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CM डॉ. यादव आज करेंगे ‘सदानीरा समागम’ का शुभारंभ, भारत भवन में होगा आयोजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को भारत भवन में सदानीरा समागम का करेंगे शुभारंभ जल संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगा राष्ट्रीय विमर्श भारत भवन में 27 मई से 2 जून तक चलेगा सात दिवसीय समागम देश-विदेश के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और कलाकार होंगे शामिल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, चित्रकला कार्यशाला और जल-केंद्रित प्रदर्शनियां होंगी मुख्य आकर्षण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बुधवार 27 मई को भारत भवन में 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक उत्सव “सदानीरा समागम” का शुभारंभ करेंगे। वीर भारत न्यास द्वारा जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति, पंचमहाभूतों तथा सतत विकास के विषयों पर केंद्रित यह गरिमामयी आयोजन 2 जून तक चलेगा, जिसमें देश-विदेश के विद्वान, पर्यावरण विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और कलाकार सहभागिता करेंगे। उद्घाटन समारोह में खेल एवं युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर और संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी उपस्थित रहेंगे। वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस सात दिवसीय समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूत-जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि-पर आधारित विभिन्न वैचारिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण और पारंपरिक ज्ञान पर देश-विदेश के विशेषज्ञ गहराई से मंथन करेंगे। इस राष्ट्रीय विमर्श में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), आईआईएम बोधगया जैसी देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभिन्न कॉर्पोरेट घरानों के सीएसआर प्रमुख भी शामिल होकर अपने विचार साझा करेंगे। समागम में वैचारिक मंथन के साथ प्रतिदिन सायंकाल सांस्कृतिक और रचनात्मक आयोजनों की धूम रहेगी, जिसमें नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस दौरान भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, 'गोवर्धन लीला' और 'गंगा यात्रा' की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही 'जल, जंगल, जीवन' पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के नामचीन कलाकार हिस्सा लेंगे। आयोजन स्थल पर म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, बरकतुल्ला विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय के सहयोग से जलचर जीवन, मध्यप्रदेश के जल गंगा संवर्धन अभियान, लघु चित्रों में जल और भूगर्भीय जल स्रोतों पर आधारित चार विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। कार्यक्रम में जल और संस्कृति पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा, जिनमें वीर भारत न्यास और मैपकॉस्ट द्वारा प्रकाशित 'अंतर्जली यात्रा', 'पुरोवाक्', प्रेमशंकर शुक्ल की 'आत्मा की घाटी में पानी का संगीत' और राजेश्वर त्रिवेदी की 'जल, संस्कृति और स्थापत्य' शामिल हैं। इस विशाल आयोजन को सफल बनाने में भारत भवन, मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय, जनसंपर्क विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, दत्तोपन्त ठेंगड़ी शोध संस्थान, यूनाइटेड कॉन्शसनेस, सेज, एलएनसीटी और सैम ग्लोबल यूनिवर्सिटी सहित केन्द्रीय भूजल बोर्ड, नर्मदा समग्र जैसी अनेक संस्थाएं और जिला प्रशासन भोपाल सहयोगी के रूप में अपना सक्रिय योगदान देंंंगे।  

मध्यप्रदेश सरकार पर बढ़ता कर्ज, मई के आखिरी हफ्ते में ₹2800 करोड़ की नई उधारी

भोपाल  सरकार प्रदेश में जारी विकास योजनाओं के लिए 2,800 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। वित्त विभाग के बजट निदेशक भास्कर लक्षकार द्वारा इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया गया है। सरकार यह लोन दो अलग-अलग अवधियों और ब्याज दरों के आधार पर आरबीआई के जरिए जुटाएगी। इसमें सरकार 7.64 फीसदी ब्याज दर वाले मध्य प्रदेश एसडीएस 2034 बॉण्ड को दोबारा जारी कर रही है। इसकी अवधि 8 वर्ष की होगी और 1600 करोड़ का यह कर्ज 29 अप्रैल 2034 को वापस चुकाया जाएगा । 1200 करोड़ रुपये के दूसरे ऋण के लिए 7.83 फीसदी ब्याज दर वाले मध्य प्रदेश एसडीएस 2048 बॉण्ड भी दोबारा जारी किए जा रहे हैं । कर्ज की अवधि 22 वर्ष की होगी और इसके भुगतान की तिथि 29 अप्रैल 2048 तय की गई है। दोनों कर्जी पर ब्याज का भुगतान हर वर्ष 29 अक्टूबर और 29 अप्रैल को छमाही आधार पर होगा । वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य सरकार यह कर्ज मध्यप्रदेश राज्य विकास ऋण के तहत आरबीआई के जरिए बॉन्ड जारी कर ले रही है। पहली राशि 1600 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.64 प्रतिशत ब्याज दर तय की गई है। वहीं दूसरी राशि 1200 करोड़ रुपए की होगी, जिस पर 7.83 प्रतिशत ब्याज देना होगा। दोनों कर्जों की अदायगी सरकार छह माही किस्तों में अप्रैल और अक्टूबर में करेगी। 2034 और 2048 तक के लिए कर्ज सरकार द्वारा लिया जा रहा पहला कर्ज वर्ष 2034 तक की अवधि के लिए रहेगा, जबकि दूसरा कर्ज 2048 तक यानी 22 वर्षों की अवधि के लिए लिया गया है। दोनों ऋणों के लिए सिक्योरिटी की नीलामी आरबीआई द्वारा कराई जाएगी और भुगतान प्रक्रिया 27 मई 2026 तक पूरी की जाएगी। इस बार अप्रैल से ही कर्ज लेने लगी सरकार प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष में अप्रैल से ही कर्ज लेना शुरू कर दिया था। इससे पहले के वर्षों में आमतौर पर मई से कर्ज उठाने की प्रक्रिया शुरू होती थी। अप्रैल में सरकार ने दो बार चार किस्तों में 4600 करोड़ रुपए का ऋण लिया था। इसके बाद मई में पहले 1800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया और अब 2800 करोड़ रुपए का नया ऋण उठाया जा रहा है। उत्पादक विकास योजनाओं में खर्च होगी राशि सरकार का कहना है कि बॉन्ड से प्राप्त राशि का उपयोग राज्य की उत्पादक विकास योजनाओं, सिंचाई परियोजनाओं, ऊर्जा, कृषि और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। राजपत्र में जारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में मध्यप्रदेश की राजस्व प्राप्ति लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए और राजस्व व्यय भी लगभग 2.79 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। आज होगी बॉण्ड की नीलामी मंगलवार को इन सरकारी बॉण्ड्स की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन सिस्टम (ई-कुबेर) पर इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में आयोजित की जाएगी। नीलामी के बाद रिजल्ट की घोषणा उसी दिन होगी और इसके अगले दिन सफल बोली लगाने वालों को राशि का भुगतान बैंकिंग समय में कैश, बैंकर्स चेक या डिमांड ड्राफ्ट के जरिए करना होगा। 31 मार्च 2026 की स्थिति में प्रदेश सरकार पर कुल कर्ज भार 4,88,714.17 करोड़ रुपये है। इसमें बाजार से लिया गया कर्ज 3,33,278.21 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार से मिले ऋण और एडवांस के 81,152.31 करोड़ रुपये भी शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर CM डॉ. यादव का बधाई संदेश

प्रधानमंत्री मोदी के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई प्रदेशवासियों की ओर से किया प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को राष्ट्र सेवा के सफल 12 वर्ष पूर्ण करने पर हार्दिक बधाई दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देशवासियों की आशा के प्रतीक प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विगत 12 वर्षों में भारत ने विकास के साथ आत्मनिर्भरता, सुरक्षा, सांस्कृतिक गौरव, डिजिटल क्रांति और वैश्विक नेतृत्व के नए आयाम स्थापित किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया से गांव-गरीब तक तकनीक की पहुंच सुनिश्चित हुई है। अंत्योदय की भावना के साथ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचा है। राष्ट्र प्रथम की भावना से GYAN मंत्र में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के उत्थान तक, सीमाओं की सुरक्षा से नक्सल व आतंक मुक्त भारत के निर्णायक परिणाम तक, भारत ने अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज भारत वैश्विक मंचों पर निर्णायक नेतृत्व कर रहा है और दुनिया भारत को विश्वास, विकास व वैभव के प्रतीक के रूप में देख रही है। 'विकसित भारत @ 2047' के संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व राष्ट्र को निरंतर नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में प्रधानमंत्री मोदी का इस अवसर पर समस्त प्रदेशवासियों की ओर से अभिनंदन किया है।  

गंगा दशहरा पर CM डॉ. यादव ने किया श्रमदान, देवी सागर तालाब सफाई अभियान में लिया हिस्सा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ  धार  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।  

राज्य स्तरीय समारोह में 850 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, CM ने शिक्षा पर दिया बड़ा संदेश

भोपाल  भोपाल के रवींद्र भवन में सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड का राज्य स्तरीय स्कॉलरशिप वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा ही युवाओं को आगे बढ़ाने और समाज की तस्वीर बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। कार्यक्रम में पढ़ो-पढ़ाओ, राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा से ही समाज मजबूत होगा और युवा देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगे।  पहली बार राज्य स्तर पर दिया गया स्कॉलरशिप वितरण वक्फ बोर्ड के गठन के बाद पहली बार प्रदेश स्तर पर इतने बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बताया गया कि बोर्ड अब तक 1452 बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ चुका है। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल हैं, जिन्होंने आर्थिक तंगी या सामाजिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी। समारोह में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड, कमेटी इंजामिया औकाफ-ए-अम्मा, औकाफ-ए-खास भोपाल और ताजुल मसाजिद से जुड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे। स्कॉलरशिप सिर्फ मदद नहीं, सपनों की उड़ान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को पूरा करने का जरिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ने की अपील की। सीएम ने कहा कि शिक्षा इंसान को नई दिशा देती है और समाज को मजबूत बनाती है। उन्होंने रहीम के दोहे का उल्लेख करते हुए शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया। सरकार भी देगी बराबर की सहायता राशि मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिन विद्यार्थियों को वक्फ बोर्ड की ओर से स्कॉलरशिप दी गई है, उन्हें राज्य सरकार भी उतनी ही सहायता राशि उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वक्फ संपत्तियों से बढ़ेगी शिक्षा की मदद मुख्यमंत्री ने कहा कि नए वक्फ कानून लागू होने के बाद व्यवस्थाओं में सुधार आया है। वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है और अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई भी चल रही है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और सुधार के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि इन संपत्तियों की आय बढ़ाकर गरीब और जरूरतमंद बच्चों, खासकर बेटियों की शिक्षा में इस्तेमाल किया जाए। माफियाओं से संपत्तियां छुड़ाकर समाजहित में करेंगे उपयोग सीएम ने कहा कि वक्फ की जमीनों और संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा रहा है। इन संपत्तियों से मिलने वाली आय को शिक्षा, स्कॉलरशिप और समाज कल्याण के कार्यों में लगाया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को लाभ मिल सके।  

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाना ऐतिहासिक कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने का कार्य ऐतिहासिक : मुख्यमंत्री डॉ.यादव मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड, देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड वक्फ सुधारों के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम में 849 बेटे-बेटियों को मिली स्कॉलरशिप मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पूर्व राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम और भारत-पाक युद्ध में शौर्य के प्रतीक कैप्टन हमीद का किया स्मरण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड विभिन्न नवाचारों से देश में सबसे आगे है। प्रदेश में वक्फ बोर्ड के माध्यम से वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन की गई, इसके लिए भारत सरकार से स्कॉच अवार्ड मिला। यह पारदर्शी व्यवस्था पूरे देश के लिए उदाहरण बनी है। म.प्र वक्फ बोर्ड देश का श्रेष्ठ वक्फ बोर्ड है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को रवीन्द्र भवन भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के स्कॉलरशिप वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। रहीम और रसखान ने दिया समरसता का संदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा देश रहीम और रसखान की मेलजोल की संस्कृति में विश्वास रखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की जनता कानून में भरोसा रखती है, चाहे किसी भी समुदाय की हो। इसलिए भारत पूरे विश्व में आदर्श है। कश्मीर की जनता ने पड़ोसी दरिंदों को खदेड़ा, यह भारत की आदर्श संस्कृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब जम्मू कश्मीर में पड़ोसी राष्ट्र से दरिन्दे आए तब वहां की जनता ने उनका सीधा विरोध किया और उन्हें खदेड़ दिया। हमारे देश की जनता बुद्धि और विवेक का उपयोग करती है। भारत की यह सुदृढ़ परम्परा और आदर्श संस्कृति है। प्रधानमंत्री की पहल और मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने नए वक्फ कानून के माध्यम से सुशासन और पारदर्शिता की व्यवस्था लागू करवाई है। अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। मध्यप्रदेश इस कार्य में अग्रणी है। वक्फ सुधार के कार्य ऐतिहासिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक वक्फ सुधार में इतना बड़ा कार्य नहीं हुआ है। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड अभिनंदन का पात्र है। वक्फ संपत्तियों का संरक्षण और सुधार हो रहा है। नया वक्फ भवन भी बनाने की पहल हुई है, जिसका नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया। पोर्टल से पारदर्शिता आई मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब पारदर्शी कार्य प्रणाली लागू है। उम्मीद पोर्टल के माध्यम से सभी वक्फ संपत्तियां ऑनलाइन हैं और रिकॉर्ड में दर्ज हुई हैं। वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण हटाने का कार्य बोर्ड द्वारा किया जा रहा है जो प्रशंसनीय है। अब वक्फ संपत्तियां सुरक्षित, वक्फ बोर्ड के माध्यम से आय वृद्धि का अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए वक्फ कानून से अनेक वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा संभव हुई है। मध्यप्रदेश में अतिक्रमण को रोकने में सफलता मिली है। बोर्ड को आय वृद्धि का अवसर भी मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने नए वक्फ कानूनों से श्रेष्ठ कार्य को प्रोत्साहित किया है। जहां राज्यों के वक्फ बोर्ड की आय बढ़ रही है, वहीं सच्चाई के साथ कार्य करने का आनंद भी मिल रहा है। बेटे बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें सरकार देगी पूरा सहयोग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बेटे-बेटियां शिक्षा के माध्यम से प्रोत्साहित हों और भविष्य के सपनों को साकार करें। मध्यप्रदेश सरकार इनका पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न तरह के दान से भी निर्धन बच्चों को पढ़ाने का कार्य हो रहा है। दान दाताओं की भूमिका प्रशंसनीय है। ऐसे कार्यों में राज्य सरकार भी पूरा सहयोग करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न धार्मिक प्रमुखों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। स्कॉलरशिप प्राप्त करने वाले 849 बेटे बेटियों को हार्दिक बधाई दी। कैप्टन हमीद के साहस और शौर्य का स्मरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत पाक युद्ध में कैप्टन हमीद ने साहसी कारनामा करते हुए पाकिस्तान के अनेक टैंक नष्ट कर दिखाए, इसे कौन भूल सकता है। कैप्टन हमीद शहीद हुए, उन्होंने राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा को सर्वोपरि माना। पढ़ो-पढ़ाओ और राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना में छात्रवृत्ति का लाभ लें विद्यार्थी – डॉ. सनवर पटेल मध्यप्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि आज पढ़ो-पढ़ाओ- राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश को विकसित और स्वर्णिम बनाने के लिए कार्य हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी वक्फ की चुनौतियों से निपटने के लिए नए कानून लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार नए कानूनों के माध्यम से आमजन की भलाई और बेटा-बेटियों की पढ़ाई के लिए कार्य कर रही है। प्रदेश में वक्फ माफियाओं पर अंकुश लगा है, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति ऑनलाइन दर्ज हुई है। इस कार्य के लिए मध्यप्रदेश को देश में प्रथम स्थान मिला और प्रदेश को स्कॉच अवार्ड से नवाजा गया। संपत्तियों के ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ी है, छुप कर मिली भगत से काम करने वाले बेनकाब हुए हैं। माफिया और भू-माफिया किसी धर्मस्थल का शोषण न कर पाएं, इस बात का वक्फ बोर्ड विशेष ध्यान रख रहा है। वक्फ की संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है। स्कूल-कॉलेजों में बेटियों के ड्राप आउट को रोकने में मिली सफलता डॉ. सनवर पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के सभी मेधावी विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। इसी का परिणाम है कि आज 849 मेधावी विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान कर उनका सम्मान किया जा रहा है। गरीब-जरूरतमंद बेटा-बेटियों को मेडिकल कॉलेज तक की पढ़ाई करने में मदद दी जा रही है। नए कानूनों के कारण वक्फ बोर्ड की आय बढ़ी है। हमारा वक्फ … Read more

शपथ ग्रहण समारोह में मोदी-शिवराज की खास बातचीत, अब चर्चा में दिल्ली वाला बुलावा

भोपाल  मुझे 13 दिसंबर, 2023 मध्य प्रदेश में नई सरकार के शपथ ग्रहण का दिन स्पष्ट याद है। मैंने प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेतृत्व का मुख्यमंत्री के रूप में स्वागत किया और जैसे ही मोहन यादव ने शपथ ली, स्वाभाविक रूप से सबका ध्यान उन पर चला गया। बाद में प्रधानमंत्री मेरे पास आए और धीरे से कहा- शिवराज, समय निकालकर दिल्ली आओ। आपसे कुछ बातें करनी हैं। इसके छह महीने बाद नौ जून, 2024 को मैंने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। मुझे कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय सौंपा गया। तब मुझे अहसास हुआ प्रधानमंत्री ने उस शपथग्रहण समारोह के दौरान ही मेरे लिए योजना बना ली थी।’ यह अंश है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ का, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कई संस्मरणों को शामिल किया है। पुस्तक में शिवराज सिंह के प्रधानमंत्री मोदी के साथ तीन दशकों से अधिक पुराने आत्मीय संबंधों का हृदयस्पर्शी वर्णन है। इसमें घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि अनुभवों की वह यात्रा है, जो 1991-92 की एकता यात्रा से प्रारंभ होकर वर्ष 2025 में उनके तीसरे कार्यकाल तक विस्तृत है। पुस्तक में और क्या शिवराज सिंह ने पुस्तक में कहा है कि पहलगाम हमले के बाद कैबिनेट बैठक के बाद उनके मन में पुस्तक लिखने का विचार आया। तब प्रधानमंत्री सऊदी अरब के राजकीय दौरे पर थे। लेकिन सूचना मिलने पर वह कार्यक्रम को बीच में ही रोककर अगले दिन भारत लौट आए। उन्होंने लिखा, ‘30 अप्रैल, 2025 को कैबिनेट बैठक के वातावरण में तनाव था, और मेरे मन में बार-बार एक ही प्रश्न उठ रहा था-इन कठिन क्षणों का बोझ मोदीजी पर कितना भारी पड़ रहा होगा? लेकिन मैंने उन्हें अंदाज में कमरे में आते देखा। उनके मन-मानस पर क्रोध और विचलन का नामोनिशान नहीं था। अपनी शांत, परंतु दृढ़निश्चयी आवाज में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। सर्जिकल स्ट्राइक्स और एयरस्ट्राइक्स से अलग होगा। जिन्होंने यह हरकत करने की जुर्रत की है, वे दुनिया के किसी भी कोने में छुपे हों, हम उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।’ ये क्रोध में बोले गए शब्द नहीं, बल्कि अडिग संकल्प और दृढ़ नेतृत्व के परिचायक थे। जब शिवराज सिंह चौहान को लिस्ट में नहीं मिला उनका नाम पीटीआई भाषा ने किताब में वर्णित अंशों के हवाले से लिखा, जब भाजपा ने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की, तो चौहान ने सोचा कि पहले उन सीटों के उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जाएंगे, जहां भाजपा की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जा रही थी। उन्होंने लिखा, 'मेरा नाम शुरुआती सूचियों में शामिल नहीं था।' पुराने बयान का जिक्र किताब के अनुसार, इसी दौरान एक जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य में विकास का उल्लेख करते हुए कहा था, 'अगर हम नहीं रहे, तो हमें बहुत याद किया जाएगा।' उन्होंने लिखा कि विपक्ष ने इस बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और यह प्रचारित किया कि चौहान का राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है। चौहान ने लिखा कि विपक्ष के कुछ लोगों ने उनका मजाक उड़ाया। मौजूदा कृषि मंत्री चौहान ने कहा, 'उन्होंने (विपक्ष ने) यह तक कह दिया कि मामाजी का तो राजनीतिक अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।' चौहान ने किताब में लिखा कि कांग्रेस पार्टी ने 'गलत सूचना' को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य आधार बना लिया और उनके बयान को 'तोड़-मरोड़कर पेश' करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने लिखा, 'शायद वे हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना चाहते थे। मुझे भी लगा कि हमें अपने कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करने और गलत धारणा को तोड़ने के लिए कुछ करना चाहिए।' केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि जब वह उस समय को याद करते हैं, तो उन्हें कांग्रेस की 'मजाक उड़ाने वाली बातें' याद नहीं आतीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी की 'गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता' सामने आती है। जब पीएम मोदी का फोन आया उन्होंने कहा कि चुनाव अभियान के बीच बेहद व्यस्त होने के बावजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया। चौहान ने किताब में लिखा, 'उन्होंने (मोदी ने) मुझे मुख्यमंत्री के रूप में संबोधित नहीं किया। बहुत गर्मजोशी और स्नेह के साथ उन्होंने कहा, 'आज मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा हूं, न ही चुनावों के संदर्भ में फोन कर रहा हूं। मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।' उन्होंने किताब में कहा कि प्रधानमंत्री ने बहुत ही नरमी से पूछा, 'आप इतने चिंतित क्यों हो? अगर आपका कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक या गुरु है, जिनका आप सम्मान करते हैं, तो उनके पास जाकर मार्गदर्शन लें। कुछ समय एकांत में बिताएं और अपने मन को शांत, संतुलित एवं स्थिर रखें।' चौहान ने लिखा कि उन्हें लगा कि शायद प्रधानमंत्री यह सोच रहे थे कि 'मुझे कुछ आश्वासन की जरूरत हो सकती है'। शिवराज सिंह चौहान ने क्या रिप्लाई दिया केंद्रीय मंत्री ने लिखा, 'मैंने उनसे कहा, 'भाई साहब, मुझे कुछ नहीं चाहिए। मैं सिर्फ काम करना चाहता हूं।' चौहान के अनुसार, इसपर मोदी ने जवाब दिया, 'नहीं शिवराज, एक-दो दिन अकेले रहिए, अपना ध्यान रखिए, अपनी मानसिक स्थिति का ख्याल रखें और फिर काम में जुट जाएं।' भाजपा के वरिष्ठ नेता ने लिखा, 'वह (मोदी) चाहते थे कि मैं कुछ समय के लिए रुकूं, अपने ऊपर ध्यान दूं और आंतरिक शक्ति को फिर से जागृत करुं, उनका स्नेह मेरे मन को गहराई से छू गया। जो नेता पूरे देश की जिम्मेदारियों का भार उठाए हुए हैं, वह मेरे व्यक्तिगत मानसिक हालात की भी चिंता कर रहे थे; यही वास्तविक संवेदनशीलता है।' सलाह मान उत्तराखंड गए चार बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चौहान ने लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री की सलाह मान ली और उत्तराखंड चले गए। चौहान ने लिखा, 'ऋषिकेश से थोड़ी दूरी पर, मैं गंगा के किनारे एकांत में घंटों बैठा रहा। बहते पानी और अडिग पहाड़ों को देखते हुए मेरा मन धीरे-धीरे शांत होने लगा। तब मैं पूरी तरह समझ गया कि मोदी जी क्या चाहते थे। उनका स्नेह केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि रणनीतिक भी था।' केंद्रीय मंत्री ने लिखा कि मोदी अच्छी तरह समझते थे कि यदि भ्रामक मीडिया रिपोर्टों से उनका (चौहान) मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी … Read more

गंगा दशहरा सिर्फ पर्व नहीं, जल के प्रति कृतज्ञता का संदेश है : डॉ. मोहन यादव

गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व-डॉ. मोहन यादव भोपाल भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को मात्र जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। इनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा या गंगावतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। इस दिन को गंगा दशहरा, गंगा दशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। दरअसल, गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है. गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है। अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है। यह मिशन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामी गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाके तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया। प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि पानी बचाना स्वच्छ भारत मिशन की तरह सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाएं बनीं, चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार हुआ। इन प्रयासों का परिणाम साफ दिखता है। भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या घटी है और कई जिलों में जल संकट कम हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी का विजन केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि जल संरक्षण को संस्कृति और आदत बनाने का है। वे बच्चों को वाटर वॉरियर्स बनाने और समाज को जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग बन गया है। ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है। मध्यप्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि प्रदेश जल संकट से मुक्त हो सके।अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि जल पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण ने जल संकट को गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के समाधान में निहित है। अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव होता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरक्षण संरचनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है। मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है। इस अभियान से मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है।यह मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।  

भोजशाला में ऐतिहासिक पल, CM पहली बार करेंगे मां वाग्देवी के दर्शन

धार  भोजशाला इन दिनों पूरी तरह भगवामय नजर आ रही है। मां सरस्वती मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के बाद यहां लगातार धार्मिक आयोजन हो रहे हैं और देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ गया है। सोमवार को इस ऐतिहासिक स्थल पर एक नया अध्याय जुडऩे जा रहा है, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं भोजशाला पहुंचकर गर्भगृह में विराजित मां वाग्देवी के दर्शन और पूजन करेंगे। इतिहास में पहली बार इतिहास में यह पहला (Historic Day) अवसर माना जा रहा है, जब मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए कोई राजनीतिक हस्ती भोजशाला में विधिवत दर्शन-पूजन करने पहुंचेगी। इसे लेकर हिंदू समाज और स्थानीय नागरिकों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।  वसंत पंचमी की तर्ज पर सजी भोजशाला धारभोजशाला परिसर को बसंत पंचमी की तर्ज पर सजाया गया है। परिसर और आसपास के क्षेत्र में भगवा ध्वज, पताकाएं और स्वागत बैनर लगाए गए हैं, जिससे पूरा वातावरण धार्मिक आस्था और उत्सव की भावना से सराबोर हो उठा है। अटल से मोदी तक कई दिग्गज कर चुके हैं दर्शन भोजशाला लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रही है। यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिघल, प्रवीण तोगडिय़ा, उमा भारती, साध्वी ऋतंभरा और शिवराज सिंह चौहान जैसे कई बड़े नेता और हिंदू संगठनों से जुड़े चेहरे दर्शन कर चुके हैं। पीएम तक पहुंच चुके हैं भोजशाला वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए भोजशाला पहुंच चुके हैं। अब बतौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री इस अवसर पर 'भोजसरस्वती लोक' जैसी बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं। 900 मीटर तक जनता के बीच पैदल चलेंगे मुख्यमंत्री निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सोमवार सुबह करीब 10 बजे हेलीकॉप्टर से धार पहुंचेंगे। डीआरपी लाइन हेलीपेड से वाहन द्वारा राजवाड़ा पहुंचने के बाद वहां से भोजशाला तक भव्य रोड शो निकलेगा। करीब 900 मीटर लंबा यह मार्ग पूरी तरह स्वागत द्वारों, बैनरों और धार्मिक सजावट से सुसज्जित किया गया है। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, साधु-संत और स्थानीय नागरिक मौजूद रहेंगे। भोजशाला पहुंचने पर मुख्यमंत्री पुलिस चौकी के सामने मुख्य प्रवेश द्वार से पैदल गर्भगृह तक जाएंगे और मां वाग्देवी का पूजन-अर्चन करेंगे। मुख्यमंत्री का धार प्रवास दो घंटे से अधिक समय तक रहने की संभावना है। धारेश्वर और मां गढ़ कालिका के भी करेंगे दर्शन मुख्यमंत्री अपने धार दौरे के दौरान धारेश्वर मंदिर और मां गढ़ कालिका मंदिर में भी दर्शन-पूजन करेंगे। देवीजी मंदिर क्षेत्र में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विशेष श्रमदान कार्यक्रम रखा गया है। मुख्यमंत्री घाट की साफ-सफाई में भी हिस्सा लेंगे और जल संरक्षण का संदेश देंगे। गंगा दशहरा आयोजन में हितग्राहियों को देंगे सौगात मुख्यमंत्री का यह दौरा शासकीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसे 'गंगा दशहरा कार्यक्रम' नाम दिया गया है। मुख्य आयोजन मोती बाग चौक पर होगा, जहां विशाल वाटरप्रूफ डोम और भव्य मंच तैयार किया गया है। सभा के दौरान मुख्यमंत्री विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे। साथ ही विकास कार्यों और नई परियोजनाओं की घोषणाएं भी संभव मानी जा रही हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं।

मन शांत तो तन स्वस्थ… आर्ट ऑफ लिविंग का यही संदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मन की शांति ही तन का योग सादृश्य…यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविशंकर जी का 70वां जन्मोत्सव प्रदेशवासियों की ओर से रविशंकर के लिए जन्मोत्सव की मंगलकामनाएं लेकर स्वयं उदयपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव के जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने कभी दुनिया को हथियारों के बल पर जीतने की चेष्ठा नहीं की। हमने विश्वशक्ति नहीं, विश्वगुरु बनने का मार्ग चुना है। हमने हमेशा सबके सुख की कामना की है और वैश्विक कल्याण का नारा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की शांति ही तन के योग सादृश्य है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर सही संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। 'वसुधैव कुटुम्बकम्' हमारी संस्कृति का मूल है और रविशंकर जी इसी संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। ने दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को तनाव से मुक्ति दिलाकर शांत, स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को कर्नाटक राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग के इंटरनेशनल सेन्टर, उदयपुरा, बैंगलुरू में रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने रविशंकर से कहा कि वे मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से उन्हें जन्मोत्सव की अनंत और अशेष मंगलकामनाएं देने स्वयं यहां (उदयपुरा) आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 7 दशक की की ऊर्जा और करुणा इस व्यस्त और ऊथल पुथल के दौर में भी हर दिन नई और चिरयुवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस विश्व को की देन है। यह सेवा, साधना और शांति का परम संगम है। आर्ट ऑफ लिविंग पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की कला का सहज मार्ग है, एक नव वैश्विक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग सिर्फ जीवन जीने की कला नहीं, जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, प्राणायाम, ध्यान और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़कर लोगों को आत्मिक शांति प्रदान की है। करीब एक माह का यह आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन वास्तव में मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां मन शांत होता है, वहीं समाज भी समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग आध्यात्मिक संगठन को वैश्विक पुनीत सामाजिक कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप सब भारत की ध्यान, योग, साधना, मेडिटेशन, सुदर्शन क्रिया जैसी प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र, बेंगलुरु आकर देवलोक जैसा आनंद प्राप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति में भाषाओं का गुलदस्ता है। भाषा कोई भी हो, लेकिन चेहरे के भाव से ही बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। गुजरात के सोमनाथ में गुरूदेव के आशीर्वाद से सोमनाथ उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रत्येक सांस के साथ जीवन और मृत्यु साथ-साथ चलती है। दोनों परमपिता परमात्मा के हाथ में है। श्रीरविशंकर जी ने 70वें जन्मदिन के अवसर पर 20 दिवसीय उत्सव मनाने का निर्णय लिया है। संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए बेंगलुरु स्थित इस केंद्र में आते हैं। हमारी संस्कृति में हमारे गुरु ही हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। हमारा जीवन यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे यानी जैसा पिंड है, वैसा ही ब्रह्मांड है की अवधारणा पर चलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य का भोजन तीन प्रकार का है। बगैर भोजन के 30 दिन तक जीवित रह सकते हैं। पानी हमें 7 दिन तक जिंदा रख सकता है। गुरुदेव ने हमें प्राण से परमानंद और परमानंद से परमात्मा की ओर जाने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य का जीवन नियत है। हमारा यह जीवन ऊर्जा और चेतना के साथ प्रकृति से भी जुड़ा रहे, इसके लिए के सभी सामाजिक सेवा प्रकल्प विशेष महत्व रखते हैं। बेंगलुरु के इस आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में हमें सांस्कृतिक चेतना और शांति का मार्ग प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के जय घोष के साथ गुरुदेव रविशंकर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सह्स्त्रायु को प्राप्त हों और दीर्घकाल तक हम सबके जीवन का मार्गदर्शन करते रहें। कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। न्यूज फर्स्ट मीडिया हाऊस के सीईओ एस. रवि कुमार एवं टीवी 9 के वरिष्ठ एंकर रंगनाथ भारद्वाज ने कन्नड़ भाषा में दिये संबोधन में कहा कि गुरुदेव रविशंकर विश्व शांति के दूत हैं। आपने पूरे विश्व के लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के साथ-साथ आर्ट ऑफ लविंग भी सिखाया है। कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, श्रीमती जानकी शुक्ला, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता जैकी श्राफ, एशियन पेंट के मालिक जलस दानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे।