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पेंटागन डील के बाद OpenAI पर संकट, यूजर्स का ChatGPT अकाउंट डिलीट करने का सिलसिला, Claude AI को मिला फायदा

नई दिल्ली दुनिया के सबसे लोकप्रिय एआई चैटबॉट ChatGPT के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. हाल ही में OpenAI द्वारा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिलाने की खबर ने आम यूजर्स को नाराज कर दिया है. लोग इस कदर गुस्से में हैं कि सोशल मीडिया पर डिलीट चैटजीपीटी (#DeleteChatGPT) ट्रेंड करने लगा है. आलम यह है कि लोग न सिर्फ अपने अकाउंट डिलीट कर रहे हैं, बल्कि ऐप स्टोर पर इसे वन-स्टार की रेटिंग भी दे रहे हैं |  क्या है पूरा विवाद? यह विवाद तब शुरू हुआ, जब OpenAI कंपनी ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के साथ हाथ मिला लिया. इससे पहले ChatGPT सैन्य और युद्ध संबंधी कार्यों के लिए इस्तेमाल न होने की बात कह रहा था. अब पेंटागन के साथ समझौते का मतलब है कि OpenAI की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अपनी रणनीतियों और साइबर सिक्योरिटी के लिए करेगी. यूजर्स का मानना है कि जो एआई 'मानवता की भलाई' के लिए बनाया गया था, अब उसका इस्तेमाल युद्ध और सैन्य उद्देश्यों के लिए होना इस सिद्धांत के खिलाफ है. इसी डर और नाराजगी के कारण पिछले कुछ दिनों में ChatGPT को डिलीट करने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है |  क्या है पूरा मामला? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में बताया कि OpenAI ने Department of Defense के साथ अपने एग्रीमेंट में कुछ अहम बदलाव किए हैं|   उन्होंने बताया की ऐसा इसलिए क्योंकि यह साफ हो सके कि कंपनी के AI सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा|  उन्होंने साफ लिखा कि कानून के दायरे में रहते हुए AI का इस्तेमाल किया जाएगा और इसे जानबूझकर डोमेस्टिक सर्विलांस के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा|  Altman ने यह भी कहा कि सरकार की तरफ़ से अगर कोई असंवैधानिक आदेश आता है तो वे उसका पालन नहीं करेंगे|  उनका कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया सबसे ऊपर है और सरकार को फैसले लेने चाहिए, न कि कोई निजी कंपनी दुनिया का भविष्य तय करे. लेकिन विवाद यहीं से शुरू हुआ|  गुस्सा क्यों बढ़ा? TechCrunch की रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही यह खबर फैली कि OpenAI अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ काम कर रही है, बड़ी संख्या में लोगों ने ChatGPT ऐप हटाना शुरू कर दिया|   सिर्फ एक दिन में अनइंस्टॉल में 295 प्रतिशत की उछाल दर्ज किया गया . सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या AI अब युद्ध मशीन का हिस्सा बनने जा रहा है|  कुछ यूजर्स का कहना है कि AI कंपनियों को सेना से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. वहीं कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर AI इतना शक्तिशाली है तो उसे सरकार के साथ जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, ताकि गलत हाथों में न जाए|  Anthropic का नाम क्यों आया बीच में? इस पूरे विवाद में एक और AI कंपनी Anthropic का जिक्र हो रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Anthropic ने रक्षा विभाग के साथ कुछ शर्तों पर असहमति जताई थी और साफ रुख अपनाया था कि उनकी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल मास सर्विलांस या ऑटोनोमस हथियारों में नहीं होना चाहिए|  इसके बाद OpenAI ने अपनी डील आगे बढ़ाई. इससे यह बहस और तेज हो गई कि आखिर AI कंपनियां किस दिशा में जा रही हैं. क्या वे सरकार के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत कर रही हैं या एक खतरनाक रास्ते की ओर बढ़ रही हैं? Altman ने क्या माना? Sam Altman ने अपनी पोस्ट में यह भी स्वीकार किया कि डील को लेकर कम्युनिकेशन बेहतर हो सकता था. उन्होंने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है और इसे जल्दी में सार्वजनिक करना शायद सही तरीका नहीं था|  उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी अभी कई मामलों में पूरी तरह तैयार नहीं है और सुरक्षा को लेकर बहुत सावधानी जरूरी है|  उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में OpenAI सरकार के साथ मिलकर तकनीकी सुरक्षा उपायों और सेफगार्ड पर काम करेगा ताकि AI का गलत इस्तेमाल न हो|  यह सब अभी क्यों अहम है? दुनिया इस वक्त युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रही है. साइबर हमले, ड्रोन टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और इंटेलिजेंस में AI का रोल तेजी से बढ़ रहा है|  ऐसे समय में अगर कोई बड़ी AI कंपनी सीधे रक्षा विभाग के साथ काम करती है तो यह सिर्फ टेक्नोलॉजी की खबर नहीं रहती, यह राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता का मुद्दा बन जाती है|  एक तरफ सरकारें कहती हैं कि AI से देश की सुरक्षा मजबूत होगी. दूसरी तरफ नागरिक अधिकार समूह चेतावनी दे रहे हैं कि निगरानी और डेटा कंट्रोल का दायरा खतरनाक रूप ले सकता है|  असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद का केंद्र एक ही है. AI पर कंट्रोल किसका होगा? सरकार का, निजी कंपनी का या जनता की लोकतांत्रिक निगरानी का? Sam Altman का कहना है कि लोकतंत्र को नियंत्रण में रहना चाहिए और AI को लोगों को ताकत देनी चाहिए, उनसे छीननी नहीं चाहिए. लेकिन जनता का एक हिस्सा आश्वस्त नहीं है. अनइनस्टॉल के आंकड़े यही दिखा रहे हैं|  आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है, क्योंकि AI अब सिर्फ चैटबॉट नहीं रहा. यह सुरक्षा, युद्ध, साइबर ऑपरेशन और रणनीतिक फैसलों का हिस्सा बन रहा है. ऐसे में हर डील, हर बयान और हर फैसला वैश्विक बहस का विषय बनेगा. और यही वजह है कि Pentagon और OpenAI की यह डील सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि AI के भविष्य की दिशा तय करने वाली कहानी बन चुकी है|  Sam Altman ने अपने ट्वीट में क्या-क्या साफ किया? Sam Altman ने अपने लंबे पोस्ट में सबसे पहले यह कहा कि OpenAI और अमेरिकी रक्षा विभाग के बीच जो एग्रीमेंट हुआ है, उसमें खास भाषा जोड़ी गई है ताकि कंपनी के सिद्धांत बिल्कुल साफ रहें|  उन्होंने लिखा कि AI सिस्टम का इस्तेमाल जानबूझकर अमेरिकी नागरिकों की निगरानी के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने अमेरिकी संविधान, फोर्थ अमेंडमेंट और FISA जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि सब कुछ कानूनी दायरे में ही होगा|  प्राइवेसी एडवोकेट्स इसे दिखावा मान रहे हैं  Altman ने यह भी साफ किया कि Department of Defense ने यह समझा है कि यह लिमिटेशन … Read more

ChatGPT का बढ़ता क्रेज: भारत में युवा इसे कोडिंग, पढ़ाई और काम में कर रहे हैं इस्तेमाल, रिपोर्ट में खुलासा

मुंबई   भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के इस्तेमाल के मामले में एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है. ओपनएआई के नए डेटा के मुताबिक, भारत अब चैटजीपीटी का अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा मार्केट बन चुका है. भारत में चैटजीपीटी के वीकली एक्टिव यूज़र्स की संख्या 10 करोड़ से भी आगे पहुंच चुकी है. इसमें खास बात यह है कि भारतीय यूज़र्स सिर्फ एआई को आज़मा नहीं रहे, बल्कि इसे अपनी डेली-लाइफ के काम और प्रोफेशनल जरूरतों के लिए गंभीरता से इस्तेमाल भी कर रहे हैं. ओपनएआई की नई पब्लिक डेटा पहल 'OpenAI Signals' की रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में यूज़र्स टेक्निकल टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल एवरेज से कहीं ज्यादा कर रहे हैं. खासतौर पर कोडिंग और डेटा एनालिसिस के मामले में भारत काफी तेजी से आगे निकल रहा है. प्लस और प्रो सब्सक्राइबर्स के बीच डेटा एनालिसिस टूल्स का इस्तेमाल ग्लोबल औसत से करीब चार गुना ज्यादा है. वहीं, कोडिंग से जुड़े के लिए Codex का इस्तेमाल लगभग तीन गुना ज्यादा देखा गया है. OpenAI के सीईओ सैम अल्टमैन ने भी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के बाद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल के जरिए यही बात कही है. ChatGPT यूज़ करने के तरीके भारत में आंकड़ा ग्लोबल तुलना मुख्य नोट्स वीकली एक्टिव यूजर्स 100 मिलियन से ज्यादा US के बाद दूसरा सबसे बड़ा सबसे तेज Codex ग्रोथ कोडिंग (Coding / Codex) 3x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से 3 गुना तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु सबसे आगे डेटा एनालिसिस 4x ज्यादा (Plus/Pro) ग्लोबल एवरेज से 4 गुना एडवांस टूल्स में हाई यूज लर्निंग/एजुकेशन 2x ज्यादा ग्लोबल मीडियन से दोगुना युवा सबसे आगे वर्क-रिलेटेड मैसेजेस 35% ग्लोबल: 30% ड्राफ्टिंग, डिबगिंग, स्पीड-अप प्रैक्टिकल गाइडेंस (नॉन-वर्क) 35% – सेल्फ-लर्निंग, डिसीजन मेकिंग जनरल जानकारी / राइटिंग दोनों कामों के लिए 20% – बेसिक क्वेरीज और कंटेंट उम्र ग्रुप 18-24: 50% 18-34: 80% 18-24: 33% युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर)   चैटजीपीटी का सबसे एडवांस यूज़ कर रहा भारत रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय यूज़र्स कोडिंग से जुड़े सवाल भी दुनियाभर के यूजर्स की तुलना में करीब तीन गुना ज्यादा पूछ रहे हैं. वहीं, पढ़ाई और लर्निंग से जुड़े सवालों में भी भारत ग्लोबल एवरेज से लगभग दोगुना आगे है. जियोग्राफिक तौर पर देखें तो तेलंगाना, कर्नाटका और तमिलनाडु जैसे टेक हब्स में कोडिंग से जुड़ा इस्तेमाल सबसे ज्यादा देखने को मिला है. इसके अलावा भारत में लोग काम से जुड़े कामों के लिए भी चैटजीपीटी का काफी इस्तेमाल करते हैं और इसमें भी तेजी से बढ़ोतरी आई है. करीब 35% कंज्यूमर मैसेजेस सीधे काम से जुड़े होते हैं, जबकि ग्लोबल लेवल पर यह आंकड़ा लगभग 30 प्रतिशत है. ऑफिस वर्क में लोग ड्राफ्टिंग, एडिटिंग, टेक्निकल हेल्प, डिबगिंग और काम को तेज करने के लिए चैटजीपीटी पर भरोसा कर रहे हैं. भारत के यूज़र्स काम के अलावा भी चैटजीपीटी का काफी प्रैक्टिल तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. लगभग 35% नॉन-वर्क मैसेजेस किसी न किसी तरह की प्रैक्टिकल गाइडेंस से जुड़े होते हैं. इसके अलावा करीब 20% मैसेजेस जनरल जानकारी और 20% राइटिंग से जुड़े होते हैं. इससे साफ है कि लोग सेल्फ लर्निंग, डिसीजन मेकिंग और पर्सनल प्रोडक्टिविटी के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं.     18-24: 33%    युवा (स्टूडेंट्स/अर्ली करियर) उम्र के लिहाज से देखें तो भारत में चैटजीपीटी का इस्तेमाल युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है. 18 से 24 साल के यूज़र्स कुल मैसेजेस का लगभग आधा हिस्सा भेजते हैं. वहीं, 18 से 34 साल के यूज़र्स मिलकर करीब 80% मैसेजेस करते हैं. OpenAI के चीफ इकोनॉमिस्ट रोनी चैटर्जी का कहना है कि एआई को अपनाने की रफ्तार इतनी तेज है कि उसे मापने वाले टूल्स भी पीछे छूट रहे हैं. उनका मानना है कि OpenAI Signals भारत में एआई को लेकर चर्चा को हाइप से निकालकर डेटा के आधार पर समझने में मदद करेगा.

AI की दुनिया में अगला धमाका: OpenAI लॉन्च करेगा अपना स्पेशल डिवाइस

नई दिल्ली OpenAI का नाम आते ही लोगों के जेहन में एक सॉफ्टवेयर का ख्याल आता है. मगर कंपनी अब हार्डवेयर सेक्टर में एंट्री करना चाहती है. कंपनी ने कुछ वक्त पहले ही ऐलान किया है कि वो इस साल के अंत तक AI इनेबल हार्डवेयर प्रोडक्ट लॉन्च कर सकते हैं. कंपनी इससे पहले एक नया प्रोडक्ट लॉन्च कर सकती है.  2026 के अंत में कंपनी AI इनेबल डिवाइस को लॉन्च करेगी, जो लोगों के लिए 2027 में मिलेगा. अब एक लीक सामने आई है, जिसमें कंपनी के अपकमिंग हार्डवेयर की जरूरी डिटेल्स हैं. ये एक नॉन-AI डिवाइस हो सकता है. आइए जानते हैं इसकी डिटेल्स.  क्या होगा कंपनी का पहला डिवाइस? टिप्स्टर स्मार्ट पिकाचू के मुताबिक, OpenAI का पहला हार्डवेयर ईयरबड्स होंगे. इन ईयरबड्स का नाम Dime हो सकता है. हालांकि, कंपनी इसका बेसिक वर्जन रिलीज करेगी. ये संभवतः कंपनी के अपने ड्रीम डिवाइस के लॉन्च से पहले का वॉर्मअप हो सकता है.  OpenAI से जुड़ी एक पेटेंट फाइलिंग चीन में पब्लिक की गई है. इस फाइलिंग के मुताबिक प्रोडक्ट का नाम Dime होगा. टिप्स्टर का कहना है कि कंपनी पहले सिंपल ईयरबड्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा OpenAI के स्मार्टफोन जैसे डिवाइस को लॉन्च होने में वक्त लगेगा.  फोन जैसा डिवाइस भी लाएगी कंपनी इसकी वजह HBM स्टोरेज है जो मैटेरियल की कीमत को बढ़ा सकती है. कंपनी का स्मार्टफोन जैसा डिवाइस कंप्यूटर जैसी पावर के साथ आएगा. इससे पहले OpenAI के चीफ ग्लोबल अफेयर ऑफिसर क्रिस लेहेन ने बताया था कि इस साल के अंत तक वे पहला AI डिवाइस लॉन्च करेंगे. हालांकि, लॉन्च की निश्चित तारीख की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई हैं. OpenAI ने हाल में ही नया AI मॉडल एजेंटिक कोडिंग को लॉन्च किया है, जिसका नाम GPT-5.3-Codex है. ये मॉडल सभी पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध है. कंपनी का कहना है कि ये डिवाइस पिछले वर्जन के मुकाबले 25 परसेंट फास्ट होगा.

AI बनेगा नया ‘कर्मचारी’! सैम ऑल्टमैन की OpenAI ने पेश किया Frontier, इंसानों का भविष्य क्या?

नई दिल्ली OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि आने वाले समय में कंपनियों में AI का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होगा और ऑफिस में AI टीम्स काम करेंगी। इस काम के लिए OpenAI ने Frontier नाम का एक नया एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म पेश किया है। यह प्लेटफॉर्म कंपनियों के लिए AI कर्मचारी बनाने का काम करेगा। बतौर सैम ऑल्टमैन लोग कंपनियों में AI एजेंट्स की टीम को संभालेंगे। इसका मतलब है कि भविष्य में इंसानी कर्मचारियों की जगह AI एजेंट्स लें लेंगे और उन AI कर्मचारियों को संभालने का काम कुछ लोगों का होगा। X पर एक पोस्ट कर सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि भविष्य में वही कंपनियां कामियाब होंगी, जो AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करेंगी और जहां लोग इन AI एजेंट्स की टीमों को मैनेज करेंगे। क्या है Frontier और क्या काम करेगा? रिपोर्ट के अनुसार, (REF.) Frontier को खास तौर पर बड़ी एंटरप्राइज कंपनियों के लिए ही बनाया गया है। इसके जरिए वह अपने इंटरनल सिस्टम में काम करने वाले AI एजेट्स को आसानी से मैनेज कर पाएंगी। गौर करने वाली बात है कि AI एजेंट्स इंसानी कर्मचारियों की तरह काम करते हैं। इन्हें इंसानों की तरह ही कंपनी के बारे में समझाया जाता है, इनकी भी ट्रेनिंग होती है और यह भी फीडबैक से सीखते हैं। इसके साथ ही हर एजेंट की पहचान और सुरक्षा सीमाएं होती हैं। कैसे काम करेंगे AI एजेंट्स Open AI का Frontier प्लेटफॉर्म कंपनियों के डेटा वेयरहाउस, CRM सिस्टम और टिकट टूल्स जैसे इंटरनल ऐप्स से कनेक्ट हो जाएगा। इससे कंपनी और उनके कामकाज के तरीके को लेकर AI की समझ और भी बेहतर होती है। इस तहह से AI एजेंट्स फाइलों के साथ काम कर सकेंगे, कोड चला सकेंगे और बिना किसी नए डेटा फॉर्मेट के मौजूदा एंटरप्राइज टूल्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। ऑल्टमैन के मुताबिक, (REF.) उनका प्लेटफॉर्म Codex का इस्तेमाल करता है ताकि कंपनिया या थर्ड पार्टी डेवलपर्स सुरक्षित एजेंट बना सकें। OpenAI ने इन्हें बेहतर बनाने के लिए इन-बिल्ट इवैल्यूएशन और ऑप्टिमाइजेशन टूल्स भी दिए हैं। अब आगे क्या? लॉन्च के साथ ही दुनिया के ढेरों कंपनियां Frontier को अपना चुकी हैं। इनमें HP, Oracle, Uber, और Thermo Fisher जैसी कंपनियों के नाम शामिल है। इतना ही नहीं Cisco और T-Mobile जैसी कंपनियों में इसके पायलट प्रोग्राम चल रहे हैं। OpenAI अपने प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है ताकि उद्योगों के हिसाब से खास समाधान पेश किए जा सकें। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म कुछ कंपनियों के लिए उपलब्ध हैं लेकिन जल्द ही इसे सभी के लिए खोल दिया जाएगा।

AI की रेस में चीन का Kling आगे? जानिए क्यों दुनियाभर में मचा रहा है तहलका

नई दिल्ली AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से वीडियो बनाने का ट्रैंड इन दिनों काफी चल रहा है। क्रिएटर्स के लिए AI एक जरूरी टूल बन गया है। चीन की कंपनी Kuaishou का Kling प्लेटफॉर्म भी Google के Veo और OpenAI के Sora जैसे बड़े एआई वीडियो एडिटिंग टूल को कड़ी टक्कर दे रहा है। अब इसका नाम भी टॉप एआई एडिटिंग टूल की लिस्ट में शामिल हो गया है। बता दें कि Kling को जून, 2024 में लॉन्च किया गया था। इसके बाद इसने लगभग 1.2 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स का बेस बना लिया है। इसकी सालाना आय लगभग 24 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। इसके बारे में डिटेल में जानते हैं। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में बदली रैंकिंग आजकल एलियन का हमला और डिजिटल इंसानों द्वारा लाइव स्ट्रीमिंग होस्ट करना आम बात हो गई है। वीडियो जनरेशन बेंचमार्क में रैंकिंग बदल रही है। Kling, Google के Veo और OpenAI के Sora के साथ टॉप टियर में अपनी जगह बना चुका है। Kuaishou का Kling समय के साथ-साथ हिट होता जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि इसकी लोकप्रियता इतनी क्यों बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में ही इसने 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की कमाई की थी। इससे इसकी साल भर की कमाई 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गई थी। जनवरी 2025 में, रोजाना की औसत कमाई पिछले महीने की तुलना में लगभग 30% बढ़ गई। तीन कारण से सफल हुआ टूल Kuaishou के अनुसार, Kling जनरेटिव-एआई युग का नया मॉडर्न अवतार बता रहा है। कंपनी ने अप्रैल 2025 में इस टूल के लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई। पिछले साल की अर्निंग कॉल्स में कंपनी के अधिकारी बार-बार इसके बढ़ते यूजर बेस और कमाई का जिक्र करते रहे। Kling के ऑपरेशन हेड Zeng Yushen के अनुसार, इस वीडियो जनरेटर की सफलता के पीछे तीन मेन कारण हैं। इसमें बेहतरीन एआई मॉडल, मजबूत इंटरैक्टिव डिजाइन और क्रिएटर्स के इकोसिस्टम के साथ जुड़ाव शामिल है।

OpenAI उतरेगा हार्डवेयर की दुनिया में, ‘Gumdrop’ बन सकता है iPhone का विकल्प

OpenAI अपना पहला हार्डवेयर डिवाइस "Gumdrop" लॉन्च करने की तैयारी में है, जो iPhone का विकल्प बन सकता है। पेन के आकार का यह स्क्रीन-रहित गैजेट Apple के पूर्व डिजाइन चीफ जोनी आइव द्वारा डिजाइन किया जा रहा है। Foxconn द्वारा निर्मित यह डिवाइस 2026-27 में लॉन्च हो सकता है। कैमरा और माइक्रोफोन से लैस Gumdrop हस्तलिखित नोट्स को डिजिटल टेक्स्ट में बदल सकेगा और OpenAI के AI मॉडल्स को चला सकेगा। जेब या गले में पहनने योग्य यह iPod Shuffle साइज का गैजेट AI-आधारित प्रोडक्टिविटी के जरिए स्मार्टफोन्स को रिप्लेस करने का लक्ष्य रखता है। अब वो दिन दूर नहीं जब आपके फोन की जगह कोई दूसरा डिवाइस ले लेगा। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक, (REF.) OpenAI अपना पहला डिवाइस लॉन्च कर सकता है। इसे आप अपनी जेब में रख पाएंगे और गले में भी पहन सकेंगे। आकार में यह डिवाइस पेन की तरह का होगा। इस डिवाइस पर Apple के पूर्व चीफ डिजाइन ऑफिसर जोनी आइव काम कर रहे हैं, जिनका मकसद OpenAI को आपके iPhone की जगह लेने के लिए तैयार करना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डिवाइस एक छोटा गैजेट होगा, जो कि शक्तिशाली एआई से लैस होगा। यह डिवाइस बिना किसी स्क्रीन के आएगा और बावजूद इसके हर जरूरत को पूरा कर सकेगा। चलिए OpenAI के इस अपकमिंग डिवाइस के बारे में जानते हैं। कहां तैयार हो रहा और कब आएगा? ताइवान की इकोनॉमिक डेली की रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI पहले इस डिवाइस को चीन की Luxshare कंपनी से बनवाने की सोच रही थी लेकिन अमेरिका में चीन की सप्लाई चेन को लेकर चिंताओं के कारण अब OpenAI ने इसके लिए Foxconn को चुना है। यह डिवाइस या तो वियतनाम में बनेगा या अमेरिका में, और 2026-27 के दौरान लॉन्च हो सकता है। गौर करने वाली बात है कि Foxconn पहले से ही OpenAI का मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर है और AI डेटा सेंटर्स को डिजाइन करने से लेकर उन्हें तैयार करने तक का काम संभालता है। ऐसे में नए कंज्यूमर डिवाइस के लिए भी Foxconn को चुनना समझदारी भरा फैसला लगता है। Gumdrop नाम का यह पेन क्या-क्या कर सकेगा? इस डिवाइस का इंटरनल कोडनेम "Gumdrop" है और यह एक स्मार्ट पेन की तरह काम करेगा। इसका साइज iPod Shuffle जितना होगा लेकिन इसमें कोई डेडिकेटेड स्क्रीन नहीं होगी। यह डिवाइस कैमरा और माइक्रोफोन जैसे सेंसर्स की मदद से अपने आसपास की चीजों को समझ सकेगा। सबसे खास बात यह है कि यह OpenAI के AI मॉडल्स को खुद अपने अंदर चला सकेगा, और जब ज्यादा पावर चाहिए होगी तो क्लाउड से मदद ले लेगा। यह आपके हाथ से लिखे नोट्स को टेक्स्ट में बदलकर तुरंत ChatGPT में अपलोड कर देगा। यानी आप जो पेन से लिखेंगे, वे डिजिटल हो जाएगा। बिना स्क्रीन लेगा iPhone की जगह? यह डिवाइस दूसरे डिवाइसेस से बात कर सकेगा, बिल्कुल वैसे जैसे आज हम अपने स्मार्टफोन से करते हैं। इसे वियरेबल की तरह नहीं बनाया जाएगा, लेकिन आप इसे जेब में रख या गले में पहन पाएंगे। यह डिवाइस AI-आधारित प्रोडक्टिविटी का इस्तेमाल करके iPhone को रिप्लेस करने की कोशिश करेगा। OpenAI का मानना है कि भविष्य में लोगों को बड़ी स्क्रीन की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एक छोटा, स्मार्ट और तेज डिवाइस काफी होगा जो AI की ताकत से सब कुछ कर दे। यह पेन जैसा गैजेट उस सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ऐप स्टोर में ChatGPT: जानें कैसे बुक करें घर और ऑर्डर करें राशन

नई दिल्ली सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने ChatGPT के लिए अपना नया ऐप स्टोर लॉन्च किया है। अब यूजर्स चैट के दौरान ही Adobe, Canva और गूगल ड्राइव जैसे ऐप का सीधे इस्तेमाल कर सकेंगे। हाल ही में Adobe के फोटोशॉप और एक्रोबेट जैसे फीचर्स जोड़े थे, जिसके बाद ऐप डायरेक्टरी के लाइव होने की चर्चा शुरू हो गई थी। ऐप स्टोर का फायदा होगा कि आप चैट करते-करते सिर्फ जानकारी ही नहीं लेंगे, बल्कि ऐप के फंक्शन के साथ अपनी प्रोडक्टिविटी को और बढ़ा सकेंगे। कंपनी का कहना है कि अगर आपको घर की तलाश है तो अब आप चैट के दौरान ही अपार्टमेंट सर्च कर सकते हैं। अगर किराने का सामान ऑर्डर करना है तो बातचीत करते हुए सीधे ग्रॉसरी ऑर्डर की जा सकती है। वहीं, ऑफिस के काम के लिए किसी रफ आउटलाइन को सीधे स्लाइड डेक या प्रेजेंटेशन में बदला जा सकता है। इस ऐप स्टोर पर जो ऐप हैं, वह आपके मोबाइल या कंप्यूटर पर इंस्टॉल नहीं होंगे, बल्कि Connect बटन पर क्लिक करके उन्हें सिर्फ ऑथराइजेशन (अनुमति) देनी होगी। फिलहाल ऐप को फीचर्ड, लाइफस्टाइल और प्रोडक्टिविटी जैसे 3 हिस्सों में बांटा गया है। कैसे कर सकते हैं इस्तेमाल     वेब पर ChatGPT यूज करते हैं तो chatgpt.com/apps पर जाएं।     जिस ऐप को यूज करना चाहते हैं उससे Connect बटन दबाकर कनेक्ट करें।     अगर ChatGPT का मोबाइल ऐप चला रहे हैं तो ऐप के लेफ्ट साइडबार में प्रोफाइल के अंदर Apps का ऑप्शन दिखेगा।     यहां Browse Apps में जाकर अपने जरूरत के ऐप से कनेक्ट करें।     इसके बाद उस ऐप से Chat करने का ऑप्शन दिखने लगेगा। एक बार कनेक्ट होने के बाद चैटिंग बार में बस @ लगाकर ऐप का नाम लिखकर इस्तेमाल कर सकते हैं। पुराने फीचर्स में भी किया बदलाव OpenAI अब एक ऐसे फीचर पर भी काम कर रहा है जिससे बातचीत के हिसाब से ChatGPT खुद ही सही ऐप का सुझाव देगा। इसके साथ ही कंपनी ने पुराने कनेक्टर्स के नाम भी बदल दिए हैं। अब गूगल ड्राइव या ड्रॉपबॉक्स जैसे फीचर्स को Apps with file search या Apps with sync के नाम से जाना जाएगा। प्राइवेसी और डेटा का भी रखा ध्यान सुरक्षा के लिहाज से कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये ऐप ChatGPT के मेमोरी फीचर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर सेटिंग्स में AI मॉडल को बेहतर बनाने वाला विकल्प चुना है, तो आपकी जानकारी का इस्तेमाल भविष्य के मॉडल्स को ट्रेनिंग देने के लिए भी किया जा सकता है।

Sam Altman का बड़ा कदम: OpenAI रोबोटिक्स में ऐपल के Ex-इंप्लॉइज और ATLAS के साथ

नई दिल्ली OpenAI ने हाल ही में अपना पहला Agentic AI ब्राउजर ATLAS लॉन्च किया. इसके तुरंत बाद गूगल के शेयर गिरे और बताया गया कि 150 बिलियन डॉलर्स का नुकसान हो गया. लेकिन असली कहानी सिर्फ ब्राउजर की नहीं है, बल्कि इससे कहीं आगे की है. OpenAI एक ऐसा मार्केट कैप्चर करने की तैयारी में है जो फिलहाल एग्जिस्ट ही नहीं करता है. Agentic AI अभी भी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन सैम ऑल्टमैन अगले कुछ सालों में इस स्पेस को कैप्चर कर लेंगे और गूगल फिर से पिछड़ सकता है.  लगभग 4 साल पहले जब ChatGPT शुरू हुआ था तब हमने आपको बताया था कि कैसे ये कंपनी गूगल को टक्कर देगी और मोनॉपली तोड़ेगी. अभी कमोबेश वैसा हो चुका है. गूगल सर्च में लगाार गिरावट देखी जा रही है और कंपनी को भारी नुकसान भी हो रहा है. लोगों की डिपेंडेंसी गूगल पर कम हो चुकी है,  Agentic AI – कंप्यूटर खुद से करेगा सबकुछ ATLAS ब्राउजर Google Chrome वाले तमाम फीचर्स देता है, लेकिन साथ ही इसमें दिया गया ऐसिस्टेंट आपके कमांड पर खुद से काम करता है. निश्चित तौर पर ये ब्राउजर गूगल क्रोम को टक्कर देगा.  ATLAS लॉन्च के दूसरे दिन ही OpenAI ने ऐलान किया कि उन्होंने Apple Shortcut बनाने वाली टीम को खरीद लिया यानी उनका अधिग्रहण कर लिया. दरअसल जिस टीम ने ऐपल का बड़ा ऑटोमेशन ऐप Shortcut बनाया था अब वो OpenAI के पास है. इस टीम ने सबसे पहले Workflow बनाया था जिसके बाद ऐपल ने इस टीम को खरीदा और उनसे Shortcut ऑटोमेशन बनवाया था.  मैकबुक में ऑटोमेशन का डीप इंटीग्रेशन करती है Sky टीम  ऐपल की वो टीम जिन्होंने 'शॉर्टकट' बनाया था उन्होंने पहले ही ऐपल छोड़ दिया था. यही टीम SKY AI चला रही थी. Sky की टीम AI पावर्ड नैचुरल लैंगवेज इंटरफेस पर काम कर रही थी. दरअसल ये इंटरफेस भी ऐपल के मैक कंप्यूटर्स के लिए है जो डेस्कटॉप पर आपके एजेंट की तरह काम करता है और यूजर्स इसके जरिए कोडिंग से प्लानिंग तक कर सकते हैं.  जैसे ChatGPT जैसा टूल वेब पर काम करता है उसी तरह Sky मैकबुक में नेटिव लेवल पर काम करता है और बिना यूजर के इंटरवेंशन के खुद से टास्क कंपलीट करता है. उदाहरण के तौर पर आप मैकबुक से सिर्फ Sky के जरिए कोई भी टास्क परफॉर्म करा सकते हैं.  खुद से काम करेगा कंप्यूटर  ये पूरा खेल ऑटोमेशन का है. यानी अब तक कंप्यूटर को आप चलाते हैं, लेकिन फ्यूचर में कंप्यूटर खुद से सबकुछ करेगा आपको बस कमांड देना है. क्या कम्प्यूटिंग का मॉडल वाकई बदलने वाला है? तीन दशक तक हमारा रिश्ता कंप्यूटर से एक ही तरह का रहा. हम क्लिक करते हैं, टाइप करते हैं, और सिस्टम उसका जवाब देता है. Open AI उस व्यवस्था को उलटने की कोशिश कर रहा है. जहां इंसान सिर्फ बताता है कि उसे क्या चाहिए, और सिस्टम खुद सबकुछ संभालता है. यह बदलाव जितना तकनीकी है, उतना ही प्रैक्टिकल भी, क्योंकि डिजिटल दुनिया में समय, ध्यान और नेविगेशन से जुड़ी थकान एक प्रॉब्लम बन चुकी है.  ATLAS और SKY मिल करेंगे धमाल  ATLAS ब्राउजर लॉन्च हो ही चुका है और अब SKY की टीम यानी 12 पूर्व ऐपल इंप्लॉइज भी अब OpenAI के पास है. ओपनएआई ने SKY को इसलिए एक्वायर किया है ताकि ChatGPT जैसे टूल्स सिर्फ चैटबॉट न रहें, बल्कि आपका कंप्यूटर एजेंट की तरह सारे काम खुद कर सके. ओपनएआई का मकसद है, AI को आपके OS, ऐप्स, ब्राउज़र और फाइल्स के अंदर गहराई से इंटीग्रेट करना ताकि आप कोई भी टास्क कहें और AI उसे अंजाम दे दे. Sky टीम, जो ऑटोमेशन में एक्सपर्ट है, अब OpenAI के साथ मिलकर अगले जनरेशन का कंप्यूटिंग मॉडल तैयार कर रही है.  रेस में OpenAI के पीछे क्यों दिख रहा Google? AI रेस में कुछ समय तक के लिए गूगल पिछड़ जरूर गया था, लेकिन अब तेजी से कैचअप कर रहा है. हालांकि अब भी देखें तो ऐसा लगता है कि गूगल लगतार दूसरी AI कंपनियां को टक्कर दे रही हैं जिनमे से एक बड़ा नाम Perplexity का भी है. हाल ही में Perplexity ने Comet एजेंटिक ब्राउजर लॉन्च किया था और तुरंत बाद गूगल ने भी क्रोम ब्राउजर में ऐसिस्टेंट दे दिया. अब मार्केट में OpenAI का ATLAS आ गया है और इसका पूरा नुकसान Google Chrome को होगा. क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट ने भी एजेंटिक AI ब्राउजर लॉन्च किया है जो सीधी टक्कर गूगल को ही देगा.  Open AI में माइक्रोसॉफ्ट ने भी काफी निवेश किया है, इसलिए गूगल के लिए ये पूरा डेवेलपमेंट परेशानी का सबब बन सकता है. इसलिए अगर आपका ऐसा लगता है कि गूगल की मोनोपली कोई तोड़ नहीं सकता तो गलत हैं. गूगल की मोनॉपली ऑलरेडी कई टेक कंपनियां तोड़ रही हैं.  दो साल पहले तक कोई ये नहीं सोच रहा था कि गूगल सर्च को कोई टक्कर दे ही नहीं सकता. लेकिन अब सबकुछ बदल चुका है और गूगल सर्च का ट्रैफिक हर दिन गिर रहा है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि एजेंटिक AI की रेस में गूगल दूसरों से आगे निकलने के लिए क्या बड़ा करता है. 

यूज़र्स के लिए बड़ा बदलाव – ChatGPT से नहीं मिल पाएगी मेडिकल, वित्तीय या कानूनी सलाह

नई दिल्ली एआई चैटवाट अपने उपयोग कर्ताओं को मेडिकल, वित्तीय और कानून से संबंधित सलाह नहीं देगा।चैट जीपीटी की पेरेंट कंपनी ने मुकदमे बाजी और जिम्मेदारी से बचने के लिए,भारत के प्लेटफार्म पर यह कदम उठाया है। कंपनी का कहना है, यह कदम चैट जीपीटी का उपयोग करने वाले उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और उनकी कानूनी जिम्मेदारी से बचने के लिए यह निर्णय लिया है। वर्तमान निर्णय के पश्चात अब चैटवाट मुकदमे से बचने के लिए कानूनी जानकारी, निवेश इत्यादि से संबंधित  तथा स्वास्थ्य से संबंधित दावों के बारे में सुझाव और सलाह की जिम्मेदारी नहीं लेगा। कंपनी को डर है,  जिस तरह की जानकारी चैट जीपीटी द्वारा दी जाती है।भारत में उस जानकारी को लेकर मुकदमेबाजी का शिकार होना पड़ सकता है। जिसके कारण कंपनी ने जिम्मेदारी से हटा लिया है। अब उपयोगकर्ता अपने स्तर पर निर्णय करेगा, उसे वह जानकारी सही लगती है, या गलत है। अब क्या बदल जाएगा? नए नियमों के बाद ChatGPT यूजर्स को दवाओं के नाम, उनकी मात्रा, मुकदमे की टेंपलेट, कानूनी रणनीति और निवेश से जुड़ी सलाह नहीं देगा. अब यह केवल जनरल प्रिंसिपल, बेसिक मैकेनिज्म की जानकारी और लोगों को डॉक्टर, वकीलों और वित्तीय सलाहकारों जैसे प्रोफेशनल्स से कंसल्टेशन करने की सलाह देगा.  29 अक्टूबर से ChatGPT ने इलाज, कानूनी मुद्दों और पैसों के बारे में सलाह देना बंद कर दिया है। यह बॉट अब आधिकारिक तौर पर एक एजुकेशनल टूलहै, न कि एक सलाहकार और नई शर्तें इसे स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। नए नियमों के तहत, अब चैटजीपीटी न ही आप लोगों को दवा का नाम या खुराक का सुझाव देगा, न ही कानूनी रणनीति बनाने में मदद करेगा और न ही निवेश संबंधी खरीद और बिक्री की सलाह देगा। क्यों किया जा रहा है यह बदलाव? पिछले कुछ समय से कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जब लोग ChatGPT से मिली सलाह का पालन कर खुद को नुकसान पहुंचा चुके हैं. अगस्त में एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एक 60 वर्षीय बुजुर्ग ने ChatGPT से सलाह लेकर नमक की जगह सोडियम ब्रोमाइड खाना शुरू कर दिया था. इससे उसे मानसिक समस्याएं होने लगीं, जिसके बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसी तरह एक और मामले में अमेरिका के एक 37 वर्षीय व्यक्ति को खाना निगलने में समस्या हो रही थी. उसने ChatGPT से इस बारे में पूछा तो चैटबॉट ने बताया कि कैंसर के कारण ऐसा होना बहुत मुश्किल है. वह व्यक्ति इससे संतुष्ट हो गया और उसने समय पर डॉक्टर से संपर्क नहीं किया. बाद में जब कैंसर चौथी स्टेज पर पहुंच गया, तब जाकर वह डॉक्टर के पास पहुंचा.

OpenAI का नया कदम: ChatGPT में जोड़ा जाएगा ‘एडल्ट मोड’ फीचर

नई दिल्ली ChatGPT मेकर OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने अपने प्लेटफॉर्म की पॉलिसी में बड़े बदलाव का ऐलान कर दिया है. अब कुछ यूजर्स को एडल्ट कंटेंट तक का एक्सेस मिलेगा. हालांकि इसे कम उम्र के यूजर्स एक्सेस नहीं कर सकेंगे.  सैम ऑल्टमैन ने  पोस्ट करके कहा, दिसंबर में हम पूरी तरह से उम्र को लेकर नियम लागू करेंगे और एडल्ट यूजर्स को एडल्ट की तरह सर्विस का एक्सेस देंगे. इसके बाद वेरिफाइड एडल्ट्स को एडल्ट जैसे कंटेंट तक पहुंच दी जाएगी. हालांकि अभी तक कंपनी ने ये क्लियर नहीं किया गया है कि एडल्ट कंटेंट के एक्सेस के रूप में कौन-कौन सी परमिशन दी जाएंगी. बताते चलें कि यह बदलाव OpenAI के सबसे बड़े बदलावों में से एक है.  यूजर्स की जरूरत या राइवल्स का प्रेशर  दरअसल, मार्केट में Elon Musk का Grok AI और कई प्लेटफॉर्म यूजर्स को एडल्ट कंटेंट तक का एक्सेस दे रहे हैं, जिसको लेकर कई बार विवाद भी खड़ा हुआ है. इसके बावजूद उन कंपनियों ने अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया. अब ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि OpenAI यूजर्स को क्या वाकई इस मोड की जरूरत है या फिर कंपनी अपने राइवल्स से आगे निकलने के लिए ये एक्सेस दे रही है.  सैम ऑल्टमैन ने मौजूदा पॉलिसी को लेकर कही ये बात  सैम ऑल्टमैन ने बताया कि ChatGPT के मौजूदा वर्जन को ऐसे तैयार किया था, जिससे वह यूजर्स के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान ना पहुंचाए. इसके लिए यूजर्स को कई तरह के कंटेंट से दूर रखा गया, जिसकी वजह से उन यूजर्स को भी नुकसान हुआ है जो मानसिक रूप से मजबूत हैं.  सैम ऑल्टमैन ने कहा कि अब हमारे पास नए टूल्स हैं, जिनकी मदद से हम कुछ मामलों में सुरक्षा को फॉलो करते हुए नियमों में ढील दे सकेंगे. यहां न्यू टूल्स से मतलब पैरेंटल कंट्रोल्स से हो सकता है. कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  टीएनजर्स वर्जन के लिए अलग से पॉलिसी और फीचर्स को सीमित कर रहे हैं, जिसमें कुछ कंट्रोल्स उनके पैरेंट्स के पास होता है. अब चैटजीपीटी में भी पेरेंट्ल कंट्रोल जैसा एक्सेस दिया जा सकता है, हालांकि आने वाले दिनों में इसको लेकर और भी जानकारी सामने आएंगी.