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वैश्विक मंच पर ईरान पर वार: नेतन्याहू बोले– दुनिया की सुरक्षा को बड़ा खतरा, दिखाए प्रमाण

ईरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को दुनियाभर के नेताओं से अपील की कि वे ईरान के खिलाफ इजरायल और अमेरिका के युद्ध प्रयासों में शामिल हों। उन्होंने इजरायली क्षेत्र पर हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए कहा कि ये हमले एक बढ़ते वैश्विक खतरे का सबूत हैं। इजरायल के अराद में ईरान द्वारा किए गए एक मिसाइल हमले की जगह पर बोलते हुए, नेतन्याहू ने कहा कि पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम यह दिखाते हैं कि ईरान न केवल इजरायल के लिए, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी खतरा पैदा कर रहा है। इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि ईरान ने यरुशलम में नागरिक इलाकों और प्रमुख धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया है, जिनमें वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद शामिल हैं। नेतन्याहू ने कहा, "अगर आपको इस बात का सबूत चाहिए कि ईरान पूरी दुनिया के लिए खतरा है, तो पिछले 48 घंटों ने वह सबूत दे दिया है। पिछले 48 घंटों में, ईरान ने एक नागरिक इलाके को निशाना बनाया। वे ऐसा सामूहिक हत्या के हथियार के तौर पर कर रहे हैं। खुशकिस्मती से, कोई मारा नहीं गया, लेकिन ऐसा किस्मत की वजह से हुआ, न कि उनके इरादे की वजह से। उनका इरादा नागरिकों की हत्या करना है।" उन्होंने आगे कहा, "दूसरी बात, उन्होंने यरुशलम पर हमला किया, जो तीन एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों- वेस्टर्न वॉल, चर्च ऑफ़ द होली सेपल्चर और अल-अक्सा मस्जिद के ठीक बगल में स्थित है। और एक चमत्कार की बदौलत, एक बार फिर, उनमें से किसी को भी चोट नहीं आई, लेकिन वे तीन प्रमुख एकेश्वरवादी धर्मों के पवित्र स्थलों को निशाना बना रहे थे।'' उन्होंने आगे दावा किया कि ईरान ने लंबी दूरी तक मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है, जिसमें काफी दूर तक मिसाइलें दागना और समुद्री व ऊर्जा गलियारों सहित रणनीतिक मार्गों को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने आगे कहा, ''आपको और क्या सबूत चाहिए कि इस शासन को, जो पूरी दुनिया के लिए खतरा है, रोकना ही होगा। इजरायल और अमेरिका पूरी दुनिया के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। और अब समय आ गया है कि बाकी देशों के नेता भी इसमें शामिल हों। मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं देख सकता हूं कि उनमें से कुछ लोग उस दिशा में आगे बढ़ना शुरू कर रहे हैं, लेकिन अभी और ज्यादा करने की जरूरत है।'' नेतान्याहू ने ईरान के खिलाफ व्यापक अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपीलों का भी स्वागत किया, और इसे न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी जरूरी बताया।  

नेतन्याहू ने जो वीडियो शेयर किया था, उससे खारिज हुई मौत की अफवाह, Grok ने उसे डीपफेक बताया!

यरुशलम इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. पिछले हफ्ते से इंटरनेट पर उनके बारे में अजीब तरह की अफवाहें चल रही थीं. कुछ यूजर्स दावा कर रहे थे कि नेतन्याहू की मौत हो गई है या उन्हें ईरानी अटैक में मार दिया गया है। इन अफवाहों की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें दावा किया गया कि नेतन्याहू के हाथ में 6 उंगलियां दिखाई दे रही हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे AI जनरेटेड वीडियो बताया और सवाल उठाए कि कहीं यह असली व्यक्ति की जगह डिजिटल डबल तो नहीं है. यही से नेतन्याहू जिंदा हैं या नहीं जैसी थ्योरी फैलने लगी। चूंकि वो अब तक लाइव नहीं आए हैं, इसलिए इस तरह के अफवाहों को बल मिल रहा है. इसी बीच उनके X हैंडल से एक नया वीडियो पोस्ट किया गया है. हालांकि इंटरनेट पर लोग इस वीडियो पर भी सवाल उठा रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये वीडियो AI जेनेरेटेड तो नहीं है, लेकिन इसमें नेतन्याहू के बॉडी डबल का यूज किया गया है. हालांकि Elon Musk का Grok इस वीडियो को भी नकली बता रहा है। क्या नया वीडियो Deepfake है? रविवार को नेतन्याहू के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक नया वीडियो सामने आया. इस वीडियो में वह एक कैफे में खड़े दिखाई देते हैं और कॉफी पीते हुए मजाकिया अंदाज में उन अफवाहों पर प्रतिक्रिया देते हैं। वीडियो में वह कहते हैं कि लोग कह रहे हैं कि वह मर चुके हैं, लेकिन वह खुद कॉफी पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। Grok ने नए वीडियो को बताया Deepfake यानी नकली एलन मस्क की कंपनी xAI के AI चैटबॉट Grok ने इस वीडियो को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने जब Grok से पूछा कि यह वीडियो असली है या नहीं, तो चैटबॉट ने जवाब दिया कि यह AI से बना Deepfake वीडियो हो सकता है। Grok ने कहा कि वीडियो में कई ऐसे संकेत हैं जो AI जनरेशन की ओर इशारा करते हैं. कुछ यूजर्स ने वीडियो में अजीब लिप सिंक, कप में कॉफी का असामान्य स्तर और बैकग्राउंड के कुछ अस्वाभाविक हिस्सों की ओर भी ध्यान दिलाया. इसी वजह से इंटरनेट पर बहस और तेज हो गई कि यह वीडियो असली है या AI से बनाया गया। कैफे की तस्वरीरें भी की गई हैं जारी हालांकि इस बीच उस कैफे की तरफ से तस्वीरें भी जारी की गईं, जहां नेतन्याहू को कॉफी लेते हुए देखा गया था. कैफे ने कहा कि प्रधानमंत्री सच में वहां आए थे और तस्वीरें उसी समय की हैं. इससे यह दावा भी किया गया कि नेतन्याहू बिल्कुल जिंदा और सक्रिय हैं। दरअसल यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में हालात काफी संवेदनशील बने हुए हैं. इसी माहौल में नेतन्याहू की मौत से जुड़ी अफवाहें भी तेजी से फैलने लगीं कि ईरान द्वारा किए गए हमले मे उनकी मौत हो गई है। AI की वजह से हो रही कन्फ्यूजन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि AI के दौर में असली और नकली वीडियो में फर्क करना कितना मुश्किल होता जा रहा है. Deepfake तकनीक से बनाए गए वीडियो इतने असली लग सकते हैं कि आम लोगों के लिए सच और झूठ में फर्क करना आसान नहीं रहता। अब सोशल मीडिया पर बहस जारी है. कुछ लोग कह रहे हैं कि वीडियो असली है और AI चैटबॉट ने गलती की है, जबकि कुछ यूजर्स अभी भी इसे Deepfake मान रहे हैं।

ईरान पर इजरायल की स्ट्राइक पर बोले नेतन्याहू—खतरे को दूर करने के लिए उठाया कदम

तेल अवीव इजरायल ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान पर कई बड़े हमले किए, जिससे मिडिल ईस्ट एक बार फिर से युद्ध की गिरफ्त में आ गया। इन हमलों में अमेरिका ने भी इजरायल का साथ दिया। ईरान पर हुए हमलों पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर किया गया हमला ईरान से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को दूर करने के लिए था। नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा, "मेरे भाइयो और बहनो, इजरायल के नागरिको, कुछ समय पहले इजरायल और यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान में आतंकवादी शासन से पैदा हुए अस्तित्व के खतरे को दूर करने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया है।" नेतन्याहू ने आगे कहा, "हमारी मिली-जुली कार्रवाई बहादुर ईरानी लोगों के लिए अपनी किस्मत अपने हाथों में लेने के हालात बनाएगी। ईरान के सभी लोगों के लिए… ज़ुल्म का बोझ उतार फेंकने और एक आजाद और शांति चाहने वाला ईरान लाने का समय आ गया है।" नेतन्याहू ने आगे कहा कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और शनिवार को इजरायल और अमेरिका के इस्लामिक रिपब्लिक पर हमले शुरू करने के बाद इजरायलियों से एक साथ खड़े होने की अपील की। नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा, "इस खूनी आतंकवादी सरकार को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, जिससे वह पूरी इंसानियत को खतरे में डाल सके।" उन्होंने आगे कहा, “हम साथ खड़े रहेंगे, साथ लड़ेंगे और साथ मिलकर इजरायल की हमेशा-हमेशा के लिए रक्षा करेंगे।” ईरान पर अमेरिकी हमले का खतरा कई दिनों से मंडरा रहा था। इजरायल ने अमेरिका का साथ देते हुए पहले ईरान पर मिसाइलों से हमला किया और फिर अमेरिका ने भी अटैक शुरू कर दिए। पहला हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के ऑफिस के पास हुआ। ईरानी मीडिया ने पूरे देश में हमलों की खबर दी, और राजधानी से धुआं उठता देखा जा सकता था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि अमेरिका ने ईरान में बड़े लड़ाकू ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम डेवलप करना जारी रखे हुए है और अमेरिका तक पहुंचने के लिए मिसाइलें डेवलप करने की योजना बना रहा है और ईरानी लोगों से अपील की कि अपनी सरकार संभालो- यह तुम्हारी होगी।  

टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ा रहे भारत और इजरायल, बोले नेतन्याहू—भविष्य इसी का

यरूशलम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।  उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं। अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, "यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।" इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा। इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है।

मोदी के इजरायल दौरे से पहले नेतन्याहू का बड़ा बयान—भारत दुनिया की ताकतवर शक्ति

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह इजरायल के दौरे पर जाएंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में खास होगा। यह दौरा सुरक्षा, काउंटर-टेररिज़्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई टेक्नोलॉजी में आपसी रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशों के बीच हो रहा है। यह इसीलिए भी खास है क्योंकि PM मोदी 2017 के बाद, यानी 9 सालों में पहली बार इजरायल जा रहे हैं। इससे पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत और इजरायल के संबंधों पर चर्चा करते हुए इसे बेहद अहम बताया है। हालांकि भारत ने इस दौरे की आधिकारिक घोषणा नहीं है, लेकिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के न्योते के बाद पीएम मोदी आगामी 24-25 फरवरी को इजरायल की यात्रा पर रवाना हो सकते हैं। दौरे से पहले नेतन्याहू ने भी इसके संकेत दिए हैं। हाल ही में मेजर अमेरिकन ज्यूइश ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट के कॉन्फ्रेंस में अपने भाषण में, नेतन्याहू ने देशों के बीच मजबूत रिश्तों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "संसद में भाषण होने वाला है। अगले हफ्ते यहां कौन आ रहा है? नरेंद्र मोदी।" उन्होंने आगे कहा, “इजरायल और भारत के बीच बहुत अच्छे संबंध है, और हम हर तरह के सहयोग पर बात करेंगे।” उन्होंने आगे भारत को एक पावरफुल देश बताया। नेतन्याहू ने कहा, “जैसा की आप जानते हैं, भारत कोई छोटा देश नहीं है। यहां 1.4 बिलियन लोग रहते हैं। भारत बहुत पावरफुल है, बहुत पॉपुलर है।… मैं चाहता हूं कि आप सभी इसे जानें।" उन्होंने भारत में इजरायल की प्रसिद्धि की भी बात कही। किन मुद्दों पर होगी चर्चा? पीएम मोदी के दौरे पर उनके और नेतन्याहू के बीच बातचीत रक्षा सहयोग के साथ-साथ काउंटर-टेररिज़्म की कोशिशों को तेज करने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है। दोनों नेताओं ने हाल के दिनों में आतंकवाद पर कड़ा प्रहार करने की बात कही है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, क्वांटम रिसर्च और एडवांस्ड एग्रीकल्चर जैसे उभरते हुए क्षेत्रों के भी समझौतों की उम्मीद है।  

मिडिल ईस्ट में रणनीति का कमाल: नेटन्याहू के आने से पहले जयशंकर ने बुलाए अरब देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

बड़ी चुनौतियों के बीच नेतन्याहू ने जताई उम्मीद, शांति के अवसर कम नहीं

तेल अवीव इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने 'दुश्मनों की बड़ी चुनौतियों' के बीच भी 'शांति के बड़े अवसर' की बात की है। माउंट हर्जल में आयोजित एक राजकीय कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने ये विचार रखे। युद्ध में मिली सफलता की सराहना करते हुए, नेतन्याहू ने कहा, "हमारे दुश्मन अभी भी एक बड़ी चुनौती हैं। वे फिर से हथियार उठाने की फिराक में हैं।" उन्होंने स्पष्ट तौर पर ईरान का नाम नहीं लिया, लेकिन द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार इशारा उन्हीं की ओर था। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए नेतन्याहू ने कहा, "बड़ी चुनौतियां—और उनके साथ-साथ, शांति के दायरे को व्यापक बनाने के और बड़े अवसर हैं। हम अपने इस दावे को दोहराते हैं कि युद्ध के बाद इजरायल पड़ोसी अरब देशों के साथ रिश्तों को सामान्य बनाने और शांति समझौतों का विस्तार करने के लिए तैयार है।" नेतन्याहू ने माना कि राष्ट्रीय एकता जरूरी है। वे बोले, "हम एक साथ दोनों स्तरों पर काम कर रहे हैं, और दोनों ही स्तरों पर एकता जरूरी है, युद्ध में भी और शांति में भी। हम अपने सभी लक्ष्य हासिल करेंगे, सिर्फ आंतरिक एकजुटता, आपसी जिम्मेदारी और उन बंधनों को मजबूत करके जो तोड़ते नहीं बल्कि जोड़ते हैं।" इससे पहले उन्होंने हर बंधक (शव) को वापस लाने की बात कही। बोले, "हम हर एक बंधक को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" प्रधानमंत्री ने कहा, "संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन आज एक बात स्पष्ट है: जो कोई भी हमारे खिलाफ हाथ उठाएगा, वह पहले से ही जानता है कि उसे अपनी आक्रामकता की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हम उस जीत को हासिल करने के लिए दृढ़ हैं जो आने वाले कई वर्षों तक हमारे जीवन की दिशा तय करेगी।" उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों से कहा, "मैं आपके दुख की गंभीरता को समझता हूं। मैं युद्ध में लड़ने वाले सभी सैनिकों—यहूदियों, ड्रूज, ईसाइयों, मुसलमानों, बेडोइन, सर्कसियन, और अन्य समूहों के सदस्य जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे—का राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त करता हूं।"

नेतन्याहू ने PM मोदी को कॉल करने के लिए रोकी अहम बैठक, सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली यरूशलम में गुरुवार रात एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे. एजेंडा बेहद गंभीर था. गाजा में सीजफायर और बंधकों की रिहाई पर बड़ा फैसला होना था. लेकिन अचानक नेतन्‍याहू ने बैठक रोक दी. वजह? भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आ गया था. जी हां, नेतन्‍याहू ने अपने सारे मंत्री और अफसर कुछ मिनटों के लिए इंतजार में छोड़ दिए, ताकि वो सीधे पीएम मोदी से बात कर सकें. दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत लगभग दस मिनट चली, लेकिन उसका असर अब दोनों देशों के रिश्तों पर साफ दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू ने गाजा में युद्धविराम और बंधकों की रिहाई पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फोन रिसीव किया. मोदी ने उन्हें इस समझौते पर बधाई दी और कहा कि भारत इस मानवीय प्रयास का समर्थन करता है. बयान में आगे लिखा है कि मोदी ने नेतन्‍याहू को करीबी दोस्त बताया और कहा कि भारत-इजरायल की दोस्ती हर परिस्थिति में मजबूत रहेगी. नेतन्‍याहू ने भी पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि वो भारत के साथ मिलकर काम जारी रखना चाहते हैं. नेतन्याहू को दी बधाई, गाज़ा समझौते का किया स्वागत पीएम मोदी ने नेतन्याहू को फोन लगाकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के गाज़ा में शांति प्लान के तहत हुई प्रगति पर इज़रायली पीएम को बधाई दी। इसके साथ ही पीएम मोदी ने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों को मानवीय सहायता बढ़ाने पर हुए समझौते का स्वागत भी किया। पीएम मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दुनिया में कहीं भी किसी भी रूप या स्वरूप में आतंकवाद अस्वीकार्य है। मोदी बोले-आतंकवाद कहीं भी बर्दाश्त नहीं इस बातचीत के तुरंत बाद पीएम मोदी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किया. उन्होंने लिखा, मैंने अपने मित्र प्रधानमंत्री नेतन्‍याहू को फोन करके गाजा शांति योजना में हुई प्रगति पर बधाई दी. हमने बंधकों की रिहाई और गाज़ा के लोगों के लिए बढ़ाई जा रही मानवीय मदद का स्वागत किया. मैंने दोहराया कि आतंकवाद किसी भी रूप में और कहीं भी स्वीकार्य नहीं है. मोदी के इस ट्वीट को कुछ ही मिनटों में लाखों व्यूज़ मिले और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे हाथों-हाथ लिया. कई विश्लेषकों ने कहा कि यह बातचीत इस बात का संकेत है कि भारत अब पश्चिम एशिया की राजनीति में एक संतुलित लेकिन प्रभावी भूमिका निभा रहा है. सोमवार तक रिहा होंगे सभी बंधक इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि गाज़ा में हामास के कब्जे में मौजूद बंधकों को सोमवार या मंगलवार को रिहा कर दिया जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि वे मिस्र में आयोजित होने वाली समझौते की हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस कैबिनेट बैठक में बताया कि बुधवार को बंधकों की रिहाई और गाज़ा के पुनर्निर्माण के पहले चरण पर समझौता हुआ. हामास 72 घंटे के संघर्षविराम के बाद 20 बचे बंधकों को एक साथ रिहा करेगा. ट्रंप ने इसे खुशी का दिन बताया और कहा कि इससे क्षेत्र में “स्थायी शांति” की उम्मीद है. गाजा डील और नेतन्‍याहू की मुश्किलें इजरायल और हमास के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष में यह सीजफायर डील बेहद अहम मानी जा रही है. इसमें सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में मानवीय सहायता बढ़ाने की बात कही गई है. इजरायल के भीतर इस समझौते को लेकर मतभेद हैं. कुछ नेता मानते हैं कि यह आतंक के आगे झुकना है, तो कुछ इसे जरूरी राहत बता रहे हैं. ऐसे वक्त में नेतन्‍याहू का मोदी से बात करना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि कूटनीतिक संदेश है कि भारत न सिर्फ गाजा संकट पर नज़र रखे हुए है, बल्कि शांति के हर प्रयास का समर्थन कर रहा है. पीएम मोदी ने इजरायल को बताया भारत का मित्र प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू हमेशा से भारत के घनिष्ठ मित्र रहे हैं और दोनों देशों के बीच यह मित्रता आने वाले समय में भी और मजबूत रहेगी. मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल के रिश्ते आपसी विश्वास, सहयोग और समान मूल्यों पर आधारित हैं और यह संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने मोदी का इजरायल के प्रति समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि भारत और इजरायल आगे भी करीबी साझेदारी और समन्वय के साथ विभिन्न मुद्दों पर साथ काम करते रहेंगे. पीएम ने की ट्रंप से बात गुरुवार को इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की और उन्हें अमेरिका की ओर से कराए गए गाजा शांति समझौते के पहले चरण की सफलता पर बधाई दी. यह तीन हफ्तों में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दूसरी फोन कॉल थी. प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की इस ऐतिहासिक शांति योजना को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, मैंने मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रंप से बात की और ऐतिहासिक गाजा शांति योजना की सफलता पर उन्हें बधाई दी. व्यापारिक वार्ताओं में हुई अच्छी प्रगति की भी समीक्षा की. गाजा में हुआ युद्धविराम अमेरिका ने घोषणा की कि इजराइल और हमास — जो पिछले दो साल से एक-दूसरे से लड़ रहे हैं — उन्होंने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर सहमति बना ली है. इस पहले चरण में गाजा पट्टी में युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाएगा और इजराइली बंधकों और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की जाएगी. यह युद्ध उस समय शुरू हुआ जब 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइली पर हमला किया था. इस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हो गई थी और हमास ने 251 लोगों को बंधक बना लिया था, जिनमें से अब भी 50 से अधिक लोग उसकी कैद में हैं. इजराइल ने इस हमले के बाद गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया. फिलिस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं. यह शांति समझौता उस लंबे संघर्ष में एक अहम मोड़ माना जा रहा है, जिसने गाजा … Read more

शांति वार्ता के बावजूद तनाव बना रहा — इजरायल का वचन: हमास को निरस्त्रीकरण करेंगे

इजरायल इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि हमास को या तो आसान तरीके से या कठिन तरीके से निशस्त्र किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब फिलस्तीनी संगठन हमास ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के कुछ हिस्सों को स्वीकार कर लिया है, जिसमें सभी बंधकों की रिहाई भी शामिल है। नेतन्याहू ने कहा कि गाजा से इजरायल की पूर्ण सैन्य वापसी नहीं होगी और यह क्षेत्र अब भी इजरायली नियंत्रण में रहेगा। उन्होंने कहा, “इजरायली सेना गाजा में जिन इलाकों पर नियंत्रण रखती है, उन्हें बनाए रखेगी। योजना के दूसरे चरण में हमास को या तो कूटनीतिक रूप से या हमारी सैन्य कार्रवाई के जरिए निशस्त्र किया जाएगा। या तो आसान रास्ते से या कठिन रास्ते से, निपटा दिया जाएगा।'' नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में गाजा से सभी इजरायली बंधकों की रिहाई की घोषणा की जा सकेगी। उन्होंने कहा, “हम एक बहुत बड़ी उपलब्धि के कगार पर हैं। यह अभी अंतिम नहीं है, लेकिन हम दिन-रात काम कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि सुक्कोत पर्व के दौरान मैं सभी बंधकों की वापसी की घोषणा कर सकूंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि इजरायली सेना (IDF) अभी भी गाजा पट्टी के गहरे हिस्सों में तैनात है और वहां नियंत्रण बनाए हुए है। हमास ने ट्रंप की योजना के हिस्से किए स्वीकार शुक्रवार रात हमास ने ट्रंप की गाजा शांति योजना के कुछ हिस्सों को मंजूरी दी, जिनमें युद्ध समाप्ति, इजरायल की चरणबद्ध वापसी, इजरायली बंधकों और फिलस्तीनी कैदियों की रिहाई, गाजा में राहत और पुनर्निर्माण कार्य और फिलस्तीनियों को क्षेत्र से निष्कासन के विरोध का वचन शामिल है। ट्रंप ने इससे पहले हमास को अंतिम चेतावनी दी थी कि वह रविवार शाम 6 बजे (अमेरिकी समयानुसार) तक प्रस्ताव स्वीकार करे, वरना नरक टूट पड़ेगा। ट्रंप ने हमास को जल्द से जल्द शांति समझौते पर सहमत होने की सलाह दी, साथ ही इजरायल को भी गाजा पर बमबारी रोकने की चेतावनी दी थी। हालांकि, चेतावनी के कुछ ही घंटे बाद इजरायल ने गाजा पर हवाई हमले किए, जिनमें छह लोगों की मौत हो गई। रॉयटर्स के मुताबिक, एक हमले में गाजा सिटी में चार और खान यूनिस में दो लोगों की जान गई। रविवार को ट्रंप ने दावा किया कि इजरायल प्रारंभिक वापसी रेखा पर सहमत हो गया है और जैसे ही हमास इसकी पुष्टि करेगा, तुरंत युद्धविराम लागू हो जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने जो रेखा तय की है, उस पर इजरायल सहमत हो गया है। जब हमास पुष्टि करेगा, युद्धविराम तुरंत लागू होगा, बंधक और कैदी वापसी शुरू होगा और यह 3,000 साल पुराने संघर्ष के अंत की दिशा में बड़ा कदम होगा।” मिस्र में सोमवार से वार्ता शुरू इजरायल और हमास की प्रतिनिधि टीमें सोमवार से मिस्र में होने वाली वार्ता में हिस्सा लेंगी जहां युद्धविराम और गाजा के भविष्य पर आगे की रूपरेखा तय होने की उम्मीद है।  

नेतन्याहू का दांव: गाजा संघर्ष के बीच ट्रंप से मीटिंग, US में युद्धविराम की आस

गाजा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समय वॉशिंगटन में हैं। आज (सोमवार, 29 सितंबर को) उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होने वाली है। इससे पहले नेतन्याहू ने कहा है कि वह वाइट हाउस के साथ गाजा में एक नए युद्धविराम योजना पर काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इसका कोई विवरण नहीं दिया और सिर्फ इतना कहा कि इसके विवरण तय किए जा रहे हैं। नेतन्याहू का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब एक तरफ इजरायली फौज गाजा में लगातार आगे बढ़ रही है और ताबड़तोड़ हमले कर रही है, ताकि शहर को हमास से मुक्त कराया जा सके। वहीं दूसरी तरफ, नेतन्याहू पर गाजा युद्ध को समाप्त करने का भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। इस बीच, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि इजरायल और हमास के बीच लगभग तीन साल से जारी युद्ध में मारे गए फिलिस्तीनी नागरिकों की संख्या अब बढ़कर 66,000 से अधिक हो गई है। वाइट हाउस में सोमवार को होने वाली ट्रंप-नेतन्याहू की बैठक में, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गाजा में युद्ध समाप्त करने के लिए एक नया प्रस्ताव साझा करने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि ट्रंप इसके लिए 21 सूत्री प्रस्ताव का ऐलान कर सकते हैं। इसी के मद्देनजर नेतन्याहू के सुर में बदलाव देखा गया है। नेतन्याहू ने फॉक्स न्यूज़ संडे के 'द संडे ब्रीफिंग' में कहा, “हम इस पर काम कर रहे हैं। इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन हम राष्ट्रपति ट्रंप की टीम के साथ काम कर रहे हैं, और मुझे उम्मीद है कि हम इसे सफल बना सकते हैं।” 21-सूत्रीय प्रस्ताव में तत्काल युद्धविराम योजना की जानकारी रखने वाले अरब अधिकारियों का कहना है कि 21-सूत्रीय प्रस्ताव में तत्काल युद्धविराम, हमास द्वारा बंधक बनाए गए सभी लोगों को 48 घंटों के भीतर रिहा करने और गाजा से इजरायली सेना की क्रमिक वापसी की बात शामिल है। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर एसोसिएट प्रेस से यह बात कही क्योंकि प्रस्ताव की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। अधिकारियों ने कहा कि प्रस्ताव अंतिम नहीं है और इसमें बदलाव की पूरी संभावना है। अरब नेताओं के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा दरअसल, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में अरब नेताओं के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी। हमास के एक अधिकारी ने कहा कि समूह को योजना के बारे में जानकारी दे दी गई है, लेकिन अभी तक मिस्र और कतर के मध्यस्थों से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। हमास ने कहा है कि वह ‘किसी भी प्रस्ताव का सकारात्मक और जिम्मेदारी से अध्ययन करने’ के लिए तैयार है। गाजा में अभी भी 48 लोग बंधक बता दें कि नेतन्याहू ने हमास के खात्मे तक लड़ाई जारी रखने की कसम खाई है। हालांकि, उन्होंने संघर्ष समाप्त करने वाले समझौते के तहत हमास के गुर्गों को गाजा छोड़ने की अनुमति देने की पेशकश दोहराई है। बता दें कि 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के आतंकी हमले के बाद से इजरायल ने हमास के ठिकानों को नेस्तनाबूद करना शुरू कर दिया था। गाजा में आक्रमण उसी रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, "अगर वे युद्ध खत्म कर देते हैं, सभी बंधकों को रिहा कर देते हैं, तो हम उन्हें छोड़ देंगे।" गाजा में अभी भी 48 लोग बंधक है। सीजफायर की बात क्यों करने लगे नेतन्याहू? दरअसल, नेतन्याहू पर युद्ध समाप्त करने के लिए काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव है। इजरायली आपत्तियों के बावजूद, प्रमुख पश्चिमी सहयोगी देश फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने वाले देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो गए हैं। अमेरिका पर भी इस युद्ध को रुकवाने का दबाव बढ़ गया है। दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ इजरायल के खिलाफ प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है और उसके खिलाफ खेल एवं सांस्कृतिक बहिष्कार के प्रयास भी तेज हो गए हैं।