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समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का किसानों को 1 हजार 508 करोड़ रुपए भुगतान

बिलासपुर. सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर अपना धान बेचने वाले किसानों को सरकार द्वारा अब तक 1 हजार 508 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि इतना भुगतान करने के बाद अभी भी हजारों की संख्या में किसान शेष हैं, जो भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। विपणन विभाग के अनुसार ऐसे सभी किसानों को दो से तीन दिनों के भीतर राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। 15 नवंबर से प्रारंभ की गई समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का शासन द्वारा समय-समय पर भुगतान जारी किया जाता रहा है। इसके अंतर्गत आज की स्थिति तक किसानों को 1 हजार 508 करोड़ रूपए का भुगतान जारी किया जा चुका है। हालांकि भुगतान की गति काफी धीमी रही है। ऐसे किसान जिन्होंने 15 जनवरी या इसके बाद की स्थिति में अपना धान बेचा था, इन्हें तेरह दिनों बाद भी भुगतान प्राप्त नहीं हो सका था। भुगतान प्राप्त नहीं होने से परेशान किसान किसी गड़बड़ी की आशंका पर लगातार अपनी समितियों में एवं बैंकों में जाकर पतासाजी कर रहे थे। इन किसानों को जनवरी के अंत तक भुगतान प्राप्त हो सका था। इधर सरकार ने भले ही किसानों को 15 सौ करोड़ का भुगतान किया है, लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में किसान भुगतान का इंतजार कर ही रहे हैं, जिन्हें दो से तीन दिनों के भीतर भुगतान होने की बात कही जा रही है।

550 किसानों को फिर मिला धान बेचने का मौका

बिलासपुर. सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए दो दिन और बढ़ाने का निर्णय लेने के बाद जिले के 550 किसानों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। इनमें से ज्यादातर किसान ऐसे थे, जिनका टोकन कटने के बाद भौतिक सत्यापन भी किया जा चुका था, लेकिन धान खरीदी का नंबर ही नहीं लग सका। जिले में बढ़ाई गई दो तिथियों में करीब 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी और होने का अनुमान है। सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान नहीं बेच पाने का मलाल अब जिले के 550 किसानों को नहीं रहेगा। सरकार के द्वारा धान विक्रय के लिए दी जाने वाली दो अतिरिक्त तिथियों 6 एवं 7 फरवरी को वे अपना धान उपार्जन केंद्रों में बेच सकेंगे। धान खरीदी के लिए तय अंतिम तीन दिनों 27, 28 एवं 29 जनवरी के लिए जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों के 414 किसानों ने न केवल टोकन प्राप्त कर लिया था, बल्कि उनके भौतिक सत्यापन भी किए जा चुके थे, लेकिन इनके द्वारा धान नहीं बेचा जा सका। इसी तरह करीब 136 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने व्धान बेचने के लिए टोकन कटवाने का रिक्वेस्ट डाला था। कुल मिलाकर धान बेचने से रह गए जिले के 550 किसानों से ही अब अगली दो तिथियों में धान खरीदा जाना है। इन किसानों से अनुमानित तौर पर 20 हजार क्विंटल धान की खरीदी होने की बात कही जा रही है। निर्धारित अवधि तक ही चली धान की खरीदी : धान खरीदी को लेकर दो दिन की बढ़ोतरी की बात भले ही कही जा रही है, लेकिन किसानों के अनुसार समयसीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। किसानों द्वारा यह बात कही जा रही है कि धान खरीदी प्रारंभ करने के लिए तय की गई तिथि दिनांक 15 नवंबर को शनिवार था, जिससे उस दिन खरीदी नहीं की गई थी। इसी तरह धान खरीदी के लिए तय अंतिम तिथि 31 जनवरी को भी शनिवार का अवकाश था। प्रारंभ और अंत के जिन दो दिनों में अवकाश के कारण खरीदी नहीं हो सकी थी, वही दो दिन अब और किसानों को धान विक्रय के लिए दिए गए हैं, जिसमें तिथि में बढ़ोतरी जैसी कोई बात ही नहीं है।

मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस के धान खरीदी आंदोलन पर साधा निशाना, कहा– मुद्दाविहीन राजनीति कर रही है कांग्रेस

रायपुर धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश में गर्म है. इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस मुद्दाविहीन है, इसलिए इस तरह का आंदोलन कर रही है. कांग्रेस का धर्म ही विरोध करना है. नारायणपुर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आज धान खरीदी की अंतिम तारीख है, धान खरीदी अच्छे से हो रही है. दो दिन पहले ही समीक्षा कर अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों का धान समय पर बिके और टोकन मिलने में देर न हो. अधिकारी लगातार इस पर काम कर रहे हैं. वहीं जमीन गाइडलाइन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि गाइडलाइन में संशोधन किए गए हैं. सुझाव भी मांगे गए थे. अभी इस पर वर्किंग चल रही है. वहीं निजी अस्पतालों के आयुष्मान कार्ड से इलाज नहीं करने के ऐलान पर उन्होंने कहा कि जो भी बकाया है, उसे जारी किया जाएगा. बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नारायणपुर में दो दिन के प्रवास पर रहेंगे. राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा भी मुख्यमंत्री के साथ जा रहे हैं. इस दौरान 361 करोड़ के अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन होगा.

सरकारी व्यवस्था का असर: धान खरीदी ने बदली महिला किसान चौती बाई की ज़िंदगी

रायपुर. धान खरीदी व्यवस्था ने बदली महिला किसान चौती बाई की ज़िंदगी खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी के साथ ही छत्तीसगढ़ के गांवों में सिर्फ धान नहीं, बल्कि भरोसे, संतोष और आत्मविश्वास की नई फसल भी लहलहा उठी है। शासन की किसान-हितैषी नीतियों का जीवंत प्रमाण हैं धमतरी जिले के ग्राम संबलपुर की महिला किसान श्रीमती चौती बाई साहू, जिनकी कहानी संवेदनशील शासन और सुशासन की सशक्त मिसाल बनकर सामने आई है।       अब तक परिवार में धान विक्रय की जिम्मेदारी चौती बाई के पति निभाते रहे थे, लेकिन इस वर्ष स्वास्थ्य कारणों से यह दायित्व उन्होंने स्वयं संभाला। यह उनके लिए केवल धान बेचने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की एक नई यात्रा थी। पूर्व निर्धारित तिथि पर कटे टोकन के अनुसार वे 57 क्विंटल धान लेकर खरीदी केंद्र पहुँचीं। पहली बार इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद चौती बाई के चेहरे पर किसी तरह की घबराहट नहीं, बल्कि संतोष और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र की सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान-मैत्री व्यवस्था ने पूरे अनुभव को आसान और सम्मानजनक बना दिया। केंद्र में बारदाना, हमाल, डिजिटल तौल मशीन, प्रशिक्षित ऑपरेटर, पेयजल, शौचालय और बिजली जैसी सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध थीं, जिससे किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई।      धान विक्रय से प्राप्त राशि से चौती बाई अपने पति का बेहतर इलाज कराने की योजना बना रही हैं। उनकी आवाज़ में सरकार के प्रति आभार स्पष्ट महसूस किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार द्वारा 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का निर्णय किसानों के लिए संबल साबित हुआ है। इससे खेती न केवल लाभकारी बनी है, बल्कि ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सुरक्षा भी मिली है। चौती बाई मानती हैं कि बढ़े हुए समर्थन मूल्य से उनके परिवार के जीवन में स्थिरता आई है। घर के खर्च, इलाज और भविष्य की जरूरतों को लेकर अब पहले जैसी चिंता नहीं रही। उन्होंने धान खरीदी केंद्र के कर्मचारियों, हमालों और प्रशासनिक अमले की सराहना करते हुए कहा कि सभी ने सहयोग, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ कार्य किया।      चौती बाई की कहानी केवल एक महिला किसान की सफलता नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब शासन की नीतियाँ ईमानदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो उनका लाभ सीधे अंतिम पंक्ति में खड़े किसान तक पहुँचता है। आज संबलपुर की चौती बाई सिर्फ धान बेचने वाली किसान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की किसान-केंद्रित नीतियों की सशक्त पहचान बन चुकी हैं। जिनकी मुस्कान में व्यवस्था पर भरोसा और बेहतर भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई देती है।

कोडरमा में धान की बंपर खरीदी से पैक्स गोदाम फुल

कोडरमा. धान क्रय के मामले में कोडरमा जिला पूरे राज्य में नंबर वन पर है। जिले को मिले एक लाख क्विंटल धान क्रय के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 50 प्रतिशत धान की खरीद की जा चुकी है। इस वर्ष धान क्रय के साथ ही किसानों को उनके बैंक खाते में समय पर भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे किसानों में संतोष देखा जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद पैक्स स्तर पर धान क्रय की प्रक्रिया फिलहाल प्रभावित हो रही है। जिले में इस बार धान क्रय के लिए कुल 30 पैक्स एवं दो महिला मंडलों का चयन किया गया है। 15 दिसंबर से शुरू हुई धान खरीद में अब तक करीब 50 हजार क्विंटल धान किसानों से खरीदा जा चुका है। इनमें से लगभग 20 हजार क्विंटल धान मिलरों को भेजा गया है। लेकिन बीते एक सप्ताह से अधिकांश पैक्सों में धान क्रय लगभग ठप है। पैक्स संचालकों के अनुसार गोदाम पूरी तरह धान से भर चुके हैं। मिलों की ओर से धान का उठाव नहीं हो पाने के कारण आगे क्रय संभव नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि मिल संचालकों को एफसीआई को दिए जाने वाले चावल के बदले धान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन समय पर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति नहीं होने के कारण धान का उठाव प्रभावित हुआ है। पैक्स गोदामों में धान डंप, आगे की खरीद हो रही प्रभावित  इसके चलते पैक्स गोदामों में धान डंप हो गया है। गोदाम खाली होने के बाद ही आगे धान क्रय किया जा सकेगा। इस स्थिति से किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है, हालांकि प्रशासन उन्हें धैर्य रखने की अपील कर रहा है। इस संबंध में जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) प्रदीप शुक्ला ने कहा कि धान क्रय के लिए 31 मार्च तक का समय निर्धारित है, इसलिए किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। कोडरमा जिला राज्य में धान क्रय में सबसे आगे है और लक्ष्य का 50 प्रतिशत पहले ही हासिल कर लिया गया है, जबकि अभी ढाई माह से अधिक का समय शेष है। इस बार सरकार की ओर से लागू की गई हैं कई शर्तें उन्होंने बताया कि इस बार सरकार की ओर से कई शर्तें लागू की गई हैं, जिनमें अग्रिम धान नहीं लेना, छुट्टी व रविवार को धान क्रय नहीं करना तथा पैक्सों को लक्ष्य निर्धारित करना शामिल है। डीएसओ ने बताया कि पैक्सों में किसानों का धान पहुंचते ही दो से सात दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है। मिल संचालकों द्वारा सीएमआर की आपूर्ति होते ही धान का उठाव शुरू होगा और इसके बाद क्रय प्रक्रिया फिर से तेज हो जाएगी।

धान खरीदी में अनियमितता बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर सख़्त कार्रवाई जारी

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था के प्रति सरकार प्रतिबद्ध रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरकार की स्पष्ट नीति है कि धान खरीदी और भंडारण से जुड़े किसी भी स्तर पर अनियमितता, लापरवाही या गड़बड़ी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में जिला बेमेतरा के धान संग्रहण केन्द्र सरदा-लेंजवारा में कुल 12,72,389.56 क्विंटल धान का भंडारण किया गया था। कलेक्टर बेमेतरा के निर्देशानुसार इस संग्रहण केन्द्र में भंडारित धान का भौतिक सत्यापन एवं गुणवत्ता परीक्षण के लिए राजस्व, खाद्य, मार्कफेड, नागरिक आपूर्ति निगम, सहकारिता, कृषि उपज मंडी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग सहित संबंधित विभागों का संयुक्त जांच दल गठित किया गया। संयुक्त जांच दल द्वारा 31 दिसंबर 2025 को संग्रहण केन्द्र सरदा-लेंजवारा का भौतिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि भंडारित धान के स्टैक पूर्ण स्थिति में नहीं थे, धान के बोरे अव्यवस्थित रूप से बिखरे हुए थे तथा ऑनलाईन उपलब्ध स्टॉक की जानकारी और मौके पर उपलब्ध धान में गंभीर अंतर पाया गया।जांच में धान मोटा 4,209.19 क्विंटल एवं धान सरना 49,430.03 क्विंटल, कुल 53,639.22 क्विंटल धान की कमी पाई गई। इस संबंध में संयुक्त जांच दल द्वारा तैयार प्रतिवेदन शासन को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला विपणन अधिकारी बेमेतरा द्वारा संग्रहण केन्द्र सरदा-लेंजवारा के प्रभारी नितीश पाठक, क्षेत्र सहायक को दिनांक 14 जनवरी 2026 से समस्त प्रभारों से मुक्त करते हुए उनके विरुद्ध निलंबन एवं विभागीय जांच संस्थित करने के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने के उद्देश्य से हेमंत कुमार देवांगन, क्षेत्र सहायक को आगामी आदेश पर्यन्त धान संग्रहण केन्द्र लेंजवारा (सरदा) एवं भंडारण केन्द्र बेमेतरा का प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। भौतिक सत्यापन के दौरान संग्रहण केन्द्र सरदा एवं लेंजवारा में कुल 11,648.62 क्विंटल धान भौतिक रूप से उपलब्ध पाया गया, जिसमें से 3,000 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका है। शेष उपलब्ध धान के उठाव की प्रक्रिया नियमानुसार सतत जारी है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि संग्रहण केन्द्रों में प्लास्टिक बोरों में धान का भंडारण किया गया था, जो निर्धारित मानकों के विपरीत है। इन सभी तथ्यों को विभागीय जांच के दायरे में शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट संदेश है कि “धान का हर दाना खरीदा जाएगा, किसानों को उनका पूरा भुगतान समय पर मिलेगा, लेकिन किसी भी स्तर पर अनियमितता करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।” धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनाए रखने के लिए सरकार पूरी सख़्ती और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है।

धान का 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से हो रहा उपार्जन

दंतेवाड़ा. खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत जिले में धान खरीदी का कार्य सुचारू और पारदर्शी तरीके से संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासन के मंशानुरूप किसानों से निर्धारित मापदंडों के तहत धान की खरीदी की जा रही है और व्यवस्था को लेकर किसान पूरी तरह संतुष्ट हैं। प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया गया है कि प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है और उन अफवाहों का खंडन किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि केवल 12 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा रहा है। किसानों को उनकी पूरी उपज के लिए नियमानुसार टोकन जारी किए जा रहे हैं। किसानों से अपील की गई है कि वे केवल इस खरीफ सीजन का साफ-सुथरा और सुखाया हुआ धान ही उपार्जन केंद्रों पर लाएं। पुराने धान को खपाने की कोशिश या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शासन के संज्ञान में आया है कि कुछ तत्वों द्वारा धान खरीदी को लेकर संगठित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि गलत अफवाह फैलाकर व्यवस्था को बाधित करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मोखपाल धान खरीदी केंद्र में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों से सीधा संवाद किया है। चर्चा के दौरान किसानों ने बताया कि उन्हें टोकन प्राप्त करने और बारदाना मिलने में कोई समस्या नहीं हो रही है। किसानों ने समिति की कार्यप्रणाली और वहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया है। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य जितेन्द्र सोरी, जनपद पंचायत कटेकल्याण अध्यक्ष हपारांम कोवाड़ी, सहकारी समिति अध्यक्ष भीमाराम, और अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर खाद्य अधिकारी, नायब तहसीलदार, जिला विपणन अधिकारी, सहायक आयुक्त (सहकारिता) ,शाखा प्रबंधक जिला सहकारी बैंक दंतेवाड़ा और कृषि विस्तार अधिकारी ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

जशपुर के खरीदी केंद्र से 7 करोड़ की 20,586 क्विंटल धान गायब

जशपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के धान खरीदी केंद्र में खरीफ विपणन साल 2024-25 के दौरान बड़ी अनियमितता सामने आई है। जहां करीब 6 करोड़ 55 लाख रुपए की आर्थिक गड़बड़ी पाई गई है। जब अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी ने मौके का निरीक्षण किया तो मामले का खुलासा हुआ। मामला आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोनपारा (पंजीयन क्रमांक 128) के अंदर संचालित धान खरीदी उपकेंद्र का है। यहां पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों ने धान खरीदी के रिकॉर्ड में हेराफेरी की है। शुरुआती जांच और संयुक्त जांच दल की ओर से किए गए भौतिक सत्यापन में 20,586.88 क्विंटल धान कम पाया गया। नोडल अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामला तुमला थाना क्षेत्र का है। कोनपारा धान खरीदी उपकेंद्र में 6 करोड़ 55 लाख रुपए की आर्थिक गड़बड़ी पाई गई। जांच के दौरान खरीदी केंद्र से 20,586.88 क्विंटल धान की कमी पाई गई है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित (अपेक्स बैंक) जशपुर के नोडल अधिकारी राम कुमार यादव (61) ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार धान खरीदी उपकेंद्र कोनपारा में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर धान खरीदी में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की। 20,586 क्विंटल धान गायब मामले की जांच की गई तो सामने आया कि खरीफ वर्ष 2024-25 में कंप्यूटर रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में कुल 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्शाई गई थी। जबकि मिलों और संग्रहण केंद्रों को केवल 1,40,663.12 क्विंटल धान ही भेजा गया। इस तरह कुल 20,586.88 क्विंटल धान की कमी पाई गई। 6.55 करोड़ रुपए का नुकसान गायब धान की कीमत 3,100 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से 6 करोड़ 38 लाख 19 हजार 328 रुपए आंकी गई है। इसके अलावा धान की पैकिंग में उपयोग किए गए 4,898 नग बारदाने (नए-पुराने) की कीमत 17 लाख 7 हजार 651 रुपए बताई गई है। इस प्रकार शासन को कुल 6 करोड़ 55 लाख 26 हजार 979 रुपए के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। 6 आरोपियों पर FIR अपेक्स बैंक जशपुर के नोडल अधिकारी राम कुमार यादव (61) की रिपोर्ट पर समिति स्तर पर पदस्थ 6 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 320, 336, 338 और 61 के तहत केस दर्ज किया गया है। प्राधिकृत अधिकारी (खरीदी केंद्र) भुनेश्वर यादव, समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू, फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव, कंप्यूटर ऑपरेटर जितेंद्र साय, सहायक फड़ प्रभारी अविनाश अवस्थी और उप सहायक फड़ प्रभारी चंद्र कुमार यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी फरार SSP शशि मोहन सिंह ने बताया कि पुलिस ने फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव (39), निवासी ग्राम झारमुंडा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। अन्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। जांच के दौरान यदि और तथ्य या संलिप्तता सामने आती है तो और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

धान खरीदी घोटाले पर कार्रवाई, लापरवाह पाए गए 2 पटवारी सस्पेंड

बलरामपुर धान खरीदी कार्य में लापरवाही करने वाले 2 पटवारियों के खिलाफ बलरामपुर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया है. कलेक्टर ने तहसील रामचंद्रपुर में पदस्थ पटवारी बंधन राम और तहसील रामानुजगंज में पदस्थ पटवारी विजय यादव को निलंबित कर दिया है. जारी आदेश में बताया गया है कि धान खरीदी वर्ष 2025–26 के दौरान संबंधित पटवारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियमों के विपरीत है. इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों पटवारियों को निलंबित किया है. निलंबन अवधि में पटवारी बंधन राम का मुख्यालय तहसील कार्यालय कुसमी तथा पटवारी विजय यादव का मुख्यालय तहसील कार्यालय शंकरगढ़ निर्धारित किया गया है. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा.

पारदर्शिता से बदली धान खरीदी की तस्वीर, किसान पिंकू कुजूर बोले– अब प्रक्रिया आसान और भरोसेमंद

अंबिकापुर, जिले में संचालित धान उपार्जन केन्द्रों की पारदर्शी एवं किसान-हितैषी व्यवस्था का लाभ अब किसानों को मिल रहा है। टोकन प्रणाली, समयबद्ध खरीदी, त्वरित नमी परीक्षण तथा मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता के चलते धान विक्रय की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और सहज हो गई है। किसानों को अब धान बेचने के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। अम्बिकापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत श्रीगढ़ निवासी किसान पिंकू केरकेट्टा ने बताया कि इस वर्ष उनकी धान की फसल अच्छी हुई है। उन्होंने कुल 59.60 क्विंटल धान का रकबा है, जिसे उन्होंने खैरबार धान उपार्जन केन्द्र में विक्रय किया है। किसान श्री केरकेट्टा ने बताया कि टोकन कटाने की प्रक्रिया पूरी तरह से व्यवस्थित रही और इसमें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि खैरबार उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही गेट पास जारी किया गया, इसके बाद धान की नमी परीक्षण कर तत्काल बारदाना उपलब्ध कराया गया। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तेज रही, जिससे कम समय में धान की तौल और खरीदी पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि उन्हें धान विक्रय के दौरान किसी भी स्तर पर दिक्कत नहीं हुई। किसान केरकेट्टा ने बताया कि उपार्जन केन्द्र में किसानों के लिए बैठने एवं पीने के स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था है, उन्होंने कहा कि पहले धान बेचने में पूरा दिन लग जाता था, लेकिन अब सीमित समय में कार्य पूर्ण हो जाता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा धान का सर्वाधिक मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है, जिससे किसानों को फसल का उचित दाम मिला है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। फसल विक्रय से प्राप्त राशि का उपयोग किसान केरकेट्टा रबी सीजन में गेहूं, सरसों एवं विभिन्न सब्जी फसलों की खेती में कर रहे हैं। इससे बहुफसली खेती को बढ़ावा मिल रहा है और किसानों की आय के स्रोत भी बढ़ रहा हैं। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान और बेहतर व्यवस्था के कारण किसान अब अपनी आगे की खेती की योजना आसानी से बना पा रहे हैं। किसान  केरकेट्टा ने धान खरीदी व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था किसानों के हित में है उन्होंने किसानों के लिए की गई धान खरीदी व्यवस्थाओं हेतु मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।