samacharsecretary.com

PMGKAY के तहत फोर्टिफाइड चावल वितरण पर केंद्र सरकार ने लगाई रोक, स्टोरेज में न्यूट्रिशन कम होने का दावा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत दिए जाने वाले 'फोर्टिफाइड चावल' के वितरण को फिलहाल रोक दिया है. सरकार ने यह कदम चावल के लंबे समय तक भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के खराब होने की चिंताओं के बीच उठाया है. क्यों लिया गया यह फैसला? खाद्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आईआईटी खड़गपुर को एक विशेष अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इस स्टडी में यह जांचना था कि अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल के दाने कितने समय तक अपनी गुणवत्ता बनाए रखते हैं. रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. अध्ययन के अनुसार, नमी, तापमान और गोदामों में रखने के तरीके का चावल की क्वालिटी पर बुरा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में कहा गया कि लंबे समय तक रखे रहने और सामान्य रखरखाव के दौरान इन चावलों में मौजूद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इससे जिस मकसद के लिए चावल में पोषण मिलाया गया था, वह पूरा नहीं हो पा रहा है. भंडारण की समस्या सबसे बड़ी चुनौती भारत के सरकारी गोदामों में चावल की उपलब्धता जरूरत से कहीं ज्यादा है. आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय पूल में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना जरूरत सिर्फ 372 लाख मीट्रिक टन की है. इस कारण चावल को गोदामों में 2 से 3 साल तक रखा जाता है. इतने लंबे समय तक फोर्टिफाइड चावल में मिलाए गए विटामिन और आयरन अपनी शक्ति खो देते हैं. आम जनता पर क्या होगा असर? सरकार ने साफ किया है कि इस फैसले से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले अनाज की मात्रा में कोई कमी नहीं आएगी.     राशन मिलता रहेगा: लाभार्थियों को उनके हक का पूरा चावल मिलेगा, बस वह अब फोर्टिफाइड (मिश्रित) नहीं होगा.     इन योजनाओं पर असर: यह फैसला PDS (राशन दुकान), आंगनवाड़ी (ICDS) और स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील (PM POSHAN) पर लागू होगा.     राज्यों को छूट: खरीफ सीजन 2025-26 के लिए राज्यों को छूट दी गई है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल बांट सकते हैं. क्या है फोर्टिफाइड चावल? बता दें कि कुपोषण और एनीमिया (खून की कमी) को दूर करने के लिए सामान्य चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं. इसे 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था और मार्च 2024 तक इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया था. आगे क्या? खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यह रोक स्थायी नहीं है. सरकार अब एक ऐसी नई तकनीक या सिस्टम पर काम कर रही है जिससे चावल के पोषक तत्व लंबे समय तक खराब न हों. जैसे ही कोई बेहतर तरीका मिल जाएगा, इस योजना को फिर से शुरू किया जा सकता है.

भारत पहुंचे कनाडा के प्रधानमंत्री, पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली   कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज 27 फरवरी से 2 मार्च तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री कार्नी का भारत का यह पहला आधिकारिक दौरा होगा। चार दिवसीय भारत दौरे पर पीएम कार्नी दोनों देशों के संबंधों की मजबूती पर जोर देंगे। पीएम कार्नी कनाडा से रवाना हो चुके हैं और 27 फरवरी को वह मुंबई पहुंचेंगे। अगले दो दिनों में वे अलग-अलग बिजनेस प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे और भारतीय तथा कनाडाई सीईओ, उद्योग एवं वित्तीय विशेषज्ञों, नवोन्मेषकों, शिक्षाविदों के साथ-साथ भारत में स्थित कनाडाई पेंशन फंड के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। पीएम कार्नी 1 मार्च को नई दिल्ली पहुंचेंगे। 2 मार्च को दोनों देशों के प्रधानमंत्री हैदराबाद हाउस में डेलीगेशन स्तर की बातचीत करेंगे। दोनों नेता भारत-कनाडा रणनीतिक साझेदारी के अलग-अलग एरिया में अब तक हुए विकास की समीक्षा करेंगे, जो कनानास्किस (जून 2025) और जोहान्सबर्ग (नवंबर 2025) में हुई उनकी पिछली बैठकों पर आधारित होगी। वे व्यापार और निवेश, ऊर्जा, जरूरी मिनरल्स, कृषि, शिक्षा, शोध और नवाचार और लोगों के बीच संबंधों जैसे खास स्तंभों में चल रहे सहयोग की भी समीक्षा करेंगे। दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक विकास पर भी अपने विचार शेयर करेंगे। बाद में प्रधानमंत्री मोदी और पीएम कार्नी भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भी शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि पीएम कार्नी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-कनाडा के आपसी संबंध सामान्य होने के एक अहम मोड़ पर हैं। दोनों प्रधानमंत्री पहले एक-दूसरे की चिंताओं के लिए आपसी सम्मान, लोगों के बीच मजबूत संबंध और बढ़ती आर्थिक एक-दूसरे को पूरा करने वाली चीजों पर आधारित एक रचनात्मक और संतुलित साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। दोनों नेताओं के बीच होने वाली आने वाली मीटिंग, आगे की सोच वाली साझेदारी बनाने में भारत और कनाडा के सकारात्मक मोमेंटम और साझा दृष्टिकोण को फिर से पक्का करने का मौका देगी। कनाडाई सरकार ने कार्नी के भारत के लिए रवाना होने से पहले देश में हो रहे अपराध में भारत की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया। कार्नी सरकार के अधिकारी ने भारत को क्लीन चिट देते हुए कहा कि कनाडा में हो रहे अपराध से भारत का कोई लेना-देना नहीं है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर इस तरह की गतिविधियां हो रही होतीं तो हम यह यात्रा बिल्कुल नहीं करते।

PM मोदी का इज़राइल दौरा: Future Tech का जायजा, AI से लेकर हेल्थ तक भारत की नई दिशा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इजराइल के दौरे पर हैं. यरुशलम में उन्होंने एक टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी का दौरा किया. इस प्रदर्शनी में इजराइल की कई स्टार्टअप और टेक कंपनियों ने अपने नए प्रोडक्ट और रिसर्च दिखाए. यहां AI, हेल्थ-टेक, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम कंप्यूटिंग, एग्री-टेक और वॉटर मैनेजमेंट से जुड़ी टेक्नोलॉजी रखी गई थी. मोदी ने अलग-अलग स्टॉल पर जाकर डेमो देखे और कंपनियों के फाउंडर्स से बातचीत की. इजराइल लंबे समय से टेक और स्टार्टअप के लिए जाना जाता है. साइबर सिक्योरिटी और डिफेंस टेक में इजराइल की कंपनियों की पकड़ मानी जाती है. भारत पहले से इन सेक्टर में इजराइल के साथ काम कर रहा है. ऐसे में इस तरह की प्रदर्शनी में जाना एक संकेत है कि भारत नई टेक्नोलॉजी को समझना और अपनाना चाहता है. खासकर AI और हेल्थ-टेक जैसे सेक्टर भारत के लिए आने वाले सालों में अहम होने वाले हैं. पीएम मोदी ने वहां मौजूद कंपनियों से कहा कि वे भारत में अपने सॉल्यूशन लाने पर विचार करें. भारत में डिजिटल हेल्थ, स्मार्ट एग्रीकल्चर और साइबर सिक्योरिटी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. गांवों में हेल्थ सर्विस पहुंचाने के लिए AI टूल्स और रिमोट मॉनिटरिंग जैसे समाधान काम आ सकते हैं. खेती में डेटा और सेंसर्स के जरिए पानी और खाद का सही इस्तेमाल भी एक बड़ा मुद्दा है. प्रदर्शनी में दिखाए गए कई प्रोडक्ट इन समस्याओं से जुड़े थे. हालांकि इस दौरे के दौरान अब तक AI और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा कोई बड़ा करार या डील सामने नहीं आई है. अभी तक सिर्फ बातचीत और संभावनाओं की बात हुई है. सरकारी बयान में भी किसी MoU या एग्रीमेंट का जिक्र नहीं है. इसका मतलब यह है कि फिलहाल यह एक शुरुआती कदम है. असली टेस्ट तब होगा जब इन कंपनियों के साथ भारत में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे या कोई ठोस पार्टनरशिप सामने आएगी. पहले भी कई टेक डेमो दिखाए गए हैं, लेकिन वे जमीन पर उतरने में वक्त लेते हैं या कभी-कभी फाइलों में ही अटक जाते हैं. गौरतलब है कि भारत और इजराइल के रिश्ते बीते कुछ सालों में मजबूत हुए हैं. डिफेंस और टेक्नोलॉजी में दोनों देशों का सहयोग बढ़ा है. सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की पोस्ट से यह साफ है कि वे इस दौरे को इनोवेशन और युवाओं से जोड़कर दिखा रहे हैं. उन्होंने इजराइल के युवाओं के काम की तारीफ की और कहा कि इस तरह की टेक्नोलॉजी भविष्य की जरूरतों से जुड़ी है. लेकिन जमीन पर सवाल यह है कि क्या भारत इन टेक्नोलॉजी को अपने सिस्टम में तेजी से अपना पाएगा. भारत में रेगुलेशन, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और डेटा पॉलिसी जैसे मुद्दे अक्सर किसी विदेशी टेक को अपनाने में देरी करते हैं. कुल मिलाकर यह दौरा एक संकेत देता है कि भारत टेक्नोलॉजी के मोर्चे पर इजराइल जैसे देशों से सीखना चाहता है. अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे तुरंत कोई बड़ा बदलाव आएगा. फिलहाल यह एक शोकेस विजिट है. असली कहानी तब बनेगी जब इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भारत के अस्पतालों, खेतों और डिजिटल सिस्टम में दिखने लगेगा. तभी यह दौरा केवल तस्वीरों और बयानों से आगे बढ़कर असली असर दिखा पाएगा.

इजरायल दौरे के बाद भारत और ईरान पर सियासी हलचल, ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में ओवैसी ने इस कदम को फिलिस्तीन के प्रति भारत के ऐतिहासिक समर्थन के साथ विश्वासघात करार दिया है। ओवैसी ने यह भी दावा किया कि पीएम मोदी की यात्रा खत्म होते ही अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। गाजा को लेकर ओवैसी की सख्त टिप्पणी ओवैसी ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही गाजा की स्थिति को 'नरसंहार' करार दिया। उन्होंने लिखा कि गाजा में जो कुछ भी हो रहा है, उसे इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। एआईएमआईएम प्रमुख ने इजरायल के प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए उन्हें 'युद्ध अपराधी' कहा, जिसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी है। उन्होंने पीएम मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे समय में इजरायल जाना और एक 'युद्ध अपराधी' को गले लगाना भारत की स्थापित विदेश नीति के खिलाफ है। ओवैसी ने कहा कि भारत हमेशा से फिलिस्तीनी लोगों और उनके अधिकारों का समर्थन करता आया है। उनके अनुसार, मौजूदा प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे सैद्धांतिक समर्थन के साथ सीधा धोखा है। ओवैसी ने मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की भी आशंका जताई है। उन्होंने अंदेशा जताया कि प्रधानमंत्री के इस दौरे के समाप्त होने के बाद अमेरिका, ईरान पर हमला कर सकता है। उन्होंने अपनी इस पोस्ट का अंत 'जायोनिज्म मुर्दाबाद' के नारे के साथ किया है, जो इजरायल की राजनीतिक विचारधारा 'जायोनिज्म' के प्रति उनके कड़े विरोध को दर्शाता है। कांग्रेस ने भी बोला हमला कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी के इजराइल दौरे से पहले बुधवार को आरोप लगाया था कि जब पूरी दुनिया इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आलोचना कर रही है तो प्रधानमंत्री मोदी वहां 'नैतिक कायरता' का परिचय देने जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, '20 मई 1960 को जवाहरलाल नेहरू गाजा में थे और उन्होंने वहां संयुक्त राष्ट्र आपातकालीन बल की भारतीय टुकड़ी से मुलाकात की थी। 29 नवंबर 1981 को भारत ने फलस्तीन के साथ एकजुटता प्रदर्शित करते हुए एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। 18 नवंबर 1988 को भारत ने औपचारिक रूप से फलस्तीन राष्ट्र को मान्यता दी।' कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा- 'मुझे आशा है कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी अपनी आगामी इजराइल यात्रा पर नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा में हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के नरसंहार का उल्लेख करेंगे और उनके लिए न्याय की मांग करेंगे।' उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत अपने पूरे इतिहास में जो सही है, उसके लिए खड़ा रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा, 'हमें दुनिया को सत्य, शांति और न्याय की रोशनी दिखाना जारी रखना चाहिए।' ऐतिहासिक दौरे पर पीएम मोदी, गाजा शांति योजना का जिक्र बता दें कि प्रधानमंत्री अपने दो दिवसीय इजरायल दौरे पर हैं। एक दिन पहले उन्होंने इजरायल की संसद 'नेसेट' में अपने ऐतिहासिक संबोधन में गाजा शांति पहल को पूरे क्षेत्र के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का मार्ग बताया, साथ ही उन्होंने इजरायल के प्रति एकजुटता का सशक्त संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद चाहे कहीं हो, यह हर जगह की शांति के लिए खतरा है। मोदी ने कहा कि इजरायल की तरह भारत भी आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की एक 'सुसंगत और अडिग नीति अपनाता है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है'। उन्होंने इस खतरे का मुकाबला करने के लिए निरंतर और समन्वित वैश्विक प्रयासों का आह्वान भी किया। प्रधानमंत्री इजरायल की प्रतिनिधि सभा, नेसेट को संबोधित करने के कई घंटे पहले यहां पहुंचे। बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायल के उनके समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने उनका जोरदार स्वागत किया।

इजरायली संसद में हंगामा और वॉकआउट, फिर PM मोदी से मुलाकात में बदले सुर

यरुशलम/नई दिल्ली इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक संबोधन से ठीक पहले एक हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा देखने को मिला. इजरायली विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे एक पल के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई. हालांकि, विपक्ष ने तुरंत साफ कर दिया कि उनकी यह नाराजगी पीएम मोदी से नहीं, बल्कि इजरायल की सत्ताधारी सरकार और संसद के स्पीकर से है. विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान सदन में वापसी की और नेता प्रतिपक्ष यायर लैपिड ने व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी का स्वागत करते हुए कहा, आज यहां जो कुछ भी हुआ, उसका आपसे कोई लेना-देना नहीं है. आखिर विपक्ष ने क्यों किया वॉकआउट? इजरायली अखबार ‘हारेत्ज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद नेसेट के स्पीकर अमीर ओहाना के एक फैसले की वजह से हुआ. स्पीकर ने इस विशेष सत्र में इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष आइजैक अमित को आमंत्रित नहीं किया था. इजरायल में यह परंपरा रही है कि ऐसे विशेष मौकों पर सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष को बुलाया जाता है. स्पीकर के इस फैसले को न्यायपालिका के अपमान के तौर पर देखते हुए विपक्षी दलों ने स्पीकर और सरकार के खिलाफ सदन का बहिष्कार करने का फैसला किया. नेतन्याहू का बहिष्कार, लेकिन पीएम मोदी का किया स्वागत विपक्षी दलों येश अतिद , यिसराइल बेइतेनु और द डेमोक्रेट्स ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भाषण का पूरी तरह से बहिष्कार किया. लेकिन इन पार्टियों ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे भारतीय प्रधानमंत्री के भाषण का बहिष्कार किसी भी कीमत पर नहीं करेंगे. विपक्षी दलों ने एक साझा संदेश में पीएम मोदी को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय नेताओं में से एक और इजरायल का सच्चा मित्र करार दिया. लैपिड ने पीएम मोदी से मिलाया हाथ जैसे ही पीएम नेतन्याहू का भाषण समाप्त हुआ, इजरायल के विपक्षी नेता और पूर्व प्रधानमंत्री यायर लैपिड सदन में वापस लौट आए. उन्होंने सीधे पीएम मोदी के पास जाकर उनसे हाथ मिलाया और संसद में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया ताकि भारत को कोई गलत संदेश न जाए. लैपिड ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए कहा, मिस्टर प्राइम मिनिस्टर (प्रधानमंत्री जी), मैं आपका केवल एक पल लेना चाहता हूं ताकि आपको यह बता सकूं कि आज यहां जो कुछ भी हुआ, उसका आपसे कोई लेना-देना नहीं है.लैपिड की इस टिप्पणी पर जब सत्ताधारी गठबंधन के सांसदों ने हूटिंग शुरू कर दी, तो लैपिड ने सत्ता पक्ष को शांत कराते हुए कहा, आइए चीजों को और खराब करने की कोशिश न करें. ‘संकट के समय भारत हमारे साथ खड़ा रहा’ नेता प्रतिपक्ष यायर लैपिड ने सदन के पटल पर पीएम मोदी की लीडरशिप और भारत-इजरायल की दोस्ती की जमकर तारीफ की. उन्होंने मोदी से कहा, पूरा इजरायल राज्य आपके नेतृत्व, आपकी दोस्ती और इस बात के लिए प्रशंसा से भरा है कि आप हमारी मुसीबत के समय में हमारे लिए यहां खड़े रहे. हमारे दोनों देशों के बीच यह एक शाश्वत गठबंधन है. यहां आने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. हम सभी, चाहे हम सत्ता पक्ष के हों या विपक्ष के, आपके भाषण को सुनने के लिए उत्सुक हैं. सोशल मीडिया पर भी लैपिड ने जाहिर की खुशी संसद में स्वागत करने के बाद, यायर लैपिड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर भी पीएम मोदी के लिए एक खास संदेश लिखा. उन्होंने पोस्ट किया, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी, इजरायल का पूरा देश आपके नेतृत्व, आपकी दोस्ती और मुश्किल समय में हमारे साथ खड़े रहने के लिए आपकी सराहना करता है. यहां आने के लिए आपका धन्यवाद.

‘रामायण सर्किट’ के तहत जबलपुर-गोंदिया रेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी, नक्सल मुक्त क्षेत्र को 5,236 करोड़ की सौगात

जबलपुर मध्य प्रदेश के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पीएम मोदी सरकार ने गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। इसमें प्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को सीधा लाभ मिलेगा। नक्सल प्रभावित बालाघाट के रेल परियोजना से जुड़ने से विकास के नए द्वार खुलेंगे। सीएम मोहन यादव ने केंद्र सरकार व मोदी कैबिनेट द्वारा  गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन परियोजना को स्वीकृति देने की जानकारी साझा करते हुए खुशी जताई है। उन्होंने एक्स पर जानकारी देते हुए पीएम और रेल मंत्री का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण परियोजना को आधिकारिक स्वीकृति दे दी गई है। उन्होंने इस निर्णय को प्रदेश के लिए 'बड़ी सौगात' बताया है। सेवातीर्थ में पहली केंद्रीय कैबिनेट की बैठक बता दें कि सेवातीर्थ में केन्द्र सरकार की पहली केबिनेट बैठक में आयोजित हुई। इसमें गोंदिया से जबलपुर रेलवे लाईन दोहरीकरण को मंजूरी मिल गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे रामायण सर्किट से लेकर नार्थ से साउथ तक का एक महत्वपूर्ण कॉरीडोर बताया है। इस दोहरीकरण का सबसे ज्यादा लाभ विकास के रूप में बालाघाट जिले मिलेगा। केंद्र ने इस रेललाइन के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान करते हुए 5236 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है। जाहिर है इस परियोजना के पूरे होने के बाद एमपी के विकास को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। नक्सल मुक्त बालाघाट को मिलेगी नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि नक्सल समस्या से मुक्त हो चुके बालाघाट जिले के लिए यह परियोजना जीवनदायिनी साबित होगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से यहां न केवल व्यापार और व्यवसाय बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज, मेजर और माईनर ब्रिज बनेंगे करीब 231 किलोमीटर के गोंदिया-जबलपुर रेलवे दोहरीकरण का काम 5236 करोड़ रुपए से 5 साल में पूरा होगा। जिससे महाराष्ट्र के गोंदिया और मध्यप्रदेश के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को इसका लाभ मिलेगा। वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए 450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च किए जाएंगे। साथ ही रेलवे दोहरीकरण के इस काम में नर्मदा नदी में एक बड़े ब्रिज के साथ ही मेजर और माईनर ब्रिज बनाए जाएंगे। परियोजना में एमपी को क्या-क्या मिलेगा, एक नजर     रामायण सर्किट में नार्थ से साउथ तक का कॉरीडोर बनेगा है     परियोजना की कुल लागत 5,236 करोड़ रुपए     रेल दोहरीकरण में लगभग 231 किलोमीटर लम्बाई पर काम होगा     परियोजनाओं को 5 वर्ष में कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया     एमपी के जबलपुर, मंडला, सिवनी, बालाघाट को मिलेगा लाभ     450 करोड़ रुपए की लागत से अंडरपास और फेसिंग में खर्च

पीएम मोदी के इजरायल आगमन पर गूंजा राष्ट्रगान, नेतन्याहू ने किया शानदार वेलकम

येरूशलेम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर इजरायल की धरती पर कदम रख दिया है. वो आज अपने पुराने दोस्त पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने पहुंचेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दो दिवसीय इजरायल दौरा बेहद व्यस्त और ऐतिहासिक कार्यक्रमों से भरा हुआ है. बुधवार दोपहर को तेल अवीव पहुंचने के बाद, पीएम मोदी सबसे पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एयरपोर्ट पर ही एक संक्षिप्त मुलाकात करेंगे और फिर वहां से सीधे येरूशलम के लिए रवाना होंगे. आज के दिन का सबसे बड़ा और यादगार कार्यक्रम इजरायली संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में उनका ऐतिहासिक संबोधन है, जिसके बाद वह नेतन्याहू द्वारा दिए गए एक प्राइवेट डिनर में शामिल होंगे. इजरायल में पीएम मोदी के स्वागत की तैयारी इजरायल में पीएम मोदी के ग्रैंड स्वागत की तैयारी हो चुकी हैं. ये तैयारी इजरायल के मशहूर अखबार ‘द जेरूसलम पोस्ट’ के फ्रंट पेज पर दिखाई दी, जिसमें पीएम मोदी के स्वागत में पूरा का पूरा स्पेशल एडिशन ही निकाल दिया है, जिसके फ्रंट पेज पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘नमस्ते’ लिखा है. यह सिर्फ एक दौरा नहीं है, बल्कि दो पुरानी सभ्यताओं के बीच दोस्ती का एक नया और सुनहरा अध्याय है, जो रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है. विदेशी अखबार के पहले पन्ने पर हिंदी का शब्द ‘नमस्ते’ चमकता हुआ दिखाई दिया. अखबार के एडिटर-इन-चीफ ज्वीका क्लेन ने सोशल मीडिया पर इस फ्रंट पेज को शेयर किया, जिसमें पीएम मोदी की हाथ हिलाते हुए एक बड़ी फोटो लगी है. यहूदी अखबार का फ्रंट पेज वायरल अखबार की हेडलाइंस चिल्ला-चिल्ला कर कह रही हैं- ‘वेलकम, मोदी’. पूरे पहले पन्ने पर सिर्फ भारत और इजरायल की गहरी होती पार्टनरशिप की कहानियां हैं. हिब्रू भाषा के साथ ‘नमस्ते’ का लिखा होना यह साफ दिखाता है कि इजरायल के दिल में भारत के लिए कितना प्यार और सम्मान है. यह दौरा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पीएम मोदी इजरायली संसद (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. संसद में मोदी का भाषण दोनों देशों के रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा. इजरायल में भारत के राजदूत जेपी सिंह का कहना है कि इस दौरे का मकसद सिर्फ कुछ पुराने समझौतों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि व्यापार और टेक्नोलॉजी के हर क्षेत्र में साथ मिलकर काम करना है. मोदी के इजरायल दौरे से पाकिस्तान को 'घबराहट' पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'Dawn' ने अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा, भारत और इजरायल के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध साल 1992 में बने थे. हालांकि 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद इस रिश्ते में और गर्मजोशी आई है. मोदी ने 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर इजरायल का पहला दौरा किया था जिसके अगले साल नेतन्याहू ने भी भारत का दौरा किया. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को दोस्त कहा था. डॉन ने लिखा है, 'मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी तो इजरायल की मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ डिफेंस स्ट्रैटजी के रूप में किया गया था. पाकिस्तानी वेबसाइट ने लिखा, यह व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत-इजरायल की साझेदारी को दर्शाता है. लेकिन इजरायल के साथ ही भारत खाड़ी देशों और ईरान के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए हुए है. उदाहरण के लिए भारत ने ईरान का चाबहार पोर्ट डेवलप किया है जो अफगानिस्तान के लिए एक ट्रेड गेटवे है. अफगानिस्तान के तालिबानी अधिकारियों के साथ भी भारत ने रिश्ते कायम किए हैं.' डॉन ने कांग्रेस पार्टी की सीनियर नेता प्रियंका गांधी के बयान का भी जिक्र किया है. प्रियंका गांधी ने PM मोदी के दौरे को लेकर बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी इजरायल की संसद को संबोधित करते समय गाजा में हजारों बेगुनाह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या का जिक्र करेंगे.  पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज के 'कैपिटल टॉक' शो में पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर हेडलाइन दी गई है- पीएम मोदी का इजरायल दौरा पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी. वहां के मीडिया में सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान को लेकर जिसमें उन्होंने कट्टर शिया और सुन्नी एक्सिस को खतरा बताते हुए भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब, एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ एक गठजोड़ बनाने की बात कही. पाकिस्तानी संसद में भी इस बयान का विरोध करते हुए मंगलवार शाम को एक प्रस्ताव पारित किया गया है. पाकिस्तानी एंकर हामिद मीर ने कहा कि ये मामला बहुत नाजुक है क्योंकि चंद दिनों पहले अमेरिका के राजदूत ने एक इंटरव्यू में 'ग्रेटर इजरायल' की बात कही थी. इसकी सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन समेत कई अरब देशों ने कड़ी आलोचना की थी. एक तरफ नेतन्याहू पीएम मोदी का स्वागत कर रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले का मंसूबा बनाए हुए हैं. बहुत सारे मामलों पर ये सारे इकट्ठे हो गए हैं. पाकिस्तान के लिए बहुत चिंता वाली स्थिति बन गई है. अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर हमले हो रहे हैं और अगर ईरान और अमेरिका की जंग शुरू हो गई तो पाकिस्तान के लिए तो बड़े मुश्किल भरे हालात हो जाएंगे. PM Modi-Netanyahu की दोस्ती का नया ‘पावर पैक’ प्लान प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू, जिन्हें अक्सर ‘जिगरी दोस्त’ कहा जाता है, इस मुलाकात में कई बड़े मुद्दों पर मुहर लगाने वाले हैं. यह दोस्ती अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन पर भी बड़े बदलाव लाने वाली है. आगे जानें पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच किन मुद्दों पर बात होने वाली है.     रक्षा और सुरक्षा- नए हथियारों और डिफेंस टेक्नोलॉजी पर बड़ी चर्चा.     बैंकिंग सिस्टम- क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और बैंकिंग सिस्टम को और आसान बनाना.     खेती और पानी- इजरायल की मॉडर्न टेक्नोलॉजी से भारतीय किसानों की मदद.     साइंस और इनोवेशन- दोनों देशों के वैज्ञानिक मिलकर नई खोजें करेंगे. पीएम मोदी का इजरायल दौरा कंफर्म करे हुए इजरायली पीएम नेतन्याहू ने मोदी को अपना ‘प्रिय मित्र’ बताते हुए इस दौरे को पहले ही ‘ऐतिहासिक’ करार दिया था. कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत में भी उन्होंने इसी दौरे का जिक्र किया गया. मोदी … Read more

पीएम मोदी इजरायल पहुंचे, फ्लाइट रडार पर ‘एअर इंडिया वन’ विमान की सर्चिंग हुई सबसे ज्यादा

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल पहुंच गए हैं. इजरायल यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्लाइट लोकेशन को दुनिया में इस वक्त सबसे ज्यादा ट्रैक किया जा रहा है. दुनिया भर के विमानों के मूवमेंट पर नजर रखने वाला पॉपुलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म फ्लाइटरडार के डेटा बताते हैं कि इस वक्त पीएम मोदी की फ्लाइट मूवमेंट को विश्व में सबसे ज्यादा ट्रैक किया जा रहा है.  पीएम नरेंद्र बुधवार को दो दिनों की इजरायल यात्रा पर निकले हैं. फ्लाइटरडार एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है जो लाइव फ्लाइट ट्रैकिंग करता है. इसका मुख्य काम है दुनिया भर में उड़ रहे विमानों की रियल-टाइम लोकेशन, स्पीड, ऊंचाई, रूट, फ्लाइट नंबर आदि दिखाना है. फ्लाइटरडार के अनुसार बुधवार शाम पौने चार बजे जब पीएम मोदी की फ्लाइट सऊदी अरब से जॉर्डन में एंट्री कर रही थी उस वक्त इसे 7184 लोग लाइव ट्रैक कर रहे थे.  पीएम मोदी का विमान इजरायल के लिए पाकिस्तान और ईरान के एयर स्पेस को पूरी तरह से एवॉइड कर रहे हैं. पीएम मोदी की फ्लाइट दिल्ली से निकलकर गुजरात होते हुए अरब सागर को पार कर ओमान पहुंचा, इसके बाद सऊदी अरब पहुंचा, यहां से उनका प्लेन सऊदी अरब के एयर स्पेस बीच से होकर गुजरा. इसके बाद उनका विमान जॉर्डन पहुंचा. जॉर्डन के बाद इजरायल की सीमा शुरू हो जाती है.  पीएम मोदी एयर इंडिया वन से इज़रायल जा रहे हैं.  यह भारत सरकार का विशेष विमान है, जो प्रधानमंत्री और अन्य उच्च पदाधिकारियों के लिए इस्तेमाल होता है. आमतौर पर यह Boeing 777-300ER या कभी-कभी दो विमानों का फ्लीट होता है, जो स्पेशल कॉन्फ़िगरेशन के साथ आता है. इस विमान में कमांड सेंटर, सिक्योर कम्युनिकेशन और डिफेंस सिस्टम्स शामिल होते हैं.  पीएम मोदी 25 फरवरी 2026 को सुबह पालम एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुए. उनका विमान तेल अवीव के बेन गुरियन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ. भारत से इजरायल की डायरेक्ट फ्लाइट लगभग 6-7 घंटे की होती है. 

इंडिया दौरे से पहले कनाडा पीएम का बड़ा कदम, भारत के दुश्मन को देंगे ‘बेमुल्क’

 नई दिल्ली मुंबई आतंकी हमले का एक खूंखार किरदार अब बेमुल्क हो जाएगा. इस आतंकी का नाम तहव्वुर राणा है. मुंबई हमले की साजिश रहने वाला आतंकी तहव्वुर राणा कनाडा का निवासी है. लेकिन कनाडा ने अब पाकिस्तान में जन्मे इस टेररिस्ट की नागरिकता छीनने का फैसला किया है. कनाडा ने ये फैसला वहां के पीएम मार्क कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले लिया है.  तहव्वुर राणा पर 2008 के मुंबई आतंकी हमले में अहम भूमिका निभाने का आरोप है. 64 साल का आतंकी राणा पाकिस्तान में जन्मा कनाडाई नागरिक है और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साज़िश करने वालों में से एक डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाऊद गिलानी का करीबी साथी है. डेविड कोलमैन हेडली उर्फ ​​दाऊद गिलानी अमेरिकी नागरिक है.   ग्लोबल न्यूज़ को मिले डॉक्यूमेंट्स के हवाले से लिखा है कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने राणा को बताया है कि वे उसकी 2001 में मिली कनाडाई नागरिकता छीनने जा रहे हैं.  राणा 1997 में कनाडा आया था और बाद में उसे डेनमार्क के एक अखबार के स्टाफ पर हमला करने की साजिश रचने के लिए US में दोषी ठहराया गया था. 26/11 हमले का अहम किरदार  26/11 हमले का मास्टरमाइंड राणा ने मुंबई हमले का अहम किरदार था. इस हमले में 166 लोग मारे गए थे. आतंकी राणा को अप्रैल 2025 में यूनाइटेड स्टेट्स से भारत लाया गया था. नई दिल्ली पहुंचते ही उसे नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने गिरफ्तार कर लिया था.  रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अपने फैसले में इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिज़नशिप कनाडा (IRCC) ने लिखा कि राणा की सिटीजनशिप आतंकवाद की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए रद्द की जा रही है क्योंकि उसने अपने एप्लीकेशन फॉर्म में झूठ बोला था.  शिकागो में रहने की बात छिपाई IRCC ने एक रिपोर्ट में लिखा कि जब राणा ने 2000 में सिटीज़नशिप के लिए अप्लाई किया था, तो उसने दावा किया था कि वह पिछले चार साल से ओटावा और टोरंटो में रह रहा है, और देश से सिर्फ़ छह दिन बाहर रहा है. हालांकि, RCMP की जांच में पता चला कि उसने असल में लगभग पूरा समय शिकागो में बिताया था, जहां उसकी कई प्रॉपर्टी और बिज़नेस था, जिसमें एक इमिग्रेशन फर्म और एक किराने की दुकान भी शामिल थी. रद्द करने के फैसले में उस पर "एक गंभीर और जानबूझकर धोखा" देने का आरोप लगाया गया है. कहा गया है कि उसने "कनाडा के सिटीज़नशिप कानूनों का सम्मान नहीं किया" और इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे गलत तरीके से सिटीज़नशिप दे दी थी.  तुमने जानबूझकर कनाडा से अपनी गैर-मौजूदगी नहीं बताई IRCC ने 31 मई, 2024 को उसे लिखा, "तुम्हारा मामला ऐसा है जिसमें ऐसा लगता है कि तुमने नागरिकता के लिए एप्लीकेशन प्रोसेस के दौरान कनाडा में अपने रहने की जगह के बारे में गलत जानकारी दी, क्योंे कि तुमने जानबूझकर कनाडा से अपनी गैर-मौजूदगी नहीं बताई." "तुम्हारी गलत जानकारी की वजह से फैसला लेने वालों को लगा कि तुमने नागरिकता के लिए रहने की जरूरतें पूरी कर ली हैं, जबकि ऐसा लगता है कि ये सच नहीं था" कनाडा की फेडरल कोर्ट करेगी फैसला सरकार ने कहा कि वह उसके केस को फेडरल कोर्ट को भेज रही है, जिसका इस बारे में आखिरी फैसला होगा कि नागरिकता "गलत जानकारी या धोखाधड़ी या जानबूझकर ज़रूरी हालात छिपाकर" ली गई थी या नहीं.ग्लोबल रिपोर्ट में कहा गया है कि तहव्वुर राणा का केस लड़ रहे टोरंटो के एक इमिग्रेशन वकील ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है और कहा है कि यह गलत था और उनके अधिकारों का उल्लंघन था. पिछले हफ्ते फेडरल कोर्ट में नागरिकता रद्द करने से जुड़ी एक सुनवाई हुई थी. सरकारी वकीलों ने 19 दिसंबर को कोर्ट से केस से सेंसिटिव नेशनल सिक्योरिटी जानकारी छिपाने की इजाज़त मांगी थी. इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के एक स्पोक्सपर्सन ने ग्लोबल न्यूज़ को बताया कि गलत जानकारी के लिए नागरिकता रद्द करना "कनाडाई नागरिकता की इंटेग्रिटी बनाए रखने का एक ज़रूरी तरीका है." मैरी रोज़ सबेटर ने कहा कि यह पक्का करने के लिए कि प्रोसेस फेयर हो, फेडरल कोर्ट ऐसे मामलों में आखिरी फैसला लेता है.  

AI समिट में पीएम मोदी का संदेश: इंसान केंद्रित तकनीक जरूरी, दुनिया को दी अहम चेतावनी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई समिट से दुनिया को खास संदेश दिया है. एआई इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए भारत का MANAV विजन प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि एआई का विकास ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए, जहां इंसान केवल डेटा पॉइंट न बने. प्रधानमंत्री ने एआई के लोकतंत्रीकरण, समावेशन और ग्लोबल साउथ के सशक्तीकरण पर जोर दिया. MANAV विजन नैतिक व एथिकल सिस्टम, जवाबदेह गवर्नेंस और डेटा पर व्यक्ति के अधिकार की वकालत करता है. उन्होंने कहा कि एआई को ओपन, सुरक्षित और मानव केंद्रित बनाकर वैश्विक कल्याण का माध्यम बनाया जा सकता है. एआई ट्रांसफॉर्मेटिव पावर – पीएम मोदी  पीएम मोदी ने कहा, ‘आज मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर तेज भी है, गहरा भी है और व्यापक भी है. इसलिए हमें विजन भी बड़ा रखना है और जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी निभानी है. साथ ही हमें इस बात की भी चिंता करनी है कि आने वाली पीढ़ियों के हाथों में हम AI का क्या स्वरूप सौंप कर जाएंगे. इसलिए आज असली प्रश्न यह नहीं कि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या कर सकती है, प्रश्न यह है कि वर्तमान में हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ क्या करते हैं. ऐसे प्रश्न मानवता के सामने पहले भी आए हैं. सबसे सशक्त उदाहरण है न्यूक्लियर पावर. हमने उसका डिस्ट्रक्शन भी देखा है और सकारात्मक कंट्रीब्यूशन भी देखा है. एआई भी एक ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है.’ भारत दुनिया का बड़ा टेक टैलेंट पूल – पीएम मोदी पीएम मोदी ने एआई समिट में बोलते हुए कहा कि मानव इतिहास में हर कुछ शताब्दियों के बाद एक टर्निंग पॉइंट आता है और वो टर्निंग पॉइंट सभ्यता की दिशा रिसेट करता है. वहीं से विकास की रफ्तार बदलती है. सोचने, समझने और काम करने के परिणाम बदलते हैं. पीएम मोदी ने कहा, ‘किसी ने कल्पना नहीं की थी कि एक दिन पूरी दुनिया रियल टाइम में कनेक्ट होगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव इतिहास का ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेटिव पावर है. आज जो हम देख रहे हैं जो प्रेडक्ट कर रहे हैं वो इसके इंपैक्ट का सिर्फ प्रारंभिक संकेत हैं. एआई मशीनों को इंटेलिजेंट बना रही हैं, लेकिन उससे भी अधिक मानव सामर्थ्य को कई गुना बढ़ा रही है.’ भारत दुनिया का बड़ा टेक टैलेंट पूल – पीएम मोदी  एआई समिट में पीएम मोदी ने कई बातों का उल्‍लेख किया. उन्‍होंने कहा, ‘भारत दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी का देश है…सबसे बड़े टेक टैलेंट पूल का केंद्र है. भारत नई टेक्नोलॉजी बनाता भी है और उसे अभूतपूर्व तेजी से अपनाता भी है. इस समिट का भारत में होना भारत के साथ ही पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है. दुनिया के 100 से ज्यादा देशों का रिप्रेजेंटेशन दुनिया के कोने-कोने से यहां आए महानुभाव इसकी सफलता को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं. इसमें यंग जनरेशन की जो उपस्थिति हमने देखी है वो एक नया विश्वास पैदा करती है. नई टेक्नोलॉजी को लेकर कुछ लोगों में शुरुआती में संदेह होता है, लेकिन जिस तेजी और भरोसे के साथ दुनिया की युवा पीढ़ी एआई को स्वीकार कर रही है, उसकी ओनरशिप ले रही है और एआई का इस्तेमाल कर रही है वह अभूतपूर्व है.’ सुंदर पिचाई ने बताया भारत में इन्‍वेस्‍टमेंट का प्‍लान गूगल के सीईओ Sundar Pichai ने भारत दौरे के दौरान देश में तेज बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया हाइपर-प्रोग्रेस के दौर में प्रवेश कर रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को साहसिक रूप से अपनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि AI अरबों लोगों के जीवन में सुधार ला सकता है और दवा अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला रहा है. पिचाई ने बताया कि Google 15 अरब डॉलर के बुनियादी ढांचा निवेश के तहत भारत में फुल-स्टैक AI हब स्थापित करेगा. साथ ही कंपनी भारत की व्यस्त सड़कों के लिए Waymo तकनीक पर भी काम कर रही है. डिजिटल क्रांति केवल तकनीक नहीं, बल्कि सभ्यता का परिवर्तन – मैक्रों एआई समिट में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत की डिजिटल क्रांति की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि सभ्यता का परिवर्तन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि एक समय मुंबई का स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता नहीं खोल पाता था, लेकिन आज वही व्यक्ति मोबाइल से तुरंत डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहा है. मैक्रों ने भारत की 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान व्यवस्था, हर महीने 20 अरब लेनदेन करने वाली भुगतान प्रणाली और 50 करोड़ डिजिटल हेल्थ आईडी जारी करने वाली स्वास्थ्य संरचना को दुनिया के लिए मिसाल बताया.  पीएम मोदी पहुंचे भारत मंडपम, अश्विनी वैष्‍णव ने सेट किया टोन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एआई समिट को संबोधित करने के लिए भारत मंडपम पहुंच चुके हैं. उससे पहले भारत में आयोजित पहले ग्लोबल साउथ एआई समिट को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक आधारभूत तकनीक है, जो काम करने, सीखने और निर्णय लेने के तरीकों में व्यापक बदलाव ला रही है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे. समिट में 118 देशों की भागीदारी को ऐतिहासिक बताते हुए वैष्णव ने कहा कि भारत एआई स्टैक की पांचों परतों पर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य तकनीक का लोकतंत्रीकरण करना और इसे बड़े पैमाने पर सभी के लिए सुलभ बनाना है. पीएम मोदी की 4 देशों के प्रमुखों संग अहम बैठकें  एआई सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi आज चार देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में शामिल होंगे. ये बैठकें Bharat Mandapam में आयोजित होंगी. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, दोपहर 14:30 बजे पीएम मोदी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात करेंगे. इसके बाद 15:10 बजे नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री Dick Schoof, 15:45 बजे स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति Guy Parmelin और 16:25 बजे ग्रीस के प्रधानमंत्री Kyriakos Mitsotakis से वार्ता होगी. इससे पहले बुधवार 18 फरवरी को पीएम मोदी सात वैश्विक नेताओं से भी मुलाकात कर चुके हैं.