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देश की पहचान और परंपरा से जोड़ता है राम मंदिर: राष्ट्रपति मुर्मु

अयोध्या राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नवरात्र के प्रथम दिन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आयोजित श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राम मंदिर भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पावन प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर हमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि उन्हें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता है कि देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या धाम अब धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन चुका है और यह मंदिर परिसर भारत की सनातन चेतना, ऊर्जा और पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत का पुनर्जागरण केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सभी आयामों में हो रहा है। राष्ट्रपति ने जोर देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का नमन करना और भारत माता का वंदन करना एक ही भाव है। देवभक्ति और देशभक्ति का मार्ग अलग नहीं, बल्कि एक ही है। राष्ट्रपति ने रामराज्य की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता के सर्वोच्च आदर्शों को प्रस्तुत करता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास के रामायण में वर्णित आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों माता शबरी से भावपूर्ण मिलन, निषादराज से स्नेह, जटायु के प्रति सम्मान, वानर सेना का सहयोग, जामवंत और यहां तक कि गिलहरी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी उदाहरण एक सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी जीवन दर्शन को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, जो नवरात्र का प्रथम दिन है, इस पावन अवसर पर अयोध्या आकर वह स्वयं को कृतार्थ अनुभव कर रही हैं। साथ ही उन्होंने देशवासियों को रामनवमी के अवसर पर अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। इस मौके पर आनंदीबेन पटेल ने कहा कि अयोध्या आस्था, संस्कार और विरासत की भूमि है और आज यह वैश्विक चेतना का केंद्र बन चुकी है। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारतीय संदेश के कारण आज विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है। राज्यपाल ने कहा कि भारत वह भूमि है जहां शक्ति का अर्थ सृजन, आस्था का अर्थ करुणा और धर्म का सार समाज को जोड़ना है। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर को देशवासियों के लिए सदैव स्मरणीय बताया।

राम मंदिर में नव वर्ष समारोह: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु श्रमिकों और कर्मचारियों को करेंगी सम्मानित

अयोध्या भगवान श्रीराम की नगरी में नव संवत्सर (नव वर्ष) पर ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है. समारोह को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हई हैं. राम मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले इस विशेष समारोह की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु होंगी. वे मंदिर में अनुष्ठान के बाद श्रमिक और कर्मचारियों को सम्मानित भी करेंगी. बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति राम मंदिर परिसर में लगभग चार घंटे तक रहेंगी. वे मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र और श्रीराम नाम मंदिर की स्थापना भी करेंगी. विशेष बात ये है कि मंदिर समिति ने पहली बार किसी बड़े कार्यक्रम के दौरान दर्शन सुचारु रखने की योजना बनाई है. जानकारी के मुताबिक 19 मार्च को सुबह 9 बजे से अनुष्ठानों की शुरुआत होगी. दक्षिण भारत, काशी और अयोध्या के 51 वैदिक आचार्य अनुष्ठानों को संपन्न कराएंगे. काशी के आचार्य पद्मभूषण पंडित गणेश्वर शास्त्री के नेतृत्व में समस्त अनुष्ठान होंगे. कार्यक्रम की व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं. सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही अतिथियों के स्वागत, बैठने की व्यवस्था, पार्किंग और आवागमन की सुचारु व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. ट्रस्ट के मुताबिक श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ मंदिर के दूसरे तल की धार्मिक गतिविधियों को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिलेगी. यह यंत्र श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का प्रतीक माना जाता है. राष्ट्रपति की उपस्थिति से यह आयोजन राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप ग्रहण करेगा. हिंदू नववर्ष के शुभारंभ अवसर पर 19 मार्च को प्रस्तावित नव संवत्सर समारोह की तैयारियों को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बैठक भी की थी. जिसमें आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई थी.

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर मायावती भड़कीं, उठाए सवाल

लखनऊ  पश्चिम बंगाल दौरे पर गईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम से जुड़े प्रोटोकॉल विवाद पर बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को कहा कि संवैधानिक पदों का सम्मान होना चाहिए व उनका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। मायावती ने 8 मार्च को अपने ट्वीट में लिखा, "भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना जरूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है। वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण।" बसपा अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, "इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है। सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा। इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।"

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ दार्जिलिंग में विवादित व्यवहार, झारखंड राजनैतिक हलकों में आक्रोश

 दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर सियासत तेज हो गई है। झारखंड के कई नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए इसे राष्ट्रपति पद और आदिवासी समाज का अपमान बताया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के व्यवहार को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ किया गया व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। अर्जुन मुंडा ने भी इस घटना को संविधान का अपमान बताया मरांडी ने अपने प्रेस बयान में कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के प्रति इस तरह का रवैया प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इससे आदिवासी समाज की भावनाएं भी आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के शब्दों में जो पीड़ा और असहजता दिखाई दी, उसे पूरे देश ने महसूस किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है और संथाल आदिवासी समाज का भी अपमान किया है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी इस घटना को संविधान का अपमान बताया है। मुर्मु के साथ ऐसा व्यवहार करना बेहद शर्मनाक आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश महतो ने भी इस मामले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं और उनके साथ ऐसा व्यवहार करना बेहद शर्मनाक है। सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि जब राष्ट्रपति नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने दार्जिलिंग पहुंचीं, तब उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद थीं और न ही कोई वरिष्ठ अधिकारी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को प्रोटोकॉल के अनुसार सम्मान नहीं दिया गया, जो बेहद आपत्तिजनक है। आजसू पार्टी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे राष्ट्रपति पद का अपमान बताया है।  

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का झारखंड आगमन, पुष्पगुच्छ भेंट कर राज्य सरकार ने किया अभिनंदन

रांची  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को अपने निर्धारित दौरे पर झारखंड की राजधानी रांची पहुंचीं। उनका स्वागत बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर भव्य तरीके से किया गया। राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने भव्य जगन्नाथ मंदिर का किया शिलान्यास राष्ट्रपति के आगमन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रोटोकॉल के अनुसार पुलिस और विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए, ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। स्वागत समारोह के बाद राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर के जरिए जमशेदपुर के लिए रवाना हो गईं। राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी उनके साथ थे। जमशेदपुर प्रशासन ने भी सुरक्षा को लेकर पूरी तैयारी कर ली थी। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच संपन्न हुआ भूमि पूजन जमशेदपुर के कदमा मरीन ड्राइव पहुंचकर राष्ट्रपति ने भव्य जगन्नाथ मंदिर का शिलान्यास किया। इस अवसर पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच विधि-विधान से भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनेगा।  

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा: सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला

विश्वास वहीं टिकता है जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध होती हैं: राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा: सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला लखनऊ में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में बोलीं राष्ट्रपति  सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है: द्रौपदी मुर्मु लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह में भाग लेते हुए राजयोग के जरिए आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वास वहीं टिकता है, जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है। राष्ट्रपति मुर्मु के अनुसार, शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज बोता है और वहीं से विश्व शांति और विश्व एकता की नींव बनती है। भारत की प्राचीन सभ्यता ने दिया वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने “ओम शांति” के संबोधन से अपने वक्तव्य की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति ने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश विश्व को दिया है, जिसका भाव यह है कि सारा विश्व एक परिवार है। आज जब विश्व कई प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है, तब यह विचार और अधिक प्रासंगिक बन जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस महान संकल्प को सिद्ध करने के लिए यह अभियान प्रभावी योगदान देगा। उन्होंने कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ब्रह्मकुमारीज परिवार के सभी सदस्यों को बधाई दी। भारत सरकार ने समाज को अधिक समावेशी बनाने के लिए उठाए कदम राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार समाज को अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और मूल्य-आधारित बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। योग एवं ध्यान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन का नेतृत्व भी इसी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य-आधारित शिक्षा तथा जीवन पोषण जैसे तथ्यों का समावेशन इसी दिशा का प्रयास है। भारत सरकार ने मिशन लाइफ अभियान की शुरुआत की है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता प्रसारित करने का अभियान है। महिला सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेश के लिए विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आध्यात्मिक चेतना से सुरक्षित होगा मानवता का भविष्य वर्ष 2023 में भारत में हुए जी-20 समिट के आयोजन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समिट का थीम था वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर। उन्होंने कहा कि ये पहल इस महत्वपूर्ण संदेश को मजबूत करती हैं कि मानवता का भविष्य मानव-मूल्यों, संवाद, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना से सुरक्षित और उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में विज्ञान और तकनीक के बल पर मानवता ने अभूतपूर्व प्रगति की है। आज का युग सूचना, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और अंतरिक्ष अनुसंधान का युग है। इन क्रांतिकारी परिवर्तनों ने मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, सुगम तथा संसाधन-संपन्न बनाया है। तकनीकी उन्नति के साथ बढ़ रहा तनाव राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का मानव पहले की अपेक्षा अधिक शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम है। उसके पास आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं, लेकिन समाज में तकनीकी उन्नति के साथ तनाव, असुरक्षा, अविश्वास और एकाकीपन भी बढ़ रहा है। आज आवश्यक है कि हम केवल आगे बढ़ने की ही नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने की भी यात्रा प्रारंभ करें। इसी ‘स्व’ से साक्षात्कार को सुगम बनाने का कदम ब्रह्मकुमारीज ने उठाया है, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। आनंद बाहरी वस्तु में नहीं, हमारे भीतर ही है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हर मनुष्य चाहता है कि वह दूसरों पर विश्वास करे, लेकिन विश्वास वहीं टिकता है जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध हों। उन्होंने कहा कि जब हम कुछ क्षण रुककर स्वयं से संवाद करते हैं, तो यह अनुभव होता है कि शांति और आनंद किसी बाहरी वस्तु में नहीं, बल्कि हमारे भीतर है। जब आत्मिक चेतना जागृत होती है, तो प्रेम, भाईचारा, करुणा और एकता स्वतः जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज बोता है और वहीं से विश्व शांति और विश्व एकता की नींव रखी जाती है। सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है। भीतर की शांति को जगाने का आह्वान ब्रह्मकुमारीज संस्था द्वारा विश्व शांति, मानवीय मूल्य, नारी शक्ति, आत्मिक जागृति, शिक्षा और ध्यान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास वास्तव में प्रेरक और प्रशंसनीय हैं। इस सेवा के लिए सभी का हृदय से धन्यवाद। उन्होंने आह्वान किया कि आइए, शांति को अपने भीतर जगाएं, विश्वास को अपने विचारों में उतारें और एकता को अपने कर्म में प्रकट करें। हम सभी एक बेहतर, शांतिपूर्ण और विश्वासपूर्ण विश्व के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि वे जानती हैं कि ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय केवल लखनऊ और माउंट आबू में ही नहीं, बल्कि गांव-गांव में शिक्षा केंद्रों के माध्यम से सकारात्मकता का प्रसार कर रहा है। सभी समाज को सुख, शांति, आनंद, प्रेम और विश्वास का संवाहक बनकर जन-जन तक पहुंच रहे हैं। आज का कार्यक्रम एक सुंदर विश्व बनाने की दिशा में संवाहक की भूमिका निभाएगा। दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा लखनऊ में आयोजित विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। उन्होंने ब्रह्मकुमारियों को कलश सौंपा तथा भ्राताओं को ब्रह्मकुमारीज की ध्वजा प्रदान की। कार्यक्रम में छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य शैली में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। इस दौरान ब्रह्मकुमारी राधा जी ने ईश्वरीय परिवार की ओर से स्वागत वक्तव्य दिया। भ्राता नथमल जी ने वैश्विक एकता और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए राजयोग को अपनाने तथा विकारों को दूर करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर महासचिव ब्रह्मकुमारीज एवं अध्यक्ष (शिक्षा शाखा, माउंट आबू) राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार मृत्युंजय, निदेशक उपक्षेत्र लखनऊ राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी राधा जी, राष्ट्रीय संयोजक … Read more

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिलाई शपथ, जस्टिस सूर्यकांत बने 53वें चीफ जस्टिस; 15 महीने का होगा कार्यकाल

नई दिल्ली  जस्टिस सूर्यकांत आज भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) की शपथ ग्रहण की है। CJI के रूप में उनका कार्यकाल 15 महीनों का होगा। वो CJI भूषण आर गवई की जगह लेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जस्टिस सूर्यकांत को CJI की शपथ दिलाई है। CJI भूषण आर गवई ने संविधान के अनुच्छेद 124 की धारा 2 के तहत अगले CJI के लिए जस्टिस सूर्यकांत का नाम सामने रखा था। राष्ट्रपति ने इसपर मुहर लगाते हुए जस्टिस सूर्यकांत को देश का 53वां CJI नियुक्त कर दिया है। पीएम मोदी भी रहे मौजूद राष्ट्रपति भवन में आयोजित जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल भी मौजूद थे। जस्टिस सूर्यकांत को 30 अक्टूबर 2025 को CJI नियुक्त किया गया था और वो 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर रहेंगे। दरअसल CJI बी आर गवई 65 साल के पूरे हो गए हैं, जिसके चलते अब वो सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में CJI का पद छोड़ने से पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को अगला CJI बनाने की परंपरा जारी रखी और जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी चुना है।  

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू छत्तीसगढ़ पहुंचेंगी 20 नवंबर को, जनजातीय गौरव दिवस में शिरकत

रायपुर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज 20 नवंबर को छत्तीसगढ़ दौरे पर आ रही है। इस दौरान वे अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय गौरव दिवस के मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगी। बता दें कि राष्ट्रपति के आगमन की तैयारियां पूरी हो गई है। राष्ट्रपति के अलावा राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित मंत्री, सांसद, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहेंगे। दो दिन तक चलेगा कार्यक्रम जानकारी अनुसार, 19 और 20 नवंबर को अंबिकापुर के पीजी कॉलेज मैदान में जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति रहेगी। वे इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी और प्रदेश के जनजातीय समुदायों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम हेलीकॉप्टर के आगमन से लेकर राष्ट्रपति के स्थल तक जाने का पूरा मार्ग सील किया जाएगा और हर दिशा से निगरानी की जाएगी। वहीं कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 1700 से अधिक जवानों की तैनाती की जाएगी।कार्यक्रम की सफलता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) की टीम भी निगरानी रख रही है। मुख्यमंत्री वैद्यराज सम्मान निधि योजना का शुभारंभ बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू प्रदेश में मुख्यमंत्री वैद्यराज सम्मान निधि योजना का शुभारंभ करेंगी। इस योजना के तहत प्रदेश में परंपरागत उपचार करने वाले वैद्यों को हर साल 5000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी। राज्य सरकार ने इसके लिए एक तीन स्तरों वाला चयन प्रक्रिया तैयार किया है, जिसके तहत योग्य वैद्यों का चयन किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक उपचार विधाओं को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री अखरा विकास योजना को मिलेगी हरी झंडी इसके अलावा राष्ट्रपति मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री अखरा विकास योजना का भी उद्घाटन करेंगी। इस योजना के तहत प्रदेश के देवस्थलों का विकास और पुनरोद्धार किया जाएगा। योजना के अंतर्गत प्रत्येक देवस्थान पर 5 से 20 लाख रुपए तक की राशि खर्च की जाएगी। योजना का उद्देश्य न केवल धार्मिक स्थलों का संरक्षण करना है बल्कि इन स्थानों को पर्यटन और स्थानीय सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करना भी है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर और बालोद जिला प्रशासन को किया सम्मानित

रायपुर : छत्तीसगढ़ के दो जिलों को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रायपुर और बालोद जिला प्रशासन को किया सम्मानित प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार होगा प्रेरणादाई: मुख्यमंत्री  साय रायपुर जल संरक्षण एवं सामुदायिक भागीदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित कर छत्तीसगढ़ के दो जिलों रायपुर और बालोद ने राष्ट्रीय स्तर पर नया इतिहास रच दिया है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार एवं जल संचय जनभागीदारी 1.0 अवार्ड समारोह में राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु ने दोनों जिलों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासनिक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देशभर में विशेष पहचान बनाई है। पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार के अभिनव प्रयासों और जनभागीदारी ने जल संचयन की दिशा में नए आयाम हासिल किए हैं। मुख्यमंत्री ने दोनों जिलों के नागरिकों और प्रशासन को अपनी शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जल संचयन के प्रति लोगों में आई यह चेतना जल के समुचित उपयोग को बढ़ावा देगी और जल का अनावश्यक दोहन कम होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का जल भविष्य सुरक्षित करने में यह पुरस्कार प्रेरणादाई होगा और जनभागीदारी बढ़ने से हम जल संचयन के लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे।  रायपुर जिला देश में प्रथम स्थान पाने वाला नगर निगम, पूर्वी जोन में मिला तीसरा स्थान रायपुर जिले को जल संचय जनभागीदारी 1.0 अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह और नगर निगम आयुक्त  विश्वदीप ने ग्रहण किया। देशभर के नगर निगमों में रायपुर नगर निगम प्रथम स्थान पर रहा, जबकि ईस्टर्न जोन कैटेगरी 01 में रायपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा। रायपुर जिले और नगर निगम ने मिलकर सामुदायिक सहभागिता को जल संचय का व्यापक अभियान बनाया। रायपुर नगर निगम द्वारा 33,082 कार्य और जिला प्रशासन द्वारा 36,282 कार्य तथा राज्य स्तर पर कुल 4,05,563 जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए। इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग, रिचार्ज पिट्स, अमृत सरोवर, टॉप डैम एवं परकुलेशन टैंक शामिल हैं। तरल अपशिष्ट प्रबंधन में भी रायपुर ने दर्ज की महत्वपूर्ण उपलब्धि रायपुर में 4 एसटीपी के माध्यम से 206 एमएलडी क्षमता विकसित की गई है। 09 औद्योगिक इकाइयों को 125.849 एमएलडी शुद्ध जल आपूर्ति की जा रही है। प्रत्येक वार्ड में वर्षा जल संचयन, 20 से अधिक सरोवरों का पुनर्जीवन और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से स्मार्ट ग्राउंडवॉटर मॉनिटरिंग ने इस उपलब्धि को हासिल करने में बड़ी भूमिका निभाई है।  बालोद जिला पूर्वी जोन में प्रथम, मिला 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित दूसरे जिले बालोद को पूर्वी जोन में बेस्ट परफॉर्मिंग जिला घोषित किया गया, जिसके साथ 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई। यह सम्मान कलेक्टर मती दिव्या उमेश मिश्रा ने ग्रहण किया। कलेक्टर मिश्रा ने इस उपलब्धि का श्रेय जिले के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अमले और संपूर्ण बालोदवासियों को दिया। बालोद जिले ने ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत प्रभावशाली और बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य किए। इसके तहत 1 लाख 6 हजार 677 नई जल संरचनाएँ निर्मित की गई। 30 हजार 849 पुराने जल स्रोतों की मरम्मत व सफाई, प्रधानमंत्री आवासों में 10 हजार वाटर रिचार्ज पिट, वन क्षेत्र में 3 लाख 88 हजार पौधरोपण, 27 हजार से अधिक घरों में स्वयं प्रेरित सोकपिट निर्माण, 1 लाख 09 हजार 27 स्टेगर्ड कंटूर ट्रेंच, 140 अमृत सरोवर, 6 हजार 160 निजी डबरी, 1 हजार 944 सामुदायिक तालाब, 399 मिनी परकुलेशन टैंक, 6 हजार 614 लूज बोल्डर चेक डैम, 69 स्टॉप डैम, 316 गेबियन चेक डैम, 423 कुएं निर्मित किए गए हैं। ये विस्तृत कार्य बालोद की जल संरक्षण नीतियों और जनता की सक्रिय भागीदारी की मिसाल हैं।

हरियाणा को मिला राष्ट्रीय जल पुरस्कार, ये सम्मान हरियाणा की जनता और हमारे किसानों की मेहनत को समर्पित

हरियाणा  नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में हरियाणा को तीसरा स्थान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने समारोह में सिंचाई एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी को सम्मानित किया और उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इस मौके पर मंत्री के साथ विभाग के Additional Chief Secretary एवं EIC मौजूद रहे।  श्रुति चौधरी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कार में हरियाणा को तीसरा स्थान प्राप्त होना सम्मान की बात है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिया गया ये सम्मान हरियाणा की जनता की जागरूकता और हमारे किसानों की मेहनत को समर्पित है। हरियाणा सरकार की योजनाओं ने इसे सम्भव किया है और स्वर्गीय चौधरी बंसीलाल व सुरेंद्र सिंह के सपनों को साकार किया है। हम मिलकर जल संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर रहे हैं। बधाई हरियाणा! ये आपका पुरस्कार है। राष्ट्रीय जल पुरस्कार में हरियाणा को तीसरा स्थान प्राप्त होना सम्मान की बात है। महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू जी द्वारा दिया गया ये सम्मान हरियाणा की जनता की जागरूकता और हमारे किसानों की मेहनत को समर्पित है। इससे पहले श्रुति चौधरी ने एक और एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरे राज्य हरियाणा के लिए यह अत्यंत गर्व और उपलब्धि की बात है कि उसे आज भारत सरकार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सीआर पाटिल द्वारा घोषित छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ राज्य की श्रेणी में तृतीय पुरस्कार मिला है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए धन्यवाद देती हूं, जिनके नेतृत्व में जल संसाधन मंत्रालय का गठन हुआ और जिन्होंने हरियाणा में जल संरक्षण के लिए अथक प्रयास किया है। मैं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद देता हूँ और हरियाणा सरकार के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करता हूँ। जय हरियाणा!