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टिकट बंटवारे में बदलाव, BJP इन वर्तमान विधायकों को सकती है अलविदा

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनाव समिति की लगातार दो दिन बैठक हुई, जिसमें चुनावों की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, बढ़िया प्रदर्शन न करने वाले या विवादों में घिरे मौजूदा विधायकों के टिकट पर कैंची चलना तय माना जा रहा है। उन विधायकों को टिकट नहीं देने की चर्चाएं जोरों पर है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री एवं बिहार चुनाव के लिए पार्टी प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने की। बैठक में उनके कैबिनेट सहयोगी एवं चुनावों के सह-प्रभारी सीआर पाटिल और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े भी मौजूद थे। बिहार विधानसभा चुनाव में नए चेहरों को मिलेगा मौका भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि चर्चा ‘‘हमारी बची हुई मौजूदा सीटों के साथ-साथ पिछली बार हारी हुई सीटों'' पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा था कि ‘‘जिन उम्मीदवारों का प्रदर्शन अच्छा रहा है और जिनका कोई मजबूत विरोधी नहीं है, उन्हें दूसरी बार मौका दिया जा सकता है, लेकिन बाकी को नए चेहरों से बदलना पड़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक,  कमजोर प्रदर्शन करने वाले या विवादों में घिरे 20 से अधिक विधायकों का टिकट काटा जा सकता है। बताया जा रहा है कि रामनगर से भागीरथी देवी, छपरा से विधायक डॉ. सीएन गुप्ता, लोरिया के विनय बिहारी , आरा से अमरेंद्र प्रताप सिंह, नरकटियागंज की रश्मि वर्मा, अलीपुर के मिश्रा लाल यादव जैसे कुछ अन्य विधायकों के टिकटें कटना तय माना जा रहा है। ऐसे में प्रदेश के कई राजनीतिक दिग्गजों के भविष्य पर सवालिया निशान लगता नजर आ रहा है! पार्टी द्वारा विधायकों के प्रदर्शन को लेकर भी सर्वे करवाया गया। जिन विधायकों को लेकर लोगों ने अच्छा फीडबैक दिया है, पार्टी उनको ही दोबारा मौका देने का फैसला किया है। वहीं कमजोर प्रदर्शन वाले विधायकों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। आज होगा चुनाव की तारीखों का ऐलान बता दें कि पार्टी ने 2020 के चुनावों में 110 सीट पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 75 पर जीत हासिल की थी, और अन्य दलों के दलबदल और उपचुनावों में जीत के कारण पिछले कुछ वर्षों में इसकी ताकत बढ़ी है। जानकारी हो कि निर्वाचन आयोग सोमवार को बिहार विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा करेगा। निर्वाचन आयोग शाम चार बजे संवाददाता सम्मेलन करेगा। बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है।

डॉ. संजीव कुमार का बड़ा फैसला: जदयू छोड़ राजद में शामिल, एनडीए को टक्कर

 खगड़िया विधानसभा चुनाव 2025 से दल बदल का खेल जारी है। एक दिन पहले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता जनार्दन यादव जनसुराज में शामिल हो गए थे। आज जनता दल यूनाइटेड के विधायक डॉ. संजीव कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल का दामन थाम लिया। वह पिछले कुछ महीनों से अपनी पार्टी से नाराज चल रहे थे। राजद के खगड़िया जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि गोगरी स्थित भगवान उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में डॉ. संजीव पार्टी में विधिवत शामिल हो गए। जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव ने बताया कि डॉ. संजीव अपने हजारों समर्थकों के साथ राजद की सदस्यता ग्रहण की। उनके आने से पार्टी को काफी मजबूती मिलगी। इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. संजीव का एनडीए से मोहभंग होना पहले से तय था। एनडीए द्वारा आयोजित विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों से उनकी लगातार गैरमौजूदगी विशेषकर 27 सितंबर को परबत्ता सम्मेलन और 25 सितंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यक्रम से दूरी इस बदलाव के साफ संकेत थे। डॉ. संजीव कुमार अपनी बेबाकी और मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने के लिए जाने जाते हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी उन्होंने कई बार किसानों के हक, जमीन विवाद और निर्माण परियोजनाओं में गड़बड़ियों को लेकर अपनी ही सरकार की आलोचना की है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो डॉ. संजीव पूर्व मंत्री और पांच बार के विधायक डॉ. आरएन सिंह के पुत्र हैं, जिनकी पहचान जदयू के मजबूत स्तंभ के तौर पर थी। ऐसे में अगर डॉ. संजीव राजद में शामिल होते हैं, तो यह जदयू के लिए बड़ा झटका होगा और राजद के लिए परबत्ता तथा खगड़िया जिले में नई राजनीतिक संभावनाओं के द्वार खोल देगा।

डॉ. संजीव के बाद जदयू में उठी सियासी हलचल, एक और MLA पर शक

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले बिहार में राजनीति का बड़ा 'खेला' शुक्रवार को हो रहा है। कई 'पूर्व' और 'दिग्गज' पार्टियां बदल चुके हैं, लेकिन चुनावी साल में किसी चर्चित मौजूदा विधायक का पार्टी-बदल पहली बार हो रहा है। खगड़िया के परबत्ता से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड के विधायक डॉ. संजीव कुमार 'आखिरकार' राष्ट्रीय जनता दल में जा रहे हैं। आखिरकार इसलिए, क्योंकि वह फरवरी 2024 से अब तक कभी भी जा सकते थे, लेकिन अब जा रहे हैं। फरवरी 2024 में बिहार विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के समय से कई विधायक जदयू छोड़ने वाले थे, लेकिन डॉ. संजीव के बाद अब उनमें से एक और MLA को लेकर पार्टी अपना मन मजबूत कर चुकी है। फ्लोर टेस्ट के समय हुए 'खेला' का प्रभाव आज तक बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले अब जो हो रहा है, उसकी नींव 11 फरवरी 2024 को पड़ गई थी। 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट होने से एक दिन पहले मंत्री विजय चौधरी के आवास पर जदयू विधायकों की मीटिंग में छह विधायक नहीं पहुंचे थे- पूर्णिया के रूपौली से बीमा भारती, पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह, सीतामढ़ी के सुरसंड से दिलीप राय, शेखपुरा के बरबीघा से सुदर्शन कुमार, खगड़िया के परबत्ता से डॉ. संजीव कुमार, पूर्वी चंपारण के केसरिया से शालिनी मिश्रा। तब मंत्री विजय चौधरी ने कहा था कि सभी संपर्क में हैं और जरूरी कारणों से नहीं आए हैं। लेकिन, इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की देखरेख में तेजस्वी यादव के लिए खेला हो रहा था। फ्लोर टेस्ट में इसी खेला के कारण राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का नंबर 128 से घटकर 125 रहा था। 'अमर उजाला' ने तब सबसे पहले हॉर्स ट्रेडिंग की जानकारी सामने लायी थी। इस साल आर्थिक अपराध इकाई की जांच इस दिशा में आगे बढ़ चुकी है, हालांकि कुछ फाइनल नहीं सामने आया है। जहां तक फ्लोर टेस्ट का सवाल है तो उसका नुकसान ज्यादा विपक्षी महागठबंधन को ही हुआ था। नीतीश कुमार सरकार के फ्लोर टेस्ट के समय अंत में डॉ. संजीव कुमार विधानसभा पहुंच गए थे, लेकिन तब यह माना गया था कि वह राष्ट्रीय जनता दल के गेम-प्लान में शामिल थे। जब लाइव खबरों के जरिए यह पता चलने लगा कि राजद-कांग्रेस के ही कई विधायक टूटकर सत्ता पक्ष में खड़े हो गए हैं तो सरकार गिरने की आशंका नहीं, तब सत्ता पक्ष के कई गायब विधायक आननफानन में विधानसभा पहुंचे थे। उनमें डॉ. संजीव कुमार भी थे। इसके बाद लोकसभा चुनाव के समय भी डॉ. संजीव खगड़िया से राजग प्रत्याशी के खिलाफ लगातार मुखर रहे थे। खुद को लोकसभा प्रत्याशी तक बता दिया था। अब वह अंतत: राजद में औपचारिक रूप से जा रहे हैं। परबत्ता सीट पर उन्होंने राजद के दिगंबर प्रसाद तिवारी को 952 मतों से हराया था। डॉ. संजीव को राजद इसी सीट से प्रत्याशी बनाएगा। पार्टी में भी उन्हें पद दिए जाने की बात चल रही है। कौन पहले छोड़ गए, कौन टिकेंगे, किनपर खतरा है अब पूर्णिया से रूपौली की तत्कालीन विधायक बीमा भारती तो लोकसभा चुनाव के पहले जदयू छोड़ गईं। पूर्णिया से राजद के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़कर हारीं। फिर रूपौली के उप चुनाव में राजद के टिकट पर उतरीं तो तीसरे नंबर पर रह गईं। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर से धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह राजद के कुछ नेताओं से सटे नजर आए थे, लेकिन बिहार चुनाव से पहले उन्होंने लालू प्रसाद की पार्टी के कई नेताओं को जदयू में लाकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। शेखपुरा के बरबीघा से सुदर्शन कुमार ने पिछले दिनों सीएम नीतीश कुमार से मिलकर इस सीट को अपने लिए सुरक्षित कर लिया है। पूर्वी चंपारण के केसरिया से शालिनी मिश्रा फ्लोर टेस्ट के समय निजी काम से दिल्ली में थीं, यह उसी समय पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया था। वह लगातार पार्टी की तरफ से सक्रिय हैं। अब सीतामढ़ी के सुरसंड से दिलीप राय को लेकर संशय है। सीतामढ़ी में जदयू उन्हें पार्टी से बाहर मान चुका है। उन्हें पार्टी के औपचारिक कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। इंतजार इसी बात का हो रहा है कि कब वह छोड़कर जाएं।

चित्रकूट में नौकरानी की मौत का मामला गहराया, पूर्व कांग्रेस नेता की पत्नी पर संगीन आरोप

 सतना चित्रकूट में कांग्रेस के पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के निवास पर काम करने वाली 24 साल की नौकरानी सुमन की आत्महत्या मामले में पुलिस ने पूर्व विधायक की पत्नी अर्चना चतुर्वेदी पर केस दर्ज किया है। पुलिस ने इस केस में अहम खुलासे किए हैं। मृतका के प्रेमी अरविंद उर्फ रज्जू यादव को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। वहीं पूर्व विधायक की पत्नी अर्चना चतुर्वेदी पर शस्त्र अधिनियम के तहत लापरवाही का केस दर्ज किया गया है। 29 जुलाई को नौकरानी सुमन ने पूर्व कांग्रेस विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के घर में मौजूद लाइसेंसी रिवॉल्वर से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। जांच में पता चला कि यह हथियार अर्चना चतुर्वेदी के नाम पर है और उसे घर में असुरक्षित तरीके से रखा गया था। इस लापरवाही के आधार पर पुलिस ने उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 30 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि सुमन का प्रेम संबंध अरविंद उर्फ रज्जू यादव से था। अरविंद उर्फ रज्जू यादव दास हनुमान गोशाला में काम करता था। वह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले का रहने वाला है। दोनों की नजदीकियां सब्जी दुकान के पास बैठने के दौरान बढ़ीं, जहां सुमन का परिवार दुकान लगाता था। जब सुमन की मां को इस रिश्ते की भनक लगी, तो उन्होंने उसकी शादी कटनी निवासी एक युवक से तय कर दी। इसके बाद सुमन और अरविंद के बीच तनाव गहराता गया। अरविंद लगातार सुमन से संपर्क करने की कोशिश करता रहा और उसे दो बार मोबाइल फोन देकर बातचीत के लिए दबाव बनाया। 28 जुलाई को सुमन की मां ने अरविंद का दिया दूसरा मोबाइल भी जब्त कर लिया। इसके बाद घर में विवाद हुआ और सुमन पर सामाजिक और भावनात्मक दबाव काफी बढ़ गया। मां की सख्ती, प्रेमी का दबाव और तय विवाह की उलझनों के बीच मानसिक तनाव में सुमन ने अगले दिन खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली। साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर चित्रकूट पुलिस ने अरविंद की भूमिका की पुष्टि की है। उसके खिलाफ बीएनएस की धारा-108 और 107 के तहत केस दर्ज किया गया है। उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने एक ओर प्रेमी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है, तो दूसरी ओर पूर्व विधायक की पत्नी पर लापरवाही से शस्त्र रखने को लेकर मामला दर्ज कर अलग से जांच कर रही है। पुलिस ने इस मामले की जांच के दौरान युवती सुमन और पूर्व विधायक के घर के कई सदस्यों के फिंगर प्रिंट की जांच कराई थी। गौर करने वाली बात यह कि मृतका की मां ने पुलिस से कहा था कि सुमन को दो माह पूर्व दिमागी बुखार आया था जिससे वह परेशान थी। 

मध्यप्रदेश में जनप्रतिनिधियों को मिलेगा लग्जरी ठिकाना, 3 स्टार होटल जैसे फ्लैट्स पर 159 करोड़ खर्च

भोपाल  राजधानी में विधायकों के लिए नए फ्लैट बनने जा रहे हैं। इसके लिए भूमिपूजन भी हो चुका है। 159 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 102 नए फ्लैट बनाए जाएंगे, जिसका भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने किया। यह फैसला विधायकों की शिकायत पर लिया गया है, क्योंकि 67 साल पहले बने विश्रामगृह में बारिश का पानी टपकने और प्लास्टर उखड़ने की समस्या आ रही थी। ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित हैं फ्लैट नए 3 बीएचके फ्लैट 2600 वर्गफीट के होंगे और ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित होंगे, जिसमें सौर ऊर्जा पैनल और फायर फाइटिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। प्रदेशभर के विधायकों के लिए आधुनिक सुविधाओं युक्त नए आवास बनाने का काम आज से शुरू होने जा रहा है। अरेरा हिल्स पर 159 करोड़ रुपए की लागत से ये सर्वसुविधायुक्त 102 नए फ्लैट बनाए जाएंगे। 67 साल पहले बना था विश्रामगृह 1958 यानी, करीब 67 साल पहले बने विश्रामगृह में वर्तमान समय के हिसाब विधायकों की शिकायत थी कि इन भवनों में बारिश का पानी टपकने और कई जगह प्लास्टर उखड़ने की समस्या सामने आ रही है। इसे देखते हुए 10 महीने पहले सरकार ने विधायकों को नए विश्रामगृह बनाने का फैसला किया था। सीएम और विधानसभा अध्यक्ष ने किया भूमिपूजन सोमवार को (आज) मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर इस नए प्रोजेक्ट का भूमिपूजन करेंगे। विधानसभा के अधिकारियों का कहना है कि इसे दो से तीन साल में पूरा करने की योजना है। नए आवास बनाने के लिए विश्राम गृह के खंड एक और पुराने पारिवारिक खंड के साथ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को तोड़ा जाएगा। इसकी जगह नए फ्लैट बनेंगे। पुराने पारिवारिक खंड में 24 आवास हैं, जो 700 वर्ग फीट के हैं, जबकि खंड एक में 102 सिंगल रूम कमरे हैं। खंड एक में विधायकों को तीन-तीन रूम अलॉट किए जाते हैं। यह 125-125 वर्गफीट के हैं। नए बनने वाले 3 बीएचके फ्लैट 2600 वर्गफीट के होंगे। ‘विश्राम भवन नहीं सेवा भवन हैं’ भूमि पूजन के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि नए दौर के नए समय में मध्य प्रदेश लगातार बढ़ रहा है. यह विश्राम भवन नहीं सेवा भवन हैं, विधायकों के कार्यालय भी आधुनिक होना चाहिए. पहले चरण में 102 आवास बनाए जा रहे हैं. उसके बाद दूसरे चरण में भी आधुनिक विधायक विश्राम गृह बनेंगे. विधायक विश्राम गृह भी अच्छा बनना चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज GPT और गूगल का जमाना है। ऐसे में सारे संसाधनों के साथ जब विधायक अपनी विधानसभा में बैठेंगे और विधानसभा में काम करने आएंगे, तो इस सारे तंत्र का और व्यवस्थाओं का लाभ भी लेंगे। इसलिए भोपाल में विधायक विश्राम गृह भी अच्छा होना चाहिए। हमने अपने बजट में 5 लाख रुपए देकर विधायकों के कार्यालय से आवास तक व्यवस्था बनाने की बात कही थी। हमारे बीच में नवाचार का सिलसिला कम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि यह भवन 1958 में बने थे। आज नए दौर का भारत है, जो दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। हमने कल स्पेन की मंत्री का शॉल भेंट कर स्वागत किया, तो उन्होंने बड़े अचंभे से कहा कि आपके यहां महिलाएं घूंघट करती हैं। उन्होंने कहा कि हम युवाओं के रोजगार के लिए प्रबंध कर रहे हैं। डॉ. यादव ने कहा कि ये विश्राम गृह नहीं, बल्कि सेवा ग्रह बनेगा। विजन डॉक्यूमेंट में हमारी पार्टी ने इसे शामिल किया था। दूसरे दलों की सरकारें लंबे समय रहीं, लेकिन विकास के मामले में आप सिंहावलोकन करेंगे तो शेर आगे बढ़ने के लिए एक बार पीछे मुड़कर देखता है। हम आजादी की सौवीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहे है, तो सिंहावलोकन जरूरी है। तकनीक से जुड़कर आगे बढ़ें विधायक वरना पीछे रह जाएंगे नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि विधानसभा में कंप्यूटराइजेशन हो रहा है। तकनीक से जुड़कर विधायक नहीं चले, तो पीछे रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब हम पहली बार विधायक बने, तो 1989 से 2000 तक बस से आते थे। उस समय रोडवेज में आगे की सीट रिजर्व रहती थी। हम इंदौर से बस से पांच घंटे में भोपाल पहुंचते थे। उस समय कोई होता नहीं था। उस समय चार-पांच विधायकों के बीच एक कर्मचारी होता था। आज जमाना बदल गया है। आज सोशल मीडिया के लिए अलग स्टाफ है। गनमैन हर विधायक के पास है। आज समय की आवश्यकता के अनुसार नए आवास ग्रह की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि इस बार एमपी के 8 शहर स्वच्छता में अवॉर्ड लेकर आए। विधायक दायित्व का निर्वहन कर सकें इसलिए जरुरत पूरी हो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक जनता का प्रतिनिधि होता है, वह दायित्व का ठीक से निर्वहन कर सके, इसलिए उसकी आवश्यकता की पूर्ति होनी चाहिए। विधायक विश्राम गृह बहुत पुराना हो गया है। मैं भी एक आवास में रहता था, आज फोटो देखने पर पता चला कि वह 1958 में बना था। मेरा जन्म 1957 में हुआ था यानी उस समय मेरी घुटनों के बल चलने की स्थिति रही होगी। उन्होंने कहा कि ये प्रकल्प पूरा होगा तो विधायक और यहां काम के लिए आई जनता को बहुत प्रसन्नता होगी। हमारा राज्य काफी बड़ा और बड़ी आबादी वाला है। राज्य को नई ऊंचाइयां देने के लिए नई चुनौतियां हैं मुख्यमंत्री जी प्रदेश को नई ऊंचाई देने के लिए लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री जी के सामने कई प्रकल्प हैं, ऐसे समय में उन्होंने विधायक विश्राम गृह को स्वीकृति दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा में नए नवाचार किए गए हैं। आने वाले समय में ई विधानसभा में तब्दील हो जाएगी, तो विधायकों को काम में आसानी होगी। विधायक विश्राम गृह के दूसरे चरण का काम भी जल्दी शुरू होगा 18 महीने में बनकर तैयार होगा विश्राम गृह PWD मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि वर्तमान विधायक विश्राम गृह 66 साल पुराना है। इसलिए नए विश्राम गृह की जरूरत महसूस हो रही थी, जहां विधायक सरकार के संकल्पों को गढ़ सकें। केवल 18 माह में ये विधायक विश्राम गृह बनकर तैयार होगा। ये अग्नि रोधी, भूकंप रोधी होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा परिसर में विधायकों के लिए आवास बनाने के लिए भूमिपूजन में आज … Read more

सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग

 पथरिया  एमपी के जिले में एक अनोखा मामला सामने आया है। पथरिया से BJP की पूर्व MLA सोना बाई के दिव्यांग पति सेवकराम अहिरवार ने उनसे गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम ने कुटुंब न्यायालय में अर्जी दाखिल कर पत्नी की पेंशन से 25 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग की है। उनका कहना है कि 2016 में दुर्घटना में पैर खराब होने के बाद वे दिव्यांग हो गए और अब मजदूरी करने में भी असमर्थ हैं। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई ने उन्हें अपमानित किया और बाद में छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें उनके साथ रहने में शर्म आती थी। 1993 में हुई थी शादी सेवकराम अहिरवार और सोना बाई की शादी 1993 में हुई थी। सेवकराम ने बताया कि 2003 में सोना बाई ने राजनीति में आने की इच्छा जताई। उनके सहयोग से सोना बाई 2003 में से BJP के टिकट पर चुनाव जीतीं और 2008 तक MLA रहीं। सेवकराम के अनुसार, पत्नी के MLA रहते सब ठीक था, लेकिन 2009 में सोना बाई ने उन्हें अपमानित करना शुरू कर दिया और कुछ समय बाद छोड़ दिया। हालांकि, दोनों का तलाक नहीं हुआ है। 2016 में एक पैर खराब हो गया सेवकराम ने बताया कि 2016 में एक दुर्घटना में उनका एक पैर खराब हो गया। अब वे दिव्यांग हैं और मजदूरी भी नहीं कर सकते। इसलिए उन्होंने पत्नी से गुजारा भत्ता मांगा है। सेवकराम के वकील नितिन मिश्रा ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण सेवकराम को भरण पोषण की आवश्यकता है। कोर्ट से नोटिस मिलने पर देंगे जवाब इस मामले पर सोना बाई का कहना है कि वे कोर्ट से नोटिस मिलने पर ही जवाब देंगी। सोना बाई और सेवकराम के तीन बच्चे हैं। सौरव, नीरज और प्रवीण. तीनों बच्चे अपनी मां सोना बाई के साथ रहते हैं। उनका एक बेटा डॉक्टर है और मकरोनिया के सरकारी अस्पताल में कार्यरत है। सोना बाई अभी भी BJP में हैं, लेकिन उनके पास कोई पद नहीं है। पहले सेवकराम करते थे ठेकेदारी पहले सेवकराम ठेकेदारी करते थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्होंने यह काम बंद कर दिया। उनका कहना है कि पत्नी के MLA बनने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया। बड़े-बड़े नेताओं से संपर्क होने के कारण उनमें गुरूर आ गया। सेवकराम का आरोप है कि सोना बाई को उनके साथ रहने में शर्मिंदगी महसूस होती थी।