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भारत की 8% विकास दर, पीएम मोदी ने इनोवेशन संचालित नीतियों को श्रेय दिया

अम्मान   भारत-जॉर्डन बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ बढ़ रहा है और देश की वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक है। यह उत्पादकता संचालित शासन और इनोवेशन संचालित नीतियों का नतीजा है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में भारत में जॉर्डन के निवेशकों के लिए अवसर के नए दरवाजे खुले रहे हैं और यहां के निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। आज हेल्थकेयर केवल एक सेक्टर नहीं रह गया है, बल्कि एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है। अगर भारतीय कंपनियां जॉर्डन में दवाएं और मेडिकल उपकरण बनाती हैं, तो इससे जॉर्डन के लोगों को तो फायदा होगी, बल्कि जॉर्डन अफ्रीका और पश्चिम एशिया के भी एक भरोसेमंद हब बन सकता है। निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में भारत में जॉर्डन के निवेशकों के लिए अवसर के नए दरवाजे खुले रहे हैं और यहां के निवेशक भारत में निवेश कर अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं। भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन के बीच फार्मा और मेडिकल उपकरण क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। आज हेल्थकेयर केवल एक सेक्टर नहीं रह गया है, बल्कि एक रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है। अगर भारतीय कंपनियां जॉर्डन में दवाएं और मेडिकल उपकरण बनाती हैं, तो इससे जॉर्डन के लोगों को तो फायदा होगी, बल्कि जॉर्डन अफ्रीका और पश्चिम एशिया के भी एक भरोसेमंद हब बन सकता है। आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती रिन्यूएबल एनर्जी में देश में हुए विकास पर पीएम मोदी ने कहा कि आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है, क्योंकि क्लीन एनर्जी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज में भारत एक बड़े निवेशक के रूप में काम रहा है। जॉर्डन के पास भी इस सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं, जिसे हम अनलॉक कर सकते हैं। साथ ही कहा कि इस प्रकार ऑटोमोबाइल और ईवी में भी कई संभावनाएं हैं और भारत किफायती ईवी और दोपहिया एवं सीएनजी मोबिलिटी में शीर्ष देशों में एक है और हमें ज्यादा से ज्यादा काम मिलकर करना चाहिए। रिन्यूएबल एनर्जी में देश में हुए विकास पर पीएम मोदी ने कहा कि आज की दुनिया ग्रीन ग्रोथ के बिना आगे नहीं बढ़ सकती है, क्योंकि क्लीन एनर्जी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज में भारत एक बड़े निवेशक के रूप में काम रहा है। जॉर्डन के पास भी इस सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं, जिसे हम अनलॉक कर सकते हैं। साथ ही कहा कि इस प्रकार ऑटोमोबाइल और ईवी में भी कई संभावनाएं हैं और भारत किफायती ईवी और दोपहिया एवं सीएनजी मोबिलिटी में शीर्ष देशों में एक है और हमें ज्यादा से ज्यादा काम मिलकर करना चाहिए। दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन दोनों देश अपने कल्चर, अपनी हेरिटेज पर बहुत गर्व करते हैं। कल्चर और हेरिटेज टूरिज्म के लिए दोनों देशों में बहुत स्कोप है। दोनों देशों के इन्वेस्टर्स को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत में इतनी सारी फिल्में बनती हैं, उन फिल्मों की शूटिंग जॉर्डन में हो सकती है। ज्वाइंट फिल्म फेस्टिवल हों, इसके लिए भी जरूरी प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कही यह बात दोनों देश की मजबूत विरासत पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और जॉर्डन दोनों देश अपने कल्चर, अपनी हेरिटेज पर बहुत गर्व करते हैं। कल्चर और हेरिटेज टूरिज्म के लिए दोनों देशों में बहुत स्कोप है। दोनों देशों के इन्वेस्टर्स को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत में इतनी सारी फिल्में बनती हैं, उन फिल्मों की शूटिंग जॉर्डन में हो सकती है। ज्वाइंट फिल्म फेस्टिवल हों, इसके लिए भी जरूरी प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। (इनपुट-एजेंसी) 

संसद हमले में जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों को PM मोदी समेत नेताओं ने याद किया, दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे नेता शनिवार को 2001 के पार्लियामेंट हमले की बरसी पर उस हमले में जान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित किए.इसके साथ ही देशभर में अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले सुरक्षाकर्मियों की याद में श्रद्धांजलि सभाएं की गईं और उनको याद किया गया.इससे पहले दिन में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संसद हमले में अपनी जान देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा. एक पोस्ट में, CM योगी आदित्यनाथ ने कहा, "'लोकतंत्र का मंदिर', भारतीय संसद भवन, साल 2001 में आज ही के दिन एक कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला देखा था, जो देश की संप्रभुता, गरिमा और लोगों की शक्ति पर एक क्रूर हमला था. संसद और देश की गरिमा की रक्षा के लिए इस दिल दहला देने वाली घटना में अपनी जान देने वाले अमर वीरों को विनम्र श्रद्धांजलि. देश हमेशा उनका आभारी रहेगा. जय हिंद!" केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस भयानक आतंकवादी हमले के दौरान भारतीय संसद की रक्षा करते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.     गडकरी ने कहा, "13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर आतंकवादी हमले के दौरान लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा के लिए अपनी जान देने वाले बहादुरों को सलाम. देश की रक्षा के लिए उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा."  सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स ने भी 2001 के पार्लियामेंट टेरर अटैक की बरसी पर 88 बटालियन की कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी को श्रद्धांजलि दी और उनके साहस और बलिदान को याद किया.     CRPF के X पोस्ट में लिखा था, "बहादुरों को श्रद्धांजलि… 13 दिसंबर 2001 को, दिल्ली में पार्लियामेंट पर हुए टेररिस्ट अटैक के दौरान, 88 बटालियन, #CRPF की कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी ने भारी फायरिंग के बीच टेररिस्ट का पीछा करके और अपने साथी जवानों को उनकी एक्टिविटीज के बारे में लगातार जानकारी देकर अदम्य साहस और बेमिसाल बहादुरी का परिचय दिया." पोस्ट में कहा गया, "उनके हिम्मत वाले कामों की वजह से, सभी 5 आतंकवादी मारे गए. इस घटना के दौरान, उन्हें गंभीर चोटें आईं और आखिरकार उन्होंने ड्यूटी की वेदी पर अपनी जान दे दी. उनके अदम्य साहस और असाधारण बहादुरी के लिए, उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया. बहादुर 'बलिदानी' को #CRPF का हमेशा सलाम." 13 दिसंबर, 2001 को, आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के पांच भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने नई दिल्ली में संसद परिसर में धावा बोल दिया और अंधाधुंध गोलियां चलाईं.     इस हमले में सुरक्षाकर्मियों और एक आम नागरिक समेत करीब 14 लोग मारे गए थे. यह आतंकी हमला संसद की कार्यवाही स्थगित होने के करीब 40 मिनट बाद हुआ था, और इमारत में करीब 100 सदस्य मौजूद थे. शुक्रवार को लोकसभा ने पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस, दिल्ली पुलिस और CRPF के उन बहादुर जवानों को दिल से श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 13 दिसंबर, 2001 को हुए आतंकवादी हमले के दौरान पार्लियामेंट की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. स्पीकर ओम बिरला ने श्रद्धांजलि देने में सदन का नेतृत्व किया. सदन ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में डटे रहकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के अपने पक्के इरादे को दोहराया.

प्रधानमंत्री ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर दी श्रद्धांजलि

नईदिल्ली   मोदी ने कहा कि उनकी कविताओं ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी, जिसने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना जागृत की।  प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि  भारती ने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया और तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका योगदान अतुलनीय है।  मोदी ने ‘एक्स’ पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा: “महाकवि सुब्रमण्यम भारती को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। उनके काव्यों ने साहस का संचार किया और उनके विचारों में अनगिनत लोगों के मन पर अमिट छाप छोड़ने की शक्ति थी। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया। उन्होंने एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में कार्य किया। तमिल साहित्य को समृद्ध बनाने में भी उनका योगदान अतुलनीय है।”

ओमान ने PAK के टुकड़े करने में भारत का साथ दिया था, अब पीएम मोदी का वहां दौरा, क्या होगा अगला कदम?

नई दिल्ली इतिहास के पन्ने पलटें तो साल था 1971. भारत और पाकिस्तान के बीच जंग छिड़ी थी. पाकिस्तान के दो टुकड़े होने वाले थे और एक नया देश बांग्लादेश नक्शे पर उभर रहा था. उस वक्त दुनिया का कूटनीतिक माहौल भारत के खिलाफ था. अमेरिका अपना सातवां बेड़ा भेज रहा था और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के लगभग सभी ताकतवर देश सऊदी अरब, ईरान, जॉर्डन मजहब के नाम पर पाकिस्तान के साथ खड़े थे. लेकिन उस घने अंधेरे में एक चिराग था जो भारत के लिए जल रहा था. वह देश था ओमान. ओमान वह मुस्लिम देश था, जिसने अरब और इस्लामिक जगत के भारी दबाव को दरकिनार करते हुए, यूएन से लेकर हर वैश्विक मंच पर भारत का खुलकर समर्थन किया था. जब सब पाकिस्तान को बचाने में लगे थे, ओमान भारत की सच्चाई के साथ खड़ा था. अगले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी ओमान की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. 17-18 दिसंबर का यह दौरा सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने का नहीं, बल्कि 54 साल पुरानी उस वफादारी को नमन करने का है. 1971 की वो कहानी, जो अक्सर नहीं सुनाई जाती 1971 की जंग के दौरान पाकिस्तान ने खुद को ‘इस्लाम के किले’ के रूप में पेश किया था. अरब देशों पर भारी दबाव था कि वे भारत का बायकॉट करें. उस वक्त ओमान के सुल्तान कबूस बिन सईद ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया. उन्होंने साफ कर दिया कि ओमान, भारत के रणनीतिक हितों के खिलाफ नहीं जाएगा. सऊदी अरब और जॉर्डन जैसे देश सुल्तान कबूस से बेहद खफा हो गए थे. लेकिन सुल्तान अड़े रहे. उन्होंने न सिर्फ भारत का कूटनीतिक समर्थन किया, बल्कि अपनी बंदरगाहों और सुविधाओं के दरवाजे भी भारत के लिए खुले रखे. अब जब पीएम मोदी ओमान जा रहे हैं, तो वह एक तरह से उस दोस्ती का कर्ज चुकाने जा रहे हैं. ओमान भारत के लिए सिर्फ एक ‘ट्रेडिंग पार्टनर’ नहीं, बल्कि ‘ऑल वेदर फ्रेंड’ यानी हर मौसम का साथी है. ‘दिल’ के बाद अब ‘डील’ की बारी 1971 में ओमान ने दिल से साथ दिया था, 2025 में वह भारत की इकॉनमी को रफ्तार देने जा रहा है. पीएम मोदी के इस दौरे पर भारत-ओमान फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर होना लगभग तय है. इस समझौते के बाद भारतीय सामान जैसे कपड़ा, जेम्स, ज्वेलरी, मशीनरी बिना किसी टैक्स के ओमान के बाजारों में बिक सकेगा. इससे चीन को झटका लगना तय है. ओमान रणनीतिक रूप से बहुत अहम जगह यानी अरब सागर और फारस की खाड़ी के मुहाने पर है. भारत वहां दुकम (Duqm) पोर्ट पर पहले से ही मौजूदगी दर्ज करा चुका है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए भारत वहां चीन के प्रभाव को कम करेगा और अपनी जड़ें जमाएगा. ‘पुणे’ वाला कनेक्शन और सुल्तान से याराना     कूटनीति में निजी रिश्तों का बहुत मोल होता है. ओमान के मौजूदा सुल्तान हैथम बिन तारिक के रगों में भारत से जुड़ी यादें हैं. सुल्तान हैथम के पिता ने भारत के पुणे शहर में पढ़ाई की थी. ओमान का शाही परिवार भारत को अपना दूसरा घर मानता है.     पीएम मोदी और सुल्तान हैथम के बीच गजब का तालमेल है. पिछले साल जब सुल्तान भारत आए थे, तो यह उनकी पहली राजकीय यात्रा थी. अब पीएम मोदी का वहां जाना उस दोस्ती को और गहरा करेगा.     ओमान में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं. पीएम मोदी जब उनसे मिलेंगे, तो यह संदेश जाएगा कि भारत अपने नागरिकों और अपने पुराने दोस्तों, दोनों का ख्याल रखता है. जॉर्डन और इथियोपिया भी जाएंगे पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ ओमान तक सीमित नहीं है. वे जॉर्डन और इथियोपिया भी जा रहे हैं. यह तीनों देश मुस्लिम आबादी के लिहाज से भारत के लिए बहुत मायने रखते हैं. जॉर्डन (97% मुस्लिम): तब और अब: 1971 में जॉर्डन पाकिस्तान के साथ था, लेकिन आज 2025 में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला पीएम मोदी के करीबी दोस्त हैं. किंग अब्दुल्ला, जो पैगंबर साहब के वंशज माने जाते हैं, उनका पीएम मोदी का स्वागत करना इस्लामिक दुनिया में भारत की बदलती छवि का सबूत है. यह दौरा फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के संतुलन को दिखाएगा. इथियोपिया (34% मुस्लिम): पहला दौरा: यह किसी भारतीय पीएम का पहला इथियोपिया दौरा होगा. वहां 4 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम आबादी है. भारत वहां अफ्रीका में अपनी पैठ बढ़ाने जा रहा है. 1971 की नींव पर 2025 का महल पीएम मोदी का यह दौरा बताता है कि विदेश नीति में ‘मेमोरी’ कितनी अहम होती है. भारत ने नहीं भुलाया कि जब दुनिया खिलाफ थी, तब ओमान साथ था. ज जब ओमान के साथ ऐतिहासिक FTA होने जा रहा है, तो यह 1971 के उस बीज का फल है जिसे सुल्तान कबूस ने बोया था. ओमान में ‘इकॉनमी’ की बात होगी (FTA के जरिए), लेकिन उसकी बुनियाद में ‘दिल’ की वो बात होगी जो 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े होते वक्त ओमान ने भारत के कान में कही थी- हम तुम्हारे साथ हैं. यह दौरा उसी भरोसे को रीन्यू करने का है.

PM मोदी ने कहा- जनता की परेशानी के लिए कोई भी नियम या कानून नहीं होना चाहिए

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की फ्लाइट्स कैंसिल या देरी होने का सिलसिला आठवें दिन भी जारी है. इससे हवाई सफर करने वाले यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस बीच इंडिगो संकट पर बड़ा बयान देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि नियम-कानून बनाने का मकसद सिस्टम को बेहतर करना होना चाहिए, न कि आम नागरिकों को परेशान करना. पीएम मोदी ने एनडीए सांसदों की बैठक के दौरान इंडिगो संकट पर ये बात कही. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार को एनडीए के सांसदों की बैठक में पीएम के बयान का हवाला देते हुए यह जानकारी शेयर की है. एनडीए संसदीय दल की बैठक के बाद रिजिजू ने कहा, “…प्रधानमंत्री मोदी ने सभी NDA सांसदों को देश के लिए और अपने संसदीय क्षेत्र के लिए, राज्य के लिए क्या-क्या करना है, उसके लिए मार्गदर्शन दिया है…प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों की जिंदगी को सुधारने के लिए सुधारों पर बहुत जोर दिया है…देश के आम लोगों की जिंदगी को आसान और आरामदायक बनाने के लिए सुधार, हर क्षेत्र में सुधार होने चाहिए…प्रधानमंत्री मोदी ने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि कोई भी ऐसा कानून, नियम नहीं होना चाहिए, जो बिना मतलब नागरिकों को परेशान करें…कानून लोगों पर बोझ नहीं बल्कि उनकी सुविधा के लिए होना चाहिए…प्रधानमंत्री मोदी ने तीसरे कार्यकाल में देश को और तेजी से आगे ले जाने के लिए और तेजी से काम करने के लिए कहा है…बहुत अच्छी बैठक हुई है…” IndiGo पर सरकार की कड़ी कार्रवाई, फ्लाइट्स में 5% कटौती का लिया फैसला इंडिगो संकट के बीच देश के एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए ने बड़ा एक्शन लिया है. डीजीसीए ने नोटिस जारी कर कहा है इंडिगो ने अपने शेड्यूल को अच्छे से चलाने की काबिलियत नहीं दिखाई है. इसे सभी सेक्टर में शेड्यूल 5 फीसदी कम करने का निर्देश दिया गया है. इंडिगो को 10 दिसंबर को शाम 5 बजे तक बदला हुआ शेड्यूल जमा करना होगा. एक्शन में MoCA, बड़े एयरपोर्ट्स का जायजा लेंगे अधिकारी इंडिगो की चल रही ऑपरेशनल दिक्कतों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है. मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी, डायरेक्टर और ज्वाइंट सेक्रेटरी जैसे बड़े अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे जल्द ही देश के बड़े एयरपोर्ट पर जाकर जमीनी हकीकत का जायजा लें. ये अधिकारी मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, पुणे, गुवाहाटी, गोवा और तिरुवनंतपुरम जैसे एयरपोर्ट्स का दौरा करेंगे.

पुतिन की यात्रा समाप्त, जेलेंस्की के आगमन से पहले भारत की कूटनीति सक्रिय

 नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सफल दिल्ली दौरे के बाद भारत ने कूटनीति की दूसरी सधी हुई चाल चली है. भारत अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को दिल्ली में होस्ट करने की योजना पर काम कर रहा है. कूटनीतिक हलकों में इसे भारत की विदेश नीति का बैलेंसिंग एक्ट माना जा रहा है. माना जा रहा है कि जनवरी 2026 में जेलेंस्की का दिल्ली दौरा हो सकता है, हालांकि अभी इस दौरे की तारीख तय नहीं हो सकी है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत कई हफ्तों से यूक्रेन के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क में है. भारत की य़े कोशिश राष्ट्रपति पुतिन के नई दिल्ली दौरे से पहले से ही चल रही है. इस बाबत भारतीय और यूक्रेनी अधिकारियों के बीच कई हफ़्तों से बातचीत चल रही है, और पुतिन के भारत आने से पहले ही नई दिल्ली ज़ेलेंस्की के ऑफिस के संपर्क में थी.  जेलेंस्की की यात्रा से भारत को रूस-यूक्रेन युद्ध के दोनों पक्षों के साथ जुड़े रहने की कोशिशों को बल मिलेगा. भारत इस नीति पर कई महीनों से चल रही है. यही वजह है कि जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब मॉस्को गए और पुतिन से मिले, तो इसके एक महीने बाद ही अगस्त में पीएम मोदी ने यूक्रेन का दौरा किया था.  यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के प्रस्तावित दौरे का समय और दायरा कई बातों पर निर्भर करेगा. इसमें सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति योजना कैसे आगे बढ़ती है और युद्ध के मैदान में क्या होता है.  यूक्रेन की घरेलू राजनीति, जहां ज़ेलेंस्की की सरकार अभी एक बड़े भ्रष्टाचार घोटाले में फंसी होने के कारण दबाव में है. उसका भी इस प्रस्तावित दौरे पर असर पड़ सकता है.  खास बात यह है कि यूक्रेन का राष्ट्रपति अबतक सिर्फ तीन बार भारत आया है. ये मौके थे. 1992, 2002 और 2012.  पुतिन की यात्रा पर यूरोप की कड़ी नजर रही है. कई यूरोपीय दूतों ने भारत से मॉस्को पर युद्ध खत्म करने का दबाव डालने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का आग्रह किया है. भारत ने लगातार कहा है कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही रास्ता है.  इस बार भी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत तटस्थ नहीं है, भारत शांति के पक्ष में है. यूक्रेन युद्ध पर भारत की नीति काफी पहले से रही है.  फरवरी 2022 में यूक्रेन- रूस के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भारत पुतिन और ज़ेलेंस्की दोनों के संपर्क में रहा है. मोदी ने ज़ेलेंस्की से कम से कम आठ बार फोन पर बात की है, दोनों नेता अलग अलग प्लेटफॉर्म पर कम से कम चार बार मिल चुके हैं.  अगस्त 2024 में यूक्रेन दौरे पर गए पीएम मोदी ने ज़ेलेंस्की से कहा था, “हम युद्ध से दूर रहे हैं, लेकिन हम न्यूट्रल नहीं हैं, हम शांति के पक्ष में हैं. हम बुद्ध और गांधी की धरती से शांति का संदेश लेकर आए हैं.” भारत से हजारों सैकड़ों किलोमीटर दूर चल रहे यूक्रेन-रूस की लड़ाई की सीधा असर भारत की इकोनॉमी पर भी पड़ा है.  भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी पेनाल्टी टैरिफ लगा दिया है. 

‘गलतफहमी नहीं होनी चाहिए’—पुतिन के दौरे पर थरूर ने दिया चीन और अमेरिका को सख्त संदेश

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बृहस्पतिवार शाम दो दिवसीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। पुतिन करीब चार साल बाद भारत दौरे पर आए हैं। इस अवसर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-रूस संबंधों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा, रक्षा और सामरिक क्षेत्रों में रूस भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है। थरूर ने कहा कि पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक राजनीति अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ऐसे में भारत के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंधों को और मजबूत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- यह बहुत महत्वपूर्ण दौरा है। रूस के साथ हमारा रिश्ता काफी पुराना है और हाल के वर्षों में इसकी अहमियत और बढ़ी है। तेल और गैस के क्षेत्र में रूस हमारे लिए बड़ी आपूर्ति का स्रोत रहा है। वहीं रक्षा सहयोग का महत्व हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आया, जब S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान से दागी गई कई मिसाइलों से दिल्ली सहित हमारे शहरों की सुरक्षा की। ‘भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बरकरार’ शशि थरूर ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है और रूस के साथ मजबूत संबंध किसी अन्य देश- चाहे अमेरिका हो या चीन, किसी के साथ संबंधों को प्रभावित नहीं करते। उन्होंने साफ शब्दों में कहा- भारत स्वतंत्र रूप से अपने हितों और साझेदारियों का चुनाव करता है। हमारी संप्रभु स्वायत्तता हमारी नीति की आधारशिला है। किसी को गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि रूस के साथ हमारी करीबी किसी अन्य राष्ट्र के साथ संबंधों के खिलाफ जाएगी। दौरे से संभावित समझौते और नई दिशा आज यानी 5 दिसंबर को राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता करेंगे, जिसमें रक्षा उत्पादन, व्यापार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, संस्कृति और मानवीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौते होने की संभावना है। थरूर ने उम्मीद जताई कि यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने का अवसर सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि अगर इस दौरे में कोई समझौते होते हैं, तो वे इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करेंगे। पूर्व राजनयिकों ने भी बताई साझेदारी की अहमियत पूर्व भारतीय राजनयिक अरुण सिंह ने भी भारत-रूस संबंधों की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दशकों से मॉस्को ने राजनीतिक और रक्षा क्षेत्र में भारत का समर्थन किया है और बदलते वैश्विक परिदृश्य में भी रूस भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच नई साझेदारियों और संतुलित कूटनीति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। रूसी राष्ट्रपति 5 दिसंबर तक भारत में रहेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण वार्ताएं और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट

पुतिन–मोदी मुलाकात: वेपन, मिसाइल और S-500 पर क्या बड़ी घोषणाएँ हो सकती हैं? पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट पुतिन–मोदी मीटिंग: न्यूक्लियर रिएक्टर से आर्थिक साझेदारी तक कई अहम मुद्दों पर बात होगी  नई दिल्ली    आज भारत और रूस के बीच 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हो रही है. यह मुलाकात सिर्फ दोस्ती की नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में बड़े सौदों की उम्मीद जगाने वाली है. हथियार, मिसाइलें, फाइटर जेट्स और खासतौर पर रूसी Su-57 फाइटर जेट तथा S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर डिफेंस कंपनियों और विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं.  अमेरिका के दबाव के बावजूद भारत रूस के साथ अपनी पुरानी साझेदारी को मजबूत करने को तैयार है. आइए, जानते हैं कि इस सम्मेलन से क्या-क्या उम्मीदें हैं. सम्मेलन का बैकग्राउंड: पुरानी दोस्ती, नई चुनौतियां रूसी राष्ट्रपति पुतिन 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचे, जहां पीएम मोदी ने खुद एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. यह चार साल बाद पुतिन का भारत दौरा है. सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा, ऊर्जा और व्यापार पर है. रूस भारत का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक, 2024 में भारत के 36 फीसदी हथियार रूस से आए थे. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान रूसी S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी ड्रोन्स को 95 फीसदी नष्ट कर दिया था, जिससे भारत को इसकी ताकत का पता चला. अब भारत और पांच और S-400 यूनिट्स खरीदने की योजना बना रहा है, साथ ही उन्नत S-500 पर बातचीत हो सकती है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि रूस के साथ हमारी रक्षा साझेदारी लंबे समय से चली आ रही है. इस सम्मेलन से सहयोग गहरा होगा. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी पुष्टि की कि S-400 और Su-57 पर चर्चा होगी.  मुख्य ऐलान जिन पर नजरें टिकीं डिफेंस सेक्टर की कंपनियां जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इन ऐलानों से फायदा उठाने को बेताब हैं. यहां हैं प्रमुख मुद्दे… Su-57 फाइटर जेट्स: भारत की पांचवीं पीढ़ी की ताकत रूस का Su-57 (नाटो नाम: फेलॉन) एक स्टील्थ फाइटर जेट है, जो अमेरिकी F-35 का मुकाबला कर सकता है. इसमें सुपरक्रूज, एडवांस्ड रडार और लंबी दूरी की मिसाइलें लगी हैं. भारत को कम से कम दो स्क्वाड्रन (लगभग 84 जेट्स) चाहिए, ताकि वायुसेना की कमी पूरी हो सके. कीमत: प्रति जेट करीब 30 करोड़ डॉलर. रूस 100 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है, ताकि भारत में ही इन्हें बनाया जा सके. HAL नासिक में प्रोडक्शन हो सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं- यह भारत के स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट का स्टॉप-गैप होगा. क्रेमलिन ने कहा कि यह दुनिया का सबसे अच्छा फाइटर है. हम भारत के साथ जॉइंट प्रोडक्शन चाहते हैं. अगर डील हो गई, तो यह 74 अरब डॉलर का सौदा हो सकता है. S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम: हाइपरसोनिक हमलों का जवाब S-500 'प्रोमिथियस' S-400 से भी आगे है. यह हाइपरसोनिक मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और लोअर ऑर्बिट के सैटेलाइट्स को नष्ट कर सकता है. रेंज: 600 किलोमीटर. भारत को 5.4 अरब डॉलर का सौदा चाहिए, जिसमें 60 फीसदी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो. रूस की अल्माज-एंटे कंपनी के साथ जॉइंट प्रोडक्शन की बात चल रही है. अगर यह ऐलान हुआ, तो भारत की एयर डिफेंस सबसे मजबूत हो जाएगी. बीईएल जैसी कंपनियां इससे फायदा उठाएंगी. अन्य हथियार और अपग्रेड: ब्रह्मोस से लेकर टैंक्स तक       S-400 अपग्रेड: बाकी डिलीवरी पर बात, साथ ही 280 अतिरिक्त मिसाइलें (3 अरब डॉलर का डील).       ब्रह्मोस मिसाइल: रेंज बढ़ाकर 800 किलोमीटर, नई जनरेशन ब्रह्मोस-एनजी. दो और रेजिमेंट्स.       Su-30MKI अपग्रेड: 100 जेट्स का बड़ा ओवरहॉल, 7.4 अरब डॉलर. HAL के साथ रूस पार्टनरशिप.       R-37 मिसाइलें: 200 किलोमीटर रेंज वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें.       अन्य: स्प्रूट लाइट टैंक्स, पंतसिर सिस्टम, तलवार क्लास फ्रिगेट्स (ब्रह्मोस से लैस) और अकुला क्लास सबमरीन की डिलीवरी (2028 तक).  ये सौदे मेक इन इंडिया को बढ़ावा देंगे, क्योंकि ज्यादातर में लोकल प्रोडक्शन होगा.  डिफेंस सेक्टर पर असर: शेयर बाजार में उछाल की उम्मीद ये ऐलान डिफेंस स्टॉक्स को बूस्ट देंगे. HAL, BDL, मझगांव डॉक और एलएंडटी जैसी कंपनियों के शेयर पहले से ही 5-10 फीसदी ऊपर हैं. विशेषज्ञों का कहना है, अगर Su-57 और S-500 पर डील हुई, तो सेक्टर में 20-30 फीसदी ग्रोथ हो सकती है. भारत की वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ 30 हैं. ये डील्स कमी पूरी करेंगी. अमेरिका का दबाव, भारत की आजादी अमेरिका ने CAATSA सैंक्शंस की चेतावनी दी है, लेकिन भारत ने कहा है कि वह अपनी जरूरतें खुद तय करेगा. पुतिन ने कहा कि मोदी ने अमेरिकी दबाव नहीं माना. यह डील चीन और पाकिस्तान को भी संदेश देगी. ऊर्जा क्षेत्र में भी बात होगी: रूस भारत को सस्ता तेल देगा. रुपे-मीर पेमेंट सिस्टम को लिंक किया जाएगा.  मजबूत साझेदारी का नया अध्याय पुतिन-मोदी मुलाकात भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई देगी. यह सिर्फ हथियारों का सौदा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप है. विशेषज्ञ कहते हैं कि ये ऐलान दक्षिण एशिया की सैन्य संतुलन बदल देंगे. पुतिन का संदेश: भारत संग गर्मजोशी और अमेरिका को पावर शिफ्ट का संकेत — जानें 10 मुख्य पॉइंट रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली में हैं. भारत के दौरे में पुतिन कई अहम समझौतों पर पीएम मोदी के साथ बात करेंगे. जिसमें दुनिया के बदलते पावर बैलेंस, यूरोप और अमेरिका के साथ तनाव और भारत के साथ मजबूत संबंधों के फ्यूचर ब्लूप्रिंट सबपर पुतिन ने खुलकर बात की. रूस की राजधानी मॉस्को के क्रेमलिन में  इंटरव्यू में व्लादिमीर पुतिन ने हर एक सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. दुनिया के लिए सख्त संदेश और भारतीयों को दोस्ती का पैगाम देते पुतिन ने इस इंटरव्यू में ये 10 मैसेज दिए. बदलते वैश्विक समीकरण और भारत का महत्व 1. दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और वक्त के साथ उसके बदलने की रफ्तार तेज होती जा रही है. ये बात सब जानते हैं. नये समीकरण और नये पावर सेंटर बन रहे हैं. इन समीकरणों पर प्रभाव डालने वाली शक्तियां भी समय के साथ बदल रही हैं. ऐसे हालात में … Read more

इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)

अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय मूल्यों और संस्कारों पर आधारित शिक्षण संस्थान की स्थापना करना, सच्ची राष्ट्रसेवा है- लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   इमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना, वास्तविक देशभक्ति है – ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)     महाराणा प्रताप शिक्षण परिषद के संस्थापक-सप्ताह उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूपी एडीआरएफ के उपाध्यक्ष, ले.जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.)   गोरखपुर गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी जी (से.नि.) शामिल हुए। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने छात्र-छात्राओं को महाराणा प्रताप के अनुकरणीय जीवन से प्रेरणा लेने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए अनुशासन, साहस, समर्पण, समानता और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं बल्कि इमानदारी से अपने कर्तव्य का पालन करना, पर्यावरण की रक्षा, लोक कल्याण और समाज का एक अच्छा नागरिक बनना भी  वास्तविक देशभक्ति है। उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के माध्यम से आप सफलता के इन मूल्यों का संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।  महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 के उद्घाटन कार्यक्रम का आयोजन गोरखपुर में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) ने अंग्रजों के शासन और  स्वतंत्रा संघर्ष के दौरान भारतीय संस्कारों और शिक्षा मूल्यों पर आधारित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना और उसके निरंतर राष्ट्रसेवा में योगदान देने की सरहाहना की एवं शिक्षा परिषद के संस्थापकों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब देश में अग्रेंजी शासन और अंग्रेजियत का बोलबाला था ऐसे में 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी और 1932 में महाराणा प्रतापा शिक्षा परिषद की गोरखपुर में नींव रखना भारतीयता और राष्ट्र की सच्ची सेवा थी। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं शिक्षा परिषद के सभी शिक्षकों राष्ट्रसेवा के इस संकल्प को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।   उद्घाटन अवसर पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा ही महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है किस प्रकार उन्होंने अकेले, अन्य राजपूत राजाओं के सहयोग के बिना भी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की अवज्ञा की और आत्मबलिदान, त्याग और समर्पण के मूल्यों की अमर गाथा हम सबके लिए ये प्रस्तुत की। यही कारण था कि 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज हो या 19वीं, 20वीं शताब्दी के राष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनसे प्रेरणा प्राप्त की। महाराणा प्रताप के जीवन से हमें अनुशासन, ईमानदारी, समर्पण और प्रतिबद्धता के जिन मूल्यों की शिक्षा मिलती है वो ही आपको जीवन में सफल बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि महाराणा प्रताप शिक्षण संस्थान में आप इन मूल्यों और संस्कारों को प्राप्त कर रहे हैं।  अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि देशभक्ति केवल देश की सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं, इमानदारी से अपने कर्यव्यों का निर्वहन करने, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनान सच्ची देशभक्ति हैं। अपने जीवन के व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सेना भी ऐसे नौजवानों को चुनती है जो जीवन में अनुशासन, समर्पण और कर्तव्यपालन को सर्वोपरी मानते हैं। अनुशासन ही सफलात की सीढ़ी है। उन्होंने शिक्षा परिषद की प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं को भागीदारी करने के लिए भी प्रेरित किया और कहा की हार और जीत निर्णायक नहीं है प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करना सबसे जरूरी है। असफलता से निराश होने की जरूरत नहीं है, असफलता ही हमें सफलता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन का प्रसंग और परिणाम की चिंता किए बगैर कर्व्यपालन करने के भागवत् गीता के श्लोक – कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन् को अनुकरणीय बताया। साथ ही उन्होंने तेजी से बदल रही तकनीकि, एआई, रोबोटिक्स के प्रति भी छात्रों को सजग रहने को कहा। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में केवल एक मजबूत चरित्र और सही तकनीक की समझ ही सफलता दिलाएगी। लेकिन हमें ये याद रखना है कि विजय मैदान में नहीं मन पर होती है, शक्ति हथियार में नहीं संस्कार में होती है।

पुतिन दिल्ली में करेंगे बड़ी डील, पश्चिम से टकराव पर चर्चा, पांच लेयर सुरक्षा के बीच भारत पहुंचे राष्ट्रपति

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा आज से शुरू हो रही है और दिल्ली इस हाई-प्रोफाइल विजिट के लिए पूरी तरह तैयार है. यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, इसलिए कूटनीतिक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक स्तर पर बेहद सख्त व्यवस्थाएं की गई हैं. शहर के कई हिस्सों में उनके स्वागत के लिए फ्लेक्स बोर्ड और रूसी झंडे लगा दिए गए हैं, जबकि ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कवच पहले से लागू कर दिए गए हैं. पुतिन की यात्रा के कारण ट्रैफिक डायवर्जन पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे. इस दौरान एनएच–S, धौला कुआं और दिल्ली कैंट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्राइवेट डिनर पर होस्ट करेंगे, जिसके कारण सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग और शांति पथ के आसपास भी वाहनों की आवाजाही धीमी रहेगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन दावा किया है कि ट्रैफिक को लंबी अवधि तक ब्लॉक नहीं रखा जाएगा. शुक्रवार को हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे क्योंकि पुतिन का पूरा दिन लगातार कार्यक्रमों से भरा है. सुबह वह राजघाट जाएंगे, इसके बाद हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठकें होंगी. दोपहर में भारत मंडपम् में कार्यक्रम तय है, जबकि शाम को राष्ट्रपति भवन में स्टेट बैंक्वेट का आयोजन होगा. इन गतिविधियों के चलते राजघाट, आईटीओ, रिंग रोड, तिलक मार्ग, इंडिया गेट, भैरो रोड, मथुरा रोड, मंडी हाउस और दिल्ली गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक रुक-रुक कर चलता रह सकता है. जरूरत पड़ने पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है. पुतिन की सिक्योरिटी कैसी होगी? इधर सुरक्षा इंतजाम भी अपनी चरमसीमा पर हैं. पुतिन की हर विदेश यात्रा की तरह इस दौरे में भी उनकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर कवच तैयार किया गया है. पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में NSG कमांडो, स्नाइपर्स, जैमर, ड्रोन सर्विलांस और AI आधारित निगरानी तकनीक तैनात की गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. 40 से ज्यादा रूसी सुरक्षा अधिकारी दिल्ली पहुंचकर NSG और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काफिले की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान एसपीजी का विशेष सुरक्षा घेरा भी सक्रिय रहेगा. इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है. शुक्रवार को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी है. राजधानी में तैयारियों की रफ्तार और सुरक्षा का स्तर बताता है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. रूस को 10 लाख मजदूरों की जरूरत, पुतिन दिल्‍ली में करेंगे बड़ी डील इस दौरे पर पुतिन भारत के साथ मजदूरों को लेकर इजरायल की तरह से ही बड़ी डील कर सकते हैं। दोनों देश सामाजिक और मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर सहयोग करेंगे। रूस की योजना है कि 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती की जाए। इसमें भारत भी शामिल है। रूस लेबर म‍िनिस्‍ट्री का मानना है कि साल 2030 तक देश में मजदूरों की यह कमी 31 लाख तक पहुंच सकती है। विश्‍लेषकों का कहना है कि रूसी के हजारों युवा यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके हैं और देश के फिर से निर्माण के लिए अब लाखों लोगों की जरूरत है। वह भी तब जब रूस में आबादी कम हो रही है और लोग बच्‍चे कम पैदा कर रहे हैं। रूसी राष्‍ट्रपति ने देश में बच्‍चे पैदा करने पर भारी आर्थिक सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया है। रूस में अब तक मध्‍य एशिया के देशों से लाखों रूसी बोलने वाले लोग काम करने जाते रहे हैं लेकिन इससे मास्‍को को सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है। यही वजह है कि रूस अब 7 लाख से ज्‍यादा मध्‍य एशिया के विदेशी मजदूरों से मुक्ति पाना चाहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब तेज हुई जब मास्‍को में मार्च 2024 में आतंकी हमला हुआ। पश्चिम से टकराव गहरा होगा? PM Modi से इन मुद्दों पर होगी चर्चा अमेरिका का दबाव और रूस के साथ मजबूरी यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिकी उत्पादों व रक्षा उपकरणों के लिए अपने बाजार खोले. वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के लिए सस्ता तेल, हथियारों की सप्लाई और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा स्रोत बना हुआ है. GTRI के मुताबिक, “पुतिन की यह यात्रा शीत युद्ध की याद में की जा रही कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि यह जोखिम, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सीधी बातचीत है. यह किसी एक पक्ष को चुनने की नहीं, बल्कि टूटती वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की रणनीति है.” भारत-रूस रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती भारत और रूस की दोस्ती की जड़ें शीत युद्ध के दौर तक फैली हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया और USS एंटरप्राइज भेजा. तब सोवियत संघ ने भारत को हथियार, कूटनीतिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया. 1962 के चीन युद्ध के बाद भी रूस भारत के साथ खड़ा रहा. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना रहा. आज भी भारत के 60 से 70% सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी तकनीक पर आधारित हैं। तीन स्तंभों पर टिका भारत-रूस रिश्ता GTRI के अनुसार, आज भारत-रूस संबंध तीन मुख्य स्तंभों पर टिके हैं— 1- ऊर्जा (Energy)     रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है.     2024 में रूस से भारत की कुल तेल खरीद का हिस्सा 37% से ज्यादा रहा.     2021 में जहां भारत ने रूस से सिर्फ 2.3 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.     वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 52.7 अरब डॉलर पहुंच गया.     यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ते दामों पर एशियाई बाजारों की ओर मुड़ गया, जिससे भारत को भारी फायदा हुआ.  2- रक्षा (Defence) … Read more