samacharsecretary.com

ईरान में युद्ध की संभावना, 10 हजार भारतीयों की जान पर बन आई, कश्मीरी छात्रों के माता-पिता का भावुक निवेदन

 नई दिल्ली ईरान में बीते दो हफ्तों से जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों ने वहां की आंतरिक स्थिति को बेहद अस्थिर बना दिया है. हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं. मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, मृतकों की संख्या 2,000 से अधिक हो चुकी है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे 3,000 से भी ज्यादा बता रही हैं. इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ा है. बुधवार को ईरान ने अचानक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया, जिससे भारत, यूरोप समेत उत्तरी अमेरिका के बीच उड़ानें बाधित हो गईं.  एयर इंडिया और इंडिगो जैसी एयरलाइंस को रूट बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों को देरी और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. दोनों विमान कंपनियों ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि कि रूट में बदलाव करना पड़ा है और कई फ्लाइट्स को कैंसिल करना पड़ा है. कश्मीरी छात्रों समेत 10 हजार भारतीय संकट में ईरान में इस समय करीब 10,000 से 12,000 भारतीय मूल के लोग मौजूद हैं. इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, जिनमें लगभग दो से तीन हजार कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं.  जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने इन छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. बार-बार इंटरनेट बंद होने और हिंसक प्रदर्शनों के चलते इन छात्रों से संपर्क करना मुश्किल हो गया है, जिससे उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. भारतीय दूतावास ने सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है. हालांकि छात्रों और उनके संगठनों का कहना है कि अब तक किसी निकासी योजना की घोषणा नहीं की गई है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है. वहीं, पैरेंट्स सरकार से उनके बच्चों को निष्कासन में मदद की अपील कर रहे हैं. इस अशांति का असर व्यापार पर भी दिख रहा है. पहले ही अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत-ईरान व्यापार में भारी गिरावट आ चुकी है. मौजूदा हालात में शिपिंग रूट्स और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका से भारत के व्यापार घाटे पर और दबाव पड़ सकता है. आंकड़ों के अनुसार, 2019 में ईरान और भारत के बीच $17.6 बिलियन का व्यापार हुआ करता था, जो कि 2024 में घटाकर महज़ $2.3 बिलियन रह गया है. ख़ास बात ये है कि भारत के कुल व्यापार का महज़ 0.2 फीसदी व्यापार ईरान के साथ होता है. हालांकि, शिपिंग रूट बाधित होने की वजह से व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है. चाबहार पोर्ट परियोजना खतरे में: भारत की सामरिक योजना पर बड़ा संकट भारत की सामरिक महत्व की चाबहार बंदरगाह परियोजना, जिसमें लगभग 500 मिलियन डॉलर का निवेश हुआ है, अब गंभीर खतरे में दिखाई दे रही है. यह बंदरगाह भारत के लिए पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने का एक अहम गेटवे है. चाबहार बंदरगाह भारत की रणनीतिक कोशिशों में केंद्रीय स्थान रखता है, लेकिन वहां की वर्तमान अस्थिर राजनीतिक और आर्थिक स्थिति इस परियोजना को प्रभावित कर रही है. बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट एक प्रमुख चिंता का विषय भारत के बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट है. ईरान, जो भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा विदेशी बाजार रहा है, ने इस व्यापार में भी ठहराव देखा है. 2018-19 में भारत का ईरान को निर्यात लगभग 3.51 बिलियन डॉलर था, जो अब 2024-25 में घटकर केवल 1.24 बिलियन डॉलर रह गया है. इससे भारतीय किसानों और निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. क्षेत्रीय संतुलन और स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी पर असर क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति की अनिश्चिता भारत की पश्चिम एशिया नीति के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. भारत ने हमेशा ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित हो सके.  चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के चीनी-प्रायोजित ग्वादर बंदरगाह से मात्र 92 समुद्री मील की दूरी पर है और भारत की रणनीतिक उपस्थिति का प्रतीक है. अगर इस क्षेत्र में अशांति बनी रहती है, तो भारत की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी कमजोर हो सकती है और चीन-पाकिस्तान के प्रभाव में वृद्धि हो सकती है. इसलिए, भारत के लिए यह जरूरी है कि वह चाबहार परियोजना को स्थिर बनाए रखने के लिए अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियों को और मज़बूत करे, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को कायम रखा जा सके.

भारत में T20 विश्व कप खेलने से बांग्लादेश का इनकार, ICC से बदला वेन्यू चाहा

ढाका बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने फैसला किया है कि वह टी20 विश्व कप के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा। भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद उस वक्त से गरमा गया है जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से बाहर करने कहा था। अब बांग्लादेश के एक समाचार वेबसाइट द डेली स्टार के अनुसार, बीसीबी ने टी20 विश्व कप के लिए भारत की यात्रा करने से इनकार कर दिया है। खेल मंत्रालय ने बीसीबी को दिए थे निर्देश इससे पहले, बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के खेल मंत्री ने बीसीबी को निर्देश दिया था कि वह आईसीसी से बांग्लादेश के मुकाबले श्रीलंका में आयोजित करने की मांग उठाने कहा था। बांग्लादेश के खेल मंत्रालय का मानना है कि मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीसीबी के अध्यक्ष और बांग्लादेश के पूर्व कप्तान अमीनुल इस्लाम बुलबुल ने मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने के बाद बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाई थी। चार लीग मैच बांग्लादेश को भारत में खेलने हैं बांग्लादेश को अपने चार लीग मैच में से तीन कोलकाता और एक मुंबई में खेलना है। बांग्लादेश के लीग मैच वेस्टइंडीज (सात फरवरी), इटली (नौ फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ कोलकाता में और नेपाल (17 फरवरी) के खिलाफ मुंबई में है। बांग्लादेश को ग्रुप सी में इटली, नेपाल, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के साथ रखा गया है। आईपीएल का विवाद आईसीसी तक पहुंचा दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर करने से शुरू हुई।  केकेआर ने पिछले महीने मिनी नीलामी में मुस्तफिजुर को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। लेकिन बीसीसीआई के निर्देश पर केकेआर ने इस बांग्लादेशी गेंदबाज को टीम से बाहर कर दिया। मुस्तफिजुर को लेने पर भारत में विरोध हो रहा था और कई राजनेताओं तथा कथावाचक ने इसे लेकर केकेआर के मालिका शाहरुख खान को घेरा था। मुस्तफिजुर को बाहर करने के बाद बीसीबी बौखला गया है और यही कारण है कि उसने भारत में अपनी टीम भेजने से इनकार कर दिया है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला क्रिकेट की वैश्विक संस्था आईसीसी को लेना है जिसके अध्यक्ष जय शाह हैं। बीसीसीआई की भी आई थी प्रतिक्रिया बांग्लादेश के खेल मंत्रालय ने जब बीसीबी को टी20 विश्व कप मैच भारत के बजाए श्रीलंका में कराने की बात कही थी तो इस पर बीसीसीआई की भी प्रतिक्रिया आई थी। बीसीसीआई सूत्र ने कहा था कि सूत्र ने कहा था, आप किसी की मनमर्जी पर खेल का प्रारूप नहीं बदल सकते। यह एक बहुत बड़ी समस्या है। विपक्षी टीमों के बारे में सोचिए। उनके हवाई टिकट, होटल सब बुक होते हैं। साथ ही हर दिन तीन-तीन मैच होने हैं, यानी एक मैच श्रीलंका में होना है। प्रसारण दल भी मौजूद है। इसलिए यह कहना आसान है, करना मुश्किल। कार्यक्रम में अब बदलाव असंभव है क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में एक महीने का समय बचा है।

बांग्लादेश में संकट, यूनुस की जिद के कारण ₹9 हजार करोड़ का नुकसान, भारतीय सूत पर रोक के बावजूद समस्या बरकरार

नई दिल्ली भारत से दुश्मनी का बांग्लादेश अब खामियाजा भुगतने लगा है. मोहम्मद यूनुस के भारत से पंगा लेने का नुकसान बांग्लादेशियों को खूूब हो रहा है. भारत के कारण बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए का चूना लगने वाला है. जी हां, बांग्लादेश की स्थानीय कताई मिलें गंभीर संकट का सामना कर रही हैं. भारतीय सस्ते सूत की वजह से बंगलादेश की मिलों के पास करीब 9 हजार करोड़ रुपए का बिना बिका स्टॉक जमा हो गया है. बांग्लादेश को 9 हजार करोड़ रुपए के सूत का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है. बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन के मुताबिक, मौजूदा वर्ष के अप्रैल से अक्टूबर के बीच भारत से सूत का आयात 137 प्रतिशत बढ़ गया है. भारतीय व्यापारी घरेलू कीमतों से 0.30 डॉलर प्रति किलोग्राम से भी कम दाम पर सूत बांग्लादेश में बेच रहे हैं. इसके चलते प्रतिस्पर्धा में टिक न पाने के कारण लगभग 50 स्थानीय स्पिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं. भारत पर बैन का क्या मकसद? दरअसल, बांग्लादेश मिल्स एसोसिएशन भारतीय सूत पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है. इन लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हम भारतीय सूत पर ज्यादा निर्भर रहे और भारत अचानक आपूर्ति बंद कर दे, तो हमारा परिधान उद्योग भी मुश्किल में पड़ सकता है. अब इसी का असर बांग्लादेश पर उल्टा पड़ रहा है. बांग्लादेश ने क्या फैसला लिया था? गौरतलब है कि अप्रैल में बांग्लादेश ने लैंड पोर्ट के जरिए भारत से सूत आयात पर प्रतिबंध लगाया था, ताकि घरेलू उद्योग को संरक्षण मिल सके. हालांकि, यह प्रतिबंध समुद्री मार्ग से होने वाले आयात पर लागू नहीं होता. बावजूद इसके भारत के सस्ते सूत से बांग्लादेश की कताई मिलें संकट में आ गई है. बांग्लादेश के मिल मालिकों की नहीं सुन रहे यूनुस हालांकि, बांग्लादेश के मिल मालिकों ने कहा है कि वे भारतीय सूत पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं चाहते, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन कम करने की मांग कर रहे हैं, जो फिलहाल भारत के पक्ष में है…इसके अलावा मिल मालिक उन किस्मों के सूत के आयात पर रोक लगाने की मांग की, जिनका उत्पादन देश में पर्याप्त मात्रा में हो रहा है…     बांग्लादेश टेक्सटाइल्स मिल्स एसोसिएशन चाहता है कि बांग्लादेश की सरकार कपास व्यापारियों के लिए वेयरहाउसिंग की सुविधा दे ताकि अमेरिकी कपास का भंडारण कर स्थानीय मिलों में उपयोग किया जा सके. क्योंकि ये वादा पारस्परिक टैरिफ वार्ताओं के दौरान किया गया था. भारत का माल है सस्ता अन्य मिल मालिकों ने बताया कि वे भारतीय सूत से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं, जहां भारतीय सूत 2.50 डॉलर प्रति किलोग्राम बिक रहा है, वहीं कच्चे माल, खासकर कपास की कमी के कारण स्थानीय मिलों को सूत 3 डॉलर प्रति किलोग्राम में बेचना पड़ रहा है. क्यों इंटरनेशनल ब्रांड भी भारतीय सूत की रखते हैं चाहत सस्ते दामों के कारण अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय सूत को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बांग्लादेश का स्पिनिंग सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान आयात 950 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 137 प्रतिशत अधिक है…बांग्लादेश अब भारतीय सूत का सबसे बड़ा आयातक बन चुका है और कुल आयात का 44 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है. बांग्लादेश में कितनी मिलें बंद? उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि भारत कपास किसानों से लेकर फैक्ट्रियों और निर्यातकों तक कई स्तरों पर प्रोत्साहन देता है, जिससे भारतीय सूत बेहद प्रतिस्पर्धी बन गया है. बांग्लादेश में करीब 40-50 मिलें बंद हो चुकी हैं और कई और बंद होने की कगार पर हैं. श्रम कानून में संशोधन से भी अशांति बढ़ सकती है. BTMA ने बांग्लादेश सरकार से 72 घंटे के भीतर नीतिगत समर्थन देने की अपील की है और कहा कि 25 प्रतिशत नकद प्रोत्साहन, बैक-टू-बैक एलसी सुविधा और EDF के जरिए यह क्षेत्र अब भी संभल सकता है.

भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में तनाव, प्रधानमंत्री ने FTA वादे पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने शनिवार को भारत के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए इसे अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई थीं और इसका विरोध किया था। प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा, “हमने अपने पहले कार्यकाल में भारत के साथ FTA करने का वादा किया था और हमने उसे पूरा कर दिया है।” उन्होंने इस समझौते को आर्थिक विकास के लिए अहम बताते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर, आय में वृद्धि और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। लक्सन के अनुसार, यह समझौता 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं के विशाल बाजार के दरवाजे न्यूजीलैंड के लिए खोलेगा। लक्सन ने इसे अपनी सरकार के व्यापक एजेंडे से जोड़ते हुए कहा कि यह समझौता बुनियादी सुधार और भविष्य के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। सत्तारूढ़ गठबंधन में मतभेद हालांकि, इस समझौते ने न्यूजीलैंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के भीतर मतभेद भी उजागर कर दिए हैं। विदेश मंत्री और न्यूजीलैंड फर्स्ट (NZF) पार्टी के नेता विंस्टन पीटर्स ने इस समझौते को न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष करार दिया। पीटर्स ने कहा कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को अपनी पार्टी की चिंताओं से अवगत कराया है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह जयशंकर का पूरा सम्मान करते हैं। पीटर्स ने आरोप लगाया कि समझौते में गुणवत्ता से अधिक रफ्तार को प्राथमिकता दी गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन सहयोगी को चेतावनी दी थी कि भारत के साथ कमजोर और जल्दबाजी में किया गया समझौता न किया जाए।” उनका कहना था कि सरकार को पूरे संसदीय कार्यकाल का उपयोग कर एक बेहतर और संतुलित समझौता करना चाहिए था, जो दोनों देशों के नागरिकों के हित में होता। डेयरी सेक्टर सबसे बड़ा विवाद इस समझौते को लेकर सबसे बड़ा विवाद डेयरी उद्योग को लेकर है। पीटर्स ने आरोप लगाया कि न्यूजीलैंड ने भारत के लिए अपना बाज़ार खोल दिया, लेकिन बदले में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों जैसे दूध, पनीर और मक्खन पर टैरिफ में कोई ठोस रियायत नहीं मिली। उन्होंने कहा, “यह समझौता न्यूजीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है।” यह FTA इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन के बीच हुई बातचीत के बाद घोषित किया गया था। दोनों नेताओं ने कहा कि यह समझौता अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर सकता है और अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर तक का निवेश ला सकता है। वर्ष 2024 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच कुल व्यापार 2.07 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 1.1 अरब डॉलर था। भारत से प्रमुख निर्यातों में दवाइयां शामिल हैं, जबकि न्यूजीलैंड से कृषि और वानिकी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। भारत सरकार के अनुसार, न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पीटर्स ने यह भी आरोप लगाया कि यह समझौता व्यापार से ज्यादा भारतीय श्रमिकों की आवाजाही और भारत में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय नागरिकों के लिए एक नया रोजगार वीजा श्रेणी बनाई गई है, जो ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन जैसे साझेदारों को नहीं दी गई। उन्होंने कहा, “न्यूजीलैंड फर्स्ट हर प्रवासन नीति को इस कसौटी पर परखता है कि क्या वह स्थानीय लोगों के रोजगार और आव्रजन प्रणाली की अखंडता की रक्षा करती है।” पीटर्स के मुताबिक, भारत के साथ किया गया यह समझौता उस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, खासकर ऐसे समय में जब न्यूजीलैंड का श्रम बाज़ार पहले से ही दबाव में है।

कैसे भारत बनेगा AI का केंद्र: 2030 तक लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार

नई दिल्ली केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा को बताया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में स्किल्स के मामले में दुनिया के सबसे अच्छे देशों में शामिल है। उन्होंने स्टैनफोर्ड AI इंडेक्स रिपोर्ट 2025 का हवाला देते हुए कहा कि भारत AI प्रतिभा को अपनी ओर खींचने में पूरी दुनिया में पहले नंबर पर है। हर साल भारत में AI से जुड़ी नौकरियों में करीब 33% की बढ़ोतरी हो रही है। साल 2016 से अब तक भारत में AI प्रतिभा की संख्या तीन गुना से ज्यादा हो गई है। सरकार का मानना है कि AI से भारत मजबूत बनेगा और हर क्षेत्र में फायदा होगा। सरकार की एआई को लेकर प्लानिंग ANI की रिपोर्ट (Ref.) के मुताबिक, मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत सरकार इस बात को अच्छी तरह समझती है कि जैसे-जैसे अलग-अलग क्षेत्र में AI का इस्तेमाल होगा, वैसे-वैसे अधिक स्किल वाले लोगों की जरूरत होगी। सरकार अपनी AI योजनाओं को इसी दिशा में बना रही है। दुनिया भर की रिपोर्ट्स भी भारत के AI कर्मचारियों की तारीफ कर रही हैं। 2027 तक दोगुना होगा एआई टैलेंट बेस अनुमान है कि भारत में AI का टैलेंट बेस 2027 तक दोगुने से ज्यादा हो जाएगा। हर साल करीब 15 प्रतिशत की दर से यह बढ़ोतरी होगी। भारत के AI एक्सपर्ट्स की बढ़ती संख्या का असर दुनिया भर में दिख रहा है। गिटहब पर AI प्रोजेक्ट्स में भारत का योगदान 2024 में दूसरा सबसे बड़ा था, जो कुल प्रोजेक्ट्स का 19.9 प्रतिशत था। इससे साफ पता चलता है कि भारत के AI डेवलपर्स कितने मजबूत हैं। भारत का IndiaAI मिशन मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये आंकड़े भारत सरकार के बड़े स्तर पर AI कौशल, रिसर्च और नवाचार पर ध्यान देने का नतीजा हैं। IndiaAI मिशन के तहत सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इसमें 500 पीएचडी विद्वानों, 5,000 पोस्टग्रेजुएट और 8,000 ग्रेजुएट छात्रों को AI से जुड़े काम के लिए मदद दी जा रही है। छोटे शहरों में 27 IndiaAI डेटा और AI लैब्स बनाए गए हैं, जहां डेटा तैयार करने करने जैसे कोर्स चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, 174 आईटीआई और पॉलिटेक्निक में भी ऐसे लैब्स बनाए जा रहे हैं। ये सब काम दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में हो रहा है ताकि हर जगह के युवाओं को मौका मिले। 2030 तक 1 करोड़ लोग एआई से जुड़े का करेंगे सरकार नासकॉम के साथ मिलकर युवाओं को AI, बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी नई स्किल्स की ट्रेनिंग दे रही है। ये कोर्स राष्ट्रीय कौशल मानकों से जुड़े हैं। प्लेटफॉर्म पर 500 से ज्यादा कोर्स हैं। अब तक 16 लाख से ज्यादा लोग इन कोर्स में नामांकन कर चुके हैं या ट्रेनिंग ले चुके हैं। इसके अलावा एक फ्री नेशनल कोर्स 'युवा AI फॉर ऑल' शुरू किया गया है, जो हर किसी को AI की बेसिक जानकारी देता है। नासकॉम की रिपोर्ट कहती है कि भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल कौशल वाला टैलेंट पूल है। साल 2030 तक भारत 80 से 100 लाख लोगों को AI से जुड़े कामों के लिए तैयार कर सकता है।

भारत के खिलाफ नई चाल! बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश की साजिश का खुलासा

नई दिल्ली बांग्लादेश में जहां एक ओर जमीनी स्तर पर भारत विरोधी प्रदर्शन तेज हो रहे हैं. ठीक इसी तरह समुद्र में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. पिछले दो महीने से भारत ने एक तरह के असामान्य पैटर्न को नोटिस किया है. बंगाल की खाड़ी में लगातार बड़ी संख्या में बांग्लादेश की मछली पकड़ने वाली नौकाएं भारतीय जलसीमा में प्रवेश कर रही हैं.  यह मामला 15 दिसंबर को उस समय सुर्खियां बटोरी, जब बांग्लादेश नौसेना के एक गश्ती पोत ने 16 मछुआरों को ले जा रहे एक भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी, जिससे वह पलट गया. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया जब फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएं तेज हो गई हैं. शेख हसीना सरकार के तख्तापलटन के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी से भारत मे अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है. यूनुस पहले यह दावा भी कर चुके हैं कि बांग्लादेश पूरे क्षेत्र में महासागर का संरक्षक है, जिसे लेकर भारत में असहजता है. इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास मछली पकड़ने वाले भारतीय मछुआरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं. सोमवार को तनाव उस समय और बढ़ गया जब आरोप लगा कि बांग्लादेश नौसेना के एक जहाज ने सीमा के पास पश्चिम बंगाल के 16 मछुआरों को ले जा रहे भारतीय ट्रॉलर को टक्कर मार दी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेशी जहाज की लाइटें बंद थीं, जिससे रात में भारतीय ट्रॉलर उसे देख नहीं सका. FB Parmita नाम का यह ट्रॉलर पलट गया, जिससे सभी मछुआरे समुद्र में जा गिरे. सुबह करीब 6 बजे भारतीय तटरक्षक बल ने 11 मछुआरों को बचाया. पांच अब भी लापता हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक मछुआरे की भाले जैसे हथियार से हत्या कर दी गई. बचे हुए मछुआरों ने आरोप लगाया है कि ट्रॉलर पर सवार सभी लोगों को मारने की कोशिश की गई.  बांग्लादेशी जहाज ने उस समय टक्कर मारी जब मछुआरे जाल डालने की तैयारी कर रहे थे. एक मछुआरे ने बताया कि राजदुल अली शेख नामक व्यक्ति को भाले से मारा गया. सुंदरबन मरीन फिशरमैन वर्कर्स यूनियन की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. हालांकि, भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक यह पुष्टि नहीं की है कि भारतीय ट्रॉलर ने समुद्री सीमा पार की थी या बांग्लादेश नौसेना का जहाज भारतीय जलसीमा में दाखिल हुआ था. उधर, बांग्लादेश ने इन रिपोर्टों को भ्रामक बताते हुए दावा किया है कि उसका गश्ती पोत घटनास्थल से 12 मील दूर था. इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है. विदेश मामलों के विशेषज्ञ रमन मूर्ति ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा कि यह उकसावा है. वे भारत के साथ टकराव चाहते हैं. यही उनके दयनीय अस्तित्व का एकमात्र रास्ता है.  एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित उकसावा है, जिसका मकसद हमें फंसाना है. भारतीय जलसीमा में बांग्लादेशी नौकाएं यह सब ऐसे समय में हो रहा है, जब बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं की भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में घुसपैठ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. 16 दिसंबर को ही भारतीय तटरक्षक बल ने दो बांग्लादेशी मछली पकड़ने वाली नौकाओं को भारतीय जलसीमा में घुसने के आरोप में पकड़ा.  यह कोई अकेली घटना नहीं है. बीते कुछ महीनों में भारत कम से कम आठ बांग्लादेशी नौकाओं और करीब 170 मछुआरों को पकड़ चुका है. भारत-विरोधी भावनाओं के साथ इन घटनाओं का बार-बार होना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है. भारत-विरोधी बयानबाजी में तेजी बांग्लादेश में चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से इस तरह की गतिविधियों में इजाफा हुआ है. बांग्लादेश सरकार के अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश ने न सिर्फ पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाई हैं, बल्कि कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और पहले प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों को भी जगह दी है. इसी बीच, नवंबर में पाकिस्तान नौसेना प्रमुख ने बांग्लादेश का तीन दिवसीय दौरा किया. 1971 के बाद पहली बार किसी पाकिस्तानी नौसेना का कोई अधिकारी बांग्लादेश के उच्चस्तरीय दौरे पर रहा. एक संसदीय समिति ने यहां तक कहा है कि ढाका में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते भारत को 1971 के युद्ध के बाद से सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. शुक्रवार को बांग्लादेश में एक बार फिर भारत-विरोधी प्रदर्शन और हिंसा देखने को मिली. यह हिंसा कट्टरपंथी नेता और भारत विरोधी बयानबाजी  के लिए कुख्यात शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की, जिसे नकाबपोश हमलावरों ने गोली मार दी थी.

भारत ने AI क्षेत्र में तीसरा स्थान हासिल किया, UK और साउथ कोरिया को पछाड़ा

 नई दिल्ली भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सेक्टर में बड़ी छलांग लगाई है. Stanford University की 2025 Global AI Vibrancy Tool रिपोर्ट (2024 के डेटा पर आधारित) में भारत दुनिया में तीसरी पोजिशन पर है. रिपोर्ट की मानें, तो भारत को 21.59 स्कोर मिला है. इस लिस्ट में भारत सिर्फ अमेरिका और चीन से पीछे है.  जहां अमेरिका का स्कोर 78.6 है, जबकि चीन का स्कोर 36.95 है. एक साल पहले तक भारत 7वें स्थान पर था और महज एक साल में भारत ऊंची छलांग लगाकर तीसरे पायदान पर पहुंच गया है.  क्या है स्टैनफोर्ड का ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल?  ये टूल एक ऑनलाइन डैशबोर्ड है, जो देशों को AI इकोसिस्टम में उनकी एक्टिविटी और कॉम्पिटेटिवनेस के आधार पर रैंक करता है. ये डैशबोर्ड देशों का आकलन 7 पिलर- रिसर्च, टैलेंट, इकोनॉमी, पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रिस्पॉन्सिबल AI और पब्लिक ओपिनियन के आधार पर करता है.  जहां इस लिस्ट में भारत पिछले साल 7वें स्थान पर था, इस साल तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. भारत ने साउथ कोरिया और यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़ दिया है.  7वें से तीसरे नंबर पर सिर्फ एक साल में भारत कैसे पहुंचा?  भारत के तेजी से आगे बढ़ने के कई कारण हैं. रिपोर्ट की मानें, तो मजबूत पॉलिसी, तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और AI टैलेंट का बड़ा पूल भारत को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभा रहा है.  इसकी वजह से भारत कई मोर्चों पर मजबूत हुआ है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि भारत को AI के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए 'नई और बड़ी पहलों' का सीधा फायदा मिला है. इन्हीं कदमों के दम पर भारत ने कई विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए ग्लोबल AI रेस में अपनी स्थिति मजबूत की है. स्टार्टअप और प्राइवेट सेक्टर पुश कितना जरूरी है?  भारत की AI वाइब्रेंसी तेजी से आगे बढ़ते स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस इकोसिस्टम से जुड़ी हुई है. स्टार्टअप और एंटरप्राइसेस फाइनेंस से लेकर हेल्थकेयर, एजुकेशन और लॉजिस्टिक तक विभिन्न सेक्टर्स में AI को जोड़ रहे हैं. भारत के बड़े डिजिटल बाजार और एक्टिव कंपनियां इसे उभरते मार्केट्स में सबसे अधिक कॉम्पिटेटिव AI इकोनॉमी में से एक बनाती हैं. भारत का टैलेंट एडवांटेज कितना बड़ा है?  भारत AI टैलेंट का ग्लोबल पावर हाउस है. AI हायरिंग में भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ हासिल की है. साल 2024 में भारत AI से जुड़े GitHub प्रोजेक्ट्स में सबसे ज्यादा योगदान करने वाला दूसरा देश बन गया है. AI स्किल पेनिट्रेशन के मामले में भी भारत दुनिया के टॉप देशों में शामिल है. यह रैंकिंग भारत की मजबूत इंजीनियरिंग वर्कफोर्स को दिखाती है.  क्या भारत वास्तव में AI रिसर्च और इनोवेशन में मजबूत है?  भले ही भारत, अमेरिका और चीन से पीछे है, लेकिन AI पब्लिकेशन और पेटेंटिंग में भारत के सुधार साफ नजर आते हैं. ये दोनों ही फैक्टर R&D पिलर के लिए महत्वपूर्ण हैं. स्टैनफोर्ड के AI इंडेक्स के मुताबिक भारत लगातार अपनी AI आउटपुट क्षमता बढ़ा रहा है और खुद को एक स्ट्रैटेजिक AI डेवलपमेंट हब के तौर पर स्थापित कर रहा है. खासकर एकेडमिक-इंडस्ट्री के बीच बढ़ता सहयोग, भारत को मजबूत कर रहा है.  सरकार का क्या रोल है?  यहां IndiaAI Mission एक प्रमुख प्लेयर है. इस मिशन को केंद्रीय कैबिनेट ने अगले 5 सालों के लिए लगभग 10,300–10,372 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी थी. इसके तहत 10 हजार से ज्यादा GPUs को कंप्यूटिंग कैपेसिटी बढ़ने के लिए लगाना, एक नेशनल नॉन-पर्सनल डेटा प्लेटफॉर्म डेवलप करना और सुरक्षित और भरोसेमंद AI के लिए फ्रेमवर्क तैयार करना है. इसका सीधा असर पॉलिसी, गवर्नेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पिलर्स पर पड़ा है.  हाई रैंकिंग के बाद भी भारत अभी कहां पिछड़ रहा है? एनालिस्ट को यहां कई गैप्स नजर आ रहे हैं. कटिंग-एज AI रिसर्च और ग्लोबल विजिबल फाउंडेशनल मॉडल्स, चीन और अमेरिकी के मुकाबले हाई-वैल्यू प्राइवेट इन्वेस्टमेंट फ्लो, डेटा क्वालिटी और एडवांस R&D कैपेसिटी में बॉटलनेक स्थिति बड़ी चुनौतियां हैं. भारत को प्रमुश शहरी केंद्रों के आगे रिस्पॉन्सिबल AI रेगुलेशन और एक्सेस पर काम करने की जरूरत है.  भारत के AI फ्यूचर के लिए ये रैंकिंग क्या मायने रखती है?  तीसरे स्थान पर होना ये दिखाता है कि भारत दुनिया की सबसे ज्यादा कॉम्पिटेटिव AI पावर में से एक है. साथ ही भारत लोअर और मिडिल इनकम वाले देशों के आगे खड़ा है. हालांकि, फ्रंटियर कैपेबिलिटी के मामले में अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत काफी पीछे है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर भारत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बनाए रखता है, रिसर्च और इनोवेशन पर दोगुना जोर दे और एथिकल व इन्क्लूसिव AI गवर्नेंस को मजबूत करता है, तो आने वाले में दशक में भारत की AI ग्रोथ रेट काफी तेज हो सकती है.  

भारत को टेस्ट में शर्मनाक हार, हार्मर की तूफानी पारी, साउथ अफ्रीका ने 408 रन से शिकस्त दी

गुवाहाटी गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में हुआ दूसरा टेस्ट भी साउथ अफ्रीका की टीम ने जीत लिया. भारत के सामने 549 रनों का टारगेट था. लेकिन भारतीय टीम मैच के पांचवें द‍िन महज 140 रनों पर स‍िमट गई. टेम्बा बावुमा की कप्तानी  वाली साउथ अफ्रीकी टीम ने भारत को 408 रन से हराकर शानदार जीत दर्ज की. जो भारत की टेस्ट क्रिकेट में रनों के ल‍िहाज से सबसे बड़ी हार रही.  मेहमान टीम ने पहली पारी में 489 रन बनाए और दूसरी पारी में 260/5d पर पारी घोषित कर दी. इसके बाद भारत के सामने 549 रन का विशाल लक्ष्य था.  भारतीय टीम दबाव में टूट गई और पहली पारी में सिर्फ 201 तथा दूसरी पारी में 140 रन ही बना सकी. अफ्रीका के गेंदबाजों ने दोनों पारियों में भारतीय बल्लेबाज़ों को जमने नहीं दिया. दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका की ओर से साइमन हार्मर ने 6 विकेट झटके और मैच में कुल 9 व‍िकेट झटके.  भारतीय टीम का 25 साल बाद जीती सीरीज  साल 2000 में हैंसी क्रोनिए के नेतृत्व में साउथ अफ्रीका ने भारत को 2-0 से हराकर घरेलू टेस्ट सीरीज में व्हाइटवॉश किया था. वहीं अफ्रीकी टीम ने तब आख‍िरी बार भारत में सीरीज भी जीती थी. तब पहला मैच मुंबई में हुआ जिसे अफ्रीकी टीम ने 4 विकेट से जीता. वहीं दूसरा टेस्ट मैच बेंगलुरु  में हुआ, जिसे तब प्रोट‍ियाज टीम ने एक पारी और 71 रन से जीता था. ऐसे में टेम्बा बावुमा ने कोलकाता और अब गुवाहाटी टेस्ट जीतकर हैंसी क्रोन‍िए के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली और सीरीज में भारत का सूपड़ा साफ क‍िया. ध्यान रहे साउथ अफ्रीका की टीम ने कोलकाता टेस्ट 30 रनों से जीता था.   भारत की दूसरी पारी में भी शुरुआत खराब रही. यशस्वी जायसवाल (13) सस्ते में लौटे, मार्को जानसेन की गेंद पर विकेटकीपर काइल वेरेने ने कैच लपका. कुछ देर बाद केएल राहुल (6) भी साइमन हार्मर की गेंद पर बोल्ड हो गए. पांचवें द‍िन भारत ने 27/2 के स्कोरकार्ड से बल्लेबाजी करनी शुरू की. लेकिन स्कोरकार्ड में 13 रन और जुड़े और कुलदीप यादव 5 रन पर साइमन हार्मर की गेंद पर बोल्ड हो गए. इसी ओवर (24वें) में ध्रुव जुरेल भी आउट हुए. इसके बाद भारतीय कप्तान पंत ने थोड़े तेवर द‍िखाए और एक चौका और छक्का जड़कर टीम का स्कोर 58 तक ले गए, लेकिन वो भी हार्मर की गेंद पर म‍िले एक्स्ट्रा बाउंस पर एडेन मार्करम को 13 रन पर कैच थमा बैठे. टी ब्रेक के बाद साई सुदर्शन का धैर्य भी जवाब दे गया और वो 139 गेंदों पर 14 रन बनाकर सेनुरन मुथुसामी का श‍िकार बने. वॉशिंगटन सुंदर (16 रन, 44 गेंदों में)  भी ज्यादा कुछ नहीं कर पाए और हार्मर ने उन्हें पवेलियन भेजा. नीतीश रेड्डी ने एक बार फ‍िर न‍िराश किया और वो 0 पर आउट हुए. रवींद्र जडेजा ने रेड्डी के आउट होने के बड़ा शॉट लगाने की कोश‍िश की, लेकिन वो स्टम्प आउट हो गए; आउट होने वाले आख‍िरी बल्लेबाज मोहम्मद स‍िराज रहे.   व‍िकेट पतन: 1-17 (यशस्वी जायसवाल, 6.1 ओवर), 2-21 (केएल राहुल, 9.2 ओवर), 3-40 (कुलदीप यादव, 23.3 ओवर), 4-42 (ध्रुव जुरेल, 23.6 ओवर), 5-58 (ऋषभ पंत, 31.2 ओवर), 6-95 (साई सुदर्शन, 47.5 ओवर),  7-130 (वॉशिंगटन सुंदर, 60.4 ओवर), 8-138 (नीतीश कुमार रेड्डी, 62.1 ओवर), 9-140 (रवींद्र जडेजा, 63.1 ओवर इस मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने अपनी पहली पारी में 489 रनों का स्कोर खड़ा किया था. जवाब में भारत ने अपनी पहली पारी में सिर्फ 201 रन बनाए. यानी पहली इनिंग्स के आधार पर साउथ अफ्रीका को 288 रनों की बड़ी लीड मिली. साउथ अफ्रीका अपनी दूसरी पारी 260/5 रन बनाकर घोष‍ित की, इस तरह भारत के सामने यह टेस्ट जीतने के ल‍िए 549 रनों का टारगेट है.  टीम इंडिया को सीरीज ड्रॉ कराने के लिए ये मैच जीतना ही होगा. भारतीय टीम को कोलकाता में आयोजित सीरीज के पहले टेस्ट मैच में 30 रनों से हार झेलनी पड़ी थी. स्टब्स ने जड़े 94, 260/5 पर अफ्रीका की दूसरी पारी घोष‍ित  साउथ अफ्रीकी टीम ने दूसरी पारी में ट्र‍िस्टन स्टब्स के 94 रनों की बदौलत दूरी पारी में 5 व‍िकेट के नुकसान पर 260/5 का स्कोर बनाया. स्टब्स के आउट होते ही टेम्बा बावुमा ने पारी घोष‍ित कर दी.   दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका की शुरुआत सधी रही. खेल के तीसरे दिन के आखिरी सेशन में रयान रिकेल्टन और एडेन मार्करम ने भारतीय गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और 8 ओवर्स बिना किसी क्षति के निकाले. स्टार तेज गेंदबाजों मोहम्मद सिराज और जसप्रीत बुमराह इस दौरान नई गेंद से कमाल नहीं कर पाए. खेल के चौथे दिन रवींद्र जडेजा ने भारतीय टीम को पहली कामयाबी दिलाई. जडेजा ने रयान रिकेल्टन (35 रन) को मोहम्मद सिराज के हाथों कैच आउट कराया. रिकेल्टन और एडेन मार्करम के बीच पहले विकेट के लिए 59 रनों की साझेदारी हुई. इसके बाद जडेजा ने एक बार फ‍िर अपनी फ‍िरकी का जाल ब‍िछाया और एडेन मार्करम को बोल्ड कर दिया. थोड़ी देर बाद ही टेम्बा बावुमा 3 रन के स्कोर पर वॉश‍िंगटन सुंदर की गेंद पर चलते बने. इसके बाद स्टब्स और टोनी डी जोरजी के बीच लंबी 101 रनों की पार्टनरश‍िप हुई. लेक‍िन इस पार्टनरश‍िप का अंत रवींद्र जडेजा ने जोरजी को 49 रनों पर आउट कर क‍िया. साउथ अफ्रीका को पांचवां झटका स्टब्स के रूप में लगा, ज‍िन्होंने 180 गेंदों पर 94 रन बनाए और जडेजा की गेंद पर 4 व‍िकेट लिए. भारतीय टीम की ओर से सबसे सफल गेंदबाज जडेजा ही रहे, ज‍िन्होंने 62 रन देकर 4 विकेट झटके.    

भारत में बढ़ी iPhone मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू बाजार में बिक्री भी रही मजबूत

नई दिल्ली   दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है। एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है। कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”

गिल की जगह नए खिलाड़ी को मौका, SA की ठोस ओपनिंग से टीम इंडिया दबाव में

गुवाहाटी गुवाहाटी के बारसापारा स्टेड‍ियम में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 2 मैचों की सीरीज का दूसरा टेस्ट  (22 नवंबर) शुरू हो गया है. जहां साउथ अफ्रीकी टीम पहले बल्लेबाजी कर रही है. मैच में टॉस अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा ने जीता था. अफ्रीकी टीम की ओर से एडेन मार्करम, र‍यान रिकेल्टन ओपन‍िंंग करने आए हैं. इस मुकाबले की लाइव कवरेज और स्कोरकार्ड के लिए इस पेज को लगातार र‍िफ्रेश करते रहें.  भाारत और साउथ अफ्रीका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा एवं आखिरी मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में 22 नवंबर (शनिवार) से खेला जा रहा है. इस मुकाबले में साउथ अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी का निर्णय लिया. यानी भारतीय टीम को इस मुकाबले में पहले गेंदबाजी करनी पड़ी है. इस मुकाबले के लिए दोनों टीम्स की प्लेइंग-1 में बदलाव देखने को मिले हैं. मुकाबले में ऋषभ पंत भारतीय टीम की कप्तानी कर रहे हैं क्योंकि नियमित कप्तान शुभमन गिल नेक इंजरी के चलते दूसरे टेस्ट मैच से बाहर हो गए थे. शुभमन की जगह बैटिंग ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी को इस मैच में मौका मिला है. वहीं स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर अक्षर पटेल भी यह मुकाबला नहीं खेल रहे हैं. अक्षर की जगह साई सुदर्शन की प्लेइंग-11 में एंट्री हुई है. साउथ अफ्रीका ने भी अपनी एकादश में एक बदलाव किया है. कॉर्बिन बॉश की जगह भारतवंशी स्पिनर सेनुरन मुथुसामी को मौका मिला है. मुथुसामी बाएं हाथ के स्पिनर हैं, साथ ही वो बाएं हाथ के उपयोगी बल्लेबाज भी हैं. मुथुसामी के परदादा-परदादी तमिलनाडु के वेल्लूर के रहने वाले थे और वो बाद में साउथ अफ्रीका चले आए थे. भारतीय टीम गुवाहाटी टेस्ट मैच में चार स्पेशलिस्ट बल्लेबाज, एक विकेटकीपर, 2 स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर, 1 बैटिंग ऑलराउंडर, एक विशेषज्ञ स्पिनर और दो तेज गेंदबाज के साथ उतरी है. दूसरी ओर मेहमान साउथ अफ्रीकी टीम पांच स्पेशलिस्ट बैटर, तीन ऑलराउंडर, एक स्पिन बॉलिंग ऑलराउंडर और दो विशेषज्ञ स्पिनर के साथ उतरी है. भारत- अफ्रीका की प्लेइंग 11 में कितने बदलाव?  भारतीय टीम ने इस मुकाबले में प्लेइंग 11 में 2 बदलाव किए और साउथ अफ्रीकी टीम ने एक बदलावा किया. शुभमन ग‍िल की जगह नीतीश रेड्डी को मौका दिया गया. वहीं अक्षर पटेल को टीम से बाहर कर साई सुदर्शन को टीम में लाया गया. साउथ अफ्रीकी टीम में भी एक बदलाव हुआ है. वहीं कॉर्बिन बॉश  की जगह अफ्रीकी टीम में स्प‍िनर सेनुरन मुथुसामी को लाया गया है. ऐसे में अफ्रीकी टीम 3 स्प‍िनर्स के साथ उतरी है, उनके पास पहले से ही केशव महाराज और साइमन हार्मर हें.  गुवाहाटी टेस्ट में भारत की प्लेइंग-XI: यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, वॉशिंगटन सुंदर, ध्रुव जुरेल, ऋषभ पंत (कप्तान, विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, नीतीश रेड्डी, साई सुदर्शन, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज गुवाहाटी टेस्ट में साउथ अफ्रीका की प्लेइंग-XI: एडेन मार्करम, र‍यान रिकेल्टन, वियान मुल्डर, टेम्बा बावुमा (कप्तान), टोनी डी जोरजी, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरेने (विकेटकीपर), साइमन हार्मर, मार्को जानसेन, सेनुरन मुथुसामी, केशव महाराज गुवाहाटी में नई परंपरा की शुरुआत  गुवाहाटी स्टेडियम में यह पहला टेस्ट मैच है. यहां टॉस सुबह 8:30 बजे हुआ और मैच 9 बजे शुरू होगा. पांचों दिन पहला सत्र 9 से 11 बजे तक होगा. इसके बाद 20 मिनट का टी-ब्रेक लिया जाएगा. फिर दूसरा सत्र 11.20 बजे से 1.20 बजे तक होगा. दूसरे सत्र की समाप्ति के बाद 40 मिनट का लंच ब्रेक निर्धारित किया गया है. फिर दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक आखिरी सत्र होगा. यदि निर्धारित समय में पूरे ओवर्स नहीं होते हैं तो खेल को आधा घंटा बढ़ाया भी जाएगा. यानी मुकाबला शाम 4.30 बजे तक चल सकता है. कोलकाता टेस्ट में क्या हुआ था टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका के हाथों कोलकाता के ईडन गार्डन्स में हुए टेस्ट मैच में 30 रनों से हार झेलनी पड़ी थी. भारतीय टीम को जीत के लिए 124 रनों का टारगेट मिला था, लेकिन शुभमन गिल ब्रिगेड 93 रनों पर ही सिमट गई. साउथ अफ्रीका ने इस तरह भारत में 15 साल बाद कोई टेस्ट मैच जीता था. इस जीत के चलते साउथ अफ्रीकी टीम टेस्ट सीरीज में 1-0 से आगे है. अ माना जा रहा है कि भारत की प्लेइंग 11 में ज्यादा बदलाव नहीं होंगे. केवल शुभमन गिल की जगह किसी ख‍िलाड़ी की एंट्री होगी. वहीं अफ्रीकी टीम की प्लेइंग 11 में ज्यादा बदलाव नहीं होगा.  भारत vs साउथ अफ्रीका टेस्ट (H2H) 45 टेस्ट, 16 भारत जीत, 19 भारत हारा, 10 ड्रॉ भारत-साउथ अफ्रीका टेस्ट (भारत में) कुल मैच 20, भारत जीता: 11, हारा: 6, ड्रॉ: 3  साउथ अफ्रीका सीरीज भारत की टेस्ट टीम: ऋषभ पंत (विकेटकीपर, कप्तान), यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल, ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, नीतीश कुमार रेड्डी, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, आकाश दीप. भारत दौरे के लिए साउथ अफ्रीका का टेस्ट स्क्वॉड: टेम्बा बावुमा (कप्तान), कॉर्बिन बॉश, डेवाल्ड ब्रेविस, टोनी डी जोरजी, जुबैर हमजा, साइमन हार्मर, मार्को जानसेन, केशव महाराज, एडेन मार्करम, वियान मुल्डर, सेनुरन मुथुसामी, लुंगी एनग‍िडी (कगिसो रबाडा की जगह), रयान रिकेलटन, ट्रिस्टन स्टब्स, काइल वेरेने.