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गरीबी में पला-बढ़ा बेटा बना IAS अफसर, पिता की मेहनत ने बदली किस्मत

जयपुर कहते हैं अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, रास्ता निकल ही आता है। यह बात सच साबित करते हैं देशल दान चरण, जिन्होंने बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास की और आईएएस बनने का सपना पूरा किया। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। छोटे से गांव से शुरू हुआ सफर देशल दान चरण मूल रूप से राजस्थान के सुमलाई गांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। उनके पिता कुशल दान चरण एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे। इसी दुकान की कमाई से दस लोगों का परिवार चलता था। घर की हालत ऐसी थी कि रोजमर्रा के खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पिता को कर्ज लेना पड़ता था। लेकिन उन्होंने कभी भी बच्चों को पढ़ाई छोड़कर काम करने के लिए मजबूर नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह रास्ता है जो गरीबी से बाहर निकाल सकता है। पिता का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत देशल के पिता हमेशा कहते थे कि हालात चाहे जैसे हों, पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। घर में पैसों की कमी थी, लेकिन सपनों की नहीं। यही सोच बच्चों के अंदर भी बैठ गई। कम संसाधनों में पढ़ाई करना आसान नहीं था। न अच्छे कोचिंग संस्थान, न सुविधाएं, न पढ़ाई का माहौल। लेकिन देशल ने ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने अपनी पढ़ाई पर पूरा फोकस रखा और हर परिस्थिति को चुनौती की तरह लिया। परिवार पर टूटा बड़ा दुख, फिर भी नहीं डगमगाए जब देशल दसवीं कक्षा में थे, तब उनके परिवार पर एक बड़ा दुख आ पड़ा। उनके बड़े भाई, जो नौसेना में थे, एक पनडुब्बी दुर्घटना में शहीद हो गए। इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर का माहौल बदल गया। दुख, जिम्मेदारियां और आर्थिक दबाव सब एक साथ आ गए। लेकिन इसी समय देशल ने ठान लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को संभालने के लिए कुछ बड़ा करना है। उन्होंने इस दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बना लिया। इंजीनियर बनने का सपना और पहली बड़ी सफलता देशल का सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने जेईई मेन परीक्षा की तैयारी शुरू की। सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और पहले ही प्रयास में परीक्षा अच्छे अंकों से पास कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जबलपुर में दाखिला मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। गांव से निकलकर एक प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचना उनके संघर्ष का पहला फल था। यहां से बदला सोचने का नजरिया इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान देशल ने महसूस किया कि वह सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं। यहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का विचार आया। उन्होंने तय किया कि अब लक्ष्य होगा देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में जाना। यह रास्ता आसान नहीं था, क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षा माना जाता है। यूपीएससी की तैयारी, अनुशासन और धैर्य की परीक्षा यूपीएससी की तैयारी केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि धैर्य, मानसिक मजबूती और लगातार मेहनत की मांग करती है। देशल ने बिना किसी शोर-शराबे के, बिना दिखावे के, चुपचाप तैयारी शुरू की। उन्होंने अपनी दिनचर्या सख्त बनाई। समय का पूरा उपयोग किया। कमजोर विषयों पर ज्यादा मेहनत की और लगातार खुद को बेहतर बनाते रहे। उनकी रणनीति साफ थी, कम संसाधन हैं तो मेहनत दोगुनी करनी होगी। संघर्ष से निकली सफलता की कहानी देशल दान चरण ने यह साबित कर दिया कि सफलता किसी बड़े शहर, अमीर परिवार या महंगी कोचिंग की मोहताज नहीं होती। अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत ईमानदार हो, तो एक चाय बेचने वाले का बेटा भी आईएएस बन सकता है। उनकी कहानी सिर्फ परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है जो एक पिता ने अपने बच्चों की पढ़ाई पर रखा, और उस बेटे की जिसने उस विश्वास को सच कर दिखाया।

मध्य प्रदेश में 2026 में होगा पावर स्ट्रक्चर में बदलाव, 32 आईएएस-आईपीएस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति

भोपाल   नया साल 2026 मध्य प्रदेश की नौकरशाही और पुलिस महकमे के लिए बड़े बदलाव लेकर आने वाला है। मध्य प्रदेश कैडर के 16 आईपीएस और 16 आईएएस अधिकारी अगले वर्ष अपनी सेवाएं पूरी कर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। इनमें पुलिस महानिदेशक से लेकर मुख्य सचिव, एडीजी, आईजी, कलेक्टर और संभागायुक्त स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के बाहर जाने से शासन और पुलिस व्यवस्था में व्यापक फेरबदल तय माना जा रहा है। गृह विभाग की ओर से जारी सूची के अनुसार प्रदेश के मौजूदा डीजीपी कैलाश मकवाणा भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के तहत डीजीपी का न्यूनतम कार्यकाल दो साल होना जरूरी है, इसी कारण उनकी रिटायरमेंट तिथि बढ़ाई गई है।  डीजी से लेकर एसपी तक खाली होंगे पद वर्तमान सूची के मुताबिक 2026 में पुलिस विभाग से डीजी रैंक के 4 अधिकारी, एडीजी के 2, आईजी के 5, डीआईजी के 3 और एसपी रैंक के 2 अधिकारी सेवानिवृत्त होंगे। इससे पुलिस मुख्यालय से लेकर रेंज और जिला स्तर तक कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हो जाएंगे। इसमें डीजीपी कैलाश मकवाना, अजय कुमार शर्मा, आलोक रंजन, सोनाली मिश्रा, संजीव समी, आशुतोष राय, ए साई मनोजर, संजय तिवारी, अंशुमान सिंह, अरविंद सक्सेना, हिमानी खन्ना, मिथिलेस शुक्ला, शशिकांत शुक्ला, महेश चंद्र जैन, सविता सोहाने और जगदीश डावर शामिल हैं।    आईएएस कैडर में भी बड़ा बदलाव सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक सेवा में भी 2026 अहम रहने वाला है। 16 आईएएस अधिकारी अगले साल रिटायर होंगे। इनमें सबसे बड़ा नाम मुख्य सचिव अनुराग जैन का है, जिनका कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को पूरा होगा। यदि केंद्र सरकार उन्हें दोबारा सेवा विस्तार नहीं देती है, तो राज्य को नया मुख्य सचिव चुनना पड़ेगा।  मुख्य सचिव के अलावा एसीएस स्तर की अलका उपाध्याय और आशीष श्रीवास्तव, चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार, शिवपुरी कलेक्टर रविंद्र चौधरी और शहडोल कलेक्टर केदार सिंह भी 2026 में रिटायरमेंट की सूची में हैं। इसके साथ ही शिक्षा, खनिज, राजस्व, आयुष और लोकायुक्त जैसे विभागों से जुड़े वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी सेवा से बाहर होंगे। यह आईएएस होंगे रिटार्यड  सितंबर में- मुख्य सचिव अनुराग जैन, अलका उपाध्याय, आशीष श्रीवास्तव, स्मिता भारद्वाज, उमाकांत उमराव, अरुणा गुप्ता, माल सिंह भयडिया, उर्मिला शुक्ला, ललित दाहिमा, सुरेश कुमार, चंद्रशेखर वालिम्बे, रविंद्र कुमार चौधरी, संजय कुमार, संजय कुमार मिश्रा, केदार सिंह और जीएस धुर्वे शामिल हैं।     

मध्य प्रदेश के IAS अधिकारियों को मोदी सरकार में नई जिम्मेदारी, दो अफसरों को मिली बड़ी जिम्मेदारी

भोपाल   मध्य प्रदेश कैडर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जलवा बरकरार है। नए साल की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद जारी इस सूची में मध्य प्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इनका हुआ प्रमोशन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार केरालिन खोंगवार देशमुख (IAS, 1996 बैच) को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद से स्थानांतरित कर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव बनाया गया है। वहीं, असित गोपाल (IFS, 1990 बैच) को टेक्सटाइल मंत्रालय में पदोन्नति दी गई है। अब वे अतिरिक्त सचिव के बजाय विशेष सचिव और वित्तीय सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे। दिल्ली में एमपी कैडर का दबदबा मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी अपनी कार्यकुशलता के कारण केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर हमेशा प्राथमिकता पाते रहे हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड और विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की स्थिति कुछ इस प्रकार है। केंद्र में एमपी से तीन दर्जन अधिकारी वहीं, मध्य प्रदेश कैडर के करीब 35 से 40 आईएएस अधिकारी वर्तमान में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर पर तैनात हैं। इनमें से कई अधिकारी पीएमओ और नीति आयोग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में सक्रिय हैं। आईपीएस अधिकारियों का भी दबदबा एमपी कैडर के लगभग 25 से 30 आईपीएस अधिकारी केंद्रीय एजेंसियों जैसे इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), सीबीआई (CBI), बीएसएफ (BSF) और सीआरपीएफ (CRPF) में प्रतिनियुक्ति पर हैं। कई अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) कार्यालय से भी जुड़े रहे हैं। भारतीय वन सेवा के अधिकारी भी वन क्षेत्र में मध्य प्रदेश के समृद्ध अनुभव को देखते हुए केंद्र में 10 से 12 आईएफएस अधिकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ-साथ अन्य मंत्रालयों में वित्तीय सलाहकार और सचिव स्तर के पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इसलिए चुना जाता है MP विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक क्षमता और मध्य प्रदेश की भौगोलिक-सामाजिक परिस्थितियों के अनुभव के कारण इन अफसरों को केंद्र में नीति निर्धारण और वित्तीय प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है।  

नए साल पर मध्य प्रदेश में करीब 200 अधिकारियों को प्रमोशन, मोहन यादव सरकार का तोहफा

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 200 से ज्यादा आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को नए साल का गिफ्ट दिया है. इन सभी अधिकारियों को प्रमोशन दिया गया है. देर रात राज्य सरकार ने प्रमोशन आदेश जारी कर दिए. प्रमोशन किए गए आईएएस अधिकारियों में उप सचिव, अपर सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी मुख्य रूप से शामिल हैं. इसी तरह 18 आईपीएस अफसरों का भी प्रमोशन किया गया है. इन अधिकारियों को एडीजी से स्पेशल डीजी पद पर पदोन्नति दी गई है. इन IAS अधिकारियों का हुआ प्रमोशन सामान्य प्रशासन विभाग कार्मिक में सचिव पद पर पदस्थ एम सेलवेन्द्रन को प्रमोशन देकर उन्हें प्रमुख सचिव बनाया गया है. हालांकि उनका विभाग नहीं बदला गया है. उधर मध्य प्रदेश कैडर के वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारियों को सुपर टाइम स्केल (पे मेट्रिक-14) में प्रमोशन देकर उन्हें सचिव बनाया गया है. प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड जबलपुर में प्रबंध संचालक अनय द्विवेदी, भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, स्वास्थ्य आयुक्त तरुण राठी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति के कमिश्नर कर्मवीर शर्मा और कोष एवं लेखा विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षकार हैं. उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह, आबकारी आयुक्त अभितीज अग्रवाल, पंचायत संचालक छोटे सिंह, स्वास्थ्य एवं नियंत्रण खाद्य एवं औषधि प्रशासन दिनेश श्रीवास्तव, राजस्व मंडल ग्वालियर सचिव सपना निगम का भी प्रमोशन किया गया है. 2010 बैच के अधिकारी और आयुक्त जनसंपर्क दीपक कुमार सक्सेना, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरएस जादोन का भी प्रमोशन किया गया है. इन अधिकारियों का बदला विभाग उधर राज्य सरकार ने पदोन्नति के बाद राजस्व विभाग में अपर सचिव संजय कुमार को सचिव मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल एवं कल्याण आयुक्त बनाया है. श्रम विभाग में अपर सचिव बसंत कुर्रे को सह संचालक कौशल विकास बनाया गया है. सुरेश कुमार को संभाग आयुक्त चंबल संभाग मुरैना बनाया गया. चंद्रशेखर वालिबे को सचिव मुख्यमंत्री, शीलेंद्र सिंह को सचिव नगरीय विकास एवं अवास विभाग बनाए गए हैं. आईपीएस अधिकारियों का भी हुआ प्रमोशन उधर आईपीएस अधिकारियों का भी प्रमोशन किया गया है. 1994 बैच के अधिकारी एडीजी अजाक आशुतोष राय को प्रमोशन देकर विशेष पुलिस महानिदेशक (अजाक) बनाया गया. 2001 बैच के आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा को प्रमोशन देकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जबलपुर जोन बनाया गया. 1999 और 2008 बैच के अधिकारियों को पुलिस महानिरीक्षक (वेतन मैट्रिक्स-14) के पद पर प्रमोशन किया गया है, जिसमें आईजी साइबर निरंजन बी. वायंगणकर, पुलिस मुख्यालय, पुलिस महानिरीक्षक, साइबर, पुलिस मुख्यालय सियाज ए, पुलिस महानिरीक्षक, शिकायत एवं मानव अधिकार ललित शाक्यवार को प्रमोट किया गया है. एसपी राकेश सगर, राघवेन्द्र सिंह बेलवंशी, किरणलता केरकेट्टा, रियाज इकबाल, असित यादव, कुमार प्रतीक, शिवदयाल को प्रमोशन देकर आईजी बनाया गया है. डीआईजी के पद पर पदोन्नति एसपी खंडवा मनोज कुमार राय, रेल एसपी भोपाल राहुल कुमार लोढ़ा, रेल एसपी जबलपुर सिमाला प्रसाद, धार एसपी मयंक अवस्थी और भोपाल डीसीपी विवेक सिंह को डीआईजी बनाया गया. इसी तरह प्रवर श्रेणी 2012 और 2013 बैच के 11 अधिकारियों को वेतन मैट्रिक्स-13 में स्वीकृत किया गया है. इसमें एसपी बड़वानी जगदीश डाबर और टीकमगढ़ एसपी मनोहर सिंह मण्डलोई शामिल हैं.

मध्य प्रदेश के 32 प्रमुख प्रशासनिक चेहरे 2026 में होंगे रिटायर, मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई IAS-IPS के नाम

भोपाल  मध्य प्रदेश प्रशासनिक गलियारे के लिए साल 2026 बड़े बदलावों वाला साबित होने वाला है। प्रदेश कैडर के 16 आईएएस और 16 आईपीएस अधिकारी अगले साल सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। इन प्रमुख नामों में प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन भी शामिल हैं, जो सितंबर 2026 में रिटायर होंगे। उन्हें दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो सरकार को नए प्रशासनिक मुखिया की नियुक्ति करनी होगी। पदों के लिए मचेगी होड़ इतनी बड़ी संख्या में सीनियर अधिकारियों के रिटायर होने से सरकार के सामने एडीजी इंटेलिजेंस, आईजी लॉ एंड ऑर्डर और माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे अहम पदों के लिए नए चेहरों की तलाश की चुनौती होगी। साथ ही, मुख्य सचिव अनुराग जैन को यदि दोबारा विस्तार नहीं मिला, तो प्रशासनिक मुखिया का पद भी खाली हो जाएगा। गौरतलब है कि साल 2025 में भी 29 अधिकारी रिटायर हुए थे, जिनमें से मुख्य सचिव और डीजीपी को विशेष सेवा वृद्धि (एक्सटेंशन) दी गई थी। यह आईएएस हैं शामिल 16 वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपनी सरकारी सेवाओं से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। मार्च 2026 में माध्यमिक शिक्षा मंडल की चेयरमैन स्मिता भारद्वाज, अप्रैल में राजस्व विभाग के अपर सचिव संजय कुमार, मई में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय, जून के महीने में एमपी खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के एमडी माल सिंह भयड़िया, अगस्त में खनिज साधन विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव और बालाघाट के अपर कलेक्टर जी.एस. धुर्वे, सितंबर में मुख्य सचिव अनुराग जैन और चंबल संभाग के कमिश्नर सुरेश कुमार रिटायर हो रहे हैं। अक्तूबर से दिसंबर तक ये IAS रिटायर होंगे अक्टूबर माह में लोकायुक्त संगठन की सचिव अरुणा गुप्ता और गृह मंत्रालय में पदस्थ आशीष श्रीवास्तव, नवंबर में राजस्व विभाग के अपर सचिव चंद्रशेखर वालिम्बे, कलेक्टर—शिवपुरी के रविंद्र कुमार चौधरी और शहडोल के केदार सिंह, दिसंबर 2026 में राजस्व मंडल के सचिव ललित दाहिमा और आयुष विभाग के अपर सचिव संजय कुमार मिश्रा, आर्कियोलॉजी विभाग की कमिश्नर उर्मिला शुक्ला भी इसी वर्ष सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की सूची में शामिल हैं। रिटायर होने वाले आईपीएस की लिस्ट जनवरी: जगदीश डावर (एसपी, बड़वानी) फरवरी: अंशुमान सिंह (आईजी, लॉ एंड ऑर्डर) मार्च: हिमानी खन्ना (आईजी, सागर रेंज) अप्रैल: सविता सोहाने (डीआईजी, शहडोल) मई: महेश चंद्र जैन (डीआईजी, नारकोटिक्स, इंदौर) जून: संजीव शमी (स्पेशल डीजी, टेलीकॉम) और संजय तिवारी (आईजी, प्लानिंग) जुलाई: आलोक रंजन (डायरेक्टर, एनसीआरबी), अरविंद सक्सेना (आईजी, ग्वालियर रेंज) और शशिकांत शुक्ला (आईजी, एफएसएल) अगस्त: अजय कुमार शर्मा (चेयरमैन, पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन), आशुतोष राय (एडीजी, आजाक पीएचक्यू), ए. साई मनोहर (एडीजी, इंटेलिजेंस) और मिथलेश शुक्ला (आईजी, नर्मदापुरम) अक्टूबर: सोनाली मिश्रा (डीजी, रेलवे पुलिस बोर्ड) दिसंबर: कैलाश मकवाना (डीजीपी)

खंडवा में फर्जीवाड़े का आरोप: कलेक्टर और सीईओ ने कहा, अवॉर्ड के लिए लगाए गए सभी आरोप झूठे

खंडवा   केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान (JSJB 1.0)’ में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए खंडवा जिले को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था। खंडवा के कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ राष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड लेने दिल्ली गए थे। दो करोड़ रुपए की इनाम राशि जिले को मिला था। अब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस इनाम के लिए फर्जीवाड़ा हुआ है। काम दिखाने के लिए एआई की तस्वीरें अपलोड की गईं। इन आरोपों पर खंडवा कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ ने सच बताया है। साथ ही मीडिया की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। छवि धूमिल करने की है कोशिश खंडवा जिला प्रशासन ने आधिकारिक रूप से उस रिपोर्ट को भ्रामक, तथ्यहीन और प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया है। जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का अभियान से कोई संबंध नहीं है। समाचार बिना सत्यापन और अपूर्ण जानकारी के आधार पर प्रकाशित किया गया। अभियान में 1.29 लाख जल संरक्षण कार्यों की फोटो अपलोड डॉ. गौड़ा ने जानकारी दी कि JSJB 1.0 अभियान पिछले वर्ष शुरू हुआ था और 31 मई 2025 को समाप्त हो चुका था। अभियान के दौरान जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण और शहरी स्तर पर जनभागीदारी से विभिन्न संरचनाएं तैयार कराई गईं। मीडिया रिपोर्ट में 1714 फोटो की जानकारी उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में मात्र 1714 फोटो अपलोड करने का दावा किया गया है, जबकि वास्तविक रूप से 1,29,046 कार्यों की फोटो पोर्टल पर अपलोड की गई, जिसका डेस्क और फील्ड वेरिफिकेशन जल शक्ति मंत्रालय द्वारा किया गया। इसी आधार पर खंडवा को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। इन संरचनाओं में रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग, सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट, डगवेल-बोरवेल रिचार्ज, चेकडैम और स्टॉपडैम की मरम्मत, गली प्लग, बोल्डर वॉल, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन पॉन्ड सहित कई कार्य शामिल थे। प्रशासन के अनुसार अभियान में न्यूनतम लागत और अधिकतम जनभागीदारी को सिद्धांत बनाया गया। आरोपों पर दी सफाई अक्टूबर 2025 की जिन फोटो को आधार बनाकर आरोप लगाए गए हैं, वे जल शक्ति अभियान- कैच द रेन के पोर्टल की हैं, जो JSJB 1.0 से पूरी तरह अलग है। जिला पंचायत सीईओ ने कहा कि पुरानी जनसुनवाई शिकायतों को मिलाकर भ्रम फैलाने का प्रयास है। गौड़ा ने कहा कि रिपोर्ट पुरानी जनसुनवाई शिकायतों पर आधारित है, जिन पर पहले ही जांच और कार्रवाई की जा चुकी है। इसे राष्ट्रीय पुरस्कार से जोड़ना एक सुनियोजित भ्रम फैलाना प्रतीत होता है। कौन हैं डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता गौरतलब है कि डॉ नागार्जुन बी गौड़ा 2019 बैच के अधिकारी हैं। हरदा में पोस्टिंग के दौरान भी इन पर जुर्माना माफ करने और जमीन खरीदने के आरोप लगा थे। वह मूल रूप से कर्नाटक के निवासी हैं। एमबीबीएस करने के बाद 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। पहले मणिपुर कैडर मिला था। इसके बाद कैडर ट्रांसफर करवाकर एमपी आए है। अभी खंडवा जिला पंचायत के सीईओ हैं। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जल संरक्षण और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल की वजह से चर्चा में हैं। इसी काम में जिला प्रशासन पर खेल करने का आरोप लगा है।

अनुभव पर भरोसा: रिटायर्ड IAS अधिकारी को मिली अहम भूमिका, अधिसूचना जारी

चंडीगढ भारत सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसमें रिटायर्ड इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) ऑफिसर श्री आर. एस. वर्मा को स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA), हरियाणा का मेंबर अपॉइंट किया गया है। श्री आर. एस. वर्मा के पास BA, LLB, और MBA की डिग्री है और हरियाणा सरकार में उनका 32 साल से ज़्यादा का शानदार एडमिनिस्ट्रेटिव करियर रहा है। अपनी लंबी और शानदार सर्विस के दौरान, उन्होंने कई अहम और सेंसिटिव पोस्ट पर काम किया है और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और एनवायरनमेंटल गवर्नेंस में अहम योगदान दिया है। उन्होंने पहले राज्य सरकार में डायरेक्टर, एनवायरनमेंट, स्पेशल सेक्रेटरी, एनवायरनमेंट, और डिप्टी कमिश्नर, रोहतक जैसे कई दूसरे अहम एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट पर काम किया है। एडमिनिस्ट्रेशन, कानून, मैनेजमेंट और एनवायरनमेंटल मामलों में उनके बहुत ज़्यादा अनुभव से SEIAA, हरियाणा के कामकाज को मज़बूती मिलने की उम्मीद है। यह अपॉइंटमेंट भारत सरकार के तय नियमों के मुताबिक किया गया है, और इस बारे में ऑफिशियल गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। सरकार ने भरोसा जताया है कि श्री आर.एस. वर्मा का अनुभव, ईमानदारी और पर्यावरण और एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों की गहरी समझ हरियाणा में असरदार पर्यावरण मूल्यांकन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में अहम योगदान देगी।

IAS पदों पर IPS नियुक्ति पर हाईकोर्ट ने तेलंगाना सरकार से पूछा कारण

हैदराबाद IAS यानी भारतीय प्रशासनिक सेवा कैडर के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की नियुक्ति पर तेलंगाना हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। अदालत में एक रिट याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें कहा गया था कि इस तरह की नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करती हैं। उच्च न्यायालय ने इस तरह के फैसलों के पीछे कानूनी वजह बताने के लिए कहा है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर तारीख तय की गई है। हैदराबाद के एक वकील और सामाजिक कार्यकर्ता वाडला श्रीकांत ने एक रिट याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता के वकील विजय गोपाल का कहना है कि सरकार का फैसला और खासतौर से जीओ 1342 (जारी 26 सितंबर) जारी करना और उन केंद्रीय कानूनों का उल्लंघन है, जो दो भारतीय सेवाओं की अलग-अलग भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में बताते हैं। इस याचिका में विशेष रूप से तीन अधिकारियों का जिक्र किया गया है। ये IPS अधिकारी उन पदों को संभाल रहे हैं, जो आमतौर पर IAS कैडर के पास होते हैं। इनमें IPS स्टीफन रविंद्र हैं, जो सिविल सप्लाइज कमिश्नर और एक्स ऑफिशियो प्रधान सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। इनके अलावा IPS शिखा गोयल, जो विजिलेंस एंड एनफोर्समेंट में महानिदेशक हैं। साथ ही हैदराबाद के पूर्व आयुक्त सीवी आनंद का नाम है, जो गृह विभाग का विशेष मुख्य सचिव बनाया गया है। एडवोकेट गोपाल का कहना है कि इस तरह की क्रॉस कैडर नियुक्तियां IAS (Fixation of Cadre Strength) Regulations, 2016 जैसे नियमों का उल्लंघन करती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IPS अधिकारियों की प्रधान सचिव रैंक पर नियुक्तियों की प्रथा साल 2014 में बीआरएस सरकार के समय से चली आ रही है। सरकार की तरफ से पेश हुए वकील राहुल रेड्डी ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की थी।

सियासी धरने पर ASI संदीप की पत्नी ने किया खुलासा, IPS पूरन की पत्नी को लेकर आया चौंकाने वाला बयान

रोहतक एएसआइ संदीप आत्महत्या के मामले में परिवार की ओर से लगाए गए आरोप की अब कुछ परतें सामने आ रही हैं। संदीप की पत्नी संतोष की ओर से पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि अर्बन एस्टेट थाना में आइजी वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इस मामले में सुशील को गिरफ्तार करने वाली टीम में उसके पति संदीप लाठर भी शामिल थे। सुशील की गिरफ्तारी के बाद आइजी वाई पूरन कुमार ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद आइजी वाई पूरन कुमार के परिवार ने चंडीगढ़ में धरना दे दिया। शिकायत में कहा गया कि आइजी वाई पूरन कुमार व अन्य के खिलाफ विजिलेंस जांच चल रही थी। इसे लेकर उसके पति तनाव में थे। उनके परिवार के धरने की वजह से उसके पति संदीप कुमार ने मानसिक तनाव में आकर खुद को गोली मार ली। इधर, पुलिस को मामले में अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है। क्योंकि रिपोर्ट के आधार पर भी पुलिस की टीम जांच को आगे बढ़ा पाएगी। सदर थाना पुलिस की टीम ने स्वजन की शिकायत के आधार में जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मौके से बरामद सुसाइड नोट और वीडियो को कब्जे में लिया था। अब पुलिस की टीम सुसाइड नोट को जांच के लिए मधुबन लैब में भेजेगी। क्योंकि रिपोर्ट आने के बाद ही ये स्पष्ट हो पाएगा की सुसाइड नोट की राइटिंग संदीप लाठर की ही है या किसी अन्य की। पुलिस मामले में अन्य तथ्य भी जुटाने में लगी है। 

जिलाधिकारी आज़मगढ़ की साहसिक यात्रा

आज़मगढ़  दिनांक 19 सितम्बर, 2025 को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में  रविंद्र कुमार, आई0ए0एस0, जिलाधिकारी, आज़मगढ़ द्वारा 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के अधिकारी प्रशिक्षुओं को एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रदान किया गया।  कुमार द्वारा फाउंडेशन कोर्स के अंतर्गत अधिकारी प्रशिक्षुओं को पर्वतारोहण एवं ट्रेकिंग से सम्बन्धित साहसिक गतिविधियों पर एक विशेष प्रशिक्षण सत्र प्रदान किया गया। इस सत्र के दौरान  कुमार ने पीपीटी एवं व्याख्यान के माध्यम से प्रशिक्षुओं को न केवल पर्वतीय गतिविधियों की तकनीकी जानकारी दी, ताकि प्रशिक्षु अधिकारियों को दिये गये स्किल से भविष्य में पर्वतीय या आपदा-प्रवण क्षेत्रों अपनी फील्ड पोस्टिंग के दौरान आपदा प्रबन्धन में राहत एवं बचाव कार्यों में मदद मिल सके और जिससे आम  लोगों की जान-माल की सुरक्षा हो सके।  कुमार द्वारा पूर्व में भी कई बार पर्वतारोहण के विषय पर ट्रेकिंग से सम्बन्धित साहसिक गतिविधियों पर प्रशिक्षण सत्र प्रदान किया है।   रविन्द्र कुमार 2011 बैच के आई0ए0एस0 अधिकारी हैं। लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में प्रथम फेज की टेªनिंग के बाद सिक्किम में परीवीक्षा प्रशिक्षण के तहत तैनात थे। सिक्किम में डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग के दौरान वर्ष 2012 में एच0एम0आई0 दार्जीलिंग से बेसिक माउंटेनियरिंग प्रशिक्षण कोर्स एवं एडवांस माउंटेनियरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा  कुमार ने सिक्किम के पर्वतीय क्षेत्रों में लम्बी-लम्बी ट्रेकिंग की एवं पर्वतारोहण का अभ्यास किया।   रविन्द्र कुमार द्वारा वर्ष 2013 में नेपाल रूट से एवरेस्ट अभियान प्रारम्भ किया। 10 दिन की ट्रैकिंग के बाद बेस कैम्प पहुँचे। वहाँ पहुँचने पर लगभग 2 सप्ताह तक अनुकूलन (Acclimatisation) हेतु अभ्यास किया, तत्पश्चात अनुकूल मौसम मिलने पर शिखर की ओर बढ़ना शुरू किया। अंतिम चढ़ाई के दौरान Death Zone में ऑक्सीजन मास्क का प्रयोग किया क्योंकि एवरेस्ट की ऊँचाई पर केवल एक-तिहाई ऑक्सीजन मिलती है। इस वर्ष कुल 9 पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई, जिनमें से दो पर्वतारोहियों से  कुमार की पहले बेस कैम्प में मुलाकात भी हुई थी। उन्हें उन पर्वतारोही की मौत पर गहरा दुःख हुआ। अंततः  रविन्द्र कुमार ने 19 मई 2013 को शिखर पर पहुँचकर भारतीय तिरंगा लहराया।     जून 2013 में एवरेस्ट से लौटने के बाद सिक्किम के विभिन्न जिलो में एस0डी0एम0 एवं ए0डी0एम0 के रूप में तैनाती रही, जहाँ वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव भी करवाया। तत्पश्चात माननीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 02 अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत मिशन का शुभारम्भ किया, तब रविन्द्र कुमार ने तय किया कि स्वच्छ भारत मिशन के बारे में लोगों को जागरूक करने हेतु दूसरी बार एवरेस्ट की चढ़ाई की जाये।  वर्ष 2015 में 5 सिविल सेवकों की एक टीम बनाई गई। जिसे माननीय प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 27 मार्च 2015 को ‘स्वच्छ भारत अभियान‘ के तहत हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया।  कुमार द्वारा टीम का नेतृत्व करते हुए ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत देश के लोगों में स्वच्छता को लेकर जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से नेपाल (दक्षिण) मार्ग से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास किया गया, परन्तु 25 अप्रैल, 2015 को आए विनाशकारी भूकंप के कारण उनका प्रयास विफल हो गया। नेपाल में भूकंप आने से एवरेस्ट पर हिमस्खलन (Avalanche) हुआ। इस भीषण भूकंप ने एवरेस्ट अभियान को गहरा झटका दिया। अभियान के दौरान अचानक आए हिमस्खलन से बेस कैम्प बुरी तरह प्रभावित हुआ। कई टेंट नष्ट हो गए, कई पर्वतारोही घायल हुए और कई लोगो ने अपनी जान गवांई। नेपाल सरकार ने सभी अभियानों को रद्द कर दिया।  कुमार ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए घायल पर्वतारोहियों एवं शेरपाओं को अस्थायी अस्पताल तक पहुँचाने में मदद की। इस मानवीय कार्य एवं सेवा भावना को देखते हुए  रविन्द्र कुमार को हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन, नेपाल ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। यह अभियान भले ही अधूरा रहा हो, लेकिन मानवता और सेवा के मूल्यों ने इसे अविस्मरणीय बना दिया। वर्ष 2019 में जल संरक्षण हेतु जागरूक करने के उद्देश्य ‘स्वच्छ गंगा स्वच्छ भारत एवरेस्ट अभियान’ केे तहत  रविन्द्र कुमार गंगा जल लेकर द्वारा उत्तरी मार्ग (चीन) से दिनांक 23 मई 2019 को विश्व की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट पर पुनः पहुँचे।   कुमार द्वारा एवरेस्ट शिखर पर तिरंगा लहराया एवं गंगाजल अर्पित करते हुए समस्त देशवासियों से जल बचाओ की अपील की।  कुमार द्वारा एवरेस्ट शिखर पर नमामि गंगे, स्वच्छ भारत मिशन एवं उत्तर प्रदेश सरकार का लोगो (प्रतीक चिन्ह्)  भी ले जाया गया। इस वर्ष 11 पर्वतारोहियों की मृत्यु हुई, जिनमें से कुछ साथी अभियान के दौरान मिले भी थे। चढ़ाई के दौरान कई पुरानी मृत देहें भी दिखीं, जो अत्यधिक ठंड के कारण दशकों बाद भी सुरक्षित पड़ी थीं। यह अभियान दृढ़ निश्चय, अनुशासन और भारत की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति श्रद्धा का प्रतीक रहा।   रविन्द्र कुमार भारत के पहले और एकमात्र सिविल सेवक हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर दो बार अलग-अलग रास्तों से चढ़ाई की है, एक बार 2013 में दक्षिण (नेपाल) मार्ग से और 2019 में उत्तर (चीन) मार्ग से। वे उन 15 भारतीयों में से एक हैं, जिन्होंने नेपाल और चीन दोनों मार्गों से माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की है।  कुमार ने माउंट एवरेस्ट के अलावा, उन्होंने 2014 में टिंगचेनखांग पीक (पश्चिम सिक्किम), 2015 में बीसी रॉय पीक (पश्चिम सिक्किम), जनवरी 2019 में तांगलांग-ला पीक (लेह) और मार्च 2019 में रेनोक पीक (पश्चिम सिक्किम) जैसी अन्य चोटियों पर भी चढ़ाई की है।  रविन्द्र कुमार वर्तमान में जिलाधिकारी आज़मगढ़ के पद पर तैनात हैं। वर्ष 2011 बैच के  रविन्द्र कुमार ने सिक्किम में नियुक्ति के दौरान एस0डी0एम0 तथा ए0डी0एम0 के पदीय दायित्वों का निर्वहन किया है। मई, 2016 में उत्तर प्रदेश कैडर में ट्रांसफर होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी, सीतापुर के पद पर रहे, जहां 2017 विधानसभा चुनाव सकुशल सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तत्पश्चात जिलाधिकारी, फर्रूखाबाद के पद पर स्थानान्तरित हुए। उसके बाद डेढ़ साल तक वर्ष 2019 में जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार में मा0 कैबिनेट मंत्री सु उमा भारती जी के निजी सचिव के रूप में कार्य किया, जिस दौरान दूसरी बार एवरेस्ट की सफलतम चढ़ाई की।  एवरेस्ट से लौटने पर जिलाधिकारी, बुलन्दशहर के रूप में अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन किया जहां ‘नागरिक संशोधन विधेयक’ एवं ‘कोविड’ के दौरान बहुत ही साहसिक एवं निडर भाव से सराहनीय कार्य किया।  वर्ष 2021 में जिलाधिकारी, झाँसी के पद पर स्थानान्तरित हुए जहां पर जल संरक्षण हेतु सरकार द्वारा चलाये गये कार्यक्रमों में विशेष अभिरूचि … Read more