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2026 में सरप्राइज देने आ रहा है ऐपल का ये खास डिवाइस, आईफोन नहीं फिर भी सबकी नजर

 नई दिल्ली  नए साल का आगाज होने वाला है। टेक्‍नोलॉजी के क्षेत्र में साल 2026 कई बदलाव लेकर आ सकता है। टेक‍ दिग्‍गज ऐपल को लेकर कहा जा रहा है कि नए साल में कंपनी आईफोन या मैकबुक से ज्‍यादा किसी और प्रोडक्‍ट पर ध्‍यान दे रही है। ऐपल सीईओ टिम कुक के लिए कंपनी के टेक डेवलपमेंट की सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐपल ग्‍लासेज हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा हो सकता है कि नए साल में कंपनी एक बड़ा लॉन्‍च आयोजित करे। 2026 में हो सकता है बड़ा लॉन्‍च 9to5Mac की रिपोर्ट (ref.) के मुताबिक, ऐसा हो सकता है कि ऐपल साल 2026 में बड़े लॉन्‍च की तैयारी कर रही है और ऐपल ग्‍लासेज उसका हाइलाइट हो सकते हैं। अन्‍य रिपोर्टों की मानें तो कंपनी ‘अनवील्‍ड’ शब्‍द पर अधिक जोर दे रही है जो संकेत हो सकता है कि ऐपल ग्‍लासेज को सिर्फ प्रदर्शित किया जाएगा, लॉन्‍च को टाला जा सकता है। ऐसा हुआ तो कंपनी वियरेबल सेगमेंट में एक और डिवाइस तो ले आएगी, लेकिन उसे लोगों के बीच पहुंचने में वक्‍त लग सकता है। हर दिन पहनने वाले चश्‍मे हालांकि ऐपल ग्‍लास ेज के लॉन्‍च होने की संभावनाएं इसलिए भी बन रही हैं, क्‍योंकि गूगल भी अपने ग्‍लासेज नए साल में ला सकती है और मेटा के मेटा ग्‍लास पहले से ही मार्केट में मौजूद हैं। यह सेगमेंट ऐसा है, जिसमें चीनी स्‍मार्टफोन कंपनियों की मौजूदगी अधिक नहीं है। ऐपल इस सेगमेंट में कदम रखकर अपना दबदबा बना सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल का मकसद पूरी तरह से ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) ग्लासेज देना है, जिसे लोग हर दिन पहन सकें। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लास को पहनने के बाद उससे ही कई सारे काम किए जा सकेंगे, ठीक वैसे ही जैसा रे-बैन मेटा स्मार्ट ग्लासेज (Ray-Ban Meta smart glasses) में मुमकिन है। ऐपल ग्‍लासेज के फीचर्स ऐपल ग्‍लासेज को बिना डिस्‍प्‍ले के पेश किया जा सकता है। वह आईफोन से कनेक्‍ट होकर काम करेगा। कहा जाता है कि ऐपल ग्‍लासेज में सिरी, ऐपल इंटेलिजेंस और बिल्‍ट इन ओपन ईयर स्‍पीकर्स का सपोर्ट होगा। हालांकि चश्‍मों को पूरी तरह से कंट्रोल करने के लिए आईफोन चाहिए होगा। कहा जाता है कि कंपनी एक ऐसा गैजेट पेश करना चाहती है जिसे यूजर अपने रोजाना इस्‍तेमाल में पहन सके। कंपनी मेटा से मुकाबला करना चाहती है, जिसने अपने स्‍मार्ट ग्‍लासेज को एक के बाद एक लॉन्‍च करके पॉपुलर बनाने की कोशिश की है।

क्यों किया सेना ने एंड्रॉयड को प्रतिबंधित? अब अनिवार्य होगा iPhone का इस्तेमाल

इजरायल इजरायल की सेना (IDF) ने अपने बड़े अफसरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब लेफ्टिनेंट कर्नल और उससे ऊपर के रैंक के सभी कमांडर सिर्फ आईफोन ही इस्तेमाल कर सकेंगे। एंड्रॉयड फोन पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सेना का कहना है कि एंड्रॉयड फोन में हैकिंग का खतरा ज्यादा है। दुश्मन आसानी से इन फोन्स को हैक करके निजी जानकारी चुरा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में इजरायल के सैनिकों को 'हनी ट्रैप' का शिकार बनाया गया है। इसमें खूबसूरत लड़कियों के फेक अकाउंट से चैट शुरू की जाती है और फिर फोन में वायरस डाल दिया जाता है। इससे सैनिकों की लोकेशन और दूसरी जरूरी जानकारी लीक हो जाती है। सिर्फ आईफोन ही क्यों? यह खबर इजरायल के आर्मी रेडियो ने सबसे पहले दी, जिसे जेरूसलम पोस्ट ने भी छापा। रिपोर्ट में बताया गया कि आईफोन को सेना ज्यादा सुरक्षित मान रही है क्योंकि यह एक क्लोज सिस्टम है। इसमें बाहर के ऐप आसानी से नहीं डाले जा सकते। ऐपल कंपनी हर चीज पर सख्ती से नजर रखती है। जबकि एंड्रॉयड में हजारों कंपनियां फोन बनाती हैं और कोई भी ऐप डाउनलोड करना आसान है। इसी वजह से वायरस और स्पाईवेयर का खतरा ज्यादा रहता है। इजरायल को गूगल पिक्सल भी रास नहीं आया हाल ही में गूगल ने बड़ा दावा किया था कि उसका पिक्सल फोन आईफोन से भी ज्यादा सुरक्षित है। अमेरिका की सेना ने भी पिक्सल फोन को मंजूरी दे दी थी। गूगल ने कहा था कि उसके फोन में खास सुरक्षा फीचर हैं जो सरकारी काम के लिए बेस्ट हैं। लेकिन इजरायल की सेना ने इन दावों को नजरअंदाज कर दिया और सिर्फ आईफोन को चुना। पहले से चल रही थी तैयारी यह फैसला एकदम से नहीं लिया गया। पहले भी सेना ने अपने अफसरों को ट्रेनिंग दी थी कि फेक मैसेज और कॉल से कैसे बचें। हिजबुल्लाह जैसे दुश्मन संगठनों के हनी ट्रैप का ड्रामा भी करवाया गया था ताकि सैनिक सतर्क रहें। अब फोन का नियम और सख्त कर दिया गया है। निजी इस्तेमाल में छूट, सरकारी काम में सख्ती नए नियम के मुताबिक एंड्रॉयड फोन पूरी तरह बैन नहीं हुए हैं। अफसर अपना निजी फोन एंड्रॉयड ही रख सकते हैं। लेकिन सेना के किसी भी काम, मीटिंग या गोपनीय बात के लिए सिर्फ आईफोन इस्तेमाल करना जरूरी होगा। सेना की तरफ से दिए जाने वाले फोन भी अब सिर्फ आईफोन ही होंगे। एंड्रॉयड ने बहुत सुधार किया, फिर भी पीछे पिछले दो साल में गूगल ने एंड्रॉयड को काफी सुरक्षित बनाया है। अब अगले साल से बाहर के ऐप डालने पर और सख्ती आने वाली है। फिर भी आईफोन का बंद इकोसिस्टम अभी भी सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। खासकर सेनाओं और सरकारी कामों के लिए। एंड्रॉयड से कहीं आगे है आईफोन? यह फैसला सिर्फ इजरायल की सेना तक सीमित नहीं है। दुनिया की दूसरी सेनाएं और खुफिया एजेंसियां भी देख रही हैं। अगर कोई देश अपने टॉप अफसरों के लिए सिर्फ आईफोन चुनता है तो यह ऐपल के लिए बड़ी जीत है और गूगल के लिए झटका। स्मार्टफोन की सुरक्षा की जंग में आईफोन अभी आगे निकल गया लगता है।

भारत में बढ़ी iPhone मैन्युफैक्चरिंग, घरेलू बाजार में बिक्री भी रही मजबूत

नई दिल्ली   दुनिया में बनने वाला हर पांच में एक आईफोन भारत में मैन्युफैक्चर किया जा रहा है। साथ ही, कंपनी की ग्लोबल प्रोडक्शन वैल्यू में देश का योगदान 12 प्रतिशत हो गया है। यह जानकारी एप्पल की फाइलिंग में दी गई। फाइलिंग के मुताबिक, एप्पल की भारतीय इकाई (एप्पल इंडिया) की घरेलू बिक्री वित्त वर्ष 25 में बढ़कर 9 अरब डॉलर हो गई है। एनालिस्ट की ओर से कहा गया कि एप्पल की कुल वैश्विक आय 416.1 अरब डॉलर है। इसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 2 प्रतिशत के करीब है। हालांकि, आईफोन के उत्पादन में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कंपनी की ओर से अब भारत में पहली बार हाई-एंड प्रो और प्रो मैक्स मॉडल का उत्पादन भी शुरू कर दिया है। फाइलिंग में कंपनी ने बताया कि 2025 में अमेरिकियों 178.4 अरब डॉलर के एप्पल प्रोडक्ट्स खरीदे थे, जो कि कंपनी की कुल आय का 43 प्रतिशत है। वहीं, भारत की ओर से यूएस को आईफोन शिपमेंट में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। एप्पल की आय में यूरोप 26.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ दूसरे और ग्रेटर चीन 15.4 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले दस सालों में कंपनी की भारतीय इकाई की आय लगभग आठ गुना बढ़ी है, जिसमें मुख्य रूप से आईफोन, मैकबुक, आईपैड, एयरपोड्स और एक्सेसरीज का योगदान है, जबकि सर्विसेज का कुल बिक्री में योगदान काफी कम है। वित्त वर्ष 25 में एप्पल के इंडिया-बेस्ड प्रोडक्शन की फ्रेट-ऑन-बोर्ड वैल्यू 22 अरब डॉलर थी, जिसमें से 7.5 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया। लोकल मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह से आयातित फोन पर लगने वाली 16 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी को बचाकर कंपनी की घरेलू बिक्री को बढ़ाने में मदद कर रही है। कंपनी की अर्निंग्स कॉल में, एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि जब रिटेल की बात आती है, तो “हम अपने अब तक के सबसे अच्छे लाइनअप के साथ साल के सबसे बिजी समय में जा रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में, हमने इंडिया और यूएई जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में नए स्टोर और यूएस और चीन में नए स्टोर्स खोले हैं।”

Apple और SpaceX की साझेदारी: अब iPhone पर बिना SIM इंटरनेट संभव

नई दिल्ली कैसा हो अगर आप अपने फोन पर बिना सिम के भी आराम से हाई स्पीड इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें? दरअसल अब ऐसा iPhone के साथ संभव होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले साल आने वाले iPhone 18 Pro में ऐपल ऐसा ही एक जबरदस्त फीचर दे सकती है, जिसकी मदद से बिना किसी सिम या नेटवर्क के भी इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस फीचर का नाम स्टारलिंक इंटरनेट कनेक्शन हो सकता है और इसके लिए ऐपल और स्पेस एक्स साथ आ सकते हैं। The Information की एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों कंपनियों में इसे लेकर बात चल रही है। क्या है स्टारलिंक इंटरनेट कनेक्शन? बता दें कि ऐपल के iPhone 14, iPhone 15 और iPhone 16 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का ऑप्शन देता है लेकिन फिलहाल उससे इंटरनेट नहीं चलाया जा सकता और यह सभी देशों में उपलब्ध भी नहीं है। रिपोर्ट के मुताबित ऐपल इस फीचर के लिए अपने iPhone 18 Pro में हार्डवेयर के स्तर पर अपग्रेड कर सकता है। इसके बाद iPhone 18 Pro डायरेक्ट सैटेलाइट 5G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करेगा। बताया जा रहा है कि यह फीचर सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर की तरह सिर्फ एक SOS फीचर नहीं होगा। इसे यूजर नॉर्मली भी इस्तेमाल कर पाएंगे। इसका साफ सा मतलब है कि आपको इंटरनेट चलाने के लिए किसी सिम या टावर की जरूरत नहीं रहेगी। तैयारी कर रहा SpaceX गौरतलब है कि SpaceX ने Starlink सैटेलाइट की नई जेनरेशन बनाई है जो Apple की मौजूदा सैटेलाइट टेक्नोलॉजी वाले रेडियो स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल करती है। इससे दोनों कंपनियों के लिए पार्टनरशिप तकनीकी रूप से आसान हो जाएगी। अगर यह डील फाइनल हो जाती है, तो उन इलाकों में भी इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाना संभव होगा, जहां फिलहाल कोई सेल टावर नहीं है। ऐसा बताया जा रहा है कि ऐपल इस फीचर को सिर्फ अपने प्रो मॉडल में देगा। क्यों हो रही है यह डील? फिलहाल ऐपल सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर के लिए Globalstar की मदद लेता है, जो कि इनका सैटेलाइट पार्टनर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Globalstar जल्द ही बिकने वाला है और उसकी कीमत करीब 10 बिलियन डॉलर यानी कि लगभग 84,000 करोड़ रुपये हो सकती है। ऐसा होता है, तो ऐपल को नए पार्टनर की जरूरत होगी। ऐसे में SpaceX से बढ़िया ऑप्शन और क्या हो सकता है। बता दें कि फिलहाल Globalstar ही SOS फीचर के तौर पर Apple के कुछ मॉडल्स पर सैटेलाइट कनेक्टिविटी देता है और इसकी मदद से लोग इमरजेंसी सर्विस से संपर्क कर पाते हैं। भारत का भी होगा फायदा अगर iPhone 18 Pro में इस तरह का फीचर आता है, तो भारत में भी यह उपलब्ध कराया जा सकता है। दरअसल स्टारलिंक भारत में जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसका मकसद दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का है। ऐसे में देखा जाए, तो Apple और SpaceX के हाथ मिलाने से भारत में भी यह फीचर समय रहते उपलब्ध हो सकता है। मालूम हो कि फिलहाल सैटेलाइट कनेक्टिविटी वाला फीचर भारत में उपलब्ध नहीं है।  

iOS 26.1 अपडेट: नए iPhone में मिलने वाले बड़े बदलाव और नई सुविधाएं

नई दिल्ली  iOS 26.1 बीटा 2 अपडेट के जारी होने के बाद, Apple अब iPhone के लिए iOS 26.1 को रोल आउट करने की योजना बना रहा है। नया अपडेट कई सुधार लाएगा, साथ ही सुविधाओं और प्रदर्शन में मामूली बदलाव शामिल होंगे। इसमें AirPods के लिए विस्तारित लाइव ट्रांसलेशन सपोर्ट शामिल है – सेटिंग्स, सफारी, फोन, फिटनेस ऐप, अलार्म और अन्य सेक्शन में बदलाव किए जाएंगे। iOS 26.1 में क्या-क्या फीचर होंगे?  नए अपडेट में Apple Music के लिए नए फीचर शामिल होंगे। अब यूजर्स स्वाइप इशारों का इस्तेमाल करके मिनीप्लेयर के गानों के बीच स्विच कर पाएंगे – बाईं ओर स्वाइप करने पर नया गाना बजेगा और दाईं ओर स्वाइप करने पर पिछला गाना बजेगा। इसके अलावा, Apple AirPods के लिए एक लाइव ट्रांसलेशन फीचर भी पेश कर सकता है, जो अब पांच नई भाषाओं को सपोर्ट करेगा, जिससे कुल भाषाओं की संख्या 11 हो जाएगी। इसके अलावा, यह नया फीचर आपको अपने AirPods के साथ रीयल-टाइम में अनुवादित बातचीत करने की सुविधा देगा। यह सुविधा AirPods Pro 3, AirPods Pro 2 और नए AirPods 4 (ANC वेरिएंट) के साथ आएगी। समर्थित भाषाओं में मैंडरिन, अंग्रेजी (अमेरिका और यूके), फ्रांच, जर्मन, इतालवी, कोरियाई, जापानी, पुर्तगाली और स्पेनिश शामिल हैं। अलार्म को गलती से बजने से रोकने के लिए Apple एक पुराना संकेत भी फिर से पेश कर सकता है। नया स्वाइप-टू-स्टॉप एक्शन iOS 26 में पेश किए गए बड़े, दिखने वाले स्टॉप बटन की जगह लेगा। इस संकेत का इस्तेमाल अलार्म और टाइमर, दोनों पर किया जा सकता है। किन डिवाइसों को iOS 26.1 मिलेगा? iOS 26.1 उन सभी iPhones पर उपलब्ध होगा जो iOS 26 को सपोर्ट करते हैं। इसमें iPhone X और उसके बाद के मॉडल, जिनमें दूसरी पीढ़ी और नया iPhone SE शामिल हैं।

ट्रंप का टिम कुक से दो-टूक सवाल, मेहमानों से जानना चाहा इन्वेस्टमेंट प्लान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलेनिया ने व्हाइट हाउस में टेक इंडस्ट्री के दिग्गजों को खाने पर बुलाया. ट्रंप ने इस दावत को हाई आईक्यू लोगों का जमावड़ा कहा. इस दावत में खाने के साथ-साथ पॉलिटिक्स, इकोनॉमी, निवेश और नौकरियों पर चर्चा हुई.  डिनर के दौरान ट्रंप ने टेक कंपनियों के मालिकों और सीईओ से पूछा कि वे अमेरिका में कितना निवेश कर रहे हैं.  ट्रंप के दाहिनी ओर बैठे मेटा के मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं. इसके बाद ट्रंप ऐपल के सीईओ टिम कूक की ओर मुखातिब हुए. उन्होंने टिम कूक से पूछा, "और टिम… ऐपल अमेरिका में कितना पैसा लगाएगा? क्योंकि मुझे पता है कि यह बहुत ज़्यादा होने वाला है. और आप जानते ही हैं, आप कहीं और थे, और अब आप सचमुच बड़े पैमाने पर वापस लौट रहे हैं. आप कितना पैसा लगाएंगे?" ट्रंप ने टिम कुक से पूछा, “टिम, आप अमेरिका में कितने पैसे निवेश करने जा रहे हैं? मुझे पता है यह बहुत बड़ी रकम है। आप पहले कहीं और थे, अब आप बड़े पैमाने पर घर लौट रहे हैं। कितना निवेश होगा?” कुक ने जवाब दिया, “600 अरब डॉलर।” साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा, “मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने ऐसा माहौल बनाया जिससे हम अमेरिका में बड़ा निवेश कर सकें। यह आपकी नेतृत्व क्षमता और नवाचार पर ध्यान को दर्शाता है।” भारत पर ट्रंप की आपत्ति हाल ही में ट्रंप ने टिम कुक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि उन्हें एप्पल का भारत में प्रोडक्शन बढ़ाना पसंद नहीं है। ट्रंप ने कहा, “मैंने टिम कुक से कहा, मेरे दोस्त, मैंने तुम्हारे साथ अच्छा व्यवहार किया है। अब तुम यहां 500 अरब डॉलर का निवेश करने आ रहे हो, लेकिन सुन रहा हूं कि तुम भारत में भी निर्माण कर रहे हो। मैं नहीं चाहता कि तुम भारत में बनाओ।” एप्पल ने चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाना शुरू किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में दुनिया भर में बिकने वाले 25 प्रतिशत iPhone भारत में बने। भारत में 6 करोड़ आईफोन बनाने की योजना टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल भारत में अपनी उत्पादन क्षमता को 4 करोड़ यूनिट्स से बढ़ाकर 6 करोड़ यूनिट्स करने के लिए करीब 2.5 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है। ट्रंप ने Meta प्रमुख जुकरबर्ग से भी यही सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा, “600 अरब डॉलर।” Google के सुंदर पिचाई ने जवाब दिया, “हम 100 अरब डॉलर से ऊपर हैं। अगले दो वर्षों में यह 250 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।” Microsoft प्रमुख सत्या नडेला ने कहा, “इस साल अमेरिका में हम करीब 75 से 80 अरब डॉलर निवेश करेंगे।” ट्रंप ने सभी की सराहना करते हुए कहा, “बहुत बढ़िया, हम आप पर गर्व करते हैं। बहुत सारी नौकरियां आएंगी।” इस पर टिक कूक ने कहा कि वे अमेरिका में 600 बिलियन डॉलर निवेश करने जा रहे हैं.  ट्रंप ने आगे कहा- 600 अरब डॉलर, बढ़िया है, बहुत सारी नौकरियां आएंगी. हमें ऐसा करके बहुत गर्व महससू होगा. आपका बहुत धन्यवाद, मैं इसकी सराहना करता हूं.  इसके बाद ट्रंप गूगल के सुंदर पिचाई से बात की और उनसे पूछा कि वे कितना पैसा अमेरिका में लगा रहे हैं.  सुंदर पिचाई ने कहा, "हम 100 बिलियन डॉलर से काफी ऊपर हैं. अगले दो वर्षों में अमेरिका में यह 250 बिलियन डॉलर हो जाएगा." इस पर ट्रंप ने कहा, "यह बहुत बढ़िया है, यह बहुत बढ़िया है. हमें आप पर गर्व है. शुक्रिया, ढेर सारी नौकरियां." फिर अमेरिकी राष्ट्रपति ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से पूछा कि उनकी कंपनी कितना पैसा अमेरिका में लगा रही है.  अमेरिका के लिए अपना निवेश प्लान बताते हुए सत्या ने कहा कि इस साल हम संयुक्त राज्य अमेरिका में लगभग 75 से 80 अरब डॉलर के करीब निवेश करेंगे. ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ को भी थैंक्यू कहा. व्हाइट हाइस के स्टेट डाइनिंग रूम में जमी टेक दिग्गजों की इस मीटिंग का सबसे हैरान करने वाला पहलू था- इस डिनर से दुनिया के सबसे अमीर और टेक दुनिया के टायकून एलॉन मस्क का गायब रहना. कभी ट्रंप के खास मित्रों में शामिल रहने वाले एलॉन मस्क और डोनाल्ड के संबंध अब बिगड़ गए हैं और दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते.  इस डिनर में ट्रंप ने मस्क के विरोधी और टेक दुनिया के दूसरे बड़े बिजनेसमैन ओपन एआई के सीईओ सैम अल्टमैन को बुलाया और उन्हें काफी तरजीह दी.  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस में आयोजित टेक डिनर में भारतीय मूल के सीईओ का जलवा रहा. इनमें माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के सत्या नडेला, गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोन टेक्नोलॉजीज के सीईओ संजय मेहरोत्रा, TIBCO के चेयरमैन और पैलंटिर के सीटीओ श्याम शंकर शामिल थे.