samacharsecretary.com

अल्टीमेटम खत्म, अब धर्मयुद्ध का समय: लखनऊ से शंखनाद करेंगे मुकुंदानंद

  लखनऊ, लखनऊ में बुधवार को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ की शुरुआत करेंगे। इस कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर दो बजे होगी और इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। शंकराचार्य के शिष्य ने कहा कि 40 दिन के अल्टीमेटम के बाद धर्मयुद्ध का शंखनाद होगा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्य मुकुंदानंद ने बताया कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन बटुकों का अपमान हुआ था। शंकराचार्य की पालकी को तोड़कर घसीटा गया था, जिससे पूरे समाज में रोष फैल गया। इस घटना के बाद शंकराचार्य महाराज काशी आए और उन्होंने लोगों को 40 दिन का समय दिया। 40 दिन पूरे होने के बाद अब शंकराचार्य महाराज लखनऊ में कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुके हैं। मुकुंदानंद ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर दोपहर सवा दो बजे के बाद विजय मुहूर्त होगा। इस विजय मुहूर्त में शंकराचार्य महाराज धर्मयुद्ध का शंखनाद करेंगे। उन्होंने बताया कि हमारी पद्धति के अनुसार किसी भी धर्मयुद्ध या धार्मिक मुहिम की शुरुआत से पहले शंखनाद किया जाता है। शंखनाद केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि यह लोगों में एकजुटता और जागरूकता पैदा करने का माध्यम भी है। शंखनाद के माध्यम से गौ रक्षा की मुहिम और इसके महत्व की बात जन-जन तक पहुंचाई जाएगी। शिष्य मुकुंदानंद ने कहा कि शंकराचार्य महाराज के आदेश के अनुसार पूरे समाज को इस मुहिम में शामिल किया जाएगा। भारत में सौ करोड़ से अधिक हिंदू इस पहल से जुड़ेंगे और विश्वभर में डेढ़ सौ करोड़ हिंदुओं को भी इस संदेश से अवगत कराया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल गौ रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक और सामाजिक चेतना फैलाने का भी जरिया है। गौरतलब है कि इससे पहले 7 मार्च को काशी से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पदयात्रा शुरू की थी जो जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली और उन्नाव जैसे जिलों से गुजरते हुए अब लखनऊ पहुंच चुकी है। आज यहां ‘गौ माता प्रतिष्ठा संकल्प महासभा’ होगी, जिसमें शंकराचार्य ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का शंखनाद करेंगे।  

सबसे अधिक राजस्व मामले निस्तारित कर लखनऊ अव्वल, जनपदीय न्यायालयों में जौनपुर ने फिर मारी बाजी

  राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर सीएम योगी की मॉनीटरिंग से प्रदेश में मामलों के निस्तारण में आया खासा सुधार कुल राजस्व मामले के निस्तारण में प्रयागराज दूसरे, आजमगढ़ तीसरे और जौनपुर चौथे स्थान पर जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व मामलों के निस्तारण में जौनपुर पहले, भदोही दूसरे और बिजनौर तीसरे स्थान पर     लखनऊ, प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की फरवरी माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है। जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में पिछले 15 माह से जौनपुर टॉप फाइव जिलों में बना हुआ है।   राजधानी में सबसे अधिक कुल 15,981 मामले निस्तारित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत प्रदेश के जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में पूरे प्रदेश में कुल 3,34,538 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 15,981 मामले निस्तारित किए गये, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज में कुल 14,132 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरा, आजमगढ़ 9,333 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है। आजमगढ़ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप राजस्व मामलों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। जनशिकायतों के समयबद्ध समाधान के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रहीं हैं। राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अभियान चलाकर निपटाया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि आजमगढ़ ने फरवरी में राजस्व मामलों के निस्तारण में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह जौनपुर ने 8,912 मामले निस्तारित कर चौथा और बाराबंकी ने 8,378 मामलों का निस्तारण कर पांचवां स्थान प्राप्त किया है।   जनपद स्तरीय न्यायालयों में जौनपुर ने मारी बाजी, 542 मामले किए निस्तारित जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की फरवरी माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक के निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 542 मामलों का निस्तारण किया है। इसका अनुपात 216.80 प्रतिशत है। इसी के साथ जनपदीय न्यायालय में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि मानक 300 के सापेक्ष 381 मामलों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर बस्ती और मानक 300 के सापेक्ष 353 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर प्रतापगढ़ है। इसी तरह फरवरी में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 86 मामलों का निस्तारण कर 286.67 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो प्रदेश भर में सबसे अधिक है और जौनपुर प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। भदोही के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 69 मामले निस्तारित किए गये। वहीं, बिजनौर के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 46 मामले निस्तारित किए गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किए गये मामलों में भदोही दूसरे और बिजनौर तीसरे स्थान पर है।

रहस्यमय ढंग से गायब हुईं बिहार की 5 नाबालिग बच्चियां, लखनऊ में बरामद

सहरसा बिहार के सहरसा जिले से लापता हुई पांच लड़कियों का मामला सुलझा लिया गया है। ये पांचों लड़कियां उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग रेलवे स्टेशन से सुरक्षित बरामद कर ली गई हैं। 27 फरवरी को घास काटने के लिए घर से निकली इन लड़कियों के अचानक गायब होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी (SIT) का गठन किया था। ऐसे मिली सफलता जांच के दौरान पुलिस को संदेह था कि लड़कियां ट्रेन के जरिए कहीं बाहर जा सकती हैं। इसी संभावना को देखते हुए एसआईटी ने प्रदेश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट जारी कर दिया था और लड़कियों की तस्वीरें जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) को साझा की थीं। 28 फरवरी को जब ये लड़कियां लखनऊ के ऐशबाग स्टेशन पर देखी गईं, तो रेलवे पुलिस और आरपीएफ के जवानों ने तुरंत उनकी पहचान कर ली और उन्हें सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। आखिर लखनऊ कैसे पहुंचीं लड़कियां? लड़कियों के सकुशल मिलने की खबर मिलते ही उनके परिजनों ने राहत की सांस ली है। वहीं, सहरसा पुलिस की एक टीम उन्हें लाने के लिए लखनऊ रवाना हो चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि घास काटने निकली ये पांच लड़कियां बिहार से इतनी दूर लखनऊ कैसे पहुंचीं? क्या इसके पीछे कोई साजिश है या वे स्वयं घर से निकली थीं? इन तमाम सवालों के जवाब अब बिहार पुलिस लड़कियों से पूछताछ के बाद ही साफ कर पाएगी। जांच में जुटी पुलिस सहरसा पुलिस का कहना है कि लड़कियों के सुरक्षित मिलने के बाद अब प्राथमिकता इस बात की जांच करना है कि वे घर से कैसे निकलीं और लखनऊ तक किन परिस्थितियों में पहुंचीं। पुलिस इस पूरे मामले के हर पहलू को खंगाल रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

चिकनकारी की कहानी कहने वाली लखनऊ की फिल्म ‘अंजुमन’ का राष्ट्रीय संरक्षण

  लखनऊ प्रसिद्ध फिल्मकार मुज़फ़्फ़र अली ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए अपनी पुरस्कार-विजेता हिंदी फिल्म अंजुमन (1986) की दुर्लभ 35 मिमी रिलीज़ प्रिंट नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) – नेशनल फ़िल्म आर्काइव ऑफ़ इंडिया (NFAI) को दान की है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री मुज़फ़्फ़र अली ने यह प्रिंट NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम को औपचारिक रूप से सौंपी। फिल्म अंजुमन का उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ से गहरा सांस्कृतिक संबंध है। फिल्म की अधिकांश शूटिंग पुराने लखनऊ में की गई थी और यह शहर की तहज़ीब, नफ़ासत और पारंपरिक हस्तशिल्प परंपरा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। यह फिल्म लखनऊ की प्रसिद्ध चिकनकारी कारीगरी से जुड़ी महिलाओं के जीवन को संवेदनशीलता के साथ चित्रित करती है तथा उनकी उत्कृष्ट कला के बावजूद उन्हें झेलनी पड़ने वाली सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को उजागर करती है। वर्ष 1986 में अंजुमन इंडियन पैनोरमा की आधिकारिक चयनित फिल्मों में शामिल रही। इसके साथ ही फिल्म को वैंकूवर फ़िल्म फ़ेस्टिवल और तेहरान फ़िल्म फ़ेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रदर्शित किया गया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सराहना के बावजूद फिल्म को व्यावसायिक रूप से सिनेमाघरों में प्रदर्शित नहीं किया जा सका। इस अवसर पर श्री मुज़फ़्फ़र अली ने कहा कि राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन के अंतर्गत NFDC–NFAI द्वारा किया जा रहा संरक्षण कार्य फ़िल्म जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेल्युलॉइड माध्यम अत्यंत नाज़ुक होता है और समय के साथ रंगों व छवियों का नष्ट होना अत्यंत पीड़ादायक है। उनके अनुसार, फ़िल्म संरक्षण का यह कार्य व्यवसाय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सेतु का निर्माण है, जिसे केवल राष्ट्र की व्यापक दृष्टि से ही संभव बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अंजुमन जैसी फिल्म, जो लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा को दर्शाती है, उसका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना आवश्यक है। NFDC के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदूम ने कहा कि देश की सिनेमाई विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है। भारत सरकार का राष्ट्रीय फ़िल्म विरासत मिशन, जिसे NFDC–NFAI द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अंजुमन की प्रति दान करने के लिए श्री मुज़फ़्फ़र अली का आभार व्यक्त करते हुए फ़िल्म उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों से अपील की कि वे भी फिल्मों और फ़िल्म से संबंधित सामग्री को संरक्षण हेतु आगे आएँ। उल्लेखनीय है कि फिल्म अंजुमन भारतीय सिनेमा में कई कलात्मक उपलब्धियों के लिए जानी जाती है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री शबाना आज़मी ने संगीतकार ख़य्याम के निर्देशन में अपने स्वयं के प्लेबैक गीत गाए थे, जिनके बोल शायर शाहरीयार और दिवंगत फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने लिखे थे। इस प्रकार, अंजुमन न केवल एक महत्वपूर्ण सिनेमाई कृति है, बल्कि उत्तर प्रदेश—विशेषकर लखनऊ—की सांस्कृतिक, सामाजिक और कलात्मक विरासत का एक अमूल्य दस्तावेज़ भी है।

अखिलेश से मिले आजम खान: बोले– मुलाकात में क्या बात हुई, खुद बताई पूरी कहानी

लखनऊ समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की। मुलाकात के बाद आजम खां ने खुद बताया कि अखिलेश यादव से उनकी किन मुद्दों पर बात हुई। आजम खां 23 महीने बाद 23 सितंबर को सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। इसके बाद अखिलेश यादव ने रामपुर जाकर बंद कमरे में आजम से मुलाकात की थी। दो घंटे तक चली इस मुलाकात के बाद आजम खां ने तब कुछ भी नहीं कहा था। अब जेल से निकलने के 44 दिन बाद उन्होंने लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की। मुलाकात के बाद आजम खां ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज की हमारी मुलाकात का मकसद ये साबित करना था कि इतनी ऐतिहासिक नाइंसाफी के बाद भी कुछ लोग ऐसे हैं जो ये साबित कर सकें कि आज के दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी बर्दाश्त करने की क्षमता किसी पत्थर और पहाड़ से कहीं ज्यादा है। मैं यहां पर मेरे साथ, मेरे परिवार के साथ और मेरे शहर के साथ जो कुछ हुआ उसकी दास्तान लेकर आया था। हमारे कई और साथी अभी भी जेलों में हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम जब भी आपस में मिलते हैं तो उन दर्द भरे लम्हों को गवाह बनाते हैं जिन्हें आने वाली पीढ़ियां याद रखें कि किसी के साथ ऐसा भी हुआ था। उन्होंने कहा कि जो मेरे साथ हुआ उससे मीडिया के द्वारा बनाई गई मेरी छवि में भी शायद बदलाव आया है और आप लोग शायद मुझे समझ पा रहे हैं। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मुलाकात की तस्वीर एक्स पर पोस्ट की। इस तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि न जाने कितनी यादें संग ले आए। जब वो आज हमारे घर पर आए! ये जो मेलमिलाप है यही हमारी साझा विरासत है। इसके पहले आजम खां ने गुरुवार को सपा के कई अन्य नेताओं से भी मुलाकात की थी और कई मुद्दों पर चर्चा की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप को दिखाई हरी झंडी

रक्षा मंत्री की घोषणा, आगामी वित्तीय वर्ष में 3,000 करोड़ टर्नओवर और 500 करोड़ जीएसटी राजस्व देगी यूनिट राजनाथ सिंह ने सीएम योगी को सराहा, बोले- गुंडाराज से डिफेंस हब तक योगी सरकार में निवेशकों का बढ़ा भरोसा रक्षा मंत्री बोले- भारत की वैश्विक पहचान में हुआ इजाफा, अब ‘टेकर’ नहीं, ‘गिवर’की भूमिका में लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ शनिवार को एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थानीय इकाई से निर्मित सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों के प्रथम बैच को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि धनतेरस के शुभ अवसर पर चार मिसाइलों की डिलीवरी के साथ भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाला यह कदम न केवल सैन्य सफलता का, बल्कि आर्थिक समृद्धि और रोजगार सृजन का भी प्रतीक है। उन्होंने ब्रह्मोस को 'भारत की बढ़ती स्वदेशी ताकत का प्रतीक' बताते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दी कि अब उसकी एक-एक इंच जमीन ब्रह्मोस की पहुंच में है। लोकार्पण से डिलीवरी तक पांच महीनों की तेज रफ्तार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है कि आज लखनऊ में ब्रह्मोस की स्टेट-ऑफ-द-आर्ट बूस्टर बिल्डिंग का लोकार्पण हो रहा है। अभी थोड़ी ही देर पहले इसी प्रांगण में रुद्राक्ष के पौधे का रोपण करने का भी मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ। रुद्राक्ष को तो हम रूद्र, यानी भगवान महादेव का अंश मानते हैं। मेरी महादेव से यही प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद इस अत्याधुनिक सुविधा पर और हम सभी देशवासियों पर सदा बना रहे। उन्होंने लखनऊ की जनता को बधाई देते हुए कहा कि लखनऊ मेरे लिए केवल संसदीय क्षेत्र नहीं, बल्कि मेरी आत्मा में बसने वाला शहर है। राज्य और राजधानी के तीव्र विकास को देखकर जो संतोष और गर्व की अनुभूति होती है, वह आज इस रक्षा क्षेत्र से जुड़ी उपलब्धि के कारण और भी गहरी हो गई है। पांच महीनों की तेज रफ्तार राजनाथ सिंह ने कहा कि 11 मई 2025 को इस आधुनिक सुविधा का उद्घाटन हुआ था और मात्र पांच महीनों में ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप तैयार होकर डिलीवर हो रही है। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि जिस गति और दक्षता से यह कार्य पूरा हुआ है, वह केवल रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि लखनऊ और उत्तर प्रदेश की विश्वसनीयता का भी प्रमाण है। आज ब्रह्मोस की विश्वसनीयता के साथ-साथ लखनऊ की पहचान भी और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इस परियोजना के लिए हर संभव सहयोग और समर्थन दिया। पीक टाइम में सैकड़ों रोजगार देगी यूनिट उन्होंने कहा कि यह सुविधा करीब 200 एकड़ में फैली हुई है और लगभग 380 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई है। पीक टाइम पर सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि अनुमान है कि यहां से प्रतिवर्ष लगभग 100 मिसाइल सिस्टम थलसेना, वायुसेना और नौसेना को उपलब्ध कराए जाएंगे। अगले वित्तीय वर्ष में इस इकाई का टर्नओवर 3,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा, जो 500 करोड़ रुपए का जीएसटी राजस्व उत्पन्न करेगा। ब्रह्मोस स्वदेशी शक्ति का प्रतीक रक्षा मंत्री ने ब्रह्मोस की क्षमताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रह्मोस सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती स्वदेशी ताकत का प्रतीक है। यह परंपरागत वॉरहेड, उन्नत गाइडेड सिस्टम और सुपरसोनिक गति के साथ लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने में सक्षम है। गति, सटीकता और शक्ति का यह अनूठा संयोजन ब्रह्मोस को विश्व की सर्वश्रेष्ठ मिसाइल प्रणालियों में शुमार करता है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि ब्रह्मोस आज भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना—तीनों की रीढ़ बन चुका है। ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस के प्रति पैदा किया विश्वास उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि आज का अवसर केवल एक लॉन्चिंग इवेंट नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देने वाला क्षण है कि भारत अपने सपनों को हकीकत में बदलने की ताकत रखता है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस ने न केवल अपनी तकनीकी श्रेष्ठता साबित की, बल्कि यह भी दिखाया कि यह भारत की सुरक्षा का सबसे बड़ा व्यावहारिक प्रमाण है। इस ऑपरेशन ने सिद्ध किया कि जीत अब हमारे लिए कोई घटना नहीं, बल्कि हमारी आदत बन चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस का जो प्रैक्टिकल प्रदर्शन हुआ है, उसने न केवल देशवासियों बल्कि पूरी दुनिया में ब्रह्मोस के प्रति एक गहरा विश्वास और आत्मविश्वास पैदा किया है। ट्रेलर था ऑपरेशन सिंदूर, पिक्चर अभी बाकी है संबोधन का सबसे कड़ा हिस्सा पाकिस्तान को संबोधित करते हुए आया, जहां रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की एक-एक इंच जमीन ब्रह्मोस की पहुंच में है। ऑपरेशन सिंदूर इसका ट्रेलर था, जिसने पाकिस्तान को अहसास दिला दिया कि अगर भारत पाकिस्तान को जन्म दे सकता है तो समय आने पर वह…इसके आगे मुझे बोलने की जरूरत नहीं…आप सब समझदार हैं। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने ब्रह्मोस को वैश्विक स्तर पर साबित कर दिया। देश को यह विश्वास हो गया है कि हमारे विरोधी अब ब्रह्मोस की मारक क्षमता से नहीं बच सकते। हमें संकल्प लेना होगा कि इस आदत को न केवल बनाए रखना है, बल्कि इसे और मजबूत करना है।" गुंडाराज से डिफेंस हब तक बदला उत्तर प्रदेश रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि मैं यहां सिर्फ रक्षा सेक्टर की ही बात नहीं कर रहा। मैं उस बड़े परिवर्तन की भी बात करना चाहता हूं जो उत्तर प्रदेश में हो रहा है। हम सब जानते हैं कि कभी उत्तर प्रदेश की पहचान गुंडाराज और बिगड़े हुए लॉ एंड ऑर्डर से की जाती थी। लोग डर के माहौल में रहते थे और निवेशक यहां आने से कतराते थे। पर आज, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह स्थिति बदल चुकी है। उनके दृढ़ नेतृत्व और नीतिगत निर्णयों ने प्रदेश में विश्वास लौटाया है। लखनऊ सिर्फ तहजीब नहीं, अब तकनीक का भी शहर उन्होंने लखनऊ को तहजीब का शहर बताते हुए कहा कि लखनऊ अब केवल तहजीब का शहर नहीं रहा, बल्कि टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्रीज का केंद्र बन चुका … Read more

सीएम योगी के निर्देश पर विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर शुरू की गई गाइडेड टूर सेवा

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री बोले, पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित और किफायती यात्रा का लाभ देने के लिए उठाया गया कदम लखनऊ, योगी सरकार विश्व पर्यटन दिवस (27 सितंबर) के अवसर पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नई सौगात लेकर आयी है। सीएम योगी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (UPSTDC)द्वारा लखनऊ से नैमिषारण्य और अयोध्या के लिए एक दिवसीय गाइडेड टूर शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भक्ति और सुविधा दोनों एक साथ उपलब्ध कराना है। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती पैकेज और सरल ऑनलाइन बुकिंग (www.upstdc.co.in) की सुविधा दी गई है। गाइडेड टूर से श्रद्धालुओं को मिलेगा सुरक्षित, किफायती और सार्थक यात्रा का लाभ पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पौराणिक स्थलों पर यात्रा सुगम करने के लिए विभिन्न कदम उठाये जा रहे हैं। इसी के तहत सीएम योगी के नेतृत्व में नैमिषारण्य और अयोध्या के लिए गाइडेड टूर प्रदेश में आस्था पर्यटन को और मजबूती प्रदान करने के लिए कदम उठाया गया है। इसमें हमारी प्राथमिकता है सुरक्षित, किफायती और सार्थक यात्रा, जो सभी के लिए सुलभ हो। नैमिषारण्य टूर – संचालन दिवस: शुक्रवार, रविवार, सोमवार – समय: सुबह 8:00 बजे से शाम 7:30 बजे तक – किराया: 1,700 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,000 रुपये – दर्शनीय स्थल: चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, ललिता देवी मंदिर अयोध्या टूर – संचालन दिवस: शनिवार, रविवार – समय: सुबह 8:00 बजे से रात 8:30 बजे तक – किराया: 2,000 रुपये, वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1,000 रुपये। – दर्शनीय स्थल: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, राम की पैड़ी गाइड द्वारा हर श्रद्धालु को पौराणिक कथाओं से कराया जाएगा रूबरू निगम की प्रबंध निदेशक ईशा प्रिया ने बताया कि प्रत्येक पैकेज में गाइड द्वारा पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों का रोचक वर्णन, भोजन-जलपान तथा एक स्मृति चिह्न शामिल है। इन टूर पैकेजों में वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा और सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। साथ ही यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान और प्रदेश के पर्यटन को बढ़ावा देने का माध्यम भी बनेगी। इस नये प्रयास से UPSTDC श्रद्धालुओं और पर्यटकों को उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक धरोहर से जोड़ते हुए उन्हें भक्ति, ज्ञान और अविस्मरणीय यादों का अनुभव कराने के लिए नए द्वार खोल रहा है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि ये यात्राएं केवल आस्था का अनुभव नहीं देंगी, बल्कि संस्कृति और सामूहिकता का भी संदेश फैलाएंगी। यह यात्रियों के बीच सामुदायिक बंधन को और मजबूत करेंगी।