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ईरान ने अमेरिका के प्रमुख वार्निंग सिस्टम को तबाह किया, युद्ध के बीच ‘आंख’ फोड़ने से हुआ बड़ा नुकसान

वाशिंगटन ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद युद्ध ने भयावह मोड़ के लिया है। जहां एक तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर लगातार हमले जारी रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच अब यह खबर सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका को एक गहरा जख्म दे दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। इसे इस क्षेत्र में अमेरिका का आंख भी कहा जाता था। जानकारी के मुताबिक करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत वाला यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है और इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़ा मिसाइल चेतावनी रडार माना जाता है। ईरान ने कैसे फोड़ी आंख? ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे सटीक मिसाइल हमला बताया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवत: कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से किया गया होगा, जो शायद शाहेद प्रकार का था। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन के एक साथ बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा। क्यों है बड़ा नुकसान? इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत बनाया था। यह प्रणाली 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की निगरानी कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर सिर्फ एक सैन्य ठिकाने को नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम अमेरिकी मिसाइल रक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन ने कहा कि इस हमले के रणनीतिक असर भी हो सकते हैं। बदलने में लग जाएगा समय सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े रडार सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता, इसलिए इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।

ईरान के साथ संघर्ष: अमेरिका पूरी ताकत लगा रहा, हर हमला रोक पाना संभव नहीं—बड़ा बयान

वाशिंगटन ईरान के साथ जारी युद्ध के पांचवें दिन अमेरिका ने साफ किया है कि उसने मध्य पूर्व में तैनात अपने सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए कोई कमी नहीं छोड़ी है। अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) ने पेंटागन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए हर संसाधन और हर क्षमता का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ड्रोन या मिसाइल हमले को पूरी तरह रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमला शुरू करने से पहले अधिकतम सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन 100 प्रतिशत सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। इसी बीच पेंटागन ने जानकारी दी कि अब तक इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही संकेत दिया था कि यह जंग लंबी चल सकती है और आगे भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। अमेरिका बोला- ईरान उसे थका नहीं सकता है हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस सैन्य अभियान में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और ईरान के हवाई क्षेत्र पर तेजी से नियंत्रण स्थापित कर रहा है। उनका कहना था कि अमेरिका जितना समय जरूरी होगा, उतना समय लेगा और ईरान उसे थका नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका “निर्णायक, तबाही मचाने वाले और बिना किसी रियायत के” आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि और लड़ाकू विमान और बमवर्षक जल्द ही इस क्षेत्र में पहुंचेंगे। जंग के पांचवें दिन एक अहम सैन्य कार्रवाई भी हुई। मंगलवार रात एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो दागकर ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को डुबो दिया। हेगसेथ ने कहा कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में खुद को सुरक्षित समझ रहा था, लेकिन उसे निशाना बना लिया गया। यह जहाज ईरान के नए युद्धपोतों में से एक था। श्रीलंका ने बताया कि उसके दक्षिणी तट के पास जहाज से संकट संदेश मिलने के बाद उसकी नौसेना और वायुसेना ने 180 में से 32 लोगों को बचा लिया। हेगसेथ के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब किसी दुश्मन के जहाज को इस तरह अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया है। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि जंग की शुरुआत के मुकाबले अब ईरान कम मिसाइलें दाग रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के लगातार हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है। जंग कितने समय तक चलेगी, इस पर हेगसेथ ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह चार हफ्ते भी चल सकती है, छह या आठ हफ्ते भी, और हालात के मुताबिक इससे कम या ज्यादा समय भी लग सकता है। उनके मुताबिक, युद्ध की रफ्तार और दिशा अमेरिका तय कर रहा है और दुश्मन असंतुलित स्थिति में है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिका ने उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया और अब ईरानी आसमान पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद ग्रैविटी बम का इस्तेमाल करने की योजना है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त गोला-बारूद और संसाधन मौजूद हैं। एक इजरायली सैन्य अधिकारी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के शीर्ष अधिकारियों ने करीब तीन हफ्ते पहले हमलों की योजना बनानी शुरू कर दी थी। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,000 से ज्यादा और लेबनान में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है और हजारों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। सितंबर तक चल सकता है युद्ध 'पॉलिटिको' की रिपोर्ट में आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से लिखा है कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अमेरिकी रक्षा विभाग से फ्लोरिडा स्थित अपने मुख्यालय में और अधिक सैन्य खुफिया कर्मचारियों को भेजने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य आने वाले महीनों में ईरान के खिलाफ अभियानों को सुचारू रूप से चलाना है। इस अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग से पता चलता है कि अमेरिका एक लंबे अभियान की योजना बना रहा है, जो सितंबर तक खिंच सकता है। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन पिछली टिप्पणियों के बिल्कुल उलट है, जिनमें उन्होंने युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद कहा था कि यह अभियान लगभग चार सप्ताह या उससे भी कम समय में पूरा हो सकता है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पॉलिटिको को बताया कि रक्षा अधिकारी इस क्षेत्र में अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां तैनात करने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें विशेष रूप से छोटी और कम खर्चीली 'एंटी-ड्रोन तकनीक' शामिल हैं, जिन्हें पेंटागन ने हाल के वर्षों में विकसित किया है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अमेरिका और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किया गया यह युद्ध 28 फरवरी को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के नाम से शुरू हुआ था। इस अभियान के पहले ही दिन ईरान की राजधानी तेहरान में एक बड़े हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई उनके आवास पर मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने इस युद्ध के व्यापक परिणामों का पूरी तरह से अनुमान नहीं लगाया था। नतीजतन, अमेरिकी विदेश विभाग ने पूरे मध्य पूर्व से अपने राजनयिक कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाने शुरू कर दिए हैं। निकासी प्रक्रिया का सीधा नियंत्रण अब विदेश विभाग के वरिष्ठ नेतृत्व के हाथों में है। इस अभियान के दौरान अब तक छह अमेरिकी सैनिक अपनी जान गंवा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। पड़ोसी देशों पर खतरा इस संघर्ष का असर अब फारस की खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ने लगा है। ईरानी ड्रोन और मिसाइलें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत और अन्य पड़ोसी देशों के हवाई क्षेत्र की ओर उड़ती देखी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया भर में तेल निर्यात के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, वहां से जहाजों की आवाजाही काफी हद तक रुक गई है। ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के कारण व्यापारिक … Read more

दुनिया में बढ़ा तनाव! ईरान जंग के बीच अमेरिका का Doomsday मिसाइल परीक्षण, धमकी के बाद स्पेन आया लाइन पर

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे 'मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल' लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को 'प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने' के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

शांति और स्थिरता की दी अपील ईरान का ड्रोन अटैक: सऊदी की Aramco रिफाइनरी पर हमला, PM मोदी का शांति और स्थिरता पर जोर

दुबई दुबई में स्थित दुनिया के सबसे बड़े ऑयल टैंक 'अरामको' पर ईरान ने अटैक किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको ने ड्रोन हमलों के बाद सोमवार को अपनी रास तनुरा तेल रिफाइनरी बंद कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक, बंद होने की खबरों से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 9.32% बढ़ गई हैं. यह जगह सऊदी की सबसे बड़ी और सबसे स्ट्रेटेजिक एनर्जी साइट्स में से एक है. हमले के बाद इसके प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स में आग लग गई. अधिकारियों का कहना है कि आग पर काबू पा लिया गया है और किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने इलाके में ज़रूरी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता पैदा कर दी है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी के ने बताया कि अरामको की रास तनुरा रिफाइनरी को एहतियात के तौर पर बंद कर दिया गया है. अधिकारी ने कहा कि स्थिति कंट्रोल में है. ईरान युद्ध के बीच PM मोदी का बड़ा बयान पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की ऐतिहासिक मुलाकात भारत की कूटनीति के लिए एक नया अध्याय साबित हो सकती है. नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को 'नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप'  पर ले जाने का संकल्प लिया, बल्कि वैश्विक शांति के लिए एक मजबूत संदेश भी साझा किया. प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत हमेशा से ही शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है और सभी विवादों का समाधान 'डायलॉग और डिप्लोमेसी' (संवाद और कूटनीति) के माध्यम से होना चाहिए.  पीएम मोदी ने कहा कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में सभी संबंधित देशों के साथ मिलकर काम जारी रहेगा. उन्होंने दोहराया कि “हमने हमेशा शांति और स्थिरता की अपील की है.” आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हुई. इस दौरान दोनों नेताओं ने आतंकवाद और कट्टरपंथ को पूरी मानवता के लिए एक साझा खतरा बताते हुए इसके खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया. रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत और कनाडा ने 'इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग' की स्थापना का निर्णय लिया है.  इसके माध्यम से दोनों देश डिफेंस इंडस्ट्री, मिलिट्री एक्सचेंज और मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (समुद्री सुरक्षा जागरूकता) को बढ़ावा देंगे. पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में रह रहे लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि भारत उनकी सलामती के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा. ईरान जंग का ख़तरनाक दौर… दुनिया भर में, ईरान जंग के बढ़ने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में चार साल में सबसे ज़्यादा उछाल आया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए व्यापार करीब रुक गया है. यह एक ऐसा पानी का रास्ता है, जो रोज़ाना दुनिया का करीब पांचवें हिस्से का कच्चा तेल ले जाता है. हालांकि, ईरान ने ऑफिशियली चैनल बंद नहीं किया है, लेकिन जहाज़ मालिकों ने लड़ाई के बीच खुद ही रोक लगा दी है. ईरान युद्ध ग्लोबल ऑयल मार्केट के लिए एक खतरनाक नया दौर है. US और इज़रायल ने शनिवार को ईरान में कई जगहों पर मिसाइलें दागीं और लोकल लोगों से इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकने की अपील की. ईरान के सुप्रीम लीडर, अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के बाद तेहरान ने इज़रायल के साथ-साथ सऊदी अरब, कतर, यूनाइटेड अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में US बेस और दूसरे ठिकानों पर हमलों की झड़ी लगा दी. 

खामनेई की मौत के बाद बौखलाए ईरान ने ट्रंप को दिया जवाब, मुसलमान देशों पर हमले की गलती मानी

तेहरान  ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बाद ईरान ने अपना इरादा बता दिया है। डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से यह दावा किए जाने के बाद कि ईरान का नेतृत्व अब अमेरिका संग बातचीत के लिए तैयार है, ईरान ने साफ किया है कि अब बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसके साथ ही ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप को सीधा संदेश भेज दिया है। ईरान के सिक्योरिटी चीफ अली लारीजानी ने ट्रंप के बयानों को सिरे से खारिज कर दिया। सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अली लारीजानी ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। यह बयान उन रिपोर्ट्स के जवाब में था जिसमें यह कहा जा रहा था कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रविवार को इस तरह का एक बयान दिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने 'द अटलांटिक' मैग्जीन के साथ एक इंटरव्यू में कहा था, "वे बात करना चाहते हैं, मैंने बातचीत के लिए सहमति दे दी है, इसलिए मैं उनसे बात करूंगा।" ईरान पर हमले जारी इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद भी अमेरिका-इजरायल ने रविवार को ईरान में कई जगहों पर जोरदार हमले किए हैं। ईरानी नेताओं के मुताबिक, इन हमलों की शुरुआत से अब तक खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं के अलावा 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के महत्वपूर्ण सैन्य, राजनीतिक और खुफिया ठिकानों को भी निशाना बनाया है। इससे प्रतीत होता है कि जंग व्यापक होती जा रही है और यह लंबे समय तक चल सकती है, जो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता ला सकती है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य अड्डों पर बोला हमला वहीं ईरान ने बदले का संकल्प लेते हुए जवाबी कार्रवाई में इजरायल और अरब देशों पर सैंकड़ों मिसाइलें दागी हैं। इजरायल की बचाव सेवाओं के मुताबिक यरुशलम और मध्य शहर बेत शेमेश के एक प्रार्थना स्थल (सिनागॉग) समेत कई जगहों पर हमले हुए। बेत शेमेश में नौ लोगों की मौत हो गई है और 28 लोग घायल हुए। इसके साथ ही इजरायल में मृतकों की कुल संख्या 11 हो गई। वहीं खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान लगातार मिसाइलें दाग रहा है। ईरान ने मुसलमान देशों पर हमला करके गलती इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उसने जवाबी कार्रवाई के तहत उन 6 पड़ोसी देशों पर हमला बोल दिया, जो सीधे तौर पर इस जंग में शामिल नहीं थे। अब इन सभी देशों ने ईरान के खिलाफ बयान जारी किया है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने तो ईरान के राजदूत को तलब कर नाराजगी जताई है। ऐसी स्थिति में यह सवाल अब उठ रहा है कि क्या ईरान ने पड़ोस के मुसलमान देशों पर हमला करके गलती की। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि गल्फ कॉपरेशन काउंसिल के वाले इन 6 देशों ने अब ईरान के खिलाफ साझा बयान जारी किया है। यही नहीं इन देशों का कहना है कि हमारे पास अधिकार है कि हम भी ईरान के इन आक्रामक हमलों का जवाब दे सकें। इस संबंध में इन देशों ने एक ऑनलाइन मीटिंग भी की है, जिसमें ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़ी जंग से उपजे हालातों पर चर्चा की गई। इसके अलावा यह बात भी हुई कि ईरान ने हम पर हमला करके गलती की है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर और कुवैत को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है। इन सभी देशों के विदेश मंत्रियों ने चर्चा की और क्षेत्र में स्थिरता कायम करने के उपायों पर भी बात की। खाड़ी देश बोले- संभल जाओ, वरना हम भी कदम उठाएंगे खाड़ी के इन सभी देशों ने कहा कि हम अपनी सुरक्षा और स्थिरता के लिए कदम उठाने को स्वतंत्र हैं। UAE ने तो ईरान के राजदूत रजा अमेरी को तलब किया और उनसे विरोध जताया है। यूएई ने कहा कि ईरान ने हमारे ऊपर हमला करके सही नहीं किया है। UAE ने कहा कि हमारे ऊपर हमला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा हमारी संप्रभुता को चैलेंज किया गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में डाली गई है। ऐसी स्थिति को हम स्वीकार नहीं कर सकते हैं। हमारे पास भी ईरान के हमलों पर जवाब देने का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने की UAE के नेता से बात, शियाओं में गम और गुस्सा इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से बात भी की है। उन्होंने UAE के लीडर को फोन किया और ईरान के हमलों को लेकर चर्चा की। दोनों ने इस मसले पर भी बात की कि आखिर आने वाले दिन कैसे हो सकते हैं। बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई भी इन हमलों में मारे गए हैं। उनके मारे जाने से दुनिया भर के शिया मुसलमानों में गम और गुस्सा है। भारत में भी श्रीनगर, लखनऊ, दिल्ली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। खाड़ी देशों में धमाके कई खाड़ी देशों में ईरानी हमलों के बाद धमाकों की आवाजें सुनी गई हैं। यूएई की सरकारी मीडिया के मुताबिक राजधानी अबू धाबी पर ईरानी हमलों की चपेट में आने से 2 लोगों की मौत हो गई और हवाई हमलों से निकले मलबे के कारण शहर के मुख्य बंदरगाह और प्रतिष्ठित बुर्ज अल अरब होटल में आग लग गई। ईरानी कार्रवाई का दायरा ओमान तक फैल गया है, जो पश्चिम के साथ ईरान का लंबे समय से वार्ताकार रहा है और इससे पहले इस संघर्ष में शामिल नहीं हुआ था। इसके अलावा सऊदी अरब ने अपनी राजधानी रियाद और पूर्वी क्षेत्र पर ईरान के हमलों की निंदा करते हुए कहा कि उसने इन हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र या भूभाग का इस्तेमाल ईरान को निशाना बनाने के लिए नहीं होने दिया। वहीं जॉर्डन ने कहा कि उसने 49 ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना किया। कुवैत, बहरीन और कतर … Read more

ईरान को 48 घंटे की जंग में हुआ कितना नुकसान? 48 नेता, 40 कमांडर, 9 नेवल शिप की कीमत पर मिडिल ईस्ट में फ्रांस की एंट्री

तेहरान / न्यूयॉर्क अमेरिका और इजरायल के हमलों के दौरान ईरान को 48 घंटे में भारी नुकसान हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि इन हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं. उन्होंने कहा, 'यह तेजी से आगे बढ़ रहा है. कोई विश्वास नहीं कर सकता कि हमने कितनी सफलता हासिल की है, एक ही हमले में 48 नेता खत्म हो गए.' ट्रंप ने यह बात फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में कही. वहीं इजरायल की सेना (IDF) ने कहा कि इस हमले में 40 'महत्वपूर्ण' ईरानी सैन्य कमांडर मारे गए हैं, जिनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ, अब्दुलरहीम मौसावी भी शामिल हैं. IDF के अनुसार, यह कार्रवाई खामेनेई पर हमले के तुरंत बाद हुई. नौ ईरानी युद्धपोत डूबे ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी सेनाएं ईरान की नौसेना को बेअसर करने में लगी हैं और अब तक नौ ईरानी युद्धपोत डूब चुके हैं. उन्होंने कहा, 'वे जल्दी ही समुद्र की तलहटी पर तैरेंगे!' उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरानी नौसेना मुख्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत ईरानी सैन्य बलों ने जवाब में सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि इस संघर्ष में अब तक तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. अमेरिकी सेनाध्यक्षों के अनुसार, ईरान के खिलाफ संयुक्त अमेरिकी-इजरायली ऑपरेशन ने देश के कई प्रमुख सैन्य और राजनीतिक नेताओं को खत्म कर दिया, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे. USS अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा खारिज यह संघर्ष अब पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र में फैल गया है. ईरानी मिसाइलों ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन को निशाना बनाया. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रविवार को दावा किया कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि मिसाइलें कैरियर के पास तक भी नहीं पहुंच सकीं और कैरियर अभी भी क्षेत्र में संचालन कर रहा है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान पर भीषण हमले किए जो तीसरे दिन भी जारी हैं. इसके जवाब में ईरान ने भी कई देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में टकराव बढ़ता जा रहा है.  दूसरी तरफ खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने भी अपने तेवर से बता दिया है कि वो रुकने वाला नहीं है. ईरान की जामकरान मस्जिद पर इंतकाम का लाल झंडा फहराया गया है. ईरान ने जवाबी हमले में 'करारा' जवाब देने का दावा करते हुए इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. मिडिल ईस्ट के देशों ने अपने एयरस्पेस बंद कर दिए हैं, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें गैर-ज़रूरी मूवमेंट से बचने के लिए कहा गया है.  पाकिस्तान में US दूतावास अलर्ट पर अमेरिकी दूतावास इस्लामाबाद ने पाकिस्तान में वर्तमान स्थिति को लेकर चेतावनी जारी की है. दूतावास ने बताया कि लाहौर स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर चल रहे प्रदर्शन और कराची के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हिंसक विरोध प्रदर्शन की सूचना मिल रही है. इसके अलावा, इस्लामाबाद में अमेरिकी दूतावास और पेशावर के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के सामने भी अतिरिक्त प्रदर्शन के आह्वान हो रहे हैं. अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तब तक अपनी आवाजाही सीमित रखें जब तक अन्य सूचना न दी जाए. सेंसेक्स 2743 अंक टूटा, निफ्टी 519 अंक गिरा ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई है. सेंसेक्स में 2743 अंक यानी 3.38% की भारी गिरावट देखी गई और यह 78,543 अंक पर खुला. वहीं, निफ्टी इंडेक्स में भी 519 अंक या 2.06% का नुकसान हुआ, जो इसे 24,659 अंक पर ले आया. इजरायल के हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. इजरायल के हमलों के चलते बेरूत के दक्षिणी इलाकों में कम से कम 10 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है. साइप्रस में ब्रिटिश बेस पर ड्रोन हमला, नुकसान की पुष्टि साइप्रस ने पुष्टि की है कि उसके द्वीप पर स्थित एक ब्रिटिश सैन्य ठिकाने को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया था. इस हमले से ठिकाने को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई है. यह घटना क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता के संदर्भ में चिंता का विषय बनी हुई है.  ईरानी सुप्रीम लीडर की हत्या के विरोध में डोडा-किश्तवाड़ में बंद का आह्वान डोडा और किश्तवार जिलों में शिया और अन्य मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने आज बंद का आह्वान किया है. यह बंद ईरान के सुप्रीम नेता की हत्या के विरोध में आयोजित किया गया है. जम्मू डिवीजन के ये दोनों जिले धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां इस तरह के घटनाक्रम का गहरा असर पड़ता है.

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान ने दागीं मिसाइलें, ट्रंप बोले- अब अमेरिका दिखाएगा ताकत

ईरान ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद व्यापक सैन्य कार्रवाई का दावा किया है। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ प्रतिशोध के तौर पर की जा रही है। ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में इजरायल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए हैं। UAE और कतर में धमाकों की खबर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर, जिन्हें अमेरिका का करीबी सहयोगी माना जाता है, वहां हमलों की सूचना सामने आई है। दुबई और कतर की राजधानी दोहा में कई जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबरें हैं। हालांकि इन हमलों से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।   IRGC का दावा: मिसाइल और ड्रोन से हमला ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस' के पांचवें चरण के तहत कार्रवाई का दावा किया है। जेबेल अली एंकरेज पर अमेरिकी जहाज के लिए गोला-बारूद ले जा रहे एक पोत को ड्रोन से निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 12 ड्रोन से हमला किए जाने की बात भी सामने आ रही है। हमलों में बुनियादी ढांचे के नष्ट होने और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दुबई एयरपोर्ट और प्रमुख स्थलों पर हमला ईरान ने दुनिया के व्यस्ततम हवाई अड्डों में शामिल दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही दुबई के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पाम जुमेराह और लक्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर भी पहले हमले किए जाने की बात कही गई है। अमेरिका राष्ट्रपति ने फिर दी चेतावनी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हमला किया गया तो अमेरिका, ऐसा जवाब देगा जो पहले कभी नहीं देखा गया। ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान ने हमारी रेड लाइन पार की, तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा। ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई वहीं, खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की कसम खाई है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के समर्पण तक कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है और क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

खामेनेई की मौत के बाद ईरान का इजरायल पर मिसाइल अटैक

तेहरान. ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान ने अपना नया कमांडर इन चीफ नियुक्त किया है। ईरान ने खामेनेई की मौत के बगाद 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। वहीं इजरायल और अमेरिका के इस हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने भी की है। वहीं ईरान ने नए सुप्रीम लीडर का भी ऐलान किया है। हमलों के बाद भड़के हुए ईरान ने भी पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेसों को निशाना बनाया। ये हमले ऐसे समय में हुए जब हाल के हफ्तों में तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में तैनात किए जा चुके थे और डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते थे। यह उस समय हो रहा है जब देश के भीतर भी हालात चुनौतीपूर्ण हैं और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ईरान के हमलों की वजह से कतर, सऊदी अरब, ईराक और अन्य देशों में भी उसका विरोध हो रहा है। वहीं खबर के मुताबिक यूएई में ईरान के हमले में एक शख्स की मौत भी हो गई है। IRGC ने ब्रिगेडियर जनरल अहमद वहीदी को नया कमांडर इन चीफ चुन लिया है। ऐसे में युद्ध अभी लंबा खिंचने की संभावना नजर आ रही है। खामेनेई के मारे जाने पर प्रदर्शन की आग भारत तक पहुंच गई है। भारत में कश्मीर, यूपी और कई अन्य जगहों पर शिया मुसलमान सड़कों पर उतर रहे हैं। यूएन ने की हमले की निंदा संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और ''क्षेत्र और पूरी दुनिया को संकट से निकालने'' के लिए तत्काल फिर से बातचीत शुरू करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने आपातकालीन बैठक में कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ''वरना व्यापक संघर्ष होने की आशंका है जिसके नागरिकों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से गंभीर परिणाम हो सकते हैं।'' यहां पढ़ें ईरान-इजरायल युद्ध का पूरा मामला… कैसे चुना जाएगा ईरान का सुप्रीम लीडर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने देश के भविष्य को लेकर बेहद महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मौलवियों की एक समिति को उनके स्थान पर नए नेता के चयन का काम सौंपा गया है। ईरान के संविधान के तहत 88 सदस्यीय समिति 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' (विशेषज्ञों की सभा) नये सर्वोच्च नेता का चयन करेगी। इस निकाय में केवल शिया धर्मगुरु शामिल होते हैं, जिन्हें हर आठ वर्ष में जनमत के आधार पर चुना जाता है। कानून के अनुसार, 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' को जल्द से जल्द नये सर्वोच्च नेता का चयन करना होगा। यदि चयन में देरी होता है तो एक नेतृत्व परिषद कार्यभार संभाल सकती है, जिसमें राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और 'गार्जियन काउंसिल' का एक वरिष्ठ सदस्य शामिल होता है।

ईरान में इजरायल और अमेरिका का बड़ा हमला, राष्ट्रपति भवन, खुफिया एजेंसी सहित 30 ठिकानों को बनाया निशाना

तेल अवीव/तेहरान इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। इसके अलावा इजरायली सेना ने ईरान के पलटवार की आशंका के बीच लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा है। ईरान की राजधानी तेहरान में कम से कम तीन जगहों पर भीषण धमाकों की आवाज सुनी गई है। इजरायली सेना ने कहा कि ये अलर्ट लोगों को इजरायल की तरफ मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए तैयार करने के लिए हैं। इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ये हमला किया है। इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर के निजी आवास को उड़ा दिया गया है। लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सुप्रील लीडर उस वक्त अपने आवास पर मौजूद नहीं थे। वहीं ईरान के एयरस्पेस को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। सिविल एविएशन ऑर्गनाइज़ेशन के स्पोक्सपर्सन ने नए NOTAM जारी होने के बाद पूरे देश में बंद होने की पुष्टि की। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा है कि ईरान में एक साथ 30 टारगेट पर हमले किए हैं। इन हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ली अली खआमेनेई और ईरानी इंटेलिजेंस के हेडक्वार्टर शामिल हैं। शुरुआती धमाके राजधानी तेहरान में तीन जगहों पर करीब 09:30 बजे रिकॉर्ड किए गए, और आगे के हमलों में राजधानी के कम से कम दो और इलाकों को निशाना बनाया गया। तेहरान में लोकल टाइम के हिसाब से सुबह 10:00 बजे के बाद धमाकों की दूसरी लहर शुरू हुई। इजरायली सेना ईरान पर हमला करने की घोषणा की है। ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही इजरायल और US ईरान पर हमले कर रहे हैं, तेहरान के उत्तर और पूर्व में, साथ ही इस्फ़हान, करज और करमानशाह में भी धमाके सुनाई दे रहे हैं। इजरायल और अमेरिका ने ईरान के जिन जगहों पर हमला किया है वो इस प्रकार हैं.    -रक्षा मंत्रालय  -खुफिया मुख्यालय -सुप्रीम लीडर अली खामेनेई का ऑफिस -एटॉमिक एनर्जी ऑफ ईरान -परचीन ईरान के किन किन शहरों पर हमला हुआ है -तेहरान -कॉम -तबरेज -करमनशाह -कराज -इस्फहान युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर अमेरिका ने किया हमला इरान पर अमेरिका ने अपने युद्धपोत अब्राहम लिंकन से ईरान पर हमले कर रहा है. इस हमले में अमेरिकी नौसेना और वायुसेना शामिल है.   इजरायली PM  ने कहा- ये शेर की दहाड़ इजरायल ने ईरान पर कई मिसाइलें दागी हैं. हमले के बाद राजधानी तेहरान में कई स्थानों इमारतों से धुएं का गुबार निकलता हुआ दिखाई दे रहा है. इजरायल ने इस ऑपरेशन का नाम शील्ड ऑफ जुडा यानी कि यहूदी की ढाल रखा है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री ने ईरान पर हमले को शेर की दहाड़ नाम दिया है.  तेहरान विस्फोट की आवाज ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को एक विस्फोट हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह दावा किया। इस विस्फोट पर सरकार की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई। यह विस्फोट ऐसे समय हुआ जब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। इजराइल के हमले के बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। इजराइल के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके देश ने ईरान पर हमला किया है और उन्होंने आपातकाल की घोषणा की। इसके साथ ही इजराइल में सायरन बजने लगे। इजरायल ने जवाबी मिसाइल हमले की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की है। एपी के मुताबिक, ईरान पर हमले के बाद इजराइल ने भी अपना हवाई क्षेत्र बंद किया। खामेनेई को सुरक्षित जगह पहुंचा गया एक अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई तेहरान में नहीं हैं और उन्हें एक सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है। इजराइल ने कहा कि उसने ईरान के खिलाफ हमला किया है, जिसमें तेहरान में कई धमाके होने की खबर है। ईरान में मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त अलजजीरा की मुताबिक इजरायली हमले में ईरान के मोबाइल नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया है। एक इज़रायली सिक्योरिटी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इस ऑपरेशन की प्लानिंग महीनों पहले से थी और इसकी टाइमिंग कई हफ़्ते पहले तय हो गई थी। डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट के सूत्रों ने बताया कि 'शील्ड ऑफ़ जूडा' नाम के इन हमलों का एक मकसद "इज़राइली होम फ्रंट के लिए खतरों को दूर करना होगा, जिसमें मिसाइल लॉन्चर और अनमैन्ड एरियल व्हीकल बेस पर ज़ोर दिया जाएगा।" ईरान गरजा- जंग शुरू तुमने की, खत्म हम करेंगे इस बीच ईरानी संसद राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी के चेयरमैन ने इजरायल-अमेरिका को सीधी धमकी देते हुए कहा है कि ये लड़ाई तुमने शुरू की है, लेकिन इसे खत्म हम करेंगे. इस बीच ईरान ने कहा है कि इस हमले का जवाब में इजरायल  को कुचल दिया जाएगा.  ईरान पर हमले के बाद इराक में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है और उसने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया गया है.  हमले के बाज ट्रंप का पहला बयान इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर हमले के बाद पहला बयान आया है. उन्होंने कहा है कि ईरान कभी भी परमाणु बम नहीं बना सकता है. ईरान को निशाना बनाना चाहता था. उन्होंने कहा कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, जिससे अमेरिका को भी खतरा है. और दूसरे देशों को भी खतरा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान पर भीषण आक्रमण कर रही है.  ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने मिलकर किया हमला अमेरिका पहले ही मिडिल ईस्ट में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत तैनात कर चुका है। कई राउंड की डिप्लोमैटिक कोशिशों के बावजूद इजरायल और अमेरिका का कहना है कि ‘बातचीत का कोई रास्ता नहीं निकल पाया है।’ ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के सुप्रीम लीडर को एक अज्ञात जगह पर छिपा दिया गया है। इजरायली सेना ने इमरजेंसी की घोषणा कर दी है और लोगों से शेल्टर के पास रहने को कहा है। इजरायली सेना ने कहा है कि "हम समझते हैं कि यह एक कैंपेन है जिसे इजरायल ने अपनी इस पॉलिसी के हिसाब से शुरू किया है कि ईरान इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा है।" इजरायल में स्कूलों को बंद कर दिया गया है, लोगों के एक जगह पर जमा होने से मना कर दिया गया है और जरूरी सेक्टर्स छोड़कर गैर-जरूरी जगहों को बंद कर … Read more

हालात बिगड़े, भारत की एडवाइजरी जारी: ईरान छोड़ें भारतीय नागरिक

ईरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव गहराने के बाद भारत ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने एक बयान जारी कर नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है। इसमें निर्देश दिए गए हैं कि लोग किसी भी तरह से जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकल जाए। दूस्तवास ने इस संबंध में कई अन्य निर्देश भी दिए हैं। भारत सरकार ने जनवरी में जारी अपनी पिछली एडवाइजरी को दोहराया है जिसमें लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई थी। एडवाइज़री में लिखा था, “सभी भारतीय नागरिकों और PIO को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए, विरोध या प्रदर्शन वाली जगहों से बचना चाहिए, ईरान में भारतीय एम्बेसी के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी डेवलपमेंट के लिए लोकल मीडिया पर नजर रखनी चाहिए।” हेल्पलाइन नंबर भी जारी दूतावास ने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह देते हुए, उनसे अपने इमिग्रेशन और ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स अपने पास रखने और किसी भी मदद के लिए इंडियन एम्बेसी से संपर्क करने को कहा है। भारतीय दूतावास ने इस संबंध में भारतीय नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। फंसे हुए नागरिक इन मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर मदद मांग सकते हैं: +989128109115; +989128109109, +989128109102, +989932179359। कभी भी हमला कर सकता है अमेरिका गौरतलब है कि बीते महीने ईरान में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही अमेरिका खामेनेई शासन को सैन्य हस्तक्षेप की धमकियां दे रहा है। बीते महीने से लेकर अब तक अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बड़ी सैन्य तैनाती कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते सप्ताह एक बार फिर यह बयान दिया है कि वह ईरान पर हमले का विचार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ दोनों पक्षों के बीच परमाणु वार्ता भी जारी है। हालांकि इससे कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। अगले दौर की वार्ता कब? इन सब के बीच ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अगला दौर गुरुवार को जिनेवा में होगा। बद्र अल-बुसैदी ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि उन्हें इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि 'समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है'। ओमान ने इससे पहले जिनेवा में हुई वार्ता की भी मेजबानी की थी।