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सीएम योगी का म्यांमार यात्रा के बाद पहला विदेशी दौरा, 23-24 सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास

सिंगापुर की 25 और जापान की 8 कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से करेंगे मुलाकात जी-टू-बी संवाद और राउंड टेबल मीटिंग में निवेशकों से होगा सीधा संवाद प्रवासी भारतीयों और स्कूली बच्चों से बातचीत कर साझा करेंगे बदले यूपी की कहानी डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल और ग्रीन एनर्जी निवेश पर रहेगा जोर वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में अहम पहल लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान के चार दिवसीय दौरे पर आज रवाना होंगे। 2017 की म्यांमार यात्रा के बाद यह मुख्यमंत्री का पहला विदेशी दौरा होगा, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति और औद्योगिक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे। इस यात्रा की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के जरिए निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। यूपी के सीईओ की तरह वे निवेशकों से प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता और कारोबारी संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणाम केंद्रित बातचीत करेंगे। प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश वासियों को संबोधित करने के साथ वे स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की विकास यात्रा साझा करेंगे। सरकार का मानना है कि 25 करोड़ नागरिकों की शक्ति उत्तर प्रदेश को उत्पादन और उपभोग दोनों का केंद्र बनाती है। विशाल श्रमबल, बड़ा बाजार और तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ के विजन की मजबूत आधारशिला हैं। सिंगापुर की 25 कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे सीएम योगी सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। गूगल और एसटीटी ग्लोबल जैसे निवेशकों के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, जापफा ग्रुप और ओलम इंटरनेशनल के साथ एग्रीबिजनेस, मैपलट्री और एआई सैट्स के साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तथा एवीपीएन, जीएससी ग्रीन्स और ईडीपीआर सनसीप के साथ क्लीन व सौर ऊर्जा निवेश पर चर्चा होगी। ग्रीनफील्ड वेंचर्स और ड्रीमट्रस्ट के साथ हॉस्पिटैलिटी व थीम पार्क, यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप के साथ पैकेजिंग, सेम्बकॉर्प के साथ इंडस्ट्रियल पार्क और सिंगापुर एयरलाइंस इंजीनियरिंग कंपनी के साथ एविएशन क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। टेमासेक, जीआईसी और ब्लैकस्टोन जैसे वैश्विक निवेश फंड्स के साथ पूंजी निवेश, जबकि फुलर्टन फाइनेंशियल, डीबीएस बैंक और वर्टेक्स वेंचर्स के साथ फिनटेक व स्टार्टअप सहयोग पर भी बातचीत होगी। जापान में आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे मुख्यमंत्री जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कुबोटा और सुजुकी के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, टोक्यो इलेक्ट्रॉन के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा टोयो डेंसो, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स और नागासे एंड कंपनी के साथ ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे। कनाडेविया के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और मारुबेनी के साथ हॉस्पिटैलिटी व रियल एस्टेट निवेश पर भी चर्चा होगी। जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों के जरिए करेंगे संवाद दौरे के दौरान आयोजित जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर निवेशकों के साथ संवाद करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन बैठकों से निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में अहम कदम चार दिन के इस दौरे में मुख्यमंत्री निवेशकों के सामने नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर रखेंगे, जहां मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तेज कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने और ‘मेक इन यूपीवन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने में अहम साबित हो सकता है।

जापानी पीएम ने कसी कड़ी भाषा, कहा- ताइवान संघर्ष में अमेरिका पर हमला बर्दाश्त नहीं

टोक्यो जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने ताइवान को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि अगर ताइवान में कोई बड़ा संकट पैदा होता है और वहां अमेरिकी सेना पर हमला किया जाता है, तो जापान मूकदर्शक नहीं बनेगा, बल्कि दखल देगा। टोक्यो में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान ताकाइची ने कहा कि ऐसी स्थिति में अगर जापान ने कुछ नहीं किया तो अमेरिका के साथ उसका सुरक्षा गठबंधन कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ताइवान का मामला सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि जापान की सुरक्षा और उसके अंतरराष्ट्रीय रिश्तों से जुड़ा हुआ है। निक्केई एशिया के मुताबिक, ताकाइची ने यह भी कहा कि आपात स्थिति में ताइवान में फंसे जापानी और अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी सेना पर हमला होता है और हम दूरी बनाते हैं, तो फिर हमारे गठबंधन का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”प्रधानमंत्री ने यह भी साफ किया कि सैन्य हमले जैसी इमरजेंसी में जापान हालात का आकलन करेगा और मौजूदा कानूनों के दायरे में रहकर जवाब देगा। उनका कहना था कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।ताकाइची का यह बयान ऐसे समय आया है जब चीन लगातार ताइवान पर अपना नियंत्रण जताने के संकेत दे रहा है। इससे ताइवान पर संभावित चीनी सैन्य कार्रवाई की आशंका और गहरी हो गई है।   गौरतलब है कि पिछले साल नवंबर में भी ताकाइची ने जापानी संसद में कहा था कि ताइवान के खिलाफ चीन की नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जापान के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकती है। उस बयान पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई थी और दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था।चीन के दबाव के बाद ताकाइची ने दिसंबर में कहा था कि जापान का ताइवान पर रुख 1972 से नहीं बदला है, लेकिन अब उनके ताजा बयान से साफ है कि टोक्यो ताइवान के मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है। इससे एक बार फिर चीन-जापान रिश्तों में तल्खी बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।  

यीडा डेलिगेशन ने देश के सबसे सफल जापानी औद्योगिक क्लस्टर के मॉडल के अनुभवों को समझा

यीडा डेलिगेशन का नीमराना दौरा, यूपी में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी के लिए मॉडल का किया अध्ययन यीडा डेलिगेशन ने देश के सबसे सफल जापानी औद्योगिक क्लस्टर के मॉडल के अनुभवों को समझा रीको अधिकारियों ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क के विकास की यात्रा, योजना और संचालन ढांचे पर दी विस्तृत प्रस्तुति उत्तर प्रदेश के यीडा क्षेत्र में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी को आकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा दौरा नीमराना  उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी को आकार देने की दिशा में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को राजस्थान के नीमराना स्थित राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) के जापानी इंडस्ट्रियल पार्क का अध्ययन दौरा किया। इस भ्रमण का उद्देश्य देश के सबसे सफल जापानी औद्योगिक क्लस्टर माने जाने वाले नीमराना मॉडल के अनुभवों को समझना और उन्हें यीडा क्षेत्र में लागू करना है। रीको अधिकारियों ने दी विस्तृत प्रस्तुति बैठक के दौरान रीको अधिकारियों ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क के विकास की पूरी यात्रा, योजना प्रक्रिया और संचालन ढांचे पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसमें बताया गया कि किस प्रकार जापानी निवेशकों की आवश्यकताओं के अनुरूप भूमि आवंटन, जोनिंग, आधारभूत ढांचे और यूटिलिटी सेवाओं को विकसित किया गया। अधिकारियों ने विशेष प्रोत्साहन नीतियों, प्रशासनिक सहूलियतों और निवेशकों के लिए तैयार किए गए अनुकूल इकोसिस्टम पर भी प्रकाश डाला। चर्चा के दौरान जापानी कंपनियों की लॉजिस्टिक जरूरतों, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं, सुचारू आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर नीति वातावरण जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। यीडा अधिकारियों ने इस मॉडल को उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित जापानी इंडस्ट्रियल सिटी के मास्टर प्लान में समाहित करने पर जोर दिया। टीम ने प्रत्यक्ष रूप से देखा जापानी इंडस्ट्रियल पार्क तकनीकी सत्र के बाद यीडा प्रतिनिधिमंडल ने नीमराना जापानी इंडस्ट्रियल पार्क का स्थलीय निरीक्षण भी किया और वहां मौजूद अवसंरचना, सड़क नेटवर्क और यूटिलिटी प्रबंधन को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस अवसर पर यीडा के सीईओ आर.के. सिंह ने कहा कि राजस्थान सरकार और रीको द्वारा साझा किए गए अनुभव यीडा के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने कहा कि भूमि नियोजन, विशेष अवसंरचना और निवेशक-अनुकूल व्यवस्था से जुड़े इन अनुभवों के आधार पर यीडा क्षेत्र में विश्वस्तरीय जापानी इंडस्ट्रियल सिटी विकसित की जाएगी, जिससे उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति में आएगा। औद्योगिक क्लस्टर आधारित विकास पर केंद्रित है यीडा की योजना उन्होंने यह भी बताया कि यीडा की योजना औद्योगिक क्लस्टर आधारित विकास पर केंद्रित है, जिसमें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ा जा रहा है। दौरे के समापन पर यीडा डेलिगेशन ने रीको और राजस्थान सरकार का आभार जताया और इसे राज्यों के बीच सहयोग का एक सशक्त उदाहरण बताया, जो देश के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा। यीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर.के. सिंह के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी शैलेंद्र कुमार भाटिया, ईडी, ईपीसीएमडी-इंडिया सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। रीको की ओर से डीजीएम संजय बगाड़िया ने बैठक में सहभागिता की।

जापान का बड़ा कदम: सेंट्रल बैंक ने महंगाई पर काबू के लिए ब्याज दरें 30 साल के उच्चतम स्तर पर बढ़ाईं

टोक्यो जापान से बड़ा खबर आई है, यहां के सेंट्रल बैंक (Bank Of Japan) ने ब्याज दरों में तगड़ा इजाफा किया है इसे एक चौथाई फीसदी बढ़ाते हुए 0.75% (Japan Hikes Interest Rate) कर दिया है. ये देश में ब्याज दरों का 30 साल का सबसे उच्चतम स्तर है. जापानी बैंक के फैसले पर सभी की नजर थी और अनुमान के मुताबिक ही शुक्रवार को केंद्रीय बैंक की ओर से बड़ा ऐलान किया गया. बढ़ती महंगाई (Japan Inflation) के दबाव में देश में ब्याज दरों में ये बढ़ोतरी की गई है.   अब 'जीरो' ब्याज पर कर्ज का दौर खत्म  जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा (Kazuo Ueda) के नेतृत्व में बैंक ऑफ जापान (Bank Of Japan) के मॉनिटरी बोर्ड ने शुक्रवार को एक व्यापक रूप से अपेक्षित निर्णय में अपनी बेंचमार्क दर को एक चौथाई फीसदी बढ़ाकर 0.75% कर दी है. शुक्रवार को इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर तीन दशकों या 1995 के बाद सबसे हाई पर पहुंच गया. अब ये देश में पहले कभी नहीं देखे गए लेवल पर पहुंच गया है. इस फैसले से जापान में दशकों से मिल रहे भारी मॉनेटरी सपोर्ट और लगभग ज़ीरो फीसदी पर उधार लेने की लागत का दौर खत्म हो गया है.  पहले से जताई जा रही थी उम्मीद गौरतलब है कि बैंक ऑफ जापान की ओर से Rate Hike का ये फैसला पहले से जताई जा रही उम्मीदों के अनुरूप ही है. एक्सपर्टस शॉर्ट-टर्म Japan Interest Rate में सेंट्रल बैंक की ओर से 0.5% से बढ़ाकर 0.75% करने का अनुमान जाहिर कर रहे थे. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब नई प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची देश में महंगाई को कम करने के लिए प्रयास कर रही हैं.  ताकाइची और उएदा दोनों के अपने वर्तमान पदों को संभालने के बाद यह पहली वृद्धि (First Rate Hike) है, अब Bank Of Japan के गवर्नर उएडा दोपहर 3:30 बजे (0630 GMT) इस फैसले के बारे में अधिका जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. जापान में महंगाई घटाने के लिए कदम बता दें कि जब कोई केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो इसका सीधा प्रभाव देश की करेंसी के मूल्य में वृद्धि के रूप में देखने को मिलता है. जापान के मामले में ये कदम देश में महंगाई को कम करने की क्षमता रखता है,  क्योंकि अमेरिकी डॉलर (US Dollar) और यूरो जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले येन के कम मूल्य ने आयात लागत को बढ़ाकर महंगाई को बढ़ावा देने में मदद की है. अभी ब्याज दर में और इजाफा संभव! Japan Inflation Rate पर एक नजर डालें, तो शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जापान में खाद्य और ईंधन को छोड़कर महंगाई दर नवंबर में 2.9% की दर से बढ़ी है. मंहगाई का ये आकंड़ा बैंक ऑफ जापान के तय 2% के टारगेट से अधिक है. अधिकांश अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान अगले साल एक बार फिर अपनी बेंचमार्क ब्याज दर बढ़ाकर 1% कर देगा. क्या है जापान के शेयर बाजार का हाल?  जापान में लिए गए Rate Hike के बड़े फैसले से पहले जापानी शेयर बाजार ग्रीन जोन में कारोबार कर रहा था. वहीं इस खबर के आने के बाद भी इसमें तेज उछाल देखने को मिल रहा है. Japan Nikkei 560 अंक या 1.14% की बढ़त के साथ 49,602.98 के लेवल पर ट्रेड कर रहा था. हालांकि, ब्याज दरों में इजाफा किए जाने के फैसले के बाद दुनियाभर के शेयर बाजार सकर्त मोड में नजर आ रहे हैं. भारतीय बाजार की बात करें, तो इसमें तेजी देखने को मिली है. BSE Sensex 450 अंक, तो NSE Nifty 140 अंक की तेजी लेकर कारोबार कर रहा था.  

जापान में 6.7 का शक्तिशाली भूकंप, तटीय क्षेत्रों में सुनामी का खतरा, देश में चौथी बार भूकंप

टोक्यो जापान में आज सुबह फिर तेज झटके महसूस किए गए. समुद्र में आया 6.7 मैग्नीट्यूड का भूकंप इतना जोरदार था कि तटीय इलाकों से लेकर दूर बसे शहरों तक धरती हिल गई. भारतीय समय के मुताबिक यह भूकंप सुबह 8:14 बजे आया. इसकी गहराई 10.7 किलोमीटर थी, जो इसे खतरनाक बनाती है. भूकंप तट के करीब आया, और झटकों की तीव्रता देखकर कई जगह लोग घरों से बाहर भागते दिखे. दुकानों और दफ्तरों में अलार्म बजा दिए गए. जापान में भूकंप के बाद सुनामी की कहां चेतावनी? जापानी मीडिया आउटलेट के मुताबिक भूकंप के बाद जापान मौसम एजेंसी ने 1 मीटर तक ऊंची लहरें आने की चेतावनी जारी की है. कई तटीय इलाकों में दोपहर तक लगातार अलर्ट दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक होक्काइडो सेंट्रल पैसिफिक कोस्ट, आओमोरी प्रीफेक्चर, इवाते प्रीफेक्चर और मियागी प्रीफेक्चर में सुनामी की चेतावनी दी गई. बताया जा रहा है कि ये एक मीटर तक ऊंची हो सकती हैं. इसी हफ्ते आए कई भूकंप जापान इस हफ्ते भूकंपों की सीरीज से जूझ रहा है. सोमवार को 7.6 मैग्नीट्यूड का बड़ा भूकंप आया, जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हुए. सड़कें टूटीं, इमारतें हिली, और छोटे सुनामी वेव्स भी दिखे. मंगलवार को होंचो शहर में 6.7 मैग्नीट्यूड के झटके महसूस किए गए. बुधवार को आओमोरी और होक्काइडो में 6.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया. अब शुक्रवार को फिर 6.7, यानी जापान इस सप्ताह चौथे दिन कांप चुका है. जापान ने जारी की बड़ी चेतावनी सोमवार के भूकंप के बाद जापान एजेंसी ने दुर्लभ ‘मेगाक्वेक एडवाइजरी’ जारी कर दी है. एजेंसी का कहना है कि अगले एक हफ्ते में 8.0 या उससे बड़ा भूकंप आने की संभावना बढ़ गई है. 2011 का विनाशकारी 9.0 भूकंप भी इसी पैटर्न की तरह था. जापान की टेक्टॉनिक प्लेट्स इस समय भारी दबाव में हैं, खासकर होक्काइडो-सानरिकु तट के पास. आज आए भूकंप से क्या नुकसान हुआ? अभी तक किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं मिली है. फिलहाल भूकंप के तुरंत बाद कई ट्रेनें रोक दी गईं. तटीय हाइवे बंद होने लगे हैं. वहीं स्थानीय. प्रशासन अलर्ट पर है. लोग अपने घरों से तुरंत बाहर निकल आए और खुले इलाके में जमा हो गए. सरकार ने कहा है कि हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

दुनियाभर में 100+ उम्र के बुजुर्ग: जापान नंबर-1, भारत की क्या स्थिति? जानें टॉप 5 देश

नई दिल्ली वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के नए डेटा से पता चला है कि दुनिया भर में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या बढ़ रही है। सौ साल से ज़्यादा जीने वालों की ग्लोबल लिस्ट में जापान अभी भी टॉप पर है, जहां 123,330 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र एक शतक को पूरा कर चुकी है। इस लिस्ट में जापान के बाद अमेरिका का नंबर आता है, जहां ऐसे बुजुर्गों की संख्या 73,629 है। तीसरे नंबर चीन और चौथे पर भारत का स्थान है। आंकड़े बताते हैं कि चीन में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या 48,566 है, जबकि भारत में ये संख्या 37,988 है। टॉप पांच देशों की लिस्ट में पांचवे पायदान पर फ्रांस है, जहां 33,220 बुजुर्ग सौ साल से ऊपर के हैं। ये आंकड़े बदलते लाइफस्टाइल, बेहतर हेल्थकेयर और अत्याधुनिक और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदगी दिखाते हैं जो लोगों को पिछली पीढ़ियों की तुलना में लंबी उम्र तक जीने में मदद कर रही हैं। टॉप 5 देशों के अलावा कहां-कहां ऐसे बुजुर्ग? एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 100 साल से ज्यादा बुजुर्गों वाले देशों के सूची में इन पांच देशों के अलावा और भी कई देश हैं, जहां 100 साल से ऊपर लोगों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे देशों में इटली, रूस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, थाईलैंड, कनाडा और दक्षिण कोरिया शामिल है। इन देशों में औसतन ऐसे बुजुर्गों की तादाद 11,000 से 23,000 के बीच है। पिछले 15 सालों में दोगुने हुए 100 से ऊपर के बुजुर्ग वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में अब पहले से कहीं ज़्यादा सौ साल से ज़्यादा जीने वाले लोग हैं। पिछले 15 सालों में दुनिया भर में इनकी संख्या करीब दोगुनी हो गई है। 2009 में ऐसे लोगों की संख्या 455,000 थी जो 2024 में बढ़कर लगभग 935,000 हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह ट्रेंड पब्लिक हेल्थ, वैक्सीन, बीमारी कंट्रोल और फिटनेस और न्यूट्रिशन के बारे में आम जागरूकता में सुधार दिखाता है। और जहाँ बढ़ती आबादी हेल्थकेयर और पेंशन सिस्टम पर दबाव जैसी चुनौतियाँ लाती है, वहीं वे बेहतर सर्वाइवल रेट और ज़्यादा सेहतमंद बुज़ुर्गों का भी संकेत देती हैं। अनुशासित जीवनशैली और स्वास्थ्य सुविधाएं अहम कई देश जहां हर व्यक्ति की उम्र ज़्यादा होती है, वे अनुशासित जीवनशैली और बुज़ुर्गों के लिए मज़बूत और सुलभ सहायता तंत्र के लिए भी जाने जाते हैं। उदाहरण के लिए, जापानी समाज प्रिवेंटिव हेल्थकेयर और शुरुआती स्क्रीनिंग पर ध्यान देता है। रिसर्चर उन कल्चरल तरीकों की ओर भी इशारा करते हैं जो पैदल चलने, सोशल गैदरिंग और हेल्दी खाने को बढ़ावा देते हैं। ये वजहें, मेडिकल केयर के साथ मिलकर, ज़िंदगी की उम्मीद बढ़ाने और सौ साल जीने वालों की संख्या बढ़ाने में मदद करती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सौ साल जीने वालों की संख्या में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि दुनिया कितनी तेज़ी से बदल रही है। अब ज़्यादा लोग लंबी और हेल्दी ज़िंदगी जी रहे हैं, और देश बढ़ती उम्र वाली आबादी के हिसाब से ढलना सीख रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दशक में 100 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों की संख्या और भी बढ़ने की संभावना है।  

भूकंप से कांपा जापान: 6.7 तीव्रता के झटकों के बाद इवाते में खतरे की घंटी

टोक्यो जापान के उत्तर-पूर्वी इलाके में शनिवार शाम 6.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिसके बाद अधिकारियों ने इवाते प्रीफेक्चर के तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, यह भूकंप शाम 5 बजे के बाद इवाते के तट से दूर समुद्र में आया। झटके इवाते और पड़ोसी मियागी प्रीफेक्चर में तेज़ी से महसूस किए गए, जिनकी तीव्रता जापान के 0 से 7 के भूकंपीय पैमाने पर 4 दर्ज की गई।  अधिकारियों ने तटीय इलाकों के लोगों से समुद्र तट से दूर रहने और ऊँचाई वाले स्थानों पर जाने की अपील की है। अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन समुद्र के जलस्तर और आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटकों) पर नजर बनाए हुए है। ट्रेन सेवाओं को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है, और स्थानीय प्रशासन ने अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र  सक्रिय कर दिए हैं ताकि हालात का आकलन किया जा सके।  जापान, जो प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" क्षेत्र में स्थित है, अक्सर भूकंप और सुनामी का सामना करता है। इस भूकंप ने लोगों को 2011 के भयानक पूर्वी जापान भूकंप और सुनामी की याद दिला दी, जिसने भारी तबाही मचाई थी और फुकुशिमा परमाणु संकट को जन्म दिया था। फिलहाल, JMA इवाते के तटीय क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी रखते हुए भूकंप की गहराई और संभावित झटकों का विश्लेषण कर रही है।  

जापान की नेवी ने रचा इतिहास! इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन 8000 KM की स्पीड से करती है वार

टोक्यो  जापान ने अपनी नेवी के जहाज से पहली बार इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन फायरिंग का सफल टेस्ट कर इतिहास रच दिया है. समुद्र में तैनात टारगेट शिप पर दागे गए इस ‘शॉक वेपन’ ने साफ कर दिया कि परंपरागत तोप-गोलों का जमाना अब धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है. जापान के रक्षा मंत्रालय की अधिग्रहण, तकनीक और लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने खुलासा किया कि जून से जुलाई के बीच टेस्ट शिप JS Asuka से रेलगन के ट्रायल किए गए. चार तस्वीरें जारी करते हुए ATLA ने लिखा, ‘यह पहली बार है जब किसी वारशिप से रेलगन का टेस्ट किया गया और वह भी सीधे एक असली जहाज पर.’ क्या है रेलगन? रेलगन बारूद नहीं, बल्कि बिजली की ताकत से गोला दागती है. प्रोजेक्टाइल को इतनी गति मिलती है कि वह परंपरागत तोपों से कहीं अधिक दूरी और शक्ति के साथ टारगेट भेदता है. जापान की यह रेलगन करीब Mach 6.5 की स्पीड यानी आवाज की रफ्तार से साढ़े छह गुना (8,000 किलोमीटर प्रति घंटा) तक प्रोजेक्टाइल दाग सकती है. खास बात यह कि 120 लगातार फायरिंग के बाद भी बैरल की स्पीड में गिरावट दर्ज नहीं हुई. चीन और अमेरिका भी इस टेक पर लगे चीन भी इसी तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है और उसके पास सतत फायरिंग के सफल टेस्ट की खबरें आई हैं, लेकिन वह इसे अब तक तैनात नहीं कर पाया है. अमेरिका ने भी एक समय रेलगन प्रोजेक्ट पर अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन 2021 में तकनीकी चुनौतियों और लागत के चलते इसे बंद कर दिया. वहीं जापान अब इस हथियार को वास्तविक तैनाती की दिशा में सबसे आगे निकल आया है. क्यों इतनी खास है यह तकनीक? डिफेंस एक्सपर्ट मसाशी मुरानो ने जापान टाइम्स को बताया कि हाई-स्पीड एंटी-शिप मिसाइलों को परंपरागत मिसाइलों से इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल है. रेलगन इस चुनौती का जवाब हो सकता है. इसके दागे प्रोजेक्टाइल न सिर्फ बेहद तेज होते हैं, बल्कि पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में सस्ते भी हैं. जहां एयर डिफेंस मिसाइल की एक शॉट की कीमत करोड़ों-करोड़ होती है, वहीं रेलगन अपेक्षाकृत किफायती है. इसके अलावा, रेलगन से एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए ‘एयरबर्स्ट म्युनिशन’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो हवा में ही फटकर घातक टुकड़े छोड़ते हैं. यह मिसाइलों और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में बेहद कारगर हो सकता है. जापान रेलगन को सिर्फ नौसैनिक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहता. योजना है कि इसे जमीन पर भी तैनात किया जाए, ताकि दुश्मन के आर्टिलरी यूनिट्स को निशाना बनाया जा सके और तटीय सुरक्षा को मजबूत किया जा सके. ATLA अब प्रोजेक्टाइल की उड़ान स्थिरता, फायर-कंट्रोल सिस्टम और सतत फायरिंग क्षमता को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. हालांकि, अभी तक इसकी अधिकतम रेंज और रैपिड फायर की क्षमता उजागर नहीं की गई है.