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इंडिया-चीन FTA: सबसे बड़ी डील का खेल? फायदे, नुकसान और भारत पर असर

नई दिल्ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बन गई है. इसके साथ ही अमेरिका ने भारत टैरिफ की दर घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. पहले यह दर कुल 50 फीसदी था. इसमें 25 फीसदी टैरिफ और रूस से तेल खरीद के कारण 25 फीसदी पेनाल्टी थी. अमेरिका के साथ इस डील पर सहमति से चंद दिनों पहले 27 जनवरी को ही भारत और ईयू के बीच ट्रेड डील पर हस्ताक्षर किए गए थे. भारत-ईयू ट्रेड डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा गया. इसके बाद अमेरिका के साथ डील पर बनी सहमति को फादर ऑफ ऑल डील कहा जा रहा है. ऐसे अब दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमी यानी चीन के साथ भी ट्रेड के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की रिपोर्ट आई है. ऐसे में एक सहज सवाल यह है कि अगर भारत और चीन के बीच फ्री ट्रेड डील हो जाए तो क्या होगा? इस सवाल का जवाब अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के साथ डील में छिपा है. इन दोनों के साथ भारत का व्यापार हमारे के पक्ष में था. यानी भारत अमेरिका और यूरोपीय यूनियन दोनों को आयात से ज्यादा निर्यात करता है. इस कारण इन पक्षों ने भारत के साथ ट्रेड डील करने को अहमियत दी. उनको भारत के साथ डील के लिए मजबूर होना पड़ा. लेकिन चीन के साथ स्थिति उलट है. भारत चीन से आयात बहुत ज्यादा और निर्यात बहुत कम करता है. ऐसे में अमेरिका और यूरोपीय यूनियन की तरह यहां भारत के पाले में गेंद है. भारत को कोशिश करनी चाहिए कि अपनी शर्तों पर वह चीन को ट्रेड डील करने पर मजबूर करे. 155.6 अरब डॉलर तक पहुंचा व्यापार दरअसल, भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने मंगलवार को चीनी नववर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की कि दोनों देशों के बीच व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है. यह आंकड़ा वैश्विक स्तर पर बढ़ते बदलावों और अस्थिरता के बीच आया है, जहां कई अर्थव्यवस्थाएं चुनौतियों का सामना कर रही हैं. राजदूत ने कहा कि व्यापार में यह वृद्धि भारत-चीन संबंधों में सुधार के स्पष्ट संकेत हैं. खासकर नियंत्रण रेखा पर चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के समाप्त होने के बाद. भारत से चीन को निर्यात 9.7 फीसदी बढ़ा उन्होंने कई सकारात्मक चीजों का जिक्र किया. भारत से चीन को निर्यात में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हो गई है, जिसमें लगभग 20,000 भारतीय तीर्थ यात्री शामिल हुए. चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करना शुरू कर दिया है. इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल हो गई हैं, जिससे लोगों के बीच आवाजाही बढ़ेगी. जू फेइहोंग ने कहा कि अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तियानजिन में सफल मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को रीसेट और फ्रेश स्टार्ट किया. उन्होंने जोर दिया कि दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी और विकास के अवसर हैं. चीनी राजदूत ने भारत की इस वर्ष ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया और कहा कि चीन ब्रिक्स के माध्यम से बहुपक्षीय समन्वय मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है. हालांकि, व्यापार में यह रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत की ओर से कुछ चिंताएं बनी हुई हैं. द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन बना हुआ है, जहां चीन का निर्यात भारत की तुलना में काफी अधिक है. भारतीय पक्ष ने चीन के बाजारों में पर्याप्त पहुंच की कमी, खासकर उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई है. 116 अरब डॉलर का व्यापार घाटा कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया, जो रिकॉर्ड स्तर का है. चीनी राजदूत ने कहा कि उनका देश कभी जानबूझकर व्यापार अधिशेष नहीं बनाता. चीन न केवल विश्व का कारखाना बल्कि विश्व का बाजार भी बनना चाहता है. चीन का टैरिफ स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम (7.3 फीसदी) है, विदेशी निवेश की नेगेटिव लिस्ट छोटी हो रही है और वीजा-फ्री नीति का विस्तार हो रहा है. उन्होंने भारतीय कंपनियों को चीन इंटरनेशनल इम्पोर्ट एक्सपो जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करने की सलाह दी, ताकि उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय उत्पाद चीनी बाजार में पहुंच सकें और व्यापार घाटा सहयोगात्मक अधिशेष में बदल सके. 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंध छह दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. अक्टूबर 2024 में एलओसी पर गतिरोध समाप्त होने के बाद से कई कदम उठाए गए हैं, जैसे सीमा विवाद को सुलझाना और संबंधों को सामान्य बनाना.

टैरिफ की राजनीति में भारत ने दिखाया कमाल, चीन को निर्यात बढ़ा 22%

नई दिल्ली एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ-टैरिफ (Trump Tariff) खेल रहे हैं, तो वहीं भारत ने अपने निर्यातक देशों की लिस्ट में विविधता लाई है. इसका असर भी देखने को मिला है. अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ (US Tariff On India) का बड़ा असर झींगा निर्यात से लेकर टेक्सटाइल सेक्टर तक पर देखने को मिला. लेकिन भारतीय निर्यातकों ने अमेरिकी बाजार में दबाव के बीच दूसरे देशों के बाजारों का रुख किया. रिपोर्ट के मुताबिक, US Tariff Tension के बीच India-China के व्यापार संबंध सुधरे हैं और वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भारत का चीन को निर्यात करीब 22% बढ़ा है.  टैरिफ टेंशन के बीच बढ़ा चीन से कारोबार रिपोर्ट्स की मानें तो India-China Trade में सुधार के चलते अप्रैल-सितंबर 2025 में चीन को भारत का निर्यात 8.41 अरब डॉलर रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही अप्रैल-सितंबर 2024 के 6.90 अरब डॉलर से 22 फीसदी के आसपास की बढ़त दर्शाता है. खास तौर पर अमेरिकी टैरिफ के असर से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स के प्रोडक्ट्स की चीन में अच्छी खासी डिमांड देखने को मिली है. इनमें झींगा और एल्युमिनियम प्रमुख हैं. इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों ने चीन को निर्यात में तेजी दिखाई है.  झींगा समेत इन सेक्टर्स को लगा था झटका बीते दिनों आईं अन्य रिपोर्ट्स पर नजर डालें, तो अमेरिका द्वारा भारत पर 50% का टैरिफ लगाने के बाद से भारतीय झींगा निर्यात पर बुरा असर देखने को मिला है. ग्लोबल डेटा के हवाले से ट्रंप के इस टैरिफ अटैक के चलते भारत से अमेरिका को एयर कार्गो निर्यात में 14 फीसदी की तगड़ी गिरावट दर्ज की गई है, तो आंध्र प्रदेश की झींगा इंडस्ट्री करीब 25,000 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का अनुमान लगाया गया था. इनमें कहा गया था कि अमेरिका को झींगा निर्यात के 50 फीसदी ऑर्डर 50% टैरिफ के बाद से रद्द हुए. इसके अलावा अन्य सबसे प्रभावित सेक्टर्स में एल्युमिनियन और टेक्सटाइल रहा, जिनके लिए अमेरिका सबसे बड़ा बाजार रहा है. बीते दिनों कंफेडेरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री यानी CITI के एक सर्वे में इसके प्रभाव देखने को मिले थे. सर्वे के निष्कर्षों में सामने आया था कि निर्यात पर 50% टैरिफ के चलते कपड़ा और परिधान क्षेत्र कम ऑर्डर और कारोबार में करीब 50% की गिरावट से जूझ रहा है.  चीनी राजदूत बोले- 'भारतीय वस्तुओं का स्वागत' भारत में चीन के राजदूत श फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (पहले X) पर एक पोस्ट के जरिए भी India-China Trade बढ़ने पर खुशी जाहिर की है. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि, 'वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में चीन को भारत का निर्यात 22% बढ़ा है. बीजिंग ज्यादा से ज्यादा भारतीय वस्तुओं का स्वागत करता है और अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने में मदद के लिए तैयार है.' ट्रंप ने भारत पर टैरिफ किया था दोगुना बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ पॉलिसी के तहत शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. लेकिन बाद में रूसी तेल और हथियारों की खरीद को मुद्दा बनाया और भारत पर इसकी खरीद बढ़ाकर यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद करने का आरोप लगाया था. इसके चलते अमेरिका की ओर से भारत पर लागू टैरिफ को दोगुना करते हुए 50% कर दिया गया था, जो 27 अगस्त से लागू है. 

ईस्टर्न बॉर्डर पर जनरल लेवल वार्ता, भारत-चीन ने 10 मुद्दों पर पाया समझौता

नई दिल्ली चीन के विदेश मंत्री वांग यी का भारत दौरा काफी चर्चा में रहा. वह 18 और 19 अगस्त को भारत में थे. उन्होंने यहां भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधिमंडल स्तर की 24वें दौर की वार्ता में हिस्सा लिया. इस दौरान सीमा पर तनाव कम करने, शांति बढ़ाने और विवाद को सुलझाने पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा हुई और 10 बिंदुओं पर सहमति बनी. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की. इस दौरान वांग यी ने कजान में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मुलाकात के बाद हुई प्रगति की तारीफ की और कहा कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से सीमा क्षेत्र स्थिर रहे हैं.  दोनों पक्षों ने कजान में दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी सहमति के क्रियान्वयन में हुई प्रगति का मूल्यांकन किया और भी उल्लेख किया कि 23वें दौर की वार्ता के बाद से चीन और भारत के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी हुई है. – दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर प्रतिबद्धता जताई. साथ ही चीन-भारत संबंधों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रासंगिक मुद्दों को मैत्रीपूर्ण परामर्श के जरिए हल करने की जरूरत पर जोर दिया.  – भारत और चीन के बीचहुई विशेष प्रतिनिधियों की 24वीं दौर की वार्ता में तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों (Traditional Boundary Trade Markets) को फिर से खोलने पर सहमति बनी है. – दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा स्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए और 2005 में दोनों देशों के बीच बनी सहमति के अनुरूप सीमा विवाद को हल करने के लिए एक न्यायसंगत, तार्किक और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य फ्रेमवर्क तलाशा जाए. – दोनों पक्षों ने चीन-भारत सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के कार्य तंत्र (WMCC) के ढांचे के तहत एक विशेषज्ञ समूह बनाने का फैसला किया है, जो उन क्षेत्रों में सीमांकन (Demarcation) की संभावनाओं को तलाशेगा, जहां परिस्थितियां अनुकूल हैं. – दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि WMCC के तहत एक कार्यसमूह बनाया जाएगा, जो सीमा पर प्रभावी प्रबंधन और नियंत्रण को बढ़ावा देगा, ताकि शांति बनी रहे. – पश्चिमी सीमा पर पहले से चल रही सामान्य स्तर की वार्ता के अलावा, पूर्वी और मध्य सीमा क्षेत्रों में भी ऐसी वार्ता शुरू होगी.प श्चिमी क्षेत्र में जल्द ही नए दौर की वार्ता होगी.  – दोनों पक्षों ने राजनयिक और सैन्य चैनलों के माध्यम से सीमा प्रबंधन और नियंत्रण तंत्र का उपयोग करने पर सहमति जताई.  – दोनों पक्षों ने सीमा-पार नदियों पर सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया और सीमा-पार नदियों के लिए विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र का उपयोग करके बाढ़ की जानकारी साझा करने के समझौता ज्ञापन को नवीनीकरण करने पर संचार बनाए रखने पर सहमति जताई. चीनी पक्ष ने मानवीय सिद्धांतों के आधार पर संबंधित नदियों की आपातकालीन जल संबंधी जानकारी भारतीय पक्ष के साथ साझा करने पर सहमति दी. – दोनों पक्षों ने तीन पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर से खोलने पर सहमति जताई. – दोनों पक्षों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की वार्ता आयोजित करने पर सहमति जताई.