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ईरान को 12 साल लगेगा सिर्फ मरम्मत करने में, US से संघर्ष ने किया इतना नुकसान

तेहरान  अमेरिका और इजरायल के साथ हुए युद्ध से हुए नुकसान से उबरने में ईरान को 10 साल से ज्यादा का समय लगेगा। खबर है कि ईरान के सेंट्रल बैंक ने इससे जुड़ी जानकारियां सरकार के सामने रख दी हैं। साथ ही अर्थव्यवस्था को संभालने की अपील की है। कहा जा रहा है कि ईरान की अहम रिफाइनरी समेत कई जगहों को खासा नुकसान हुआ है। साथ ही मुल्क में तेजी से महंगाई बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की पहले से ही नाजुक अर्थव्यवस्था को 40 दिनों के युद्ध के दौरान जमकर नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भेजे गए एक आकलन में वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि इस नुकसान को ठीक करने में 12 साल तक का समय लग सकता है। कितना हुआ नुकसान, महंगाई होने वाली है युद्ध के दौरान कई बड़े एयरपोर्ट्स को नुकसान पहुंचा। जबकि, तेल ठिकानों, रिफाइनरीज और पेट्रोकेमिकल संस्थानों को भी निशाना बनाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने चेताया है कि उत्पादन क्षमता को हुए नुकसान के चलते आने वाले महीनों में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है। राष्ट्रपति को भेजे गए आकलन में बताया गया है कि औद्योगिक इनपुट सप्लाई ऐसे ही कम बनी रही तो महंगाई में 180 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। अमेरिका से सुलह की सलाह रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुल नसीर हेम्मती ने राष्ट्रपति से अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने इंटरनेट सुविधा को पूरी तरह से बहाल करने और अमेरिका के साथ समझौता करने की सलाह भी दी है। इंटरनेट ने दिया बड़ा झटका युद्ध के दौरान ईरान में लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहा था। कहा जा रहा था कि इंटरनेट बंद करने का फैसला साइबर अटैक से बचने के लिए लिया गया था। अब ईरान की डिजिटल इकोनॉमी मुल्क की जीडीपी का 5-6 प्रतिशत है। अब ऐसे में इंटरनेट के बंद होने के चलते पेमेंट सिस्टम, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ठप हो गए थे। क्यों नहीं हो पाया समझौता ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने विफल शांति वार्ता के बाद सोमवार को कहा कि लंबी बैठक से कोई सबक नहीं सीखा गया। समझौते के करीब पहुंचने के बावजूद वार्ता विफल हो गई। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ईरान ने पूरी निष्ठा से इस बैठक में भाग लिया लेकिन अमेरिका की मांगे बढ़ती मांगों, लक्ष्य और नाकेबंदी के चलते ये वार्ता टूट गई। दूसरे दौर की बातचीत की कोशिश भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने सोमवार को कहा है कि अमेरिका कोई गैर कानूनी मांग न करे और तेहरान की शर्तों को माने, तो हम अमेरिका के साथ दूसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं। भारत में ईरानी राजदूत ने आरोप लगाया कि वार्ता के दौरान अमेरिकी पक्ष ने गैरकानूनी मांगें रखीं, जिसके कारण बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका। अमेरिका कीी नाकेबंदी के सवाल पर उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान की क्षमताओं से भली-भांति परिचित है। ये पता होना चाहिए कि होर्मुज ईरान के जल क्षेत्र में आता है। पश्चिम एशिया संकट पर उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत का साझा भविष्य जुड़ा है।

ट्रंप की धमकी: होर्मुज में तूफान का खतरा, ईरान पर नहीं पड़ी असर, रूस ने युद्ध में लिया कदम

वाशिंगटन पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. यूनाइटेड स्टेट्स और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई, जबकि पहले युद्धविराम की घोषणा की गई थी. इस असफल बातचीत के बाद हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं. वार्ता फेल होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक घेराबंदी लागू कर दी. ट्रंप ने साफ कहा कि हम किसी देश को दुनिया को ब्लैकमेल या डराने नहीं देंगे.उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान की कोई तेज हमला करने वाली नौकाएं अमेरिकी सेना के करीब आईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा।  हिज्बुल्ला का ऐलान हालांकि ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत विफल होने के बाद ईरान के प्रतिनिधियों ने फिर से संपर्क किया है और अब तेहरान शांति समझौते के लिए बातचीत में लौटना चाहता है. इस बीच क्षेत्र में एक और तनावपूर्ण बयान सामने आया है. लेबनान के संगठन हिज्बुल्ला के प्रमुख नईम कासिम ने लेबनान सरकार से अपील की है कि वह अमेरिका में इजरायल के साथ होने वाली प्रस्तावित वार्ता को रद्द कर दे. हिज्बुल्ला ने कहा कि इजरायल जैसे दुश्मन देश के साथ किसी भी तरह की बातचीत को पूरी तरह खारिज करते हैं. उन्होंने इसे रद्द करने के लिए सरकार से ऐतिहासिक और साहसिक फैसला लेने की मांग की. गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ईरान समर्थित संगठन है और 2 मार्च से इजरायल के साथ संघर्ष में शामिल है।  रूस बनना चाहता है मध्यस्थ ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध में अब रूस शांतिदूत की भूमिका निभाना चाहता है. पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस संबंध में ऑफर दिया था और अब विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की. रूस की ओर से कहा गया कि सशस्त्र संघर्ष दोबारा न हो, यह बहुत जरूरी है. साथ ही रूस ने एक बार फिर साफ किया कि वह इस संकट को सुलझाने में हर संभव मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है।  अमेरिका बोला- फैसला ईरान को लेना है अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने कहा कि ईरान को परमाणु समझौते पर आगे बढ़ने के लिए खुद कदम उठाने होंगे. उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान में 21 घंटे चली बातचीत के बाद अमेरिका अब वहां से वापस आ रहा है और ईरान की प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं रही. वेंस के मुताबिक आगे की बातचीत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान कितनी गंभीरता से बातचीत में शामिल होता है. उन्होंने कहा कि अब प्रगति की जिम्मेदारी ईरान पर है और उसे यह दिखाना होगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाने के लिए तैयार है।  पाकिस्तान का दावा- ईरान चाहता है इस्लामाबाद में हो वार्ता इस्लामाबाद में हुई बातचीत के बाद मध्यस्थता की कोशिश करने वाले देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच मैसेज का आदान-प्रदान जारी रखा है. उनका लक्ष्य है कि दोनों देश कम से कम 45 दिन के लिए सीजफायर बढ़ाने पर राजी हो जाएं. दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर तो सहमत हैं, लेकिन अगली मीटिंग के एजेंडा, उद्देश्य, फॉर्मेट और जगह को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं. ईरान चाहता है कि अगली बातचीत इस्लामाबाद में हो क्योंकि वहां उसे सुविधा और पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भरोसा है. वहीं अमेरिका दूसरी जगहों पर विचार कर रहा है, जहां उसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स बेहतर लगते हैं. हालांकि अगर बड़े मुद्दों पर सहमति बनती है, तो बातचीत की जगह कोई बड़ी रुकावट नहीं बनेगी।   2 दिन बाद फिर शुरू होगी ईरान-अमेरिका वार्ता ईरान-अमेरिका युद्ध: एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच एक नई दौर की बातचीत जल्द ही गुरुवार तक हो सकती है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में इस्लामाबाद में हुई उच्चस्तरीय वार्ता भले ही किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन बातचीत के दरवाजे खुले रहे. इसका मतलब है कि दोनों देश अब भी कूटनीतिक रास्ते से समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं. आने वाली बातचीत में पिछले मुद्दों पर फिर चर्चा हो सकती है और समझौते की संभावना बनी हुई है।   होर्मुज नाकेबंदी हटाना चाहता है सऊदी, ट्रंप से की बात अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सऊदी अरब, अमेरिका पर दबाव डाल रहा है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नौसैनिक घेराबंदी तुरंत हटा ले और दोबारा बातचीत की मेज पर लौट आए. सऊदी और अन्य खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने घेराबंदी जारी रखी तो ईरान बदला लेने के लिए उनके वैकल्पिक रास्ते भी बंद कर सकता है. ऐसी स्थिति उनकी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगी. होर्मुज के हाहाकार के बाद भी उनका तेल अब तक दूसरे रास्तों से निकल रहा था लेकिन ट्रंप के इस कदम से वो भी खतरे में आ जाएंगे।  होर्मुज पर चीन ने अमेरिका को हड़काया – हमारे मामले से दूर रहो  होर्मुज ब्लॉकेड पर अब चीन भी भड़क उठा है. चीन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी लगाने के ट्रंप के फैसले को लेकर अमेरिका को चेताया है. चीन ने अमेरिका को आगाह किया कि वह ईरान के साथ चीन के संबंधों में दखल न दे. होर्मुज ब्लॉकेड पर चीन की अमेरिका को सीधी-सीधी पहली प्रतिक्रिया है. चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा कि बीजिंग तेहरान के साथ अपने व्यापार और ऊर्जा संबंधी वादों को पूरा करेगा. उन्होंने कहा कि चीनी जहाज इस इलाके में अपना काम जारी रखेंगे और बाहरी दखल को बर्दाश्त नहीं करेंगे।  लेबनान-इजरायल के बीच वार्ता की शुरुआत इजरायल-लेबनान वार्ता: अमेरिका में आज इजराइल और लेबनान के बीच बातचीत की शुरुआत होगी. अमेरिकी राजदूत येचिएल लीटर और लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोआवद की आज शांति के लिए बातचीत होगी. पिछले हफ्ते पहली बार दोनों देशों के राजदूतों के बीच फोन पर दशकों बाद बातचीत हुई थी. 1983 में अंतिम बार दोनों देशों के बीच आखिरी और सीधी बातचीत हुई थी, हालांकि अप्रत्यक्ष समझौते और अप्रत्यक्ष वार्ता होती रही है. आज अमेरिका की मध्यस्थता में यह बातचीत होनी है. ये बात दिलचस्प है क्योंकि इजरायल-लेबनान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध तक नहीं हैं।  होर्मुज की नाकेबंदी कर रहा अमेरिका, ईरान को दी धमकी … Read more

अमेरिका की नाकेबंदी से होर्मुज स्ट्रेट में संकट, कच्चे तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर से ऊपर

न्यूयॉर्क दुनिया की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए मिडिल-ईस्ट को लेकर फिलहाल अभी तक समझौता नहीं हो सका है. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में यूएस-ईरान वार्ता बेनतीजा रही, जिससे शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है. दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी और वार्ता रुक गई.  करीब 21 घंटे तक चली बातचीत के बाद भी दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके, जिससे सीजफायर पर संकट गहरा गया है।  अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि तेहरान ने जंग खत्म करने के लिए यूएस की शर्तें नहीं मानी. बातचीत में रुकावट आने के बाद वेंस अमेरिका लौट गए. दूसरी तरफ, ईरान ने इस बातचीत को नाकाम बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका ने बहुत ज़्यादा मांगें रखीं।  अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नाकेबंदी का मकसद ईरान की तेल बिक्री रोकना है। ट्रम्प के मुताबिक, कई अन्य देश भी इस प्रयास में अमेरिका का साथ दे रहे हैं। ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान हुआ है और उसकी नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 158 जहाज तबाह किए जा चुके हैं। नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 104 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हुई वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका ईरान पर दोबारा सैन्य हमले करने पर भी विचार कर रहा है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के हिसाब से आगे का फैसला लिया जाएगा। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत एक अस्थायी दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी समाधान में बदलने के लिए हो रही थी. इस वार्ता में अमेरिकी डेलिगेशन की अगुवाई उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने की, जबकि ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ सहित कई सीनियर अधिकारी शामिल हुए।  पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स     चीन को धमकी- ट्रम्प ने चीन को साफ चेतावनी दी है कि अगर उसने ईरान की सैन्य मदद की, तो अमेरिका उस पर 50% तक भारी टैरिफ लगा देगा।     होर्मुज की नाकाबंदी- ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी करेगी और ईरान को टोल देने वाले जहाजों को भी रास्ते में रोक लिया जाएगा।     इजराइली मंत्री का मस्जिद दौरा- इजराइल के मंत्री बेन गविर के अल अक्सा मस्जिद दौरे पर जॉर्डन ने विरोध जताया और इसे भड़काऊ कदम बताते हुए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कहा।     ईरान ने टोल मांगा- ईरान ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उसके कंट्रोल में है और वहां से गुजरने वाले जहाजों को रियाल में टोल देना जरूरी होगा।     50 लोग गिरफ्तार- ईरान में करीब 50 लोगों को जासूसी के आरोप में पकड़ा गया है, जिन पर अमेरिका और इजराइल को संवेदनशील जानकारी देने का आरोप है। अमेरिकी नाकेबंदी से ईरान के चार बंदरगाहों पर सीधा असर अमेरिकी नौसेना के ईरानी समुद्री क्षेत्रों की नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक शिपिंग उद्योग में भारी चिंता देखी जा रही है. उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका इन बंदरगाहों को ब्लॉक करता है, तो ईरान के चार सबसे बड़े बंदरगाहों पर सीधा असर पड़ेगा     खार्ग द्वीप: ये ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात टर्मिनल है.     जास्क टर्मिनल: ओमान की खाड़ी में स्थित एक प्रमुख तेल केंद्र है.     बंदर अब्बास: ईरान का रणनीतिक रूप से बड़ा और मुख्य व्यापारिक बंदरगाह है.     बंदर खुमैनी: ईरान का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है.  सीजफार पर ट्रंप बोले- अच्छी तरह कायम है ईरान के साथ सीजफायर कायम रहने को लेकर ट्रंप ने बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'मैं कहूंगा कि यह अच्छी तरह कायम है. उनकी सेना खत्म हो चुकी है. उनका पूरा नौसेना बल पानी में डूब गया है. 158 जहाज तबाह हो गए हैं. उनका नौसेना बल खत्म हो गया है. उनके ज्यादातर बारूदी सुरंग यंत्र नष्ट हो गए हैं. कल सुबह 10 बजे से नाकाबंदी लागू हो जाएगी. दूसरे देश ये ध्यान देने के लिए काम कर रहे हैं कि ईरान तेल न बेच सके और ये बहुत प्रभावी होगा. कई नावें तेल भरकर हमारे देश की ओर आ रही हैं और फिर उसे ले जाएंगी. इसलिए वो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नहीं गुजरेंगी. इसे ठीक कर लिया जाएगा. इस बीच, वो हमारा इस्तेमाल कर रहे हैं. हमारे पास रूस और सऊदी अरब दोनों के कुल तेल से कहीं ज्यादा तेल है. हो ये रहा है कि नावें यहां आ रही हैं, तेल भर रही हैं. हमें होर्मुज से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा।  इजरायली हमलों में मौतों की संख्या 2000 पार लेबनान में जारी इजरायली हमलों के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,055 तक पहुंच गई है।   अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में भारी इजाफा अमेरिका ने सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने की घोषणा की है. जिसके बाद रविवार को बाजार खुलते ही तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया. अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत 8% बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 7% की बढ़त के साथ 102.29 डॉलर पर आ गया।     

ईरान का अमेरिका के लिए कड़ा संदेश, ब्लड मनी की मांग; इरादे किए साफ

तेहरान  पाकिस्तान में बातचीत से पहले ईरान ने अपने इरादे बता दिए हैं। सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का कहना है कि आक्रमण करने वालों को बगैर सजा दिए छोड़ा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान शहीदों के लिए ब्लड मनी की भी मांग करेगा। इसके अलावा भी उन्होंने कई मांगें रखी हैं। उनका बयान ऐसे समय पर आया है, जब ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच दो सप्ताह का सीजफायर हुआ है और पाकिस्तान में आगे की वार्ता होनी है। खामेनेई ने इस युद्ध में ईरान की जीत का ऐलान किया है। उन्होंने कहा, 'आज तक के हालातों को देखते हुए यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि आप ईरान की बहादुर जनता, इस मैदान में असली विजेता रहे हैं।' रखी हैं ये मांगें खामेनेई ने कहा, 'हम अपराधी हमलावरों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे। हम हर चोट का हर्जाना, शहीदों के लिए ब्लड मनी और इस जंग में अपाहिज हुए सैनिकों के लिए मुआवाजा जरूर लेंगे। साथ ही, हम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन को यकीनन एक नए स्तर पर ले जाएंगे।' उन्होंने साफ किया है कि अस्थायी सीजफायर का मतलब युद्ध खत्म होना नहीं है। ईरान ने रख दी लेबनान वाली शर्त ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि पश्चिम एशिया में युद्धविराम लागू करने के लिए लेबनान में इजरायली हमलों का तुरंत रुकना एक अहम शर्त है। उन्होंने कहा कि ईरान की 10-सूत्रीय योजना के तहत प्रस्तावित युद्धविराम 'ईरानी नेतृत्व और जनता के बलिदान का परिणाम' है। उन्होंने कहा कि अब देश कूटनीति, रक्षा तथा जनभागीदारी के स्तर पर एकजुट रहेगा। ट्रंप जता चुके हैं आशंका अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौते के प्रभावी होने को लेकर आशंका जताई है। उन्होंने गुरुवार को कहा, 'ईरान बहुत खराब काम कर रहा है। ईरान तेल को होर्मुज से गुजरने देने के संदर्भ में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे शर्मनाक कहेंगे।' उन्होंने कहा, 'हमारे बीच ऐसा कोई समझौता नहीं है।' पाकिस्तान की वार्ता पर नजर अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को वार्ता की मेजबानी करने जा रहे पाकिस्तान ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। हालांकि, शीर्ष ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर किए गए इजराइली हमले वार्ता को निरर्थक बना सकते हैं। अमेरिका और ईरान बुधवार को दो हफ्ते के लिए सशर्त युद्ध-विराम पर सहमत हो गए। इसके बाद, मतभेदों को सुलझाने और मौजूदा युद्ध-विराम को एक स्थायी शांति में तब्दील करने के लिए इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच बैठक होनी है।

अमेरिका ने ईरान को नुकसान का मुआवजा देने का किया ऐलान, पर शर्तें हैं गजब

तेहरान  अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम का ऐलान हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से मिले 10 बिंदु बातचीत आगे बढ़ाने का आधार हैं। खबर है कि इसमें ईरान ने एक शर्त यह भी रखी है कि उसे हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाएगा। सबसे बड़ी राहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना मानी जा रही है, जिसपर दुनिया का तेल वितरण टिका हुआ था। 3640 मौतें, 90 हजार घर गिरे जंग में लेबनान, इराक, जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, यूएई, ओमान जैसे देश भी शामिल हो गए। लगभग 40 दिन तक मिसाइलें, ड्रोन और बमबारी चलती रही. अब तक की रिपोर्ट के अनुसार कुल मौतें करीब 3640 बताई जा रही हैं. हजारों लोग घायल हुए हैं. बहुत बड़ी संपत्ति का नुकसान हुआ है।  जंग कब शुरू हुई और फैली? 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकाने, परमाणु सुविधाएं और सरकार से जुड़े स्थान निशाने पर थे. ईरान ने इसे जवाब दिया और इजरायल पर मिसाइल व ड्रोन दागे. साथ ही उसने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए।  ईरान ने खाड़ी देशों पर भी हमले किए क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकाने हैं. लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे. यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल को निशाना बनाया. इस तरह एक छोटा सा संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया. कई देशों में विस्फोटों की आवाजें सुनाई दीं और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं।  इस 40 दिन की जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार वहां 2076 लोग मारे गए. 26500 से ज्यादा घायल हुए. इनमें आम नागरिक भी शामिल हैं. लेबनान में 1497 मौतें हुईं और हजारों लोग घायल हुए. इजरायल में 26 लोग मारे गए जबकि 7183 घायल हुए. अमेरिकी सैनिकों में 13 मौतें हुईं और 200 से ज्यादा घायल हुए।  खाड़ी देशों में कुल 28 मौतें बताई गई हैं. इनमें कुवैत में 7, बहरीन में 3, सऊदी अरब में 2, यूएई में 12, ओमान में 3 और कतर में कुछ घायल हुए. इराक में 109 मौतें और दर्जनों घायल. जॉर्डन में 29 घायल, सीरिया में 4 मौतें और साइप्रस में भी कुछ नुकसान हुआ.  कुल मिलाकर मौतों की संख्या 3640 के आसपास पहुंच गई है. घायलों की संख्या बहुत ज्यादा है – ईरान अकेले में 26,500 से ऊपर. असली आंकड़े इससे भी ज्यादा हो सकते हैं क्योंकि स्थिति तेजी से बदल रही है।  इमारतों और संपत्ति का भारी नुकसान जंग ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि शहरों और गांवों को भी तबाह कर दिया. कुल 90 हजार घर पूरी तरह बर्बाद हो गए. स्कूलों पर भी बहुत असर पड़ा – 760 स्कूल क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गए. अस्पतालों की संख्या 307 बताई गई है जो या तो बमबारी में टूट गए या इस्तेमाल नहीं हो पा रहे. हजारों व्यावसायिक इमारतें, दुकानें, बाजार और फैक्टरियां भी नष्ट हुईं।  ईरान में कई शहरों में आवासीय इलाके, स्कूल और अस्पताल प्रभावित हुए. लेबनान में भी बड़े पैमाने पर घर और इमारतें गिर गईं. इजरायल में कुछ इलाकों में क्षति हुई लेकिन वहां की एयर डिफेंस ने कई हमलों को रोक लिया. खाड़ी देशों में तेल और गैस के प्लांट, बंदरगाह और एयरपोर्ट पर हमले हुए जिससे ऊर्जा उत्पादन प्रभावित हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल परिवहन बाधित होने से पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गईं।  ईरान इस जंग का मुख्य केंद्र रहा. वहां सबसे ज्यादा मौतें और घायल हुए. उसके परमाणु और सैन्य कार्यक्रम को बड़ा झटका लगा. लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े इलाकों में भारी बमबारी हुई जिससे आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया. इजरायल ने अपनी मजबूत रक्षा व्यवस्था से कई हमलों को रोका लेकिन कुछ मौतें और चोटें हुईं।  खाड़ी देश जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन आदि ने ईरानी हमलों का सामना किया. इन देशों में ज्यादातर हमले ऊर्जा सुविधाओं पर थे. हालांकि इन देशों की एयर डिफेंस ने ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को मार गिराया, फिर भी कुछ मौतें और संपत्ति का नुकसान हुआ।  ईरान ने रखीं हैं 10 शर्तें एक-दूसरे पर हमला न करना Strait of Hormuz पर ईरान का नियंत्रण बने रहना यूरेनियम संवर्धन की अनुमति देना सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को हटाना सभी माध्यमिक प्रतिबंधों को हटाना UNSC के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सभी प्रस्तावों को समाप्त करना ईरान को हुए नुकसान का मुआवजा देना क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों को वापस बुलाना सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना, जिसमें लेबनान के 'इस्लामिक रेजिस्टेंस' के खिलाफ युद्ध भी शामिल है। ट्रंप का बयान ट्रंप ने लिखा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर से हुई बातचीत के आधार पर, जिसमें उन्होंने मुझसे ईरान पर आज रात होने वाले विनाशकारी हमले को रोकने का अनुरोध किया था। साथ ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरा, तत्काल और सुरक्षित तरीके से खोलने के मद्देनजर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर दो हफ्ते के लिए बमबारी और हमले रोकने के लिए तैयार हो गया हूं।' ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका और ईरान के बीच पिछले विवाद के लगभग सभी बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो हफ्तों का संघर्ष विराम समझौते को अंतिम रूप देने और लागू करने में मदद करेगा।' पाकिस्तान में होगी वार्ता पाकिस्तान ने बुधवार को अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान ने तत्काल संघर्षविराम पर सहमति जताई है। शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमने-सामने बातचीत के लिए आमंत्रित किया है, ताकि 'सभी विवादों का समाधान' निकाला जा सके। चीन की है अहम भूमिका? एपी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन ने ईरान के नेताओं से बातचीत करके उन्हें अमेरिका से युद्धविराम का रास्ता तलाशने के लिए राजी करने की कोशिश की। दो अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि बातचीत के दौरान चीनी अधिकारी ईरानी अधिकारियों के संपर्क में थे। … Read more

ईरान ने सीजफायर की शर्तों को किया खारिज, होर्मुज को बंद करने और 45 दिन के युद्धविराम पर नहीं हुआ सहमति

तेहरान   ईरान और अमेरिका को एक मसौदा प्रस्ताव मिला है, जिसमें 45 दिन के युद्धविराम और होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई है ताकि युद्ध समाप्त करने का रास्ता निकाला जा सके. पश्चिम एशिया के दो अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक यह प्रस्ताव मिस्र, पाकिस्तान और तुर्किये के मध्यस्थों की ओर से तैयार किया गया है, जो संघर्ष को रोकने के प्रयास में जुटे हैं. उनका मानना है कि 45 दिन की यह अवधि दोनों देशों के बीच व्यापक वार्ता के लिए पर्याप्त समय देगी, जिससे स्थायी युद्धविराम पर सहमति बन सके।  अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव देर रात ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और पश्चिम एशिया में अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ को भेजा गया, लेकिन अमेरिका की इस पर प्रतिक्रिया नहीं आई है. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने होर्मुज को खोलने से लेकर 45 दिन के अस्थायी सीजफायर के लिए भी इनकार कर दिया है. ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ने न्यू एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान को लगता है कि अमेरिका परमानेंट सीजफायर नहीं करना चाहता।  क्या है युद्धविराम की शर्तें?     पहले चरण में करीब 45 दिन का युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी. अगर बातचीत के लिए और समय चाहिए हुआ, तो इस सीजफायर को बढ़ाया भी जा सकता है।      दूसरे चरण में युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का अंतिम समझौता किया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलना और ईरान के उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम का समाधान -जैसे उसे देश से बाहर भेजना या उसकी मात्रा कम करना, सिर्फ अंतिम समझौते के बाद ही संभव होगा।  इस प्रस्ताव की शर्तों की जानकारी सबसे पहले समाचार वेबसाइट एक्सियोस ने दी. ईरान का कहना है कि वह तब तक लड़ाई जारी रखेगा जब तक उसे वित्तीय क्षतिपूर्ति और भविष्य में फिर से हमले न होने का आश्वासन नहीं मिल जाता।  समझौता इतना भी आसान नहीं ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है।  ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध में अब तक किसी तरह के समझौते की सूरत नहीं बन पाई. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि कोई भी पक्ष अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है. युद्ध के 24वें दिन तक ट्रंप समझौते के मूड में थे, लेकिन एक बार फिर से वे काफी एग्रेसिव हो चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों पर बमबारी की धमकी दी है. ईरान भी लगातार कह रहा है कि वो अमेरिका के ग्राउंड ऑपरेशन का इंतजार कर रहा है। 

US-ईरान के बीच सीजफायर की उम्मीद, ईरान ने भेजा मध्यस्थों को शांति प्रस्ताव

तेहरान  मिडिल-ईस्ट में तनाव में भारी बढ़ोतरी के साथ जंग अपने 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी धमकियां तेज़ कर दी हैं, जबकि तेहरान ने इस पर तीखा जवाब दिया है. ऐसे में जंग खतरनाक रूप लेती जा रही है।  Axios ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक ग्रुप 45 दिनों के संभावित संघर्ष-विराम की शर्तों पर चर्चा कर रहा है, जिससे जंग स्थायी रूप से रुक सकती है।  एक्सियोस ने बातचीत की जानकारी रखने वाले चार अमेरिकी, इज़रायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से यह बात कही है।  सीजफायर पर क्या बात हुई? एक्सियोस में संवाददाता बाराक रविद की रिपोर्ट में कहा गया है कि दो फेज़ वाली डील की शर्तों पर बातचीत जारी है. पहले फेज़ में 45 दिन का संभावित सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी।  रिपोर्ट में कहा गया है कि दूसरे फेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक समझौता होगा. अगर बातचीत के लिए और वक्त की ज़रूरत हुई, तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया कि ईरान के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोलने या ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का सामना करने की उनकी डेडलाइन मंगलवार शाम है।  पर्दे के पीछे क्या चल रहा? रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मीडिएटर के ज़रिए बातचीत हो रही है और ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भेजे गए टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी हो रही है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने हाल के दिनों में ईरान को कई प्रपोज़ल दिए, लेकिन अभी तक ईरानी अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है।  सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर पार्टियों के साथ दो-फ़ेज़ वाली डील की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं. पहला फ़ेज़ संभावित 45-दिन का सीज़फ़ायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी. एक सूत्र ने कहा कि अगर बातचीत के लिए और समय की ज़रूरत हुई तो सीज़फ़ायर बढ़ाया जा सकता है।  दूसरे फ़ेज़ में युद्ध खत्म करने पर एक एग्रीमेंट होगा. सूत्रों ने कहा कि मीडिएटर सोचते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना और ईरान के बहुत ज़्यादा एनरिच्ड यूरेनियम का समाधान या तो इसे देश से हटाकर या डाइल्यूशन करके सिर्फ़ एक फ़ाइनल डील का नतीजा हो सकता है।  होर्मुज़ को लेकर ईरान का सख्त रुख! ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 5 अप्रैल, रविवार को होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और इज़रायल को कड़ी चेतावनी जारी की है. आईआरजीसी ने सोशल मीडिया पर कहा कि फारस की खाड़ी में नई सुरक्षा व्यवस्था बन रही है और यह अहम समुद्री रास्ता अब पहले जैसा नहीं रहेगा।  वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईस्टर रविवार के दिन पलटवार की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर यह रास्ता नहीं खोला गया, तो मंगलवार को ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाया जाएगा. होर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। 

क्या ईरान में 45 दिन का युद्ध विराम होगा? पाकिस्तान समेत कई देशों की पेशकश पर निर्भर स्थिति

वाशिंगटन अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध से मची वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक अच्छी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान सहित अन्य मध्यस्थों ने पूरा जोर लगाया है और 45 दिनों के सीजफायर प्लान पर बातचीत शुरू हो गई है। बता दें कि बीते 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद से यह जंग जारी है। ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरसाई हैं। वहीं इस युद्ध की वजह से ईंधन आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इस बीच एक्सियोस ने रविवार को चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह 45 दिन के संभावित सीजफायर की शर्तों पर चर्चा कर रहा है। इस सीजफायर प्लान से युद्ध का हमेशा के लिए अंत भी हो सकता है। क्या है सीजफायर प्लान? रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्यस्थ दो चरणों वाले एक समझौते की शर्तों पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें बताया गया है कि पहला चरण 45 दिन का संभावित सीजफायर होगा, जिसके दौरान युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने पर बातचीत की जाएगी। वहीं दूसरा चरण युद्ध को समाप्त करने के समझौते पर आधारित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत के लिए और समय की जरूरत पड़ी, तो सीजफायर की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे मध्यस्थ युद्धविराम के लिए जुटे सभी मध्यस्थ एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एपी को बताया है कि संघर्षविराम कराने की उनकी सरकार की कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इससे सीजफायर को लेकर उम्मीदें एक बार फिर लौटी हैं। वही क्षेत्र के दो अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान के अलावा तुर्किये और मिस्र के मध्यस्थ भी अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास में जुटे हुए हैं। ईरान ने रखी हैं शर्तें एक्सियोस ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि होर्मुज को पूरी तरह से खोलने और ईरान के पास अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम होने जैसे मुद्दों को केवल एक अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में ही सुलझाया जा सकता है। इसके अलावा मध्यस्थ अमेरिका के लिए विश्वास-बहाली के उपायों पर काम कर रहे हैं और उन कदमों की तलाश कर रहे हैं जिन्हें अमेरिका ईरान की कुछ मांगों को पूरा करने के लिए उठा सकता है। वही ईरान ने युद्ध खत्म करने के शर्त के रूप में युद्ध का हर्जाना और सुरक्षा की गारंटी समेत कई मांगें रखी हैं। ट्रंप ने दी है डेडलाइन इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को एक बार फिर धमकी देते हुए कहा कि ईरान के साथ सोमवार तक समझौता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा है कि अगर ईरान ने तेजी नहीं दिखाई तो अमेरिका और तेजी से हमले करेगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान समझौते की दिशा में तेजी नहीं दिखाता है तो वह सब कुछ उड़ा देने और तेल पर नियंत्रण करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने वार्ता जारी रखने के लिए ईरानी वार्ताकारों को राहत दी है। इससे पहले ट्रंप ने रविवार सुबह एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान को चेतावनी दी कि अगर जलमार्ग को समुद्री यातायात के लिए नहीं खोला गया, तो ईरान को 'नरक बना दिया जाएगा। ईरान ने दिया दो टूक जवाब वहीं ईरान ने ट्रंप को दो टूक जवाब दे दिया है। ईरान के संस्कृति मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकियों को खारिज करते हुए उन्हें 'अस्थिर और भ्रम में रहने वाला व्यक्ति' करार दिया। सैयद रजा सालिही-अमीरी ने रविवार को एक साक्षात्कार में कहा, ''ईरानी समाज उनके बयानों पर आम तौर पर ध्यान नहीं देता क्योंकि उसका मानना है कि उनमें व्यक्तिगत, व्यवहारिक एवं भाषाई संतुलन का अभाव है और वह लगातार परस्पर विरोधी रुख अपनाते रहते हैं।'' सालिही-अमीरी ने कहा, ''ऐसा लगता है कि ट्रंप एक ऐसे व्यक्ति बन गए हैं, जिसका पूरा विश्लेषण न तो ईरानी कर पा रहे हैं और न ही अमेरिकी।'' उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज ‘दुनिया के लिए खुला है, लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए बंद है।’

ईरान ने होर्मुज में टोल वसूली को दी मंजूरी, अमेरिकी और इजरायली जहाजों पर बैन

तेहरान  ईरान जंग में जिसका डर था, वो हो गया. ईरान की संसद ने होर्मुज पर टोल लगाने वाले ‘कानून’ को मंजूरी दे दी है. जी हां, ईरान की संसद की सुरक्षा समिति ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लिए एक नई प्रबंधन योजना को मंजूरी दी है. इसमें जहाजों पर टोल और कुछ देशों पर बैन लगाने का प्रस्ताव है. इस मंजूरी के बाद अब होर्मुज से अमेरिका और इजरायल के जहाजों पर बैन लग गया है. इस तरह अब ईरान ने दुनिया के इस सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण और मजबूत करने का फैसला किया है. यह जानकारी ईरानी सरकारी मीडिया ने दी है।  इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) के अनुसार, इस नए प्लान में रणनीतिक जलमार्ग यानी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए रियाल आधारित टोल सिस्टम लागू किया गया है. इसका मतलब है कि  होर्मुज से गुजरने पर सभी जहाजों को टोल देना होगा. इस प्लान में समुद्री सुरक्षा, जहाजों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और होर्मुज से गुजरने के वित्तीय नियमों से जुड़ी बातें भी शामिल हैं।  अमेरिकी-इजरायली जहाजों पर बैन IRIB के मुताबिक, इस योजना के तहत अमेरिकी और इजरायली जहाजों के गुजरने पर प्रतिबंध लगाया गया है और उन देशों पर भी प्रतिबंध बढ़ाया गया है, जो ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाते हैं. साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता को फिर से मजबूत किया है और ओमान के साथ मिलकर इसके प्रबंधन के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया है।  ईरान के इस कदम से खलबली ईरान का यह कदम दुनिया में खलबली मचाने वाला है. यह कदम पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिकी-इजरायली गठबंधन के बीच चल रहे संघर्ष के बीच उठाया गया है, जो अब दूसरे महीने में है. इससे तेहरान की ओर से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक यानी होर्मुज पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश का संकेत मिलता है. अब तक जो हालात हैं, उससे साफ है कि होर्मुज पर ईरान का एकक्षत्र राज है।  अमेरिका रहा है होर्मुज पर फेल इसी बीच अमेरिका अब तक होर्मुज खोलने में विफल रहा है. वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से स्थापित करना चाहता है ताकि जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र रूप से हो सके. उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘बाजार में पर्याप्त आपूर्ति है और हम देख रहे हैं कि रोजाना ज्यादा से ज्यादा जहाज गुजर रहे हैं, क्योंकि अलग-अलग देश फिलहाल ईरानी शासन के साथ समझौते कर रहे हैं. समय के साथ अमेरिका जलडमरूमध्य पर नियंत्रण फिर से हासिल करेगा और वहां जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र होगी, चाहे वह अमेरिकी एस्कॉर्ट के जरिए हो या बहुराष्ट्रीय एस्कॉर्ट के जरिए। 

ईरान ने बदल दिया अपना टारगेट, अमेरिका को चोट पहुँचाने के लिए दिया नया अल्टीमेटम

तेहरान  अमेरिका ने जंग में भले ही थमने का ऐलान कर दिया है लेकिन बावजूद इसके ईरान ने जंग में रुकने का अपनी ओर से कोई संकेत नहीं दिया है. ईरान ने कहा है कि अब पश्चिम एशिया के जिन जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हैं उन्हें टारगेट किया जाएगा. ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि पूरे क्षेत्र में जिन होटलों में अमेरिकी सैनिक ठहरे हुए हैं, वे युद्ध में उसके निशाने पर होंगे. और एक एक पर हमला किया जाएगा. ईरान ने पश्चिम एशिया के देशों के होटल मालिकों को अल्टीमेटम दिया है कि वे अपने होटल में अमेरिकी सैनिकों को न रहने दें।   ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी सैनिकों पर खाड़ी सहयोग परिषद देशों के लोगों को 'मानव ढाल' के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, "इस युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिक GCC में अपने मिलिट्री बेस छोड़कर होटलों और दफ़्तरों में छिपने के लिए भाग गए।  उन्होंने इस क्षेत्र के होटलों से अपील की कि वे उन्हें बुकिंग न दें. फार्स न्यूज एजेंसी ने कुछ अनाम सूत्रों के हवाले से बताया कि ईरान ने इस क्षेत्र के होटलों को सकर संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में सख्त चेतावनी जी है।  क्या हम हाथ धरे बैठे रहें ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफ़ज़ल शेकरची ने सरकारी टेलीविजन पर कहा, "जब सभी अमेरिकी फोर्स किसी होटल में जाते हैं, तो हमारे नजरिए से वह होटल 'अमेरिकी' बन जाता है." "क्या हमें बस हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए और अमेरिकियों को हम पर हमला करने देना चाहिए? जब हम जवाब देंगे, तो जाहिर है हमें वहीं हमला करना होगा जहां वे मौजूद हैं।  सीरिया, लेबनान, जिबूती को अल्टीमेटम एजेंसी ने आगे बताया कि ईरान की सेना ने सीरिया, लेबनान और जिबूती में भी अमेरिकी सेना को इसी तरह की जगहों का इस्तेमाल करते हुए पहचाना है. ईरान अपने पड़ोसी देशों पर अमेरिकी सेना को अपनी जमीन से हमले करने की इजाजत देने का आरोप लगाता रहा है, किन खाड़ी देशों ने इन आरोपों को बार-बार नकारा है.उन्होंने युद्ध शुरू होने से पहले ही साफ कर दिया था कि वे अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए नहीं होने देंगे।  ईरान ने बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के होटल मालिकों को "अल्टीमेटम" जारी करते हुए चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों को ठहराने से वे हमारे लिए टारगेट बन सकते हैं।  रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों ने पूरे क्षेत्र में सिविलियन इलाकों में अपनी उपस्थिति स्थापित कर ली है, जिसमें बेरूत के पुराने हवाई अड्डे के पास एक लॉजिस्टिक्स बेस और दमिश्क के रिपब्लिक पैलेस, फोर सीजन्स और शेरेटन होटल शामिल है. खबरों के अनुसार, अमेरिकी मरीन को इस सप्ताह इस्तांबुल और सोफिया होते हुए जिबूती अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थानांतरित किया गया है।  ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 की 83वीं लहर इस बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि उसने "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4" की 83वीं लहर शुरू की है, जिसमें इजरायली सैन्य ठिकानों और अमेरिका से जुड़ी केंद्रों को निशाना बनाया गया है।  IRGC ने दावा किया कि उसने अशदोद में तेल भंडारण स्थलों, मोदीन में सैन्य ठिकानों और खुफिया जानकारी से जुड़ी सुविधाओं पर हमले किए हैं।  उसने अल धाफरा, अल उदीद, अली अल सलेम और शेख ईसा सहित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमलों की जानकारी दी, जिसमें ईंधन डिपो, विमान हैंगर, ड्रोन और पैट्रियट सिस्टम के रखरखाव स्थलों को निशाना बनाया गया।  खबरों के अनुसार इस ऑपरेशन में लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों, मल्टी-वॉरहेड सिस्टम और लोइटरिंग अटैक ड्रोन का मिला-जुला इस्तेमाल किया गया. IRGC ने कहा कि यह हमला उसकी नौसेना और एयरोस्पेस बलों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था और ये ऑपरेशन जारी रहेंगे।