फेक्शनरी, जैम और फलों की जेली, नारियल पानी, नमकीन, 20 लीटर की बोतल में पैक पेयजल, फलों का गूदा या रस, दूध युक्त पेय पदार्थ, आइसक्रीम, पेस्ट्री और बिस्कुट, कॉर्नफ्लेक्स और अनाज तथ चीनी से बनी मिठाइयों पर कर की दर को मौजूदा के 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत किया जाएगा। सभी प्रकार की चपाती और पराठे पर कर की दर शून्य होगी। इस पर फिलहाल पांच प्रतिशत जीएसटी लगता है। ‘टूथ पाउडर', दूध की बोतलें, रसोई के बर्तन, छाते, बर्तन, साइकिल, बांस के फर्नीचर और कंघी जैसी उपभोक्ता वस्तुओं पर कर की दर 12 प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत होगी। शैम्पू, टैल्कम पाउडर, टूथपेस्ट, टूथब्रश, फेस पाउडर, साबुन और हेयर ऑयल पर कर की दरें 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई हैं।  इन वाहनों पर लगेगा 40 प्रतिशत की दर से टैक्स सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद ने व्यक्तिगत जीवन बीमा और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के प्रीमियम भुगतान पर जीएसटी को हटाने का फैसला किया है। इससे लोगों के लिए बीमा पॉलिसी लेना सस्ता हो पाएगा। जीएसटी परिषद ने सीमेंट पर कर की दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा 1,200 सीसी तक के पेट्रोल वाहनों और 1,500 सीसी तक के डीजल वाहनों (4,000 मिलीमीटर तक लंबाई) पर भी जीएसटी दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि 1,200 सीसी से अधिक क्षमता वाले पेट्रोल वाहनों और 1,500 सीसी से बड़े डीजल वाहनों पर अब 40 प्रतिशत की दर से कर लगेगा।  कंडीशनर, डिशवॉशर और टीवी समेत इन इलेक्ट्रॉनिक चीजें भी होंगी सस्ती  सीतारमण ने कहा कि 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें और एयर कंडीशनर, डिशवॉशर एवं टीवी जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर भी कर घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली मोटरसाइकिल, याट, निजी उपयोग वाले विमान और रेसिंग कारों पर 40 प्रतिशत की विशेष दर से जीएसटी लगेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर पहले की तरह पांच प्रतिशत ही बनी रहेगी।  राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने … Read more

अब कम दाम में AC और TV! GST कटौती से जानें कितने हजार रुपये होंगे बचत

नई दिल्ली दीवाली, नवरात्र या कहें कि फेस्टिव सीजन से पहले केंद्र सरकार की तरफ से एक बड़ा तोहफा दिया जा रहा है. आने वाले दिनों में अगर आप कंज्यूमर इलेक्ट्रोनिक्स से जुड़ा कोई सामान खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो आपको बड़ी सेविंग होगी. ये सेविंग न्यू GST रेट्स के लागू होने के बाद होगी.  बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित GST Council की 56वीं बैठक हुई. इस मीटिंग के दौरान बड़े फैसले लिए और GST Tax Slab में बदलाव किए गए. इसके बाद स्मार्ट टीवी, एयर कंडीशनर (AC), इलेक्ट्रोनिक डिशवॉशर पर लगने वाले GST Tax Slab में बदलाव कर दिया है, जो 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे. अभी तक इन पर 28% टैक्स लगता था अब 18% का टैक्स लगेगा.   Air Conditioners और TV आने वाले दिनो में सस्ते होंगे नए बदलाव के तहत Air Conditioners पर अब 18 परसेंट का GST लगेगा, जो अब तक 28 परसेंट था. टेलीविजन को अब 18% GST Tax में कर दिया है, ये अभी तक 28 परसेंट के स्लैब में थीं.  TV पर होगी इतने हजार रुपये की सेविंग  मान लीजिए TV का बेस प्राइस = 10,000 रुपये पुरानी कीमत (28% GST) = 10,000 × 1.28 = 12,800 रुपये नई कीमत (18% GST) = 10,000 × 1.18 = 11,800 रुपये  इतने रुपये की होगी बचत  = 1,000 रुपये   32 इंच से बड़े एलईडी और एलसीडी टीवी पर अब जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. जीएसटी की दरों में 10 फीसदी की कटौती से 35000 रुपये में अभी 35900 रुपये में आना वाला टीवी करीब तीन हजार रुपये सस्‍ता हो जाएगा. जीएसटी के नए रेट 22 सितंबर से लागू होंगे. यानी इस बार की त्‍योहारी शॉपिंग आपकी सस्‍ती होने वाली है. टीवी कैसे सस्‍ता होगा, आइये जानते हैं. अभी फ्लिपकार्ट पर एक 40 इंच का स्‍मार्ट एंड्रॉयड टीवी 35990 रुपये में मिल रहा है. अभी क्‍योंकि 32 इंच से बड़े टीवी पर जीएसटी 28 फीसदी है, तो यह रेट इतना है. टीवी का बेस प्राइस जीएसटी हटाने के बाद ₹28,117.19 होता है. इस बेस प्राइस पर 28 फीसदी जीएसटी ₹7,872.81 रुपये बनती है और इस तरह टीवी का रेट 35990 रुपये हो जाता है. अब जीएसटी दर 18 फीसदी होने से टीवी के बेस प्राइस ₹28,117.19 पर जीएसटी के रूप में आपको 5,061.06 रुपये कर के रूप में देने होंगे और टीवी की कुल कीमत 33,178 रुपये हो जाएगी. इस तरह आपको सीधे-सीधे 2812 रुपये की बचत होगी. 41,990 वाले एसी पर बचेंगे 3,281 रुपये अमेजन पर फिलहाल वोल्‍टास 1.5 टन 5 स्‍टार, इनवर्टर स्प्लिट एसी 41990 रुपये में मिल रहा है. क्‍योंकि अभी इस पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है तो इसका बेस प्राइस ₹32,805 रुपये है. 28 फीसदी के हिसाब से 9,185 रुपये जीएसटी के रूप में लगते हैं. इसी बेस प्राइस पर 18 फीसदी जीएसटी लगने से इस एसी कीमत घटकर 38,709 रुपये हो जाएगी. यानी यही एसी आपको 3,281 रुपये की बचत हो जाएगी. टीवी भी हो जाएगा सस्‍ता अभी फ्लिपकार्ट पर एक 40 इंच का स्‍मार्ट एंड्रॉयड टीवी 35990 रुपये में मिल रहा है. अभी क्‍योंकि 32 इंच से बड़े टीवी पर जीएसटी 28 फीसदी है, तो यह रेट इतना है. टीवी का बेस प्राइस जीएसटी हटाने के बाद ₹28,117.19 होता है. इस बेस प्राइस पर 28 फीसदी जीएसटी ₹7,872.81 रुपये बनती है और इस तरह टीवी का रेट 35990 रुपये हो जाता है. अब जीएसटी दर 18 फीसदी होने से टीवी के बेस प्राइस ₹28,117.19 पर जीएसटी के रूप में आपको 5,061.06 रुपये कर के रूप में देने होंगे और टीवी की कुल कीमत 33,178 रुपये हो जाएगी. इस तरह आपको सीधे-सीधे 2812 रुपये की बचत होगी. कितने सस्ते होंगे स्मार्ट टीवी? फिलहाल 43 इंच से बड़े स्मार्ट टीवी पर अभी 28% टैक्स देना पड़ता है लेकिन अगर यह दर भी 18% हो गई तो इनके दामों में भी एसी की तरह ही गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसा भी अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे टीवी का प्राइस लगभग 2,000 से लेकर 3,000 रुपये तक कम हो सकता है। हालांकि, कीमत में असली कटौती हर प्रोडक्ट के बेस प्राइस पर डिपेंड करेगी। कितने सस्ते होंगे फ्रिज और वॉशिंग मशीन? वहीं, इस वक्त रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन 18% जीएसटी स्लैब के दायरे में आते हैं। यानी अगर इन्हें भी 5% स्लैब में शामिल कर दिया जाता है तो ग्राहकों को इनकी कीमतों में भी अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि इन प्रोडक्ट्स की कीमत तभी कम होगी जब टैक्स रेट घटाया जाएगा। हेयर ऑयल, साबुन, साइकिल भी हुई सस्‍ती हेयर ऑयल, टॉयलेट सोप, साबुन की टिकिया, शैंपू, टूथब्रश, टूथपेस्ट, साइकिल, टेबलवेयर, किचनवेयर और अन्य घरेलू सामान पर भी जीएसटी घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है. दूध, ब्रेड, छेना और पनीर पर जीएसटी 5 फीसदी से घटाकर 0 कर दिया गया है. सभी भारतीय रोटियों पर जीएसटी 0 होगा यानी रोटी हो या पराठा या जो भी हो, उन सभी पर जीएसटी 0 होगा. खाद्य पदार्थ नमकीन, बुज्जिया, सॉस, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफी, संरक्षित मांस, कॉर्नफ्लेक्स, मक्खन, घी, ये सभी 5 चीजें जीएसटी के दायरे में हैं. 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी जीएसटी में एयर कंडीशनिंग मशीनें, डिशवॉशिंग मशीनें, छोटी कारें, मोटरसाइकिलें शामिल हैं.   नए GST Tax के बाद AC पर कितनी होगी बचत?  Air Conditioners पर लगने वाले GST टैक्स की कीमतों की बात करें तो 28 परसेंट की जगह पर 18 परसेंट होने के बाद कई हजार रुपये की सेविंग होगी. इसको हमने नीचे उदाहरण से समझाया है.   मान लीजिए AC की बेस प्राइस = 30,000 रुपये पुरानी कीमत (28% GST) = 30,000 × 1.28 = 38,400 रुपये नई कीमत (18% GST) = 30,000 × 1.18 = 35,400 रुपये  इतने रुपये की होगी बचत  = 3,000 रुपये  1 Ton से 2 Ton AC तक इतने हजार की होगी बचत (अनुमानित कीमत) AC कैटेगरी     अनुमानित बेस प्राइस (Rs) पुराना GST (28%)  न्यू GST Tax (18%) कस्टमर की बचत (Rs) 1 Ton AC 30,000 38,400 35,400 3,000 1.5 Ton AC 40,000 51,200 47,200 4,000 2 Ton AC 50,000 64,000 59,000 5,000 डिशवॉशिंग मशीन भी होंगी सस्ती  डिशवॉशिंग मशीन का इस्तेमाल गंदे बर्तन … Read more

घर से दुकान तक असर: नई GST दरों की पूरी लिस्ट, कौन-सा सामान किस स्लैब में

नई दिल्ली सरकार ने देश के आम आदमी को प्री-दिवाली गिफ्ट दे दिया है. बुधवार को नई दिल्ली में हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इसके तहत टैक्स स्लैब को कम किया गया, जिससे तमाम सामानों पर लगने वाले टैक्स का रेट कम हो जाएगा. नए रेट 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे. नए जीएसटी सुधार के तहत 100 से ज्‍यादा चीजों के दाम घटने वाले हैं. इसमें जरूरी वस्तुओं, रोजमर्रा की चीजों, एग्रीकल्‍चर प्रोडक्‍ट्स और हेल्थ प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स रेट में कमी की गई है.   जीएसटी पर देशवासियो को जिसका इंतजार था, सरकार ने वो मुराद पूरी कर दी. दिवाली से पहले सरकार ने आम लोगों को बड़ा तोहफा दिया है. जीएसटी कम हो गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर की दरों में व्यापक कटौती की घोषणा की. जीएसटी में इस बदलाव के तहत अधिकतर वस्तुएं 5% और 18% के स्लैब में आ गई हैं. कई वस्तुओं पर अब 0% या शून्य कर लगेगा और कुछ को 40% ‘सिन टैक्स यानी ‘पाप कर’ स्लैब में जोड़ दिया गया है. जीएसटी का नया स्लैब 22 सितंबर से लागू होगा. कई रोजमर्रा की घरेलू वस्तुओं पर जीएसटी में कटौती से आम आदमी और मध्यम वर्ग के लिए खुश होने की बड़ी वजह है. जीएसटी दरों में कटौती के बाद क्या सस्ता हुआ है? किन वस्तुओं पर अब अधिक टैक्स लगेगा और कौन सी वस्तुएं अब महंगी होंगी? चलिए देखते हैं पूरी लिस्ट. जीएसटी में बदलाव के बाद क्या-क्या सस्ता   सामान पुराना जीएसटी रेट नया जीएसटी रेट दूध, पनीर, छेना 5 फीसदी 0 फीसदी बटर, खोआ, घी, चीज और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स 12 फीसदी 5 फीसदी 33 जीवन रक्षक दवा- ओनासेमनोजेन अबेपार्वोवेक, एस्किमिनिब, मेपोलिज़ुमाब, पेगीलेटेड लिपोसोमल इरिनोटेकन, डाराटुमुमाब, डाराटुमुमैब उपचर्म, टेक्लिस्टामैब, अमिवंतामब, एलेक्टिनिब, रिस्डिप्लाम, ओबिनुटुज़ुमैब, पोलाटुज़ुमैब वेडोटिन, एंट्रेक्टिनिब, एटेजोलिज़ुमाब, स्पेसोलिमैब, वेलाग्लूसेरेज अल्फा, एगल्सिडेस अल्फा, रुरियोक्टोकॉग अल्फा पेगोल, इडुरसल्फेटेज, एल्ग्लूकोसिडेस अल्फा, लैरोनिडेस, ओलिपुडेस अल्फा, टेपोटिनिब, एवेलुमैब, एमिसिज़ुमाब, बेलुमोसुडिल, मिग्लस्टैट, वेलमनसे अल्फा, एलिरोक्यूमैब, एवोलोकुमाब, सिस्टामाइन बिटार्ट्रेट, सीआई-अवरोधक इंजेक्शन और इंक्लिसिरन 12 फीसदी 0 फीसदी पर्सनल हेल्थ इश्योरेंस और जीवन बीमा (एलआईसी) 12 फीसदी 0 फीसदी खाखरा, चपाती या रोटी, ब्रेड 5 फीसदी 0 फीसदी रबड़, मैप, चार्ट और ग्लोब, पेंसिल, शार्पनर, पेस्टल, एक्सरसाइज बुक और नोटबुक 5 फीसदी 0 फीसदी 15 हॉर्स पावर तक की क्षमता के निश्चित गति वाले डीजल इंजन, हैंड पंप, ड्रिप सिंचाई उपकरण और स्प्रिंकलर के लिए नोजल, मिट्टी तैयार करने के लिए कृषि और बागवानी मशीनरी, कटाई और थ्रेसिंग मशीनरी, कंपोस्टिंग मशीन और ट्रैक्टर (1800 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले सेमी-ट्रेलर के लिए ट्रैक्टर को छोड़कर). 12 फीसदी 5 फीसदी सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड और अमोनिया सहित प्रमुख उर्वरक कच्चे माल 18 फीसदी 5 फीसदी नीम-आधारित कीटनाशक सहित विभिन्न जैव कीटनाशक 12 फसदी 5 फीसदी ट्रैक्टर के पिछले टायर और ट्यूब, ट्रैक्टरों के लिए 250 सीसी से अधिक सिलेंडर क्षमता वाले कृषि डीजल इंजन, ट्रैक्टर के लिए हाइड्रोलिक पंप और विभिन्न ट्रैक्टर कलपुर्जों 18 फीसदी 5 फीसदी 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें और एयर कंडीशनर, डिशवॉशर और टीवी जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 28 फीसदी 18 फीसदी एसी यानी एयर कंडीशनिंग मशीनें, टीवी, डिशवॉशिंग मशीनें, छोटी कारें, मोटरसाइकिल 28 फीसदी 18 फीसदी बीड़ी 28 फीसदी 18 फीसदी             जीएसटी में बदलाव के बाद क्या-क्या महंगा सामान जीएसटी का पुराना रेट जीएसटी का नया रेट कोल्ड ड्रिंक और ऐडेड शुगर आइटम 28 फीसदी 40 फीसदी 1,200 सीसी से अधिक और 4,000 मिमी से अधिक लंबी सभी वाहनों के साथ-साथ 350 सीसी से अधिक की मोटरसाइकिल और रेसिंग कार पर 40 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा     नन अल्कोहलिक बेवरेज 28 फीसदी 40 फीसदी महंगी कार, तंबाकू और सिगरेट 28 फीसदी 40 फीसदी कैसीनो, रेस क्लब, या आईपीएल जैसे खेल आयोजनों में एंट्री 18 फीसदी 40 फीसदी किसी रेस क्लब में सट्टेबाजों को लाइसेंस देने के लिए सेवाएं, जुआ, घुड़दौड़, लॉटरी और ऑनलाइन मनी गेमिंग 28 फीसदी 40 फीसदी रिवॉल्वर और पिस्तौल 28 फीसदी 40 फीसदी पान मसाला, सिगरेट, गुटखा, चबाने वाला तंबाकू, जर्दा, एडेड शुगर, कार्बोनेटेड ड्रिग्स, पर्सनल यूज वाले एयरक्राफ्ट, लग्‍जरी कार और फास्‍ट फूड अलग-अलग स्लैब 40 फीसदी       चलिए एक नजर मार लेते हैं कि कौन सा सामान अब किस स्लैब में है? 0 फीसदी स्लैब में आने वाले सामान 33 जीवन रक्षक दवाएं, कैंसर की दवाएं, दुर्लभ बीमारियों की दवाएं, व्यक्तिगत जीवन बीमा, स्वास्थ्य पॉलिसियां मानचित्र, चार्ट, ग्लोब, पेंसिल, शार्पनर, क्रेयॉन, पेस्टल, अभ्यास पुस्तिकाएं, नोटबुक, रबड़ दूध, छेना या पनीर, पहले से पैक और लेबल वाला, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती या रोटी 5 फीसदी स्लैब में आने वाले सामान बालों का तेल, शैम्पू, टूथपेस्ट, टॉयलेट साबुन, टूथब्रश, शेविंग क्रीम मक्खन, घी, पनीर और डेयरी स्प्रेड, नमकीन, बर्तन दूध की बोतलें, शिशुओं के लिए नैपकिन और क्लिनिकल डायपर सिलाई मशीनें और उनके पुर्जे थर्मामीटर, मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, सभी डायग्नोस्टिक किट और अभिकर्मक, ग्लूकोमीटर और टेस्ट = स्ट्रिप चश्मा ट्रैक्टर के टायर, पुर्जे, ट्रैक्टर निर्दिष्ट जैव-कीटनाशक, सूक्ष्म पोषक तत्व टपक सिंचाई प्रणाली और स्प्रिंकलर मिट्टी तैयार करने के लिए कृषि, बागवानी या वानिकी मशीनें 18 फीसदी स्लैब में आने वाले सामान पेट्रोल, एलपीजी, सीएनजी कारें (1200 सीसी और 4000 मिमी से अधिक नहीं) डीजल और डीजल हाइब्रिड कारें (1500 सीसी और 4000 मिमी से अधिक नहीं) तीन पहिया वाहन  मोटरसाइकिल (350 सीसी और उससे कम  माल परिवहन के लिए मोटर वाहन एयर कंडीशनर एलईडी और एलसीडी टीवी सहित टेलीविजन (32 इंच से अधिक) मॉनिटर और प्रोजेक्टर बर्तन धोने की मशीन 1800 से अधिक इंजन क्षमता वाले सड़क ट्रैक्टर सीसी 40 फीसदी स्लैब में आने वाले सामान पान मसाला, सिगरेट, गुटखा, चबाने वाला तंबाकू, बीड़ी अतिरिक्त चीनी या स्वाद वाले वातित पानी, कैफीनयुक्त पेय पदार्थ, गैर-मादक पेय पदार्थ धूम्रपान पाइप 350 सीसी से अधिक क्षमता वाली मोटरसाइकिलें निजी उपयोग के लिए विमान नाव रिवॉल्वर और पिस्तौल सट्टा, कैसीनो, जुआ, घुड़दौड़, लॉटरी और ऑनलाइन मनी गेमिंग

बस एक दिन का इंतजार… GST छूट से TV-AC समेत 175 सामान होंगे सस्ते

नई दिल्ली जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक  शुरू हो चुकी है और कल इस बैठक के तहत लिए गए फैसले का ऐलान होगा, जिसका ब्रेसब्री से इंतजार कंपनियों से लेकर आम आदमी तक को है. क्‍योंकि 15 अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से एक बड़ा ऐलान करते हुए दिवाली पर नए GST रिफॉर्म लाने की बात कही थी. इस ऐलान के बाद जीएसटी परिषद (GST Council) की यह पहली बैठक है.  जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में कई बड़े ऐलान हो सकते हैं. साथ ही दिवाली पर लागू होने वाले नए GST Reform के तहत दो टैक्‍स स्‍लैब और आम आदमी से जुड़ी चीजें सस्‍ती करने पर मुहर लग सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि दो दिन चलने वाले इस बैठक में दरों को युक्तिसंगत बनाने के मुद्दे पर चर्चा होने की उम्‍मीद है, जिसमें डेली यूज के साथ-साथ महंगी वस्‍तुएं भी सस्‍ती होंगी.  2 स्‍लैब करने पर होगी चर्चा  केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब हो सकते हैं. इसमें 28 प्रतिशत वाले स्लैब में आने वाली सभी वस्तुएं, हानिकारक वस्तुओं को छोड़कर, 18 प्रतिशत वाले स्लैब में शामिल हो सकती हैं और 12 प्रतिशत वाले स्लैब की वस्‍तुएं 5 प्रतिशत वाले स्लैब में आ सकती हैं. 40 प्रतिशत का एक और स्लैब होगा, जो 6-7 वस्तुओं पर लगाया जाएगा, जिनमें से ज्‍यादातर हानिकारक और लग्‍जरी वस्‍तुएं होंगी. भारत में टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव आने की तैयारी है। बुधवार, 3 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की 56वीं बैठक चल रही है। इस बैठक में 175 से ज्यादा सामानों और सेवाओं पर GST दरें घटाने का प्रस्ताव चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, 28%) को घटाकर सिर्फ दो मुख्य स्लैब (5% और 18%) रखने का प्लान है। वहीं, लक्ज़री आइटम्स और ‘सिन गुड्स’ पर 40% का अलग टैक्स स्लैब भी लाने पर विचार हो रहा है। 12-28% स्‍लैब में आने वाली कुछ खास वस्‍तुएं     घी     मक्खन     चीज     पैक्ड फ्रोजन सब्जि‍यां     फ्रूट जूस (अधिकतर, नॉन-एरेटेड)     छाता      सोलर वॉटर हीटर     कृषि उपकरण      एयर कंडीशनर     सीमेंट      कार/एसयूवी हेल्‍थ और इंश्‍योरेंस को जीएसटी से छूट  मंत्रियों के समूहों का प्रस्‍ताव है कि स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम को जीएसटी दायरे से अलग रखना चाहिए. यानी इसपर टैक्‍स नहीं लगाया जाना चाहिए. हालांकि इससे राजस्‍व में गिरावट आएगी. तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क के अनुसार, व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर पूरी छूट से अनुमानित रूप से सालाना 9,700 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा.  क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव?     5% GST स्लैब में आएंगे: टूथपेस्ट, साबुन, शैम्पू, रेडी-टू-ईट फूड्स, बटर, चीज़, स्नैक्स और आम कपड़े-खाद्य उत्पाद।     18% GST स्लैब में: टीवी, AC, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, सीमेंट और ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट (पहले 28% टैक्स लगता था)।     40% टैक्स स्लैब: लक्ज़री कारें, 350cc से ऊपर की बाइकें, तंबाकू और प्रीमियम प्रोडक्ट्स। ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर     छोटी कारें और हाइब्रिड गाड़ियां (1200cc तक) पर टैक्स 28% से घटकर 18% हो सकता है।     ₹20-40 लाख तक की महंगी इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स 5% से बढ़कर 18% हो सकता है।     दोपहिया वाहनों पर राहत: इंडस्ट्री की मांग के मुताबिक 28% से घटकर 18% GST की उम्मीद।     350cc से ऊपर की बाइक (जैसे रॉयल एनफील्ड) पर 40% टैक्स का प्रपोजल, कंपनियों को झटका लग सकता है। ️ आम जनता को क्या मिलेगा फायदा?     रोजमर्रा की चीज़ें जैसे साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट और खाने का सामान सस्ता होगा।     टीवी, AC, वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमत घट सकती है।     टू-व्हीलर्स और कई कारें सस्ती होंगी।     लक्ज़री प्रोडक्ट्स और प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारें महंगी हो जाएंगी। क्यों हो रहे हैं GST रिफॉर्म्स? प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से कहा था कि भारत को नए GST ढांचे की जरूरत है। हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत पर 50% इंपोर्ट ड्यूटी लगाने के बाद यह कदम उपभोक्ताओं की जेब को राहत और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए उठाया जा रहा है।     SBI रिसर्च का अनुमान: GST सुधारों से अगले 1 साल में GDP में 0.60% की बढ़त हो सकती है।     खुदरा महंगाई में भी 20-25 बेसिस पॉइंट की गिरावट की उम्मीद। सरकार को कितना होगा नुकसान?     टैक्स कटौती और स्लैब घटाने से सरकार को सालाना ₹60,000 करोड़ से ₹1.7 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।     सरकार इसे GST कम्पनसेशन सेस फंड (₹45,581 करोड़ सरप्लस) और सिन गुड्स पर 40% टैक्स से भरने की योजना बना रही है।     कम टैक्स से खपत बढ़ने की उम्मीद, जिससे लंबी अवधि में राजस्व फिर बढ़ सकता है। ️ राज्यों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच राज्यों को GST कटौती से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए नया कंपनसेशन मैकेनिज्म बनाने पर भी चर्चा हो रही है।

GST रेट कट का बड़ा ऐलान कल, रोजमर्रा की चीजें और इलेक्ट्रॉनिक्स हो सकते हैं सस्ते

नई दिल्ली देश में जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स में सुधार को लेकर तैयारियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बीते 15 अगस्त को लाल किले से किए गए ऐलान के बाद से ही तेज हैं, अब आज से जीएसटी काउंसिल की बैठक शुरू हो रही है और दो दिवसीय इस बैठक में जीएसटी रेट्स में बदलाव से लेकर चार की जगह दो टैक्स स्लैब को लेकर अंतिम मुहर लगेगी. जीएसटी रिफॉर्म के जरिए सरकार का लक्ष्य दरअसल, टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाना और उपभोक्ताओं को सीधा फायदा पहुंचाना है. उम्मीद है कि नए बदलाव के बाद रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले दूध-पनीर से लेकर टीवी-एसी और कार-बाइक तक की कीमतें कम हो सकती हैं.  जीएसटी सुधारों पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?  बता दें कि देश में तमाम अलग-अलग टैक्स को खत्म करते हुए जीएसटी 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया था. हालांकि, विपक्ष इस गुड्स एंड सर्विस टैक्स को हमेशा से ही 'गब्बर सिंह टैक्स' कहकर सरकार पर निशाना साधती रही है, लेकिन केंद्र सरकार इसे आर्थिक सुधार की दिशा में उठाया गया अपना बड़ा कदम करार देती है. अब इसे और आसान बनाने की तैयारी के तहत इसमें शामिल टैक्स स्लैब की संख्या को घटाने और तमाम रेट्स को युक्तिसंगत बनाने के लिए आज से तमाम प्रस्तावों पर मंथन शुरू हो रहा है. बैठक शुरू होने से पहले मंगलवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी सुधारों को लेकर बड़ा बयान दिया था और कहा कि इसका लक्ष्‍य अर्थव्‍यवस्‍था को पूरी तरह से खोलना और पारदर्शिता लाना है, जिससे छोटे उद्योगों की बड़ी मदद होगी. चार स्लैब नहीं, अब रहेंगे सिर्फ दो केंद्र सरकार ने जीएसटी के तहत आने वाले चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18%, और 28%)  को कम करके 12% और 28% टैक्स को हटाने की की तैयारी की है. मतलब सिर्फ 5% और 18% वाले जीएसटी स्लैब बचेंगे. पीएम नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद हुई मंत्री समूह (GoM) की बैठक में भी 12% और 28% स्लैब को खत्म करने के प्रपोजल को मंजूरी दी जा चुकी है. प्रधानमंत्री ने इस जीएसटी सुधार को देशवासियों के लिए दिवाली गिफ्ट के तौर पर संबोधित किया है. हालांकि, सरकार द्वारा किए जाने वाले जीएसटी रेट्स में इन बदलाव से रेवेन्यू का करीब 40,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान जताया गया है, लेकिन ये देश के आम आदमी के लिए बड़ी राहत भरे सुधार साबित होंगे.   क्या-क्या चीजें हो सकती हैं सस्ती?  जीएसटी रिफॉर्म से जुड़े प्रस्ताव लागू होते हैं, तो फिर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले तमाम सामान सस्ते हो जाएंगे, जिनमें दूध-पनीर, से लेकर नमकीन, साबुन, तेल, कपड़े शामिल हैं, इसके साथ ही स्लैब चेंज होने पर जूते, TV, AC, मोबाइल और कार-बाइक्स के दाम में भी बड़ी कमी देखने को मिल सकती है. प्रस्ताव के तहत जिन सामानों पर जीएसटी स्लैब को 12 फीसदी से कम करते 5 फीसदी के दायरे में लाने की तैयारी यानी इन्हें सस्ता करने का प्लान है, उनमें पैकेज्ड फूड्स जैसे: नमकीन (भुजिया), चिप्स, पास्ता, नूडल्स, जैम, Ketchup, पैकेज्ड जूस, कंडेंस्ड मिल्क, घी, मक्खन, चीज और दूध से बने बेवरेजेस हैं.  जीएसटी की बैठक में  जीरो जीएसटी स्लैब के दायरे में भी सरकार द्वारा इजाफा करने की उम्मीद जताई जा रही है और ऐसे में इस लिस्ट में कई रोजमर्रा के जरूरी सामानों को शामिल किया जा सकता है, जो फिलहाल 5% और 18% जीएसटी के दायरे में आते हैं. बीते दिनों आई बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट की मानें, तो इन सामानों में खासतौर पर फूड प्रोडक्ट शामिल होंगे, जिनमें यूएचटी दूध, प्री-पैकेज्ड पनीर, पिज्जा ब्रेड और रोटी को Zero GST स्लैब में लाया जा सकता है. इसके अलावा पराठा भी शामिल हो सकता है, जिस पर 18% जीएसटी लागू है. कोको बेस्ड चॉकलेट, फ्लेक्स, पेस्ट्री से लेकर आइसक्रीम तक पर लागू जीएसटी स्लैब में बदलाव किया जा सकता है और ये 18% से कम करते हुए 5% हो सकता है.  GST Reforms में क्या-क्या बदलेगा? GST Reforms में होने वाले बदलावों को अगर कम शब्दों में बताए तो जीएसटी के तहत चार स्लैब कम होकर दो स्लैब रह जाएंगे। इसकी वजह से कई चीजों पर टैक्स कम हो जाएगा। ये टैक्स 10 फीसदी तक घट सकता है। वहीं कुछ वस्तु ऐसे भी होने वाले हैं, जिनमें कोई टैक्स नहीं देना होगा। अब उन वस्तुओं के बारे में बात करते हैं, जिनमें शून्य टैक्स लग सकता है। इसका मतलब है कि इन वस्तुओं के खरीद पर जल्द कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। GST Rate Cut किन वस्तुओं पर नहीं है कोई टैक्स? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार GST Reforms के बाद रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली जरूरी वस्तुओं पर शून्य टैक्स हो जाएगा। देश में बहुत जल्द जीएसटी के तहत चार टैक्स स्लैब की जगह अब दो टैक्स स्लैब ही रहने वाले हैं। अब 5% और 12% के दो टैक्स स्लैब होंगे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जरूरी वस्तुएं जैसे पनीर, पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती और रोटी जैसी खाद्य वस्तुओं पर कोई टैक्स नहीं लगेगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है। ऐसे ही स्टेशनरी, चिकित्सा उपकरण और दवाइयों पर कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा या फिर 5 फीसदी टैक्स लिया जा सकता है। किस पर कितना टैक्स, क्या-क्या सस्ता? मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जीएसटी टैक्स स्लैब में कुछ इस तरह से बदलाव हो सकता है-     12 फीसदी टैक्स स्लैब वाले 99 फीसदी प्रोडक्ट 5 फीसदी वाली कैटेगरी आ जाएंगे।     28 फीसदी टैक्स स्लैब में आने वाली वस्तु 18 फीसदी टैक्स स्लैब में शामिल हो जाएंगे। इस तरह से 10 फीसदी तक टैक्स कम हो जाएगा। वहीं लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40 फीसदी टैक्स लगेगा। इसकी साथ ही पेट्रोलियम और सोने और हीरों जैसी वस्तु पर पहले जैसे ही टैक्स लगेगा। हालांकि सरकार की ओर से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा से जुड़े सामान भी हो सकते हैं जीएसटी फ्री   सरकार के पास शिक्षा से जुड़ी तमाम चीजों को भी जीएसटी से फ्री करने का भी प्रस्ताव है. काउंसिल की बैठक में  मानचित्र, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, दीवार मानचित्रों, ग्लोब, मुद्रित शैक्षिक चार्ट, पेंसिल-शार्पनर के साथ ही प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक और लैबोरेटरी नोटबुक को जीएसटी से छूट मिल सकती है, … Read more

GST सुधार से छोटे व्यवसाय होंगे मजबूत, अर्थव्यवस्था होगी और खुली – वित्त मंत्री

चेन्नई  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार एक खुली और पारदर्शी अर्थव्यवस्था का निर्माण करेंगे, अनुपालन बोझ को कम करेंगे और छोटे व्यवसायों को फायदा पहुंचाएंगे। तमिलनाडु में सिटी यूनियन बैंक के 120वें स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, अनुपालन लागत कम करना और स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई के लिए एक अधिक सक्षम इकोसिस्टम का निर्माण करना है। वस्तु एंव सेवा कर की दरों को कम करने के लिए जीएसटी परिषद की बैठक 3-4 सितंबर को होनी है। वित्त मंत्री ने सभी बैंकों से अपील की कि वे विकास को गति प्रदान करें और विश्वास का निर्माण करें। साथ ही कहा कि बैंकों को अपने ढांचे में अच्छा प्रशासन सुनिश्चित करना चाहिए और प्रत्येक रुपए को राष्ट्र निर्माण में लगाना चाहिए। वित्त मंत्री सीतारमण ने आगे कहा कि अप्रैल-जून में हमारी वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही है और हमारी सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग 18 वर्षों में पहली बार अपग्रेड हुई है। पिछले 8 वर्षों में मुद्रास्फीति की दर में 1.15 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस साल राजकोषीय घाटा 4.42 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि पीएम जन धन जैसी योजनाओं ने बड़े स्तर पर बदलाव लाया है और इसमें 56 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खोले गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए भाषण में जीएसटी व्यवस्था में व्यापक बदलावों का संकेत देते हुए कहा था, "इस दिवाली, मैं आपके लिए दोहरी दिवाली मनाने जा रहा हूं। देशवासियों को एक बड़ा तोहफा मिलने वाला है, आम घरेलू वस्तुओं पर जीएसटी में भारी कटौती होगी।" प्रधानमंत्री मोदी ने जीएसटी दरों की समीक्षा की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया और इसे "समय की मांग" बताया। उन्होंने घोषणा की, "जीएसटी दरों में भारी कमी की जाएगी। आम लोगों के लिए कर कम किया जाएगा।" 

सरकार का खजाना भर गया, GST से आया ₹1.86 लाख करोड़ — अब तक का तगड़ा उछाल

नई दिल्ली सरकार ने सोमवार को जीएसटी कलेक्शन के आंकड़े शेयर किए, जो राहत भरे हैं. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो अगस्त महीने में कलेक्शन 1.86 लाख करोड़ रुपये रहा है, जो बीते साल की समान अवधि की तुलना में 6.5 फीसदी ज्यादा है. बता दें कि अगस्त 2024 में 1.75 लाख करोड़ रुपये रहा था. वहीं बात इससे पिछले महीने की करें, तो जुलाई 2025 में जीएसटी संग्रह से सरकार के खजाने में 1.96 लाख करोड़ रुपये आए थे.  रेवेन्यू में जोरदार उछाल का असर सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू राजस्व में उछाल की वजह से अगस्त में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 1.86 लाख करोड़ रुपये से अधिक पर पहुंच गया. बीते महीने ये रेवेन्यू 9.6 फीसदी बढ़कर 1.37 लाख करोड़ रुपये हो गया, जबकि आयात कर 1.2 फीसदी की गिरावट के साथ 49,354 करोड़ रुपये रह गया. जीएसटी रिफंड पर नजर डालें, तो साल-दर-साल 20 फीसदी घटकर 19,359 करोड़ रुपये रह गया. अप्रैल 2025 में रिकॉर्ड कलेक्शन जीएसटी कलेक्शन के अब तक के सबसे बड़े आंकड़े पर नजर डालें, तो ये इस साल अप्रैल महीने में रहा था, जब सरकार के जीएसटी संग्रह से 2.37 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. ये जीएसटी के लागू होने के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा कलेक्शन था.  गौर करने वाली बात है कि जोरदार जीएसटी कलेक्शन का ये आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जबकि दो दिन बाद जीएसटी काउंसिल की बैठक होने वाली है. इसमें जीएसटी रिफॉर्म के तहत टैक्स स्लैब की संख्या को कम करने, जीएसटी रेट्स को युक्तिसंगत बनाने पर चर्चा होने वाली है.  देश में जीएसटी में बदलाव की तैयारी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म को लेकर ऐलान किया था. उन्होंने अपने संबोधन में कहा था कि सरकार अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार लेकर आ रही है और इससे आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम होगा. उन्होंने इसके दिवाली से पहले लागू होने की उम्मीद जताई थी. नई जीएसटी व्यवस्था में कर प्रणाली को सरल बनाने के लिए सिर्फ दो दरें, 5% और 18%, लागू करने का प्रस्ताव है. जीओएम की मंजूरी, 3-4 सितंबर को बैठक  बीते 20 और 21 अगस्त को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) की नई दिल्ली में हुई बैठक में दो टैक्स स्लैब के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए 12% और 28% जीएसटी स्लैब को खत्म करने पर सहमति जताई गई. इसमें शामिल सदस्यों ने 5% और 18% जीएसटी स्लैब के प्रस्ताव को मंजूर किया. हालांकि, सरकार को इस जीएसटी रिफॉर्म ससे करीब 40,000 करोड़ रुपये के राजस्व के नुकसान की आशंका है. अब जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक 3 और 4 सितंबर को होने वाली है, जिसमें इस मुद्दे पर अंतिम मुहर लगेगी. 

31 अक्टूबर के बाद नहीं देना पड़ेगा सेस? GST काउंसिल ने दिए संकेत

नई दिल्ली वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक 3 सितंबर को होने जा रही है। इस बैठक में 31 अक्टूबर तक क्षतिपूर्ति उपकर समाप्त करने पर चर्चा की जा सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाला था। हालांकि, उपकर संग्रह को पहले ही समाप्त करने के लिए चर्चाएं शुरू हो गई हैं, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान राज्यों को राजस्व की कमी की भरपाई के लिए, लिए गए ऋण पूरी तरह से चुकाने के करीब पहुंच रहे हैं। यह पुनर्भुगतान 18 अक्टूबर के आसपास पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन सरकार सुचारू संचालन के लिए इसे अक्टूबर के अंत तक बढ़ा सकती है। सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि उपकर संग्रह से लगभग 2,000-3,000 करोड़ रुपए का अधिशेष प्राप्त हो सकता है, जिसे केंद्र और राज्यों के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा। कानून में क्षतिपूर्ति के लिए उपकर को केवल पांच वर्षों के लिए अनिवार्य किया गया था, क्योंकि राज्यों को चिंता थी कि 2017 में जीएसटी लागू होने पर उन्हें कर राजस्व का नुकसान होगा। इसलिए राज्य के राजस्व में कमी की भरपाई के लिए क्षतिपूर्ति उपकर लगाया गया था। केंद्र ने राज्यों की ओर से 2.69 लाख करोड़ रुपए उधार लिए और वित्तीय प्रबंधन में सहायता के लिए उन्हें ऋण के रूप में प्रदान किए। हालांकि, महामारी के दौरान लिए गए ऋणों के भुगतान हेतु, जब राजस्व में तेज गिरावट आई थी, इस उपकर को जून 2022 से मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया था। वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 के अनुसार, ऋणों का भुगतान पूरा होने के बाद उपकर संग्रह बंद हो जाएगा। वित्त मंत्रालय ने सभी वस्तुओं पर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो जीएसटी दरों के लिए जीएसटी परिषद को अपना प्रस्ताव भेजा है, जो मौजूदा चार स्लैब संरचना का स्थान लेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुसार, गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को कम करने के उद्देश्य से एक नियोजित जीएसटी सुधार के माध्यम से नागरिकों को इस दिवाली दोहरा बोनस मिलेगा।

महंगाई से मिलेगी राहत? फूड और कपड़ों को 5% GST में लाने की तैयारी

नई दिल्ली  भारत सरकार की जीएसटी सुधार योजना (GST 2.0) के तहत यह प्रस्ताव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि सभी खाद्य और वस्त्र उत्पादों को समान रूप से 5% जीएसटी स्लैब में ले जाया जाए। इस कदम का उद्देश्य टैक्स संरचना को सरल बनाना, वर्गीकरण विवादों को समाप्त करना और आम जनता के लिए जरूरी वस्तुओं की लागत को कम करना है। यह प्रस्ताव 3–4 सितंबर 2025 को होने वाली अगली GST काउंसिल बैठक में विचाराधीन हो सकता है। क्या है डिटेल TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले सीमेंट पर करों में कटौती पर चर्चा की जा रही है। खासकर इस पर मौजूदा 28% स्लैब को 18% पर लाने की योजना है। यह कदम उपभोक्ताओं के लिए निर्माण लागत कम कर सकता है, बशर्ते निर्माण उद्योग (जो कई बार वर्चस्ववादी आरोप झेल चुका है) इन लाभों को खरीदारों तक पहुंचाए। यदि यह प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो यह बदलाव निर्माण उद्योग में संतुलन और पारदर्शिता लाएगा। बता दें कि GST काउंसिल अगले महीने 3 और 4 सितंबर 2025 की बैठक में कई जरूरी प्रस्तावों पर विचार करेगी, जिनमें कई दैनिक और आवश्यक वस्तुओं व सेवाओं पर GST की दरों में कटौती शामिल है, ताकि टैक्स संरचना को सरल बनाया जा सके। बीमा सेक्टर में भी राहत की उम्मीद GST काउंसिल यह भी प्रस्ताव रख रही है कि व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा पर GST शून्य प्रतिशत टैक्स लगा हो। इससे बीमा की पहुंच बढ़ेगी और लोगों के लिए यह किफायती विकल्प बन सकेगा, जिससे व्यापक स्वास्थ्य कवरेज को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देने में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है।