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छत्तीसगढ़ में धान खरीदी ने तोड़ा रिकॉर्ड, 17.77 लाख किसानों को ₹23,448 करोड़ का भुगतान

रायपुर   धान खरीदी के मामले में छत्तीसगढ़ ने नया रिकॉर्ड बनाया है. इस बार राज्य में रिकॉर्ड 105.14 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुईहै, जिसमें 17.77 लाख किसानों के खातों में सरकार ने 23,448 करोड़ रुपए का भुगतान भी कर दिया है. यह आंकड़े 13 जनवरी तक की खरीदी और भुगतान के हैं, जबकि अभी धान खरीदी का काम चालू है. ऐसे में छत्तीसगढ़ में धान के बंपर उत्पादन से खरीदी और भुगतान के पिछले सारे रिकॉड टूट गए हैं. खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में यह नया रिकॉर्ड धान खरीदी का बन गया है.  धान खरीदी पर सख्त  वहीं सरकार की तरफ से बताया गया कि धान खरीदी को लेकर पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस अनियमितता पर 33 अधिकारियों को नोटिस अब तक भेजा गया है, जबकि 33 हजार क्विंटल धान को छत्तीसगढ़ में जब्त भी किया गया है. सरकार की तरफ से बताया गया कि रिकॉर्ड मात्रा में खरीदी और रिकॉर्ड राशि का वितरण यह बताता है कि धान खरीदी में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई का असर दिखा है. एफआईआर और निलंबन की कार्रवाई भंडारण और निराकरण की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी निगरानी में की गई है. ताकि किसानों को धान खरीदी का पूरा फायदा मिल सके.  यदि पिछले वर्षों के 13 जनवरी तक के आंकड़ों से तुलना की जाए तो सरकार की यह उपलब्धि और भी स्पष्ट रूप से सामने आती है। खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में 13 जनवरी तक 17,49,003 किसानों से 72.15 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹13,550 करोड़ का भुगतान हुआ था। वर्ष 2021-22 में इसी अवधि तक 17,09,834 किसानों से 68.77 LMT धान खरीदा गया था, जिसके बदले ₹13,410 करोड़ किसानों को दिए गए थे। खरीफ विपणन वर्ष 2022-23 में 13 जनवरी तक 22,14,302 किसानों से 97.67 LMT धान की खरीदी की गई थी और ₹20,022 करोड़ का भुगतान हुआ था। इन सभी वर्षों की तुलना में वर्ष 2025-26 में धान खरीदी की मात्रा और किसानों को वितरित की गई राशि – दोनों ही  उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि जहां 2020-21 में 72.15 LMT, 2021-22 में 68.77 LMT और 2022-23 में 97.67 LMT धान खरीदा गया था, वहीं 2025-26 में मात्र 13 जनवरी तक ही 105.14 LMT धान खरीदा जा चुका है, जो अपने-आप में एक नया रिकॉर्ड है। इसी तरह किसानों को मिलने वाली राशि भी  सीधे बढ़कर  ₹23,448 करोड़ तक पहुँच गई है। किसानों के खातों में पहुंचा भरोसे का पैसा राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चलाई जा रही धान खरीदी व्यवस्था का नतीजा है. किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बेचने का भरोसा मिला और भुगतान में किसी तरह की देरी नहीं हुई. यही कारण है कि किसान बिना किसी चिंता के अपनी उपज सरकारी केंद्रों तक लेकर पहुंचे. कहीं आगे निकला यह सीजन अगर पिछले कुछ सालों से तुलना करें तो यह उपलब्धि और भी बड़ी नजर आती है. साल 2020-21 में 13 जनवरी तक जहां करीब 72 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी और 13,550 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, वहीं 2021-22 में यह आंकड़ा और भी कम रहा. 2022-23 में जरूर सुधार देखने को मिला था, लेकिन तब भी 97.67 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया और 20,022 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था. इन सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ते हुए मौजूदा सीजन ने नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं. पारदर्शी व्यवस्था से बढ़ा किसानों का भरोसा इस बार की धान खरीदी में सबसे अहम भूमिका पारदर्शी व्यवस्था और समयबद्ध भुगतान की रही है. सरकार ने साफ संदेश दिया कि हर पात्र किसान का एक-एक दाना खरीदा जाएगा और उसकी पूरी कीमत समय पर मिलेगी. यही वजह है कि किसानों में सरकार के प्रति भरोसा मजबूत हुआ है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार मिली है. लापरवाही पर सख्ती, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस सरकार ने केवल खरीदी और भुगतान पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि भंडारण और प्रबंधन में गड़बड़ी करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की है. पिछले कुछ सालों में जहां भी धान भंडारण में कमी या लापरवाही पाई गई, वहां संबंधित अधिकारियों और केंद्र प्रभारियों को नोटिस दिए गए, निलंबन हुआ और कुछ मामलों में FIR भी दर्ज की गई. इससे साफ संदेश गया कि किसानों की मेहनत के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ताकत धान खरीदी से सीधे तौर पर गांवों में नकदी का प्रवाह बढ़ा है. किसानों के पास अब रबी फसल के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधन हैं. स्थानीय बाजारों में भी रौनक लौटी है. सरकार का मानना है कि इसी तरह की नीतियों से किसान आत्मनिर्भर बनेंगे और छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था आने वाले सालों में और मजबूत होगी. 31 जनवरी तक चलेगी खरीदी  बता दें कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 31 जनवरी तक चलने वाली है, ऐसे में अभी किसानों के पास पूरे 16 दिन है, जहां समर्थन मूल्य पर सरकार की तरफ से धान खरीदी की जाएगी, छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया 15 नवंबर 2025 से शुरू हुई थी, जो 31 जनवरी तक चलने वाली है. इस बार किसानों के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल की सीमा और समय पर भुगतान राशि का प्रावधान किया गया है. इस बार धान खरीदी को सुगम बनाने के लिए सरकार की तरफ से कई तरह की पारदर्शिताएं भी रखी गई है, जबकि किसानो के लिए तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया है.  बता दें कि अभी 31 जनवरी तक धान की खरीदी होनी है, ऐसे में धान खरीदी के मामले में छत्तीसगढ़ और रिकॉर्ड बना सकता है, क्योंकि फाइनल आंकड़ें आने के बाद यह तय होगा कि कितनी खरीदी हुई और कितना भुगतान हुआ है. 

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के समर्थन मूल्य से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार

राजनांदगांव  खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के धान उपार्जन केन्द्रों में तेजी से धान खरीदी कार्य किया जा रहा है। शासन किसानों के वास्तविक उपज को समर्थन मूल्य में खरीदी कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। जिले के किसान आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे है।  राजनांदगांव विकासखंड के धान उपार्जन केन्द्र सोमनी में ग्राम ईरा के किसान डिलेश्वर प्रसाद साहू ने बताया कि वे 66 क्विंटल धान बिक्री करने आए हैं। उनके पास 8 एकड़ खेती जमीन है, जिसमें वे धान की उपज लिया है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा 3100 रूपए प्रति क्ंिवटल की दर से धान खरीदी करने से उनकी उपज का वास्तविक दाम मिल रहा है और राशि भी शीघ्र खाते में मिल रही है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष धान बिक्री की राशि से वे खेती-किसानी को बढ़ाने के लिए ट्रेक्टर खरीदा था। उन्होंने बताया कि बहुत दिनों से ट्रेक्टर खरीदने का सोच रहे थे, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण नहीं खरीद पाए थे। पिछले वर्ष जैसे ही शासन द्वारा धान खरीदी करने पर उन्होंने धान विक्रय किया और एक मुश्त राशि मिलने पर ट्रेक्टर खरीदने की हिम्मत जुटा जाए।  उन्होंने बताया कि समय पर खेती-किसानी कार्य करने के लिए सहुलियत हुआ है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष की धान बिक्री की राशि से ट्रेक्टर की किश्त को पूरा करने में उपयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जरूरतों के साथ-साथ खेती-किसानी को बढ़ाने के लिए राशि का उपयोग कर रहे हैं।  ग्राम ईरा के किसान डिलेश्वर बताया कि धान उपार्जन केन्द्र में पर्याप्त मात्रा में बारदाने की उपलब्धता, पारदर्शिता तरीके से इलेक्ट्रानिक तौलाई, खाते में राशि अंतरण किया जा रहा है। धान उपार्जन केन्द्र सोमनी में किसानों के लिए बहुत अच्छी व्यवस्था रखी गई है। धान उपार्जन केन्द्र में पेयजल, छांव, चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है। इसके लिए उन्होंने राज्य शासन को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

रायपुर : 17 व्यापारियों से 13 लाख रूपए का 622 क्विंटल पुराना धान जब्त

रायपुर : 17 व्यापारियों से 13 लाख रूपए का 622 क्विंटल पुराना धान जब्त मुंगेली जिले में अवैध धान भंडारण पर खाद्य विभाग की कार्रवाई मण्डी अधिनियम के तहत प्रकरण हुआ दर्ज रायपुर राज्य शासन के निर्देश पर प्रदेश में धान के अवैध परिवहन एवं भंडारण पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। मुंगेली जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में अवैध धान के क्रय-विक्रय और भंडारण पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही की जा रही है। जिला प्रशासन के निर्देश पर खाद्य विभाग एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जिले भर में थोक और चिल्हर व्यापारियों के प्रतिष्ठानों का गहन निरीक्षण किया जा रहा है। जांच के दौरान अब तक कुल 17 व्यापारियों के यहां पुराने धान का प्रकरण दर्ज किया गया है। टीम ने इन प्रतिष्ठानों से कुल 622.80 क्विंटल धान जब्त किया है, जिसकी मंडी उपज अधिनियम के तहत आंकी गई कुल कीमत 13 लाख 02 हजार 120 रुपये है।        खाद्य अधिकारी ने बताया कि सभी प्रकरणों को मंडी अधिनियम के अंतर्गत विधिवत दर्ज किया गया है। यह जांच धान खरीदी पूर्ण होने तक जारी रहेगी, ताकि रबी फसल का पुराना धान खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान में किसी भी स्थिति में मिश्रित न हो सके और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग न हो। साथ ही वैध किसानों और पंजीकृत उपार्जन केंद्रों में पारदर्शी एवं निष्पक्ष धान खरीदी सुनिश्चित की जाएगी। जिले में सुगमता एवं पारदर्शिता के साथ धान खरीदी जारी    शासन के निर्देशानुसार धान खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के 66 समितियों के 105 उपार्जन केन्द्रों में 01 लाख 07 हजार 214 पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदा जाएगा। जिले में अब तक 02 हजार 238 किसानों से 01 लाख 01 हजार 127 क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की जा चुकी है। प्रत्येक खरीदी केंद्र में सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। टोकन, बारदाना, परिवहन और भुगतान की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है, ताकि जिले के सभी किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर धान विक्रय का लाभ मिल सके।

MSP के तहत ज्वार और बाजरा का उपार्जन शुरू 24 नवंबर से, धान 1 दिसंबर से, कलेक्टर्स को निर्देश

भोपाल  ज्वार, बाजरा और धान की फसल की पैदावार करने वाले किसानों के लिए ये जरूरी खबर है सरकार MSP पर उनकी  उपज का उपार्जन शुरू करने वाली है, इसके लिए राज्य सरकार ने उपार्जन नीति घोषित कर दी है, शासन ने उपार्जन से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को दिए हैं, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश हैं कि उपार्जन केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे किसान को कोई परेशानी ना हो। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा समय – समय पर घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर औसत अच्छी गुणवत्ता की धान, ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन किसानों से किया जाएगा। राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा की उपार्जन नीति घोषित कर दी है। समर्थन मूल्य पर ज्वार एवं बाजरा की 24 नवम्बर से 24 दिसम्बर तक और धान की खरीदी एक दिसम्बर से 20 जनवरी, 2026 तक की जायेगी। खरीदी सोमवार से शुक्रवार तक की जायेगी। सख्त निर्देश, किसानों को ना हो कोई परेशानी  खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स, नागरिक आपूर्ति निगम तथा वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि उपार्जन नीति का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराएं, जिससे किसानों को लाभ पहुंचाने की सरकार की मंशा पूरी हो सके। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर उपार्जन कार्य से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी खाद्य मंत्री ने बताया कि निर्धारित अवधि में उपार्जन किया जाएगा। समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा के उपार्जन के लिए मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज़ कार्पोरेशन नोडल एजेंसी होगी। इसके अलावा विभाग द्वारा केन्द्र एवं राज्य सरकार की अन्य एजेन्सी अथवा उनके द्वारा अधिकृत संस्था को भी उपार्जन एजेन्सी घोषित किया जा सकेगा। ये है फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य धान कॉमन MSP 2369 रुपये प्रति क्विंटल। धान ग्रेड-ए MSP 2389 रुपये  प्रति क्विंटल। ज्वार मालदण्डी MSP 3749 हजार रुपये प्रति क्विंटल। ज्वार हाइब्रिड MSP 3699 रुपये प्रति क्विंटल। बाजरा MSP 2775 रुपये प्रति क्विंटल । किसानों की सुविधा अनुसार होंगे उपार्जन केन्द्र मंत्री श्री राजपूत ने बताया कि उपार्जन केन्द्र के स्थान का निर्धारण किसानों की सुविधा अनुसार किया जाएगा। उपार्जन केन्द्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित किए जाएंगे। गोदाम/केप उपलब्ध न होने पर समिति एवं अन्य स्तर पर उपार्जन केन्द्र स्थापित किए जा सकेंगे। जिले में उपार्जन केन्द्रों की संख्या का निर्धारण किसान पंजीयन, पंजीयन में दर्ज बोया गया रकबा एवं विगत वर्ष निर्धारित उपार्जन केन्द्रों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा। ऐसी रहेगी बारदाना व्यवस्था खाद्य मंत्री ने बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिये 46 प्रतिशत पुराने और 54 प्रतिशत नवीन जूट बारदाने उपयोग किये जायेंगे। बारदानों की व्यवस्था उपार्जन एजेंसी द्वारा की जायेगी। ज्वार एवं बाजरे का उपार्जन नवीन जूट बारदानों में किया जायेगा। इन निर्देशों का पालन करना जरूरी      केन्द्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा धान, ज्वार एवं बाजरा के समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिये निर्धारित यूनिफार्म स्पेसिफिकेशन्स के अनुसार एवं समय-समय पर इसमें दी गई शिथिलता के अनुसार उपार्जन किया जायेगा।     गुणवत्ता परीक्षण का दायित्व उपार्जन केन्द्र में उपार्जन करने वाली संस्था और भण्डारण स्थल पर उपार्जन एजेंसी का होगा।     कृषि उपज मण्डियों में एफएक्यू मानक की धान, ज्वार एवं बाजरा की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर क्रय नहीं किया जायेगा। नॉन एफएक्यू उपज का सैम्पल कृषि उपज मण्डी द्वारा संधारित किया जायेगा।     किसान पंजीयन में दर्ज फसल के रकबे एवं राजस्व विभाग द्वारा तहसीलवार निर्धारित उत्पादकता के आधार पर कृषक द्वारा खाद्यान्न की विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया जायेगा।     कृषक द्वारा उपज बेचने के लिये उपार्जन केन्द्र एवं विक्रय दिनांक के चयन के लिये स्लॉट बुकिंग करानी होगी।     उपार्जित खाद्यान्न का उपार्जन केन्द्र से गोदाम तक परिवहन का दायित्व उपार्जन एजेंसी का और धान को उपार्जन केन्द्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन का दायित्व मिलर्स का होगा।  

रायपुर : कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा ने आसानी से किया धान विक्रय

रायपुर : कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाए समिति में सभी सुविधाएं दुरुस्त रायपुर, कृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाएकृषक लक्ष्मण, छगन और खोरबाहरा को धान विक्रय में नहीं हुई परेशानी, आसानी से धान बेच पाए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन और किसान-कल्याण की प्राथमिकता को धरातल पर उतारती हुई राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना आज किसानों के लिए वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। बेहतर समर्थन मूल्य, पारदर्शी एवं सुविधाजनक उपार्जन व्यवस्था, तथा टोकन प्रणाली जैसे सुधारों ने धान विक्रय प्रक्रिया को सहज, तेज और भरोसेमंद बनाया है। जिसका प्रत्यक्ष लाभ सीमांत कृषक से लेकर बड़े किसानों तक समान रूप से पहुंच रहा है और कृषक अधिक उत्साह और विश्वास के साथ उत्पादन बढ़ा रहे हैं।             महासमुंद जिला के विकासखंड के ग्राम मोंगरा निवासी श्री लक्ष्मण ध्रुव अपने 54 कट्टा धान का विक्रय करने ग्रामीण सेवा सहकारी समिति झालखम्हरिया उपार्जन केंद्र पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे 3 दिन पूर्व टोकन कटवाया है, जिससे उन्हें समय पर धान विक्रय की सुविधा मिली। शासन की पारदर्शी टोकन व्यवस्था और त्वरित पंजीयन ने उनकी प्रक्रिया को सहज बनाया। उनके पास एक एकड़ खेती है। इसी तरह मोंगरा निवासी श्री खोरबहारा साहू ने बताया कि वे अपने 42 डिसमिल कृषि भूमि में 8.80 क्विंटल धान उत्पादन किया है। उन्होंने सतत देखभाल और शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का लाभ लेते हुए अपने फसल का उत्पादन किया है। उन्होंने बताया कि धान बेचने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। वहीं मोंगरा निवासी श्री छगन लाल साहू ने अपने पिताजी पुनीत राम साहू के नाम पंजीकृत 10 एकड़ कृषि भूमि में इस वर्ष 250 कट्टा धान का उपार्जन किया है।          सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल की दर से धान खरीदी और समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल देने का निर्णय किसानों के लिए एक बड़ी राहत है। मोंगरा निवासी लक्ष्मण ध्रुव, खोरबाहरा साहू और छगन लाल साहू ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का धन्यवाद ज्ञापित किया है।

धान से मिले पैसों से खुद के लिए वाहन खरीदेंगे-किसान गंगाराम

रायपुर, खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 हेतु धान खरीदी का शुभारंभ अवसर पर जशपुर जिले के गम्हरिया चौक स्थित धान खरीदी केंद्र में ग्राम झीलिंग के किसान गंगा यादव ने सर्वप्रथम अपना धान विक्रय किया। उन्होंने कहा कि धान से मिले पैसों से खुद के लिए वाहन खरीदूंगा l         किसान गंगा यादव ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष लगभग 150 क्विंटल धान समर्थन मूल्य पर बेचा था, जिससे प्राप्त लाभ से उन्होंने एक दुकान की शुरुआत कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना। उन्होंने कहा कि इस वर्ष वे वाहन क्रय करने की योजना बना रहे हैं। यादव ने शासन द्वारा खरीदी केंद्रों में की गई सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र में सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध हैं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।        शासन के निर्देशानुसार जिले के सभी धान उपार्जन केंद्रों में माइक्रो-एटीएम सुविधा, टोकन ‘तुंहर द्वार’ व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि किसानों को धान विक्रय प्रक्रिया में आसानी और पारदर्शिता मिल सके।     मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेशभर में 15 नवम्बर से धान खरीदी का कार्य सुचारू रूप से प्रारंभ हो गया है। जशपुर जिले मे किसी भी समिति में किसानों को तकलीफ नहीं है l आसानी से टोकन मिल रहा है और किसान निर्धारित दिवस धान समिति में लेकर आ रहे हैं l

महराजपुर से धान खरीदी का उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया शुभारंभ

रायपुर, कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड स्थित महराजपुर धान उपार्जन केंद्र में आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी महापर्व का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने परम्परागत रूप से तौल यंत्रों की पूजा-अर्चना कर, किसानों का तिलक करते हुए श्रीफल भेंट किया। उन्होंने खरीदी प्रक्रिया की शुरुआत कर किसानों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान ग्राम कांपा के किसान श्री भगत कौशिक से 36 क्विंटल धान का विक्रय किया गया। उन्होंने किसान के साथ मिलकर धान का तौल कराया एवं किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को जाना। उल्लेखनीय है कि महराजपुर उपार्जन केंद्र के अंतर्गत महराजपुर, कांपा, जीताटोला और डगनिया के कुल 769 पंजीकृत किसान हैं। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने किसानों से आत्मीय चर्चा कर उपार्जन केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, टोकन व्यवस्था एवं खरीदी प्रक्रिया का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस वर्ष ‘मोदी की गारंटी’ को पूरा करते हुए किसानों के हित में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं, जिससे किसानों को लाभ, सुचारू व्यवस्था और समय पर भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा। उपमुख्यमंत्री ने सभी किसानों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण, उनकी आय वृद्धि और कृषि क्षेत्र के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुव्यवस्थित खरीदी प्रबंधन से इस वर्ष भी किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी। इस अवसर पर कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।

कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन सख्त, समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तैयारी तेज़

देर रात हुई कार्रवाई, अवैध धान परिवहन और भंडारण पर कसी लगाम महासमुंद धान खरीदी के पूर्व जिला प्रशासन अवैध धान परिवहन, भंडारण एवं विक्रय पर सख्त रुख अपनाते हुए लगातार कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर श्री विनय लंगेह के निर्देश पर राजस्व, खाद्य एवं मंडी विभाग की संयुक्त टीमों ने देर रात तक कई स्थानों पर छापामार कार्रवाई कर बड़ी मात्रा में अवैध धान जप्त किया है। तहसील सराईपाली के ग्राम बालसी में देर रात अनिल ट्रेडर्स के गोदाम से 375 कट्टा और रोशन ट्रेडर्स के गोदाम से 50 कट्टा अवैध धान जप्त किया गया। यह कार्रवाई राजस्व विभाग, खाद्य निरीक्षक और मंडी सचिव की संयुक्त टीम द्वारा मंडी अधिनियम के तहत की गई। इसी प्रकार ओड़िशा सीमा से अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे 80 कट्टा धान को नायब तहसीलदार प्रकृति एवं मंडी टीम द्वारा जब्त किया गया। एक अन्य कार्रवाई में तहसील पिथौरा अंतर्गत ग्राम छोटे लोरम में साहेब लाल पटेल के गोदाम से 600 बोरी, ग्राम लालमाटी में बीसीकेशन पिता रूपसाय के घर से 200 बोरी, तथा गोमती पति गंगाराम के घर से 100 बोरी अवैध धान प्रशासनिक टीम ने जब्त किया। यह कार्रवाई एसडीएम पिथौरा श्री बजरंग वर्मा के मार्गदर्शन में की गई तथा मंडी सचिव को मंडी अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर श्री विनय लंगेह ने कहा कि धान खरीदी प्रारंभ होने से पूर्व कोई भी व्यक्ति या व्यापारी अवैध रूप से धान का भंडारण या परिवहन न करे। नियम विरुद्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले की सीमाओं पर निगरानी और सघन जांच अभियान आगामी दिनों में भी जारी रहेगा, ताकि समर्थन मूल्य पर खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध परिवहन, भंडारण न हो सके।

PCC चीफ दीपक बैज का बयान: 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो, किसानों को मिले 3286 रुपये प्रति क्विंटल

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होगी। साय कैबिनेट की आज हुई बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। वहीं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करते हुए 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने 3100 रुपये समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 3286 रुपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य करने की भी मांग की। बैज का कहना है कि केंद्र सरकार ने दो बार एमएसपी में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा उन्होंने अन्य मुद्दों पर भी बयान दिया। गाय को राजमाता का दर्जा देने मुद्दे पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “गाय को राजमाता का दर्जा देने” वाले बयान पर दीपक बैज ने भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि गाय को राजमाता का दर्जा देने की बात कहना भाजपा का पॉलिटिकल प्रोपेगैंडा है। गायों की लगातार मौत हुई है। 5 लाख गाय कहां चली गई, यह बताना चाहिए। कवर्धा में युवा कांग्रेस और भाजयुमो कार्यकर्ताओं के बीच विवाद पर बयान कवर्धा में युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ भाजयुमो कार्यकर्ताओं की ओर से मारपीट करने के मामले पर बैज ने कहा कि कवर्धा में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ भाजयुमो नेताओं की ओर से मारपीट निंदनीय है। लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन किया जा रहा था, लेकिन भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने अपशब्द कहे और मारपीट की। 1 नवंबर को प्रधानमंत्री आ रहे हैं तो हम लोग भी विरोध करेंगे। मंत्री केदार कश्यप के बयान पर पलटवार मंत्री केदार कश्यप के कांग्रेस पर धान के मसले पर निशाना साधने और पश्चाताप यात्रा निकालने की सलाह पर बैज ने कहा कि पश्चाताप यात्रा तो भाजपा को निकालनी चाहिए, झूठ बोलकर 15 साल सत्ता में भाजपा रही, दो साल का बोनस भी नहीं दिया। कांग्रेस ने कर्जा माफ किया, घोषणा के मुताबिक धान खरीदा की। भाजपा सरकार किसानों के लिए नौटंकी कर रही है। जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया पर बयान कांग्रेस जिला अध्यक्ष चयन प्रक्रिया पर मंत्री केदार कश्यप के निशान साधने के मामले पर दीपक बैज ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस में लोकतांत्रिक तरीके से जिला अध्यक्ष का चयन हो रहा है, हमारे यहां पर्ची से मंत्री और मुख्यमंत्री बनाने का चलन नहीं है, पारदर्शी व्यवस्था है। पदाधिकारी चयन में 40 प्रतिशत महिलाओं को जगह देने के सवाल पर कहा कि दीपावली से पहले एआईसीसी को अपनी रिपोर्ट पर्यवेक्षक देंगे। महिला, युवा को 50 फीसदी पदों पर तरजीह देने की सोच है। किसान और बिजली बिल के मुद्दे पर बयान भारतीय किसान संघ के प्रदर्शन और घेराव के ऐलान के मुद्दे पर पीसीसी चीफ बैज ने कहा कि किसान परेशान हैं तो नाराज तो होंगे ही, उनको समय पर खाद-बीज नहीं मिला, बिजली बिल में दो गुना बढ़ोतरी हुई है। भाजपा और संघ से जुड़ा संगठन ही प्रदर्शन कर रहा है तो समझिए कि भाजपा के भीतर भी कुछ न कुछ चल रहा है। अब सरगुजा ओलंपिक के नाम पर भ्रष्टाचार की खोली जा रही नई दुकान – बैज सरगुजा ओलंपिक और डिप्टी सीएम अरुण साव के बयान को लेकर दीपक बैज ने कहा कि पहले बस्तर ओलंपिक के नाम पर खेल कराए गए, बस्तर इसलिए चुना गया ताकि भ्रष्टाचार हो। बस्तर ओलंपिक में 1400 रुपये का ट्रैक सूट 2500 रुपये में खरीदे गए। अब सरगुजा ओलंपिक के नाम पर भ्रष्टाचार की नई दुकान खोली जा रही।

धान किसानों के लिए बड़ी खबर: 15 नवंबर से खरीदी अभियान की शुरुआत

रायपुर छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन सत्र 2024-25 के लिए 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू हो जाएगी. इसकी घोषणा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर सभी पंजीकृत किसानों का धान खरीदेंगे. प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदा जाएगा. राज्य सरकार ने किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. बता दें कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य कर दिया है. एग्रीस्टैक पोर्टल से संबंधित किसी भी जानकारी या सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-1030 पर संपर्क किया जा सकता है. अब तक 21.47 लाख किसानों ने करा लिया है पंजीयन गत वर्ष राज्य के 25.49 लाख किसानों ने धान विक्रय किया था. वर्तमान वर्ष में अब तक 21.47 लाख किसानों ने एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीकरण कर लिया है. शेष किसान अपने निकटतम सहकारी समिति या निर्धारित केंद्र में जाकर 31 अक्टूबर 2025 तक अपना पंजीयन करा सकते हैं. इस संबंध में सभी समितियों और जिला कलेक्टरों को पूर्व में आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एग्रीस्टैक पोर्टल डिजिटल क्रांति की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो छत्तीसगढ़ में धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, सटीक और किसान हितैषी बनाएगा. पिछले सीजन में रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की हुई थी खरीदी बता दें कि पिछले खरीफ सीजन में छत्तीसगढ़ में राज्य शासन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत रिकॉर्ड 149.25 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की थी. इसमें मोटा धान 81.98 लाख मीट्रिक टन, पतला धान 10.75 लाख मीट्रिक टन और सरना धान 56.52 लाख मीट्रिक टन शामिल थे. धान की यह खरीदी राज्य बनने के बाद का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था. पिछले बार धान खरीदी का सिलसिला 14 नवंबर 2024 से शुरू होकर 31 जनवरी 2025 तक निरंतर जारी रहा, जिसके अंतर्गत राज्य के पंजीकृत 25 लाख 49 हजार 592 किसानों ने धान विक्रय किया था. धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 31 हजार 89 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा गया था. महासमुंद जिला सर्वाधिक 11.04 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर राज्य में पहले नंबर पर थे. वहीं बेमेतरा जिला 9.38 लाख मीट्रिक टन धान खरीद कर दूसरा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिला 8.56 लाख मीट्रिक टन धान खरीदकर तीसरा स्थान हासिल किया था.