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ट्रंप ने कहा- मोदी मेरे अच्छे दोस्त, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता होगा शानदार

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है. उन्होंने पीएम मोदी को अपना शानदार दोस्त बताते हुए भारत और अमेरिका के बीच एक अच्छी ट्रेड डील की उम्मीद जताई है. स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान हमारी सहयोगी न्यूज पोर्टल मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी उनके शानदार दोस्त हैं. बहुत जल्द भारत के साथ अमेरिका की अच्छी डील होने जा रही है. ट्रंप ने कहा- ‘हम प्रधानमंत्री मोदी का सम्मान करते हैं, मोदी शानदार इंसान और मेरे अच्छे दोस्त हैं’. उन्होंने कहा वह कि ‘भारत के साथ जल्द अच्छी डील करने जा रहे हैं’. किन मुद्दों पर अटकी है बातचीत? वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के 56वें वार्षिक समिट के मौके पर ट्रंप ने मनी कंट्रोल के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. ट्रंप ने भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बेहद आशावादी बातें कही है. उनका यह बयान उस वक्त आया है जब भारत और अमेरिका के वार्ताकार इस डील पर अटके हुए हैं. दोनों देशों के वार्ताकार कई मसलों पर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. इसमें टैरिफ की दरों से लेकर बाजार तक पहुंच के मुद्दे शामिल हैं. इनके बीच ऊर्जा और कृषि से जुड़े मसलों पर असहमति है. अब तक कितने दौर की हुई बातचीत? भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की संभावना को लेकर पूछे गए सीधे सवाल पर उन्होंने सकारात्मक बातें कहीं. उन्होंने कहा कि हम एक अच्छी डील करने जा रहे हैं. भारत और अमेरिका ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पारस्परिक टैरिफ दरों को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यवस्था बनाने को लेकर अब तक छह दौर की बातचीत की है. दोनों पक्ष लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. इस संभावित ट्रेड डील पर बातचीत को बीते साल फरवरी में गति मिली थी. उस वक्त पीएम मोदी ने अमेरिका का दौरा किया था. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की थी. फिर दोनों शासनाध्यक्षों ने ‘मिशन 500’ की घोषणा की थी. इस मिशन का लक्ष्य दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर दोगुना करने का था. कब तक हो सकती है डील? इस रोडमैप के तहत ही भारत और अमेरिका ने तय किया था कि 2025 के बीतते-बीतते एक मल्टी-सेक्टर पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रेड डील को अमलीजामा पहना देंगे. लेकिन, यह समय बीत गया लेकिन डील नहीं हो पाई. हालांकि भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी अनंत नागेश्वरन ने संकेत दिया है कि मार्च 2026 तक दोनों देशों के बीच अंतरिम ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है. भारत के लिए कितना जरूरी है यह डील? भारत के लिए यह ट्रेड डील बहुत जरूरी हो गया है. क्योंकि भारत के 48.2 बिलियन डॉलर के निर्यात को भारी अमेरिकी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. भारत की कोशिश है कि इस विषम परिस्थिति में भी अमेरिका को भारतीय निर्यात में बढ़ोतरी बनी रहे. हालांकि, उच्च टैरिफ दरों का असर अन्य सेक्टर पर पड़ा है. पीएम मोदी ने बीते साल फरवरी में अमेरिका का दौरा किया था. उसके बाद दोनों देशों के बीच ट्रेड वार्ता शुरू हुई थी. दोनों देशों के बीच कितने का कारोबार? टैरिफ की चुनौतियों के बीच दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है. सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बीते साल अप्रैल से दिसंबर के बीच भारत से अमेरिका को निर्यात 9.8 फीसदी बढ़कर 65.9 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लिए बतौर एक ट्रेड पार्टनर अमेरिका की क्या भूमिका है. भारत और अमेरिका अब भी द्विपक्षीय ट्रेड समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं. अभी क्या है भारत का रुख? भारत के विदेश मंत्रालय ने नौ जनवरी को कहा था कि दोनों देशों के बीच करीब एक साल साल से बातचीत चल रही है. विदेश मंत्रालय ने कहा था- भारत और अमेरिका द्विपक्षीय ट्रेड वार्ता के लिए प्रतिबद्ध हैं. दोनों देशों के बीच बीते साल 13 फरवरी से बातचीत चल रही है. उसके बाद ही दोनों देशों ने एक संतुलित और दोनों को फायदा पहुंचाने वाले एक ट्रेड डील को लेकर कई दौर की वार्ता कर चुके हैं.

क्या है ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस और PM मोदी को इसके लिए कितना भुगतान करना होगा?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पत्र में इस पहल को मध्य पूर्व में शांति को पुख्ता करने और वैश्विक संघर्ष को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। भारत के लिए इस न्योते के मायने क्या हैं। जानते हैं अगर भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनता है तो क्या होगा। पहले समझें क्या है बोर्ड ऑफ पीस ट्रंप ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड की शुरुआत की है। वॉशिंगटन, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा और उसके आसपास शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह निकाय अन्य वैश्विक संघर्षों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। मूल रूप से, इस नए निकाय को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख और वित्तपोषण समन्वय का कार्य सौंपा जाना है। भारत के लिए क्या हैं मायने इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप के पास होगी। अगर भारत न्योता स्वीकार करता है, तो वह तीन सालों के लिए बोर्ड का हिस्सा बन जाएगा। हालांकि, अगर किसी देश को सदस्य बने रहना है, तो आर्थिक रूप से योगदान भी देना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हर देश को 1 बिलियन डॉलर देने होंगे। इसके साथ ही वह स्थाई सदस्य बन जाएगा और इस धन का इस्तेमाल बोर्ड की गतिविधियों में होगा। बहरहाल, शुरुआत के तीन सालों की सदस्यता के लिए किसी देश को आर्थिक योगदान नहीं देना होगा। शामिल देश गाजा में होने वाले अगले चरण के सीजफायर के बाद गतिविधियों पर नजर रखेंगे। इनमें नए फिलिस्तीनी समिति, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती, हमास से हथियार लेने की प्रक्रिया और गाजा का दोबारा निर्माण शामिल है। पीएम मोदी को भेजा पत्र ट्रंप ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में 'शांति बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शानदार प्रयास' में शामिल होने और साथ ही 'वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण' पर काम करने के लिए आमंत्रित करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। गोर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें ट्रंप का निमंत्रण मोदी तक पहुंचाने का सम्मान मिला है, जिसमें उन्हें ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है और यह निकाय 'गाजा में स्थायी शांति लाएगा'। राजदूत ने कहा कि बोर्ड स्थिरता और समृद्धि हासिल करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा। ट्रंप ने मोदी को लिखे पत्र में 29 सितंबर को गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा के साथ-साथ मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए अपनी 20-सूत्री रूपरेखा का भी उल्लेख किया। किन देशों को न्योता भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है। व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा बयान: भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठियों पर होगा कड़ा एक्शन

मालदा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदा टाउन से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पीएम ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर जोरदार हमला बोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "…देश के प्रधान सेवक के रूप में मैं बंगाल के लोगों की पूरी ईमानदारी से सेवा का प्रयास कर रहा हूं, मैं चाहता हूं कि बंगाल के हर बेघर के पास अपना पक्का घर हो… लेकिन ऐसा नहीं हो रहा, यहां की TMC सरकार बहुत ही निर्दयी है, केंद्र सरकार गरीबों के लिए जो पैसा भेजती है उसे यहां TMC के लोग लूट लेते हैं। TMC के लोग बंगाल के गरीबों के दुश्मन हैं, उन्हें आपकी तकलीफों की चिंता नहीं है, वे अपनी तिजोरी भरने में जुटे हैं।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "मैं चाहता हूं कि देश के बाकी राज्यों की तरह बंगाल के लोगों को भी 5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिले यहां आयुष्मान भारत योजना लागू हो लेकिन आज बंगाल देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं होने दी गई… ऐसी पत्थर दिल सरकार, ऐसी निर्मम सरकार, ऐसी सरकार की बंगाल से विदाई जरूरी है।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भाजपा ने पूरे देश में सुशासन और विकास का नया मॉडल विकसित किया है, आज पूरे देश में जनता इसे अपना आशीर्वाद दे रही है। कल ही महाराष्ट्र में शहरी निकाय चुनाव के नतीजे आए हैं जिसमें भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है, खासतौर पर महाराष्ट्र की राजधानी और दुनिया के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक BMC में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड विजय मिली है। कुछ दिन पहले तिरुवनंतपुरम में भी पहली बार भाजपा के मेयर बने हैं यानि जहां कभी भाजपा के लिए चुनाव जीतना असंभव माना जाता था वहां भी आज भाजपा को अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है, यह दिखाता है कि देश का वोटर, देश की जेन Z भाजपा के विकास मॉडल पर कितना विश्वास करती है। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि इस बार बंगाल के लोग भी भाजपा को भारी बहुमत से विजय बनाएंगे।" मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "आज हमारा देश 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। विकसित भारत के निर्माण के लिए पूर्वी भारत का विकास बहुत जरूरी है। पूर्वी भारत को दशकों तक नफरत की राजनीति करने वालों ने जकड़ कर रखा था। भाजपा ने इन राज्यों को नफरत की राजनीति करने वालों के चंगुल से मुक्त किया है… पूर्वी भारत के राज्यों का विश्वास अगर किसी के साथ है तो उस पार्टी का नाम है भाजपा।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "ओडिशा में पहली बार भाजपा ने सरकार बनाई है, त्रिपुरा ने भाजपा पर विश्वास किया है, असम ने भी बीते चुनाव में भाजपा को ही समर्थन दिया है और कुछ दिन पहले बिहार में भी एक बार फिर भाजपा-NDA की सरकार बनी है यानि बंगाल की हर दिशा में भाजपा के सुशासन की सरकार है। अब बंगाल में सुशासन की बारी है, इसलिए मैंने बिहार चुनाव की जीत के बाद ही कह दिया था कि अब बंगाल में भी विकास की गंगा बहेगी और भाजपा यह काम करके रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "कुछ देर पहले पश्चिम बंगाल से जुड़े कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है, नई रेल सेवाएं पश्चिम बंगाल को मिली है, इन परियोजनाओं से यहां के लोगों के लिए यात्रा आसान होगी और व्यापार-कारोबार में भी आसानी होगी…आज से भारत में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत हो रही है। यह नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रा को और आरामदायक बनाएगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "मालदा वह जगह है जहां प्राचीन ज्ञान की गूंज है, राजनीति और संस्कृति की चेतना है, मालदा बंगाल की समृद्धि का एक बड़ा केंद्र रहा है। मैं सबसे पहले बंगाल के महान सपूत सुवेंदु शेखर रॉय को नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही। आज भी मालदा अपने रेशम, लोक संगीत और बौद्धिक चेतना की वजह से जाना जाता है। 

‘कुर्सी जाने का डर था, लेकिन मैंने इसे दायित्व समझकर किया…’, बोले PM मोदी

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि युवाओं की तरह उन्हें भी जोखिम लेना पसंद है. पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को खतरे में डालकर निर्णय लिए हैं, क्योंकि ये फैसले देश हित में थे. दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्टार्ट अप डे पर युवाओं से संवाद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज हम स्टार्ट अप इंडिया के 10 साल पूरे होने का माइल स्टोन सेलिब्रेट कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं का फोकस देश की समस्याओं का समाधान करने पर है. सिर्फ 10 साल में स्टार्ट अप मीडिया मिशन एक क्रांति बन चुका है. भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इको सिस्टम है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जोखिम लेना जिंदगी की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है. मंथली सैलेरी से आगे सोचने वालों को अब न सिर्फ एक्सेप्ट किया जाता है बल्कि उन्हें रिस्पेक्ट भी मिलता है. पीएम मोदी ने कहा कि याद कीजिए आज से 10 साल पहले हालत क्या थे. व्यक्तिगत प्रयास औऱ इनोवेशन के लिए बहुत गुंजाइश ही नहीं थे. हमने इसे चुनौती दी. हमने युवाओं को खुला आसामान दिया. आज नतीजा हमारे सामने है. 10 साल में ये क्रांति बन चुका है. युवाओं के रिस्क लेने की क्षमता का तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं की तरह उन्हें भी रिस्क लेना पसंद है. जोखिम लेने की प्रवृति की सराहना करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "साथियो रिस्क टेकिंग पर मैं खास तौर पर जोर देता रहा हूं, क्योंकि ये मेरी भी पुरानी आदत है, जो काम कोई करने के लिए कोई तैयार नहीं होता, जो काम दशकों से पहले की सरकारों ने नहीं छूए, क्योंकि उनमें चुनाव हारने का, कुर्सी जाने का डर था. जिन कामों के लिए लोग आकर कहते थे. ये बहुत पॉलिटिकल रिस्क है. मैं उन कार्यों को अपना दायित्व समझकर जरूर करता था." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, "आप की तरह ही मेरा भी मानना है जो काम देश के लिए जरूरी है उसे किसी न किसी को तो करना ही होगा, किसी न किसी को रिस्क लेना ही होगा. नुकसान होगा तो मेरा होगा. लेकिन अगर फायदा होगा तो मेरे देश के करोड़ों परिवार का होगा."  पीएम ने कहा कि पिछले 10 सालों में ऐसा इको सिस्टम तैयार हुआ है जो इनोवेशन को बढ़ावा देता है.  भविष्य के उद्यमियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत में सवा सौ एक्टिव यनिकॉर्न है. जबकि 2014 में इनकी संख्या मात्र 4 थी. आज के स्टार्ट अप यूनिकॉर्न बन रहे हैं. ये बेहद अच्छी खबर है. पीएम मोदी ने कहा कि मेरे देश का नौजवान आज कंफर्ट जोन में अपनी जिंदगी गुजारने को तैयार नहीं है, उसे घिसी पिटी जिंदगी पसंद नहीं है .   

मोदी सरकार की नेम चेंज पॉलिसी: PMO को ‘सेवा तीर्थ’, राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’ बनाने की घोषणा

नई दिल्ली पिछले कुछ सालों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य और सेवा की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा का विषय रही है. अब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बदलाव यह हुआ है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके आसपास के प्रशासनिक ब्लॉक का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है.  यह नया परिसर पहले Executive Enclave के नाम से जाना जाता था और सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बनाया गया है. इसी नए भवन परिसर में प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय स्थित होंगे. नया नाम सेवा तीर्थ इसलिए चुना गया है क्योंकि यह सरकार के कामकाज में 'सेवा की भावना' को प्राथमिकता देने का प्रतीक है. यानी शासन केवल सत्ता और अधिकार के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और कल्याण के लिए है. चर्चा में रहा नाम परिवर्तन पिछले कुछ वर्षों में भारत में कई सड़कों, सरकारी इमारतों, संस्थानों और शहरों के नाम बदले गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इन बदलावों को गुलामी के दौर की पहचान से बाहर निकलने और भारतीय संस्कृति, लोक भावना और कर्तव्य की सोच को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है. राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ करने से लेकर योजना आयोग को नीति आयोग बनाने तक, देशभर में नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया लगातार चर्चा में रही है. सड़कें, सरकारी इमारतें, शहर या संस्थान कई जगहों पर पुराने नामों की जगह नए नाम रखे गए हैं. 1. राजपथ- कर्तव्य पथ (2022) दिल्ली का ऐतिहासिक राजपथ अब कर्तव्य पथ कहलाता है. यह बदलाव जनसेवा और कर्तव्य को प्राथमिकता देने के विचार से किया गया. 2. 7 रेस कोर्स रोड – लोक कल्याण मार्ग (2016) प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास अब लोक कल्याण मार्ग के नाम से जाना जाता है. यह नाम जनता के कल्याण का प्रतीक माना गया. 3. योजना आयोग – नीति आयोग (2015) आजादी के बाद बना योजना आयोग समाप्त कर नीति आयोग बनाया गया. इसका उद्देश्य राज्यों को साथ लेकर नीति बनाना है. 4. प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर- सेवातीर्थ (2025–26) पीएमओ के नए कॉम्प्लेक्स का नाम सेवातीर्थ (Seva Teerth) रखा गया. यह नाम सेवा भावना और सार्वजनिक जिम्मेदारी को दर्शाता है. 5. केंद्रीय सचिवालय- कर्तव्य भवन सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत नए सचिवालय भवनों को कर्तव्य भवन कहा गया. यह बदलाव सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य बोध को दर्शाने के लिए किया गया. 6. दलहौजी रोड- दारा शिकोह रोड ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर बनी सड़क का नाम बदलकर मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया. दारा शिकोह को भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक माना जाता है. 7. राजभवन- लोकभवन (कई राज्य) कई राज्यों में राज्यपाल के आवास राजभवन को लोकभवन कहा जाने लगा. यह बदलाव पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम जैसे राज्यों में लागू हुआ. 8. राज निवास- लोक निवास लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास किया गया. शहरों और स्थानों के बड़े नाम परिवर्तन 9. इलाहाबाद- प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को ध्यान में रखते हुए नाम बदला गया. 10. फैजाबाद जिला- अयोध्या जिला राम जन्मभूमि से जुड़ी धार्मिक पहचान को प्रमुखता दी गई. 11. मुगलसराय स्टेशन- पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन एक प्रमुख रेलवे स्टेशन का नाम बदला गया. 12. औरंगाबाद- संभाजीनगर (महाराष्ट्र) छत्रपति संभाजी महाराज के सम्मान में नाम बदला गया. 13. उस्मानाबाद- धाराशिव (महाराष्ट्र) प्राचीन भारतीय नाम को फिर से अपनाया गया. Indian Penal Code का भी बदला नाम भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) का नाम बदल चुका है, लेकिन यह सिर्फ नाम नहीं बदलकर पूरी तरह नई संहिता में बदल गया है. पुरानी Indian Penal Code (IPC), 1860 जिसे ब्रिटिश शासन के समय बनाया गया था और आजादी के बाद भी लागू रहा. अब 1 जुलाई 2024 से यह हटकर नई संहिता में बदल गया है. नया नाम क्या है? Indian Penal Code (IPC) की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS), 2023 लागू हो गया है. New criminal law (Bharatiya Nyaya Sanhita) 1 जुलाई 2024 से लागू हो गया है और इससे IPC पूरी तरह बदल गया है. सरकार का कहना है कि पुराने IPC को आधुनिक समय के अनुसार बदलने और भारत की पहचान के हिसाब से नया नाम देने की जरूरत थी.  सरकार का तर्क क्या है? केंद्र सरकार का कहना है कि देश में सड़कों, शहरों, सरकारी इमारतों और संस्थानों के नाम बदलने का निर्णय सिर्फ एक नाम बदलने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे तीन बड़े उद्देश्य हैं.  1.  गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति कई पुरानी सड़कों, भवनों और संस्थानों के नाम ब्रिटिश शास अधिकारी के नाम पर थे. जैसे राजपथ, डलहौजी रोड, कुछ रेलवे स्टेशन आदि. सरकार का कहना है कि इन नामों से भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय पहचान को ठीक तरह से नहीं दिखाया जाता था. नाम बदलकर अब ये स्वदेशी और भारतीय प्रतीकों से जुड़े हुए हैं. जैसे- राजपथ का नाम कर्तव्य पथ, डलहौजी रोड का नाम दारा शिकोह रोड. 2. भारतीय इतिहास और संस्कृति का सम्मान नाम बदलने का दूसरा उद्देश्य यह है कि इतिहास और संस्कृति को सही सम्मान मिले. पुराने नाम अक्सर उपनिवेशिक काल या विदेशी प्रभाव को दर्शाते थे. नए नाम ऐसे चुने गए हैं जो भारतीय संस्कृति, वीरता, लोककथा और राष्ट्रीय नेताओं को समर्पित हैं. जैसे-औरंगाबाद- छत्रपति संभाजीनगर, इलाहाबाद-प्रयागराज. 3. लोककल्याण और सेवा की भावना को बढ़ावा देना सिर्फ जगह का नाम बदलना ही नहीं, बल्कि सरकारी संस्थानों और भवनों के नाम बदलकर कर्तव्य और सेवा का संदेश दिया गया. जैसे 7 रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग, राजभवन  का नाम बदलकर लोक भवन, राज निवास का नाम बदलकर लोक निवास हो गया.

मोदी सरकार का तोहफा: पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% इजाफा

नई दिल्ली  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा घोषित पूर्व सैनिकों (ESM) और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी अब लागू कर दी गई है. ये जानकारी रक्षा मंत्रालय (MoD) ने शनिवार यानी 10 जनवरी को दी है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बढ़ी हुई सहायता केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा लागू की गई योजनाओं के तहत दी गई है. मंत्रालय ने कहा कि ये फैसला दिग्गजों की सर्विस और बलिदान का सम्मान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दिखाता है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्रालय (MoD) ने कहा, 'रक्षा मंत्रालय ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए वित्तीय सहायता में 100% की बढ़ोतरी को पूरी तरह लागू कर दिया है. इस निर्णय के तहत केंद्रीय सैनिक बोर्ड के माध्यम से विवाह अनुदान 1 लाख रुपये और शिक्षा अनुदान 2,000 रुपये प्रति माह हो गया है. ये सरकार की पूर्व सैनिकों के कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.' कब मिली थी मंजूरी? रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व सैनिकों (ESM) के लिए वित्तीय सहायता में 100% बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी. किन ग्रांट्स में बढ़ोतरी की गई है? मंत्रालय के मुताबिक, गरीबी भत्ता को हर लाभार्थी के लिए ₹4,000 से बढ़ाकर ₹8,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये 65 साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्ग और नॉन-पेंशनर ESM और उनकी विधवाओं को जिंदगी भर लगातार सहायता देगा, जिनकी कोई रेगुलर इनकम नहीं है. एजुकेशन ग्रांट को प्रति व्यक्ति ₹1,000 से बढ़ाकर ₹2,000 प्रति माह कर दिया गया है. ये दो आश्रित बच्चों (कक्षा I से ग्रेजुएशन तक) या दो साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने वाली विधवाओं के लिए है. शादी ग्रांट को प्रति लाभार्थी ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दिया गया है. ये ESM की दो बेटियों तक और विधवा के दोबारा शादी करने पर लागू होगा. वो भी उन शादियों के लिए जो इस आदेश के जारी होने के बाद हुई हैं. बलिदान का सम्मान, सरकार की प्रतिबद्धता इन योजनाओं को रक्षा मंत्री पूर्व सैनिक कल्याण कोष से फाइनेंस किया जाता है, ये सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष (AFFDF) का एक हिस्सा है. MoD के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए बताया कि इस फैसले से कम इनकम वाले ग्रुप के नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों, विधवाओं और आश्रितों के लिए सोशल सिक्योरिटी सेफ्टी नेट बेहतर होगा. जिससे दिग्गजों की सेवा और बलिदान का सम्मान करने की सरकार की प्रतिबद्धता फिर से पक्की होती है. 

सोमनाथ: आक्रमण से पुनर्निर्माण तक, 1000 साल की यात्रा पर प्रधानमंत्री मोदी की भावनात्मक कलम

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रांताओं द्वारा सोमनाथ मंदिर के बार-बार विध्वंस और इसके पुनर्निर्माण की कहानी पर एक भावुक ब्लॉग लिखा है. भारत के गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर को पहली बार 1026 ईस्वी में महमूद गजनी के हाथों विध्वंस का सामना करना पड़ा, जिसमें पवित्र ज्योतिर्लिंग को खंडित कर दिया था. इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी (1299), जफर खान (1395) और औरंगजेब (1706) जैसे मुगल शासकों ने भी हिंदू आस्था के इस प्राचीन केंद्र पर हमले किए. हर विध्वंस के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण के प्रयास किए गए. भारत की स्वतंत्रता के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर इसका आधुनिक स्वरूप निर्मित हुआ.  पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'सोमनाथ… ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है. भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है. ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है…सौराष्ट्रे सोमनाथं च…यानी ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है. ये इस पवित्र धाम की सभ्यतागत और आध्यात्मिक महत्ता का प्रतीक है.' उन्होंने आगे लिखा, 'शास्त्रों में ये भी कहा गया है: सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते। लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥ अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है. मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है. दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था. वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं. जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण किया था, इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया था. यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था.'   पीएम मोदी ने सोमनाथ पर हमले को मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक बताया. उन्होंने कहा कि इतनी बार विध्वंस का सामना करने के एक हजार वर्ष बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है. साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को उसके पूरे वैभव के साथ पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे. मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका. संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है. 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुआ वो समारोह ऐतिहासिक था, जब मंदिर के द्वार दर्शनों के लिए खोले गए थे. उन्होंने लिखा कि 1026 में एक हजार वर्ष पहले सोमनाथ पर हुए पहले आक्रमण, वहां के लोगों के साथ की गई क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है. जब इन्हें पढ़ा जाता है तो हृदय कांप उठता है. हर पंक्ति में क्रूरता के निशान मिलते हैं, ये ऐसा दुःख है जिसकी पीड़ा इतने समय बाद भी महसूस होती है. हम कल्पना कर सकते हैं कि इसका उस दौर में भारत पर और लोगों के मनोबल पर कितना गहरा प्रभाव पड़ा होगा. सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था. ये बड़ी संख्या में लोगों को अपनी ओर खींचता था. ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी. हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे.   पीएम मोदी ने लिखा कि सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है. ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है. 1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित किया. यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था. लेकिन हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया. और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया. उन्होंने अपने ब्लॉग में लिखा, 'महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका. सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, हमारा विश्वास और प्रबल हुआ. उसकी आत्मा लाखों श्रद्धालुओं की भीतर सांस लेती रही. साल 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है, कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है. वो आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है, वो आज भी हमारी शक्ति का पुंज है. ये हमारा सौभाग्य है कि हमने उस धरती पर जीवन पाया है, जिसने देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति को जन्म दिया. उन्होंने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें.'   प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे, वो अनुभव उन्हें भीतर तक आंदोलित कर गया. 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने अपनी भावना व्यक्त की. उन्होंने कहा, 'दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे. ये आपको किसी भी संख्या में पढ़ी गई पुस्तकों से अधिक हमारी सभ्यता की गहरी समझ देंगे.' इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है. ये बार बार नष्ट किए गए, और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए. … Read more

ट्रंप की मोदी को लेकर फिर से तारीफ, लेकिन क्या यह भारत के लिए नई परेशानी का संकेत है?

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा- ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है.’ डोनाल्ड ट्रंप की यह नई चेतावनी ऐसे समय आई है, जब पहले से वॉशिंगटन में रूस के साथ भारत के ऊर्जा व्यापार को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हालांकि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि रूस से तेल खरीदना उसकी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है लेकिन ट्रंप लगातार इस बात का दबाव बना रहे हैं. भारत पर पहले से ही 50 फीसदी टैरिफ लगा चुके ट्रंप ने इसे और भी बढ़ाने की धमकी दी है. क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप? डोनाल्ड ट्रंप का ये बयान उस फोन कॉल के कुछ ही हफ्तों बाद आया है, जिसमें ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपस में बातचीत की थी. तब दोनों नेताओं ने टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव के बावजूद भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया था. अब ट्रंप ने इस मामले पर फिर से भारत को धमकी दी है, हालांकि एक बार फिर उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ भी की. ट्रंप ने कहा – ‘वे मुझे खुश करना चाहते थे. पीएम मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, ऐसे में उन्हें मुझे खुश करना जरूरी लगा.’ हालांकि ट्रंप ने लगातार ये भी कहा कि भारत अगर रूस से तेल खरीदना कम नहीं करता, तो वे भारत पर जल्द ही टैरिफ बढ़ा सकता है. डोनाल्ड ट्रंप चाहते क्या हैं? भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच व्यापार विवाद सुलझाने के लिए नई बातचीत भी शुरू हुई. भारत-अमेरिका की ट्रे़ड डील पर बात इस साल की शुरुआत में शुरू हुई थी, लेकिन अमेरिका ने जब भारतीय सामान पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया, तो ये डील अटक गई थी. डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि भारत, रूस से तेल लेना बंद कर दे और ऐसा नहीं करने पर वे टैरिफ बढ़ाने की धकी फिर दे रहे हैं. अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले के बाद तेल का मुद्दा एक बार फिर उठा है. वेनेजुएला के पास करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा माना जाता है. अमेरिकी प्रतिबंधों और निवेश की कमी की वजह से इसका उत्पादन कम हो गया है, जिसे अब ट्रंप बढ़ाना चाहते हैं.

बीए की किताब में पीएम मोदी और सावरकर पर अध्याय, छात्रों को पढ़ाई जाएगी ‘मन की बात’

बड़ौदरा गुजरात की एक यूनिवर्सिटी में बीए (इंग्लिश) के स्टूडेंट अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर वाला चैप्टर पढ़ेंगे। महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) में नई शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किए गए बीए (इंग्लिश) माइनर कोर्स में पीएम मोदी के मन की बात को भी शामिल किया गया है। खबर के मुताबिक, एमएसयू में फैकल्टी ऑफ आर्ट्स ने बीए माइनर कोर्स की शुरुआत की है। इसमें एनालाइजिंग एंड अंडरस्टैडिंग नॉन-फिक्शनल राइटिंग्स शीर्षक के तहत पीएम मोदी की लिखी 'ज्योतिपुंज' और सावरकर की 'इनसाइड द एनिमी कैंप' को शामिल किया गया है। कोर्स को मौजूदा अकादमिक वर्ष 2025-26 से लागू किया गया है। नए सिलेबस में और क्या-क्या पढ़ाया जाएगा? पाठ्यक्रम के तहत मोदी की ‘ज्योतिपुंज’ को एक जीवनीपरक कृति के रूप में पढ़ाया जाएगा, जबकि सावरकर की ‘इनसाइड द एनिमी कैंप’ का आत्मकथात्मक रचना के तौर पर शामिल किया जाएगा। सिलेबस में श्री अरबिंदो, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और स्वामी विवेकानंद के लेखों को भी अपनाया गया है। इनके अलावा पीएम मोदी के रेडियो संबोधन 'मन की बात' के चुनिंदा एपिसोड्स को भी स्थान मिला है। यूनिवर्सिटी का क्या कहना है? एमएसयू के अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर हितेश डी. रविया ने टीओआई से कहा, 'यह पाठ्यक्रम अंग्रेजी अध्ययन को भारत की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने के लिए तैयार किया गया है। यह एक आत्मविश्वासी भारतीय दृष्टिकोण है जिसमें भारत के अपने विचारकों, नेताओं और विचारों को पढ़ाया जा रहा है, इसके बजाय कि सिर्फ औपनिवेशिक या यूरोपीय साहित्यिक परंपराओं तक सीमित रहा जाए।'  

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित है, राष्ट्र प्रेरणा स्थल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल, सभी तैयारियां पूरी  डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित है, राष्ट्र प्रेरणा स्थल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र नायकों की कांस्य प्रतिमाओं का करेंगे लोकार्पण, 2 लाख से अधिक लोग होंगे साक्षी राष्ट्रीय चिन्हों और मालाओं से सजाया गया है राष्ट्र प्रेरणा स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक डायवर्जन और पार्किंग की पूरी तैयारी      लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बन कर तैयार भव्य 'राष्ट्र प्रेरणा स्थल' को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे। यह स्थल भारतीय राष्ट्रवाद की त्रयी कहे जाने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं. दीन दयाल उपाध्याय और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों और अमूल्य योगदान को जन-जन तक पहुंचाने का अनुपम प्रयास है। इस संबंध में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस पर  भव्य उद्घाटन समारोह के लिए भव्य तैयारियां की गई हैं। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों समेत, 2 लाख से अधिक लोग इस अवसर के साक्षी बनेंगे। सुरक्षा व्यवस्था, पार्किंग, ट्रैफिक डायवर्जन के साथ उद्घाटन समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की भी सभी तैयारियों को मूर्त रूप दिया जा चुका है। प्रदेश की राजधानी प्रधानमंत्री की उपस्थिति में इस ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनेगी।  राष्ट्र नायकों की मूर्तियों के लोकार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करेंगे प्रधानमंत्री राष्ट्र प्रेरणा स्थल के भव्य उद्घाटन समारोह के आयोजन के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण और पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राष्ट्र प्रेरणा स्थल के विशाल प्रांगण में फूलों से कमल की आकृति की रंगोली बनाई जा रही हैं। साथ ही प्रेरणा स्थल की बाहरी दीवारों पर कला संस्कृति विभाग की ओर से राष्ट्रीय सांस्कृतिक चिन्हों का अलंकरण किया गया है। राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं के अनावरण का कार्यक्रम 2 बजे अपराह्न शुरू होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट से प्रेरणा स्थल पहुंच कर सबसे पहले राष्ट्र नायकों की मूर्तियों के लोकार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। उसके बाद राष्ट्र नायकों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को समर्पित संग्रहालय का उद्घाटन कर, उसका अवलोकन करेंगे। संग्रहालय के ओरिएंटेशन रूम में राष्ट्र नायकों के जीवन पर आधारित वीडियो एवी का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री जनसंबोधन करेंगे, इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी उपस्थित रहेंगे। भावी पीढ़ियों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करेगा राष्ट्र प्रेरणा स्थल   लखनऊ के वसंत कुंज में राष्ट्र प्रेरणा स्थल को कमल की आकृति में बनाया गया है। प्रेरणा स्थल में राष्ट्रवाद के शिखर पुरुषों डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पं दीन दयाल उपाध्याय और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है। जिनका निर्माण विश्व विख्यात मूर्तिकार राम सुतार और मंटू राम आर्ट क्रिएशंस ने किया है। प्रतिमाओं को फेसेड लाइटिंग और प्रोजेक्शन मैपिंग से सजाया गया है। साथ ही परिसर में राष्ट्र नायकों को समर्पित संग्रहालय का निर्माण भी किया गया है। संग्रहालय की इंटरप्रिटेशन वॉल पर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के म्यूरल आर्ट से देश की राष्ट्रीयता की यात्रा को दर्शाया गया है। संग्रहालय के कोर्टयार्ड में राष्ट्रीय भावना की प्रतीक भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। राष्ट्र नायकों को समर्पित गैलरियां उनके जीवन, विचारधारा और संघर्षों को जीवंत बनाती हैं। साथ ही राष्ट्र प्रेरणा स्थल परिसर में सिंथेटिक ट्रैक, मेडिटेशन सेंटर, विपश्यना केंद्र, योग केंद्र, हेलीपैड और कैफेटेरिया का भी निर्माण किया गया है। इसके अलावा परिसर में 3000 की क्षमता वाले एम्फीथिएटर और लगभग 2 लाख की क्षमता के रैली स्थल का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल ऐतिहासिक स्मृति का बिंदु है, बल्कि भावी पीढ़ियों में राष्ट्रीयता की भावना का संचार करेगा।