samacharsecretary.com

ऊर्जा संकट के दौर में भारत-वेनेजुएला संबंधों पर बड़ी हलचल, अंतरिम राष्ट्रपति के दौरे की चर्चा

 नई दिल्ली पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा अब वैश्विक कूटनीति का बड़ा केंद्र बनती जा रही है. इसी बीच अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत दौरे पर आएंगी, जहां तेल सप्लाई और ऊर्जा सहयोग को लेकर अहम बातचीत होगी।  रुबियो ने भारत रवाना होने से पहले कहा कि अमेरिका चाहता है कि भारत उससे "जितना चाहे उतना तेल खरीदे." उन्होंने कहा, "हम भारत को जितनी ऊर्जा चाहिए उतनी बेचने के लिए तैयार हैं. हमें लगता है कि वेनेजुएला के तेल को लेकर भी बड़े मौके मौजूद हैं। . मार्को रुबियो ने आगे कहा, "मेरी जानकारी के मुताबिक वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अगले हफ्ते भारत आने वाली हैं." रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है और भारत वैकल्पिक सप्लाई लाइनों की तलाश में जुटा है।  भारत तेल खरीद को कर रहा डाइवर्सिफाई भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बाद भारत लगातार सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन पर काम कर रही है. ऐसे में वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है, भारत के लिए अहम विकल्प बनकर उभर रहा है।  दिलचस्प बात यह है कि जनवरी 2026 में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाया गया था, जिसके बाद डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया. तब से वॉशिंगटन और कराकस के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रोड्रिगेज की कई बार तारीफ कर चुके हैं, खासकर तेल कंपनियों के साथ सहयोग को लेकर।  तेल क्षेत्र में वेनेजुएला कर रहा सुधार रिपोर्ट्स के मुताबिक, वेनेजुएला की नई सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए तेल क्षेत्र में बड़े सुधार कर रही है. अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को ज्यादा स्वतंत्रता देने, टैक्स कम करने और पीडीवीएसए के एकाधिकार को कमजोर करने जैसे कदम उठाए गए हैं।  भारत और वेनेजुएला के रिश्तों में एक दिलचस्प सांस्कृतिक कनेक्शन भी है. डेल्सी रोड्रिगेज भारतीय आध्यात्मिक गुरु सत्य साईं बाबा की अनुयायी मानी जाती हैं और उपराष्ट्रपति रहते हुए वह दक्षिण भारत स्थित उनके आश्रम का दौरा भी कर चुकी हैं।  रुबियो खुद 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर रहेंगे. इस दौरान ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर बातचीत होगी. माना जा रहा है कि वेनेजुएला की राष्ट्रपति की यात्रा और रुबियो का दौरा, दोनों मिलकर भारत की ऊर्जा रणनीति में नए समीकरण पैदा कर सकते हैं। 

‘अज्ञात’ का एक और निशाना, हमजा बुरहान के बाद सामने आई आतंकियों की लंबी लिस्ट

नई दिल्ली  पाकिस्तान की धरती पर भारत के दुश्मनों का काल बनकर मंडरा रहे अज्ञात हमलावरों ने एक और बड़े आतंकी को जहन्नुम पहुंचा दिया है. गुरुवार को खबर आई कि पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी गई है. पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. मोटरसाइकिल पर आने वाले इन अज्ञात हमलावरों ने अब तक लश्कर, जैश और हिजबुल के कई टॉप कमांडरों को मौत के घाट उतार दिया है । इन रहस्यमय हत्याओं ने पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों और वहां पनाह लिए बैठे आतंकियों के आकाओं की नींद उड़ा दी है. कोई नहीं जानता कि इन आतंकियों की जान लेने वाले ये अज्ञात लोग आखिर कौन हैं।  पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड हमजा बुरहान को कैसे मिली मौत? भारत सरकार की तरफ से साल 2022 में आतंकी घोषित किया गया हमजा बुरहान अब इस दुनिया में नहीं है. उसे मुजफ्फरराबाद में अज्ञात हमलावरों ने कई गोलियां मारीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह खतरनाक आतंकी संगठन अल बदर से जुड़ा हुआ था. साल 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश में उसका बड़ा हाथ था, जिसमें भारत के 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे. इस हमले के बाद से ही वह भारत का बड़ा दुश्मन बना हुआ था, लेकिन पीओके में अज्ञात बंदूकधारियों ने उसे गोलियां मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया ।  लाहौर में लश्कर के संस्थापक अमीर हमजा पर कैसे हुआ था हमला? पाकिस्तान के लाहौर शहर में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में शामिल अमीर हमजा को भी इसी साल अप्रैल में निशाना बनाया गया था. बाइक पर सवार होकर आए अज्ञात हमलावरों ने अमीर हमजा पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस जानलेवा हमले में वह बुरी तरह जख्मी हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अमीर हमजा भारत के खिलाफ लंबे समय से जहर उगलने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने का काम कर रहा था।  मसूद अजहर और हाफिज सईद के करीबियों को किसने ढेर किया? जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मौलाना मसूद अजहर के बड़े भाई मोहम्मद ताहिर अनवर की भी पिछले महीने पाकिस्तान में रहस्यमयी हालात में मौत हो गई. वह जैश के सभी बड़े ऑपरेशन्स को संभालता था. वहीं, पिछले साल मार्च में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के बेहद करीबी अबू कतल उर्फ कतल सिंधी को झेलम सिंध में अज्ञात हमलावरों ने मार गिराया. कतल सिंधी साल 2024 में जम्मू-कश्मीर के रियासी में तीर्थयात्रियों की बस पर हुए हमले का मुख्य आरोपी था. इसके अलावा कराची में हाफिज सईद के एक और खास मुफ्ती कैसर फारूक को भी अज्ञात हमलावरों ने मदरसा के पास पीठ में गोलियां मारकर ढेर कर दिया था।  पठानकोट हमले के गुनहगार शाहिद लतीफ का अंत कैसे हुआ? साल 2016 में भारत के पठानकोट एयरबेस पर हुए बड़े आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता शाहिद लतीफ को सियालकोट की एक मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियां मार दी थीं. 54 साल का शाहिद लतीफ भारत की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल था और लंबे समय से पाकिस्तान में बैठकर कश्मीरी युवाओं को भड़काने का काम कर रहा था. इसी तरह लश्कर का एक और खतरनाक भर्ती कमांडर अकरम खान गाजी भी नवंबर 2023 में मोटरसाइकिल सवार हमलावरों की गोलियों का शिकार बन गया. गाजी भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए नए लड़कों का ब्रेनवॉश करता था।  ख्वाजा शाहिद का सिर कलम और विमान हाईजैक के आरोपी की मौत कैसे हुई? लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर ख्वाजा शाहिद उर्फ मियां मुजाहिद की लाश एलओसी के पास नीलम घाटी में बेहद डरावनी हालत में मिली थी. अज्ञात हमलावरों ने पहले उसका अपहरण किया, फिर उसे बुरी तरह टॉर्चर करने के बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. इससे पहले साल 1999 में इंडियन एयरलाइंस के आईसी-814 विमान को हाईजैक करने वाले मुख्य आतंकियों में शामिल मिस्त्री जहूर इब्राहिम को कराची में मौत के घाट उतारा गया था. वह जाहिद अखुंद नाम से फर्जी पहचान छिपाकर रह रहा था, लेकिन अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर में पॉइंट ब्लैंक रेंज से दो गोलियां मारकर उसका काम तमाम कर दिया था।  यूएपीए (UAPA) के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की लिस्ट     मौलाना मसूद अजहर उर्फ मौलाना मोहम्मद मसूद अजहर अल्वी उर्फ वली आदम इस्सा.     हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद साहिब उर्फ हाफिज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद उर्फ हाफिज सईद उर्फ हाफेज मोहम्मद सईद उर्फ हाफिज मोहम्मद सयीद उर्फ मोहम्मद सईद उर्फ मोहम्मद सईद.     जकी-उर-रहमान लखवी उर्फ अबू वाहीद इर्शाद अहमद अर्शद उर्फ काकी उर-रहमान उर्फ जाकिर रहमान लखवी उर्फ जकी-उर-रहमान लकवी उर्फ जाकिर रहमान.     दाऊद इब्राहिम कास्कर.     वधावा सिंह बब्बर उर्फ चाचा.     लखबीर सिंह उर्फ रोडे.     रंजीत सिंह उर्फ नीता.     परमजीत सिंह उर्फ पंजवड़.     भूपिंदर सिंह भिंडा.     गुरमीत सिंह बग्गा.     गुरपतवंत सिंह पन्नून.     हरदीप सिंह निज्जर.     परमजीत सिंह उर्फ पम्मा.     साजिद मीर उर्फ साजिद मजीद उर्फ इब्राहिम शाह उर्फ वासी उर्फ खाली उर्फ मोहम्मद वसीम.     यूसुफ मुजम्मिल उर्फ अहमद भाई उर्फ यूसुफ मुजम्मिल बट उर्फ हुरैरा भाई.     अब्दुर रहमान मक्की उर्फ अब्दुल रहमान मक्की.     शाहिद महमूद उर्फ शाहिद महमूद रहमतुल्लाह.     फरहातुल्लाह गोरी उर्फ अबू सूफियान उर्फ सरदार साहब उर्फ फारू.     अब्दुल रऊफ असगर उर्फ मुफ्ती उर्फ मुफ्ती असगर उर्फ साद बाबा उर्फ मौलाना मुफ्ती रऊफ असगर.     इब्राहिम अथर उर्फ अहमद अली मोहम्मद अली शेख उर्फ जावेद अमजद सिद्दीकी उर्फ ए.ए. शेख उर्फ चीफ.     यूसुफ अजहर उर्फ अजहर यूसुफ उर्फ मोहम्मद सलीम.     शाहिद लतीफ उर्फ छोटा शाहिद भाई उर्फ नूर अल दीन.     सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन उर्फ पीर साहब उर्फ बुजुर्ग.     गुलाम नबी खान उर्फ आमिर खान उर्फ सैफुल्लाह खालिद उर्फ खालिद सैफुल्लाह उर्फ जवाद उर्फ दांद.     जफर हुसैन भट उर्फ खुर्शीद उर्फ मोहम्मद … Read more

वैश्विक टकराव के बीच भारत पर बढ़ा दबाव, आखिर कैसे टूटेगा ये चक्रव्यूह?

नई दिल्ली भारत आर्थिक तौर पर संकट के दौर से गुजर रहा है. कारण सबको पता है, मिडिल-ईस्ट में तनाव. हालात ये हैं कि भारत के लोग सुबह उठकर सबसे पहले नजर डालते हैं कि दुनिया में कच्चा तेल और युद्ध को लेकर क्या अपडेट्स हैं।  दरअसल, दुनिया के किसी कोने में कोई मिसाइल दागता है, दो देश आपस में टकराते हैं, या कोई बड़ा देश कमजोर देश पर पाबंदियां लगाता है, तो उसकी सीधी मार भारत की जेब पर पड़ती है. यानी करे कोई, और भुगते कोई. यह सिस्टम हर भारतीय को चुभता है।  रूस-यूक्रेन का युद्ध हो, या फिलहाल अमेरिका और ईरान की जंग. तबाही का मंजर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा है? जबकि इस दौरान अमेरिकी शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बना हुआ है, भारत का बाजार ही पस्त नहीं है, बल्कि जीडीपी की रफ्तार थमने वाली है।  अब सवाल उठता है कि आखिर क्यों दुनिया की हर जंग का बिल भारत को चुकाना पड़ता है, इसके पीछे के असली कारण क्या हैं और इस चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता क्या है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो रहा है, और इसके पीछे कोई इत्तेफाक है, मुख्यतौर पर फिलहाल 4 कारण सामने दिख रहे हैं।  1. कच्चा तेल (भारत की मजबूरी) भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. यानी एक तरह से भारत की इकोनॉमी तेल पर टिकी है. जब भी पश्चिम एशिया में तनाव होता है, हॉर्मुज जैसे समुद्री रास्तों पर संकट आता है, तेल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, और भारत कुछ नहीं कर पाता है।  जबकि अमेरिका का गणित अलग है. अमेरिका अब सिर्फ तेल खरीदता नहीं है, वह दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी है. जब तेल महंगा होता है, तो अमेरिकी कंपनियों को फायदा होता है, यानी ऐसे संकट में भी अमेरिका को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं होता. जबकि भारत के डॉलर पानी की तरह बहने लगते हैं. इसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'आयातित महंगाई' कहते हैं, यानी महंगाई बढ़ने के कारण विदेशी फैसले होते हैं।  2. डॉलर की दादागीरी दुनिया में व्यवस्था ऐसी है कि भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ती है, तो ग्लोबल इंवेस्टर्स अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए डॉलर खरीदने भागते हैं. इससे डॉलर मजबूत होता है और भारतीय रुपया कमजोर पड़ जाता है. मौजूदा दौर में पिछले करीब 2 महीने से यही हो रहा है. रुपया कमजोर होने का सीधा मतलब है कि जो तेल दो महीने पहले महज 70-75 डॉलर प्रति बैरल में खरीद रहे थे, अब उसके लिए 100 डॉलर से ज्यादा का भुगतान करना पड़ रहा है. एक तो कच्चा तेल का महंगा होना, और फिर रुपया का कमजोर पड़ना, भारतीय अर्थव्यवस्था पर दोहरी चोट पहुंचाता है. इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।  3. शेयर बाजार का गणित वैश्विक तनाव के दौरान हमेशा भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, और उसकी वजह भी विदेशी निवेशक (FII) ही होते हैं. जबकि ऐसे संकट के समय में अमेरिका बच जाता है. क्योंकि अमेरिका को दुनिया का 'सेफ हेवन' माना जाता है. जैसे ही दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, विदेशी निवेशक भारत जैसे 'इमर्जिंग मार्केट्स' से अपना मुनाफा समेटते हैं और उस पैसे को निकालकर अमेरिका के सरकारी बॉन्ड्स या अमेरिकी शेयर बाजार में लगा देते हैं. जिसका नतीजा ये होता है कि भारत का बाजार गिर जाता है और अमेरिका का बाजार मजबूती से डटा रहता है।  4. तनाव का एक्सपोर्ट पर सीधा असर भारत इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और केमिकल्स जैसी कई चीजें एक्सपोर्ट करता है. लेकिन जब समुद्री रास्तों पर युद्ध का साया होता है, तो एक्सपोर्ट बाधित हो जाता है, या फिर जहाजों की आवाजाही दूसरे लंबे रूटों से करनी पड़ती है. इससे जहाजों का किराया और इंश्योरेंस का प्रीमियम 3 से 4 गुना बढ़ जाता है. फिर विदेशी बाजारों में पहुंचते-पहुंचते इनमें आयात किया जाने वाला सामान काफी महंगा हो जाता है, प्रोडक्ट महंगा होने की वजह से बिक्री घट जाती है. यानी कुल मिलाकर एक्सपोर्ट ठप पड़ जाता है और देश में आने वाली विदेशी करेंसी कम हो जाती है।  जब ये सारे संकट एक साथ आते हैं, तो देश की विकास दर यानी जीडीपी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है, भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता, क्योंकि घरेलू मोर्चे पर किसी तरह का कोई संकट नहीं होता है. केवल एक तेल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होती है. जिससे सब्जी, दूध, राशन से लेकर हर चीज के दाम बढ़ते हैं. फिर महंगाई को काबू करने के लिए रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं. ब्याज दरें बढ़ते ही होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन महंगे हो जाते हैं।  फिर जब लोन महंगा होगा और जेब में पैसा कम बचेगा. आम आदमी नया घर, गाड़ी या मोबाइल चाहकर भी नहीं खरीद पाएगा. जब लोग नहीं खरीदेंगे तो फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा. फैक्ट्रियों में सामान नहीं बनेगा, तो नई नौकरियां नहीं आएंगी. जिससे जीडीपी की रफ्तार अपने आप सुस्त पड़ जाएगी।  इस चक्रव्यूह से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए? ये तो साफ है कि इस संकट के लिए दुनिया को कोसने से कुछ नहीं होगा. भारत को अगर वाकई में आत्मनिर्भर बनना है, तो कुछ मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा।  ऊर्जा पर विदेशी निर्भरता कम  जब तक हम तेल के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर रहेंगे, हमारी नब्ज उनके हाथ में रहेगी, और ऐसे झटके लगते रहेंगे. हमें पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता को तेजी से कम करना होगा. गाड़ियों को इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट करना और पेट्रोल में E30 यानी 30 फीसदी तक एथेनॉल मिलाना होगा. सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के मामले में भारत को इतनी आत्मनिर्भरता हासिल करनी होगी कि हमें बाहर से कच्चा तेल मंगाने की जरूरत सिर्फ पेट्रोकेमिकल्स के लिए पड़े, न कि ईंधन के लिए।  इसके अलावा भारत को 'डी-डॉलरइजेशन' यानी डॉलर की दादागीरी को कम करने की दिशा में सोचना पड़ेगा. रूस, यूएई, ईरान या जिन भी देशों के साथ भारत व्यापार करता है. उनसे सीधे 'रुपया-रुबल' या 'रुपया-दिरहम' में ट्रेड सेटलमेंट को बढ़ावा देना होगा. … Read more

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को भारत ने UN में घेरा, सुनाई खरी-खरी

 नई दिल्ली भारत ने बुधवार को यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल (UNSC) में पाकिस्तान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "नरसंहार के कृत्यों का 'लंबे वक्त से दागदार' रिकॉर्ड एक ऐसा पैटर्न दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा के ज़रिए अपनी अंदरूनी नाकामियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश करता है." भारत का यह बयान सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर UN सुरक्षा परिषद की सालाना खुली बहस के दौरान आया।  UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथनेनी ने ये टिप्पणियां तब कीं, जब पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने बहस के दौरान जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया। हरीश ने कहा, "यह विडंबना है कि पाकिस्तानने ऐसे मुद्दों का जिक्र करना चुना है, जो पूरी तरह से भारत का अंदरूनी मामला है।  'पवित्र महीने में…' इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों का जिक्र करते हुए भारतीय प्रतिनिधि परवथनेनी ने कहा, "दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के वक्त पाकिस्तान ने काबुल में 'उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल' पर एक बर्बर हवाई हमला किया था।  अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “हिंसा की इस कायरतापूर्ण और अमानवीय हरकत में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए. यह घटना एक ऐसी जगह पर हुई, जिसे किसी भी तरह से मिलिट्री टारगेट के तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता.” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया 'दोहरे मापदंड' वाला है कि वह एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय कानून के ऊंचे सिद्धांतों की बात करता है और दूसरी तरफ अंधेरे की आड़ में बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाता है।  UNAMA के मुताबिक,प ये हवाई हमले शाम की तरावीह की नमाज खत्म होने के वक्त हुए, जब कई मरीज मस्जिद से बाहर निकल रहे थे. परवथानेनी ने UNAMA के उस आकलन का भी जिक्र किया, जिसके मुताबिक अफगान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा की वजह से 94 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की हरकतें किसी ऐसे देश के लिए हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बम बरसाता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है।  राजदूत हरीश ने यह भी कहा कि 1971 में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' के दौरान पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा चार लाख महिलाओं के साथ सुनियोजित तरीके से सामूहिक बलात्कार और नरसंहार का अभियान चलाया था. इस बहस में भारत का हस्तक्षेप इन्हीं आरोपों पर केंद्रित रहा, क्योंकि उसने पाकिस्तान की उस कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान ने इस मामले को अपना 'आंतरिक मामला' बताया था। 

ईरान युद्ध के बीच भारत की नई चाल, पाकिस्तान के गठजोड़ को काउंटर करने की तैयारी

नई दिल्ली ईरान जंग ने मौजूदा वर्ल्‍ड ऑर्डर को उलट-पुलट कर रख दिया है. होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और LPG लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. मौजूदा संकट को देखते हुए अब तमाम देश एनर्जी सप्‍लाई के लिए अल्‍टरनेटिव रूट डेवलप करने की कोशिश में जुटे हैं. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच देशों के आपसी रिश्‍ते भी बदलने लगे हैं. पुराने समीकरण ध्‍वस्‍त हो रहे हैं तो नए गुट बन रहे हैं. पाकिस्‍तान ने सऊदी अरब और तुर्की के साथ मिलकर इस्‍लामिक NATO की नींव रखने का काम किया है. इन तीनों देशों का लक्ष्‍य संकट के समय एक-दूसरे का साथ देना है. हालांकि, अभी तक यह बस जुबानी जमाखर्च ही साबित हुई है. दूसरी तरफ, इस त्रिकोणीय गठजोड़ के अपने सामरिक महत्‍व भी हैं. अब भारत ने कथित इस्‍लामिक NATO का जवाब अपने अंदाज में तैयार कर लिया है. दिलचस्‍प बात यह है कि इसमें इजरायल की भी एंट्री मानी जा रही है. बता दें कि कुछ दिनों पहले ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की UAE यात्रा की बात सामने आई थी. हालांकि, इसे खारिज कर दिया गया है. इटली के सामरिक मामलों के एक्‍सपर्ट मानते हैं कि भारत, UAE और इजरायल का गठजोड़ पश्चिम एशिया में शांति के लिए X फैक्‍टर साबित हो सकता है।  इटली के जियोपॉलिटकल एक्‍सपर्ट सर्गियो रेस्टेली ने ‘टाइम्‍स ऑफ इजरायल’ में लिखे लेख में भारत, UAE और इजरायल के त्रिकोणीय गठजोड़ की बात कही है. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक रणनीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है. भू-राजनीतिक विशेषज्ञ सर्गियो रेस्टेली ने The Times of Israel में प्रकाशित अपने लेख में कहा है कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और ईरान के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखने की कला विकसित करनी होगी. उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को खाड़ी देशों को भरोसा दिलाते हुए ईरान के साथ संवाद के दरवाजे खुले रखने चाहिए और साथ ही इजरायल के साथ सहयोग को भी मजबूत करना चाहिए. रेस्टेली के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया UAE यात्रा ऐसे समय हुई जब पश्चिम एशिया में संघर्षों ने वैश्विक शक्तियों की विदेश नीति की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के संबंध अब केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निवेश, बुनियादी ढांचा, रक्षा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और समुद्री संपर्क जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।  भारत के लिए यूएई और इजरायल का महत्‍व इतालवी एक्‍सपर्ट ने यूएई को ऐसा साझेदार बताया जो क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को व्यवहारिक परियोजनाओं में बदलने की क्षमता रखता है. उनके मुताबिक, अबू धाबी भारत की पश्चिम एशिया नीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है. रेस्टेली लिखते हैं कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता घरेलू आर्थिक मुद्दा भी है, क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी व्यवधान का असर महंगाई, औद्योगिक उत्पादन और घरेलू बजट पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि भारत के इजरायल के साथ रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा, जल प्रबंधन और तकनीक के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं. वहीं, यूएई पूंजी, भौगोलिक पहुंच और क्षेत्रीय स्वीकार्यता प्रदान करता है. रेस्टेली के अनुसार, यूएई और इजरायल मिलकर पश्चिम एशिया में एक नए व्यावहारिक ढांचे का निर्माण कर रहे हैं, जो नारों की बजाय बुनियादी ढांचे, इनोवेशन और स्थिरता पर आधारित है।  ईरान भारत के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण सर्गियो रेस्टेली ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी पश्चिम एशिया नीति को किसी एक धुरी तक सीमित नहीं कर सकता. उनके मुताबिक, ईरान भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिहाज से. उन्होंने चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) को भारत-ईरान साझेदारी का सबसे ठोस उदाहरण बताया. रेस्टेली ने कहा कि ईरानी विदेश मंत्री अब्‍बास अरागची (Abbas Araghchi) की दिल्ली यात्रा ने यह संकेत दिया कि भारत तेहरान के साथ गंभीर संवाद बनाए रखना चाहता है. उनके अनुसार, संकटग्रस्त क्षेत्र में सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की क्षमता ही जिम्मेदार कूटनीति की पहचान है. लेख में कहा गया कि यूएई भारत की उभरती पश्चिम एशिया रणनीति का मुख्य आधार है, इजरायल तकनीक और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोगी है, जबकि ईरान संपर्क और क्षेत्रीय संकट प्रबंधन के लिए आवश्यक साझेदार बना रहेगा. रेस्टेली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा ने यह स्पष्ट किया कि भारत अब केवल तेल आयातक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने हितों और रणनीतिक विकल्पों के साथ एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका तय कर रहा है। 

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत एक्टिव: रूस से भरोसा मिला तो अमेरिका से की खास अपील

 नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अमेरिका से रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट को आगे बढ़ाने की अपील की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई दिल्ली ने वॉशिंगटन से कहा है कि मौजूदा हालात में ऊर्जा सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि तेल बाजार में जारी अस्थिरता का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ सकता है।  अमेरिका ने पहली बार मार्च में भारत और अन्य मुल्कों को रूसी तेल खरीदने के लिए विशेष छूट दी थी. इसके बाद इसे बढ़ाकर 16 मई 2026 तक कर दिया गया. इस छूट की वजह से भारत रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद पा रहा है।  हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका लगातार भारत पर दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से तेल खरीद कम करे ताकि मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सके. लेकिन अब ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी पक्ष से कहा है कि अगर तेल बाजार में उथल-पुथल जारी रहती है तो इसके गंभीर सामाजिक और आर्थिक असर हो सकते हैं. खासतौर पर भारत जैसे देश में, जहां 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें काफी बड़ी हैं और पहले से ही कुकिंग गैस की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. भारत के तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से भी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है।  रूस का एनर्जी सप्लाई पूरा करने का वादा नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने से पहले ब्रॉडकास्टर आरटी इंडिया से बातचीत में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि रूस यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के ऊर्जा हित पूरी तरह सुरक्षित रहें. उन्होंने कहा, "मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूसी ऊर्जा सप्लाई से जुड़े भारत के हित प्रभावित नहीं होंगे. हम हरसंभव कोशिश करेंगे कि यह अनुचित कंपटीशन हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए।  रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने जोर देकर कहा कि रूस ने ऊर्जा क्षेत्र में कभी भी भारत या किसी अन्य साझेदार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफलता नहीं दिखाई है. उन्होंने तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट को भारत-रूस सहयोग का प्रमुख उदाहरण बताया और कहा कि नए पावर यूनिट्स पर काम जारी है. उन्होंने कहा, "भारत को और ऊर्जा की जरूरत है. हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की सप्लाई लगातार जारी रखे हुए हैं।  इस बीच भारत ने मई महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रूसी तेल आयात किया है. इकोनॉमिक टाइम्स ने डेटा फर्म क्लेपेर के हवाले से बताया कि, मई में भारत रोजाना करीब 23 लाख बैरल रूसी तेल आयात कर रहा है. अनुमान है कि पूरे महीने का औसत करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन रह सकता है, जो अब भी बेहद बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।  विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में संघर्ष लंबा खिंचने की स्थिति में भारत रूस से सस्ते तेल पर अपनी निर्भरता और बढ़ा सकता है, क्योंकि इससे घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। 

भारत दौरे को लेकर सक्रिय हुआ बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड, BCCI से लगातार संपर्क में अधिकारी

ढाका भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट रिश्तों को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और तनाव की खबरें सामने आती रही थीं. लेकिन अब पूर्व बांग्लादेशी कप्तान और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के मौजूदा अध्यक्ष तमीम इकबाल ने दोस्ताना बयान देकर माहौल बदलने की कोशिश की है। तमीम इकबाल ने साफ कहा है कि अब भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) और बीसीबी के बीच कोई बड़ा मुद्दा नहीं बचा है और भारत का बांग्लादेश दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है. भारत को अगस्त 2025 में बांग्लादेश दौरे पर ODI और T20I सीरीज खेलनी थी. लेकिन दोनों देशों के बीच बढ़े राजनीतिक तनाव के कारण यह दौरा टाल दिया गया और इसे सितंबर 2026 तक शिफ्ट कर दिया गया। मुस्ताफिजुर को बाहर करने पर बिगड़े हालात इसके बाद दोनों बोर्ड्स के संबंधों में उस वक्त तल्खी आई, जब बीसीसीआई के निर्देश पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्ताफिजुर रहमान को अपने स्क्वॉड से रिलीज कर दिया. हालात इतने खराब हो गए थे कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों की सुरक्षा का हवाला देते हुए आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 से अपना नाम वापस ले लिया था. हालांकि बाद में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई और अब भारत सितंबर 2026 में बांग्लादेश दौरे पर 6 मुकाबले खेल सकता है। तमीम इकबाल ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि उनके मौजूदा बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास के साथ काफी अच्छे रिश्ते हैं. उन्होंने कहा कि दोनों ने आईपीएल में एक साथ क्रिकेट खेला है और मिथुन कई बार ढाका लीग खेलने भी बांग्लादेश आ चुके हैं। तमीम इकबाल ने भारतीय टीम की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बयान दिया. तमीम ने साफ कहा कि बांग्लादेश में भारतीय टीम की सुरक्षा को लेकर कभी कोई खतरा नहीं रहा. तमीम कहते हैं, 'जब भारत बांग्लादेश आता है तो पूरा स्टेडियम भर जाता है. लोग इस मुकाबले को बेहद पसंद करते हैं. मुझे नहीं लगता कि अब बीसीबी और बीसीसीआई के बीच कोई वास्तविक समस्या बची है। भारत का बांग्लादेश दौरा सिर्फ क्रिकेट सीरीज नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों के क्रिकेट रिश्तों को फिर से मजबूत करने का बड़ा मौका साबित हो सकता है. अगर यह सीरीज तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो यह लंबे समय बाद दोनों बोर्ड्स के बीच रिश्तों में आई खटास को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा। भारत का बांग्लादेश दौरा (2026) 1 सितंबर- पहला वनडे, मीरपुर 3 सितंबर- दूसरा वनडे, मीरपुर 6 सितंबर- तीसरे वनडे, चटगांव 9 सितंबर- पहला टी20, चटगांव 12 सितंबर- दूसरा टी20I, मीरपुर 13 सितंबर- तीसरा टी20I, मीरपुर

भारतीयों के लिए खुशखबरी: कनाडा में परमिट समाप्ति के बाद भी 90 दिन तक कानूनी रूप से रह सकेंगे

चंडीगढ़  कनाडा में रह रहे भारतीयों खासकर पंजाबियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब वर्क परमिट या स्टडी परमिट खत्म होने के बाद लोगों को तुरंत भारत लौटने की मजबूरी नहीं होगी। कनाडा की इमिग्रेशन एजेंसी इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा ने नियमों में बदलाव करते हुए नया विकल्प शुरू किया है। पहले नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति का वर्क परमिट खत्म हो जाता था तो उसे केवल वर्कर कैटेगरी में ही अपना स्टेटस बहाल कराना पड़ता था। इसी तरह स्टूडेंट को भी स्टूडेंट कैटेगरी में ही आवेदन करना होता था। नई नौकरी या नया कोर्स न मिलने की स्थिति में लोगों को कनाडा छोड़कर भारत लौटना पड़ता था। अब नए नियमों के तहत वर्क या स्टडी परमिट खत्म होने के बाद व्यक्ति 90 दिनों के भीतर विजिटर रिकॉर्ड के लिए आवेदन कर सकता है। इससे वह बिना नौकरी या पढ़ाई के भी कानूनी रूप से कनाडा में रह सकेगा। हालांकि इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा ने स्पष्ट किया है कि स्टेटस बहाली की प्रक्रिया पूरी होने तक व्यक्ति न तो काम कर सकेगा और न ही पढ़ाई जारी रख पाएगा। इमिग्रेशन एक्सपर्ट पूजा सिंह ने बताया कि पहले भी 90 दिन का नियम लागू था लेकिन उस दौरान व्यक्ति केवल अपने पुराने स्टेटस को ही बहाल कर सकता था। अब विजिटर रिकॉर्ड का विकल्प मिलने से लोगों को अतिरिक्त राहत मिली है। नए नियम के तहत विजिटर स्टेटस बहाल करने के लिए 346.25 कनाडाई डॉलर फीस तय की गई है। यह नियम 1 मई 2026 से लागू हो चुका है। एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि लोग समय रहते आवेदन करें क्योंकि आउट ऑफ स्टेटस होने का असर भविष्य में पीआर और एक्सप्रेस एंट्री प्रोफाइल पर पड़ सकता है। 

72 घंटे में भारत की जीत, अमेरिकी विशेषज्ञ ने साझा किया रणनीति का विश्लेषण

 नई दिल्ली अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर कहा है कि भारत ने इस संघर्ष में रणनीतिक रूप से बड़ी जीत हासिल की. उन्होंने बताया कि 10 मई की सुबह तक भारत ने हवाई क्षेत्र में पूरी श्रेष्ठता बना ली थी, जबकि पाकिस्तान अपने हवाई ऑपरेशनों को जारी रखने में कमजोर हो चुका था।  यह नतीजा किसी एक हमले या छोटी लड़ाई का परिणाम नहीं था, बल्कि कई दिनों तक चली सावधानीपूर्वक योजना और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने की मुहिम का नतीजा था. मई 2025 में भारत ने 6-7 मई की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए।  जब पाकिस्तान ने भारत के शहरों और सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया, तब भारत ने भी पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर मजबूत जवाब दिया. यह चार दिन का संघर्ष 10 मई को पाकिस्तान की मांग पर युद्धविराम के साथ खत्म हुआ. इस दौरान भारत ने पाकिस्तानी एयरबेस, एयर डिफेंस सिस्टम और कई अन्य सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया।  भारत की रणनीति कैसे काम की अमेरिकी सेना के पूर्व मेजर जॉन स्पेंसर अब मैडिसन पॉलिसी फोरम में वॉर स्टडीज के चेयर और अर्बन वारफेयर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर हैं. उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर विस्तार से बताया कि भारत ने कैसे पाकिस्तान की हवाई रक्षा को कमजोर किया. उन्होंने कहा कि 8 मई को भारत ने पाकिस्तानी हवाई रक्षा ठिकानों पर हमले किए, जिनमें चूनियां और पासरूर में अर्ली वार्निंग रडार और कम से कम एक HQ-9 सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बैटरी शामिल थी. 9 मई को भी और हमले किए गए।  ये हमले ज्यादातर लॉइटरिंग मुनिशन से किए गए. इनका मकसद था कि पाकिस्तान के रडार और मिसाइल सिस्टम को लगातार दबाव में रखा जाए, चाहे वे पहले हमलों से बचे हों या नई जगह पर तैनात किए गए हों. स्पेंसर ने लिखा कि इन हमलों से पाकिस्तान की देखने, कॉर्डिनेशन करने और जवाब देने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित हुई. हवाई युद्ध में यह बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे पहले कि लड़ाकू विमान आमने-सामने आएं, दुश्मन की रक्षा प्रणाली ही ध्वस्त हो जाती है।  S-400 ने बदला खेल, पाकिस्तानी विमानों पर हालत खराब हो गई स्पेंसर ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई. भारत की S-400 मिसाइल सिस्टम ने एक हाई वैल्यू एयरबोर्न प्लेटफॉर्म को करीब 300 किलोमीटर दूर से निशाना बनाया. इससे पाकिस्तान एयर फोर्स को यह सोचना पड़ा कि वे कहां और कैसे अपने विमानों को उड़ा सकते हैं. इस वजह से पाकिस्तानी विमानों का ऑपरेशन क्षेत्र सीमित हो गया. उन्हें ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ी।  स्पेंसर ने माना कि शुरू के कुछ घंटों में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय विमानों को गिराने में सफलता हासिल की. यह शुरुआती सफलता पाकिस्तान के लिए प्रचार का अच्छा मौका बनी, लेकिन स्पेंसर कहते हैं कि छोटी-मोटी सफलता पूरे अभियान की जीत नहीं तय करती।  पाकिस्तान ने बाद में सैकड़ों ड्रोन, CM-400एकेजी मिसाइलें, फतेह और हत्फ रॉकेट दागे, लेकिन भारत की एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें रोक लिया. भारत ने अपनी स्वदेशी आईएसीसीसीएस (Integrated Air Command, Control and Communication System) और आकाशतीर प्रणाली का इस्तेमाल किया, जिसने पाकिस्तानी हमलों को नाकाम कर दिया।  आधुनिक युद्ध: सिर्फ विमान नहीं, पूरा सिस्टम लड़ता है जॉन स्पेंसर ने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ लड़ाकू विमान एक-दूसरे से नहीं लड़ते. इसमें एंटी-एयरक्राफ्ट गन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कमांड नेटवर्क और एकीकृत सिस्टम बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत के पास बड़े पैमाने, गहराई और बेहतर एकीकरण था. इसी वजह से भारत शुरुआती झटके को सहन कर सका और फिर अपना ऑपरेशनल टेम्पो पाकिस्तान पर थोप दिया।  दूसरी ओर पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन से मिले हथियारों पर निर्भर था. शुरुआत में इनसे कुछ सफलता मिली, लेकिन जब भारत ने पाकिस्तान की महत्वपूर्ण नोड्स को नष्ट कर दिया तो पाकिस्तान लड़ने लायक नहीं बचा।  रणनीतिक जीत भारत की ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिखाया कि अच्छी योजना, स्वदेशी तकनीक और मजबूत एकीकरण से छोटी-मोटी शुरुआती असफलताओं को भी पलटकर बड़ी जीत हासिल की जा सकती है. जॉन स्पेंसर जैसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने हवाई श्रेष्ठता हासिल कर पाकिस्तान को ऑपरेशन करने लायक ही नहीं छोड़ा. यह संघर्ष दिखाता है कि भविष्य के युद्धों में सिस्टम की मजबूती और निरंतर दबाव कितना निर्णायक साबित होता है। 

भारत-वियतनाम रिश्तों में मजबूती, 13 समझौते और जल्द ही UPI का फास्ट पेमेंट सिस्टम से कनेक्शन

नई दिल्ली  वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के भारत दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गति देने वाला माना जा रहा है. भारत और वियतनाम अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों देशों के बीच बुधवार को 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।  पीएम मोदी ने बताया कि हमारी साझा विरासत को जीवंत रखने के लिए, हम वियतनाम के प्राचीन चम्पा सभ्यता के मी सॉन और न्हान टवर मंदिरों का पुनर्निमाण कर रहे हैं. अब हम चम्पा सभ्यता की मनुस्क्रिप्ट को भी डिजिटलाइज करेंगे, और इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करेंगे।  मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत के लिए दोनों देशों का नजरिया एक जैसा है और दोनों पक्ष कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे. ऐसा समझा जाता है कि दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत में चीन की बढ़ती मिलिट्री ताकत पर भी चर्चा हुई।  लाम, एक उच्च स्तर प्रतिनिधिमंडल के साथ, मंगलवार को भारत की अपनी तीन दिन की यात्रा पर निकले. इस महीने राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह देश की उनकी पहली सरकारी यात्रा है।  पीएम मोदी ने अपने मीडिया स्टेटमेंट में कहा कि भारत और वियतनाम ने रिश्तों को बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है।  मोदी ने कहा, "वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और विज़न ओशन का एक अहम स्तंभ है. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी, हम एक जैसी सोच रखते हैं." उन्होंने कहा, "हमारे मजबूत रक्षा और सुरक्षा सहयोग के जरिए, हम कानून के राज, शांति, स्थिरता और खुशहाली में योगदान देते रहेंगे।  प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वियतनाम के सहयोग से आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के साथ अपने संबंधों को और बढ़ाएगा. उन्होंने कहा कि वित्तीय संपर्क को बढ़ावा देने के लिए हमने दोनों देशों के सेंट्रल बैंकों के बीच सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।  उन्होंने कहा कि भारत का यूपीआई और वियतनाम का फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द ही जुड़ जाएगा. अपनी बात में लैम ने कहा कि दोनों पक्ष राजनीतिक विश्वास को गहरा करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमत हुए।  पिछले साल, दोनों पक्षों ने सबमरीन सर्च, रेस्क्यू और व्यवस्था के लिए एक फ्रेमवर्क बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उन्होंने द्विपक्षीय रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करने के लिए एक आशय का पत्र (LoI) पर भी हस्ताक्षर किया।