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दो आईएएस जॉइंट सेक्रट्री के लिए इम्पैनल, रीवा के अपर कलेक्टर का 8 महीने बाद हुआ रिलीव

भोपाल मध्यप्रदेश कैडर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को केंद्र स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने की दिशा में अहम कदम सामने आया है। 2009 बैच की आईएएस अधिकारी प्रियंका दास को भारत सरकार में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद के लिए बनाए गए पैनल में शामिल किया गया है। इसी क्रम में 2009 बैच के ही मध्यप्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी S. तेजस्वी नाइक का नाम भी संयुक्त सचिव पद के लिए पैनल में शामिल किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इस पैनल में शामिल होना अधिकारियों के अनुभव, कार्यक्षमता और प्रशासनिक दक्षता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। पैनल में शामिल अधिकारियों को भविष्य में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्ति दी जा सकती है। मध्यप्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारियों का इस पैनल में शामिल होना राज्य के प्रशासनिक तंत्र के लिए भी गौरव की बात माना जा रहा है। इससे प्रदेश के अधिकारियों की क्षमता और कार्यशैली को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने का संकेत मिलता है। तबादले के बाद जारी किए आदेश त्रिपाठी के पदोन्नति के सवा साल बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 4 अगस्त 2025 को जारी तबादला सूची में उन्हें सिंगरौली जिले का अपर कलेक्टर बनाया गया। तब से लेकर अब तक रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने त्रिपाठी को सिंगरौली के लिए रिलीव नहीं किया। अब जबकि 9 अप्रैल को जारी आदेश में शासन ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल का तबादला सागर कलेक्टर के पद पर किया है तो रिलीव होने से पहले राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी प्रभाशंकर त्रिपाठी को कलेक्टर पाल ने सिंगरौली में अपर कलेक्टर के पद के लिए रिलीव किए जाने का आदेश जारी किया है। प्रियंका और तेजस्वी अब केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री इधर डीओपीटी ने अलग-अलग आदेश जारी कर एस तेजस्वी नायक 2009 बैच तथा प्रियंका दास 2009 बैच को केंद्र में जॉइंट सेक्रेट्री के पद पर इम्पैनल किए जाने के बाद इसके आधार पर वेतनमान और पदस्थापना के आदेश किए हैं। इसी हफ्ते जारी आदेश में दोनों ही अधिकारियों को जॉइंट सेक्रेट्री के लिए इम्पैनल किया गया है। दोनों ही अधिकारी भोपाल नगर निगम आयुक्त रह चुके हैं। केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय (डीओपीटी) ने दोनों ही अधिकारियों के जॉइंट सेक्रेट्री के लिए इम्पैनल किए जाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके पहले एमपी कैडर के आईएएस रवि सिहाग को विवाह के आधार पर एमपी कैडर से मुक्त किए जाने के आदेश भी केंद्र सरकार ने जारी किए हैं।

प्रियंक मिश्रा बने भोपाल के नए कलेक्टर, प्रदेश में 26 IAS अफसरों का तबादला

 भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार रात एक बड़ी ट्रांसफर लिस्ट जारी की है. इसमें 2008 से लेकर 2017 बैच तक के 26 IAS अफसरों के नाम शामिल हैं. इस फेरबदल में सबसे चर्चित नाम प्रियंक मिश्रा का है, जिन्हें राजधानी भोपाल की कमान सौंपी गई है।  2013 बैच के IAS प्रियंक मिश्रा को धार कलेक्टर से अब भोपाल के नए कलेक्टर बनाया गया है. वहीं, कौशलेंद्र विक्रम सिंह (2010) निवर्तमान भोपाल कलेक्टर को अब मुख्यमंत्री का सचिव नियुक्त किया गया है. साथ ही उन्हें नगर और ग्राम निवेश का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।  इनको मिली नई जिम्मेदारी  भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है। वहीं धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा अब भोपाल के नए कलेक्टर होंगे। नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीणा को वित्त विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं मंडला के कलेक्टर रहे सोमेश मिश्रा नर्मदापुरम के नए कलेक्टर होंगे। तबादलों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गुरुवार को लंबी बैठक हुई। इसके बाद सूची को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने इस अहम बैठक के लिए पूरा दिन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में रिजर्व रखा था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने तबादलों को अंतिम रूप देते हुए आदेश जारी कर दिए। दरअसल, चुनाव आयोग द्वारा अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू कराई गई SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) की प्रक्रिया के बाद ही इन तबादलों की तैयारी शुरू हो गई थी। योजना के अनुसार 22 फरवरी के बाद तबादले किए जाने थे, लेकिन त्योहारों और बजट सत्र के चलते यह फैसला लगातार टलता रहा। 14 अफसरों में 9 महिलाएं शामिल 14 आईएएस अफसरों में 9 महिलाएं हैं। इनमें शिल्पा गुप्ता, प्रतिभा पाल, सोनिया मीणा, शीतला पटले, नेहा मीना, रानी बाटड, राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी का नाम शामिल हैं। इनमें से 5 को कलेक्टर पद पर पदस्थापना मिली है। इनमें प्रतिभा पाल और नेहा मीना पहले से ही अन्य जिलों में कलेक्टर थीं, जबकि राखी सहाय, शीला दाहिमा और बिदिशा मुखर्जी को अन्य पदों से हटाकर पहली बार जिले की कमान सौंपी गई है। पहली बार जिले की कमान     राखी सहाय – कलेक्टर, उमरिया     शीला दाहिमा – कलेक्टर, श्योपुर     बिदिशा मुखर्जी – कलेक्टर, मैहर पहले से कलेक्टर, अब नई जिले की जिम्मेदारी     प्रतिभा पाल – कलेक्टर, सागर।     नेहा मीना – कलेक्टर, सिवनी। प्रतिभा दूसरी अफसर जिसे रीवा के बाद सागर कलेक्टर बनाया प्रीति मैथिल के बाद प्रतिभा पाल ऐसी दूसरी आईएएस हैं जो रीवा जिले की कलेक्टर बनने के बाद सागर कलेक्टर बनी हैं। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में प्रीति मैथिल को रीवा कलेक्टर के बाद सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। तीन महिला अधिकारी को कलेक्टर बनाया, दो के जिले बदले, तीन को हटाया तबादला सूची में महिला अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। इंदौर लोक सेवा आयोग की सचिव राखी सहाय को उमरिया कलेक्टर, सहकारिता विभाग की उप सचिव शीला दाहिमा को श्योपुर कलेक्टर और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप सचिव बिदिशा मुखर्जी को मैहर कलेक्टर बनाया गया है। इसके अलावा, नेहा मीना को झाबुआ से स्थानांतरित कर सिवनी कलेक्टर तथा प्रतिभा पाल को रीवा से सागर कलेक्टर की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, नर्मदापुरम की कलेक्टर सोनिया मीना को हटा कर वित्त विभाग में अपर सचिव और सिवनी कलेक्टर शीतला पटले को लोक सेवा आयोग में सचिव बनाया गया है। मैहर कलेक्टर रानी बाटड़ को सहकारिता विभाग में उपसचिव बनाया है।  नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त बदले नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त कृष्णगाेपाल तिवारी को हटा कर आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण बनाया गया है। उनकी जगह पर आयुक्त सह संचालक नगर तथा ग्राम निवेश श्रीकांत बनोठ को आयुक्त नर्मदापुरम संभाग बनाया गया है। इनको जिले से हटाया शिवपुरी जिले के कलेक्टर रवींद्र कुमार चौधरी को नर्मदा घाटी विकास विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। वहीं, उमरिया कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन को विमानन विभाग का अपर सचिव बनाया गया। सागर कलेक्टर संदीप जी आर को विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह श्रम आयुक्त इंदौर, दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव तथा पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन के संचालक का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।  इन अधिकारियों को भी फील्ड में भेजा विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी सह आयुक्त-सह संचालक संस्थागत वित्त तथा संचालक, बजट राजीव रंजन मीना को धार कलेक्टर, मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास विभाग के उप सचिव प्रताप नारायण यादव को दमोह कलेक्टर, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा जल संसाधन के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे राहुल नामदेव धोटे को मंडला कलेक्टर, आयुष्मान भारत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी योगेश तुकाराम भरसट को झाबुआ कलेक्टर, नगर पालिक निगम रीवा के आयुक्त डॉ.सौरभ संजय सोनवणे को बैतूल कलेक्टर बनाया गया है।  इन कलेक्टर के जिले बदले श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा को शिवपुरी कलेक्टर, झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना को सिवनी कलेक्टर, मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम कलेक्टर, धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को भोपाल कलेक्टर, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को रीवा कलेक्टर, रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को सागर कलेक्टर की कमान सौंपी गई है।  संभाग और मंत्रालय स्तर पर फेरबदल कृष्ण गोपाल तिवारी (2008): नर्मदापुरम कमिश्नर से अब सामाजिक न्याय विभाग के आयुक्त होंगे. शिल्पा गुप्ता (2008): लोक शिक्षण आयुक्त से अब गृह विभाग की सचिव होंगी. अभिषेक सिंह (2009): गृह विभाग से अब आयुक्त, लोक शिक्षण की जिम्मेदारी संभालेंगे. श्रीकांत बनोठ (2009): अब नर्मदापुरम संभाग के नए कमिश्नर होंगे. एसीएस की तर्ज पर डीजी, एडीजी बने संभाग प्रभारी:वरुण कपूर भोपाल, उपेंद्र जैन उज्जैन, पंकज श्रीवास्तव जबलपुर संभाग प्रभारी राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिवों की तर्ज पर स्पेशल डीजी और एडीजी स्तर के अधिकारियों को संंभागीय स्तर पर कानून व्यवस्था की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी है। यह अधिकारी रेंज स्तर पर पदस्थ आईजी के अलावा संभागों की कानून व्यवस्था की निगरानी करेंगे। डीजी वरुण कपूर को भोपाल, उपेंद्र जैन को उज्जैन तथा स्पेशल डीजी पंकज श्रीवास्तव को जबलपुर संभाग का प्रभारी बनाया गया है। यह व्यवस्था प्रदेश में यूसीसी लागू करने के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के फैसले के बाद प्रभावी की गई है।  

हरियाणा में 6 ट्रेनी IAS की पोस्टिंग, विवेक यादव होंगे हिसार सहायक आयुक्त, विशाल को मिला रोहतक, शिवानी को कैथल

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने तुरंत प्रभाव से 6 प्रशिक्षणाधीन आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। अमितेज पांगटे को नूंह तथा मुस्कान श्रीवास्तव को फरीदाबाद में सहायक आयुक्त लगाया गया है। इसी तरह शिवानी पांचाल को कैथल, सोहम शैलेन्द्र को करनाल, विशाल सिंह को रोहतक तथा विवेक यादव को हिसार में सहायक आयुक्त लगाया गया है।

राजस्थान में बड़े प्रशासनिक फेरबदल, टीना डाबी समेत 65 IAS अफसरों के ट्रांसफर, 25 कलेक्टर बदले

जयपुर राजस्थान में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल हुआ है. सूबे की सरकार ने एक साथ 65 आईएएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं, जिससे ब्यूरोक्रेसी में हलचल तेज हो गई है. राज्य के 25 कलेक्टर बदले गए हैं. इस बड़े प्रशासनिक बदलाव में खास बात यह है कि मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रमुख सचिव को छोड़कर करीब सभी अधिकारियों को बदल दिया गया है. इसे सरकार का बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।  आईएएस टीना डाबी का बाड़मेर से सचिन पायलट के इलाके टोंक में कलेक्टर पद पर तबादला हुआ है. टीना की बहन रिया डाबी को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है. जयपुर के कलेक्टर जितेंद्र सोनी को सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी बनाया गया है।  राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को बहुत जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि इतने बड़े स्तर पर एक साथ तबादले कम ही देखने को मिलते हैं।  जयपुर में संदेश नायक को कलेक्टर बनाया गया है, जबकि टोंक की जिम्मेदारी टीना डाबी को सौंपी गई है. उदयपुर में गौरव अग्रवाल और बीकानेर में निशांत जैन को तैनात किया गया है. करौली में अक्षय गोदारा और जोधपुर में आलोक रंजन को जिम्मेदारी दी गई है।  जैसलमेर में अनुपमा जोरवाल, बाड़मेर में चिनमयी गोपाल, प्रतापगढ़ में शुभम चौधरी और सीकर में आशीष मोदी को कलेक्टर बनाया गया है. फलौदी में अंकित कुमार सिंह और बारां में बाल मुकुंद असावा को पोस्टिंग मिली है।  श्रीगंगानगर में अमित यादव, चित्तौड़गढ़ में मंजू, पाली में रविन्द्र गोस्वामी और सिरोही में रोहिताश्व सिंह तोमर को नियुक्त किया गया है. बूंदी में हरफूल सिंह यादव, डीडवाना-कुचामन में अवधेश मीणा और नागौर में देवेंद्र कुमार को जिम्मेदारी दी गई है।  दौसा में सौम्या झा, खैरथल-तिजारा में अतुल प्रकाश, सलूंबर में मुहम्मद जुनैद पीपी, डूंगरपुर में देशल दान और डीग में मयंक मनीष को कलेक्टर बनाया गया है. वहीं, करौली-बहरोड़ में अपर्णा गुप्ता को जिला कलेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया है। 

EWS प्रमाणपत्र विवाद में फंसी केरल कैडर की एमपी मूल की IPS अधिकारी, डिमोशन का संकट

खरगोन  देश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ईडब्ल्यूएस पात्रता की शर्तों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली और केरल कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी निमिषी त्रिपाठी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को लेकर जांच के दायरे में हैं। मामला इसलिए अहम हो गया है क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट उपयोग में तकनीकी त्रुटि पाई जाती है, तो उनकी सेवा में बदलाव तक हो सकता है।  शिकायत के बाद शुरू हुई जांच निमिषी त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा 2023 में 368वीं रैंक हासिल की थी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के तहत उन्हें आईपीएस सेवा मिली। अब नियुक्ति के बाद उनके ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर केंद्र सरकार ने जांच शुरू कर दी। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे मामले की पड़ताल कर रहा है। इस मामले में खरगोन कलेक्टर ने जिले से जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।  केंद्र और राज्य के नियमों में फर्क बना वजह इस मामले की जड़ में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियमों में अंतर बताया जा रहा है। केंद्र सरकार के नियम के अनुसार 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक के प्लॉट वाले परिवार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में नहीं आते, जबकि मध्य प्रदेश के नियम के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक, नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक और नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक पात्रता का नियम है। यही अंतर अब विवाद का कारण बन गया है। कहां उलझा मामला? जानकारी के मुताबिक, निमिषी त्रिपाठी का परिवार नगर पालिका क्षेत्र में रहता है और उनकी मां के नाम करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट है, जो राज्य के नियमों के अनुसार ईडब्ल्यूएस श्रेणी में आता है। लेकिन केंद्रीय सेवाओं के लिए आवेदन करते समय केंद्र सरकार के निर्धारित प्रारूप का प्रमाण पत्र जरूरी होता है, यहीं से पूरा विवाद खड़ा हुआ। मामले में जांच एजेंसियां दो मुख्य पहलुओं पर फोकस कर रही हैं। क्या प्रमाण पत्र फर्जी है? क्या गलत प्रारूप का उपयोग किया गया? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रमाण पत्र वैध तरीके से जारी हुआ है, लेकिन इसके उपयोग को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि ईडब्ल्यूएस श्रेणी अमान्य पाई जाती है, तो नौकरी समाप्त होने की संभावना कम है। हालांकि, सेवा में बदलाव संभव है। ऐसी स्थिति में उन्हें उनकी रैंक के अनुसार अन्य सेवा, जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस में भेजा जा सकता है। 

मध्य प्रदेश में प्रशासनिक स्ट्राइक, करीब 2 दर्जन SP के ट्रांसफर की सूची, जानिए कौन-कौन शामिल

भोपाल  मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर को लेकर हलचल तेज है। होली, रंगपंचमी बीत चुके हैं और ईद आने वाली है और साथ ही हिंदू नववर्ष भी शुरु होने वाला है। अब प्रशासनिक स्ट्राइक की बारी है। एमपी में आईपीएस अफसरों की तबादला सूची लगभग तैयार हो चुकी है। मध्यप्रदेश में पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादलों की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार करीब 20 जिलों में एसपी बदले जा सकते हैं और जल्द ही तबादला सूची जारी होने की संभावना है। प्रस्तावित सूची में करीब 20 जिलों में नए एसपी की पदस्थापना हो सकती है। जिन जिलों में बदलाव की संभावना है। इनकी सूची नीचे है… इन जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं शाजापुर से यशपाल सिंह राजपूत, शिवपुरी से अमन सिंह राठौर,डिंडौरी से वाहिनी सिंह, मंडला से  रजत सकलेचा, छतरपुर से अगम जैन, बुरहानपुर से देवेंद्र कुमार पाटीदार, निवाड़ी से राय सिंह नरवरिया, नीमच से अंकित जायसवाल, दमोह से श्रुतकीर्ति सोमवंशी, सिवनी से सुनील कुमार मेहता, आगर मालवा से विनोद कुमार सिंह, ग्वालियर से धर्मवीर सिंह, उज्जैन से प्रदीप शर्मा, जबलपुर से संपत उपाध्याय के नाम शामिल हैं। कहा जा रहा है कि  गृह विभाग इसा दिशा में तैयारी कर चुका है और कभी भी आदेश जारी हो सकते हैं। तबादला सूची में सबसे ज्यादा फायदा 2020 बैच के पांच आईपीएस अफसरों को होगा, जिन्हें जिलों में एसपी पद की कमान सौंपी जाएगी। क्योंकि अब तक 2019 बैच के आईपीएस भी जिलों में एसपी पद पर आ चुके हैं। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से प्रमोटी आईपीएस बने अधिकारी भी जिले के एसपी बन सकते हैं।

हरियाणा में 23 IAS अधिकारियों के तबादले, प्रशासनिक फेरबदल की घोषणा

चंडीगढ़  हरियाणा में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। राज्यपाल के आदेशानुसार कई IAS अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादले तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इस फैसले का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और विभिन्न विभागों में सुचारु संचालन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। नए आदेश के तहत अधिकारियों को उनके नए पदों पर जल्द से जल्द कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

पांच राज्यों के चुनाव में एमपी के 40 IAS अधिकारियों की ड्यूटी, आयोग ने किए ऑब्जर्वर तैनात

भोपाल  देश के विभिन्न राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए मध्य प्रदेश कैडर के 40 भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा अलग-अलग राज्यों में प्रेक्षक (ऑब्जर्वर) के रूप में तैनात किया गया है। इससे प्रदेश सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के कामकाज पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कई वरिष्ठ और अनुभवी आईएएस अधिकारियों को चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी चुनावी व्यवस्थाओं की समीक्षा करना, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर नजर रखना होगी।  जिन राज्यों में इन अधिकारियों को प्रेक्षक बनाया गया है, उनमें पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरला, पुडुचेंरी और आसाम शामिल हैं। इन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करने के लिए अनुभवी अधिकारियों की तैनाती की गई है। मध्य प्रदेश से जिन अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से प्रमुख सचिव संदीप यादव, जॉन किंग्सले, श्रीमन शुक्ला, स्वतंत्र कुमार सिंह, शिल्पा गुप्ता, सिबी चक्रवर्ती, अजय कटसेरिया, निधि निवेदिता, रोहित सिंह और अनुराग वर्मा के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राहुल फटिंग हरिदास, दीपक आर्य, हरहिका सिंह, आशीष भार्गव, अभिजीत अग्रवाल, दिलीप कुमार, वंदना वैद्य, सपना निगम, केवीएस चौधरी, मनीष सिंह, प्रबल सिपाहा, सौरव सुमन, अवि प्रसाद, सतेंद्र सिंह और बुद्धेश वैद्य सहित अन्य अधिकारी भी चुनाव ड्यूटी पर भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार सूची जारी होने के बाद कुछ अधिकारियों ने अपनी चुनावी ड्यूटी निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी। हालांकि अंतिम निर्णय चुनाव आयोग के स्तर पर ही लिया जाएगा। वहीं, यह भी चर्चा है कि इनमें कई अधिकारी राज्य सरकार के महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत हैं। ऐसे में उनके चुनावी ड्यूटी पर जाने से विभागीय कामकाज की गति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।   

IAS मनु की संपत्ति सबसे बड़ी, मुख्य सचिव से 4 गुना ज्यादा; MP के 12 कलेक्टरों के पास नहीं है अपना घर

भोपाल   प्रदेश में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मनु श्रीवास्तव एमपी में तैनात एसीएस स्तर के अफसरों में सबसे अमीर आइएएस हैं। उनके पास 19.50 करोड़ की अचल संपत्ति है। जबकि स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा एसीएस अशोक बर्णवाल पगार के अलावा अपनी संपत्तियों से सबसे अधिक कमाने वाले अफसर हैं। बर्णवाल के पास 7.50 करोड़ की संपत्ति है। इससे उन्हें हर साल 23.68 लाख रुपए आय हो रही है।  MP में 391 IAS अधिकारियों में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सबसे अमीर हैं। उनके पास 19 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति है, जबकि मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास 4 करोड़ 15 लाख रुपए की संपत्ति है। इस तरह मनु श्रीवास्तव की संपत्ति अनुराग जैन से लगभग 4.7 गुना अधिक है। इसके अलावा प्रदेश के 55 जिलों के कलेक्टरों में से 12 जिलों के कलेक्टरों के पास न तो अपना घर है और न ही खेती की जमीन है। इन अधिकारियों ने अपनी अचल संपत्ति निल बताई है। वहीं 17 कलेक्टर ऐसे भी हैं, जिनके पास मकान और दुकान के साथ-साथ खेती की जमीन भी है। कलेक्टरों में किशोर कन्याल सबसे अमीर जिला कलेक्टरों में गुना कलेक्टर किशोर कन्याल सबसे अधिक संपत्ति वाले अधिकारी हैं। उनके पास करीब 3 करोड़ 18 लाख रुपए की संपत्ति है। उनके पास दो मकान, एक प्लॉट और कृषि भूमि है, जो भोपाल, उत्तर प्रदेश और नोएडा में स्थित है। विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी विवेक अग्रवाल के पास सबसे अधिक जमीन है। उनके पास भटिंडा, गंगानगर, सिरसा, मुक्तसर, पंचकुला, मुल्लानपुर, इंदौर और भोपाल में मिलाकर करीब 65 एकड़ किसान जमीन है। इसके अलावा इंदौर के अपर कलेक्टर नवजीवन पवार के पास सबसे अधिक 20 अलग-अलग प्रॉपर्टी दर्ज हैं। 16 साल में 4.5 लाख का प्लॉट घटकर 1 लाख का हुआ इन सबके बीच नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा का मामला अलग नजर आता है। वर्ष 2010 में उन्होंने 4.5 लाख रुपए में एक प्लॉट खरीदा था। आमतौर पर समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ती है, लेकिन इस मामले में उल्टा हुआ। 4 लाख 50 हजार रुपए का वह प्लॉट अब घटकर केवल 1 लाख रुपए का रह गया है। यानी करीब 16 साल में उस प्लॉट की कीमत लगभग 4.5 गुना कम हो गई है। मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ की संपत्ति मध्य प्रदेश के प्रशासनिक मुखिया यानी प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास कुल 4.14 करोड़ कीमत की अचल संपत्ति है. हालांकि उनके पास 3 राज्यों में संपत्ति है. इसमें भोपाल के प्रेमपुरा नगर में भूखंड, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में 79 लाख कीमत का एक अंडरकंस्ट्रक्शन फ्लैट, जयपुर में एक फ्लैट और शिवाजी नगर भोपाल में 2 करोड़ 72 लाख कीमत का एक मकान है। अलका उपाध्याय के पास करोड़ों की संपत्ति,नहीं दर्शाई कीमत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश कैडर की 1990 बैच की आईएएस अलका उपाध्याय के पास दिल्ली, गुडगांव और भोपाल में मकान, भूखंड हैं. गुडगांव में 2930 स्क्वायर फीट का फ्लैट, दिल्ली में 3244 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, भोपाल में करीब 1 हजार स्क्वायर मीटर का प्लॉट है. इसके अलावा नर्मदापुरम जिले में 2 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जो उन्हें अपने पिता से मिली है. उन्होंने प्रॉपर्टी की मौजूदा कीमत नहीं बताई है।  अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा भी करोड़पति 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा के पास भोपाल के मिंडोरी में 163.4 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत उन्होंने 48 लाख रुपए बताई है. गुजरात के अहमदाबाद में 50 लाख रुपए कीमत का एक ऑफिस, मिंडोरी में 0.25 एकड़ भूमि इसकी कीमत 27 लाख रुपए दिखाई गई है. भोपाल के सेमरी बजाफ्त में 0.580 हेक्टेयर भूमि कीमत 28.92 लाख और मिडोरी में 0.25 एकड़ कृषि भूमि है. इसकी कीमत 20 लाख दिखाई गई है।  अशोक वर्णवाल के पास 7 करोड़ 50 लाख की संपत्ति वर्ष 1990 बैच के अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल के पास कुल अचल संपत्ति 7 करोड़ 50 लाख है. भोपाल के बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि, झारखंड के डुमरी में 1200 स्क्वायर फीट का दो मंजिला मकान, बिसनखेड़ी में 0.202 हेक्टेयर कृषि भूमि और बावड़िया कला में फ्लैट भी है. इसके अलावा बावड़िया कला भोपाल में 2 फ्लैट हैं. इनकी कीमत 4.50 करोड़ रुपए है।  मनोज गोविल के पास 2 करोड़ 64 लाख की अचल संपत्ति 1991 बैच के आईएएस अधिकारी दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ मनोज गोविल ने कुल अचल संपत्ति 2 करोड़ 64 लाख दशाई है. भोपाल के तुलसी नगर में उनका एक फ्लैट, गुडगांव, हरियाणा में एक फ्लैट है।  अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव के पास 20 करोड़ की अचल संपत्ति 1991 बैच के नवकरर्णीय ऊर्जा में अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव का प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में पुस्तैनी 699.86 स्क्वायर मीटर का मकान है, इसकी कीमत 16 करोड़ रुपए है. इसके अलावा गौतम बुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में 3.50 करोड़ रुपए कीमत का एक प्लॉट है।  आशीष श्रीवास्तव भी करोड़पति, नहीं दर्शाई संपत्ति की कीमत 1992 बैच के आईएएस और दिल्ली में केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ आशीष श्रीवास्तव के पास भोपाल के गौंदरमऊ में 240 स्क्वायर मीटर प्लॉट और हरियाणा गुरूग्राम में 2 फ्लैट हैं. इसकी खरीद के समय कीमत 66 लाख रुपए दर्शाई गई है. अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस अपर मुख्य सचिव कैलाश चंद्र गुप्ता के पास जाटखेड़ी, भोपाल में 3858 स्क्वायर फीट पर निर्मित मकान, कटारा, भोपाल में 0.1़6 हेक्टेयर कृषि भूमि, गौहरगंज रायसेन में 220 स्क्वायर मीटर का प्लॉट, इंदौर में 6877 स्क्वायर फीट का प्लॉट और अरेरा कॉलोनी, भोपाल में 588 स्क्वायर मीटर पर मकान है, जिसकी खरीद के समय कीमत 3.95 करोड़ रुपए थी।  वीएल कांताराव के पास भोपाल, तमिलनाडु में करोड़ों की संपत्ति 1992 बैच के आईएएस और केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ वीएल कांताराव का कटारा हिल्स, भोपाल में 0.75 एकड़ भूमि और कांजीपुरम, तमिलनाडु में 2500 स्क्वायर फीट का प्लॉट है।  अनिरूद्ध मुखर्जी के पास 8 करोड़ 45 लाख की संपत्ति 1993 बैच … Read more

एमपी में प्रमोशन में देरी के कारण प्रशासनिक कैडर में गड़बड़ी, 68 IAS, 48 IPS और 87 IFS पद खाली

भोपाल  मध्यप्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के प्रमोशन में लगातार हो रही देरी अब प्रशासनिक ढांचे पर सीधा असर डालने लगी है। हालात यह हैं कि राज्य में आईएएस,आईपीएस और आईएफएस कैडर के कुल 203 पद खाली पड़े हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज, कानून-व्यवस्था और वन प्रबंधन तीनों क्षेत्रों में दबाव बढ़ गया है। 3 कैडर, 203 पद खाली सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में आईएएस के 68 पद, आईपीएस के 48 पद और आईएफएस के 87 पद रिक्त हैं। इन पदों के खाली रहने से कई जिलों में स्थायी कलेक्टर, एसपी और डीएफओ की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। प्रमोटी अफसरों को नहीं मिल पा रहा पूरा मौका प्रदेश में राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा से प्रमोट होकर आने वाले अधिकारियों को सीमित अवसर मिल पा रहे हैं। कई अफसर वर्षों से प्रतीक्षा सूची में हैं, लेकिन केंद्र से समय पर स्वीकृति और कैडर रिव्यू नहीं होने से प्रमोशन अटका हुआ है। केंद्र–राज्य समन्वय की कमी सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती और प्रमोशन की प्रक्रिया केंद्र सरकार से जुड़ी होती है। कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने और रिक्त पद भरने के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन लंबे समय से निर्णय नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर राज्य के प्रशासनिक संचालन पर पड़ रहा है। जिले और विभाग अतिरिक्त प्रभार पर कई जिलों में एक ही अधिकारी के पास दो-दो या तीन-तीन जिलों का प्रभार है। वहीं, पुलिस और वन विभाग में भी वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी हो रही है और फील्ड लेवल पर निगरानी कमजोर पड़ रही है। आने वाले समय में और बढ़ेगी चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रमोशन और नई भर्ती की प्रक्रिया तेज नहीं की गई, तो आगामी वर्षों में रिटायरमेंट के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसका असर विकास कार्यों,कानून-व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण पर साफ दिखाई देगा। प्रमोशन समय पर हों तो सुधार की गुंजाइश इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग की भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भरने वाले पदों के जरिये इस रिक्तता को कम किया जा सकता है लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही और देरी के चलते तीनों ही कैडर की डीपीसी समय से नहीं हो रही है और इसका असर पद रिक्त होने के रूप में साफ दिख रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक अनुभव की टाइम लिमिट को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है। प्रशासनिक और नीतिगत कामों पर सीधा असर अधिकारियों का मानना ​​है कि स्वीकृत पदों के न भर पाने से कई दिक्कतें होती हैं। हालांकि पद रिक्त रहने के कई संरचनात्मक कारण भी बताए जा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से वार्षिक भर्ती सीमित है, जबकि हर साल सेवानिवृत्ति जारी हैं। राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में अधिकारियों की पदोन्नति में देरी ने भी इस अंतर को और बढ़ा दिया है। इसके अलावा कई राज्यों ने भर्ती में समानुपातिक वृद्धि किए बिना अपने कैडर की संख्या बढ़ा दी है।