samacharsecretary.com

हिंदू युवक से मोहब्बत में मुस्लिम युवती ने किया धर्म परिवर्तन, मिस्बा अहमद बनी मनीषा

लुधियान  कहते हैं कि मोहब्बत न तो जाति देखती है और न ही धर्म। सच्ची मोहब्बत करने वाले सामाजिक और परिवार की बेड़ियों को भी तोड़ देते हैं। कुछ ऐसा ही मामला यूपी के अलीगढ़ से सामने आया है। यहां पंजाब के लुधियाना की एक युवती ने अलीगढ़ के हिंदू युवक की मोहब्बत में अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है। मिस्बा अहमद से मनीषा बनी युवती ने अलीगढ़ में अपने धर्म परिवर्तन का प्रार्थना पत्र दिया है। मामला जिले में उत्तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज किया गया पहला केस है। पंजाब के लुधियान आजाद नगर खन्ना निवासी मिस्बा अहमद ने एक धर्म से दूसरे धर्म में आशायित संपरिवर्तन के संबंध में यूपी विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड प्रार्थना पत्र प्रशासन को दिया है। जिसमें मिस्बा ने स्वेच्छा से मुस्लिम से हिन्दू धर्म परिवर्तन करने की जानकारी दी गई है। युवती ने पिछले दिनों हिन्दू धर्म में वापिसी का शपथ पत्र दिया और प्रयागराज में एक धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर धर्म परिवर्तन भी कर लिया। मिस्बा अब मनीषा के नाम से पहचानी जाएगी। टप्पल निवासी युवक की मोहब्बत में मिस्बा ने ऐसा किया। टप्पल के गांव बैना निवासी युवक के परिजन धर्म परिवर्तन के साक्षी बने। अब धर्म परिवर्तन को विधिवत रजिस्टर्ड किया जाएगा। प्रशासन इस मामले की कार्रवाई में तैयारी शुरू कर दी है। 2020 में लागू हुआ था अधिनियम यूपी विधि विरूद्ध धर्म संपरिवर्तन अधिनियम 27 नवंबर 2020 को उत्तर प्रदेश में लागू हुआ था। अधिनियम के तहत जबरन धर्म परिवर्तन करने वालों पर सख्त कार्यवाही का भी प्रावधान है। धर्म परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया नोटरीकृत हलफनामा तैयार किया जाता है जिसमें नाम, पुराना पता, पुराना धर्म, और नया धर्म दर्ज हो। धर्म परिवर्तन केवल अपनी मर्जी से होना चाहिए। लालच, जबरदस्ती, या विवाह के बहाने (केवल शादी के लिए) किया गया धर्मांतरण गैरकानूनी है। यदि प्रशासन को लगता है कि जबरन धर्म परिवर्तन हुआ है, तो पुलिस जांच की जा सकती है। जबरन या अवैध तरीके से धर्मांतरण के मामलों में 1 से 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है। एक सप्ताह पहले संभल में युवती ने बदला था धर्म एक सप्ताह पहले संभल में इसी तरह का मामला सामने आया था। यहां एक युवती हिंदू प्रेमी के लिए घर वालों से बाग बन गई थी। परिवार वालों की मर्जी न होने के बाद उसने धर्म परिवर्तन करके हिंदू युवक से शादी कर ली थी। यही नहीं उसने अपना नाम भी बदल लिया था। हजरतनगर गढ़ी क्षेत्र के नवाड़ा गांव निवासी समरीन और अंकित एक ही स्कूल में पढ़ते थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। शादी करने के लिए तैयार नहीं हुए तो 27 जनवरी को समरीन घर छोड़कर अंकित के घर पहुंची और उसके साथ रहने की इच्छा जताई। समरीन के घर से जाने पर उसकी मां ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की और अदालत में पेश किया। अदालत में दोनों ने खुद को बालिग बताया। समरीन ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी इच्छा से अंकित के साथ रहना और विवाह करना चाहती है। 2 फरवरी को बयान दर्ज होने के बाद सीडब्ल्यूसी ने युवती को अंकित के सुपुर्द करने का आदेश दिया। सीडब्ल्यूसी के आदेश के बाद दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया। विवाह के उपरांत समरीन ने हिंदू धर्म अपनाते हुए अपना नाम रूही रख लिया। अंकित के परिवार ने उसे स्वीकार कर लिया है।

ट्रंप के गाजा प्लान पर समर्थन से घिरा पाकिस्तान, सोशल मीडिया पर भड़के लोग – ‘शहबाज ने सरेंडर कर दिया

इस्लामाबाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्री गाजा शांति योजना ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर हलचल मचा दी है। लेकिन इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का इस योजना का खुला समर्थन उनके लिए मुसीबत बन गया है। उनके विरोधी कह रहे हैं कि शहबाज शरीफ ने ट्रंप के आगे सरेंडर कर दिया है। विपक्षी नेता और आम नागरिक उन्हें 'गद्दार' करार दे रहे हैं जिसने फिलिस्तीन के साथ धोखा किया है। मामला बिगड़ता देख शहबाज सरकार ने सफाई दी है कि ट्रंप की गाजा योजना में पाकिस्तान की सभी मागों को शामिल नहीं किया गया है। ट्रंप ने सोमवार को वाइट हाउस में अपनी गाजा योजना का ऐलान किया। ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वार्ता के बाद प्रस्तुत की गई इस योजना में गाजा में युद्ध तत्काल खत्म करने, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करने और गाजा के असैन्यीकरण का प्रस्ताव है। योजना में इजरायल को गाजा के आसपास सुरक्षा परिधि बनाने और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई का प्रावधान है, लेकिन कई आलोचकों का मानना है कि यह प्लान इजरायल के हितों को प्राथमिकता देता है और फिलिस्तीनियों की सहमति को नजरअंदाज करता है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की खुलेआम तारीफ की। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फील्ड मार्शल शुरू से हमारे साथ थे। उन्होंने 100% समर्थन का बयान जारी किया है। वे कमाल के लोग हैं।" इसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गाजा योजना का स्वागत करते हुए कहा कि “फिलिस्तीनी जनता और इजरायल के बीच स्थायी शांति ही क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता और आर्थिक विकास ला सकती है।” लेकिन उनके इस बयान ने पाकिस्तान के भीतर कड़ी प्रतिक्रिया पैदा कर दी। राजनीतिक दलों, विश्लेषकों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने इसे "सरेंडर" करार देते हुए सरकार पर ऐतिहासिक रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया। 'मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया' पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने कहा कि मुस्लिम दुनिया ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि फिलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना से पहले अब्राहम समझौते में शामिल होना पाकिस्तान के लिए “भारी भूल” होगी। मजलिस वहदत-ए-मुस्लिमीन के नेता अल्लामा राजा नासिर ने योजना को “त्रुटिपूर्ण और अन्यायी” बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना फिलिस्तीनियों की राय को दरकिनार कर अमेरिकी और इजरायली हितों को आगे बढ़ाती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता इमान जैनब मजारी ने कहा, “फिलिस्तीन मुद्दे पर पाकिस्तान की जनता एकमत है। प्रधानमंत्री का यह कदम देश की ऐतिहासिक स्थिति से विश्वासघात है।” लेखिका फातिमा भुट्टो ने कहा कि पाकिस्तान का इजरायल से सामान्य संबंध स्थापित करना नैतिक और धार्मिक कर्तव्य से पलायन है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी जनता कभी दो-राष्ट्र नीति के सरेंडर को स्वीकार नहीं करेगी। केवल एक फिलिस्तीन है और वह इजरायल के कब्जे में है।” पत्रकारों और राजनीतिक नेताओं की नाराजगी पत्रकार तलत हुसैन ने योजना की आलोचना करते हुए कहा, “कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं, गाजा में फिलिस्तीनी अथॉरिटी नहीं, हमास का सफाया- और नेतन्याहू हत्याओं के बाद शांति-दूत बन जाएंगे। यह सब ताजा खून की धरती पर ट्रंप का रियल एस्टेट सौदा है।” पत्रकार जर्रार खुहरो ने इसे “इजरायल को पाक-साफ करने और फिलिस्तीनियों के गुस्से को भटकाने की चाल” बताया। वहीं कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने शहबाज शरीफ़ के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जनसंहार कर रहे जायोनी देश से शांति की बात करना शर्मनाक है। पाकिस्तान की जनता कभी इसे माफ नहीं करेगी।” सीनियर नेता जावेद हाशमी ने कहा कि पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का रुख स्पष्ट था कि इजरायल “एक नाजायज देश” है। जमात-ए-इस्लामी प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने कहा कि उनकी पार्टी प्रधानमंत्री के बयान को पूरी तरह खारिज करती है। उन्होंने लिखा, “66,000 शहीद फिलिस्तीनियों की लाशों पर खड़ी किसी भी तथाकथित शांति योजना की तारीफ करना दरअसल गुनहगारों के साथ खड़ा होना है।” पूर्व वित्त मंत्री असद उमर ने भी प्रधानमंत्री की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि “जब इजरायल का इतिहास हर समझौते को तोड़ने का रहा है, तो उसे चरणबद्ध वापसी का भरोसा क्यों? गाजा में 20 लाख की आबादी के लिए केवल 600 ट्रक राहत क्यों?” पाक सरकार की सफाई पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ईशाक डार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रस्तावित गाजा शांति योजना पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह योजना पाकिस्तान द्वारा सुझाए गए सभी बदलावों को शामिल नहीं करती है। डार ने एक टीवी चैनल पर कहा कि वाशिंगटन द्वारा तैयार अंतिम मसौदा पाकिस्तान के 24 घंटे के भीतर सौंपे गए संशोधनों को नजरअंदाज करता है। डार ने कहा, "ट्रंप की टीम ने कुछ बिंदु साझा किए थे, और हमने 24 घंटे के भीतर अपने संशोधन सौंपने का वादा किया। लेकिन वाशिंगटन द्वारा तैयार दस्तावेज में हमारे सभी सुझावों को शामिल नहीं किया गया।" उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की नीति फिलिस्तीन मुद्दे पर स्पष्ट और अपरिवर्तित बनी हुई है। उप प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना के तहत फिलिस्तीन में एक स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों की सरकार स्थापित की जाएगी, जिसकी निगरानी मुख्य रूप से फिलिस्तीनियों से बनी एक पर्यवेक्षी संस्था करेगी। उन्होंने गाजा में युद्ध विराम और पूर्ण शांति लाने के प्रयासों के बारे में बात की, जिसमें पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के साथ आठ मुस्लिम देशों के नेताओं की तैयारी बैठक भी शामिल थी।

ओवैसी का हमला: बराबरी चाहिए थी, मंत्री पद नहीं — बिहार की सियासत में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर उठाए सवाल

पटना ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके पुत्र तेजस्वी यादव  पर आरोप लगाया कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन को लेकर उनकी पार्टी की ओर से किए गए आग्रहों पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एआईएमआईएम ने केवल बराबरी का दर्जा मांगा था, मंत्री पद की कोई इच्छा जाहिर नहीं की थी। हमारी केवल यही मांग थी कि हमें बराबरी का दर्जा मिले… हैदराबाद के सांसद ओवैसी किशनगंज जिले में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। यह रैली उनके चार दिवसीय ‘‘सीमांचल न्याय यात्रा'' का हिस्सा है। सीमांचल क्षेत्र में अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है। ओवैसी ने कहा, ‘‘हमारे बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव को तीन पत्र लिखकर ‘इंडिया' गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि हमने केवल छह सीट की मांग की थी, हमें किसी मंत्री पद की चाहत नहीं थी।'' ओवैसी ने कहा, ‘‘हमारी केवल यही मांग थी कि हमें बराबरी का दर्जा मिले, गुलाम की तरह व्यवहार न किया जाए। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।'' राजद की ‘‘उपेक्षा'' को दोषी ठहराते हुए ओवैसी ने कहा कि बिहार में मुस्लिम समुदाय के पास अपनी कोई ठोस नेतृत्वकारी ताकत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘यादव, कुशवाहा, कुर्मी, मांझी, राजपूत और पासवान यानी हर जाति के अपने नेता हैं। लेकिन मुसलमानों का कोई अपना नेता नहीं है।'' उन्होंने सवाल किया, ‘‘जब तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने का सपना देख सकते हैं तो सीमांचल का कोई युवा नेता क्यों नहीं बन सकता? ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी ने यह पहल इसलिए की ताकि उसपर भाजपा की मदद करने के आरोप न लगें। उन्होंने कहा, ‘‘राजद की ओर से सही प्रतिक्रिया नहीं आने से यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में भाजपा की मदद कौन कर रहा है।'' एआईएमआईएम ने पिछला विधानसभा चुनाव 20 सीट पर लड़ा था और पांच सीट पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में पांच में से चार विधायक राजद में शामिल हो गए और केवल अख्तरुल इमान ही पार्टी के साथ बने रहे। सीमांचल क्षेत्र में पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिले आते हैं। इस क्षेत्र में अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है। ओवैसी दिन में बाद में अररिया जिले में भी जनसभाओं को संबोधित करेंगे।  

हिंदू लड़की का मुस्लिम युवक से जबरन निकाह, वाराणसी पुलिस ने मौलवी समेत 5 को पकड़ा

वाराणसी  वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र में जबरन धर्म परिवर्तन का मामला सामने आया है. इस घटना में 12 साल की एक नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा करके मौलवी ने मुस्लिम लड़के से निकाह करा दिया. इस मामले में पुलिस ने देर से ही सही, लेकिन नाबालिग लड़के निहाल, उसकी मां, पिता शरीफ उर्फ राजू, चाचा लालू और मौलवी मोहम्मद हसीन समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है.  पीड़ित पिता नंदू मौर्य लगभग 3 महीने तक थाने-चौकी के चक्कर लगाता रहा, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई. थक-हारकर उन्होंने पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी, जिसके बाद कार्रवाई हुई. मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.  पीड़ित पिता की आपबीती पीड़ित पिता नंदू मौर्य ने अपनी शिकायत में बताया कि लगभग 3 महीने पहले उनकी 12 साल की बेटी को निहाल नाम का लड़का जबरन अपने घर उठा ले गया था. जब वह अपनी बेटी को वापस लेने गए, तो निहाल, उसके पिता शरीफ, चाचा लालू और कुछ अन्य लोगों ने उन पर हमला कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अब उनके मजहब की हो गई है, उसका निकाह हो चुका है और वह काफिर (नंदू मौर्य) की हत्या करके उसे जहन्नुम भेज देंगे.  पुलिस ने कराया आरोपियों से उठक-बैठक इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे थाने में ही उठक-बैठक करवाई. मौलवी मोहम्मद हसीन ने कबूल किया कि उसने 12 साल की नाबालिग का निकाह कराया था और अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी. सभी पांच आरोपियों पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम समेत अन्य कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. देखें वीडियो-  पुलिस कमिश्नर की पहल पर कार्रवाई एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया कि पुलिस कमिश्नर को शिकायत मिलते ही तुरंत एफआईआर दर्ज की गई और लड़की को बरामद करने के लिए टीम लगा दी गई. टीम ने लड़की को ढूंढ लिया. पूछताछ में पता चला कि निहाल के परिवार ने उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करवा दिया था. एसीपी ने यह भी बताया कि पीड़ित पिता पहले थाने नहीं आए थे, सीधे पुलिस कमिश्नर के पास गए, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो पाई. 

रायसेन में शिक्षा पर विवाद, हिंदू बच्चों को इस्लामिक शब्द सिखाने का आरोप

रायसेन  रायसेन जिले के एक कॉन्वेंट स्कूल में इस्लामिक शिक्षा देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बेबी कॉन्वेंट स्कूल में नर्सरी के बच्चों को पारंपरिक शिक्षा से हटकर इस्लामिक शिक्षा सामग्री पढ़ाया जा रहा था। इतना ही नहीं, स्कूल द्वारा बांटे गए पट्टी पहाड़े में 'क से काबा', 'म से मस्जिद', 'न से नमाज', और 'औ से औरत (हिजाब में)' जैसे शब्द और चित्र शामिल है। यह मामला तब उजागर हुआ जब एक बच्ची के चाचा ने उसकी किताब देखी। स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग मामला सामने आने के बाद अभिभावक, विश्व हिन्दू परिषद, और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने स्कूल में प्रदर्शन कर हंगामा किया और स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की। हो हंगामा की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की। इसके बाद थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल ने प्रदर्शनकारियों से शिकायत दर्ज करने को कहा, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। स्कूल प्राचार्य ने स्वीकार की गलती वहीं, स्कूल की प्राचार्य आईए कुरैशी ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि भोपाल से मंगवाए गए पट्टी पहाड़े की सामग्री की जांच नहीं की गई थी। अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने अभिभावकों से सामग्री वापस करने की अपील की। दोषियों पर होगी कार्रवाई वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों में ऐसी सामग्री की अनुमति नहीं है। ऐसे में ये जांच का विषय है कि स्कूल में इस तरह की सामग्री कहां से लाया गया और लाने का उद्देश्य क्या था।