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बंगाल राजनीति में ट्विस्ट: हुमायूं कबीर का बड़ा फैसला, अब नजर AIMIM के जवाब पर

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए JUP यानी जनता उन्नयन पार्टी नेता हुमायूं कबीर साथी तलाश रहे हैं। खबर है कि उन्होंने कांग्रेस समेत कई दलों के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया है। बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण के ऐलान के बाद कबीर चर्चा में आ गए थे। इसके बाद उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। उन्होंने राज्य में टीएमसी को हराने की बात कही है। कांग्रेस नहीं अधीर रंजन का साथ देंगे मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कबीर ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट और सीपीएम के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया है। साथ ही भरोसा जताया है कि वह सांसद असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन से गठबंधन कर सकते हैं। वहीं, उन्होंने कांग्रेस से दूरी बनाने की बात भी कही है। जबकि, दावा किया है कि चुनाव में उनकी पार्टी अधीर रंजन चौधरी को समर्थन दे सकती है। कबीर ने कहा, 'ISF सीट शेयरिंग पर फैसला लेने में देरी कर रही है। वो मुझे कम आंकने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में हम आईएसएफ और इसी वजह से सीपीआई (एम) के साथ सीटें साझा नहीं कर सकते।' उन्होंने कांग्रेस से भी गठबंधन नहीं करने की बात कही है। उन्होंने कहा, 'अगर अधीर रंजन चौधरी बेहरमपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो हम उनका समर्थन करेंगे। वह अच्छे व्यक्ति हैं। समर्थन सिर्फ उनके लिए होगा और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं।' AIMIM से कर सकते हैं गठबंधन उन्होंने कहा, 'मुझे भरोसा है कि AIMIM मेरे साथ होगी। कुछ और पार्टीयां भी मेरे साथ आएंगी। यह तय है। आने वाले दिनों में हम उनके साथ बैठकें करने वाले हैं।' बीते साल AIMIM ने पश्चिम बंगाल की सभी सीटों पर लड़ने की बात कही थी। बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू कबीर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में अयोध्या की बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बहुचर्चित मस्जिद का निर्माण कार्य शुरू किया। कबीर ने घोषणा की कि बेलडांगा के रेजिनगर में इस मस्जिद का निर्माण दो साल के भीतर पूरा हो जाएगा और इसकी लागत लगभग 50-55 करोड़ रुपये आएगी। यह मस्जिद 11 एकड़ जमीन पर बनाई जा रही है और इसमें लगभग 12,000 लोग एकसाथ नमाज अदा कर सकेंगे। सभी सीटों पर लड़ने का प्लान कबीर ने यह भी घोषणा की कि उनकी पार्टी राज्य के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से 135 पर प्रत्याशी खड़ा कर आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को टक्कर देगी। इस बीच, कबीर एक नए विवाद में फंस गए हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल पुलिस ने मंगलवार को मादक पदार्थों की तस्करी के एक मामले में उनके कुछ रिश्तेदारों से संबंधित लगभग 11 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है।

हुमायूं कबीर के समधी पर ड्रग तस्करी का आरोप, 18 करोड़ की संपत्ति जब्त

  कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में निलंबित तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर के परिवार से जुड़ा मामला सियासी और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर तूल पकड़ता जा रहा है. जिस समय हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम से एक नई मस्जिद के निर्माण की शुरुआत की तैयारी चल रही थी, उससे ठीक दो दिन पहले राज्य पुलिस ने उनकी बेटी के ससुर शरीफुल इस्लाम से जुड़ी करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त कर लिया. यह कार्रवाई ड्रग तस्करी से जुड़े एक मामले में अदालत के आदेश के बाद की गई. पुलिस के अनुसार, शरीफुल इस्लाम के एक रिश्तेदार जियाउर रहमान को इस्लाम के घर के पास से करीब 500 ग्राम नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया गया था. इसी मामले की जांच के तहत संपत्तियों को एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत अटैच किया गया है. हुमायूं कबीर ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से अपमानित करने के लिए झूठे मामले में फंसाया गया है. वहीं, उनकी बेटी नजमा सुल्ताना ने पुलिस पर परिवार को लगातार नोटिस भेजकर परेशान करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर की जा रही है और इसका मकसद उनके पिता को राजनीतिक रूप से दबाव में लाना है. भारी पुलिस बल ने  लालगोला बस स्टैंड से सटे इलाके में शरीफुल इस्लाम से जुड़ी कई संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें एक होटल और एक आवासीय मकान शामिल है. यह कार्रवाई करीब दो घंटे तक चली. इसके बाद मंगलवार को भी सुबह से ही लालगोला थाने की पुलिस ने हुमायूं कबीर की बेटी के ससुराल पक्ष की संपत्तियों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. पुलिस ने जिले के अलग-अलग इलाकों में स्थित कुल छह संपत्तियों को सील किया, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है. दूसरे दिन सील की गई संपत्तियों में ईंट भट्टे और व्यावसायिक दुकानें शामिल हैं. इस तरह पुलिस ने दो दिनों में हुमायूं कबीर की बेटी के ससुराल पक्ष की कुल 18 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई की है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शरीफुल इस्लाम लालगोला पंचायत क्षेत्र के नलदहारी इलाके के निवासी हैं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में ड्रग्स की तस्करी और उससे अर्जित संपत्तियों की जांच की जा रही है तथा जब्त की गई संपत्तियों को आगे नीलाम किया जाएगा. सूत्रों का दावा है कि शरीफुल इस्लाम ने ड्रग तस्करी के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है और मुर्शिदाबाद के अलावा कोलकाता में भी उनके फ्लैट और मकान हैं. उन्हें पहले भी दो बार ड्रग तस्करी के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को अयोध्या में विवादित ढांचे के ध्वंस की बरसी के दिन बाबरी मस्जिद के मॉडल पर बनने वाली मस्जिद की आधारशिला रखी थी. मस्जिद निर्माण कार्य 11 फरवरी को कुरान तिलावत के बाद शुरू होने वाला है, जिसमें करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है. टीएमसी द्वारा मस्जिद निर्माण का विरोध किए जाने के बाद हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) बनाई और आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 135 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. वहीं, बीजेपी उन्हें अक्सर सत्तारूढ़ दल की ‘बी-टीम’ बताकर निशाना बनाती रही है.

ममता बनर्जी के लिए चुनौती: बंगाल में हुमायूं कबीर समेत तीन मुस्लिम नेताओं की सक्रियता

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति तेजी से गरमा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होना है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) यहां पहली बार सरकार बनाने तमन्ना लिए बैठी है। इस सबके बीच चुनावी बिसात पर बागी विधायक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ा दी है। कबीर के एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन औवेसी और इंडिया सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी से संपर्क साधने से राज्य की राजनीति में गरमाहट आ गई है। दूसरी तरफ तो भाजपा ने अपने मजबूत बूथ प्रबंधन से बदलाव की स्थिति बनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच लगभग सीधा मुकाबला है। कांग्रेस और तीन दशक तक राज्य में सत्ता पर काबिज रही माकपा और उसके सहयोगी दल हाशिए पर जा चुके हैं। ऐसे में तृणमूल से बाहर निकले हुमायूं तीसरी ताकत के रूप में उभरने की कोशिश में है। हालांकि वह अकेले एक क्षेत्र विशेष तक सीमित है पर यदि उनको औवेसी व पीरजादा का साथ मिला तो कई सीटों पर समीकरण प्रभावित कर सकते हैं। तीन मुस्लिम नेता एक साथ औवेसी ने हाल में बिहार में जो सफलता हासिल की है उससे साफ हुआ है कि मुस्लिम मतदाताओं ने इस पार्टी को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। आईएसएफ ने पिछले चुनाव में ही अपनी स्थिति साफ कर दी थी, जब उसने एक सीट जीत ली थी। ऐसे में अगर तीन प्रमुख मुस्लिम नेता एक मंच पर आते हैं तो मुसलमानों के बीच वह अपनी पैठ बढ़ा सकते हैं। ध्रुवीकरण से ममता को नुकसान बंगाल की लगभग 30% मुस्लिम आबादी है। हुमायूं कबीर जिस तरह से माहौल बना रहे हैं उसमें वह अगर मुस्लिम मतों का थोड़ा भी ध्रुवीकरण करने में सफल रहते हैं तो ममता बनर्जी को काफी नुकसान हो सकता है। इसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। भाजपा विधायक भी मैदान में डटे भाजपा ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी अपना विस्तार किया है। उसके विधायक मैदान में डटे रहे हैं। भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व पहले से ही आक्रामक और राज्य की मौजूदा स्थितियों में और ज्यादा आक्रामकता दिखाकर ममता बनर्जी की दिक्कतें बढ़ाएगा। पिछली बार भाजपा अपने बूथ प्रबंधन में कमजोर रही थी, इसलिए पार्टी ने इस बार पूरा जोर बूथ प्रबंधन पर लगाया है।

हुमायूं कबीर की नई पार्टी का ऐलान, 20% हिंदू होंगे सदस्य, जानें क्या है पार्टी का नाम

कोलकाता बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है. हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी का नाम जनता उन्नयन पार्टी (JANATA UNNAYAN PARTY) रखा है. पार्टी के चुनाव चिन्‍ह के लिए हुमायूं कबीर ने कहा कि मेरी पहली पसंद 'टेबल' है. मेरी दूसरी पसंद 'ट्विन रोजेज' है. हुमायूं कबीर ने बताया कि वह जरूरत पड़ने पर सभी 294 सीटों पर अपने उम्‍मीवार उतारेंगे. हमारी पार्टी सिर्फ आम लोगों के विकास की बात करेगी. पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव हैं.  जल्‍द लोगों को पता चलेगा हुमायूं कबीर क्‍या है? एनडीटीवी से खास बातचीत में हुमायूं कबीर ने बताया, 'पार्टी का नाम क्‍या होगा, ये आज दोपहर तक साफ हो जाएगा. हमने जनता उन्‍नयन पार्टी नाम सोचा है. फाइनल नाम चुनाव आयोग तय करेगा. मुस्लिमों को सिर्फ वोट बैंक की राजनीति के लिए सत्‍ताधारी पार्टी इस्‍तेमाल करती रही हैं. इन्‍हें काफी चीजों से वंचित रखा गया है. हम उनके हक की आवाज उठाएंगे. अभी हमें कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है, लेकिन जल्‍द ही लोगों को पता चल जाएगा कि हुमायूं कबीर क्‍या है. कुछ सीटों पर उम्‍मीदवारों का ऐलान हम आज करने जा रहे हैं. कबीर ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले एक विवाद खड़ा कर दिया था। मुर्शिदाबाद जिले में उनकी 'बाबरी मस्जिद-स्टाइल' में एक मस्जिद का नींव रखने के कारण 'मंदिर बनाम मस्जिद' विवाद शुरू हो गया था। कबीर ने यह भी कहा कि JUP के सिंबल के लिए उनकी पसंदीदा पसंद एक टेबल और दो गुलाब हैं। कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य के हाशिए पर पड़े लोगों को एक मंच प्रदान करेगी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सस्पेंड MLA हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी पिछड़े तबकों के मुद्दों पर फोकस करेगी। RSS प्रमुख मोहन भागवत के 'बाबरी मस्जिद' के निर्माण को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कबीर ने कहा कि वह भागवत का सम्मान करते हैं। लेकिन वह इस बात से सहमत नहीं हैं कि इस मुद्दे से पश्चिम बंगाल में अशांति फैल सकती है। उन्होंने कहा, "हम मोहन भागवत जी का सम्मान करते हैं। लेकिन उनका यह आकलन कि यहां दंगे वगैरह हो सकते हैं, हम ऐसा कुछ नहीं होने देंगे।" ममता पर लगाया बड़ा आरोप कबीर ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के RSS से संबंध हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में राज्य में संगठन की मौजूदगी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भागवत हाल ही में 15 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल आए थे। उन्होंने उनकी अगली यात्रा पर सवाल उठाया। कबीर ने कहा, "CM के RSS से कुछ संबंध हैं। हाल ही में मोहन भागवत जी 15 दिनों के लिए बंगाल आए थे, अब वह फिर से यहां कैसे आ गए? उन्हें यहां आने के लिए राज्य सरकार की अनुमति चाहिए।" 2016 में जब हुमायूं कबीर ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था, तो उनका चुनाव चिन्ह 'टेबल' था। अपनी नई पार्टी के लिए वह फिर से चुनाव आयोग से 'टेबल' चिन्ह देने की अपील करने की योजना बना रहे हैं। अगर वह चिन्ह नहीं मिलता है, तो उनकी दूसरी पसंद 'गुलाब के फूलों का जोड़ा' होगी। खास बात यह है कि कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी एक मस्जिद बनाने का वादा किया है। इसके लिए उन्होंने पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। 294 सीटों पर लड़ सकते हैं चुनाव  टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों से अपील की कि वे एकजुट हों और अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार को हटाने के लिए गठबंधन में चुनाव लड़ें. इसका ऐलान हुमायूं कबीर ने सोमवार को अपनी नई पॉलिटिकल पार्टी की घोषणा से एक दिन पहले किया. हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं पश्चिम बंगाल में सभी एंटी-तृणमूल कांग्रेस और एंटी-भाजपा ताकतों को एक साथ आने के लिए बुला रहा हूं. आइए हम अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में एक ग्रैंड अलायंस बनाकर लड़ें. हालांकि, ऐसी कोई भी ताकत खुद को सबसे ऊपर समझती है तो मेरी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. अगर जरूरत पड़ी तो मैं पश्चिम बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों से उम्मीदवार उतारूंगा. मेरे पास वह ताकत है.' हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका मौजूदा कदम पूरी तरह से पॉलिटिकल है, इसलिए वह कोई भी फैसला करने से पहले कई बार सोचेंगे. मोहन भागवत के बयान पर कबीर ने दी प्रतिक्रिया आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत के ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कबीर ने कहा कि हालांकि वे भगवत का सम्मान करते हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में अशांति फैलने के उनके आकलन से असहमत हैं। उन्होंने कहा, “हम मोहन भगवत जी का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके इस आकलन से कि यहां दंगे आदि हो सकते हैं, हम ऐसा कुछ भी नहीं होने देंगे।” ये भी पढ़ें: ‘मैं बंगाल का ओवैसी हूं’, बाबरी जैसी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर बोले- चुनाव में बनूंगा किंगमेकर कबीर ने सीएम बनर्जी पर लगाया RSS से मिलीभगत का आरोप कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरएसएस से संबंध होने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके कार्यकाल में राज्य में आरएसएस की उपस्थिति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भागवत ने हाल ही में 15 दिनों के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और उनकी अगली यात्रा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के आरएसएस से कुछ संबंध हैं। हाल ही में मोहन भगवत जी 15 दिनों के लिए बंगाल आए थे, अब वे दोबारा यहां कैसे आ गए? उन्हें यहां आने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता है।” अगले साल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में कबीर का नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस नई पार्टी का चुनावी परिदृश्य पर कितना असर पड़ेगा, यह देखना अभी बाकी है।

फोन पर मिली जानलेवा धमकियां, हुमायूं कबीर बोले— अब HC से ही मिलेगी सुरक्षा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले विधायक हुमायूं कबीर ने धमकियां मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि राज्य के बाहर से फोन आ रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा के लिए राज्य सरकार से गुहार लगाई है। साथ ही कहा है कि सिक्योरिटी की मांग के लिए उच्च न्यायालय का भी रुख करेंगे। कबीर को तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था।   एक चैनल से बातचीत में कबीर ने कहा, 'लगातार सात दिनों से इतना धमकी आ रही है। पश्चिम बंगाल के बाहर से। कोई फोन करके मुझे जान से मारने की धमकी दे रहा है। वो बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी, उसके पहले ही मुझे जान से मुझे जान से मार देंगे, ऐसा बोल रहे हैं। मैं डरा नहीं अभी तक, मुझे अल्लाह पर पूरा भरोसा है। लेकिन सावधानी के लिए मैं सिक्योरिटी के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को, गृह विभाग के पास आवेदन दूंगा। फिर सिक्योरिटी के लिए हाईकोर्ट में जाऊंगा।' खबर के अनुसार, कबीर ने सोमवार को यहां संवाददाताओं से कहा, 'तत्काल उपाय के तौर पर मैं कल से अपने लिए आठ निजी सुरक्षाकर्मी नियुक्त करूंगा क्योंकि 06 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने के बाद मुझे राज्य के बाहर से धमकी भरे फोन आ रहे हैं। धमकी भरे फोन आने के बाद मैंने सुरक्षा मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र को भी मेल किया है।' उन्होंने कहा कि वह 16 दिसंबर को बेंगलुरु जाएंगे और उसके बाद नोएडा जाएंगे। एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने कहा, 'हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक अपने सुरक्षाकर्मियों को नहीं हटाया है, लेकिन मुझे पश्चिम बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं है क्योंकि सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस बाबरी मस्जिद के लिए फंडिंग का आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लगा रही है।' उन्होंने कहा कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी सुनिश्चित करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय जा सकते हैं।  

धमकी से बवाल: भाजपा समर्थकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी, हुमायूं कबीर का पुराना विवादों से रिश्ता फिर चर्चा में

कोलकाता  बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को TMC ने निलंबित कर दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब उनके खिलाफ इस तरह का ऐक्शन लिया गया है। 62 साल के कबीर का राजनीतिक करियर कई विवादों से भरा रहा है। एक मौके पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को नदी में फेंकने तक का ऐलान कर दिया था। कबीर ने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से हुई थी। तब उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा था। उन्हें कांग्रेस के पूर्व सांसद अधीर रंजन चौधरी का करीबी माना जाता था। लेकिन 20 नवंबर 2012 में उन्होंने अलग होकर टीएमसी का दामन थाम लिया था। खास बात है कि उस दौरान टीएमसी लेफ्ट का 34 साल का शासन खत्म कर सत्ता में आई थी। टीएमसी में एंट्री के बाद उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कैबिनेट में मंत्री बनाया गया था। हालांकि, 3 सालों में ही उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था। साल 2018 में वह भाजपा में आए और 2021 में दोबारा टीएमसी में लौट गए। खबर है कि वह इस दौरान समाजवादी पार्टी में भी कुछ समय रहे और निर्दलीय चुनाव भी लड़ चुके हैं। टीएमसी में विवादों में रहे मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कबीर ने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 70 फीसदी है और हिंदू सिर्फ 30 प्रतिशत हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि वह भाजपा समर्थकों को भागीरथी नदी में फेंक देंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा था, 'अगर मैं भाजपा (समर्थकों) को 2 घंटों के अंदर भागीरथी गंगा में नहीं फेंक पाया, तो राजनीति छोड़ दूंगा। मैं तुम लोगों को शक्तिपुर में नहीं रहने दूंगा। अगर तुम्हें लगता है कि मुर्शिदाबाद में सिर्फ 30 फीसदी लोग हैं। हम 70 फीसदी हैं।' इस साल 13 मार्च को भी विधायक कबीर के नाम पर टीएमसी की अनुशासनात्मक समिति ने शोकॉज नोटिस थमा दिया था। उनपर राज्य में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को धमकी देने के आरोप लगे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2015 में उन्हें टीएमसी ने बाहर कर दिया था। अब नई पार्टी बनाने की तैयारी पीटीआई भाषा के अनुसार, निलंबन के कुछ ही देर बाद कबीर ने घोषणा की कि वह विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे, इस महीने के अंत में अपनी पार्टी बनाएंगे और प्रस्तावित कार्यक्रम को बढ़ाएंगे, भले ही इसके लिए उन्हें ‘गिरफ्तार’ किया जाए या मार ही क्यों न दिया जाए। तृणमूल के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम ने कोलकाता में निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि इस फैसले पर मुख्यमंत्री ने मुहर लगाई है। हाकिम ने कहा, 'कबीर सांप्रदायिक राजनीति में लिप्त हैं और तृणमूल इसके सख्त खिलाफ है। तृणमूल कांग्रेस सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं रखती। अब उनका पार्टी के साथ कोई संबंध नहीं है।'  

‘अगली बार CM नहीं बन पाएंगी ममता?’—हुमायूं कबीर ने किया विवादित बयान

कलकत्ता  बाबरी मस्‍ज‍िद की नींव डालने का ख्‍वाब देखना हुमायूं कबीर को भारी पड़ा. ममता को लगा क‍ि इससे ह‍िन्‍दू एकजुट हो जाएंगे और उनका सिंहासन डोल जाएगा. आनन फानन में उन्‍होंने हुमायूं कबीर को ही पार्टी से सस्‍पेंड कर द‍िया. लेकिन ममता के इस एक्‍शन ने पश्च‍िम बंगाल का सियासी समीकरण उलझा द‍िया है. ममता बनर्जी के लिए यह स्थिति ‘आगे कुआं, पीछे खाई’ जैसी हो गई है. एक तरफ भाजपा का बढ़ता हिंदुत्व कार्ड है, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी पार्टी का कोर वोटर मुस्लिम समुदाय, जो अब हुमायूं कबीर की बर्खास्तगी को एक ‘विश्वासघात’ की तरह देख सकता है. क्या आगामी विधानसभा चुनावों में ममता का यह दांव उल्टा तो नहीं पड़ेगा? हुमायूं कबीर कोई साधारण विधायक नहीं हैं. मुर्शिदाबाद की राजनीति में उनकी हैसियत एक मास लीडर की है. उनका करियर कांग्रेस से शुरू हुआ, वे मंत्री बने, फिर टीएमसी में आए, बीच में 2019 में भाजपा में गए और फिर टीएमसी में लौट आए. इतनी बार पाला बदलने के बावजूद, उनकी निजी लोकप्रियता खासकर भारतपुर और रेजीनगर इलाके में कभी कम नहीं हुई. अगली बार CM नहीं बन पाएंगी ममता पश्चिम बंगाल में बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान कर चुके विधायक हुमायूं कबीर के निशाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। उन्होंने दावा किया है कि अगले विधानसभा चुनाव के बाद बनर्जी सीएम नहीं बन पाएंगी। मस्जिद की नींव रखने के ऐलान के बाद राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें निलंबित कर दिया था। अब कबीर ने खुद की पार्टी बनाने के संकेत दिए हैं। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में कबीर ने कहा, 'मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री बनना है। 2026 में मुख्यमंत्री फिर मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी। वह शपथ नहीं लेंगी और पूर्व मुख्यमंत्री कहलाएंगी।' उन्होंने शुक्रवार को टीएमसी से इस्तीफा देने की बात कही है। कबीर ने दावा किया था कि वह 6 दिसंबर को बाबरी से मिलती जुलती मस्जिद की नींव रखेंगे। बंगाल में साल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। नई पार्टी बनाने की तैयारी कबीर ने कहा था, 'मैं कल टीएमसी से इस्तीफा दे दूंगा। अगर जरूरत पड़ी तो मैं 22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करूंगा।' उन्होंने पार्टी के जिला अध्यक्ष के साथ बैठक को लेकर कहा, 'मैं यहां जिला अध्यक्ष के साथ मीटिंग के लिए आया हूं और प्रतिक्रिया बाद में दूंगा। लेकिन मुझे पार्टी से निलंबित किया है, विधायक पद से नहीं। पहले मीटिंग होने दीजिए।' बाबरी जैसी मस्जिद बनाने का ऐलान विधायक कबीर ने पहले ऐलान किया था, 'हम 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलदांगा में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे।' इससे पहले उन्होंने कहा था, 'इसे पूरा होने में 3 साल का समय लगेगा। उस कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता शामिल होंगे।' रैली में थे और पार्टी ने निलंबित कर दिया निलंबन की खबर तब सामने आई जब कबीर बहरामपुर में मुख्यमंत्री की एसआईआर विरोधी रैली के आयोजन स्थल पर बैठे थे, जहां तृणमूल ने उन्हें पहले आमंत्रित किया था। कबीर ने इसे 'जानबूझकर किया गया अपमान' बताया और कहा कि उनके खिलाफ 'साजिश' रची गई है। उन्होंने कहा, 'मुझे कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन मैं शुक्रवार या सोमवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा।' कबीर ने कहा कि उनका नया संगठन अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में कुल 294 में से 135 सीट पर उम्मीदवार उतारेगा। सत्तारूढ़ पार्टी में लौटने से पहले कभी कांग्रेस, कभी तृणमूल और कभी भाजपा में रहे कबीर ने कहा कि बेलडांगा में छह दिसंबर का शिलान्यास कार्यक्रम रद्द नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी के लहजे में कहा, '(शिलान्यास कार्यक्रम में) लाखों लोग शामिल होंगे। अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो एनएच-12 जाम किया जा सकता है।' उन्होंने कहा कि उन्हें चुप कराने के लिए उनकी हत्या भी की जा सकती है। कबीर ने कहा कि अगर उन्हें रोका गया, तो वह धरने पर बैठेंगे और 'गिरफ्तारी देंगे'। उन्होंने कहा कि उन्हें 'न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।' अधिकारियों ने कहा कि कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है। ममता बनर्जी हुईं नाराज? एनडीटीवी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विधायक कबीर के फैसले से सीएम बनर्जी नाराज हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सीएम और उनकी पार्टी इस फैसले के साथ नहीं हैं और यह संदेश विधायक को पहुंचा दिया गया है। एक दिन पहले भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी भी इस फैसले से दूरी बनाते हुए नजर आए थे। मुस्लिमों में उनकी पकड़ हुमायूं कबीर की छवि एक ऐसे नेता की है जो समुदाय के मुद्दों पर अपनी ही सरकार से भिड़ने को तैयार रहता है. जब उन्होंने मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर 2025 को ‘बाबरी मस्जिद’ की आधारशिला रखने की बात कही, तो यह महज एक बयान नहीं था. उन्होंने साफ कहा, 25 बीघा जमीन पर इस्लामिक अस्पताल, रेस्ट हाउस, होटल-कम-रेस्टोरेंट, हेलीपैड, पार्क और मेडिकल कॉलेज बनेगा… हुमायूं कबीर को कौन रोक सकता है? मैं चुनौती देता हूं. उनका यह ‘रॉबिनहुड’ वाला अंदाज उन्हें मुस्लिम युवाओं और ग्रामीण वोटरों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है. उनके समर्थकों को लगता है कि ममता दीदी दिल्ली के डर से या हिंदू वोटों के लिए मुस्लिम मुद्दों को दबा रही हैं, जबकि हुमायूं कबीर उनकी आवाज उठा रहे हैं. बाबरी मस्जिद का दांव और ममता की मजबूरी ममता बनर्जी खुद को सेक्यूलरिज्म की सबसे बड़ी पैरोकार मानती हैं. लेकिन हुमायूं कबीर का दांव उनके लिए गले की हड्डी बन गया. अगर ममता बनर्जी हुमायूं कबीर को बाबरी मस्जिद या उसके नाम पर कोई स्मारक बनाने देतीं, तो भाजपा इसे पूरे बंगाल और देश भर में भुना लेती. भाजपा इसे ‘तुष्टिकरण की पराकाष्ठा’ और ‘हिंदुओं का अपमान’ बताकर ध्रुवीकरण करती. यही वजह है कि ममता के सिपहसालार फिरहाद हकीम ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कबीर को सस्पेंड किया. हकीम ने तर्क दिया, हम धर्म के नाम पर भेद करने वाली राजनीति नहीं करते. हुमायूं कबीर भाजपा की मदद कर रहे हैं और बंगाल में आग लगाने की कोशिश कर रहे हैं. ममता बनर्जी ने भी अपनी रैली में बिना नाम लिए कहा, हम सांप्रदायिक राजनीति के खिलाफ हैं, मुर्शिदाबाद के लोग दंगा नहीं चाहते.