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जीपीएम जिले के सभी पंप संचालक बने रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य, शुरू की हेलमेट मुहिम

रायपुर : अब बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं: जीपीएम जिले के पंप संचालकों ने उठाया कदम जीपीएम जिले के सभी पंप संचालक बने रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य, शुरू की हेलमेट मुहिम बिना हेलमेट पेट्रोल बंद, जीपीएम पंप संचालकों ने बढ़ाया सुरक्षा और समाजसेवा का कदम रायपुर गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में सड़क हादसों को कम करने और लोगों की जान बचाने के लिए अब प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी और पुलिस अधीक्षक श्री एस.आर. भगत की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में हुई बैठक में तय किया गया कि अब जिले के सभी पेट्रोल-डीजल पंपों पर “नो हेलमेट-नो पेट्रोल” नियम सख्ती से लागू किया जाएगा। बैठक में सभी पंप संचालकों ने इस फैसले का स्वागत किया और सहमति जताई। तय हुआ कि आने वाले एक हफ्ते तक जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाया जाएगा कि पेट्रोल लेने के लिए हेलमेट पहनना जरूरी है। इसके लिए सभी पंपों पर चेतावनी वाले फ्लैक्स लगाए जाएंगे और चौक-चौराहों पर भी घोषणाएं की जाएंगी। इसके बाद प्रशासन हेलमेट की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करेगा। बैठक में मानवता की सेवा के लिए जिला रेडक्रॉस सोसायटी की सदस्यता लेने पर भी चर्चा हुई। इसमें सभी पंप संचालकों ने 1000 रुपये शुल्क जमा कर आजीवन सदस्यता ली। इसके साथ ही, गौरेला के मथुरा पेट्रोल पंप संचालक उमेश अग्रवाल और पेंड्रा के काव्या पेट्रोल पंप संचालक आदित्य साहू ने 25 हजार रुपये सेवा शुल्क देकर संरक्षक सदस्यता भी ग्रहण की। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा सहित जिले के सभी प्रमुख पेट्रोल पंप संचालक और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम से जुड़े विभिन्न पंप संचालकों ने भी भाग लिया और इस जनहितकारी निर्णय का समर्थन किया। इस तरह प्रशासन और पंप संचालकों के संयुक्त प्रयास से जिले में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और हेलमेट पहनने की आदत से कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकेंगी।

Petrol के बाद Diesel में बदलाव: Isobutanol ब्लेंडिंग से क्या होंगे फायदे?

नई दिल्ली  बीते कुछ हफ्तों से देश भर में एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल (E20 Petrol) की खूब चर्चा हो रही है. पेट्रोल के आयात और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल को मिक्स करना शुरू किया, जो इस समय देश के कई फ्यूल स्टेशन पर बिक्री के लिए उपलब्ध है. जिसके बाद कई वाहन मालिकों ने माइलेज और परफॉर्मेंस में कमी आने की शिकायत की. अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल (Isobutanol) मिलाने की तैयारी कर रही है.  हाल ही में पुणे में प्राज इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि, "एथेनॉल हमारे लिए एक शुरुआत है, ये कोई अंत नहीं है. मैं विशेष रूप से प्राज इंडस्ट्री और ARAI को धन्यवाद दूंगा कि, उन्होनें एथेनॉल के बाद आइसोब्यूटेनॉल पर काम करना शुरू किया है. और अभी वो डीजल में 10% आइसोब्यूटेनॉल डालकर प्रयोग कर रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने किर्लोस्कर के साथ मिलकर 100% आइसोब्यूटेनॉल पर चलने वाला इंजन भी तैयार किया है. आइसोब्यूटेनॉल वैकल्पिक जैव ईंधन है."  नितिन गडकरी ने आगे कहा कि, "आइसोब्यूटेनॉल डीजल का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. हमारे देश में पेट्रोल के तुलना में डीजल का प्रयोग ढाई से तीन गुना ज्यादा होता है. प्रदूषण की मुख्य समस्या पेट्रोल और डीजल के कारण ज्यादा है. आने वाले समय में आइसोब्यूटेनॉल हमारे देश के लिए एक वरदान साबित हो सकता है. रिसर्च, ट्रायल और स्टैंडर्ड निश्चित होने के बाद जब इसका प्रस्ताव पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को जाएगा और मंत्रालय से इसको मान्यता मिलेगी तब इसका मार्केट और भी बढ़ेगा."  क्या है आइसोब्यूटेनॉल आइसोब्यूटेनॉल मूल रूप से एल्केनॉल (अल्कोहल) ग्रुप से आने वाला एक कलरलेस, फ्लेमेबल ऑर्गेनिक लिक्विड है. इसका केमिकल फार्मूला (C₄H₁₀O) है. ये व्यापक रूप से पेंट और कोटिंग्स के लिए सॉलवेंट यानी विलायक के रूप में काम में लिया जाता है. इसके अलावा अपने हाई एनर्जी डेंसिटी और ऑक्टेन रेटिंग के कारण फ्यूल ऐडिटिव्स के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है. इसे प्रोपिलीन कार्बोनिलीकरण के माध्यम से पेट्रोलियम या बायोमास जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है. डीज़ल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग फ्यूल ब्लेंडिंग: आइसोब्यूटेनॉल को डीज़ल के साथ मिक्स कर उपयोग किया जा सकता है. यह उत्सर्जन को कम करने और फ्यूल एफिशिएंसी को बढ़ाने में मदद कर सकता है. क्लीन बर्निंग फ्यूल: इसमें सल्फर और अन्य हानिकारक तत्व कम होने के कारण डीज़ल इंजन में स्वच्छ दहन (Clean Combustion) होता है. ग्रीनहाउस गैस में कमी: आइसोब्यूटेनॉल फ्यूल से CO₂ और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन कम होता है. इंजन कम्पैटिबिलिटी: शोध से पता चला है कि डीज़ल इंजनों में आइसोब्यूटेनॉल-डीज़ल मिश्रण बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है. बेहतर प्रदर्शन: इससे इंजन परफॉर्मेंस बनी रहती है और ईंधन की खपत भी थोड़ी कम हो सकती है. हालांकि अभी डीजल में आइसोब्यूटेनॉल के मिक्स्चर पर शोध जारी है. लेकिन माना जा रहा है कि, भविष्य में आने वाले नए डीजल इंजन फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के ही सिद्धांत पर काम करेंगे. जो संभवतः पूरी तरह से आइसोब्यूटेनॉल पर चलने में सक्षम होंगे. क्या कहते हैं अब तक हुए शोध? सोसायटी ऑफ ऑटोमोटिव इंजीनियर्स (SAE) की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार 4-स्ट्रोक सिंगल-सिलेंडर डीज़ल इंजन में 5% और 10% वॉल्यूम आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर ब्रेक थर्मल एफिशिएंसी (BTE) में वृद्धि देखी गई है. ब्रेक स्पेसिफिक फ्यूल कंजम्प्शन (BSFC) में सुधार हुआ है, यानी ईंधन की खपत प्रति यूनिट ऊर्जा कम हुई. कार्बन उत्सर्जन और धुएँ की तीव्रता (Smoke Opacity) में काफी कमी आई है, जबकि NOₓ उत्सर्जन में मामूली कमी देखने को मिली है. बहरहाल, डीजल में आइसोब्यूटेनॉल को मिलाने को लेकर शोध अभी चल रही है. जैसा कि नितिन गडकरी ने भी बताया कि, इससे जुड़ी एजेंसियां इस पर प्रयोग कर रही हैं. यानी अभी इस डीजल ब्लेंडिंग पर अंतिम रिपोर्ट आने में थोड़ा समय लगेगा. अभी इस बात की भी जानकारी नहीं मिली है कि, सरकार डीजल में इसका प्रयोग कब शुरू करेगी. अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरण में है और रिसर्च/प्रयोग में सफलता मिलने के बाद इसका प्रस्ताव संबंधित मंत्रालय को भेजा जाएगा, जहां से इसे आखिरी मंजूरी मिलेगी.  भारत में डीजल की खपत पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार भारत की कुल कच्चे तेल की खपत में डीज़ल का योगदान लगभग 40% है. 2024-25 में डीज़ल की खपत 2% बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो जाएगी. पीपीएसी ने 2025-26 के लिए डीज़ल के उपयोग में 3% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो 94.1 मिलियन टन हो जाएगा.

मंत्री पटेल की अगुवाई में हुई श्रम विभागीय समीक्षा, नीतियों पर हुआ मंथन

भोपाल  पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय में श्रम विभागीय परार्मशदात्री समिति की बैठक सम्पन्न हुई।  बैठक में श्रमिक हित में किये जाने वाले नवाचारों के संबंध में सदस्यों को अवगत कराया गया। श्रम विभाग की नई पहल, SHREE (श्रमिक हेल्थ रेजुवेशन एजुकेशन एण्ड इंटरप्राइज) पहल का उ‌द्देश्य विभिन्न सरकारी निकायों के संसाधनों का उपयोग करके मध्यप्रदेश में श्रमिकों की स्थिति को समग्र रूप से बेहतर बनाना है। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्‌यम और कार्यस्थल के वातावरण में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर मानव संसाधन का कायाकल्प और सशक्तिकरण करना है, जिससे सतत् सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। स्वास्थ्य, शिक्षा, उ‌द्यम और कार्यस्थल सुधार को एकीकृत करके SHREE न केवल राज्य में बल्कि पूरे भारत में श्रमिक कल्याण और विकास के लिए एक आदर्श स्थापित करेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रम स्टार रेटिंग सूचकांक भी प्रस्तावित किया गया है, जिसके संबंध में सचिव श्रम विभाग ‌द्वारा अवगत कराया गया कि यह रेटिंग सूचकांक वैश्विक स्तर पर श्रम कल्याण मानकों को उत्कृष्ट बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वैश्विक बाजार ‌द्वारा नैतिक स्त्रोतों, निष्पक्ष श्रम प्रथाओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने की प्रणाली को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। विनिर्माण और सेवा उ‌द्योगों में श्रम कल्याण के महत्व को समझते हुए विभिन्न कार्यप्रणाली के आधार पर व्यवसायों को रेटिंग दिये जाने से उपभोक्ता तथा परिचालन उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकेगी। बैठक में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस, देवेन्द्र रामनारायण सखवारे, बृजेन्द्र सिंह यादव, श्रीमती अनुभा मुंजारे, विष्णु खत्री और श्रम विभाग के सचिव रघुराज राजेन्द्रन, अपर सचिव श्रम बसंत कुर्रे और आयुक्त श्रीमती रजनी सिंह उपस्थित थी।  

हेलमेट न खरीदो, किराए पर पहन लो! इंदौर में चालान से बचने का नया तरीका वायरल

इंदौर   इंदौर में 1 अगस्त से प्रशासन के आदेश के बाद बिना हेलमेट पेट्रोल देने पर सख्त रोक लगा दी गई है। अब पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट आए दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जा रहा है, जिससे शहर में ऐसे कई नजारे दिखने लगे, जो प्रशासन के नियम को धता बता रहे है। लोग इसकी हेलमेट उसके सिर की तर्ज पर पेट्रोल भरवा रहे है। बांगड़दा के पेट्रोल पंप पर हेलमेट नहीं पहन कर आए एक दोपहिया वाहन चालक ने पेट्रोल नहीं देने पर कर्मचारियों से विवाद भी किया।  कई लोग पेट्रोल भरवाने के लिए दूसरों से हेलमेट उधार मांग रहे हैं या आसपास खड़े लोगों का हेलमेट पहनकर केवल नियम पूरा कर रहे हैं।कुछ पेट्रोल पंपों के पास लोग 10-15 रुपये किराए पर हेलमेट देने लगे हैं ताकि ग्राहक पेट्रोल भरवा सकें। कई पंपों पर बेरिकेडिंग की गई है।सिर्फ जिनके पास हेलमेट है, उन्हें ही पेट्रोल पंप परिसर में जाने दिया जा रहा है।इस नए नियम के चलते हेलमेट की बिक्री अचानक बढ़ गई है, लोग फुटपाथों पर हेलमेट बेचने लगे हैं। यह बात भी सामने आई कि सायकल हेलमेट, खिलौना हेलमेट, किराए की हेलमेट जुगाड़ अपना पर भी कई जगह पेट्रोल भरवाने लोग जा रहे है। इंदौर में छोटी ग्वालटोली क्षेत्र में पेट्रोल पंप के बाहर एक व्यक्ति हेलमेट पहने खड़ा था। वह बगैर हेलमेट पेट्रोल भरवाने आने वाले लोगों से पूछ रहा था कि हेलमेट चाहिए क्या। लोग लोग हेलमेट लेने के लिए तैयार हो रहे थे, वह उनसे दस रुपये मांग रहा था। परदेशीपुरा पेट्रोल पंप पर संचालक ने बेरिकेड लगवा दिए। जिनके पास हेलमेट है। उन्हें भी बेरिकेड के भीतर जाने दिया जा रहा है। इस पंप से कुछ दूरी पर दो युवक हेलमेट दस रुपये में किराए पर दे रहे है, लेकिन वे पैसे नकद ले रहे है, ताकि कोई अधिकारी पकड़े तो उनके पास पैसे लेने के सबूत न रहे। इस पंप पर एक युवक सायकल के साथ पहनी जाने वाली हेलमेट पहन कर आ गया, लेकिन वह उसके सिर से बार-बार गिर रही थी। उसे भी कर्मचारियों ने पेट्रोल नहीं दिया।   भाई हेलमेट देना जरा, पेट्रोल भरवाने जाना है पेट्रोल भरवाने के लिए वाहन चालक अपने आस पड़ोसियों से, रिश्तेदारों से हेलमेट उधार मांग रहे है। वे यह बोलते नजर आ रहे है कि भाई हेलमेट देना जरा, पेट्रोल भरवा कर लाना है। ज्यादातर ई स्कूटर वाले बगैर हेलमेट के घूम रहे इंदौर में 40 हजार से ज्यादा ई बाइक व स्कूटर है। वे घर से ही अपना वाहन चार्ज करते है,हालांकि शहर में भी सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन है, लेकिन वहां के लिए प्रशासन की तरफ से स्पष्ट आदेश नहीं है। इस कारण बगैर हेलमेट के दोपहिया वाहन चालक अपने वाहन चार्ज कर रहे है।

भोपाल में नया आदेश लागू: पेट्रोल-सीएनजी केवल हेलमेट पहनने वालों को ही मिलेगा

भोपाल   भोपाल जिले में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही लगातार वृद्धि और जनहानि को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए एक प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार, 1 अगस्त शुक्रवार से बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को जिले के किसी भी पेट्रोल पंप या सीएनजी स्टेशन से पेट्रोल अथवा गैस नहीं दी जाएगी। सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना उद्देश्य राजधानी में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने यह बड़ा कदम उठाया है। भोपाल कलेक्टर ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि अब शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। यह आदेश राजधानी के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू होगा। आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई कलेक्टर की आदेश के मुताबिक इस फैसले का उद्देश्य ट्रैफिक नियमों के पालन को सुनिश्चित करना और सड़क हादसों में कमी लाना है। कलेक्टर ने पेट्रोल पंप संचालकों को चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आईएसआई मार्क हेलमेट जरूरी भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के इस आदेश में लिखा है मध्य प्रदेश मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 में स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन सवारी तथा वाहन चालक अनिवार्य रूप से आईएसआई. मार्क हेलमेट पहनेगा। 

भोपाल-इंदौर में नई व्यवस्था: बिना हेलमेट वालों को नहीं मिलेगा पेट्रोल, प्रशासन ने कसी कमर

भोपाल / इंदौर मध्य प्रदेश के दो शहर भोपाल और इंदौर में सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है. अब आज 1 अगस्त 2025 से शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा. यह सख्त निर्देश दोनों शहरों के कलेक्टर ने जारी किए हैं. प्रशासन का मानना है कि इस कदम से सड़क हादसों में कमी लाई जा सकेगी और लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ेगी. इस आदेश को लागू करने का निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया. बैठक में इंदौर की मौजूदा यातायात व्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. इसके बाद जिला प्रशासन ने यह ठोस कदम उठाने का ऐलान किया. कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि यह आदेश दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है औरआज  1 अगस्त से इसे सख्ती से लागू किया जाएगा. आदेश से पहले 30 और 31 जुलाई को शहर भर में जनजागरूकता अभियान चलाया गया , ताकि लोगों को समय रहते जानकारी मिल सके और वे नियमों का पालन करें. नियम नहीं माना तो पेट्रोल पंप के खिलाफ होगी कार्रवाई प्रशासन ने पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देशित किया है कि वे बिना हेलमेट आए किसी भी व्यक्ति को पेट्रोल न दें. अगर कोई पेट्रोल पंप इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस आदेश के लागू होने से शहर में हेलमेट पहनने की आदत को मजबूती मिलेगी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा. मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 मप्र मोटर यान अधिनियम 1988 की धारा-129 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि प्रत्येक दो पहिया वाहन चालक और सवारी को आईएसआई मार्क हेलमेट(Helmet Petrol Rule 2025) पहनना जरूरी है। यह प्रतिबंध 01 अगस्त 2025 से लागू होकर 29 सितंबर 2025 तक प्रभावशील रहेगा। इसके उल्लंघन की स्थिति में संबंधित व्यक्ति, संस्था या संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। किस कानून के तहत आया आदेश?  यह नियम मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129, आपदा प्रबंधन अधिनियम और नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत लागू किया गया है। इसके तहत दोनों शहरों के पेट्रोल पंप संचालकों को आदेशित किया गया है कि वे बिना हेलमेट आए ग्राहक को ईंधन न दें। आदेश का उल्लंघन करने पर पंप संचालकों पर कानूनी कार्रवाई होगी, हालांकि उपभोक्ता पर क्या सज़ा होगी, इसका अभी स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। कहां, कैसे और किसको मिलेगी हेलमेट न पहनने की छूट? यदि किसी व्यक्ति के पास मेडिकल इमरजेंसी या आकस्मिक परिस्थिति है, तो उसे इस नियम से अस्थायी रूप से छूट दी जाएगी। लेकिन अन्य सभी मामलों में यह नियम सख्ती से लागू होगा। इमरजेंसी में मिले सकेगी छूट     प्रतिबंध मेडिकल संबंधी मामलों व आकस्मिक स्थिति में लागू नहीं होगा। यह प्रतिबंध अन्य किसी नियम/आदेश के प्रतिबंध के अतिरिक्त होंगे।     यह आदेश 1 अगस्त 25 से लागू होगा। 29 सितंबर 25 तक की अवधि में प्रभावशील रहेगा।     इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, संस्था और संचालक के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता-23 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी। बिना हेलमेट आने वालों पर क्या कार्रवाई? पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन बिना हेलमेट के पेट्रोल देने पर पंप संचालक पर तो कार्रवाई करेगी, लेकिन जो पेट्रोल ले रहा है, उस पर क्या कार्रवाई होगी? सड़क पर पुलिस बिना हेलमेट वाले वाहन चालकों को नहीं पकड़ पा रही है। इस पर भी सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष और रिटायर्ड न्यायाधीश न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने मंगलवार को इंदौर में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक ली थी। इस दौरान उन्होंने कुछ जरूरी निर्देश दिए थे।     सरकारी कर्मचारियों और विद्यार्थियों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए।     अगले 6 महीनों में सुधार के लिए रणनीति तैयार की जाए ताकि सकारात्मक बदलाव और नतीजे देखने को मिलें। न्यायमूर्ति सप्रे ने कहा था कि इंदौर में लोगों को हेलमेट पहनने की आदत डालनी चाहिए। सीट बेल्ट के इस्तेमाल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाई जाए। शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। लोक परिवहन के साधन बढ़ाए जाएं ताकि सड़कों पर छोटे निजी वाहनों की भीड़ कम हो। पुलिस, सरकारी कर्मचारी और विद्यार्थी जब भी वाहन चलाएं, तो हेलमेट पहनना अनिवार्य हो। सरकारी दफ्तरों में बिना हेलमेट एंट्री नहीं  इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी कलेक्टर को पत्र लिखकर सरकारी कार्यालयों में हेलमेट अनिवार्य करने की सिफारिश की थी। अब बिना हेलमेट किसी सरकारी दफ्तर में प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सिफारिशों पर अमल  सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष रिटायर्ड जज अभय मनोहर सप्रे ने इंदौर समीक्षा बैठक में हेलमेट अनिवार्यता, शराब पीकर वाहन चलाने पर सज़ा, और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहन जैसे बिंदुओं पर सख्त अमल की मांग की थी। यही दिशा-निर्देश अब जमीन पर उतारे जा रहे हैं। कब से लागू होगा हेलमेट पहनने का आदेश? क्या मिलेगा दंड? यह आदेश 1 अगस्त से 29 सितंबर 2025 तक लागू रहेगा। नियम का उल्लंघन करने पर IPC की धारा 223 के तहत चालान या अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश में स्पष्ट नहीं प्रशासन का निर्णय ठीक है, लेकिन आदेश में स्पष्ट नहीं है कि पेट्रोल पंप(Helmet Petrol Rule 2025) पर यदि कोई बिना हेलमेट के पेट्रोल भरवाता है तो इसमें पेट्रोल पंप संचालक को दोषी नहीं माना जाएगा। पंप संचालक को इसके लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। पंप संचालक पर इसकी अनिवार्यता नहीं होना चाहिए।-अजय सिंह, अध्यक्ष, मप्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन

कलेक्टर रुचिका चौहान ने झांसी रोड पेट्रोल पंप पर दो महिलाओं को शक्ति दीदी की जैकेट पहनाकर फ्यूल डिलीवरी वर्कर का दायित्व सौपा

ग्वालियर  ग्वालियर जिले की महिलाएं अब चौका-चूल्हे और घरेलू कामकाज करने तक ही सीमित नहीं रही हैं। जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से किए गए नवाचार ‘शक्ति दीदी’ से जुडकर जरूरतमंद महिलाएं बखूबी ढंग से पुरुषों की तरह फ्यूल डिलेवरी वर्कर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।  5 और जरूरतमंद महिलाएं शक्ति दीदी बनाई गईं। इन सभी महिलाओं ने जिले के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर फ्यूल डिलेवरी वर्कर की जिम्मेदारी संभाल ली है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने शक्ति दीदी जैकेट पहनाकर सौंपा दायित्व  कलेक्टर रुचिका चौहान ने झांसी रोड और अचलेश्वर के पास स्थित पेट्रोल पंप पर दो महिलाओं को शक्ति दीदी की जैकेट पहनाकर उन्हें फ्यूल डिलीवरी वर्कर का दायित्व सौपा। ऐसा ही फुलबाग ,कलेक्ट्रेट के पीछे और काल्पी ब्रिज स्तिथ पेट्रोल पंप पर भी तीन महिलाओं को फ्यूल डिलीवरी वर्कर का जिम्मा दिया गया। आपको बता दें कि ग्वालियर कलेक्टर के इस नवाचार की तारीफ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी कर चुके हैं। कलेक्टर ने पेट्रोल पंप संचालकों को दिए निर्देश  इस अवसर पर कलेक्टर चौहान ने पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देश दिए कि शक्ति दीदियों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें प्रावधानों के अनुसार मानदेय व अन्य सुविधाएं एवं साप्ताहिक अवकाश अवश्य प्रदान किया जाए। उन्होंने थाना प्रभारी को भी निर्देश दिए कि जिन पेट्रोल पंप पर शक्ति दीदी तैनात हैं उन पर लगातार गश्त करते रहें। साथ ही एसडीएम, तहसीलदार पुलिस अधिकारी, पेट्रोल पंप संचालक एवं शक्ति दीदियों को शामिल कर एक वॉट्सएप ग्रुप में नई शक्ति दीदियों को जोडें।