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Team India Super-8 Schedule: तारीखें तय, इन टीमों से होगी भिड़ंत

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. सुपर-8 चरण में ग्रुप-1 की तस्वीर साफ है. मेजबान भारत के साथ जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका ने जगह बनाई है. अब हर मुकाबला सेमीफाइनल की दिशा तय करेगा. भारत अपने अभियान की शुरुआत 22 फरवरी को करेगा. पहला ही मैच चुनौतीपूर्ण है, जब टीम की भिड़ंत दक्षिण अफ्रीका से होगी. यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शाम 7 बजे खेला जाएगा. टूर्नामेंट के इस चरण में शुरुआती जीत मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला सकती है, लिहाजा नजरें इस हाई-वोल्टेज टक्कर पर टिकी होंगी. दूसरा मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ होगा. सुपर-8 का यह मुकाबला भारत के लिए अंक तालिका में मजबूती का अहम अवसर माना जा रहा है. स्पिन के अनुकूल चेन्नई की पिच पर रणनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती है. भारत का तीसरा सुपर-8 मुकाबला 1 मार्च को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला जाएगा. यह मैच सुपर-8 के ग्रुप-1 की तस्वीर पूरी तरह साफ कर सकता है. कैरेबियाई टीम की विस्फोटक बल्लेबाजी के सामने भारत की गेंदबाजी की असली परीक्षा होगी. सुपर-8 के ग्रुप-1 में चारों टीमें मजबूत हैं, ऐसे में रनरेट भी अहम भूमिका निभा सकता है. मेजबान होने के नाते भारत पर उम्मीदों का दबाव है, लेकिन घरेलू परिस्थितियां टीम के पक्ष में जा सकती हैं. टीम इंडिया सुपर-8 की राह को पार कर सेमीफाइनल का टिकट कटाने के लिए ताकत झोंकने के लिए तैयार है.  उधर, सुपर-8 के ग्रुप-2 में इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें हैं. सुपर-8 के बाद टूर्नामेंट का नॉकआउट दौर (सेमीफाइनल) शुरू होगा, जहां 4 (दोनों ग्रुप से शीर्ष 2-2) टीमें होंगी. टूर्नामेंट के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 4 और 5 मार्च को खेले जाएंगे. इसके बाद क्रिकेट जगत की निगाहें 8 मार्च पर टिकी होंगी, जब खिताबी मुकाबला खेला जाएगा. पाकिस्तान सुपर-8 राउंड की शुरुआत शनिवार को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले से करेगा.  अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करता है, तो वह 4 मार्च को कोलंबो में खेले जाने वाले पहले सेमीफाइनल में उतरेगा. लेकिन यदि पाकिस्तान क्वालिफाई नहीं करता, तो यह सेमीफाइनल मुकाबला कोलकाता में खेला जाएगा. दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. अगर भारत क्वालिफाई करता है, तो वह दूसरे सेमीफाइनल में खेलेगा. यदि पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो खिताबी मुकाबला कोलंबो में आयोजित होगा, अन्यथा फाइनल अहमदाबाद में खेला जाएगा. सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मुकाबलों के लिए रिजर्व डे भी रखा गया है.

स्वास्थ्य से लेकर प्रौद्योगिकी तक: भारत-फ्रांस ने किए 21 महत्वपूर्ण समझौते

मुंबई: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम बैठक की. उनकी इस बैठक के दौरान भारत और फ्रांस के बीच कई अहम मुद्दों पर बात बनी.साथ ही, भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच कई पहलों की घोषणा की. दोनों देशों ने मिलकर देश को आगे ले जानें पर विचार विमर्श किया. मैक्रों आज एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाएंगे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारत में एच125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन किया. दोनों देशों के बीत इन क्षेत्रों में हुए समझौते राजनीतिक और कूटनीतिक संबंध, तकनीक और नवाचार, रक्षा और सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र सहित महत्वपूर्ण और उभरती हुई तकनीक, अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, अक्षय ऊर्जा और कौशल विकास. सोमवार रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गवर्नर आचार्य देवव्रत ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका और फर्स्ट लेडी ब्रिगिट मैक्रों का स्वागत किया. भारत ने गुरुवार को फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदने की मंजूरी दे दी, जो मैक्रों के देश दौरे से पहले उसके सबसे बड़े एयरक्राफ्ट ऑर्डर में से एक है. यह मंजूरी नई दिल्ली के 3.6 ट्रिलियन रुपये के डिफेंस खर्च पैकेज का हिस्सा थी. भारत-फ्रांस के बीच अहम समझौते की सूची 1. भारत-फ़्रांस संबंधों को विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर उन्नत करना 2. उन्नत साझेदारी और 'होराइजन 2047' रोडमैप के कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा के लिए वार्षिक विदेश मंत्री स्तरीय वार्ता की शुरुआत 3. भारत-फ़्रांस नवाचार वर्ष का शुभारंभ 4. भारत-फ़्रांस इनोवेशन नेटवर्क का शुभारंभ 5. कर्नाटक के वेमगल में एच125 हेलीकॉप्टर बनाने की फैक्ट्री (असेम्बली लाइन) का उद्घाटन 6.भारत और फ़्रांस के बीच रक्षा सहयोग के पुराने समझौते का नवीनीकरण 7.भारत में हैमर मिसाइल बनाने के लिए बीईएल और सफरान के बीच जॉइंट वेंचर 8.भारत और फ्रांस की सेना के अधिकारी अनुभव साझा करेंगे 9. नई तकनीकों के विकास के लिए एक संयुक्त समूह 10. क्रिटिकल मिनरल्स और मेटल्स में आपसी सहयोग हेतु संयुक्त घोषणा पत्र 11. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और फ़्रांस के सीएनआरएस ने उन्नत सामग्री के क्षेत्र में अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए आपसी सहमति 12. भारत और फ्रांस के बीच डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट पर प्रोटोकॉल में संशोधन 13. स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवाचार और तकनीक में रणनीतिक सहयोग हेतु टी-हब (T-Hub) और नॉर्ड फ्रांस के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर 14. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और सीएनआरएस के बीच वैज्ञानिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर 15. डिजिटल विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर स्थापित करने हेतु संयुक्त आशय घोषणा 16. एम्स, नई दिल्ली में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर का शुभारंभ 17. संक्रामक रोगों और वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग हेतु डीबीटी और एएनआरएस के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर 18. मेटाबॉलिक हेल्थ साइंसेज के लिए इंडो-फ्रेंच सेंटर की स्थापना हेतु समझौते पर हस्ताक्षर 19. एरोनॉटिक्स में कौशल विकास के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु आशय पत्र पर हस्ताक्षर 20. स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़ी पहल, भारत और फ़्रांस ने रिन्यूएबल एनर्जी सहयोग समझौते को आगे बढ़ाया 21.डाक सेवाओं में सहयोग हेतु भारत के डाक विभाग और फ्रांस के 'ला पोस्ट' के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट की घोषणा फ्रांस में भारतीय राजदूत संजीव कुमार सिंगला ने कहा कि भारत और फ्रांस ने क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट की घोषणा की है. मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए भारतीय राजदूत ने भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और फ्रांसीसी संस्था सीएनआरएस के बीच एडवांस्ड मटीरियल पर एक सेंटर बनाने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट की घोषणा की. संजीव कुमार सिंगला ने कहा,'क्रिटिकल और नई टेक्नोलॉजी पर हमने एक जॉइंट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ग्रुप बनाने का फैसला किया है, साथ ही क्रिटिकल मिनरल में सहयोग के लिए एक जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट भी बनाया है. हमारे डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी और सीएनआरएस नाम के फ्रेंच इंस्टीट्यूशन के बीच एडवांस्ड मटीरियल पर एक सेंटर बनाने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट भी है, जो दुनिया के सबसे बड़े साइंटिफिक इंस्टीट्यूशन में से एक है, जो खास तौर पर बेसिक रिसर्च पर फोकस करता है. हमने दोनों देशों के बीच डबल टैक्स अवॉइडेंस एग्रीमेंट में अमेंडमेंट पर भी साइन किए हैं.' भारत और फ्रांस के जॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की खोज, निकालने, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए, ताकि अलग-अलग तरह की, टिकाऊ, जिम्मेदार और मजबूत सप्लाई चेन बनाई जा सकें. नेताओं ने ग्रीन और डिजिटल इकॉनमी, नई टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने में क्रिटिकल मिनरल्स की अहम भूमिका को पहचाना. विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में कहा गया कि दोनों पक्षों ने फ्रांस और भारत के बीच क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर जॉइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट का स्वागत किया. मंगलवार को पीएम मोदी और इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई में इंडस्ट्रियल, डिफेंस, क्लीन एनर्जी, स्पेस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी सेक्टर में सहयोग पर बाइलेटरल बातचीत की. पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध 'ग्लोबल स्टेबिलिटी और प्रोग्रेस' के लिए है. फ्रांस के राष्ट्रपति और पीएम मोदी ने मिलकर मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन किया. मैक्रों अभी भारत के अपने चौथे दौरे पर हैं. मुंबई में दोनों देशों के बीच बातचीत खत्म होने के बाद, मैक्रों अब भारत मंडपम में एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली जाएंगे.

भारत-UK ट्रेड डील अप्रैल से प्रभावी होने के संकेत, ज्यादातर भारतीय उत्पादों पर खत्म होगी ड्यूटी

नई दिल्ली  भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) इस साल अप्रैल 2026 से लागू होने के लिए पूरी तरह तैयार है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने पुष्टि की है कि इस समझौते के लागू होने से न केवल द्विपक्षीय व्यापार में ऐतिहासिक वृद्धि होगी, बल्कि भारतीय श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन के दरवाजे पूरी तरह खुल जाएंगे. 99% भारतीय उत्पादों पर जीरो-ड्यूटी इस ऐतिहासिक समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ब्रिटेन को निर्यात किए जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर अब कोई सीमा शुल्क (Customs Duty) नहीं लगेगा. इससे भारत के उन क्षेत्रों को जबरदस्त फायदा होगा जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं. विशेष रूप से टेक्सटाइल (कपड़ा), रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, फुटवियर, खिलौने, और समुद्री उत्पादों के निर्यातकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. अब ये उत्पाद ब्रिटिश बाजार में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले ज्यादा सस्ते और प्रतिस्पर्धी होंगे. IT सेक्टर और पेशेवरों को बड़ी राहत व्यापार के साथ-साथ, सेवाओं के क्षेत्र में भी बड़ी जीत हासिल हुई है. दोनों देशों ने 'डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन' (DCC) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसका मतलब यह है कि जो भारतीय आईटी पेशेवर या अन्य कर्मचारी अस्थायी रूप से (3 साल तक) ब्रिटेन में काम करने जाएंगे, उन्हें और उनके नियोक्ताओं को वहां 'सोशल सिक्योरिटी' टैक्स नहीं देना होगा. इससे भारतीय कंपनियों की लागत कम होगी और उनके कर्मचारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. व्हिस्की और कारों पर घटेगा आयात शुल्क भारत ने भी ब्रिटिश उत्पादों के लिए अपने बाजार खोले हैं. भारत में बेहद लोकप्रिय स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर तत्काल 75% कर दिया जाएगा, जिसे 2035 तक धीरे-धीरे 40% तक लाया जाएगा. इसी तरह, ब्रिटिश कारों पर लगने वाले भारी-भरकम शुल्क को अगले 5 वर्षों में घटाकर 10% तक लाया जाएगा. बदले में, भारतीय इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को ब्रिटेन के बाजार में विशेष कोटा मिलेगा. आर्थिक लक्ष्य और भविष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने मई 2025 में इस डील को अंतिम रूप दिया था. वर्तमान में यह समझौता ब्रिटिश संसद में अनुसमर्थन की प्रक्रिया में है. दोनों देशों का लक्ष्य है कि वर्तमान के $60 बिलियन के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $100 बिलियन के पार पहुँचाया जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के सपने को गति प्रदान करेगा.

India vs Pakistan की टक्कर T20 WC 2026 में? जानिए संभावित तारीख और तरीका

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 के लीग फेज में टीम इंडिया और पाकिस्तान की भिड़ंत रविवार 15 फरवरी को हुई, जिसमें भारतीय टीम ने बुरी तरह से पाकिस्तान को धोया। पाकिस्तान की टीम को इस मैच में 61 रनों से हार मिली। इस हार की वजह से टीम का सुपर 8 में पहुंचने का गणित भी गड़बड़ा गया है। हालांकि, एक और मैच जीतकर पाकिस्तान की टीम सुपर 8 में पहुंच जाएगी, लेकिन फैंस उम्मीद कर रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान का मैच फिर से इस टी20 विश्व कप में खेला जाए? अब क्या संभव है कि इंडिया और पाकिस्तान फिर से टूर्नामेंट में भिड़ेंगे? इसका जवाब है- हां, ऐसा हो सकता है। ये कैसे संभव है? ये आप इस स्टोरी में जान लीजिए। दरअसल, इंडिया और पाकिस्तान टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप ए में थे। ऐसे में दोनों के बीच टी20 विश्व कप में कम से कम एक मुकाबला संभव था, जो कि 15 फरवरी को खेला जा चुका है, लेकिन जिस तरह का मुकाबला हुआ है, उसे देखकर फैंस चाह रहे हैं कि एक बार फिर से दोनों देशों के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जो कि कांटे का हो। हालांकि, सुपर 8 में ये संभव नहीं होने वाला है। इसके पीछे का कारण ये है कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी ने टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी करते हुए टॉप टीमों को सीडिंग दी थी, जिसके तहत सुपर 8 के मुकाबले लगभग तय हैं कि कौन सा मैच किस टीम के बीच खेला जाएगा। सुपर 8 में दो ग्रुप बनाए जाएंगे। ग्रुप 1 की चार टीमों को आपस में मुकाबले खेलने होंगे, जबकि दूसरे ग्रुप में भी ऐसा ही करना होगा। भारतीय टीम (X1) ग्रुप 1 में होगी, जिसमें ऑस्ट्रेलिया (X2), वेस्टइंडीज (X3) और साउथ अफ्रीका (X4) होगी। वहीं, ग्रुप 2 में इंग्लैंड (Y1), न्यूजीलैंड (Y2), पाकिस्तान (Y3) और श्रीलंका (Y4) को रखा जाएगा। बर्शते ये टीमें क्वालीफाई करें। अगर कोई टीम सुपर 8 में नहीं पहुंचती है तो उस टीम को उस ग्रुप की दूसरी टीम से रिप्लेस कर दिया जाएगा। इस तरह सुपर 8 में इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मुकाबला संभव नहीं है, लेकिन अगर भारत और पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करती हैं तो फिर दोनों के बीच भिड़ंत हो सकती है। टी20 विश्व कप 2026 में इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल मैच तभी होगा, जब ग्रुप 1 में भारत टॉप पर रहे और ग्रुप 2 में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहे या फिर पाकिस्तान ग्रुप 2 में पहले स्थान पर रहे और ग्रुप 1 में भारत दूसरे स्थान पर सुपर 8 फेज को फिनिश करे। अगर ऐसा नहीं होता तो फिर इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल मैच संभव नहीं होगा। इसके लिए फैंस को उम्मीद करनी होगी कि दोनों टीमें फाइनल में भिड़ें। अगर पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में पहुंचती है तो उसका सेमीफाइनल कोलंबो में होगा। अगर इंडिया वर्सेस पाकिस्तान सेमीफाइनल होता है तो यह भी कोलंबो में होगा। अन्यथा इंडिया किसी अन्य टीम से सेमीफाइनल में भिड़ेगी तो वह मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा। अगर पाकिस्तान की टीम ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं किया तो दूसरा सेमीफाइनल कोलकाता के ईडन गार्डेंस में खेला जाएगा। फाइनल में अगर पाकिस्तान की टीम पहुंची तो फिर फाइनल कोलंबो में होगा। अगर फाइनल में पाकिस्तान नहीं पहुंचा तो फिर टी20 विश्व कप 2026 फाइनल अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा।

IND vs PAK मैच अपडेट: पाकिस्तान ने चुनी गेंदबाजी, भारत पर बड़ी पारी का दबाव

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच रविवार को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में टी20 विश्व कप मैच खेला जा रहा है। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले बांग्लादेश के प्रति एकजुटता दिखाते हुए भारत के खिलाफ मैच को बहिष्कार करने का फैसला लिया था। लेकिन कुछ दिन बाद यू टर्न लेते हुए मैच खेलने के लिए राजी हो गया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद , बांग्लादेश और श्रीलंका क्रिकेट के बीच हफ्तों तक लंबी बातचीत हुई। टी20 विश्व कप 2026 में भारत और पाकिस्तान की टीमें कागज के साथ मैदान पर भी काफी मजबूत हैं और इस वजह से इस बार फैंस को कांटे की टक्कर का मुकाबला देखने को मिल सकता है। हालांकि प्रेमदासा स्टेडियम की पिच के रिकॉर्ड को देखते हुए ये उम्मीद लगाई जा रही है कि ये मैच हाईस्कोरिंग नहीं होगा। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला उसी पिच पर खेला जाएगा, जहां जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को मात दी थी। वहीं सूर्यकुमार यादव ने बताया है कि सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला खेलेंगे। टी20 विश्व कप में किसका पलड़ा भारी टी20 विश्व कप के इतिहास में भारतीय टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़े अंतर से दबदबा बनाया हुआ है। टी20 विश्व कप में दोनों टीमों के बीच अब तक कुल 8 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से भारत ने सात जीते हैं और एक मुकाबला पाकिस्तान ने अपने नाम किया है। पाकिस्तान ने विश्व कप में पिछली बार भारत को 2021 में 10 विकेट से हराया था। वहीं भारत ने न्यूयॉर्क में खेले गए पिछले विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ 6 रनों की रोमांचक जीत हासिल की थी। T20 WC 2026 में भारत-पाकिस्तान का प्रदर्शन सूर्यकुमार यादव के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने अपने पहले मुकाबले में अमेरिका को 29 रनों से हराकर टूर्नामेंट का विजयी आगाज किया था। वहीं सलमान अली आगा की अगुवाई में पाकिस्तान ने नीदरलैंड को करीबी मुकाबले में तीन विकेट से मात दी थी। दूसरे मैच में भारत ने नामीबिया को 93 रनों से करारी शिकस्त दी थी। जबकि पाकिस्तान ने अपने दूसरे मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ 32 रनों से जीत हासिल की। टीमें : भारत : सूर्यकुमार यादव (कप्तान), ईशान किशन, संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, हार्दिक पांड्या, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती । पाकिस्तान: सलमान अली आगा (कप्तान), अबरार अहमद, बाबर आजम, फहीम अशरफ, फखर जमां, ख्वाजा नफे, मोहम्मद नवाज, मोहम्मद सलमान मिर्जा, नसीम शाह, साहिबजादा फरहान, सईम अयूब, शाहीन शाह अफरीदी, शादाब खान, उस्मान खान, उस्मान तारिक।

दुनिया की दिग्गज कंपनियों का भारत रुख: Google और Nvidia के CEO की यात्रा के मायने

 नई दिल्ली भारत में इस बार दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण AI सम्मेलन होने वाला है. हम बात कर रहे हैं India AI Impact Summit 2026 की, जो अगले हफ्ते शुरू होने वाला है. ये इवेंट 16 फरवरी को शुरू होगा और 20 फरवरी तक चलेगा. इसका आयोजन भारत मंडपम में होगा.  इस इवेंट में 100 से ज्यादा देशों के डेलिगेशन के हिस्सा लेंगे. इसमें 15 से 20 सरकारों के प्रमुख, 50 से ज्यादा मंत्री और 50 से ज्यादा दुनिया भर की प्रमुख कंपनी के CEO शामिल होंगे. इसमें भारतीय कंपनियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. समिट में AI इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 500 प्रमुख व्यक्ति भी शामिल होंगे. इसमें इनोवेटर्स, रिसर्चर और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर शामिल हैं. अगर चर्चित नामों की बात करें, तो गूगल CEO सुंदर पिचाई से लेकर एंथ्रॉपिक के डारियो अमोडेई तक इसका हिस्सा होने वाले हैं.  भारत इस बार AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन कर रहा है. इस कार्यक्रम में ना सिर्फ टेक और AI सेक्टर के दिग्गज हिस्सा ले रहे हैं. बल्कि 20 देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति भी शामिल होंगे. कौन-कौन लेगा हिस्सा?      गूगल CEO सुंदर पिचाई     DeepMind के सीईओ डेमिस हसाबिस     OpenAI CEO सैम अल्टमैन     एंथ्रॉपिक के सीईओ डारियो अमोडेई     Nvidia सीईओ जेन्सेन हुआंग     माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ     मेटा के चीफ AI साइंटिस्ट यान लेकुन      क्वालकॉम CEO क्रिस्टियानो एमोन और कई नाम शामिल होंगे.  कैसे रजिस्टर कर सकते हैं आप?  India AI Impact Summit 2026 के लिए रजिस्टर करना बहुत ही आसान है. इसके लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट impact.indiaai.gov.in पर जाना होगा. यहां आपको रजिस्टर नाउ का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक करना होगा. इसके बाद आपको रजिस्टर ऐज डेलिगेट पर जाना होगा. यहां आपको पर्सनल डिटेल्स देनी होंगी. इसमें नाम और कई दूसरी जानकारियां शामिल हैं. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद आप 5 दिनों तक चलने वाले इस इवेंट में हिस्सा ले सकेंगे. इस इवेंट में 700 से ज्यादा सेसन होंगे, जिसमें AI सेफ्टी, गवर्नेंस, एथिकल फ्रेमवर्क, डेटा प्रोटेक्शन और भारत के संप्रभु AI रणनीति पर बात होगी.   

वैश्विक मंच पर भारत का दम, जमीन और समुद्र दोनों मोर्चों पर बड़ी कामयाबी

नई दिल्ली भारत के रक्षा मंत्रालय ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. भारत ऐसा अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने के लिए कर रहा है. लेकिन, भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में अपनी पारंपरिक नीति से अलग एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. वह अब किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. उसने अपनी विदेश नीति की तरह ही रक्षा खरीद नीति में मल्टीपोलर बना दिया है. बीते कुछ महीनों के डेवलपमेंट को देखा जाए तो ऐसा लगता है कि भारत ने इस नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है. तकनीकी रूप से जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है लेकिन वह एक बहुत बड़ी आर्थिक शक्ति और सैन्य शक्ति है. भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. हाल के महीनों में रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने न केवल इन देशों को साधने का काम किया है, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है. रूस के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते रूस भारत का सबसे पुराना और भरोसेमंद रक्षा साझेदार बना हुआ है. वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का संयुक्त उद्यम इसका प्रमुख उदाहरण है. S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की दो स्क्वाड्रन इसी साल डिलीवर होने वाले थहैं. इतना ही नहीं गुरुवार को ही रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 हजार करोड़ में एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला किया. इसी तरह रूस के साथ मिलकर ही यूपी के अमेठी में 6 लाख से अधिक AK-203 असॉल्ट राइफलों का स्वदेशी उत्पादन चल रहा है. सरकारी कंपनी एचएएल में Su-30MKI इंजनों का निर्माण भी रूस के सहयोग से चल रहा है. ये सौदे रूस को भारत में स्थायी बाजार देते हैं, जबकि भारत को सस्ती और विश्वसनीय तकनीक मिलती है. अमेरिका से मिलेगा हाईटेक तकनीक अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. GE-F414 जेट इंजन सौदा सबसे बड़ा ब्रेकथ्रू है, जिसमें HAL के साथ 80 फीसदी तकनीक ट्रांसफर की बात चल रही है. यह सुविधा पहले केवल NATO सहयोगियों को मिलती थी. यह सौदा मार्च 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है, जो तेजस MkII और AMCA जैसे स्वदेशी फाइटर को पावर देगा. इसके अलावा, 31 MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन और 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद हिंद महासागर में अभूतपूर्व निगरानी प्रदान करेगी. अमेरिका को भारत एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार मिलता है, जबकि भारत को ‘सबमरीन हंटर’ जैसी उन्नत क्षमता मिलती है. रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस से 114 राफेल खरीदने को मंजूरी दे दी है. फ्रांस बना एक सबसे भरोसेमंद साझेदार फ्रांस भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी साबित हुआ है, जहां तकनीक साझा करने में कोई शर्त नहीं लगाई जाती. 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने गुरुवार को 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी. नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (मरीन) पहले ही क्लियर हैं. स्कॉर्पीन (कलवरी-क्लास) सबमरीन पर सहयोग जारी है, जहां मझगांव डॉक अतिरिक्त यूनिट बना रहा है. फ्रांस को भारत में बड़ा बाजार और सह-उत्पादन मिलता है, जबकि भारत को हाई-परफॉर्मेंस फाइटर और जर्मनी के साथ सबमरीन डील जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है. ये सबमरीन मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड में बनेंगी, जिसमें फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी.

अमेरिकी खेल बिगड़ा, ट्रंप की रणनीति भारत की सख्त नीति के सामने फेल

 नई दिल्ली भारत और अमेरिका में ट्रेड डील (India-US Trade Deal) का ऐलान हो चुका है. इसका फ्रेमवर्क भी जारी किया जा चुका है और फैक्टशीट रिलीज होने के बाद इसमें अमेरिका की ओर से चुपचाप बड़ा बदलाव भी किया गया है. ये चेंज दालों (Pulses) से जुड़ा हुआ है. जी हां, भारत के साथ ट्रेड डील में अमेरिका की दाल नहीं गल पाई और भारत की रेड लाइन ने डोनाल्ड ट्रंप का पूरा खेल ही बिगाड़ दिया. आइए जानते हैं कैसे मोदी सरकार के किसानों के हित में अपना रुख अडिग रखने को साफ असर इस व्यापार समझौते में देखने को मिला है?  एग्री प्रोडक्ट पर ट्रंप की नहीं चली  सबसे पहले बात करते हैं 'दाल' को लेकर भारत की रणनीति के कामयाब होने के बारे में, तो बता दें कि बीते दिनों Donald Trump ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए थे. इसके बाद दोनों देशों ने डील का फ्रेमवर्क और फैक्टशीट जारी कर दी थी. लेकिन नया मोड़ तब आया, जब अमेरिका ने इस India-US Trade Deal Factsheet में अचानक बदलाव कर दिया, जो खासतौर पर भारत के लिए राहत भरा है. दरअसल, व्हाइट हाउस ने अमेरिकी टैरिफ लिस्ट में भारतीय दालों का जिक्र ही हटा दिया. यानी इस डील में Pulses शामिल नहीं की गईं.  India-US Trade Deal की संशोधित फैक्टशीट को देखें, डील के तहत भारत द्वारा 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामानों की खरीदारी की शर्त को प्रतिबद्धता (Committed) के बजाय अब इरादा या योजना में तब्दील कर दिया गया है. मतलब ये बाध्यकारी नहीं है. वहीं US White House की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, डील के तहत लागू प्रोडक्ट कैटेगरी की लिस्ट से कृषि शब्द को हटाया गया है. कुछ वस्तुओं, जिनमें दालें भी शामिल हैं, उन्हें Tariff Cut सूची से दूर कर दिया गया है. भारत ने पहले ही खींच दी थी Red Line गौरतलब है कि भारत ने अबतक जिन भी देशों से व्यापार समझौते किए हैं, उनमें भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर को दूर रखा है. देश के किसानों के हित के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता न करने के लिए भारत ने पहले ही रेड लाइन (Red Line) खींच रखी थी. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय तक अटकी रहने के पीछे ये भी एक अहम कारण रहा था, क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी एग्री-डेयरी प्रोडक्ट के लिए भारतीय बाजार में Tariff Free एंट्री पर अड़े हुए थे, जबकि भारत अपने रुख पर सख्ती से कायम रहा. अब इसका असर भी देखने को मिला है.  एग्री-डेयरी क्षेत्र को लेकर कैसा रहा भारत का रुख? गौरतलब है कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत शुरू होने से लेकर इसके फाइनल होने तक भारत का Agri-Dairy Sector को लेकर रुख साफ रहा है. जब अमेरिका ने अपने ऐसे प्रोडक्ट्स को भारतीय बाजार में एंट्री दिलाने के लिए दबाव बढ़ाया था, तो बीते साल जुलाई महीने में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो-टूक कह दिया था. भारत किसी दबाव में नहीं आएगा और अपने मूल हितों खासतौर पर किसानों के हित से समझौता कतई नहीं करेगा. उन्होंने कहा था कि 'Nation First हमारा मूल मंत्र है और किसी भी तरह की कोई बातचीत दबाव में नहीं होगी. भारतीय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही बातचीत की जाएगी. अब India-US Trade Deal का ऐलान होने के बाद भी उन्होंने साफ किया है कि इस समझौते से भारत के किसानों और उनकी खेती को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा. इसमें कोई भी ऐसा उत्पाद शामिल नहीं है, जो भारतीय किसानों की आजीविका या देश की कृषि को प्रभावित कर सके. पीयूष गोयल ने भी बताया क्या-क्या डील से बाहर?  शिवराज सिंह चौहान के अलावा केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्रेड डील के ऐलान और फ्रेमवर्क जारी होने के बाद कहा था कि यह समझौता किसानों के हितों की सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील कृषि व डेयरी उत्पादों को पूरी तरह संरक्षित रखा गया है.  सबसे बड़ा उत्पादक, आयातक भी भारत सिर्फ दालों के लिहाज से देखें, तो भारत विश्व में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है और लगातार इस सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर जोर देता रहा है. बीते कुछ वित्तीय वर्षों में उत्पादन के आंकड़े देखें, तो रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में दाल उत्पादन  2022–23 में 26 मिलियन टन के करीब, 2023–24 में लगभग 24 मिलियन टन और 2024–25 में 25–27 मिलियन टन के बीच रहा है.  मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं. वहीं भारत कई देशों में दाल का निर्यात भी करता रहा है. इनमें बांग्लादेश, नेपाल, UAE, श्रीलंका, अमेरिका और कनाडा सबसे ऊपर रहे हैं. आयात की बात करें, तो 2024-25 में रिकॉर्ड 73 लाख टन दालों का इंपोर्ट किया गया था, जो घरेलू खपत का करीब 15% से अधिक था.   

भारत की प्लेइंग 11 में बदलाव तय, बुमराह की एंट्री से चौंकाएगा फैसला

 नई दिल्ली टी20 विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम का सामना नामीबिया से होगा. यह मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में आज यानी गुरुवार को खेला जाएगा. टीम इंडिया ने टूर्नामेंट का आगाज जीत के साथ किया था और अब कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुवाई में टीम इस लय को बरकरार रखना चाहेगी. दूसरी ओर नामीबिया को इसी मैदान पर नीदरलैंड के खिलाफ हार झेलनी पड़ी थी, ऐसे में वह वापसी की कोशिश करेगा. अभिषेक शर्मा की फिटनेस पर संशय भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की सेहत को लेकर है. अभिषेक पेट में संक्रमण और बुखार से जूझ रहे हैं और उन्हें दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. हालांकि उन्हें छुट्टी मिल चुकी है, लेकिन नामीबिया के खिलाफ उनके खेलने पर संशय बना हुआ है. अगर अभिषेक मैच से बाहर होते हैं तो संजू सैमसन को ओपनिंग का मौका मिल सकता है. सैमसन के पास आक्रामक शुरुआत देने की क्षमता है, जो टीम को पावरप्ले में मजबूती दे सकती है. बुमराह की वापसी से बढ़ेगा आत्मविश्वास पहले मुकाबले में अमेरिका के खिलाफ तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बुखार के कारण नहीं खेल पाए थे. अब वह पूरी तरह फिट बताए जा रहे हैं और उन्होंने मंगलवार को नेट्स में गेंदबाजी अभ्यास भी किया. ऐसे में नामीबिया के खिलाफ उनकी प्लेइंग इलेवन में वापसी लगभग तय मानी जा रही है. अगर बुमराह टीम में लौटते हैं तो मोहम्मद सिराज को बाहर बैठना पड़ सकता है. बुमराह की मौजूदगी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को और धारदार बना देगी, खासकर डेथ ओवर्स में. पाकिस्तान मैच से पहले लय पाना जरूरी अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में कप्तान सूर्यकुमार यादव को छोड़कर बाकी बल्लेबाज खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे. 15 फरवरी को पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले यह मैच भारतीय बल्लेबाजों के लिए लय हासिल करने का सुनहरा मौका होगा. अगर सैमसन और ईशान किशन ओपनिंग करते हैं तो टीम को तेज शुरुआत मिल सकती है. मिडिल ऑर्डर में तिलक वर्मा और इन-फॉर्म सूर्यकुमार यादव बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं, जबकि रिंकू सिंह फिनिशर की भूमिका निभाएंगे. तीन ऑलराउंडर्स के साथ उतर सकती है टीम भारतीय टीम संतुलन बनाए रखने के लिए तीन ऑलराउंडर्स के साथ उतर सकती है. हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे और अक्षर पटेल टीम को बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में गहराई देंगे. स्पिन विभाग की जिम्मेदारी वरुण चक्रवर्ती के कंधों पर रह सकती है, जिसमें उपकप्तान अक्षर पटेल उनका साथ देंगे. तेज गेंदबाजी आक्रमण में अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह की जोड़ी अहम भूमिका निभा सकती है. भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह. भारतीय टीम स्क्वॉड संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, अभिषेक शर्मा, कुलदीप यादव, वॉशिंगटन सुंदर.

206 अरब डॉलर का अमेरिकी बाजार खुला भारत के लिए, कौन-कौन से सेक्टर होंगे फायदे में

नई दिल्ली भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए एक बड़ा मौका सामने आया है. लंबे समय से भारतीय किसान और फूड एक्सपोर्ट करने वाले अमेरिकी मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहते थे, और अब हालात उनके पक्ष में दिख रहे हैं. अमेरिका का कुल कृषि आयात बाजार करीब 206 अरब डॉलर का है, जो दुनिया के सबसे बड़े इम्पोर्ट मार्केट्स में गिना जाता है. नई ट्रेड व्यवस्था के तहत भारत को इस बड़े बाजार में एंट्री आसान होने जा रही है. कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स को पूरी तरह जीरो ड्यूटी पर एंट्री मिलेगी, जबकि कई अन्य सामानों पर पहले से कम टैरिफ देना होगा. इसका सीधा असर यह होगा कि भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में ज्यादा किफायती और कॉम्पिटिटिव हो जाएगा. वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका के 46 अरब डॉलर के एग्रीकल्चर इम्पोर्ट सेगमेंट में भारत को जीरो ड्यूटी का फायदा मिलेगा. इसमें मसाले, प्रोसेस्ड फूड, फल, चाय, कॉफी और एसेंशियल ऑयल जैसे अहम प्रोडक्ट शामिल हैं. इसके अलावा करीब 160 अरब डॉलर के बड़े हिस्से में भारतीय सामान 18 प्रतिशत की कम रेसिप्रोकल टैरिफ रेट पर जाएगा. यानी पहले जहां ज्यादा ड्यूटी लगती थी, अब वहां कम शुल्क लगेगा. इससे एक्सपोर्ट की लागत घटेगी और अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय प्रोडक्ट्स ज्यादा आकर्षक बनेंगे. भारत का होगा ट्रेड सरप्लस आंकड़े भी भारत के पक्ष में संकेत दे रहे हैं. साल 2024 में भारत ने अमेरिका को लगभग 3.4 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद निर्यात किए, जबकि आयात 2.1 अरब डॉलर का रहा. इस तरह भारत को करीब 1.3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस मिला. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर नई टैरिफ व्यवस्था सही समय पर लागू हो जाती है, तो यह सरप्लस और बढ़ सकता है. इसका फायदा सीधे किसानों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्सपोर्ट कंपनियों को मिलेगा. यह जीरो ड्यूटी की सुविधा एक इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद लागू होगी, जिसकी संभावना मार्च के आसपास जताई जा रही है. वहीं 18 प्रतिशत की कम टैरिफ दर तब प्रभावी होगी, जब अमेरिका इस संबंध में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करेगा. उम्मीद है कि यह प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकती है. यानी आने वाले कुछ महीनों में जमीन पर इसका असर दिखने लगेगा. मसालों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ अगर प्रोडक्ट कैटेगरी की बात करें तो मसालों के सबसे अधिक लाभ मिलने वाला है. अभी अमेरिका के कुल मसाला आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत है, जिसकी वैल्यू लगभग 2.01 अरब डॉलर है. चाय और कॉफी की हिस्सेदारी फिलहाल 1 प्रतिशत से भी कम है, जबकि पूरा बाजार 9.38 अरब डॉलर का है. इसका मतलब है कि यहां ग्रोथ की बड़ी गुंजाइश मौजूद है. फलों में आम और केले जैसे प्रोडक्ट अमेरिका की कुल खरीद का सिर्फ 0.3 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. वहीं प्रोसेस्ड फलों का इम्पोर्ट लगभग 759 मिलियन डॉलर का है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत है. साफ है कि सही रणनीति के साथ यह आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है. वनों वाले प्रोडक्ट्स जैसे बांस की कोपलें, वेजिटेबल वैक्स, नट्स और बीजवैक्स भी अलग-अलग सेगमेंट में 0.2 प्रतिशत से लेकर 38 प्रतिशत तक हिस्सेदारी रखते हैं. अब जब टैरिफ में राहत मिलेगी, तो इन प्रोडक्ट्स की डिमांड में इजाफा हो सकता है. खास तौर पर वे प्रोडक्ट्स, जिनकी क्वालिटी पहले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है, उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है. मरीन सेक्टर को भी मिलेगा फायदा 18 प्रतिशत की रेसिप्रोकल टैरिफ व्यवस्था से मरीन सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिल सकता है. खासकर झींगा जैसे उत्पाद, जिनका अमेरिकी इम्पोर्ट मार्केट करीब 25 अरब डॉलर का है. इसके अलावा बासमती और प्रीमियम चावल, तिल जैसे ऑयलसीड्स और कुछ खास फलों को भी इस रियायत का लाभ मिलेगा. अगर सप्लाई चेन मजबूत रही और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पूरे किए गए, तो भारत इस सेगमेंट में तेजी से आगे बढ़ सकता है. कुल मिलाकर यह कदम भारतीय एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है. लेकिन सिर्फ टैरिफ में छूट काफी नहीं होगी. सरकार और एक्सपोर्टर्स को क्वालिटी कंट्रोल, टाइमली सप्लाई, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी फोकस करना होगा. अगर इन पहलुओं पर गंभीरता से काम हुआ, तो आने वाले समय में अमेरिकी बाजार में भारत की हिस्सेदारी कई गुना बढ़ सकती है और इसका सीधा फायदा देश के किसानों और एग्री-बिजनेस से जुड़े लोगों को मिलेगा.