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US-ईरान के बीच सीजफायर की उम्मीद, ईरान ने भेजा मध्यस्थों को शांति प्रस्ताव

तेहरान  मिडिल-ईस्ट में तनाव में भारी बढ़ोतरी के साथ जंग अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकियां तेज़ कर दी हैं, जबकि तेहरान ने इस पर तीखा जवाब दिया है. ऐसे में जंग खतरनाक रूप लेती जा रही है।  Axios ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक ग्रुप 45 दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर चर्चा कर रहा है, जिससे जंग स्थायी रूप से रुक सकती है।  एक्सियोस ने बातचीत की जानकारी रखने वाले चार अमेरिकी, इज़रायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से यह बात कही है।  सीजफायर पर क्या बात हुई? एक्सियोस में संवाददाता बाराक रविद की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो फेज़ वाली डील की शर्तों पर बातचीत जारी है. पहले फेज़ में 45 दिन का संभावित सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे फेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक समझौता होगा. अगर बातचीत के लिए और वक्त की ज़रूरत हुई, तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने या ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सामना करने की उनकी डेडलाइन मंगलवार शाम है।  पर्दे के पीछे क्या चल रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मीडिएटर के ज़रिए बातचीत हो रही है और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भेजे गए टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी हो रही है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल के दिनों में ईरान को कई प्रपोज़ल दिए, लेकिन अभी तक ईरानी अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है।  सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर पार्टियों के साथ दो-फ़ेज़ वाली डील की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. पहला फ़ेज़ संभावित 45-दिन का सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी. एक सूत्र ने कहा कि अगर बातचीत के लिए और समय की ज़रूरत हुई तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है।  दूसरे फ़ेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक एग्रीमेंट होगा. सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर सोचते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना और ईरान के बहुत ज़्यादा एनरिच्ड यूरेनियम का समाधान या तो इसे देश से हटाकर या डाइल्यूशन करके सिर्फ़ एक फ़ाइनल डील का नतीजा हो सकता है।  होर्मुज़ को लेकर ईरान का सख्त रुख! ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 5 अप्रैल, रविवार को होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी जारी की है. आईआरजीसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि फारस की खाड़ी में नई सुरक्षा व्यवस्था बन रही है और यह अहम समुद्री रास्ता अब पहले जैसा नहीं रहेगा।  वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर रविवार के दिन पलटवार की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर यह रास्ता नहीं खोला गया, तो मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा. होर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

क्या ईरान में 45 दिन का युद्ध विराम होगा? पाकिस्तान समेत कई देशों की पेशकश पर निर्भर स्थिति

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है। क्या है सीजफायर प्लान? रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ईरान ने रखी हैं शर्तें एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं। ट्रंप ने दी है डेडलाइन इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है। इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा। ईरान ने दिया दो टूक जवाब वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

ईरान ने होर्मुज में टोल वसूली को दी मंजूरी, अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर बैन

तेहरान  ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान की संसद ने होर्मुज पर टोल लगाने वाले ‘कानून’ को मंजूरी दे दी है. जी हां, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नई प्रबंधन योजना को मंजूरी दी है. इसमें जहाजों पर टोल और कुछ देशों पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इस मंजूरी के बाद अब होर्मुज से अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर बैन लग गया है. इस तरह अब ईरान ने दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने का फैसला किया है. यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी है।  इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, इस नए प्लान में रणनीतिक जलमार्ग यानी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए रियाल आधारित टोल सिस्टम लागू किया गया है. इसका मतलब है कि  होर्मुज से गुजरने पर सभी जहाजों को टोल देना होगा. इस प्लान में समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और होर्मुज से गुजरने के वित्तीय नियमों से जुड़ी बातें भी शामिल हैं।  अमेरिकी-इजरायली जहाजों पर बैन IRIB के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी और इजरायली जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगाया गया है और उन देशों पर भी प्रतिबंध बढ़ाया गया है, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं. साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को फिर से मजबूत किया है और ओमान के साथ मिलकर इसके प्रबंधन के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है।  ईरान के इस कदम से खलबली ईरान का यह कदम दुनिया में खलबली मचाने वाला है. यह कदम पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिकी-इजरायली गठबंधन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच उठाया गया है, जो अब दूसरे महीने में है. इससे तेहरान की ओर से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक यानी होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश का संकेत मिलता है. अब तक जो हालात हैं, उससे साफ है कि होर्मुज पर ईरान का एकक्षत्र राज है।  अमेरिका रहा है होर्मुज पर फेल इसी बीच अमेरिका अब तक होर्मुज खोलने में विफल रहा है. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से स्थापित करना चाहता है ताकि जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र रूप से हो सके. उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है और हम देख रहे हैं कि रोजाना ज्यादा से ज्यादा जहाज गुजर रहे हैं, क्योंकि अलग-अलग देश फिलहाल ईरानी शासन के साथ समझौते कर रहे हैं. समय के साथ अमेरिका जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से हासिल करेगा और वहां जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र होगी, चाहे वह अमेरिकी एस्कॉर्ट के जरिए हो या बहुराष्ट्रीय एस्कॉर्ट के जरिए। 

ईरान ने बदल दिया अपना टारगेट, अमेरिका को चोट पहुँचाने के लिए दिया नया अल्टीमेटम

तेहरान  अमेरिका ने जंग में भले ही थमने का ऐलान कर दिया है लेकिन बावजूद इसके ईरान ने जंग में रुकने का अपनी ओर से कोई संकेत नहीं दिया है. ईरान ने कहा है कि अब पश्चिम एशिया के जिन जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हैं उन्हें टारगेट किया जाएगा. ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि पूरे क्षेत्र में जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए हैं, वे युद्ध में उसके निशाने पर होंगे. और एक एक पर हमला किया जाएगा. ईरान ने पश्चिम एशिया के देशों के होटल मालिकों को अल्टीमेटम दिया है कि वे अपने होटल में अमेरिकी सैनिकों को न रहने दें।   ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी सैनिकों पर खाड़ी सहयोग परिषद देशों के लोगों को 'मानव ढाल' के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक GCC में अपने मिलिट्री बेस छोड़कर होटलों और दफ़्तरों में छिपने के लिए भाग गए।  उन्होंने इस क्षेत्र के होटलों से अपील की कि वे उन्हें बुकिंग न दें. फार्स न्यूज एजेंसी ने कुछ अनाम सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने इस क्षेत्र के होटलों को सकर संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में सख्त चेतावनी जी है।  क्या हम हाथ धरे बैठे रहें ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफ़ज़ल शेकरची ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "जब सभी अमेरिकी फोर्स किसी होटल में जाते हैं, तो हमारे नजरिए से वह होटल 'अमेरिकी' बन जाता है." "क्या हमें बस हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए और अमेरिकियों को हम पर हमला करने देना चाहिए? जब हम जवाब देंगे, तो जाहिर है हमें वहीं हमला करना होगा जहां वे मौजूद हैं।  सीरिया, लेबनान, जिबूती को अल्टीमेटम एजेंसी ने आगे बताया कि ईरान की सेना ने सीरिया, लेबनान और जिबूती में भी अमेरिकी सेना को इसी तरह की जगहों का इस्तेमाल करते हुए पहचाना है. ईरान अपने पड़ोसी देशों पर अमेरिकी सेना को अपनी जमीन से हमले करने की इजाजत देने का आरोप लगाता रहा है, किन खाड़ी देशों ने इन आरोपों को बार-बार नकारा है.उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं होने देंगे।  ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को "अल्टीमेटम" जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ठहराने से वे हमारे लिए टारगेट बन सकते हैं।  रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने पूरे क्षेत्र में सिविलियन इलाकों में अपनी उपस्थिति स्थापित कर ली है, जिसमें बेरूत के पुराने हवाई अड्डे के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस और दमिश्क के रिपब्लिक पैलेस, फोर सीजन्स और शेरेटन होटल शामिल है. खबरों के अनुसार, अमेरिकी मरीन को इस सप्ताह इस्तांबुल और सोफिया होते हुए जिबूती अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानांतरित किया गया है।  ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4" की 83वीं लहर शुरू की है, जिसमें इजरायली सैन्य ठिकानों और अमेरिका से जुड़ी केंद्रों को निशाना बनाया गया है।  IRGC ने दावा किया कि उसने अशदोद में तेल भंडारण स्थलों, मोदीन में सैन्य ठिकानों और खुफिया जानकारी से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए हैं।  उसने अल धाफरा, अल उदीद, अली अल सलेम और शेख ईसा सहित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमलों की जानकारी दी, जिसमें ईंधन डिपो, विमान हैंगर, ड्रोन और पैट्रियट सिस्टम के रखरखाव स्थलों को निशाना बनाया गया।  खबरों के अनुसार इस ऑपरेशन में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों, मल्टी-वॉरहेड सिस्टम और लोइटरिंग अटैक ड्रोन का मिला-जुला इस्तेमाल किया गया. IRGC ने कहा कि यह हमला उसकी नौसेना और एयरोस्पेस बलों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था और ये ऑपरेशन जारी रहेंगे। 

जंग का झटका: गोल्ड ₹12 हजार सस्ता, सिल्वर ₹31 हजार धड़ाम—एक साल में कितना गिरा भाव?

नई  दिल्ली अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच सोने चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 12,077 रुपए घटकर 1.35 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.47 लाख थी। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 30,864 रुपए घटकर 2.01 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.32 लाख रुपए किलो थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 24 दिन में 23,956 और चांदी 65,200 सस्ती हुई है। ईरान युद्ध के अलावा गिरावट के मुख्य कारण मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा : आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है: कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे। प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं। ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए। सोने की कीमतों का सफर: ₹1.76 लाख से ₹1.35 लाख तक सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है।     शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): ₹1.33 लाख     ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): ₹1.76 लाख (सिर्फ एक महीने में भारी उछाल)     मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक ₹41 हजार सस्ता हो चुका है। दाम बढ़ने या घटने में किन बातों का पड़ता है असर ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं। खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।

ईद की रात खून से लाल हुआ ईरान: चौथे सप्ताह में जंग ने मचाई भारी तबाही

ईरान पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान में मरने वालों की संख्या 1,500 से अधिक हो गई है। यह जानकारी सरकारी मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है।अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी से शुरू किए गए हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में रमजान खत्म होने के दौरान भीषण हवाई हमले हुए, जिससे लोगों में डर और अफरा-तफरी फैल गई। युद्ध के चौथे सप्ताह में भी संघर्ष जारी है और अब इसका दायरा और बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। यह हमला करीब 4,000 किलोमीटर दूर से किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइलें मौजूद हैं। इसके साथ ही ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर फिर से हमला किया गया है, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है। इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में ईरान को कुल कितना नुकसान हुआ है और देश की कमान किसके हाथ में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई को इस भूमिका के लिए नामित किया गया है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

नतांज परमाणु केंद्र पर हमले के बाद अमेरिका-इजरायल की विनाशकारी कार्रवाई

 तेहरान मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है. ईरान के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले नतांज परमाणु केंद्र (Natanz Nuclear Facility) पर एक भीषण हमला हुआ है. खबर है कि अमेरिका-इजरायल ने मिलकर इस साइट पर जबरदस्त बमबारी की है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि, इस भारी हमले के बीच राहत की एक बड़ी खबर भी सामने आई है।  ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस ताजा हमले में नतांज संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया गया है. हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी गूंज दूर-दराज के इलाकों तक सुनी गई. लेकिन शुरुआती जांच के बाद ईरानी अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब तक किसी भी तरह के रेडियोधर्मी पदार्थ (रेडिएशन) के रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है. यानी, परमाणु कचरा फैलने जैसा जो सबसे बड़ा डर था, वह फिलहाल टल गया है।  ईरानी मीडिया का दावा है कि धमाके के बावजूद आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं. सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका-इजरायल के उस निरंतर अभियान का हिस्सा बताया है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है।  बार-बार निशाने पर नतांज, पर हर बार बचा पर्यावरण दरअसल, नतांज परमाणु केंद्र दुश्मनों के लिए हमेशा से टारगेट रहा है. साल 2025 से अब तक इस साइट को कई बार निशाना बनाया जा चुका है. हर बार यहां के ढांचे और मशीनों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन गनीमत यह रही है कि अब तक पर्यावरण को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।  आपको बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच जो 12 दिनों का भीषण युद्ध चला था, उसमें भी नतांज ही मुख्य टारगेट था. उस समय अमेरिका भी सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा बन गया था. अब एक बार फिर इसी जगह पर बमबारी होना यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट के हालात और भी ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं। 

ईरान ने 14 दिन की जंग में US को भीख मंगवाया, दुबई बना घोस्ट टाउन! अमीरों ने छोड़ा ‘सबसे सुरक्षित’ शहर

दुबई ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रही जंग के कारण दुबई में अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। पहले दुनिया के सबसे सुरक्षित और चमकदार शहरों में शुमार दुबई अब लगभग खाली नजर आ रहा है। विदेशी निवासी और पर्यटक बड़े पैमाने पर शहर छोड़ चुके हैं, जबकि बीचेस, पार्टी पूल, बीच क्लब और रेस्तरां सुनसान पड़े हैं। केवल स्थानीय मजदूर वर्ग ही बचा हुआ है जो अब खाली जगहों पर काम कर रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, शहर की यह स्थिति ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों से पैदा हुई है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, ईरान ने पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यूएई (अबू धाबी और अन्य इलाकों) में अमेरिकी बेस होने के कारण, ईरान ने यहां सैकड़ों ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। इसी तनाव ने दुबई की चकाचौंध को खौफ में बदल दिया है। दुबई से सामने आ रहे वीडियो में चकाचौंध से भरा रहने वाला यह शहर किसी घोस्ट टाउन जैसा दिख रहा है। 14 दिन की जंग में ही अमेरिका को भीख मंगवा दिया  अमेरिका और ईरान के भी जंग के साथ बयानबाजी भी काफी तेज हो गई है. ईरान के खर्ग द्वीप को तबाह करने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बीच तेहरान ने भी बेहद चुभने वाला कटाक्ष किया है। शिया मुल्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा है कि मात्र 14 दिन की जंग में हमने अमेरिका से भीख मंगवा दिया है. ईरान का यह बयान रूस से तेल खरीदने की अमेरिकी अपील को लेकर आया है. दरअसल, अमेरिका ने दुनिया के देशों से रूस से तेल खरीदने की अपील की है ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उछाल को थामा जा सके। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा है. वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अरागची ने यूरोपीय देशों को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि वे अमेरिका के इस ‘अवैध जंग’ को सपोर्ट कर रहे हैं. उनको लगता है कि वे ईरान के खिलाफ अमेरिकी का इस अवैध जंग को सपोर्ट कर रूस के खिलाफ वाशिंगटन का समर्थन हासिल कर लेंगे. लेकिन, यह एक बकवास सोच है। ईरान के हमलों का असर: 1700 मिसाइल-ड्रोन, लेकिन 90% रोक दिए गए ईरान ने अमेरिकी-इजराइली हमलों के जवाब में पिछले दो हफ्तों में लगभग 1700 मिसाइलें और ड्रोन दुबई समेत यूएई पर दागे। यूएई की एयर डिफेंस सिस्टम ने करीब 90% हमलों को रोक लिया, लेकिन गिरते मलबे (डेब्री) ने बड़ा नुकसान पहुंचाया। बुर्ज अल अरब होटल, फेयरमॉन्ट द पाम, दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर, दुबई एयरपोर्ट और कई स्काईस्क्रेपर्स को नुकसान पहुंचा। एयरपोर्ट पर दो ड्रोनों के गिरने से चार लोग घायल हुए और उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी गईं। दुबई मीडिया ऑफिस ने शुरुआत में कोई घटना नहीं हुई कहा, लेकिन तस्वीरें और रिपोर्ट्स ने सच्चाई उजागर कर दी। शहर खाली क्यों? एक्सपैट्स ने सामान बांधा, पालतू जानवर सड़कों पर छोड़े द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में रहने वाले हजारों अमीर विदेशी निवासी और पर्यटक शहर छोड़ चुके हैं। स्कूलों की स्प्रिंग ब्रेक शुरू होने के बावजूद पश्चिमी बच्चे नदारद हैं। बीच क्लबों और रेस्तरां में सन लाउंजर्स खाली पड़े हैं, जबकि पहले यहां इन्फ्लुएंसर्स और टूरिस्टों की भीड़ रहती थी। सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, कई विदेशी निवासियों ने कहा कि जन-जीवन लगभग सामान्य है, लेकिन फोन पर शेल्टर अलर्ट, आसमान में फ्लैश और गिरते डेब्री की आग सब कुछ बदल देती है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी देशों के पेशेवर और रईस लोग चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भारी रकम चुकाकर भाग रहे हैं। रातों-रात शहर छोड़ने की जल्दबाजी में कई लोग अपने पालतू जानवरों तक को सड़कों पर लावारिस छोड़ गए हैं। एयरपोर्ट पर उड़ानें सीमित हैं, जिससे हजारों लोग फंस गए थे। अमेरिका ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए चार्टर फ्लाइट्स शुरू की हैं। टूरिज्म धड़ाम, जुमेराह बीच वीरान 'गल्फ टाइम्स' के अनुसार मध्य पूर्व में इस युद्ध के कारण पर्यटन उद्योग को रोजाना करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। जुमेराह बीच रेजीडेंस (JBR), रेस्टोरेंट्स और दुबई मॉल जैसे इलाके, जहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी, आज लगभग सुनसान पड़े हैं। दुनिया के सबसे बड़े फेरिस व्हील 'ऐन दुबई' के पहिए भी थम गए हैं। फंस गए आम मजदूर इस पूरी स्थिति का सबसे डरावना पहलू यह है कि जहां पैसे वाले लोग दुबई छोड़कर निकल गए, वहीं दक्षिण एशियाई देशों (भारत, पाकिस्तान, नेपाल आदि) के लाखों ब्लू-कॉलर वर्कर, टैक्सी ड्राइवर और होटल कर्मचारी यहीं फंस गए हैं। काम ठप होने से इनकी सैलरी रुक गई है और फ्लाइट्स का किराया तीन गुना तक बढ़ जाने के कारण इनके लिए स्वदेश लौटना नामुमकिन सा हो गया है। राहत की बात यह है कि इस अस्थिरता के बीच भारत सरकार और एयरलाइंस के प्रयासों से 1 से 7 मार्च के बीच 52,000 से अधिक भारतीय नागरिक यूएई और खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। सरकार की प्रतिक्रिया और फ्री स्पीच पर अंकुश यूएई सरकार ने एयर डिफेंस को मजबूत किया और नागरिकों को आश्वासन दिया। लेकिन पुलिस ने चेतावनी दी है- हमले की तस्वीरें या वीडियो शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। अब तक 21 लोगों पर अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया जा चुका है, जिनमें एक 60 वर्षीय ब्रिटिश टूरिस्ट भी शामिल है। ब्रिटिश एंबेसी ने नागरिकों को सावधान किया है कि यूएई कानून बहुत सख्त हैं। कुल मिलाकर दुबई की स्थिति अभी भी 'खतरे से बाहर' नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर क्षति या हताहत नहीं हुए हैं। शहर की चमक कम हुई है, लेकिन मजदूर वर्ग और कुछ स्थानीय निवासियों के साथ जीवन जारी है। तेल की कीमतें, उड़ानें और पर्यटन पर असर वैश्विक स्तर पर पड़ रहा है।

अमेरिकी दूतावास पर बगदाद में हेलीपैड पर मिसाइल और ड्रोन से हमला

बगदाद इराक की राजधानी बगदाद के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले 'ग्रीन ज़ोन' में स्थित अमेरिकी दूतावास पर एक बड़ा हमला हुआ है. इराकी अधिकारियों के अनुसार, दूतावास परिसर के भीतर मौजूद हेलीपैड को निशाना बनाकर मिसाइल दागी गई है. हमले के तुरंत बाद दूतावास परिसर से काला धुआं निकलता देखा गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है. अमेरिकी दूतावास में लगे रडार सिस्टम को एक आत्मघाती ड्रोन द्वारा निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी दूतावास परिसर के भीतर से धुएं का गुबार उठता साफ दिखाई दे रहा है. हालांकि, अभी तक दूतावास के भीतर किसी के हताहत होने या सटीक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि अमेरिकी पक्ष से नहीं की गई है. सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में 'इराकी इस्लामिक रेजिस्टेंस' ने अमेरिकी सैन्य और खुफिया कर्मियों पर भारी इनाम की घोषणा की थी और एक अमेरिकी विमान को मार गिराने का दावा किया था। माना जा रहा है कि यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा हो सकता है. दूतावास पर हमला सीधे तौर पर वाशिंगटन को दी गई एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास सबसे सुरक्षित राजनयिक परिसरों में से एक माना जाता है. इसके बावजूद मिसाइल का हेलिपैड तक पहुंचना सुरक्षा में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है। ईरान को घुटनों पर लाने का ट्रंप कार्ड?  फारस की खाड़ी के शांत दिखने वाले नीले पानी के बीच एक छोटा सा द्वीप है – खार्ग आइलैंड. आकार में यह इतना छोटा है कि पहली नजर में इसे मैप पर ढूंढना भी मुश्किल लगता है. लेकिन आज यही छोटा सा द्वीप वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सैन्य रणनीति के केंद्र में आ गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐलान किया कि अमेरिकी सेना ने खार्ग आइलैंड पर बड़ा सैन्य हमला किया है. ट्रंप के मुताबिक यह हमला "मध्य पूर्व के इतिहास की सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक" था, जिसमें द्वीप पर मौजूद लगभग सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस द्वीप को ईरानी शासन का "क्राउन ज्वेल" यानी सबसे कीमती संपत्ति बताया. उन्होंने यह भी कहा कि हमले के दौरान जानबूझकर तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया. यह हमला ऐसे समय हुआ है जब ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही को बाधित करने के आरोप लग रहे हैं. यही वजह है कि अचानक खार्ग आइलैंड अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया है.खार्ग आइलैंड आकार में सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर का है. इसकी चौड़ाई करीब 3 मील और लंबाई लगभग 7 मील है. यह ईरान के बुशेहर प्रांत के तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है. द्वीप की आबादी बहुत बड़ी नहीं है. यहां लगभग 3,000 से 5,000 लोग रहते हैं. इनमें स्थानीय मछुआरों के परिवार, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के कर्मचारी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के सैनिक शामिल हैं।  

मोजतबा खामेनेई कोमा में और पैर कटने की अफवाह, वेस्टर्न मीडिया में सनसनी

तेहरान ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. सबसे हैरान करने वाला दावा है कि मोजतबा खामेनेई कोमा में हैं. उनका एक पैर भी काट दिया गया है और उनकी हालत बेहद संजीदा है. ये दावा ब्रिटिश अखबार 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में किया है।  'द सन' की ये रिपोर्ट उस समय सामने आई, जब कुछ घंटों पहले ही मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों में हमले जारी रखे जाएंगे और होर्मुज स्ट्रेट की भी नाकेबंदी रहेगी।   'द सन' ने ये रिपोर्ट अपने सूत्र के हवाले से चलाई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है और वह कोमा में है. वह अस्पताल में ईरान के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री मोहम्मद रजा जफरगंदी की निगरानी में हैं. जफरगंदी ईरान के टॉप सर्जन्स में से एक हैं।  रिपोर्ट में क्या दावा किया गया? 'द सन' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि मोजतबा खामेनेई तेहरान की सिना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में इंटेसिव केयर में है. इस बिल्डिंग के एक हिस्से को भारी सिक्योरिटी के बीच सील कर दिया गया है।  रिपोर्ट में बताया गया कि मोजतबा का एक पैर कट गया है और उनके पेट और लिवर को भी गंभीर चोटें आई हैं. हालांकि, यह साफ नहीं है कि मोजतबा खामेनेई 28 फरवरी को उसी हमले में घायल हुए थे, जिसमें आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी. हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी के एंकर मोजतबा खामेनेई को 'रमजान का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताते हैं।  'द सन' को सूत्र ने बताया, 'उनका एक या दोनों पैर काट दिए गए हैं. उनका लिवर या पेट भी फट गया है. वह शायद कोमा में भी हैं.' रिपोर्ट में कहा गया है कि दो दिन पहले ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान चुपके से मोजतबा खामेनेई से मिलने गए थे. सिना हॉस्पिटल की इंटेंसिव केयर यूनिट में सिर्फ कुछ ही ऑथराइज्ड लोगों को ही जाने की इजाजत है.  कितना मजबूत है ये दावा? 28 फरवरी से जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग शुरू हुई है, तब से मोजतबा खामेनेई एक बार भी सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।  मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था. खामेनेई की मौत के लगभग एक हफ्ते बाद. उसी दिन ईरानी मीडिया ने खबरें दी थीं कि मोजतबा खामेनेई देश को संबोधित करेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ।  सुप्रीम लीडर चुने जाने के पांच दिन के बाद मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश दुनिया के सामने आया. लेकिन उनके संदेश को टीवी पर एक एंकर ने पढ़ा. वह कैमरे पर भी दिखाई नहीं दिए।  ईरान के सरकारी टीवी रिपोर्ट्स के एंकर्स ने मोजतबा खामेनेई को 'रमजान युद्ध का जांबाज' यानी 'घायल योद्धा' बताया. हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की कि मोजतबा 28 फरवरी को घायल हुए थे या नहीं।  इन्हीं सब बातों के कारण उनकी हेल्थ को लेकर अटकलें, अफवाहें और दावे और भी बढ़ गए हैं. हालांकि, अब तक मोजतबा खामेनेई को सिर्फ दावे ही किए जा रहे हैं, कुछ पुष्टि नहीं हुई है।